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ईरान संकट पर ट्रंप कूदे तो खामेनेई का सख्त अल्टीमेटम—नतीजे विनाशकारी होंगे

तेहरान डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी पर ईरान की प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान ने स्पष्ट कहा है कि अगर ईरान के आंदोलन में डोनाल्ड ट्रंप कूदे तो तबाही हो जाएगी। ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार ने शुक्रवार को बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप से पूरे क्षेत्र में अव्यवस्था फैल जाएगी। गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरानी शासन को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों का दमन किया गया, तो अमेरिका मूकदर्शक बना नहीं रहेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक संदेश में स्पष्ट किया कि अगर ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई या उनकी हत्या की, तो अमेरिका हस्तक्षेप करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सड़क पर उतर चुकी है जनता गौरतलब है कि ईरान की खराब अर्थव्यवस्था से आक्रोशित जनता सड़कों पर उतर आई है। गुरुवार को ये प्रदर्शन प्रांतों में भी फैल गए, जहां सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कम से कम सात लोग मारे गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। प्रदर्शन में सात लोगों के मारे जाने से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि देश की सरकार प्रदर्शनकारियों से सख्ती से निपटने के मूड में है। लेकिन प्रदर्शनकारी भी अड़े हुए हैं।   2022 के बाद सबसे बड़ा प्रदर्शन राजधानी तेहरान में प्रदर्शन भले ही धीमे पड़ गए हों, लेकिन अन्य जगहों पर इनमें तेजी आई है। बुधवार को दो और बृहस्पतिवार को पांच लोगों की मौत चार शहरों में हुई। इन चारों शहरों में लूर जातीय समुदाय की बहुलता है। यह विरोध प्रदर्शन 2022 के बाद से ईरान के सबसे बड़े प्रदर्शन के रूप में उभरा है। वर्ष 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए थे। अर्थव्यवस्था को लेकर सबसे अधिक हिंसा ईरान के लोरेस्टान प्रांत के अजना शहर में देखी गई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वहां सड़कों पर जलती हुई वस्तुएं दिखाई दे रही हैं साथ ही गोलियों की आवाजें गूंजती हैं। अर्धसरकारी समाचार एजेंसी फ़ार्स ने तीन लोगों के मारे जाने की खबर दी। सुधार समर्थक मीडिया संस्थानों सहित अन्य मीडिया ने फार्स के हवाले से ही घटनाओं का जिक्र किया है।  

ट्रंप का बड़ा सैन्य दांव: अमेरिका बनाएगा अब तक का सबसे शक्तिशाली युद्धपोत, दुश्मनों की बढ़ेगी चिंता

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना के लिए एक नए विशाल युद्धपोत के निर्माण की योजना की घोषणा की है, जिसे उन्होंने “बैटलशिप” नाम दिया है। यह घोषणा उन्होंने फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट में की। ट्रंप ने इसे अमेरिका की प्रस्तावित “गोल्डन फ्लीट” का अहम हिस्सा बताया। ट्रंप ने दावा किया कि यह नया युद्धपोत अब तक बनाए गए किसी भी बैटलशिप से “100 गुना अधिक शक्तिशाली”, सबसे तेज़ और सबसे बड़ा होगा। उनके अनुसार, यह जहाज द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए आयोवा-क्लास बैटलशिप से भी लंबा और भारी होगा, जिनका वजन लगभग 60,000 टन था। ट्रंप ने कहा कि इस नए युद्धपोत में हाइपरसोनिक मिसाइलें, रेलगन और उच्च क्षमता वाले लेज़र हथियार लगाए जाएंगे। हालांकि, अमेरिकी नौसेना अभी इन तकनीकों को पूरी तरह विकसित करने की प्रक्रिया में है। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में लागत बढ़ने और देरी के कारण एक नए छोटे युद्धपोत की योजना को रद्द कर दिया था। इसके अलावा, फोर्ड-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर और कोलंबिया-क्लास पनडुब्बियों जैसी प्रमुख परियोजनाएं भी समय और बजट से पीछे चल रही हैं। इतिहास में ‘बैटलशिप’ शब्द का इस्तेमाल भारी कवच और विशाल तोपों से लैस युद्धपोतों के लिए होता रहा है, जिनका उपयोग समुद्री और तटीय हमलों में किया जाता था।   द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विमानवाहक पोतों और लंबी दूरी की मिसाइलों के कारण बैटलशिप का महत्व कम हो गया।ट्रंप पहले भी नौसेना के डिज़ाइन और तकनीक को लेकर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने आधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट की जगह भाप से चलने वाली पुरानी प्रणाली अपनाने की वकालत की थी। उन्होंने नौसेना के जहाजों पर जंग लगने और उनके “बदसूरत” डिज़ाइन की भी आलोचना की थी। ट्रंप ने कहा कि इस नए युद्धपोत के डिज़ाइन में उनकी सीधी भूमिका होगी। उन्होंने कहा, “अमेरिकी नौसेना इन जहाजों के डिज़ाइन का नेतृत्व करेगी, लेकिन मैं भी साथ रहूंगा, क्योंकि मैं एक बहुत एस्थेटिक इंसान हूं।”

अमेरिकी संसद में बगावत: ट्रंप के भारत पर 50% टैरिफ के खिलाफ डेमोक्रेट सांसदों ने उठाया विरोध

वॉशिंगटन  अमेरिका में भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगाने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला दिया था. अब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की तीन डेमोक्रेट सांसदों—डेबोरा रॉस (नॉर्थ कैरोलिना), मार्क वीजी (टेक्सास) और भारतीय मूल के राजा कृष्णमूर्ति (इलिनॉय)—ने इस फैसले को चुनौती देते हुए एक प्रस्ताव पेश किया है. सांसदों ने कहा कि यह टैरिफ न केवल अवैध हैं, बल्कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के हितों के खिलाफ हैं. तीनों सांसदों ने साझा बयान में कहा, “ये टैरिफ आम लोगों की जेब पर भार डाल रहे हैं और अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसे हटाना अमेरिका-भारत संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण है.” ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त 2025 को भारत से आने वाले उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इसके बाद 27 अगस्त 2025 को भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत सेकेंडरी टैरिफ की घोषणा की गई. इससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया. प्रशासन का तर्क था कि भारत अब भी रूस से तेल खरीद रहा है, जिससे मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के लिए वित्तीय सहायता मिल रही है. सांसदों की प्रतिक्रिया डेबोरा रॉस ने कहा कि नॉर्थ कैरोलिना की अर्थव्यवस्था भारत से जुड़े निवेश पर निर्भर है. उन्होंने बताया कि भारतीय कंपनियों ने वहां अरबों डॉलर का निवेश किया है और हजारों नौकरियां पैदा की हैं. ऐसे में टैरिफ इस आर्थिक संबंध को नुकसान पहुँचा रहे हैं. मार्क वीजी ने कहा, “ये टैरिफ आम अमेरिकी परिवारों के लिए महंगाई बढ़ाने जैसा है. भारत हमारा महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक सहयोगी है, और ऐसे कदम द्विपक्षीय रिश्तों को कमजोर करते हैं.” राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि टैरिफ अमेरिकी सप्लाई चेन में रुकावट डाल रहे हैं और अमेरिकी मजदूरों को नुकसान पहुँचा रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि टैरिफ हटाने से अमेरिका-भारत के आर्थिक और सुरक्षा संबंध मजबूत होंगे. कांग्रेस बनाम राष्ट्रपति यह प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस में उस बड़े प्रयास का हिस्सा है, जिसमें डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों के दुरुपयोग पर अंकुश लगाना चाहते हैं. सांसदों का कहना है कि व्यापार नीति बनाने का अधिकार संविधान के तहत केवल कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. वर्तमान में यह प्रस्ताव हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में पेश किया गया है. यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो इसे सीनेट में भी पेश किया जाएगा. विशेष बहुमत मिलने पर राष्ट्रपति के वीटो को भी ओवरराइड किया जा सकता है. प्रस्ताव पारित होने पर भारत पर लगे 50 प्रतिशत टैरिफ हट सकते हैं और दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में सुधार की संभावना बढ़ सकती है.

कंबोडिया बॉर्डर पर बमबारी, ट्रंप के सीजफायर दावे के विपरीत, थाईलैंड ने दिया कड़ा बयान

न्यूयॉर्क अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीजफायर कराने के दावे के बावजूद दोनों देशों के बीच सीमा पर लड़ाई थमती नहीं दिख रही है. कंबोडिया ने दावा किया है कि शनिवार सुबह भी थाई सेनाएं विवादित सीमा पर हमले कर रही हैं, जबकि थाईलैंड ने उलटे कंबोडिया पर अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है. फिलहाल, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच विवादित सीमा पर सैन्य टकराव नहीं रुक रहा. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई है. कंबोडिया के सूचना मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि थाई सैन्य बलों ने सीमा पार हमले बंद नहीं किए हैं. मंत्रालय के मुताबिक, थाई सेनाएं अब भी बमबारी कर रही हैं और इन हमलों में फाइटर जेट्स का भी इस्तेमाल किया गया है. कंबोडिया के सूचना मंत्रालय ने बयान में कहा, थाई सेनाओं ने अब तक बमबारी बंद नहीं की है और हमले लगातार जारी हैं. थाईलैंड का पलटवार, कंबोडिया पर गंभीर आरोप वहीं, थाईलैंड की सेना ने कंबोडिया के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया है. थाई सेना का कहना है कि कंबोडिया बार-बार अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है. थाईलैंड के मुताबिक कंबोडियाई बलों ने नागरिक इलाकों को निशाना बनाया है और सीमा क्षेत्रों में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं. थाईलैंड का आया बयान… बॉर्डर पर बमबारी के बीच थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल का बयान आया. उन्होंने कहा, यह बिल्कुल भी कोई रोड एक्सीडेंट नहीं है. थाईलैंड तब तक सैन्य कार्रवाई करता रहेगा, जब तक हमारी जमीन और हमारे लोगों के लिए कोई और नुकसान या खतरा खत्म नहीं हो जाता. मैं यह बात पूरी तरह स्पष्ट करना चाहता हूं. आज सुबह हमारी कार्रवाइयों ने खुद सब कुछ बता दिया है. ट्रंप का दावा… लेकिन दोनों देशों की चुप्पी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार रात थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल और कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत से फोन पर बातचीत के बाद कहा था कि दोनों देश शुक्रवार से ही सभी तरह की गोलीबारी रोकने पर सहमत हो गए हैं. हालांकि ट्रंप के इस दावे के बाद दोनों देशों के नेताओं के बयानों में किसी औपचारिक सीजफायर समझौते का जिक्र नहीं किया गया. थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल ने साफ कहा कि कोई सीजफायर नहीं हुआ है. जब ट्रंप के दावे पर सवाल किया गया तो थाई विदेश मंत्रालय ने पत्रकारों को प्रधानमंत्री के बयान का हवाला दिया. कंबोडिया ने दोहराई शांतिपूर्ण समाधान की बात कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत ने शनिवार को फेसबुक पर जारी एक बयान में ट्रंप के साथ हुई बातचीत और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ पहले हुई चर्चा का जिक्र किया. मानेत ने कहा कि कंबोडिया अब भी विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है. उन्होंने कहा कि कंबोडिया अक्टूबर में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में हुए पहले के समझौते के तहत ही विवाद सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है. ट्रंप ने सीजफायर पर क्या कहा था? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि थाईलैंड और कंबोडिया शुक्रवार शाम से अपने जॉइंट बॉर्डर पर सभी तरह की सैन्य कार्रवाइयों को रोकने पर सहमत हो गए हैं. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने थाई प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नवीराकुल और कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मानेत से अलग-अलग बातचीत की. उन्होंने इन चर्चाओं को बेहद सकारात्मक बताया और कहा कि इनका मकसद दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद में हालिया तनाव को खत्म करना था. ट्रंप के ट्रुथ सोशल पर जारी संदेश के मुताबिक, दोनों नेताओं ने तुरंत सभी तरह की गोलीबारी रोकने और उस शांति ढांचे पर वापस लौटने की प्रतिबद्धता जताई है, जिसे पहले अमेरिका की भूमिका और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मध्यस्थता से तय किया गया था. ट्रंप ने कहा, वे इस शाम से सभी तरह की फायरिंग रोकने पर सहमत हो गए हैं और मेरे साथ तथा उनके साथ मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मदद से किए गए मूल शांति समझौते पर वापस लौटेंगे. यह नए सीजफायर का ऐलान ऐसे समय किया गया था, जब बीते कुछ दिनों में हुए घातक संघर्षों के चलते हजारों नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े थे और इस साल की शुरुआत में मलेशिया की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के टूटने का खतरा पैदा हो गया था. ट्रंप ने अक्टूबर में मलेशिया में हुई फॉलो-अप बैठकों में भी हिस्सा लिया था. वे इस संघर्ष को उन कई विवादों में से एक बताते हैं, जिन्हें उनके मुताबिक उन्होंने सुलझाया है.

डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा जताया, मीटिंग पर मीटिंग से झुंझलाए, रूस पर यूक्रेन का दबाव

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब रूस और यूक्रेन की शांति बातचीत से लगभग ऊब चुके हैं. कई दौर की मीटिंग चली, कई प्रस्ताव दिए गए, कई दखल भी हुए, लेकिन जमीन पर कोई बदलाव नहीं हुआ. यही वजह है कि डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार साफ शब्दों में कहा है कि वह ‘अब समय बर्बाद नहीं करना चाहते’.ट्रंप की नाराजगी सिर्फ रूस पर नहीं है. वह खुलकर यूरोपीय देशों और यूक्रेन से भी खफा दिखे. NBC की रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप लंबे समय से ट्रंप के प्रस्तावों से बचने की कोशिश कर रहा है, खासकर उस मांग से जिसमें यूक्रेन को रूस को जमीन सौंपने की बात कही गई है. यूरोप ने कहा है कि यह प्लान अस्वीकार्य है, जबकि ट्रंप इसे ‘तुरंत लागू होने वाला समाधान’ बताते रहे हैं. वहीं ट्रंप ने रूस-यूक्रेन की लड़ाई को तीसरे विश्वयुद्ध तक पहुंचने की बात कही है. ट्रंप ने कहा, ‘मैंने उन्हें कुछ दिन पहले बताया था. मैंने कहा था कि अगर हर कोई इसी तरह के खेल खेलता रहा, तो अंततः तीसरा विश्व युद्ध छिड़ जाएगा.’ यह उन सभी देशों को संदेश है जो या तो रूस या यूक्रेन के पक्ष में खड़े हैं. ट्रंप क्यों हुए परेशान? एक बिजनेस राउंडटेबल में ट्रंप ने कहा, ‘वे लोग चाहते हैं कि हम वीकेंड में यूरोप मीटिंग के लिए आएं. हम तभी आएंगे जब कुछ ठोस लेकर वापस आएंगे. हम समय बर्बाद करने नहीं बैठे.’ उन्होंने यहां तक कह दिया, ‘कई बार आपको लोगों को आपस में लड़ने देना पड़ता है, कई बार नहीं.’ यह बयान बताता है कि ट्रंप अब खुद को इस डिप्लोमेसी से दूर करने की तैयारी में हैं. उधर जेलेंस्की ने भी पहली बार माना कि अमेरिका उन पर ‘बड़े भूभाग छोड़ने’ का दबाव बना रहा है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने खुलासा किया कि विवाद की सबसे बड़ी वजह डोनेत्स्क क्षेत्र और जापोरिज्ज्या न्यूक्लियर प्लांट पर नियंत्रण है. ज़ेलेंस्की ने कहा, ‘वे चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेत्स्क छोड़ दे और रूस वहां न घुसे. वे इसे फ्री इकोनॉमिक जोन कह रहे हैं.’ रूस में कहां हुआ हमला? इसी तनाव के बीच यूक्रेन ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने रूस को पूरी तरह चौंका दिया है. यूक्रेन ने पहली बार कैस्पियन सागर में रूस के ऑफशोर तेल प्लेटफॉर्म पर लंबी दूरी के ड्रोन से वार किया है. यह मिशन पहले कभी सार्वजनिक नहीं हुआ था. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस के सूत्रों ने बताया, ‘यह पहली बार है जब यूक्रेन ने कैस्पियन सागर में रूस की तेल फैसिलिटी को निशाना बनाया है. जो भी यूनिट्स रूसी युद्ध मशीन को फंड करती हैं, वे सब वैध लक्ष्य हैं.’ यह हमला रूस की बड़ी ऊर्जा कंपनियों पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस की रिफाइनरी, तेल पाइपलाइन, टर्मिनल और यहां तक कि टैंकरों पर भी हमले तेज कर दिए हैं. सिर्फ अगस्त से नवंबर के बीच यूक्रेन ने रूस की 77 एनर्जी फैसिलिटी हिट की हैं, जो साल के पहले सात महीनों की तुलना में लगभग दोगुना है. बड़ी बात यह है कि अब यूक्रेन एक ही रिफाइनरी को बार-बार टारगेट कर रहा है ताकि वह कभी पूरी तरह चालू न हो सके. सारातोव रिफाइनरी को अगस्त से अब तक आठ बार निशाना बनाया जा चुका है. क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स? विशेषज्ञों का कहना है कि रूस तेल की कमाई से सेना में भर्ती और वेतन बढ़ाकर अपना युद्ध तंत्र मजबूत कर रहा है. इसलिए यूक्रेन अब सीधा उस ‘एनर्जी ATM’ पर वार कर रहा है जिससे रूस को सबसे ज्यादा पैसा मिलता है. परिणाम साफ हैं कि रूस की मरम्मत की रफ्तार काफी धीमी हो चुकी है और कई जगहों पर लंबे समय तक भारी नुकसान हुआ है. दूसरी तरफ, मोर्चे पर रूस धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और बातचीत का हर दौर रूस की मांगों को और मजबूत कर रहा है.

राष्ट्रपति ट्रंप को मिला ‘शांति पुरस्कार’, खुद उठाकर पहने सम्मान की माला

वाशिंगटन  नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कर रहे डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल तो नहीं लेकिन फीफा शांति पुरस्कार जरूर मिल गया है। फुटबॉल की वैश्विक संस्था (FIFA) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने नए फीफा शांति पुरस्कार से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार खेल से इतर वैश्विक शांति को ध्यान में रखकर बनाया गया है और ट्रंप इसके पहले विजेता हैं। फीफा ने क्यों दिया यह पुरस्कार डोनाल्ड ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार के लिए प्रेम किसी से छिपा नहीं है। ऐसा माना जा रहा है कि फीफा द्वारा इस साल से शुरू किया जा रहा है शांति पुरस्कार ट्रंप को ही मिलेगा। वैसे बी फीफा के वर्तमान अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को ट्रंप का करीबी माना जाता है। वह कई बार खुले तौर पर इस बात को कह चुके हैं कि गाजा संघर्ष में युद्धविराम करवाने के लिए ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार मिलना ही चाहिए। फीफा के अगले विश्वकप के लिए आयोजित किए जा रहे एक कार्यक्रम में जियानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए ट्रंप को यह पुरस्कार देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा, "यह आपके लिए एक सुंदर मेडल है, जिसे आप जहां चाहें, वहां पहन सकते हैं।" इसके बाद ट्रंप ने तुरंत ही इसे अपने गले में डाल लिया। इसके साथ ही ट्रंप को एक सर्टिफिकेट भी दिया गया, जिसमें ट्रंप को 'दुनिया में शांति और एकता बढ़ाने में योगदान' देने वाला बताया गया। इसके अलावा जियानी ने ट्रंप को एक सोने की ट्राफी भी भेंट की। इस पर आगे ट्रंप का नाम लिखा हुआ था। उन्होंने कहा, "आप इस शांति पुरस्कार के योग्य हैं, अपनी कोशिशों और उपलब्धियों के लिए। फीफा शांति पुरस्कार मिलने के बाद ट्रंप उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा, "यह मेरे जीवन के सबसे बड़े सम्मानों में से एक है।" इसके बाद उन्होंने अपने परिवार, खासतौर पर अपनी पत्नी मेलानिया का धन्यवाद दिया और मेजबान देशों कनाडा और मेक्सिको के नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह तीनों देशों के लिए बेहतर रहेगा।

अमेरिका वेनेजुएला पर कार्रवाई कर सकता है—डोनाल्ड ट्रंप ने दिया ऑपरेशन का संकेत

वॉशिंगटन कैरिबियन में कथित वेनेजुएला के ड्रग तस्करों की नावों पर अमेरिका के बार-बार हवाई हमलों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका बहुत जल्द वेनेजुएला के अंदर रहने वाले 'बुरे लोगों' पर हमला करना शुरू कर देगा. मंगलवार की कैबिनेट मीटिंग में ट्रंप की टिप्पणी से वॉशिंगटन और काराकास के बीच और तनाव बढ़ने का इशारा मिलता है. ट्रंप ने कैबिनेट मीटिंग के दौरान कहा, 'हम जमीन पर भी ये हमले शुरू करने जा रहे हैं. जमीन पर हमला करना ज्यादा आसान है. हम जानते हैं कि बुरे लोग कहाँ रहते हैं, और हम यह बहुत जल्द शुरू करने जा रहे हैं.' ट्रंप की यह बात तब आई है जब उनके प्रशासन पर ड्रग तस्करी करने वाली नावों को निशाना बनाने के लिए किए गए हमले को लेकर कड़ी जांच हुई है, जिसमें अब तक 80 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. बैठक में ट्रंप ने वॉर सेक्रेटरी पीट हेगसेथ का बचाव किया और कहा कि न तो उन्हें और न ही वॉर सेक्रेटरी को संदिग्ध ड्रग जहाज पर दूसरे हमले के बारे में पता था. अमेरिकी सेना ने 2 सितंबर को कैरिबियन में चल रहे एक संदिग्ध ड्रग जहाज पर एक और हमला किया था, जब शुरुआती हमले में जहाज पर सवार सभी लोग नहीं मारे गए थे. ट्रंप ने कहा, 'मुझे दूसरे हमले के बारे में नहीं पता था. मुझे लोगों के बारे में कुछ नहीं पता था. मैं इसमें शामिल नहीं था और मुझे पता था कि उन्होंने एक नाव ली थी, लेकिन मैं यह कहूंगा कि उन्होंने हमला किया था.' राष्ट्रपति ने कहा कि हेगसेथ हमले से संतुष्ट थे लेकिन उन्हें दूसरे हमले के बारे में पता नहीं था, जिसमें दो लोग शामिल थे. हेगसेथ ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने पहला हमला लाइव देखा था, लेकिन फिर अपनी अगली मीटिंग में चले गए. वॉर सेक्रेटरी ने आगे कहा कि उन्हें दूसरे हमले के बारे में कुछ घंटे बाद पता चला और उन्होंने किसी भी जिंदा को नहीं देखा. हेगसेथ ने कहा, 'कुछ घंटों बाद मुझे पता चला. मैंने खुद किसी को जिंदा नहीं देखा क्योंकि उस चीज में आग लगी हुई थी. इसे युद्ध का कोहरा कहते हैं. व्हाइट हाउस ने कहा है कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के कमांडर एडमिरल फ्रैंक एम 'मिच' ब्रैडली ने दूसरे हमले का आदेश दिया था.

ट्रम्प ने किया ऐतिहासिक फैसला, बाइडेन के कार्यकाल के अधिकांश एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स रद्द

वाशिंगटन एक बार फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने सभी को हैरान कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में जारी किए गए 92% एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स को कैंसिल कर दिया है। इसकी जानकारी डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ के जरिए दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि यह सभी ऑर्डर्स ऑटोपेन से साइन किए गए थे, यानी जो भी ऑर्डर्स जारी किए गए थे वे मशीन द्वारा साइन किए गए थे और इस पर जो बाइडेन की मंजूरी नहीं थी। डोनाल्ड ट्रंप के इस बड़े कदम से जो बाइडेन के कई महत्वपूर्ण एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स प्रभावित हुए हैं। इन ऑर्डर्स में पर्यावरण, स्वास्थ्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे बड़े आदेश शामिल थे। इस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने जो बाइडेन को भी निशाने पर लिया और कहा कि अगर जो बाइडेन इन दस्तावेजों पर अपनी सहमति का दावा करेंगे तो उन पर झूठे बयान के आरोप लगेंगे। जो बाइडेन को डोनाल्ड ट्रंप ने सुस्त और चालाक बताया है। जानकारी दे दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने यह फैसला व्हाइट हाउस के पास नेशनल गार्ड्स पर हुए हमले के बाद लिया है। यह अवैध रूप से किया गया था: डोनाल्ड ट्रंप दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लिखा कि ‘जो बाइडेन के ऑटोपेन से साइन किए गए लगभग 92% ऑर्डर्स रद्द किए जाते हैं और ऑटोपेन का इस्तेमाल तभी वैध है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट मंजूरी दी हो। यह अवैध रूप से किया गया था, बिडेन ऑटोपेन प्रक्रिया में शामिल नहीं थे।’ हालांकि ऐसा नहीं है कि जो बाइडेन के सभी एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स रद्द कर दिए गए हैं। जो बाइडेन ने अपने कार्यकाल में कुल 162 एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स जारी किए थे, लेकिन इनमें से 80 ऑर्डर्स को डोनाल्ड ट्रंप ने पद संभालने के तुरंत बाद ही रद्द कर दिया था। ये बड़े एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स हो सकते हैं प्रभावित अभी भी जो बाइडेन के कई एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स जारी हैं, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले के बाद अब इन पर भी संकट मंडराने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक अब इन ऑर्डर्स में से कुछ रद्द होने का खतरा है। इनमें एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14087 शामिल है, जो अमेरिका में प्रिस्क्रिप्शन दवाओं की कीमतों से जुड़ा हुआ है। इस ऑर्डर से ही दवा कंपनियों पर नियंत्रण लगाया जाता है और यह आम नागरिकों को सस्ती दवाएं प्रदान करवाता है। एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14096 प्रभावित हो सकता है। दूसरा एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14096 प्रभावित हो सकता है। यह ऑर्डर पर्यावरणीय न्याय पर केंद्रित है, जिसका उद्देश्य गरीब और अल्पसंख्यक समुदायों को पर्यावरण प्रदूषण से बचाना था। इसके अलावा एक और ऑर्डर प्रभावित हो सकता है, जो एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 14110 है। इस ऑर्डर के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास को लेकर नियम बनाए गए थे, खास तौर पर इसके उपयोग में क्षमता, जोखिम भरे कामों से बचाव और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। अमेरिकी नियमों पर नजर डालें तो कोई भी मौजूदा राष्ट्रपति पूर्व राष्ट्रपति के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स को रद्द, संशोधित और अमान्य करने की पावर रखता है। यानी डोनाल्ड ट्रंप चाहे तो जो बिडेन के इन ऑर्डर्स को रद्द कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें ज्यादा जोर लगाने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि कुछ सीमाएं भी हैं, खासकर सजा में माफी और कमी से जुड़े मामलों में ये ऑर्डर्स वापस नहीं लिए जा सकते हैं।

ट्रंप की आलोचना: अमेरिकियों पर सवाल, चिप उत्पादन तक में असफल

वाशिगटन   अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने एक और बड़ा बयान दिया है. इस बार, उन्‍होंने अमेरिकी इंडस्‍ट्री को चिप मेकिंग्‍स को लेकर खूब खरी-खोटी सुनाई. इसके अलावा, उन्‍होंने एच-1बी प्रवासी श्रमिकों के प्रति अपने समर्थन का बचाव करते हुए भी कहा कि अमेरिकियों को 'माइक्रोचिप बनाना नहीं आता'.  ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका अपने घरेलू सेमीकंडक्‍टर चिप के पुननिर्माण का प्रयास कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी वर्कफोर्स में सेमीकंडक्‍टर विनिर्माण के लिए आवश्‍यक तकनीक कौशल का अभाव है. यह एक महत्‍वपूर्ण उद्योग है. ट्रंप का दावा है कि इस सेक्‍टर में अमेरिका बड़े स्‍तर पर वापसी करेगा.  ताइवान के कंट्रोल में पूरी इंडस्‍ट्री ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब ज्‍यादा चिप का निर्माण नहीं करता है, लेकिन अगर आप चिप बनाने जा रहे हैं तो हमें अपने लोगों को चिप बनाने की ट्रेनिंग देनी होगी, क्‍योंकि हमने चिप वाला कारोबार ताइवान के हाथों बहुत ही मूर्खतापूर्ण तरीके से गंवा दिया है.  जल्‍द उबरेगा अमेरिका का चिप मार्केट  ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी चिप मार्केट जल्‍द ही उबर जाएगा और उन्‍होंने कुछ और सालों के भीतर घरेलू उत्‍पादन में ग्रोथ का अनुमान लगाया है. हालांकि उन्होंने 2022 चिप्स अधिनियम को खारिज कर दिया, जिसका उद्देश्य अमेरिकी विनिर्माण को बढ़ावा देना था.  चिप बनाने में सबसे आगे होगा अमेरिका  ट्रंप ने कहा कि चिप्‍स एक्‍ट एक आपदा थी. सभी चिप बनाने वाली कंपनियां वापस आ रही हैं और शायद दुनिया में ज्‍यादातर चिप निर्माण अमेरका में ही होगा. ट्रंप का यह बयान उनके रिपब्लिकन सहयोगियों की बढ़ती आलोचना के बीच आया है. ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका में सियासत गरमा गई है. फ्लोरिडा के गवर्नर डेसेंटिस ने 13 नवंबर को एक पोस्ट कहा कि कांग्रेस में रिपब्लिकन बहुमत में हैं और वे H1B को समाप्त करने के लिए कानून बना सकते हैं. उन्‍होंने कहा कि यहां शब्दों का नहीं, बल्कि कार्यों का महत्व है.   एक और अधिकारी ने कहा कि माइक्रोचिप का आविष्कार करने का श्रेय जिन दो लोगों को दिया जाता है, उसमें जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस हैं, जो अमेरिकी इंजीनियर थे और अमेरिका की धरती पर काम कर रहे थे. फिर भी ट्रंप को अपनी इंडस्ट्री नजरिए पर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा, 'अच्छी खबर यह है कि सब कुछ वापस आ रहा है। यह तो हमेशा से यहीं होना चाहिए था.'

चीन का सैन्य शक्ति प्रदर्शन! लड़ाकू विमानों और जहाजों से ताइवान को घेरा, ट्रंप ने दी कड़ी चेतावनी

ताइवान ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को बताया कि देश के चारों ओर चीन के 10 लड़ाकू विमान  और 10 नौसैनिक जहाज सक्रिय रूप से संचालित होते देखे गए हैं। इनमें से चार विमान ताइवान की “मीडियन लाइन” पार कर उसके उत्तरी और दक्षिण-पश्चिमी वायु रक्षा पहचान क्षेत्र में घुस गए। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा, “आज सुबह 6 बजे (स्थानीय समयानुसार) तक 10 PLA विमानों और 10 PLAN जहाजों को ताइवान के आसपास देखा गया। ताइवान की सशस्त्र सेनाएं हालात की बारीकी से निगरानी कर रही हैं और आवश्यक कदम उठा रही हैं।”  इससे पहले शनिवार को ताइवान ने 18 चीनी विमानों, सात नौसैनिक जहाजों और एक सरकारी पोत की गतिविधियां दर्ज की थीं। वहीं शुक्रवार को 38 विमान और नौ जहाज ताइवान के आसपास देखे गए थे, जिनमें से 31 विमानों ने मीडियन लाइन पार की थी। यह “मीडियन लाइन” ताइवान जलडमरूमध्य में एक अनौपचारिक सीमा है, जिसे चीन ने हाल के वर्षों में बार-बार पार कर ताइवान पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है। इन लगातार हो रही सैन्य गतिविधियों ने ताइवान स्ट्रेट में तनाव और बढ़ा दिया है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा-“बीजिंग जानता है कि अगर उसने ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की तो परिणाम क्या होंगे।”सीबीएस को दिए साक्षात्कार में ट्रंप ने खुलासा किया कि उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई मुलाकात में यह विषय नहीं उठा, लेकिन उन्होंने कहा,“अगर कुछ होता है तो दुनिया देखेगी… मैं अपनी रणनीति नहीं बताऊंगा, लेकिन चीन जानता है कि नतीजे क्या होंगे।”