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सस्ता और सुलभ होगा सफर, गुरुग्राम में 55 रुपये प्रति किमी की दर पर चलेंगी ई-बसें, जीएमडीए ने जारी किया ठेका

गुरुग्राम गुरुग्राम में यात्रियों की सुविधा के लिए जुलाई से 100 नई ई-बसें शुरू की जाएंगी। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण ने इसके लिए पीएमआई इलेक्ट्रो मोबीलिटी को ठेका दे दिया है। वर्तमान में चल रही 150 सीएनजी बसें पुरानी होने के कारण अक्सर खराब हो जाती हैं जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। नई ई-बसों का संचालन 55.47 रुपये प्रति किलोमीटर की दर पर होगा जो मौजूदा बसों के खर्च से काफी कम है। इन बसों के लिए सेक्टर-10 में डिपो तैयार है। सड़कों पर दौड़ेंगी 100 ई-बसें अधिकारियों ने बताया कि गुरुग्राम में जुलाई से 100 ई-बसें सड़कों पर दौड़ेंगी। इसको लेकर गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण ने पीएमआई इलेक्ट्रो मोबीलिटी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को ठेका स्वीकृति पत्र जारी कर दिया है। प्रति किलोमीटर 55 रुपये 47 पैसे आएगा खर्च 55 रुपये 47 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से बस संचालन की एवज में इस कंपनी को गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड (जीएमसीबीएल) की तरफ से भुगतान किया जाएगा। मौजूदा समय में गुरुग्राम में 150 सीएनजी बस हैं। करीब आठ साल पुरानी बस होने की वजह से आए दिन इसमें खराबी आती रहती है। रोजाना 15 से 20 बस बीच रास्ते में दम तोड़ रही है। पुरानी बसों पर खर्च ज्यादा यही नहीं इन बसों को करीब 95 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है। जीएमडीए ने पीएम ई-सेवा के तहत सब्सिडी पर 100 ई-बस मुहैया कराने का आग्रह दो साल पहले किया था। गत 16 फरवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में ई-बस के संचालन को लेकर उच्चस्तरीय खरीद समिति की बैठक में ठेकेदार कंपनी से नेगोसिएशन हुई थी। इसके बाद सिटी बसों के संचालन का रास्ता साफ हो गया था। यात्री फिलहाल परेशान बस कम होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। द्वारका एक्सप्रेसवे डिवेलपमेंट एसोसिएशन के पदाधिकारी सुनील सरीन ने बताया कि पिछले दो साल से जीएमसीबीएल और जीएमडीए से सिटी बस के संचालन की मांग कर रहे हैं। उनसे आग्रह किया है कि यशो भूमि और द्वारका मेट्रो स्टेशन को सिटी बस सेवा से जोड़ा जाए। ई-बस डिपो तैयार गुरुग्राम महानगर सिटी बस लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विश्वजीत चौधरी ने कहा कि कई-बस के आते ही इनका संचालन शुरू कर दिया जाएगा। सेक्टर-10 में ई-बस डिपो तैयार किया जा चुका है। सेक्टर-48 में भी ई-बस डिपो जल्द बनकर तैयार हो जाएगा। बसों के आने के बाद परिवहन सेवा बेहतर होगी। लोगों को आवागमन में राहत मिलेगी। बस रूट भी तैयार ई-बस संचालन को लेकर सेक्टर-10 में ई-बस डिपो बनकर तैयार हो चुका है। बिजलीघर भी बन चुका है। डीएचबीवीएन से बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया जा चुका है। सेक्टर-48 में ई-बस डिपो निर्माणाधीन है। ई-बस के संचालन को लेकर जीएमसीबीएल की तरफ से बस रूट तैयार किए जा चुके हैं।

सीकर रोड पर जाम से फंसे VIP, लापरवाही पड़ गई भारी, पहली बार बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज

जयपुर राजधानी जयपुर में 9 मार्च को आयोजित एक हाई-प्रोफाइल शादी समारोह अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। लाडनू से कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर के विवाह समारोह के दौरान सीकर रोड पर लगे कई किलोमीटर लंबे ट्रैफिक जाम को लेकर पुलिस मुख्यालय ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में एक आईपीएस अधिकारी समेत कुल 6 पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार मानते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। बताया जा रहा है कि जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की ओर से इस घटना को गंभीरता से लिया गया था और स्पेशल सीपी स्तर पर इसकी विस्तृत जांच करवाई गई। जांच रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजे जाने के बाद विजिलेंस टीम ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। सूत्रों के मुताबिक, जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। शादी समारोह बना जाम की वजह जानकारी के अनुसार 9 मार्च को हरमाड़ा क्षेत्र में सीकर रोड स्थित एक रिसॉर्ट में विधायक मुकेश भाकर और आरजेएस अधिकारी कोमल मीणा का विवाह समारोह आयोजित हुआ था। इस समारोह में सत्ता और विपक्ष के कई बड़े नेता, वरिष्ठ ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस के आला अधिकारी शामिल हुए थे। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल के आसपास वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया, जिससे सीकर रोड पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात ऐसे हो गए कि कई किलोमीटर तक वाहन रेंगते नजर आए और आम लोगों के साथ-साथ कई वीआईपी मेहमान भी जाम में फंस गए। वायरलेस मैसेज के बावजूद नहीं खुला जाम सूत्रों के अनुसार, जाम की स्थिति को लेकर पुलिस कंट्रोल रूम और वायरलेस सेट पर लगातार संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। बावजूद इसके, मौके पर ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू करने में काफी देरी हुई। कई वीआईपी को जाम से निकलने में लंबा समय लग गया, जिससे पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और मामले की जांच के आदेश दिए गए। स्पेशल कमिश्नर ने सौंपी जांच रिपोर्ट मामले की जांच स्पेशल कमिश्नर ओमप्रकाश को सौंपी गई थी। उन्होंने मौके की परिस्थितियों, ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की भूमिका और ट्रैफिक मैनेजमेंट की स्थिति का आकलन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजी। रिपोर्ट में लापरवाही के बिंदुओं को चिन्हित किया गया, जिसके आधार पर विजिलेंस टीम ने कार्रवाई शुरू की है। इन अधिकारियों को माना गया जिम्मेदार पुलिस जांच में जिन अधिकारियों को प्राथमिक रूप से जिम्मेदार ठहराया गया है, उनमें एसीपी चोमू आईपीएस उषा यादव, एसीपी ट्रैफिक किशोर सिंह भदोरिया, ट्रैफिक इंस्पेक्टर मंजू चौधरी, संपत राज, नवरत्न धौलिया और हरमाड़ा थाना अधिकारी उदय सिंह शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है और उनसे पूछा गया है कि ट्रैफिक प्रबंधन में चूक क्यों हुई। जांच के दौरान हुए तबादले गौरतलब है कि जांच प्रक्रिया के दौरान ही एसीपी चोमू उषा यादव का तबादला कर उन्हें हाड़ी रानी बटालियन में कमांडेंट नियुक्त किया गया है। इसके अलावा जयपुर के डीसीपी ट्रैफिक का भी ट्रांसफर किया जा चुका है। हालांकि इन तबादलों को नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है, लेकिन इसे इस मामले से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पहली बार उच्च अधिकारियों पर भी गिरी गाज सूत्रों के मुताबिक, यह पहला मामला है जब ट्रैफिक जाम जैसी स्थिति के लिए केवल निचले स्तर के कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि उच्च अधिकारियों को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। पुलिस मुख्यालय का यह कदम यह संकेत देता है कि अब ट्रैफिक प्रबंधन में किसी भी स्तर की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हो। आगे क्या? अब सभी की नजर संबंधित अधिकारियों के जवाब पर टिकी हुई है। यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो विभागीय कार्रवाई के तहत चार्जशीट, सस्पेंशन या अन्य अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।

‘कचुम्बर’ और ‘ढापा’ जैसे नामों से मिलेगी मुक्ति, राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिलेगी नई पहचान

जयपुर राजस्थान में अब सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बच्चों की पहचान भी बदलेगी और वो भी सरकारी पहल के जरिए! जयपुर से आई इस खबर ने शिक्षा जगत के साथ-साथ आम लोगों में भी हलचल मचा दी है। क्या सरकार बच्चों के नाम तय करेगी? या ये एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत है? दरअसल, राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक ऐसे अभियान की घोषणा की है, जिसने चर्चा और जिज्ञासा दोनों को जन्म दे दिया है। इस अभियान का नाम है ‘सार्थक नाम अभियान’। सुनने में यह पहल सरल लगती है, लेकिन इसके पीछे की सोच और असर कहीं ज्यादा गहरा है। नाम पर क्यों उठी ये पहल? मंत्री दिलावर के अनुसार, राज्य के कई ग्रामीण इलाकों में बच्चों के ऐसे नाम रख दिए जाते हैं जिनका कोई स्पष्ट अर्थ नहीं होता, या जो आगे चलकर बच्चे के लिए शर्मिंदगी का कारण बन सकते हैं। जैसे ‘कचुम्बर’, ‘ढापा’ जैसे नाम। सरकार का मानना है कि ऐसे नाम बच्चों में हीन भावना पैदा कर सकते हैं और उनके आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकते हैं। इसी सोच के साथ अब शिक्षा विभाग एक कदम आगे बढ़ते हुए ऐसे बच्चों के लिए “सार्थक और सम्मानजनक” नाम सुझाएगा। कैसे चलेगा ‘सार्थक नाम अभियान’? इस योजना के तहत शिक्षा विभाग 2,000 से 3,000 अर्थपूर्ण नामों की एक सूची तैयार करेगा। इसके बाद स्कूलों के माध्यम से उन बच्चों की पहचान की जाएगी जिनके नाम को “अर्थहीन या असहज” माना जाता है। फिर शुरू होगा असली प्रोसेस अधिकारियों और शिक्षकों द्वारा माता-पिता से संवाद। उन्हें समझाया जाएगा कि उनके बच्चे के लिए एक बेहतर, अर्थपूर्ण नाम क्यों जरूरी है। हालांकि, अंतिम फैसला माता-पिता का ही रहेगा। क्या ये बदलाव आसान होगा? यहीं से कहानी में आता है असली ट्विस्ट। नाम सिर्फ एक पहचान नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा और भावनाओं से जुड़ा होता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं क्या ग्रामीण परिवार अपने बच्चों के नाम बदलने के लिए तैयार होंगे? क्या यह पहल सामाजिक स्वीकृति हासिल कर पाएगी? सिर्फ नाम नहीं, शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव इस घोषणा के साथ ही शिक्षा मंत्री ने कई और बड़े ऐलान भी किए हर बच्चे का दाखिला सुनिश्चित: खानाबदोश (nomadic) समुदाय के बच्चों को बिना दस्तावेज के भी स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। टॉपर्स का सम्मान 2026 बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाले छात्रों को उनके स्कूलों में सम्मानित किया जाएगा और उनकी उपलब्धियों को सोशल मीडिया व बैनर के जरिए प्रचारित किया जाएगा। एलुमनाई मीट की शुरुआत: इस साल से हर सरकारी स्कूल में वार्षिक एलुमनाई मीट होगी, ताकि पुराने छात्र स्कूल के विकास में योगदान दे सकें। प्रिंसिपल की जिम्मेदारी तय: सभी प्रिंसिपल्स को रोजाना क्लासरूम निरीक्षण का निर्देश दिया गया है। नशे पर सख्ती के संकेत: शिक्षा विभाग ऐसे कर्मचारियों की सूची तैयार करेगा जो तंबाकू, गुटखा या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। बदलाव की शुरुआत या नई बहस? ‘सार्थक नाम अभियान’ एक तरफ बच्चों के आत्मसम्मान को मजबूत करने की कोशिश है, तो दूसरी तरफ यह समाज में एक नई बहस को भी जन्म दे रहा है क्या सरकार को व्यक्तिगत पहचान में दखल देना चाहिए? अब देखने वाली बात यह होगी कि यह अभियान जमीनी स्तर पर कितना सफल होता है और क्या वाकई बच्चों की पहचान को एक नई दिशा मिल पाती है या यह सिर्फ एक सरकारी पहल बनकर रह जाएगी। फिलहाल, राजस्थान में नाम को लेकर शुरू हुई यह नई कहानी आने वाले दिनों में बड़ा सामाजिक बदलाव भी ला सकती है।

मध्य प्रदेश में डेयरी और पशुपालन को मिलेगा बढ़ावा, महोत्सव में दिखेगा आदर्श गौशाला मॉडल और उन्नत नस्लों का दम

भोपाल खेती को लाभकारी बनाने, किसानों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से रायसेन जिले में “उन्नत कृषि महोत्सव-2026” के अंतर्गत प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह महोत्सव तीन दिन तक चलेगा, जिसमें किसानों को देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। महोत्सव के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इससे किसानों को उन्नत खेती, नई तकनीकों और बेहतर उत्पादन के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। महोत्सव में पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा स्टॉल लगाया जाएगा, जहां पशुपालकों एवं किसानों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्नत पशु एवं कुक्कुट प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें गिर, साहिवाल, थारपारकर गाय, मुर्रा भैंस, कड़कनाथ मुर्गी तथा रंगीन बैकयार्ड बर्ड्स शामिल हैं। इसके साथ ही बकरी पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोजत, बीटल, बारबरी, जमुनापारी एवं सिरोही नस्लों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। गौ-संवर्धन बोर्ड प्रस्तुत करेगा आदर्श गौशाला मॉडल मध्यप्रदेश गौ-संवर्धन बोर्ड द्वारा महोत्सव में आदर्श गौशाला का मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा। इससे गौशाला स्थापना की दिशा में किए जा रहे बहुआयामी प्रयासों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही निराश्रित गोवंश के बेहतर प्रबंधन, स्वावलंबी गौशाला स्थापना नीति-2025 में किए जा रहे कार्यों और उनकी उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला जाएगा। इसके अतिरिक्त गौशाला उत्पादों जैसे पंचगव्य एवं गौ-शिल्प से संबंधित जानकारी भी किसानों और पशुपालकों को उपलब्ध कराई जाएगी। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से विभाग की विभिन्न प्रचलित योजनाओं की जानकारी भी प्रदान की जाएगी। इनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना, क्षीरधारा ग्राम योजना, कृत्रिम गर्भाधान हेतु संचालित हिरण्यगर्भा अभियान तथा दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान शामिल हैं। इन योजनाओं से पशुपालकों को आधुनिक डेयरी प्रबंधन, उत्पादन वृद्धि और आय संवर्धन के लिए आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। म.प्र. राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम तकनीक का करेगा प्रदर्शन महोत्सव में मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, भोपाल द्वारा पशुपालकों को जानकारी देने एवं जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें भारत सरकार के विभिन्न कार्यक्रमों जैसे नेशनल लाइवस्टॉक मिशन, राष्ट्रीय गोकुल मिशन, सेक्स सॉर्टेड सीमन तकनीक एवं एंब्रियो ट्रांसफर तकनीक का प्रदर्शन शामिल रहेगा। इसके अतिरिक्त चलित पशु चिकित्सा इकाई एंबुलेंस वाहन), राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम तथा राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के संबंध में भी विस्तृत जानकारी पशुपालकों को प्रदान की जाएगी।  

आधी रात बदले गए दिल्ली के अफसर, कई विभागों में नई पोस्टिंग, प्रशासनिक कामकाज की रफ्तार बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली दिल्ली में देर रात एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है. सरकार के आदेश पर एक साथ 20 से ज्यादा IAS और DANICS अधिकारियों के ट्रांसफर और नई पोस्टिंग की लिस्ट जारी की गई है. इस फेरबदल से साफ है कि प्रशासनिक स्तर पर कामकाज की रफ्तार बढ़ाने के लिए बड़ी तैयारी की गई है. इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा दो वरिष्ठ अधिकारियों की हो रही है. पोस्टिंग का इंतजार कर रहे 1989 बैच के IAS नरेंद्र कुमार को दिल्ली का नया फाइनेंशियल कमिश्नर बनाया गया है. वहीं, IAS प्रशांत गोयल को फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, साथ ही उनके पास पावर और प्रशासनिक सुधार जैसे कई अन्य अहम विभाग भी रहेंगे. इसके अलावा, IAS सौम्या सौरभ को डीएम के साथ स्पेशल सेक्रेटरी का अतिरिक्त चार्ज मिला है, जबकि सोनिका सिंह को डीडीए में स्पेशल सेक्रेटरी बनाया गया है. शिक्षा, जेल और इलेक्शन विभागों में भारी बदलाव इस पूरे फेरबदल का एक बड़ा हिस्सा दानिक्स (DANICS) अधिकारियों से जुड़ा है, जिन्हें शिक्षा, जेल, ट्रांसपोर्ट, रेवेन्यू और इलेक्शन जैसे महत्वपूर्ण विभागों में नई जिम्मेदारियां दी गई हैं. कई अधिकारियों को डिप्टी सेक्रेटरी और असिस्टेंट कमिश्नर के पदों पर तैनात किया गया है. खास बात यह है कि मंत्रियों के दफ्तरों में भी नए चेहरों की एंट्री हुई है. साथ ही, कुछ अधिकारियों को तो विशेष रूप से जनगणना 2027 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए तैनात किया गया है. सरकार ने यह भी साफ किया है कि कुछ पुराने आदेशों में बदलाव किया गया है. खास तौर पर दानिक्स अधिकारी अमित कुमार से जुड़ा एक पुराना ट्रांसफर ऑर्डर रद्द कर दिया गया है. इस पूरे बदलाव को सिर्फ रूटीन ट्रांसफर के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. जानकारों का मानना है कि यह एक प्रशासनिक रणनीति है ताकि अलग-अलग विभागों में काम की रफ्तार तेज हो सके. आने वाले समय में जनगणना और अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को 'री-सेट' किया गया है. कुल मिलाकर, इस फेरबदल के पीछे एक बड़ी प्रशासनिक सोच काम कर रही है, जिसका असर आने वाले दिनों में दिल्ली के कामकाज पर दिखेगा.  

बजट और सरकारी खर्च पर रहेगी पैनी नजर, जनलेखा और प्राक्कलन समितियों में पक्ष-विपक्ष के दिग्गजों को मिली जगह

जयपुर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने चार प्रमुख वित्तीय समितियों का गठन किया है। इनमें जनलेखा समिति, प्राक्कलन समिति ‘क’, प्राक्कलन समिति ‘ख’ और राजकीय उपक्रम समिति शामिल हैं। इन सभी समितियों का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा। जनलेखा समिति में अनिता भदेल, अर्जुन लाल जीनगर, प्रमोद जैन “भाया”, डॉ. विश्वनाथ मेघवाल, अजय सिंह, रामकेश, चन्द्रभान सिंह चौहान, डॉ. सुरेश धाकड़, रफीक खान, रोहित बौहरा, गुरुवीर सिंह और गोपाल शर्मा को सदस्य बनाया गया है। प्राक्कलन समिति ‘क’ में प्रताप सिंह सिंघवी, शांति धारीवाल, समाराम, हरेंद्र मिर्धा, छोटूसिंह, अर्जुन लाल, जीवाराम चौधरी, सुरेश मोदी, अमित चाचाण, मनोज कुमार (सादुलपुर) और विश्वराज सिंह मेवाड़ को शामिल किया गया है। प्राक्कलन समिति ‘ख’ में पुष्पेंद्र सिंह, शंकरसिंह रावत, गोविंद सिंह डोटासरा, हमीर सिंह भायल, पब्बाराम विश्नोई, समरजीत सिंह, मनोज कुमार (सुजानगढ़), अमीन कागजी, डॉ. सुभाष गर्ग और अरुण चौधरी को सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं राजकीय उपक्रम समिति में डॉ. दयाराम परमार, श्रवण कुमार, संजीव कुमार, हरिमोहन शर्मा, रीटा चौधरी, यूनुस खान, गोपाल लाल शर्मा, शत्रुधन गौतम, गोरधन, ललित मीना, अनिल कुमार शर्मा और डॉ. शैलेश सिंह को सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। इस समितियों के क्या काम होते हैं- 1. जनलेखा समिति (Public Accounts Committee – PAC)     सरकार के खर्च की जांच करती है     CAG (कैग) की रिपोर्टों की समीक्षा करती है     यह देखती है कि पैसा नियमों के अनुसार खर्च हुआ या नहीं     गड़बड़ी मिलने पर जवाबदेही तय करती है 2. प्राक्कलन समिति ‘क’ और ‘ख’ (Estimates Committees)     सरकारी विभागों के बजट (अनुमान) की जांच करती हैं     यह सुझाव देती हैं कि खर्च कैसे कम और प्रभावी हो सकता है     योजनाओं की उपयोगिता और कार्यक्षमता का मूल्यांकन करती हैं     सरकार को सुधार के लिए सिफारिशें देती हैं       3. राजकीय उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings)     सरकारी कंपनियों और उपक्रमों के कामकाज की समीक्षा करती है     उनके वित्तीय प्रदर्शन और प्रबंधन की जांच करती है     घाटे या अनियमितताओं पर सवाल उठाती है     सुधार और बेहतर संचालन के सुझाव देती है  

पिंकसिटी में शादियों की चकाचौंध से पायलटों को परेशानी, 5 किलोमीटर के दायरे में ‘नो लेजर जोन’ घोषित

जयपुर पिंकसिटी के आसमान में अब शादियों और पार्टियों वाली लेजर लाइटें विमानों की राह में रोड़ा नहीं बन पाएंगी। जयपुर कमिश्नरेट पुलिस ने हवाई सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। एयरपोर्ट के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे में अब लेजर लाइट या किसी भी तरह की तीव्र रोशनी का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। विमानों के लिए 'खतरा' बनी चकाचौंध जयपुर के एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. राजीव पचार ने बुधवार को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किए। जांच में सामने आया कि एयरपोर्ट के पास स्थित मैरिज गार्डन, होटल और क्लबों में होने वाले आयोजनों में अक्सर बेहद पावरफुल लेजर लाइट्स का उपयोग किया जाता है। इन लाइट्स की रोशनी आसमान में कई किलोमीटर ऊपर और काफी दूर तक जाती है। जब कोई विमान लैंडिंग या टेक-ऑफ की प्रक्रिया में होता है, तो ये किरणें पायलट की आंखों में सीधे चकाचौंध पैदा करती हैं। इससे न केवल पायलट का ध्यान भटकता है, बल्कि विमान के संचालन में गंभीर तकनीकी परेशानी और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। 7 जून तक 'नो लेजर जोन' पुलिस प्रशासन ने इस प्रतिबंध को 7 जून तक प्रभावी रखने का निर्णय लिया है। आदेश के मुताबिक-     दायरे में कौन: सांगानेर एयरपोर्ट के चारों ओर 5 किलोमीटर का इलाका।     प्रभावित प्रतिष्ठान: इस दायरे में आने वाले लगभग 10 बड़े क्लब और होटल के साथ ही 20 से अधिक मैरिज गार्डन पर यह पाबंदी लागू होगी।     सख्ती: यदि कोई संचालक इन आदेशों की अवहेलना करते हुए लेजर लाइट का उपयोग करता पाया गया, तो उसके विरुद्ध पुलिस नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी शादियों के सीजन में प्रशासन का अलर्ट चूंकि अभी शादियों और समारोहों का सीजन चल रहा है, ऐसे में गार्डन संचालक और इवेंट मैनेजर अक्सर ग्राहकों को लुभाने के लिए भव्य लेजर शो का आयोजन करते हैं। पुलिस ने निर्देश दिए हैं कि सभी संचालक यह सुनिश्चित करें कि रोशनी केवल उनके परिसर के भीतर और जमीन की ओर रहे, आसमान की तरफ कोई भी बीम न छोड़ी जाए। एयरपोर्ट अथॉरिटी और पायलटों की ओर से बार-बार मिल रही शिकायतों के बाद पुलिस ने यह 'सुरक्षा कवच' तैयार किया है। अब परकोटा और आसपास के इलाकों में होने वाली पार्टियों की चकाचौंध विमानों की सुरक्षित उड़ान में खलल नहीं डाल सकेगी।  

राधा चरण साह के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर चुनाव का एलान, 14 मई को आएंगे नतीजे

 पटना   बिहार विधान परिषद की भोजपुर-बक्सर स्थानीय निकाय सीट पर उपचुनाव का बिगुल बज गया है. इलेक्शन कमीशन ने गुरुवार को इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी. इस सीट पर 12 मई को मतदान कराया जाएगा, जबकि 14 मई को मतों की गिनती होगी. यह सीट 16 नवंबर 2025 से खाली है. पहले इस सीट का प्रतिनिधित्व जदयू नेता राधा चरण साह कर रहे थे. लेकिन विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी. उनका कार्यकाल 7 अप्रैल 2028 तक था, लेकिन समय से पहले सीट खाली हो गई. चुनाव का पूरा शेड्यूल निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार     16 अप्रैल: अधिसूचना जारी     23 अप्रैल: नामांकन की अंतिम तिथि     24 अप्रैल: नामांकन पत्रों की जांच     27 अप्रैल: नाम वापसी की आखिरी तारीख     12 मई: मतदान     14 मई: मतगणना लागू हुई आचार संहिता, बढ़ी सियासी हलचल चुनाव की घोषणा के साथ ही भोजपुर और बक्सर क्षेत्र में आचार संहिता लागू हो गई है. इसके बाद से ही इलाके में पॉलिटिकल एक्टिविटीज तेज हो गई हैं. सभी दल इस सीट पर कब्जा जमाने के लिए रणनीति बनाने में जुट गए हैं. NDA फिर से जीत का कर रहा दावा इस सीट पर पहले जदयू का कब्जा था, जो एनडीए गठबंधन का हिस्सा है. ऐसे में एनडीए एक बार फिर इस सीट को अपने पास बनाए रखने का दावा कर रहा है. वहीं विपक्ष भी इस मौके को भुनाने की तैयारी में है, जिससे मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है. 27 वोट से जीती थी विधानसभा चुनाव राधा चरण साह ने 2025 के विधानसभा चुनाव में संदेश सीट से जदयू के टिकट पर जीत दर्ज की थी. उन्होंने राजद उम्मीदवार दीपू सिंह को महज 27 वोटों के अंतर से हराया था. इस चुनाव में राधा चरण साह को 80,598 वोट मिले थे. यह मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और पूरे राज्य में इसकी काफी चर्चा हुई थी. सियासी मुकाबला होगा दिलचस्प भोजपुर-बक्सर की यह सीट स्थानीय निकाय से जुड़ी होने के कारण यहां का चुनाव समीकरण अलग होता है. ऐसे में सभी पार्टियां अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गई हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि इस उपचुनाव में कौन बाजी मारता है और किसके खाते में यह सीट जाती है.

खाली हो चुके स्कूलों में लौटी रौनक, एसडीएम के आदेश के बाद जनगणना ड्यूटी छोड़ क्लासरूम पहुंचे शिक्षक

  अंबाला स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई ठप नहीं होगी। जनगणना कार्य में जुटे शिक्षकों को वापस बुलाने का निर्णय लेते हुए विभाग ने अब केवल 50 प्रतिशत स्टाफ की ही ड्यूटी लगाने का फैसला किया है। कई दिनों से जनगणना कार्य के चलते अधिकांश शिक्षक स्कूलों से नदारद थे। इसका असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा था। बोर्ड परीक्षाओं और वार्षिक सत्र की महत्ता को देखते हुए विभाग पर लगातार दबाव बना हुआ था। अब नए आदेशों के बाद शिक्षकों ने स्कूलों में कार्यभार संभाल लिया है। इससे रुकी हुई कक्षाएं दोबारा शुरू हो गई हैं शिक्षकों की वापसी से पिछड़ चुके पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने में मदद मिलेगी। आगामी परीक्षाओं को देखते हुए स्कूलों में अब विशेष कक्षाओं का आयोजन किया जा सकेगा। स्कूल खाली होने से जो अभिभावक परेशान थे, वे अब बच्चों को वापस भेजने के लिए उत्साहित हैं। खाली हो गए थे स्कूल जनगणना ड्यूटी के कारण जिले के लगभग 60 से अधिक स्कूल प्रभावित हो गए थे। इनमें से कुछ स्कूल पूरी तरह से शिक्षक के बिना रह गए थे। जिन प्राथमिक स्कूलों में एक ही शिक्षक था, उसकी भी ड्यूटी लगा दी गई थी। इसके अलावा जहां 20 से 25 शिक्षक थे, उस स्कूल का पूरा स्टाफ भी जनगणना के कार्य में लगा दिया गया था। इस मामले पर जिला प्राथमिक शिक्षक संघ व अन्य यूनियनों ने विभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर 50-50 प्रतिशत फॉमूर्ला लागू करने का आग्रह किया था। वर्जन बच्चों की शिक्षा हमारी प्राथमिकता है। जनगणना कार्य भी अनिवार्य है इसलिए 50-50 प्रतिशत का फॉर्मूला निकाला गया है। – कनिका गोयल, एसडीएम, अंबाला  

गुवाहाटी में ‘विराट’ धमाके की तैयारी! राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ किंग कोहली के दिलचस्प आंकड़े

गुवाहाटी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और राजस्थान रॉयल्स के बीच आईपीएल 2026 का 16वां मुकाबला खेला जाएगा. गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में खेले जाने वाले इस मैच पर सभी की नजरें आरसीबी के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली पर टिकी होंगी और उनके बल्ले से फैंस को बड़ी पारी की उम्मीद होगी. तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ विराट कोहली के आंकड़े कैसे हैं? उन्होंने कितने रन बनाए हैं… RR VS RCB के बीच होगी कांटे की टक्कर शुक्रवार को राजस्थान रॉयल्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के बीच कांटे की टक्कर का मुकाबला देखने को मिलने वाला है. दोनों टीमें 10 अप्रैल को मैदान पर उतरने वाली हैं. ये मैच गुवाहाटी के बरसापारा स्टेडियम में खेला जाएगा. आरआर और आरसीबी दोनों ही टीमें विजयरथ पर सवार हैं. अब देखने वाली बात होगी कि कौन जीतकर अपनी जीत की लय को बरकरार रखता है, तो वहीं किसे हार का सामना करना पड़ता है.      RR के खिलाफ विराट कोहली के आंकड़े रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 33 मुकाबले खेले, जिसकी 32 पारियों में उन्होंने 34.46 के औसत और 123.93 की स्ट्राइक रेट से 896 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 1 शतक और 6 अर्धशतक लगाए. विराट राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ सिर्फ एक बार ही डक पर आउट हुए हैं. उनका हाईएस्ट स्कोर 113* रनों का रहा है. विराट कोहली के IPL रिकॉर्ड आईपीएल में 3 बार ऑरेन्ज कैप जीत चुके विराट कोहली ने अब तक 269 मुकाबले खेले हैं, जिसमें 133.20 की स्ट्राइक रेट और 39.81 के औसत से 8758 रन बनाए हैं. इस दौरान विराट ने 8 शतक और 65 अर्धशतक लगाए हैं. वहीं विराट के बल्ले से 297 छक्के और 778 चौके निकले हैं. ऐसी हैं दोनों टीमें राजस्थान रॉयल्स टीम: यशस्वी जयसवाल, वैभव सूर्यवंशी, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर), रियान पराग (कप्तान), शिम्रोन हेटमायर, डोनोवन फरेरा, रवींद्र जड़ेजा, जोफ्रा आर्चर, नंद्रे बर्गर, तुषार देशपांडे, संदीप शर्मा, रवि बिश्नोई, लुआन-ड्रे प्रीटोरियस, ब्रिजेश शर्मा, रवि सिंह, शुभम दुबे, एडम मिल्ने, दासुन शनाका, कुलदीप सेन, सुशांत मिश्रा, युध्दवीर चरक, केना मफाका, विग्नेश पुथुर,अमन राव पेराला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु टीम: फिलिप साल्ट, विराट कोहली, देवदत्त पडिक्कल, रजत पाटीदार (कप्तान), जितेश शर्मा (विकेटकीपर), टिम डेविड, रोमारियो शेफर्ड, क्रुणाल पंड्या, भुवनेश्वर कुमार, अभिनंदन सिंह, जैकब डफी, सुयश शर्मा, जैकब बेथेल, रसिख सलाम डार, कनिष्क चौहान, वेंकटेश अय्यर, जोश हेज़लवुड, मंगेश यादव, विहान मल्होत्रा, विक्की ओस्टवाल, जॉर्डन कॉक्स, स्वप्निल सिंह, सात्विक देसवाल