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IPL 2026: आखिरी 12 गेंदों में चाहिए थे 30 रन, मुकुल और बडोनी के अर्धशतकों से जीता लखनऊ।

 कोलकाता मुकुल चौधरी (54*) और आयुष बडोनी (54) की तूफानी अर्धशतकीय पारियों की मदद से लखनऊ सुपर जाएंट्स ने कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) को तीन विकेट से हरा दिया। गुरुवार को ईडेन गार्डेन्स में खेले गए मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी कोलकाता ने 20 ओवर में चार विकेट पर 181 रन बनाए। जवाब में लखनऊ ने 20 ओवर में सात विकेट पर 182 रन बनाए और मुकाबला अपने नाम कर लिया। लखनऊ पांचवें स्थान पर पहुंची यह लखनऊ की लगातार दूसरी जीत है। इससे पहले टीम ने हैदराबाद के खिलाफ पांच विकेट से मुकाबला जीता था। इस जीत के साथ लखनऊ की टीम अंक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुंच गई। उनके खाते में चार अंक हैं और नेट रन रेट -0.359 का है। वहीं, कोलकाता लगातार तीन मैचों में हार और एक मुकाबला बेनतीजा रहने की वजह से -1.315 के नेट रन रेट के साथ अंक तालिका में नौवें पायदान पर है। आईपीएल 2026 की अंक आखिरी चार ओवर का रोमांच 182 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही लखनऊ का स्कोर 16वें ओवर की समाप्ति तक सात विकेट पर 128 रन था। क्रीज पर आवेश खान (0) और मुकुल चौधरी (2) मौजूद थे। मुकाबले में जान 17वें ओवर में लौटी। इसके बाद कैसे लखनऊ ने केकेआर के जबड़े से जीत छीनी यहां पढ़िये… 17वां ओवर कप्तान अजिंक्य रहाणे ने वैभव अरोड़ा को गेंद थमाई। शुरुआती दो गेंदों पर कोई रन नहीं आया, लेकिन तीसरी गेंद पर मुकुल ने चौका जड़ा। इसके बाद हेलीकॉप्टर शॉट लगाते हुए शानदार छक्का ठोका। इस ओवर से कुल 11 रन आए। आवेश खान 0 और मुकुल चौधरी 13 रन बनाकर क्रीज पर डटे रहे। 18वां ओवर कार्तिक त्यागी के ओवर में मुकुल चौधरी ने अपना असली रंग दिखाया। ओवर की पहली ही गेंद पर लंबा छक्का जड़ा। बीच में कुछ डॉट गेंदें आईं, लेकिन फिर एक और विशाल छक्का लगाकर केकेआर पर दबाव डाल दिया। इस ओवर से 13 रन आए और मुकाबला फिर से खुल गया। 19वां ओवर कप्तान रहाणे ने कैमरन ग्रीन को गेंद थमाई। लखनऊ को अब 12 गेंदों में 30 रन चाहिए थे।     पहली गेंद: मुकुल ने पुल किया लेकिन गेंद ज्यादा दूर नहीं जा सकी। इस पर कोई रन नहीं आया। अब 11 गेंदों में 30 रन चाहिए थे।     दूसरी गेंद:  फिर मुकुल से गेंद मिस हुई। अब 10 गेंदों 30 रन चाहिए थे।     तीसरी गेंद: मुकुल ने शानदार छक्का जड़ा। अब 9 गेंदों में 24 रन चाहिए थे।     चौथी गेंद: मुकुल बड़ा शॉट खेलने गए लेकिन चूक गए।  अब आठ गेंदों में 24 रन चाहिए थे।     पांचवीं गेंद: मुकुल ने शानदार चौका लगाया। अब सात गेंदों में 20 रन चाहिए थे।     छठी गेंद: आखिरी गेंद पर मुकुल ने छक्का लगाया। अब छह गेंद में 14 रन चाहिए थे। 20वां ओवर अब आखिरी छह गेंदों पर 14 रन चाहिए थे। गेंद फिर वैभव अरोड़ा के हाथ में सौंपी गई।     पहली गेंद: आवेश ने एक रन लिया। अब पांच गेंदों में 13 रन चाहिए थे।     दूसरी गेंद:  मुकुल ने शानदार छक्का लगाया। अब चार गेंदों में सात रन चाहिए थे।     तीसरी गेंद: वैभव की यॉर्कर को समझने में मुकूल चूक गए। अब तीन गेंदों में सात रन चाहिए थे।     चौथी गेंद: मुकुल फिर यॉर्कर को समझने से चूक गए। अब दो गेंदों पर सात रन चाहिए थे।     पांचवीं गेंद: इस गेंद पर मुकुल ने कवर के ऊपर शॉट खेलकर स्कोर बराबर कर दिया और अपना अर्धशतक भी पूरा कर लिया। अब एक गेंद पर एक रन चाहिए था।     छठी गेंद: बाय से एक रन आया और लखनऊ ने 182 रन बनाकर मुकाबला जीत लिया। लखनऊ की पारी इससे पहले लखनऊ को मिचेल मार्श और एडेन मार्करम ने सधी हुई शुरुआत दी। दोनों ने मिलकर पहले विकेट के लिए 4.1 ओवर में 41 रन जोड़े। मार्श 11 गेंदों में 15 रन बनाकर आउट हुए। वहीं, मार्करम अच्छी शुरुआत का फायदा नहीं उठा सके और वह 15 गेंदों में 22 रन बनाने के बाद वैभव अरोड़ा का शिकार बने। वैभव ने तीन गेंदों के अंदर ही एलएसजी के दोनों सलामी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। कप्तान ऋषभ पंत बल्ले से कुछ खास कमाल नहीं दिखा सके और नौ गेंदों में 10 रन बनाकर आउट हुए। निकोलस पूरन का निराशाजनक प्रदर्शन इस मुकाबले में भी जारी रहा और वह 15 गेंदों का सामना करने के बावजूद सिर्फ 13 रन ही बना सके। अब्दुल समद को अनुकूल रॉय ने सिर्फ दो रनों के स्कोर पर क्लीन बोल्ड किया। हालांकि, आयुष बदोनी एक छोर संभालकर खड़े रहे और उन्होंने शानदार बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतकीय पारी खेली। बदोनी ने 34 गेंदों में 54 रन बनाए। अपनी इस पारी में उन्होंने सात चौके और दो छक्के लगाए।  अंत के ओवरों में एलएसजी के 21 वर्षीय बल्लेबाज मुकुल चौधरी ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 27 गेंदों में 54 रनों की नाबाद पारी खेलकर लखनऊ सुपर जायंट्स को यादगार जीत दिलाई। मुकुल ने अपनी इस पारी में दो चौके और सात छक्के लगाए। आखिरी ओवर में जीत के लिए एलएसजी को 14 रनों की जरूरत थी। वैभव अरोड़ा के इस ओवर में मुकुल ने 2 छक्के लगाते हुए केकेआर की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गेंदबाजी में केकेआर की ओर से वैभव अरोड़ा, अनुकूल रॉय ने दो-दो विकेट चटकाए। वहीं, नरेन और कैमरन ग्रीन ने एक-एक विकेट निकाला।  अंत के ओवरों में एलएसजी के 21 वर्षीय बल्लेबाज मुकुल चौधरी ने बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 27 गेंदों में 54 रनों की नाबाद पारी खेलकर लखनऊ सुपर जायंट्स को यादगार जीत दिलाई। मुकुल ने अपनी इस पारी में दो चौके और सात छक्के लगाए। आखिरी ओवर में जीत के लिए एलएसजी को 14 रनों की जरूरत थी। वैभव अरोड़ा के इस ओवर में मुकुल ने 2 छक्के लगाते हुए केकेआर की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। गेंदबाजी में केकेआर की ओर से वैभव अरोड़ा, अनुकूल रॉय ने दो-दो विकेट चटकाए। वहीं, नरेन और कैमरन ग्रीन ने एक-एक विकेट निकाला। कोलकाता की पारी इससे पहले टॉस गंवाने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए कोलकाता ने 20 ओवर में 181 रन … Read more

पंजीयन कार्यालयों का नया टाइम टेबल लागू, शाम 4 बजे के बाद ही होगी विशेष रजिस्ट्री

रायपुर पंजीयन कार्यालयों में दस्तावेजों के पंजीयन को लेकर लंबे समय से चल रही अव्यवस्था और समय को लेकर शिकायतों के बीच अब बड़ा फैसला लिया गया है। महानिरीक्षक पंजीयन के निर्देश पर पूरे प्रदेश में ऑनलाइन अपॉइंटमेंट की समय-सीमा तय कर दी गई है। इसके तहत अब नियमित अपॉइंटमेंट शाम चार बजे तक ही मिलेंगे। जबकि चार से पांच बजे के बीच केवल विशेष अपॉइंटमेंट ही लिए जाएंगे। इस बदलाव से जहां कार्यप्रणाली में अनुशासन आने की उम्मीद है, वहीं आम लोगों को भी समय पर सेवा मिलने का रास्ता साफ होगा। वहीं शाम चार से पांच बजे के बीच केवल विशेष अपॉइंटमेंट छत्तीसगढ़ पंजीयन एवं मुद्रांक कार्यपालिक अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ, रायपुर द्वारा तीन फरवरी को भेजे गए पत्र के बाद शासन ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। बता दें कि सुबह 10 से शाम चार बजे तक ही नियमित अपॉइंटमेंट दिए जाएंगे। वहीं शाम चार से पांच बजे के बीच केवल विशेष परिस्थितियों में स्पेशल अपॉइंटमेंट ही उपलब्ध होंगे। इस संबंध में NGDRS (National Generic Document Registration System) प्रणाली संचालित करने वाली एनआइसी को तत्काल तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को क्या होगा फायदा नई व्यवस्था से अब अपॉइंटमेंट और वास्तविक काम के समय में टकराव नहीं होगा। इससे पंजीयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनेगी। साथ ही स्पेशल अपॉइंटमेंट को अलग स्लॉट मिलने से आपात या विशेष मामलों का तेजी से निपटारा भी संभव होगा। बता दें कि लंबे समय से पंजीयन कार्यालयों में अपॉइंटमेंट के समय और कार्यालयीन समय के बीच तालमेल नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही थीं। कई बार ऐसा होता था कि अपॉइंटमेंट समय कार्यालय बंद होने के करीब या बाद का होता था, जिससे आम नागरिकों को परेशानी उठानी पड़ती थी। पहले यह थी समस्या अब तक अपॉइंटमेंट सिस्टम में समय-सीमा स्पष्ट नहीं थी, जिससे कई बार अंतिम समय में भी बुकिंग हो जाती थी और काम पूरा नहीं हो पाता था। इससे न केवल आवेदकों को परेशानी होती थी, बल्कि कर्मचारियों पर भी अनावश्यक दबाव बनता था। नई समय-सीमा का कड़ाई से पालन किया जाएगा। सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंजीयक और उप पंजीयकों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी साबित होती है।   

भारत का ‘त्रिदेव’ है S-400 और THAAD का मुकाबला, 10,000 KMPH की रफ्तार से अटैक, पलक झपकते ही नष्ट

नई दिल्ली ईरान जंग ने पूरी दुनिया को एक बार फिर से हथियारों की रेस में धकेल दिया है. यूरोप से लेकर चीन, भारत समेत तमाम देश अपनी क्षमताओं के अनुसार डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने में जुटा है. मॉडर्न वॉरफेयर में फाइटर जेट, मिसाइल और ड्रोन की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है. ईरान की कम लागत वाली शाहेद ड्रोन ने अमेरिका और इजरायल को गहरे जख्‍म दिए हैं. वहीं, अमेरिका-इजरायल की घातक मिसाइलों ने ईरान को तबाही की दहलीज पर ला खड़ा किया है. इसमें एक बात सबसे अहम है – अमेरिका, इजरायल और ईरान एक-दूसरे की जमीन पर गए बिना ही तबाही लाई है. विध्‍वंस की ऐसी लकीर खींच दी गई है, जिससे पूरी दुनिया में डर और भय का आलम है. यही वजह है कि अब यूरोप के साथ ही जापान जैसे देश भी अपनी सुरक्षा को लेकर फ‍िक्रमंद हो गए हैं. नई टेक्‍नोलॉजी की मदद से कट‍िंग एज वेपन सिस्‍टम डेवलप करने में अरबों डॉलर का इन्‍वेस्‍टमेंट करने की योजना बनाई जा रही है. भारत भी इस रेस में पीछे नहीं रहना चाहता है. नेशनल एयर डिफेंस सिस्‍टम प्रोजेक्‍ट मिशन सुदर्शन चक्र पर काम शुरू हो चुका है. इसके साथ ही एक और डिफेंस प्रोजेक्‍ट पर काम चल रहा है. इसके पूरा होने पर एक ऐसा सिस्‍टम डेवलप होगा, जिसके प्रहार के सामने S-400, THAAD, HQ-9B और आयरन डोम जैसे अत्‍याधुनिक वायु रक्षा प्रणाली भी पस्‍त हो जाएंगे. इस हाइपरसोनिक सिस्‍टम में 3 मिसाइलें होंगी, जिससे हवा, पानी और आसमान अभेद्य क‍िला बन जाएगा. भारत के इस ‘त्रिदेव’ के सामने चीन-पाकिस्‍तान जैसे देशों की हालत खराब होनी तय है । जानकारी के अनुसार, भारत की हाइपरसोनिक तकनीक को लेकर महत्वाकांक्षा अब केवल भविष्य की योजना नहीं रही, बल्कि तेजी से वर्तमान सैन्य क्षमता में बदलती दिखाई दे रही है. देश एक बहुस्तरीय (मल्टीलेयर) हाइपरसोनिक स्ट्राइक नेटवर्क विकसित कर रहा है, जो परमाणु प्रतिरोध (Nuclear Detterent), समुद्री प्रभुत्व और अत्यधिक सटीक हमलों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है. ‘डिफेंस डॉट इन’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीतिक बदलाव के केंद्र में तीन अत्याधुनिक और आपस में जुड़े वेपन सिस्टम हैं – ध्वनि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (Dhvani HGV), लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-AShM) और एक्सटेंडेड ट्रैजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (ET-LDHCM). ये तीनों मिलकर भारत की सैन्य ताकत को नई ऊंचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं । ध्‍वनि हाइपरसोनिक ग्‍लाइड व्‍हीकल ध्वनि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भारत के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. यह लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है और परमाणु पेलोड ले जाने की क्षमता रखता है. इसकी रफ्तार मैक-5 से कहीं अधिक बताई जा रही है और इसकी रेंज करीब 10,000 किलोमीटर तक हो सकती है. खास बात यह है कि यह ऊपरी वायुमंडल (upper atmosphere) में अनियमित रास्तों पर ग्लाइड करता है, जिससे इसे ट्रैक और इंटरसेप्ट करना बेहद मुश्किल हो जाता है. वर्ष 2026 के दौरान इसके ट्रायल में हीट-रेजिस्टेंट मैटेरियल, टार्गेटिंग सॉफ्टवेयर और अंतिम चरण की नेविगेशन सिस्‍टम की विश्वसनीयता पर फोकस किया जा रहा है । लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल दूसरी ओर, LR-AShM भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तैयार की जा रही है. लगभग 1,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल चलती मोबाइल नेवी वॉरशिप के साथ-साथ जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को भी निशाना बना सकती है. इसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में विरोधियों की गतिविधियों को सीमित करना है. इस मिसाइल की खासियत यह है कि इसमें पूरी तरह स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक्स और सेंसर का उपयोग किया गया है, जिससे विदेशी निर्भरता समाप्त होती है. इसके भूमि, समुद्र और हवा से लॉन्च किए जाने वाले संस्करण विकसित किए जा रहे हैं, जो इसे एक व्यावहारिक युद्धक हथियार बनाते हैं। एक्सटेंडेड ट्रैजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल ET-LDHCM इस हाइपरसोनिक ट्राएंगल का तीसरा महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो क्रूज मिसाइल और ग्लाइड व्हीकल के बीच की कड़ी का काम करता है. वर्ष 2025 में इसके महत्वपूर्ण परीक्षण किए गए थे. यह मिसाइल मैक-8 (तकरीबन 10 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार) से अधिक की गति से उड़ान भर सकती है और 1,500 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय कर सकती है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी लचीलापन (वर्सेटिलिटी) है. यह उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है और इसे हवाई जहाज, नौसैनिक जहाज या जमीन से लॉन्च किया जा सकता है. यह उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों को भेदने में सक्षम मानी जा रही है। हाइपरसोनिक मिसाइल क्या होती है? हाइपरसोनिक मिसाइल ऐसी उन्नत हथियार प्रणाली है, जो ध्वनि की गति (मैक 1) से कम से कम पांच गुना यानी मैक 5 या उससे अधिक रफ्तार से उड़ती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी अत्यधिक गति, सटीकता और रास्ता बदलने की क्षमता है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। यह पारंपरिक बैलिस्टिक या क्रूज मिसाइलों से कैसे अलग है? बैलिस्टिक मिसाइलें तय प्रक्षेपवक्र (trajectory) में ऊपर जाकर गिरती हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ती हैं लेकिन उनकी गति अपेक्षाकृत कम होती है. हाइपरसोनिक मिसाइल इन दोनों का संयोजन मानी जाती है—यह बहुत तेज होती है और उड़ान के दौरान दिशा बदल सकती है, जिससे दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली इसे ट्रैक करना मुश्किल पाती है। हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं? मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं – हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल (HGV), जिसे रॉकेट से ऊंचाई पर ले जाकर छोड़ा जाता है, जहां से यह ग्लाइड करते हुए लक्ष्य तक पहुंचता है. दूसरा, हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (HCM) जो स्क्रैमजेट इंजन से संचालित होती है और पूरे रास्ते हाइपरसोनिक स्‍पीड बनाए रखती है। दुनिया में किन देशों के पास यह तकनीक है? इस क्षेत्र में अमेरिका, रूस और चीन सबसे आगे माने जाते हैं. रूस ने ‘किंजल’ और ‘अवांगार्ड’ जैसे सिस्टम तैनात किए हैं, जबकि चीन ने भी कई सफल परीक्षण किए हैं. अमेरिका भी इस टेक्नोलॉजी पर तेजी से काम कर रहा है। भारत की स्थिति क्या है? भारत भी हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी में तेजी से प्रगति कर रहा है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) का सफल परीक्षण किया है. इसके अलावा, लंबी दूरी की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों पर भी काम जारी … Read more

विद्यालयों में पढ़ाई बने परिणामोन्मुखी: दीप मंत्र के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम, बोले मंत्री गजेंद्र यादव

रायपुर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि विद्यालयों में शैक्षणिक कार्यों को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुखी बनाना सुनिश्चित करें। पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, साइंस कॉलेज ग्राउंड, रायपुर में स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी एवं हिन्दी माध्यम विद्यालयों के प्राचार्यों की राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन आज स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। उन्होंने सभी प्राचार्यों से अपेक्षा की गई कि वे डॉ. भीमराव अंबेडकर के समान समता, शिक्षा एवं सामाजिक न्याय के मूल्यों को आत्मसात करते हुए विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, अनुशासन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ध्यान दें तथा राज्य के शिक्षा स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। विद्यालयों में शैक्षणिक कार्यों को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुखी बनाएं-स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव बैठक का शुभारंभ राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, दीप मंत्र एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। साथ ही कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवनी के उल्लेख से करते हुए उनके संघर्षों एवं नागरिकों को समान अधिकार दिलाने में दिए गए योगदान को स्मरण किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्यभर के लगभग 751 विद्यालयों के प्राचार्यों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में शैक्षणिक कार्यों को अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं परिणामोन्मुखी बनाना रहा। बैठक में आगामी शैक्षणिक सत्र हेतु बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार के लिए लक्ष्य निर्धारण, NEET एवं JEE जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में विद्यार्थियों की भागीदारी एवं सफलता बढ़ाने की रणनीति, पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया, अंग्रेजी भाषा दक्षता में सुधार, पीटीए बैठकों की समीक्षा तथा पालक-अधिकारियों की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। बैठक में सह-शैक्षणिक गतिविधियों की उपलब्धियां, स्मार्ट क्लास एवं पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार तथा नवाचार आधारित गतिविधियों पर भी विचार- विमर्श किया गया। बैठक में सेजस के विजन मिशन को पीपीटी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसमें 4.22 लाख से अधिक अध्ययनरत विद्यार्थियों, स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय उपयोग, शिक्षकों की भर्ती, मॉनिटरिंग एवं विद्यार्थियों की उपलब्धियों की जानकारी साझा की गई। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने सभी प्राचार्यों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यालयों का प्रदर्शन बेहतर बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। उन्होंने शिक्षकों के मिलनसार व्यवहार, जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों से मधुर संबंध तथा शिक्षण में ईमानदारी पर विशेष बल दिया। प्रत्येक छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान देने और प्राचार्यों द्वारा कम से कम एक कक्षा लेने का भी निर्देश दिया गया। उन्होंने निर्देशित किया कि विद्यालयों में प्रतिदिन राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान एवं दीप मंत्र तथा छुट्टी के समय गायत्री मंत्र एवं शांति पाठ का आयोजन किया जाए। शनिवार को गतिविधि दिवस के रूप में मनाने, विद्यार्थियों को योग अभ्यास कराने एवं गार्डनिंग व हाउसकीपिंग जैसे कौशल सिखाने हेतु दो समूह अनिवार्य रूप से बनाने की बात कही। शिक्षा मंत्री ने कक्षा 9 वीं से 12 वीं तक के विद्यार्थियों पर विशेष फोकस रखते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु मार्गदर्शन उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। प्रत्येक माह एक दिन निर्धारित कर “इंग्लिश स्पीकिंग डे” मनाने तथा विद्यालय परिसर में मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण रखने के निर्देश दिए। उन्होंने एआई आधारित शिक्षण प्रणाली को बढ़ावा देने एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की। बैठक में समग्र शिक्षा आयुक्त श्रीमती किरण कौशल, संयुक्त सचिव श्रीमती फरिहा आलम सिद्दकी, एससीईआरटी के संयुक्त संचालक के. कुमार, उपसंचालक ए.एन. बंजारा, डीईओ हिमांशु भारतीय सहित प्रदेशभर से आए प्राचार्यगण उपस्थित रहे।

माइकल जैक्सन की बायोपिक का ट्रेलर रिलीज, विवादों और भारी खर्च के बीच 24 अप्रैल को पर्दे पर उतरेगी फिल्म

किंग ऑफ पॉप' माइकल जैक्सन की बायोपिक 'माइकल' का फाइनल ट्रेलर रिलीज हो गया है। यह फिल्‍म पिछले कुछ साल से लगातार चर्चा में है। इस हॉलीवुड फिल्‍म की दुनियाभर में जैक्‍सन के फैंस को बेसब्री से इंतजार है। खासकर टीजर और ट्रेलर को मिले रेस्‍पॉन्‍स को देखकर यही लग रहा है कि यह फिल्‍म बॉक्‍स ऑफिस पर करिश्‍मा करेगी। फिल्‍म में जैक्‍सन के भतीजे जाफर जैक्‍सन लीड रोल में हैं और पर्दे पर वह हूबहू अपने चाचा की तरह लग रहे हैं। नए ट्रेलर में वह माइकल जैक्‍सन के कुछ पुराने हिट-नंबर्स पर परफॉर्म करते हुए दिख रहे हैं। खास बात यह है कि इस फिल्‍म पर ना सिर्फ दिवंगत पॉप सिंगर के फैंस की, बल्‍क‍ि उनके आलोचकों की भी नजर है। वो भी तब, जब बीते दिनों खबर आई कि मेकर्स ने इसके आख‍िरी हिस्‍से को फिर से री-शूट किया है। यह फिल्‍म अभी से विवादों में भी घ‍िरती नजर आ रही है। बताया जाता है कि इसमें उन बच्चों के यौन शोषण के आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है, जिनका सामना माइकल जैक्‍सन को अपने करियर के आखिरी दशक में करना पड़ा था। प्रोडक्शन टीम का दावा है कि यह जैक्सन एस्टेट के वकीलों की एक चूक थी। एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, फ‍िल्म के आखिरी हिस्से को फिर से शूट करने में भारी भरकम खर्च आया है। करीब 22 दिनों की इस एक्‍स्‍ट्रा शूटिंग के कारण $15 मिलियन (138.96 करोड़ रुपये) तक का खर्च आया। इस वजह से रिलीज की तारीख एक बार नहीं, बल्कि दो बार बदली गई। अब जब एंटोनी फुक्वा के डायरेक्‍शन में बनी 'माइकल' इस महीने 24 अप्रैल 2026 को अमेरिका में रिलीज हो रही है, तो सुगबुगाहट ये भी शुरू हो गई है कि यह कितनी कमाई करेगी। 'माइकल' मूवी की कहानी से हटाए गए सीन 'वैरायटी' के मुताबिक, शुरुआत में इस फिल्‍म में माइकल जैक्‍सन की जिंदगी की कहानी में एक सीन था, जहां वह अपनी परछाई को घूर रहे होते हैं, जबकि उनके पीछे पुलिस की गाड़ियों की लाइटें चमक रही होती हैं। यह सीन 1993 का था, जब उन पर पहली बार बच्चों के यौन शोषण का आरोप लगा था। फिल्‍म के यह हिस्सा मुख्य रूप से उन आरोपों के नतीजों पर केंद्रित था, जिसमें एक ऐसा सीन शामिल था, जिसमें जांचकर्ता सबूतों की तलाश में 'नेवरलैंड रैंच' पहुंचते हैं। लेकिन अब इनमें से कोई भी चीज फ‍िल्म के नहीं दिखाई जाएगी। समझौते की एक शर्त के कारण हटाए गए सीन दरअसल, इसके पीछे की वजह एक शर्त है। जैक्सन एस्टेट के वकील, जो अब इस फ‍िल्म के निर्माता भी हैं, उन्‍होंने पॉप सिंगर पर आरोप लगाने वाले जॉर्डन चैंडलर के साथ एक ऐसा समझौता किया था। इसमें शर्त थी कि यदि उन पर कभी फ‍िल्म बनती है तो उसमें चैंडलर को दिखाने या उनका जिक्र नहीं करना है। इस शर्त का पता बहुत देर से चला। लिहाजा, अब इन सारे जिक्र को हटाना पड़ा है। क्‍या था माइकल जैक्‍सन और इवान चैंडलर का मामला जानकारी के लिए बता दें कि 1993 के मामले में, इवान चैंडलर भी शामिल थे। उन आरोप लगा था कि माइकल जैक्सन ने उनके 13 साल बेटे जॉर्डन का यौन शोषण किया था। शुरुआती जांच में जैक्सन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला और परिवार ने 1994 की शुरुआत में कुछ पैसे लेकर समझौता कर लिया। जैक्सन की कानूनी टीम ने लगातार यह बात रखी कि यह समझौता अपराध की स्वीकारोक्ति नहीं थी। जैक्सन एस्टेट ने उठाया री-शूट का खर्च नतीजा यह हुआ कि बीते साल जून 2025 में फिल्‍म की 22 दिनों की शूटिंग के लिए कलाकार फिर से इकट्ठा हुए। रीशूट पर अरबों रुपये का खर्च आया। बताया जाता है कि यह पूरा खर्च जैक्सन एस्टेट ने उठाया। नतीजतन, अब फिल्म में एस्टेट की भी हिस्सेदारी है। शायद यही वजह है कि कई लोग अब इस फिल्‍म को दिवंगत सिंगर की छवि सुधारने की एक कोशिश के तौर पर देख रहे हैं। माइकल' मूवी का बजट वैसे, लायंसगेट के बैनर तले बनी 'माइकल' का ऑरिजनल बजट $155 मिलियन था, जो अब रीशूट के बाद $170 मिलियन (1577.09 करोड़ रुपये ) तक पहुंच गया है। यह फिल्म पहले 18 अप्रैल, 2025 को ही रिलीज होने वाली थी। फिर इसे 3 अक्टूबर, 2025 तक के लिए पोस्‍टपोन किया गया और अब यह 24 अप्रैल 2026 में रिलीज हो रही है। पहले वीकेंड में 510 करोड़ रुपये की कमाई की उम्‍मीद हालांकि, फिल्‍म की कमाई को लेकर उम्‍मीदों का दौर चल रहा है, क्‍योंकि नवंबर 2025 में जब इसका टीजर ट्रेलर रिलीज किया गया था, तब महज 24 घंटों में ही इसने 116.2 मिलियन व्यूज मिले। इसने 'टेलर स्विफ्ट: द एराज टूर' के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया, जिसे 96.1 मिलियन व्यूज मिले थे। अब 'वैरायटी' की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती बॉक्स ऑफिस ट्रैकिंग से पता चलता है कि फिल्म अपने पहले वीकेंड में अमेरिका में $55 मिलियन (510.62 करोड़) से ज्यादा की कमाई कर सकती है। यह 2018 में रिलीज हुई फिल्म 'बोहेमियन रैप्सोडी' की शुरुआती कमाई ($51 मिलियन) से भी ज्यादा होगी। इस फिल्‍म ने लाइफटाइम दुनियाभर में कुल $910 मिलियन की कमाई की थी।  

रसद विभाग की बड़ी कार्रवाई, घरेलू सिलिंडरों से वाहनों में गैस भरने वाले गिरोह पर कसा शिकंजा

बांसवाड़ा राजस्थान के बांसवाड़ा शहर में रसद विभाग ने अवैध गैस रिफिलिंग के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। रतलाम रोड स्थित एक गैरेज पर छापेमारी कर 18 गैस सिलिंडर जब्त किए गए। इनमें छह व्यावसायिक और 12 घरेलू सिलिंडर शामिल हैं। कुछ सिलिंडर पूरी तरह भरे हुए थे, जबकि कुछ आंशिक रूप से खाली पाए गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यहां गैस सिलिंडरों से गैस निकालकर वाहनों में भरी जा रही थी, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। मुखबिर से मिली सूचना रसद विभाग को इस अवैध कारोबार की सूचना एक मुखबिर के जरिए मिली थी। सूचना मिलते ही प्रवर्तन अधिकारी लालशंकर डामोर के नेतृत्व में टीम ने बिना देर किए गैरेज पर दबिश दी। तलाशी के दौरान गैराज से बड़ी संख्या में गैस सिलिंडर संदिग्ध स्थिति में पाए गए। गतिविधियों की पुष्टि होते ही टीम ने तत्काल सभी सिलिंडर जब्त कर लिए। मामले की जांच जारी रसद अधिकारी ओम प्रकाश जोतड़ ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है और इस अवैध कारोबार में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी इस तरह की अवैध रिफिलिंग की जानकारी मिले तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।  

सस्ता और सुलभ होगा सफर, गुरुग्राम में 55 रुपये प्रति किमी की दर पर चलेंगी ई-बसें, जीएमडीए ने जारी किया ठेका

गुरुग्राम गुरुग्राम में यात्रियों की सुविधा के लिए जुलाई से 100 नई ई-बसें शुरू की जाएंगी। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण ने इसके लिए पीएमआई इलेक्ट्रो मोबीलिटी को ठेका दे दिया है। वर्तमान में चल रही 150 सीएनजी बसें पुरानी होने के कारण अक्सर खराब हो जाती हैं जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। नई ई-बसों का संचालन 55.47 रुपये प्रति किलोमीटर की दर पर होगा जो मौजूदा बसों के खर्च से काफी कम है। इन बसों के लिए सेक्टर-10 में डिपो तैयार है। सड़कों पर दौड़ेंगी 100 ई-बसें अधिकारियों ने बताया कि गुरुग्राम में जुलाई से 100 ई-बसें सड़कों पर दौड़ेंगी। इसको लेकर गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण ने पीएमआई इलेक्ट्रो मोबीलिटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को ठेका स्वीकृति पत्र जारी कर दिया है। प्रति किलोमीटर 55 रुपये 47 पैसे आएगा खर्च 55 रुपये 47 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से बस संचालन की एवज में इस कंपनी को गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड (जीएमसीबीएल) की तरफ से भुगतान किया जाएगा। मौजूदा समय में गुरुग्राम में 150 सीएनजी बस हैं। करीब आठ साल पुरानी बस होने की वजह से आए दिन इसमें खराबी आती रहती है। रोजाना 15 से 20 बस बीच रास्ते में दम तोड़ रही है। पुरानी बसों पर खर्च ज्यादा यही नहीं इन बसों को करीब 95 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। जीएमडीए ने पीएम ई-सेवा के तहत सब्सिडी पर 100 ई-बस मुहैया कराने का आग्रह दो साल पहले किया था। गत 16 फरवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ई-बस के संचालन को लेकर उच्चस्तरीय खरीद समिति की बैठक में ठेकेदार कंपनी से नेगोसिएशन हुई थी। इसके बाद सिटी बसों के संचालन का रास्ता साफ हो गया था। यात्री फिलहाल परेशान बस कम होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। द्वारका एक्सप्रेसवे डिवेलपमेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी सुनील सरीन ने बताया कि पिछले दो साल से जीएमसीबीएल और जीएमडीए से सिटी बस के संचालन की मांग कर रहे हैं। उनसे आग्रह किया है कि यशो भूमि और द्वारका मेट्रो स्टेशन को सिटी बस सेवा से जोड़ा जाए। ई-बस डिपो तैयार गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्वजीत चौधरी ने कहा कि कई-बस के आते ही इनका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। सेक्टर-10 में ई-बस डिपो तैयार किया जा चुका है। सेक्टर-48 में भी ई-बस डिपो जल्द बनकर तैयार हो जाएगा। बसों के आने के बाद परिवहन सेवा बेहतर होगी। लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। बस रूट भी तैयार ई-बस संचालन को लेकर सेक्टर-10 में ई-बस डिपो बनकर तैयार हो चुका है। बिजलीघर भी बन चुका है। डीएचबीवीएन से बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया जा चुका है। सेक्टर-48 में ई-बस डिपो निर्माणाधीन है। ई-बस के संचालन को लेकर जीएमसीबीएल की तरफ से बस रूट तैयार किए जा चुके हैं।

सीकर रोड पर जाम से फंसे VIP, लापरवाही पड़ गई भारी, पहली बार बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज

जयपुर राजधानी जयपुर में 9 मार्च को आयोजित एक हाई-प्रोफाइल शादी समारोह अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। लाडनू से कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर के विवाह समारोह के दौरान सीकर रोड पर लगे कई किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में एक आईपीएस अधिकारी समेत कुल 6 पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। बताया जा रहा है कि जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस घटना को गंभीरता से लिया गया था और स्पेशल सीपी स्तर पर इसकी विस्तृत जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजे जाने के बाद विजिलेंस टीम ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। सूत्रों के मुताबिक, जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। शादी समारोह बना जाम की वजह जानकारी के अनुसार 9 मार्च को हरमाड़ा क्षेत्र में सीकर रोड स्थित एक रिसॉर्ट में विधायक मुकेश भाकर और आरजेएस अधिकारी कोमल मीणा का विवाह समारोह आयोजित हुआ था। इस समारोह में सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेता, वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस के आला अधिकारी शामिल हुए थे। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के आसपास वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया, जिससे सीकर रोड पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात ऐसे हो गए कि कई किलोमीटर तक वाहन रेंगते नजर आए और आम लोगों के साथ-साथ कई वीआईपी मेहमान भी जाम में फंस गए। वायरलेस मैसेज के बावजूद नहीं खुला जाम सूत्रों के अनुसार, जाम की स्थिति को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम और वायरलेस सेट पर लगातार संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। बावजूद इसके, मौके पर ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने में काफी देरी हुई। कई वीआईपी को जाम से निकलने में लंबा समय लग गया, जिससे पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और मामले की जांच के आदेश दिए गए। स्पेशल कमिश्नर ने सौंपी जांच रिपोर्ट मामले की जांच स्पेशल कमिश्नर ओमप्रकाश को सौंपी गई थी। उन्होंने मौके की परिस्थितियों, ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की भूमिका और ट्रैफिक मैनेजमेंट की स्थिति का आकलन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी। रिपोर्ट में लापरवाही के बिंदुओं को चिन्हित किया गया, जिसके आधार पर विजिलेंस टीम ने कार्रवाई शुरू की है। इन अधिकारियों को माना गया जिम्मेदार पुलिस जांच में जिन अधिकारियों को प्राथमिक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें एसीपी चोमू आईपीएस उषा यादव, एसीपी ट्रैफिक किशोर सिंह भदोरिया, ट्रैफिक इंस्पेक्टर मंजू चौधरी, संपत राज, नवरत्न धौलिया और हरमाड़ा थाना अधिकारी उदय सिंह शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है और उनसे पूछा गया है कि ट्रैफिक प्रबंधन में चूक क्यों हुई। जांच के दौरान हुए तबादले गौरतलब है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ही एसीपी चोमू उषा यादव का तबादला कर उन्हें हाड़ी रानी बटालियन में कमांडेंट नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जयपुर के डीसीपी ट्रैफिक का भी ट्रांसफर किया जा चुका है। हालांकि इन तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन इसे इस मामले से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पहली बार उच्च अधिकारियों पर भी गिरी गाज सूत्रों के मुताबिक, यह पहला मामला है जब ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। पुलिस मुख्यालय का यह कदम यह संकेत देता है कि अब ट्रैफिक प्रबंधन में किसी भी स्तर की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। आगे क्या? अब सभी की नजर संबंधित अधिकारियों के जवाब पर टिकी हुई है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो विभागीय कार्रवाई के तहत चार्जशीट, सस्पेंशन या अन्य अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

‘कचुम्बर’ और ‘ढापा’ जैसे नामों से मिलेगी मुक्ति, राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलेगी नई पहचान

जयपुर राजस्थान में अब सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बच्चों की पहचान भी बदलेगी और वो भी सरकारी पहल के जरिए! जयपुर से आई इस खबर ने शिक्षा जगत के साथ-साथ आम लोगों में भी हलचल मचा दी है। क्या सरकार बच्चों के नाम तय करेगी? या ये एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है? दरअसल, राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक ऐसे अभियान की घोषणा की है, जिसने चर्चा और जिज्ञासा दोनों को जन्म दे दिया है। इस अभियान का नाम है ‘सार्थक नाम अभियान’। सुनने में यह पहल सरल लगती है, लेकिन इसके पीछे की सोच और असर कहीं ज्यादा गहरा है। नाम पर क्यों उठी ये पहल? मंत्री दिलावर के अनुसार, राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में बच्चों के ऐसे नाम रख दिए जाते हैं जिनका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं होता, या जो आगे चलकर बच्चे के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकते हैं। जैसे ‘कचुम्बर’, ‘ढापा’ जैसे नाम। सरकार का मानना है कि ऐसे नाम बच्चों में हीन भावना पैदा कर सकते हैं और उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। इसी सोच के साथ अब शिक्षा विभाग एक कदम आगे बढ़ते हुए ऐसे बच्चों के लिए “सार्थक और सम्मानजनक” नाम सुझाएगा। कैसे चलेगा ‘सार्थक नाम अभियान’? इस योजना के तहत शिक्षा विभाग 2,000 से 3,000 अर्थपूर्ण नामों की एक सूची तैयार करेगा। इसके बाद स्कूलों के माध्यम से उन बच्चों की पहचान की जाएगी जिनके नाम को “अर्थहीन या असहज” माना जाता है। फिर शुरू होगा असली प्रोसेस अधिकारियों और शिक्षकों द्वारा माता-पिता से संवाद। उन्हें समझाया जाएगा कि उनके बच्चे के लिए एक बेहतर, अर्थपूर्ण नाम क्यों जरूरी है। हालांकि, अंतिम फैसला माता-पिता का ही रहेगा। क्या ये बदलाव आसान होगा? यहीं से कहानी में आता है असली ट्विस्ट। नाम सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा और भावनाओं से जुड़ा होता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं क्या ग्रामीण परिवार अपने बच्चों के नाम बदलने के लिए तैयार होंगे? क्या यह पहल सामाजिक स्वीकृति हासिल कर पाएगी? सिर्फ नाम नहीं, शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव इस घोषणा के साथ ही शिक्षा मंत्री ने कई और बड़े ऐलान भी किए हर बच्चे का दाखिला सुनिश्चित: खानाबदोश (nomadic) समुदाय के बच्चों को बिना दस्तावेज के भी स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। टॉपर्स का सम्मान 2026 बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले छात्रों को उनके स्कूलों में सम्मानित किया जाएगा और उनकी उपलब्धियों को सोशल मीडिया व बैनर के जरिए प्रचारित किया जाएगा। एलुमनाई मीट की शुरुआत: इस साल से हर सरकारी स्कूल में वार्षिक एलुमनाई मीट होगी, ताकि पुराने छात्र स्कूल के विकास में योगदान दे सकें। प्रिंसिपल की जिम्मेदारी तय: सभी प्रिंसिपल्स को रोजाना क्लासरूम निरीक्षण का निर्देश दिया गया है। नशे पर सख्ती के संकेत: शिक्षा विभाग ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार करेगा जो तंबाकू, गुटखा या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। बदलाव की शुरुआत या नई बहस? ‘सार्थक नाम अभियान’ एक तरफ बच्चों के आत्मसम्मान को मजबूत करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ यह समाज में एक नई बहस को भी जन्म दे रहा है क्या सरकार को व्यक्तिगत पहचान में दखल देना चाहिए? अब देखने वाली बात यह होगी कि यह अभियान जमीनी स्तर पर कितना सफल होता है और क्या वाकई बच्चों की पहचान को एक नई दिशा मिल पाती है या यह सिर्फ एक सरकारी पहल बनकर रह जाएगी। फिलहाल, राजस्थान में नाम को लेकर शुरू हुई यह नई कहानी आने वाले दिनों में बड़ा सामाजिक बदलाव भी ला सकती है।

मध्य प्रदेश में डेयरी और पशुपालन को मिलेगा बढ़ावा, महोत्सव में दिखेगा आदर्श गौशाला मॉडल और उन्नत नस्लों का दम

भोपाल खेती को लाभकारी बनाने, किसानों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से रायसेन जिले में “उन्नत कृषि महोत्सव-2026” के अंतर्गत प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव तीन दिन तक चलेगा, जिसमें किसानों को देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। महोत्सव के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इससे किसानों को उन्नत खेती, नई तकनीकों और बेहतर उत्पादन के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। महोत्सव में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा स्टॉल लगाया जाएगा, जहां पशुपालकों एवं किसानों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्नत पशु एवं कुक्कुट प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें गिर, साहिवाल, थारपारकर गाय, मुर्रा भैंस, कड़कनाथ मुर्गी तथा रंगीन बैकयार्ड बर्ड्स शामिल हैं। इसके साथ ही बकरी पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोजत, बीटल, बारबरी, जमुनापारी एवं सिरोही नस्लों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। गौ-संवर्धन बोर्ड प्रस्तुत करेगा आदर्श गौशाला मॉडल मध्यप्रदेश गौ-संवर्धन बोर्ड द्वारा महोत्सव में आदर्श गौशाला का मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा। इससे गौशाला स्थापना की दिशा में किए जा रहे बहुआयामी प्रयासों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही निराश्रित गोवंश के बेहतर प्रबंधन, स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति-2025 में किए जा रहे कार्यों और उनकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला जाएगा। इसके अतिरिक्त गौशाला उत्पादों जैसे पंचगव्य एवं गौ-शिल्प से संबंधित जानकारी भी किसानों और पशुपालकों को उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से विभाग की विभिन्न प्रचलित योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की जाएगी। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना, क्षीरधारा ग्राम योजना, कृत्रिम गर्भाधान हेतु संचालित हिरण्यगर्भा अभियान तथा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान शामिल हैं। इन योजनाओं से पशुपालकों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन, उत्पादन वृद्धि और आय संवर्धन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। म.प्र. राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम तकनीक का करेगा प्रदर्शन महोत्सव में मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, भोपाल द्वारा पशुपालकों को जानकारी देने एवं जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें भारत सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे नेशनल लाइवस्टॉक मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक एवं एंब्रियो ट्रांसफर तकनीक का प्रदर्शन शामिल रहेगा। इसके अतिरिक्त चलित पशु चिकित्सा इकाई एंबुलेंस वाहन), राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम तथा राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के संबंध में भी विस्तृत जानकारी पशुपालकों को प्रदान की जाएगी।