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ट्रंप पर हमले की तस्वीर वायरल, ईरान ने दी सख्त चेतावनी — कहा ‘इस बार बचना मुश्किल’

तेहरान ईरान के ताजा हालात चिंताजनक हैं। अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की आशंका के बीच अब ईरान ने भी अपनी भौहें सिकोड़ ली हैं। ईरान ने एक तस्वीर के जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी दे दी है। इस बीच तनावपूर्ण हालात में ब्रिटेन ने तेहरान में अपने दूतावास को कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। इसके साथ ही ब्रिटेन ने अपने सभी डिप्लोमैटिक स्टाफ को वापस बुला लिया है। ब्रिटेन के फॉरेन ऑफिस ने कहा, “हमने तेहरान में ब्रिटिश दूतावास को कुछ समय के लिए बंद कर दिया है। यह अब रिमोटली ऑपरेट होगा।” ईरान ने 2024 में पेन्सिलवेनिया में ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले की एक तस्वीर दिखाई, जिसमें उन्हें एक कैंपेन रैली में मारने की कोशिश करते हुए दिखाया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई, "इस बार निशाना चूकेगा नहीं।" फारसी से ट्रांसलेट किए गए इस मैसेज की तस्वीरें कई मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए तेजी से ऑनलाइन फैलीं और ईरान के सरकारी टेलीविजन पर भी दिखाई गईं। यह ब्रॉडकास्ट ट्रंप की बार-बार दी गई चेतावनियों के बाद आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने लिखा, "अगर ईरान शांति से विरोध करने वालों को मारता है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा। हम आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।" ईरानी मीडिया ने जिस तस्वीर का इस्तेमाल किया, वह जुलाई 2024 में पेन्सिलवेनिया के बटलर में एक कैंपेन रैली के दौरान ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले की थी। उस समय थॉमस क्रुक्स नाम के एक बंदूकधारी ने स्टेज पर गोलियां चलाई थीं, जो ट्रंप के कान को छूते हुए निकल गई थी। इस घटना ने अमेरिका को चौंका दिया था। हाल के दिनों में ईरान और यूरोपीय देशों के बीच डिप्लोमैटिक रिश्ते और खराब हो गए हैं। अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद ईरान ने फिलहाल अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। बढ़ते तनाव के बावजूद ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक इंटरव्यू में कहा है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है और पिछले दो दशकों से उसने यही रुख बनाए रखा है। कूटनीति युद्ध से कहीं बेहतर है। अराघची ने वाशिंगटन से सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत से समाधान निकालने का आग्रह किया है।

India-EU डील पर ट्रंप को एक्सपर्ट की तगड़ी प्रतिक्रिया, कहा- ‘अमेरिका ही हारा’

वाशिंगटन एक ओर जहां डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ (Donald Trump Tariff) की धौंस जमाकर अपनी शर्तों पर भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को अंजाम तक पहुंचाने की कोशिश में लगे हैं, तो भारत सरकार अपनी रणनीति पर आगे बढ़ते हुए बिना किसी की शर्तों के आगे झुके एक के बाद एक कई देशों से ट्रेड डील कर रहा है. हाल ही में ओमान और न्यूजीलैंड के बाद अब यूरोपीय यूनियन के साथ भी भारत का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (India-EU FTA) फाइनल होने के करीब है.  यूरोपीय मीडिया की रिपोर्ट्स की मानें, तो 27 जनवरी को इस पर अंतिम मुहर भी लग सकती है. इस बड़ी डील को लेकर एक्सपर्ट डोनाल्ड ट्रंप पर निशाना साधते हुए नजर आ गए है. 'द ग्रेट रिसेट' के लेखक और स्ट्रेटिजिक एनालिस्ट नवरूप सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) के जरिए एक पोस्ट करते हुए लिखा है कि, 'ये खबर साबित करती है कि अमेरिकी ही अंतिम रूप से हारा है.' 27 जनवरी का बड़ा समझौता! European Union 27 जनवरी को भारत के साथ अपने अब तक के सबसे बड़े व्यापार समझौते को औपचारिक रूप दे सकता है. यूरोपियन मीडिया यूरेक्टिव की एक रिपोर्ट को देखें, तो इस डील पर साइन करने के लिए EU के टॉप ऑफिशियल नई दिल्ली भेजे जाएंगे. रिपोर्ट में खास बात ये है कि India-EU FTA में एग्रीकल्चर सेक्टर को दूर रखा गया है. बता दें कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अटकने में एक अहम मुद्दा कृषि और डेयरी प्रोडक्ट भी हैं. इसमें बताया गया कि उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को यूरोपीय संसद के सदस्यों को बंद कमरे में बताया कि समझौते पर इस महीने हस्ताक्षर किए जाएंगे और इसमें कृषि शामिल नहीं है. इसे लेकर यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा 27 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के साथ समझौते पर साइन के लिए भारत यात्रा पर आएंगे.  एक्सपर्ट बोले- 'ये ट्रंप के लिए संदेश' ट्रेड डील को लेकर आई इस बड़ी खबर के बाद 'द ग्रेट रिसेट' (The Great Reset) के लेखक नवरूप सिंह ने इस समझौते के अंतिम पड़ाव पर पहुंचने पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर निशाना साधा है. उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि, 'कृषि क्षेत्र में बिना किसी समझौते के फाइनल होने जा रही इस डील से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह संदेश जाता है कि भारत कृषि या डेयरी जैसे अपने मूल हितों पर कभी समझौता नहीं करेगा.' नवरूप सिंह ने X पोस्ट में लिखा,'यह होने जा रही डील संदेश है कि भारत अपने मूल हितों के साथ समझौता नहीं करेगा, फिर चाहे न्यूजीलैंड हुआ करार हो या फिर फ्रांस के साथ राफेल डील और जर्मनी के साथ पनडुब्बी सौदा, जो भारतीय सामान के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक को खोलने का प्रयास है.' 'भारत कर रहा टैरिफ का मुकाबला' नवरूप सिंह ने कहा कि भारत के ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और ओमान के साथ हुए हालिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में 99% भारतीय सामानों के आयात पर जीरो टैरिफ (Zero Tariff) हो जाता है. उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक पेशेवर की तरह खेल रहा है और ट्रंप के हाई टैरिफ का मुकाबला कर रहा है. भारत हर मुक्त व्यापार समझौते और डीफेंस डील (India Defence Deal) के साथ एक तरह से अमेरिका की ताकत और दबाव को कम करता नजर  आ रहा है और अंततः इसमें अमेरिका ही हार रहा है!

ट्रंप का बयान: पुतिन शांति समझौते के लिए तैयार, जेलेंस्की में नहीं दिख रहा उत्साह

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। ट्रंप का सीधा आरोप है कि शांति समझौते की राह में सबसे बड़ी बाधा रूस नहीं, बल्कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की को लेकर दिया बयान ओवल ऑफिस में दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट रूप से कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन डील करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन जेलेंस्की शांति प्रक्रिया में वैसी उत्सुकता नहीं दिखा रहे। जब उनसे पूछा गया कि अब तक यह संघर्ष क्यों नहीं सुलझ सका, तो ट्रंप ने इसका जिम्मेदार उन्होंने जेलेंस्की को ठहराया। ट्रंप के इस रुख से कीव और यूरोपीय सहयोगियों के बीच चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पारंपरिक रूप से माना जाता रहा है कि रूस ही युद्ध खत्म करने का इच्छुक नहीं है। वर्तमान में अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशर के नेतृत्व में शांति वार्ता चल रही है। अमेरिका की ओर से यूक्रेन पर दबाव डाला जा रहा है कि वह युद्ध विराम के बदले पूर्वी डोनबास क्षेत्र पर अपना दावा छोड़ दे। बातचीत का मुख्य फोकस इस बात पर है कि युद्ध के बाद यूक्रेन को ऐसी सुरक्षा गारंटी दी जाए जिससे रूस दोबारा हमला न कर सके। कई देशों को खटक रहा ट्रंप का बयान ट्रंप का पुतिन पर बढ़ता भरोसा और जेलेंस्की की आलोचना यूरोपीय देशों को खटक रही है। कई यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि पुतिन वास्तव में किसी समझौते के मूड में नहीं हैं, बल्कि वे केवल वक्त हासिल करना चाहते हैं। ट्रंप के इस रुख ने कीव के सामने बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है, क्योंकि युद्ध के लिए अमेरिकी सहायता बहुत हद तक ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर निर्भर है।

ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने दी धमकी, 8 राजनीतिक कैदियों की रिहाई की मांग

तेहरान      ईरान में पिछले 18 दिन से जारी विरोध-प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुके हैं जिनमें अब तक 2,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इन मौतों के बीच अमेरिका लगातार धमकी दे रहा है कि अगर ईरान के खामेनेई शासन ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अपनी सख्ती नहीं रोकी तो वो सैन्य कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेगा. वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हाल ही में ट्रंप ने अगवा करवा लिया था और ऐसे में ईरान को लेकर उनकी धमकियों को हल्के में नहीं लिया जा रहा है. इस बीच ट्रंप प्रशासन ने ईरान से कहा है कि वो राजनीतिक कैदियों को भी जल्द से जल्द रिहा करे. ट्रंप प्रशासन के फारसी भाषा के एक्स अकाउंट से एक ट्वीट में ईरान से राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की मांग की गई है. ट्वीट में लिखा गया, 'हम प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा पर चिंता जता रहे तो ये न समझा जाए कि हमने उन राजनीतिक कैदियों को भुला दिया है, जिन्हें इन विरोध प्रदर्शनों से पहले ही जेल में डाल दिया गया था.' ट्वीट में ईरान की जेल में बंद आठ राजनीतिक कैदियों के नाम लिखे गए हैं जिनमें शामिल हैं- नरगिस मोहम्मदी, सपीदेह गोलियान, जवाद अली-कोर्दी, पूरान नाजेमी, रजा खंदान, मजीद तवक्कोली, शरीफेह मोहम्मदी, हुसैन रोनागी.  ट्रंप प्रशासन की तरफ से ट्वीट में आगे लिखा गया, 'इन लोगों को लगातार हिरासत में रखा गया है जो गंभीर चिंता का विषय है. हम मांग करते हैं कि इस्लामिक रिपब्लिक का शासन इन सभी कैदियों को तुरंत रिहा करे.' कौन हैं वो 8 राजनीतिक कैदी जिन्हें जेल से छोड़ने की मांग कर रहा अमेरिका? नरगिस मोहम्मदी 2023 में शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाली नरगिस मोहम्मदी ईरान की महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं. 53 साल की नरगिस मोहम्मदी एक लेखिका हैं और डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर (डीएचआरसी) की उप निदेशक भी हैं. महिला अधिकारों के अलावा वो अन्य मानवाधिकार मुद्दों पर भी काम करती हैं जिनमें मृत्युदंड के खिलाफ कैंपेन चलाना और भ्रष्टाचार के विरोध की मुहिम शामिल है. 2023 में 'ईरान में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई और सभी के लिए मानवाधिकार व स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के संघर्ष' के लिए उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया. नरगिस मोहम्मदी पर ईरान का खामेनेई शासन हमलावर रहा है और वो कई बार जेल जा चुकी है. जब उन्हें नोबेल पुरस्कार दिया गया था तब भी वो जेल में ही थीं. मेडिकल ग्राउंड पर उन्हें जेल से बाहर रखा गया था लेकिन फिर पिछले साल दिसंबर में एक स्मृति सभा से दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया और फिलहाल वो राजधानी तेहरान की एविन जेल में बंद हैं. सपीदेह गोलियान ईरान की महिला अधिकार कार्यकर्ता गोलियान खामेनेई शासन के निशाने पर रही हैं और कई बार जेल जा चुकी हैं. गोलियान एक लेखिका और फ्रीलांस जर्नलिस्ट भी हैं जो कि महिला अधिकारों और महिला श्रम के क्षेत्र में काम करती हैं. हड़ताल कर रहे श्रमिकों के समर्थन के लिए गोलियान को पहली बार 2018 में गिरफ्तार किया गया था और 11 जून 2025 को रिहा कर दिया गया. हालांकि, मोहम्मदी के साथ इन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि ये भी स्मृति सभा का हिस्सा थीं. जवाद अली कोर्दी- अली-कोर्दी ईरान के मानवाधिकार वकील, यूनिवर्सिटी लेक्चरर और सिटी काउंसिल के पूर्व सदस्य हैं. 1 मार्च 2025 को इन्हें मशहद स्थित उनके ऑफिस से गिरफ्तार किया गया और ईरान के खिलाफ प्रोपेगेंडा के आरोप में हिरासत में लिया गया. उन्हें 11 अगस्त 2025 को रिहा किया गया, लेकिन अधिकारियों की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और कंट्रोल में रखा गया. उनके भाई और सहकर्मी खोसरो अली-कोर्दी की दिसंबर में मौत हो गई थी जिसके लिए आयोजित श्रद्धांजलि सभा में ही नरगिस मोहम्मदी और गोलियान को गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई की निंदा की. 10 दिसंबर को जवाद अली-कोर्दी को मशहद की क्रांतिकारी अदालत ने तलब किया और 12 दिसंबर 2025 को उन्हें उनके ऑफिस से सुरक्षा बलों ने हिंसक तरीके से गिरफ्तार कर लिया. उनके खिलाफ 'राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ सभा करने और साजिश रचने' तथा 'राज्य के खिलाफ प्रोपेगेंडा' के आरोप लगाए गए हैं. रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें एकांत कारावास में रखा गया है. पूरान नाजेमी नाजेमी ईरान के करमान प्रांत से हैं और महिला और नागरिक अधिकारों के लिए काम करती हैं. इन्हें भी नोबेल पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी के साथ गिरफ्तार किया गया था.  रजा खंदान खंदान ईरानी मानवाधिकार कार्यकर्ता और ग्राफिक डिजाइनर हैं. इन्होंने हिजाब आंदोलन के दौरान प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था और मौत की सजा के खिलाफ भी आवाज उठाते रहे हैं. इन्हें 2018 और 2021 के बीच कई बार जेल भेजा जा चुका है. 14 दिसंबर 2024 को ईरानी अधिकारियों ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार किया और अभी वो जेल में ही हैं मजीद तवक्कोली  तवक्कोली ईरान के स्टूडेंट लीडर और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जो लंबे समय से जेल में हैं. छात्रों के समर्थन में सरकार की आलोचना के लिए 2009 में पहली बार वो जेल गए थे. ईरानी शासन की आलोचना को लेकर फिलहाल वो 9 साल की कैद में हैं. शरीफेह मोहम्मदी मोहम्मदी ईरान की सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्हें देशद्रोह के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है. 22 वर्षीय ईरानी छात्रा महसा अमीनी की मौत के बाद ईरान में सितंबर 2022 से देशव्यापी आंदोलन शुरू हुए थे. हुसैन रोनागी रोनागी ईरान के ब्लॉगर, इंटरनेट की आजादी के हिमायती और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. इन्हें भी कई बार जेल भेजा जा चुका है. ईरानी शासन की आलोचना के लिए पहली बार 13 दिसंबर 2009 को इन्हें जेल भेजा गया था. 15 साल की सजा हुई लेकिन 2019 में रिहा कर दिए गए. फिर फरवरी 2022 में गिरफ्तार हुए और जल्द ही छोड़ दिए गए. हिजाब आंदोलन के दौरान फिर से गिरफ्तार हुए और खराब सेहत के बावजूद अब भी जेल में कैद हैं.

ट्रंप का ईरान को दो टूक संदेश: बातचीत बंद, आर्थिक शिकंजा कसा, आंदोलनकारियों के साथ खड़े

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकों को रद्द कर दिया है, ईरान से जुड़े कारोबार पर नए टैरिफ लागू कर दिए हैं और ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों से आंदोलन जारी रखने की अपील की है। ट्रंप का कहना है कि यह फैसला ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसा के कारण लिया गया है। डेट्रॉइट इकोनॉमिक क्लब में अपने भाषण में ट्रंप ने कहा, "जब तक प्रदर्शनकारियों की बेमतलब हत्याएं बंद नहीं होतीं, मैंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं।" उन्होंने कहा कि ईरान में जो हो रहा है, वह अस्वीकार्य है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने 'ईरानी देशभक्तों' को संबोधित करते हुए उनसे आंदोलन जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा, "सभी ईरानी देशभक्तों से मेरी अपील है कि प्रदर्शन करते रहिए। अगर संभव हो तो अपनी संस्थाओं पर नियंत्रण हासिल कीजिए।" ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि दोषियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ईरान में मौतों के आंकड़ों पर ट्रंप ने कहा कि अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। मुझे पांच तरह के आंकड़े सुनने को मिल रहे हैं, लेकिन एक मौत भी बहुत ज्यादा है। जवाबदेही तय होगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। आर्थिक मोर्चे पर ट्रंप ने बताया कि ईरान पर नया दबाव तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। उन्होंने कहा, "आपने देखा कि मैंने ईरान के साथ कारोबार करने वाले हर व्यक्ति और देश पर टैरिफ लगा दिए हैं। यह आज से लागू हो गया है।" ट्रंप ने टैरिफ को अपनी विदेश नीति का मुख्य हथियार बताया और कहा कि इसका मकसद ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना है। ट्रंप ने 'मेक ईरान ग्रेट अगेन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए ईरान के मौजूदा नेतृत्व की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान एक महान देश है, लेकिन मौजूदा शासकों ने उसे नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि बाहरी दबाव से ईरान में बदलाव आएगा और कहा, "मैं बस इतना कहता हूं कि मदद रास्ते में है।" ट्रंप ने टैरिफ को लंबी सैन्य कार्रवाई का बेहतर विकल्प बताया। उनके मुताबिक, व्यापारिक दबाव से पहले भी कई मामलों में नतीजे मिले हैं। उन्होंने ईरान को अन्य विदेशी नीति कार्रवाइयों के साथ जोड़ते हुए परमाणु ठिकानों पर हमलों और आतंकी नेताओं के खिलाफ अभियानों का जिक्र किया। ट्रंप ने यह भी कहा कि जो देश अमेरिका की व्यापार और सुरक्षा संबंधी मांगों का विरोध करते हैं, उन पर भी टैरिफ लगाए जाते हैं। ट्रंप के अनुसार, टैरिफ कूटनीति से ज्यादा असरदार दबाव बनाते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच दशकों से औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार रिकॉर्ड लंबे समय से तनाव की वजह रहे हैं। अमेरिका पहले भी प्रतिबंधों, टैरिफ और द्वितीयक प्रतिबंधों के जरिए ईरान पर दबाव बनाता रहा है ताकि सीधे सैन्य टकराव से बचते हुए अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत रखी जा सके।

ईरान का आरोप: ट्रंप और नेतन्याहू को किलर बताया, 2500 मौतों का जिम्मेदार बना अमेरिका और इज़राइल

तेहरान  ईरान की सड़कों पर हंगामा जारी है. कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिडंत हो रही है. इस बीच ईरान में चल रहे प्रदर्शनों और टकराव की वजह से मरने वालों की संख्या 2500 को पार कर गई है. कई दिनों के बाद ईरान के लोग दूसरे देशों में अपने रिश्तेदारों को फोन कर पाने में सक्षम हो पा रहे हैं. इसके साथ ही वहीं की खौफनाक हकीकत सामने आ रही है.  ईरान में अबतक मरने वालों की संख्या 2571 हो गई है. अमेरिका की मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार सुबह तक मरने वालों की संख्या कम से कम 2,571 हो गई थी. यह आंकड़ा कई दशकों में ईरान में किसी भी दूसरे विरोध प्रदर्शन या अशांति में हुई मौतों की संख्या से कहीं ज़्यादा है. और  देश की 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाता है. पहला हत्यारा ट्रंप है… हालांकि ईरान का प्रशासन किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं दिखता है. ईरानी अधिकारियों ने एक बार फिर से अमेरिकी ट्रंप को कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिकी रवैये पर जवाब देते हुए लिखा, 'हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." समाचार एजेंसी एपी के अनुसार ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर मौतों की पुष्टि की. एक अधिकारी के हवाले से सरकारी टीवी ने कहा कि मुल्क में "बहुत सारे लोग शहीद" हुए हैं. विद्रोहियों ने खामेनेई के लिए मौत की सजा मांगी ये प्रदर्शन दिसंबर के आखिर में ईरान की खराब अर्थव्यवस्था के गुस्से में शुरू हुए और जल्द ही यहां की मजहबी शासन प्रणाली इसके निशाने पर आ गई. राजधानी में लोग सर्वोच्च धार्मिक नेता खामेनेई की मौत की मांग करने नारे लगा रहे हैं और तस्वीरें बना रहे हैं. ईरान में इस कथित 'अपराध' के लिए मौत की सजा मुकर्रर की जाती है. इस बीच अमेरिका लगातार प्रदर्शनकारियों के साथ अपना सपोर्ट जता रहा है. मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, "ईरानी देशभक्तों, विरोध करते रहो- अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो." ट्रंप ने कहा कि था कि उन्होंने सभी ईरानी अधिकारियों के साथ तबतक के लिए बातचीत रोक दी है जबतक इन हत्याओं को रोका नहीं जाता है. उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द मदद मिलने वाली है. हालांकि घंटों बाद ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा कि उनकी सरकार "उसी हिसाब से" कार्रवाई करने से पहले मारे गए प्रदर्शनकारियों की संख्या पर एक सही रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है. ट्रंप की मदद आ रही है ट्रंप ने ईरानी सुरक्षा बलों के बारे में कहा, "मुझे लगता है कि वे बहुत बुरा बर्ताव कर रहे हैं, लेकिन यह कन्फर्म नहीं है." इस बीच ईरानी सत्ता के रुख में कोई नरमी नहीं दिख रही है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिका के रवैये पर जवाब देते हुए लिखा: "हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल देश की सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण संस्था है जो राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा नीतियों का निर्धारण करती है. यह 1989 में संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत स्थापित हुई. इसके अध्यक्ष ईरान के राष्ट्रपति होते हैं, लेकिन इसके सभी निर्णय सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई लेते हैं. तेहरान के फोन लाइन खुले समाचार एजेंसी एपी के अनुसार लगभग 5 दिनों के बाद फोन लाइन खुलने के बाद तेहरान के लोग मुल्क से बाहर कॉल कर रहे हैं. एक ईरानी चश्मदीद ने सेंट्रल तेहरान में भारी सुरक्षा, जले हुए सरकारी भवन, टूटे हुए ATM और कम राहगीरों के बारे में बताया. इस बीच लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि आगे क्या होगा जिसमें अमेरिका के हमले की संभावना भी शामिल थी. अपनी सुरक्षा की चिंता के कारण सिर्फ़ अपना पहला नाम बताने वाले दुकानदार महमूद ने कहा, "मेरे ग्राहक ट्रंप की प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हैं और सोचते हैं कि क्या वह इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ़ मिलिट्री हमला करने की योजना बना रहे हैं." "मुझे नहीं लगता कि ट्रंप या कोई दूसरा विदेशी देश ईरानियों के हितों की परवाह करता है." रेजा एक टैक्सी ड्राइवर जिसने सिर्फ़ अपना पहला नाम बताया, ने कहा कि कई लोगों के मन में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. उन्होंने कहा, "लोग – खासकर युवा निराश हैं, लेकिन वे विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कर रहे हैं."

US कंपनियों की ट्रंप को चेतावनी, वेनेजुएला में निवेश पर सवाल, ‘कैसे निकालेगा तेल?’

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने कंपनियों के सामने वेनेजुएला के तेल उद्योग को पुनर्जीवित करने का प्रस्‍ताव रखा है, जिसे लेकर शुक्रवार को व्‍हाइट हाउस में एक मीटिंग हुई. इस बैठक के दौरान एक्सॉनमोबिल के सीईओ डैरेन वुड्स समेत कई कंपनियों ने यहां निवेश को लेकर समस्‍याओं के बारे में बताया. डैरेन वुड्स ने साफ तौर पर कहा कि वर्तमान में यह लैटिन अमेरिकी देश निवेश के लिहाज से लायक नहीं है.  एक्सॉनमोबिल के सीईओ ने कहा कि वेनेजुएला की अस्थिर कानूनी व्यवस्था, निवेश सुरक्षा की कमी और पुराने हाइड्रोकार्बन कानूनों के कारण पर्याप्त सुधारों के बिना अमेरिकी तेल कंपनियों के लिए यह क्षेत्र सही नहीं होगा. वुड्स ने कहा कि अगर आप वेनेजुएला में आज मौजूद व्यावसायिक संरचनाओं और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को देखें, तो वहां निवेश करना संभव नहीं है.  उन्‍होंने आगे कहा कि इन इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और कानून व्‍यवस्‍था में महत्वपूर्ण बदलाव करने होंगे. निवेश के लिए स्‍थायी सुरक्षा उपाय और हाइड्रोजन कानूनों में बदलाव की आवश्‍यकता है. उन्होंने कहा कि एक्सॉनमोबिल ने पहली बार 1940 में वेनेजुएला में प्रवेश किया था और उसकी संपत्ति दो बार जब्त किया जा चुका है, जिस कारण कंपनी सोच समझकर कदम रखना चाहती है.   वेनेजुएला में बड़े बदलाव की जरूरत कंपनी के सीईओ ने कहा कि आप कल्पना कर सकते हैं कि तीसरी बार फिर से प्रवेश करने के लिए यहां पर कई तरह के बदलाव की आवश्‍यकता होगी. खासकर ऐतिहासिक स्‍वरूप और वर्तमान स्थिति को देखते हुए कई बदलाव जरूरी हैं. हालांकि इसके बाद भी वुड्स ने कहा कि उन्‍हें विश्‍वास है कि अमेरिका आवश्‍यक बदलाव लाने में मदद कर सकता है.   जांच के लिए जाएगी एक टीम  वुड्स ने कहा कि उन्‍हें उम्‍मीद है कि एक्‍सॉन जल्‍द ही वेनेजुएला में तेल अवसंरचना की स्थिति का आकलन करने के लिए एक तकनीकी टीम भेजेगी. डैरेन वुड्स ने कहा कि कंपनियों को किसी भी निवेश से पहले संभावित लाभ के बारे में जानकारी हासिल करनी होगी.  एक्सॉनमोबिल के सीईओ ने कहा कि आखिरी सवाल यह होगा कि वित्तीय नजरिए से सुरक्षा उपाय कितने टिकाऊ हैं? इसका लाभ कैसा दिखता है? वाणिज्यिक व्यवस्थाएं और कानूनी ढांचे क्या हैं? वेनेजुएला में निवेश पर निर्णय लेने से पहले इन सभी चीजों को व्यवस्थित करना होगा.  मधुमक्‍खी के छत्ते की तरह खड़ी हैं कंपनियां: ट्रंप  ट्रंप का दावा है कि तेल कंपनियों के अधिकारी इस अवसर का लाभ उठाने के लिए मधुमक्खी के छत्ते की तरह कतार में खड़े हैं. अगर आप अंदर तक नहीं जाना चाहते हैं तो बस मुझे बता दीजिए. बैठक के दौरान उन्‍होंने कंपनियों से कहा कि यहां पर 25 लोग अभी नहीं हैं, जो आपकी जगह लेने के लिए लाइन में खड़े हैं. उन्होंने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें सुझाव दिया गया था कि प्रशासन एक जोखिम भरे निवेश का समर्थन करने के लिए वित्तीय गारंटी दे रहा है.    ट्रंप ने कहा कि मुझे उम्‍मीद है कि मुझे कोई बचाव पेश नहीं करना पड़ेगा. दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियां यहां पर हैं और वे रिस्‍क को समझती हैं. बैठक के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला में निवेश करने वाली कंपनियों को अमेरिकी सरकार द्वारा टैक्‍सपेयर्स के पैसे खर्च किए बिना या जमीन पर सेना तैनात किए बिना 'पूर्ण सुरक्षा' का आश्वासन दिया जाएगा. ट्रंप ने संकेत दिया कि वेनेजुएला अमेरिकी कंपनियों को सुरक्षा प्रदान करेगा और कंपनियां भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था स्वयं करेंगी.

ट्रंप ने मंजूर किया 500% टैरिफ लगाने वाला बिल, भारत, चीन और ब्राजील पर अमेरिकी प्रतिबंध की तैयारी

वाशिंगटन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की जा सकेगी. इसके बाद भारत और चीन पर अमेरिकी टैरिफ बहुत ज्यादा बढ़ सकता है, कुछ मामलों में यह 500 फीसदी तक पहुंच सकता है. यह कदम यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार को झकझोर देने वाला बड़ा कदम उठाने के संकेत दिए हैं। वेनेजुएला के बाद अब अमेरिका के निशाने पर भारत, चीन और ब्राजील आ गए हैं। ट्रंप ने एक ऐसे विवादित विधेयक को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिसके तहत रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाया जा सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध बना वजह यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका की सख्त रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम ने साफ कहा है कि जो देश रूस से सस्ता तेल खरीद रहे हैं, वे अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की युद्ध नीति को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं। इसी को रोकने के लिए अमेरिका अब टैरिफ को हथियार बनाने की तैयारी में है। अगले हफ्ते वोटिंग हो सकती है रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बिल को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि ट्रंप के साथ बैठक अच्छी रही और इस बिल पर अगले हफ्ते संसद में वोटिंग हो सकती है. रूस से तेल खरीदने वालों पर कार्रवाई यह बिल लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर पेश किया है. इसके तहत ऐसे देशों पर सख्ती की जा सकेगी जो जानबूझकर रूस से तेल और यूरेनियम खरीद रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि इससे रूस को जंग जारी रखने के लिए पैसा मिलता है. भारत, चीन और ब्राजील पर दबाव सीनेटर ग्राहम के मुताबिक, इस बिल से राष्ट्रपति ट्रंप को भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर दबाव बनाने की ताकत मिलेगी, ताकि वे सस्ता रूसी तेल खरीदना बंद करें. पिछले साल ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर 25 फीसदी टैक्स लगाया था. इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैक्स भी लगाया गया. इससे कुछ भारतीय सामानों पर कुल टैक्स 50 फीसदी तक पहुंच गया और दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई. चीन के साथ भी बिगड़े रिश्ते अमेरिका और चीन के बीच भी टैक्स को लेकर तनाव बढ़ चुका है. अमेरिका ने चीन से आने वाले सामान पर 145 फीसदी तक टैक्स लगाया, जिसके जवाब में चीन ने अमेरिकी सामान पर 125 फीसदी टैक्स लगा दिया था. हालांकि, बाद में अमेरिका और चीन ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि वे 90 दिनों के लिए अपने-अपने टैरिफ रोक देंगे और बातचीत जारी रखेंगे. समझौते के अनुसार, अमेरिका चीन से आने वाले सामान पर टैक्स 145 फीसदी से घटाकर 30 फीसदी करेगा. वहीं चीन अमेरिका से आने वाले सामान पर टैक्स 125 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर देगा. भारत को लेकर ट्रंप का बयान हाल के दिनों में ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि भारत पर नए टैक्स लगाए जा सकते हैं. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जानते थे कि वह खुश नहीं हैं. ट्रंप ने कहा, 'पीएम मोदी अच्छे आदमी हैं, लेकिन मुझे खुश रखना जरूरी था. हम बहुत जल्दी टैक्स बढ़ा सकते हैं.' चावल पर भी टैक्स की चेतावनी पिछले महीने ट्रंप ने भारतीय चावल पर भी नया टैक्स लगाने की धमकी दी थी. यह बात तब सामने आई, जब व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों ने भारत, चीन और थाईलैंड पर सस्ता अनाज बेचने का आरोप लगाया. अटकी हुई है बातचीत  भारत और अमेरिका के बीच टैक्स को लेकर चल रही बातचीत फिलहाल रुकी हुई है. अमेरिका चाहता है कि भारत अमेरिकी खेती से जुड़े सामान पर टैक्स कम करे. वहीं भारत सरकार साफ कह चुकी है कि वह अपने किसानों और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगी. किन देशों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? भारत – फिलहाल भारत पर अमेरिका का करीब 50% तक टैरिफ लागू है, जिसे बढ़ाकर सीधे 500% करने का प्रस्ताव है। चीन – पहले से जारी अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के बीच यह फैसला तनाव को और बढ़ा सकता है। ब्राजील – लैटिन अमेरिका की बड़ी अर्थव्यवस्था होने के कारण ब्राजील को भी भारी आर्थिक झटका लग सकता है। लिंडसे ग्राहम का बयान अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'राष्ट्रपति ट्रंप ने उस विधेयक को हरी झंडी दे दी है, जिस पर मैं लंबे समय से काम कर रहा हूं। इसका मकसद रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दंडित करना है। भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।'  

निकोलस मादुरो ने कोर्ट में उठाया मौका, वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद पर बनाए रखा दावा, डील का हुआ खुलासा

न्यूयॉर्क बीते हफ्ते वेनेजुएला में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के इशारे पर जो कुछ भी हुआ, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके बेडरूम से उठवा लिया. मादुरो और उनकी पत्नी फिलहाल न्यूयॉर्क में कैद हैं और उनके खिलाफ ड्रग्स से जुड़ा मुकदमा शुरू किया गया है. मादुरो के साथ हुई इस घटना से वेनेजुएला का ट्रेड पार्टनर चीन बेहद नाराज हुआ है. चीन के टॉप डिप्लोमैट ने संयुक्त राष्ट्र में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर न्यूयॉर्क लाए जाने के अमेरिका के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है. वेनेजुएला में चीन एक बड़ा स्टेकहॉल्डर है और ऐसे में उसकी यह प्रतिक्रिया जायज मानी जा रही है. चीन आम तौर पर गैर-हस्तक्षेप की नीति का पालन करता है. वो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना की गई सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना करता रहा है. अमेरिका ने चीन के 'ऑल-वेदर' यानी सदाबहार स्ट्रैटेजिक पार्टनर माने जाने वाले देश के नेता को आधी रात उसके ही देश की राजधानी से उठवा लिया गया जो चीन के लिए एक बड़ा झटका है. 'मैं आज भी वेनेजुएला का राष्ट्रपति   …..   अमेरिकी अदालत में पेश हुए निकोलस मादुरो सोमवार को खूब गरजे. उन्होंने भरी अदालत में खुद को बेगुनाह बताया और कहा कि वह किडनैप किए गए हैं. वेनेजुएला से अमेरिकी सेना द्वारा उठाए गए निकोलस मादुरो ने सोमवार को मैनहैटन में अमेरिकी फेडरल कोर्ट में ड्रग तस्करी और नार्को-टेररिज्म के आरोपों पर अपनी पहली पेशी के दौरान मौके का फायदा उठाया और खुद को निर्दोष बताया. अपनी पहली सुनवाई में निकोलस मादुरो ने जज के सामने दावा किया कि वह अब भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति हैं और उन्हें किडनैप किया गया है. अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज एल्विन हेलरस्टीन के सामने पेश होते हुए मादुरो ने कोर्ट को बताया कि उन्हें जबरदस्ती वेनेजुएला से लाया गया था. कोर्टरूम में मौजूद रिपोर्टर्स के मुताबिक, उन्होंने कहा, ‘मुझे किडनैप किया गया है.’इतना ही नहीं, निकोलस मादुरो के वकील ने अदालत में साफ किया कि वे फिलहाल जमानत की कोई मांग नहीं कर रहे हैं. जब अदालत में पेशी हुई तो निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस जेल की वर्दी और बेड़ियों में नजर आए. दोनों ने नार्को-टेररिज्म और ड्रग्स तस्करी के सभी चार आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. अदालत में आक्रामक दिखे मादुरो कोर्ट रूम में निकोलस मादुरो काफी आक्रामक दिखे. उन्होंने कहा कि ‘मुझे काराकस में मेरे घर से अगवा किया गया.’ जज ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई अब 17 मार्च को होगी. सुनवाई के बाद दोनों को दोबारा कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया गया. अमेरिकी सेना ने 3 जनवरी को ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ के तहत उन्हें काराकस से पकड़ा था. 'खुद को दुनिया का जज न समझे अमेरिका' चीन ने अमेरिका पर खुद को 'दुनिया का जज' समझने का आरोप लगाया है. चीन ने इस कार्रवाई की वैधता को लेकर संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका को टार्गेट भी किया है, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने रविवार को बीजिंग में पाकिस्तान के अपने समकक्ष से मुलाकात के दौरान कहा था, 'हम कभी यह नहीं मानते कि कोई भी देश दुनिया का पुलिसवाला बन सकता है, न ही हम यह स्वीकार करते हैं कि कोई देश खुद को दुनिया का जज घोषित करे.' उन्होंने सीधे अमेरिका का नाम लिए बिना वेनेजुएला में हुए 'अचानक घटनाक्रम' का जिक्र किया. वांग यी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सभी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा की पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए.  बीते शनिवार को 63 साल के मादुरो को आंखों पर पट्टी बांधकर और हथकड़ी लगाकर न्यूयॉर्क ले जाया गया. कैद से उनकी कुछ तस्वीरें सामने आई जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया. मादुरो को हटाने के लिए उनके करीबी से हुई थी डील? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने पर बड़ा खुलासा किया है। ट्रंप ने कहा कि उनके पास मादुरो के किसी करीबी अधिकारी से डील करने का मौका था, लेकिन उनकी टीम ने फैसला किया कि इसे बिना मदद के ही अंजाम दिया जाएगा। हाल ही में अमेरिका की सेना ने काराकास में सैन्य अभियान चलाकर मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया और यूएस लेकर गए। यहां उन पर नार्को-टेररिज्म, कोकेन आयात की साजिश और हथियार रखने जैसे आरोपों में मुकदमा चलेगा। मादुरो ने न्यूयॉर्क की अदालत में खुद को बेकसूर बताया। इस अभियान के बाद वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अंतरिम राष्ट्रपति बन गई हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि वेनेजुएला पर अंतिम नियंत्रण उनका है और चुनाव कराना अभी संभव नहीं है, क्योंकि देश को पहले स्थिर करना जरूरी है। ट्रंप ने एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका वेनेजुएला से युद्ध नहीं कर रहा, बल्कि ड्रग तस्करी करने वालों से लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अंतरिम नेतृत्व सहयोग नहीं करता तो दूसरा सैन्य अभियान हो सकता है। व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने बताया कि ट्रंप ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को वेनेजुएला में आर्थिक और राजनीतिक सुधारों का नेतृत्व सौंपा है। वेनेजुएला की सरकार कौन चलाएगा? स्टीफन मिलर के अनुसार, अंतरिम सरकार से पूर्ण सहयोग मिल रहा है, जिससे वेनेजुएला के लोग पहले से कहीं अधिक अमीर होंगे। अमेरिका को आर्थिक और सैन्य लाभ मिलेगा। ट्रंप की टीम में रुबियो के अलावा रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, उप चीफ ऑफ स्टाफ मिलर और उपराष्ट्रपति जेडी वैंस शामिल हैं। मार्को रुबियो ने ट्रंप के वेनेजुएला को चलाने वाले बयान पर कहा कि अमेरिका रोजमर्रा की सरकार नहीं चलाएगा, बल्कि आर्थिक दबाव और सैन्य धमकी से प्रभाव डालेगा। रुबियो ने जोर दिया कि अंतरिम सरकार के कार्यों से ही फैसला लिया जाएगा और अभी चुनाव की बात जल्दबाजी है। ट्रंप ने वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार का जिक्र कर अमेरिकी कंपनियों के निवेश की बात की, जबकि रुबियो ने कहा कि मौजूदा सैन्य स्थिति से ड्रग और तेल शिपमेंट रोके जा रहे हैं। कोर्टरूम में क्या-क्या हुआ?     मादुरो ने अमेरिकी कोर्ट में गरजते हुए कहा कि ‘मुझे मेरे घर से पकड़ा गया था’.     40 मिनट की सुनवाई के दौरान यह एकमात्र ऐसा पल नहीं था, जब … Read more

अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो को गिरफ्तार किया, ट्रंप के बयान के बाद वेनेजुएला उपराष्ट्रपति का जवाब

काराकस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए घोषणा की है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को हिरासत में ले लिया है. यह घटनाक्रम वेनेजुएला की राजधानी काराकस में हुए उन संदिग्ध हवाई हमलों और धमाकों के बाद आया है, जिसकी खबरें पिछले कुछ घंटों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई थीं. लैटिन अमेरिका के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सैन्य और राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहा है.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए दावा किया अमेरिकी सुरक्षा बलों ने एक विशेष अभियान के तहत वेनेजुएला के विवादित राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया है. इससे पहले शनिवार को काराकस में कई बड़े धमाके सुने गए थे और सरकारी इमारतों के ऊपर काला धुआं उठता देखा गया था. माना जा रहा है कि अमेरिकी हवाई हमलों ने मादुरो के सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर दिया, जिसके बाद विशेष बलों ने उन्हें हिरासत में ले लिया. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मादुरो को वेनेजुएला में ही किसी सुरक्षित स्थान पर रखा गया है या उन्हें अमेरिका ले जाया जा रहा है. वेनेजुएला के रक्षामंत्री बोले- सरेंडर नहीं करेंगे वेनेजुएला पर हमला: वेनेजुएला के रक्षा मंत्री के जीवित होने और बयान जारी करने की पुष्टि हुई है. इससे पहले खबरें आई थीं कि बमबारी में उनके आवास को निशाना बनाया गया है. रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा, ‘हम न बातचीत करेंगे, न आत्मसमर्पण करेंगे और अंत में जीत हमारी होगी.’ वहीं, इस बीच CBS News ने दावा किया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना की एलीट स्पेशल ऑपरेशंस यूनिट डेल्टा फोर्स ने हिरासत में लिया है. हालांकि वेनेजुएला सरकार की ओर से मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है. ट्रंप बोले- यह शानदार ऑपरेशन था वेनेजुएला पर हमला: न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला में की गई कार्रवाई बेहद सोच समझकर की गई थी और इसमें बेहतरीन योजना तथा शानदार सैनिकों की भूमिका रही. ट्रंप ने इसे “वास्तव में एक शानदार ऑपरेशन” बताया. इसी बीच अमेरिका की ओर से वेनेजुएला में निशाना बनाए गए ठिकानों की पुष्टि भी की गई है. इन लक्ष्यों में कराकस स्थित मुख्य सैन्य अड्डा फुएर्ते तिउना, राजधानी का प्रमुख एयरबेस ला कार्लोटा, संचार और सिग्नल से जुड़ा अहम केंद्र एल वोल्कान, देश का सबसे बड़ा बंदरगाह ला ग्वायरा पोर्ट और मिरांडा प्रांत में स्थित हिगुएरोटे एयरपोर्ट शामिल हैं. इन ठिकानों पर हमले के बाद वेनेजुएला में सैन्य और प्रशासनिक ढांचे को बड़ा झटका लगने की बात कही जा रही है. हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं. ट्रंप का बड़ा दावा- मादुरो को गिरफ्तार करके देश से बाहर ले जाया गया वेनेजुएला पर हमला: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक सनसनीखेज बयान जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका ने वेनेजुएला के खिलाफ बड़े पैमाने पर हमला सफलतापूर्वक किया है और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी के साथ हिरासत में लेकर देश से बाहर भेज दिया गया है. ट्रंप के मुताबिक यह ऑपरेशन अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर किया गया. उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से जुड़े और विवरण जल्द साझा किए जाएंगे. ट्रंप ने यह भी बताया कि इस मामले पर आज सुबह 11 बजे मार ए लागो में प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. फिलहाल वेनेजुएला सरकार की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं.  कराकस के ऊपर ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर, वेनेजुएलाई सेना के पास ऐसे विमान नहीं वेनेजुएला पर हमला: कराकस में जारी सैन्य कार्रवाई के बीच सामने आए वीडियो फुटेज ने हालात को और गंभीर बना दिया है. CNN ने बताया कि राजधानी कराकस के ऊपर धुएं के गुबार उठते दिख रहे हैं और उसी इलाके में कई ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर उड़ते नजर आ रहे हैं. अहम बात यह है कि एविएशन जर्नल फ्लाइटग्लोबल के मुताबिक वेनेजुएला की सेना के पास किसी भी तरह के ड्यूल-रोटर हेलिकॉप्टर नहीं हैं. इससे यह संकेत और मजबूत हो गए हैं कि कराकस के ऊपर दिखाई दे रहे ये हेलिकॉप्टर विदेशी सैन्य ताकत से जुड़े हो सकते हैं.  ईरान का बयान- अमेरिका का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर का खुला उल्लंघन वेनेजुएला पर हमला: ईरान के विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है. जारी बयान में कहा गया है कि अमेरिका की ओर से किया गया हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों का स्पष्ट उल्लंघन है. ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कहा कि किसी संप्रभु देश पर इस तरह की सैन्य कार्रवाई वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है. ईरान के इस बयान से साफ है कि वेनेजुएला पर हमले को लेकर अब पश्चिम एशिया से लेकर लैटिन अमेरिका तक विरोध की आवाजें तेज होती जा रही हैं.