samacharsecretary.com

अजमेर में बम धमकी से हड़कंप: दरगाह और कलेक्ट्रेट को कराया खाली, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट

अजमेर अजमेर में गुरुवार दोपहर अजमेर दरगाह और कलेक्ट्रेट को बम से उड़ाने की धमकी मिली। धमकी ईमेल के माध्यम से दी गई, जिसमें लिखा गया कि अजमेर कुडनकुलम परमाणु संयंत्र, कलेक्टर कार्यालय और दरगाह गरीब नवाज में 4 RDX IED लगाए गए हैं। पुतिन के आते ही विस्फोट हो जाएगा। सुरक्षा इंतजाम और सर्च ऑपरेशन धमकी मिलने के बाद कलेक्ट्रेट और दरगाह परिसर को खाली करवा दिया गया। पुलिस और इंटेलिजेंस टीमों ने मेटल डिटेक्टर और डॉग स्क्वॉड की मदद से सर्च ऑपरेशन शुरू किया। चार थानों की पुलिस, सीआईडी और एटीएस की टीम लगातार परिसर की तलाशी में लगी हुई है। अजमेर एसपी वंदिता राणा ने बताया कि “कलेक्ट्रेट को मिले ईमेल में दरगाह और कलेक्ट्रेट को उड़ाने की धमकी दी गई है। सभी विभाग सक्रिय हैं। कलेक्ट्रेट पूरी तरह से चेक किया गया है और अब दरगाह परिसर की तलाशी जारी है। फिलहाल कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है।” सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई धमकी के बाद दरगाह और कलेक्ट्रेट के चारों ओर पुलिस तैनात की गई है। सर्च ऑपरेशन के दौरान मेटल डिटेक्टर और डॉग स्क्वॉड से परिसर के हर हिस्से की जांच की जा रही है। तीन साल बाद दरगाह को पूरी तरह से खाली करवाया गया है। सितंबर 2022 में, जब बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना दरगाह जियारत करने आई थीं, तब भी सुरक्षा के मद्देनज़र परिसर खाली करवाया गया था। इस दौरान कुछ खादिम सुरक्षा एजेंसियों की मौजूदगी में चेकिंग में शामिल हैं।

सुगम खाद्य आपूर्ति और सशक्त उपभोक्ता ही खाद्य विभाग की प्रतिबद्धता: गोविंद सिंह राजपूत

भोपाल भारत के ओजस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल मार्गदर्शन एवं मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने पिछले दो वर्षों में 'खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता न्याय' के मूल मंत्र को चरितार्थ करने का अथक प्रयास किया है। हमारी यात्रा केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रही है, बल्कि हमने ऐसी व्यवस्थाओं का निर्माण किया है जो पारदर्शिता, दक्षता और जन-सरोकार पर आधारित हैं। हमने प्रदेश के करोड़ों परिवारों को न केवल सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराया है, बल्कि उन्हें एक मजबूत उपभोक्ता संरक्षण कवच भी प्रदान किया है। पिछले दो वर्षों में महत्वपूर्ण उपलब्धियों, नवाचारों और दूरगामी फैसलों से मध्यप्रदेश की खाद्य वितरण और उपभोक्ता न्याय प्रणाली को एक नई दिशा दी गयी है।सार्वजनिक वितरण प्रणाली का डिजिटल सशक्तिकरण राज्य की जनता के लिए एक अधिकार बन कर उभरा है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली राज्य की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है। पिछले दो वर्षों में, विभाग ने पीडीएस को भ्रष्टाचार-मुक्त और 'सही हितग्राही को सही लाभ' सुनिश्चित करने के लिए अभूतपूर्व डिजिटल पहल की है। समर्थन मूल्य पर खाद्यान्न का उपार्जन प्रदेश के किसानों की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदी का लक्ष्य निर्धारित किया है। खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में 6.05 लाख किसानों से 42.4 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन कर 9,200.18 करोड़ का भुगतान किसानों को किया गया। खरीफ विपणन वर्ष 2024- 25 में 6.69 लाख किसानों से 43.52 लाख मैट्रिक टन धान का उपार्जन कर समर्थन मूल्य राशि 1001 करोड़ का भुगतान किसानों को किया गया। उपार्जन अवधि में ही 14.18 लाख मीट्रिक टन धान उपार्जन केंद्र से सीधे मिलर्स को प्रदाय कर परिवहन हैंडलिंग व्यय की बचत की गई। खरीफ विपणन वर्ष 2025- 26 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु 8.59 लाख किसानों का पंजीयन किया गया है, जिनसे दिसंबर 2025 से समर्थन मूल्य राशि 2369 प्रति क्विंटल की दर से धान का उपार्जन किया जाएगा। इसी तरह रवि विपणन वर्ष 2024-25 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित 48.38 लाख मीट्रिक टन गेहूं पर 6.13 लाख किसानों को 125 में प्रति क्विंटल की दर से 605 करोड़ तथा रबी विपणन वर्ष 2025- 26 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित 77.74 लाख मीट्रिक टन गेहूं पर 9 लाख किसानों को 175 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 1360 करोड़ राज्य सरकार द्वारा बोनस का भुगतान किया गया। ई-केवाईसी अभियान में आधारभूत सुधार हमने प्रदेश के समस्त राशन उपभोक्ताओं की पहचान को प्रमाणित करने के लिए प्रदेश स्तर पर एक विशाल ई-केवाईसी अभियान चलाया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रणाली से फर्जी और डुप्लीकेट नामों को हटाना तथा सुनिश्चित करना था कि केवल पात्र व्यक्ति ही रियायती राशन प्राप्त करें। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत पात्र परिवारों की पहचान सुनिश्चित करने माह दिसंबर 2023 से अभी तक 1.61 करोड़ हितग्रहियों के ई-केवाईसी किए गए हैं। अभी तक 92 फीसदी से अधिक हितग्राहियों की ई-केवाईसी सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है। प्रदेश की 27,875 उचित मूल्य दुकानों पर लगाई गई पीओएस मशीन से पात्र हितग्राहियों की ईकेवायसी करने की व्यवस्था के अतिरिक्त बच्चों तथा हितग्राही द्वारा घर बैठे ईकेवाईसी करने की सुविधा भारत सरकार के "मेरा ईकेवायसी" ऐप के माध्यम से दी गई है। 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' का पूर्ण क्रियान्वयन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 'वन नेशन, वन राशन कार्ड' योजना को प्रदेश में सफलतापूर्वक लागू किया। अंतरराज्यीय पोर्टेबिलिटी के तहत अब मध्यप्रदेश के 30,000 उपभोक्ता देश के अन्य राज्यों से और अन्य राज्यों के 6821 उपभोक्ता मध्यप्रदेश से अपने हिस्से का राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसी प्रकार अंतर जिला पोर्टेबिलिटी से 15, 39, 384 परिवारों द्वारा अन्य दुकान से प्रतिमाह राशन प्राप्त किया जा रहा है। यह सुविधा प्रवासी मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों के लिए वरदान साबित हुई है, जिससे उनकी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। प्रदेश में विगत दो वर्ष में लगभग 17 लाख परिवारों के डाटाबेस में मोबाइल सीडिंग की गई। इस प्रकार कुल 97 प्रतिशत परिवारों की मोबाइल सीडिंग की जाकर प्रतिमाह वितरित सामग्री की सूचना के लिये एसएमएस प्रेषित किया जा रहा है, ताकि उपभोक्ता द्वारा प्राप्त सामग्री का मिलान किया जा सके। किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही को रोकने के लिए राशन वितरण को शत-प्रतिशत बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण पर आधारित किया गया। इसने मैनुअल हस्तक्षेप को समाप्त किया और वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है। प्रत्येक वितरण के बाद हितग्राही को उसके मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से वितरण की जानकारी भेजी जाती है, जिससे शिकायत की संभावना नगण्य हो जाती है। इसके अलावा अगस्त 2024 से कैरी फॉरवार्ड वितरण व्यवस्था समाप्त कर आवंटन माह में ही समस्त पात्र परिवारों को पात्रतानुसार राशन वितरण कराया जा रहा है, जिससे परिवारों को समय पर सामग्री प्राप्त हो रही है। माह दिसंबर 2023 से अभी तक 91.14 लाख नवीन हितग्राहियों को जोड़कर निःशुल्क खाद्यान्न का वितरण कराया गया तथा मृत/अपात्र/स्थाई रूप से पलायन करने वाले 72.94 लाख हितग्राहियों को पोर्टल से विलोपित किया गया।  

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराज़गी: बीएलओ सुरक्षा पर राज्यों से मांगी जवाबदेही

नई दिल्ली  मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) की मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गहरी चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने साफ कहा कि बीएलओ पर बढ़ते काम के बोझ को कम करना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है और इसके लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती तुरंत की जानी चाहिए। तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी टीवीके द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी तब आई जब कोर्ट को बताया गया कि देशभर में अब तक 35-40 बीएलओ की मौत अत्यधिक काम के दबाव के कारण हो चुकी है। याचिकाकर्ता ने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी रखी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया एक वैध प्रशासनिक कार्रवाई है जिसे समय पर पूरा किया जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, "अगर कहीं स्टाफ की कमी है, तो अतिरिक्त कर्मचारी नियुक्त करना राज्य का कर्तव्य है।" कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमार, असमर्थ या अत्यधिक दबाव में काम कर रहे अधिकारियों को लेकर राज्य सरकारें संवेदनशील रवैया अपनाएं और तुरंत वैकल्पिक स्टाफ तैनात करें। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया है कि अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति करें ताकि बीएलओ के कार्य घंटे कम किए जा सकें। जहां 10,000 कर्मचारी मौजूद हैं, वहां आवश्यकता पड़ने पर 20,000 से 30,000 कर्मियों की तैनाती भी की जा सकती है। यदि कोई बीएलओ या कर्मचारी व्यक्तिगत कारणों, बीमारी या गंभीर परिस्थिति में ड्यूटी से छूट चाहता है, तो सक्षम अधिकारी केस-टू-केस आधार पर राहत दे सकते हैं। छूट मिलने पर उसकी जगह तुरंत किसी अन्य कर्मचारी को नियुक्त किया जाए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि कई राज्यों से ऐसे मामले सामने आए हैं जहां बीएलओ ने काम के अत्यधिक दबाव, लंबी ड्यूटी और संसाधनों की कमी के कारण आत्महत्या कर ली। इस पर सीजेआई ने कहा, "यह बेहद गंभीर मामला है। जिस भी राज्य में ऐसा हो रहा है, वहां प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।" तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टी टीवीके ने एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने या इसे संशोधित करने की मांग करते हुए कहा कि बीएलओ पर इतना अधिक बोझ डाला जा रहा है कि कई लोग तनाव में आकर जान गंवा रहे हैं। याचिका में कोर्ट से बीएलओ परिवारों को मुआवजा दिलवाने का अनुरोध भी किया गया है।

उमर सरकार का बड़ा फैसला: मेरिट आधारित आरक्षण में बढ़ेगा प्रतिशत

श्रीनगर  कैबिनेट द्वारा EWS और RBA कैटेगरी में कोटा कम करके ओपन मेरिट कोटा 10 परसेंट बढ़ाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी देने के एक दिन बाद, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने आज कहा कि फाइल पर साइन करके उसे अप्रूवल के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास भेज दिया गया है और सरकार को उम्मीद है कि वह जल्द ही फॉर्मल ऑर्डर जारी कर देगी। श्रीनगर में रिपोर्टर्स से बात करते हुए, उमर अब्दुल्ला ने कहा कि फाइल पर कल साइन करके उसे वेटिंग के लिए लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास भेज दिया गया था। रिजर्वेशन रिपोर्ट के स्टेटस पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि वह इसे मंज़ूरी देंगे और उसके बाद ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा।" उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने रिहैबिलिटेशन असिस्टेंस स्कीम (RAS), जिसे पहले SRO-43 के नाम से जाना जाता था, के तहत उन सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को अपॉइंटमेंट ऑर्डर जारी किए हैं जिनकी सर्विस के दौरान मौत हो गई थी। उन्होंने कहा कि कश्मीर प्रांत से लगभग 60 मामलों में बुधवार को फॉर्मल ऑर्डर मिले, जबकि एक दिन पहले जम्मू में भी इसी तरह की एक्सरसाइज़ की गई थी।  "यह स्कीम यह पक्का करती है कि मरे हुए सरकारी कर्मचारी के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए ताकि उन्हें मुश्किल से निपटने में मदद मिल सके।"   CM ने कहा कि ऑर्डर में कुछ प्रोसेस से जुड़ी दिक्कतें हैं जिन्हें वे ठीक कर देंगे, लेकिन केस प्रोसेस हो चुके हैं और ऑर्डर अब सौंप दिए गए हैं। नौगाम ब्लास्ट की जांच के बारे में एक सवाल के जवाब में, उन्होंने कहा कि सभी संबंधित केस की जांच चल रही है। उन्होंने कहा, "उन सभी की जांच हो रही है। जहां छूट की जरूरत होगी, वह दी जाएगी। नहीं तो, नॉर्मल ऑर्डर जारी किए जाएंगे।" दरबार मूव और सर्दियों में सेक्रेटेरिएट के कामकाज पर, CM उमर ने कहा कि मंत्री और अधिकारी सर्दियों में श्रीनगर से काम करते रहते हैं। उन्होंने कहा, "हर हफ्ते, एक मंत्री यहां ड्यूटी पर रहता है। लोगों को राहत मिलनी चाहिए और उनका काम होना चाहिए।" राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन करने के बारे में पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि गवर्नेंस देने के लिए नाम दूसरी बात है। उन्होंने कहा, "नाम बदलने से कुछ नहीं होता। लोगों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम खुद को क्या कहते हैं; वे काम देखना चाहते हैं।"

स्वराज कौशल ने वकालत और मानवीयता दोनों में रचा इतिहास: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश की पूर्व विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज के पति और मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल के निधन पर दुख व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि स्वराज कौशल ने एक वकील के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई। वे भारत के सबसे कम उम्र के गवर्नर बने और अपने कार्यकाल के दौरान मिजोरम के लोगों पर उन्होंने गहरी छाप छोड़ी। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''स्वराज कौशल के गुजर जाने से दुख हुआ। उन्होंने एक वकील और ऐसे इंसान के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई, जो कानूनी पेशे का इस्तेमाल जरूरतमंदों की जिंदगी बेहतर बनाने में करते थे।'' उन्होंने एक्स पोस्ट में आगे लिखा, ''वे भारत के सबसे कम उम्र के गवर्नर बने और अपने गवर्नर के कार्यकाल के दौरान मिजोरम के लोगों पर गहरी छाप छोड़ी। एक सांसद के तौर पर उनकी समझ भी काबिले-तारीफ थी। इस दुख की घड़ी में मेरी दुआएं उनकी बेटी बांसुरी और परिवार के दूसरे सदस्यों के साथ हैं।'' लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लिखा, ''मिजोरम के पूर्व राज्यपाल, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व सांसद स्वराज कौशल का निधन अत्यंत दुखद है। दिल्ली स्थित उनके निवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनकी सुपुत्री, सांसद बांसुरी स्वराज व शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। स्वराज कौशल जी ने अपने दीर्घ सार्वजनिक जीवन में न्याय, लोकतंत्र और राष्ट्रसेवा के उच्च मूल्यों को जीवंत रखा। उनका सरल, संवेदनशील और कर्मनिष्ठ व्यक्तित्व सदैव स्मरणीय रहेगा।'' केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी स्वराज कौशल के निधन पर दुख जताया और लिखा, ''मिजोरम के पूर्व राज्यपाल और पूर्व राज्यसभा सांसद स्वराज कौशल के निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। उनका शांत, स्नेहिल और विद्वतापूर्ण व्यक्तित्व जनसेवा और न्यायप्रियता की मिसाल रहा। प्रभु श्री राम दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिवार को इस कठिन घड़ी में धैर्य प्रदान करें।'' दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के पिता स्वराज कौशल के निधन पर दुख जाहिर किया। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा, ''मिजोरम के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ अधिवक्ता स्वराज कौशल के निधन की खबर दुखद है। स्वराज कौशल जी का सार्वजनिक जीवन और विधि के क्षेत्र में योगदान हमेशा याद किया जाएगा। राष्ट्र और समाज के प्रति उनकी सेवा अविस्मरणीय है। दुख की इस घड़ी में, मेरी गहरी संवेदनाएं सांसद बांसुरी स्वराज और उनके समस्त परिजनों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति और उनके परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें।''

MP के दो बड़े इन्फ्लुएंसर्स के बीच प्रॉपर्टी को लेकर विवाद, पारुल-वीर ने की पुलिस में शिकायत

इंदौर इंदौर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर पारुल अहिरवार और उसके दोस्त गौरव रावल के बीच चल रहा प्रॉपर्टी विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस मामले में अब गौरव रावल ने पुलिस कमिश्नर और डीसीपी को आवेदन देकर पारुल और उसके साथी वीर शर्मा की शिकायत की है। गौरव का आरोप है कि पारूल और वीर शर्मा ने पुलिसकर्मी बनकर उसे धमकी भरा कॉल किया और बदनाम करने की कोशिश की है। इसके पहले पारुल ने गौरव पर लाखों रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए क्राइम ब्रांच में शिकायत की थी। आखिर क्या है पूरा मामला पुलिस के मुताबिक पारुल और गौरव ने 2020 में 800 वर्ग फीट का मकान संयुक्त रुप से खरीदा था, इसके लिए दोनों ने चार-चार लाख रुपए जमा किए थे। गौरव ने इस मकान पर 20 लाख रुपए का बैंक लोन ले लिया था। इस लोन की आधी किस्त 9,000 रुपए पारुल साल 2020 से भरती रही है। इस संबंध में दोनों के बीच एक लिखित एग्रीमेंट भी हुआ था। अब पारुल का आरोप है कि गौरव ने यह एग्रीमेंट चुरा लिया और मकान की रजिस्ट्री अपने नाम पर करा ली है। जून 2025 में पारुल को पता चला कि गौरव मकान को किसी और को बेच चुका है। उसने गौरव को कॉल किया, लेकिन फोन स्विच ऑफ था। पारुल ने कई बार गौरव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई। जिसके बाद पारुल ने गौरव के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज करा दी। 800 वर्ग फीट के मकान को लेकर तनातनी पुलिस के मुताबिक, पारुल का कहना है कि वर्ष 2020 में उसने और गौरव ने 800 वर्ग फीट का मकान संयुक्त रूप से खरीदा था। इसके लिए दोनों ने चार-चार लाख रुपए जमा किए थे। गौरव ने इस मकान पर 20 लाख रुपए का बैंक लोन ले लिया था। इस लोन की आधी किस्त 9,000 रुपए पारुल साल 2020 से भरती रही है। इस संबंध में दोनों के बीच एक लिखित एग्रीमेंट भी हुआ था। पारुल का आरोप है कि गौरव ने यह एग्रीमेंट चुरा लिया। फिर मकान की रजिस्ट्री अपने नाम पर करा ली। जून 2025 में पारुल को पता चला कि गौरव मकान को किसी और को बेच चुका है। उसने गौरव को कॉल किया लेकिन फोन स्विच ऑफ था। पारुल ने कई बार गौरव से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं हो पाई। आखिरकार पारुल ने गौरव के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज करा दी। मकान की रजिस्ट्री को लेकर है विवाद गौरव रावल ने पुलिस को शिकायत कहा है, उसने और पारुल ने मिलकर ओमेक्स सिटी फेज वन में घर लिया था, जिसकी रजिस्ट्री गौरव और उसकी मां के नाम थी। पारुल ने तय 5 लाख में से सिर्फ 4 लाख ही बिल्डर को दिए और करीब 18 महीने तक आधे हिस्से में रहने की बात कहकर किराया देती रही। गौरव का आरोप है कि जब उसने मकान बेचने का फैसला किया तो पारुल ने बिना पूरी रकम दिए ही रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव बनाया। इसके बाद पारुल और उसके साथी वीर ने गौरव की बहन के ऑफिस में अभद्रता की, जिससे उसकी नौकरी चली गई। गौरव ने यह भी बताया कि वीर ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर उसकी बहन को फोन किए। उसे अलग-अलग नंबरों से धमकी भरे कॉल किए। इस विवाद में पारुल पहले ही गौरव पर धोखाधड़ी का केस दर्ज करा चुकी है। दूसरी ओर गौरव ने भी पारुल और वीर पर धमकी देने और धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। वीर का कहना है कि उसने खुद को पुलिसकर्मी बताकर कॉल नहीं किए, बल्कि शिकायत के मामले में थाने को जानकारी दी थी। गौरव के वकील ने स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किल को किसी भी तरह का नोटिस नहीं मिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पारुल और वीर सोशल मीडिया पर गौरव की छवि खराब करते हैं तो उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई जाएगी। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने के बाद दोनों ने सोशल मीडिया पर अपनी गतिविधियां कम कर दी हैं। गौरव और उसकी मां के नाम पर है रजिस्ट्री गौरव के मुताबिक, पारुल और उसने मिलकर शुभांजन ओमेक्स वन सिटी में मकान लिया था। इसकी रजिस्ट्री गौरव और उसकी मां के नाम पर थी। पारुल और गौरव के बीच समझौते के बाद पारुल को बाद में पांच लाख रुपए देने की बात तय हुई थी। इसके एवज में पारुल ने केवल चार लाख रुपए सीधे बिल्डर के बैंक खाते में जमा कराए थे। पारुल आधे हिस्से में रहने की बात कहकर करीब 18 महीने तक गौरव को मकान किराया देती रही। गौरव का ये भी कहना है कि जब उसने मकान बेचने का मन बनाया तो पारुल ने बिना पूरी रकम दिए मकान के एक हिस्से की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव डाला। गौरव बोला- मकान मेरे और मां के नाम पर था उधर, गौरव रावल द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, पारुल और उसने मिलकर शुभांजन ओमेक्स वन सिटी में मकान लिया था। इसकी रजिस्ट्री गौरव और उसकी मां के नाम पर थी। समझौते के अनुसार, पारुल को बाद में 5 लाख रुपए देने की बात तय हुई थी। इसके ऐवज में पारुल ने केवल 4 लाख रुपए सीधे बिल्डर के बैंक खाते में जमा कराए थे। पारुल आधे हिस्से में रहने की बात कहकर करीब 18 महीने तक गौरव को मकान का किराया देती रही। गौरव का दावा है कि जब उसने मकान बेचने का मन बनाया तो पारुल ने बिना पूरी रकम दिए इसके एक हिस्से की रजिस्ट्री अपने नाम कराने का दबाव डाला। वीर पर पुलिसकर्मी बनकर कॉल करने का आरोप गौरव का आरोप है कि पारुल ने अपने साथी वीर को उसकी बहन ममता के ऑफिस में भेजकर अभद्रता कराई। जिसके बाद ममता की नौकरी चली गई। इसके बाद वीर ने खुद को लसूडिया थाने का पुलिसकर्मी बताकर ममता को कॉल किए। गौरव ने बताया कि उसे अलग-अलग फोन नंबरों से धमकी भरी कॉल आ रही थीं। उसने इनकी दो ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को भी सौंपी हैं।  

पुतिन–मोदी की दोस्ती ने दुनिया को चौंकाया! भारत को मिला अब तक का सबसे बड़ा रक्षा तोहफ़ा

नई दिल्ली  भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर दुनिया को चौंकाने वाली है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत पहुंचने से पहले दोस्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऐसी रक्षा डील को फाइनल कर दिया है, जिसे देखकर दुश्मन देशों की रातों की नींद उड़ जाएगी। ये समझौता न सिर्फ भारत की सैन्य शक्ति को कई गुना बढ़ाएगा, बल्कि हिंद महासागर से लेकर उत्तरी सीमाओं तक भारत की पकड़ और मजबूत करेगा। भारत और रूस के बीच लगभग दस साल से लंबित परमाणु-संचालित पनडुब्बी लीज़ समझौता आखिरकार फाइनल हो गया है। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भारत लगभग 2 अरब डॉलर का भुगतान करके रूस से एक न्यूक्लियर अटैक सबमरीन किराए पर लेगा। यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इस हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं। पुतिन के यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। कीमत को लेकर वर्षों से अटकी बातचीत बीते कई वर्षों से कीमत को लेकर अटकी बातचीत अब पूरी हो गई है। नवंबर में भारतीय अधिकारियों ने रूसी शिपयार्ड का दौरा किया था, जिसके बाद डील पर अंतिम सहमति बनी। भारत को पनडुब्बी की डिलीवरी दो वर्षों में मिलने की उम्मीद है, हालांकि परियोजना की जटिलता को देखते हुए समय बढ़ भी सकता है।   रणनीतिक संतुलन और मोदी की विदेश नीति इस समझौते के साथ भारत ने रूस के साथ रक्षा संबंधों को और गहरा किया है। हाल के महीनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका द्वारा 50% दंडात्मक टैरिफ लगाने के बाद रूस और चीन दोनों के साथ रिश्ते मजबूत करने का संदेश दिया है। वर्तमान में भारत ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए ऊँचे शुल्क कम कराने के लिए व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है ये वही शुल्क हैं जो अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीद जारी रखने पर दबाव बनाने के लिए लगाए थे।

हरभजन का बड़ा दावा: रोहित-विराट के करियर का फैसला कौन कर रहा, बताया पूरा अंदरूनी सच!

शारजाह  पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह को यह दुर्भाग्यपूर्ण लगता है कि रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों का भविष्य ऐसे लोग तय कर रहे हैं जिन्होंने अपने करियर में कुछ खास हासिल नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह जोड़ी 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप तक खेलती रहेगी। रोहित 38 वर्ष के हैं और विराट कोहली 37 वर्ष के तथा यह दोनों अब केवल वनडे प्रारूप में ही खेलते हैं। वह वनडे विश्व कप तक खेलते रहेंगे या नहीं इसको लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर ने इस बात पर कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है कि यह दोनों वनडे विश्व कप तक खेलते रहेंगे या नहीं। हरभजन ने शारजाह में कहा, ‘‘यह मेरी समझ से परे है। मैं इसका जवाब नहीं दे पाऊंगा क्योंकि मैं खुद एक खिलाड़ी रहा हूं और जो मैं देख रहा हूं वह मेरे साथ भी हुआ है। मेरे कई साथियों के साथ ऐसा हुआ है, लेकिन यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम इस बारे में बात नहीं करते या इस पर कोई चर्चा नहीं करते।’’ भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट में 417 विकेट लेने वाले इस गेंदबाज ने कोहली और रोहित के साथ किए जा रहे व्यवहार के संदर्भ में कहा, ‘‘जब मैं विराट कोहली जैसे खिलाड़ी को देखता हूं जो अभी भी शानदार प्रदर्शन कर रहा है तो मुझे बहुत खुशी होती है। यह थोड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि वे लोग उनके भविष्य के बारे में फैसला कर रहे हैं जिन्होंने अपने करियर में कुछ खास हासिल नहीं किया है।’’ वनडे विश्व कप में अभी एक समय साल से भी अधिक समय है लेकिन हरभजन ने रोहित और कोहली का समर्थन करते हुए कहा कि वे इस विश्व कप के दौरान शानदार फॉर्म में रहेंगे और अगली पीढ़ी के लिए मानक स्थापित करेंगे। कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मौजूदा सीरीज में घरेलू मैदान पर लगातार दो शतक लगाए हैं, जबकि रोहित ने पिछली चार पारियों में दो अर्द्धशतक और एक शतक लगाया है। हरभजन ने कहा, ‘‘उन्होंने हमेशा रन बनाए हैं और भारत के लिए शुरू से ही अच्छा योगदान दिया है। उन्होंने बल्लेबाज के रूप में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है और टीम के कप्तान भी रहे हैं। मुझे वास्तव में अच्छा लग रहा है कि वह दमदार प्रदर्शन कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे युवा पीढ़ी के लिए उदाहरण पेश कर रहे हैं और यह दिखा रहे हैं कि चैंपियन बनने के लिए क्या करना पड़ता है। इसलिए सही उदाहरण पेश करने के लिए विराट कोहली और रोहित शर्मा को बधाई।’’  

2009 का एसिड अटैक… अब तक ट्रायल जारी! CJI ने दिखाई कड़ी नाराज़गी, अदालत में लगाई फटकार

नई दिल्ली  साल 2009 में महिला पर हुए एसिड अटैक मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। जब याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि 16 साल पहले 2009 में उस पर एसिड से हमला हुआ था और अब तक मामले का ट्रायल चल रहा है तो इस पर सीजेआई सूर्यकांत भड़क उठे और जमकर क्लास लगाई। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रीय राजधानी ऐसे हालात को हैंडल नहीं कर सकती है तो फिर कौन संभालेगा? यह तो शर्म की बात है। सिस्टम का मजाक है।   सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी हाई कोर्ट से एसिड अटैक केस में पेंडिंग ट्रायल के बारे में डेटा मांगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सभी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को पेंडिंग एसिड अटैक केस के बारे में डेटा जमा करने का निर्देश दिया है। बार एंड बेंच के अनुसार, मामले की याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा, ''मेरे ऊपर 2009 में एसिड अटैक हुआ था, अभी तक ट्रायल चल रहा है। 2013 तक केस में कुछ नहीं हुआ और ट्रायल, जो अब दिल्ली के रोहिणी में हो रहा है, अब आखिरी सुनवाई के स्टेज में है।'' सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ''यह जुर्म 2009 का है और ट्रायल अब तक पूरा नहीं हुआ। अगर नेशनल कैपिटल ऐसी चुनौतियों को हैंडल नहीं कर पाएगी तो कौन करेगा? यह सिस्टम के लिए शर्म की बात है।'' याचिकाकर्ता ने बताया कि वह अपना केस लड़ने के साथ-साथ दूसरे एसिड अटैक सर्वाइवर्स की मदद के लिए भी काम कर रही हैं। सीजेआई ने याचिकाकर्ता से ट्रायल में तेजी लाने के लिए एक ऐप्लीकेशन फाइल करने के लिए कहा। साथ ही कहा कि इस मामले का ट्रायल रोज होना चाहिए। बेंच ने सभी हाई कोर्ट की रजिस्ट्री से चार हफ्ते के अंदर डिटेल मांगी। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता ने उन पीड़ितों की बुरी हालत पर रोशनी डाली जिन्हें एसिड पीने के लिए मजबूर किया जाता है, अक्सर आर्टिफिशियल फीडिंग ट्यूब और गंभीर विकलांगता के सहारे जिंदा रहते हैं। बेंच ने उनकी इस अर्जी पर भी केंद्र से जवाब मांगा कि एसिड अटैक सर्वाइवर्स को दिव्यांगों की कैटेगरी में रखा जाए ताकि वेलफेयर स्कीम्स तक उनकी पहुंच पक्की हो सके।  

रचिन रविंद्र–लैथम का तूफ़ान! कीवी टीम ने वेस्टइंडीज को 481 रन से दबाव में झोंका

नई दिल्ली रचिन रविंद्र और टॉम लैथम के शतकों की मदद से न्यूजीलैंड ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट क्रिकेट मैच के तीसरे दिन गुरुवार को क्राइस्टचर्च में 481 रन की बढ़त हासिल करके मैच पर अपना शिकंजा मजबूत कस दिया। रविंद्र ने 176 रन की लाजवाब पारी खेली जबकि सलामी बल्लेबाज लैथम ने 145 रन बनाए। इन दोनों ने तीसरे विकेट के लिए 279 रन की साझेदारी की जिससे न्यूजीलैंड ने तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक अपनी दूसरी पारी में चार विकेट पर 417 रन बनाए। न्यूजीलैंड ने अपनी पहली पारी में 231 रन बनाने के बाद वेस्टइंडीज को 167 रन पर आउट करके 64 रन की बढ़त हासिल की थी। न्यूजीलैंड की दूसरी पारी के 417 रन में से 200 रन 50 चौकों से आए, जिनमें से 27 चौके रविंद्र ने लगाए। दिन का खेल समाप्त होने के समय विल यंग 20 और माइकल ब्रेसवेल छह रन बनाकर खेल रहे थे। लैथम ने 179 गेंदों में नौ चौकों की मदद से अपना शतक पूरा किया। रविंद्र ने अपना चौथा टेस्ट शतक 108 गेंदों में 16 चौकों और एक छक्के की मदद से पूरा किया। लैथम ने अपनी पारी में 250 गेंद का सामना किया और 12 चौके लगाए जबकि रविंद्र ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। उन्होंने 185 गेंद का सामना किया और अपनी पारी में 27 चौके लगाने के अलावा एक छक्का भी जड़ा। इन दोनों के अलावा डेवोन कॉनवे ने 37 रन का योगदान दिया। स्टार बल्लेबाज केन विलियमसन केवल नौ रन ही बना सके। उनके आउट होने से न्यूजीलैंड का स्कोर दो विकेट पर 100 रन हो गया था। इसके बाद रविंद्र और लैथम ने बड़ी साझेदारी निभाई।