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ईरान का आरोप: ट्रंप और नेतन्याहू को किलर बताया, 2500 मौतों का जिम्मेदार बना अमेरिका और इज़राइल

तेहरान  ईरान की सड़कों पर हंगामा जारी है. कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिडंत हो रही है. इस बीच ईरान में चल रहे प्रदर्शनों और टकराव की वजह से मरने वालों की संख्या 2500 को पार कर गई है. कई दिनों के बाद ईरान के लोग दूसरे देशों में अपने रिश्तेदारों को फोन कर पाने में सक्षम हो पा रहे हैं. इसके साथ ही वहीं की खौफनाक हकीकत सामने आ रही है.  ईरान में अबतक मरने वालों की संख्या 2571 हो गई है. अमेरिका की मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार सुबह तक मरने वालों की संख्या कम से कम 2,571 हो गई थी. यह आंकड़ा कई दशकों में ईरान में किसी भी दूसरे विरोध प्रदर्शन या अशांति में हुई मौतों की संख्या से कहीं ज़्यादा है. और  देश की 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाता है. पहला हत्यारा ट्रंप है… हालांकि ईरान का प्रशासन किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं दिखता है. ईरानी अधिकारियों ने एक बार फिर से अमेरिकी ट्रंप को कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिकी रवैये पर जवाब देते हुए लिखा, 'हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." समाचार एजेंसी एपी के अनुसार ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर मौतों की पुष्टि की. एक अधिकारी के हवाले से सरकारी टीवी ने कहा कि मुल्क में "बहुत सारे लोग शहीद" हुए हैं. विद्रोहियों ने खामेनेई के लिए मौत की सजा मांगी ये प्रदर्शन दिसंबर के आखिर में ईरान की खराब अर्थव्यवस्था के गुस्से में शुरू हुए और जल्द ही यहां की मजहबी शासन प्रणाली इसके निशाने पर आ गई. राजधानी में लोग सर्वोच्च धार्मिक नेता खामेनेई की मौत की मांग करने नारे लगा रहे हैं और तस्वीरें बना रहे हैं. ईरान में इस कथित 'अपराध' के लिए मौत की सजा मुकर्रर की जाती है. इस बीच अमेरिका लगातार प्रदर्शनकारियों के साथ अपना सपोर्ट जता रहा है. मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, "ईरानी देशभक्तों, विरोध करते रहो- अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो." ट्रंप ने कहा कि था कि उन्होंने सभी ईरानी अधिकारियों के साथ तबतक के लिए बातचीत रोक दी है जबतक इन हत्याओं को रोका नहीं जाता है. उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द मदद मिलने वाली है. हालांकि घंटों बाद ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा कि उनकी सरकार "उसी हिसाब से" कार्रवाई करने से पहले मारे गए प्रदर्शनकारियों की संख्या पर एक सही रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है. ट्रंप की मदद आ रही है ट्रंप ने ईरानी सुरक्षा बलों के बारे में कहा, "मुझे लगता है कि वे बहुत बुरा बर्ताव कर रहे हैं, लेकिन यह कन्फर्म नहीं है." इस बीच ईरानी सत्ता के रुख में कोई नरमी नहीं दिख रही है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिका के रवैये पर जवाब देते हुए लिखा: "हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल देश की सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण संस्था है जो राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा नीतियों का निर्धारण करती है. यह 1989 में संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत स्थापित हुई. इसके अध्यक्ष ईरान के राष्ट्रपति होते हैं, लेकिन इसके सभी निर्णय सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई लेते हैं. तेहरान के फोन लाइन खुले समाचार एजेंसी एपी के अनुसार लगभग 5 दिनों के बाद फोन लाइन खुलने के बाद तेहरान के लोग मुल्क से बाहर कॉल कर रहे हैं. एक ईरानी चश्मदीद ने सेंट्रल तेहरान में भारी सुरक्षा, जले हुए सरकारी भवन, टूटे हुए ATM और कम राहगीरों के बारे में बताया. इस बीच लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि आगे क्या होगा जिसमें अमेरिका के हमले की संभावना भी शामिल थी. अपनी सुरक्षा की चिंता के कारण सिर्फ़ अपना पहला नाम बताने वाले दुकानदार महमूद ने कहा, "मेरे ग्राहक ट्रंप की प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हैं और सोचते हैं कि क्या वह इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ़ मिलिट्री हमला करने की योजना बना रहे हैं." "मुझे नहीं लगता कि ट्रंप या कोई दूसरा विदेशी देश ईरानियों के हितों की परवाह करता है." रेजा एक टैक्सी ड्राइवर जिसने सिर्फ़ अपना पहला नाम बताया, ने कहा कि कई लोगों के मन में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. उन्होंने कहा, "लोग – खासकर युवा निराश हैं, लेकिन वे विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कर रहे हैं."

US कंपनियों की ट्रंप को चेतावनी, वेनेजुएला में निवेश पर सवाल, ‘कैसे निकालेगा तेल?’

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कंपनियों के सामने वेनेजुएला के तेल उद्योग को पुनर्जीवित करने का प्रस्‍ताव रखा है, जिसे लेकर शुक्रवार को व्‍हाइट हाउस में एक मीटिंग हुई. इस बैठक के दौरान एक्सॉनमोबिल के सीईओ डैरेन वुड्स समेत कई कंपनियों ने यहां निवेश को लेकर समस्‍याओं के बारे में बताया. डैरेन वुड्स ने साफ तौर पर कहा कि वर्तमान में यह लैटिन अमेरिकी देश निवेश के लिहाज से लायक नहीं है.  एक्सॉनमोबिल के सीईओ ने कहा कि वेनेजुएला की अस्थिर कानूनी व्यवस्था, निवेश सुरक्षा की कमी और पुराने हाइड्रोकार्बन कानूनों के कारण पर्याप्त सुधारों के बिना अमेरिकी तेल कंपनियों के लिए यह क्षेत्र सही नहीं होगा. वुड्स ने कहा कि अगर आप वेनेजुएला में आज मौजूद व्यावसायिक संरचनाओं और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को देखें, तो वहां निवेश करना संभव नहीं है.  उन्‍होंने आगे कहा कि इन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और कानून व्‍यवस्‍था में महत्वपूर्ण बदलाव करने होंगे. निवेश के लिए स्‍थायी सुरक्षा उपाय और हाइड्रोजन कानूनों में बदलाव की आवश्‍यकता है. उन्होंने कहा कि एक्सॉनमोबिल ने पहली बार 1940 में वेनेजुएला में प्रवेश किया था और उसकी संपत्ति दो बार जब्त किया जा चुका है, जिस कारण कंपनी सोच समझकर कदम रखना चाहती है.   वेनेजुएला में बड़े बदलाव की जरूरत कंपनी के सीईओ ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं कि तीसरी बार फिर से प्रवेश करने के लिए यहां पर कई तरह के बदलाव की आवश्‍यकता होगी. खासकर ऐतिहासिक स्‍वरूप और वर्तमान स्थिति को देखते हुए कई बदलाव जरूरी हैं. हालांकि इसके बाद भी वुड्स ने कहा कि उन्‍हें विश्‍वास है कि अमेरिका आवश्‍यक बदलाव लाने में मदद कर सकता है.   जांच के लिए जाएगी एक टीम  वुड्स ने कहा कि उन्‍हें उम्‍मीद है कि एक्‍सॉन जल्‍द ही वेनेजुएला में तेल अवसंरचना की स्थिति का आकलन करने के लिए एक तकनीकी टीम भेजेगी. डैरेन वुड्स ने कहा कि कंपनियों को किसी भी निवेश से पहले संभावित लाभ के बारे में जानकारी हासिल करनी होगी.  एक्सॉनमोबिल के सीईओ ने कहा कि आखिरी सवाल यह होगा कि वित्तीय नजरिए से सुरक्षा उपाय कितने टिकाऊ हैं? इसका लाभ कैसा दिखता है? वाणिज्यिक व्यवस्थाएं और कानूनी ढांचे क्या हैं? वेनेजुएला में निवेश पर निर्णय लेने से पहले इन सभी चीजों को व्यवस्थित करना होगा.  मधुमक्‍खी के छत्ते की तरह खड़ी हैं कंपनियां: ट्रंप  ट्रंप का दावा है कि तेल कंपनियों के अधिकारी इस अवसर का लाभ उठाने के लिए मधुमक्खी के छत्ते की तरह कतार में खड़े हैं. अगर आप अंदर तक नहीं जाना चाहते हैं तो बस मुझे बता दीजिए. बैठक के दौरान उन्‍होंने कंपनियों से कहा कि यहां पर 25 लोग अभी नहीं हैं, जो आपकी जगह लेने के लिए लाइन में खड़े हैं. उन्होंने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें सुझाव दिया गया था कि प्रशासन एक जोखिम भरे निवेश का समर्थन करने के लिए वित्तीय गारंटी दे रहा है.    ट्रंप ने कहा कि मुझे उम्‍मीद है कि मुझे कोई बचाव पेश नहीं करना पड़ेगा. दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां यहां पर हैं और वे रिस्‍क को समझती हैं. बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला में निवेश करने वाली कंपनियों को अमेरिकी सरकार द्वारा टैक्‍सपेयर्स के पैसे खर्च किए बिना या जमीन पर सेना तैनात किए बिना 'पूर्ण सुरक्षा' का आश्वासन दिया जाएगा. ट्रंप ने संकेत दिया कि वेनेजुएला अमेरिकी कंपनियों को सुरक्षा प्रदान करेगा और कंपनियां भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था स्वयं करेंगी.

ट्रंप ने मंजूर किया 500% टैरिफ लगाने वाला बिल, भारत, चीन और ब्राजील पर अमेरिकी प्रतिबंध की तैयारी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी. इसके बाद भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ बहुत ज्यादा बढ़ सकता है, कुछ मामलों में यह 500 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह कदम यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार को झकझोर देने वाला बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका के निशाने पर भारत, चीन और ब्राजील आ गए हैं। ट्रंप ने एक ऐसे विवादित विधेयक को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध बना वजह यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका की सख्त रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने साफ कहा है कि जो देश रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध नीति को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं। इसी को रोकने के लिए अमेरिका अब टैरिफ को हथियार बनाने की तैयारी में है। अगले हफ्ते वोटिंग हो सकती है रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि ट्रंप के साथ बैठक अच्छी रही और इस बिल पर अगले हफ्ते संसद में वोटिंग हो सकती है. रूस से तेल खरीदने वालों पर कार्रवाई यह बिल लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है. इसके तहत ऐसे देशों पर सख्ती की जा सकेगी जो जानबूझकर रूस से तेल और यूरेनियम खरीद रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि इससे रूस को जंग जारी रखने के लिए पैसा मिलता है. भारत, चीन और ब्राजील पर दबाव सीनेटर ग्राहम के मुताबिक, इस बिल से राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने की ताकत मिलेगी, ताकि वे सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करें. पिछले साल ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 25 फीसदी टैक्स लगाया था. इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैक्स भी लगाया गया. इससे कुछ भारतीय सामानों पर कुल टैक्स 50 फीसदी तक पहुंच गया और दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई. चीन के साथ भी बिगड़े रिश्ते अमेरिका और चीन के बीच भी टैक्स को लेकर तनाव बढ़ चुका है. अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 145 फीसदी तक टैक्स लगाया, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामान पर 125 फीसदी टैक्स लगा दिया था. हालांकि, बाद में अमेरिका और चीन ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि वे 90 दिनों के लिए अपने-अपने टैरिफ रोक देंगे और बातचीत जारी रखेंगे. समझौते के अनुसार, अमेरिका चीन से आने वाले सामान पर टैक्स 145 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी करेगा. वहीं चीन अमेरिका से आने वाले सामान पर टैक्स 125 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर देगा. भारत को लेकर ट्रंप का बयान हाल के दिनों में ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि भारत पर नए टैक्स लगाए जा सकते हैं. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वह खुश नहीं हैं. ट्रंप ने कहा, 'पीएम मोदी अच्छे आदमी हैं, लेकिन मुझे खुश रखना जरूरी था. हम बहुत जल्दी टैक्स बढ़ा सकते हैं.' चावल पर भी टैक्स की चेतावनी पिछले महीने ट्रंप ने भारतीय चावल पर भी नया टैक्स लगाने की धमकी दी थी. यह बात तब सामने आई, जब व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों ने भारत, चीन और थाईलैंड पर सस्ता अनाज बेचने का आरोप लगाया. अटकी हुई है बातचीत  भारत और अमेरिका के बीच टैक्स को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल रुकी हुई है. अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी खेती से जुड़े सामान पर टैक्स कम करे. वहीं भारत सरकार साफ कह चुकी है कि वह अपने किसानों और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी. किन देशों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? भारत – फिलहाल भारत पर अमेरिका का करीब 50% तक टैरिफ लागू है, जिसे बढ़ाकर सीधे 500% करने का प्रस्ताव है। चीन – पहले से जारी अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के बीच यह फैसला तनाव को और बढ़ा सकता है। ब्राजील – लैटिन अमेरिका की बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण ब्राजील को भी भारी आर्थिक झटका लग सकता है। लिंडसे ग्राहम का बयान अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने उस विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर मैं लंबे समय से काम कर रहा हूं। इसका मकसद रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दंडित करना है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।'  

निकोलस मादुरो ने कोर्ट में उठाया मौका, वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद पर बनाए रखा दावा, डील का हुआ खुलासा

न्यूयॉर्क बीते हफ्ते वेनेजुएला में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के इशारे पर जो कुछ भी हुआ, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके बेडरूम से उठवा लिया. मादुरो और उनकी पत्नी फिलहाल न्यूयॉर्क में कैद हैं और उनके खिलाफ ड्रग्स से जुड़ा मुकदमा शुरू किया गया है. मादुरो के साथ हुई इस घटना से वेनेजुएला का ट्रेड पार्टनर चीन बेहद नाराज हुआ है. चीन के टॉप डिप्लोमैट ने संयुक्त राष्ट्र में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर न्यूयॉर्क लाए जाने के अमेरिका के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है. वेनेजुएला में चीन एक बड़ा स्टेकहॉल्डर है और ऐसे में उसकी यह प्रतिक्रिया जायज मानी जा रही है. चीन आम तौर पर गैर-हस्तक्षेप की नीति का पालन करता है. वो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना की गई सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना करता रहा है. अमेरिका ने चीन के 'ऑल-वेदर' यानी सदाबहार स्ट्रैटेजिक पार्टनर माने जाने वाले देश के नेता को आधी रात उसके ही देश की राजधानी से उठवा लिया गया जो चीन के लिए एक बड़ा झटका है. 'मैं आज भी वेनेजुएला का राष्ट्रपति   …..   अमेरिकी अदालत में पेश हुए निकोलस मादुरो सोमवार को खूब गरजे. उन्होंने भरी अदालत में खुद को बेगुनाह बताया और कहा कि वह किडनैप किए गए हैं. वेनेजुएला से अमेरिकी सेना द्वारा उठाए गए निकोलस मादुरो ने सोमवार को मैनहैटन में अमेरिकी फेडरल कोर्ट में ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के आरोपों पर अपनी पहली पेशी के दौरान मौके का फायदा उठाया और खुद को निर्दोष बताया. अपनी पहली सुनवाई में निकोलस मादुरो ने जज के सामने दावा किया कि वह अब भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति हैं और उन्हें किडनैप किया गया है. अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज एल्विन हेलरस्टीन के सामने पेश होते हुए मादुरो ने कोर्ट को बताया कि उन्हें जबरदस्ती वेनेजुएला से लाया गया था. कोर्टरूम में मौजूद रिपोर्टर्स के मुताबिक, उन्होंने कहा, ‘मुझे किडनैप किया गया है.’इतना ही नहीं, निकोलस मादुरो के वकील ने अदालत में साफ किया कि वे फिलहाल जमानत की कोई मांग नहीं कर रहे हैं. जब अदालत में पेशी हुई तो निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस जेल की वर्दी और बेड़ियों में नजर आए. दोनों ने नार्को-टेररिज्म और ड्रग्स तस्करी के सभी चार आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. अदालत में आक्रामक दिखे मादुरो कोर्ट रूम में निकोलस मादुरो काफी आक्रामक दिखे. उन्होंने कहा कि ‘मुझे काराकस में मेरे घर से अगवा किया गया.’ जज ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई अब 17 मार्च को होगी. सुनवाई के बाद दोनों को दोबारा कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया गया. अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत उन्हें काराकस से पकड़ा था. 'खुद को दुनिया का जज न समझे अमेरिका' चीन ने अमेरिका पर खुद को 'दुनिया का जज' समझने का आरोप लगाया है. चीन ने इस कार्रवाई की वैधता को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका को टार्गेट भी किया है, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को बीजिंग में पाकिस्तान के अपने समकक्ष से मुलाकात के दौरान कहा था, 'हम कभी यह नहीं मानते कि कोई भी देश दुनिया का पुलिसवाला बन सकता है, न ही हम यह स्वीकार करते हैं कि कोई देश खुद को दुनिया का जज घोषित करे.' उन्होंने सीधे अमेरिका का नाम लिए बिना वेनेजुएला में हुए 'अचानक घटनाक्रम' का जिक्र किया. वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए.  बीते शनिवार को 63 साल के मादुरो को आंखों पर पट्टी बांधकर और हथकड़ी लगाकर न्यूयॉर्क ले जाया गया. कैद से उनकी कुछ तस्वीरें सामने आई जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. मादुरो को हटाने के लिए उनके करीबी से हुई थी डील? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने पर बड़ा खुलासा किया है। ट्रंप ने कहा कि उनके पास मादुरो के किसी करीबी अधिकारी से डील करने का मौका था, लेकिन उनकी टीम ने फैसला किया कि इसे बिना मदद के ही अंजाम दिया जाएगा। हाल ही में अमेरिका की सेना ने काराकास में सैन्य अभियान चलाकर मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया और यूएस लेकर गए। यहां उन पर नार्को-टेररिज्म, कोकेन आयात की साजिश और हथियार रखने जैसे आरोपों में मुकदमा चलेगा। मादुरो ने न्यूयॉर्क की अदालत में खुद को बेकसूर बताया। इस अभियान के बाद वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अंतरिम राष्ट्रपति बन गई हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि वेनेजुएला पर अंतिम नियंत्रण उनका है और चुनाव कराना अभी संभव नहीं है, क्योंकि देश को पहले स्थिर करना जरूरी है। ट्रंप ने एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका वेनेजुएला से युद्ध नहीं कर रहा, बल्कि ड्रग तस्करी करने वालों से लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अंतरिम नेतृत्व सहयोग नहीं करता तो दूसरा सैन्य अभियान हो सकता है। व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने बताया कि ट्रंप ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को वेनेजुएला में आर्थिक और राजनीतिक सुधारों का नेतृत्व सौंपा है। वेनेजुएला की सरकार कौन चलाएगा? स्टीफन मिलर के अनुसार, अंतरिम सरकार से पूर्ण सहयोग मिल रहा है, जिससे वेनेजुएला के लोग पहले से कहीं अधिक अमीर होंगे। अमेरिका को आर्थिक और सैन्य लाभ मिलेगा। ट्रंप की टीम में रुबियो के अलावा रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, उप चीफ ऑफ स्टाफ मिलर और उपराष्ट्रपति जेडी वैंस शामिल हैं। मार्को रुबियो ने ट्रंप के वेनेजुएला को चलाने वाले बयान पर कहा कि अमेरिका रोजमर्रा की सरकार नहीं चलाएगा, बल्कि आर्थिक दबाव और सैन्य धमकी से प्रभाव डालेगा। रुबियो ने जोर दिया कि अंतरिम सरकार के कार्यों से ही फैसला लिया जाएगा और अभी चुनाव की बात जल्दबाजी है। ट्रंप ने वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार का जिक्र कर अमेरिकी कंपनियों के निवेश की बात की, जबकि रुबियो ने कहा कि मौजूदा सैन्य स्थिति से ड्रग और तेल शिपमेंट रोके जा रहे हैं। कोर्टरूम में क्या-क्या हुआ?     मादुरो ने अमेरिकी कोर्ट में गरजते हुए कहा कि ‘मुझे मेरे घर से पकड़ा गया था’.     40 मिनट की सुनवाई के दौरान यह एकमात्र ऐसा पल नहीं था, जब … Read more

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार किया, ट्रंप के बयान के बाद वेनेजुएला उपराष्ट्रपति का जवाब

काराकस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए घोषणा की है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को हिरासत में ले लिया है. यह घटनाक्रम वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हुए उन संदिग्ध हवाई हमलों और धमाकों के बाद आया है, जिसकी खबरें पिछले कुछ घंटों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई थीं. लैटिन अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य और राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए दावा किया अमेरिकी सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान के तहत वेनेजुएला के विवादित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया है. इससे पहले शनिवार को काराकस में कई बड़े धमाके सुने गए थे और सरकारी इमारतों के ऊपर काला धुआं उठता देखा गया था. माना जा रहा है कि अमेरिकी हवाई हमलों ने मादुरो के सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद विशेष बलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मादुरो को वेनेजुएला में ही किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है या उन्हें अमेरिका ले जाया जा रहा है. वेनेजुएला के रक्षामंत्री बोले- सरेंडर नहीं करेंगे वेनेजुएला पर हमला: वेनेजुएला के रक्षा मंत्री के जीवित होने और बयान जारी करने की पुष्टि हुई है. इससे पहले खबरें आई थीं कि बमबारी में उनके आवास को निशाना बनाया गया है. रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा, ‘हम न बातचीत करेंगे, न आत्मसमर्पण करेंगे और अंत में जीत हमारी होगी.’ वहीं, इस बीच CBS News ने दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना की एलीट स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट डेल्टा फोर्स ने हिरासत में लिया है. हालांकि वेनेजुएला सरकार की ओर से मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है. ट्रंप बोले- यह शानदार ऑपरेशन था वेनेजुएला पर हमला: न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला में की गई कार्रवाई बेहद सोच समझकर की गई थी और इसमें बेहतरीन योजना तथा शानदार सैनिकों की भूमिका रही. ट्रंप ने इसे “वास्तव में एक शानदार ऑपरेशन” बताया. इसी बीच अमेरिका की ओर से वेनेजुएला में निशाना बनाए गए ठिकानों की पुष्टि भी की गई है. इन लक्ष्यों में कराकस स्थित मुख्य सैन्य अड्डा फुएर्ते तिउना, राजधानी का प्रमुख एयरबेस ला कार्लोटा, संचार और सिग्नल से जुड़ा अहम केंद्र एल वोल्कान, देश का सबसे बड़ा बंदरगाह ला ग्वायरा पोर्ट और मिरांडा प्रांत में स्थित हिगुएरोटे एयरपोर्ट शामिल हैं. इन ठिकानों पर हमले के बाद वेनेजुएला में सैन्य और प्रशासनिक ढांचे को बड़ा झटका लगने की बात कही जा रही है. हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. ट्रंप का बड़ा दावा- मादुरो को गिरफ्तार करके देश से बाहर ले जाया गया वेनेजुएला पर हमला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमला सफलतापूर्वक किया है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया गया है. ट्रंप के मुताबिक यह ऑपरेशन अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से जुड़े और विवरण जल्द साझा किए जाएंगे. ट्रंप ने यह भी बताया कि इस मामले पर आज सुबह 11 बजे मार ए लागो में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. फिलहाल वेनेजुएला सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.  कराकस के ऊपर ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर, वेनेजुएलाई सेना के पास ऐसे विमान नहीं वेनेजुएला पर हमला: कराकस में जारी सैन्य कार्रवाई के बीच सामने आए वीडियो फुटेज ने हालात को और गंभीर बना दिया है. CNN ने बताया कि राजधानी कराकस के ऊपर धुएं के गुबार उठते दिख रहे हैं और उसी इलाके में कई ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर उड़ते नजर आ रहे हैं. अहम बात यह है कि एविएशन जर्नल फ्लाइटग्लोबल के मुताबिक वेनेजुएला की सेना के पास किसी भी तरह के ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर नहीं हैं. इससे यह संकेत और मजबूत हो गए हैं कि कराकस के ऊपर दिखाई दे रहे ये हेलिकॉप्टर विदेशी सैन्य ताकत से जुड़े हो सकते हैं.  ईरान का बयान- अमेरिका का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन वेनेजुएला पर हमला: ईरान के विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है. जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिका की ओर से किया गया हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है. ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है. ईरान के इस बयान से साफ है कि वेनेजुएला पर हमले को लेकर अब पश्चिम एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक विरोध की आवाजें तेज होती जा रही हैं.

ईरान संकट पर ट्रंप कूदे तो खामेनेई का सख्त अल्टीमेटम—नतीजे विनाशकारी होंगे

तेहरान डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान की प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने स्पष्ट कहा है कि अगर ईरान के आंदोलन में डोनाल्ड ट्रंप कूदे तो तबाही हो जाएगी। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार ने शुक्रवार को बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप से पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था फैल जाएगी। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरानी शासन को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का दमन किया गया, तो अमेरिका मूकदर्शक बना नहीं रहेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक संदेश में स्पष्ट किया कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई या उनकी हत्या की, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सड़क पर उतर चुकी है जनता गौरतलब है कि ईरान की खराब अर्थव्यवस्था से आक्रोशित जनता सड़कों पर उतर आई है। गुरुवार को ये प्रदर्शन प्रांतों में भी फैल गए, जहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम सात लोग मारे गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रदर्शन में सात लोगों के मारे जाने से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि देश की सरकार प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के मूड में है। लेकिन प्रदर्शनकारी भी अड़े हुए हैं।   2022 के बाद सबसे बड़ा प्रदर्शन राजधानी तेहरान में प्रदर्शन भले ही धीमे पड़ गए हों, लेकिन अन्य जगहों पर इनमें तेजी आई है। बुधवार को दो और बृहस्पतिवार को पांच लोगों की मौत चार शहरों में हुई। इन चारों शहरों में लूर जातीय समुदाय की बहुलता है। यह विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद से ईरान के सबसे बड़े प्रदर्शन के रूप में उभरा है। वर्ष 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए थे। अर्थव्यवस्था को लेकर सबसे अधिक हिंसा ईरान के लोरेस्टान प्रांत के अजना शहर में देखी गई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वहां सड़कों पर जलती हुई वस्तुएं दिखाई दे रही हैं साथ ही गोलियों की आवाजें गूंजती हैं। अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने तीन लोगों के मारे जाने की खबर दी। सुधार समर्थक मीडिया संस्थानों सहित अन्य मीडिया ने फार्स के हवाले से ही घटनाओं का जिक्र किया है।  

ट्रंप का बड़ा सैन्य दांव: अमेरिका बनाएगा अब तक का सबसे शक्तिशाली युद्धपोत, दुश्मनों की बढ़ेगी चिंता

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना के लिए एक नए विशाल युद्धपोत के निर्माण की योजना की घोषणा की है, जिसे उन्होंने “बैटलशिप” नाम दिया है। यह घोषणा उन्होंने फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में की। ट्रंप ने इसे अमेरिका की प्रस्तावित “गोल्डन फ्लीट” का अहम हिस्सा बताया। ट्रंप ने दावा किया कि यह नया युद्धपोत अब तक बनाए गए किसी भी बैटलशिप से “100 गुना अधिक शक्तिशाली”, सबसे तेज़ और सबसे बड़ा होगा। उनके अनुसार, यह जहाज द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए आयोवा-क्लास बैटलशिप से भी लंबा और भारी होगा, जिनका वजन लगभग 60,000 टन था। ट्रंप ने कहा कि इस नए युद्धपोत में हाइपरसोनिक मिसाइलें, रेलगन और उच्च क्षमता वाले लेज़र हथियार लगाए जाएंगे। हालांकि, अमेरिकी नौसेना अभी इन तकनीकों को पूरी तरह विकसित करने की प्रक्रिया में है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में लागत बढ़ने और देरी के कारण एक नए छोटे युद्धपोत की योजना को रद्द कर दिया था। इसके अलावा, फोर्ड-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर और कोलंबिया-क्लास पनडुब्बियों जैसी प्रमुख परियोजनाएं भी समय और बजट से पीछे चल रही हैं। इतिहास में ‘बैटलशिप’ शब्द का इस्तेमाल भारी कवच और विशाल तोपों से लैस युद्धपोतों के लिए होता रहा है, जिनका उपयोग समुद्री और तटीय हमलों में किया जाता था।   द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विमानवाहक पोतों और लंबी दूरी की मिसाइलों के कारण बैटलशिप का महत्व कम हो गया।ट्रंप पहले भी नौसेना के डिज़ाइन और तकनीक को लेकर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने आधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट की जगह भाप से चलने वाली पुरानी प्रणाली अपनाने की वकालत की थी। उन्होंने नौसेना के जहाजों पर जंग लगने और उनके “बदसूरत” डिज़ाइन की भी आलोचना की थी। ट्रंप ने कहा कि इस नए युद्धपोत के डिज़ाइन में उनकी सीधी भूमिका होगी। उन्होंने कहा, “अमेरिकी नौसेना इन जहाजों के डिज़ाइन का नेतृत्व करेगी, लेकिन मैं भी साथ रहूंगा, क्योंकि मैं एक बहुत एस्थेटिक इंसान हूं।”

अमेरिकी संसद में बगावत: ट्रंप के भारत पर 50% टैरिफ के खिलाफ डेमोक्रेट सांसदों ने उठाया विरोध

वॉशिंगटन  अमेरिका में भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला दिया था. अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की तीन डेमोक्रेट सांसदों—डेबोरा रॉस (नॉर्थ कैरोलिना), मार्क वीजी (टेक्सास) और भारतीय मूल के राजा कृष्णमूर्ति (इलिनॉय)—ने इस फैसले को चुनौती देते हुए एक प्रस्ताव पेश किया है. सांसदों ने कहा कि यह टैरिफ न केवल अवैध हैं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के हितों के खिलाफ हैं. तीनों सांसदों ने साझा बयान में कहा, “ये टैरिफ आम लोगों की जेब पर भार डाल रहे हैं और अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसे हटाना अमेरिका-भारत संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है.” ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त 2025 को भारत से आने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इसके बाद 27 अगस्त 2025 को भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत सेकेंडरी टैरिफ की घोषणा की गई. इससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. प्रशासन का तर्क था कि भारत अब भी रूस से तेल खरीद रहा है, जिससे मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के लिए वित्तीय सहायता मिल रही है. सांसदों की प्रतिक्रिया डेबोरा रॉस ने कहा कि नॉर्थ कैरोलिना की अर्थव्यवस्था भारत से जुड़े निवेश पर निर्भर है. उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियों ने वहां अरबों डॉलर का निवेश किया है और हजारों नौकरियां पैदा की हैं. ऐसे में टैरिफ इस आर्थिक संबंध को नुकसान पहुँचा रहे हैं. मार्क वीजी ने कहा, “ये टैरिफ आम अमेरिकी परिवारों के लिए महंगाई बढ़ाने जैसा है. भारत हमारा महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक सहयोगी है, और ऐसे कदम द्विपक्षीय रिश्तों को कमजोर करते हैं.” राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि टैरिफ अमेरिकी सप्लाई चेन में रुकावट डाल रहे हैं और अमेरिकी मजदूरों को नुकसान पहुँचा रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि टैरिफ हटाने से अमेरिका-भारत के आर्थिक और सुरक्षा संबंध मजबूत होंगे. कांग्रेस बनाम राष्ट्रपति यह प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस में उस बड़े प्रयास का हिस्सा है, जिसमें डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना चाहते हैं. सांसदों का कहना है कि व्यापार नीति बनाने का अधिकार संविधान के तहत केवल कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. वर्तमान में यह प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश किया गया है. यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो इसे सीनेट में भी पेश किया जाएगा. विशेष बहुमत मिलने पर राष्ट्रपति के वीटो को भी ओवरराइड किया जा सकता है. प्रस्ताव पारित होने पर भारत पर लगे 50 प्रतिशत टैरिफ हट सकते हैं और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में सुधार की संभावना बढ़ सकती है.

कंबोडिया बॉर्डर पर बमबारी, ट्रंप के सीजफायर दावे के विपरीत, थाईलैंड ने दिया कड़ा बयान

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीजफायर कराने के दावे के बावजूद दोनों देशों के बीच सीमा पर लड़ाई थमती नहीं दिख रही है. कंबोडिया ने दावा किया है कि शनिवार सुबह भी थाई सेनाएं विवादित सीमा पर हमले कर रही हैं, जबकि थाईलैंड ने उलटे कंबोडिया पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. फिलहाल, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच विवादित सीमा पर सैन्य टकराव नहीं रुक रहा. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई है. कंबोडिया के सूचना मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि थाई सैन्य बलों ने सीमा पार हमले बंद नहीं किए हैं. मंत्रालय के मुताबिक, थाई सेनाएं अब भी बमबारी कर रही हैं और इन हमलों में फाइटर जेट्स का भी इस्तेमाल किया गया है. कंबोडिया के सूचना मंत्रालय ने बयान में कहा, थाई सेनाओं ने अब तक बमबारी बंद नहीं की है और हमले लगातार जारी हैं. थाईलैंड का पलटवार, कंबोडिया पर गंभीर आरोप वहीं, थाईलैंड की सेना ने कंबोडिया के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है. थाई सेना का कहना है कि कंबोडिया बार-बार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है. थाईलैंड के मुताबिक कंबोडियाई बलों ने नागरिक इलाकों को निशाना बनाया है और सीमा क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं. थाईलैंड का आया बयान… बॉर्डर पर बमबारी के बीच थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल का बयान आया. उन्होंने कहा, यह बिल्कुल भी कोई रोड एक्सीडेंट नहीं है. थाईलैंड तब तक सैन्य कार्रवाई करता रहेगा, जब तक हमारी जमीन और हमारे लोगों के लिए कोई और नुकसान या खतरा खत्म नहीं हो जाता. मैं यह बात पूरी तरह स्पष्ट करना चाहता हूं. आज सुबह हमारी कार्रवाइयों ने खुद सब कुछ बता दिया है. ट्रंप का दावा… लेकिन दोनों देशों की चुप्पी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल और कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत से फोन पर बातचीत के बाद कहा था कि दोनों देश शुक्रवार से ही सभी तरह की गोलीबारी रोकने पर सहमत हो गए हैं. हालांकि ट्रंप के इस दावे के बाद दोनों देशों के नेताओं के बयानों में किसी औपचारिक सीजफायर समझौते का जिक्र नहीं किया गया. थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने साफ कहा कि कोई सीजफायर नहीं हुआ है. जब ट्रंप के दावे पर सवाल किया गया तो थाई विदेश मंत्रालय ने पत्रकारों को प्रधानमंत्री के बयान का हवाला दिया. कंबोडिया ने दोहराई शांतिपूर्ण समाधान की बात कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत ने शनिवार को फेसबुक पर जारी एक बयान में ट्रंप के साथ हुई बातचीत और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ पहले हुई चर्चा का जिक्र किया. मानेत ने कहा कि कंबोडिया अब भी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है. उन्होंने कहा कि कंबोडिया अक्टूबर में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुए पहले के समझौते के तहत ही विवाद सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है. ट्रंप ने सीजफायर पर क्या कहा था? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि थाईलैंड और कंबोडिया शुक्रवार शाम से अपने जॉइंट बॉर्डर पर सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमत हो गए हैं. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल और कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत से अलग-अलग बातचीत की. उन्होंने इन चर्चाओं को बेहद सकारात्मक बताया और कहा कि इनका मकसद दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद में हालिया तनाव को खत्म करना था. ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर जारी संदेश के मुताबिक, दोनों नेताओं ने तुरंत सभी तरह की गोलीबारी रोकने और उस शांति ढांचे पर वापस लौटने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसे पहले अमेरिका की भूमिका और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मध्यस्थता से तय किया गया था. ट्रंप ने कहा, वे इस शाम से सभी तरह की फायरिंग रोकने पर सहमत हो गए हैं और मेरे साथ तथा उनके साथ मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मदद से किए गए मूल शांति समझौते पर वापस लौटेंगे. यह नए सीजफायर का ऐलान ऐसे समय किया गया था, जब बीते कुछ दिनों में हुए घातक संघर्षों के चलते हजारों नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े थे और इस साल की शुरुआत में मलेशिया की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के टूटने का खतरा पैदा हो गया था. ट्रंप ने अक्टूबर में मलेशिया में हुई फॉलो-अप बैठकों में भी हिस्सा लिया था. वे इस संघर्ष को उन कई विवादों में से एक बताते हैं, जिन्हें उनके मुताबिक उन्होंने सुलझाया है.

डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा जताया, मीटिंग पर मीटिंग से झुंझलाए, रूस पर यूक्रेन का दबाव

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब रूस और यूक्रेन की शांति बातचीत से लगभग ऊब चुके हैं. कई दौर की मीटिंग चली, कई प्रस्ताव दिए गए, कई दखल भी हुए, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव नहीं हुआ. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार साफ शब्दों में कहा है कि वह ‘अब समय बर्बाद नहीं करना चाहते’.ट्रंप की नाराजगी सिर्फ रूस पर नहीं है. वह खुलकर यूरोपीय देशों और यूक्रेन से भी खफा दिखे. NBC की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप लंबे समय से ट्रंप के प्रस्तावों से बचने की कोशिश कर रहा है, खासकर उस मांग से जिसमें यूक्रेन को रूस को जमीन सौंपने की बात कही गई है. यूरोप ने कहा है कि यह प्लान अस्वीकार्य है, जबकि ट्रंप इसे ‘तुरंत लागू होने वाला समाधान’ बताते रहे हैं. वहीं ट्रंप ने रूस-यूक्रेन की लड़ाई को तीसरे विश्वयुद्ध तक पहुंचने की बात कही है. ट्रंप ने कहा, ‘मैंने उन्हें कुछ दिन पहले बताया था. मैंने कहा था कि अगर हर कोई इसी तरह के खेल खेलता रहा, तो अंततः तीसरा विश्व युद्ध छिड़ जाएगा.’ यह उन सभी देशों को संदेश है जो या तो रूस या यूक्रेन के पक्ष में खड़े हैं. ट्रंप क्यों हुए परेशान? एक बिजनेस राउंडटेबल में ट्रंप ने कहा, ‘वे लोग चाहते हैं कि हम वीकेंड में यूरोप मीटिंग के लिए आएं. हम तभी आएंगे जब कुछ ठोस लेकर वापस आएंगे. हम समय बर्बाद करने नहीं बैठे.’ उन्होंने यहां तक कह दिया, ‘कई बार आपको लोगों को आपस में लड़ने देना पड़ता है, कई बार नहीं.’ यह बयान बताता है कि ट्रंप अब खुद को इस डिप्लोमेसी से दूर करने की तैयारी में हैं. उधर जेलेंस्की ने भी पहली बार माना कि अमेरिका उन पर ‘बड़े भूभाग छोड़ने’ का दबाव बना रहा है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खुलासा किया कि विवाद की सबसे बड़ी वजह डोनेत्स्क क्षेत्र और जापोरिज्ज्या न्यूक्लियर प्लांट पर नियंत्रण है. ज़ेलेंस्की ने कहा, ‘वे चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेत्स्क छोड़ दे और रूस वहां न घुसे. वे इसे फ्री इकोनॉमिक जोन कह रहे हैं.’ रूस में कहां हुआ हमला? इसी तनाव के बीच यूक्रेन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने रूस को पूरी तरह चौंका दिया है. यूक्रेन ने पहली बार कैस्पियन सागर में रूस के ऑफशोर तेल प्लेटफॉर्म पर लंबी दूरी के ड्रोन से वार किया है. यह मिशन पहले कभी सार्वजनिक नहीं हुआ था. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस के सूत्रों ने बताया, ‘यह पहली बार है जब यूक्रेन ने कैस्पियन सागर में रूस की तेल फैसिलिटी को निशाना बनाया है. जो भी यूनिट्स रूसी युद्ध मशीन को फंड करती हैं, वे सब वैध लक्ष्य हैं.’ यह हमला रूस की बड़ी ऊर्जा कंपनियों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस की रिफाइनरी, तेल पाइपलाइन, टर्मिनल और यहां तक कि टैंकरों पर भी हमले तेज कर दिए हैं. सिर्फ अगस्त से नवंबर के बीच यूक्रेन ने रूस की 77 एनर्जी फैसिलिटी हिट की हैं, जो साल के पहले सात महीनों की तुलना में लगभग दोगुना है. बड़ी बात यह है कि अब यूक्रेन एक ही रिफाइनरी को बार-बार टारगेट कर रहा है ताकि वह कभी पूरी तरह चालू न हो सके. सारातोव रिफाइनरी को अगस्त से अब तक आठ बार निशाना बनाया जा चुका है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? विशेषज्ञों का कहना है कि रूस तेल की कमाई से सेना में भर्ती और वेतन बढ़ाकर अपना युद्ध तंत्र मजबूत कर रहा है. इसलिए यूक्रेन अब सीधा उस ‘एनर्जी ATM’ पर वार कर रहा है जिससे रूस को सबसे ज्यादा पैसा मिलता है. परिणाम साफ हैं कि रूस की मरम्मत की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है और कई जगहों पर लंबे समय तक भारी नुकसान हुआ है. दूसरी तरफ, मोर्चे पर रूस धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और बातचीत का हर दौर रूस की मांगों को और मजबूत कर रहा है.