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रामनगरी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा, वाल्मीकि आश्रम सहित प्रमुख स्थलों का विकास

अयोध्या  रामनगरी अयोध्या और आसपास के जिलों में धार्मिक पर्यटन को एक नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। रामायणकालीन विरासत को संरक्षित करते हुए सरकार अब ऐसे व्यापक धार्मिक पर्यटन सर्किट पर काम कर रही है, जिसमें 41 पौराणिक तीर्थ स्थलों को एक साथ जोड़ा जाएगा। इस योजना का उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक और अनुभवात्मक बनाना है, बल्कि लंबे समय से उपेक्षित प्राचीन स्थलों को पुनर्जीवित कर उन्हें पर्यटन मानचित्र पर मजबूत पहचान दिलाना भी है। यह सर्किट अयोध्या के साथ गोंडा, बस्ती और अंबेडकरनगर के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ते हुए एक संगठित आध्यात्मिक मार्ग तैयार करेगा। रामायणकालीन विरासत को मिलेगा नया स्वरूप 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित इन 41 पौराणिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण की दिशा में काम शुरू हो गया है। सरकार की मंशा है कि श्रद्धालु केवल राम मंदिर तक सीमित न रहकर पूरे रामायणकालीन भूगोल का अनुभव करें और उन स्थलों से भी जुड़ें जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित विकास से वंचित रहे हैं। 41 तीर्थ स्थलों का होगा व्यापक विकास और सौंदर्यीकरण परियोजना के तहत इन सभी स्थलों पर आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कुंडों और पवित्र स्थलों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा, साथ ही श्रद्धालुओं के लिए शेड, पेयजल व्यवस्था, चेंजिंग रूम, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और सड़क संपर्क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य तीर्थ यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सुव्यवस्थित बनाना है। रामायण से जुड़े प्रमुख स्थलों को किया गया शामिल इस धार्मिक पर्यटन सर्किट में वाल्मीकि आश्रम, अंगी ऋषि आश्रम, विभीषण कुंड, सुग्रीव कुंड, राम कुंड, सीता कुंड, भरत कुंड, नंदीग्राम, तमसा नदी, श्रवण क्षेत्र और पाराशर आश्रम जैसे प्रमुख स्थल शामिल किए गए हैं। ये सभी स्थान रामायण काल की कथाओं और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं और इनका ऐतिहासिक महत्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार यह परियोजना केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, छोटे व्यापारों को प्रोत्साहन मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। होटल, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। श्रद्धालुओं के लिए समग्र आध्यात्मिक अनुभव की तैयारी सरकार का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को एक ही यात्रा में संपूर्ण रामायणकालीन विरासत का अनुभव मिल सके। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिलेगी।  

स्मार्टफोन खरीदते समय 89% लोग AI फीचर्स को दे रहे हैं सबसे ज्यादा अहमियत

स्मार्टफोन खरीदते समय आप किन बातों या कहें कि किन फीचर्स का ध्यान रखते हैं. एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया है कि 89 परसेंट लोग स्मार्टफोन खरीदते समय आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) फीचर्स पर ध्यान दे रहे हैं. पहले भले ही कैमरे, बैटरी, प्रोसेसर और डिस्प्ले पर ध्यान दिया जाता हो, लेकिन अब लोगों का फोकस AI पर है. काउंटरप्वाइंट रिसर्च ने फ्लिपकार्ट के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार की है. इस रिपोर्ट का नाम स्मार्टफोन इनसाइट रिपोर्ट 2026 है. भारतीय मार्केट में कंज्यूमर की बदलती आदत को दिखाया गया है. साथ ही बताया है कि अब यूजर्स स्पेसिपिकेशन्स से आगे बढ़कर AI पर ध्यान दे रहे हैं, जिसमे Gen-z भी हैं. रिपोर्ट के मुताबिक स्मार्टफोन चुनने में अब सबसे अहम भूमिका AI निभा रहा है. रिपोर्ट में बताया है कि 89 परसेंट यूजर्स ने बताया है कि AI फीचर्स उनके हैंडसेट खरीदने के फैसले को प्रभावित करता है. AI की मदद से यूजर्स अपने डेली के टास्क को आसान बना रहे हैं. सर्चिंग से लेकर वॉयस असिस्टेंट तक को AI बेहतर बना रहा है. कई मोबाइल कंपनियां खुद का AI मॉडल दे रहे हैं. सैमसंग से गूगल तक मार्केट में कई AI मॉडल मार्केट में गूगल के AI फीचर्स के अलावा भी कई मॉडल मौजूद हैं. जहां सैमसंग का Galaxy AI है. वहीं वीवो और शाओमी के भी AI मॉडल हैं. मोटोरोला का Moto AI नाम है. सैमसंग ने गूगल जेमिनी के कई फीचर्स को ऑप्टीमाइज करके अपने हैंडसेट को दिया है, जिससे उनकी उपयोगिता और बेहतर हो गई है. ये स्पीड 15-20 हजार रुपये के सेगमेंट में भी फैल रही है, जहां आमतौर पर प्रीमियम फीचर्स बहुत ही कम देखने को मिलते हैं. 33 परसेंट लोग EMI पर स्मार्टफोन खरीद रहे- रिपोर्ट रिपोर्ट में एक अन्य खुलासा ये भी किया है कि 33 परसेंट लोग ऐसे हैं, जो आसान किस्तों (EMI) का ऑप्शन लेकर प्रीमियम हैंडसेट को खरीद रहे हैं.

गर्मी में राहत देने वाला एसी कब बन सकता है सेहत के लिए खतरा

 ऑफिस हो या घर, बिना एसी के गर्मी में समय काटना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में गर्मी और उमस से बचने के लिए लोग अपना अधिकतर समय एयर कंडीशनर (AC) में बिताते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एसी धीरे-धीरे आपको बीमार कर सकती है. डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, AC का गलत इस्तेमाल शरीर के मेटाबॉलिज्म से लेकर फेफड़ों तक समस्या पैदा कर सकता है. एयर कंडीशनिंग खुद बीमारी नहीं बनाती, लेकिन बहुत तेज़ ठंड, ड्राय हवा और गंदे फिल्टर शरीर पर असर डाल सकते हैं. तो आइए वो कौन सी बीमारियां हैं जो लंबे समय तक एसी में रहने से होती हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है, इस बारे में जान लीजिए. AC से कैसे बढ़ती हैं परेशानियां? एसी की ठंडी हवा न केवल नमी सोख लेती है बल्कि यह हमारे गले और नाक की म्यूकस मेम्ब्रेन को भी सुखा देती है. इससे सर्दी-खांसी और साइनस जैसी समस्याएं होने लगती हैं. मीडिया  के पल्मोनरी एक्सपर्ट के हवाले से कहा गया है कि अधिक सूखी हवा सांस की नली में जलन पैदा कर सकती है और खांसी, गले में खराश, नाक बंद होने जैसी दिक्कतें बढ़ा सकती है. वहीं डॉक्टरों का भी कहना है कि AC कमरे की नमी कम कर देता है, जिससे सांस की नली और गला सूखने लगते हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक, गंदे एसी से निकलने वाली हवा सिक बिल्डिंग सिंड्रोम का कारण बनती है, जिससे सिरदर्द और थकान महसूस होती है. इसलिए अगर एसी की सर्विस समय पर न हो तो उसके फिल्टर में बैक्टीरिया और मोल्ड पनपने लगते हैं.  यदि किसी रूप में खराब वेंटिलेशन है तो उस रूम में सिक बिल्डिंग सिंड्रोम (Sick building syndrome) का जोखिम बढ़ सकता है जिससे सिरदर्द, चक्कर, थकान, नाक और सांस की तकलीफ हो सकती हैं. CDC भी साफ कहता है कि कम वेंटिलेशन और कमजोर एयर सर्कुलेशन इनडोर एयर क्वालिटी को बिगाड़ सकते हैं. जोड़ों का दर्द और ड्राई स्किन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक कम तापमान में बैठने से मसल्स में खिंचाव और जोड़ों में अकड़न की समस्या देखी जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही अर्थराइटिस है. इसके अलावा एसी हवा की नमी पूरी तरह खत्म कर देता है जिससे स्किन और आंखों में सूखापन आ जाता है. मेडिकल न्यूज टुडे की रिपोर्ट बताती है कि एयर कंडीशनिंग से त्वचा की प्राकृतिक नमी छिन जाती है जिससे खुजली और डर्मेटाइटिस की समस्या बढ़ सकती है. थर्मल शॉक और थकान जब हम तपती धूप से सीधे बेहद ठंडे कमरे में आते हैं तो शरीर के तापमान में अचानक बदलाव आता है. इसे थर्मल शॉक कहा जा सकता है. तापमान में यह अचानक उतार-चढ़ाव शरीर में थकान पैदा कर देता है और कमजोरी महसूस कराता है. एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि एसी का तापमान हमेशा 24 से 26 डिग्री के बीच रखना चाहिए ताकि बैलेंस बना रहे. गंदा AC भी बनता है वजह  पुराने या ठीक से साफ न किए गए एसी, मोल्ड और एलर्जी को हवा में फैला सकते हैं जिससे एलर्जी और सांस की समस्या बढ़ सकती है. एक्सपर्ट चेतावनी देते हैं कि गंदे फिल्टर, कॉइल और डक्ट्स में धूल, फफूंद और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं. साफ AC एलर्जी कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन खराब रखरखाव वाला HVAC सिस्टम माइक्रोबियल एलर्जन का घर बन सकता है इसलिए फिल्टर समय पर बदलना और साल में एक बार सर्विस कराना जरूरी माना गया है.

मध्यम और निम्न आय वर्ग को राहत, 8 लाख रुपये से शुरू होंगे फ्लैट

लखनऊ  राजधानी लखनऊ में किफायती आवास की बढ़ती मांग को देखते हुए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने मध्यम और अल्प आय वर्ग के लिए बड़ी योजना तैयार की है। इसके तहत शहर के पांच प्रमुख स्थानों पर एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 3000 से अधिक फ्लैट बनाए जाएंगे। अधिकारियों ने इन सभी स्थानों का निरीक्षण कर जमीन को अंतिम रूप दे दिया है। अब परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इन मकानों की शुरुआती कीमत 8 लाख रुपये होगी। 30 लाख रुपये की कीमत तक के फ्लैट बनाए जाएंगे। इससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। आवासीय संकट से मिलेगी राहत: शहर में लगातार बढ़ती आबादी और महंगे रियल एस्टेट के कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में एलडीए की यह आवासीय योजना लोगों की पहुंच में होगी। खास बात यह है कि परियोजना को ऐसी लोकेशन पर विकसित किया जा रहा है जहां बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं या आसानी से विकसित की जा सकती हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण की इस योजना का उद्देश्य ऐसे लोगों को राहत देना है जो सीमित आय के चलते महंगे फ्लैट खरीदने में सक्षम नहीं हैं। इन पांच स्थानों पर बनेंगे आवास 1-अनंत नगर योजना, मोहन रोड में मध्यम वर्ग के लिए आवासीय फ्लैट बनाए जाएंगे। स्थल चयन पूरा हो चुका है और निर्माण के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। 2-सीतापुर रोड शिया डिग्री कॉलेज के सामने खाली पड़ी जमीन पर भी मध्यम वर्ग के लिए फ्लैट बनाने की मंजूरी मिली। 3-वसंत कुंज योजना, सेक्टर-एच यहां भी मध्यम आय वर्ग के लिए बहुमंजिला फ्लैट बनेंगे। 4-शारदा नगर विस्तार में एलआईजी और ईडब्ल्यूएस दोनों श्रेणियों के लिए मकान बनाए जाएंगे, जिससे कमजोर वर्ग के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। 5-ऐशबाग में मदरसे के पीछे की जमीन पर भी मध्यम वर्ग के लिए एलआईजी फ्लैट बनेंगे। एलडीए इसे पहली ही मंजूरी दे चुका है। तीन योजनाओं में उपकेंद्र शहर के विस्तार के साथ एलडीए ने बिजली ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लखनऊ विकास प्राधिकरण अपनी तीन प्रमुख योजनाओं आईटी सिटी, वरुण विहार और नैमिष नगर में बड़े बिजली उपकेंद्र (सब स्टेशन) बनाने जा रहा है। इनमें सबसे बड़ा उपकेंद्र आईटी सिटी में स्थापित किया जाएगा, जिसके लिए 53 एकड़ जमीन चिन्हित की जा चुकी है। ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ने जमीन को दी मंजूरी: एलडीए के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड की मंडलीय भूमि चयन समिति ने 3 अप्रैल 2026 को आईटी सिटी क्षेत्र का निरीक्षण किया। जांच के बाद जमीन को उपयुक्त माना। अब एलडीए जल्द ही यह भूमि कॉरपोरेशन को हस्तांतरित करेगा, ताकि निर्माण शुरू हो सके। नैमिष नगर व वरुण विहार भी योजना में: नैमिष नगर में भी 9 अप्रैल 2026 को स्थलीय निरीक्षण किया गया, जहां चयन समिति ने जमीन को उपयुक्त पाया। यहां भी जल्द जमीन ट्रांसफर की जाएगी। तीसरा उपकेंद्र आगरा रोड स्थित वरुण विहार योजना में प्रस्तावित है, जो बिजली आपूर्ति को मजबूत करेगा। बिजली व्यवस्था में आएगा बड़ा सुधार एलडीए के अनुसार, इन मेगा उपकेंद्रों के बनने से क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता व गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। बढ़ती आबादी और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन्हें अगले 50 वर्ष के लोड को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्र दोनों को समान रूप से लाभ मिल सके। पहली बार इन योजना के प्रभावित गांवों को भी फायदा इस बार की योजना में खास बदलाव है। पहले एलडीए की कॉलोनियों में 24 घंटे बिजली मिलती थी, जबकि आसपास के गांवों को अलग लाइन से सीमित सप्लाई मिलती थी। पर अब बनने वाले उपकेंद्रों से न सिर्फ प्राधिकरण की कॉलोनियों बल्कि उन गांवों को भी सीधे बिजली मिलेगी, जिनकी जमीन अधिग्रहित कर योजनाएं विकसित की जा रही हैं। उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के अनुसार प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण किया गया है। कुछ जगहों पर जमीन को अंतिम रूप दे दिया गया है। अब डीपीआर तैयार होने के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। जल्द ही निर्माण शुरू होगा। एलडीए हजारों परिवारों का सस्ते व अपने घर का सपना साकार करेगा।

बुद्ध पूर्णिमा 2026: आज बन रहे कई शुभ योग, ज्योतिष अनुसार दिन रहेगा खास

 आज बुद्ध पूर्णिमा मनाई जा रही है. द्रिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हर वर्ष बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है. बुद्ध पूर्णिमा को ही वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. कहते हैं कि इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म, उन्हें ज्ञान और महानिर्वाण की प्राप्ति हुई थी. इस दिन श्रीहरि और माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है. इस बार की बुद्ध पूर्णिमा सिर्फ धार्मिक लिहाज से ही नहीं, बल्कि ज्योतिष नजरिए से भी बहुत ही खास मानी जी रही है. दरअसल, आज कई ग्रह अपनी चाल में परिवर्तन करेंगे और कुछ राजयोगों का भी निर्माण होगा. द्रिक पंचांग के अनुसार, बुद्धि के देवता बुध आज मेष राशि में अस्त हो रहे हैं. इसके अलावा, आज मेष राशि में सूर्य-बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण होने जा रहा है. आज सिद्धि योग का निर्माण भी हो रहा है. तो चलिए जानते हैं कि बुद्धि पूर्णिमा इन सभी शुभ योगों के बनने से किन राशियों को लाभ होगा. मेष राशि बुधादित्य राजयोग का असर मेष राशि के लोगों के लिए काफी फायदेमंद रहने वाला है. इस समय पुराने अटके काम धीरे-धीरे पूरे हो सकते हैं. पैसों से जुड़ी परेशानियों में कमी आएगी. कर्ज से राहत मिलने के संकेत हैं. करियर में भी नई संभावनाएं बनेंगी, जिससे तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं. वृषभ राशि इस राजयोग के चलते वृषभ राशि वालों के जीवन में सुख-सुविधाएं बढ़ सकती हैं. आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं. धन लाभ के योग बन रहे हैं. अगर कहीं निवेश करने का विचार है, तो समय आपके पक्ष में रह सकता है. आगे चलकर अच्छा फायदा दे सकता है. मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है. आत्मविश्वास बढ़ेगा. फैसले लेने में आसानी होगी. हालांकि इस दौरान खर्चों पर ध्यान देना जरूरी है, वरना बजट बिगड़ सकता है. सही योजना बनाकर चलेंगे तो अच्छे परिणाम मिल सकते हैं. मीन राशि मीन राशि वालों के लिए यह समय मिला-जुला रह सकता है. कोई भी बड़ा आर्थिक फैसला लेने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना जरूरी होगा. जल्दबाजी में उठाया गया कदम नुकसान दे सकता है, लेकिन समझदारी से लिए गए निर्णय लाभ दिला सकते हैं. इस दौरान सोच में सकारात्मकता भी बढ़ेगी.  

अब 18 से 40 वर्ष तक के युवाओं को मिलेगा लाभ, 10 लाख रुपये तक लोन की तैयारी

लखनऊ  यूपी की योगी सरकार जल्द ही युवाओं को बड़ी सौगात देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी अभियान योजना की सफलता को देखते हुए जल्द इसका विस्तार होगा। युवा उद्यमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि आवेदन पात्रता की आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट दिए जाने की तैयारी है। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है। अब तक 21 से 40 वर्ष आयु वर्ग के 1.68 लाख युवा योजना के तहत पांच लाख रुपये तक बिना बैंक गारंटी के ब्याज मुक्त लोन हासिल कर चुके हैं। अब न्यूनतम आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किया जाएगा जबकि अधिकतम आयु सीमा 40 ही रहेगी। इसके साथ ही पांच लाख को डबल कर 10 लाख करने की भी तैयारी है। सीमा युवा उद्यमी योजना के तहत युवा सर्विस व मैनुफैक्चरिंग सेक्टर से लेकर इनोवेटिव बिजनेस में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। योजना के तहत पांच लाख रुपये तक लिए गए लोन को चार वर्ष में चुकाने के बाद दूसरे चरण में साढ़े सात लाख रुपये तक ब्याज मुक्त लोन प्रदान किए जाने की व्यवस्था है। ताकि भविष्य में पहले चरण को पूरा करने के उपरांत युवा उद्यमी अपने कारोबार को और आगे बढ़ाने के लिए बड़ी राशि हासिल कर सकें। इसके चलते राशि को दोगुना किए जाने का भी प्रस्ताव है यानी पांच लाख के स्थान पर युवा 10 लाख रुपये तक और साढ़े सात लाख रुपये के स्थान पर 15 लाख रुपये तक लोन हासिल कर सकेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर युवा उद्यमी योजना की शुरुआत 24 जनवरी 2024 को यूपी दिवस के अवसर पर हुई थी। शुरुआत में इस योजना के तहत डेढ़ लाख युवाओं को विभिन्न बैंकों के माध्यम से बिना गारंटी के ब्याज मुक्त लोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। आंकड़ों की नजर में योजना कुल आवेदन – 530487 – परियोजना लागत – 24964.7 करोड़ रुपये बैंक से स्वीकृत आवेदन – 180756 – परियोजना लागत – 6142.97 करोड़ रुपये बैंक द्वारा वितरित – 168516 – परियोजना लागत – 5913.15 करोड़ रुपये महिलाओं की 28 प्रतिशत भागीदारी योजना के तहत अब तक कुल लोन हासिल करने वालों में 28 प्रतिशत महिलाएं और 72 प्रतिशत पुरुष हैं। ओबीसी युवाओं की भागीदारी 50 फीसदी लोन हासिल करने वालों में सर्वाधिक 49.9 लाभार्थी ओबीसी वर्ग के हैं। इनके अलावा 34.3 प्रतिशत सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति के 15.5 और अनुसूचित जनजाति के 0.3 प्रतिशत युवाओं ने लोन लिया है। किस क्षेत्र में कितना लोन सर्विस सेक्टर – 62 प्रतिशत मैनुफैक्चरिंग सेक्टर 38 प्रतिशत

मई महीने की शुरुआत और अंत दोनों पूर्णिमा से, बना दुर्लभ धार्मिक संयोग

 आज से मई का महीना शुरू हो चुका है. ज्योतिषियों के मुताबिक, मई का महीना धार्मिक नजरिए से बेहद खास माना जा रहा है. दरअसल, मई में एक अनोखा संयोग बन रहा है, जहां महीने की शुरुआत और समापन दोनों ही पूर्णिमा से होगा. ऐसे योग बहुत कम देखने को मिलते हैं, इसलिए इस पूरे महीने को पूजा-पाठ, स्नान और दान के लिए अत्यंत शुभ माना जा रहा है. इस दिन पूरे महीने श्रीहरि और मां लक्ष्मी की पूजा करें और मनोकामना पूर्ति के लिए उनके आगे तेल का दीपक भी जलाएं. पूर्णिमा से होगी महीने की शुरुआत मई की शुरुआत 1 तारीख को वैशाख पूर्णिमा से हो रही है, जिसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है. यह दिन हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों में बहुत पवित्र माना जाता है. इस दिन लोग सुबह स्नान करके पूजा करते हैं और जरूरतमंदों को दान देते हैं. मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है. बुद्ध पूर्णिमा का खास महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और जल दान करना बहुत शुभ होता है. वहीं बौद्ध धर्म में यह तिथि इसलिए खास है क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था. इसलिए यह दिन आध्यात्म और साधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है. महीने का अंत भी होगा पूर्णिमा पर दिलचस्प बात यह है कि मई का आखिरी दिन यानी 31 मई को भी पूर्णिमा तिथि पड़ेगी. यह ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा होगी, जो अपने आप में बहुत विशेष मानी जाती है. अधिक मास में आने के कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है. अधिक पूर्णिमा क्यों मानी जाती है खास? अधिकमास करीब ढाई से तीन साल में एक बार आता है और इस दौरान आने वाली पूर्णिमा को बहुत पुण्यदायक माना जाता है. इसे पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सुख-समृद्धि और शांति मिलने की मान्यता है. शास्त्रों में महत्व धार्मिक ग्रंथों में इस पूर्णिमा को बहुत फलदायी बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन किए गए व्रत, पूजा और दान से व्यक्ति को सफलता और सकारात्मक परिणाम मिलते हैं. इसे ‘सर्व सिद्धिदायिनी’ तिथि भी कहा जाता है. इन कामों को करना रहेगा शुभ इस पूरे महीने में खासतौर पर पूर्णिमा के दिन व्रत रखना, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना और सत्यनारायण कथा सुनना लाभकारी माना जा रहा है. इसके अलावा गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करके अन्न, कपड़े और धन का दान करना भी बहुत शुभ माना गया है.

लखनऊ: गंगा एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा स्पीड लिमिट, टोल दरें तय

लखनऊ गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहन बिना टोल का भुगतान किए ही दौड़ेंगे। टोल की दरें तय जरूर कर दी गई हैं पर उसकी वसूली शुरू होने में अभी लगभग दो सप्ताह का वक्त लगेगा। सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 दिन बाद टोल की वसूली शुरू हो सकेगी। इससे पूर्व गंगा एक्सप्रेसवे के लिए निर्धारित टोल दरों के प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृत कराया जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी गंगा एक्सप्रेसवे पर दो पहिया, तीन पहिया और पंजीकृत ट्रैक्टर के लिए टोल दर 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर तय की गई है। ऐसे ही कार, जीप, वैन व हल्के वाहन के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर, हल्के वाणिज्यिक वाहन, हल्के माल वाहन के लिए 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर, मिनी बस, बस व ट्रक के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर, भारी निर्माण मशीनरी, मिट्टी हटाने वाले वाहन के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर तथा उपकरण व बहुएक्सल वाहन, अत्यधिक बड़े वाहन (सात व अधिक एक्सेल वाले) के लिए 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर टोल दर तय की गई है। हर मौसम के अनुकूल है डामर की परत लखनऊ।गंगा एक्सप्रेसवे पर 594 किलोमीटर लंबे सफर को आरामदेह व सुरक्षित बनाने के लिए उच्च तकनीक का उपयोग किया गया है। इस एक्सप्रेसवे पर मौसूम अनुकूल डामर परत (डीबीएम) को 100 मिलीमीटर तक की मोटाई दी गई है। यह तकनीक सड़क को भीषण गर्मी और अत्यधिक बारिश के प्रभाव से सुरक्षित रखती है। इसके लिए 3.67.022 मीट्रिक टन डामर का इस्तेमाल किया गया। यूपीडा के अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे को मजबूती देने के लिए मिट्टी की मजबूती का पैमाना अपनाया गया है। कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो (सीबीआर) का प्रयोग किया गया है, जिसकी वैल्यू आठ पर रखी गई है, जो एक अत्यंत स्थिर और ठोस आधार का प्रमाण है। एक्सप्रेसवे पर 19 करोड़ घन मीटर मिट्टी, 2,78,380 मिट्रिक टन स्टील, 14.83.313 मीट्रिक टन सीमेंट व 41.88 लाख घनमीटर रेत का भी प्रयोग किया गया है। संरचनात्मक मजबूती के हर पहलू को ध्यान में रखकर कार्य को पूरा कराया गया है। 154.58 लाख घनमीटर मिट्टी सड़क की निचली और ऊपरी परतों को ठोस स्वरूप देने के लिए प्रयोग की गई है। एक्सप्रेसवे के मुख्य कैरिजवे की कुल मोटाई 485 मिलीमीटर से 500 मिलीमीटर तक रखी गई है। यह आधा मीटर मोटी बहु-स्तरीय संरचना सुनिश्चित करती है कि सड़क भारी यातायात का दबाव आसानी से झेल सके। इस एक्सप्रेसवे की क्षमता 79 से 108 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल (एमएसए) तक मापी गई है। अधिकारियों का दावा है कि एक्सप्रेसवे करोड़ों भारी मालवाहक वाहनों के भार को बिना किसी संरचनात्मक क्षति के सहन करने की क्षमता रखता है। 254 लाख मैन-डेज का श्रम और लाखों टन उच्च गुणवत्ता वाली निर्माण सामग्री एक्सप्रेसवे को सुरक्षा की दृष्टि से भरोसेमंद बनाती हैं। डिजाइन क्रस्ट तकनीक से रखरखाव की लागत में भी कमी आएगी। यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अत्याधुनिक स्विस सेंसर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

अहमदाबाद जा रहे बच्चों की तस्करी का मामला, उज्जैन-नागदा में 26 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया

उज्जैन उज्जैन रेलवे स्टेशन पर गुरुवार रात बच्चों की तस्करी की सूचना पर बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अंत्योदय एक्सप्रेस ट्रेन को उज्जैन और फिर नागदा स्टेशन पर रोककर पुलिस, बाल कल्याण समिति (CWC) और अन्य विभागों की टीम ने 26 नाबालिग बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। जानकारी के मुताबिक, बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि करीब 100 बच्चों को मजदूरी के लिए मुजफ्फरनगर से अहमदाबाद ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही उज्जैन में चार थानों का बल, आरपीएफ, जीआरपी, श्रम विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम को अलर्ट किया गया। गुरुवार रात करीब 11 बजे जैसे ही अंत्योदय एक्सप्रेस उज्जैन स्टेशन पहुंची, टीम ने ट्रेन में सर्चिंग शुरू की। करीब आधे घंटे तक 50 से अधिक बच्चों और उनके साथ मौजूद लोगों से पूछताछ की गई, जिसमें शुरुआती तौर पर 4 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इसी दौरान ट्रेन आगे बढ़ गई। रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहीं सीएसपी दीपिका शिंदे ने तत्काल नागदा स्टेशन को सूचना देकर ट्रेन रुकवाई। वहां एक घंटे तक चली सर्चिंग के बाद 22 और नाबालिग बच्चों को ट्रेन से उतारा गया। इस तरह कुल 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। नागदा से उतारे गए सभी बच्चे नाबालिग बताए जा रहे हैं, जिनमें से दो की उम्र 14 साल से भी कम है। सभी बच्चों को फिलहाल उज्जैन जीआरपी को सौंप दिया गया है। परिजनों से संपर्क कर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, वहीं बच्चों को फिलहाल CWC उज्जैन में रखा जाएगा। पुलिस को आशंका है कि बच्चों को मजदूरी के लिए गुजरात ले जाया जा रहा था, हालांकि कुछ बच्चे सोमनाथ और अन्य स्थानों पर घूमने जाने की बात भी कह रहे हैं। मामले की जांच जारी है। श्रम विभाग की सहायक आयुक्त राखी जोशी के अनुसार, सूचना थी कि चार लोग 100 से अधिक नाबालिगों को गुजरात ले जा रहे हैं। फिलहाल यह पता लगाया जा रहा है कि बच्चों को किस उद्देश्य से और किन लोगों द्वारा ले जाया जा रहा था।

ipl 2026 में बड़ा बवाल: पराग वीडियो के बाद का सख्त रुख

नई दिल्ली आईपीएल 2026 के बीचों-बीच जब मैदान पर मुकाबले तेज होते जा रहे हैं, उसी समय राजस्थान रॉयल्स (Rajasthan Royals) के ड्रेसिंग रूम से उठी एक तस्वीर ने पूरे टूर्नामेंट की हवा बदल दी. कप्तान रियान पराग का वेपिंग करते वीडियो सामने आया और फिर जो हुआ, उसने सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि पूरी फ्रेंचाइजो को कठघरे में खड़ा कर दिया. कहानी यहीं खत्म नहीं होती. इससे कुछ दिन पहले ही टीम मैनेजर रोमी भिंडर डगआउट में मोबाइल इस्तेमाल करते कैमरे में कैद हुए थे. यानी मामला सिर्फ एक गलती का नहीं, बल्कि टीम कल्चर पर उठते सवालों का बन गया. इस बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने सख्त रुख दिखाया. पराग पर मैच फीस का 25% जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट… लेकिन संकेत साफ था-  मामला सिर्फ खिलाड़ी तक सीमित नहीं रहेगा. टीम कल्चर पर समझौता नहीं- संगकारा का कड़ा संदेश कुमार संगकारा जो अपने शांत स्वभाव के लिए जाने जाते हैं, इस बार शब्दों में सख्ती लेकर सामने आए. दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मुकाबले से ठीक पहले उन्होंने साफ कहा- 'ऐसी विवाद टीम के लिए किसी भी तरह से सकारात्मक नहीं होते. खिलाड़ियों को यह याद रखना होगा कि टीम की संस्कृति बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है.' संगकारा का यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि ड्रेसिंग रूम के भीतर चल रही हलचल का संकेत था. साफ है- मैनेजमेंट अब ढील देने के मूड में नहीं है. नियम हैं या मजाक, वाह रे BCCI! रियान पराग की ‘हल्की सजा’ से क्या सीखेगी IPL की यंग ब्रिगेड? BCCI का अगला कदम? BCCI ने अपने बयान में यह भी साफ कर दिया कि वे फ्रेंचाइजी और उसके अधिकारियों पर भी कार्रवाई के विकल्प तलाश रहे हैं. सचिव देवजीत सैकिया ने भी संकेत दिए कि मामला अभी बंद नहीं हुआ है. यानी आने वाले दिनों में यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है और इसका असर टीम के अभियान पर भी पड़ सकता है. दिलचस्प बात ये है कि मैदान पर RR अभी भी प्लेऑफ की रेस में मजबूती से बनी हुई है…. लेकिन सवाल यही है- क्या ड्रेसिंग रूम का माहौल उनकी रफ्तार को तोड़ देगा? संगकारा ने पराग का बचाव करते हुए उनके हालिया छोटे, लेकिन अहम योगदान का जिक्र जरूर किया- 'उस छोटी पारी ने मैच का मोमेंटम बदल दिया.' लेकिन सच्चाई यह भी है कि आईपीएल जैसे हाई-प्रेशर टूर्नामेंट में सिर्फ रन नहीं, अनुशासन भी मैच जिताता है. अब सबकी नजर 1 मई को जयपुर में होने वाले मुकाबले पर है, जहां Rajasthan Royals का सामना Delhi Capitals से होगा. यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि उस टीम की परीक्षा होगी, जो मैदान के बाहर उठे तूफान को अंदर की ताकत में बदलना चाहती है.