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लखनऊ में क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की बाग प्रिंट कला का प्रदर्शन

भोपाल  उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को लखनऊ की ऐतिहासिक सफेद बारादरी में “क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी” का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक और क्राफ्टरूट की संस्थापक श्रीमती अनारबेन पटेल भी उपस्थित रहीं। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने प्रदर्शनी के भ्रमण के दौरान मध्यप्रदेश के धार जिले के बाग गाँव से आए प्रसिद्ध बाग प्रिंट शिल्पकार मोहम्मद आरिफ खत्री एवं मोहम्मद अली खत्री से पारंपरिक कला के बारे में विस्तार से जानकारी भी ली। राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बाग प्रिंट की जटिल प्रक्रिया को बड़े ध्यान से समझा। श्री खत्री ने उन्हें बताया कि बाग प्रिंट एक प्राचीन हस्तकला है, जो पूरी तरह हाथ से की जाती है। इसमें कपास और रेशम के कपड़ों पर लकड़ी के ब्लॉकों से छपाई की जाती है, और प्राकृतिक रंगों, पौधों, फूलों और जड़ों से बने रंगों का उपयोग होता है। बाग क्षेत्र की विशिष्ट नदी का पानी इन रंगों को और गहराई तथा चमक प्रदान करता है। राज्यपाल श्रीमती पटेल ने कहा कि इस तरह की पारंपरिक कलाएँ भारत की असली पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि युवा पीढ़ी को इन कलाओं से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।  

डॉ. यादव के फैसलों से खुश किसान, कहा—सरकार ने हमारी सुनी आवाज़

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का रतलाम आगमन पर बंजली हवाईपट्टी पर जिले के किसानो ने भावांतर योजना लागू किए जाने और क्षतिग्रस्त फसलों के लिए राहत राशि दिए जाने पर स्वागत कर आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को किसानों ने ही बताया कि ग्राम गणेशगंज तहसील पिपलोदा के श्री दशरथ पिता परमानन्द को 1,20,000 रूपए, ग्राम कमलाखेड़ा तहसील पिपलोदार के श्री बलबहादुर सिंह पिता रतन सिहं को 99,798 रूपए, ग्राम सेजावता तहसील रतलाम शहर के श्री अरूण पिता प्रहलादचंद्र पुरोहित को 42,230 रूपए, ग्राम कालुखेड़ी तहसील रतलाम शहर के श्री बसंतीलाल पिता शंकरलाल को 35,040 रूपए, ग्राम कमालिया तहसील जावरा के श्री फूलचंद पिता अंकारलाल को 41,814 रूपए एवं ग्राम टोलखेड़ी तहसील जावरा के श्री अमृत पिता भंवरलाल चौधरी को 38,000 रूपए की राहत राशि बैंक खाते में प्राप्त हुई है। किसानो ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर राहत राशि मिलने से संकट की घड़ी में आर्थिक संबल मिला है। मुख्यमंत्री ने किसानो से कहा कि आप चिंता नहीं करें, सरकार हर मुसीबत की घड़ी में किसानों के साथ है। 

राज्यपाल पटेल ने कहा- गौरव दिवस का आयोजन सभी जिलों में हो

भोपाल  राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जनजातीय कल्याण के लिये किये जा रहे कार्यों की जानकारी समुदाय को उपलब्ध कराने के प्रयासों पर विशेष बल दिया जाये। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के सभी जिलों में गौरव दिवस का आयोजन किया जाए। राज्यपाल श्री पटेल शुक्रवार को राजभवन में गृह, जेल, वन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में चर्चा कर रहे थे। बैठक का आयोजन 2 सत्रों में किया गया था। प्रथम सत्र में राज्यपाल ने गृह, जेल और वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की। द्वितीय सत्र में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना और प्रधानमंत्री जन-मन योजना की समीक्षा की। जनजातीय गौरव दिवस पर भी रिहा होंगे बंदी राज्यपाल श्री पटेल ने अच्छा आचरण करने पर बंदियों को रिहा करने के वर्ष में नियत 4 अवसरों में देश में पहली बार 15 नवम्बर जनजातीय गौरव दिवस को शामिल करने की राज्य सरकार की पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जेल विभाग मुक्त बंदियों के लिये सामाजिक स्वीकार्यता और आश्रित परिवारों के पुनर्वास प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिये समाज कल्याण विभाग के साथ दायित्वों की नीतिगत व्यवस्था तैयार करें। उन्होंने अनुसूचित जाति, जनजाति आकस्मिकता राहत योजना के प्रावधानों पर तत्काल कार्यवाही की व्यवस्था की निरंतर मॉनिटरिंग कर फास्ट-ट्रेक प्रक्रिया में प्रकरणों के निराकरण के प्रयास करने के लिये कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री जन-मन आवास योजना के घरों में प्रकाश आदि की व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान देने के लिये कहा है। राज्यपाल श्री पटेल को बताया गया कि वर्ष 2025 के दौरान 26 जनवरी गणतंत्र दिवस, 14 अप्रैल डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस और 2 अक्टूबर के अवसर पर कुल 523 बंदियों को रिहा किया है। राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर 29 बंदियों जिसमें 8 अनुसूचित जनजाति वर्ग के बंदियों को रिहा किया जाना प्रस्तावित है। अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध चिन्हित प्रकरणों को वापस लेने के लिये शासन द्वारा तय किया गया है कि जिन प्रकरणों में अतिक्रमण हटा लिया गया है, वह सभी मामले वापस ले लिये जायेंगे। अनुसूचित जनजातीय वर्ग के व्यक्तियों के विरूद्ध 3 मार्च 2009 की स्थिति में वन अपराध के पंजीबद्ध कुल 87 हजार 549 प्रकरण शासन द्वारा वापस लिये गये हैं। विगत 10 वर्षों में दर्ज 35 हजार 807 प्रकरणों में से 28 हजार 645 निराकृत हो गये हैं। न्यायालय में 4 हजार 396 प्रकरण विचाराधीन हैं। बैठक में बताया गया कि पेसा एक्ट के तहत गठित 492 ग्राम सभाओं के साथ ही 735 ग्राम सभा के लिये नये आवेदन प्राप्त हुए हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, महानिदेशक जेल श्री वरूण कपूर, विशेष महानिदेशक जेल श्री जी. अखितो सेमा और वन, गृह, जेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।  

इतने नॉमिनेशन के बावजूद ट्रंप क्यों रहे नोबेल शांति पुरस्कार से वंचित?

वॉशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला है। इस साल का सम्मान मारिया कोरिना नाचाडो को मिला है, जो वेनेजुएला की विपक्षी नेता हैं। अब उनका नाम डोनाल्ड ट्रंप के साथ लिया जा रहा है कि आखिर वह कैसे नोबेल सम्मान पा गईं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति चूक गए। डोनाल्ड ट्रंप के लिए लगातार लॉबिंग हो रही थी। पाकिस्तान की ओर से उनके नाम का नॉमिनेशन हुआ था। इसके अलावा नेतन्याहू समेत कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने इसकी पहल की थी। फिर भी उन्हें सम्मान नहीं मिला। मीडिया की सुर्खियां भी यही हैं कि डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति सम्मान नहीं मिला है। इसकी वजह यह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने इसी साल 19 जनवरी को कमान संभाली थी। नोबेल पुरस्कार के लिए एंट्री 31 जनवरी तक ही मांगी गई थीं। उसके बाद भेजी गईं एंट्रीज पर विचार नहीं किया जाता है। डोनाल्ड ट्रंप के केस में ऐसा ही हुआ है। उन्होंने 19 जनवरी को कमान संभाली थी और महज 12 दिन बाद नामांकन की प्रक्रिया बंद हो गई थी। डोनाल्ड ट्रंप जिन 8 जंगों को रुकवाने का श्रेय लेते हुए नोबेल पुरस्कार की मांग रख रहे हैं, वे 31 जनवरी के बाद की उपलब्धियां हैं। ऐसे में अब उनके नाम पर 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए विचार हो सकता है, लेकिन इस साल के लिए वह पात्र ही नहीं थे। इसलिए उनके नाम पर कमेटी ने विचार तक नहीं किया। डोनाल्ड ट्रंप के माम दावों के बाद भी उनके नाम पर विचार ना किए जाने को लेकर जब नोबेल कमेटी के चेयरमैन जॉर्गन वाटने फ्रिडनिस से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसका फैसला तो काम के आधार पर किया जाता है। इसके अलावा अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार निर्णय होता है। उन्होंने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार के लंबे इतिहास में कभी भी इस समिति ने मीडिया अटेंशन या फिर प्रचार नहीं देखा। हमें हर साल हजारों पत्र मिलते हैं और दावा किया जाता है कि वे कौन-कौन सी उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं, जिसके लिए उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। फिर भी हमारी मान्यता यही है कि किसी भी एंट्री पर कामकाज के आधार पर ही विचार करेंगे। ऐसा ही होता भी है। नोबेल समिति के जानकारों का कहना है कि हम इस बात को प्राथमिकता देते हैं कि दावेदार के प्रयास कैसे थे और उनमें क्या निरंतरता थी। हेनरी जैकसन सोसायटी के रिसर्च फेलो और इतिहासकार थिओ जेनोउ ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के जिन प्रयासों की बात की जा रही है, उनका असर ज्यादा समय तक नहीं रहने वाला है। उन्होंने कहा कि किसी समस्या को समाप्त करना और उसे कुछ समय के लिए रोकना अलग-अलग चीजें हैं। शॉर्ट टर्म उपायों के आधार पर नोबेल समिति में पुरस्कार के लिए विचार नहीं किया जाता।  

मारिया ने झेला अंधकार, लोकतंत्र की रोशनी के लिए जीता नोबेल शांति पुरस्कार

कराकास  आर्कटिक से आने वाली नॉर्वे की सर्द हवाओं के बीच नॉर्वेजियन नोबेल समिति की घोषणा ने दुनिया भर में एक नई उम्मीद की किरण जलाई है। वेनेजुएला की विपक्षी नेता को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है। नोबेल कमिटी के चेयरमैन जॉर्गेन वाटने फ्राइडनेस ने मंच पर खड़े होकर कहा, "यह पुरस्कार एक ऐसी महिला को जाता है जो बढ़ते हुए अंधेरे में लोकतंत्र की लौ जलाए रखती है।" और फिर नाम लिया गया- मारिया कोरिना माचाडो। वेनेजुएला की यह बेटी, जो तानाशाही के साए में छिपी हुई थी, वह 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार की विजेता बन चुकी है। लेकिन यह सिर्फ एक सम्मान नहीं है; यह उन लाखों वेनेजुएलन दिलों की धड़कन है, जो दशकों से दम तोड़ रही थीं। यह पुरस्कार उन्हें वेनेजुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के उनके अथक प्रयासों और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर न्यायपूर्ण एवं शांतिपूर्ण संक्रमण के संघर्ष के लिए दिया गया। 'लोकतंत्र के औजार ही शांति के औजार हैं' मारिया कोरिना माचाडो का नाम सुनते ही आंखों के सामने एक तस्वीर उभरती है- एक महिला, जिसके कंधों पर वेनेज़ुएला का पूरा बोझ लदा है, फिर भी उसकी मुस्कान में उम्मीद की किरण चमकती है। 1967 में काराकास की गलियों में जन्मीं मारिया, एक धनी इंजीनियर और व्यवसायी परिवार की बेटी थीं। लेकिन भाग्य ने उन्हें राजनीति के मैदान में धकेल दिया जहां साल 2000 से ह्यूगो चावेज की तानाशाही ने लोकतंत्र को कुचलना शुरू कर दिया था। 2010 में लोकसभा के लिए चुनी गईं मारिया ने रिकॉर्ड वोटों से जीत हासिल की, लेकिन 2014 में शावेज के उत्तराधिकारी निकोलास मादुरो के शासन ने उन्हें पद से हटा दिया। फिर भी, वे रुकीं नहीं। उन्होंने वेंते वेनेज़ुएला पार्टी की स्थापना की, 2017 में सोय वेनेज़ुएला गठबंधन बनाया। यह एक ऐसा धागा था जो विपक्षी दलों को एक सूत्र में बांधता था। इसके बाद का सफर और कठिन हो गया- उन्हें राजनीतिक प्रतिबंध लगाए गए, यात्रा पर रोक लगा दी गई और बार-बार गिरफ्तारी की धमकियां मिलीं। नोबेल कमिटी ने कहा, "मारिया ने दिखाया कि लोकतंत्र के औजार ही शांति के औजार हैं।" बीबीसी की '100 वुमन' सूची (2018) और टाइम मैगजीन की 'वर्ल्ड्स मोस्ट इन्फ्लुएंशियल पीपल' (2025) में शामिल होना उनके वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है। पुरस्कार की वजह? सरल शब्दों में कहें तो यह वेनेज़ुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए उनके अथक संघर्ष का सम्मान है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में धांधली के बाद, मारिया ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जगाया। उन्होंने स्वतंत्र चुनावों की मांग की, मानवाधिकार उल्लंघनों पर रोशनी डाली। अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट और मार्को रुबियो जैसे नेताओं ने अगस्त 2024 में नोबेल कमिटी को पत्र लिखा, जिसमें कहा, "उनका साहस और निस्वार्थ नेतृत्व शांति और लोकतंत्र की खोज में महत्वपूर्ण रहा है।" लेकिन वजह सिर्फ राजनीति नहीं; यह शांति की वो लड़ाई है जो तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण संक्रमण की मांग करती है। वेनेज़ुएला, जहां 25 सालों से चावेज-मादुरो रेजीम ने अर्थव्यवस्था को चूर-चूर कर दिया, लाखों को भुखमरी की कगार पर ला खड़ा किया, वहां मारिया की आवाज ने लोगों को एकजुट किया। नोबेल कमिटी ने जोर दिया, "लोकतंत्र- मतदान का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ही देशों के भीतर और बीच शांति की नींव है।" मारिया का संघर्ष वैश्विक संकट को भी दर्शाता है, जहां लोकतंत्र पीछे हट रहा है। मारिया की जीत का प्रतीक अब बात उस खास किस्से की जो मारिया की जीत का प्रतीक बन गया- एक ऐसा पल जो आंसू और साहस की मिश्रित कहानी है। जनवरी 2025 की ठंडी सुबह, काराकास के चाको इलाके में एक रैली हो रही थी। तीन महीने से छिपी हुई मारिया पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आईं। भीड़ में सैकड़ों लोग थे- भूखे, डरे हुए, लेकिन आशा से भरे। मारिया मंच पर चढ़ीं, उनकी आवाज कांप रही थी, लेकिन शब्द मजबूत थे: "हम डरेंगे नहीं। यह हमारा देश है, हमारी आजादी है।" रैली खत्म होते ही, मादुरो रेजीम की ताकतें दौड़ पड़ीं। गोलियां चलीं, आंसू गैस के धमाके हुए। मारिया को गिरफ्तार करने की कोशिश हुई- वे उन्हें घेर चुके थे। लेकिन तब कुछ हुआ जो इतिहास बन गया। भीड़ ने एक दीवार बनाई। साधारण लोग- माताएं, छात्र, मजदूरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मारिया को बचाया। एक बुजुर्ग महिला ने चिल्लाया, "वह हमारी उम्मीद है!" जबकि युवा छिपे हुए रास्ते से मारिया को सुरक्षित निकाल ले गए। यह गिरफ्तारी का प्रयास विफल रहा, लेकिन इसने दुनिया को दिखा दिया कि मारिया अकेली नहीं हैं; वे लाखों की आवाज हैं।

ईडी का जोरदार ऐक्शन: ऑनलाइन सट्टेबाजी के आरोप में कांग्रेस विधायक के घर से 40 किलो सोना जब्त

बेंगलुरु ईडी ने ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े रैकेट की चल रही जांच के मामले में छापेमारी कर कर्नाटक कांग्रेस के विधायक के दो लॉकरों से 40 किलोग्राम सोना जब्त किया है। इसकी कीमत 50 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। ईडी अधिकारियों के मुताबिक तलाशी अभियान बेंगलुरु क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा पीएमएलए 2002 के तहत किया गया। इस बरामदगी के साथ इस मामले में कुल जब्त राशि 150 करोड़ रुपये से अधिक हो गयी है, जिसमें पहले से जब्त लगभग 21 किलोग्राम सोने की छड़ें, नकदी, आभूषण, लक्जरी वाहन और फ्रीज किए गए बैंक खाते शामिल हैं। चित्रदुर्ग विधानसभा क्षेत्र से विधायक केसी वीरेंद्र को इस साल के अगस्त में गिरफ्तार कर लिया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में है। ईडी को जांच में किंग 567 और राजा 567 जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफार्मों के माध्यम से संचालित 2,000 करोड़ रुपये के सट्टेबाजी नेटवर्क का पता चला है। अपने बयान में ईडी ने कहा कि वीरेंद्र ने अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर कई अवैध सट्टेबाजी वेबसाइट चलाये और मासूम लोगों को ठगा। इन प्लेटफॉर्मों से एकत्रित धनराशि को फोनपैसा समेत कई गेटवे से भेजा गया और पूरे भारत में बिचौलियों से मिले हजारों 'म्यूल' खातों के जरिये स्थानांतरित किया गया। जांच में यह भी पता चला कि सट्टेबाजी से प्राप्त आय का इस्तेमाल विदेशों में लग्जरी यात्रा, वीजा और आतिथ्य सेवाओं के वित्तपोषण के लिए किया गया था। एजेंसी ने कहा कि मार्केटिंग, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन, बल्क एसएमएस कैंपेन और प्लेटफॉर्म होस्टिंग के लिए भुगतान भी सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े खातों के माध्यम से किये गये थे। ईडी ने कहा, 'साक्ष्य बताते हैं कि अवैध ऑनलाइन गतिविधियों से प्राप्त धन को उनके स्रोत को छिपाने के लिए कई मध्यस्थ खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया था।' प्रवर्तन निदेशालय वीरेंद्र और उसके सहयोगियों से जुड़े अपराध से कमाये धन के स्रोत का पता लगाने और अतिरिक्त संपत्तियों की पहचान करने का काम कर रही है

ऐतिहासिक फैसला: हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड के खिलाफ 600 परिवारों की दावेदारी को ठुकराया

कोच्चि केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि केरल वक्फ बोर्ड द्वारा वर्ष 2019 में मुनंबम की विवादित संपत्ति को वक्फ घोषित करने का निर्णय “कानून के अनुरूप नहीं” था। न्यायमूर्ति एस.ए. धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी.एम. की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा गठित जांच आयोग को अवैध ठहराया गया था। यह मामला कई दशकों पुराना है। 600 परिवारों के बेघर होने का खतरा बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मुनंबम की यह भूमि मूल रूप से 404.76 एकड़ थी, जो अब समुद्री कटाव से घटकर करीब 135.11 एकड़ रह गई है। 1950 में सिद्दीक सैत नामक व्यक्ति ने यह भूमि फारूक कॉलेज को उपहार (Gift Deed) के रूप में दी थी। हालांकि, उस समय इस भूमि पर कई परिवार बसे हुए थे। बाद में कॉलेज ने इन परिवारों को भूमि के कुछ हिस्से बेच दिए, लेकिन बिक्री दस्तावेजों में इस संपत्ति को वक्फ भूमि नहीं बताया गया। 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने इस भूमि को औपचारिक रूप से वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया, जिससे पहले हुए सभी भूमि सौदे अमान्य हो गए। इसके बाद लगभग 600 परिवारों को बेदखली का खतरा पैदा हो गया और उन्होंने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। राज्य सरकार ने बनाई जांच आयोग प्रदर्शनों को देखते हुए केरल सरकार ने नवंबर 2024 में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति सी.एन. रामचंद्रन नायर की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया। इस आयोग का उद्देश्य प्रभावित परिवारों की स्थिति और उनके अधिकारों की जांच करना था। लेकिन ‘वक्फ संरक्षण समिति’ के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना था कि वक्फ संपत्तियों पर जांच आयोग गठित करने का अधिकार सरकार के पास नहीं है, क्योंकि यह अधिकार वक्फ अधिनियम के तहत केवल वक्फ बोर्ड को है। एकल पीठ का फैसला और राज्य की अपील 17 मार्च को न्यायमूर्ति बेकु कुरियन थॉमस की एकल पीठ ने आयोग के गठन के आदेश को रद्द कर दिया था। एकल जज ने यह राय दी थी कि आयोग को वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत पहले से तय या लंबित मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसके खिलाफ राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में अपील की। सरकार का तर्क था कि याचिकाकर्ताओं के पास मामले को अदालत में लाने का अधिकार ही नहीं था और वक्फ बोर्ड का आदेश कानूनी रूप से गलत था। डिवीजन बेंच का निर्णय: वक्फ बोर्ड का आदेश ‘अवैध’ और ‘देरी से पारित’ डिवीजन बेंच यानी खंडपीठ ने राज्य सरकार की दलील से सहमति जताते हुए कहा कि 1950 का दस्तावेज “वक्फ डीड” नहीं बल्कि “गिफ्ट डीड” था। अदालत ने कहा, “1950 की दान-पत्री का उद्देश्य ‘ईश्वर के नाम पर स्थायी समर्पण’ करना नहीं था, बल्कि यह केवल एक साधारण उपहार था। अतः यह जमीन किसी भी वक्फ अधिनियम (1954, 1984 या 1995) के तहत वक्फ नहीं मानी जा सकती।” अदालत ने आगे कहा कि वक्फ बोर्ड द्वारा 2019 में जारी आदेश “बेहद विलंबित, कानूनी प्रावधानों के उल्लंघन में” और “कानूनन अमान्य” हैं। पीठ ने कहा, “वक्फ बोर्ड द्वारा सितंबर और अक्टूबर 2019 में संपत्ति को वक्फ घोषित करने की कार्रवाई न केवल अनुचित देरी से की गई बल्कि यह वक्फ अधिनियमों के प्रावधानों के स्पष्ट उल्लंघन में है। यह आदेश कानून में प्रवर्तनीय नहीं हैं।” “वक्फ डीड” और “गिफ्ट डीड” क्या है? वक्फ डीड एक कानूनी दस्तावेज है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को इस्लामी कानून के तहत धर्मार्थ या धार्मिक उद्देश्यों के लिए स्थायी रूप से दान कर देता है। इसे वक्फनामा भी कहते हैं। यह संपत्ति किसी व्यक्ति के निजी लाभ के लिए उपयोग नहीं की जा सकती। वहीं गिफ्ट डीड भी एक कानूनी दस्तावेज है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को स्वेच्छा से बिना किसी भुगतान के किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को उपहार के रूप में ट्रांसफर करता है। मुख्य अंतर वक्फ डीड धार्मिक/दान उद्देश्य के लिए होती है और स्थायी होती है, जबकि गिफ्ट डीड व्यक्तिगत उपहार के लिए होती है और उद्देश्य में लचीलापन हो सकता है। ‘भूमि हथियाने की कोशिश’ बताया गया अदालत ने अपने कड़े शब्दों में कहा कि वक्फ बोर्ड द्वारा भूमि को वक्फ घोषित करने की प्रक्रिया “भूमि हथियाने की चाल” थी, जिसने सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर असर डाला। अदालत ने कहा, “25 सितंबर 2019 की अधिसूचना, जिसके तहत उक्त भूमि को वक्फ घोषित किया गया, वह वक्फ अधिनियमों के प्रावधानों के विरुद्ध और ‘भूमि हथियाने की कोशिश’ के समान है। इससे सैकड़ों परिवारों की रोटी-रोजी प्रभावित हुई है।” राज्य सरकार वक्फ बोर्ड के आदेश से बाध्य नहीं अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार वक्फ बोर्ड के ऐसे आदेशों से बाध्य नहीं है। पीठ ने कहा, “हम यह घोषित करते हैं कि राज्य सरकार वक्फ बोर्ड की घोषणाओं से बंधी नहीं है, क्योंकि यह केवल एक दिखावा था ताकि संपत्ति को वक्फ बताकर कब्जा किया जा सके। राज्य सरकार को वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 97 के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार है।”  

हाई कोर्ट सख्त: सबरीमाला मंदिर चोरी मामले में तुरंत जांच, आरोपी जल्द पकड़े जाएं

केरल  केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को राज्य पुलिस को आदेश दिया कि वह सबरीमला मंदिर के चौखट या लिंटर से सोने की हेराफेरी को लेकर आपराधिक केस दर्ज कर जांच शुरू करे। जस्टिस राजा विजयराघवन वी. और जस्टिस के. वी. जयकुमार की पीठ ने कहा, 'अब तक की गई जांच से ऐसा प्रतीत होता है कि जहां तक चौखट का संबंध है, सोने की हेराफेरी की गई है। हमारे समक्ष पेश सतर्कता रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि काफी मात्रा में सोना लगभग 474.9 ग्राम – उन्नीकृष्णन पोट्टी (सोने की परत चढ़ाने का प्रस्ताव देने वाले प्रायोजक) को सौंपा गया था।’ हालांकि, रिकॉर्ड से यह पता नहीं चलता कि सोने की यह मात्रा त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (TDB) को सौंपी थी। पीठ ने अपनी ओर से गठित विशेष जांच दल (SIT) को चौखट मुद्दे के साथ-साथ जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य सभी पहलुओं की भी पड़ताल करने का निर्देश दिया। इसने कहा कि सतर्कता रिपोर्ट त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के समक्ष रखी जाए, जिसे उसे राज्य पुलिस प्रमुख को भेजने का आदेश दिया गया। राज्य पुलिस प्रमुख को एडीजीपी (अपराध शाखा और कानून व्यवस्था) एच. वेंकटेश को इस मामले के संबंध में आपराधिक मामला दर्ज करने और जांच शुरू करने का निर्देश देने के लिए कहा गया। SIT को निष्पक्ष जांच करने का निर्देश 9 अक्टूबर को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, एडीजीपी वेंकटेश एसआईटी का नेतृत्व कर रहे हैं। पीठ ने एसआईटी को पूरी तरह से निष्पक्ष और त्वरित जांच करने का निर्देश दिया ताकि अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके। SIT को 6 सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट दाखिल करने और हर 2 सप्ताह में एक बार अदालत के समक्ष जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश भी दिया गया। पीठ ने यह भी कहा कि SIT अदालत के प्रति सीधे जवाबदेह होगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जांच अत्यंत विवेक और ईमानदारी के साथ की जाए। एसआईटी को यह भी निर्देश दिया गया कि जांच पूरी होने तक वह जांच का विवरण जनता या मीडिया को नहीं बताए।  

CJI गवई की शख्सियत का अंदाज: ‘हम भी तो बच्चे थे!’ – SG तुषार मेहता के सामने यह क्यों कहा?

नई दिल्ली देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ आज (शुक्रवार, 10 अक्टूबर को) दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण से जुड़े पटाखों के मुद्दे और ‘हरित’ पटाखों के निर्माण और बिक्री से संबंधित मुद्दों पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि कुछ शर्तों के साथ पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए। NCR के राज्यों ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि वे सभी हरित पटाखे हों और केवल राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान यानी National Environmental Engineering Research Institute (NEERI) द्वारा हरित पटाखे के तौर पर अनुमोदित हों। सुनवाई के दौरान एनसीआर राज्यों ने शीर्ष अदालत को यह सुझाव भी दिया कि किसी भी ई-कॉमर्स वेबसाइट को पटाखों के लिए ऑनलाइन ऑर्डर स्वीकार नहीं करेंगे। एनसीआर राज्यों ने शीर्ष अदालत को यह सुझाव भी दिया कि दिवाली पर रात 8 बजे से रात 10 बजे तक ही पटाखे जलाने की अनुमति दी जानी चाहिए। एनसीआर राज्यों ने यह सुझाव भी दिया कि क्रिसमस और नए साल की पूर्व संध्या पर रात 11.55 बजे से रात 12.30 बजे तक ही पटाखे जलाने की अनुमति दी जाए। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस मामले पर कोई आदेश नहीं दिया है। क्या 2018 में 2024 की तुलना में काफी कम प्रदूषण (AQI) था दरअसल, एनसीआर राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली-एनसीआर में हरित पटाखे जलाने की अनुमति देने का आग्रह किया था। केंद्र सरकार की तरफ से मामले में पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से हरित पटाखे जलाने की इजाजत देने की मांग की थी। बार एंड बेंच के मुताबिक, इस दौरान CJI बीआर गवई ने पूछा, "क्या 2018 में प्रदूषण (AQI) 2024 की तुलना में काफी कम था?" हम सब भी तो बच्चे थे मीलॉर्ड! इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “कोविड काल में यह कम हुआ था… अन्यथा यह हमेशा से वैसा ही रहा है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे पता चले कि पटाखों की वजह से ऐसा हुआ है। मैं आग्रह करता हूँ कि पटाखों पर कोई प्रतिबंध न हो। अगर दो घंटे का समय है… तो एक घंटा तो सिर्फ़ माता-पिता को समझाने में ही चला जाता है! हम सब भी तो बच्चे थे मीलॉर्ड!” आधे हरियाणा पर बिना सुनवाई के ही प्रतिबंध इसी दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता के परमेश्वर ने हरियाणा का पक्ष रखते हुए कहा, "आधे हरियाणा पर बिना सुनवाई के ही प्रतिबंध लगा दिया गया है। एनसीआर का विस्तार ऐसा ही है।" CJI जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ पटाखा निर्माताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें प्रतिबंध में ढील देने और ‘हरित’ पटाखे बेचने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है। बता दें कि शीर्ष अदालत ने 26 सितंबर को प्रमाणित निर्माताओं को इस शर्त के साथ ‘हरित’ पटाखों के निर्माण की अनुमति दी थी कि वे बिना उसकी मंजूरी के प्रतिबंधित दिल्ली-एनसीआर में इन्हें नहीं बेचेंगे।  

अरविंद केजरीवाल को लेकर अमित शाह ने दिया करारा जवाब, सोशल मीडिया पर वायरल

नई दिल्ली  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक बार फिर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर जमकर बरसते नजर आए। गृहमंत्री ने पूर्व सीएम पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने इतने घोटाले किए कि जनता ने उनके चुनाव का 'घोटाला' कर दिया और अब वह घर बैठे हुए हैं। इसी साल फरवरी में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी की सरकार को हार का सामना करना पड़ा था और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल अपनी सीट तक नहीं बचा पाए थे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को यमुना नदी की सफाई के लिए 1,816 करोड़ रुपये के प्रॉजेक्ट्स की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने पूर्व की आप सरकार और इसके राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर जोरदार निशाना साधा। शाह ने कहा, 'केजरीवाल जी ने 11 साल में मोहल्ला क्लीनिक का घोटाला, सीएनजी का घोटाला, शराब घोटाला, विज्ञापन का घोटाला, दवा का घोटाला, क्लासरूम का घोटाला, दिल्ली जल बोर्ड का घोटाला, शीशमहल का घोटाला, सीसीटीवी लगाने का घोटाला और पैनिक बटन का घोटाला। इतने घोटाले कर दिए कि दिल्लीवालों ने उनके चुनाव का ही घोटाला कर दिया। और अब वह घर पर बैठ हुए हैं।' गृहमंत्री ने इस दौरान कांग्रेस पर भी जोरदार हमला किया और कहा कि देश में उसकी सरकार थी तो 12 लाख करोड़ के घोटाले हुए। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस की सरकार थी देश में तब 12 लाख करोड़ रुपये के घोटाले किए थे। मोदी जी के 11 साल के शासन में एक भी आरोप हमारे प्रधानमंत्री पर नहीं लगे। यही बताता है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकारें जनता को समर्पित सरकारें हैं।' केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भ्रष्टाचार कम करने और विज्ञापनों पर कम पैसा खर्च करने मात्र से ही यमुना का शुद्धिकरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जब दिल्ली की जनता ने परिवर्तन को चुना तब प्रधानमंत्री ने कहा था कि हमारी सरकार की प्राथमिकता में सर्वोच्च स्थान पर मां यमुना को शुद्ध करना है। मोदी ने वादा किया था कि हम 2029 से पहले यमुना जी को स्वच्छ करने का काम पूरा कर देंगे। उन्होंने कहा है कि भ्रष्टाचार कम करने और विज्ञापनों पर कम पैसा खर्च करने मात्र से ही यमुना जी का शुद्धिकरण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज यमुना के शुद्धिकरण और साफ यमुना के स्वप्न को साकार करने का रास्ता प्रशस्त हो चुका है।