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हरियाणा: पुलिस परिवारों के लिए शगुन योजना लागू, शादी खर्च में मिल रही मदद

चंडीगढ़ हरियाणा पुलिस द्वारा पुलिस परिवारों के सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई शगुन योजना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी रूप से लागू हो चुकी है। इस पहल के तहत अप्रैल माह में अब तक 18 पुलिसकर्मियों को उनके बच्चों की शादी के लिए 2.5-2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके अलावा 12 नए आवेदन वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं। डीजीपी अजय सिंघल ने कहा कि यह योजना विशेष रूप से पुलिसकर्मियों के बच्चों, खासकर बेटियों के विवाह के दौरान आर्थिक सहयोग देने के उद्देश्य से शुरू की गई है, ताकि पुलिसकर्मी बिना वित्तीय दबाव के अपने पारिवारिक दायित्व निभा सकें। योजना से लाभान्वित एसआई कमल चंद ने बताया कि बेटी की शादी जैसे भावनात्मक अवसर पर आर्थिक प्रबंधन चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन शगुन योजना से मिली सहायता उनके परिवार के लिए बड़ी राहत बनी है। अनुभव साझा करते हुए लाभार्थियों की प्रतिक्रिया एसआई कमल चंद ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बेटी के विवाह जैसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक अवसर पर आर्थिक प्रबंधन करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है, ऐसे में शगुन योजना के तहत मिली सहायता हमारे लिए बड़ी राहत साबित हुई है। इसी प्रकार, एक अन्य लाभार्थी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि इस योजना ने हमें आत्मसम्मान के साथ अपने सामाजिक दायित्व निभाने की शक्ति दी है। यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि विभाग की ओर से हमारे प्रति विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। कुछ कर्मियों ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जिस संवेदनशीलता के साथ हमारे परिवारों की जरूरतों को समझा है, वह सराहनीय है। इससे हमें यह भरोसा मिलता है कि विभाग हर परिस्थिति में हमारे साथ खड़ा है।  

पॉलिटेक्निक छात्रों का कमाल, वेस्ट मटेरियल से तैयार की पेट्रोल से चलने वाली ऑफ-रोड बग्गी

अंबाला अक्सर कहा जाता है कि यदि इंसान ठान ले तो सीमित संसाधनों से भी बड़े काम किए जा सकते हैं. दरअसल जुगाड़, हुनर और जज़्बा, जब ये तीनों एक साथ मिलते हैं, तो साधारण संसाधन भी असाधारण नतीजे दे जाते हैं. बता दें कि, इस कहावत को सच कर दिखाया है राजकीय पॉलिटेक्निक, अंबाला के ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के छात्रों ने, जिन्होंने कबाड़ यानी वेस्ट मटेरियल से एक अनोखी छोटी गाड़ी (बग्गी) तैयार कर सबको चौंका दिया है. वहीं छात्रों ने अपनी इस अनूठी रचना का नाम “यमदूद” रखा है, जो इन दिनों काफी ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई है. वही इस बग्गी को तैयार करने में लोहे के पाइप और पुराने वाहनों के अनुपयोगी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया है. हैरानी की बात तो यह है कि इस पूरी गाड़ी को बनाने में छात्रों का केवल लगभग 80 हजार रुपये का खर्चा आया हैं. हालांकि, इस बग्गी में उपयुक्त अधिकांश सामग्री पहले से उपलब्ध कबाड़ से ली गई, जिससे लागत बेहद कम रही है ओर छोटी गाड़ी का एक अच्छा मॉडल तैयार हुआ हैं. इस बग्गी की खासियत सिर्फ इसकी कम लागत ही नहीं हैं, बल्कि इसमें दिए गए आधुनिक सेफ्टी फीचर्स ओर मनोरंजन के स्पीकर लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं. गाड़ी को तैयार करने में 80 हजार रुपए का आया खर्चा वहीं इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए छात्र नैतिक ने बताया कि उनके द्वारा बनाई गई, यह गाड़ी टूटी सड़कों के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि यह ऑफ रोड पर काफी आराम से चलती हैं. उन्होंने कहा कि इसका डिजाइन भी इस तरह से तैयार हुआ है कि इसका वेट काफी कम है और दूसरी गाड़ियों के मुकाबले इसका इंजन गाड़ी के आखरी में रखा गया है. ताकि यह सही ढंग से चल सके और खेतों में दूसरी गाड़ियों के मुकाबले बिल्कुल कंफर्टेबल तरीके से कार्य करें. उन्होंने बताया कि इस गाड़ी को तैयार करने में उनका लगभग 80 हजार रुपए का खर्चा आया है, ओर सभी साथियों ने मिलकर यह अपने खर्चे पर गाड़ी (बग्गी) तैयार की हैं. उन्होंने कहा कि इस बग्गी को बनाने में पांच लोगों को दो महीने का समय लगा है ओर इसके इंजन के ऊपर एक बड़ा फेन, पंखा लगाया है ताकि वह ठंडा रह सके. उन्होंने बताया कि यह गाड़ी पेट्रोल से चलती है और लगभग 1 लीटर पेट्रोल में 20 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है, जो इसे किफायती भी बनाता है. उन्होंने बताया वेस्ट पाइप और प्लास्टिक के साथ-साथ गाड़ी के पार्ट्स की मदद से यह बग्गी तैयार हुई है, और इसमें सेफ्टी के लिए लाइटिंग व मनोरंजन के लिए म्यूजिक सिस्टम लगाया हैं. वहीं छात्र तुषार ने बताया कि ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग फील्ड में उन्हें गाड़ी के इंजन के बारे में पढ़ाया गया था, जिसके बाद उनके मन में विचार आया कि क्यूं न वह वेस्ट मटेरियल से एक गाड़ी तैयार करें. उन्होंने बताया कि इस गाड़ी में फिर 624 सीसी का इंजन फिट किया गया था और अब वह इस गाड़ी को काफी आसानी से चला पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस गाड़ी में आगे दो लोग बैठ सकते हैं और पीछे तीन लोगों के खड़े होने की व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि इस गाड़ी में फीचर दूसरे गाड़ियों के मुकाबले काफी ज्यादा बदले गए हैं और इसमें टेक्निकल चेंज करके बग्गी के मॉडल को तैयार किया हैं. उन्होंने कहा कि जल्द वह इस गाड़ी को मार्केट में उतारेंगे और फिर यह ग्रामीण क्षेत्र में काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होगी.

कैबिनेट विस्तार से पहले बीजेपी की रणनीति, अरविंद शर्मा को बनाया MLC उम्मीदवार

पटना बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और दो डिप्टी सीएम वाली नई सरकार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के पूर्व उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को कैबिनेट विस्तार तक के लिए इंतजार कराने से भूमिहार समाज में उपजी नाराजगी को भाजपा मैनेज करने में जुट गई है। विधायक बन चुके पार्टी के वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय के इस्तीफे से खाली हुई विधान परिषद की एक सीट के लिए हो रहे उप-चुनाव में भाजपा ने 46 साल पुराने कार्यकर्ता अरविंद शर्मा को टिकट दिया है। विधानसभा कोटे की इस सीट पर 202 विधायकों के समर्थन वाले एनडीए के कैंडिडेट अरविंद शर्मा की जीत तय है, जो भूमिहार जाति से हैं। अरविंद शर्मा को टिकट मिलने को पार्टी से शुरुआत से जुड़े कार्यकर्ताओं के समर्पण का इनाम बताया जा रहा है। अरविंद शर्मा ने गुरुवार को नामांकन के आखिरी दिन पर्चा भरा है। उनके साथ दौरान सीएम सम्राट चौधरी, डिप्टी सीएम विजय चौधरी, जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार और लोजपा-आर के विधायक दल के नेता राजू तिवारी समेत एनडीए गठबंधन के अन्य नेता मौजूद रहे। विपक्ष के पास इतने विधायक नहीं हैं कि वो चुनाव लड़ने की भी सोच सके। इसलिए अरविंद शर्मा इस चुनाव में इकलौते कैंडिडेट होने के आधार पर निर्विरोध जीत जाएंगे। कोई कैंडिडेट आ जाता है तो 12 मई को मतदान और फिर उसी शाम को नतीजे आएंगे। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की सरकार के दौर में नक्सलियों और रणवीर सेना के संघर्ष का केंद्र रहे जहानाबाद से काटकर बनाए गए अरवल जिले के बंभई गांव के रहने वाले अरविंद शर्मा पटना में रहते हैं। भाजपा में पहले जिलाध्यक्ष और जिलों में प्रभारी रह चुके अरविंद शर्मा को सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष कार्यकाल में बिहार कार्यालय का प्रभारी बनाया गया था। भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन के दिवंगत पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और अरविंद शर्मा एक दौर के नेता हैं और गहरे मित्र रहे हैं। अरविंद शर्मा एक बार विधानसभा चुनाव लड़ने की रेस में थे, लेकिन टिकट का समीकरण नहीं बन पाया था। अब उनको पक्की जीत वाली सीट से एमएलसी का टिकट मिलने से पुराने कार्यकर्ताओं में उत्साह है कि पार्टी नेतृत्व कब किसे धैर्य का धमाकेदार तोहफा दे, कोई नहीं जानता। विधान परिषद में जून में 9 और सीटें खाली हो रही है, जिसका चुनाव मजेदार होगा। विपक्ष के पास जितने विधायक हैं, उसमें एकजुटता दिखाने पर एक सीट निकल सकती है। बाकी 8 सीटों पर एनडीए के कैंडिडेट बाजी मारेंगे, ऐसा माहौल दिख रहा है। अगले चुनाव में रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश कुशवाहा को मौका मिलने को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है।

शहर में पीएम आवास योजना के आवेदन को लेकर निगम ने लगाया कैंप, पात्र लोगों को मिलेगा लाभ

रांची रांची नगर निगम की ओर से प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत शहर के विभिन्न वार्डों में विशेष कैंप लगेगा। गुरुवार से इसकी शुरुआत होगी। पहले दिन कुल आठ वार्डों में शिविर लगेंगे। इस पहल का उद्देश्य ऐसे पात्र व वंचित लोगों तक योजना का लाभ पहुंचाना है, जिनके पास देश में कहीं भी पक्का मकान नहीं है और जो अब तक किसी कारणवश इस योजना से वंचित रह गए हैं। शिविर में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार आवेदन लिए जाएंगे। निगम के मुताबिक, आवेदन परिवार के महिला या पुरुष मुखिया के नाम से होगा, जिसमें पति-पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल होंगे। आवेदक या उसके परिवार के किसी भी सदस्य के नाम पर भारत में कहीं भी पक्का मकान नहीं होना चाहिए। साथ ही, जो लोग पहले से किसी सरकारी आवास योजना का लाभ ले चुके हैं, वे इसके लिए पात्र नहीं होंगे। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के ऐसे परिवार, जिनकी वार्षिक आय तीन लाख रुपये से कम है, आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज आवेदन के लिए भूमि से संबंधित अद्यतन कागजात, परिवार की फोटो, पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक, आय प्रमाण पत्र, आवास होल्डिंग रसीद, स्व-प्रमाण पत्र एवं पक्का मकान नहीं होने का शपथ पत्र समेत अन्य दस्तावेज आवश्यक हैं। इस दौरान लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन देने की सुविधा मिलेगी। इन वार्डों में यहां लगेंगे शिविर वार्ड संख्या स्थान 1,2 और 3 जोगो पहाड़, एदलहातू 4 और 5 पहान टोली, अटल क्लिनिक 7,11 और 12 दुर्गा सोरेन चौक, हाई टेंशन मैदान कल इन आठ वार्डों में यहां शिविर लगेंगे और लोग प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन कर सकेंगे और इस बारे में जानकारी भी मिल जाएगी। वार्ड संख्या स्थान 13,14 और 46 वार्ड कार्यालय, बहु बाजार चुटिया 6 और 8 सामुदायिक भवन, क्लिनिक 15,16 और 17 कर्बला चौक, निगम कार्यालय इसी प्रकार चार मई को वार्ड संख्या 25 व 26 में कार्तिक उरांव चौक, 27, 28 व 29 को सेल्टर हाउस मधुकम, 24 व 43 को कडरू दुर्गा मंदिर, 30, 32, 33 और 34 को सामुदायिक भवन टंगराटोली में शिविर लगेगा। पांच मई को वार्ड संख्या 37, 38, 39, 40, 41, 42, 49 व 35 में शिविर लगेगा। छह मई को वार्ड संख्या 44, 45, 48, 18, 19, 9 व 10 में शिविर लगेगा। सात मई को कुल ग्यारह वार्डों में शिविर लगेगा। इसमें वार्ड संख्या 20, 21, 22, 23, 47, 36, 31, 50, 51, 52 व 53 शामिल हैं।

झारखंड में ई-गवर्नेंस फेलोशिप योजना की शुरुआत, छात्रों को मिलेगा योजनाओं पर काम करने का मौका

रांची  राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन वर्तमान में थर्ड पार्टी के रूप में चयनित निजी एजेंसियों द्वारा ही कराया जाता रहा है। अब राज्य सरकार ने इस कार्य में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को भी लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू करेगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन की सामान्य सभा की हुई बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्रस्तावित चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए बकायदा उन्हें फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। स्नातकोत्तर छात्र न केवल योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने चीफ मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप स्कीम के ही एक कंपोनेंट के रूप में इसे शुरू करने का निर्णय लिया है। यह वीडियो भी देखें किसी क्षेत्र के विकास व प्रोजेक्ट पर काम करेंगे पीएचडी छात्र इस स्कीम के एक अन्य कंपोनेंट के तहत झारखंड के चिह्नित क्षेत्रों के विकास के लिए शोध कार्य करने तथा किसी खास प्रोजेक्ट आधारित शोध के लिए फेलोशिप प्रदान की जाएगी। यह फेलोशिप कार्यक्रम पीएचडी विद्यार्थियों के लिए होगा। झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन ऐसे क्षेत्रों तथा प्रोजेक्ट की पहचान करेगा, जिनमें शोध किया जाना है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। क्षेत्रों एवं प्रोजेक्ट की पहचान के बाद विज्ञापन प्रकाशित कर इसके लिए अर्हता प्राप्त विद्यार्थियों से आवेदन मंगाए जाएंगे। विशेषज्ञ टीम उन आवेदनों की स्क्रूटनी कर योग्य अभ्यर्थियों की अनुशंसा काउंसिल को करेगी।

OnePlus Pad 4 लॉन्च: 13.2 इंच डिस्प्ले और 13380mAh बैटरी वाला दमदार प्रीमियम टैबलेट

वनप्‍लस ने OnePlus Pad 4 को भारत में लॉन्‍च कर दिया है। यह कंपनी का प्रीमियम फ्लैगश‍िप टैबलेट है, जिसे ‘स्‍नैपड्रैगन 8 एलीट जेन 5 चिपसेट’ से पैक किया गया है। टैबलेट में 13.2 इंच का 3.4K रेजॉलूशन डिस्प्ले है और 13380 एमएएच की बड़ी बैटरी दी गई है। इतनी बड़ी बैटरी के बावजूद यह काफी पतला है और कंपनी दावा करती है कि इस टैबलेट के साथ यूजर्स को PC लेवल की परफॉर्मेंस मिलेगी। OnePlus Pad 4 के प्राइस और उपलब्‍धता     8GB+256GB मॉडल की कीमत 54,999 रुपये है।     12GB+512GB मॉडल के दाम 59,999 रुपये हैं।     इस टैबलेट की सेल 5 मई 2026 से Amazon, Flipkart, OnePlus.in और ऑफलाइन स्टोर्स पर शुरू होगी। कुछ बैंक कार्ड्स पर 5000 रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है साथ ही 5,499 रुपये प्राइस वाला OnePlus Stylo Pro फ्री दिया जाएगा। OnePlus Pad 4 के स्‍पेस‍िफ‍िकेशंस और फीचर्स     OnePlus Pad 4 एक बड़े डिस्‍प्‍ले वाला पतला और प्रीमियम टैबलेट है।     इसमें 13.2 इंच का 3.4K डिस्प्ले, 144 हर्त्‍ज रिफ्रेश रेट और 1 हजार निट्स की ब्राइटनैस दी गई है।     टैब में 7:5 'ReadFit' आस्पेक्ट रेश्यो दिया गया है, जिससे डॉक्‍युमेंट्स पढ़ने और मल्‍टीटास्‍क‍िंग में आसानी होती है।     OnePlus Pad 4 में Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट, 12GB RAM और 512GB स्टोरेज है।     यह वनप्‍लस का सबसे पावरफुल टैबलेट है और 13,380mAh बैटरी के साथ सबसे बड़े टैब्‍स में शामिल है।     इसे चार्ज करने के लिए बॉक्‍स में 80वॉट की सुपरवूक चार्जिंग मिलती है। दावा है कि फुल चार्ज के बाद यह 54 दिनों     का स्‍टैंडबाय और 20 घंटे का वीड‍ियो प्‍लेबैक दे सकता है।     हैवी परफॉर्मेंस के दौरान टैब में कोई रुकावट ना आए, इसके लिए टैब में 'Cryo-velocity Cooling System' दिया गया है, जो टैब को ठंडा रखता है।     ‘वनप्‍लस पैड 4’ रन करता है OxygenOS 16 पर। कंपनी ने इसमें माउस-कीबोर्ड शेयरिंग फीचर दिया है, जिससे यह लैपटॉप जैसा एक्‍सपीरियंस देता है। OnePlus Pad 4 के अन्‍य फीचर्स     मेटल यूनिबॉडी के साथ आने वाला OnePlus Pad 4 सिर्फ 5.94mm स्‍लीक है। इसका वेट 672 ग्राम है। इसमें 8 स्‍पीकर्स (4 वूफर्स और 4 ट्वीटर) का सेटअप है।     टैब में एआई फीचर्स दिए गए हैं। इनमें एआई राइटर, एआई समरी, एआई पेंटर, एआई क्‍लीयर कॉल आदि शामिल हैं। 50 हजार से अधिक प्राइस, क्‍या OnePlus Pad 4 खरीदना चाहिए? वनप्‍लस का प्रीमियम और फ्लैगश‍िप टैबलेट हर मोर्चे पर अडवांस, फास्‍ट और बेहतरीन नजर आता है। NBT टेक के पास यह डिवाइस मौजूद है। हम इसे र‍िव्‍यू कर रहे हैं। अब तक के एक्‍सपीरियंस में वनप्‍लस पैड 4 एक सॉलिड खिलाड़ी बनकर उभरा है। परफॉर्मेंस से लेकर डिस्‍प्‍ले और बैटरी क्षमता में यह दमदार है। वनप्‍लस का सबसे बड़ी बैटरी वाला टैब है। अगर बजट इजाजत देता है तो आप ब‍िना हिचक इसे खरीद सकते हैं।  

RR vs DC: बराबरी के रिकॉर्ड के साथ सवाई मानसिंह स्टेडियम में भिड़ंत

जयपुर इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 का 43वां मुकाबला राजस्थान रॉयल्स (RR) और दिल्ली कैपिटल्स (DC) के बीच खेला जाएगा। RR ने इस संस्करण अब तक 6 मुकाबलों में जीत दर्ज की है। वहीं, 3 मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। DC की टीम को 3 मैच में जीत और 5 मुकाबलों में हार मिली है। ऐसे में आइए मुकाबले से जुड़ी सभी जरूरी बातों पर नजर डालते हैं। दोनों टीमों के बीच बराबरी का रहा है मुकाबला IPL में DC और RR के बीच कुल 30 मुकाबले हुए हैं। इस दौरान DC को 15 मैच में जीत मिली है। RR ने भी 15 मैच अपने नाम किए हैं। IPL 2025 में दोनों टीमों के बीच एक मुकाबला हुआ था। ये मैच टाई रहा था। बाद में सुपर ओवर में DC को जीत मिली थी। IPL 2024 में दोनों के बीच 2 मैच हुए। एक मैच RR ने जीता और एक मैच में DC को जीत मिली थी। इस प्लेइंग इलेवन के साथ उतर सकती है DC DC अपने पिछले मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के खिलाफ सिर्फ 75 रन पर ऑलआउट हो गई थी। उसे 9 विकेट से हार मिली थी। ऐसे में टीम उस हार को भूलाकर अच्छा प्रदर्शन करना चाहेगी। तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क इस मैच में खेलते हुए नजर आ सकते हैं। संभावित एकादश: साहिल पराख, केएल राहुल (विकेटकीपर), नितीश राणा, समीर रिजवी, ट्रिस्टन स्टब्स, डेविड मिलर, अक्षर पटेल (कप्तान), दुष्मंथा चमीरा, मिचेल स्टार्क, कुलदीप यादव और टी नटराजन। इस संयोजन के साथ नजर आ सकती है RR RR को अपने पिछले मैच में PBKS के खिलाफ 6 विकेट से जीत मिली थी। टीम के लिए एक बार फिर वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल धमाकेदार शुरुआत देना चाहेंगे। वहीं, गेंदबाजी में जोफ्रा आर्चर से उम्मीदें होंगी। रियान पराग भी अपना खोया हुआ लय इस मैच में हासिल करना चाहेंगे। संभावित एकादश: वैभव सूर्यवंशी, यशस्वी जायसवाल, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रियान पराग (कप्तान), डोनोवन फरेरा, रविंद्र जडेजा, दासुन शनाका, जोफ्रा आर्चर, नांद्रे बर्गर, संदीप शर्मा और यश राज पुंजा। ये हो सकते हैं इम्पैक्ट सब्स प्लेयर RR: लुआन-ड्रे प्रीटोरियस, रवि सिंह, रवि बिश्नोई, शुभम दुबे और तुषार देशपांडे। DC: आकिब नबी डार, आशुतोष शर्मा, विपराज निगम, त्रिपुराना विजय और अभिषेक पोरेल। कैसा रहेगा पिच का मिजाज? सवाई मानसिंह स्टेडियम की पिच काली मिट्‌टी से बनी है, जो आमतौर पर बल्लेबाज और गेंदबाजों दोनों को मदद करती है। यहां मैचों में टीमों ने कई बड़े स्कोर बनाए हैं। मैच के शुरुआती ओवरों से तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की उम्मीद है। चूंकि, मैदान की बाउंड्री बड़ी है, इसलिए बल्लेबाजों को रन बनाना चुनौतीपूर्ण होता है। पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम बड़ा स्कोर लगाने के इरादे से उतरेगी। कैसा रहेगा जयपुर का मौसम? एक्यूवेदर के मुताबिक, 1 मई को जयपुर में अच्छी गर्मी होगी। दिन का अधिकतम तापमान 39 डिग्री तक जा सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 26 डिग्री तक रहने की उम्मीद है। मैच की शुरुआत रात 7:30 बजे होगी। बारिश की कोई उम्मीद नहीं है। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेंगी नजरें RR के लिए वैभव ने पिछले 10 मैचों में 227.36 की स्ट्राइक रेट से 457 रन बनाए हैं। यशस्वी के बल्ले से पिछले 10 मैचों में 342 रन निकले हैं। DC के लिए राहुल ने पिछले 10 मैच में 183.63 की स्ट्राइक रेट से 404 रन बनाए हैं। गेंदबाजों में आर्चर ने पिछले 9 मैच में 8.27 की इकॉनमी से 14 विकेट लिए हैं। DC से कुलदीप ने पिछले 9 मैचों में 9.58 की इकॉनमी से 10 विकेट चटकाए हैं। कब और कहां देखें मुकाबला? RR और DC के बीच यह मुकाबला 1 मई को जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में रात 7:30 बजे से खेला जाएगा। भारत में स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोहॉटस्टार ऐप पर इस मैच का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।  

सड़क चौड़ीकरण के लिए बड़ा अभियान, जामा मस्जिद के आसपास दुकानों पर चला बुलडोजर

चंदौली  चंदौली जिले के प्रमुख शहर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले अवैध अतिक्रमणों को हटाने के लिए पूरे दिन कार्रवाई चलाई गई. इस दौरान बुलडोजर से सड़क किनारे बने अतिक्रमणों पर एक्शन लिया गया, जो दुकानों, मकानों और एक कॉलेज के कुछ हिस्सों के रूप में मौजूद थे. इसके साथ ही शहर के मध्य में सड़क किनारे स्थित जामा मस्जिद के कुछ हिस्सों को भी खाली कराया गया. इस कार्रवाई के दौरान मस्जिद के नीचे वाले हिस्से में बनी दुकानों पर बुलडोजर से एक्शन लिया गया, जबकि मस्जिद के ऊपरी हिस्से में स्थित बाउंड्री वॉल और छोटे गुंबदों को मस्जिद कमेटी के लोगों ने खुद ही तोड़ दिया.प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई में 50 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए गए और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. दरअसल, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर की मुख्य सड़क के चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सड़क के किनारे लोगों ने PWD की जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बना लिए थे. साथ ही शहर की प्रमुख जामा मस्जिद का भी कुछ हिस्सा अवैध रूप से बना लिया गया था, जिससे सड़क चौड़ीकरण के काम में बाधा हो रही थी. इस कार्रवाई के अंतिम चरण में जब प्रशासन की टीम जामा मस्जिद के पास पहुंची तो मस्जिद के सामने बनी दुकानों पर बुलडोजर से अतिक्रमण हटाया गया. वहीं मस्जिद के ऊपरी तल पर स्थित बाउंड्री वॉल और गुंबदों को मस्जिद कमेटी के सदस्यों ने खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया. बता दें कि इस मस्जिद के सड़क की ओर वाले हिस्से में ग्राउंड फ्लोर पर कई दुकानें बनी हुई हैं, जबकि ऊपरी तल पर मस्जिद का हिस्सा है. देखें VIDEO:- प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, आज के एक्शन में 50 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए गए हैं और यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी. SDM डीडीयू नगर चंदौली अनुपम मिश्रा ने ने बताया, ''मुगलसराय रोड पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है. इस दौरान PWD के एक्सईएन, नगर पालिका के एसडीएम, बिजली विभाग के एसडीओ और पर्याप्त पुलिस बल मौजूद रहा. मैं और सीओ साहब यहां शांति व्यवस्था बनाए रख रहे हैं. इस कार्रवाई में 50 से ज्यादा स्ट्रक्चर हटाए गए हैं. कुछ लोग खुद भी अपने अतिक्रमण तोड़ रहे हैं और व्यापारियों का भी सहयोग मिल रहा है. हमने सुभाष पार्क से लेकर लेफ्ट साइड की कार्रवाई की है और रेलवे स्टेशन तक जाएंगे. अभी हम मस्जिद और रेलवे स्टेशन के पास पहुंचे हैं. शुक्रवार और शनिवार को भी यह कार्रवाई जारी रहेगी.''

झारखंड से बाहर निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री की तैयारी में झामुमो

रांची झारखंड की क्षेत्रीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय पहचान बनाने की दिशा में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने निर्णायक कदम बढ़ा दिया है। अप्रैल, 2025 को रांची में आयोजित पार्टी के 13वें महाधिवेशन में पारित अपने राजनीतिक प्रस्ताव से साफ संकेत दिया कि झामुमो की प्राथमिकता अब सिर्फ राज्य नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार है। पार्टी संगठन केंद्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में नई रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। यह प्रस्ताव धरातल पर मजबूती के साथ दिखने भी लगा है। इस कड़ी में दिल्ली में संपर्क कार्यालय, अन्य राज्यों में संगठन को मजबूत करने की दिशा में ठोस पहल तथा बिहार, असम, ओडिशा और बंगाल जैसे राज्यों के लक्षित हिस्सों को मिलाकर बृहद झारखंड की परिकल्पना झामुमो की रणनीति का हिस्सा हैं। बिहार से मिला सबक, गठबंधन राजनीति की चुनौती राष्ट्रीय विस्तार की इस रणनीति की पहली परीक्षा बिहार विधानसभा चुनाव में दिखी। झामुमो ने महागठबंधन के तहत चुनाव लड़ने की तैयारी की थी, लेकिन सीट बंटवारे पर राजद और कांग्रेस के साथ अंतिम समय तक सहमति नहीं बन सकी। झामुमो ने सम्मानजनक सीटों की मांग की थी, पर ससमय निर्णय नहीं हुआ। लिहाजा, बिहार चुनाव से झामुमो को दूर रहना पड़ा। यह झामुमो के लिए बड़ा सबक रहा। असम में आक्रामक रणनीति, ‘तीर-धनुष’ के साथ मैदान में बिहार के अनुभव से सबक लेते हुए झामुमो ने असम में समय रहते चुनाव आयोग से अपना चुनाव चिह्न ‘तीर-धनुष’ हासिल किया और स्थानीय स्तर पर संगठन भी सक्रिय किया। यहां रिजल्ट आने में अभी देरी है लेकिन हेमंत सोरेन ने 16 सीटों पर चुनाव लड़ स्पष्ट संदेश दिया कि पार्टी ने राष्ट्रीय फलक पर विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। प्रचार के दौरान पूरी रणनीति के साथ धुआंधार रैलियां की और टी-ट्राइब को जनजाति का दर्जा दिलाने समेत अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। झामुमो मानता है कि उसकी मौजूदगी से भाजपा के आदिवासी वोट बैंक में सेंधमारी हो सकती है। बंगाल में रणनीतिक समर्थन, टीएमसी के साथ तालमेल बंगाल में हेमंत ने राजनीतिक सूझबूझ और परिपक्वता का परिचय देते हुए अपने उम्मीदवार नहीं उतारे, बल्कि ममता बनर्जी का हाथ मजबूत करने का निर्णय लिया। हेमंत ने टीएमसी के पक्ष में प्रचार कर भाजपा विरोधी राजनीति को मजबूत किया। कल्पना सोरेन ने भी आदिवासी बहुल सीटों पर प्रचार किया। यह रणनीति झामुमो के उस व्यापक राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके तहत खुद को राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का धुर विरोधी के रूप में स्थापित करना है। पार्टी भविष्य में छत्तीसगढ़ और अन्य प्रदेशों में करेगी विस्तार झामुमो की राजनीति का मूल आधार झारखंड के आदिवासी, मूलवासी, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, किसान और मजदूर रहे हैं। पार्टी अब इसी सामाजिक गठजोड़ को राष्ट्रीय स्तर पर दोहराना चाहती है। पार्टी संगठन हेमंत की छवि को भी इसी रणनीति के तहत राष्ट्रीय स्तर पर उभार रहा है। आदिवासी समाज से जुड़े चिंतकों का मानना है कि हेमंत आज देश के सबसे बड़े और लोकप्रिय ट्राइबल लीडर के रूप में स्वीकार किए जा रहे हैं और भाजपा के खिलाफ मजबूती से खड़े हैं। झामुमो महासचिव विनोद पांडेय के अनुसार, पार्टी भविष्य में छत्तीसगढ़ समेत अन्य प्रदेशों में विस्तार को लेकर रणनीति बना रही है। भाजपा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई झामुमो ने अपने राजनीतिक प्रस्ताव में भाजपा को मुख्य वैचारिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में चिह्नित किया है। पार्टी का मानना है कि देश में सामाजिक विभाजन और भय का माहौल बनाया जा रहा है, जिसके खिलाफ आदिवासी और वंचित वर्गों को एकजुट करना जरूरी है। झामुमो की जड़ें 1970 के दशक के उस आंदोलन से जुड़ी हैं, जब 1972-73 के आसपास अलग झारखंड और सामाजिक न्याय की विचारधारा के साथ पार्टी का गठन हुआ। समाजवादी सोच को आगे बढ़ाने में एके राय और शिबू सोरेन जैसे नेताओं की अहम भूमिका रही। आगे की राह: क्या है अवसर और कौन सी हैं चुनौतियां झामुमो को राष्ट्रीय पार्टी बनने के लिए न केवल नए राज्यों में संगठन खड़ा करना है, बल्कि गठबंधन राजनीति की जटिलताओं से भी जूझना है। असम में सक्रिय भागीदारी और बंगाल में रणनीतिक समर्थन से पार्टी ने संकेत दिया है कि वह लचीली, लेकिन स्पष्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है। इतना तय है कि झामुमो ने अपनी राजनीतिक दिशा स्पष्ट कर दी है- झारखंड के बाद उनका अगला पड़ाव दिल्ली है।

सरकार का बड़ा फैसला: 7 जिलों में पत्थर खनन को मिली मंजूरी, बढ़ेगा राजस्व

 पटना  बिहार सरकार ने राज्य में पत्थर खनन पट्टों की बंदोबस्ती को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब सर्वेक्षण के बाद चयनित आधा दर्जन से अधिक जिलों में पत्थर खनन होगा। इसके पूर्व क्षेत्रों की बंदोबस्ती ई-नीलामी के माध्यम से की जाएगी। सरकार ने इस काम को प्राथमिकता में करने के लिए मेटल स्क्रैप ट्रेड कारपोरेशन (एमएसटीसी) को ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के रूप में चयनित किया है। यह संस्थान पारदर्शी तरीके से आनलाइन नीलामी प्रक्रिया संचालित करेगा। 7 जिलों का कराया सर्वेक्षण खान एवं भू-तत्व विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्तमान में स्टोन चिप्स के लिए प्रदेश को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना होता है। बिहार में पत्थर खनन पर रोक इसकी वजह थी, परंतु अब सरकार ने करीब सात जिलों का सर्वेक्षण कराया है जहां से पत्थर खनन का प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से कई फायदे होंगे। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि राज्य में चल रही सरकारी परियोजनाओं के लिए पत्थर और स्टोन चिप्स उचित दर पर उपलब्ध हो सकेंगे। इससे निर्माण कार्यों की लागत में कमी आएगी, जिससे सड़कों, पुलों और अन्य विकास योजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा। बिहार के राजस्व में होगी वृद्धि इसके अलावा, पत्थर खनन पट्टों की व्यवस्थित बंदोबस्ती से राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी। अभी तक अवैध खनन या अनियमित प्रक्रियाओं के कारण सरकार को पूरा राजस्व नहीं मिल पाता था, लेकिन ई-नीलामी से यह प्रक्रिया पारदर्शी और नियंत्रित होगी। इस निर्णय से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। खनन कार्यों के संचालन से स्थानीय स्तर पर लोगों को काम मिलेगा, जिससे आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। विभाग का दावा है कि यह कदम राज्य के विकास, राजस्व वृद्धि और आम लोगों को सस्ती निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।