samacharsecretary.com

जयपुर में भिड़ंत, क्या अक्षर पटेल की टीम बचा पाएगी प्लेऑफ की उम्मीद?

जयपुर राजस्थान रॉयल्स (आरआर) और दिल्ली कैपिटल्स (डीसी) के बीच शुक्रवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 का 43वां मैच सवाई मानसिंह स्टेडियम में खेला जाना है। डीसी की निगाहें इस मुकाबले को जीतकर प्वाइंट्स टेबल में अपनी स्थिति को बेहतर करने पर होंगी। डीसी के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है। अगर जयपुर में हार मिली तो प्लेऑफ की उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा यानी उनके लिए यह मुकाबला 'करो या मरो' जैसा है। मुश्किल में दिल्ली की टीम दिल्ली कैपिटल्स इस समय दबाव में है। यह टीम 8 में से 5 मुकाबले गंवाकर प्वाइंट्स टेबल में फिलहाल 7वें पायदान पर है। इस टीम ने शुरुआती 2 मुकाबले जीतने के बाद अगले 6 में से 5 मैच गंवा दिए हैं। अक्षर पटेल की कप्तानी वाली इस टीम का सबसे हालिया मुकाबला बेहद निराशाजनक रहा था। डीसी को अरुण जेटली स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) के हाथों बड़ी हार का सामना करना पड़ा। यह टीम महज 8 रन पर 6 विकेट गंवाने के बाद 75 रन पर सिमट गई थी। आसान लक्ष्य को विपक्षी टीम ने 6.3 ओवरों में हासिल कर लिया। इस मैच ने दिल्ली कैपिटल्स की बल्लेबाजी और गेंदबाजी, दोनों ही विभागों की कमजोरियों को उजागर कर दिया था। टॉप 4 पर राजस्थान की नजरें दूसरी तरफ, आरआर अपने घरेलू मैदान पर जीत हासिल करते हुए टॉप-4 में अपनी जगह और मजबूत करना चाहेगी। राजस्थान रॉयल्स की टीम 9 में से 6 मैच जीतकर चौथे स्थान पर मौजूद है। इस टीम ने शुरुआती 4 मुकाबलों में जीत के साथ अपने अभियान की शानदार शुरुआत की थी। इसके बाद उसे अगले 5 में से 3 मैच गंवाने पड़े। रियान पराग की कप्तानी वाली यह टीम एक मनोबल बढ़ाने वाली जीत के बाद इस मुकाबले में उतर रही है, उन्होंने 223 रनों के विशाल लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा करते हुए पंजाब किंग्स को इस सीजन की पहली हार का स्वाद चखाया था। रियान पराग की फॉर्म को लेकर टेंशन भले ही राजस्थान रॉयल्स को सही समय पर लय मिल गई, लेकिन कप्तान रियान पराग की फॉर्म को लेकर चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं, क्योंकि बल्ले से उनका प्रदर्शन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। फिर भी, पिछले मैच में उनका छोटा लेकिन असरदार योगदान टीम के लिए एक सही समय पर मिला प्रोत्साहन साबित हो सकता है, क्योंकि टीम अब टूर्नामेंट के निर्णायक दौर में प्रवेश कर रही है। उस मैच में मध्यक्रम के बल्लेबाजों का फिर से फॉर्म में आना भी मेजबान टीम के लिए एक उत्साहवर्धक संकेत है। राजस्थान रॉयल्स की टीम: शिमरोन हेटमायर, यशस्वी जयसवाल, ध्रुव जुरेल, लुआन-ड्रे प्रिटोरियस, रियान पराग (कप्तान), वैभव सूर्यवंशी, डोनोवन फरेरा, रवींद्र जड़ेजा, जोफ्रा आर्चर, नंद्रे बर्गर, क्वेना मफाका, संदीप शर्मा, युद्धवीर सिंह चरक, रवि बिश्नोई, सुशांत मिश्रा, रवि सिंह, अमन राव पेराला, एडम मिल्ने, कुलदीप सेन, दासुन शनाका, शुभम दुबे, तुषार देशपांडे, विग्नेश पुथुर, ब्रजेश शर्मा। दिल्ली कैपिटल्स की टीम: अभिषेक पोरेल, केएल राहुल, नितीश राणा, समीर रिजवी, ट्रिस्टन स्टब्स, अक्षर पटेल, अजय मंडल, आशुतोष शर्मा, कुलदीप यादव, मुकेश कुमार, विपराज निगम, मिचेल स्टार्क, त्रिपुराना विजय, डेविड मिलर, औकिब नबी डार, पथुम निसांका, लुंगी एनगिडी, साहिल पारख, पृथ्वी शॉ, काइल जैमीसन, टी नटराजन, माधव तिवारी, करुण नायर, दुष्मंथा चमीरा।  

अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी का नया समय, आज से लागू: अब शाम 6:30 बजे तक

अमृतसर  अटारी-वाघा बॉर्डर पर रोज़ाना आयोजित होने वाली मशहूर रिट्रीट सेरेमनी के समय में बदलाव किया गया है। प्रशासन के नए फैसले के अनुसार, अब यह देशभक्ति से भरपूर समारोह शाम 6:00 बजे शुरू होगा और 6:30 बजे तक चलेगा। पहले यह कार्यक्रम शाम 5:30 बजे शुरू होकर 6:00 बजे समाप्त होता था। अधिकारियों के मुताबिक, यह बदलाव मौसम और दिन के समय में हो रहे परिवर्तन को ध्यान में रखते हुए किया गया है। साथ ही, इसका उद्देश्य पर्यटकों को बेहतर अनुभव देना और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुचारू बनाना भी है। हर दिन बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए यहां पहुंचते हैं। अब इस नए शेड्यूल पर होगा आयोजन नया समय आज यानी 1 मई से लागू कर दिया गया है, इसलिए यहां आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों को अब इस नए शेड्यूल के अनुसार अपनी योजना बनानी होगी। भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा किया जाने वाला यह बीटिंग रिट्रीट समारोह अनुशासन, जोश और देशभक्ति का प्रतीक माना जाता है। दर्शकों में गूंज उठता है ‘वंदे मातरम्’ का नारा हर शाम हजारों दर्शकों की मौजूदगी में “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों से पूरा माहौल गूंज उठता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय से पहले पहुंचें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके और इस शानदार समारोह का पूरा आनंद लिया जा सके। मौसम और दिन की घटती-बढ़ती रोशनी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह फैसला लिया है। अधिकारियों का कहना है कि दर्शकों को बेहतर अनुभव देने और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए समय में यह बदलाव जरूरी था। अटारी-वाघा बॉर्डर पर हर रोज होने वाली इस देशभक्ति से भरपूर सेरेमनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। देशभक्ति की झलक देखने को मिलती है यह नया समय आज यानी 1 मई से लागू कर दिया गया है। यानी अब जो भी पर्यटक या स्थानीय लोग इस सेरेमनी को देखने की योजना बना रहे हैं, उन्हें नए समय के अनुसार ही पहुंचना होगा। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी भारत और पाकिस्तान के सैनिकों द्वारा की जाने वाली एक विशेष परंपरा है, जिसमें जोश, अनुशासन और देशभक्ति की झलक देखने को मिलती है। हजारों लोग बनते हैं आयोजन का हिस्सा हर दिन हजारों लोग इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं और भारत माता की जय तथा वंदे मातरम जैसे नारों से माहौल देशभक्ति से गूंज उठता है। इस बदलाव के बाद उम्मीद है कि लोग समय से पहुंचकर इस अद्भुत दृश्य का आनंद ले पाएंगे। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय का विशेष ध्यान रखें और निर्धारित समय से पहले ही पहुंचकर अपनी सीट सुनिश्चित करें, ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।

GT ने RCB को 4 विकेट से हराया, बटलर-गिल की दमदार पारियां

अहमदाबाद इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के 42वें मैच में गुजरात टाइटंस (GT) ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 4 विकेट से हराते हुए अपनी 5वीं जीत दर्ज की। नरेंद्र मोदी स्टेडियम में हुए मैच में RCB ने पहले खेलते हुए सभी विकेट खोकर 155 रन बनाए। जवाब में GT ने जोस बटलर (39) और शुभमन गिल (43) की पारियों की मदद से लक्ष्य हासिल किया। आइए मैच में बने रिकॉर्ड्स पर एक नजर डालते हैं। इस तरह से जीती GT की टीम टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए RCB ने 35 रन तक विराट कोहली (28) और जैकब बेथल (5) के विकेट गंवाए। निरंतर अंतराल पर गिर रहे विकेटों के बीच देवदत्त पडिक्कल ने 40 रन बनाते हुए टीम का स्कोर 150 के पार पहुंचाया। GT से अरशद खान ने 3 विकेट लिए। जवाब में साई सुदर्शन (6) के जल्दी आउट होने के बाद बटलर और गिल ने तेज रन बनाए। इसके बाद राहुल तेवतिया (27*) ने जीत सुनिश्चित की। कोहली ने पूरे किए 450 टी-20 छक्के कोहली ने 13 गेंदों में 28 रन बनाए। इस बीच उन्होंने 5 चौके और एक छक्का लगाया। अपने इकलौते छक्के के साथ ही कोहली ने टी-20 क्रिकेट में अपने 450 छक्के पूरे किए। वह इस आंकड़े को छूने वाले दूसरे भारतीय बने। कोहली टी-20 क्रिकेट में 450 छक्के पूरे करने वाले विश्व के कुल 21वें बल्लेबाज बने। भारतीय बल्लेबाजों में कोहली से ज्यादा छक्के सिर्फ रोहित शर्मा (555) ने लगाए हैं। बटलर ने पूरे किए 200 IPL छक्के बटलर ने 19 गेंदों में 39 रन की पारी खेली। इस बीच उन्होंने 2 चौके और 4 छक्के लगाए। इस इंग्लिश विकेटकीपर बल्लेबाज ने अपने IPL करियर में 200 छक्के पूरे किए। अपने IPL करियर में उन्होंने 130 मैचों में 39.90 की औसत और 149.88 की स्ट्राइक रेट के साथ 4,429 रन बनाए। इस बीच उन्होंने 7 शतक और 26 अर्धशतक लगाए। उनका सर्वोच्च स्कोर 124 रन रहा है। अरशद और होल्डर ने की उम्दा गेंदबाजी GT की ओर से अरशद सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए। बाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने 3.2 ओवर में 22 रन देते हुए 3 सफलताएं हासिल की। यह उनके IPL करियर का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन है। ऑलराउंडर जेसन होल्डर ने अपने 4 ओवर के कोटे में 29 रन देते हुए 2 विकेट चटकाए। अनुभवी लेग स्पिनर राशिद खान ने 19 रन देते हुए 2 विकेट अपने नाम किए। भुवनेश्वर ने पूरे किए अपने 350 टी-20 विकेट भुवनेश्वर ने अपने 4 ओवर में 28 रन देते हुए 3 विकेट लिए। इस बीच उन्होंने अपने टी-20 करियर के 350 विकेट पूरे किए। GT के सलामी बल्लेबाज साई सुदर्शन उनका 350वां शिकार बने। क्रिकइंफो के अनुसार, टी-20 विकेटों के मामले में भारतीयों में भुवनेश्वर सिर्फ युजवेंद्र चहल से पीछे हैं। चहल 391 विकेटों के साथ इस सूची में सबसे ऊपर हैं। IPL 2026 में भुवनेश्वर अब तक 17 विकेट ले चुके हैं।  

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा का आदेश, AAP बोली- ‘हम भुगतने को तैयार हैं

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (आप) इन दिनों जहां एक तरफ पार्टी में टूट के संकट से जूझ रही है तो दूसरी तरफ पार्टी के बड़े नेता अदालती लड़ाई में भी उलझे हैं। खुद पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ बहिष्कार वाला सत्याग्रह छेड़ दिया है, जिसमें अब उनके अलावा मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक भी शामिल हो गए हैं। कथित शराब घोटाले से जुड़े केस की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में बुधवार को इन नेताओं की ओर से ना तो कोई वकील पेश हुआ और ना ही इनकी ओर से कोई जवाब दिया गया है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की ओर से दिए गए ‘अंतिम मौके’ पर 'आप' ने एक बार फिर अपना रुख जाहिर कर दिया है। आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में 'सत्याग्रह' जारी रखने की बात कहते हुए कहा कि परिणाम भुगतने को तैयार हैं और सबकुछ सोचकर फैसला लिया गया है कि जहां न्याय की उम्मीद नहीं है वहां पेश होने का फायदा नहीं है। अनुराग ने कहा, 'मुझे लगता है कि अरविंद केजरीवाल जी की तरफ से, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक की तरफ से साफ कह दिया गया है कि वह इन कार्यवाही में हिस्सा नहीं लेंगे। यह सत्याग्रह है हम लोगों का।' परिणाम भुगतने को तैयार, सोचकर लिया फैसला: केजरीवाल आप नेता ने कहा कि कानूनी विकल्प अपनाए जाएंगे पर अभी यह साफ है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में तीनों ही नेता अपना केस नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा, 'सत्याग्रह इसलिए कि हमने कानूनी प्रक्रिया अपनाई, रिक्यूजल के प्रोसेस में गए और सबकुछ किया। इसके बाद दो फैक्ट्स को मानते हुए जज कहती हैं कि मैं ही इस केस को सुनूंगी तो उनके सामने जाने का क्या फायदा, जब हमको पता है कि हमें इंसाफ मिलेगा या नहीं मिलेगा। सत्याग्रह जारी है। जब राजघाट गए थे तो इस प्रण को दृठ करते हुए कि दुष्परिणाम के लिए तैयार हैं। सारी चीजों को सोचकर फैसला लिया है। जहां न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है वहां पेश होने का फायदा नहीं है। जो भी कानूनी विकल्प होंगे उन्हें अपनाएंगे। लेकिन अभी तक स्पष्ट है कि ना तीनों ही नेता जाएंगे और ना ही वकील के माध्यम से पक्ष रखेंगे।' जज ने दिया आखिरी मौका आप के नेताओं ने न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा के सामने सुनवाई का बहिष्कार किया है। हालांकि, जज ने उन्हें अपना जवाब दाखिल करने का एक अंतिम मौका दिया है। जस्टिस शर्मा ने कहा कि 'हम रिकॉर्ड मंगवाएंगे और सोमवार से सुनवाई शुरू करेंगे' और निर्देश दिया कि रिकॉर्ड कल तक मंगवा लिया जाए। अदालत ने यह भी गौर किया कि कई पक्षों ने अपने-अपने जवाब दाखिल कर दिए हैं लेकिन बरी किए गए कुछ आरोपियों ने अब तक ऐसा नहीं किया है। अदालत ने कहा, '(अदालत) उन्हें जवाब दाखिल करने का एक और आखिरी मौका देगी। वे शनिवार तक जवाब दाखिल कर दें।' जस्टिस शर्मा ने खुद को अलग करने से किया इनकार, केजरीवाल का बहिष्कार जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा शर्मा ने 20 अप्रैल को इस मामले से खुद को अलग करने संबंधी केजरीवाल और सिसोदिया की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद आप नेताओं ने खुला पत्र लिखकर कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से या किसी वकील के माध्यम से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में पेश नहीं होंगे। केजरीवाल समेत अन्य आप नेताओं ने जस्टिस पर हितों के टकराव समेत कुछ आरोप लगाए हैं और आशंका जाहिर की है कि उनकी अदालत में न्याय नहीं मिल पाएगा।

गुजारा-भत्ता पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ‘पुरुष पल्ला नहीं झाड़ सकता’

ग्वालियर  शादी के बाद पत्नी का भरण-पोषण करना पति का न केवल नैतिक, बल्कि अनिवार्य कानूनी दायित्व है। हाईकोर्ट ने एकल पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि पति स्वस्थ और काम करने में सक्षम है, तो वह यह कहकर गुजारा भत्ता देने से नहीं बच सकता कि उसकी आय कम है या वह बेरोजगार है। जस्टिस अमित सेठ की एकल पीठ ने पति और पत्नी दोनों की ओर से दायर पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के अंतरिम भरण-पोषण के आदेश को यथावत रखा है। मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर दरअसल शबीना व शाहिद (दोनों के परिवर्तित नाम) का निकाह नवंबर 2019 में मुस्लिम रीति-रिवाजों से हुआ था। पत्नी का आरोप था कि निकाह के बाद उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया, जिसके कारण उसे मायके में शरण लेनी पड़ी। पत्नी ने फैमिली कोर्ट में आवेदन देकर बताया कि उसका पति मैकेनिक है और 30 हजार रुपए महीना कमाता है, इसलिए उसे भरण पोषण दिलाया जाए।  दूसरी ओर पति ने कोर्ट में दलील दी कि वह मैकेनिक नहीं बल्कि एक गैराज में महज हेल्पर है और उसकी मासिक आय केवल 5,000 रुपए है। उसने दलील दी कि इतनी कम आय में वह 4,000 रुपए गुजारा भत्ता नहीं दे सकता। वहीं पत्नी ने गुजारा भत्ता की राशि बढ़ाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दिक्कतें अपनी जगह, हक अपनी जगह     कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि धारा 125 सीआरपीसी का उद्देश्य महिला को दर-दर भटकने से बचाना और उसे गरिमापूर्ण जीवन देना है। यदि पति शारीरिक रूप से स्वस्थ है, तो उसे एक 'अकुशल श्रमिक' के बराबर कमाकर पत्नी को पैसा देना ही होगा।     पति ने अपनी सही आय के पुख्ता सबूत नहीं दिए, इसलिए फैमिली कोर्ट द्वारा कलेक्टर रेट (न्यूनतम मजदूरी) के आधार पर 4,000 रुपए का अंतरिम गुजारा भत्ता तय करना पूरी तरह उचित है। क्या होता है गुजारा भत्ता जानकारी के लिए बता दें कि गुजारा भत्ता (Alimony/Maintenance) तलाक या अलग होने के बाद एक पति/पत्नी द्वारा दूसरे को दी जाने वाली कानूनी और वित्तीय सहायता है। इस सहायता का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर साथी को विवाह के दौरान की जीवनशैली बनाए रखने में मदद करना है। यह राशि अदालत द्वारा या आपसी सहमति से तय की जा सकती है। ये भी जानें -मुख्य उद्देश्य तलाक के बाद आर्थिक असमानता को दूर करना।-यह स्थायी (जीवनभर) या अस्थायी (पुनर्वास के लिए) हो सकता है। -यह आमतौर पर पति की आय का 25-33% हो सकता है, जो पति-पत्नी की संपत्ति, उम्र और वैवाहिक अवधि पर निर्भर करता है। -यह आमतौर पर प्राप्तकर्ता के पुनर्विवाह करने या मौत होने तक जारी रहता है।

जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से गोचा नदी के स्टॉप डैम की तस्वीर हुई बदल

सफलता की कहानी जल गंगा संवर्धन अभियान: जनसहभागिता से बदली गोचा नदी स्टॉप डैम की तस्वीर भोपाल मध्यप्रदेश में संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ जल संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी जनआंदोलन के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में 19 मार्च से 30 जून 2026 तक चल रहे इस अभियान ने प्रदेशभर में जल संरचनाओं के संरक्षण, संवर्धन और पुनर्जीवन को नई गति दी है। इसी अभियान के अंतर्गत गुना जिले के जनपद पंचायत राघौगढ़ की ग्राम पंचायत मोररवास में जनसहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण सामने आया है, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि सामूहिक प्रयासों से जल संकट जैसी चुनौती का समाधान संभव है। सूखे स्टॉप डैम में लौटी जीवन की धारा गोचा नदी पर स्थित स्टॉप डैम में पूर्व में पानी का ठहराव नहीं हो पाता था और वर्षा जल बहकर अन्य स्थानों पर चला जाता था। परिणामस्वरूप ग्रामीणों एवं पशुधन को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से 50 हजार रुपये की जनसहयोग राशि से बोरी बंधान का कार्य 6 से 11 अप्रैल के बीच पूर्ण किया गया। इस छोटे लेकिन प्रभावी प्रयास से अब स्टॉप डैम में जल ठहराव बढ़ा है और जल संग्रहण की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। श्रमदान से बना जनआंदोलन इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामवासियों की सक्रिय भागीदारी रही। ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश दिया और जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने का संकल्प लिया। जनप्रतिनिधियों के नेतृत्व में यह कार्य सामूहिक रूप से पूर्ण किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में सकारात्मक संदेश प्रसारित हुआ। मवेशियों एवं वन्य जीवों को मिला सहारा बोरी बंधान से जल उपलब्धता में वृद्धि हुई है, जिससे अब मवेशियों एवं वन्य जीवों के लिए भी पानी की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी है। जो स्थान पहले सूखा रहता था, वह अब जीवनदायी जल स्रोत के रूप में विकसित हो रहा है। प्रेरणादायक मॉडल गोचा नदी स्टॉप डैम का यह परिवर्तन ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के अंतर्गत जनसहभागिता आधारित कार्यों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। यह पहल प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरी है और यह संदेश देती है कि सामूहिक प्रयास, जनसहयोग एवं सकारात्मक सोच से जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा सकता है।  

मोहन सरकार में मंत्रिमंडल में बदलाव, इन नामों को मिल सकता है मौका!

इंदौर   मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर दो दिन पहले हुई एक महत्वपूर्ण बैठक को लेकर कवायद शुरू हो गई है जिसे मंत्रिमंडल के विस्तार से भी जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार में मंत्रियों का कोरम पूरा हो जाएगा। इसमें बड़ा फेरबदल होने की भी संभावनाएं जताई जा रही है जिसमें नई मंत्री बनाए जाने के साथ कुछ की छुट्टी भी तय मानी जा रही है। मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार को ढाई साल होने जा रहे हैं। इस बीच मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया है। वर्तमान में 31 मंत्री हैं, जबकि 35 बनाए जा सकते हैं। चार पदों को भरा जाएगा जिसके साथ कुछ मंत्रियो को मुक्त करके नए बनाए जाने की भी बात सामने आ रही है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी इस बात को मजबूत यूं भी माना जा रहा है कि दो दिन पहले डॉ. मोहन यादव के निवास पर एक समन्वय समिति की बैठक हुई थी जिसमें संघ के कई बड़े दिग्गज नेता मौजूद थे और माना जाता है कि कोई भी बड़े फैसले से पहले समिति में बात रखी जाती है। इस बात से मुख्यमंत्री डॉ. यादव के पिछले दिनों दिल्ली के लगातार दौरे को भी जोड़कर देखा जा रहा है जिसमें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की भी मंजूरी मानी जा रही है।  रिपोर्ट के मुताबिक ये भी कहानी सामने आ रही है कि मंत्रिमंडल विस्तार में इंदौर का नाम भी है जिसमें मालिनी गौड़ प्रमुखता से है तो दूसरे पायदान पर मनोज पटेल है। हालांकि विधायक उषा ठाकुर भी खासा प्रयास कर रही हैं जिसके लिए उन्होंने भोपाल-दिल्ली एक कर रखा है। उनके अलावा संभाग से अर्चना चिटनीस का नाम भी है। वहीं भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव, बृजेंद्र सिंह यादव और रीति पाठक के नाम भी मंत्री बनने वाले विधायकों की फेहरिस्त में हैं। ये नाम तो मंत्री बनने के दावेदारों के है, लेकिन कुछ नाम ऐसे दिग्गजों के भी हैं जिनके इस्तीफे भी हो सकते हैं। संतुलन बनाने का होगा प्रयास मंत्रिमंडल विस्तार में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन बनाने का भी प्रयास किया जाएगा। हालांकि निगम मंडल और प्राधिकरणों में जो नियुक्ति हो रही है जिसमें मोहन सरकार व भाजपा का संगठन इस बात का बारीकी से ध्यान रख रहा है। भविष्य में होने वाले चुनाव को लेकर भी अभी से बिसात जमाई जा रही है ताकि सभी वर्गों की नाराजगी को दूर किया जा सके।

2 मई से MP में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू, पुराने आवेदकों के लिए प्रोफाइल अपडेट जरूरी, चयन मेरिट के आधार पर

भोपाल  मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए MP अतिथि शिक्षक भर्ती (Guest Teacher Recruitment) की प्रक्रिया का बिगुल फूंक दिया है। इस बार विभाग ने पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए अतिथि शिक्षक पोर्टल 3.0 शुरू किया गया है। 2 मई 2026 से शुरू होने वाली इस प्रक्रिया के तहत प्रदेश भर के प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में विषयवार पद करीब 10 हजार पदों को भरने की तैयारी है। हाल ही में अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अतिथि शिक्षकों के लिए यह बड़ी खबर है, क्योंकि अब चयन का आधार पूरी तरह से डिजिटल स्कोर कार्ड और मेरिट होगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना सत्यापन के किसी भी आवेदक का स्कोर कार्ड जनरेट नहीं होगा, जिससे वह भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेगा। इसलिए सभी इच्छुक कैंडिडेट्स को तय समयसीमा में जरूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विभाग ने पदों की कुल संख्या स्पष्ट नहीं की है, लेकिन यह प्रक्रिया प्रदेश के स्कूलों में विषयवार रिक्त करीब 10 हजार पदों को भरने के लिए संचालित की जा रही है। इसमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के शिक्षकों की आवश्यकता के अनुसार चयन किया जाएगा। एमपी अतिथि शिक्षक भर्ती 2026 आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे निर्धारित समयसीमा के भीतर अपनी प्रक्रिया पूरी करें, क्योंकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। पोर्टल 3.0 पंजीकरण और प्रोफाइल अपडेट की प्रक्रिया इस वर्ष भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी।  1. नए आवेदकों के लिए (For New Applicants) जो अभ्यर्थी पहली बार अतिथि शिक्षक के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें पोर्टल 3.0 पर फ्रेश रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसमें उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के माध्यम से अपनी आईडी जनरेट करनी होगी। 2. पूर्व रजिस्टर्ड उम्मीदवारों के लिए (For Old Applicants) पहले से पंजीकृत उम्मीदवारों को अपनी पुरानी आईडी से लॉगिन कर प्रोफाइल अपडेट (Profile Update) करना अनिवार्य है। इसमें उन्हें अपनी नवीनतम शैक्षणिक योग्यता, व्यावसायिक डिग्री (B.Ed/D.El.Ed) और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के अंक अपडेट करने होंगे। डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन और स्कोर कार्ड अतिथि शिक्षक भर्ती में सबसे जरूरी डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन है। बिना वेरिफिकेशन के आवेदक का स्कोर कार्ड (Score Card) जनरेट नहीं होगा, और बिना स्कोर कार्ड के भर्ती प्रक्रिया में शामिल होना असंभव है। पुराने कैंडिडेट्स को करनी होगी प्रोफाइल अपडेट भर्ती पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से “अतिथि शिक्षक पोर्टल 3.0” पर की जाएगी। नए आवेदकों को पहले पंजीयन करना होगा, जबकि पुराने उम्मीदवारों को अपनी प्रोफाइल अपडेट करनी होगी। इसके बाद सभी आवेदकों को अपने शैक्षणिक, व्यावसायिक योग्यता और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़े दस्तावेज अपलोड करने होंगे। प्रोफाइल लॉक करने के बाद आवेदकों को संकुल प्राचार्य के माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। सत्यापन के बाद ही स्कोर कार्ड तैयार किया जाएगा, जो मेरिट तय करने का आधार बनेगा। साथ ही, इस बार पहले ही विभाग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार की छूट नहीं दी जाएगी। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया     आवेदकों को पोर्टल पर अपने डाक्यूमेंट्स अपलोड करने के बाद संकुल प्राचार्य (Cluster Principal) के पास मूल डाक्यूमेंट्स के साथ जाना होगा।     प्राचार्य ओटीपी के माध्यम से पोर्टल पर जानकारी को एक्सेप्ट या रिजेक्ट करेंगे।     यदि आवेदन रिजेक्ट होता है, तो आवेदक उसे सुधार कर दोबारा जमा कर सकता है। चयन का आधार: मेरिट और स्कोर कार्ड  अतिथि शिक्षकों का चयन मेरिट के आधार पर होगा।      शैक्षणिक योग्यता (Academic Record): 10वीं, 12वीं और ग्रेजुएट/पोस्टग्रेजुएट के अंक।     व्यावसायिक योग्यता: बी.एड (B.Ed) या डी.एल.एड के अंक।     पात्रता परीक्षा (TET): शिक्षक पात्रता परीक्षा में प्राप्त अंकों को विशेष वेटेज दिया जाएगा।     अनुभव: पूर्व में अतिथि शिक्षक के रूप में किए गए कार्य का अनुभव अंक। सावधानियां और निर्देश      अधूरी योग्यता: यदि बी.एड या अन्य कोर्स का रिजल्ट वेटिंग है, तो वेरिफिकेशन नहीं होगा।     मल्टीपल आईडी: यदि किसी आवेदक के पास एक से अधिक आईडी है, तो अनुभव प्रमाण पत्र मर्ज कराना अनिवार्य है।     डाक्यूमेंट्स: बिना ओरिजिनल डॉक्यूमेंट के संकुल प्राचार्य (Cluster Principal) वेरिफिकेशन नहीं करेंगे। अधिकारियों की जवाबदेही और निगरानी   लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही होने पर कार्रवाई की जाएगी। नाराजगी देख बदली व्यवस्था अतिथि शिक्षकों ने 29 अप्रैल को भोपाल के अंबेडकर पार्क में बड़ा आंदोलन किया था। अतिथि शिक्षक सरकार द्वारा वार्षिक अनुबंध का वादा तोड़ने और डीपीआई द्वारा 30 अप्रैल से कार्यमुक्त करने से नाराज हैं। उनके आंदोलन से प्रदेश में सरकार की छवि पर खराब असर पड़ने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग हरकत में आया है। उनकी नाराजगी को संभालने के लिए डीपीआई द्वारा नए शैक्षणिक सत्र के लिए नियुक्ति की प्रक्रिया के संबंध में नया आदेश जारी किया है। 

प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में जोड़ें नए आयाम

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि विमानन क्षेत्र में मध्यप्रदेश को देश का रोल मॉडल बनाने के प्रयास किए जाएं। प्रदेश के दूरस्थ इलाकों के साथ ही पड़ौसी राज्यों के यात्रियों को भी विमानन सेवाएं लाभान्वित करती हैं। मध्यप्रदेश के पर्यटन क्षेत्र का महत्व बढ़ाने की दृष्टि से भी ये सेवाएं महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंत्रालय में हुई बैठक में विमानन विभाग के कार्यों की जानकारी प्राप्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विकसित होने वाले मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों और विभिन्न औद्योगिक संस्थानों के परिसर में हैलीपेड निर्माण को प्राथमिकता दी जाए। हैली सेवाओं के विस्तार के लिए हैलीपेड निर्माण में निजी क्षेत्र का सहयोग प्राप्त किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने उज्जैन एयरपोर्ट के विकास के लिए संचालित कार्यों को समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि उज्जैन एयरपोर्ट में एयरफील्ड का कुल क्षेत्रफल 95 एकड़ है। राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार उज्जैन एयरपोर्ट 2700 मीटर लंबाई के रनवे के साथ कुल 4 हजार 100 मीटर लंबाई में विकसित होगा। इसके लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए 590 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि स्वीकृत की जा चुकी है। सिंहस्थ:2028 के दृष्टिगत श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए एयरपोर्ट उपयोगी होगा। उन्होंने निर्देशित किया कि एयरपोर्ट के विकास के सभी कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण किया जाए। बैठक में पीएम हेली पर्यटन सेवा के संचालन के संबंध में भी चर्चा हुई। रोजगारपरक एविएशन पाठ्यक्रम का लाभ युवाओं को दिलवाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में विमानन सेवाओं के विस्तार के साथ दक्ष पायलट और अन्य प्रशिक्षित अमले की आवश्यकता होगी। नई शिक्षा नीति में एविएशन पाठ्यक्रम को रोजगारपरक शिक्षा की श्रेणी में शामिल किया गया है। उन्होंने प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा एविएशन कोर्स का लाभ युवाओं को दिलवाने के लिये प्रयास करने के ‍निर्देश दिये। सफल है प्रदेश की विमानन नीति, रीवा से 24 हजार यात्रियों ने उठाया हवाई सेवा का लाभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 गत फरवरी 2025 में जारी की गई थी। नीति में विमानन क्षेत्र की समग्र वैल्यू चैन के लिए कई तरह के प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। मध्यप्रदेश से बनारस और पटना जैसे बड़े नगरों के लिए विमान सेवा प्रारंभ करने का प्रयास किया जाए ताकि धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिले। प्रदेश की विमानन नीति की सफलता में नए आयाम जोड़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विमानन नीति की सफलता के लिए विभाग के अधिकारियों को बधाई दी। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के एयरपोर्ट से नए गंतव्यों को हवाई मार्ग से जोड़ने के लिए वित्तीय सहायता भी शिड्यूल्ड ऑपरेटर्स को दी जा रही है। मध्यप्रदेश नागरिक विमानन नीति-2025 की सफलता का ही यह प्रमाण है कि गत छह माह में रीवा से 24 हजार यात्रियों ने हवाई सेवा का लाभ उठाया है। रीवा से दिल्ली, रीवा से रायपुर सप्ताह में तीन दिन और रीवा से इंदौर प्रतिदिन फ्लाइट उपलब्ध है। गत चार माह में रीवा से इंदौर की ऑक्यूपेंसी 85 प्रतिशत और गत डेढ़ माह में रीवा से रायपुर की ऑक्यूपेंसी 80 प्रतिशत से अधिक है। रीवा- नई दिल्ली फ्लाइट की ऑक्यूपेंसी भी 70 प्रतिशत से अधिक है। बैठक में अपर मुख्य सचिव विमानन विभाग  संजय कुमार शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव  आलोक कुमार सिंह, सचिव वित्त  लोकेश जाटव सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।  

राजस्थान वन विभाग का बड़ा फैसला: लेपर्ड को मारने से पहले DNA जांच जरूरी

जयपुर  राजस्थान में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच राज्य वन विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी लेपर्ड को 'आदमखोर' घोषित कर उसे मारने की अनुमति देना आसान नहीं होगा। चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन के.सी.ए. अरुणप्रसाद द्वारा जारी की गई नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में स्पष्ट किया गया है कि लेपर्ड को 'आदमखोर' श्रेणी में डालने के लिए अब पुख्ता वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्यों की आवश्यकता होगी। बिना फॉरेंसिक जांच नहीं होगा फैसला नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी लेपर्ड पर इंसानों पर हमला करने या उन्हें खाने का संदेह है, तो केवल अनुमान के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। विभाग को अब निम्नलिखित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी-     डीएनए विश्लेषण: घटनास्थल पर मिले बालों, लार या अन्य नमूनों का मिलान संदिग्ध जानवर से करना होगा।     फॉरेंसिक साक्ष्य: हमले के निशान और अन्य फॉरेंसिक एविडेंस की जांच अनिवार्य कर दी गई है।     वैज्ञानिक निगरानी: हमले वाले क्षेत्र में ट्रैप कैमरे और ड्रोन के जरिए लेपर्ड के व्यवहार की निगरानी की जाएगी। मारना नहीं, पकड़ना होगी पहली प्राथमिकता SOP में यह भी साफ किया गया है कि अगर किसी लेपर्ड को 'आदमखोर' मान भी लिया जाता है, तब भी पहली प्राथमिकता उसे जीवित पकड़ने की होगी। उसे मारने का आदेश केवल अंतिम विकल्प के रूप में और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की लिखित अनुमति के बाद ही दिया जा सकेगा। भीड़ पर लगेगी लगाम अक्सर रेस्क्यू के दौरान उमड़ने वाली भीड़ लेपर्ड को हिंसक बना देती है। अब ऐसे संवेदनशील ऑपरेशन्स के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में 144) लागू की जाएगी। पुलिस को भीड़ हटाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि वैज्ञानिक तरीके से जांच पूरी की जा सके। हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें होगी तैनात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि हैबिटेट के विखंडन के कारण लेपर्ड आबादी के करीब आ रहे हैं। इस नई नियमावली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बेगुनाह जानवर को महज लोगों के गुस्से या डर के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े। अब हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात रहेंगी, जो आधुनिक उपकरणों और वैज्ञानिक डेटा के आधार पर ऐसे संकटों का समाधान करेंगी।