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झारखंड में नया सियासी बम—पोस्टर विवाद और हेमंत सोरेन की दिल्ली यात्रा ने बढ़ाई अटकलें

रांची.  अब नया बम झारखंड में हेमंत अब जीवंत होंगे… 14 नवंबर को बिहार चुनाव परिणाम के तीसरे दिन 17 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने सोशल मीडिया पर यह पोस्ट किया था. उस समय से ही यह कयास लगने लगे थे कि संभव है कि झारखंड में कुछ राजनीतिक उथल-पुथल हो. इस एक लाइन ने पूरे झारखंड में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया. वजह भी साफ थी- बिहार चुनाव के दौरान सीट शेयरिंग को लेकर झामुमो और महागठबंधन में जारी तनातनी ने पहले ही संकेत दे दिया था कि रिश्तों में दरार गहरी हो रही है. बिहार सीमा से लगी 12 सीटों पर लड़ने का दावा करने वाला झामुमो जब सीटें नहीं मिलीं तो उसने सीधा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था. तब से ही चर्चा थी कि – बिहार की हार, झारखंड की राजनीति बदल देगी! इसकी पृष्ठभूमि बनी और सियासी कहानी क्रमवार बढ़ती गई है. बिहार में हार… और झारखंड में वार? दरअसल, इसकी वजह बिहार चुनाव के दौरान से ही दिख रही थी, क्योंकि बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर जिस तरह झारखंड मुक्ति मोर्चा और महागठबंधन के दलों में समन्वय की कमी दिखी, वह कुछ तो संकेत कर रही थी. बिहार झारखंड सीमा से लगी 12 सीटों पर झामुमो चुनाव लड़ने का दावा कर रहा था तो दूसरी ओर महागठबंधन की ओर से झामुमो के लिए किसी भी प्रकार की तवज्जो नहीं देना, इसकी पृष्ठभूमि तैयार करता हुआ दिखा. बाद में यह भी चर्चा हुई कि जेएमएम को 3 सीटें दिए जाने पर सहमति बन गई है. लेकिन, तभी खबर आई कि झामुमो ने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने से ही इनकार कर दिया है. महागठबंधन में सीटें नहीं मिलने पर जेएमएम ने उम्मीदवार खड़े नहीं किए और बिहार चुनाव बाद झारखंड में गठबंधन को लेकर समीक्षा यानी रिव्यू की बात कही थी. बिहार में चुनाव हुए फिर परिणाम भी आए और महागठबंधन की करारी हार हुई. इसके बाद अजय आलोक के इस पोस्ट ने झारखंड में सियासी सरगर्मी भी तेज कर दी. हेमंत-कल्पना दिल्ली में, झारखंड में हलचल इसके बाद तो भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी की लगातार चुप्पी और फिर महागठबंधन को लेकर हेमंत सोरेन की लंबी खामोशी और संशय के माहौल में पत्नी कल्पना सोरेन के साथ दिल्ली दौरा और वहां कथित तौर पर भाजपा नेताओं से गुप्त मुलाकात… जाहिर है कयासों ने सियासी कहानी गढ़ दी है. दरअसल, इसकी पृष्ठभूमि भी साफ-साफ दिख रही है क्योंकि, पिछले कुछ दिनों से हेमंत सोरेन और कांग्रेस की दूरी साफ-साफ दिख रही है. मुख्यमंत्री का सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में उपस्थित नहीं होना और कार्यक्रम कैंसल होना भी कुछ तो संकेत कर रहा था. बता दें कि पिछले साल इसी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जिला-जिला जाते थे और जिक्र करते थे कि सरकार AC कमरे से नहीं गांव से चल रही है, पर इस बार किसी जिले में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम नहीं हुआ. महागठबंधन में दरार की चर्चा तेज बात और आगे तब बढ़ती दिखी जब दुमका में फ्लाईंग इंस्टिट्यूट के उद्घाटन कार्यक्रम के मौके पर सीएम हेमंत सोरेन के मंच पर सहयोगी कंग्रेस एवं राजद के मंत्री और विधायक नदारद रहे. बता दें कि इससे पहले महागठबंधन में जब भी मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यक्रम किया तो दोनों दल के मंत्री मौजूद रहते थे. इसके आगे की कहानी बढ़ी तो मोरहाबादी मैदान में नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के पोस्टर से राजद और कांग्रेस के नेताओं के पोस्टर नहीं लगे थे.पोस्टर नहीं लगने के बाद कांग्रेस और राजद के कुछ नेताओं के बीच यह बात चर्चा का विषय रही. इसके बाद तो झारखंड में इस सियासी सस्पेंस को और मजबूत किया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चुप्पी और उनके दिल्ली दौरे ने. क्या झारखंड की सियासत में परिवर्तन की तैयारी है? पत्नी कल्पना सोरेन के साथ हेमंत सोरेन का दिल्ली में कई दिनों तक रहना और वहां भाजपा नेताओं के साथ कथित गोपनीय मुलाकातों की खबरें, गठबंधन में असहजता के संकेत देती दिख रही हैं. उसके बाद सरकार-आपके-द्वार जैसे बड़े कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी, दुमका फ्लाइंग इंस्टिट्यूट के मंच से कांग्रेस-राजद के नेताओं की दूरी और सरकारी पोस्टरों से सहयोगियों की गायब तस्वीरों ने सवालों को और गहरा कर दिया. अब परिस्थिति इस मोड़ पर है कि सियासत सिर्फ अफवाहों पर नहीं चल रही, बल्कि घटनाएं खुद कहानी लिख रही हैं. फिलहाल स्थिति साफ नहीं है और न ही किसी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि, लेकिन सत्ता गलियारों की भाषा बताती है कि झारखंड की राजनीति अगले कुछ दिनों शांत नहीं रहने वाली.

हाईकोर्ट का फैसला: अनुसूचित जाति–जनजाति आरक्षण का लाभ केवल मूल धर्म की स्थिति में मान्य

प्रयागराज  इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) के लाभ का अधिकार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि यह लाभ केवल हिंदू धर्म में रहने वाले व्यक्तियों को ही प्राप्त हो सकता है. हाई कोर्ट के जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की एकल पीठ ने कहा कि धर्म बदलने के बाद भी अनुसूचित जाति का लाभ लेना संविधान के साथ धोखा है. कोर्ट ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए इस पर कानूनी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए. चार माह में जांच कर कार्रवाई का आदेश हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को निर्देश दिया है कि धर्म बदल चुके हिंदुओं की ओर से SC लाभ लिए जाने के मामलों की चार माह में जांच करें और जांच के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए. इसके साथ ही महाराजगंज के डीएम को विशेष रूप से निर्देश दिया गया है कि ईसाई धर्म अपना चुके व्यक्ति की ओर से खुद को हिंदू दिखाने के मामले की तीन माह में जांच कर कार्रवाई की जाए. केंद्र व राज्य सरकार को भी निर्देश इसके साथ ही कोर्ट ने निम्न अधिकारियों को इस मामले में कार्रवाई करने के आदेश दिए: 1. भारत सरकार के कैबिनेट सचिव 2. उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव 3. अपर मुख्य सचिव, समाज कल्याण विभाग 4. प्रमुख/अपर मुख्य सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग याची जितेंद्र साहनी की याचिका खारिज यह निर्णय जितेंद्र साहनी की याचिका पर सुनाया गया, जिसमें उन्होंने धर्म परिवर्तन के आरोप में एसीजेएम कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द किए जाने की मांग की थी. हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि याची चाहे तो अधीनस्थ अदालत में डिस्चार्ज अर्जी दे सकता है. कोर्ट ने हिंदू कौन है, इसका स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, आर्य समाजी आदि हिंदू परंपरा के अंतर्गत आते हैं. जो व्यक्ति मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी नहीं है, वह हिंदू माना जाता है. SC की सुविधाएं केवल हिंदू (और संबंधित धर्मों) को ही दी जाती हैं. धर्म बदलने के बाद व्यक्ति इन लाभों का हकदार नहीं रहता है. सुप्रीम कोर्ट के इस केस का दिया हवाला सुप्रीम कोर्ट के C. Selvarani मामले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि लाभ लेने के उद्देश्य से धर्मांतरण करना संविधान के साथ धोखा बताया गया है. याची पर आरोप है कि उसने गरीबों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया. साथ ही हिंदू देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कीं और धार्मिक शत्रुता भड़काई. ग्राम मथानिया लक्ष्मीपुर एकडंगा के याची पर आरोप है कि उसने जीसस क्राइस्ट की स्पीच के लिए गरीबों का धर्म परिवर्तन कराया है. SC/ST एक्ट का मकसद भी स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने कहा कि SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम का उद्देश्य उन समुदायों की रक्षा करना है. जो ऐतिहासिक रूप से जातीय भेदभाव का शिकार रहे हैं, उनके लिए ये एक्ट है. इसलिए इस संरक्षण को उन लोगों तक नहीं बढ़ाया जा सकता, जिन्होंने ऐसा धर्म अपना लिया है जहां जाति व्यवस्था मान्य नहीं है.

मध्यप्रदेश में सरकारी हवाई खर्च 90 करोड़ के पार, मेंटेनेंस पर ही 45 करोड़ रुपए खर्च

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले 11 महीनें में 90 करोड़ रुपए का हवाई सफर कर डाला. जबकि पिछले 4 सालों में हवाई यात्राओं पर 290 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. पिछले छह सालों में विमान किराए की राशि में करीबन 80 फीसदी की बढोत्तरी हुई है. साल 2019 में विमान के किराए पर 1.63 करोड़ रुपए खर्च होते थे, जो साल 2025 में बढ़कर 90.7 करोड़ रुपए पहुंच गया है. विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल और पंकज उपाध्याय के सवाल के जवाब में यह जानकारी सरकार ने विधानसभा में दी है. एक अन्य सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि, 'भुगतान मद में बजट राशि न होने की वजह से 15.30 करोड़ का भुगतान अभी बाकी है. मेंटेनेंस पर खर्च हुए 45 करोड़ मध्य प्रदेश सरकार के पास अभी 1 शासकीय हेलीकॉप्टर है, जिसका हवाई यात्राओं में उपयोग होगा है. जबकि एक अन्य विमान 2020 में ग्वालियर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. विधानसभा में सरकार द्वारा जानकारी दी गई कि राज्य सरकार के पास मौजूदा हवाई वाहन के रखरखाव पर साल 2011-12 से अभी तक 45.24 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है. वहीं इस दौरान इसके ईंधन खर्च पर 11.05 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. इस हेलीकॉप्टर पर साल 2022-23 ने सबसे ज्यादा उड़ान भरी. इस साल इसमें 14 करोड़ रुपए का ईंधन खर्च हुआ. इसी साल इसके मेंटेनेंस पर भी 10.49 करोड़ हुए खर्च हुए. विमान कंपनियों को चुकाए 290 करोड़ जानकारी में बताया गया कि, राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2021 से लेकर नंवबर 2025 के दौरान विमान किराए पर 290 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई. वहीं इस साल 2025 में जनवरी से लेकर नवंबर माह के दौरान निजी विमान कंपनियों पर 90.7 करोड़ रुपए की राशि हवाई उड़ान में खर्च की गई. हवाई उड़ान में खर्च की राशि में पिछले 4 सालों के दौरान भारी बढोत्तरी हुई है. साल 2019 में विमान किराए पर सिर्फ 1.63 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गई थी, लेकिन अब बढ़कर 90.7 करोड़ रुपए पहुंच गई है. 2022-23 से बढ़ाया विमान का किराया कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने बताया कि, ''सरकार ने उनके सवाल में जानकारी दी है कि 2022-23 से 2024-25 तक विमान किराए में 20 से 30 फीसदी की बढोत्तरी की गई है. 4 अप्रैल 2023 को आयुक्त विमानन द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि पोस्ट कोविड में पर्यटन बढ़ने के कारण विमान की मांग बढ़ गई है. कोविड के कारण विमान हेलीकॉप्टर का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है और लोकसभा चुनाव होने से विमान किराए की मांग बढ गई है. साथ ही इनके रखरखाव और ईंधन में बढोत्तरी हुई है, इसलिए किराया बढ़ाया जाना तय किया गया है. इस आधार पर जिन विमान का किराया 2022-23 में 4.45 लाख प्रतिघंटा उसे बढ़ाकर 2024 में 5.70 लाख प्रति घंटा किया गया और जिन विमान का किराया 3.5 लाख प्रति घंटा था, उसे बढ़ाकर 4.75 लाख प्रतिघंटा किया गया.''

फार्मा दिग्गज Corona का IPO लॉन्च—अगले हफ्ते खुलेगा इश्यू, प्राइस बैंड नोट करें

 नई दिल्ली आईपीओ मार्केट (IPO Market) में इस साल बहार देखने को मिल रही है. एक के बाद एक कई कंपनियां अपने इश्यू लॉन्च कर रही हैं, जिनमें कई निवेशकों को ताबड़तोड़ मुनाफा भी करा रहे हैं. अब लिस्ट में एक फार्मा कंपनी भी शामिल होने वाली है, जिसका नाम है कोरोना रेमेडीज (Corona Remedies), इस इश्यू को अगले हफ्ते सब्सक्रिक्शन के लिए ओपन किया जाएगा. इसके प्राइस बैंड, लॉट साइस समेत तमाम डिटेल्स सामने आ चुकी हैं.  कब खुलेगा Corona का आईपीओ? फार्मा कंपनी कोरोना रेमेडीज, प्राइवेट इक्विटी फर्म क्रिसकैपिटल से समर्थित है और इसका आईपीओ (Corona IPO) अगले हफ्ते की शुरुआत में 8 दिसंबर को ओपन होगा. निवेशक इसमें तीन दिन यानी 10 दिसंबर तक पैसे लगा सकेंगे. क्लोज होने के बाद इस आईपीओ का अलॉटमेंट (IPO Allotment) 11 दिसंबर को होगा, जबकि शेयर मार्केट (Stock Market) के दोनों इंडेक्स बीएसई और एनएसई पर Corona Share की लिस्टिंग 15 दिसंबर को होगी.  655Cr का आईपीओ, ये है प्राइस बैंड कोरोना रेमेडीज के आईपीओ के बारे में आगे की जानकारी देखें, तो ये एक बुकबिल्ड इश्यू हैं और इसके तहत ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए शेयरों की पेशकश की जाएगी. कंपनी 61,71,101 शेयर बिक्री के लिए पेश करेगी. इसके शेयरों के लिए प्राइस बैंड की बात करें, तो ये 1008-1062 रुपये तय किया गया है और इस हिसाब से इस आईपीओ का साइज 655.37 करोड़ रुपये हो जाता है.  कम से कम लगाने होंगे इतने रुपये इस आईपीओ के लॉट साइज की बात करें, तो कंपनी ने 14 शेयरों का Lot तय किया है. इसका मतलब ये होता है कि अगर कोई निवेशक इस आईपीओ में निवेश करना चाहता है, तो उसे कम से कम इतने शेयरों के लिए बोली लगानी होगी. अब अपर प्राइस बैंड के हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो इसके लिए मिनिमम निवेश 14,868 रुपये का करना होगा. निवेशकों अधिकतम 183 शेयरों या 13 लॉट के लिए बोली लगा सकेंगे और मैक्सिमम निवेश 1,93,284 रुपये करना होगा.  तेजी से बढ़ा कंपनी का कारोबार अहमदाबाद में मुख्यालय वाली कोरोना रेमेडीज एक फार्मा कंपनी है, जो मेडिकल प्रोडक्ट्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी हुई है. बीते साल के अंत तक इसके कंपनी के पोर्टफोलियो में महिला स्वास्थ्य, हार्ट एंड डायबिटीज देखभाल समेत 67 मेडिसिन ब्रांड शामिल थे. रिपोर्ट्स की मानें तो घरेलू मार्केट में इसका कारोबार तेजी से ग्रोथ कर रहा है. क्रिसिल के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक ये टॉप-30 फार्मा कंपनियों में दूसरी सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी रही थी. 

रिव्यू मीटिंग में CM मोहन यादव का निर्देश: कुपोषण पर ज़ीरो टॉलरेंस, लाड़ली लक्ष्मी योजना में ड्रॉप आउट रोकें

भोपाल   मध्य प्रदेश सरकार के दो साल पूरे होने वाले हैं। इससे पहले सीएम मोहन यादव विभागों की समीक्षा कर रहे हैं। बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान सीएम ने कई निर्देश दिए हैं। मध्य प्रदेश आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पूर्णत: ऑनलाइन पारदर्शी भर्ती प्रकिया लागू करने में देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही सीएम ने लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट पर विभागीय अधिकारियों से जानकारी ली। ड्रॉप आउट रोकने के निर्देश सीएम ने अधिकारियों को लाडली लक्ष्मी बेटियों के ड्रॉप आउट रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा कि इस पर सख्त निगरानी रखें। दरअसल, यह खबरें आ रही थीं कि लाडली लक्ष्मी बेटियां पढ़ाई छोड़ रही हैं। इसी के बाद सीएम ने चर्चा की है। ये रहीं विभाग की उपलब्धियां इसके साथ ही टेक होम राशन की एफआरएस प्रक्रिया में मध्य प्रदेश प्रथम स्थान पर है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है। साथ ही स्पॉन्सरशिप योजना में 20,243 बच्चों को लाभ देकर एमपी ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। झाबुआ के ‘मोटी आई’ नवाचार को प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार मिला है। PM JANMAN भवनों की डिजाइन और मॉनिटरिंग मॉड्यूल की भारत सरकार द्वारा विशेष सराहना की गई। भवन निर्माण की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक मॉड्यूल विकसित किया गया। आंगनवाड़ी में गर्म भोजन की व्यवस्था वहीं, सीएम ने तीन वर्ष की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। 2026 से मध्य प्रदेश के शहरी आंगनवाड़ी केंद्रों में सेंट्रल किचन से गर्म भोजन उपलब्ध करवाने की तैयारी है। साथ ही अगले तीन वर्ष में 9000 नए आंगनवाड़ी केंद्रों के भवन बनाए जाएंगे। महिलाओं को मिली मदद साथ ही PMMVY में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को ₹512 करोड़ से अधिक की सहायता मिली है। लाडली बहना योजना के तहत जनवरी 2024–नवंबर 2025 में ₹36,778 करोड़ का अंतरण किया गया है। 1.72 लाख महिलाओं को महिला हेल्पलाइन से सहायता मिली है। इसके साथ ही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के तहत 1.89 लाख पौधारोपण, 6,520 ड्राइविंग लाइसेंस, 8,637 बालिकाओं को प्रतियोगी परीक्षा प्रशिक्षण दी गई। वहीं, सामग्री टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी होगी तो वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार होगें। सीएम ने तीन साल में कुपोषण को समाप्त करने के लिए फुल प्रूफ कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ब्रेस्ट फीडिंग के लिए जागरूकता बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं।

डिजिटल रिकॉर्ड की रफ्तार तेज: एसआईआर के दूसरे चरण में 47.5 करोड़ फॉर्म अपलोड, 11 दिसंबर तक कर सकेंगे ई-एफ सबमिट

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण ने एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है। आयोग द्वारा दी गई ताजा जानकारी के अनुसार, देशभर में 47.5 करोड़ से अधिक यानी 93 प्रतिशत से ज्यादा एन्यूमरेशन फॉर्म (ईएफ) का डिजिटलाइजेशन पूरा हो चुका है। इस अभियान के तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे व्यापक मतदाता सत्यापन कार्य में 99.83 प्रतिशत यानी 50.88 करोड़ से भी अधिक मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं। आयोग ने बताया कि एन्यूमरेशन फॉर्म भरने और जमा करने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर है। यानी मतदाताओं के पास अब भी कुछ दिन बचे हैं, जिसमें वे अपने विवरण की पुष्टि, सुधार या बदलाव करा सकते हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दैनिक बुलेटिन के अनुसार, लक्षद्वीप, गोवा, अंडमान-निकोबार जैसे छोटे राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी 99 प्रतिशत से अधिक फॉर्म वितरित हो चुके हैं। डिजिटलाइजेशन में सर्वाधिक प्रगति लक्षद्वीप, गोवा और अंडमान-निकोबार में दिखी है, जहां 97 से 100 प्रतिशत तक फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं। सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश में 13.27 करोड़ फॉर्म (85 प्रतिशत) डिजिटलाइज्ड हो चुके हैं, जबकि फॉर्म वितरण 99.87 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। देशभर में 5,32,828 बीएलओ और 12 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट्स इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। ईसीआई का स्पष्ट उद्देश्य है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो, अनुचित/दोहराई गई प्रविष्टियां हटें और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और मजबूत बने। आयोग ने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया है कि वे अधिक बीएलओ नियुक्त करें ताकि फॉर्म की समीक्षा और सत्यापन में सहयोग किया जा सके। मतदाता अपने बीएलओ या ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपने विवरण सत्यापित कर दें ताकि आने वाले चुनावों के लिए सूची पूरी तरह तैयार हो सके।

संदिग्ध घुसपैठियों की सूची तैयार करने के निर्देश, घुसपैठियों को रखने के लिए बनेगा डिटेंशन सेंटर

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों पर निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के 17 नगर निकायों को आदेश दिया है कि वे अपने यहां काम करने वाले सभी संदिग्ध विदेशी नागरिकों की तत्काल सूची बनाएं। सरकार का स्पष्ट इरादा है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे यूपी में बसने की कोशिश करने वाले किसी भी घुसपैठिए को बख्शा न जाए। डिटेंशन सेंटर की तैयारी तेज, हर मंडल में होगी व्यवस्था राज्य भर के कमिश्नरों और पुलिस महानिरीक्षकों को पहले चरण में डिटेंशन सेंटर बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इन सेंटरों में अवैध रूप से रह रहे व्यक्तियों को तब तक रखा जाएगा जब तक उन्हें उनके मूल देश वापस भेजने की प्रक्रिया पूरी न हो जाए। जिलों में खाली सरकारी भवन, सामुदायिक केंद्र, पुलिस लाइन और थाने को चिन्हित किया जा रहा है। इन स्थानों को हाई सिक्योरिटी जोन की तरह विकसित किया जाएगा ताकि घुसपैठियों को निगरानी में रखा जा सके। दस्तावेजों की जांच से पता चलेगा कौन है असली और कौन घुसपैठिया सरकार ने पाया है कि कई रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिक भारतीय पहचान पत्र बनवाकर खुद को स्थानीय नागरिक दिखाने की कोशिश कर रहे थे। इसी कारण सभी संदिग्ध दस्तावेजों का बड़े स्तर पर सत्यापन शुरू किया गया है। उत्तर प्रदेश में भी अन्य राज्यों की तरह डिटेंशन सेंटर को प्रशासन और पुलिस की संयुक्त निगरानी में संचालित किया जाएगा।

दिल्ली में गड्ढों पर वार: 72 घंटे की डेडलाइन, उल्लंघन पर भारी जुर्माना—पलूशन कंट्रोल मोड में सरकार

नई दिल्ली  दिल्ली में विकराल होती पलूशन की समस्या को गंभीरता से लेते हुए आज केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में बैठक हुई थी। इसमें दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिरसा भी थे। सिरसा ने मीटिंग के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें दिल्ली में प्रदूषण के खिलाफ लिए फैसलों के बारे में बताया। सिरसा के बताए अनुसार, सभी सड़कों को गड्ढामुक्त कर उन्हें धूल मुक्त भी किया जाएगा। इसके साथ एंटी स्मॉग गन और पानी का छिड़काव चलते रहेंगे। मीचिंग में हरियाली को लेकर भी कदम उठाए गए हैं जिसमें वृक्षारोपण बढ़ाने पर जोर होगा। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सुबह केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में एक बैठक हुई। इस बैठक में उत्तर भारत के सभी राज्यों ने भाग लिया। इस बैठक के बाद यह आदेश दिया गया कि नोएडा, फरीदाबाद, गुड़गांव, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर्स (मशीनीकृत सड़क सफाईकर्मी), एंटी-स्मॉग गन और पानी के स्प्रिंकलर चलाए जाने चाहिए। यह भी तय किया गया कि सड़कों पर मौजूद गड्ढों को 72 घंटों के भीतर पहचान कर ठीक किया जाएगा। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि बैठक में यह तय किया गया कि सभी स्थानीय निकाय जनता को शामिल करते हुए वृक्षारोपण पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह आदेश दिया गया कि दिल्ली-NCR क्षेत्र में पार्कों और सड़कों के किनारे के क्षेत्रों को सघन रूप से पेड़ों से कवर किया जाएगा। दिल्ली सरकार तूफानी जल निकासी के साथ सड़क योजना के लिए केंद्र सरकार के 'गौरव पथ' मॉडल को अपनाएगी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में, हम ई-ऑटो को शामिल करके मेट्रो रेल तक अंतिम-मील कनेक्टिविटी (Last-Mile Connectivity) बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। सिरसा ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदूषण विरोधी उपायों और नियमों का उल्लंघन करते पाए जाने पर किसी भी एजेंसी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह सरकारी हो या निजी। निर्माण और विध्वंस स्थलों पर धूल कम करने के लिए उचित बाड़बंदी की जानी चाहिए, और वहां पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए। MCD (नगर निगम) को आदेश दिया गया है कि उसकी सभी 8000 किमी सड़कें गड्ढों से मुक्त और धूल-मुक्त होनी चाहिए।  

फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में शिवानी का अभिनव प्रयोग देश-दुनिया में लिख रहा सफलता की नई कहानी

शिवानी तथा नीलम के स्टार्टअप्स को योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सराहा, राष्ट्रीय स्तर पर दिलाई पहचान लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के स्टार्टअप कल्चर को बढ़ावा देने की पॉलिसी प्रदेश में महिला उद्यमियों को सशक्त करने का माध्यम बन रही है। प्रदेश में ऐसे कई उदाहरण हैं जो महिला उद्यमिता और नवाचार के नए प्रतिमान गढ़ रहे हैं। यूं तो प्रदेश के हर जिले में सफलता की ऐसी कहानियां आमतौर पर दिख जाएंगी, मगर इसमें विशेष उल्लेख है बुंदेलखंड की महिलाओं का, जिनकी सफलता नई कहानियां लिखने का काम कर रही है। झांसी की कई महिलाओं के स्टार्टअप्स इस समय देश और प्रदेश में चर्चा के केंद्र में हैं, जिनमें से एक है शिवानी के बेर से बने प्रोडक्ट तो दूसरा है नीलम की कबाड़ से बनी कलाकृतियां। इन दोनों को ही सरकार की ओर से सम्मान और प्रोत्साहन प्रदान किया गया है। शिवानी ने बेर से बनाए अनूठे प्रोडक्ट झांसी जिले की रहने वाली शिवानी बुंदेला ने फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए बेर के ऐसे-ऐसे प्रोडक्ट बनाए हैं, जो किसी का भी ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। बेर से जूस, जैम, चॉकलेट और टॉफी बना चुकी शिवानी अभी हाल के दिनों में एक नया प्रोडक्ट सामने लेकर आयी हैं, जो है बेर से बना स्नैक्स। शिवानी के स्टार्टअप को आगे बढ़ाने में झांसी स्मार्ट सिटी, उद्यान विभाग और एमएसएमई ने काफी मदद प्रदान की। जी 20 के आयोजन में शिवानी के स्टार्टअप को गिफ्टिंग पार्टनर बनाया गया था और काफी सराहना मिली थी। शिवानी ने अपने ब्रांड को अब्रोसा नाम दिया है। शिवानी लगभग 250 किसानों से बेर खरीद रही हैं जबकि उनके स्टार्टअप के माध्यम से 20 से अधिक महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीनों संस्करणों में शिवानी हिस्सेदारी निभा चुकी हैं। अभी कुछ समय पहले शिवानी को यूनाइटेड नेशन्स एनवायरनमेंट प्रोग्राम के तहत एग्रो फॉरेस्ट्री को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी मिली है। फिलहाल इनके क्लाइंट्स में आदित्य बिरला समूह, एनबीसीसी, इरकॉन, ह्युंडई, एमिटी विश्वविद्यालय, एसकेएन, अवाडा जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों का नाम शुमार है।  बेकार को आकार देकर नीलम ने बनाई पहचान बेकार सामानों से कलाकृतियां तैयार करने वाली झांसी की नीलम सारंगी के स्टार्टअप बेकार के आकार को उत्तर प्रदेश सरकार ने सम्मानित करने के साथ ही प्रोत्साहित भी किया है। झांसी नगर निगम के साथ मिलकर स्वच्छता अभियान के अंतर्गत निष्प्रयोज्य सामानों से पार्कों में सुंदर कलाकृतियां तैयार करने का काम किया। योगी सरकार ने नीलम सारंगी को अनूठे स्टार्टअप के लिए नवदेवी सम्मान प्रदान किया है। नीलम का स्टार्टअप इस समय बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंक्यूबेशन सेंटर में पंजीकृत है। नीलम ने अपने स्टार्टअप के साथ उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो, स्टार्टअप महाकुंभ और राइज हैकथान जैसे आयोजनों में हिस्सेदारी निभाई है। नीलम इस समय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भरता का प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। महिलाओं को मिल रही आत्मनिर्भरता की प्रेरणा शिवानी बुंदेला ने बताया कि उनके स्टार्टअप को बढ़ावा देने में सरकार और प्रशासन ने काफी मदद की है। उनके स्टार्टअप के माध्यम से बेर से बने उत्पादों को प्रोत्साहित किया जा रहा है और बर्बाद होने वाले बेर को बचाने की कोशिश की जा रही है। बहुत सारी महिलाओं को इससे रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। वहीं, नीलम सारंगी के अनुसार नगर निगम, स्मार्ट सिटी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके स्टार्टअप 'बेकार को आकार' को प्रोत्साहित करने में मदद की। अब कोशिश है कि महिलाओं को यह हुनर सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भरता की ओर प्रेरित किया जाए।

चीता परियोजना के अभूतपूर्व परिणाम, चीतों की संख्या बढ़कर हुई 32

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर गुरुवार 4 दिसम्बर को श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में 3 चीतों, जिनमें मादा चीता 'वीरा' और उसके 10 माह के 2 शावकों को बड़े बाड़े से खुले जंगल में छोड़ेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव कूनो राष्ट्रीय उद्यान के वर्ष 2026 का कैलेण्डर तथा 'फील्ड मैन्युअल फॉर क्लीनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़ इन कूनो नेशनल पार्क' का विमोचन करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नव-निर्मित सोवेनियर शॉप का लोकार्पण भी करेंगे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर 3 वर्ष पूर्व मध्यप्रदेश को चीता परियोजना की सौगात मिली थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने 17 सितम्बर, 2022 को अपने जन्म-दिवस पर कूनो पालपुर में चीते छोड़कर प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी। नामीबिया से 8 चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाया गया था। वर्तमान में कूनो पालपुर और गाँधी सागर अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में प्रोजेक्ट चीता को "इनोवेटिव इनिशिएटिव्स अवॉर्ड'' से सम्मानित किया गया है। चीतों ने भारतीय वातावरण को आश्चर्यजनक रूप से पूरी तरह अपना लिया है। पिछले 3 वर्षों में 5 मादा चीता द्वारा 6 बार शावकों को जन्म देना इस परियोजना की सफलता और लचीलापन का परिचायक है। परिणाम स्वरूप चीते न केवल जीवित रहे, बल्कि चीतों ने सफलतापूर्वक अपना परिवार भी बढ़ाया है। अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस का मुख्य उद्देश्य चीतों की घटती आबादी, उनके आवास के नुकसान और शिकार जैसी समस्याओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनके संरक्षण के लिये वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देना है। एपीसीसीएफ एवं निदेशक लॉयन प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश ने बताया कि चीता परिवार की सुरक्षा और प्राकृतिक परिवेश में सफल अनुकूलन सुनिश्चित करने के लिये उन्नत रेडियो-ट्रेकिंग प्रणाली और समर्पित फील्ड टीमों के माध्यम से सतत निगरानी की जायेगी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम कूनो राष्ट्रीय उद्यान के परोंड वन क्षेत्र में आयोजित होगा, जो निर्धारित पर्यटन जोन है। इस क्षेत्र में चीता परिवार की मौजूदगी से ईको पर्यटन के नये अवसरों के साथ ही प्रोजेक्ट चीता के प्रति जन-सहभागिता और रुचि में और अधिक वृद्धि होने की अपेक्षा है।