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सम्राट सरकार से बनी सहमति, अंचल अधिकारियों की हड़ताल खत्म, जमीन के काम होंगे तेज

पटना बिहार में लंबे समय से चल रही अंचलाधिकारियों और राजस्व पदाधिकारियों की हड़ताल खत्म हो गई है। सम्राट सरकार से वार्ता पर सहमति बनने के बाद सीओ, आरओ समेत अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर गए सभी सीओ-आरओ ने काम पर लौटने का फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि सरकार से उनकी मांगों पर वार्ता की सहमति बन गई है। इसके बाद बिहार संयुक्त राजस्व सेवा महासंघ ने गुरुवार को सामूहिक अवकाश खत्म करने का ऐलान कर दिया। हड़ताल खत्म होने के बाद अंचलों में अटके जमीन के काम फिर से सुचारु हो सकेंगे, यह आम जनता के लिए भी राहत भरी खबर है। राज्य भर के अंचलाधिकारी (सीओ) अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बीते 9 मार्च को अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। राजस्व इस बीच राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से कई बार उन्हें का काम पर लौटने की अपील की गई। तत्कालीन विभागीय मंत्री सह डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हड़ताली अफसरों को सैलरी ब्रेक, निलंबन समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी। इसके असर से कुछ अधिकारियों ने हड़ताल खत्म कर दी थी। हालांकि, बड़ी संख्या में सीओ-आरओ अपनी मांगों पर डटे रहे। इससे अंचलों में जमीन से जुड़े काम प्रभावित हो रहे थे। काम पर नहीं लौटने वाले कुछ अधिकारियों पर विभाग ने ऐक्शन लेकर निलंबित भी किया। इससे सरकार और हड़ताली पदाधिकारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा था। साथ ही अंचलों में निबंधन से लेकर जमीन से जुड़े अन्य काम अटक गए थे। राज्य सरकार ने वैकल्पिक उपाय भी अपनाते हुए ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को अंचलों के अतिरिक्त प्रभार दिए थे। इससे अन्य कर्मचारियों का वर्क लोड बढ़ गया था। हड़ताल से प्रभावित हो रहा था जनगणना का काम जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है। अभी स्व-गणना का काम चल रहा है। 2 मई से प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की गणना भी करेंगे। बिहार में जनगणना के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। ऐसे में सीओ, आरओ और राजस्व कर्मियों की हड़ताल से जनगणना का काम भी प्रभावित हो रहा था। 55 दिनों बाद काम पर लौटेंगे सीओ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार ने सुलह का रास्ता निकाल दिया है। बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से हड़ताली अधिकारियों को उनकी मांगों पर विचार करने के लिए आश्वासन दिया है। इसके बाद, बिहार संयुक्त सेवा महासंघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 4 मई से वे अपना योगदान देंगे। 55 दिनों के बाद सीओ काम पर लौट जाएंगे। प्रधान सचिव पद से हटाए गए दो दिन पहले ही सम्राट सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल को हटा दिया था। उनका तबादला बिहार राज्य योजना पर्षद में बतौर परामर्शी (सलाहकार) कर दिया गया था। इसके बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह को प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सीके अनिल के ट्रांसफर के पीछे की मुख्य वजह सीओ-आरओ हड़ताल को ही मानी गई थी। सीके अनिल 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।  

महंगाई का असर: दिल्ली में ई-रिक्शा सफर होगा महंगा, नई दरें जल्द लागू

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली में ई-रिक्शा से सफर करने वाले यात्रियों को जल्द ही ज्यादा किराया चुकाना पड़ेगा। इलेक्ट्रिक व्हीकल्स फेडरेशन ने बढ़ती महंगाई और लंबे समय से किराए में कोई बदलाव न होने का हवाला देते हुए न्यूनतम किराया 20 रुपये करने का फैसला लिया है। नई दरें अगले महीने से लागू होने की संभावना है। फेडरेशन के चेयरमैन अनुज शर्मा ने बताया कि दिल्ली में ई-रिक्शा वर्ष 2010 से चल रहे हैं, लेकिन तब से अब तक इनके किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई। वहीं, इसी अवधि में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के किराए दो बार बढ़ चुके हैं। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, बैटरी, मेंटेनेंस और अन्य खर्चों में इजाफे के कारण किराया बढ़ाना जरूरी हो गया है, ताकि ड्राइवरों की आय प्रभावित न हो। रिक्शा ड्राइवरों और मैन्युफैक्चरर्स की बैठक में फैसला यह फैसला बुधवार को ई-रिक्शा ड्राइवरों, डीलरों और मैन्युफैक्चरर्स की संयुक्त बैठक में लिया गया, जिसमें दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह भी मौजूद थे। बैठक में किराया बढ़ाने के साथ-साथ सेक्टर से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। कुल 2 लाख ई-रिक्शा चल रहे वर्तमान में दिल्ली में 2 लाख से अधिक ई-रिक्शा आधिकारिक रूप से पंजीकृत हैं, जबकि करीब 1.5 लाख बिना रजिस्ट्रेशन के भी सड़कों पर चल रहे हैं। ये ई-रिक्शा खासकर मेट्रो स्टेशनों और रिहायशी इलाकों में लास्ट माइल कनेक्टिविटी का अहम साधन बने हुए हैं। अभी अधिकांश जगहों पर पहले दो किलोमीटर के लिए 10 रुपये और उसके बाद हर किलोमीटर के लिए 5 रुपये किराया लिया जाता है। 2022 का सर्कुलर लिया वापस इस बीच, दिल्ली सरकार ने 2022 के उस सर्कुलर को वापस लेने का भी फैसला किया है, जिसमें कंपनियों को अपने नाम पर कई ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक कार्ट रजिस्टर कराने की अनुमति दी गई थी। परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कुछ कंपनियों के हाथों में मालिकाना हक के केंद्रीकरण को रोकना और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के शोषण को कम करना है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से मालिक-ड्राइवर को अधिक अवसर मिलेंगे, आत्मनिर्भर रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ई-रिक्शा सेक्टर में एकाधिकार की संभावना भी कम होगी। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और लास्ट माइल कनेक्टिविटी का ढांचा भी मजबूत होगा।

अनुपमा में बड़ा ड्रामा: श्रुति और अनुपमा के बीच तीखी बहस, राही का डर बढ़ा

सीरियल अनुपमा की शुरुआत अनु की चिंता से होती है, जहां वह सोचती है कि जैसे ही राही को कैफे के बारे में पता चलेगा, बड़ा तूफान खड़ा हो सकता है. उसे लगता है कि उसने सही किया है, लेकिन राही उसकी भावनाओं को समझ नहीं पा रही. दूसरी तरफ राही से प्रेम अपने व्यवहार के लिए माफी मांगता है और कहता है कि उसे दुख देने का कोई हक नहीं है. वह राही को एक घड़ी गिफ्ट करता है और वादा करता है कि वह हमेशा उसके साथ रहेगा. राही के मन में डर है कि जब प्रेम को अनुपमा के कैफे के बारे में पता चलेगा, तो उसका रिएक्शन क्या होगा. मंदिर में अनुपमा और श्रुति का आमना-सामना कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है जब अनुपमा मंदिर जाती है और वहां उसकी मुलाकात श्रुति से होते-होते रह जाती है. श्रुति अपनी बेटी के लिए प्रार्थना कर रही होती है, जिससे मंदिर में भीड़ रुक जाती है. अनुपमा लोगों से अपील करती है कि एक मां की भावना को समझें. इस बीच अनुपमा को एक लॉकेट मिलता है, जिसे वह लौटाने की कोशिश करती है. लेकिन जब वह उसमें अनुज और राही की तस्वीर देखती है, तो चौंक जाती है. तभी श्रुति वहां आ जाती है और दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो जाती है. श्रुति ने अनु को दी चुनौती श्रुति दावा करती है कि वह राही की जिंदगी में उसकी जगह लेगी, क्योंकि राही खुद को अकेला महसूस करती है. अनुपमा इस बात का विरोध करती है और कहती है कि मां-बेटी के रिश्ते को किसी को साबित करने की जरूरत नहीं. दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ जाती है कि श्रुति खुलकर चुनौती देती है कि वह राही को अनुपमा से छीन लेगी. उधर राही एक डरावना सपना देखती है, जिसमें प्रेम अनुपमा के कैफे को लेकर गुस्से में होता है. सपना टूटने के बाद भी वह डरी रहती है और सोचती है कि वह अपने रिश्ते को कैसे बचाए.

भारतीय वनडे टीम में बड़ा बदलाव संभव, पंत की जगह सैमसन पर नजर

नई दिल्ली भारतीय टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत के लिए मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स की कप्तानी कर रहे ऋषभ पंत भारतीय वनडे टीम से बाहर हो सकते हैं। आगामी वनडे विश्व कप को देखते हुए चनयकर्ता टीम में संजू सैमसन को मौका दे सकते हैं। वनडे में इस समय केएल राहुल विकेटकीपर के रूप में पहली पसंद बने हुए हैं। ऋषभ पंत इस साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज का हिस्सा थे लेकिन फिर चोट के कारण बाहर हो गए थे। वहीं दूसरी तरफ संजू सैमसन ने टी20 विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में बेहतरीन प्रदर्शन करके चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। टी20 विश्व कप में प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट रहे संजू सैमसन ने आईपीएल 2026 में भी अपना फॉर्म बरकरार रखा है और 300 से ज्यादा रन बना चुके हैं। संजू सैमसन ने जारी सीजन में दो शतक भी लगाए हैं। वहीं दूसरी तरफ लखऊ के कप्तान ऋषभ पंत लगातार दूसरे सीजन रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बतौर कप्तान भी उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है और इस वजह से 50 ओवर के फॉर्मेट में चयनकर्ता संजू सैमसन पर भरोसा कर सकते हैं। संजू सैमसन इस सीजन चेन्नई सुपर किंग्स में शामिल हुए हैं, जहां वह एमएस धोनी के स्थान पर कुछ मैचों में विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मीडिया  रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिकेट बोर्ड भारतीय वनडे टीम में ऋषभ पंत की जगह दूसरे विकेटकीपर बल्लेबाज के रूप में संजू सैमसन के नाम पर विचार कर रही है। केएल राहुल टीम के नियमित विकेटकीपर बल्लेबाज बने हुए हैं। ध्रुव जुरेल भी दावेदार हैं। भारत का अगला वनडे सीरीज अफगानिस्तान से है, जोकि 14 जून से शुरू होने वाला है। ऋषभ पंत टी20 इंटरनेशनल में अपनी जगह खो चुके हैं उन्होंने इस फॉर्मेट में अपना पिछला मैच जुलाई 2024 में श्रीलंका के खिलाफ खेला था।

न्यायिक सेवाओं में बड़ा बदलाव, ई-कोर्ट सर्विस ऐप का नया वर्जन 5 मई से होगा लॉन्च

 रांची  न्यायिक सेवाओं को और अधिक सुलभ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ई-कोर्ट सर्विस मोबाइल प का नया संस्करण 4.0 आगामी पांच मई से लांच किया जाएगा। इस संबंध में झारखंड हाई कोर्ट के केंद्रीय परियोजना समन्वयक द्वारा राज्य के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। पत्र में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी के निर्देशानुसार एप का यह नया संस्करण कई तकनीकी और उपयोगकर्ता सुविधाओं के साथ अपग्रेड किया गया है। इसमें एंड्रायड 14 सपोर्ट, बेहतर परफार्मेंस, आसान नेविगेशन और नया यूजर फ्रेंडली इंटरफेस शामिल है, जिससे एक हाथ से भी आसानी से उपयोग संभव होगा। नए वर्जन में केस स्टेटस सेक्शन के माध्यम से सीधे आदेश और निर्णय की पीडीएफ डाउनलोड की सुविधा दी गई है। इसके अलावा माई केसेस सेक्शन में बेहतर रिस्पांस, केस कंवर्जन ट्रैकिंग फीचर, ईपे, एनजेडीजी और ईफाइलिंग जैसी सेवाओं को एकीकृत क्विक लिंक में जोड़ा गया है। कोर्ट परिसरों का लोकेशन जानने के लिए भूवन मैप्स का भी इंटीग्रेशन किया गया है। हाई कोर्ट ने सभी न्यायिक पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस संबंध में आम लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए नोटिस को वेबसाइट, ई-सेवा केंद्रों और कोर्ट परिसरों में प्रदर्शित किया जाए। साथ ही, उपयोगकर्ताओं को अपने पुराने डेटा का बैकअप लेने की सलाह दी गई है। ई-कोर्ट मोबाइल एप संस्करण 4.0 की मुख्य विशेषताएं     उन्नत तकनीक: यह ऐप अब पुराने कोर्डोवा हाइब्रिड फ्रेमवर्क से रिएक्ट नेटिव (React Native v0.77.0) पर शिफ्ट हो गया है, जिससे इसकी गति और कार्यक्षमता (Performance) काफी बेहतर हो गई है।     Android 14 सपोर्ट: यह नया संस्करण Android 14 (API स्तर 34) का समर्थन करता है।     बेहतर डेटा हैंडलिंग: उच्च डेटा वॉल्यूम को संभालने में यह पहले से अधिक सक्षम है।     उपयोगकर्ता मैनुअल और प्रशिक्षण: संस्करण 4.0 के लिए उपयोगकर्ता मैनुअल और प्रशिक्षण वीडियो जारी कर दिए गए हैं।  

बुद्ध पूर्णिमा 2026: अंगुलिमाल डाकू की कहानी से मिलता है जीवन बदलने का संदेश

इस बार बुद्ध पूर्णिमा 1 मई, शुक्रवार को मनाई जाएगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को आती है. भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़ी कई कहानियां आज भी लोगों को सही राह दिखाती हैं. ऐसी ही एक प्रसिद्ध कथा अंगुलिमाल नाम के डाकू से जुड़ी है, जो जीवन बदलने की सीख देती है. कौन था अंगुलिमाल डाकू? कहा जाता है कि मगध राज्य में अंगुलिमाल नाम का एक खतरनाक डाकू रहता था. लोग उससे बहुत ज्यादा डरते थे क्योंकि वह राह चलते लोगों को मार देता था और उनकी उंगलियों की माला पहनता था. इसी वजह से उसका नाम अंगुलिमाल पड़ गया था. गांव के लोग उसके खौफ से डर और परेशानी के माहौल में जी रहे थे. एक दिन गौतम बुद्ध उसी क्षेत्र में पहुंचे. लोगों ने उनका स्वागत बड़े ही सत्कार के साथ तो किया, लेकिन उनके चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था. जब गौतम बुद्ध ने वजह पूछी, तो सभी ने अंगुलिमाल के आतंक की कहानी सुना दी. यह सुनकर गौतम बुद्ध बिना डरे अगले दिन जंगल की ओर चल पड़े. गांव वालों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी की बात नहीं मानी. जब अंगुलिमाल डाकू की हुई गौतम बुद्ध के मुलाकात जंगल में अंगुलिमाल ने गौतम बुद्ध को देखा और उन्हें रोकने के लिए दौड़ा, लेकिन वह जितना तेज भागता, बुद्ध उतनी ही शांति से आगे बढ़ते रहते और उसके हाथ नहीं आए. आखिर थककर उसने जोर से कहा, 'रुक जाओ!' तब गौतम बुद्ध रुके और शांत स्वर में बोले, 'मैं तो रुक गया हूं, लेकिन तुम कब रुकोगे?' यह बात सुनकर अंगुलिमाल डाकू चौंक गया. उसने गौतम बुद्ध को डराने की कोशिश की और खुद को सबसे शक्तिशाली बताया. तब बुद्ध ने उसे एक छोटा सा काम करने को कहा-पेड़ से कुछ पत्ते तोड़कर लाने को. अंगुलिमाल डाकू ने बुद्ध को तुरंत पत्ते तोड़कर ला दिए. फिर बुद्ध ने कहा, 'अब इन्हें वापस उसी तरह जोड़ दो.' अंगुलिमाल डाकू हैरान रह गया और बोला कि यह तो संभव नहीं है. गौतम बुद्ध ने डाकू को दी यह सीख तब गौतम बुद्ध ने समझाया, 'जब तुम किसी चीज को जोड़ नहीं सकते, तो उसे तोड़ने का अधिकार भी तुम्हें नहीं है. किसी का जीवन लेना आसान है, लेकिन जीवन देना सबसे बड़ी शक्ति है.' यह बात अंगुलिमाल डाकू के दिल को छू गई. उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने उसी समय हिंसा का रास्ता छोड़ दिया. वह गौतम बुद्ध का शिष्य बन गया और आगे चलकर लोगों की सेवा करने लगा. कहा जाता है कि बाद में वही अंगुलिमाल एक शांत और ज्ञानी संन्यासी बन गया. इस कहानी से यह सीख मिलती है कि इंसान चाहे कितना भी भटक जाए, अगर वह सही रास्ता चुन ले, तो उसका जीवन बदल सकता है.

राजस्थान शिक्षा व्यवस्था पर सवाल, नागौर स्कूल में बच्चे कर रहे थे सफाई का काम

 नागौर  राजस्थान के नागौर जिले के एक सरकारी स्कूल से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां छोटे बच्चों से मिड-डे मील के बर्तन उठवाने और धुलवाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने संज्ञान लिया है और संबंधित स्कूल के खिलाफ आधिकारिक जांच शुरू कर दी है। यह घटना रियांबी उपखंड के दासावास गांव में स्थित सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई। मिड-डे मील के ब्रेक के दौरान आराम करने या खाना खाने के बजाय, कई बच्चों को भारी स्टील के बर्तन उठाते और एक जगह से दूसरी जगह ले जाते देखा गया। इस फुटेज ने स्कूल में निगरानी और छात्रों के कल्याण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कमरे में सोते दिखें शिक्षक चिंता की बात यह भी है कि उसी समय चार शिक्षक एक कमरे में सोते हुए पाए गए। स्कूल में कुल आठ शिक्षक हैं, जिनमें से घटना वाले दिन सात शिक्षक मौजूद थे। इसके बावजूद, बर्तनों को संभालने की जिम्मेदारी छात्रों पर ही आती दिखी। प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और वीडियो से यह भी पता चलता है कि प्रधानाध्यापक सोहनलाल फडोदा वहां मौजूद थे और अपनी कुर्सी पर बैठे थे, जबकि बच्चे काम कर रहे थे। उन्होंने न तो कोई दखल दिया और न ही कर्मचारियों को बच्चों को रोकने का कोई निर्देश दिया। कुछ बच्चों ने दावा किया कि यह कोई एक बार हुई घटना नहीं है, बल्कि यह उनके रोजाना के काम का ही एक हिस्सा है। मामले की जांच शुरू वीडियो वायरल होने के बाद, स्थानीय अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है। घटना की जांच करने और दोषियों की पहचान करने के लिए एक जांच समिति का गठन किया गया है। SDM सूर्यकांत शर्मा ने कहा कि हमें एक शिकायत मिली है और पूरे मामले की जांच की जाएगी। मुख्य विकास अधिकारी रामलाल कराड़ी ने बताया कि यह मामला मीडिया रिपोर्टों के जरिए सामने आया है और उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

पूछताछ के दौरान हड़कंप: बाड़मेर में आरोपी ने खुद को किया घायल, पुलिस ने कराया इलाज

बाड़मेर बाड़मेर महिला अपराध एएसपी कार्यालय में पॉक्सो एक्ट के आरोपी ने गला काटकर आत्महत्या करने का प्रयास किया. पुलिस उसको आनन-फानन में बाड़मेर मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल लेकर पहुंची, जहां पर उसका इलाज कराया. आरोपी खून से लथपथ हो गया था. आरोपी ने भी कुछ नहीं बताया. पुलिस ने आरोपी का इलाज कराया, इसके बाद जेल भेज दिया. पॉक्सो का आरोपी गिरफ्तार जानकारी के अनुसार, बाड़मेर की महिला थाने में दर्ज पॉक्सो के मामले में नरेश को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, और महिला अपराध अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रभुराम इस पूरे मामले की जांच कर रहे हैं. आज एएसपी कार्यालय में जांच में पूछताछ के दौरान युवक ने अपना गला काट लिया. उसके बाद पुलिस के हाथ पांव फूल गए, और तुरंत उसको घायल अवस्था में बाड़मेर मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल ले गए. चिकित्सकों ने उसका इलाज किया, उसके बाद पुलिस ने उसे अस्पतावापस ASP कार्यालय लेकर आ गई है. कुछ बोलने से पुलिस का इनकार इस पूरे मामले को लेकर अस्पताल पहुंचे महिला अपराध अनुसंधान सेल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रभु राम ने किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इनकार कर दिया. आरोपी युवक भी मीड‍िया के सामने कुछ नहीं बोला.   बाड़मेर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निर्देश आर्य का कहना है कि महिला थाने में दर्ज पॉक्सो के मामले में नरेश कुमार पुत्र दालाराम निवास गांधीनगर को गिरफ्तार किया था, जिसको आज फिंगरप्रिंट लेने के दौरान टेबल पर रखे पेपर कटर से खुद की गर्दन पार वार कर दिया था. उसके बाद जाब्ते ने उसे अस्पताल ले जाकर ईलाज करवाया, अब उसको जेल भेज दिया है. लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ जांच करवाई जा रही है.

कानून-व्यवस्था मजबूत करने को लातेहार पुलिस में व्यापक ट्रांसफर

लातेहार पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने जिले में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 29 पुलिस पदाधिकारियों का तबादला किया है। जारी आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है। जारी सूची के अनुसार हरिशंकर सिंह को छिपादोहर थाना से पुलिस केंद्र लातेहार, नागेंद्र भगत को लातेहार थाना से महुआडांड़ थाना, राम प्रसाद राम को चंदवा थाना से बारेसाढ़ थाना, शशिरंजन सिंह को चंदवा से महुआडांड़ थाना, सत्येन्द्र प्रसाद को चंदवा से गारू थाना भेजा गया है। इसी तरह संजय चौधरी को बालूमाथ से बरवाडीह, चन्द्रशेखर दुबे को बालूमाथ से महुआडांड़ थाना, द्वारिकानाथ पांडेय को बारियातू थाना से पीसीआर वैन, मिथिलेश कुमार सिंह को बारियातू से मनिका, अरुण कुमार सिंह को हेरहंज से जिला नियंत्रण कक्ष तथा नरेश राम को बरवाडीह से जिला नियंत्रण कक्ष में पदस्थापित किया गया है। पंचरत्न राय यादव को बरवाडीह से बारेसाढ़ थाना, मोहम्मद अनवर को बरवाडीह से बालूमाथ, निरंजन तिवारी को छिपादोहर से पुलिस केंद्र लातेहार, सचिंदानंद सिंह को छिपादोहर से जिला नियंत्रण कक्ष तथा एमानुल टुडू को गारू से चंदवा थाना भेजा गया है। अमर कुमार को भेजा गया बारेसाढ़ से चंदवा धर्मेन्द्र कुमार को बारेसाढ़ से बरवाडीह, अमर कुमार को बारेसाढ़ से चंदवा, खुशादिल अंसारी को बारेसाढ़ से बारियातू, मधुसूदन प्रसाद प्रसाद को महुआडांड़ से लातेहार थाना, उमेश प्रसाद मेहता को महुआडांड़ से चंदवा तथा ददन प्रधान को महुआडांड़ से बालूमाथ थाना में तैनात किया गया है। भोला नाथ भंडारी को महिला थाना महुआडांड़ से पुलिस केंद्र लातेहार, दिनेश कुमार को पीसीआर वन से बारियातू, सहदेव प्रसाद वर्मा को जिला नियंत्रण कक्ष से बरवाडीह थाना, बचु राम को जिला नियंत्रण कक्ष से बारियातू थाना, मोहम्मद मुमताज अहमद को जिला नियंत्रण कक्ष से हेरहंज, रामविनय कुमार को बालूमाथ से लातेहार थाना तथा रामजी ठाकुर को पुलिस केंद्र लातेहार से छिपादोहर थाना भेजा गया है।

क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘The Odyssey’ होगी Oppenheimer से छोटी, निर्देशक ने किया खुलासा

  ऑस्कर विजेता फिल्म 'ओपेनहाइमर' के निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन इन दिनों फिल्म 'द ओडिसी' की तैयारियों में व्यस्त हैं। दर्शकों को इस फिल्म का बेसब्री से इंतजार है और हर अपडेट पर नजरें टिकाए हुए हैं। लोग यह जानना चाह रहे हैं कि इस फिल्म की अवधि कितनी होगी? खुद क्रिस्टोफर नोलन ने इसका जवाब दे दिया है। 'ओपेनहाइमर' से छोटी होगी फिल्म फिल्म 'द ओडिसी' का रनटाइम 'ओपेनहाइमर' से कम होगा। वैरायटी की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्ममेकर क्रिस्टोफर नोलन ने इस बात की पुष्टि की है कि उनकी आने वाली फिल्म 'द ओडिसी' का रनटाइम उनकी ऑस्कर-विजेता फिल्म 'ओपेनहाइमर' से कम होगा। एक इंटरव्यू में नोलन ने कहा, 'यह एक एपिक फिल्म है, जैसा कि इसका विषय मांगता है। लेकिन यह छोटी है'। कितना था 'ओपेनहाइमर' का रनटाइम? 'ओपेनहाइमर', जो जे. रॉबर्ट ओपेनहाइमर और दूसरे विश्व युद्ध के दौरान परमाणु बम बनाने की कहानी पर आधारित एक बायोग्राफिकल ड्रामा है। यह फिल्म 180 मिनट लंबी थी। इतनी लंबी होने और 'R' रेटिंग मिलने के बावजूद, इसने दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर लगभग 975 मिलियन डॉलर की कमाई की। नोलन के इस नए प्रोजेक्ट को यूनिवर्सल पिक्चर्स का समर्थन मिला है और यह होमर के ग्रीक महाकाव्य पर आधारित उनकी अपनी प्रस्तुति है। यह फिल्म व्यापक स्तर पर बनाई जा रही है।