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खारिज़, खारिज़, खारिज़… बानू मुश्ताक मामले में CJI का स्पष्ट निर्णय

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक को इस साल मैसुरु दशहरा उत्सव के उद्घाटन के लिए आमंत्रित करने के कर्नाटक सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने शुक्रवार (19 सितंबर) को कर्नाटक हाई कोर्ट के 15 सितंबर के आदेश को बकरार रखा, जिसमें राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया गया था। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ एच एस गौरव ने शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी। यह उत्सव 22 सितंबर से शुरू होगा। इस याचिका में कहा गया था कि चामुंडेश्वरी मंदिर में होने वाले दशहरा के अनुष्ठान के रीति-रिवाज प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत संरक्षित आवश्यक धार्मिक प्रथा हैं। इस परंपरा के तहत देवी चामुंडेश्वरी के गर्भगृह के समक्ष दीप प्रज्वलित किया जाता है, हल्दी व कुमकुम लगाया जाता है, फल और फूल चढ़ाए जाते हैं। याचिकाकर्ता ने क्या दी थी दलील? याचिका के अनुसार, ये हिंदू पूजा के कार्य हैं जो आगमिक परंपराओं द्वारा निर्धारित होते हैं, और इन्हें कोई गैर-हिंदू नहीं कर सकता, जबकि मैसुरु जिला प्रशासन ने तीन सितंबर को, विपक्षी भाजपा सहित कुछ वर्गों की आपत्तियों के बावजूद, बानू मुश्ताक को औपचारिक रूप से इस आयोजन में आमंत्रित किया था। इसी फैसले को पहले हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां चीफ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस सीएम जोशी की पीठ ने उसे खारिज कर दिया था। SC ने पूछा, याचिका का उद्देश्य क्या है? बार एंड बेंच के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने याचिकाकर्ता से पूछा, "इस याचिका को दायर करने का उद्देश्य क्या है?" इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, "यह अनुच्छेद 25 के तहत मेरे अधिकारों को प्रभावित करता है।" इतना सुनते ही जस्टिस विक्रम नाथ ने याचिका खारिज कर दी। तभी याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि कृपया तीन मिनट के लिए मेरी बात सुनी जाए। जस्टिस विक्रम नाथ ने यूं कर दी याचिका खारिज़ जब वकील ने अपनी बात रख ली तो जस्टिस विक्रम नाथ ने फिर पूछा, "इस देश के संविधान की प्रस्तावना क्या है?" इस पर याचिकाकर्ता के वकील मिस्टर सुरेश ने कहा, “धर्मनिरपेक्ष.. लेकिन मेरी धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप न करें।” इस पर जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि यह राज्य का कार्यक्रम है…राज्य 'क', 'ख' और 'ग' में कैसे अंतर कर सकता है? इस पर फिर वकील ने कहा कि मंदिर के अंदर पूजा करना धर्मनिरपेक्ष कार्य नहीं है…यह समारोह का हिस्सा है…वहाँ कई फैसले हैं। इतना सुनते ही जस्टिस विक्रम नाथ ने फिर कहा, खारिज। कह तो दिया,अब कितनी बार कहूं? वकील ने फिर जिरह की और कहा, "बानू द्वारा ऐसे-ऐसे बयान दिए गए हैं जो हमारे अनुसार हमारे धर्म के खिलाफ हैं। ऐसी परिस्थितियों में, आप ऐसे लोगों को आमंत्रित नहीं कर सकते। दो बातें हैं – एक व्यक्ति जो धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करता है और दूसरा व्यक्ति हमारे खिलाफ बिल्कुल विपरीत रुख अपनाता है…आप ऐसे लोगों को आमंत्रित नहीं कर सकते।" इस पर जस्टिस नाथ ने कहा, "हमने तीन बार खारिज-खारिज कह दिया है, और कितनी बार कहूं?" 2027 में CJI बनेंगे जस्टिस विक्रम नाथ जस्टिस विक्रम नाथ 7 फरवरी, 2027 से 23 सितंबर, 2027 तक देश के मुख्य न्यायाधीश पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। जस्टिस सूर्यकांत के रिटायरमेंट के बाद उनका कार्यकाल लगभग 8 महीने का होगा। जस्टिस सूर्यकांत मौजूदा CJI जस्टिस बी आर गवई के बाद इसी साल नवंबर में CJI का पद संभालेंगे। बता दें कि यह विवाद बानू मुश्ताक द्वारा अतीत में दिए गए कुछ बयानों को लेकर खड़ा हुआ है, जिन्हें कुछ लोग ‘हिंदू विरोधी’ और ‘कन्नड़ विरोधी’ मानते हैं। पूर्व भाजपा सांसद प्रताप सिम्हा और अन्य आलोचकों का तर्क है कि यह उत्सव परंपरागत रूप से वैदिक अनुष्ठानों और देवी चामुंडेश्वरी को पुष्पांजलि अर्पित करके शुरू होता है, ऐसे में मुश्ताक का चयन, धार्मिक भावनाओं और लंबे समय से चली आ रही परंपराओं का अनादर है। मैसुरु में दशहरा उत्सव 22 सितंबर से शुरू होकर दो अक्टूबर को विजयादशमी पर समाप्त होगा।

मुख्यमंत्री ने की यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की तैयारियों की समीक्षा, दिए आवश्यक दिशा निर्देश

पीएम मोदी के आगमन से पूर्व मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल का भी किया स्थलीय निरीक्षण  सीएम योगी बोले- वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया अभियानों को मिलेगा बढ़ावा  यूपीआईटीएस 2025 में ओडीओपी स्टॉल्स और युवाओं की हो भागीदारीः सीएम  युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव और उद्यमिता के अवसर प्रदान करने का महत्वपूर्ण मंच होगा ट्रेड शोः मुख्यमंत्री   सीएम ने खादी व ग्रामोद्योग को प्रोत्साहित करने और विदेशी बायर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश  लखनऊ  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट सभागार में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आगामी उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो (UPITS-2025) की तैयारियों की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आयोजन की तैयारी, सुरक्षा, व्यवस्थापन और प्रतिभागियों की सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रदेश की समृद्ध परंपरा, हुनर और उत्पादों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने के साथ-साथ वोकल फॉर लोकल और मेक इन इंडिया अभियानों को बढ़ावा देगा। उन्होंने सभी जिलों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने, ODOP स्टॉल्स और शैक्षणिक संस्थानों में व्यापक ब्रांडिंग पर जोर दिया। इसके अलावा युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव और उद्यमिता के अवसर प्रदान करने, खादी व ग्रामोद्योग को प्रोत्साहित करने और विदेशी बायर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। सभी जिलों की होगी सक्रिय सहभागिता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि आगामी यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS-2025) में प्रदेश के प्रत्येक जिले की सक्रिय और प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक जिले के वन डिस्टिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) से जुड़े उत्पादों के लिए विशेष स्टॉल स्थापित किए जाएंगे, ताकि स्थानीय हस्तशिल्प, खाद्य, हस्तकला और उद्योग संबंधी उत्पादों को वैश्विक खरीदारों और निवेशकों के सामने प्रदर्शित किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रदर्शनी नहीं होगी, बल्कि यूपी की विविधता, सांस्कृतिक विरासत और व्यावसायिक प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगी। इसके माध्यम से स्थानीय उत्पादकों और उद्यमियों को नई संभावनाओं, व्यापारिक नेटवर्क और निवेश के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे प्रदेश के विकास और युवाओं के रोजगार सृजन में भी मदद मिलेगी। शैक्षणिक संस्थानों में हो व्यापक ब्रांडिंग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस-2025) की पहचान को मजबूत करने के लिए प्रदेश के सभी जिलों और शैक्षणिक संस्थानों में इसकी व्यापक ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार किया जाए। इसका उद्देश्य युवाओं और छात्रों को आयोजन के महत्व से अवगत कराना और उन्हें सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। इसके तहत कॉलेज, यूनिवर्सिटी और अन्य शैक्षणिक संस्थान अपने कैंपस में यूपीआईटीएस के पोस्टर, डिजिटल डिस्प्ले और इवेंट जानकारी साझा करेंगे, ताकि छात्र, फैकल्टी और स्थानीय समुदाय सीधे इस आयोजन से जुड़ सकें और युवाओं में उद्यमिता तथा नवाचार के प्रति जागरूकता बढ़े। सीएम योगी ने गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को आयोजन से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव और रोजगार/उद्यमिता के अवसर मिलेंगे। फैशन शो में खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो  के अंतर्गत आयोजित होने वाले फैशन शो में देशभर की फिल्म सिटी से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। इसका उद्देश्य खादी, हैंडीक्राफ्ट और ग्रामोद्योग से जुड़े उत्पादों को व्यापक दृश्यता और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस माध्यम से न केवल उत्तर प्रदेश की हस्तकला और पारंपरिक उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवा डिजाइनर्स और स्थानीय कारीगर भी नए अवसरों और बाज़ार तक पहुंच बनाने में सक्षम होंगे। फैशन शो में खादी और ग्रामोद्योग के उत्पादों को पेश करने के लिए विशेष कैटवॉक और प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी, जिससे इन उत्पादों की गुणवत्ता और सौंदर्य का प्रभाव वैश्विक स्तर पर दिखाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं को उद्यमिता, नवाचार और रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे। वृद्धजन और आगंतुकों को मिले बेहतर सुविधा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए कि आयोजन में प्रतिभाग करने वाले वृद्धजनों और वरिष्ठ नागरिकों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए जाएं। इसके तहत नासा पार्किंग स्थल से शटल सेवा उपलब्ध कराई जाएं, ताकि उन्हें सहज और आरामदायक तरीके से आयोजन स्थल तक पहुंचने में मदद मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सुरक्षा और संचालन की पूर्ण जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए। किसी भी ई-रिक्शा या वाहन का संचालन नाबालिग चालक द्वारा न किया जाए। इसके अलावा, आगंतुकों के लिए सुरक्षा, मार्गदर्शन और सुविधा संबंधी निर्देश भी स्पष्ट किए जाएं, ताकि सभी प्रतिभागियों को सुरक्षित, व्यवस्थित और स्वागतपूर्ण अनुभव प्राप्त हो। सीएम ने विदेशी बायर्स और मेहमानों की सुरक्षा, आवास, परिवहन और संपूर्ण रहन-सहन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि विदेशी मेहमानों को सहज, सुरक्षित और स्वागतपूर्ण अनुभव मिलना चाहिए ताकि उत्तर प्रदेश की छवि मजबूत हो। बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी समेत अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण मौजूद रहे। अपर मुख्य सचिव, एमएसएमई विभाग आलोक कुमार ने पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से मुख्यमंत्री को अब तक की तैयारियों से अवगत कराया। सीएम योगी ने यूपीआईटीएस के आयोजन स्थल का किया स्थलीय निरीक्षण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 25 से 29 सितंबर के बीच ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित होने वाले यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस 2025) की तैयारियों का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को स्थलीय निरीक्षण भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस आयोजन का शुभारंभ करेंगे। इसको देखते हुए  मुख्यमंत्री ने पूरे आयोजन स्थल का दौरा किया और अधिकारियों से तैयारियों के विषय में जानकारी ली और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। इस दौरान अपर मुख्य सचिव एमएसएमई आलोक कुमार ने उन्हें पूरे आयोजन स्थल और वीआईपी मूवमेंट की जानकारी दी। डीएम मेधा रूपम ने भी आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं और सुविधाओं का पूरा ब्यौरा दिया। वहीं पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने उन्हें सुरक्षा व्यवस्था से अवगत कराया। मुख्यमंत्री जी ने ई कार्ट में बैठकर पूरे आयोजन स्थल को देखा। इस दौरान उनके साथ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

भगवंत मान ने जताई प्रतिक्रिया, UP और बिहार के लोगों के खिलाफ फैसलों पर बोले ये शब्द

चंडीगढ़ पंजाब के कई जिलों से ऐसी खबरें आई हैं कि गांवों के सरपंचों समेत कई लोगों की ओर से यूपी और बिहार के मजदूरों को बाहर निकालने के ऐलान किए गए हैं। होशियारपुर जिले के तो 20 सरपंचों का कहना है कि वे पंजाब से बाहर के लोगों को निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं करेंगे। जिले में एक पांच साल के बच्चे के साथ कुकर्म और फिर उसकी दर्दनाक हत्या के बाद ऐसी स्थिति पैदा हुई है। वहीं इससे पहले भी गुरदासपुर समेत कई जिलों में इस तरह के मामले आए हैं। अब इस तरह के ऐलानों के बारे में भगवंत मान से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी को भी देश के किसी भी हिस्से में जाकर काम करने और रहने का हक है। यूपी और बिहार के मजदूरों को पंजाब के गांवों से निकालने के ऐलान पर भगवंत मान ने कहा कि पंजाबी सबसे ज्यादा विदेशों में रहते हैं। मान ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हमारे यहां के लोग कनाडा जैसे देशों में गए हैं और वहां मंत्री तक बने हैं। दुनिया भर में विरोध चल रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन तक में चल रहा है कि ये लोग क्यों आ गए हैं और उन्हें बाहर निकालो। यदि कोई कानून तोड़े तो उसे सख्त सजा मिले। कानून तोड़ने वाला किसी समुदाय का नहीं होता है, उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। फास्ट ट्रैक पर सुनवाई होनी चाहिए। मान ने कहा कि छत्तीसगढ़, कोलकाता में पंजाबियों का ही ट्रांसपोर्ट है। मुंबई तो पंजाबियों का बहुत कारोबार है। उन्होंने कहा कि लोगों के दिलों में गुस्सा है तो ऐसा हो सकता है। भगवंत मान ने कहा कि हम सुरक्षा देने को तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला हुआ तो हमने कश्मीरियों को सुरक्षा दी। लेकिन यदि कोई प्रदेश का कानून तोड़ेगा तो सख्त सजा मिलेगी और हमारी उसमें कोई हमदर्दी नहीं है। अपने एक विधायक पर रेप का केस होने और फिर पुलिस के साथ एनकाउंटर होने के मामले में भगवंत मान ने कहा कि हमने तो सारे अच्छे लोग चुने थे, लेकिन कुछ खराब निकल आए तो क्या करें। भगवंत मान ने कहा कि भाजपा के लोगों से यह सवाल पूछिए। वहां तो जिन लोगों के खिलाफ केस होते हैं, यदि वही उनकी पार्टी में आ जाते हैं तो वह सही हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास तो पंजाब में नेता ही नहीं हैं। भाजपा का यहां पर कांग्रेस विंग है। रवनीत बिट्टू, अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ जैसे नेता मुख्य हैं, जो कभी कांग्रेस में हुआ करते थे। इसी तरह मनप्रीत बादल हैं, जो कई दलों से पाला बदलते हुए भाजपा में आ गए हैं।

कर्नाटक धर्मस्थल मामला: जांच में नया मोड़, सात खोपड़ियां बरामद

कर्नाटक कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बंगलगुद्दा क्षेत्र में धर्मस्थल सामूहिक दफन मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को गुरुवार को दो और खोपड़ियां मिली हैं। इसके साथ ही अब तक सात मानव खोपड़ियां बरामद हो चुकी हैं। ये खोपड़ियां मुख्य रूप से मध्यम आयु के पुरुषों की बताई जा रही हैं और ये अवशेष लगभग एक वर्ष पुराने हो सकते हैं। फोरेंसिक जांच से इसकी और पुष्टि होने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि ये अवशेष संभवतः आत्महत्या के मामलों से जुड़े हो सकते हैं। विशेष जांच दल धर्मस्थल में कथित तौर पर सैकड़ों लोगों की हत्या और अवैध दफनाने के मामलों की जांच कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईटी ने बुधवार को पांच खोपड़ियां बरामद की थीं, जबकि गुरुवार को दो और मिलीं हैं। एंटी-नक्सल फोर्स के कर्मियों के साथ पुलिस और वन अधिकारियों की संयुक्त टीम ने लगभग 12 एकड़ में फैले जंगली क्षेत्र को खंगाला है। खोज अभियान के दौरान अन्य मानव अवशेषों के अलावा एक लाठी भी मिली। एसआईटी सूत्रों ने बताया कि ये खोजें बंगलगुद्दा रिजर्व फॉरेस्ट के घने इलाके में की गईं, जहां पहले भी संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिली थीं। सनसनीखेज आरोपों से शुरू हुई जांच धर्मस्थल सामूहिक दफन मामला जुलाई 2025 में तब सुर्खियों में आया जब एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने दावा किया कि 1995 से 2014 के बीच उसे मंदिर शहर के आसपास 100 से अधिक शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। शिकायतकर्ता की पहचान सी.एन. चिन्नय्या के रूप में हुई। उसने आरोप लगाया कि ये शव मुख्य रूप से महिलाओं और नाबालिगों के थे, जिनमें यौन हिंसा के निशान थे। चिन्नय्या ने अदालत में कुछ कंकाल अवशेष भी पेश किए थे। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने 19 जुलाई को डीजीपी प्रणब मोहंती के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया। जांच के दौरान 17 स्थलों पर खुदाई हुई, लेकिन अधिकांश जगहों पर कोई प्रमुख अवशेष नहीं मिले। अगस्त में चिन्नय्या को झूठी गवाही के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एक अन्य ट्विस्ट में, एक महिला ने अपनी बेटी के लापता होने का दावा वापस ले लिया, जो कथित तौर पर काल्पनिक था। चिन्नय्या की अदालती पेशी और हाईकोर्ट का निर्देश गुरुवार को चिन्नय्या को बेलथंगड़ी अदालत में पेश किया गया, जहां उसका बयान दर्ज किया गया। वह अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर को फिर अदालत में पेश होगा। इस बीच, कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे धर्मस्थल में कथित शव दफन के बारे में कोई स्वतंत्र जानकारी रिकॉर्ड पर रखें। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सुनवाई को 26 सितंबर तक स्थगित कर दिया। एसआईटी के एक अधिकारी ने बताया, "ये खोपड़ियां हाल की लग रही हैं और पुरुषों की हैं। फोरेंसिक परीक्षण से मौत का कारण और समय स्पष्ट होगा। हम आत्महत्या या अन्य प्राकृतिक कारणों की संभावना तलाश रहे हैं।" राजनीतिक हलकों में भी यह मामला गरमाया हुआ है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर मंदिर शहर की छवि खराब करने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस इसे साजिश बता रही है।  

सेवा सम्मान 2025: केसरी फाउंडेशन ने समाजसेवा की विभूतियों को किया सम्मानित

इंदौर इंदौर प्रेस क्लब परिसर में केसरी फाउंडेशन का पहला स्थापना दिवस और केसरी सेवा सम्मान 2025 का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। यह आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि समाज सेवा, समर्पण और प्रेरणा का उत्सव बन गया। कार्यक्रम में शरीर से दिव्यांग किंतु हौसलों से बुलंद मोटिवेशनल स्पीकर पूनम श्रोती (भोपाल) ने अपने उद्बोधन से सबका दिल जीत लिया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर संध्या अग्रवाल एवं चित्रा वाजपेई को सम्मानित किया गया। वरिष्ठतम पत्रकार उमेश रेखे को पत्रकारिता में छह दशक से अधिक योगदान हेतु लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। कुष्ठ रोगियों एवं बुजुर्गों की सेवा में समर्पित सुधीर भाई गोयल, नाममात्र शुल्क पर गंभीर बीमारियों का आयुर्वेद उपचार करने वाले डॉ. शिवदयाल वर्डे को सम्मानित किया गया। इंदौर की स्वच्छता अभियान की मिसाल बनीं सफाई कर्मी इंदिरा बाई श्यामलाल और महिला सुरक्षा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पुलिस अधिकारी गौरी तिवारी को भी सेवा सम्मान मिला। इसके अलावा समाजसेवा और जनहित कार्यों में योगदान हेतु जगप्रीत सिंह टुटेजा, बबीता हार्डिया, पायल गिदवानी, रेनू जय सिंघानी, विवेक गावडे, प्रीति बवेजा, हेमंत गट्टानी, हिना नीमा सहित अनेक विभूतियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नितिन दास जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। विशेष अतिथि के रूप में विधायक गोलू शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार एवं मध्यप्रदेश प्रेस क्लब अध्यक्ष डॉ. नवीन आनंद जोशी तथा केंद्रीय गुरुसिंघ सभा मप्र-छत्तीसगढ़ अध्यक्ष हरपाल सिंह मोनू भाटिया उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता में केसरी फाउंडेशन की टीम – संजीव मल्होत्रा, लतिका नजान, संजय मिश्रा, मनजीत चावला, मनोज नजान, तेजपाल सिंह चावला, रोहन मल्होत्रा, शालिनी जोशी, मंजूषा नाचन, उपेंद्र जी, प्रीति अजमानी और हरलीन कौर चावला का महत्वपूर्ण योगदान रहा। फाउंडेशन ने संकल्प लिया है कि समाज सेवा और प्रतिभाओं को मंच देने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

मंदोदरी के किरदार में दिखेंगी पूनम पांडेय, लव-कुश रामलीला में रावण की भूमिका पर चर्चा

नई दिल्ली एक्ट्रेस पूनम पांडेय शोबिज में काफी वक्त से नहीं दिखी हैं. वो पैप्स के कैमरों में जरूर स्पॉट होती हैं. मगर किसी शो या मूवी में नजर नहीं आई हैं. पूनम को स्क्रीन पर देखने का इंतजार कर रहे फैंस के लिए गुडन्यूज है. एक्ट्रेस को वो पर्दे पर तो नहीं लेकिन रामलीला में एक्टिंग करते हुए देख पाएंगे. पूनम को रामलीला में मिला अहम रोल पुरानी दिल्ली में होनी वाली लव कुश रामलीला में पूनम पांडे रावण की पत्नी मंदोदरी का रोल प्ले करेंगी. रामलीला में एक्टर आर्य बब्बर रावण का रोल निभाएंगे. रामलीला में मंदोदरी का अहम रोल प्ले करने का मौका मिलने पर पूनम ने खुशी जताई है. उनका एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने रामलीला समिति का आभार जताया है. पूनम ने जताया आभार पोस्ट में लिखा है- लव कुश रामलीला समिति की ओर से मुझे इस पावन अवसर पर आमंत्रित करने के लिए मैं दिल से धन्यवाद करती हूं. ये मेरे लिए खुशी और गर्व की बात है. मुझे इस ऐतिहासिक और भव्य आयोजन का हिस्सा बनने का जो मौका मिला है. रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और पंरपरा का उत्सव है. इसमें सम्मिलित होकर मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं. मैं पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस इवेंट का हिस्सा बनने का इंतजार कर रही हूं. आर्य बब्बर बने रावण  दिल्ली में होने वाली लव कुश रामलीला सबसे फेमस रामलीला में गिनी जाती हैं. इसका मंच लाल किले के मैदान में तैयार किया जाता है. आर्य बब्बर ने 2015 में आए टीवी शो 'संकट मोचन महाबली हनुमान' में रावण का रोल प्ले किया था. इस किरदार को रामलीला के मंच पर फिर से निभाने के लिए वो सुपर एक्साइटेड हैं. फैंस पूनम पांडेय और आर्य बब्बर की जोड़ी को लेकर उत्साहित हैं.  वर्कफ्रंट पर पूनम को आखिरी बार स्क्रीन पर वेब सीरीज 'हनीमून सुइट रूम नंबर 911' में देखा गया था. इससे पहले वो रियलिटी शो 'लॉकअप' में दिखी थीं. पूनम में 2013 में मूवी 'नशा' से बॉलीवुड में कदम रखा था. उनका एक्टिंग करियर काफी कोशशों के बावजूद नहीं चल सका. पूनम का अपना यूट्यूब चैनल और ऐप है, जहां वो अपनी बोल्डनेस का तड़का लगाती हैं. एक्ट्रेस अपनी लव लाइफ और तलाक के कारण लाइमलाइट में रहीं. 

ढाई लाख से ज्यादा फीडबैक के साथ आगे बढ़ा ‘समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ अभियान

आमजन के लिए शिक्षा सबसे बड़ा मुद्दा, आमजन ने दिया विकसित यूपी का विजन गांव से लेकर शहर तक जनता ने बढ़-चढ़कर दिए अपने सुझाव  एटा, मेरठ, मुजफ्फनगर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, मैनपुरी, कानपुर देहात, हरदोई जनपदों से आया सर्वाधिक फीडबैक लखनऊ योगी सरकार द्वारा संचालित 'समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान निरंतर जनभागीदारी और सुझावों के साथ आगे बढ़ रहा है। शुक्रवार को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर छात्रों, शिक्षकों, व्यावसायियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों, मीडिया और आम जनमानस से संवाद किया। इस संवाद में न केवल विगत आठ-साढ़े 8 वर्षों की विकास यात्रा साझा की गई, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने के लिए रोडमैप पर चर्चा और फीडबैक भी प्राप्त किया गया। ढाई लाख से अधिक फीडबैक दर्ज सरकार द्वारा विकसित पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक ढाई लाख से ज्यादा फीडबैक दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1.85 लाख से ज्यादा और नगरीय क्षेत्रों में करीब 70 हजार फीडबैक प्राप्त हुए।  आयु वर्ग के अनुसार 90 हजार से अधिक सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग से, 1.36 लाख से अधिक सुझाव 31-60 वर्ग और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से करीब 30 हजार से अधिक सुझाव आए हैं। शिक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक फीडबैक जनता के बीच शिक्षा अब भी सबसे बड़ा मुद्दा है। शिक्षा से जुड़े 90 हजार से अधिक सुझाव मिले। इसके अलावा नगरीय एवं ग्रामीण विकास से जुड़े 50 हजार, स्वास्थ्य और समाज कल्याण पर 20-20 हजार तथा कृषि क्षेत्र से संबंधित 45 हजार से अधिक सुझाव दर्ज किए गए। टूरिज्म में 5 हजार से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं।  इन जिलों से मिल रही भागीदारी एटा, मेरठ, मुजफ्फनगर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, मैनपुरी, कानपुर देहात, हरदोई आदि जनपदों से सबसे अधिक भागीदारी रही। इन जिलों से 90 हजार से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए। यह दर्शाता है कि जनता इस अभियान को गंभीरता से ले रही है। लड़कियों की शिक्षा से लेकर युवाओं के प्रशिक्षण तक मिल रहे सुझाव लखनऊ से पुष्पा शुक्ला ने सुझाव दिया है कि लड़कियों की शिक्षा से लेकर रोजगार तक एक सतत कार्यक्रम बनाया जाए, जिसमें स्कूल स्तर पर साप्ताहिक एसटीईएम एवं वित्तीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, मुफ्त सैनिटरी किट, आईटीआई/पॉलीटेक्निक आधारित लघु कौशल-पाठ्यक्रम (ईवी, उद्यमिता, प्रशिक्षण आदि) और बिज़नेस पास के जरिए उपस्थिति सुनिश्चित कर 2-3 वर्षों में ड्रॉप-आउट दर को 5% से कम करने जैसे कदम शामिल हों। बांदा के योगेश मिश्रा का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरती तकनीकों के रोजगार अवसरों को नोएडा की तरह लखनऊ, आगरा, मेरठ, कानपुर और वाराणसी जैसे टियर-2 शहरों में भी विस्तार दिया जाए, क्योंकि ये शहर हाई स्पीड ट्रेन नेटवर्क से जुड़े होने के कारण प्रतिभा और संसाधनों को आकर्षित कर सकते हैं। वहीं, जालौन के यश तिवारी ने मांग की है कि जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या एवं गुणवत्ता दोनों बढ़ाई जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र बाहर गए बिना अपने गृह जिले में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें और क्षेत्र का समग्र विकास संभव हो सके। विकसित उत्तर प्रदेश@2047 विजन के लिए नागरिकों से सुझाव आमंत्रित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प विकसित उत्तर प्रदेश@2047 को साकार करने के लिए प्रदेशभर में 5 सितम्बर से 5 अक्टूबर 2025 तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने बताया कि नागरिक अपने सुझाव https://samarthuttarpradesh.up.gov.in पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। 19 सितम्बर को अर्थ एवं संख्या प्रभाग के 300 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया गया। सचिव नियोजन/महानिदेशक अर्थ एवं संख्या सेल्वा कुमारी जे. ने सभी को स्वयं, परिवार व मित्रजनों से सुझाव दर्ज कराने का आह्वान किया। निदेशक अलका बहुगुणा ढौंडियाल ने अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। प्राप्त सुझावों में से उत्कृष्ट व सार्थक विचारों का चयन कर प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। नियोजन विभाग इस विजन डॉक्युमेंट का नोडल विभाग है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: भीमा कोरेगांव के आरोपी वरवर राव को झटका

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को भीमा कोरेगांव मामले में गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत आरोपी कार्यकर्ता और कवि पी वरवर राव पर लगाई गई मेडिकल जमानत की शर्त में बदलाव करने की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. इस शर्त के तहत, अगर उन्हें ग्रेटर मुंबई क्षेत्र छोड़ना है, तो उन्हें ट्रायल कोर्ट से पूर्व अनुमति लेनी होगी. जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर की दलीलें सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया गया. ग्रोवर ने दलील दी कि राव चार साल से जमानत पर हैं, लेकिन उनकी सेहत बिगड़ती जा रही है. पहले उनकी पत्नी उनकी देखभाल करती थीं, लेकिन अब वह हैदराबाद चली गई हैं इसलिए उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है. वरिष्ठ वकील ने कहा, ‘आज भी वह चक्कर आने से गिर पड़े. राव की पेंशन 50,000 रुपए है, लेकिन उन्हें हर महीने 76,000 रुपए खर्च करने पड़ते हैं. तेलंगाना में उन्हें मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं, लेकिन ग्रेटर मुंबई में उन्हें हर बार स्वास्थ्य सुविधाओं पर पैसा खर्च करना पड़ता है.’ जस्टिस माहेश्वरी ने असहमति जताते हुए कहा, ‘सरकार उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखेगी, अन्यथा उसी कोर्ट में जाएं, हमें इसमें कोई रुचि नहीं है.’ वहीं, ग्रोवर ने यह भी बताया कि मामले की कार्यवाही सीआरपीसी की धारा 207 के चरण में है और मुकदमा जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है. उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि राव को बाद में आवेदन करने की अनुमति दी जाए, लेकिन कोर्ट ने आदेश में ऐसी कोई बात दर्ज करने से इनकार कर दिया. साल 2022 में मिली थी जमानत दरअसल, अगस्त 2022 में जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने राव को उनकी उम्र, स्वास्थ्य स्थितियों और उनके ओर से बिताई गई 2.5 साल की वास्तविक हिरासत अवधि को ध्यान में रखते हुए मेडिकल आधार पर जमानत दी थी. इसके अलावा, पीठ ने यह भी कहा था कि मामले में मुकदमा शुरू नहीं हुआ है और आरोपपत्र दायर होने के बावजूद आरोप भी तय नहीं किए गए हैं. यह आदेश दिया गया था कि राव मुंबई स्थित विशेष एनआईए अदालत की स्पष्ट अनुमति के बिना ग्रेटर मुंबई क्षेत्र से बाहर नहीं जाएंगे और किसी भी तरह से अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेंगे, न ही किसी गवाह से संपर्क करेंगे और न ही जांच को प्रभावित करने का प्रयास करेंगे.  

PM मोदी ने भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, CM योगी ने की खुलकर तारीफ

मथुरा यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ शुक्रवार सुबह मथुरा पहुंचे। यहां उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति महोत्सव मेले में शिरकत की। वहीं सीएम योगी ने यहां मौजूद जनसभा को संबोधित भी किया। सीएम योगी ने इस दौरान कहा कि आज भारत का युवा नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनने की क्षमता रखता है। सीएम योगी ने कहा कि खुद को धर्मनिरपेक्ष बताने वाली केंद्र की पिछली सरकारें भारत को विश्व शक्ति बनाने में नाकाम रहीं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे संभव कर दिखाया है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 11 वर्षों में हमने भारत को बदलते देखा है।  '11 सालों में भारत ने की अभूतपूर्व प्रगति' सीएम योगी ने कहा, "पंडित दीन दयाल उपाध्याय का सपना तब साकार होता है जब भारत और पीएम मोदी के मुंह से वोकल फॉर लोकल और स्वदेशी के मंत्र को सुनता है और उसे प्रभावी ढंग से जमीन पर उतरते हुए देखता है। भारत ने पिछले 11 साल में हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। पिछले 11 वर्षों में आपने इस नए बदलते हुए भारत को देखा होगा। पहले भारत दुनिया के बॉटम 5 देशों में गिना जाता था, लेकिन आज वह दुनिया के टॉप 4 अर्थव्यवस्था में भारत का नाम है और अगले तीन वर्ष तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा।" 'पीएम मोदी ने किया असंभव को संभव' उन्होंने आगे कहा, "पिछले 11 वर्षों में हमने भारत को बदलते देखा है। पिछली सरकारों के लोग, जो खुद को धर्मनिरपेक्ष कहते थे, अपनी सरकारों में भारत को विश्व शक्ति बनाने के लिए असंभव शब्द जोड़ देते थे। इस असंभव को पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संभव कर दिखाया है, जिन्होंने दीनदयाल उपाध्याय के मंत्र को आत्मसात किया है। यानी पंडित दीन दयाल उपाध्याय के मंत्र में असंभव को संभव करने का मंत्र छिपा हुआ है। स्वदेशी है तो हम सशक्त हैं, स्वदेशी है तो स्वावलंबन भी है, यही पं. दीनदयाल उपाध्याय जी का मंत्र था।’’

भारत का ऑपरेशन सिंदूर: आधी रात 1.30 बजे हमले के पीछे की असली वजह सामने आई

नई दिल्ली  पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने रात के डेढ़ बजे ही ऑपरेशन सिंदूर क्यों चलाया था? इस बारे में CDS अनिल चौहान ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने झारखंड की राजधानी रांची में एक कार्यक्रम में बताया कि 7 मई 2025 की रात को पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया था. रात 1 बजे से 1:30 बजे के बीच हमला किया था और इतनी रात को इतने बजे हमला करने के पीछे भी 2 वजहें थीं.   इन 2 वजहों से किया आधी रात को हमला उन्होंने कहा कि आधी रात के करीब अंधेरा घना होता है, उस समय सैटेलाइट इमेज कैप्चर करना और सबूत इकट्ठा करना सबसे मुश्किल काम होता है. फिर भी भारतीय सेना ने रात 1 से 1:30 बजे के बीच हमला किया, क्योंकि भारत को अपने सैटेलाइट पर भरोसा था कि वे रात को भी तस्वीरें कैप्चर कर पाएंगे. दूसरा कारण यह था कि भारतीय सेना पाकिस्तान के नागरिकों को नुकसान से बचाना चाहती थी. हालांकि हमला करने का सबसे अच्छा समय सुबह 5:30-6 बजे के बीच होता, लेकिन उस समय पहली अजान या पहली नमाज होती है. बहावलपुर और मुरीदके में उस समय लोगों की काफी चहल-पहल हो सकती थी. इसलिए रात के एक से डेढ़ बजे के बीच हमला किया.   7 मई को ही क्यों किया गया था अटैक? CDS अनिल चौहान ने बताया कि 7 मई की रात को ही पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक करने का फैसला कई कारणों से किया गया था. एक तो उन दिनों फ्लाइट्स की आवाजाही बंद थी, दूसरा मौसम भी अनुकूल था. 7 मई के बाद बारिश होने का पूर्वानुमान था, इसलिए फैसला किया गया कि 7 मई की रात को मौसम साफ रहेगा तो उसी तारीख को ऑपरेशन सिंदूर चलाया जाए, जिसमें इस बार सेना के तीनों अंगों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जबकि उरी और बालाकोट एयर स्ट्राइक में सिर्फ एयरफोर्स ने जिम्मेदारी निभाई थी. सेना को बैक स्पोर्ट के लिए स्टैंड बाय मोड पर रखा गया था.