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पति नहीं दे रहा था खर्च, सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी को दिया निर्देश: सैलरी से 25,000 पत्नी के खाते में डालो

नई दिल्ली आदेशों के बाद भी पत्नी और बच्ची को गुजारा नहीं दे रहे व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। खबर है कि अदालत ने व्यक्ति के एम्पलॉयर को ही उसकी सैलरी काटने और सीधे महिला के खाते में रकम डालने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष न्यायालय ने पाया कि कपल करीब 4 सालों से अलग रह रहा है और पत्नी अकेली ही बच्चे का भरण पोषण कर रही है। बच्ची से मिलने तक नहीं आया पिता जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी। लाइव लॉ के अनुसार, अदालत ने पाया कि व्यक्ति ने पूर्व में जारी आदेशों का पालन नहीं किया है। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया है कि 4 साल की बच्ची का ध्यान महिला ही अकेली रख रही है। इतना ही नहीं बच्ची का पति बीते चार सालों से उससे मिलने तक नहीं आया है। कोर्ट की कोई बात नहीं मानी रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने इससे पहले दोनों को शादी खत्म करने के लिए रकम की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा था। अंतरिम राहत के तौर पर पति को 25 हजार रुपये पत्नी को देने के आदेश दिए गए थे। ये रकम मध्यस्थता प्रक्रिया में महिला और उनके बच्चे आने-जाने के खर्च के लिए थी। हालांकि, कोर्ट के इस आदेश का भी पालन नहीं हुआ। बेंच को सूचित किया गया कि मजिस्ट्रेट कोर्ट की तरफ से जारी एक अंतरिम आदेश 2024 में जारी किया गया था। साथ ही बताया गया कि पति पर करीब 1.38 लाख रुपये का बकाया हो गया था। पति ने किया परेशानी का दावा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पति की तरफ से दिए गए हलफनामे की भी जांच की, जिसमें उसने सैलरी 50 हजार रुपये बताई थी। साथ ही कहा था कि वह आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा है। जज ने उससे पूछा कि क्या वह 2.5 लाख रुपये जमा कराना चाहता है, जिसमें अंतरिम गुजारे का एरियर भी शामिल है। इसपर उसने भुगतान से इनकार कर दिया। कोर्ट का फैसला कोर्ट ने कहा, 'ऐसी परिस्थितियों में, हमारे पास प्रतिवादी-पति के नियोक्ता को यह निर्देश देने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है कि पति के वेतन से 25,000 रुपये प्रति माह काटे जाएं। यह राशि सीधे RTGS के माध्यम से उसकी पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी।' बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि वह खासतौर से बच्चे की चिंता है। कोर्ट ने पाया कि महिला अपने रिश्तेदार के पास रहकर बच्ची को खुद ही पाल रही हैं।

ममता बनर्जी का केंद्र पर हमला: राज्यपाल के इस्तीफे को बताया ‘अमित शाह की राजनीतिक चाल’

कोलकाता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल सीवी आनंदबोस के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह सब गृह मंत्री अमित शाह के दबाव की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह का फैसला अमित शाह ही ले सकते हैं। बनर्जी ने कहा कि सीवी आनंदबोस ने किसलिए इस्तीफा दिया इसको लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा कता लेकिन इतना साफ है कि राजनीतिक फायदे को देखते हुए ही इस तरह का परिवर्तन किया जा रहा है। नवंबर 2027 तक था कार्यकाल सीएम बनर्जी ने कहा कि उन्हें शाह से पता चला है कि बोस के जाने के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल एवं पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। बोस ने दिल्ली से बताया, ''हां, मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैं साढ़े तीन साल तक बंगाल का राज्यपाल रहा हूं; यह मेरे लिए पर्याप्त है।' उन्होंने हालांकि अचानक इस्तीफा देने के कारणों का खुलासा नहीं किया, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं क्योंकि उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक था। बनर्जी ने कहा कि शाह ने थोड़ी देर पहले ही उन्हें इस फैसले के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा हैं। इस तरह से एकतरफा फैसले किसी राज्य के हित में नहीं हैं बल्कि पार्टी विशेष के हित में हैं। 'लोक भवन' के अधिकारियों ने पुष्टि की कि त्यागपत्र राष्ट्रपति भवन भेजा जा चुका है। बोस ने 17 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति से लगभग 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। इसके साथ ही वह पश्चिम बंगाल के लगातार दूसरे ऐसे राज्यपाल बन गए जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही पद छोड़ दिया। बनर्जी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह अचानक हुए इस घटनाक्रम से ''स्तब्ध और बेहद चिंतित'' हैं और दावा किया कि उन्हें इसके कारणों का पता नहीं है। उन्होंने कहा, ''हालांकि, यदि बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल बोस पर केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से राजनीतिक कारणों से दबाव डाला गया हो तो मुझे हैरानी नहीं होगी।' टीएमसी चीफ बनर्जी ने कहा, ''मुझे केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) से पता चला है कि आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद बोस का स्थान लेंगे।' लोकतांत्रिक ढांचे पर प्रहार मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शाह ने उन्हें बोस की जगह रवि के आने की जानकारी दी, लेकिन इस मामले में उनसे परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने कहा, "केंद्र को सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हों।' इस बीच बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने संघीय भावना पर हमले के बारे में बनर्जी की टिप्पणियों को ''बेबुनियाद'' करार दिया। उन्होंने कहा, ''राजभवन में बदलाव होना आम बात है। मैंने सुना है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। तृणमूल कांग्रेस सिर्फ इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।'' यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समय पर सामने आया है, क्योंकि निर्वाचन आयोग द्वारा जल्द ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किये जाने की उम्मीद है। अपने कार्यकाल के दौरान, बोस ने कई बार राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ उनका अक्सर टकराव होता रहता था। गुरुवार शाम को दिल्ली से उनके अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक विश्लेषकों और राज्य प्रशासन दोनों को आश्चर्यचकित कर दिया। लोक भवन के अधिकारियों ने बताया कि बोस दिन में पहले दिल्ली गये थे और वहीं से उन्होंने राष्ट्रपति भवन को अपना त्यागपत्र भेजा था। इस घटनाक्रम ने बोस के पूर्ववर्ती जगदीप धनखड़ के पद से इस्तीफा देने की यादें ताजा कर दीं, जिन्होंने राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया था, क्योंकि वह 2022 में उपराष्ट्रपति चुने गए थे। धनखड़ ने पिछले साल अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।  

खाटूश्यामजी मंदिर में आतंकियों की एंट्री से अफरा-तफरी, बाद में खुला राज—ATS की मॉक ड्रिल थी

जयपुर विश्व प्रसिद्ध खाटूश्यामजी मंदिर परिसर शुक्रवार को उस समय सुरक्षा छावनी में तब्दील हो गया, जब मंदिर में आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर एटीएस (Anti-Terrorist Squad) की टीम ने अचानक धावा बोल दिया। हथियारों से लैस जवानों की त्वरित कार्रवाई और घेराबंदी को देखकर परिसर में हड़कंप मच गया, लेकिन कुछ ही देर बाद जब सच्चाई सामने आई तो सभी ने राहत की सांस ली। त्वरित कार्रवाई और जवाबी हमला आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिलते ही एटीएस के जवानों ने मोर्चा संभाला और योजनाबद्ध तरीके से मंदिर परिसर में प्रवेश किया। कुछ ही मिनटों के भीतर टीम ने कड़ा संघर्ष करते हुए दो काल्पनिक आतंकवादियों को ढेर कर दिया। कार्रवाई के दौरान जवानों ने उनके कब्जे से भारी मात्रा में हथियार और बारूद बरामद करने का प्रदर्शन भी किया। सुरक्षा परखने के लिए था अभ्यास जैसे ही एटीएस के अधिकारियों ने इसे मॉकड्रिल घोषित किया, वहां मौजूद श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासन की चिंता दूर हुई। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता की जांच करना, भीड़भाड़ वाले संवेदनशील स्थानों पर क्विक रिस्पॉन्स टाइम को मापना और मंदिर की सुरक्षा घेराबंदी और समन्वय को और अधिक पुख्ता करना है। चौथी बार हुआ सुरक्षा अभ्यास गौरतलब है कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र खाटू श्याम मंदिर की संवेदनशीलता को देखते हुए एटीएस अब तक यहां चार बार मॉकड्रिल कर चुकी है। इस सफल अभ्यास के दौरान एटीएस टीम के साथ मंदिर सुरक्षा गार्ड प्रभारी रघुनाथ सिंह, मंदिर समिति के लक्ष्मीकांत रंगलालका सहित अन्य सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी भी मुस्तैद रहे।

गार्ड से मोबाइल पर गाना बजाकर ठुमके लगवाए, फिर डंडों और बेल्ट से पिटाई, बेइज्जती का वीडियो वायरल

 सूरजपुर छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के देवनगर इलाके से एक विचलित करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक फॉरेस्ट नर्सरी में तैनात फॉरेस्ट गार्ड के साथ कुछ स्थानीय युवकों ने न केवल मारपीट की, बल्कि उसे सबके सामने नाचने के लिए भी मजबूर किया. इस पूरी घटना का वीडियो हमलावरों ने खुद रिकॉर्ड किया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।  दरअसल, फॉरेस्ट गार्ड अपनी एक महिला साथी के साथ नर्सरी में मौजूद था. इसी दौरान वहां स्थानीय लड़कों का एक गुट पहुंचा और विवाद करने लगा. बात इतनी बढ़ गई कि उन लड़कों ने गार्ड को घेर लिया और डंडों व बेल्ट से उसकी जमकर पिटाई की।  डांस करने पर किया मजबूर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि हमलावर डरे-सहमे गार्ड को मोबाइल पर म्यूजिक बजाकर नाचने के लिए मजबूर कर रहे हैं. गार्ड वर्दी में था और हाथ जोड़कर उनसे विनती कर रहा था, लेकिन युवकों ने उसकी एक न सुनी और उसकी बेइज्जती का वीडियो रिकॉर्ड करते रहे।  विभाग ने जारी किया 'कारण बताओ' नोटिस वीडियो वायरल होने के बाद सूरजपुर फॉरेस्ट डिवीजन के अधिकारियों ने संज्ञान लिया है. हालांकि, गार्ड के साथ हुई मारपीट की निंदा हो रही है, लेकिन वन विभाग ने खुद गार्ड को ही 'कारण बताओ नोटिस' जारी कर दिया है. विभाग ने पूछा है कि वह ड्यूटी के दौरान किन परिस्थितियों में एक महिला के साथ नर्सरी में मौजूद था।  पुलिस की कार्रवाई का इंतजार पुलिस का कहना है कि अब तक फॉरेस्ट गार्ड की ओर से इस हमले को लेकर कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही लिखित शिकायत मिलेगी, वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

सारस संरक्षण को नई उड़ान: मैनपुरी और इटावा में विकसित होगा सारस सर्किट

लखनऊ योगी सरकार प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस (क्रेन) के संरक्षण और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सारस सर्किट की स्थापना कर रही है। सारस सर्किट का विकास प्रदेश के मैनपुरी और इटावा जिलों के वेटलैंड्स में किया जा रहा है, जिसके तहत मैनपुरी के किर्थुआ, सहस, कुर्रा जरावां, सौज एवं समन के साथ इटावा के सरसई नावर और परौली रामायण वेटलैंड एरिया में सारस सर्किट विकसित किया जा रहा है। सारस सर्किट में सारस पक्षी के संरक्षण के साथ इको-टूरिज्म की गतिविधियों को भी शामिल किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य सारस पक्षी और वेटलैंड्स संरक्षण के साथ स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देना है। यह स्थानीय लोगों को आय के अवसर उपलब्ध करवाएगा और सारस पक्षी और वेटलैंड्स के संरक्षण के लिए भी प्रेरित करेगा। इन परियोजनाओं का विकास ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से प्रदेश का वन विभाग कर रहा है। दुनिया में सबसे लंबी उड़ान के लिए जाना जाने वाला सारस पक्षी, उत्तर प्रदेश का राजकीय पक्षी है। इसका आवास और प्रजनन क्षेत्र विशेषतौर पर राज्य के मैनपुरी, इटावा, एटा, अलीगढ़ की वेटलैड्स में है। जिसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार सारस पक्षी के संरक्षण के लिए सारस सर्किट का विकास कर रही है। जहां प्रदेश का वन विभाग, यूपी ईको टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से क्षेत्र के उथले जलाशयों, तालाबों और अन्य वेटलैड्स को संरक्षित कर सारस पक्षी के अनुकूल बनाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही क्षेत्र में ईको टूरिज्म की गतिविधियों को भी विकसित किया जा रहा है। इस क्रम में मैनपुरी और इटावा जिलों के सारस सर्किट में प्रवेश द्वार, व्यू पॉइंट, डेक एवं बोटिंग स्पॉट, बटरफ्लाई गार्डन, सोलर साइट लाइटिंग, इंटरप्रिटेशन सेंटर, पार्किंग जैसी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। साथ ही, सारस सर्किट में पर्यटकों की सुविधा के लिए सूचना केंद्र, ईको-टॉयलेट ब्लॉक, पार्किंग, इंटरैक्टिव साइनेज, फूड कियोस्क और ओडीओपी व स्मृति चिन्ह की दुकानें भी विकसित की जाएंगी। ये सुविधाएं पर्यटकों को सारस के प्राकृतिक आवास को देखने और समझने का अवसर प्रदान करेंगी। योगी सरकार की यह पहल न केवल सारस (क्रेन) और अन्य पक्षियों जैसे ग्रे हेरॉन, ओपन-बिल्ड स्टॉर्क आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि क्षेत्र के वेटलैंड्स के संरक्षण को भी बढ़ावा देगी। यह इन क्षेत्रों में भू-जल स्तर में वृद्धि के साथ ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों को कम करने और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। साथ ही, इन क्षेत्रों में इको-टूरिज्म की गतिविधियों के विकास से स्थानीय समुदाय के लोगों को आय और रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे स्थानीय लोगों और घूमने के लिए आने वाले पर्यटकों में भी पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता में बढ़ोतरी होगी। सारस पक्षी को उसके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षा और संरक्षण प्रदान कर योगी सरकार क्षेत्र की जैव विविधता को संजोने का अनूठा प्रयास कर रही है। ये परियोजनाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सतत विकास की अवधारणा को सफल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

बजट सत्र में नहीं चला सदन, पंजाब विधानसभा की कार्यवाही 8 मार्च तक टली

चंडीगढ़ पंजाब विधानसभा का बजट सेशन रविवार, 8 मार्च को सुबह 10 बजे तक के लिए टाल दिया गया है। सुबह बजट सेशन शुरू होते ही कांग्रेस ने भारी हंगामा किया और अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरा। कांग्रेसियों ने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और फिर विधानसभा से वॉकआउट कर दिया। कांग्रेस ने AAP के मंत्रियों और विधायकों पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने और विधानसभा परिसर में शिष्टाचार भंग करने के गंभीर आरोप लगाए। प्रताप सिंह बाजवा ने पंजाब में बेअदबी और एनकाउंटर की घटनाओं पर सरकार को घेरा और नारे लगाए। इसके बाद विपक्ष ने पंजाब में कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर हंगामा किया और प्रदर्शन के बाद कांग्रेस विधानसभा से वॉकआउट कर गई।

गोल्डन टेंपल में सोने की धुलाई सेवा, बर्मिंघम के सेवादार को जिम्मेदारी, केमिकल का प्रयोग नहीं होगा

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर में सचखंड श्री हरमंदिर साहिब श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) के गुंबदों पर लगे सोने की धुलाई के कार्य शुक्रवार को प्रारंभ हो गया। शिरोमणि कमेटी ने इस कार्य का जिम्मा बर्मिंघम स्थित गुरु नानक निष्काम सेवक जत्था के प्रमुख भाई साहब भाई मोहिंदर सिंह को सौंपा है।इस अवसर पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी, सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के अतिरिक्त मुख्य ग्रंथी ज्ञानी अमरजीत सिंह और निष्काम सेवक जत्था के प्रमुख भाई साहब भाई मोहिंदर सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।   एसजीपीसी अध्यक्ष धामी ने कहा कि सचखंड श्री हरमंदिर साहिब में स्थापित सोने की स्वच्छता और रखरखाव को ध्यान में रखते हुए, इसकी समय-समय पर धुलाई की जाती है, जो गुरु नानक निष्काम सेवा जत्था बर्मिंघम के प्रमुख भाई साहब भाई महिंदर सिंह द्वारा संगत के सहयोग से की जाती है। उन्होंने कहा कि निष्काम सेवक जत्था यह सेवा नि:शुल्क प्रदान करता है। वे सचखंड श्री हरमंदिर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब और घंटा घर ड्योढ़ी के गुंबदों पर स्थापित सोने की परत की भी धुलाई करेंगे। उन्होंने कहा कि निष्काम सेवक जत्था आवश्यकतानुसार सचखंड श्री हरमंदिर साहिब के आंतरिक भाग में सोने की परत और तामचीनी की मरम्मत भी निरंतर करता रहता है। सफाई में केमिकल का प्रयोग नहीं भाई साहिब भाई महिंदर सिंह ने जानकारी दी कि यह सेवा अगले 10 से 12 दिनों तक चलेगी। उन्होंने बताया कि सोने की सफाई के लिए किसी भी प्रकार के रसायन (केमिकल) का प्रयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय, रीठे को उबालकर उसके पानी और नींबू के रस जैसे प्राकृतिक तरीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे सोने की शुद्धता और चमक बनी रहे। इस अवसर पर अंतरिम सदस्य स. गुरप्रीत सिंह झब्बर, सदस्य भाई राजेंद्र सिंह मेहता, स. फुम्मन सिंह, बाबा सतनाम सिंह किला आनंदगढ़, सिख विद्वान भाई गुरबख्श सिंह गुलशन, सचिव स. बलविंदर सिंह काहलवां, निजी सचिव स. शाहबाज सिंह, श्री दरबार साहिब के मैनेजर स. भगवंत सिंह धंगेड़ा और निष्काम सेवक जत्थे के अन्य सेवादार व संगत भी उपस्थित थे। समय-समय पर की जाती है गोल्डन टेंपल के सोने की सफाई शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बताया कि श्री हरमंदिर साहिब के सोने की चमक और उसकी देखभाल के लिए समय-समय पर धुलाई की जाती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सेवा निष्काम सेवक जत्था बर्मिंघम द्वारा संगत के सहयोग से पूरी तरह निःस्वार्थ भाव से की जा रही है। इस सेवा के तहत श्री हरमंदिर साहिब के मुख्य गुंबद के अलावा श्री अकाल तख्त साहिब, गुरुद्वारा बाबा अटल राय साहिब और घंटा घर ड्योढ़ी के गुंबदों पर लगे सुनहरे पत्तरों की भी सफाई की जाएगी। दरबार साहिब के अंदरूनी हिस्से में सुनहरे पत्तरों और मीनाकारी की मरम्मत का कार्य भी लगातार जारी है।  इसी बीच, गुरु नानक निष्काम सेवक जत्था बर्मिंघम के प्रमुख ने बताया कि गुरु साहब की कृपा से, शिरोमणि समिति के सहयोग से जत्था प्रतिवर्ष सोने की धुलाई का कार्य करता है। इसी क्रम में, इस बार भी संगत विशेष रूप से सोने की धुलाई के लिए आई है। उन्होंने बताया कि यह सेवा लगभग 10-12 दिनों तक चलेगी, जिसके दौरान पवित्र स्थान के बाहरी हिस्से पर लगे सोने की धुलाई प्राकृतिक तरीके से की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि सोने की धुलाई के लिए रीठा उबालकर पानी और नींबू के रस का उपयोग किया जाता है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक विधि है और इसमें किसी भी रसायन का प्रयोग नहीं किया जाता है। 

कविंद्र गुप्ता बने हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, 13 साल में RSS से जुड़कर जेल गए, शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का गवर्नर नियुक्त किया गया

शिमला  लद्दाख के उप-राज्यपाल कविंद्र गुप्ता हिमाचल प्रदेश के नए गवर्नर नियुक्त किए गए। हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को तेलंगाना का गवर्नर बनाया गया है। राष्ट्रपति कार्यालय ने गुरुवार देर रात इस बाबत आदेश जारी किए। लद्दाख और हिमाचल समेत 9 राज्यों में गवर्नर बदले गए। यह फेरबदल पश्चिम बंगाल के गवर्नर डॉ. सीवी आनंद बोस के इस्तीफा देने के बाद किया गया। हिमाचल के नए गवर्नर कविंद्र गुप्ता जम्मू-कश्मीर विधानसभा के स्पीकर और जम्मू के मेयर रह चुके हैं। इसके बाद उन्हें जुलाई 2025 में लद्दाख का उप-राज्यपाल बनाया गया। उन्होंने पिछले साल 18 जुलाई को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के तीसरे उप राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने करीब 9 महीने तक इस पद सेवाएं दी और बीते कल अपने पद से इस्तीफा दिया। इसके बाद उन्हें हिमाचल प्रदेश के गवर्नर की जिम्मेदारी दी गई है। 3 बार मेयर रह चुके जम्मू शहर के जानीपुर निवासी 66 वर्षीय कुलविंद्र गुप्ता निरंतर 3 बार जम्मू के महापौर भी रह चुके हैं। उन्होंने BJP की राज्य इकाई के महासचिव के तौर पर भी काम किया था।इसके अलावा 1993 से 1998 तक वह लगातार दो बार भारतीय जनता युवा मोर्चा की जम्मू कश्मीर इकाई के अध्यक्ष भी रहे। कविंद्र गुप्ता साल 2014 के विधानसभा चुनाव में गांधी नगर सीट से पहली बार MLA चुने गए थे। इसके बाद, उन्हें विधानसभा स्पीकर चुना गया। उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत विश्व हिंदू परिषद के सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हुए हुई थी और इमरजेंसी के दौरान करीब 13 महीने वह जेल में भी रहे थे। अब तेलंगाना गवर्नर का जिम्मा संभालेंगे शुक्ल वहीं, हिमाचल के राज्यपाल शिव प्रताप शुल्क को तेलंगाना गवर्नर का जिम्मा दिया है। शुल्क ने 18 फरवरी 2023 को हिमाचल के राज्यपाल के तौर पर शपथ ली थी। उन्होंने लगभग 3 साल तक हिमाचल गवर्नर के तौर पर सेवाएं दी। इन प्रदेशों में भी बदले गवर्नर राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी आदेशों के अनुसार- तरनजीत सिंह संधु को दिल्ली का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। तेलंगाना के राज्यपाल जिश्नु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। नंद किशोर यादव को नगालैंड और लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया। तमिलनाडू के राज्यपाल आरएन रवि अब से पश्चिम बंगाल और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर तमिलनाडु के राज्यपाल का काम संभालेंगे, जबकि दिल्ली के राज्यपाल वीके सक्सेना को लद्दाख का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

कर्नाटक बजट में अल्पसंख्यकों पर खास ध्यान, शिक्षा-कल्याण के लिए खोला खजाना

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शुक्रवार को विधानसभा में राज्य का बजट पेश करते हुए अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा, कल्याण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई नई योजनाओं की घोषणा की। इन योजनाओं का उद्देश्य अल्पसंख्यक छात्रों के लिए शैक्षिक सुविधाओं का विस्तार करना, कौशल विकास को बढ़ावा देना और आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करना है। अपने बजट भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों की बढ़ती मांग को देखते हुए छात्रावास सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिक मांग वाले जिलों में 150 क्षमता वाले 25 नए पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास शुरू किए जाएंगे। सीएम ने कहा कि मौजूदा 25 छात्रावासों की क्षमता में 50 और छात्रों की बढ़ोतरी की जाएगी। बजट पेश करते हुए, उन्होंने कहा कि सरकार माइनॉरिटी स्टूडेंट्स और कम्युनिटीज़ के लिए एजुकेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल सपोर्ट सिस्टम को बढ़ाएगी, साथ ही एंटरप्रेन्योरशिप और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा देगी। स्कूलों का उन्नयन और उच्च शिक्षा की तैयारी उन्होंने कहा कि 2026-27 में 25 नए संत शिशुनाला शरीफ रेजिडेंशियल स्कूल शुरू किए जाएंगे। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में कहा कि 117 मौलाना आज़ाद मॉडल स्कूलों और उर्दू स्कूलों को 600 करोड़ रुपये की लागत से कर्नाटक पब्लिक स्कूलों के तौर पर अपग्रेड करने का काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस साल, 400 करोड़ रुपये की लागत से इसी मॉडल के तहत और 100 स्कूलों को अपग्रेड किया जाएगा। लर्निंग सेंटर्स और सिटीज़न सर्विस सेंटर्स का ऐलान सिद्धारमैया ने कहा कि 25 मोरारजी देसाई रेजिडेंशियल स्कूलों में PUC साइंस और कॉमर्स स्ट्रीम शुरू की जाएंगी। इसके अलावा 18 APJ अब्दुल कलाम रेजिडेंशियल स्कूलों में कॉमर्स स्ट्रीम शुरू की जाएगी। सिद्धारमैया ने कहा कि इसके अलावा, माइनॉरिटी रेजिडेंशियल स्कूलों के चुने हुए काबिल PUC स्टूडेंट्स को K-CET, JEE और NEET एग्जाम के लिए अच्छी कोचिंग देने के लिए सेंटर्स ऑफ़ एक्सीलेंस के तौर पर चार रेजिडेंशियल स्कूल बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के बीच लगातार सीखने को बढ़ावा देने के लिए लर्निंग सेंटर्स और सिटीज़न सर्विस सेंटर्स भी बनाए जाएंगे। चार नए वर्किंग विमेन हॉस्टल्स बनेंगे उन्होंने कहा कि वर्किंग विमेन हॉस्टल्स की डिमांड ज़्यादा है, इसलिए बेंगलुरु में 100 लोगों की कैपेसिटी वाले चार नए वर्किंग विमेन हॉस्टल्स शुरू किए जाएंगे। सिद्धारमैया ने कहा कि सरकार ने जैन, बुद्धिस्ट और सिख कम्युनिटीज़ के बड़े डेवलपमेंट के लिए 100 करोड़ रुपये भी रखे हैं। उन्होंने बुद्धिस्ट कम्युनिटी के धम्मचारियों को 6,000 रुपये महीने का मानदेय देने की घोषणा की। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी अल्पसंख्यक छात्रों में से 5,000 छात्रों को लैपटॉप खरीदने के लिए 50,000 रुपये देने का भी उन्होंने ऐलान किया। आर्थिक सशक्तिकरण और स्वरोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देने के लिए सरकार फास्ट फूड ट्रक या मोबाइल किचन कियोस्क उपलब्ध कराएगी। इसके तहत परियोजना लागत का 75% या अधिकतम 3 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक महिला सहकारी समितियां भी स्थापित की जाएंगी। अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं जैन, बौद्ध और सिख समुदायों के समग्र विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान। बौद्ध समुदाय के धम्माचारियों को प्रति माह 6,000 रुपये मानदेय। हुब्बली और कलबुर्गी में नए हज भवनों का निर्माण। वक्फ संस्थानों के 31 महिला पीयू कॉलेजों को डिग्री कॉलेज में अपग्रेड किया जाएगा। सवनूर में एक नया महिला पीयू कॉलेज शुरू होगा। व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित वक्फ संपत्तियों का पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकास किया जाएगा। बीजेपी ने किया विरोध इन घोषणाओं पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। भारतीय जनता पार्टी की कर्नाटक इकाई ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार “तुष्टिकरण की राजनीति” कर रही है और राज्य के खजाने का बड़ा हिस्सा अपने वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए खर्च कर रही है।  

PM मोदी के पोस्टर से छेड़छाड़, जदयू दफ्तर में विरोध प्रदर्शन; नीतीश के राज्यसभा जाने पर नाराज़गी

पटना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले का उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड में विरोध तेज हो गया है। पटना स्थित जदयू के प्रदेश कार्यालय में शुक्रवार को बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमा हो गए और नीतीश के समर्थन में नारेबाजी करने लगे। जदयू कार्यालय में लगे पोस्टर में कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर कालिख भी पोत दी। पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश से राज्यसभा जाने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। शुक्रवार सुबह से पटना में जदयू कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। जदयू कार्यालय के बाहर कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए और बैनर लगाकर नारेबाजी करने लगे। पार्टी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह बिहार के जनादेश का अपमान है। बिहार की जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर वोट दिया था। उनके चेहरे पर बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा गया था। इसलिए मुख्यमंत्री पद के लिए वही पात्र हैं। जदयू कार्यकर्ताओं ने जदयू अध्यक्ष एवं सीएम नीतीश कुमार से राज्यसभा जाने का फैसला वापस लेने की मांग की है। जदयू कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ इस दौरान जदयू कार्यालय के बाहर लगे फिर से नीतीश और मोदी के पोस्टर में पीएम के चेहरे पर कालिख भी पोत दी गई। साथ ही जदयू कार्यालय के गेट पर कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश से राज्यसभा जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए पोस्टकार्ड भी लिखे। बता दें कि लगभग दो दशक तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश अब मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा जा रहे हैं। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए गुरुवार को यह ऐलान किया। उन्होंने जदयू प्रत्याशी के तौर पर गुरुवार को ही बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन भी कर दिया। नीतीश कुमार ने अपने पोस्ट में कहा कि वह अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं। उनकी बिहार विधानमंडल और संसद के दोनों सदनों के सदस्य रहने की इच्छा है। वह विधायक, एमएलसी और लोकसभा सांसद रह चुके हैं और अब राज्यसभा सांसद के रूप में नई पारी की शुरुआत करेंगे। बताया जा रहा है कि नीतीश के राज्यसभा सांसद बनते ही अगले महीने बिहार में नई सरकार का गठन होगा और सूबे को पहली बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का मुख्यमंत्री मिलेगा। एक दिन पहले भी जदयू कार्यालय और सीएम आवास के बाहर पार्टी कार्यकर्ताओं ने नीतीश के इस फैसले का विरोध करते हुए हंगामा किया था। शुक्रवार को एहतियातन पुलिस ने मुख्यमंत्री आवास की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया।