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ट्रंप की नई योजना से गाज़ा का भूगोल बदला, बफर ज़ोन और रंगबिरंगे मैप का विश्लेषण

गाज़ा  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा युद्ध को खत्म करवाने के लिए नया प्लान तैयार किया है. उन्होंने व्हाइट हाउस में इस प्लान को जारी किया. ट्रंप ने यह भी कहा है कि इजरायली पीएम बेंजामिन नेतान्याहू इस प्लान से सहमत हैं. इसके साथ ही ट्रंप ने गाजा का नया नक्शा तैयार किया है. इस नक्शे के अनुसार गाजा और इजरायल के बीच अब हमेशा के लिए एक बफर जोर रहेगा. यानी कि इस रेखा के पार न तो इजरायली सैनिक जा सकेंगे, न ही फिलीस्तीन के लोग आ सकेंगे.  ट्रंप ने कहा कि इजरायल और अन्य देशों ने उनके द्वारा बताई गई रूपरेखा को स्वीकार कर लिया है. ट्रंप ने कहा, "अगर हमास इसे स्वीकार कर लेता है, तो इस प्रस्ताव में सभी शेष बंधकों को तुरंत रिहा करने का प्रावधान है, लेकिन किसी भी स्थिति में 72 घंटे से ज़्यादा समय नहीं लगेगा." इस प्रावधान के तहत हमास को सभी जीवित और मृत बंधकों को रिहा करना होगा. इजरायल-गाजा बॉर्डर पर बफर जोन राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा जारी नक्शे में तीन लाइनें हैं. नीली, पीली और लाल. इसके बाद बफर जोन है. नीली वो रेखा है जहां तक अभी इजरायली रक्षा बलों का नियंत्रण है.  ये रेखा खान यूनुस के पास है.  इसके बाद राफा से होकर पीली रेखा गुजरती है. इसे फर्स्ट विदड्राअल लाइन कहा गया है. इस पीली रेखा का मतलब है कि बंधकों के छोड़े जाने के साथ ही इजरायली सेना पीली रेखा तक आ जाएगी.  इसके बाद सेकेंड विदड्राअल लाइन है. ये लाल रेखा है. यानी कि सेकेंड विदड्राअल के बाद इजरायल की सेना यहां आकर रूक जाएगी.   इसके बाद बफर जोन शुरू होता है. इजरायल के सैनिक थर्ड विदड्राअल के बाद यहीं आकर रुक जाएंगे.    हमास को चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है, "मुझे उम्मीद है कि हम शांति के लिए एक समझौता करेंगे, और अगर हमास इस समझौते को अस्वीकार कर देता है, जो हमेशा संभव है, तो इस डील से सिर्फ वे ही बच जाएंगे.  अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी देते हुए कहा, "बाकी सभी ने इसे स्वीकार कर लिया है. लेकिन मुझे लगता है कि हमें एक सकारात्मक जवाब मिलेगा. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है, तो जैसा कि आप जानते हैं बीबी (इजरायली पीएम), आपको जो करना होगा, उसके लिए हमारा पूरा समर्थन है." प्रस्ताव में कहा गया है, "इजरायली सेना बंधकों की रिहाई की तैयारी के लिए सहमत रेखा पर वापस लौट जाएगी." इस प्लान  में यह भी कहा गया है कि गाजा का "गाजा के लोगों के लाभ के लिए पुनर्विकास" किया जाएगा, और "यदि दोनों पक्ष इस प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा." इजरायल रिहा करेगा 250 कैदी हमास द्वारा सभी बंधकों को रिहा कर दिए जाने के बाद इजरायल 250 आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों को रिहा करेगा, साथ ही 7 अक्टूबर 2023 के बाद हिरासत में लिए गए 1,700 गाजावासियों को भी रिहा करेगा. इजरायल रिहा किए गए प्रत्येक इज़रायली बंधक के बदले, 15 मृत गाजावासियों के अवशेष भी रिहा करेगा.  गाजा छोड़ने को स्वतंत्र होंगे हमास सदस्य सभी बंधकों की वापसी के बाद, शांति की राह पर चलने को इच्छुक हमास के सदस्यों को माफी दे दी जाएगी. इसके लिए उन्हें अपने हथियार सरेंडर करने होंगे. गाज़ा छोड़ने के इच्छुक हमास सदस्यों को उनके गंतव्य देशों तक सुरक्षित मार्ग प्रदान किया जाएगा.  गाजा में हमास का नहीं होगा कोई रोल  हमास और अन्य गुट इस बात पर सहमत हैं कि वे गाजा के शासन में प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या किसी भी रूप में कोई भूमिका नहीं निभाएंगे. सुरंगों और हथियार उत्पादन सुविधाओं सहित सभी सैन्य, आतंकवादी और आक्रामक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर दिया जाएगा और उनका पुनर्निर्माण नहीं किया जाएगा.    

भारत पर शर्तें और सलाहें! अमेरिकी सेक्रेटरी हॉवर्ड ल्यूटनिक का ऊटपटांग बयान

न्यूयॉर्क अमेरिका के कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड ल्यूटनिक (Howard Lutnick) ने कहा है कि अमेरिका को भारत और ब्राजील जैसे देशों को 'दुरुस्त' करना होगा. उन्होंने यह बात टैरिफ विवाद के बीच अमेरिकी चैनल को दिए एक इंटरव्यू साक्षात्कार में कही है. अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया है, जिसमें नई दिल्ली की रूसी तेल खरीद पर लगाया गया 25 प्रतिशत शुल्क शामिल है.  ल्यूटनिक ने कहा कि इन देशों को अपने बाजार खोलकर और अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई रोककर सही जवाब देना होगा. भारत अपनी ऊर्जा खरीद को राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता से प्रेरित बताता रहा है.  ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया है. यह टैरिफ दरों में सबसे ज्यादा है, जो किसी भी देश पर लगाया गया है. इस टैरिफ में रूसी तेल की खरीद पर लगाया गया 25 फीसदी का शुल्क भी शामिल है. भारत, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों द्वारा प्रतिबंध लगाने पर रियायती रूसी तेल खरीद रहा है. भारत का मानना है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की गतिशीलता पर आधारित है. 'अमेरिका के साथ सहयोग करना होगा…' ल्यूटनिक ने कहा, "भारत, ब्राजील, स्विट्जरलैंड, और ताइवान जैसे कई देशों को 'दुरुस्त करने' की जरूरत है, क्योंकि इनके साथ अमेरिका के व्यापारिक मुद्दे अनसुलझे हैं."  उन्होंने आगे कहा कि इन देशों को यह समझना होगा कि अगर वे अमेरिकी उपभोक्ताओं को कुछ बेचना चाहते हैं, तो उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ सहयोग करना होगा. वक्त के साथ इन व्यापार मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा. व्यापार समझौते पर गतिरोध… अमेरिका लगातार चौथे साल (2024-25) भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बना रहा है. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 131.84 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है. अमेरिका भारत के कुल वस्तु निर्यात में करीब 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 फीसदी और कुल व्यापार में 10.73 फीसदी का योगदान देता है. दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा $191 बिलियन से $500 बिलियन तक दोगुना करने की उम्मीद कर रहे हैं. समझौते की तारीख पर संशय केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में एक डेलिगेशन पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क में अमेरिकी पक्ष के साथ बैठकें कर रहा था. दोनों देशों को उम्मीद थी कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते की पहली किस्त अक्टूबर-नवंबर 2025 तक पूरी हो जाएगी. अमेरिकी अधिकारियों की एक टीम ने भी समझौते पर चर्चा के लिए 16 सितंबर को भारत का दौरा किया था और कोशिशों को तेज करने का फैसला किया था.  

खुद को झुकाने को तैयार पाकिस्तान? शहबाज-मुनीर ने ट्रंप के सामने पेश किया खास तोहफा

वॉशिंगटन  पाकिस्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रिझाने में जुटा हुआ है। इसके लिए वह हर तरह के जतन कर रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर ट्रंप के लिए खास तोहफा लेकर पहुंचे। जानकारी के मुताबिक दोनों ने रेयर अर्थ मटीरियल लकड़ी के बक्से में रखकर ट्रंप के लिए पेश किया। माना जा रहा है कि उनकी यह कोशिश अमेरिका की नजरों में खास मुकाम हासिल करने के लिए है। बता दें कि ट्रंप इस बेहद अहम मिनरल सप्लाई चेन पर चीन के प्रभुत्व को खत्म करना चाहते हैं। व्हाइट हाउस ने एक तस्वीर जारी की है। इसमें पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर एक खास लकड़ी का बॉक्स पकड़े नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि इस बॉक्स में रेयर अर्थ मटीरियल भी रखा हुआ है। वहीं, बगल में खड़े पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ मुस्कुराते हुए नजर आ रहे हैं। यह फोटो अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बंद दरवाजों के पीछे हुई मीटिंग के बाद आई है। इससे करीब हफ्ते भर पहले अमेरिका की मेटल कंपनी और पाकिस्तान के बीच 500 मिलियन डॉलर की डील हुई है। वहीं, इस महीने की शुरुआत में पाकिस्तान की एक आर्मी इंजीनियरिंग संस्था ने मिसौरी-स्थित यूएस स्ट्रैटेजिक मेटल्स ने देश में एक पॉली-मेटैलिक रिफाइनरी स्थापित करने के लिए के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। अगस्त में, इस्लामाबाद ने अमेरिका के सामने मुनीर ने खजाना पेश किया और समझौते पर पहुंचे। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि वह उसके खनिज और तेल भंडार में अमेरिकी निवेश को आकर्षित करेगा। मुनीर ने पाकिस्तानी मीडिया आउटलेट जियो ग्रुप के वरिष्ठ संपादक सुहैल वारैच को बताया कि पाकिस्तान के पास दुर्लभ पृथ्वी का खजाना है। इस खजाने से पाकिस्तान का कर्ज भी कम होगा और पाकिस्तान जल्द ही सबसे समृद्ध हो जाएगा।

ट्रंप का नया कदम: 1 अक्टूबर से दवाओं पर 100% और ट्रकों पर 50% तक टैक्स लागू

नई  दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सीधे दवा उद्योग को निशाना बनाते हुए विदेशी फार्मा कंपनियों पर बड़ा फैसला सुनाया है, जो भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एलान किया कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा – अगर वह अमेरिका में निर्मित नहीं हो रही है। यानी, कोई कंपनी यदि अमेरिका में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित नहीं कर रही है, तो उसे इस भारी-भरकम टैक्स का सामना करना पड़ेगा। दवा कंपनियों पर सीधा असर यह फैसला उन देशों के लिए झटका है जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में दवा उत्पाद निर्यात करते हैं। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, उसके लिए यह निर्णय न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अमेरिका में निर्माण कार्य वास्तव में शुरू कर चुकी है, तो उस पर टैरिफ लागू नहीं होगा। “IS BUILDING” का मतलब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। फर्नीचर और घरेलू सामान पर भी टैरिफ ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति सिर्फ दवा उद्योग तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ऐलान किया कि: -किचन कैबिनेट्स और बाथरूम वैनिटीज पर 50% टैरिफ -अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर (गद्देदार फर्नीचर) पर 30% टैरिफ -भारी ट्रकों और अन्य घरेलू उत्पादों पर भी उच्च टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रंप का कहना है कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया है, जिससे स्थानीय निर्माण उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। टैरिफ लगाना अब जरूरी हो गया है ताकि अमेरिका फिर से अपनी उत्पादन क्षमता हासिल कर सके। कई देशों पर नई टैरिफ दरें ट्रंप ने अगस्त में भी कई देशों पर टैरिफ बढ़ाए थे, जो अब लागू हो चुके हैं: भारत: 50% टैरिफ रूस: 25% अतिरिक्त जुर्माना ब्राज़ील: 50% टैरिफ दक्षिण अफ्रीका: 30% टैरिफ वियतनाम: 20% टैरिफ जापान व दक्षिण कोरिया: 15% टैरिफ अमेरिका फर्स्ट की वापसी? ट्रंप की इन घोषणाओं को उनकी पुरानी रणनीति America First का विस्तार माना जा रहा है। वे पहले भी टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं – चाहे वह चीन के साथ ट्रेड वॉर हो या यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क। इस नई घोषणा से अमेरिका में फार्मा इंडस्ट्री को तो बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक व्यापार संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।  

TikTok की चीन से विदाई, ट्रंप की चाल के बाद नया मालिक कौन?

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टिकटॉक को लेकर बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने  एक्जीक्यूटिव ऑर्डर साइन किया है, जिसमें TikTok के अमेरिकी ऑपरेशन्स को बेचने की मंजूरी दी गई है. यानी टिकटॉक का अमेरिकी ऑपरेशन किसी अमेरिकी इन्वेस्टर ग्रुप को बेचने की मंजूरी दे दी गई है.  ये अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद था. अमेरिका ने कई बार टिकटॉक को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है. ऐसे में अगर टिकटॉक का ऑपरेशन किसी अमेरिकी कंपनी को मिलेगा, तो इससे ऐप को अमेरिका में बैन नहीं किया जाएगा.  कितनी लगाई गई है कीमत? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि टिकटॉक अमेरिका की वैल्यू 14 अरब डॉलर लगाई गई है. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर की वजह से टिकटॉक पर बैन फिलहाल के लिए टल गया है. एक्जीक्यूटिव ऑर्डर डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस को कानून को लागू करने से रोकता है, जिसके तहत टिकटॉक की पैरेंट कंपनी ByteDance को देश भर में बैन किया जाना था.  कौन होगा नया मालिक और क्या बदलेगा? डील के तहत TikTok US अब नए बोर्ड ऑफ डायरेक्ट नियुक्त करेगा. साथ ही एल्गोरिद्म रिकमेंडेशन, सोर्स कोड और कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम को भी नए मालिक को ट्रांसफर किया जाएगा. ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद, Oracle अब TikTok US के सिक्योरिटी ऑपरेशन्स को हैंडल करेगा और क्लाउड सर्विस भी ऑफर करेगी.  इसके अलावा Oracle, Silver Lake और अबू धाबी बेस्ड MGX ग्रुप नई इकाई में 45 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी. वेंस ने रॉयटर्स को बताया, 'शुरुआत में चीन की ओर से कुछ प्रतिरोध था, लेकिन हम चाहते थे कि टिकटॉक काम करता रहे. हम ये भी चाहते थे कि अमेरिकी डेटा सुरक्षित रहे.' चीनी राष्ट्रपति से ट्रंप ने की बात ट्रंप ने भी रिपोर्टर्स ने बातचीत ने कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बात की और उन्होंने इस पर अपनी सहमति दी थी. डोनाल्ड ट्रंप ने बताया, 'मैंने उनसे (शी जिनपिंग) बताया कि हम ये करने जा रहे हैं और उन्होंने कहा आप करिए.' उन्होंने ये भी बताया कि अब TikTok US पूरी तरह से अमेरिका द्वारा ऑपरेट किया जाएगा.  ट्रंप ने ये भी कहा है कि टिकटॉक के नए मालिक इस बात का ख्याल रखेंगे कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा फैलाने में ना हो. हालांकि, इस पूरे मामले पर ByteDance ने कोई जानकारी नहीं दी है. कंपनी ने पहले ऐसा जरूर कहा था कि वे टिकटॉक को अमेरिका में बनाए रखने के लिए पूरी तरह से कानून का पालन करेंगे.

ट्रंप का बड़ा फैसला: दवाओं और ट्रकों पर भारी टैक्स, 1 अक्टूबर से लागू

नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी व्यापारिक नीतियों को लेकर सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने सीधे दवा उद्योग को निशाना बनाते हुए विदेशी फार्मा कंपनियों पर बड़ा फैसला सुनाया है, जो भारत समेत कई विकासशील और विकसित देशों को प्रभावित कर सकता है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एलान किया कि 1 अक्टूबर 2025 से अमेरिका में किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा – अगर वह अमेरिका में निर्मित नहीं हो रही है। यानी, कोई कंपनी यदि अमेरिका में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित नहीं कर रही है, तो उसे इस भारी-भरकम टैक्स का सामना करना पड़ेगा। दवा कंपनियों पर सीधा असर यह फैसला उन देशों के लिए झटका है जो अमेरिका को बड़ी मात्रा में दवा उत्पाद निर्यात करते हैं। भारत, जो विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है, उसके लिए यह निर्णय न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक मोर्चे पर भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कंपनी अमेरिका में निर्माण कार्य वास्तव में शुरू कर चुकी है, तो उस पर टैरिफ लागू नहीं होगा। “IS BUILDING” का मतलब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर वास्तविक कार्य होना चाहिए। फर्नीचर और घरेलू सामान पर भी टैरिफ ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति सिर्फ दवा उद्योग तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ऐलान किया कि: -किचन कैबिनेट्स और बाथरूम वैनिटीज पर 50% टैरिफ -अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर (गद्देदार फर्नीचर) पर 30% टैरिफ -भारी ट्रकों और अन्य घरेलू उत्पादों पर भी उच्च टैरिफ लगाए जाएंगे। ट्रंप का कहना है कि विदेशी कंपनियों ने अमेरिकी बाजार में जरूरत से ज्यादा सामान भर दिया है, जिससे स्थानीय निर्माण उद्योग पर सीधा असर पड़ा है। टैरिफ लगाना अब जरूरी हो गया है ताकि अमेरिका फिर से अपनी उत्पादन क्षमता हासिल कर सके। कई देशों पर नई टैरिफ दरें ट्रंप ने अगस्त में भी कई देशों पर टैरिफ बढ़ाए थे, जो अब लागू हो चुके हैं: भारत: 50% टैरिफ रूस: 25% अतिरिक्त जुर्माना ब्राज़ील: 50% टैरिफ दक्षिण अफ्रीका: 30% टैरिफ वियतनाम: 20% टैरिफ जापान व दक्षिण कोरिया: 15% टैरिफ अमेरिका फर्स्ट की वापसी? ट्रंप की इन घोषणाओं को उनकी पुरानी रणनीति America First का विस्तार माना जा रहा है। वे पहले भी टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहे हैं – चाहे वह चीन के साथ ट्रेड वॉर हो या यूरोपीय उत्पादों पर शुल्क। इस नई घोषणा से अमेरिका में फार्मा इंडस्ट्री को तो बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक व्यापार संतुलन पर इसका गहरा असर पड़ेगा।

अमेरिका में जयशंकर-गोयल की वार्ता से आई अच्छी खबर, मोदी-ट्रंप बैठक करीब

नई दिल्ली अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के एक बयान से भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों पर शुभ संकेत आते दिख रहे हैं. दरअसल मार्को रुबियो ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को फिक्स के लिए तैयार हैं. रुबियो ने कहा कि ये टैरिफ भारत के रूस से तेल खरीदने की वजह से लगाए गए थे. वहीं अमेरिका यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर नए प्रतिबंधों पर भी विचार कर रहा है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारत-अमेरिका के बीच संबंधों का समीकरण बदलने लगा था. इसके बाद रूस-यूक्रेन के मुद्दे पर दोनों देशों को बीच तनाव और बढ़ा. परिस्थितियां ऐसी आ गईं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सिर्फ भारत के खिलाफ 50 फीसदी का टैरिफ लगा दिया बल्कि ऐसे बयान भी आए कि इस वक्त के सबसे बड़े युद्ध का जिम्मेदार भारत ही है. भारत और अमेरिका के रिश्ते ही नहीं व्यापार भी प्रभावित हुआ. हालांकि दोनों देशों के बीच बर्फ थोड़ी पिघलती दिख रही है. भारत-अमेरिका के बीच नरमी के संकेत मार्को रुबियो ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के मौके पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात की. दोनों के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई. यह बैठक उन तनावों के बाद पहली बार हुई है जो भारत पर अमेरिकी टैरिफ और रूस से भारत के ऊर्जा आयात को लेकर बढ़े थे. एस. जयशंकर से यूएनजीसी में मुलाकात के बाद रुबियो ने कहा है – ‘भारत, अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण सहयोगी है, खासतौर पर व्यापार, ऊर्जा, फार्मा और क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में.’ उन्होंने भारत के राजदूत के तौर पर नामित सर्गियो गोर से भी मुलाकात की. मिल सकते हैं पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप! जब से भारत और अमेरिका से संबंधों में तनाव आया है, तब से पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच सिर्फ सोशल मीडिया पर ही संपर्क हुआ है. जिसमें पीएम मोदी के जन्मदिन पर दी गई ट्रंप की बधाई खासी चर्चा में रही. माना जा रहा था कि यूएनजीसी की मीटिंग में दोनों के बीच मुलाकात हो सकती है लेकिन जब इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर के जाने का ऐलान हुआ, तो ये उम्मीद भी खत्म हो गई. ऐसे में जब चीज़ें सामान्य होती दिख रही हैं, तो दोनों देशों की ओर से कोशिश की जा रही है कि पीएम मोदी और अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप के बीच जल्द ही मुलाकात हो और बातचीत आगे बढ़े. भारत पर क्या कहा मार्को रुबियो ने? भारत को लेकर रुबियो ने कहा- ‘हमने भारत के खिलाफ कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन हमें उम्मीद है कि इसे सुधारा जा सकता है. राष्ट्रपति के पास और विकल्प हैं और वे आगे और कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं.’ मार्को रुबियो का ये बयान दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक अच्छा संकेत माना जा रहा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की अमेरिका यात्रा के साथ ही ये बयान आया है, जो मौजूदा हालात में बेहद अहम है. आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया, जिससे कुल शुल्क 50 फीसदी तक पहुँच गया है. यह दुनिया में सबसे ऊंचे टैरिफ में से एक है.

H-1B वीजा के नए नियमों के तहत भारी बढ़ोतरी, US में आवेदन पर 88 लाख रुपये तक शुल्क

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा के नियम बदल दिए हैं. अब कुछ H-1B वीजा धारक अमेरिका में गैर-इमिग्रेंट वर्कर के रूप में सीधे एंट्री नहीं ले पाएंगे. नए आवेदन के साथ 100,000 डॉलर यानी 88 लाख रुपये से ज्यादा की फीस देना जरूरी होगा. 100,000 डॉलर की नई फीस कंपनियों के लिए खर्च काफी बढ़ा सकती है. हालांकि बड़ी टेक कंपनियों के लिए यह कोई बड़ी समस्या नहीं होगी क्योंकि वे टॉप प्रोफेशनल्स के लिए भारी खर्च करती रहती हैं, लेकिन इससे छोटे टेक फर्म और स्टार्टअप दबाव में आ सकते हैं. व्हाइट हाउस के स्टाफ सेक्रेटरी विल शार्फ ने कहा, "H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम उन वीजा सिस्टम्स में से एक है जिसका सबसे ज्यादा दुरुपयोग हुआ है. इस वीजा का मकसद यही है कि ऐसे हाईली स्किल्ड लोग अमेरिका में काम कर सकें, जिनके काम अमेरिकी कर्मचारी नहीं करते. यह प्रोक्लेमेशन कंपनियों द्वारा H-1B आवेदकों को स्पॉन्सर करने की फीस को 100,000 डॉलर कर देगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि जो लोग अमेरिका आ रहे हैं, वे वास्तव में बहुत ही उच्च योग्य हैं और उन्हें अमेरिकी कर्मचारियों से बदला नहीं जा सकता." अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लूटनिक ने कहा, "अब बड़ी टेक कंपनियां या अन्य बड़ी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को ट्रेन नहीं करेंगी. उन्हें सरकार को 100,000 डॉलर देना होगा और उसके बाद कर्मचारी को भी भुगतान करना होगा. यह आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं है. अगर आप किसी को ट्रेन करने जा रहे हैं, तो इसे हमारे देश की महान यूनिवर्सिटी से हाल ही में ग्रैजुएट हुए अमेरिकी छात्रों में से किसी एक को ट्रेन करें, अमेरिकियों को काम के लिए तैयार करें, और हमारे जॉब्स लेने के लिए लोगों को लाना बंद करें. यही नीति है और सभी बड़ी कंपनियां इसके साथ हैं." टेक्नोलॉजी और स्टाफिंग कंपनियां H-1B वीजा पर बहुत निर्भर हैं. अमेजन ने 2025 की पहली छमाही में 10,000 से ज्यादा H-1B वीजा हासिल किए हैं. वहीं माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियों को 5,000 से ज्यादा वीजा अप्रूवल मिला है. H-1B वीजा हासिल करने वालों में 71% भारत H-1B वीजा के लगभग दो-तिहाई पद कंप्यूटिंग या आईटी क्षेत्र में हैं. लेकिन इंजीनियर, शिक्षक और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स भी इस वीजा का इस्तेमाल करते हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल H-1B वीजा पाने वालों में भारत सबसे बड़ा लाभार्थी था भारतीय प्रोफेशनल्स की हिस्सेदारी 71 फीसदी रही थी, जबकि चीन दूसरे नंबर पर था और उसे केवल 11.7% वीजा मिला. H-1B वीजा के नियम बदलना ट्रंप का हाई-प्रोफाइल कदम जनवरी से सत्ता में आने के बाद, ट्रंप ने वाइड-रेंज इमिग्रेशन क्रैकडाउन शुरू किया है, जिसमें कुछ कानूनी इमिग्रेशन को सीमित करने के कदम शामिल हैं. H-1B वीजा प्रोग्राम को बदलना उनके प्रशासन का अब तक का सबसे हाई-प्रोफाइल कदम है. H-1B प्रोग्राम के तहत हर साल 65,000 वीजा दिए जाते हैं, जो विशेष क्षेत्रों में अस्थायी विदेशी कर्मचारियों को लाने के लिए होते हैं. इनके अलावा, एडवांस डिग्री वाले कर्मचारियों के लिए 20,000 और वीजा जारी किए जाते हैं. मौजूदा सिस्टम के मुताबिक, H-1B वीजा के लिए अप्लाई करने के लिए पहले एक छोटे शुल्क का भुगतान करके लॉटरी में शामिल होते हैं और अगर चुने जाते हैं, तो बाद में कुछ हजार डॉलर तक के शुल्क देने पड़ते हैं. इन शुल्कों का लगभग पूरा भुगतान कंपनियों को करना होता है. H-1B वीजा तीन से छह साल की अवधि के लिए स्वीकृत होते हैं. H-1B वीजा के मौजूदा नियम क्या हैं? पहले H-1B वीजा दाखिल करने की फीस 215 डॉलर से शुरू होती थी और परिस्थितियों के हिसाब से कई हजार डॉलर तक जा सकती थी. अब 100,000 डॉलर की फीस से यह कई कंपनियों और उम्मीदवारों के लिए बहुत महंगा और मुश्किल हो जाएगा. H-1B सिस्टम के कुछ विरोधी, खासकर अमेरिका की टेक कंपनी में काम करने वाले लोग, कहते हैं कि कंपनियां वीजा लेने वाले लोगों को इसलिए काम पर रखती हैं ताकि कर्मचारियों की सैलरी कम रहे. इसके कारण अमेरिका के योग्य नौकरी चाहने वाले लोग काम नहीं पा पाते. इस बात पर टेक सेक्टर और मजदूरी बाजार में लोग दो हिस्सों में बंटे हुए हैं.

ट्रंप का बदला रुख? भारत पर से हट सकता है 25% एक्स्ट्रा टैक्स का बोझ

नई दिल्ली अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ में बड़ी राहत मिल सकती है और रूसी तेल खरीद पर ट्रंप द्वारा लगाया गया एक्स्ट्रा 25% टैरिफ हटाया जा सकता है. मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने गुरुवार ये उम्मीद जताई है. उन्होंने कहा है कि अमेरिका जल्द ही भारतीय वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ हटा सकता है और रेसिप्रोकल टैरिफ को भी घटाकर 10 से 15% किया जा सकता है. इसके साथ ही सीईए ने भारत-US ट्रेड डील के आगे बढ़ने का भी संकेत दिया है.  8-10 हफ्ते में निकल आएगा हल कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए सीईए नागेश्वरन ने कहा कि उन्हें टैरिफ मसले का अगले 8 से 10 हफ्तों के भीतर समाधान होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि अगले कुछ महीनों में कम से कम 25% के एक्स्ट्रा टैरिफ का समाधान जरूर निकल आएगा.' बिजनेस टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, नागेश्वरन ने आगे कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में तेजी के संकेत मिल रहे हैं, जिससे करीब 50 अरब  डॉलर मूल्य के भारतीय निर्यात पर दबाव कम हो सकता है. ट्रंप ने क्यों लगाया 25% एक्स्ट्रा टैरिफ? गौरतलब है कि भारत पर पहले अमेरिकी की ओर से 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया था, लेकिन अगस्त में भारत की रूसी तेल खरीद को युक्रेन युद्ध में पुतिन की आर्थिक मदद करने का जरिया करार देते हुए जुर्माने के रूप में 25% का एक्स्ट्रा टैरिफ जुर्माने के तौर पर लगाया था. इसके बाद भारत पर कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो गया था और इससे ये ब्राजील के साथ सबसे ज्यादा ट्रंप टैरिफ को झेलने वाले देशों में शामिल हो गया था. अपने संबोधन में नागेश्वरन ने कहा कि अमेरिका और भारत दोनों ही सरकारों के बीच सतह के नीचे तमाम मुद्दों को हल करने के लिए काफी बातचीत हो रही है. भारत-US ट्रेड डील में क्या प्रोग्रेस?   भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील एग्रीकल्चर और डेयरी प्रोडक्ट्स समेत अन्य मुद्दों को लेकर अटकी हुई थी और इस पर बातचीत भी ट्रंप के एक्स्ट्रा टैरिफ के बाद थमी हुई थी. लेकिन बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पीएम मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताते हुए ट्रेड डील के सफल निष्कर्ष निकलने की बात कही थी.  इसके बाद इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका की ओर से प्रमुख वार्ताकर ब्रेंडेन लिंच ट्रेड डील पर छठे चरण की बैठक करने के लिए नई दिल्ली आए थे और भारत के मुख्य व्यापार वार्ताकार राजेश अग्रवाल के साथ करीब 7 घंटे की लंबी चर्चा की थी.  55% सामान हाई टैरिफ के अंदर रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में अमेरिका को भारत के निर्यात का लगभग 55% हिस्सा ट्रंप के हाई टैरिफ के अंदर आ रहा है. इसकी मार से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले सेक्टर्स की बात करें, तो कपड़ा, केमिकल, मरीन फूड, जेम्स एंड ज्वेलरी के साथ ही मशीनरी शामिल हैं. ये इसलिए भी खास हैं, क्योंकि भारत की श्रम-प्रधान निर्यात अर्थव्यवस्था के प्रमुख हिस्से हैं. टैरिफ के असर को देखें, तो अगस्त महीने में अमेरिका को निर्यात घटकर 6.87 अरब डॉलर रह गया, जो 10 महीने का सबसे निचला स्तर है.

भारत-अमेरिका ट्रेड वार: क्या ट्रंप नवंबर में 25% टैरिफ कम करेंगे?

रूस  रूस से तेल आयात करने की वजह से भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घुटने टेकने के लिए मजबूर हो सकते हैं। नवंबर के बाद अमेरिका भारत पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को हटा सकता है। रेसिप्रोकल टैरिफ के नाम पर पहले अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया था, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया था। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने उम्मीद जताई है कि 30 नवंबर के बाद कुछ आयातों पर लगाया गया दंडात्मक शुल्क (25 फीसदी) वापस ले लिया जाएगा। कोलकाता में मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए, सीईए नागेश्वरन ने कहा, "हम सभी पहले से ही इस पर काम कर रहे हैं, और मैं यहां टैरिफ के बारे में बात करने के लिए कुछ समय लूंगा। हां, 25 फीसदी का मूल पारस्परिक टैरिफ और 25 फीसदी का दंडात्मक टैरिफ, दोनों की उम्मीद नहीं थी। मेरा अब भी मानना ​​है कि भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण दूसरा 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया होगा, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों के हालिया घटनाक्रमों को देखते हुए, मेरा मानना ​​है कि 30 नवंबर के बाद दंडात्मक टैरिफ नहीं लगाया जाएगा।'' भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर भी बातचीत चल रही है। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि अगले कुछ महीनों में दंडात्मक शुल्क और उम्मीद है कि पारस्परिक शुल्कों पर कोई समाधान निकल आएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की निर्यात वृद्धि दर, जो वर्तमान में 850 अरब अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष है, एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की राह पर है, जो जीडीपी का 25 फीसदी है, जो एक स्वस्थ और खुली इकॉनमी का संकेत है। ट्रंप ने दर्जनों देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) लागू किया था। यह 1977 का एक कानून है जिसे विदेशी आपात स्थितियों के समय प्रतिबंधों और वित्तीय नियंत्रण के लिए बनाया गया था। भारत पर पहले 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया, लेकिन बाद में रूस से तेल खरीदने को लेकर एक्स्ट्रा 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया गया। इससे भारत से एक्सपोर्ट होने वाले सामानों पर बुरा असर पड़ा है। हालांकि, भारत ने साफ किया है कि भारत राष्ट्र हित की वजह से रूस से तेल आयात कर रहा है। अमेरिकी सीमा शुल्क नोटिफिकेशन में यह भी बताया गया है कि भारत से आने वाले अधिकांश प्रोडक्ट्स पर उच्च शुल्क के साथ-साथ एंटी-डंपिंग या प्रतिपूरक शुल्क जैसे अन्य लागू शुल्क भी लागू होंगे, लेकिन कुछ वस्तुओं को इससे बाहर रखा गया है। इसमें अमेरिकी टैरिफ अनुसूची में अलग से सूचीबद्ध कुछ उत्पाद शामिल हैं। लोहे और इस्पात से बनी वस्तुओं, जिनमें उनके कुछ अन्य उत्पाद भी शामिल हैं, पर अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। यही बात एल्युमीनियम उत्पादों पर भी लागू होती है। सेडान, एसयूवी, क्रॉसओवर, मिनीवैन, कार्गो वैन और हल्के ट्रक जैसे यात्री वाहनों को भी उनके स्पेयर पार्ट्स सहित छूट दी गई है।