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ट्रंप का बड़ा बयान: भारत-अमेरिका के बीच खत्म होगी ‘टैरिफ जंग’, नई ट्रेड डील पर बनी सहमति

नई दिल्ली  भारत और अमेरिका में जारी तनाव जल्द खत्म होने के आसार हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह भारत के साथ ट्रेड डील करने वाले हैं। इससे पहले कहा जा रहा था कि अमेरिका टैरिफ घटाकर 16 प्रतिशत करने का फैसला किया था। हालांकि, इसे लेकर भारत या अमेरिका सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। दक्षिण कोरिया पहुंचे ट्रंप ने बुधवार को कहा, '…अगर आप भारत और पाकिस्तान को देखें, तो मैं भारत के साथ ट्रेड डील करने वाला हूं। मेरे मन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बहुत प्यार और सम्मान है…। हमारा रिश्ता बहुत मजबूत है।' ट्रंप के इस बयान से संकेत मिल रहे हैं कि जल्द ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम हो सकता है। अमेरिका रूसी तेल की खरीद के मुद्दे पर भारत पर निशाना साधता रहा है। बीते हफ्ते खबरें आई थीं कि भारत और अमेरिका के बीच तीन में से दो मुद्दों पर सहमति बन गई है। वहीं, खबरें ये भी थीं कि भारत ने अमेरिका को भारतीय कृषि बाजार में एंट्री की अनुमति नहीं दी थी, जिसके चलते दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर थम गया था। कहा जा रहा था कि रूसी तेल की खरीद में कमी पर भारत की सहमति के बाद अमेरिका ने टैरिफ 16 प्रतिशत पर करने के लिए तैयार हुआ था। खास बात है कि ये अटकलें पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद लगाई जा रही थीं। पूरी तरह से कटौती का दावा ट्रंप ने शनिवार को एक बार फिर दावा किया कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत रूसी तेल खरीद में 'पूरी तरह से' कटौती कर रहा है, जबकि चीन 'काफी हद तक' कटौती करेगा। शनिवार को मलेशिया जाते समय विशेष विमान एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि भारत रूसी तेल खरीद में 'पूरी तरह से कटौती' कर रहा है। ट्रंप और उनकी टीम लगातार आरोप लगाती रही है कि भारत रूसी तेल की खरीद से मुनाफाखोरी कर रहा है। साथ ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को तेल की खरीद के जरिए वित्तीय सहयोग कर रहा है। अमेरिका ने भारत पर शुरुआत में 25 प्रतिशत टैरिफ और जुर्माना लगाया था। इसके बाद भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया।  

रोहित शर्मा ने पछाड़ा शुभमन गिल, 38 साल की उम्र में हासिल किया ODI बल्लेबाज का शीर्ष स्थान

मुंबई  पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने बुधवार (29 अक्टूबर) को इतिहास रच दिया. वह आईसीसी वनडे बल्लेबाज रैंकिंग में नंबर-1 स्थान हासिल करने वाले सबसे उम्रदराज भारतीय क्रिकेटर बन गए हैं. 38 साल 182 दिन की उम्र में मुंबई के इस ओपनर ने दो पायदान की छलांग लगाकर भारत के मौजूदा कप्तान शुभमन गिल को पीछे छोड़ते हुए पहली बार अपने करियर में शीर्ष स्थान हासिल किया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल ही में खत्म हुई वनडे सीरीज में शानदार फॉर्म दिखाने के बाद रोहित ने यह मुकाम पाया. उन्होंने तीन मैचों में 202 रन बनाए, एवरेज 101.00 रहा. सीरीज के निर्णायक मुकाबले में उनकी नाबाद शतकीय पारी ने न केवल भारत को जीत दिलाई, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि वह अब भी दुनिया के सबसे भरोसेमंद टॉप ऑर्डर बल्लेबाजों में से एक हैं. इस प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया. नवीनतम रैंकिंग में 781 रेटिंग प्वाइंट के साथ रोहित पहले स्थान पर हैं. उनके बाद अफगानिस्तान के इब्राहिम जादरान (764 प्वाइंट) दूसरे और शुभमन गिल (745 प्वाइंट) तीसरे स्थान पर हैं. वहीं विराट कोहली, जिन्होंने तीसरे वनडे में नाबाद 74 रन बनाए, छठे नंबर (725) पर पहुंच गए हैं. श्रेयस अय्यर बिना बल्लेबाजी किए भी नौवें स्थान पर पहुंचे हैं. रोहित की यह उपलब्धि उनके लंबे करियर, निरंतरता और क्लास का प्रमाण है. जब उनकी अंतरराष्ट्रीय भविष्य को लेकर सवाल उठने लगे थे, ऐसे वक्त में उनका यह नंबर-1 बनना बताता है कि अनुभव, फॉर्म और जज्बा अगर कायम हो, तो उम्र सिर्फ एक आंकड़ा भर रह जाती है. पिछले हफ्ते रोहित शर्मा के पास 745 रेटिंग प्वाइंट थे, लेकिन एडिलेड ओवल में दूसरे वनडे में 97 गेंदों पर 73 रन और सिडनी में तीसरे वनडे में 125 गेंदों पर नाबाद 121 रनों की शानदार पारियों के बाद उन्होंने 781 अंक हासिल कर लिए. 2023 वनडे वर्ल्ड कप में भारत को फाइनल तक पहुंचाने वाले रोहित अब उन चुने हुए भारतीय दिग्गजों की सूची (सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और शुभमन गिल) में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने आईसीसी वनडे बल्लेबाज रैंकिंग में नंबर-1 स्थान पाया है,

भाबीजी’ शो में शिल्पा शिंदे की एंट्री, क्या शुभांत्री को मिलेगा छुट्टी का मौका?

मुंबई  'भाबीजी घर पर हैं' शो में शिल्पा शिंदे ने अपनी ऐसी छाप छोड़ी कि शो आते ही सबका चहीता बन गया था. लेकिन, कुछ बहस बाजी के बाद एक्ट्रेस ने अचानक शो को छोड़ दिया. जिसके बाद उनकी जगह मेकर्स ने शुभांगी अत्रे को बतौर अंगूरी साइन किया. अब ऐसी खबरें आ रही हैं कि मेकर्स फिर से पुरानी अंगूरी भाबी को शो में वापस लाना चाहते हैं. रिपोर्ट्स तो ये भी है कि शिल्पा शिंदे से इसे लेकर बातचीत चल रही है और हो सकता है कि वो जल्द ही इस शो में दोबारा एंट्री मार लें. शिल्पा की मेकर्स से बातचीत  सूत्रों की मानें तो शिल्पा से शो में वापसी की बात चल रही है. ऐसी उम्मीद है कि वो जल्द ही डील हो जाएगी. ये फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि सभी को लगता है कि शो को फिर से नई जान फूंकने की जरूरत है.ये शो 10 साल से सक्सेसफुली रन कर रहा है. चैनल चाहता है कि शो में कुछ नए एलीमेंट्स डाले जाए ताकि 'भाबीजी घर पर हैं' शो में थोड़ा रिफ्रेशमेंट आए.  मिड दिसंबर में शुरू हो सकती है शूटिंग खबरों की मानें तो शो का एक नया सेट तैयार किया जा रहा है. जिससे कि स्टोरीलाइन में कुछ मेजर बदलाव भी देखने को मिलेंगे. कहा जा रहा है कि 'भाबीजी घर पर है शो' 2.0 की शूटिंग दिसंबर के मिड में शुरू हो सकती है. क्यों छोड़ा था शिल्पा ने शो? अब सवाल ये उठता है कि आखिर क्यों शिल्पा शिंदे ने इस शो से बीच में अचानक किनारा कर लिया था. शिल्पा शिदें इस शो के बाद हर घर में पहचान बना चुकी थीं. लेकिन, 2016 में अचानक शो को छोड़ दिया जिसके बाद खूब बवाल हुआ था. शिल्पा ने मेंटल टॉर्चर का आरोप लगाया था. जबकि मेकर्स का कहना था कि उनसे एक कॉन्ट्रेक्स साइन कराया जा रहा था कि वो शो के दौरान किसी और सीरियल को साइन नहीं करेंगी. लेकिन उन्होंने पैसे ना देने का और भेदभाव करने का आरोप लगाया.इसके बाद मेकर्स ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा जिसमें अनप्रोशनेल बर्ताव करने की बात कही थी. खास बात है कि शिल्पा भाबीजी के बाद 'बिग बॉस सीजन 11' में दिखी थीं. जिसमें वो जीती थीं. इसके बाद 2023 में शिल्पा ने 'मैडम सर' में कैमियो रोल किया था. 

इन्फेंट्री स्कूल महू में ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत नई रिसर्च लैब स्थापित

 महू   ड्रोन तकनीक को भविष्य की युद्ध प्रणाली में निर्णायक भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है। भारतीय सेना अब स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलाजी को लेकर बड़ा कदम उठा रही है। सेना के ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में मान्यता प्राप्त इन्फेंट्री स्कूल महू और आईआईटी कानपुर इनक्यूबेटेड डिफेंस ड्रोन निर्माता वीयू डायनेमिक्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच संयुक्त उपक्रम के तहत अत्याधुनिक ड्रोन रिसर्च लैबोरेटरी स्थापित की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में महू स्थित पाथ समूह का स्ट्रेटेजिक निवेश भी शामिल है। सेना की समस्याओं व आवश्यकताओं पर शोध कर होगा नवाचार समय के साथ-साथ युद्ध तकनीक, रणनीति और जरूरतें बदलती जा रही हैं। तकनीकी युग में युद्ध के दौरान ही कई बड़ी समस्याएं व चुनौतियां सामने आती हैं। इनको त्वरित रूप से हल करने के लिए भारतीय सेना का प्रतिष्ठित इन्फेंट्री स्कूल वर्तमान और भविष्य में होने वाले युद्ध की वास्तविक चुनौतियों से जुड़ी आवश्यकताओं और समस्याओं को वीयू डायनेमिक्स कंपनी के साथ साझा करेगा। इसके बाद दोनों की संयुक्त अनुसंधान टीम आवश्यकताओं व समस्यों के तकनीकी समाधान को लेकर शोध कर नवाचार करेंगे, फिर त्वरित विकास के माध्यम से भारतीय सेना की सामरिक क्षमताओं को बढ़ाने वाले ड्रोन समाधानों पर कार्य करेगी। यह होगी विशेषता     इस रिसर्च लैब में ऐसे ड्रोन सिस्टम विकसित किए जाएंगे जो संचार बाधित या जीपीएस जैम की स्थिति में भी मिशन पूरा करने में सक्षम हों।     आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) के माध्यम से लक्ष्य की पहचान और सटीक हमला करने की क्षमता रखते हों।     इस लैब से विदेशी निर्भरता से मुक्त होकर पूर्ण रूप से स्वदेशी निर्मित तकनीकी समाधान प्रदान कर सकेंगे।     तेज प्रोटोटाइपिंग और परीक्षण के माध्यम से युद्ध में होने वाली वास्तविक जरूरतों को पूरा करेंगे।     इस प्रयोगशाला में एफपीवी अटैक ड्रोन, कमिकाजी प्लेटफार्म और लंबी दूरी वाले फिक्स्ड-विंग ड्रोन सहित कई सामरिक ड्रोन प्रणालियों के विकास पर कार्य होगा। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम यह पहल आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाते हुए भारतीय सेना को भविष्य की युद्ध परिस्थितियों के लिए तैयार किए गए स्वदेशी ड्रोन समाधान उपलब्ध कराएगी। यह सहयोग देश की तीन प्रमुख शक्तियों के एकीकृत प्रयास के परिणाम हैं। इसमें भारतीय सेना का युद्ध अनुभव, भारतीय स्टार्टअप का नवाचार व भारतीय उद्योग की मजबूती शामिल है। जिससे भविष्य में होने वाले युद्ध व युद्ध संभावनाओं में भारत की निर्णायक बढ़त सुनिश्चित करेंगे। इसको लेकर महू की इन्फेंट्री स्कूल में समारोह आयोजित हुआ। जिसमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ वीयू डायनेमिक्स व पाथ समूह के प्रतिनिधि के बीच समझौता पत्र के लिए हस्ताक्षर किए।

मुंबई की राजनीति गरमाई: BMC चुनाव से पहले शरद पवार ने फडणवीस सरकार को चुनौती दी

मुंबई   महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आने वाला है. दरअसल, स्थानीय निकाय और बीएमसी चुनाव से पहले राज्य की देवेंद्र फडणवीस ने सीधे तौर पर दिग्गज वयोवृद्ध नेता शरद पवार से सीधे टकरा गई है. दरअसल, राज्य सरकार ने शरद पवार की अध्यक्षता वाले वीएसआई के फंड की ऑडिट का आदेश दिया है. वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (वीएसआई) पुणे में स्थित है. विपक्षी दल ने इसे बीजेपी की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया है. कैबिनेट ने 30 सितंबर को इस फैसले को मंजूरी दी थी. शुगर कमिश्नर संजय कोल्टे ने कहा कि कैबिनेट मीटिंग के मिनट्स मिलने के बाद हम कमेटी गठित करने की प्रक्रिया में हैं, जो वीएसआई के रिकॉर्ड और फंड उपयोग की जांच करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वीएसआई में जांच शुरू होने की बात से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि शुगर कमिश्नर ने केवल संस्थान द्वारा कुचले गए गन्ने के प्रति टन एक रुपये के उपयोग की जानकारी मांगी है. कोई जांच शुरू नहीं हुई. अगर वीएसआई के खिलाफ कोई गंभीर शिकायत मिलती है, तो हम जांच कर सकते हैं. फिलहाल किसी की कोई शिकायत नहीं है. चीनी उद्योग के लिए अनुसंधान का काम करती है संस्था 1975 में सहकारी कारखानों के गन्ना उत्पादकों द्वारा स्थापित वीएसआई चीनी उद्योग के लिए अनुसंधान एवं विकास संस्थान है. यह सहकारी मिलों से कुचले गए गन्ने के प्रति टन एक रुपये प्राप्त करता है, जिससे अपनी गतिविधियां चलाता है. शरद पवार के अलावा उनके भतीजे एवं उपमुख्यमंत्री अजित पवार, पूर्व मंत्री दिलीप पाटील, जयंत पाटील और कांग्रेस नेता बालासाहेब थोरात इसके ट्रस्टी हैं. एन51सीपी-एसपी नेताओं ने इसे विपक्षी गढ़ों को निशाना बनाने का हिस्सा बताया. पार्टी के राज्य महासचिव रोहित पवार ने कहा कि मुख्यमंत्री का जांच का फैसला सामान्य प्रक्रिया नहीं है. ठाणे के बाद अब बारामती को निशाना बनाया जा रहा है. जब विपक्ष भ्रष्टाचार के सबूत देता है, तो सरकार चुप रहती है, लेकिन वीएसआई जैसी प्रतिष्ठित संस्था को टारगेट किया जा रहा है. यह बीजेपी की राजनीति के निम्न स्तर को दर्शाता है. पुणे जिले का बारामती पवार परिवार का राजनीतिक गढ़ है, जबकि ठाणे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना का घरेलू मैदान है. एनसीपी-एसपी का आरोप है कि सत्ता में आने के बाद बीजेपी और उसके सहयोगी विपक्षी नेताओं की संस्थाओं को कमजोर करने की रणनीति अपनाते हैं. वीएसआई चीनी उद्योग में तकनीकी नवाचार, प्रशिक्षण और अनुसंधान के लिए जाना जाता है. सहकारी मिलों से प्राप्त फंड का उपयोग वैज्ञानिक अध्ययन, किसान जागरूकता और उद्योग उन्नयन में होता है. संस्थान के ट्रस्टी बोर्ड में सभी प्रमुख दलों के नेता शामिल हैं, जो इसे गैर-राजनीतिक स्वरूप देते हैं. फिर भी, फंड ऑडिट का फैसला राजनीतिक रंग ले चुका है. जांच पारदर्शी होगी शुगर कमिश्नर कोल्टे ने बताया कि कमेटी का गठन जल्द पूरा होगा और जांच पारदर्शी होगी. लेकिन विपक्ष का मानना है कि यह कदम शरद पवार की साख को ठेस पहुंचाने का प्रयास है. रोहित पवार ने कहा कि वीएसआई ने दशकों से चीनी उद्योग को मजबूत किया है. अगर सरकार को पारदर्शिता चाहिए, तो सभी सहकारी संस्थाओं की जांच होनी चाहिए, न कि चुनिंदा. महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक प्रभाव का केंद्र रहा है. पवार परिवार का चीनी सहकारिता पर मजबूत पकड़ है और बारामती में कई मिलें उनके समर्थकों के नियंत्रण में हैं. ऑडिट का फैसला ऐसे समय आया है जब राज्य में सत्ता गठबंधन और विपक्ष के बीच तनाव चरम पर है. फडणवीस ने स्पष्ट किया कि अभी केवल जानकारी मांगी गई है, लेकिन विपक्ष इसे जांच की शुरुआत मान रहा है. आने वाले दिनों में कमेटी की रिपोर्ट इस विवाद को और गहरा सकती है या शांत कर सकती है. फिलहाल, वीएसआई का मामला महाराष्ट्र की राजनीति में नया तूफान बनता दिख रहा है.  

इतिहास रचा! राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बनीं पहली भारतीय राष्ट्रपति जिन्होंने उड़ाया राफेल लड़ाकू विमान

अंबाला  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राफेल फाइटर जेट की सवारी की है। उन्होंने अंबाला के एयरफोर्स बेस से उड़ान भरी। इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। अहम बात यह है कि अंबाला एयरबेस से ही भारत के फाइटर जेट्स ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उड़ान भरी थी और पाकिस्तान एवं पीओके में घुसकर मार की थी। पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में भारत की ओर से ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया गया था और पाकिस्तान ने भी इसका जवाब देने की कोशिश की थी। इस दौरान अंबाला एयरबेस का भारत की ओर से इस्तेमाल किया गया था। राफेल विमान में चढ़ने से पहले राष्ट्रपति ने ‘जी-सूट’ पहना था। हाथ में हेलमेट लिए और धूप का चश्मा लगाए मुर्मू ने पायलट के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। पूर्वाह्न 11:27 बजे विमान के उड़ान भरने से पहले राष्ट्रपति ने विमान के अंदर से हाथ हिलाकर अभिवादन किया। आज सुबह वायुसेना स्टेशन पहुंचने पर राष्ट्रपति को औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ भी दिया गया। इससे पहले सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर मुर्मू ने 8 अप्रैल, 2023 को असम के तेजपुर वायुसेना स्टेशन में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी और वह ऐसा करने वाली तीसरी राष्ट्रपति बनी थीं। अंबाला में ही भारतीय वायुसेना का हिस्सा बने थे राफेल जेट फ्रांसीसी एयरोस्पेस कंपनी दसॉ एविएशन द्वारा निर्मित राफेल लड़ाकू विमान को सितंबर 2020 में अंबाला वायुसेना स्टेशन पर भारतीय वायुसेना में औपचारिक रूप से शामिल किया गया था। पहले पांच राफेल विमानों को 17वें स्क्वाड्रन 'गोल्डन एरोज' में शामिल किया गया था। ये विमान 27 जुलाई, 2020 को फ्रांस से यहां पहुंचे थे। राफेल 2020 में अंबाला वायु सेना स्टेशन पर भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल हुए। ये 17 स्क्वाड्रन 'गोल्डन एरो' का हिस्सा हैं। बता दें कि भारत ने 4 दिन चले ऑपरेशन में पाकिस्तान के कई आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। पाकिस्तान के डीजीएमओ की मांग पर जंग को रोका गया था। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा करते हैं कि उनके दखल के बाद ही भारत और पाकिस्तान संघर्ष रोकने को राजी हुए थे।

भारत ने तोड़ी परंपरा: इस बार गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि यूरोपीय कमीशन व परिषद के अध्यक्ष

नई दिल्ली अगले साल गणतंत्र दिवस परेड में भारत दुनिया की एक सबसे ताकतवर हस्ती को आमंत्रित करने वाला है. इसमें न तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम है और न ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का. इसमें फ्रांस, इंग्लैंड या जर्मनी जैसे सुपरपावर के हेड का भी नाम नहीं है. ये भी स्वाभाविक है कि इसमें चीन के राष्ट्रपति का भी नाम नहीं ही है. ऐसे में ये ताकतवर हस्तिंयां कौन हैं. तो उनके नाम हैं- उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा. भारत पहली बार परंपरा से हटकर इन्हें आमंत्रित कर रहा है. लेयेन यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष हैं जबकि कोस्टा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष हैं. रिपोर्ट के मुताबिक औपचारिक निमंत्रण और स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है, जिसके पूरा होने पर नई दिल्ली और ब्रुसेल्स द्वारा जल्द ही आधिकारिक घोषणा की जाएगी. भारत के नजरिये में गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि आमंत्रण अत्यंत प्रतीकात्मक महत्व रखता है. नई दिल्ली रणनीति और आतिथ्य का संतुलन बनाते हुए मुख्य अतिथि का चयन करती है, जिसमें सामरिक-कूटनीतिक कारण, व्यापारिक हित और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति निर्णायक भूमिका निभाते हैं. इस बार ईयू नेतृत्व को आमंत्रित करना भारत-ईयू संबंधों में तेजी से आए उभार का स्पष्ट संकेत है, विशेषकर फरवरी 2025 से जब ईयू के कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स ने भारत का दौरा किया था. 27 सदस्यीय ईयू के साथ भारत के संबंध पिछले कुछ महीनों में उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुए हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली प्रशासन की अनिश्चित नीतियों के बीच ईयू ने 20 अक्टूबर को एक नया सामरिक एजेंडा अपनाया, जिसमें भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को उच्च स्तर पर ले जाने का संकल्प है. व्यापार समझौते पर वार्ता इसमें भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) की चल रही वार्ताओं को अंतिम रूप देना, प्रौद्योगिकी, रक्षा-सुरक्षा और जन-संपर्क सहयोग को गहरा करना शामिल है. जनवरी में ईयू नेताओं के भारत आने पर दिल्ली में ही भारत-ईयू लीडर्स समिट आयोजित होगा, जो मूल रूप से 2026 की शुरुआत में निर्धारित था. इससे दोनों पक्षों के वार्ताकारों पर दिसंबर तक एफटीए को पूरा करने का दबाव बढ़ गया है – यह प्रतिबद्धता फरवरी में हुई आर्थिक साझेदारी बैठकों में ली गई थी. गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में ईयू नेतृत्व की उपस्थिति न केवल कूटनीतिक जीत होगी, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करेगी. यह आमंत्रण भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ नीति का हिस्सा है, जिसमें वह अमेरिका, रूस और यूरोप जैसे सभी प्रमुख शक्ति केंद्रों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखता है. ट्रंप प्रशासन की अनिश्चितता के बीच ईयू के साथ गठजोड़ भारत को व्यापार, निवेश और रक्षा प्रौद्योगिकी में नई संभावनाएं देगा. एफटीए पूरा होने पर भारत को ईयू बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जो उसके निर्यात को बढ़ावा देगी. साथ ही, रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग से भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बल मिलेगा. जनवरी समिट में दोनों पक्ष जलवायु परिवर्तन, डिजिटल गवर्नेंस और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी चर्चा करेंगे. यह ऐतिहासिक आमंत्रण भारत-ईयू साझेदारी के नए युग की शुरुआत है. जब 26 जनवरी 2026 को राजपथ पर ईयू झंडा लहराएगा, तो यह न केवल राजनयिक सफलता होगी, बल्कि वैश्विक सहयोग की नई मिसाल भी कायम करेगा. दोनों पक्षों के बीच विश्वास और सहयोग की यह यात्रा अब निर्णायक मोड़ पर है.  

ग्रामीणों की खुशियों का अवसर: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पूरी की उनकी मांग

रायपुर : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से ग्रामीणों की मांग हुई पूरी सूरजपुर में 11 करोड़ 39 लाख रुपये की लागत से दो सड़कों का निर्माण कार्य प्रारंभ रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण अंचलों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी दिशा में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से सूरजपुर जिले के ग्रामीणों की लंबे समय से लंबित मांग को पूरा करते हुए कुल 11 करोड़ 39 लाख 63 हजार रुपये (1,139.63 लाख रुपये) की लागत से दो प्रमुख सड़कों के निर्माण कार्यों का आज भूमि पूजन एवं शुभारंभ किया गया। पहला निर्माण कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग-43 से नया कृष्ण मंदिर होकर सिलफिली बनारस रोड तक (5.20 किमी) का है, जिस पर 6 करोड़ 90 लाख 68 हजार रुपये की लागत स्वीकृत की गई है।दूसरा निर्माण कार्य एनएच-43 से नावापारा दुर्गाबाड़ी होकर रवीन्द्र नगर (3.96 किमी) तक सड़क निर्माण का है, जिसकी लागत 4 करोड़ 48 लाख 95 हजार रुपये है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि इन सड़कों के निर्माण से सैकड़ों ग्रामीण परिवारों को आवागमन की सुविधा, व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार गांव-गांव तक पक्की सड़क और विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। भूमिपूजन कार्यक्रम में  स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारी और ग्रामीणजन  बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सड़कों की स्वीकृति से क्षेत्र में हर्ष और उत्साह का माहौल रहा।

जशपुर को मिला नया खेल केंद्र: सन्ना पंडरापाठ में एनटीपीसी के सहयोग से बनेगी तीरंदाजी अकादमी

रायपुर : जशपुर जिले के सन्ना पंडरापाठ में तीरंदाजी अकादमी स्थापित करने हेतु एनटीपीसी के साथ हुआ एग्रीमेंट 20 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत से बनेगा आधुनिक आर्चरी सेंटर छत्तीसगढ़ के युवाओं को तीरंदाजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मिलेगा अवसर – मुख्यमंत्री  साय रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज जशपुर जिले के बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में बगीचा विकासखंड अंतर्गत सन्ना पंडरापाठ में तीरंदाजी अकादमी स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन और एनटीपीसी के बीच एग्रीमेंट किया गया। एनटीपीसी द्वारा यह परियोजना कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत 20 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत से संचालित की जाएगी। इस अवसर पर कलेक्टर  रोहित व्यास और एनटीपीसी के अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन)  बिलाश मोहंती उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि एनटीपीसी द्वारा सीएसआर के माध्यम से आर्चरी सेंटर की स्थापना के लिए 20 करोड़ 53 लाख रुपए की राशि प्रदान की जा रही है, यह अत्यंत हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर क्षेत्र के युवाओं में तीरंदाजी के प्रति अपार संभावनाएं हैं, और इस सेंटर के आरंभ होने से उन्हें प्रशिक्षण और संसाधनों की बड़ी सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वर्ष 2036 में भारत ने ओलंपिक खेलों की मेज़बानी के लिए दावेदारी प्रस्तुत की है। हमारी कोशिश होगी कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में अधिकतम संख्या में शामिल हों और पदक जीतकर प्रदेश व देश का नाम रोशन करें। यह तभी संभव है जब हम आर्चरी सेंटर जैसे और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करें। ऐसे केंद्रों के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने घोषणा की है कि ओलंपिक में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को 3 करोड़ रुपए, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ रुपए और कांस्य पदक प्राप्त करने वालों को 1 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने यह भी कहा कि राज्य खेल अलंकरण समारोह को पुनः आयोजित किए गए हैं और इसके माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में ‘खेलो इंडिया’ के नए प्रशिक्षण केंद्र आरंभ किए गए हैं और जनजातीय क्षेत्रों में खेल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश प्राचीन काल से ही तीरंदाजी में अग्रणी रहा है। महाभारत और रामायण जैसे हमारे पवित्र ग्रंथों के नायक भी इस विधा में पारंगत रहे हैं। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हमें आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मार्गदर्शन के माध्यम से नए आर्चर्स तैयार करने होंगे। उल्लेखनीय है कि सन्ना पंडरापाठ में 10.27 एकड़ भूमि में यह अकादमी स्थापित की जाएगी। यहां आउटडोर तीरंदाजी रेंज, खिलाड़ियों के लिए छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर, खिलाड़ियों की सुविधा हेतु भवन, जैविक खेती के लिए छायादार नर्सरी, पुस्तकालय, चिकित्सा केंद्र, कौशल विकास केंद्र, हर्बल वृक्षारोपण तथा प्रशिक्षण मैदान जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

सोने-चांदी की चमक फीकी: रिकॉर्ड स्तर से कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज

इंदौर  ग्‍लोबल संकेतों के कारण सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट जारी है. MCX पर कल अचानक सोने-चांदी के भाव में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी. सोना 3000 रुपये से ज्‍यादा तो वहीं सिल्‍वर के रेट में भी 3000 रुपये की गिरावट आई थी. यह गिरावट वैश्विक बाजारों में कमजोरी के चलते हुआ. वहीं अमेरिका और चीन के बीच व्यापार तनाव कम होने की उम्मीद और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण भी इन धातुओं के दाम में भारी गिरावट है.  MCX पर कीमतों में गिरावट मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना 0.7% की गिरावट के साथ 1,20,106 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला. चांदी भी 0.69% की गिरावट के साथ 1,42,366 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुली. बाजार बंद होने के समय सोना 2.06% की गिरावट के साथ 1,18,461 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी 1.36% की गिरावट के साथ 1,41,424 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई. आज सोने और चांदी के भाव में मामूली तेजी देखी जा रही है. रिकॉर्ड हाई से इतना सस्‍ता हुआ सोना-चांदी MCX के मुताबिक, सोने का रिकॉर्ड हाई लेवल 1.32 लाख रुपये से ज्‍यादा का है, जो अब घटकर 1.18 रुपये आ चुका है. ऐसे में देखा जाए तो रिकॉर्ड हाई से सोने की कीमतों में 13 हजार रुपये से ज्‍यादा की गिरावट आई है. वहीं चांदी अपने रिकॉर्ड हाई 1.70 लाख प्रति किलो से घटकर 1.41 लाख रुपये प्रति किलो आ चुकी है. ऐसे में देखा जाए तो चांदी के भाव में रिकॉर्ड हाई से करीब 29 हजार रुपये की गिरावट आई है. क्‍यों गिर रहा सोने-चांदी का भाव?  यह गिरावट दो महीने की मज़बूत तेजी के बाद आई है और व्यापारी मुनाफावसूली के कारण है. मेहता इक्विटीज़ लिमिटेड के उपाध्यक्ष (कमोडिटीज़) राहुल कलंत्री ने कहा कि दो महीने की मज़बूत तेजी के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर भारी बिकवाली का दबाव रहा क्योंकि दोनों मेटल्‍स प्रमुख मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे गिर गईं. सोना 4,000 डॉलर और चांदी 47 डॉलर प्रति औंस पर आ चुकी है. यह गिरावट मज़बूत डॉलर सूचकांक और चीन व भारत के साथ अमेरिकी व्यापार वार्ता को लेकर नए सिरे से आशावाद के कारण हुई है. एक्‍सपर्ट ने कहा कि गाजा शांति वार्ता में तेजी से बदलते भू राजनीतिक चिंताएं भी कम हुई हैं, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग में कमी आई है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कमजोर रुपया निचले स्‍तरों पर सर्राफा कीमतों को कुछ सहारा दे रहा है. कलांत्री ने कहा कि ग्‍लोबल स्‍तर पर सोने को 3,940-3,905 डॉलर के आसपास सपोर्ट मिला है, जबकि रेस‍िस्‍टेंस 4,055-4,100 डॉलर के आसपास है.  केंद्रीय बैंकों पर नजर  निवेशक की नजर केंद्रीय बैंकों के रेट कटौती को लेकर है. हाल ही में आए नरम महंगाई के आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की कटौती की घोषणा की उम्मीद है, जबकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक और बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौजूदा नीतियों को बरकरार रखने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो सोने-चांदी के भाव में और भी गिरावट आ सकती है.  शॉर्ट टर्म में अभी और गिरावट के संकेत एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के सीईओ दर्शन देसाई ने कहा कि निकट भविष्य का रुझान इस बात पर निर्भर करता है कि व्यापार वार्ता और नीतिगत घोषणाएं किस प्रकार सामने आती हैं. उन्‍होंने कहा कि संभावित अमेरिका-चीन व्‍यापार समझौते और मजबूत अमेरिकी डॉलर को लेकर आशावाद के बीच सुरक्षित निवेश की मांग कमजोर होने से सोने की कीमतों में गिरावट जारी है. उन्‍होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है. आगे कहा कि अगर फेडरल रिजर्व अपेक्षा से कम ब्‍याज दरों में कटौती का संकेत देता है तो इससे सोने की कीमतों पर और ज्‍यादा दबाव पड़ सकता है.