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₹4,000 करोड़ के भूखंड घोटाले में हरीश चंद्र पर गिरी गाज, नौकरी से बर्खास्त

लखनऊ यूपी सरकार ने भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। नोएडा में 4000 करोड़ रुपये के भूखंड घोटाले में वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र को सोमवार को बर्खास्त कर दिया गया है। वह मौजूदा समय कोलकाता पश्चिम बंगाल में स्थानिक प्रतिनिधि खाद्य एवं रसद विभाग के पद पर तैनात थे। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज ने इस संबंध में सोमवार को आदेश जारी किया। हरिश्चंद्र पर नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण में तैनाती के समय ग्राम शहदरा के सेक्टर 140-ए, 141, 142 व 143 में प्राधिकरण द्वारा अर्जित व कब्जा प्राप्त 381527 वर्ग मीटर भूमि को नियमों के विपरीत लीज बैक कर गंभीर अनियमितता के आरोप में 27 सितंबर 2013 को अनुशासनिक कार्रवाई की संस्तुति करते हुए मेरठ के मंडलायुक्त को जांच सौंपी गई। सेटेलाइट इमेज के आधार पर होना था आबादी का निर्धारण जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि नियमों के विपरीत जाकर लीक बैक कर गंभीर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण में तैनाती के दौरान ग्राम शहदरा की आबादी निस्तारण के लिए सर्वे कराया गया। आबादी का निर्धारण सेटेलाइट इमेज के आधार पर किया जाना चाहिए था, लेकिन जानबूझकर तथ्यों को छिपाने के लिए सेटेलाइटज इमेज का उपयोग नहीं किया गया। सर्वे आख्या जो प्रस्तुत की गई, उमें कई भू-मालिक, प्राइवेट कंपनियों व ग्राम के बाहर के निवासियों को भी शामिल किया गया। इसमें उनके द्वारा निजी स्वार्थवश कई तथ्यों को छिपाया गया। जैसे कालम नं-9 में मूल काश्तकार का नाम दर्ज नहीं किया गया। अनियमित तरीके से आवंटित कर दी गई जमीन कालम नं- 13 में विनियमितीकरण समिति को संदर्भित क्षेत्रफल का उल्लेख नहीं किया गया। लीज बैक के लिए डीएम, एसएसपी आदि की सदस्यता वाली समिति, प्राधिकरण बोर्ड व अन्य उच्चाधिकारियों के समक्ष तथ्यों को छिपाते हुए भ्रामक आख्या प्रस्तुत की गई, ताकि लीज बैक शहदरा के बाहर के व्यक्तियों एवं प्राइवेट लिमिटेड कंपनियों के पक्ष में कराई जा सके और अपना स्वार्थ सिद्ध किया जा सके। उनके द्वारा समिति को भ्रामक आख्या प्रस्तुत कर लगभग 400447 वर्ग मीटर भूमि जिसका बाजार मूल्य लगभग 4000 करोड़ रुपये होता है, अनियमित तरीके से भू-माफिया से साठगांठ कर आवंटित कर दी गई। जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया वास्तविक तथ्यों को छिपाने तथा नियमों के विपरीत जानबूझकर भ्रामक आख्या प्रस्तुत करने, स्वयं व संबंधित निजी पक्षकारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से करीब 4000 करोड़ रुपये की क्षति पहुंचाने के लिए प्रथमदृष्टया दोषी पाए गए। जांच में पाया गया कि जानबूझकर तथ्यों को छिपाया गया। राजस्व अभिलेखों में दर्ज प्राइवेट लि. कंपनियों एस्टर इलेक्ट्रिक प्रालि, महानंदा इलेक्ट्रानिक प्रालि व प्रयास गारमेंट लि. कंपनियों द्वारा कुलदीप शर्मा पुत्र भूलेराम के स्थान पर तथ्यों का छिपाव करते हुए केवल कुलदीप शर्मा के नाम सर्वे में अंकित किए गए। 2026 में लाए गए तथ्यों के आधार पर हुई कार्रवाई शासनादेश में कहा गया है कि हरीश चंद्र तत्कालीन सचिव नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण के विरुद्ध शासन द्वारा 27 नवंबर 2013 द्वारा संस्थित विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई में सिद्ध पाए गए आरोप व लोक सेवा आयोग प्रयागराज द्वारा 6 जनवरी 2022 को उपलब्ध कराई गई सहमति तथा हाईकोर्ट इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ के आदेश 3 सितंबर 2026 में लाए गए तथ्यों व के आधार पर उन्हें बर्खास्त किया जाता है। उनके विरुद्ध चल रही विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई समाप्त किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

बेगूसराय होटल कांड: युवती से मारपीट का वीडियो वायरल, केस दर्ज

पटना बिहार में महिला अपराध को लेकर एक औऱ वीडियो वायरल हुआ है। झकझोर कर रख देने वाले इस वीडियो में एक हवसी युवती को बेरहमी से पीटता नजर आ रहा है। हालांकि, लाइव हिन्दुस्तान इस वीडियो की पुष्टि कतई नहीं करता है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में ऐसा कहा जा रहा है कि यह वीडियो बेगूसराय जिले के एक होटल का है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि होटल में युवती के साथ ना सिर्फ मारपीट हुई बल्कि इस हवसी ने उसके साथ रेप भी किया। जानकारी के मुताबिक, आरोपी युवक ने ही यह वीडियो बनाया औऱ फिर यह वीडियो वायरल हो गया। घटना 27 सितंबर की बताई जा रही है और पीड़िता की शिकायत पर 28 सितंबर को केस भी दर्ज किया गया है। वीडियो में दिख रहे हवसी का नाम रोहित बताया जा रहा है। इस वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि रोहित युवती की बेरहमी से पिटाई कर रहा है औऱ युवती उसके सामने गिड़गिड़ा रही है कि वो उसे छोड़ दे और जाने दे। लेकिन रोहित लगातार युवती की पिटाई कर रहा है। युवती को चप्पल, थप्पड़ और घूंसे से पीटा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, युवती घटना के दिन अपने एक परिचित के साथ बाइक से होटल पहुंची थी। यहां उस शख्स ने युवती को रोहित के हवाले कर दिया। रोहित के बारे में कहा जा रहा है कि वो भगवानपुर थाना क्षेत्र के दामोदरपुर गांव का रहने वाला है। आरोप है कि रोहित युवती को लेकर कमरे में गया था। कमरे में जाने के बाद उसने कमरा लॉक कर दिया और फिर युवती से जमकर मारपीट की गई। बंद कमरे में युवती चीखती रही और हैवान उसे पीटता रहा। रोहित ने खुद इस घटना का वीडियो भी बनाया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, युवती के साथ उसी कमरे में रोहित ने दुष्कर्म की वारदात को भी अंजाम दिया। इतना ही नहीं यह भी आरोप है कि उसने युवती का न्यूड वीडियो भी बना लिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, होटल में जुल्म-ओ-सितम सहने के बाद युवती थाने पहुंची थी और उनकी शिकायत दर्ज की गई। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नगर थाने के एसएचओ सतीश कुमार हिमांशु ने कहा कि पीड़िता के साथ होटल में मारपीट की गई है। जिसका वीडियो भी पुलिस के हाथ लगा है। उन्होंने यह भी कहा है कि आऱोपी रोहित कुमार के खिलाफ फिलहाल प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बहरहाल आपको बता दें कि पिछले कुछ दिनों में बिहार के जमुई और बांका समेत कुछ अन्य जिलों से महिलाओं पर अपराध को लेकर कुछ वीडियो वायरल हुए हैं। पुलिस लगातार इन हवसियों पर कार्रवाई भी कर रही है। लेकिन लगातार वीडियो सामने आने से राज्य में महिला सुरक्षा पर सवाल जरूर उठे हैं।

IIT-IIM से पढ़ीं दिव्या मित्तल अब राजनीति में रखेंगी कदम

लखनऊ पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल अब राजनीति में कदम रखने जा रही हैं। IIT और IIM से पढ़ाई करने वाली दिव्या मित्तल ने IAS बनने से पहले लंदन में लाखों रुपये के पैकेज पर नौकरी की थी। फिर देश सेवा के लिए विदेश की नौकरी छोड़कर उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और तीसरे प्रयास में IAS बनीं। अब प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया है। 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का सफर बेहद रोचक रहा है। हरियाणा के रेवाड़ी में जन्मी दिव्या मित्तल ने देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई की। पहले उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की। इसके बाद आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी होने के बाद वह पति के साथ लंदन चली गईं। जहां एक मल्टीनेशनल कंपनी में बड़े पैकेज पर जॉब भी किया। हालांकि कुछ समय बाद ही उनका 9 से 6 वाली जॉब से मोह भंग हो गया और देश सेवा के लिए भारत आ गईं। तीन बार दी परीक्षा, तीनों बार मिली सफलता दिव्या मित्तल ने भारत आकर यूपीएससपी की तैयारी में जुट गईं। उन्होंने तीन बार सिविल सर्विस की परीक्षा दी। तीनों बार सफलता भी मिली लेकिन जिस आईएएस के टैग को हासिल करना चाहती थीं, उसे आखिर में हासिल करके ही माना। साल 2010 में उन्होंने पहली बार में ही 332वीं रैंक हासिल की और भारतीय राजस्व सेवा के लिए चुनी गईं। फिर अगले साल परीक्षा दी और इस बार 134वीं रैंक हासिल कर आईपीएस बनीं। तीसरी बार में 68वीं रैंक के साथ आईएएस बन गईं। दिव्या मित्तल को 2013 में यूपी कैडर से प्रदेश में सेवा का मौका मिला। इन पदों पर रहीं दिव्या मित्तल बीते 13 सालों में दिव्या मित्तल की लगातार फिल्ड में तैनाती मिलती रही। मेरठ में संयुक्त मजिस्ट्रेट के पद से आईएएस की करियर शुरूआत हुई। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), कानपुर नगर में यूपीसीडा की संयुक्त प्रबंध निदेशक, बरेली में विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष, यूपी ग्रामीण सड़क विकास एजेंसी की सीईओ, संतकबीर नगर, मिर्जापुर और देवरिया में डीएम के पद पर काम किया। एक महीने पहले दिया था इस्तीफा दिव्या मित्तल ने बीते 30 अगस्त को इस्तीफा दे दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन्होंने लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखा था। जिसमें उन्होंने अपनी भावनाएं प्रकट की थीं। उन्होंने लिखा था, 'आज मैंने 13 सालों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। लेकिन सब कुछ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताकत, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। मैं लौट आई और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।' राजनीति में जाएंगी पूर्व आईएएस दिव्या ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स (ट्विटर) पर एक वीडियो के जरिए साफ कर दिया कि वह राजनीति में प्रवेश करेंगी। हालांकि किस पार्टी से जुड़ेगी ये साफ नहीं है। साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना भी साधा। यह भी कहा कि वह किसी से नहीं डरेंगी।

6 महीने से राशन नहीं लिया तो कार्ड होगा बंद! 3 महीने में e-KYC जरूरी

नई दिल्ली अगर आप राशन कार्डधारक हैं और आपने कई महीनों से राशन नहीं लिया है तो यह सुविधा हमेशा के लिए बंद भी हो सकती है। केंद्र सरकार पिछले छह महीनों से अपने राशन कार्ड का इस्तेमाल नहीं करने वाले 1.58 करोड़ लाभार्थियों के लिए अक्टूबर से राशन बंद करने जा रही है। सरकार पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के डेटाबेस को ठीक करने के लिए इनएक्टिव, डुप्लिकेट या संदिग्ध लाभार्थियों को हटा रही है। HT की रिपोर्ट के अनुसार, एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पीडीएस डेटाबेस से लाभार्थियों के नाम तुरंत नहीं हटाए जाएंगे। वो असली लाभार्थी हैं या नहीं यह साबित करने के लिए उन्हें तीन महीने का समय दिया जाएगा, तब तक उनके राशन कार्ड कुछ समय के लिए बंद कर दिए जाएंगे। अगर वो इस दौरान e-KYC प्रोसेस पूरा कर लेते हैं, तो उनके कार्ड फिर से चालू कर दिए जाएंगे। 3 महीने में पूरी करने होगी ई-केवाईसी सरकार तीन महीने में 'साइलेंट राशन कार्ड' (ऐसे कार्ड जिनसे पिछले 6 महीनों में अनाज नहीं लिया गया है) से जुड़ी समस्याएं हल करना चाहती है। संशोधित 'टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (कंट्रोल) ऑर्डर' में कुछ समय के लिए ऐसे राशन कार्डों को निष्क्रिय करने का प्रावधान है, जिसके बाद अंतिम निर्णय लेने से पहले तीन महीने के भीतर फील्ड वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी (e-KYC) की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकार का तर्क है कि अनाज असली लाभार्थियों तक पहुंचाने और डुप्लीकेट, मर चुके, दूसरी जगह चले गए या अयोग्य लोगों की वजह से होने वाली बर्बादी को कम करने के लिए डेटाबेस को ठीक करना जरूरी है। सरकार से नागरिकों पर डाला जा रहा बोझ : प्रो. नारायणन अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर राजेंद्रन नारायणन ने पहले लाभार्थियों के कार्ड बंद करने और फिर उनसे अपनी पात्रता साबित करने के लिए कहने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "किसी व्यक्ति का नाम हटाने और फिर उनसे e-KYC या इसी तरह के दूसरे तरीकों से सिस्टम में दोबारा जुड़ने के लिए कहने की यह प्रक्रिया, जवाबदेही का बोझ सरकार से नागरिकों पर डालने जैसा है।" उन्होंने कहा कि अधिकारों पर आधारित कल्याणकारी कार्यक्रम में डिफॉल्ट तरीका लोगों को बाहर करने के बजाय उन्हें शामिल करने का होना चाहिए। लेकिन पहले नाम हटा देना और फिर राज्य की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डालना गलत है। राशन कार्ड से पहले भी हटाए जा चुके नाम सरकार पहले भी पीडीएस डेटाबेस को ठीक करने के लिए डिजिटाइजेशन, आधार सीडिंग और e-KYC का इस्तेमाल कर चुकी है। खाद्य मंत्रालय ने नवंबर 2024 में बताया था कि इन प्रक्रियाओं के जरिए पीडीएस सिस्टम से करीब 5.8 करोड़ राशन कार्ड हटा दिए गए थे। मंत्रालय ने इस प्रक्रिया को 'डी-डुप्लीकेशन' (डुप्लीकेट कार्ड हटाने की प्रक्रिया) बताया, जिसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि सिर्फ पात्र लोग ही इस व्यवस्था का लाभ उठा सकें।

सरमथुरा में पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी जारी, 12 सीटें सामान्य तो 6 ST के लिए आरक्षित

सरमथुरा (धौलपुर)  पंचायती राज चुनाव को लेकर प्रशासन की ओर से निकाली गई आरक्षण की लॉटरी ने ग्रामीण राजनीति का पूरा गणित बदल कर रख दिया है। लॉटरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरमथुरा में सीटों का आरक्षण स्पष्ट हो गया है, जिससे चुनावी सरगर्मी अचानक तेज हो गई है। नई आरक्षण स्थिति सामने आने से कई पुराने दिग्गजों के समीकरण गड़बड़ा गए हैं, वहीं नए चेहरों में उत्साह नजर आने लगा है। आंकड़ों के अनुसार, इस बार पंचायतों में विभिन्न श्रेणियों के लिए सीटों का निर्धारण रोस्टर नियमों के तहत किया गया है। अनारक्षित (सामान्य) श्रेणी में महिला सहित कुल 12 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें लीलौठी, बीलौनी, झिरी, बीझौली, बरौली, धौंध, खरौली, आंगई, डौमई, गौलारी, मदनपुर और पवैनी शामिल हैं। इसी प्रकार अनुसूचित जनजाति श्रेणी के लिए महिला सहित छह ग्राम पंचायतों को आरक्षित किया गया है। इनमें नवगठित बड़ागांव, ददरौनी, भंमपुरा, सुनकई, सुरारीकलां पंचायतों के साथ ग्राम पंचायत पिपरेंट शामिल हैं। वहीं, अनुसूचित जाति श्रेणी के लिए महिला सहित पांच ग्राम पंचायतों को आरक्षित किया गया है। इनमें रहरई, मड़ासिल, खुर्दिया, चंद्रावली और बटीकरा शामिल हैं। इसी प्रकार 24 ग्राम पंचायतों में से एक ग्राम पंचायत भरकुंजरा को ओबीसी के लिए आरक्षित किया गया है। इस नई व्यवस्था से चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। पिछले चुनाव की तुलना में इस बार कई पंचायतों का परिसीमन व वर्ग बदलने से राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों ने अपनी रणनीति पर नए सिरे से काम करना शुरू कर दिया है। आरक्षण की यह तस्वीर साफ होने के बाद अब गांवों में चौपालों पर चुनावी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सरमथुरा में प्रधान पद ओबीसी होने से सरपंची पर दिग्गजों की निगाहें आरक्षण लॉटरी में पंचायत समिति सरमथुरा में प्रधान पद ओबीसी श्रेणी के लिए आरक्षित होने के बाद दिग्गजों के सामने सरपंची का विकल्प बचा है। हालांकि, ग्राम पंचायतों का परिसीमन होने के कारण गणित गड़बड़ा रहा है। नवीन परिसीमन के अनुसार, ग्राम पंचायत बीझौली में हर पांच साल बाद समीकरण बदल जाते हैं। इस बार बीझौली व पवैनी पंचायत में से सुरारीकलां को नवीन पंचायत का दर्जा दिया गया है। इसी प्रकार बरौली व बटीकरा ग्राम पंचायतों में से सुनकई, खरौली व बीलौनी ग्राम पंचायत में से बड़ागांव, डौमई ग्राम पंचायत में से ददरौनी और झिरी ग्राम पंचायत में से भंमपुरा को नवीन ग्राम पंचायत बनाया गया है।

दशहरा से पहले किसानों को मिल सकती है बड़ी राहत, PM Kisan की 24वीं किस्त जल्द आने की उम्मीद

रांची  विक्रम संवत 2083 में भादो महीने की समाप्ति और आश्विन में पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही लोगों में त्योहारों की खुमारी चढ़ गई है. लोग-बाग अभी से ही त्योहारों में खरीदारी की तैयारी में जुट गए हैं. नौकरी-पेशा लोगों को बोनस का तो देश के करोड़ों अन्नदाता किसानों को पीएम किसान यानी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त का पैसा डीबीटी के जरिए खाते में ट्रांसफर होने का इंतजार है. झारखंड के 24 जिलों के करीब 19.97 लाख से अधिक किसान भी पीएम किसान की 24वीं किस्त के पैसे आने का इंतजार कर रहे हैं. कब आ सकता है पीएम किसान का पैसा केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक सहायता के तौर पर देश किसानों को हर साल 6000 रुपये दिए जाते हैं. यह पैसा प्रत्येक चार महीने पर तीन किस्तों में दिया जाता है. यानी प्रत्येक चार महीने पर किसानों के खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के क्रेडिट किया जाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 जून 2026 को पीएम किसान की 23वीं किस्त का पैसा डीबीटी के जरिए किसानों के खातों में ट्रांसफर किया था. अब चूंकि त्योहारी सीजन शुरू हो गया है और 20 अक्टूबर को देश में दशहरा का त्योहार मनाया जाएगा. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि पीएम किसान की 24वीं किस्त का पैसा अक्टूबर 2026 के पहले हफ्ते या दूसरे हफ्ते में किसानों के खातों में ट्रांसफर किया जा सकता है. झारखंड के कितने किसान लेते हैं योजना का लाभ पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की एक रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में 19,97,366 सक्रिय लाभार्थी किसान सरकार की पीएम किसान योजना का लाभ लेते हैं. वेरिफिकेशन ड्राइव, जमीन के रिकॉर्ड को लिंक करने और e-KYC अपडेट की वजह से रजिस्ट्रेशन और लाभार्थियों की संख्या में उतार-चढ़ाव होता रहता है. उदाहरण के लिए, जमीन के कागजात या वेरिफिकेशन पूरा न होने के कारण पहले कई रजिस्टर्ड लोगों के लिए लाभ रोक दिए गए थे या बंद कर दिए गए थे. किसानों के लिए जरूरी काम     किसान अपने खाते की ई-केवाईसी (e-KYC) पूरा रखें.     जांच लें कि उनका बैंक खाता आधार और पैन कार्ड से जुड़ा है या नहीं.

25 लाख बच्चियों का टीकाकरण पूरा, अब घर-घर पहुंचेगी HPV वैक्सीन; सर्वाइकल कैंसर से बचाव की तैयारी

लखनऊ सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए अब पात्र बेटियों तक एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) वैक्सीन पहुंचाने के लिए घर-घर अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश में 25 लाख से अधिक बच्चियों को यह टीका लगाया जा चुका है। स्वास्थ्य केंद्रों पर चल रहे टीकाकरण से वंचित 14 साल की आयु पूरी कर चुकीं, लेकिन 15 साल से कम उम्र की बालिकाओं को घर जाकर वैक्सीन लगाने की तैयारी है। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान के तहत बालिकाओं को उनके माता-पिता की सहमति से सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निश्शुल्क वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके लिए निर्धारित आयु वर्ग की बालिकाएं पात्र हैं। सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों और जिला अस्पतालों में चिकित्सकों की निगरानी में टीकाकरण जारी है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश के लिए निर्धारित 25 लाख बच्चियों के टीकाकरण का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। अब घर-घर अभियान के जरिये छूटी हुई पात्र बालिकाओं तक पहुंचने की तैयारी है। निजी अस्पतालों में एचपीवी वैक्सीन की कीमत अधिक होने के कारण कई परिवार इसका लाभ नहीं ले पाते। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों के साथ घर-घर निश्शुल्क टीकाकरण के जरिये इन परिवारों की बेटियों तक भी वैक्सीन पहुंचाने की योजना है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. पिंकी जोवल ने बताया कि केंद्र सरकार ने प्रदेश में 25 लाख बच्चियों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य दिया था, जिसे पूरा कर लिया गया है। अब किसी कारण से टीकाकरण से छूटी पात्र बालिकाओं को वैक्सीन लगाने के लिए टीमें घर-घर जाएंगी। एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है। किशोरावस्था में समय पर एचपीवी टीकाकरण से भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसी के तहत टीकाकरण के साथ जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। भारत में हर साल करीब 1.28 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। यह महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। हर साल करीब 80 हजार महिलाओं की इस बीमारी से मौत होती है। नए मामलों और मौतों के औसत के आधार पर करीब हर सात मिनट में एक महिला की जान जाती है।

New Rules October 2026: LPG, SBI, आधार और प्रॉपर्टी टैक्स के नियम बदलेंगे, जानें पूरी लिस्ट

पटना  New rules October 2026: बिहार में 1 अक्टूबर से बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, जिसका असर सीधा आम आदमी पर पड़ने वाला है। इस स्टोरी में हम कुछ प्रमुख बदलावों के बारे में बता रहे हैं, जिसके बारे में जानना आपके लिए बहुत जरूरी है। बिना जानकारी के आपको नुकसान हो सकता है, तो आइए एक-एक कर इन बदलावों के बारे में जानते हैं… LPG सिलिंडर के लिए BAA अनिवार्य बिहार समेत पूरे देश के घरेलू एलपीजी (LPG) उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्टूबर से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार के नए नियमों के तहत एलपीजी सिलिंडरों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाने के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन (BAA) कराना अनिवार्य हो गया है। अगर कोई उपभोक्ता तय समय सीमा तक इस प्रक्रिया को पूरा नहीं करता है, तो उसके गैसे सिलिंडरों की बुकिंग या आपूर्ति तो बंद नहीं होगी, लेकिन उसे सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ मिलना बंद हो जाएगा। अगर आपने BAA पहले ही पूरा कर लिया है तो दोबारा कुछ करने की जरूरत नहीं है। आपका रिफिल पहले की तरह जारी रहेगा। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र में बदलाव जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन अधिनियम के नए प्रावधान लागू होंगे। नए नियमों के तहत, जन्म या मृत्यु के 21 दिनों के अंदर भीतर रजिस्ट्रेशन फ्री और सरल रहेगा। वहीं, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र पंजीकरण में देरी होने पर अब नए प्रावधानों के तहत जुर्माने और कड़ी अनुमति का प्रवाधान है। एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर जन्म प्रमाण पत्र के रजिस्ट्रेशन के लिए उपजिलाधिकारी या जिलाधिकारी के कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी होगी ऐसे में अब किसी की मौत होने पर मृत्यु प्रमाण पत्र और जन्म होने पर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में बिल्कुल भी देरी न करें। SBI का कैश विदड्रॉल पर नया नियम अगर आपका भी भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में अकाउंट है, तो नया नियम जानना बहुत जरूरी है। स्टेट बैंक ब्रांच के जरिए खोले गए 'बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट' से कैश निकालने के चार्ज में बदलाव कर रहा है। इसके तहत, 1 अक्टूबर से महीने में चार बार कैश निकालना फ्री रहेगा। इसके बाद आपको हर बार कैश निकालने पर 15 रुपये और उस पर लागू GST देना होगा। बल्क FD पर समान दरें बैंक अब एक ही शहर/क्षेत्र की अलग-अलग शाखाओं में बल्क एफडी पर अलग-अलग ब्याज दरें ऑफर नहीं कर सकेंगे। दरें सभी जगह समान और पारदर्शी होंगी। अब 3 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की FD बल्क डिपॉजिट मानी जाएगी। पहले यह सीमा 2 करोड़ रुपये थी। बल्क FD पर बैंक अपनी जरूरत के हिसाब से अलग ब्याज दर तय कर सकेंगे। बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट की फ्री सुविधा खत्म आधार कार्ड में  बच्चों के बायोमेट्रिक अपडेट की फ्री सुविधा 30 सितंबर को खत्म हो रही है। 1 अक्टूबर से फिंगरप्रिंट, फोटो आदि के अपडेट करने के लिए 125 रुपये फीस देनी होगी। अगर फीस से बचना है, तो 30 से पहले अपडेट करा डालें। प्रॉपर्टी टैक्स पर जुर्माना पटना नगर निगम क्षेत्र के संपत्तिधारकों के लिए संपत्ति कर जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर है। इसके बाद एक अक्टूबर से बकाया कर की मूल राशि पर हर माह 1.5 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा। बकाया जितने समय तक रहेगा, देनदारी उतनी ही बढ़ती जाएगी।  

जैसलमेर-बाड़मेर बन रहे ग्रीन एनर्जी हब, 1.50 लाख हेक्टेयर में परियोजनाओं की तैयारी

जैसलमेर/बाड़मेर  थार की तेज धूप और लगातार चलने वाली हवाएं अब पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था का नया आधार बन रही हैं। अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के साथ निवेश, तकनीकी सेवाओं, परिवहन, निर्माण, रख-रखाव, सुरक्षा और स्थानीय रोजगार की नई अर्थव्यवस्था आकार ले रही हैं। जैसलमेर में अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में करोड़ों रुपए के निवेश की संभावनाएं हैं। प्रस्तावित परियोजनाओं में करीब 60 हजार मेगावाट क्षमता की सौर, पवन, बैटरी भंडारण और जैवभार आधारित परियोजनाओं का उल्लेख है। इन परियोजनाओं के लिए करीब 1.50 लाख हेक्टेयर भूमि चिन्हित किए जाने की जानकारी है। इससे पश्चिमी राजस्थान में ऊर्जा उत्पादन के साथ इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। राजस्थान में करीब 4913 मेगावाट पवन ऊर्जा क्षमता है। इसमें जैसलमेर-बाड़मेर क्षेत्र की हिस्सेदारी 4000 मेगावाट से अधिक बताई जाती है। फतेहगढ़, लाठी, नेड़ान-मूलाना और नोख क्षेत्र में सौर ऊर्जा विस्तार की गतिविधियां इस ऊर्जा पट्टी को और बड़ा आधार दे रही हैं। वहीं, बाड़मेर में 1000 से अधिक कृषि कुओं पर सौर संयंत्र संचालित होने की जानकारी है। बालोतरा के पॉपलीन उद्योग में भी सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने की उम्मीद है। पोकरण में 3500 एकड़ में सौर परियोजना पोकरण क्षेत्र के रामपुरिया, भिणाजपुरा, हस्तिनापुर और मसूरिया में रिन्यू की सौर परियोजना करीब 3500 एकड़ में फैली है। परियोजना की क्षमता को लेकर उपलब्ध विवरणों में 975 मेगावाट और 1.3 गीगावॉट, दोनों आंकड़े सामने आ रहे हैं। परियोजना से सालाना करीब 2490 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का अनुमान है। इस परियोजना से करीब पांच लाख परिवारों की बिजली जरूरतों को लाभ मिलने और हर साल करीब 23 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान जताया जा रहा है। इससे क्षेत्र में बड़े स्तर पर अक्षय ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने की दिशा में भी काम होने की बात सामने आती है। स्थानीय उद्योग और रोजगार शृंखला भी जरूरी पश्चिमी राजस्थान की ताकत केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। ऊर्जा आधारित स्थानीय उद्योग और रोजगार शृंखला भी इसके आर्थिक प्रभाव को बढ़ा सकती है। पारेषण, भंडारण, कौशल विकास और सहायक उद्योगों का विस्तार साथ हुआ तो अक्षय ऊर्जा क्षेत्र से होने वाले निवेश का स्थानीय आर्थिक प्रभाव व्यापक हो सकता है। जितेंद्र थानवी, ऊर्जा विशेषज्ञ, के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में अक्षय ऊर्जा का विस्तार केवल बिजली उत्पादन का विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े स्थानीय उद्योग और रोजगार के अवसर भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं।  

पीएमश्री स्कूल बनने से महासमुंद की प्राथमिक शाला चनाट का बदला स्वरूप

पीएमश्री स्कूल के उन्नयन से महासमुंद के शासकीय प्राथमिक शाला चनाट का हुआ कायाकल्प आधुनिक सुविधाओं और गतिविधि आधारित शिक्षा से बच्चों में बढ़ी पढ़ाई के प्रति रुचि आकर्षक प्रिंट रिच कक्षाएं, हर्बल गार्डन, स्वच्छ पेयजल और खेल-सांस्कृतिक गतिविधियों से बदली विद्यालय की तस्वीर रायपुर,   सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत पीएमश्री योजना से दूरस्थ वनांचल में स्थित शासकीय प्राथमिक शाला चनाट की तस्वीर बदल गई है। आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं, आकर्षक वातावरण और गतिविधि आधारित शिक्षण व्यवस्था के कारण विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी है। विद्यालय में आए सकारात्मक बदलाव से आसपास के गांवों के अभिभावक भी अपने बच्चों को यहां पढ़ाने के लिए उत्सुक हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा राज्य सरकार का प्रयास है कि शहरों के साथ-साथ दूरस्थ ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिले। पीएमश्री विद्यालय इसी संकल्प को धरातल पर साकार कर रहे हैं। विद्यालय केवल पढ़ाई का स्थान न होकर बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र बने, इस दिशा में अधोसंरचना के साथ खेल, योग, संगीत, रचनात्मक गतिविधियों और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। महासमुंद जिले के विकासखंड बसना के ग्राम चनाट स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का वर्ष 2023 को पीएमश्री स्कूल के रूप में उन्नयन किया गया। इसके बाद विद्यालय में आवश्यक अधोसंरचना एवं शैक्षणिक सुविधाओं का लगातार विस्तार किया गया। बालवाड़ी संचालन के लिए अतिरिक्त कक्ष का निर्माण किया गया है। वहीं बैगलेस-डे गतिविधियों के लिए अलग कक्ष बनाया गया है, जहां बच्चों के लिए समूह गतिविधियां, संगीत, योग सहित विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां संचालित की जाती हैं।विद्यालय में सुसज्जित अध्यापन कक्ष, आकर्षक प्रिंट रिच वातावरण, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता की बेहतर व्यवस्था, सुंदर गार्डन तथा खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की सुविधाएं विकसित की गई हैं। मुख्य प्रवेश द्वार, शौचालय और वाटर हार्वेस्टिंग संरचना का निर्माण भी किया गया है। शाला प्रांगण में पेवर ब्लॉक लगाए जाने से परिसर कीचड़ मुक्त और व्यवस्थित हुआ है। विद्यालय परिसर को हरा-भरा एवं आकर्षक बनाने के लिए छह क्यारियों वाला सुसज्जित उद्यान विकसित किया गया है। इसके साथ ही हर्बल गार्डन में आंवला, तुलसी, कढ़ी पत्ता, तेजपत्ता, एलोवेरा, लौंग और पीपली सहित विभिन्न उपयोगी पौधे लगाए गए हैं। इससे बच्चों को पौधों एवं उनके उपयोग की व्यावहारिक जानकारी भी मिल रही है।शाला के सभी कक्षों में बच्चों के अनुकूल प्रिंट रिच वातावरण तैयार किया गया है। दीवारों और शिक्षण सामग्री के माध्यम से सप्ताह के दिन, हिन्दी वर्णमाला, वर्ष के महीने, ज्यामितीय आकृतियां, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सौरमंडल तथा राष्ट्रीय प्रतीक—मोर, कमल, तिरंगा, अशोक स्तंभ और बरगद आदि की जानकारी रोचक तरीके से प्रदर्शित की गई है। इससे बच्चों को कक्षा में सहज और गतिविधि आधारित तरीके से सीखने का अवसर मिल रहा है।विद्यालय में हैंडवॉश कॉर्नर भी विकसित किया गया है। बच्चे शौचालय के उपयोग के बाद और भोजन से पहले नियमित रूप से हाथ धोने की आदत अपना रहे हैं, जिससे उनमें व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है।पीएमश्री विद्यालयों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक, आनंददायी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने के साथ उनके व्यक्तित्व एवं रचनात्मक क्षमता के विकास पर जोर दिया जा रहा है। शासकीय प्राथमिक शाला चनाट में हुआ बदलाव इस बात का उदाहरण है कि बेहतर अधोसंरचना और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण से दूरस्थ क्षेत्र के विद्यालय भी बच्चों और अभिभावकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।