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शमी का तूफान! सिर्फ 2 मैचों में 15 विकेट लेकर सेलेक्टर्स को दिया सख्त संदेश

नई दिल्‍ली मोहम्‍मद शमी ने रणजी ट्रॉफी में शानदार गेंदबाजी करके अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया है। शमी ने बंगाल का प्रतिनिधित्‍व करते हुए केवल दो मैचों में 15 विकेट चटकाए। इस तरह शमी ने टीम इंडिया में वापसी की दावेदारी पेश की, जिसे अगले महीने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्‍ट सीरीज खेलनी है। शमी की फिटनेस को लेकर काफी बखेड़ा हुआ। प्रमुख चयनकर्ता अजीत अगरकर ने शमी के बारे में कहा था कि उनकी फिटनेस पर कोई अपडेट नहीं है और तेज गेंदबाज को खुद को साबित करने के लिए ज्‍यादा मैच खेलने की दरकार है। तब शमी ने अगरकर पर पलटवार करते हुए कहा कि चयनकर्ताओं की तरफ से संवाद की कमी रही।   ईडन गार्डन्‍स पर शमी का कहर ऐसे में मोहम्‍मद शमी और अजीत अगरकर के बीच विवाद किसी से छिपा नहीं। बहरहाल, शमी ने ईडन गार्डन्‍स पर गुजरात के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया और बंगाल को 141 रन की जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। 35 साल के गेंदबाज ने दूसरी पारी में 10 ओवर में एक मेडन सहित 38 रन देकर पांच विकेट झटके। गुजरात की टीम 327 रन के लक्ष्‍य का पीछा करते हुए 185 रन पर ढेर हो गई। इससे पहले शमी ने पहली पारी में 44 रन देकर तीन विकेट झटके थे, जिससे बंगाल ने मैच पर शिकंजा कसा था। याद दिला दें कि शमी ने पहले राउंड के मुकाबले में उत्‍तराखंड के खिलाफ सात विकेट झटके थे, जिसमें बंगाल ने आठ विकेट से जीत दर्ज की थी। तीसरे स्‍थान पर शमी मौजूदा रणजी ट्रॉफी सीजन में शमी दो मैचों में 15 विकेट के साथ सबसे ज्‍यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में तीसरे स्‍थान पर काबिज हैं। जम्‍मू-कश्‍मीर के आकिब नबी दर (17) और सर्विसेज के अर्जुन शर्मा (16) उनसे आगे हैं। शमी आखिरी बार चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के लिए खेलते हुए नजर आए थे। इसके बाद से वो अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट से दूर हैं। उन्‍होंने अपना आखिरी टेस्‍ट 2023 विश्‍व टेस्‍ट चैंपियनशिप फाइनल खेला था। शमी ने अपनी गेंदबाजी से साबित किया कि उन्‍हें नजरअंदाज करने के लिए चयनकर्ताओं के पास कोई विकल्‍प नहीं बचा है। देखना दिलचस्‍प होगा कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दो मैचों की टेस्‍ट सीरीज के लिए शमी की भारतीय टीम में वापसी हो पाती है या नहीं।  

लाडो लक्ष्मी योजना में महिलाओं की घटती भागीदारी पर CM सैनी सख्त, कहा- जागरूकता की कमी चिंता का विषय

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने गरीब महिलाओं के कल्याण के लिए लाडो लक्ष्मी योजना शुरू की थी, जिसके तहत पात्र महिलाओं को 2100 रुपए मासिक दिए जाने हैं लेकिन महिलाएं गुलाबी और पीला राशनकार्ड कट जाने के डर से इस योजना में रुचि नहीं दिखा रही। इसके चलते मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विभागीय अधिकारियों के समक्ष नाराजगी और चिंता जाहिर की। हरियाणा दिवस पर एक नवम्बर को इन महिलाओं को मासिक भत्ते की पहली किस्त दी जानी है। प्रदेश सरकार के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक एक लाख रुपए वार्षिक तक आय वाली 23 से 60 साल की उम्र की महिलाओं की संख्या 19 लाख 62 हजार है, मगर 25 अक्तूबर तक सिर्फ 6 लाख 20 हजार महिलाओं ने भत्ता प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है।  अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को रिपोर्ट दी है कि महिलाओं में इस बात का डर है कि उनके खातों में 2100-2100 रुपए मासिक आते ही परिवारों की वार्षिक आय 25-25 हजार रुपए बढ़ जाएगी, जिससे वह अंत्योदय परिवारों की सूची से बाहर हो सकते हैं। ऐसे परिवारों की महिलाएं जागरूकता के अभाव में और डर की वजह से लाडो लक्ष्मी योजना का भत्ता प्राप्त करने के लिए आवेदन नहीं कर रही हैं।  समाज कल्याण विभाग, पंचायत विभाग और क्रिड के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सूचना दी कि महिलाओं में गुलाबी व पीले राशनकार्ड कट जाने का डर है। 25 से 50 हजार रुपए वार्षिक आय वाले अंत्योदय परिवारों के गुलाबी कार्ड बनाए जाते हैं, जबकि 50 हजार से 1.80 लाख रुपए वार्षिक तक आय वाले परिवारों के पीले बी.पी.एल. कार्ड बनाने का प्रावधान है। 1.80 लाख रुपए से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों के हरे (ए.पी.एल.) कार्ड बनते हैं। गुलाबी कार्डधारकों की सरकार 35 किलो गेहूं हर माह प्रदान करती है। गुलाबी व पीले राशनकार्ड धारकों को मिलने वाली सुविधाएं भी काफी हैं।   women are not showing interest in Lado Laxmi Yojana, haryana hindi news, Haryana news, Hindi news, अधिकारियों से मिली रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन परिवारों की वार्षिक आय 1.40 लाख रुपए वार्षिक तक है, उनकी महिलाओं को भी लाडो लक्ष्मी योजना के तहत 2100-2100 रुपए प्राप्त करने के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित किया जाए। अब पंचायत सचिवों और क्रिड में कार्यरत सी.पी.एल.ओ. को लिस्ट देकर गांवों में भेजा जा रहा है, ताकि वे पात्र महिलाओं को चिन्हित कर उनके मौके पर ही लाडो लक्ष्मी योजना के तहत आवेदन करा सकें। हरियाणा के समाज कल्याण विभाग ने अभी तक जो सीमा निर्धारित की है, उसके मुताबिक जिन महिलाओं ने 25 अक्तूबर तक आवेदन कर दिया है, उन्हें ही एक नवम्बर को 2100-2100 रुपए मिल पाएंगे लेकिन मुख्यमंत्री ने 25 अक्तूबर की इस सीमा को हटाने के लिए कहा है, ताकि 31 अक्तूबर तक भी आवेदन करने वाली महिलाओं को शगुन की राशि प्रदान की जा सके। 31 अक्तूबर तक आवेदन करने वालों को यदि सरकार ने भते की राशि प्रदान की तो यह संख्या आठ से 10 लाख भी हो सकती।    

आसमान में ऊँची उड़ान: यूपी बना नया एविएशन हब, यात्रियों और कार्गो ट्रैफिक दोनों में जबरदस्त ग्रोथ

लखनऊ  यूपी की हवाई कनेक्टिविटी और यात्री संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। अप्रैल से अगस्त 2025 की अवधि में उत्तर प्रदेश के हवाई अड्डों पर यात्रियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 14.6% बढ़कर 60.02 लाख हो गई है। वहीं इस अवधि में भारत के कुल हवाई यातायात में राज्य की हिस्सेदारी 3.52% तक पहुंच गई, जो 2024 की तुलना में 34 बेसिस पॉइंट्स अधिक है। यानि अब देश के हर 30 में से एक हवाई यात्री उत्तर प्रदेश से यात्रा कर रहा है। वहीं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुभारंभ के साथ इस रफ्तार में और भी वृद्धि होगी और सिर्फ यूपी ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों को भी कनेक्टिविटी के नए अवसर प्राप्त होंगे। साल 2016-17 में जहां यूपी के हवाई अड्डों से 59.97 लाख यात्री यात्रा करते थे, वहीं FY2024-25 में यह संख्या बढ़कर 142.28 लाख तक पहुंच गई। इनमें 129.29 लाख घरेलू और 12.99 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री शामिल रहे। इस दौरान राज्य का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 10.1% रहा, जो एविएशन सेक्टर में तेजी से बढ़ती मांग को दर्शाता है। कोविड-19 महामारी के दौरान FY2020-21 में यात्री संख्या 48.35 लाख तक गिर गई थी। 2023-24 की तुलना में 2024-25 में हवाई यात्रियों की संख्या में 25.9 प्रतिशत का ग्रोथ दर्ज किया गया है, जबकि 2023-24 और 2024-25 में अप्रैल-अगस्त माह के बीच तुलना करें तो यह ग्रोथ 14.6% रही। इस दौरान डॉमेस्टिक एयर पैसेंजर्स में 15.7% और इंटरनेशनल पैसेंजर्स की संख्या में 4.3% ग्रोथ दर्ज की गई। अयोध्या, प्रयागराज और वाराणसी बने स्टार परफॉर्मर 2023-24 से 2024-25 के बीच वाराणसी में 34.4%, प्रयागराज में 76.4%, गोरखपुर में 27.6% और कानपुर में 13.3% की वृद्धि दर्ज की गई। 2023-24 में जहां 2 लाख से ज्यादा पैसेंजर्स ने यहां से हवाई उड़ान भरी थी तो वहीं 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 11 लाख से अधिक पहुंच गया। वहीं, प्रयागराज और वाराणसी से भी धार्मिक और व्यावसायिक उड़ानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रयागराज में 2023-24 में 6 लाख से अधिक एयर पैसेंजर्स ने यात्रा की तो वहीं 2024-25 में यह संख्या 10.77 लाख से अधिक पहुंच गई। इसी तरह वाराणसी में 2023-24 में करीब 30 लाख एयर पैसेंजर्स यात्रा कर रहे थे तो वहीं 2024-25 यह संख्या 40 लाख का आंकड़ा पार कर गई। गोरखपुर में 2023-24 में 6.8 लाख की तुलना में 2024-25 में 8.67 लाख से अधिक हवाई यात्रियों ने सफर किया। लखनऊ ने भी अपनी रफ्तार में इजाफा किया है, जहां 2023-24 की तुलना में 2024-25 में 4.1% की वृद्धि हुई है। कार्गो ट्रैफिक में भी जबरदस्त वृद्धि एयर कार्गो की बात करें तो FY2016-17 से FY2024-25 तक राज्य में 19.1% का CAGR दर्ज किया गया है। यह 5.89 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 28.36 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो कि अब तक का सर्वाधिक है। FY2024-25 में लखनऊ एयरपोर्ट ने 22,099 मीट्रिक टन कार्गो हैंडल किया, जबकि वाराणसी में 27.7% और प्रयागराज में 50% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। 2023-24 से 2024-25 के बीच टोटल ग्रोथ 9.4% रही और इस दौरान एयर कॉर्गो 25,915 मीट्रिक टन से 28,356 मीट्रिक टन पहुंच गया। अप्रैल-अगस्त 2025 में कानपुर (165%) और आगरा (247%) में रिकॉर्ड ग्रोथ दर्ज हुई जो बताता है कि राज्य के इंडस्ट्रियल क्लस्टर अब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन से जुड़ रहे हैं। अप्रैल-अगस्त 2025 में राज्य का भारत के कुल एयर कार्गो में हिस्सा 0.79% हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1 बेसिस पॉइंट अधिक है।  

मिशन वात्सल्य’—हर बच्चे के सुरक्षित और उज्जवल भविष्य की दिशा में ठोस कदम

मंत्री सुश्री भूरिया ने की ‘मिशन वात्सल्य’ की समीक्षा बाल संरक्षण, दत्तक ग्रहण और आफ्टर केयर योजनाओं पर दिए महत्वपूर्ण निर्देश भोपाल  महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने मंगलवार को ‘मिशन वात्सल्य’ योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि मिशन वात्सल्य केवल एक योजना नहीं, बल्कि हर बच्चे के उज्जवल भविष्य की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य का कोई भी बच्चा असुरक्षित या असहाय न रहे, और हर बच्चे को शिक्षा, संरक्षण और सम्मान का अधिकार मिले। दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को और सरल, पारदर्शी व समयबद्ध बनाएं मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि बच्चों के दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया को और आसान, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि होम विजिट की प्रक्रिया एक माह के भीतर पूरी कर ली जाए ताकि बच्चे शीघ्र सुरक्षित परिवारों से जुड़ सकें। मंत्री ने बताया कि दत्तक ग्रहण की संपूर्ण प्रक्रिया अब ‘CARA पोर्टल’ के माध्यम से की जा रही है और दत्तक ग्रहण विनियम, 2022 के प्रावधानों के तहत ही सभी कार्यवाहियां संपादित की जा रही हैं इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है। ऑफ्टर केयर, स्पॉन्सरशिप और बालिकाओं के भविष्य निर्माण पर विशेष निर्देश मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि ऑफ्टर केयर योजना के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और आत्मनिर्भरता के अवसर प्रदान किए जाएं। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों में लिप्त किशोरों के लिए ‘प्लेस ऑफ सेफ्टी’ की व्यवस्था हेतु भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि कंपोजिट भवन निर्माण का प्रस्ताव भी भेजा गया है, जिससे बाल देखरेख, ऑफ्टर केयर और दत्तक ग्रहण जैसी सेवाओं को एक ही परिसर में एकीकृत किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि यह मॉडल भवन तैयार होता है तो मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा जो इस प्रकार का आदर्श भवन (Ideal Building) बनाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि अनाथ बच्चों के लिए विशेष इंटरैक्शन प्रोग्राम और जॉब फेयर आयोजित किए जाएं, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि महाराष्ट्र सरकार की तरह मध्यप्रदेश में भी अनाथ बच्चों को सरकारी सेवाओं में 1% आरक्षण देने का प्रस्ताव विचाराधीन है। आयुक्त महिला बाल विकास श्रीमती निधि निवेदिता ने कहा कि दत्तक ग्रहण की टाइमलाइन एक माह में निर्धारित की जाए तथा होम विजिट और लीगल प्रोसेस को समयबद्ध रूप से पूरा किया जाए।उन्होंने बताया कि स्पॉन्सरशिप योजना के तहत विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता माताओं के बच्चों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए फील्ड अधिकारियों को लक्ष्य आधारित मैपिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। श्रीमती निधि ने कहा कि ऑफ्टर केयर योजना के बच्चों को अभी से कैरियर गाइडेंस और ट्रेनिंग दी जाए तथा बालिकाओं को शिक्षा और पुलिस भर्ती में 33% आरक्षण का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने सभी सीडीपीओ, डीपीओ, सुपरवाइजर और एडी को नियमित मैदानी निरीक्षण (Field Visit) करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। 08 बाल देखरेख संस्थाओं को बंद करने के प्रस्ताव बैठक में बताया गया कि वर्तमान में इंदौर जिले के 2 बालिका गृह तथा खंडवा, बुरहानपुर, नरसिंहपुर और नर्मदापुरम जिलों के 1-1 बालक गृह, साथ ही नर्मदापुरम जिले के 2 खुले आश्रय गृह इस प्रकार कुल 08 बाल देखरेख संस्थाओं को बंद करने के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन संस्थाओं में फिलहाल कोई बालक या बालिका निवासरत नहीं है। संबंधित जिलों से संस्थाओं को बंद करने की कार्यवाही के लिए प्रस्ताव मंत्रालय को भेजे गए हैं। मंत्री सुश्री भूरिया ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बंद की जा रही संस्थाओं के अंतर्गत कोई भी बच्चा असुरक्षित स्थिति में न रहे तथा प्रत्येक बच्चे के पुनर्वास की प्रक्रिया नियमानुसार पूर्ण हो। बैठक में बाल संरक्षण, दत्तक ग्रहण, ऑफ्टर केयर, स्पॉन्सरशिप और संस्थागत देखरेख से संबंधित विभिन्न बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई।  

भारिया, बैगा एवं सहरिया समुदाय के घरों के विद्युतीकरण के लिए 78 करोड़ 94 लाख रुपये का अनुमोदन

132 K.V. और उससे बड़ी लाईन बिछाने के लिए प्रतिपूर्ति राशि में वृद्धि करने की स्वीकृति भोपाल स्थित शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 के नियम 17 एवं नियम 37 में संशोधन की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद के निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) अंतर्गत प्रदेश में PVTG समूहों यथा भारिया, बैगा एवं सहरिया समुदाय के घरों के विद्युतीकरण के लिए विद्युत वितरण कंपनियों की अतिरिक्त कार्ययोजना द्वितीय चरण का अनुमोदन प्रदान किया गया है। स्वीकृति अनुसार प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत अतिरिक्त 18 हजार 338 अविद्‌युतीकृत PVTG घरों के विद्युतीकरण के लिए विद्‌युत अधोसंरचना विस्तार के लिए लगभग 78 करोड़ 94 लाख रुपये की ‌द्वितीय चरण की कार्ययोजना की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस के लिए 60 प्रतिशत राशि 47 करोड़ 36 लाख रूपये केन्द्र शासन से अनुदान प्राप्त होगा व शेष 40 प्रतिशत राशि 31 करोड़ 58 लाख रुपये राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी। पीएम जनमन अन्तर्गत प्रदेश के 24 जिलों में निवासरत भारिया, बैगा एवं सहरिया समुदाय के अविद्युतीकृत घरों के विद्युतीकरण के लिये बसाहट वार पूर्व स्वीकृत सीमा एक लाख रूपये प्रति हाउसहोल्ड को बढ़ाकर 2 लाख रुपये प्रति हाउसहोल्ड किये जाने की स्वीकृति दी गई। विद्युत कंपनियों द्वारा 2 लाख रूपये प्रति हाउसहोल्ड तक आकलित लागत से विद्युतीकरण किया जायेगा। लागत अधिक होने की स्थिति में ऊर्जा विकास निगम द्वारा एक किलोवाट क्षमता का आफ ग्रिड सोलर पैनल और बैटरी लगाकर विद्युतीकरण किया जायेगा। 211 घरों का विद्युतीकरण आफ ग्रिड प्रणाली से किया जायेगा। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN) के अंतर्गत प्रदेश में 3 PVTG जनजाति, यथा भारिया, बैगा एवं सहरिया समूहों के अविद्‌युतीकृत घरों का विद्युतीकरण किया जा रहा है। 11 मार्च, 2024 को संपन्न मंत्रि-परिषद बैठक में योजनांतर्गत प्रथम चरण में 10 हजार 952 घरों के विद्युतीकरण के लिए लगभग 65 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसमें से 8 हजार 752 घरों को विद्युत कनेक्शन प्रदाय किये जा चुके हैं। 132 K.V. और उससे बड़ी लाईन बिछाने के कारण क्षतिपूर्ति राशि और क्षतिपूर्ति क्षेत्रफल में वृद्धि की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा अति उच्च दाब पारेषण 132 K.V. और उससे बड़ी लाईन बिछाने के लिए किसानों को दी जाने वाली मुआवजा/क्षतिपूर्ति राशि में वृद्धि करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार टॉवर लगाने पर दी जाने वाली क्षतिपूर्ति राशि को 85 प्रतिशत से बढ़ाकर 200 प्रतिशत किया गया है साथ ही लाइन ट्रान्समिशन लाइन के ROW (Right of way) में आने वाली भूमि की क्षतिपूर्ति राशि को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया गया है। क्षतिपूर्ण क्षेत्रफल में टॉवर के चार पाए के अलावा सब तरफ 1-1 मीटर की अतिरिक्त वृद्धि की गयी है। भूमि का स्वामित्व किसान का ही रहेगा। टॉवर के बीच में और लाइन के नीचे की फसल किसान ले सकेगा। केवल तार के नीचे की जमीन 132 K.V. लाईन में 7 मीटर क्षतिपूर्ण क्षेत्रफल को बढाकर कारिडोर अनुसार 28 मीटर किया गया है। उसी तरह 220 K.V. लाईन 14 मीटर में वृद्धि कर कॉरीडोर अनुसार 35 मीटर किया गया है। इसके अतिरिक्त 400 K.V. लाईन के नीचे की जमीन का क्षतिपूर्ति क्षेत्रफल 52 मीटर निर्धारित किया गया है। बक्स्वाहा जिला छतरपुर में व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खण्ड स्तर के लिए कुल 7 पदों की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा बक्स्वाहा जिला छतरपुर में व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खण्ड में व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ खण्ड स्तर का एक नवीन पद व उनके अमले अंतर्गत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 06 पद, इस प्रकार कुल 07 नवीन पदों का सृजन के लिए 52 लाख 46 हजार रूपये प्रति वर्ष की स्वीकृति प्रदान की गयी है। भोपाल स्थित शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 के नियम 17 एवं नियम 37 में संशोधन की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा भोपाल स्थित शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 के नियम 17 एवं नियम 37 में संशोधन की स्वीकृति प्रदान की गयी है। स्वीकृति अनुसार भोपाल से बाहर स्थानांतरण होने की स्थिति में अधिकतम 06 माह तक की अवधि के लिए शासकीय सेवक सामान्य दर पर आवास धारित कर सकेगा। सेवानिवृत्त होने की स्थिति में शासकीय सेवक 06 माह तक आवास धारण कर सकेगा। सेवानिवृत्त शासकीय सेवक प्रथम 03 माह की अवधि के लिए आवंटित आवास सामान्य दर पर धारण कर सकेगा। उक्त अवधि के अवसान उपरांत पुनः आगामी 03 माह की अवधि के लिए किराया सामान्य दर से 10 गुना दर पर आवास धारण कर सकेगा। इसके उपरांत दाण्डिक दर से किराया वसूल किया जाएगा एवं बेदखली की कार्यवाही की जायेगी। पहले केवल 3 माह तक ही शासकीय आवास धारण करने की अनुमति थी। इसी तरह त्यागपत्र देने, सेवा से पृथक होने अथवा अन्य किन्ही कारणों से आवास रखने के लिए अनधिकृत होने पर 03 माह तक की अवधि के लिए शासकीय सेवक द्वारा सामान्य दर पर आवास धारित किया जा सकेगा। 03 माह की अवधि के अवसान पर नियमानुसार दाण्डिक किराया वसूल किया जाएगा एवं बेदखली की कार्यवाही की जायेगी। अनधिकृत आधिपत्य के लिये नियम 37 के तहत वेतनमान के आधार पर आवास की पात्रता और लायसेंस शुल्क की दरों का निर्धारण भी संशोधित किया गया है। दाण्डिक मासिक किराया 10 गुना से बढ़कर 30 गुना किया गया है। प्रति माह 10 प्रतिशत की उत्तरोत्तर वृद्धि की जायेगी। 

अयोध्या को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी और सस्टेनेबल सिटी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य : मुख्यमंत्री

अयोध्या का विकास भव्यता, आस्था और आधुनिकता का संतुलित मॉडल बने अयोध्या विज़न 2047 के तहत आध्यात्मिक नगरी, ज्ञान नगरी, उत्सव नगरी और हरित नगरी के रूप में होगी पहचान वर्ष 2031 तक 24 लाख और 2047 तक 35 लाख की आबादी को ध्यान में रखकर सुनियोजित टाउनशिप, सड़कों और नागरिक सुविधाओं की योजना तैयार अयोध्या में 8,594 करोड़ रुपये के निवेश से 159 परियोजनाएं क्रियान्वित होने को तैयार मुख्यमंत्री का निर्देश, हर परियोजना पर्यावरणीय दृष्टि से सस्टेनेबल हो, सरयू नदी तट और हरित पट्टियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए मुख्यमंत्री का निर्देश मिश्रित और औद्योगिक भूमि का दायरा बढ़ाएं सीवरेज ट्रीटमेंट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए नवाचारों को बढ़ावा देने और यथासंभव देसी मॉडल अपनाने पर जोर, पंचकोसी और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर भी विविध गतिविधियों के लिए भूमि आरक्षित करने के निर्देश यातायात और आतिथ्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण से तीर्थयात्रियों व पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी; बस-ट्रक अड्डों और पार्किंग का विकास होगा अनियोजित प्लाटिंग और बसावट पर रोक के निर्देश, बोले मुख्यमंत्री, सभी विकास कार्य योजना और नियमों के अनुरूप हों लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को अयोध्या महायोजना 2031 से संबंधित प्रस्तावों की समीक्षा करते हुए कहा कि अयोध्या का विकास भव्यता, आस्था और आधुनिकता तीनों का समन्वित रूप होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महायोजना का लक्ष्य अयोध्या को सुनियोजित, सुव्यवस्थित और सतत (सस्टेनेबल) विकास के साथ विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करना है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विकास कार्यों में अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक गरिमा और पर्यावरणीय संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। महायोजना के बिंदुओं पर विभागीय अधिकारियों से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या विज़न 2047 के अंतर्गत अयोध्या को ग्लोबल आध्यात्मिक नगरी, ज्ञान नगरी, उत्सव नगरी, तीर्थ अनुकूल अवसंरचना, विविधीकृत पर्यटन, ऐतिहासिक सर्किट व हेरिटेज वॉक, हरित एवं सौर ऊर्जा आधारित नगरी  के रूप में आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महायोजना अयोध्या के सुनियोजित, सुव्यवस्थित और सस्टेनेबल विकास की आधारशिला बनेगी। बैठक में बताया गया कि अयोध्या महायोजना 2031 का उद्देश्य शहर को ग्लोबल स्पिरिचुअल एवं टूरिज़्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करना है। योजना के तहत अयोध्या विकास क्षेत्र को 18 जोनों में विभाजित कर संतुलित भूमि उपयोग सुनिश्चित किया गया है। प्रस्तावित 23.94 लाख की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए 52.56 प्रतिशत भूमि आवासीय, 5.11 प्रतिशत वाणिज्यिक, 4.65 प्रतिशत औद्योगिक, 10.28 प्रतिशत सार्वजनिक उपयोग, 12.20 प्रतिशत परिवहन एवं 14.31 प्रतिशत हरित एवं खुले क्षेत्र के लिए नियोजित की गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मिश्रित तथा औद्योगिक भूमि को बढ़ाया जाए, इसी प्रकार, पंचकोसी और 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर भी विविध गतिविधियों के लिए भूमि आरक्षित की जाए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में अयोध्या की जनसंख्या लगभग 11 लाख है, जो 2031 तक लगभग 24 लाख और 2047 तक 35 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। इसे ध्यान में रखते हुए नए आवासीय टाउनशिप, भव्य प्रवेश द्वार, बहुस्तरीय पार्किंग, 84 कोसी परिक्रमा मार्ग, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस मार्ग, रिंग रोड, एयरपोर्ट, टेंपल म्यूज़ियम, सौर ऊर्जा संयंत्र, होटल व आधुनिक नागरिक सुविधाएं महायोजना का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सभी परियोजनाएं अयोध्या को स्मार्ट, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाएंगी। बैठक में बताया गया कि अयोध्या विकास क्षेत्र में 159 निवेश परियोजनाएं स्वीकृत हैं, जिनमें 8 हजार 594 करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या का सड़क, रेल और वायु मार्ग से उत्कृष्ट संपर्क है। यातायात और आतिथ्य क्षेत्र (हॉस्पिटैलिटी सेक्टर) के आधुनिकीकरण से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधा मिलेगी। आवश्यकता है कि लखनऊ, प्रयागराज, गोण्डा और अम्बेडकर नगर मार्ग की ओर बस और ट्रक अड्डों सहित पार्किंग का विकास किया जाए। मुख्यमंत्री ने महायोजना अंतर्गत  सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए भी भूमि आरक्षित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीवरेज ट्रीटमेंट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए नवाचारों को बढ़ावा दें और यथासंभव देसी मॉडल को अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या का विकास न केवल धार्मिक पर्यटन बल्कि आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी प्रेरक उदाहरण बने। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर परियोजना पर्यावरणीय दृष्टि से सस्टेनेबल हो तथा नदी सरयू के तटों और हरित पट्टियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या आज केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का प्रतीक है। इसे ऐसे विकसित किया जाए कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, सौंदर्य और समृद्धि का संगम बने। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के समय में अयोध्या में हो रहे बहुमुखी विकास को देखते हुए अनियोजित प्लाटिंग, बसावट भी देखने को मिल रही हैं। इसे रोका जाना चाहिए। जो कुछ भी हो योजना के अनुरूप और नियमों के अनुकूल होना चाहिए।

दिल्ली में बादल तो बने, बारिश गायब! क्लाउड सीडिंग पर AAP का तंज– ‘सरकार की सीडिंग फुस्स’

नई दिल्ली  दिल्ली में आज दोपहर क्लाउड सीडिंग के कई ट्रायल किए गए. लेकिन रेखा सरकार का यह ट्रायल फिलहाल सवालों के घेरे में है. दो घंटे बीत जाने के बाद भी बारिश नहीं हुई है, जिस पर आप (AAP) ने दिल्ली सरकार पर निशाना साधा है. AAP ने इसे आर्टिफिशियल रेन के नाम पर फर्जीवाड़ा बताया है. क्लाउड सीडिंग के बाद अधिकारियों ने दावा किया था कि 15 मिनट से 4 घंटे के भीतर बारिश शुरू हो सकती है, लेकिन तीन घंटे बाद भी आसमान साफ नजर आ रहा है. AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने वीडियो बनाकर दिल्ली सरकार के इस ट्रायल पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने लिखा, 'बारिश में भी फर्ज़ीवाड़ा, कृत्रिम वर्षा का कोई नामुनिशान नहीं दिख रहा है. इन्होंने सोचा होगा देवता इंद्र करेंगे वर्षा. सरकार दिखाएगी खर्चा.'   'देवता इंद्र करेंगे वर्षा, सरकार दिखाएगी खर्चा' सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'इंद्र देवता भी सरकार का साथ नहीं दे रहे. कल शाम को थोड़ी बहुत बारिश हो भी रही थी लेकिन अब तो जो थोड़े बहुत बादल दिख रहे थे, वो भी चले गए.' दिल्ली में हुआ ट्रायल बता दें कि राजधानी दिल्ली में आज क्लाउड सीडिंग का सफल ट्रायल किया गया. अब इसके तीन ट्रायल हो चुके हैं. इसके लिए IIT कानपुर के Cessna एयरक्राफ्ट ने मेरठ से उड़ान भरी और खेकरा, बुराड़ी, नार्थ करोल बाग, मयूर विहार, सड़कपुर और भोजपुर जैसे इलाकों में क्लाउड सीडिंग का ट्रायल किया. इस दौरान पायरो तकनीक का उपयोग करते हुए 8 क्लाउड सीडिंग फ्लेयर्स छोड़े गए.  मंत्री सिरसा ने दी क्लाउड सीडिंग की जानकारी दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिरसा ने इस बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 8 फ्लेयर्स को यूज किया गया. एक फ्लेयर 2.5 kg की है और लगभग दो से ढाई मिनट तक चलती है. इस पूरे प्रोसेस में आधा घंटा लगा था. इस ट्रायल के बाद बाहरी दिल्ली के इलाकों में हल्की बूंदाबांदी के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई थी. लेकिन यह बादलों में नमी पर निर्भर करता है. फिलहाल नमी कम है, क्योंकि दिल्ली में मौसम विभाग द्वारा अनुमानित तापमान सामान्य से 3 डिग्री कम है. 

दिल्ली में केजरीवाल की अग्निपरीक्षा: 3 झटकों के बाद अब 12 सीटों पर साख दांव पर

नई दिल्ली  दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने के 8 महीने बाद पार्टी को पहली चुनावी परीक्षा का सामना करना होगा। वहीं, आम आदमी पार्टी (आप) के लिए भी यह नाक की लड़ाई होगी। दरअसल, दिल्ली नगर निगम के 12 वार्डों में उपचुनाव की घोषणा राज्य चुनाव आयोग ने कर दी है। 30 नवंबर को चुनाव होंगे और मतों की गिनती 3 दिसंबर को होगी। निगम के 12 वार्डों के उपचुनाव में हार-जीत से सदन की सरकार भले ही ना बदले लेकिन भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के बीच यह नाक की लड़ाई जरूर होगी। वहीं कांग्रेस के पास भी अपनी स्थिति बेहतर करने का मौका होगा। इस चुनाव को सबसे अहम 'आप' के लिए माना जा रहा है, जिसे अपने सबसे बड़े गढ़ में लगातार तीन बड़े झटकों का सामना करना पड़ा है। पहले 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से गठजोड़ के बावजूद पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई तो इस साल की शुरुआत में उसे विधानसभा की सत्ता भी गंवानी पड़ी। बात यहीं खत्म नहीं हुई और आपसी फूट की वजह से निगम की सरकार भी हाथ से चली गई। ऐसे में अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पार्टी पूरी ताकत झोंककर दमदार तरीके से वापसी करना चाहेगी। इन मुद्दों पर लड़ा जाएगा चुनाव यह चुनाव दिल्ली नगर निगम के कामकाज के ऊपर और दिल्ली में कूड़े व कचरे के निस्तारण, बाजारों में सफाई व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों पर चुनाव लड़ा जाएगा। इसके अलावा तीनों लैंडफिल साइट में स्थित वर्षों पुराने कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने के मुद्दें पर भी चुनाव में अहम भूमिका निभाएगा। इसके अतिरिक्त सभी निगम के 12 जोन के 250 वार्डों में सप्ताह विभिन्न बार कूड़ा एकत्रित करने के लिए आने वाले ऑटो टिप्पर के मुद्दे भी स्थानीय स्तर पर अहम है। सड़क किनारे मलबा डालने, निगम की सभी सेवाएं जैसे स्वास्थ्य व्यापार लाइसेंस, फैक्ट्री लाइसेंस की प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे, सीलिंग जैसे मुद्दे व्यापारियों के लिए अहम है। अभी सदन में 238 सदस्य हैं निगम के सदन में कुल 250 पार्षदों में से अभी 238 पार्षद सदन के सदस्य हैं। इसमें भाजपा के 117 पार्षद, आम आदमी पार्टी के 99 पार्षद, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) के 15 पार्षद और कांग्रेस के 7 पार्षद हैं। सदन में बहुमत के लिए कुल 126 सदस्य चाहिए होते हैं। अभी मौजूदा समय में आईवीपी, भाजपा को बाहर से समर्थन कर रही है। इन वार्ड पर होंगे उपचुनाव मुंडका, शालीमार बाग बी, अशोक विहार, चांदनी चौक, चांदनी महल, द्वारका बी, दिचाऊं कलां, नारायणा, संगम विहार-ए, दक्षिण पुरी, ग्रेटर कैलाश और विनोद नगर में उपचुनाव होंगे। इन सभी 11 वार्डों के पार्षद फरवरी 2025 के विधानसभा चुनाव में विधायक का चुनाव जीत गए थे। जिसके बाद यह 12 वार्ड खाली हो गए हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा के आठ विधायक जीते थे। जबकि चांदनी चौक, चांदनी महल और दक्षिणपुरी से आम आदमी पार्टी के पार्षद विधानसभा चुनाव जीते थे। भाजपा की द्वारका बी वार्ड से पार्षद रहीं कमलजीत सहरावत वर्ष 2024 में लोकसभा चुनाव में पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद का चुनाव जीती थीं। जिसके बाद से यह वार्ड खाली है। यह है वार्डों की स्थिति शालीमार बाग-बी ( वार्ड संख्या 56), अशोक विहार (वार्ड संख्या 65) , द्वारका-बी (वार्ड संख्या 120) , ढिचाऊं कलां (वार्ड संख्या 128) और ग्रेटर कैलाश (वार्ड संख्या 173) महिला वार्ड हैं। मुंडका (वार्ड संख्या 25), चांदनी चौक (वार्ड संख्या 74), चांदनी महल (76), नारायणा (वार्ड संख्या 139) , संगम विहार-ए (वार्ड संख्या 163) , विनोद नगर ( वार्ड संख्या 198) सामान्य वार्ड और दक्षिण पुरी (वार्ड संख्या 64) अनुसूचित जाति (एससी) वार्ड है। इन वार्डों में सत्ता पक्ष को मजबूती शालीमार बाग-बी वार्ड से वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पार्षद का चुनाव जीती थीं। इस वर्ष दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में शालीमार बाग विधानसभा से जीत दर्ज कर वह विधायक बनी थी। इसके मुंडका, अशोक विहार, द्वारका बी, दिचाऊं कलां, नारायणा, संगम विहार-ए, ग्रेटर कैलाश और विनोद नगर में भाजपा के पार्षद रह चुके हैं। इन कारणों से इन वार्डों में सत्ता पक्ष ने मजबूती की उम्मीद जताई है। हालांकि, दिल्ली में कूड़े के निस्तारण और अवैध रूप से फैंके जा रहे कूड़े के मुद्दे, सीलिंग के मुद्दे पर सत्ता पक्ष को विपक्ष घेर सकता है। कई कार्यों से हम चुनाव जीतेंगे: योगेश वर्मा सत्ता पक्ष से निगम के केशवपुरम वार्ड से पार्षद और निगम की शिक्षा समिति के अध्यक्ष योगेश वर्मा ने कहा कि हम चुनाव की घोषणा का स्वागत करते हैं। सितंबर महीने में दिल्ली के नागरिकों के लिए ग्रेटर कैलाश, पंजाबी बाग में नई मल्टी लेवल कार पार्किंग को शुरू किया। इसके अलावा रिहायशी इलाकों में स्पा सेंटरों को संचालन न करने समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। गोयला डेयरी समेत कई स्थानों पर बायोगैस सीएनजी प्लांट जैसे कार्य शुरू हो गए। इन सब कार्यों को लेकर हमें उम्मीद है कि हम मजबूती से सभी वार्डों में चुनाव की जीत दर्ज करेंगे।  

पार्क स्ट्रीट केस से जुड़े नाम फिर सुर्खियों में, कोलकाता क्लब में हुई घटना पर बवाल

कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक पांच सितारा होटल के अंदर स्थित क्लब में रविवार को एक महिला के साथ कथित तौर पर छेड़खानी, मारपीट और बीयर की बोतलों से हमला किया गया। घटना के बाद पीड़िता ने लगभग आधे घंटे तक खुद को छिपाए रखा। एफआईआर के मुताबिक, यह हादसा रविवार सुबह 4 से 5 बजे के बीच हुआ, जब महिला अपने पति, भाई और दोस्तों के साथ क्लब में पार्टी कर रही थी। बताया गया कि पुलिस ने उसे होटल के बार से सुरक्षित निकाला। बिधाननगर दक्षिण पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एफआईआर में पार्क स्ट्रीट के निवासी जुनैद खान और नासिर खान को मुख्य आरोपी बताया गया है। पीड़िता की शिकायत में लगाए गंभीर आरोप अपनी शिकायत में पीड़िता ने विस्तार से घटना का जिक्र किया है। उन्होंने कहा है कि क्लब में हमारी टेबल पर पार्टी चल रही थी, तभी कुछ लोगों ने अचानक हम पर हमला बोल दिया। जुनैद खान, नासिर खान और उनके दोस्तों के समूह ने मेरे साथ मारपीट की और यौन शोषण की कोशिश की। जब मेरे भाई ने मुझे बचाने की कोशिश की, तो उन्होंने उसके ऊपर कांच और बीयर की बोतलें फेंक दीं। हमने खुद को बचाने के लिए होटल से भागने का प्रयास किया, लेकिन जुनैद ने और लोगों को बुला लिया, और फिर से हम पर हमला शुरू कर दिया। शिकायत में आगे कहा गया है कि मैंने मदद के लिए पुलिस हेल्पलाइन पर कॉल की, लेकिन आरोपी ने सभी दरवाजे बंद करा दिए। फिर कुछ लड़कों ने मुझे धक्का देना शुरू कर दिया और बेहद घिनौने तरीके से छूना-छेड़ना शुरू कर दिया। मैंने अपनी मेडिकल रिपोर्ट संलग्न की है और क्लब परिसर के सीसीटीवी फुटेज में पूरा हमला कैद है। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि जुनैद और नासिर वही अपराधी हैं, जो 2012 के कुख्यात पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस में शामिल थे। महिला के अनुसार, वे फोन पर उसे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। आरोपी का आपराधिक इतिहास पुलिस सूत्रों के अनुसार, नासिर खान को 2012 के पार्क स्ट्रीट गैंगरेप मामले में दोषी ठहराया गया था। सजा पूरी करने के बाद वह 2020 में जेल से रिहा हुआ। इस केस में उसके भतीजे जुनैद खान का नाम भी आरोपी के रूप में आया था। वहीं, बिधाननगर पुलिस आयुक्तालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमें पीड़िता की शिकायत प्राप्त हो चुकी है और प्रारंभिक जांच जारी है। जांच के बाद ही कुछ और कहा जा सकता है।

हम अपने डॉक्टरों की सुरक्षा नहीं करेंगे तो समाज हमें माफ नहीं करेगा: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली  उच्चतम न्यायालय ने निजी क्लीनिक, औषधालयों और गैर-मान्यता प्राप्त अस्पतालों में कोविड-19 से लड़ते हुए जान गंवाने वाले चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों को बीमा पॉलिसी में शामिल नहीं किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। लेकिन अदालत के रुख से स्पष्ट है कि वह डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को बीमा पॉलिसी में शामिल न करने के खिलाफ है। बेंच ने मंगलवार को कहा कि यदि न्यायपालिका चिकित्सकों का ध्यान नहीं रखेगी और उनके लिए खड़ी नहीं होगी तो समाज उसे माफ नहीं करेगा। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बीमा कंपनियां वैध दावों का निपटारा करें और यह धारणा सही नहीं है कि निजी चिकित्सक मुनाफा कमाने के लिए काम कर रहे हैं। पीठ ने कहा, ‘अगर हम अपने चिकित्सकों का ध्यान नहीं रखेंगे और उनके लिए खड़े नहीं होंगे तो समाज हमें माफ नहीं करेगा…।’ अदालत ने कहा, ‘अगर आपके अनुसार यह शर्त पूरी होती है कि वे कोविड-19 से निपटने के लिए काम कर रहे थे और कोविड के कारण उनकी मौत हुई है तो आपको बीमा कंपनी को भुगतान करने के लिए बाध्य करना चाहिए। सिर्फ इसलिए कि वे सरकारी ड्यूटी पर नहीं थे, यह धारणा सही नहीं है कि वे मुनाफा कमा रहे थे।’ शीर्ष अदालत ने केंद्र को प्रधानमंत्री बीमा योजना के अलावा उपलब्ध अन्य समान या समानांतर योजनाओं के बारे में प्रासंगिक आंकड़े और जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ‘हमें आंकड़े और प्रधानमंत्री योजना के अलावा उपलब्ध अन्य समानांतर योजनाओं के बारे में कुछ जानकारी दीजिए। हम सिद्धांत निर्धारित करेंगे और उसके आधार पर बीमा कंपनी से दावे किए जा सकेंगे। बीमा कंपनी को हमारे फैसले के आधार पर विचार करना और आदेश पारित करना है।’ शीर्ष अदालत मुंबई उच्च न्यायालय के नौ मार्च 2021 के आदेश के खिलाफ दायर प्रदीप अरोड़ा और अन्य की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। किसकी अर्जी पर SC ने पलट दिया हाई कोर्ट का फैसला मुंबई उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि निजी अस्पताल के कर्मचारी बीमा योजना के तहत लाभ प्राप्त करने के हकदार नहीं हैं, जब तक कि राज्य या केंद्र सरकार द्वारा उनकी सेवाओं की मांग न की जाए। किरण भास्कर सुरगड़े नाम की महिला ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी जिनके पति – जो ठाणे में एक निजी क्लिनिक चलाते थे – की 2020 में कोरोना वायरस के कारण मौत हो गई थी। बीमा कंपनी ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत किरण के दावे को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उनके पति के क्लिनिक को कोविड-19 अस्पताल के रूप में मान्यता नहीं दी गई थी।