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मंदिर में दीपक न जलाने पर हाईकोर्ट नाराज़, दरगाह विवाद फिर सुर्खियों में

चेन्नई  मद्रास हाई कोर्ट की मदुरई बेंच ने बुधवार को एक तीखे शब्दों वाला अवमानना आदेश जारी किया। यह आदेश इसलिए जारी किया गया क्योंकि अधिकारियों ने तिरुप्परंकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित विवादित पत्थर स्तंभ- दीपथून पर कार्तिगई दीपम त्योहार का दीपक जलाने के उसके पहले के निर्देश का पालन नहीं किया। यह स्थान लंबे समय से हिंदू मंदिर प्रशासन और बगल में स्थित मुस्लिम दरगाह के बीच विवाद का केंद्र रहा है। थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर भगवान सुब्रमण्य स्वामी का मंदिर और सिकंदर बधूसाह दरगाह स्थित है। सोमवार को न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामिनाथन ने मंदिर प्रशासन को निर्देश दिया था कि दीपथून पर परंपरा के अनुसार दीपक जलाया जाए। यह स्थान दरगाह के पास स्थित पहाड़ी का निचला शिखर है। बुधवार शाम 6 बजे इस आदेश के पालन न होने पर न्यायाधीश ने अधिकारियों को जानबूझकर अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि आदेश स्पष्ट था और इसे लागू न करना न्यायालय की प्रतिष्ठा को चुनौती देना है। अवमानना की कार्रवाई के तहत न्यायालय ने याचिकाकर्ता और उनके साथ दस लोगों को CISF सुरक्षा में दीपथून पर चढ़कर दीपक जलाने की अनुमति दी। अदालत ने इसे प्रतीकात्मक लेकिन आवश्यक कदम बताया। ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख अपने सोमवार के आदेश में न्यायमूर्ति स्वामिनाथन ने 1920 के एक दीवानी वाद और प्रिवी काउंसिल के पुराने फैसलों का हवाला दिया था। उन्होंने कहा कि विवादित स्तंभ मंदिर की भूमि पर स्थित है, न कि दरगाह के नियंत्रण क्षेत्र में। अदालत के अनुसार पहाड़ी दो शिखरों में विभाजित है- ऊपरी शिखर पर दरगाह और निचले शिखर पर दीपथून है। न्यायाधीश ने लिखा था कि निचले शिखर पर दीप जलाने से दरगाह या मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। CISF की तैनाती से बढ़ी संवेदनशीलता श्रद्धालुओं के एक वर्ग और तिरुप्परनकुंद्रम मंदिर प्रबंधन के बीच गतिरोध के बाद मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरई पीठ ने बुधवार को याचिकाकर्ता को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की सुरक्षा घेरे में पहाड़ी के प्राचीन स्तंभ पर दीप जलाने का निर्देश दिया। अदालत के पूर्व के निर्देश के बावजूद, बुधवार शाम ‘कार्तिगई दीपम’ के अवसर पर यहां तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दरगाह के पास प्राचीन स्तंभ पर दीप नहीं जलाया गया, जिसके कारण दक्षिणपंथी संगठन हिंदू मुन्नानी के कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं के एक वर्ग ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि दीप को प्राचीन स्तंभ ‘दीपथून’ पर जलाया जाए जैसा कि पीठ ने निर्देश दिया था। एक याचिका के बाद, अदालत ने उच्च न्यायालय पीठ से संबद्ध सीआईएसएफ कमांडेंट को याचिकाकर्ता की सहायता के लिए पर्याप्त संख्या में कर्मियों को तैनात करने का निर्देश दिया, जिन्हें आदेश का कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए 10 अन्य कर्मियों को साथ ले जाने की अनुमति दी गई। इसके बाद, सीआईएसएफ सुरक्षा के साथ तिरुप्परनकुंद्रम आए याचिकाकर्ता राम रविकुमार और अन्य लोगों को पुलिस ने पहाड़ी की ओर बढ़ने से रोक दिया, क्योंकि मदुरै जिलाधिकारी ने मौजूदा कानून और व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्ष संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की थी। तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई तिरुप्परनकुंद्रम में उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई जब कुछ लोगों ने पुलिस अवरोधक तोड़कर पहाड़ी पर चढ़ने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस धक्का-मुक्की में एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने एक दिसंबर को अपने आदेश में कहा था कि सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के प्रबंधन को तीन दिसंबर को ‘कार्तिगई दीपम’ पर दीप जलाने की सुविधा प्रदान करनी चाहिए। अदालत के निर्देश के बावजूद, तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप नहीं जलाया गया। इसे तमिल महीने कार्तिगई (नवंबर-दिसंबर) में मनाए जाने वाले ‘कार्तिगई दीपम’ उत्सव के तहत, हमेशा की तरह उच्ची पिल्लैयार मंदिर के मंडपम में जलाया गया। कुछ प्रदर्शनकारी दीप जलाने के लिए पहाड़ी पर चढ़ने लगे लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें पहाड़ी पर चढ़ने से रोक दिया। मंदिर प्रबंधन ने शाम छह बजे होने वाले बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले अदालत में अपील दायर की, जिसमें दावा किया गया कि इस कदम से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। याचिकाकर्ता रामा रविकुमार ने अदालत से मंदिर प्रबंधन के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने की मांग की थी। पहाड़ी के आसपास के क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन ने निर्देश दिया कि शाम छह बजे तक दीप प्रज्वलित कर दिए जाएं, अन्यथा शाम 6.05 बजे अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू की जाएगी, और मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अदालत की अवमानना ​​की कार्रवाई की अपील स्वीकार करते हुए न्यायाधीश ने मंदिर के कार्यकारी अधिकारी और मदुरई पुलिस आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।  

हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी! इंडिगो की कई फ्लाइट्स रद्द—जानिए असली कारण क्या है

नई दिल्ली  देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इस सप्ताह अपने सबसे बड़े परिचालन संकटों में से एक का सामना कर रही है। मंगलवार और बुधवार को एयरलाइन की 200 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, जबकि सैकड़ों उड़ानें घंटों देरी से चल रही हैं। इस वजह से देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं और हजारों लोग फंसकर परेशान हो गए। घरेलू विमानन कंपनी इंडिगो ने बृहस्पतिवार को तीन प्रमुख हवाई अड्डों से 180 से अधिक उड़ानें रद्द कर दीं। गुरुग्राम स्थित एयरलाइन, अपने पायलटों के लिए उड़ान-ड्यूटी और आराम अवधि के नए नियमों के मद्देनजर अपनी उड़ानों के संचालन के लिए जरूरी चालक दल सदस्यों की व्यवस्था करने को लेकर जूझ रही है। एक सूत्र ने कहा- इंडिगो ने बृहस्पतिवार को तीन हवाई अड्डों…मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु…. से 180 से ज्यादा उड़ानें रद्द कर दीं।’ मुंबई हवाई अड्डे पर रद्द होने वाली उड़ानों की संख्या दिन भर में 86 (41 आगमन और 45 प्रस्थान) रही। वहीं बेंगलुरु में 41 आगमन उड़ानों सहित 73 उड़ानें रद्द की गईं। इसके अलावा, बृहस्पतिवार के लिए दिल्ली हवाई अड्डे पर 33 उड़ानें रद्द की गईं। सूत्र ने कहा, ‘‘दिन चढ़ने के साथ रद्द होने वाली उड़ानों की संख्या और बढ़ने की आशंका है।’ एयरलाइन का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (ओटीपी) छह प्रमुख हवाई अड्डों… दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद… पर तीन दिसंबर को 19.7 प्रतिशत तक गिर गया, क्योंकि उसे अपनी सेवाओं के संचालन के लिए आवश्यक चालक दल जुटाने को लेकर जूझना पड़ रहा है। यह दो दिसंबर के आंकड़े से लगभग आधे से कम है। उस समय यह 35 प्रतिशत था। कई कारणों के एक साथ टकराने से इंडिगो की समय-सारिणी अचानक धराशायी हो गई। इन कारणों में प्रमुख हैं- क्रू की भारी कमी, नए ड्यूटी-टाइम नियम, तकनीकी खामियां आदि। आइए इसे विस्तार से समझते हैं। 1. क्रू की गंभीर कमी नए ड्यूटी-टाइम नियम 1 नवंबर से लागू हुए, जिनसे पायलट और क्रू के काम करने के घंटे कम कर दिए गए और अनिवार्य आराम समय बढ़ा दिया गया। नियम सख्त होने के बाद कई पायलट कानूनी तौर पर ड्यूटी के लिए उपलब्ध ही नहीं बचे, जिसके चलते दर्जनों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। कई रोटेशन पूरे ही नहीं हो पाए क्योंकि समय सीमा खत्म हो चुकी थी। 2. नए रोस्टर नियम (FDTL) के कारण बढ़ी चुनौती डीजीसीए द्वारा लागू नई 'फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन' में रात की लैंडिंग, लगातार ड्यूटी घंटों और साप्ताहिक विश्राम को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। इंडिगो प्रतिदिन करीब 2200 उड़ानें संचालित करती है और उसके पास रात में उड़ान भरने वाले विमानों की बड़ी संख्या है। नए नियमों के अनुसार रोस्टर और शेड्यूल दोबारा तैयार करना पड़ा, लेकिन यह प्रक्रिया अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाई थी। 3. प्रमुख हवाई अड्डों पर तकनीकी खामियां मंगलवार को दिल्ली और पुणे जैसे हवाई अड्डों पर चेक-इन और डिपार्चर कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी समस्याएं आईं। इससे सुबह की उड़ानें पीछे खिसक गईं और देरी का यह प्रभाव पूरे दिन नेटवर्क में फैलता गया। 4. शीतकालीन भीड़ और एयरपोर्ट कंजेशन सर्दियों के मौसम में धुंध, बढ़ी हुई यात्री संख्या और पीक आवर्स की भीड़ ने हालात और खराब कर दिए। इंडिगो की तंग शेड्यूलिंग के कारण छोटी देरी भी पूरे नेटवर्क में लहर की तरह असर डालती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को इंडिगो की ऑन-टाइम परफॉर्मेंस 35% पर आ गई- यानी एक दिन में 1,400 से अधिक उड़ानें देरी से चलीं। नवंबर महीने में ही एयरलाइन को 1,232 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। क्या हैं नए FDTL नियम? डीजीसीए के नए नियमों का उद्देश्य क्रू की थकान कम करना और उड़ान सुरक्षा को मजबूत करना है। इनमें शामिल हैं:     साप्ताहिक अनिवार्य आराम समय बढ़ा     रात की लैंडिंग की सीमा 6 से घटाकर 2     लगातार ड्यूटी घंटों में कमी इसके साथ ही पायलटों के लिए उड़ान समय की नई सीमाएं तय की गईं:     8 घंटे प्रतिदिन     35 घंटे प्रति सप्ताह     125 घंटे प्रति माह     1000 घंटे प्रति वर्ष इसके अलावा किसी भी 24 घंटे की अवधि में क्रू को कम से कम 10 घंटे अनिवार्य विश्राम देना होगा। ये नियम सुरक्षा के लिहाज से मजबूत हैं, पर एयरलाइनों को पहले की तुलना में अधिक पायलट और क्रू की जरूरत पड़ रही है। इंडिगो, जिसके पास रात की उड़ानों का बड़ा नेटवर्क है, वह सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। अन्य एयरलाइंस पर इतना असर क्यों नहीं? 1. पैमाना और उड़ानों की संख्या इंडिगो देश की घरेलू उड़ानों का सबसे बड़ा हिस्सा संचालित करता है। इतने बड़े नेटवर्क में छोटी गड़बड़ी भी बड़ा प्रभाव डालती है। 2. रात की उड़ानों का बड़ा नेटवर्क विस्तारा, एयर इंडिया और अकासा जैसी एयरलाइनों की रात की उड़ानें सीमित हैं, जबकि इंडिगो कई हाई-फ्रीक्वेंसी नाइट सेक्टर संचालित करती है। रात की लैंडिंग की सीमा घटने से इंडिगो पर अधिक दबाव पड़ा। 3. तंग क्रू-उपयोग मॉडल इंडिगो की परिचालन दक्षता कम खाली समय और उच्च उपयोग पर आधारित है। नए नियमों के बाद शेड्यूल में तुरंत खालीपन आ गया। 4. नेटवर्क पुनर्गठन में कम लचीलापन छोटी एयरलाइंस अपने शेड्यूल तेजी से बदल सकती हैं, लेकिन इंडिगो के विशाल नेटवर्क में यह प्रक्रिया कहीं अधिक जटिल है। कब तक सुधरेगी स्थिति? इंडिगो ने कहा है कि वह कैलिब्रेटेड एडजस्टमेंट्स कर रहा है और 48 घंटे में संचालन सामान्य होने की उम्मीद है। एयरलाइन इन कदमों पर काम कर रही है:     उच्च दबाव वाले रूटों पर क्रू की पुनर्नियुक्ति     नाइट शेड्यूल में बदलाव     अंतिम समय की अफरातफरी से बचने के लिए प्री-प्लान्ड कैंसिलेशन     विमान और क्रू रोटेशन को नए सिरे से व्यवस्थित करना एयरलाइन ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे उड़ान स्थिति लगातार चेक करते रहें, क्योंकि देरी अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकती है। इंडिगो ने बयान जारी किया- हम अपने ग्राहकों से क्षमा चाहते हैं… अप्रत्याशित परिचालन चुनौतियों तकनीकी समस्याएं, सर्दियों से जुड़ी देरी, एयरपोर्ट कंजेशन और अपडेटेड क्रू रोस्टरिंग नियम का सामूहिक प्रभाव हमारे संचालन पर पड़ा … Read more

लालू परिवार को बड़ी राहत! लैंड फॉर जॉब केस पर आज निर्णय नहीं, कोर्ट ने CBI को दिया खास टास्क

पटना  चर्चित लैंड फॉर जॉब केस में राउज एवेन्यू कोर्ट दिल्ली का फैसला टल गया है। इससे लालू परिवार को फौरी राहत मिल गई है। अगली सुनवाई 8 दिसम्बर को होगी। कोर्ट ने जांच एजेंसी सीबीआई को एक अहम टास्क दिया है कोर्ट आज गुरुवार को लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर सुनवाई हुई। इस मामले में कोर्ट ने फिलहाल अपना आदेश स्थगित कर दिया है।   इस मामले में अदालत ने सीबीआई से आरोपियों की स्थिति की जानकारी स्पष्ट करने का टास्क दिया है। कार्यवाही के दौरान इस कांड के कुछ आरोपियों की मृत्यु हो गई। अदालत ने सीबीआई से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है और मामले की सुनवाई 8 दिसंबर के लिए निर्धारित की है। सीबीआई ने 103 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। हालाँकि, कार्यवाही के दौरान 4 की मृत्यु हो गई। कोर्ट ने मामले की तफ्तीश कर रही सीबीआई को आदेश दिया है कि सभी आरोपियों का स्टेटस वेरिफिकेशन कर रिपोर्ट दाखिल करे। लालू परिवार के लिए नासूर बन चुके इस केस की सुनवाई काफी दिनों से चल रही है। अदालत की कार्यवाही के दौरान कांड के चार आरोपितों की मौत हो गई। इसे लेकर अदालत ने कहा कि जब तक प्रत्येक अभियुक्त की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाए तबतक आरोप तय करने जैसी संवेदनशील प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। इसी वजह से कोर्ट ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई से अभियुक्तों का स्टेटस रिपोर्ट फाइल करने का निर्देश दिया है। इस मामले में आरोप है कि रेलवे के पश्चिम मध्य क्षेत्र में ग्रुप-डी श्रेणी में लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान की गई गलत तरीके से नियुक्तियां की गईं। इसके एवज में लालू परिवार के सदस्यों या अन्य सहयोगियों के नाम पर जमीनों की रजिस्ट्री कराई गई। मामला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे।  

CM भगवंत मान का नया अभियान: नशे के खिलाफ संग्राम को मजबूत करेगी मेंटल हेल्थ फैलोशिप

चंडीगढ़  पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ऐतिहासिक शुरुआत हुई है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने देश की पहली सरकारी लीडरशिप इन मेंटल हेल्थ प्रोग्राम लॉन्च किया है. उन्होंने कहा कि युद्ध नशे विरुद्ध सिर्फ नारा नहीं, बल्कि एक जमीनी लड़ाई है, जिसमें हर परिवार की सुरक्षा और भविष्य दांव पर है. यह फेलोशिप 2 साल की होगी. जिसमें न सिर्फ पंजाब, बल्कि पूरे भारत के लिए एक मॉडल बनने जा रही है. एम्स मोहाली और टीआईएसएस मुंबई की साझेदारी में शुरू हुई यह पहल 23 जिलों में मानसिक स्वास्थ्य और नशा-निवारण को बिल्कुल नए स्तर पर ले जाएगी. सरकार 35 ऐसे युवा विशेषज्ञ चुन रही है जो साइकोलॉजी या सोशल वर्क की पढ़ाई कर चुके हैं और जिनके पास मानसिक स्वास्थ्य में काम करने का अनुभव है. ये फेलो पंजाब के गांव, शहर, स्कूल, कॉलेज, कम्युनिटी सेंटर और रिहैब सुविधाओं तक पहुँचकर एक ऐसे मॉडल को लागू करेंगे जिसकी कल्पना भारत ने पहले नहीं की रोकथाम, उपचार और पुनर्वास तीनों को एक साथ जोड़कर. समाज को मजबूत करने की जरूरत भगवंत मान यह मानते हैं कि नशे से लड़ाई सिर्फ पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के मन को मजबूत करने की जरूरत है. इसी सोच के चलते इस कार्यक्रम में फेलोज़ को टीआईएसएस मुंबई से विशेष ट्रेनिंग, मेंटरशिप और जमीनी नेतृत्व सीखने का मौका मिलेगा. उन्हें 60,000 रुपये महीना का सम्मानजनक रिम्यूनरेशन भी मिलेगा, ताकि वे बिना किसी दबाव के पूरी ऊर्जा से पंजाब के युवाओं और परिवारों के साथ काम कर सकें. नशा महामारी की तरह फैल चुका है यह कार्यक्रम असल मायने में पंजाब के दिल की धड़कन है. नशा एक महामारी की तरह फैल चुका था, लेकिन अब पंजाब ने यह लड़ाई विशेषज्ञों के साथ मिलकर, वैज्ञानिक तरीकों से और लोगों के बीच उतरकर लड़ने का फैसला लिया है. भगवंत मान ने दिखा दिया है कि जब नीयत साफ हो और लक्ष्य जनता की भलाई हो, तो सरकारें बदलाव लेकर आती हैं, बयान नहीं. पंजाब के भविष्य में निवेश 7 दिसंबर तक आवेदन खुले हैं, और अधिक जानकारी के लिए https://tiss.ac.in/lmhp पर जाकर देख सकते है. यह सिर्फ एक फेलोशिप नहीं, बल्कि पंजाब के भविष्य में निवेश है, एक ऐसा भविष्य जहां हर घर सुरक्षित हो, हर युवा स्वस्थ हो, और हर माता-पिता नशे के डर के बिना अपने बच्चों को बड़ा कर सकें. यह वही पंजाब है जिसकी कल्पना भगवंत मान ने की थी और अब वह धीरे-धीरे हकीकत बन रहा है.  

दिल्ली में BJP का मास्टरस्ट्रोक: दो सीट कम, पर बढ़त सबसे दमदार!

नई दिल्ली दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की 12 सीटों पर हुए उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 7 जीतकर अपना दबदबा कायम रखा। भाजपा दिल्ली में सरकार बनने के बाद हुई अपनी पहली परीक्षा में 'टॉप' करके गदगद है तो आम आदमी पार्टी यह कहकर उसकी जीत को कमतर कर रही है कि सत्ताधारी के पास मौजूद रहीं 9 सीटों पर उपचुनाव हुआ था और वह अब सात ही जीत पाई है। हालांकि, आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भाजपा ने वोट शेयर के मामले में बड़ी छलांग लगाई है और उसकी खुशी की असली वजह भी यही है।   2022 में हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। तब पार्टी को 39 फीसदी वोट शेयर हासिल हुए थे, जबकि 42 फीसदी वोट शेयर लेकर अरविंद केजरीवाल की अगुआई वाली वाली 'आप' पहली बार निगम में काबिज हुई थी। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद आप के कई पार्षदों ने मिलकर नया गुट बना लिया और भाजपा ने दोबारा एमसीडी पर कब्जा कर लिया। इस उपचुनाव में भाजपा के वोट शेयर में बड़ा उछाल देखने को मिला है। 45 फीसदी वोटर्स ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। 2022 के मुकाबले पार्टी को 6 फीसदी अधिक वोट मिले हैं। जनसमर्थन में हुई इस वृद्धि से निश्चित तौर पर पार्टी गदगद है। चुनाव नतीजों के बाद प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा से जब दो सीटें कम होने पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि स्थानीय समीकरणों की वजह से ऐसा हुआ होगा, लेकिन उन्हें आम आदमी पार्टी से करीब 10 फीसदी अधिक वोट मिले हैं। आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका आप भले ही अपने प्रदर्शन को बरकरार रख पाई, लेकिन वोट शेयर के मामले में उसे बड़ा नुकसान हुआ है। जिन सीटों पर उपचुनाव हुए हैं उनमें से आप के पास पहले तीन सीटें थीं और अब भी पार्टी इतनी ही सीटें जीत पाई है और इसे गिनाकर वह अपना संतोष जाहिर कर रही है। हालांकि, वोट शेयर के मामले में उसे 7 फीसदी का नुकसान झेलना पड़ा है। 2022 में 42 फीसदी वोट शेयर हासिल करने वाली आप को अस बार 35 फीसदी वोटर्स ने ही चुना है। कांग्रेस के वोट शेयर में भी वृद्धि इस उपचुनाव में कांग्रेस भी एक सीट पर जीत हासिल करने में सफल रही। तब कांग्रेस को 11.68 फीसदी वोट मिले थे तो इस बार 13.4 फीसदी वोट मिले हैं।  

विवादित मस्जिद टिप्पणी: ममता बनर्जी की नाखुशी के बाद TMC ने विधायक के खिलाफ तुरंत लिया एक्शन

कोलकाता  बाबरी से मिलती जुलती मस्जिद बनाने का दावा कर रहे विधायक हुमायूं कबीर के तृणमूल कांग्रेस ने निलंबित कर दिया है। कबीर ने 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले में मस्जिद की नींव रखने की बात कही थी। इसके बाद से ही प्रशासन अलर्ट मोड पर था। खबर है कि टीएमसी विधायक के इस फैसले से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नाराज थीं। हालांकि, इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया। कोलकाता मेयर फिरहाद हाकिम ने टीएमसी के फैसले की जानकारी दी। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, उन्होंने कहा, 'हमने देखा था कि मुर्शिदाबाद के हमारे विधायकों में से एक ने अचानक ऐलान कर दिया कि वह बाबरी मस्जिद बनाएंगे। अचानक बाबरी मस्जिद क्यों? हम उन्हें पहले ही चेतावनी दे दी थी। हमारी पार्टी टीएमसी के फैसले के आधार पर हम विधायक हुमायूं कबीर को निलंबित कर रहे हैं।' क्या ममता बनर्जी थीं नाराज मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि विधायक कबीर के फैसले से सीएम बनर्जी नाराज हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि सीएम और उनकी पार्टी इस फैसले के साथ नहीं हैं और यह संदेश विधायक को पहुंचा दिया गया है। एक दिन पहले भी टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी भी इस फैसले से दूरी बनाते हुए नजर आए थे उन्होंने कहा था, 'पश्चिम बंगाल के लोग ममता बनर्जी पर भरोसा करते हैं। कौन क्या कहता है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उनका कोई महत्व नहीं है।' रैली में जाने वाले थे कबीर खबरें थीं कि विधायक कबीर मुर्शिदाबाद में होने वाली सीएम बनर्जी की रैली में भी शामिल होने वाले थे। उन्हें टीएमसी की तरफ से न्योता भी दिया गया था। अब एनडीटीवी की रिपोर्ट में कहा गया है कि विधायक को रैली में से हटा लिया गया है। खास बात है कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी टीएमसी विधायक की तरफ से की गई घोषणा के मद्देनजर सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। प्रशासन को दी थी चेतावनी कबीर ने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में मुर्शिदाबाद प्रशासन पर 'आरएसएस एजेंट' के रूप में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि वे उनके कार्यक्रम को रोकने की कोशिश नहीं करें, वरना यह 'आग से खेलने' जैसा होगा। कबीर ने कहा, 'मैंने एक साल पहले कहा था कि मैं बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की नींव रखूंगा। आपको दिक्कत क्यों हो रही है? क्या आप भाजपा के इशारे पर चल रहे हैं?' तृणमूल विधायक ने कहा कि अगर उन्हें बाबरी मस्जिद की नींव रखने से रोका गया, तो 'एनएच-34 उनके नियंत्रण में होगा, मुसलमानों के नियंत्रण में होगा।' उन्होंने राज्य की तृणमूल सरकार पर 'आरएसएस के एजेंट' के रूप में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा, 'मैं शांति भंग नहीं करूंगा, लेकिन अगर कोई शांतिपूर्ण कार्यक्रम में बाधा डालता है, तो मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं।'  

27 IAS अधिकारियों को मिला प्रमोशन, बनेंगे अपर सचिव, वेतनमान में बढ़ोतरी के साथ बिहार के डीएम शामिल

पटना  नए साल से पहले बिहार की नीतीश कुमार सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों को बड़ा तोहफा दिया है।राज्य सरकार ने 27 आईएएस अफसरों को कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड’ (Junior Administrative Grade) में प्रोन्नति दी है। इसके तहत अब ये अधिकारी अपर सचिव स्तर (Additional Secretary Level) के वेतनमान और सुविधाओं के हकदार होंगे। इस संबंध में मंगलवार 3 दिसंबर 2025 को अधिसूचना भी जारी कर दी गई। यह प्रोन्नति 01 जनवरी 2026 या उसके बाद पदभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी। इस प्रोन्नति में अलग-अलग बैच के अधिकारी समेत सीनियर कमिश्नर व जिलाधिकारी (DM) भी शामिल हैं।इससे पहले 29 नवंबर को भारतीय प्रशासनिक सेवा के संयुक्त सचिव स्तर के 19 अफसरों को पदोन्नति दी गई थी। इन 27 आईएएस अफसरों को मिला प्रमोशन     तनय सुल्तानिया: समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, भोजपुर (आरा)     तरनजोत सिंह: समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, मधेपुरा     विशाल राज: समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, किशनगंज     आरिफ अहसन: समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, शेखपुरा     विवेक रंजन मैत्रेय: समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, शिवहर     अनिल कुमार: समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, अररिया     अभिलाषा शर्मा: समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, अरवल     दीपेश कुमार: समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, सहरसा     कुमार गौरव: अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति     योगेश कुमार सागर: निदेशक, नि:शक्तता (समाज कल्याण)     संजीव मित्तल: संयुक्त सचिव, वित्त विभाग     रूबी: निदेशक, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय     कृष्ण कुमार: निदेशक, संग्रहालय     संजय कुमार (ग्रामीण कार्य विभाग के संयुक्त सचिव)     संजय कुमार सिंह (संयुक्त सचिव भवन निर्माण विभाग)     अभय झा (संयुक्त सचिव ग्रामीण कार्य विभाग)      गीता सिंह – अपर सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार, पटना     अरुण कुमार झा – बंदोबस्त पदाधिकारी, खगड़िया     नन्द किशोर साह – अपर सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, बिहार, पटना     नवीन कुमार सिंह – अपर सचिव, समाज कल्याण विभाग, बिहार, पटना     कमलेश कुमार सिंह – निदेशक, भू-अर्जन, बिहार, पटना     राजीव कुमार श्रीवास्तव – प्रबंध निदेशक, बिहार राज्य आवास बोर्ड, पटना     डॉ. विद्या नन्द सिंह – समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, बक्सर     शैलेन्द्र कुमार – अपर सचिव, कृषि विभाग, बिहार, पटना     सत्येन्द्र कुमार सिंह – अपर सचिव, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, बिहार, पटना     सुनील कुमार-1 – समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी, कैमूर (भभुआ)     पवन कुमार सिन्हा – समाहर्त्ता एवं जिला पदाधिकारी, गोपालगंज  

पुतिन की सुपर-सिक्योर Aurus Senat भारत आ रही—जानें कैसे बनी यह कार दुनिया की सबसे अभेद्य सवारी

नई दिल्ली  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को ऐतिहासिक दौरे पर भारत पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा कई मायनों में खास है और इस यात्रा पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। पुतिन के दौरे से पहले एक बार फिर उनका ‘अभेद्य रथ’ चर्चा में आ गया है। दरअसल रूसी राष्ट्रपति के साथ उनकी गाड़ियों का काफिला भी भारत आ रहा है, जिसमें दुनिया की सबसे सुरक्षित और सीक्रेट कार Aurus Senat भी शामिल रहेगी। बता दें कि पुतिन की यह खास बुलेटप्रूफ लिमोजिन उनके हर विदेश दौरे पर रूसी राष्ट्रपति के साथ ही यात्रा करती है। पुतिन का यह खास सुरक्षा कवच, हाल ही में चीन में हुए शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के दौरान सुर्खियों में रहा। इसकी वजह रही पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन एक साथ Aurus Senat में सफर करना। उस वक्त पुतिन ने करीब दस मिनट पीएम मोदी का गाड़ी में इंतजार किया था और दोनों नेताओं ने लगभग एक घंटे तक कार में बैठकर बातचीत की थी। इसके अलावा रूस ने 2024 में उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को यह कार तोहफे के रूप में भी दिया था। हाई-टेक सिक्योरिटी सिस्टम से लैस Aurus Senat रूस की स्वदेशी लग्जरी लिमोजिन है, जिसे खास तौर पर राष्ट्रपति और सरकारी इस्तेमाल के लिए डिजाइन किया गया है। इसे अक्सर रसियन रॉल्स रॉयस भी कहा जाता है। यह गाड़ी प्रीमियम और पूरी तरह से हाई-टेक सिक्योरिटी सिस्टम से लैस है। इस कार से पहले पुतिन मर्सिडीज बेंज S600 गार्ड पुल्मैन का इस्तेमाल करते थे, लेकिन बाद में रूस ने विदेशी कारों की जगह अपनी खास प्रोजेक्ट के तहत बनी इस कार को अपनाया। कितनी है कीमत? पुतिन सबसे पहले इस कार में 2018 में देखे गए थे। 2021 से इसका मास प्रोडक्शन शुरू हुआ। इसका एक लिमिटेड सिविलियन वर्ज़न भी है, जिसकी हर साल सिर्फ 120 यूनिट बनाई जाती हैं। इस कार की बेस कीमत करीब 18 मिलियन रूबल यानी लगभग 2.5 करोड़ रुपये है। हालांकि पुतिन की खास आर्मर्ड वर्ज़न में कई सीक्रेट सिक्योरिटी फीचर शामिल हैं, जिसकी कीमत लगभग दोगुनी से भी ज्यादा है। क्यों कहा जाता है अभेद्य रथ? Aurus Senat को किसी भी हमले में राष्ट्रपति की जान बचाने के लिए तैयार किया गया है। यह कार पूरी तरह बुलेटप्रूफ है और हाई-कैलिबर और आर्मर-पियर्सिंग गोलियों को रोकने में सक्षम है। इसमें ड्रोन और मिसाइल अटैक प्रूफ प्रोटेक्शन भी दिया गया है। अगर कार पानी में गिर जाए तो यह तैरते हुए आगे बढ़ने की क्षमता रखती है। इसके सभी टायर बर्बाद होने के बाद भी यह हाई स्पीड में दौड़ सकती है। केबिन को केमिकल अटैक से सुरक्षित रखने के लिए इंडिपेंडेंट एयर-फिल्ट्रेशन सिस्टम लगाया गया है। वहीं 4.4 लीटर का ट्विन-टर्बो V8 हाइब्रिड इंजन की मदद से यह महज 6 से 9 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गति तक पहुंच सकता है। कार के अंदर लेदर इंटीरियर, क्लाइमेट कंट्रोल और सिक्योर कम्युनिकेशन सिस्टम की सुविधा दी गई है, जो इसे एक अल्ट्रा लग्जरी और हाई-टेक वाहन बनाते हैं।

सनी लियोनी पर बैन क्यों नहीं?—खुशी मुखर्जी ने फफक-फफक कर साझा की अपनी कहानी

मुंबई     अतरंगी फैशन और रिवीलिंग कपड़ों को लेकर चर्चा में आईं एक्ट्रेस खुशी मुखर्जी बेहद परेशान हैं. उनका कहना है कि उनका इकलौता सोर्स ऑफ इनकम- उनका ऐप बंद करवा दिया गया है. क्योंकि उन पर आरोप था कि वो वहां वल्गर कंटेंट परोसती हैं. उन्होंने इस बात पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मेरा कंटेंट वल्गर था तो सनी लियोनी को बैन क्यों नहीं किया जाता.  ट्रॉमा झेल रहीं खुशी  खुशी अपना दर्द जाहिर करते हुए इतनी इमोशनल हो गईं कि फूट-फूटकर रोने लगीं. उनकी सांस तक रुकने लगीं, उन्होंने पानी पिया और खुद को संभाला. खुशी बताती हैं कि उन्हें उनके ऐप और अपीयरेंस की वजह से एडल्ट स्टार माना जाने लगा है. उनपर भद्दे-भद्दे कमेंट्स पास किए जाते हैं और साथ ही अश्लील ऑफर्स तक मिलते हैं. गलट्टा इंडिया से बातचीत में खुशी ने अपनी पीड़ा जाहिर की. खुशी बोलीं- मेरे इनकम का एकलौता सोर्स मेरा ऐप ही था, लेकिन उसका इतना विरोध हुआ कि मैंने उसको भी बंद कर दिया. क्योंकि मुझे कहीं न कहीं लगा कि हां, वो वल्गर लग रहा है. वो ऐप की वजह से लोग मेरे पीछे पड़े हैं. मैंने उसको बैन कर दिया है तो सनी लियोनी को क्यों नहीं बैन किया जा रहा है हमारे देश में. ऐसे सारे विदेशियों को क्यों नहीं बैन किया जा रहा है. पाकिस्तानी एक्टर्स तो बैन हैं. वर्क परमिट लेकर जो भारत में आ रहे हैं- वो भी बैन होने चाहिए.  ''अभी लेटेस्ट टॉपिक जो निकल रहा है- ड्रग्स का, ये कैसे सेल होता है. वो भी तो कहीं ना कहीं से आता ही है ना. इसे भी बैन होना चाहिए. मैंने अगर ज्यादा बोल दिया तो मेरे ही घर में ड्रग्स प्लांट करके मुझे जेल भेज देंगे. ये चीजें तो हो चुकी हैं ना.'' खुशी को मिले अश्लील ऑफर्स खुशी ने आगे बताया कि उनके कपड़े और उनके ऐप कंटेंट को देखकर उन्हें गंदे ऑफर्स आए, जहां उन्हें लोगों के साथ रात गुजारने को कहा गया. वो बताती हैं कि- मैं भी एक सभ्य परिवार से आती हूं. मैंने इंडस्ट्री को 10-12 साल दिए हैं. मैंने बचपन से ही काम करना शुरू कर दिया था. मेरे भाई ने प्रियंका चोपड़ा, स्नूप डॉग तक के साथ काम किया है. मैं कुछ बता भी नहीं पाती हूं. और क्या बताऊं कि मुझे कैसे-कैसे ऑफर्स आते हैं. ये बोलते हुए खुशी फफक-फफक रो पड़ीं. उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे.  किसी तरह खुद को संभालते हुए खुशी बोलीं- मैं किसी के साथ सोना नहीं चाहती क्योंकि हां मुझे घमंड है अपनी एक्टिंग पर. मैं तीसरी कक्षा से मोनो एक्टिंग करती आ रही हूं. मैं थियेटर कर चुकी हूं. मेरी मां भी थियेटर आर्टिस्ट रही हैं. मैं क्यों हार मान जाऊं. अगर मेरे पास पैसे हैं, थोड़ी बहुत प्रॉपर्टी है. मैं सबकुछ तो इंडस्ट्री में नहीं लगा सकती ना.  खुशी मुखर्जी बता चुकी हैं कि अपने ऐप से उन्होंने एक बार में लगभग 10 करोड़ रुपये तक कमा लिए थे. वो हार्ट अटैक, अंजल थुरई समेत कई फिल्मों में नजर आ चुकी हैं.

खरमास में शुक्र का दो बार गोचर, इन 3 राशियों को मिलेगी आर्थिक और सामाजिक सफलता

इस साल का खरमास बेहद ही खास रहने वाला है। दैत्यों  के गुरु शुक्र (Shukra) दो बार गोचर करने वाले हैं। पहला गोचर 20 दिसंबर को धनु राशि में होगा। वहीं दूसरा गोचर 13 जनवरी 2026 को मकर राशि में होगा। इसका प्रभाव इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन पर पड़ेगा। किसी को फायदा तो किसी को नुकसान होगा। जातकों के जीवन में कई बदलाव आ सकते हैं। सूर्य देव के प्रवेश धनु राशि में प्रवेश के साथ खरमास मास की शुरुआत होती है। हिंदू धर्म में इसका बेहद ही विशेष महत्व होता है। इस समय शुभ और मांगलिक कार्यक्रमों को करना अशुभ माना जाता है। गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह जैसे कार्यक्रम की मनाही होती है। खरमास की शुरुआत 14 दिसंबर से होने वाली है। इसका समापन 14 जनवरी 2026 को होगा। कई राशियों के लिए यह समय किसी वरदान के से का कम नहीं होगा। असुराचार्य शुक्र (Shukra Gochar) की खास कृपा बरसेगी। आइए जानें किन लोगों को इस दौरान सबसे अधिक फायदा होने वाला है? मेष राशि (Mesh Rashi) मेष राशि के जातकों पर धन के दाता शुक्र की खास कृपा बरसेगी। लोगों के साथ आपके संपर्क बढ़ेंगे। नए दोस्त बन सकते हैं। यात्रा की योजना भी बनेगी। प्रोफेशनल लाइफ में सकरात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। कारोबार में मुनाफा होगा। वैवाहिक जीवन में भी खुशहाली आएगी। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। छात्रों को उच्च शिक्षा में सफलता मिलेगी।  प्रतियोगी परीक्षाओं में भी अच्छा प्रदर्शन रहेगा। धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रुझान बढ़ेगा। आर्थिक तंगी भी दूर होगी। कन्या राशि (Kanya Rashi) कन्या राशि के जातकों के लिए खरमास अनुकूल रहेगा। शुक्र की खास कृपा बरसेगी। घर परिवार में खुशहाली आएगी। माता के साथ आपके संबंध मजबूत होंगे। धार्मिक और शुभ कार्यक्रमों का आयोजन भी हो सकता है। लग्जरी आइटम की खरीदारी होगी। भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होगी। लव लाइफ भी अच्छी रहने वाली है। अटका हुआ पैसा वापस मिलेगा।  बिजनेस करने वाले लोगों को इस दौरान मुनाफा होगा। अपने लाइफ पार्टनर के साथ अच्छा समय व्यतीत करने का मौका मिलेगा। तुला राशि (Tula Rashi) तुला राशि के जातकों के लिए शुक्र का दोनों गोचर लाभकारी साबित होगा। राइटिंग और लिटरेचर से जुड़े लोगों को इस दौरान फायदा होगा। तरक्की के प्रबल योग बन रहे हैं।   कम्युनिकेशन स्किल में भी सुधार आएगा। रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को सफलता मिलेगी। भाई बहनों के साथ यात्रा की योजना बन सकती है। करियर में भी कई मौके मिलेंगे। निवेश पर मुनाफा होगा। बिजनेस का विस्तार होगा। पर्सनल लाइफ भी अच्छी रहेगी। आपकी सेहत में सुधार आएगा। हालांकि परिवार के सदस्यों का ख्याल रखने की जरूरत है।