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PCB चीफ Mohsin Naqvi के बयान से बवाल: भारत में पेट्रोल संकट का दावा, सोशल मीडिया पर घिरे

नई दिल्ली पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी का एक बयान क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया है. पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल 2026) में खाली स्टेडियम को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने भारत में पेट्रोल संकट होने का दावा कर दिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया है. दरअसल, पीएसएल 2026 के मुकाबले बिना दर्शकों के कराए जा रहे हैं. जब इस पर सवाल उठे, तो नकवी ने कहा कि पाकिस्तान में कोई ईंधन संकट नहीं है, बल्कि भारत में पेट्रोल की कमी है और वहां पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं. हालांकि, उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. कई यूजर्स ने इसे बेबुनियाद बताया और कहा कि भारत में ऐसी कोई स्थिति नहीं है. अप्रैल 2026 तक भारत में पेट्रोल की सप्लाई सामान्य रही है और कहीं भी लंबी कतारों की खबर नहीं आई है. अपने ही बयान से पलटे नकवी नकवी का ये झूठ ऐसे समय में आया है जब कुछ हफ्ते पहले खुद उन्होंने पीएसएल में दर्शकों की एंट्री पर रोक के पीछे पाकिस्तान में ईंधन संकट को वजह बताया था. उन्होंने कहा था कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण देश में फ्यूल की कमी हो गई है, इसलिए लोगों की आवाजाही सीमित करने के लिए यह फैसला लिया गया. 22 मार्च को उन्होंने इस फैसले के लिए फैंस से माफी भी मांगी थी और कहा था कि सरकार ने लोगों से कम यात्रा करने की अपील की है. ऐसे में स्टेडियम में हजारों लोगों को इकट्ठा होने देना सही नहीं होगा. लेकिन अब उनके ताजा बयान ने पूरी कहानी बदल दी है. एक तरफ पीएसएल के मैच अब भी खाली स्टेडियम में हो रहे हैं, दूसरी तरफ पीसीबी चीफ भारत में संकट होने की बात कर रहे हैं. इस विरोधाभास को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हो रही है. यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि अगर पाकिस्तान में कोई संकट नहीं है, तो फिर मैच खाली स्टेडियम में क्यों खेले जा रहे हैं. पीएसएल 2026 फिलहाल अपने अंतिम चरण में है. 14 अप्रैल को एक दिन के ब्रेक के बाद टूर्नामेंट फिर शुरू होगा और 3 मई तक चलेगा.    

बेंगलुरु vs लखनऊ, आज होगा ज़बरदस्त मुकाबला

नई दिल्ली इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 में बुधवार यानी आज बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) का सामना लखनऊ सुपर जायंट्स (एलएसजी) से होगा। इस मैच में दोनों टीमों के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है। डिफेंडिंग चैंपियन आरसीबी इस सीजन 4 में से 3 मुकाबले अपने नाम कर चुकी है। इस टीम ने सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ पहला मैच 6 विकेट से अपने नाम किया और फिर चेन्नई सुपर किंग्स को 43 रन से हराया। इसके बाद राजस्थान रॉयल्स ने आरसीबी की जीत का क्रम तोड़ा। उस मैच में आरसीबी को 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा था। अपने चौथे मैच में आरसीबी ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ 18 रन से जीत हासिल की। 4 में से 2 मुकाबले हार चुकी है लखनऊ दूसरी ओर, लखनऊ सुपर जायंट्स की टीम 4 में से 2 मैच गंवा चुकी है। इस टीम ने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ अपना पहला मैच 6 विकेट से हारा, जिसके बाद शानदार वापसी करते हुए सनराइजर्स हैदराबाद (5 विकेट) और कोलकाता नाइट राइडर्स (3 विकेट) के खिलाफ जीत हासिल की। इसके बाद गुजरात टाइटंस के खिलाफ 7 विकेट से मैच गंवा दिया। आरसीबी और लखनऊ का हेड टू हेड रिकॉर्ड लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का पलड़ा भारी है। दोनों टीमों के बीच अब तक 6 मैच खेले गए हैं, जिसमें आरसीबी ने 4 मुकाबले जीते और एलएसजी को सिर्फ 2 जीत नसीब हुई। साल 2022 में आरसीबी ने दोनों मुकाबलों में एलएसजी को शिकस्त दी थी। इसके बाद साल 2023 में दोनों टीमों ने एक-एक मैच अपने नाम किए। साल 2024 में एलएसजी ने 28 रन से मुकाबला जीता था। पिछली बार जब आईपीएल 2025 में ये दोनों टीमें आमने-सामने थीं, तो आरसीबी ने छह विकेट से आसान जीत हासिल की। मैच के लिए दोनों टीमें इस प्रकार हैं रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु: रजत पाटीदार (कप्तान), विराट कोहली, टिम डेविड, जैकब बेथेल, रोमारियो शेफर्ड, जोश हेजलवुड, नुवान तुषारा, देवदत्त पडिक्कल, जितेश शर्मा, क्रुणाल पांड्या, रसिक डार, भुवनेश्वर कुमार, जॉर्डन कॉक्स, सुयश शर्मा, वेंकटेश अय्यर, स्वप्निल सिंह, जैकब डफी, कनिष्क चौहान, अभिनंदन सिंह, मंगेश यादव, फिल सॉल्ट, सात्विक देसवाल, विक्की ओस्तवाल, विहान मल्होत्रा। लखनऊ सुपर जायंट्स: ऋषभ पंत (कप्तान), एडेन मार्करम, हिम्मत सिंह, मैथ्यू ब्रीत्जके, मुकुल चौधरी, अक्षत रघुवंशी, जोश इंग्लिस, मिशेल मार्श, अब्दुल समद, शाहबाज अहमद, अर्शिन कुलकर्णी, वानिंदु हसरंगा, आयुष बडोनी, मोहम्मद शमी, अवेश खान, एम. सिद्धार्थ, दिग्वेश सिंह, आकाश सिंह, प्रिंस यादव, अर्जुन तेंदुलकर, एनरिक नॉर्खिया, नमन तिवारी, मयंक यादव, मोहसिन खान। मैच का समय: शाम को 7 बजकर 30 मिनट पर मैच शुरू होगा। टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स पर मैच लाइव आएगा जबकि इसकी लाइव स्ट्रीमिंग जियोहॉटस्टार एप पर होगी।

पहलगाम हमले के बाद कश्मीर में पर्यटकों की रौनक लौटी, पर्यटन क्षेत्र में आई नई उम्मीद

श्रीनगर  22 अप्रैल 2025 का दिन जम्मू-कश्मीर के लिए किसी बुरे ख्वाब से कम नहीं था. यहां पहलगाम स्थित बैसरन घाटी (Baisaran Valley) में हुए घातक आतंकी हमले ने पूरे कश्मीर घाटी को झकझोर दिया था. ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहलाने वाली इस खूबसूरत घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों का धर्म पूछकर उन्हें गोलियों से भून डाला था. इस नृशंस आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे. इस हमले ने न सिर्फ मानवीय क्षति पहुंचाई, बल्कि पहलगाम के पर्यटन उद्योग को बुरी तरह चोट पहुंचाई. पर्यटन उद्योग ठप पड़ गया था, दुकानें बंद हो गई थीं और स्थानीय कारीगरों-दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था. लेकिन ठीक एक साल बाद पहलगाम के घाव भरने लगे हैं. इस वसंत में पर्यटकों की रौनक लौट आई है. हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट की दुकानों पर फिर भीड़ उमड़ रही है. पर्यटक कश्मीरी शॉल, कालीन, पशमीना, कढ़ाई वाले सूट, काठ की नक्काशीदार वस्तुएं और सेब की लकड़ी से बने सामान खरीद रहे हैं. स्थानीय दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है और कमाई भी पहले जैसी होने लगी है।  पहलगाम के मुख्य बाजार लिद्दर बाजार, मलिक बाजार और चंदनवाड़ी रोड पर इन दिनों सुबह से शाम तक चहल-पहल है. दुकानों पर फिर से भीड़ दिखने लगी है. पर्यटक बसों और प्राइवेट गाड़ियों से उतरते ही दुकानों की ओर बढ़ रहे हैं. कई दुकानें सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक खुली रह रही हैं।  हम साथ देने आए हैं… इंदौर के रहने वाले फखरुद्दीन अपने परिवार के साथ पहली बार पहलगाम घूमने आए है. वह यहां की सुंदरता और लोगों की मेहमाननवाजी को देखकर कहते हैं, ‘हमने जम्मू-कश्मीर के बारे में बहुत नकारात्मक बातें सुनी थीं, लेकिन यहां आकर हमारा अनुभव बिल्कुल उल्टा है. लोग बेहद मिलनसार हैं और यहां के हस्तशिल्प अद्भुत हैं. हम कश्मीरी शॉल, पशमीना और हाथों से बने सामान खरीद रहे हैं ताकि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट मिल सके।  फखरुद्दीन ने बताया कि उनकी पत्नी और बेटी ने कई पशमीना शॉल, सूट पीस और कालीन खरीदे. वह कहते हैं, ‘हमने सोचा था कि सुरक्षा की वजह से यहां घूमना मुश्किल होगा, लेकिन हर जगह सुरक्षा बल तैनात हैं और वातावरण पूरी तरह शांतिपूर्ण है।  बैसरन घाटी का वह काला दिन पिछले साल 22 अप्रैल को दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच बैसरन घाटी में हथियारबंद आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला बोल दिया. घनी देवदार के जंगलों से घिरी इस घाटी में पर्यटक घोड़े की सवारी या पैदल घूम रहे थे. आतंकियों ने M4 कार्बाइन और AK-47 से अंधाधुंध फायरिंग की. उन्होंने पुरुषों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी और गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया. इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय घोड़ा चालक शहीद हुए।  हमले के बाद पूरे कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई. कई पर्यटन स्थल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए. पहलगाम की हैंडलूम-हैंडीक्राफ्ट दुकानों पर ताला लग गया. कारीगर परिवार महीनों बिना कमाई के गुजारा करते रहे. पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अप्रैल-मई में पर्यटकों की संख्या में 80 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई।  कश्मीर में लौट रही रौनक 2026 के वसंत में हालात अब बदल रहे हैं. मार्च के अंत से अप्रैल के पहले दो सप्ताह में पहलगाम में रोजाना 800 से 1200 पर्यटक पहुंच रहे हैं. बैसरन घाटी सहित आसपास के कई पर्यटन स्थल फिर से खुल रहे हैं. जम्मू-कश्मीर सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘Kashmir Travel Mart 2026’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिसमें हस्तशिल्प को विशेष जगह दी गई है।  जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं. पहलगाम में अतिरिक्त सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है. पर्यटक बसों और वाहनों की सुरक्षा के लिए स्पेशल एस्कॉर्ट व्यवस्था की गई है. साथ ही ‘एक्सपीरियंस कश्मीर’ अभियान के तहत सोशल मीडिया पर सकारात्मक रुख बढ़ाया जा रहा है।  पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल 2026 में अब तक पिछले साल की तुलना में 65 प्रतिशत ज्यादा पर्यटक कश्मीर घाटी आए हैं. पहलगाम के अलावा गुलमर्ग, सोनमर्ग, गांदेरबल और डल झील क्षेत्र भी पर्यटकों से गुलजार हैं।  पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जख्म अब भर रहा है. आतंकी हमले की यादें अभी भी ताजा हैं, लेकिन पर्यटकों की वापसी ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई जान दी है. फखरुद्दीन जैसे परिवार दिखाते हैं कि पर्यटक अब सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय को सपोर्ट करने भी आ रहे हैं। 

मध्य प्रदेश में राशन वितरण के लिए चेहरा पहचानने की नई व्यवस्था, जल्द लागू होगा फेस रिकग्निशन

सागर   अब तक राशन के पात्र परिवारों को बाॅयोमेट्रिक वेरिफिकेशन के आधार पर राशन मिलता है, लेकिन साल के अंत तक राशन फेस रिकग्निशन की व्यवस्था के तहत मिलेगा. खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया है कि साल के अंत तक पात्र परिवारों को उचित मूल्य दुकानों से फेस रिकग्निशन के माध्यम से राशन वितरण की योजना है. ये व्यवस्था दिसंबर 2026 तक प्रदेश भर में लागू कर दी जाएगी।  अभी तक लागू है बाॅयोमैट्रिक वेरिफिकेशन व्यवस्था सरकार द्वारा राशन वितरण के लिए बाॅयोमेट्रिक वेरिफिकेशन की व्यवस्था लागू है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत पात्र परिवारों को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के आधार पर राशन वितरित किया जा रहा है. व्यवस्था के तहत पीओएस मशीन में फिंगर और थंब इंप्रेशन सही पाए जाने पर राशन मिलता है. ऐसे में जो वृद्ध और दिव्यांगजन राशन दुकान तक नहीं पहुंच पाते हैं और उनका बाॅयोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो सकता है या विफल रहता है. ऐसे हितग्राहियों को उनके आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजकर राशन दिया जाता है।  ऐसे प्रदेश में 44 हजार 671 राशन हितग्राही हैं, जिनके परिवार के सदस्यों को नॉमिनी बनाकर राशन दिया जा रहा है. अब दिसंबर 2026 से फेस रिकग्निशन व्यवस्था के तहत राशन मिलेगा, जिसमें हितग्राही के फेस पैटर्न को एआई टूल्स के जरिए पहचानकर राशन वितरण किया जाएगा।  15 अप्रैल तक होगा राशन वितरण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार, '' मार्च 2026 में 2 लाख 72 हजार मीट्रिक टन राशन एक करोड़ 24 लाख 34 हजार परिवारों को वितरित किया जा चुका है. जो परिवार या हितग्राही अब तक राशन नहीं ले पाए हैं, उनको 15 अप्रैल तक राशन वितरण किया जाएगा.'' मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने आगे बताया, '' मध्यप्रदेश के 36 हजार 486 परिवार अन्य राज्यों में राशन लेते हैं. वहीं, अन्य राज्यों के 7 हजार 252 परिवार मध्यप्रदेश में राशन लेते हैं. वहीं अंतर जिला पोर्टेबिलिटी के तहत 18 लाख 55 हजार 554 परिवारों द्वारा अन्य जिले/अन्य दुकान से राशन लिया है. इस प्रकार तय दुकान से राशन लेने की बाध्यता न होकर अपनी पसंद और पास की दुकान से राशन लेने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. सभी पात्र परिवारों को सुविधाजनक तरीके से राशन वितरण किया जा रहा है। 

100 साल के अधिकतम बाढ़ स्तर के आधार पर फ्लड प्लेन जोन तय करेगा सिंचाई विभाग

 गाजीपुर गंगा की धारा की अविरलता और स्वच्छता बनाए रखने के लिए सिंचाई विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पिछले 100 वर्षों में आई बाढ़ के अधिकतम स्तर का सीमांकन कर नदी के किनारे चेतावनी पिलर लगाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि लोग बाढ़ क्षेत्र में निर्माण न करें और नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित न हो। यह कार्य नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर किया जा रहा है। एनजीटी ने गंगा के फ्लड प्लेन जोन (एफपीजेड) को चिह्नित करने के लिए 100 वर्षों में बाढ़ के अंतिम पहुंच बिंदु का निर्धारण करने का आदेश दिया था। इसी के तहत सिंचाई विभाग पत्थर के पिलर स्थापित कर रहा है, जिन पर ‘100 वर्ष’, पिलर संख्या और एफपीजेड अंकित किया जा रहा है। वाराणसी से बलिया सीमा तक गंगा के दोनों किनारों पर लगभग एक हजार पिलर लगाए जा रहे हैं। गाजीपुर में दोनों तरफ मिलाकर लगभग 175 किलोमीटर क्षेत्र में यह कार्य किया जा रहा है और इस पर करीब 50 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस पहल से लोगों को बाढ़ क्षेत्र की स्पष्ट जानकारी मिलेगी और अवैध निर्माण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह कदम न केवल बाढ़ के खतरे को कम करेगा, बल्कि गंगा नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को भी संरक्षित करेगा। पिलर लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है और इसे समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्य के माध्यम से स्थानीय निवासियों को बाढ़ के संभावित खतरों के बारे में जागरूक किया जाएगा। पिलर पर अंकित जानकारी से लोग यह समझ सकेंगे कि बाढ़ के समय किन क्षेत्रों में रहना सुरक्षित नहीं है। इससे अवैध निर्माण पर भी अंकुश लगेगा, जो कि नदी के किनारे अव्यवस्थित तरीके से हो रहा है। गंगा नदी भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके संरक्षण के लिए उठाए गए इस कदम को व्यापक रूप से सराहा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन ने भी इस पहल का समर्थन किया है और इसे गंगा की स्वच्छता और अविरलता के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। गंगा नदी के किनारे चेतावनी पिलर लगाने का कार्य न केवल बाढ़ प्रबंधन के लिए आवश्यक है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे न केवल नदी की धारा को सुरक्षित रखा जाएगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी बाढ़ के खतरों से बचाने में मदद मिलेगी।इस पहल से गंगा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को एक नई दिशा मिलेगी, जिससे वे सुरक्षित और संरक्षित रह सकेंगे।

खाखर गांव में छापेमारी, 8.700 किलो गीली अफीम और 370 किलो डोडा जब्त

 चतरा  चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र अंतर्गत रिमी पंचायत के खाखर गांव में पुलिस ने एक बड़ी और सफल कार्रवाई को अंजाम दिया है. एसपी सुमित कुमार अग्रवाल को गुप्त सूचना मिली थी कि गांव के अमारिक गंझु, मनोज गंझु, सरजू गंझु समेत अन्य तस्कर अपने घरों में भारी मात्रा में मादक पदार्थ छिपाकर रखे हुए हैं और इसे बाहरी व्यापारियों को बेचने की फिराक में हैं. सूचना की गंभीरता को देखते हुए सिमरिया एसडीपीओ शुभम कुमार खंडेलवाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसने खाखर गांव में दबिश दी. करोड़ों का माल और अहम दस्तावेज बरामद मंगलवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसपी सुमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि विशेष टीम ने जब आरोपियों के एक-एक घर की तलाशी ली, तो वहां से भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद हुए. छापेमारी में कुल 8.700 किलोग्राम गीली अफीम, 370 किलोग्राम डोडा और 109 किलोग्राम पोस्ता दाना जब्त किया गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी जा रही है. इसके अलावा, पुलिस ने मौके से आरोपियों के आधार कार्ड समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिससे उनकी पहचान पुख्ता हो गई है. तस्कर फरार, गिरफ्तारी के लिए छापेमारी तेज हालांकि, पुलिस की आहट पाते ही सभी नामजद आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहे. इस मामले में लावालौंग थाना कांड संख्या 23/26 के तहत एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है. एसपी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं. पुलिस की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से अवैध मादक पदार्थ के कारोबारियों में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है. कार्रवाई में शामिल रही बड़ी टीम नशे के खिलाफ इस बड़े अभियान में एनडीपीएस थाना प्रभारी शमी अंसारी, लावालौंग थाना प्रभारी चंदन कुमार, अवर निरीक्षक विधायक प्रसाद यादव सहित जिला पुलिस के कई जवान शामिल थे. चतरा पुलिस की इस उपलब्धि को जिले में नशा मुक्ति अभियान की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है.

दो पालियों में होगी प्रतियोगिता परीक्षा, जिले में बनाए गए 13 सेंटर

लातेहार झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2026 को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. यह परीक्षा 19 अप्रैल को दो पालियों में आयोजित की जाएगी. पहली पाली सुबह 10 बजे से 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है. प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना है. जिले में बनाए गए 13 परीक्षा केंद्र परीक्षा के सफल आयोजन के लिए जिले में कुल 13 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. इन केंद्रों पर परीक्षार्थियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन ने सभी केंद्रों पर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो. उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने किया निरीक्षण मंगलवार को उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने जिला मुख्यालय के कई परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया. उन्होंने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर और गांधी इंटर कॉलेज केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए. मूलभूत सुविधाओं पर दिया गया विशेष ध्यान निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने केंद्रों पर बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की. उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध कराई जाएं. कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण परीक्षा पर जोर उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि परीक्षा को कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है. इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने और सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश उन्होंने सभी केंद्राधीक्षकों और संबंधित कर्मियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही परीक्षा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. परीक्षार्थियों से समय पर पहुंचने की अपील जिला प्रशासन ने परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय से पहले अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचें और सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें. इससे परीक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सकेगी. निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी रहे मौजूद इस दौरान डीआरडीए निदेशक प्रभात रंजन चौधरी, अनुमंडल पदाधिकारी अजय कुमार रजक, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक गौतम साहू, डीटीओ उमेश मंडल, बीडीओ मनोज कुमार तिवारी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे. सभी ने मिलकर परीक्षा की तैयारियों को अंतिम रूप देने पर जोर दिया.

संजू सैमसन ने बुमराह को पीछे छोड़ा, जीता ICC का प्रमुख अवॉर्ड

नई दिल्ली भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन को मार्च महीने का आईसीसी प्लेयर ऑफ द मंथ चुना गया है. उन्होंने इस अवॉर्ड की रेस में जसप्रीत बुमराह और साउथ अफ्रीका के कॉनर एस्टरहुइजन को पीछे छोड़ा. सैमसन ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारत की जीत में सबसे अहम भूमिका निभाई. खास बात यह रही कि टूर्नामेंट की शुरुआत में वह प्लेइंग इलेवन का हिस्सा भी नहीं थे. टीम ने पहले अभिषेक शर्मा और ईशान किशन को मौका दिया, लेकिन जब सैमसन को मौका मिला, तो उन्होंने इसे पूरी तरह भुना लिया।  सुपर-8 में जिम्बाब्वे के खिलाफ 24 रन की तेज पारी से उन्होंने शुरुआत की, लेकिन असली कमाल वेस्टइंडीज के खिलाफ देखने को मिला. नॉकआउट की रेस में सैमसन ने नाबाद 97 रन बनाए और टीम को जीत दिलाई. यह पारी संभलकर खेली गई थी, जिसमें उन्होंने सही समय पर सही शॉट्स लगाए।  सेमीफाइनल और फाइनल में भी जलवा इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ वानखेड़े में सेमीफाइनल में उन्होंने 89 रन की शानदार पारी खेली. यह मैच हाई स्कोरिंग था, लेकिन सैमसन की पारी ने भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया. फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी उन्होंने 89 रन बनाए और टीम को खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई. लगातार बड़े मैचों में इस तरह का प्रदर्शन ही उन्हें सबसे खास बनाता है।  मार्च के इन अहम मैचों में सैमसन ने 3 पारियों में 275 रन बनाए. उनका औसत 137.50 और स्ट्राइक रेट 199.38 रहा. पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने 5 मैचों में 321 रन बनाए, औसत 80.25 और स्ट्राइक रेट 199.38 रहा।  हालांकि जसप्रीत बुमराह ने भी शानदार गेंदबाजी की और कई मैचों में टीम को संभाला, लेकिन सैमसन ने बल्लेबाजी से पूरे मैच का रुख बदल दिया. वहीं महिला क्रिकेट में न्यूजीलैंड की अमेलिया केर को मार्च का प्लेयर ऑफ द मंथ चुना गया है। 

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नया इको-टूरिज्म स्पॉट, अप्रैल अंत में उद्घाटन संभव

बगहा बगहा वन क्षेत्र में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा ‘गेटवे ऑफ वीटीआर’ अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के मदनपुर रेंज में बन रहा यह नया इको-टूरिज्म स्पॉट जल्द ही पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है. करीब 0.548 एकड़ क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि गेटवे का अंतिम काम तेजी से चल रहा है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 3.13 करोड़ रुपये की लागत आई है. इसमें मुख्य प्रवेश द्वार के साथ हरियाली, बैठने की सुविधा और आकर्षक डिजाइन शामिल हैं. पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा यह इको-पर्यटन स्थल खासतौर पर उन सैलानियों के लिए तैयार किया जा रहा है जो प्राकृतिक वातावरण में सुकून के पल बिताना चाहते हैं. यहां आने वाले पर्यटक न केवल सुंदर नजारे देख सकेंगे, बल्कि आरामदायक माहौल में समय भी बिता पाएंगे. अप्रैल के अंत में उद्घाटन की तैयारी बगहा वन क्षेत्र पदाधिकारी श्रीमान मालाकार के अनुसार, पार्क का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और गेटवे अंतिम चरण में है. यदि सब कुछ प्लान के अनुसार रहा तो अप्रैल के अंतिम सप्ताह में वरीय अधिकारियों द्वारा इसका उद्घाटन किया जा सकता है. जल्द तय होगा प्रवेश शुल्क (Entry Fees) फिलहाल पार्क में प्रवेश शुल्क तय नहीं किया गया है. इसके लिए प्रस्ताव वरीय अधिकारियों को भेजा गया है. उम्मीद है कि जल्द ही शुल्क निर्धारित कर दिया जाएगा, ताकि आम पर्यटक भी आसानी से यहां पहुंच सकें. पर्यटकों के लिए सुविधाओं का खास इंतजाम इस स्थल पर पर्यटकों के लिए बैठने की व्यवस्था, नाश्ते की सुविधा और बच्चों के मनोरंजन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. पूरे परिसर में सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु घेराबंदी भी की गई है. साथ ही आकर्षक लाइटिंग इसे और भी सुंदर बनाएगी. पर्यटन और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार ‘गेटवे ऑफ वीटीआर’ के शुरू होने से वाल्मीकिनगर क्षेत्र में पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. इससे न सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

रांची: नागपुरी गायक डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक को मिला ‘गुरु रत्न सम्मान 2026’

रांची  झारखंड के नागपुरी लोक संगीत जगत के प्रख्यात गायक डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित “गुरु रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें 14 अप्रैल को “भारत के गवैयों” संस्था की ओर से प्रदान किया गया. डॉ. बड़ाईक को यह गौरव नागपुरी लोक संगीत के संरक्षण, संवर्धन और इसे वैश्विक मंचों तक पहुंचाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है. इस सम्मान समारोह ने झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को एक नई मजबूती प्रदान की है. सांसद महुआ माजी ने की कलाकार की सराहना इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद महुआ माजी उपस्थित रहीं. उन्होंने डॉ. बड़ाईक को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसे वरिष्ठ कलाकार हमारी संस्कृति और परंपरा के सच्चे संवाहक होते हैं. महुआ माजी ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि लोक संगीत हमारी पहचान का अटूट हिस्सा है और डॉ. बड़ाईक जैसे व्यक्तित्व इसे युवा पीढ़ी के लिए सहेजकर रखने का महान कार्य कर रहे हैं. उन्होंने लोक कला को राजकीय और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रोत्साहन देने की बात कही. नागपुरी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में भूमिका डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक लंबे समय से नागपुरी संगीत की जड़ों को सींचने में सक्रिय हैं. उन्होंने न केवल अपने गायन बल्कि अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से भी झारखंड की लोक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. वे लगातार विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देकर लोक संगीत की मिठास को लोगों तक पहुंचा रहे हैं. उनकी विशिष्ट गायकी शैली ने न केवल दर्शकों का मन मोहा है, बल्कि कई युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित भी किया है. सुरों की महफिल में उमड़े संगीत प्रेमी सम्मान समारोह के दौरान पूरा वातावरण नागपुरी धुनों से सराबोर रहा. इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति, प्रख्यात कलाकार और भारी संख्या में संगीत प्रेमी शामिल हुए. डॉ. बड़ाईक ने मंच से अपने कुछ लोकप्रिय नागपुरी गीतों की सुरीली प्रस्तुति भी दी, जिसे श्रोताओं ने भरपूर सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया. इस सम्मान से पूरे नागपुरी संगीत जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है और इसे राज्य की गौरवशाली विरासत के लिए एक सुखद क्षण माना जा रहा है.