samacharsecretary.com

होली के मौके पर बिहार जाने वालों के लिए राहत, राजस्थान और MP से चलेंगी दो स्पेशल ट्रेनें

भोपाल  होली के त्योहार के दौरान एक जगह से दूसरी जगह पर आने-जाने वाले यात्रियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी हो जाती है। इसी अतिरिक्त यात्री दबाव को देखते हुए रेल प्रशासन ने लोगों को परेशानी से बचाने और उनकी यात्रा को सुगम बनाने के लिए कुछ स्पेशल ट्रेनों की घोषणा की है। इस दौरान पश्चिम मध्य रेलवे ने मध्य प्रदेश के रानी कमलापति स्टेशन और राजस्थान के सोगरिया स्टेशन से बिहार के दानापुर के लिए दो विशेष ट्रेन चलाने की जानकारी दी है। ये दोनों ट्रेन अलग-अलग दिनों पर चलेंगी और दोनों दिशाओं में कुल चार फेरे लगाएंगी। इसके अलावा रेल विभाग ने भोपाल से रीवा और रानी कमलापति स्टेशन से रीवा के बीच भी विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है। इन ट्रेनों का किराया सामान्य ट्रेनों की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक रहेगा। इन सभी ट्रेनों के चलने के समय और दिन की विस्तृत जानकारी हम आपको इस रिपोर्ट में बता रहे हैं।     गाड़ी संख्या 09821/09822 सोगरिया-दानापुर-सोगरिया स्पेशल ट्रेन (2-2 ट्रिप)     गाड़ी संख्या 01667/01668 रानी कमलापति-दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन (2-2 ट्रिप) ट्रेन नंबर 09821 सोगरिया से दानापुर स्पेशल ट्रेन कब चलेगी- 28 फरवरी 2026 (शनिवार) एवं 7 मार्च 2026 (शनिवार) प्रस्थान का समय- सोगरिया से रात 23:10 बजे प्रस्थान करेगी पहुंचने का समय- दूसरे दिन रात्रि 23:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी ट्रेन नंबर 09822 दानापुर से सोगरिया स्पेशल ट्रेन कब चलेगी- 2 मार्च 2026 (सोमवार) एवं 9 मार्च 2026 (सोमवार) प्रस्थान का समय- दानापुर स्टेशन से मध्य रात्रि 1:15 बजे प्रस्थान करेगी पहुंचने का समय- अगले दिन मध्य रात्रि 01:10 बजे सोगरिया स्टेशन पहुंचेगी। रास्ते में यह ट्रेन दोनों दिशाओं में इन स्टेशनों पर रुकेगी- बारां, सालपुरा, छाबड़ा गुगोर, रुठियाई, गुना, अशोकनगर, महादेवखेड़ी, सागर, दमोह, कटनी, मैहर, सतना, माणिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर एवं आरा स्टेशन होकर दानापुर पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 01667 रानी कमलापति-दानापुर स्पेशल ट्रेन (2 फेरे) कब चलेगी- 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) और 2 मार्च 2026 (सोमवार) प्रस्थान का समय- रानी कमलापति से दोपहर 14:25 बजे शुरू होगी पहुंचने का समय- अगले दिन सुबह 08:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी विभिन्न स्टेशनों से निकलने का समय- रानी कमलापति स्टेशन (दोपहर 14:25 बजे प्रस्थान), नर्मदापुरम (15:25 बजे), इटारसी (15:55 बजे), पिपरिया (17:10 बजे), गाडरवारा (17:45 बजे ), नरसिंहपुर (18:25 बजे), जबलपुर (19:40 बजे ), सिहोरा रोड (20:10 बजे), कटनी (20:50 बजे), मैहर (21:40 बजे), सतना (22:15 बजे) से निकलकर मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर एवं आरा होते हुए अगले दिन सुबह 08:45 बजे दानापुर स्टेशन पहुंचेगी। गाड़ी संख्या 01668 दानापुर-रानी कमलापति स्पेशल ट्रेन (2 फेरे) कब चलेगी- 28 फरवरी 2026 (शनिवार) और 3 मार्च 2026 (मंगलवार) प्रस्थान का समय- दानापुर स्टेशन से सुबह 11:15 बजे शुरू होगी पहुंचने का समय- अगले दिन सुबह 08:55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। विभिन्न स्टेशनों से निकलने का समय- दानापुर स्टेशन से 11:15 बजे प्रस्थान कर आरा, बक्सर, PDDU जंक्शन, मिर्जापुर, प्रयागराज छिवकी, मानिकपुर होते हुए सतना पहुंचेगी फिर यहां से रात्रि 01:00 बजे निकलेगी, फिर रात्रि 1.28 बजे मैहर से, रात्रि 2:30 बजे कटनी से, रात्रि 3:13 बजे सिहोरा रोड से, तड़के 4.00 बजे जबलपुर से, सुबह 5:00 बजे नरसिंहपुर से, सुबह 5:30 बजे गाडरवारा से, सुबह 6:00 बजे पिपरिया से, सुबह 7:10 बजे इटारसी से, सुबह 7:48 बजे नर्मदापुरम से निकलकर सुबह 8:55 बजे रानी कमलापति स्टेशन पहुंचेगी। रास्ते में यह ट्रेन दोनों दिशाओं में इन स्टेशनों पर रुकेगी- नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, गाडरवारा, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिहोरा रोड, कटनी, मैहर, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्जापुर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन, बक्सर एवं आरा स्टेशनों पर रुकेगी। स्पेशल ट्रेन के ठहराव एवं समय के बारे में विस्तृत जानकारी www.enquiry.indianrail.gov.in से भी प्राप्त की जा सकती है। रेलयात्री किसी भी कंप्यूटरीकृत आरक्षण केन्द्र या ऑनलाइन IRCTC की वेबसाइट से इन होली स्पेशल ट्रेनों में आरक्षण सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

MSP पर गेहूं उपार्जन के लिए किसानों में उत्साह, 20,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन दर्ज

20 हजार से अधिक किसानों ने समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये कराया पंजीयन : मंत्री  राजपूत भोपाल  रबी विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन के लिये अब तक 20 हजार 98 किसानों ने पंजीयन करा लिया है। किसान 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  गोविंद सिंह राजपूत ने किसानों से अपील की है कि निर्धारित समय में पंजीयन अवश्य करा लें। उन्होंने बताया है कि किसान पंजीयन की व्यवस्था को सहज और सुगम बनाया गया है। कुल 3186 पंजीयन केन्द्र बनाये गए हैं। केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिये गेहूँ का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2585 रूपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया है, जो गत वर्ष से 160 रूपये अधिक है। मंत्री  राजपूत ने बताया कि अभी तक इंदौर संभाग में 4084, उज्जैन में 9524, ग्वालियर में 476, चम्बल में 123, जबलपुर में 788, नर्मदापुरम में 900, भोपाल में 3602, रीवा में 68, शहडोल में 83 और सागर में 450 किसानों ने पंजीयन कराया है। पंजीयन की नि:शुल्क व्यवस्था पंजीयन की निःशुल्क व्यवस्था ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर, तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केन्द्र पर और सहकारी समितियों एवं सहकारी विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केन्द्र पर की गई है। पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था पंजीयन की सशुल्क व्यवस्था एम.पी. ऑनलाईन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेन्टर कियोस्क, लोक सेवा केन्द्र और निजी व्यक्तियों द्वारा संचालित साइबर कैफे पर की गई है। किसानों को करें एसएमएस खाद्य मंत्री  राजपूत ने बताया है कि विगत रबी एवं खरीफ के पंजीयन में जिन किसानों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, उन्हें एसएमएस से सूचित करने के निर्देश दिये गये हैं। गांव में डोंडी पिटवाकर ग्राम पंचायतों के सूचना पटल पर पंजीयन सूचना प्रदर्शित कराने तथा समिति/ मंडी स्तर पर बैनर लगवाने के निर्देश भी दिये गये हैं।  

भोपाल नगर निगम की अपील पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा—सिर्फ नियम नहीं, जमीन पर दिखे सुधार

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों में बार-बार बदलाव करने से जमीनी हकीकत में तब तक सुधार नहीं होगा, जब तक अधिकारी आने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम, 2026 के हिसाब से वेस्ट मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत नहीं करते। जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने भोपाल नगर निगम द्वारा दायर उन अपीलों की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिनमें राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की केंद्रीय क्षेत्रीय पीठ, भोपाल द्वारा लगाए गए भारी पर्यावरणीय मुआवजे को चुनौती दी गई थी। ग्रीन ट्रिब्युनल ने अपने 31 जुलाई 2023 और 11 अगस्त 2023 के विवादित आदेशों के माध्यम से, नगर निकाय को क्रमशः 1.80 करोड़ रुपए और 121 करोड़ रुपए का पर्यावरणीय मुआवजा देने का निर्देश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में नगरपालिका अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करने वाली विकसित हो रही वैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कहा कि नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (प्रबंधन और संचालन) नियम, 2000 को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था, जिसे अब ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाला है, हालांकि जस्टिस मिथल की अध्यक्षता वाली पीठ ने जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन में मौजूद कमियों पर चिंता व्यक्त की। आदेश में कहा गया है, "अदालत का मानना है कि जमीनी स्तर पर कई कारकों के कारण वैधानिक तंत्र वांछित परिणाम नहीं दे रहा है।" नए नियमों की शुरुआत को "स्वागत योग्य कदम" बताते हुए शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि जब तक समय पर प्रारंभिक कार्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक नए नियमों की मात्र अधिसूचना पर्याप्त नहीं होगी। पीठ ने टिप्पणी की, "नए नियमों की शुरुआत एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रभावी तिथि से पहले आवश्यक कार्य पूरा कर लें, अन्यथा 2026 के नियम जमीनी हकीकत में सुधार नहीं ला पाएंगे।" पीठ ने पक्षकारों के वकीलों की बातों को विस्‍तार से सुनने के बाद अपीलकर्ता निगम को दोनों अपीलों में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार प्रतिवादी के रूप में शामिल करने का निर्देश देकर कार्यवाही के दायरे को व्यापक बनाने का प्रस्ताव रखा। इसमें निर्देश दिया गया कि पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सचिव, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव, मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश के शहरी विकास और आवास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और मध्य प्रदेश के आवास और पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया, "अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह संशोधन करे और सुनवाई के अगले दिन या उससे पहले संशोधित कारण शीर्षक प्रस्तुत करे।" अपीलकर्ता के वकील को भारत संघ के केंद्रीय एजेंसी अनुभाग को अपील की प्रतियां सौंपने की अनुमति भी दी गई। मामले की अगली सुनवाई 19 फरवरी को होगी।"

दुनिया से व्यापार का तरीका बदल रहे एफटीए, भारत की बढ़ती ताकत: गोयल

नई दिल्ली केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत के हाल में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (एफटीए) खासकर अमेरिका के साथ हुआ अंतरिम व्यापार समझौता, देश के दुनिया के साथ व्यापार करने के तरीके में संरचनात्मक बदलाव को दिखाते हैं। राष्ट्रीय राजधानी में 'ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट (जीबीएस) 2026' में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में किसानों के हितों की पूरी तरीके से रक्षा की है। उन्होंने संबोधन में कहा कि जब हम अमेरिका के साथ ट्रेड डील के लिए बातचीत कर रहे थे, उसमें हम एक चीज को लेकर बिल्कुल स्पष्ट थे कि हमें अपने किसानों के हितों की रक्षा करनी है। गोयल ने कहा, "जिन क्षेत्रों में हमारे देश में उत्पादन सबसे अधिक है और हमारा देश आत्मनिर्भर है, उन क्षेत्रों को इस डील से बाहर रखा गया है।" उन्होंने आगे कहा,"हमने किसानों के हितों की पूरी तरह से रक्षा की है, संभवतः स्थानीय कृषि उत्पादों के 95 प्रतिशत से अधिक हिस्से की।" गोयल ने आगे कहा कि वे लंबे समय से इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि भारत का कपड़ा क्षेत्र विकास क्यों नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा, "हम वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से भी प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे थे। अब, कपड़ा क्षेत्र यूरोप के लिए बिना किसी शुल्क के खुला है और संयुक्त राज्य अमेरिका ने रेसिप्रोकल टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, इसलिए हम बाकी दुनिया से प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।" उन्होंने पहले कहा था कि भारत को अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते के तहत वस्त्र निर्यात पर वही लाभ मिलेंगे जो बांग्लादेश को अपने समझौते के माध्यम से मिले थे। वस्त्र निर्यातकों को बांग्लादेश के समान व्यवहार का आश्वासन दिया गया था। इस कार्यक्रम में गोयल ने इस बात पर भी जोर दिया कि एफटीए एक स्पष्ट ढांचे पर आधारित होते हैं, जिसमें विश्वास, पारदर्शिता और समयबद्ध निश्चितता शामिल है।" केंद्रीय मंत्री ने भारत-ईएफटीए समझौते का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे नई दिल्ली व्यापार साझेदारी के स्वरूप को फिर से परिभाषित कर रही है। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) में आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड शामिल हैं। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'रिफॉर्म एक्सप्रेस'को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है।" आगे कहा, "आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और आने वाले वर्षों में यह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगी।"

संगरूर सीमेंट प्लांट विवाद: सुप्रीम कोर्ट सख्त, पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

पंजाब पंजाब के संगरूर जिले में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं और किसानों को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने श्री सीमेंट को दिए गए सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) को रद्द कर दिया है। जानकारी के अनुसार, संगरूर में सीमेंट प्लांट स्थापित करने को लेकर लंबे समय से स्थानीय किसानों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा विरोध किया जा रहा था। उनका कहना था कि इससे कृषि भूमि और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। मामला अदालत तक पहुंचने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कंपनी को दिया गया सीएलयू रद्द कर दिया। कोर्ट के इस फैसले को आंदोलन कर रहे किसानों और पर्यावरण संगठनों की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल इस फैसले के बाद क्षेत्र में प्रस्तावित प्लांट की स्थापना पर रोक लग गई है। कोर्ट ने एनवायरनमेंट पर पड़ने वाले असर और CLU प्रोसेस में कमियों के आधार पर फैसला सुनाया, जिससे इलाके की खेती और एनवायरनमेंट को बड़ा नुकसान होने से बचाया जा सका। आपको बता दें कि, श्री सीमेंट संगरूर में एक बड़ा प्लांट लगाना चाहता था, जिसके खिलाफ स्थानीय किसानों और पर्यावरणविदों का लंबे समय से संघर्ष चल रहा था।

कानूनी सीमा से आगे भी राहत: 28 हफ्ते की गर्भवती नाबालिग रेप पीड़िता को हाईकोर्ट ने दी अबॉर्शन की इजाजत

भोपाल Madhya Pradesh High Court ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की 28 सप्ताह से अधिक की गर्भावस्था को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति दे दी है।   अदालत ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और पीड़िता की शारीरिक व मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने माना कि इतनी कम उम्र में गर्भावस्था जारी रखना नाबालिग के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। मामले की सुनवाई के दौरान विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि गर्भ जारी रहने से बच्ची पर शारीरिक और मानसिक रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके बाद अदालत ने मानवीय आधार पर गर्भ समापन की अनुमति प्रदान की। यह निर्णय राज्य में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

पंचशील समझौते के पीछे क्या थी रणनीति? CDS चौहान ने तिब्बत पर खोला राज

बीजिंग चीफ और डिफेंस स्टॉप जनरल अनिल चौहान ने भारत और चीन के बीच हुए पंचशील समझौते को लेकर अपनी राय रखी है। पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा 1954 में किए गए इस समझौते के तहत भारत ने आधिकारिक रूप से तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में स्वीकार कर लिया था। सीडीएस ने कहा कि इस समझौते के बाद भारत को लगा कि उत्तरी सीमा के विवाद का निपटारा हो गया है, लेकिन चीन ने इसे केवल एक व्यापारिक समझौता माना। देहरादून में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीडीएस अनिल चौहान ने उस समय की परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी चीन का रुख यही था कि यह समझौता केवल व्यापारिक रास्तों के लिए है, इसका सीमा से कोई लेना-देना नहीं है। इसके बाद से ही एलएसी आज तक संवेदनशील बनी हुई है। गौरतलब है कि भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और तत्तकालीन चीनी प्रीमीयर झोउ एनलाई के बीच में पंचशील समझौता हुआ था। इसके पांच सिद्धांत थे, जो शांति पूर्ण सहअस्तित्व पर आधारित थे। सीडीएस ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "ब्रिटिश चले गए, उन्हें एक दिन जाना ही था। वह अपने पीछे छोड़ गए यह सीमाएं, अब भारत को तय करना था कि हमारी सीमा कहां है? नेहरू शायद जानते थे कि पूर्व में हमारे पास मैकमोहन जैसी व्यवस्था है, इसके अलावा लद्दाख के कुछ क्षेत्र पर भी हमारा दावा है, लेकिन यहां इन पहाड़ों और दर्रों के बीच में स्तिथि स्पष्ट नहीं थी, इसलिए शायद उन्होंने पंचशील सिद्धांत का रास्ता चुना। तिब्बत हथियाने के बाद क्षेत्र में शांति चाहता था चीन 1950 के दशक का चीन आज के जितना मजबूत नहीं था। लगातार युद्धों के वजह से उसकी हालत भी कमजोर थी। हालांकि इसके बाद भी उसने तिब्बत को हथिया लिया, लेकिन इसके आगे आने की उसकी हिम्मत नहीं थी। ऐसे में वह भी शांति चाहता था। सीडीएस चौहान ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा, "चीनियों के लिए भी यह समझौता महत्वपूर्ण था, क्योंकि उन्होंने हाल ही में तिब्बत को 'मुक्त' किया था। वे ल्हासा और शिनजियांग तक पहुंच चुके थे। यह क्षेत्र उनकी पहुंच से काफी दूर थे। ऐसे में यहाँ स्थिरता बनाए रखना मुश्किल था, ऐसे में वह भी यहां पर शांति चाहते थे।" सीडीएस चौहान ने बताया कि स्वतंत्र भारत भी चीन के रूप में एक मजबूत दोस्त को देख रहा था, और उसके साथ मजबूत संबंध चाहता था। ऐसे में यह क्षेत्र दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण बन गया।

अयोध्या कोर्ट परिसर खाली, बम धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अयोध्या   राम नगरी अयोध्या में कचहरी को बम से उड़ाए जाने की धमकी से शुक्रवार की दोपहर हड़कंप मच गया। आनन-फानन में दोपहर पौने एक बजे सूचना पर मौके पर बड़ी संख्या में फोर्स पहुंच गई। कचहरी को खाली कर कर सर्च अभियान चलाया जा रहा है। बमरोधी दस्ते, स्नेफर डॉग्स के साथ सर्च अभियान में शामिल है।वरिष्ठ अफसर ने मौके पर पहुंचकर सभी अदालतों एवं अधिवक्ताओं के के बस्ते को खाली करा लिया।लगातार सर्च अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल किसी तरह की कोई अप्रिय सूचना नहीं मिली है। एक फोटो स्टेट की दुकान के पास लावारिस झोले को भी चेक किया गया।  

Mohan Yadav ने उज्जैन बायपास रेल लाइन परियोजना की मंजूरी पर रेल मंत्री का जताया आभार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन बायपास रेलवे लाइन परियोजना की स्वीकृति के लिए रेल मंत्री  वैष्णव का माना आभार नईखेरी-चिंतामन गणेश को जोड़ने वाली 8.60 किमी लंबी बायपास रेलवे लाइन से निर्बाध रेल आवागमन होगा सुनिश्चित उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रेल मंत्रालय द्वारा उज्जैन बायपास लाइन को स्वीकृति प्रदान करने के लिए रेल मंत्री  अश्विनी वैष्णव का आभार माना है। कुल 8.60 किमी की नईखेड़ी-चिंतामन गणेश रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली इस लाइन के प्रारंभ होने से उज्जैन के समीप वैकल्पिक रेल मार्ग उपलब्ध होगा। इससे उज्जैन से ट्रेनों को वापस मोड़ने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और ट्रेनों में विलंब नहीं होगा। यह व्यवस्था 'सिंहस्थ-2028' के दौरान श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाएगी। उल्लेखनीय है कि भारतीय रेल द्वारा 189.04 करोड़ रुपये की इस परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है।  

12 साल छोटे प्रेमी को पत्नी से खरीदने का मामला, महिला अधिकारी पर विवादित आरोप

भोपाल  भोपाल के कुटुंब न्यायालय में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने 90 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'जुदाई' की यादें ताजा कर दीं। भोपाल के एक परिवार में शांति बहाली के लिए रिश्तों का बाकायदा वित्तीय समझौता किया है। एक महिला ने अपनी गृहस्थी में जहर घोल रही 'सौतन' से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की संपत्ति और कैश लेकर अपने पति को हमेशा के लिए उसके नाम कर दिया। शहर के न्यायिक गलियारों में इस 'महंगे तलाक' की चर्चा हर तरफ है। सरकारी विभाग में हैं कार्यरत मामला केंद्रीय सरकारी विभाग का है। यहां तैनात एक 42 वर्षीय अधिकारी का प्रेम प्रसंग अपनी ही सहकर्मी के साथ शुरू हुआ। दिलचस्प बात यह है कि प्रेमिका की उम्र 54 वर्ष है, जो अधिकारी से उम्र में 12 साल बड़ी है। इस प्रेम के परवान चढ़ते ही अधिकारी ने अपने घर, पत्नी और दो मासूम बेटियों की अनदेखी शुरू कर दी। घर में आए दिन होने वाले विवादों ने वातावरण को बोझिल बना दिया था। बेटियों पर पड़ रहा था असर माता-पिता के बीच हर दिन होने वाली 'महाभारत' का सबसे बुरा असर 16 और 12 साल की दो बेटियों पर पड़ रहा था। मानसिक अवसाद से जूझ रही बड़ी बेटी ने हिम्मत दिखाई और मामले को कुटुंब न्यायालय तक ले गई। काउंसलिंग सत्र के दौरान पति ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि वह अपनी पत्नी के साथ खुश नहीं है और उसे अपनी सहकर्मी (प्रेमिका) के साथ ही मानसिक शांति मिलती है। जब रिश्ता जुड़ना नामुमकिन है, तो पत्नी ने एक व्यावहारिक रास्ता चुना। मान ली यह शर्त उसने मांग रखी कि बेटियों के भविष्य और गुजर-बसर के लिए उसे एक शानदार डुप्लेक्स मकान और 27 लाख रुपये नकद दिए जाएं। हैरत की बात यह रही कि पति की प्रेमिका ने बिना किसी हिचकिचाहट के यह शर्त मान ली। प्रेमिका का तर्क था कि वह अपने साथी के परिवार को बेसहारा नहीं देखना चाहती, इसलिए वह अपनी जीवन भर की जमापूंजी इस सौदे में लगाने को तैयार है। पारिवारिक मामलों के काउंसलर्स का मानना है कि जहां भावनाएं खत्म हो जाएं, वहां जबरन साथ रहने से बेहतर सम्मानजनक विदाई होती है। यह निर्णय भले ही समाज को अजीब लगे, लेकिन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और वित्तीय सुरक्षा के नजरिए से यह एक तार्किक कदम है। जब रिश्ता केवल बोझ बन जाए तो शांति के लिए अलग होना ही अच्छा है।