samacharsecretary.com

गूगल सर्च पर फर्जी नंबर से साइबर फ्रॉड, इलाज में देरी से गई जान

जमशेदपुर लौहनगरी में साइबर अपराधियों की संवेदनहीनता का एक खौफनाक चेहरा सामने आया है। ठगों ने न केवल एक परिवार की गाढ़ी कमाई लूटी, बल्कि उनकी मदद की उम्मीद तोड़कर एक मरीज की जान भी जोखिम में डाल दी। मानगो निवासी आरएन चौहान से ठगों ने एयर एंबुलेंस उपलब्ध कराने के नाम पर 8 लाख रुपये की ठगी कर ली। समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण मरीज को हैदराबाद नहीं ले जाया जा सका, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इलाज की जल्दबाजी का उठाया फायदा शिकायतकर्ता आरएन चौहान के अनुसार, उनके रिश्तेदार मोहन सिंह की स्थिति गंभीर थी और वे जमशेदपुर के TMH (टाटा मुख्य अस्पताल) के CCU में भर्ती थे। चिकित्सकों ने उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद रेफर करने की सलाह दी थी। परिजनों ने आनन-फानन में इंटरनेट पर एयर एंबुलेंस सेवा की तलाश शुरू की। सर्च इंजन (Google) पर मिले एक नंबर पर संपर्क करने पर अपराधियों ने खुद को एक प्रतिष्ठित एयर एंबुलेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताया। सौदा 8 लाख रुपये में तय हुआ, जिसे परिजनों ने तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिया। पैसे मिलते ही शुरू हुई बहानेबाजी रकम ट्रांसफर होने के बाद, कथित कंपनी ने एंबुलेंस भेजने के नाम पर टालमटोल शुरू कर दी। कभी तकनीकी खराबी तो कभी क्लीयरेंस का बहाना बनाया गया। परिजन परेशान होते रहे जब तक परिजनों को ठगी का अहसास हुआ और वे वैकल्पिक व्यवस्था करते, तब तक काफी देर हो चुकी थी। पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों के अभाव और समय पर शिफ्टिंग न होने के कारण मरीज मोहन सिंह ने दम तोड़ दिया। ऐसे करते हैं बदमाशी 1. खोज नहीं सावधानी जरूरी: साइबर अपराधी अक्सर गूगल एड्स का सहारा लेकर फर्जी वेबसाइट्स और नंबरों को टॉप सर्च में लाते हैं। लोग मुसीबत के वक्त पहले या दूसरे नंबर पर भरोसा कर लेते हैं। इसे Search Engine Result Page (SERP) Poisoning कहा जाता है। 2. एयर एंबुलेंस का औसत खर्च: आमतौर पर भारत में एयर एंबुलेंस का खर्च दूरी और सुविधाओं के आधार पर 5 लाख से 15 लाख रुपये तक होता है। अपराधी इसी रेंज का फायदा उठाकर लोगों को असली होने का भरोसा दिलाते हैं। 3. आधिकारिक स्रोत: किसी भी आपातकालीन हवाई सेवा के लिए केवल DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) द्वारा प्रमाणित ऑपरेटरों या बड़े निजी अस्पतालों के आधिकारिक पैनल पर ही भरोसा करना चाहिए। बचाव के लिए क्या करें?     सत्यापन: केवल वेबसाइट पर दिए नंबर पर भरोसा न करें। कंपनी का भौतिक पता और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांगें।     अस्पताल की मदद लें: TMH जैसे बड़े अस्पतालों का अपना पैनल होता है या वे विश्वसनीय सेवाएं सुझाते हैं। बाहरी अज्ञात स्रोत के बजाय अस्पताल प्रशासन से संपर्क करें     पेमेंट गेटवे: सीधे बैंक ट्रांसफर या UPI के बजाय आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भुगतान की कोशिश करें, हालांकि आपात स्थिति में यह कठिन होता है।     शिकायत: ऐसी किसी भी ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।  

Census 2027: रांची नगर निगम की पहल, 16 भाषाओं में ऑनलाइन जनगणना सुविधा

रांची  जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना (स्वयं विवरण भरने) विषय पर बुधवार को रांची नगर निगम में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता रौशनी खलखो ने की, जबकि उप महापौर नीरज कुमार, नगर आयुक्त सुशांत गौरव एवं अपर नगर आयुक्त संजय कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर बताया गया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और जनभागीदारी आधारित होगी। नागरिक अब अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। स्व-गणना (स्वयं विवरण भरना) के तहत लोगों को स्व-गणना जनगणना की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें निवासी अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं आनलाइन भरकर जमा करते हैं। वही नागरिक 1 मई से 15 मई तक अपने मोबाइल के https://se.census.gov.in/⁠ के माध्यम से स्व-गणना कर सकेंगे। 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण इसके बाद यह सुविधा बंद कर दी जाएगी। इस चरण में सबसे पहले मकान सूचीकरण (घर-घर का विवरण) किया जाएगा, जिसके बाद जनसंख्या गणना शुरू होगी। इसके अतिरिक्त 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। नागरिक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। महापौर रौशनी खलखो ने नागरिकों से निर्धारित अवधि में स्व-गणना पूरा करने की अपील करते हुए कहा कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाए, ताकि भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। लोगों को डेटा रहेगा सुरक्षित को लेकर नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने बताया कि यह डिजिटल जनगणना रांची नगर निगम के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मकान गणना के दौरान कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे और नागरिकों को 16 भाषाओं में फार्म भरने की सुविधा मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में ओटीपी (एक बार उपयोग होने वाला पासवर्ड) या संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगी जाएगी तथा सभी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगी। टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक सभी प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं स्थिर रहेंगी। इस दौरान कोई नया वार्ड या नगर निकाय नहीं बनाया जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। कोई भी अधिकारी आपसे ओटीपी या दस्तावेज की मांग नहीं करेगा। केवल फार्म में पूछी गई जानकारी ही भरनी होगी। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, रांची विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि, जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक सत्येंद्र कुमार गुप्ता, नगर निगम के अधिकारी एवं मीडिया प्रतिनिधि मौजूद थे।

CJI सूर्यकांत का गहरा दर्द, 15 साल की बच्ची के संघर्ष पर भावुक होकर कहा- ‘नागरिकों का सम्मान करिए’

15 साल की बच्ची ने झेला असहनीय दर्द, CJI सूर्यकांत हुए भावुक, बोले- 'मैडम, नागरिकों का सम्मान करिए' CJI सूर्यकांत का गहरा दर्द, 15 साल की बच्ची के संघर्ष पर भावुक होकर कहा- 'नागरिकों का सम्मान करिए' 15 साल की बच्ची ने कितना दर्द झेला', CJI सूर्यकांत ने किया भावुक बयान, 'मैडम, नागरिकों का सम्मान जरूरी है' नईदिल्ली   नाबालिग के गर्भपात मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है. नाबालिग के गर्भपात मामले में में एम्स दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था और अपील पर विचार करने की गुहार लगाई थी. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी गुरुवार को कहा कि 15 साल की रेप पीड़िता की प्रेग्नेंसी खत्म करने का फैसला पीड़िता और उसके माता-पिता का होना चाहिए, जिसमें मेडिकल एक्सपर्ट उन्हें सही फैसला लेने में मदद करें. सीजेआई सूर्यकांत ने बच्ची की पीड़ा को समझते हुए साफ-साफ कहा कि अनचाही प्रेग्नेंसी नहीं थोपी जा सकती है. उन्होंने सरकारी वकील से कहा कि जरा सोचिए इस बच्ची ने कितनी पीड़ा झेली होगी।  मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एम्स (AIIMS) जैसी संस्थाएं परिवार को गाइड कर सकती हैं, ताकि वे सोच-समझकर फैसला ले सकें. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी पीड़िता पर अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती और इसमें होने वाले इमोशनल और फिजिकल ट्रॉमा को भी हाईलाइट किया. दरअसल, सरकार ने एक 15 साल की बच्ची की 31 हफ्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने के पहले के आदेश के खिलाफ एक क्यूरेटिव याचिका दायर की थी. उस बच्ची के साथ रेप हुआ था. महिलाओं के अपने शरीर पर अधिकार की लड़ाई में एक अहम मोड़ साबित हो सकने वाले इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मांग की कि वह व्यक्तिगत पसंद का सम्मान करे।  ‘अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती’ सीजेआई यानी चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि किसी नाबालिग को रेप से हुई प्रेग्नेंसी जारी रखने के लिए मजबूर करना उसके पहले से सहे जा रहे दुख को और बढ़ा देगा और उसके मन पर ज़िंदगी भर के लिए गहरे ज़ख्म छोड़ सकता है. सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने कहा, ‘यह 15 साल की बच्ची की अनचाही प्रेग्नेंसी है… किसी भी इंसान पर अनचाही प्रेग्नेंसी थोपी नहीं जा सकती. जरा सोचिए, वह अभी बच्ची है. उसे अभी पढ़ाई करनी चाहिए. लेकिन हम उसे मां बनाना चाहते हैं. जरा सोचिए, इस पूरी घटना में उस बच्ची ने कितना दर्द झेला होगा और कितनी बेइज्जती सही होगी।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्रेग्नेंसी खत्म करने से मां को कोई परमानेंट डिसेबिलिटी नहीं होती है, तो इस पर विचार किया जा सकता है. सीजेआई की बेंच ने फिर दोहराया कि आखिरी फैसला पीड़िता और उसके माता-पिता का ही होना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने AIIMS को निर्देश दिया कि वह परिवार की काउंसलिंग करे, ताकि वे सोच-समझकर कोई फैसला ले सकें।  कोर्ट ने कानूनी सुधार की जरूरत बताई सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि क्या मौजूदा कानूनों में बदलाव किया जाना चाहिए ताकि रेप पीड़िता के मामलों में प्रेग्नेंसी खत्म करने की मौजूदा 20 हफ्ते की समय सीमा को बढ़ाया जा सके।  ‘कानून को समय के साथ बदलना चाहिए’ अधिक लचीले कानूनी ढांचे की जरूरत पर जोर देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कोई सख्त समय सीमा नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा, ‘जब रेप की वजह से प्रेग्नेंसी होती है, तो कोई समय सीमा नहीं होनी चाहिए. कानून को लचीला होना चाहिए और बदलते समय के साथ तालमेल बिठाना चाहिए।  AIIMS ने मेडिकल चिंताएं जताईं AIIMS की तरफ से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि इस स्टेज पर प्रेग्नेंसी खत्म करना शायद मेडिकल तौर पर मुमकिन न हो. उन्होंने बताया कि प्रेग्नेंसी 30 हफ़्ते तक पहुंच चुकी है और भ्रूण पूरी तरह से विकसित हो चुका है. उन्होंने यह भी कहा कि नाबालिग मां को गंभीर शारीरिक विकृतियों और लंबे समय तक चलने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है. उन्होंने गोद लेने (Adoption) के विकल्प का भी सुझाव दिया।  सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि अंतिम फैसला पीड़ित और उसके माता-पिता का ही होगा, जिसमें मेडिकल विशेषज्ञ उनकी मदद करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल के अपने एक पिछले आदेश का भी जिक्र किया, जब जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने 30 हफ़्ते की प्रेग्नेंसी को खत्म करने की इजाज़त दी थी।  चलिए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में इस पर क्या हुआ, किसने क्या कहा?     सीजेआई यानी चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आज यानी गुरुवार सुबह एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को फटकार लगाते हुए कहा, ‘रेप के बाद उस बच्ची (पीड़िता) ने जो तकलीफ झेली है, उसकी भरपाई कोई भी चीज नहीं कर सकती।      उन्होंने सरकार की वकील से कहा, ‘नागरिकों का सम्मान करें, मैडम. आपके पास (कोर्ट के प्रेग्नेंसी खत्म करने के आदेश को) चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है… केवल पीड़िता या उसका परिवार ही इसे चुनौती दे सकता है।      जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, ‘हम व्यक्तिगत पसंद का सम्मान करते हैं, और आपको भी करना चाहिए…’     सुप्रीम कोर्ट ने यह फटकार तब लगाई जब सरकारी वकील भाटी ने दलील दी कि इस स्टेज पर प्रेग्नेंसी खत्म करना मुमकिन नहीं है. उन्होंने कहा कि बच्ची के पास अब केवल एक ही विकल्प बचा है. बच्चे को जन्म देना और उसे गोद देने के लिए सौंप देना।      इससे पहले भाटी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था, बहुत दुख के साथ हमें यह क्यूरेटिव याचिका पेश करनी पड़ रही है. यह AIIMS की रिपोर्ट पर आधारित है. प्रेग्नेंसी खत्म करना मुमकिन नहीं है. पैदा होने वाला बच्चा गंभीर शारीरिक विकृतियों के साथ जीवित होगा… और नाबालिग माँ को ज़िंदगी भर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।   

स्मार्टफोन मार्केट में बड़ा बदलाव, OnePlus और Realme ने मिलकर बनाई नई स्ट्रैटेजी

 पिछले कुछ समय से अफवाह थी कि OnePlus बंद हो सकता है। इसे लेकर अब बड़ा अपडेट आया है। दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक OnePlus और Realme आपस में मर्ज हो गए हैं। बताया जा रहा है कि ऐसा चीन और ग्लोबल दोनों बाजारों के लिए किया गया है। ऐसे में यह एक अलग सब-प्रोडक्ट सेंटर बन गया है, जहां दोनों ब्रैंड्स की रिसर्च, डेवलपमेंट और मार्केटिंग टीमें एक साथ मिलकर काम करेंगी। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या OnePlus पूरी तरह से बंद होने वाला है, जिसका जवाब है नहीं। बताया जा रहा है कि यह विलय बदलते स्मार्टफोन मार्केट का नतीजा है। कुछ समय से स्मार्टफोन मार्केट में कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें और चिप्स की कमी ने कंपनियों के लिए अस्तित्व में बने रहना मुश्किल कर दिया है। इसके अलावा बाजार में कंपटीशन की भी कमी नहीं है। यही वजह है कि बीबीके ग्रुप ने फैसला लिया है कि OnePlus और Realme एक साथ R&D, सप्लाई चेन और प्रोक्योरमेंट का काम देखेंगे। क्या बंद हो जाएगा OnePlus? इस मर्जर की खबरें आने के बाद से लोग सोशल मीडिया पर कयास लगा रहे हैं कि क्या यह OnePlus का अंत है? रिपोर्ट्स की मानें, तो ऐसा नहीं है। बताया जा रहा है कि इस मर्जर के बाद Oneplus प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर और Realme बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन्स पर फोकस करेगा। ऐसा भी बताया जा रहा है कि भारत में वनप्लस अब ऑनलाइन-ओनली सेल्स मॉडल पर जोर दे रहा है, जो कि लागत कम करने का तरीका हो सकता है।(REF.) यूजर्स को इससे फायदा या नुकसान?     इस मर्जर से यूजर्स को कुछ फायदे होंगे, तो कुछ नुकसान भी। दरअसल:     अब दोनों ब्रांड्स की टीमें रिसर्च और टेक्नोलॉजी शेयर करेंगी। इससे संभव है कि पहले के मुकाबले सॉफ्टवेयर अपडेट्स और लेटेस्ट फीचर्स तेजी से यूजर्स को मिल सकें।     दोनों कंपनियों के रिसोर्स और सप्लाई चेन जुड़ने से प्रोडक्शन पर आने वाली लागत गिरेगी। कंपनी चाहे तो यह बचत ग्राहकों तक पहुंचा सकती है। Oneplus-Realme मर्जर से यूजर्स को ये नुकसान     इस मर्जर से बाजार में वैरायटी की कमी हो सकती है। दरअसल पहले ही ये ब्रैंड्स वनप्लस नॉर्ड CE6 लाइट और रियलमी P4X को एक जैसे हार्डवेयर के साथ पेश कर चुके हैं। ऐसे में आगे चलकर ऐसा और भी ज्यादा होने की संभावना है।     इस मर्जर से OnePlus की ब्रैंड वैल्यू पर फर्क पड़ सकता है। असल में OnePlus की एक प्रीमियम और अलग पहचान थी। अब Realme भी OnePlus जैसे फोन लॉन्च कर उसकी पहचान को धुंधला जरूर करेगा।     बताया जा रहा है कि भारत में वनप्लस ऑनलाइन-ओनली सेल्स मॉडल पर जोर देगा। ऐसे में वे यूजर्स जो ऑफलाइन फोन खरीदना पसंद करते हैं, वे OnePlus से दूर होने लगेंगे।  

कच्चे माल के संकट में फंसी कॉटन इंडस्ट्री, पंजाब का टेक्सटाइल सेक्टर अब दूसरे राज्यों पर निर्भर

लुधियाना कच्चे माल की कमी ने पंजाब की कॉटन इंडस्ट्री की रफ्तार थाम दी है। हालत यह है कि स्थानीय स्तर पर जरूरत के अनुसार कपास उपलब्ध नहीं हो रही, जिसके चलते उद्योगों को महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से कच्चा माल मंगवाकर उत्पादन चलाना पड़ रहा है।  इस संकट ने खासकर जिनिंग सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां कभी 422 इकाइयां संचालित होती थीं, अब उनकी संख्या घटकर मात्र 25 रह गई है। उद्यमियों का कहना है कि यदि हालात में जल्द सुधार नहीं हुआ तो उद्योग के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो सकता है। 7 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.2 लाख पर सिमटा रकबा एक समय पंजाब में सात लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की खेती होती थी, जिससे राज्य में जिनिंग और स्पिनिंग उद्योग तेजी से विकसित हुआ। लेकिन बीते वर्षों में कपास का रकबा लगातार घटता गया, 2019 में यह 3.35 लाख हेक्टेयर था और अब यह करीब 1.2 लाख हेक्टेयर तक सिमट चुका है। रकबा घटने के पीछे कीटनाशक हमले, कम पैदावार और किसानों का अन्य फसलों की ओर झुकाव प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। उन्नत बीज की कमी से पिछड़ रहा पंजाब पंजाब कॉटन फैक्ट्रीज एंड जिनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भगवान बांसल के अनुसार, महाराष्ट्र में किसानों को जी-4 जैसी उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध कराया जा रहा है, जो गुलाबी सुंडी और सफेद मक्खी जैसी बीमारियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी है। इससे वहां प्रति एकड़ 12-15 क्विंटल तक उत्पादन मिल रहा है। इसके विपरीत, पंजाब अभी भी पुरानी किस्मों पर निर्भर है, जिससे पैदावार कम है और किसान कपास की खेती से दूरी बना रहे हैं। उत्पादन में भारी अंतर, बाहर से मंगानी पड़ रही कपास आंकड़ों के मुताबिक, इस सीजन में महाराष्ट्र में लगभग 1.15 करोड़ गांठ कपास का उत्पादन हुआ, जबकि पंजाब में यह आंकड़ा केवल 1.5 लाख गांठ तक सीमित है। यही कारण है कि राज्य की स्पिनिंग मिलों और जिनिंग इकाइयों को अन्य राज्यों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। –देशभर में 26 अप्रैल 2026 तक कपास की आवक 308.70 लाख गांठ को पार कर चुकी है और 30 अप्रैल 2026 तक 311 लाख गांठ तक पहुंचने का अनुमान है। पूरे सीजन में कुल उत्पादन 335 लाख गांठ से अधिक रहने की संभावना है, लेकिन इसमें पंजाब की हिस्सेदारी बेहद कम है। कई इकाइयां बंद, कारोबार का पलायन कपास की कमी के चलते राज्य में बड़ी संख्या में जिनिंग मिलें बंद हो चुकी हैं। कई उद्योगपति अपना कारोबार राजस्थान और अन्य राज्यों में स्थानांतरित कर चुके हैं। इससे न केवल उद्योग प्रभावित हुआ है, बल्कि रोजगार पर भी असर पड़ा है। सरकार का फोकस: सब्सिडी और रकबा बढ़ाने का लक्ष्य स्थिति को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने कपास की खेती को बढ़ावा देने हेतु प्रमाणित बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी देने का फैसला किया है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, सरकार ने 2026 के लिए कपास का रकबा 1.25 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के तहत पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित 87 बीटी हाइब्रिड और चार देसी किस्मों को शामिल किया गया है। सब्सिडी सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। धान से कपास की ओर शिफ्ट की अपील सरकार ने किसानों से अधिक पानी खपत करने वाली धान की खेती छोड़कर कपास की ओर रुख करने की अपील की है। इसे ‘सफेद सोना’ बताते हुए वैज्ञानिक खेती और उन्नत बीजों के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि सरकार के प्रयास जारी हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उद्योग को तत्काल राहत मिलती नजर नहीं आ रही। जब तक उत्पादन और रकबा दोनों में ठोस वृद्धि नहीं होती, तब तक पंजाब की कॉटन इंडस्ट्री पर संकट के बादल छाए रहेंगे।  

एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी, आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ

रांची ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। दरअसल, आम दिनचर्या में शामिल होने वाली वस्तुएं सर्फ, साबुन, टूथपेस्ट, बिस्किट आदि की कीमतों में इजाफा कर दिया गया है। इससे हर किसी के जेब पर हर दिन भार पड़ना शुरू हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार, फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों ने वस्तुओं की की मतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। इसमें साबुन-सर्फ, टूथपेस्ट से लेकर बिस्किट, बैटरी आदि की कीमतों में एक से लेकर 26 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी की वजह कंपनियां युद्ध के कारण रॉ मैटेरियल की कीमतों में हुई वृद्धि को बता रही हैं। सबसे अधिक बढ़ोतरी 26 रुपये आधा किलो वाले स्टैंडर्ड हॉर्लिक्स के पाउच में की गई है। इनो, बैटरी और कपड़ा धोने वाले साबुन समेत कई उत्पादों में एक रुपये प्रति पीस की वृद्धि की गई है। इसके अलावा अन्य उत्पादों के दामों में वृद्धि की गई है। डीजल महंगा हुआ दूसरा कारण इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में इजाफा है। डीजल महंगा होने से उत्पादन लागत और परिवहन खर्च बढ़ा है। इसका असर कंपनियों के कुल खर्च पर पड़ा है, जिसे वे कीमत बढ़ाकर संतुलित कर रही हैं। पैकिंग लागत बढ़ी सबसे पहला कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में वृद्धि है। कच्चे तेल के महंगे होने से प्लास्टिक, पैकेजिंग और अन्य पैकिंग मैटेरियल की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर उत्पादों की एमआरपी पर पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि कच्चे माल यानी रॉ मैटेरियल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी है। कई उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले बेसिक इनपुट महंगे हो गए हैं, जिससे सहायक (सब्सिडियरी) इकाइयों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। जेसीपीडीए के मुताबिक कीमतों में वृद्धि के 3 कारण झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (जेसीपीडीए) के अध्यक्ष संजय अखौरी के अनुसार, एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे तीन प्रमुख वजह हैं। क्रूड ऑयल, डीजल और रॉ मैटेरियल के दाम बढ़े हैं। हज के विमान किराये में 10 हजार रुपए की बढ़ोतरी केंद्रीय हज कमेटी ने आजमीन ए हज के विमान किराए में वृद्धि कर दी है। 15 मई तक हर आजमीन ए हज को 10 हजार रुपए अतिरिक्त विमान किराया देना होगा। केंद्रीय हज कमेटी ने इससे संबंधित आदेश जारी किया है। हज कमेटी के खुर्शीद अनवर ने बताया कि विमान किराया में अचानक वृद्धि की गई है, जिसकी वजह से केंद्रीय हज कमेटी ने सभी हज यात्रियों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय तक हर हाल में कमेटी की वेबसाइट या ऐप पर बढ़ी हुई राशि जमा करें, नहीं तो हज यात्रियों को यात्रा में असुविधा हो सकती है। बता दें कि झारखंड के हज यात्रियों की कोलकाता एम्बारकेशन प्वाइंट से 18 अप्रैल से जेद्दा के लिए रवानागी शुरू हुई। 30 अप्रैल को हज यात्रियों का आखिरी काफिला जेद्दा के लिए रवाना होगा।

चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू, छात्रों को मिलेगी फेलोशिप

 रांची  राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन वर्तमान में थर्ड पार्टी के रूप में चयनित निजी एजेंसियों द्वारा ही कराया जाता रहा है। अब राज्य सरकार ने इस कार्य में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को भी लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू करेगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन की सामान्य सभा की हुई बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्रस्तावित चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए बकायदा उन्हें फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। स्नातकोत्तर छात्र न केवल योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने चीफ मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप स्कीम के ही एक कंपोनेंट के रूप में इसे शुरू करने का निर्णय लिया है।   किसी क्षेत्र के विकास व प्रोजेक्ट पर काम करेंगे पीएचडी छात्र इस स्कीम के एक अन्य कंपोनेंट के तहत झारखंड के चिह्नित क्षेत्रों के विकास के लिए शोध कार्य करने तथा किसी खास प्रोजेक्ट आधारित शोध के लिए फेलोशिप प्रदान की जाएगी। यह फेलोशिप कार्यक्रम पीएचडी विद्यार्थियों के लिए होगा। झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन ऐसे क्षेत्रों तथा प्रोजेक्ट की पहचान करेगा, जिनमें शोध किया जाना है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। क्षेत्रों एवं प्रोजेक्ट की पहचान के बाद विज्ञापन प्रकाशित कर इसके लिए अर्हता प्राप्त विद्यार्थियों से आवेदन मंगाए जाएंगे। विशेषज्ञ टीम उन आवेदनों की स्क्रूटनी कर योग्य अभ्यर्थियों की अनुशंसा काउंसिल को करेगी।

वास्तु शास्त्र: छाया वेध और कोण वेध से घर-व्यापार पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

घर या किसी भी व्यवसायिक स्थान, दुकान पर किसी भी वस्तु की छाया आना दोषपूर्ण होता है। घर पर किसी भी टॉवर, वृक्ष या धार्मिक स्थल में बने ऊंचाई की छाया पड़ती है तो ऐसे में घर में रहने वाले या व्यवसायिक स्थल पर काम करने वालों को पर्याप्त धन लाभ होते हुए भी नित नई-नई परेशानियों और तनावों का सामना करना पडता है। वास्तुशास्त्र के नियमों को मानें तो छाया वेध के कारण घर में आकस्मिक घटनाएं घटने की सम्भावनाऐं बढ़ जाती हैं, यही छाया वेध व्यवसाय स्थल पर होने से वहां कार्य करने वालों को भी तनाव में रखता है, जिससे लाभ की अपेक्षा घाटे की सम्भावनाऐं बढ़ जाती हैं। कुल मिलाकर छाया वेध से घर व व्यवसायिक मालिक के लिए रोग, धन-यश नाशक दरिद्रजनक स्थिति होती है, अतः घर या दुकान खरीदते समय इस बात पर अवश्य ध्यान दें कि कहीं आपके घर, दुकान पर किसी की छाया तो नहीं पड़ रही। कोण वेध- कोण वेध भी वास्तु शास्त्र के निमयों के अनुसार अनिष्टकारक होता है, जैसे दुकान या व्यवसाय स्थल के प्रवेश द्वार के ठीक सामने अन्य किसी इमारत का कोना आ जाता है, उसे कोण वेध कहते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए प्रवेश द्वार को परिवर्तित कर देना चाहिए और यदि ऐसा करना संभव न हो तो द्वार को गोलाई युक्त करवा देने से भी कोण वेध कम हो जाता है। द्वार वेध- द्वार संबंधी किसी भी रुकावटे या बाधा, असुविधा या विकृति को द्वार वेध कहा जाता है। यह अक्सर हानि, दुख और अपयश का कारण बनता है। यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि समस्त द्वार खुलते और बंद होते समय भूमि में रगड़, किसी प्रकार की आवाज, उपयोग करते समय भारी होना, कठोर होना या तेज गति से खुलना बंद होना द्वार वेध होता है, इससे प्रगति, सुख, व्यवसाय मार्ग के रास्ते अवरोधित हो जाते हैं, अतः समस्त प्रकार के वेध अवरोध से बचना चाहिए।  

कृतिका कामरा का बड़ा खुलासा: कास्टिंग काउच के मामले में ‘मैं बाल-बाल बचीं’

मुंबई  कृतिका कामरा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत एक टीवी शो से की थी. टीवी पर पॉपुलर होने के बाद, उन्होंने 2018 में फिल्मों में कदम रखा. लेकिन स्ट्रीमिंग शो 'तांडव' उनके करियर का गेम-चेंजर साबित हुआ. हालांकि यह इतना आसान नहीं था. फिल्मी परिवार का सपोर्ट न होना, यह एक ऐसी चीज है, जिससे इंडस्ट्री के बाहर से आए कई लोगों को जूझना पड़ता है. इसपर कृतिका कामरा ने खुलकर बात की है।  कृतिका कामरा ने खुलासा किया कि अपने करियर के शुरुआती सालों में वह 'कास्टिंग काउच' से कैसे बचीं. एक्ट्रेस ने कहा, 'मैंने कास्टिंग काउच जैसी चीजों के बारे में सुना था. मेरे माता-पिता ने भी अखबारों में इसके बारे में पढ़ा था. मेरा भी इससे सामना हुआ था, लेकिन मैं बिना किसी नुकसान के बच निकली. यह बस किस्मत और इत्तेफाक था. ऐसा इसलिए नहीं हुआ कि मैं बहुत ज्यादा स्मार्ट थी. सच कहूं तो मैं स्मार्ट नहीं थी, क्योंकि जब मैंने शुरुआत की थी, तब मैं बहुत छोटी थी।  हालांकि आज उन्होंने खुद को खासकर स्ट्रीमिंग की दुनिया में एक सफल एक्ट्रेस के तौर पर स्थापित कर लिया है, फिर भी कृतिका का कहना है कि उन्हें आज भी 'तरजीही बर्ताव' (preferential treatment) का सामना करना पड़ता है. उनका मानना ​​है कि इसका एक कारण उनका बैकग्राउंड और 'टीवी का टैग' भी हो सकता है. एक्ट्रेस ने कहा, 'मैंने इस तरह की ऊंच-नीच (hierarchy) का अनुभव किया है. मैं खुशी-खुशी टीवी पर काम कर रही थी, और मेरे मन में टीवी और फिल्मों के बीच कोई फर्क नहीं था।  मुझे स्मार्ट नहीं समझते फिल्ममेकर्स- कृतिका कृतिका के अनुसार, यह भेदभाव उन्हें 'सामंतवाद' (feudalism) जैसा लगता है. 'मैं एक छोटे शहर से आई थी, और मेरे लिए जो भी इंसान स्क्रीन पर दिखता था, वह एक एक्टर ही होता था. मुझे इस 'बिन-कही ऊंच-नीच' के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जो एक तरह से सामंतवाद जैसा ही है. मुझे इस बात का भी अंदाजा नहीं था कि स्क्रीन पर दिखने और निभाए गए किरदारों के आधार पर लोगों के बारे में कैसी राय बना ली जाती है।  जब एक्ट्रेस से पूछा गया कि क्या फिल्ममेकर्स पहले और कभी-कभी आज भी उन्हें जज करते हैं? इस पर एक्ट्रेस ने कहा,'मुझे लगता है कि जब लोग मुझसे बात करते हैं, या जब उन्हें पता चलता है कि एक्टिंग के अलावा भी मुझे दूसरी चीजों की जानकारी है, तो उनके चेहरे पर हैरानी का एक हल्का सा भाव जरूर होता है. मैं यह तो नहीं कहूंगी कि यह उनकी तरफ से कोई 'जजमेंटल' रवैया है, लेकिन मुझे लगता है कि एक्टर्स के साथ अक्सर ऐसा होता ही है।  'मुझे लगता है कि वे मुझे ऐसा इंसान समझते हैं जो स्मार्ट नहीं है. किसी ने सीधे शब्दों में ऐसा नहीं कहा, लेकिन मुझे यही समझ आया. असल में, जब उन्हें लगा कि मैं स्मार्ट नहीं हूं, तो यह मेरे लिए एक अजीब सी तारीफ थी. अब जैसे-जैसे वह इन सब चीजों से गुज़र रही हैं, उनके लिए एक बात जिस पर कोई समझौता नहीं हो सकता, वह है 'मजबूत इरादों वाली महिलाओं' का किरदार निभाना।  एक्ट्रेस ने कहा, 'मैं एक फेमिनिस्ट हूं. मैं यह गर्व से कहती हूं. मुझे इस बात की परवाह है कि स्क्रीन पर महिला किरदारों को कैसे दिखाया जाता है. यहां तक कि TV पर भी, मैं किचन ड्रामा या ऐसे शो से दूर रही, जिनमें कुछ दकियानूसी सोच वाली चीजों को बढ़ावा दिया जाता था. मैंने ज्यादातर प्रगतिशील चीजें करने की कोशिश की. यह कुछ ऐसा था, जिसका फैसला मैंने अपनी जिंदगी में बहुत पहले ही कर लिया था. फिल्में और वेब शो करते समय भी मैं इस बात का पूरा ध्यान रखती हूं।  अंत में कृतिका ने कहा, 'अपनी पहली फिल्म 'मित्रों' में भी, मैं कोई बेचारी लड़की नहीं थी. मैं एक मजबूत इरादों वाली हीरोइन थी. लेकिन उसके बाद, मुझे आमतौर पर ऐसी कुछ फिल्में ऑफर हुईं, जिनमें मेरे सिर्फ दो सीन और एक गाना था. मैंने उन फिल्मों के लिए मना कर दिया. मैं किसी बड़ी फिल्म का हिस्सा बनने के लिए कुछ भी करने को तैयार नहीं हूं। 

चाणक्य नीति: मजबूत आर्थिक भविष्य के लिए बचत और समझदारी से खर्च जरूरी

 आज के दौर में सफलता की परिभाषा सिर्फ अच्छे करियर तक सीमित नहीं रह गई है. लोग चाहते हैं कि उनके पास पर्याप्त धन हो, भविष्य सुरक्षित हो और जीवन में स्थिरता बनी रहे. लेकिन अक्सर हम यह भूल जाते हैं कि पैसा कमाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उसे सही तरीके से संभालना और बढ़ाना.  यही कारण है कि सदियों पहले महान अर्थशास्त्री और रणनीतिकार आचार्य चाणक्य ने जीवन और धन प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण नीतियां दी थीं. उनकी बातें आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे केवल सिद्धांत नहीं, बल्कि व्यवहारिक समझ पर आधारित हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत बने, पैसा टिके और समय के साथ बढ़े, तो चाणक्य की ये सीख आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं.  बचत: भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा चाणक्य के अनुसार, कमाई का एक हिस्सा हमेशा बचाकर रखना चाहिए. यह सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कवच है. जीवन में कब कठिन समय आ जाए, इसका अंदाजा नहीं होता, ऐसे में बचत ही आपको संभालती है.  आज के समय में इसे आप इमरजेंसी फंड के रूप में समझ सकते हैं.  चाहे आपकी आय कम हो या ज्यादा, हर महीने थोड़ा-थोड़ा बचाना आपकी वित्तीय स्थिरता की नींव रखता है. फिजूलखर्ची से दूरी ही समझदारी चाणक्य साफ कहते हैं कि बिना सोचे-समझे खर्च करने वाला व्यक्ति कभी धनवान नहीं बन सकता. दिखावे, ट्रेंड या दूसरों को प्रभावित करने के लिए किया गया खर्च लंबे समय में नुकसान ही देता है. आज की लाइफस्टाइल में यह बात और भी ज्यादा लागू होती है, ऑनलाइन शॉपिंग, डिस्काउंट ऑफर्स और सोशल मीडिया के प्रभाव में हम अक्सर जरूरत और चाहत के बीच फर्क भूल जाते हैं.  समझदारी यही है कि खर्च से पहले खुद से पूछें कि क्या यह सच में जरूरी है?  धन का सम्मान करना सीखें पैसा सिर्फ कमाने की चीज नहीं है, बल्कि उसे संभालना एक कला है. चाणक्य के अनुसार, जो व्यक्ति धन का सम्मान करता है, वही उसे लंबे समय तक बनाए रख सकता है.  इसका मतलब है बजट बनाना, खर्चों पर नजर रखना और अनावश्यक चीजों पर नियंत्रण रखना.  छोटी-छोटी लापरवाहियां ही बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं. आय के कई स्रोत बनाएं चाणक्य का मानना था कि एक ही स्रोत पर निर्भर रहना जोखिम भरा है. अगर किसी कारण से वह स्रोत बंद हो जाए, तो पूरी आर्थिक व्यवस्था डगमगा सकती है. आज के समय में यह बात और भी अहम है. आप अपनी स्किल्स को बढ़ाकर फ्रीलांसिंग, पार्ट-टाइम काम या निवेश के जरिए अतिरिक्त आय के रास्ते बना सकते हैं. मल्टीपल इनकम सोर्स आपको न सिर्फ सुरक्षित बनाते हैं, बल्कि तेजी से आगे बढ़ने में भी मदद करते हैं. ज्ञान ही सबसे बड़ा निवेश है चाणक्य के अनुसार, सबसे सुरक्षित निवेश ज्ञान होता है. पैसा कभी भी खत्म हो सकता है, लेकिन ज्ञान आपको फिर से खड़ा होने की ताकत देता है. नई स्किल्स सीखना, खुद को अपडेट रखना और बदलते समय के साथ आगे बढ़ना ये सभी चीजें आपको आर्थिक रूप से मजबूत बनाती हैं.