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रायपुर में अंतर-विश्वविद्यालय उत्सव का आगाज़, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया उद्घाटन

रायपुर : उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने अंतर-विश्वविद्यालय उत्सव का किया शुभारंभ एचएनएलयू में कोलोसस और आईएमयूएनसी का आयोजन, देशभर के 65 विश्वविद्यालयों के 500 युवा कर रहे हिस्सेदारी विभिन्न खेलों, साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन मंथन, कूटनीति और वैश्विक समस्याओं के समाधान में भागीदारी के लिए प्रेरित करने अंतरराष्ट्रीय मॉडल संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का भी आयोजन रायपुर उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने आज नवा रायपुर स्थित हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU) में अंतर-विश्वविद्यालय उत्सव एचएनएलयू कोलोसस और आईएमयूएनसी-2025 (HNLU Colossus and IMUNC-2025) का शुभारंभ किया। 10 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में देशभर के 65 विधि विश्वविद्यालयों के 500 युवा हिस्सेदारी कर रहे हैं। विधि की पढ़ाई कर रहे देश के अनेक शहरों से नवा रायपुर में जुटे युवा विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं तथा साहित्यिक व सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी करेंगे। वे मंथन, कूटनीति और वैश्विक समस्याओं के समाधान में भागीदारी के लिए विधि के छात्र-छात्राओं को प्रेरित करने आयोजित अंतरराष्ट्रीय मॉडल संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (International Model United Nations Conference) में भी हिस्सेदारी करेंगे।  साव ने मशाल जलाकर कोलोसस और आईएमयूएनसी का उद्घाटन करने के साथ ही खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी शुभारंभ किया।  उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने शुभारंभ समारोह में देशभर के विधि छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ माता कौशल्या की धरती और भगवान राम का ननिहाल है। यहां की धरती बहुत खूबसूरत और ऐतिहासिक है। सभी कालों में छत्तीसगढ़ का उल्लेख मिलता है। यहां की उर्वरा, वन और खनिज संपदा से भरी धरती में कोयला से लेकर हीरा तक विद्यमान हैं। यहां के जंगल बहुत सुंदर और विविधताओं से भरे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप लोग बड़े सपने लेकर विधि की पढ़ाई कर रहे हैं। हमारे शरीर और मन की क्षमताएं असीम हैं। आज शिखर पर पहुंचे लोग भी कभी आपके और हमारे जैसे साधारण लोग थे।   साव ने कहा कि हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई है। कुछ ही वर्षों में देश में अच्छी प्रतिष्ठा अर्जित की है। उन्होंने विद्यार्थियों के सामने पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की मिसाल रखते हुए कहा कि जीवन में असफलताओं से घबराना नहीं है। ऊर्जा, आत्मविश्वास, मेहनत और समर्पण से लक्ष्य की ओर बढ़ना है। आपके सामने सफलता का खुला आकाश है। आप दुनिया की हर ऊंचाई हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि तीन दिनों का यह एचएलएनयू कोलोसस आप लोगों की क्षमता बढ़ाने, सीखने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अच्छा अवसर है। इसका भरपूर लाभ उठाएं। आप लोग सफलता के सर्वोच्च पायदान पर पहुंचे, ऐसी मैं कामना करता हूं। उद्घाटन समारोह के विशेष अतिथि एन.एच. गोयल वर्ल्ड स्कूल, रायपुर में परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स के विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष चक्रवर्ती ने युवाओं से कहा कि आप लोग लोक संगीत को संरक्षित करने का काम करें। हमें अपनी मिट्टी की खूशबू को भूलना नहीं है। उन्होंने कहा कि आप लोग लगन, नियमित अभ्यास और परिश्रम से अपनी विधाओं में विशेषज्ञता हासिल करें। अपनी विधा के साथ ही सभी विधाओं का सम्मान करें। उन्होंने विभिन्न स्पर्धाओं में भागीदारी के लिए नवा रायपुर पहुंचे देशभर के विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन ने कहा कि एचएनएलयू कोलोसस पिछले कुछ वर्षों से देश का प्रतिष्ठित आयोजन बन गया है। अगले तीन तीनों में यहां संस्कृति, साहित्य और खेलों का वृहद संगम देखने को मिलेगा। इस आयोजन ने हमारे पूरे परिसर को बेहद जीवंत और गौरवशाली बना दिया है। रजिस्ट्रार डॉ. दीपक कुमार वास्तव, फैकल्टी कन्वीनर डॉ. अंकित सिंह और छात्र कल्याण के अधिष्ठाता डॉ. अविनाश सामल ने भी शुभारंभ समारोह को संबोधित किया। एचएलएनयू के प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं के साथ ही कोलोसस में भाग लेने आए अलग-अलग राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में इस दौरान मौजूद थे। विविध प्रतियोगिताओं के माध्यम से कानून के छात्र बिखेरेंगे अपने हुनर का जादू देश के विभिन्न राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों में कानून की पढ़ाई कर रहे युवा विविध प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपने हुनर का जादू बिखेरेंगे। एचएनएलयू के इस तीन दिवसीय प्रतिष्ठित आयोजन में विद्यार्थी अपनी कला तथा बौद्धिक व खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। वे इस दौरान क्रिकेट, फुटबॉल, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल और एथलेटिक्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन से अपनी चमक बिखेरेंगे। एकल व समूह गायन, नृत्य प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटक और मंचीय नाटक जैसे विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में वे अपनी कलात्मक प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाएंगे। प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को वाद-विवाद और ओपन माइक सत्रों के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति, वक्तृत्व कला तथा काव्यात्मक प्रतिभा के प्रदर्शन का भी मौका मिलेगा।

दिल्ली टेस्ट :जायसवाल दोहरे शतक से चूके, कप्तान गिल ने फिर दिखाया क्लास

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम ने दिल्ली में जारी दूसरे टेस्ट में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. भारत और वेस्टइंडीज के बीच जारी आखिरी टेस्ट मैच का आज दूसरा दिन है. यशस्वी जायसवाल की नजरें डबल सेंचुरी पर होंगी वहीं कप्तान शुभमन गिल भी फिरोजशाह कोटला ग्राउंड पर बड़ी पारी खेलने की फिराक में होंगे. दिल्ली टेस्ट के पहले दिन जायसवाल ने 150 प्लस का स्कोर बनाया वहीं साई सुदर्शन शतक से चूक गए. वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली टेस्ट मैच में भारतीय टीम के युवा सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल से दोहरे शतक की उम्मीद थी, लेकिन वो रन-आउट होकर पवेलियन लौटे. यशस्वी ने 258 गेंदों का सामना करते हुए 175 रन बनाए, जिसमें 22 चौके शामिल रहे. यशस्वी के टेस्ट करियर का ये सातवां शतक रहा. यशस्वी जायसवाल साथी बल्लेबाज और टीम के कप्तान शुभमन गिल के साथ तालमेल में कमी के चलते रन-आउट हुए. यह वाकया भारतीय पारी के 92वें ओवर में हुआ. उस ओवर में तेज गेंदबाज जेडन सील्स ने दूसरी गेंद फुल-टॉस डाली, जिसे यशस्वी ने मिड-ऑफ की ओर खेला. यशस्वी ने सिंगल लेने की कोशिश की, लेकिन वहां रन नहीं था. शुभमन गिल मुड़े और उन्होंने रन लेने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.   यशस्वी जायसवाल ने देरी से महसूस किया कि शुभमन गिल रन के लिए भाग नहीं रहे हैं. ऐसे में यशस्वी ने क्रीज में वापस लौटने की कोशिश की, जिसमें वो कामयाब नहीं हो सके. तेजनारायण चंद्रपॉल का थ्रो कीपर एंड पर आया और विकेटकीपर टेविन इमलाच ने स्टंप्स बिखेर दिए. यशस्वी की गलती और जल्दबाजी के चलते भारत ने तीसरा विकेट खोया. रन-आउट होने के बाद यशस्वी जायसवाल काफी निराश दिखे. वो टीम के कप्तान शुभमन गिल से कुछ बातचीत करते भी नजर आए. यशस्वी का निराश होना स्वाभाविक था क्योंकि उनके पास दोहरा शतक बनाने का शानदार मौका था. पिच से गेंदबाजों को मदद नहीं मिल रही थी, ऐसे में बैटिंग करना आसान था. रन आउट होने वाले भारतीय बल्लेबाजों में बेस्ट स्कोर (टेस्ट क्रिकेट) 218 संजय मांजरेकर vs पाकिस्तान, लाहौर 1989 217 राहुल द्रविड़ vs इंग्लैंड, द ओवल, 2002 180 राहुल द्रविड़ vs ऑस्ट्रेलिया कोलकाता, 2001 175 यशस्वी जायसवाल vs वेस्टइंडीज, दिल्ली, 2025 155 विजय हजारे vs इंग्लैंड, मुंबई, 1951 144 राहुल द्रविड़ vs श्रीलंका, कानपुर, 2009 यशस्वी जायसवाल ने भारतीय टीम के लिए अब तक 26 टेस्ट मैच खेले हैं. इस दौरान उन्होंने 48 पारियों में 52.60 की औसत से 2420 रन बनाए हैं. 23 साल के यशस्वी ने टेस्ट क्रिकेट में 7 शतक और 12 अर्धशतक लगाए हैं. यशस्वी ने टेस्ट क्रिकेट में 299 चौके और 43 छक्के जड़े हैं. भारत ने लंच ब्रेक पर बनाए 4 विकेट पर 427 रन  भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी दूसरे टेस्ट मैच की दूसरी पारी में दूसरे दिन लंच के समय 4 विकेट पर 427 रन बना लिए हैं. शुभमन गिल 75 रन बनाकर नाबाद हैं. दूसरे दिन भारत ने लंच ब्रेक तक 2 विकेट गंवाए.  नितीश रेड्डी 43 रन बनाकर आउट, भारत का चौथा विकेट गिरा  भारत ने नितीश रेड्डी के तौर पर अपना चौथा विकेट गंंवा दिया. नितीश 54 गेंदों पर 43 रन बनाकर आउट हुए. उन्हें जोमेल वॉरिकन ने जेडन सील्स के हाथों कैच कराया. नितीश ने चार चौके और दो छक्के जड़े. भारत का स्कोर 109 ओवर में 4 विकेट पर 416 रन हो चुका है.  

बिहार की सियासत में हलचल: RJD के दो विधायक थामेंगे कमल का दामन

पटना  बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले हलचल तेज हो गई है। कैमूर जिले से दो विधायकों, भभुआ से भरत बिंद और मोहनियां से संगीता कुमारी ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में नई सरगर्मी पैदा कर दी है। दोनों नेता फिलहाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) में हैं, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर जीत दर्ज की थी। सूत्रों के मुताबिक, बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव ने दोनों विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही, विधानसभा के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कहा जा रहा है कि भरत बिंद और संगीता कुमारी दोनों ही BJP के टिकट पर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।   RJD से BJP की ओर सफर भरत बिंद और संगीता कुमारी ने 2020 के चुनाव में RJD के टिकट पर जीत हासिल कर विधानसभा पहुंचे थे। दोनों ने बाद में पार्टी से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। इस कदम से नाराज़ RJD नेता तेजस्वी यादव ने उस समय विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर दोनों की सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, तब कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। अब दोनों के औपचारिक इस्तीफे ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। BJP में टिकट की जंग तेज राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भरत बिंद और संगीता कुमारी के इस्तीफे BJP के लिए संगठन विस्तार का अवसर हैं। दोनों नेता अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत जनाधार रखते हैं और भाजपा के टिकट पर आगामी चुनाव लड़ने के लिए प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। कैमूर और आस-पास के इलाकों में भाजपा की रणनीति के तहत इन नेताओं का इस्तीफा एक सोचा-समझा कदम माना जा रहा है। कांग्रेस विधायक का भी इस्तीफा वहीं, चेनारी विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुरारी गौतम ने भी इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि वे भी भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। यह कदम न केवल कांग्रेस के लिए झटका है, बल्कि यह भाजपा की रणनीति में एक और अहम जोड़ मानी जा रही है। महागठबंधन को लगा बड़ा झटका महागठबंधन (RJD-कांग्रेस-लेफ्ट) के लिए ये इस्तीफे किसी बड़े झटके से कम नहीं हैं। तीनों विधायक जिन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, वे RJD और कांग्रेस दोनों के परंपरागत वोटबैंक वाले क्षेत्र रहे हैं। अब इन सीटों पर भाजपा की पकड़ मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। तेज होते समीकरण बिहार में चुनावी माहौल अब पूरी तरह से गरमा गया है। टिकट वितरण को लेकर सभी दलों में जोरदार खींचतान चल रही है। RJD, कांग्रेस और JDU जहां अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में हैं, वहीं भाजपा लगातार विपक्षी दलों से प्रभावशाली चेहरों को जोड़कर अपनी ताकत बढ़ा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इन इस्तीफों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि आने वाले महीनों में बिहार की राजनीति में और भी बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल, टिकट के दावेदारों की बढ़ती संख्या और गठबंधन के अंदर की खींचतान बिहार की राजनीति को और दिलचस्प बना रही है।

CSK की रणनीति बदलने की तैयारी, ये 5 खिलाड़ी हो सकते हैं रिलीज़ — IPL 2026 तकटी अपडेट

चेन्नई  इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2025 में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था. पांच बार की आईपीएल चैम्पियन टीम सीएसके ने 14 में से केवल 4 मुकाबले जीते थे और वो अंकतालिका में आखिरी स्थान पर रही थी. टीम मैनेजमेंट अब आईपीएल 2026 से पहले बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है. क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक चेन्नई सुपर किंग्स की टीम आईपीएल 2026 के लिए मिनी ऑक्शन से पहले पांच खिलाड़ियों को रिलीज कर सकती है. जिन खिलाड़ियों को टीम से बाहर किया जा सकता है- उनमें सैम करन (इंग्लैंड), डेवोन कॉन्वे (न्यूजीलैंड), दीपक हुड्डा, विजय शंकर और राहुल त्रिपाठी शामिल हैं. टीम के बेहद खराब प्रदर्शन के चलते इन खिलाड़ियों को रिलीज करने की नौबत आई है. आईपीएल 2025 में ऋतुराज गायकवाड़ की चोट ने भी चेन्नई सुपर किंग्स की मुश्किलों में इजाफा किया था. ऋतुराज के बाहर होने के बाद एमएस धोनी ने टीम की कमान संभाली, लेकिन वो भी टीम की किस्मत नहीं बदल सके. अनुभवी खिलाड़ियों पर भरोसा करने की रणनीति इस बार उलटी पड़ गई. इस मामले में फिसड्डी रही CSK टॉप ऑर्डर के खराब प्रदर्शन ने चेन्नई सुपर किंग्स की मुश्किलें काफी बढ़ाईं. डेवोन कॉन्वे, दीपक हुड्डा, विजय शंकर और राहुल त्रिपाठी का फॉर्म लगातार गिरता गया. आईपीएल 2025 में सीएसके के बल्लेबाजों ने 138.29 के स्ट्राइक रेट से 2315 रन बनाए, जो पिछले सीजन में किसी टीम का सबसे कम स्ट्राइक रेट था. इसके अलावा सीएसके ने पावरप्ले में सबसे कम रन (693) बनाए, साथ ही 29 विकेट गंवाए. टीम मैनेजमेंट अब युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताना चाहती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रेंचाइजी का इरादा स्क्वॉड को नए सिरे से बनाने का है ताकि टीम नई ऊर्जा के साथ अगले सीजन में वापसी कर सके. रविचंद्रन अश्विन के आईपीएल से रिटायरमेंट के बाद सीएसके को एक तरह से फायदा हुआ है. आर. अश्विन के रिटायरमेंट के चलते टीम के पर्स में 9.75 करोड़ रुपये आ चुके हैं. अब यदि सीएसके ऊपर बताए गए पांच खिलाड़ियों को रिलीज कर देती है, तो उसके पर्स में 25 करोड़ से अधिक की रकम रहेगी. सैम करन पर सीएसके ने काफी भरोसा जताया था, लेकिन वो अपनी पुरानी लय नहीं पकड़ सके. जबकि इंजरी से उबरने के बाद डेवोन कॉन्वे की बल्लेबाजी में भारी गिरावट आई.  भारतीय बल्लेबाजों दीपक हुड्डा, विजय शंकर और राहुल त्रिपाठी भी बल्ले से कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाए. आईपीएल 2026 के मिनी ऑक्शन के लिए सभी 10 टीमों को अपनी रिटेंशन लिस्ट 15 नवंबर तक फाइनल कर लेनी है. आईपीएल 2026 के लिए मिनी ऑक्शन 13 से 15 दिसंबर के बीच हो सकता है.

उज्जैन की 200 साल पुरानी तकिया मस्जिद हटाने पर इंदौर हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की

उज्जैन  उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल लोक परिसर की तकिया मस्जिद को हटाए जाने के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मस्जिद तोड़े जाने के खिलाफ दायर की गई अपील को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं की दलील याचिकाकर्ता मोहम्मद तैयब और कुछ अन्य लोगों ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि तकिया मस्जिद लगभग 200 साल पुरानी थी और इसकी जमीन वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उन्होंने कहा कि सरकार को इसे तोड़ने का कोई अधिकार नहीं था। याचिका में मस्जिद का पुनर्निर्माण कराने और इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग की गई थी। सरकारी पक्ष का जवाब शासन की ओर से पैरवी कर रहे वकील आनंद सोनी ने कोर्ट को बताया कि जमीन का अधिग्रहण पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन के बदले में संबंधित पक्ष को मुआवजा पहले ही दिया जा चुका है और अब यह भूमि पूर्ण रूप से सरकार के स्वामित्व में है। इसके अलावा, यह भी बताया गया कि वक्फ बोर्ड ने इस मामले को लेकर भोपाल स्थित वक्फ ट्रिब्यूनल में पहले से ही एक केस दायर कर रखा है। न्यायालय की टिप्पणी और फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के दावों को अपर्याप्त माना। कोर्ट ने कहा कि अपील करने वालों के पास मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग करने का कोई कानूनी आधार (हक) नहीं है। न्यायालय ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले का उल्लेख करते हुए कहा, "किसी भी व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार किसी विशेष स्थान से नहीं जुड़ा है। नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है।" इसी आधार पर, कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका को खारिज कर दिया। 

प्रॉपर्टी घोटालों पर लगाम: YEIDA को मिली 441 हेक्टेयर जमीन, 18 गांव होंगे नियंत्रण में

ग्रेटर नोएडा जेवर क्षेत्र में जमीन फर्जीवाड़े पर लगाम के लिए यीडा ने 3695 दाखिल खारिज यानी किसान से खरीदी गई जमीन को सरकारी दस्तावेजों में अपने नाम पर दर्ज कराया है। 18 गांवों की करीब 441 हेक्टेयर जमीन यीडा के नाम पर दर्ज की गई है। इससे जमीन पर बैंक से ऋण या किसी अन्य को बेचने के मामलों पर रोक लगेगी। यीडा नियोजित विकास के लिए किसानों से सहमति के आधार पर जमीन क्रय करता है या फिर जमीन अधिग्रहण कानून के तहत अधिग्रहण करना है। जमीन क्रय करने के बाद आमतौर पर सरकारी दस्तावेजों में जमीन यीडा के नाम दर्ज करने में लापरवाही बरती जाती है। इससे जमीन के फर्जीवाड़े को अंजाम देना आसान हो जाता है। यीडा के द्वारा खरीदी गई जमीन को दूसरे लोगों को बेच दिया जाता है। सरकारी दस्तावेज में यीडा का नाम दर्ज न होने के कारण क्रेता को जानकारी नहीं हो पाती है कि यह जमीन पहले ही यीडा खरीदकर भूमि स्वामी को मुआवजा दे चुका है। इसी तरह बैंक में जमीन को बंधक बनाकर ऋण लिया जाता है। यीडा जमीन पर भौतिक कब्जा लेकर जब उस पर परियोजना का काम शुरू करता है तब बैंक या क्रेता की और से आपत्ति दर्ज कराने पर फर्जीवाड़ा सामने आता है, लेकिन उस वक्त एफआईआर दर्ज कराने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता। जमीन को लेकर होने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने के लिए यीडा ने अधिसूचित 18 गांवों में क्रय की गई करीब 441 हे. जमीन को अपने नाम दर्ज कराया है। यीडा सीईओ राकेश कुमार सिंह का कहना है कि यह जमीन अभी तक 3695 भूमि स्वामियों के नाम पर दर्ज थी, उनके नाम हटाकर अब यीडा का नाम दर्ज हो गया है। इससे सरकारी दस्तावेज दिखाकर फर्जीवाड़ा करना संभव नहीं होगा। क्रय विक्रय में पारदर्शिता रहेगी।  

त्रिकोणीय मुकाबला शुरू: बिहार-यूपी सीमा की 19 सीटों पर मायावती की एंट्री से बढ़ी राजनीतिक हलचल

पटना बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेजी से बढ़नी शुरू हो गई है। इसके साथ ही राजनीतिक गलियारों में सीटों के समीकरण, हार-जीत, जिताऊ प्रत्याशी से लेकर बिहार की राजनीति में उत्तर प्रदेश के असर की चर्चा शुरू है। बिहार के कई विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जो उत्तर प्रदेश से सटे हैं, लिहाजा इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश की राजनीति का असर भी देखने को मिलता है। चंपारण, सिवान, रोहतास, बक्सर, गोपालगंज, और कैमूर जैसे क्षेत्र हैं जहां चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश की सियासी लहर का असर दिखता है। इन क्षेत्रों के करीब 19 विधानसभा क्षेत्र हैं जो यूपी से लगते हैं। इन इलाकों में साल 2020 में हुए विधानसभा चुनाव में आठ सीटों पर एनडीए, जबकि 10 सीटों पर महागठबंधन ने जीत दर्ज की थी। एक सीट चैनपुर पर बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार जमा खान ने जीत दर्ज कराई थी। हालांकि, जीतने के बाद वह जदयू में शामिल हो गए। अब एक बार फिर यहां चुनाव की तैयारी है।   एक ओर एनडीए के उम्मीदवार यहां से ताल ठोकने की तैयारी में हैं तो दूसरी ओर महागठबंधन के उम्मीदवार भी मैदान मारने को करीब-करीब तैयार हैं। इन दो प्रमुख गठबंधनों की राजनीतिक लड़ाई में अब यूपी की पार्टी बसपा भी किस्मत आजमाने उत्तर रही है। बसपा प्रमुख मायावती ने बीते दिनों यह घोषणा कर दी है कि उनकी पार्टी बिहार में अकेले सभी सीटों पर चुनाव मैदान में उतरेगी। उनकी पार्टी बिहार में किसी से गठबंधन नहीं करेगी। बसपा की इस घोषणा के बाद प्रदेश भाजपा भी उसकी काट की तैयारी में है। दूसरी ओर, महागठबंधन इस भरोसे में है कि बिहार की राजनीति में अन्य प्रदेश का प्रभाव बहुत असर नहीं डालने वाला। राजनीतिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बसपा को बिहार के अपने क्षेत्र में रोकने के लिए एनडीए ने सारा दारोमदार भाजपा के जिम्मे छोड़ा है। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा उपमुख्यमंत्री और बिहार चुनाव के सह प्रभारी केशव प्रसाद मौर्य और योगी कैबिनेट के मंत्री दारा सिंह चौहान को भी यहां उतार दिया गया है। दूसरी ओर बसपा ने अपने चिरपरिचित चेहरे आकाश आनंद को चुनावी रणनीति बनाने से लेकर जिताऊ उम्मीदवारों के चयन तक का जिम्मा सौंपा है। मायावती को लेकर भी चर्चा है कि वे बिहार में कुछ प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार को आ सकती हैं। कांग्रेस भी सीमावर्ती क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाने के लिए अपने कई राष्ट्रीय स्तर को मैदान में उतारेगी। दलों की इन तैयारियों को देखते हुए कहा जा सकता है बिहार-यूपी सीमा की सीटें तीन तरफा मुकाबले का अखाड़ा बन रही हैं। एनडीए अपनी सत्ता के भरोसे और संगठन के बूते मैदान में है तो महागठबंधन सामाजिक समीकरणों को संतुलित कर सत्ता की ओर बढ़ना चाहता है। वहीं, मायावती की बसपा तीसरे खिलाड़ी के रूप में अपने को स्थापित करने की कोशिश में जुटी है।  

सपा बनाम कांग्रेस: यूपी एमएलसी चुनाव में सीधी भिड़ंत, अजय राय की लिस्ट से बढ़ा सियासी रोमांच

लखनऊ  यूपी एमएलसी चुनाव में सपा और कांग्रेस आमने-सामने मैदान आ गए हैं। समाजवादी पार्टी के बाद शुक्रवार को कांग्रेस ने भी स्नातक और शिक्षक स्नातक विधानपरिषद सीट के लिए पांच प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने प्रत्याशियों के नामों का ऐलान करते हुए यह भी कहा कि यूपी की सभी 11 सीटों पर कांग्रेस अपने प्रत्याशी उतारेगी। इससे पहले गुरुवार को सपा ने भी पांच सीटों के लिए प्रत्याशियों का ऐलान किया था। यूपी में फरवरी में एमएलसी चुनाव संभावित है। वोटर लिस्ट पुनरीक्षण का कार्य शुरू हो चुका है। कांग्रेस ने मेरठ-सहारनपुर स्नातक विधानपरिषद सीट पर विक्रांत वशिष्ठ को टिकट दिया है। आगरा स्नातक विधानपरिषद सीट पर रघुराज सिंह पाल को उतारा है। इसी तरह लखनऊ स्नातक विधानपरिषद सीट पर डॉ0 देवमणि तिवारी को मौका दिया गया है। वाराणसी शिक्षक विधानपरिषद सीट पर संजय प्रियदर्शी और वाराणसी स्नातक विधानपरिषद सीट पर अरविंद सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाया गया है। अजय राय ने कहा कि कांग्रेस पार्टी युवाओं और शिक्षकों की आवाज को सदन में बुलंद करने के लिए आगामी विधानपरिषद चुनाव में सभी 11 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। प्रदेश कांग्रेस कार्यालय लखनऊ में एक कनेक्ट सेंटर स्थापित कर दिया गया है। प्रत्येक जिले में एक कोऑर्डिनेटर कमेटी बनाई जाएगी जो कनेक्ट सेंटर से जुड़ी रहेगी। सभी फ्रंटल, संगठनों को इसमें लगाया गया है। विधि, शिक्षक एवं चिकित्सा प्रकोष्ठ को इस चुनाव के लिए विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। कहा कि भाजपा सरकार में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, नयी भर्तियां नहीं निकल रही हैं। परीक्षा हो रही तो पेपर लीक हो जा रहे हैं नतीजन बेरोजगार युवा रोजगार न मिलने से अवसाद से ग्रसित हो जा रहे हैं। शिक्षक इस वर्तमान सरकार में सबसे ज्यादा परेशान हैं। न तो वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय दिया गया और न ही सेवा सुरक्षा। एडेड कॉलेजों के शिक्षकों की सेवा सुरक्षा भी भाजपा सरकार ने समाप्त कर दी है। पुरानी पेंशन नहीं दी जा रही है। शिक्षकों के पद रिक्त हैं यह सरकार शिक्षा सेवा चयन आयोग बनाकर केवल मजाक कर रही है। प्राइमरी से लेकर डिग्री तक के शिक्षकों की भर्ती के लिए बनाया गया यह आयोग एक भी भर्ती न करा पा रहा है। इसी सरकार में बनाई गई चेयरमैन इस्तीफा दे रही हैं। 2021 में निकले विज्ञापनों की अभी तक परीक्षा नहीं हो पा रही है। 5 बार परीक्षा की तिथि घोषित करने के बाद परीक्षा टाल दी गई है।  

बड़ी सौगात! पंजाब में पोर्टल रीलॉन्च से आया ₹29,480 करोड़ का निवेश और 67,672 नौकरियों का अवसर

चंडीगढ़ पंजाब में निवेश की बयार इन दिनों कुछ ऐसी चल रही है कि हर तरफ विकास और रोज़गार की बातें हो रही हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के प्रयासों से राज्य में औद्योगिक माहौल पूरी तरह बदल गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक पंजाब में ₹29,480 करोड़ का निवेश आ चुका है, जिससे 67,672 नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। यह आंकड़े साफ बताते हैं कि पंजाब अब निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। पिछले ढाई सालों में मान सरकार ने कुल मिलाकर ₹88,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश राज्य में लाया है, जो किसी भी सूरत में एक बड़ी उपलब्धि है। सरकारी प्रवक्ता ने दावा किया कि टाटा स्टील लिमिटेड ने ₹2,600 करोड़, सनातन पॉलीकॉट प्राइवेट लिमिटेड ने ₹1,600 करोड़, और अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड जैसी बड़ी कंपनियों ने पंजाब में निवेश किया है। इसके अलावा इंफोसिस ने भी मोहाली में अपने ऑपरेशन को बढ़ाने के लिए करीब ₹300 करोड़ के निवेश की घोषणा की है, जिससे 2,500 सीधी नौकरियां और 210 अप्रत्यक्ष नौकरियां पंजाबियों को मिलेंगी। यह सब मुख्यमंत्री भगवंत मान की दूरदर्शी नीतियों और उद्योग-समर्थक माहौल का नतीजा है। सरकार ने शुरू से ही यह तय किया था कि पंजाब को उद्योगों के लिए सबसे आसान और पारदर्शी राज्य बनाना है, और इसी दिशा में लगातार काम किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया कि निवेश प्रोत्साहन पोर्टल को नए सिरे से लॉन्च करना मान सरकार का एक बेहद अहम फैसला साबित हुआ है। इस पोर्टल के रीलॉन्च के बाद प्रोजेक्ट आकर्षण में 167% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई है। पहले निवेशकों को अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग में महीनों तक घूमती रहती थीं। लेकिन अब यह पोर्टल एक तरह से वन-स्टॉप सॉल्यूशन बन गया है, जहां निवेशक घर बैठे ऑनलाइन सभी ज़रूरी अनुमति और मंज़ूरी ले सकते हैं। इससे समय की बचत तो हुई ही है, साथ ही पारदर्शिता भी बढ़ी है। अब कोई फाइल अटकती नहीं है, और निवेशकों को पता रहता है कि उनके प्रोजेक्ट की क्या स्थिति है। प्रवक्ता ने बताया कि सरकार ने सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम लागू किया है, जिसके तहत सभी विभागों की मंज़ूरी एक ही जगह से मिल जाती है। इसके अलावा औद्योगिक भूमि बैंक भी बनाया गया है, ताकि निवेशकों को ज़मीन ढूंढने में परेशानी न हो। राज्य सरकार ने टैक्स में छूट, सब्सिडी, और आसान लाइसेंसिंग की व्यवस्था भी की है। खासकर छोटे और मझोले उद्योगों (MSME) के लिए कई तरह की सुविधाएं दी गई है, जिससे वे भी बिना किसी रुकावट के अपना काम शुरू कर सके। यह सारे कदम मान सरकार की उस सोच को दर्शाते है, जिसमें लालफीताशाही को खत्म करके काम को तेज़ी से आगे बढ़ाना है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब ने सिर्फ ढाई साल में ₹86,541 करोड़ से ज़्यादा का निवेश आकर्षित किया है, जो राज्य की आर्थिक यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर है। यह निवेश अलग-अलग सेक्टर में फैला हुआ है – मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और सॉफ्टवेयर, कृषि-आधारित उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, और पर्यटन। यह विविधता यह सुनिश्चित करती है कि हर तरह के कौशल वाले युवाओं को रोज़गार मिले। शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों और गांवों में भी उद्योग लग रहे है, जिससे पलायन रुक रहा है और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के अवसर बढ़ रहे है। मार्च 2022 से अब तक पंजाब को ₹1.14 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले है, जिससे 4.5 लाख से ज़्यादा रोज़गार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि पंजाब अब वैश्विक निवेशकों के लिए पसंदीदा गंतव्य बन गया है, और जापान, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन जैसे देशों की कंपनियां यहां निवेश करने में दिलचस्पी दिखा रही है। यह सब तभी संभव हुआ है जब सरकार ने ईमानदारी से काम किया है, भ्रष्टाचार पर लगाम लगाई है, और निवेशकों को भरोसा दिलाया है कि उनका पैसा सुरक्षित है और उन्हें सभी तरह की सुविधाएं मिलेंगी। पंजाब सरकार ने हाल ही में 24 सलाहकार पैनल भी बनाए है, जो अलग-अलग सेक्टर के विशेषज्ञों से मिलकर बने है। इन पैनलों का काम है उद्योगों को और ज़्यादा बढ़ावा देना, नई नीतियां बनाना, और निवेशकों की समस्याओं को तुरंत हल करना। इस तरह की पहल से यह साफ होता है कि सरकार सिर्फ घोषणाएं नहीं कर रही, बल्कि ज़मीनी स्तर पर काम भी कर रही है। उद्योगपतियों और व्यापारियों ने भी मान सरकार की तारीफ की है और कहा है कि पंजाब में अब काम करना बहुत आसान हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कई बार यह कहा है कि पंजाब के युवाओं को रोज़गार देना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसीलिए हर निवेश प्रस्ताव को मंज़ूरी देते समय यह देखा जाता है कि उससे कितनी नौकरियां पैदा होंगी। वर्तमान वित्तीय वर्ष में आए ₹29,480 करोड़ के निवेश से 67,672 नौकरियां मिलने वाली है, जो पंजाब के हज़ारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है। यह नौकरियां सिर्फ एक शहर या एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में फैली हुई है। इससे हर ज़िले, हर तहसील के युवाओं को फायदा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पंजाब में निवेश की यही रफ्तार बनी रही, तो अगले दो-तीन साल में राज्य की आर्थिक तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। पंजाब न सिर्फ रोज़गार के मामले में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि देश के औद्योगिक नक्शे पर भी एक अहम जगह बनाएगा। मान सरकार ने जो नींव रखी है, वह मज़बूत है। अब ज़रूरत सिर्फ इस बात की है कि इसी तरह से काम जारी रहे, नीतियां लागू होती रहें, और निवेशकों का भरोसा बना रहे। 

31 अक्टूबर तक चलेगा विदेश मंत्रालय का स्पेशल क्लीनिंग कैंपेन 5.0, जानें क्या-क्या होगा शामिल

नई दिल्ली भारतीय विदेश मंत्रालय ने 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत 'स्पेशल क्लीनिंग कैंपेन 5.0' शुरू किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि यह अभियान 31 अक्टूबर तक जारी रहेगा। विदेश मंत्रालय ने प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि 4 से 31 अक्टूबर 2025 तक 'स्पेशल क्लीनिंग कैंपेन 5.0' शुरू किया गया है, जो स्वच्छता ही सेवा के तहत एक विशेष सफाई अभियान है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कार्यालयों में स्वच्छ और स्वस्थ कार्य वातावरण प्रदान करना है। अभियान के दौरान मंत्रालय कार्यालयों में सफाई की गुणवत्ता को बेहतर बनाने, कचरे के सही निपटान और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही सार्वजनिक शिकायतों के त्वरित निपटान और कार्य पेंडेंसी कम करने पर भी जोर रहेगा। इससे पहले, मंत्रालय ने 'स्वच्छता ही सेवा 2025' अभियान सफलतापूर्वक आयोजित किया, जो 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मंत्रालय के सभी कार्यालयों, विदेश मिशनों, पोस्टों और क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालयों में चलाया गया। इस दौरान 2 अक्टूबर को गांधी जयंती और 'स्वच्छ भारत दिवस' भी मनाया गया। विदेश मंत्रालय ने 'स्वच्छता ही सेवा 2025' के पांच मुख्य क्षेत्रों पर फोकस किया, जिसमें स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों का परिवर्तन, स्वच्छ सार्वजनिक स्थान, सफाईमित्र सुरक्षा शिविर, क्लीन ग्रीन उत्सव और जागरूकता अभियान शामिल रहे। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस पहल का नेतृत्व किया और 25 सितंबर को सुषमा स्वराज भवन, नई दिल्ली में 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' श्रमदान कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस अभियान के तहत मंत्रालय ने पहले ही स्वास्थ्य शिविर, 25 से अधिक सफाई मित्र सुरक्षा शिविर, 276 स्वच्छता लक्ष्य इकाइयों की सफाई, स्वच्छता रन, साइक्लोथॉन, पेंटिंग व निबंध प्रतियोगिताएं, मानव श्रृंखला, घर-घर जागरूकता अभियान, वेस्ट टू आर्ट इंस्टॉलेशन, सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान और बड़े पैमाने पर सफाई कार्य किए। मंत्रालय ने साफ-सफाई के प्रति समर्पित इस पहल को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया है ताकि हर कार्यालय और सार्वजनिक क्षेत्र में स्वच्छता कायम रहे।