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ट्रंप के फैसले से 4.2 करोड़ अमेरिकियों की खाद्य सहायता पर खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने दी अस्थायी रोक की मंजूरी

अमेरिका में लाखों गरीब परिवारों के लिए बुरी खबर है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नवंबर महीने के लिए मिलने वाली फूड सहायता की आधी राशि रोक दी है और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को अस्थायी मंजूरी दे दी है. यह राहत "सप्लिमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम" (SNAP) के तहत दी जाती है, जिससे करीब 4.2 करोड़ अमेरिकियों को हर महीने खाने का सामान मिलता है. दरअसल, सरकार में चल रहे शटडाउन (सरकारी कामकाज बंद होने) की वजह से फंड्स की कमी बताई जा रही है. प्रशासन ने कहा कि फिलहाल सिर्फ 4.65 अरब डॉलर की आंशिक फंडिंग ही संभव है, जबकि प्रोग्राम की पूरी फंडिंग के लिए करीब 9 अरब डॉलर की जरूरत होती है. सुप्रीम कोर्ट की जज केतानजी ब्राउन जैक्सन ने कहा कि यह आदेश सिर्फ तब तक लागू रहेगा जब तक निचली अदालत इस मामले पर फैसला नहीं दे देती. कोर्ट ने कहा कि प्रशासन को कुछ समय दिया जा रहा है ताकि वह स्थिति संभाल सके. इससे पहले रोड आइलैंड के एक जज जॉन मैककोनेल ने सरकार को आदेश दिया था कि वह तुरंत पूरी राशि जारी करे. उन्होंने कहा था कि सरकार गरीबों की मदद रोककर राजनीतिक खेल खेल रही है लेकिन ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि निचली अदालत का आदेश "शटडाउन की अराजकता को और बढ़ा देगा." सरकार के इस रुख की आलोचना भी हो रही है. डेमोक्रेसी फॉरवर्ड नामक संगठन ने कोर्ट में कहा कि ट्रंप प्रशासन गरीब अमेरिकियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है. फिलहाल कोर्ट ने प्रशासन को राहत दे दी है, लेकिन इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ेगा जो हर महीने इसी सहायता से अपना पेट पालते हैं. अब आगे फैसला फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स करेगा कि ट्रंप प्रशासन को पूरी SNAP राशि देनी होगी या नहीं. गरीब तबके में चिंता है कि अगर फंडिंग समय पर नहीं आई, तो लाखों लोगों के सामने "खाने के लाले" पड़ सकते हैं.

ट्रंप ने बताया बड़ा राज, पाकिस्तान कर रहा परमाणु परीक्षण

इस्लामाबाद  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को लेकर एक बहुत बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि निश्चित रूप से  उत्तर कोरिया परमाणु परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है. ट्रंप ने कहा कि हम भी परीक्षण करेंगे क्योंकि दूसरे देश परमाणु परीक्षण करते हैं.  ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि दुनिया के कई देश परमाणु बम की टेस्टिंग कर रहे हैं. लेकिन वे इसके बारे में बात नहीं करते हैं. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, लेकिन वे इस बारे में बात नहीं करते. वे इसे बताते नहीं हैं. हम एक खुला समाज हैं. हम अलग हैं. हम इस बारे में बात करते हैं. हमें इस बारे में बात करनी ही होगी क्योंकि वरना आप लोग कल को रिपोर्ट कर देंगे. उनके पास ऐसे पत्रकार नहीं हैं जो इस बारे में लिखें."  ट्रंप ने आगे कहा कि अब अमेरिका भी न्यूक्लियर टेस्ट करेगा. इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया और पाकिस्तान भी परमाणु बम का परीक्षण कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "हम परीक्षण करेंगे क्योंकि वे परीक्षण करते हैं और दूसरे भी परीक्षण करते हैं. और निश्चित रूप से उत्तर कोरिया परीक्षण कर रहा है. पाकिस्तान भी परमाणु परीक्षण कर रहा है." गौरतलब है कि पाकिस्तान की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक 1998 में परमाणु परीक्षण किया था. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप के दावे को माने तो पाकिस्तान परमाणु परीक्षण करता आ रहा है. और ऐसी ही स्थिति रूस और चीन की है. ट्रंप के मुताबिक दोनों ही देश लंबे समय से परमाणु परीक्षण करते आ रहे हैं.  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूज चैनल सीबीएस के 60 मिनट्स कार्यक्रम पर एक साक्षात्कार में कहा कि रूस और उत्तर कोरिया भी अपने परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं.  ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने 33 साल के प्रतिबंध के बाद अमेरिकी सेना को परमाणु हथियार परीक्षण करने के अपने आदेश को उचित ठहराया. ट्रंप के खुलासे के मुताबिक अगर पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है तो ये भारत के लिए चिंताजनक सूचना है. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "परमाणु हथियार संपन्न देश आपको इसके बारे में बताने नहीं जाते… वे जमीन के नीचे परीक्षण करते हैं जहां लोगों को ठीक से पता ही नहीं चलता कि परीक्षण में क्या हो रहा है. बस आपको थोड़ा कंपन महसूस होता है." 33 सालों बाद न्यूक्लियर टेस्ट क्यों कर रहा है अमेरिका बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका 33 वर्षों के अंतराल के बाद परमाणु परीक्षण शुरू करने जा रहा है. अमेरिका ने आखिरी बार परीक्षण 1992 में किया गया था. इसके बाद शीत युद्ध के अंत की घोषणा की गई थी.  सोशल मीडिया पर ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पेंटागन को "हमारे परमाणु हथियारों का समान आधार पर परीक्षण शुरू करने" का निर्देश दिया है, जो रूस द्वारा नई न्यूक्लियर सिस्टम के परीक्षण और चीन द्वारा नए बैलिस्टिक मिसाइल साइलो की तैनाती के जवाब में है.

अमेरिका में फिर होंगे परमाणु परीक्षण! ट्रंप ने 33 साल बाद दी मंजूरी, रूस-चीन पर साधा निशाना

वाशिंगटन  दुनिया फिर से न्यूक्लियर डर के साये में आ गई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा कदम उठा दिया है जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई. उन्होंने 33 साल बाद फिर से अमेरिका में परमाणु हथियारों के परीक्षण शुरू करने का आदेश दे दिया है. यह ऐलान उन्होंने किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं, बल्कि अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर किया वो भी उस वक्त जब वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के लिए जा रहे थे. ट्रंप का ट्रुथ सोशल पोस्ट- ‘अब बराबरी जरूरी है’ ट्रंप ने अपने Marine One हेलिकॉप्टर से उड़ान के दौरान पोस्ट किया कि  दूसरे देशों के परीक्षण कार्यक्रमों को देखते हुए मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वे हमारे परमाणु हथियारों का परीक्षण तुरंत शुरू करें. यह प्रक्रिया तुरंत शुरू होगी. उन्होंने लिखा कि रूस दूसरे नंबर पर है और चीन तीसरे पर, लेकिन चीन पांच साल में बराबरी कर लेगा. यानी, ट्रंप का कहना साफ था कि अगर दूसरे देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका क्यों पीछे रहे? ‘दूसरे कर रहे हैं तो हम क्यों नहीं?’- ट्रंप का तर्क वॉशिंगटन लौटते समय ट्रंप ने कहा कि अगर रूस और चीन परीक्षण कर रहे हैं, तो अमेरिका को भी करना चाहिए. उनका कहना है कि दूसरे देश जब टेस्ट कर रहे हैं, तो हमें भी करना चाहिए. इससे हम अपने विरोधी देशों के बराबर रहेंगे. उन्होंने कहा कि टेस्ट साइट बाद में तय की जाएगी, लेकिन यह भी जोड़ा कि वे अब भी परमाणु निरस्त्रीकरण (denuclearisation) चाहते हैं. मैं चाहूंगा कि दुनिया परमाणु हथियारों से मुक्त हो, लेकिन जब तक दूसरे नहीं रुकते, हम भी नहीं रुकेंगे. हालांकि, यह साफ नहीं है कि ट्रंप असली परमाणु विस्फोट की बात कर रहे हैं या परमाणु मिसाइलों की उड़ान जांच (flight testing) की. चीन-रूस की चालों के जवाब में ट्रंप का न्यूक्लियर कदम ट्रंप का यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब रूस और चीन दोनों अपने परमाणु कार्यक्रमों में तेजी से निवेश कर रहे हैं. चीन ने पिछले दस सालों में अपनी परमाणु ताकत दोगुनी कर ली है. 2020 में 300 हथियार थे, जो 2025 में बढ़कर करीब 600 हो गए. अमेरिकी अधिकारियों का अनुमान है कि 2030 तक चीन के पास 1,000 से ज्यादा परमाणु हथियार होंगे. सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की रिपोर्ट कहती है कि हाल ही में चीन की विक्ट्री डे परेड में ऐसे पांच हथियार दिखाए गए जो अमेरिका तक पहुंच सकते हैं. वहीं रूस ने हाल ही में दावा किया है कि उसने Poseidon नाम की परमाणु-चालित टॉरपीडो और Burevestnik नाम की क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने साफ कहा है कि अगर अमेरिका परीक्षण करेगा, तो रूस भी करेगा. दुनिया के तीन बड़े न्यूक्लियर खिलाड़ी Arms Control Association के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका के पास 5,225 परमाणु हथियार, रूस के पास 5,580, चीन के पास करीब 600 है. ट्रंप ने कहा, “हमारे स्टॉक बहुत सुरक्षित हैं, लेकिन जब बाकी देश बढ़ रहे हैं तो हमें भी तैयारी रखनी चाहिए.” उन्होंने यह भी बताया कि वे रूस से बातचीत कर रहे हैं और अगर भविष्य में कोई समझौता होता है तो चीन को भी शामिल किया जाएगा. अमेरिका के अंदर विरोध शुरू, कहा – ‘ट्रंप गलतफहमी में हैं’ ट्रंप के इस ऐलान पर अमेरिका में ही तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली. नेवादा की डेमोक्रेट सांसद डीना टाइटस ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि  मैं ऐसा बिल लाने जा रही हूं जो इस परीक्षण को रोक सके. वहीं Arms Control Association के डायरेक्टर डैरिल किम्बल ने कहा कि  ट्रंप गलतफहमी में हैं. 1992 के बाद अब अमेरिका को फिर से परमाणु विस्फोट करने की न तो जरूरत है और न कारण. उन्होंने चेतावनी दी कि यह फैसला दुनिया में परमाणु परीक्षणों की नई दौड़ शुरू कर सकता है और ‘नॉन-प्रोलिफरेशन ट्रीटी’ (NPT) को तोड़ सकता है. किम्बल का कहना है कि अगर अमेरिका ने कदम बढ़ाया तो रूस और चीन भी अपनी रफ्तार बढ़ा देंगे. परमाणु युग की कहानी  पहला परीक्षण संयुक्त राज्य अमेरिका ने जुलाई 1945 में न्यू मैक्सिको के अलामोगोर्डो में किया था. इसका पहला प्रयोग अगस्त 1945 में हुआ, जब हिरोशिमा और नागासाकी पर बम गिराए गए. अमेरिका ने आखिरी परीक्षण 1992 में किया था. रूस ने आखिरी परीक्षण 1990 में किया था. चीन ने आखिरी परीक्षण 1996 में किया था. उत्तर कोरिया ने आखिरी परीक्षण 2017 में किया था. यानी, 1990 के दशक के बाद से लगभग सभी बड़े देश परमाणु विस्फोटक परीक्षण बंद कर चुके हैं, सिर्फ उत्तर कोरिया को छोड़कर.

अमेरिका-चीन रिश्तों में नरमी! ट्रंप ने फेंटेनाइल पर लगाया टैक्स घटाया 10%

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एशिया दौरे के आखिरी पड़ाव पर चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात की। इस दौरान अमेरिका और चीन के बीच बीते कुछ समय से जिन मुद्दों को लेकर तनाव चल रहा था, उन पर भी चर्चा हुई। दक्षिण कोरिया से रवाना होने के बाद एयर फोर्स वन में मीडिया के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने जिनपिंग के साथ अपनी मुलाकात के बारे में जानकारी दी।डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे एक व्यापार समझौते पर पहुंच गए हैं, जिस पर जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। ट्रंप ने कहा, "हमारे बीच एक समझौता हो गया है। अब, हम हर साल इस समझौते पर बातचीत करेंगे। मुझे लगता है कि यह समझौता लंबे समय तक चलेगा। यह एक साल का समझौता है और हम इसे एक साल बाद बढ़ा देंगे।" उन्होंने आगे कहा कि वह और शी जिनपिंग लगभग हर चीज पर सहमत हो गए हैं, जिसमें सोयाबीन व्यापार और फेंटेनाइल से संबंधित शुल्क भी शामिल हैं। जिन मुद्दों पर आप हमेशा बात करते रहते हैं, उनमें से कई पर हमारी चर्चा हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "हम कई मुद्दों पर सहमत हैं, बड़ी मात्रा में सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों की खरीद तुरंत शुरू होने जा रही है।" वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिनपिंग के साथ अपनी मुलाकात को रेट भी किया और कहा, "कुल मिलाकर, शून्य से दस के पैमाने पर, जिसमें दस सबसे अच्छा है, मैं कहूंगा कि यह बैठक बारह थी।" इसके अलावा टैरिफ को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीनी नेता शी जिनपिंग के साथ बातचीत के बाद, वह फेंटेनाइल से संबंधित शुल्क घटाकर 10% कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, मैंने चीन में आने वाले फेंटेनाइल के कारण उस पर 20% शुल्क लगाया है, जो एक बड़ा शुल्क है। मैंने इसे 10% कम कर दिया है, इसलिए यह तुरंत प्रभाव से 20% के बजाय 10% हो गया है।" चीन ने रेयर अर्थ एलिमेंट्स को लेकर जो प्रतिबंध लगाए थे, उसके बाद अमेरिका के साथ तनाव और बढ़ गया। हालांकि, उसको लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, "रेयर अर्थ एलिमेंट्स से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान हो चुका है और यह पूरी दुनिया के लिए है। अब वह बाधा दूर हो गई है… रेयर अर्थ के मामले में कोई बाधा नहीं है। उम्मीद है कि कुछ समय के लिए यह हमारी वोकैब्यलरी से गायब हो जाएगा। अमेरिका रेयर अर्थ एलिमेंट की खरीद और उत्पादन जारी रख सकेगा।"

अमेरिका छोड़कर चीन की ओर: ट्रंप से जिनपिंग की अहम मुलाकात, कारोबार की सियासत गरम

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  शटडॉउन से आर्थिक गर्त में डूब रहे अपने देश को छोड़ कर अपने इस कार्यकाल में पहली बार  एशिया की यात्रा पर निकल गए हैं। इस यात्रा के दौरान ट्रंप के निवेश समझौतों और शांति प्रयासों पर चर्चा करने की उम्मीद है। ट्रंप अपनी एशिया यात्रा के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से आमने-सामने की मुलाकात करेंगे और व्यापार संबंधी जटिलताओं को कम करने की कोशिश करेंगे। ट्रंप ने ‘एयर फोर्स वन' (अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष विमान) में अपने साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हमारे पास एक बेहतर समझौता करने की अच्छी संभावना है।''   उन्होंने कहा कि वह शी जिनपिंग के साथ फेंटेनाइल की तस्करी और चीन द्वारा अमेरिका से सोयाबीन की कम खरीद पर चर्चा करने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं चाहता हूं कि हमारे किसानों का ध्यान रखा जाए। और वह भी यही चाहते हैं।'' मलेशिया की अपनी लंबी उड़ान के तहत कतर में ईंधन भरवाने के दौरान ट्रंप ने अपने विमान में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से भी मुलाकात की। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने गाजा में सुरक्षा समझौतों की प्रगति पर चर्चा की। 

कनाडा के लिए ट्रंप का बड़ा वार: टैरिफ बम गिरा, चेतावनी के साथ कहा- परिणाम भुगतोगे

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक व्यापार रुख से हलचल मचा दी है। ट्रंप ने कनाडा को चेतावनी दी है कि यदि ओंटारियो प्रांत में चल रहा अमेरिका-विरोधी शुल्क विज्ञापन तुरंत नहीं हटाया गया, तो वह कनाडाई आयात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगा देंगे। ट्रंप ने शनिवार को ‘एयर फोर्स वन’ से मलेशिया रवाना होते समय अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए लिखा “उनका विज्ञापन झूठ पर आधारित है। उन्हें इसे तुरंत हटाना था, लेकिन उन्होंने वर्ल्ड सीरीज के दौरान इसे प्रसारित कर दिया। इसलिए मैं कनाडा पर इस समय लग रहे शुल्क में 10% की वृद्धि कर रहा हूं।” ये विज्ञापन बना  विवाद का कारण कनाडा के ओंटारियो प्रांत में प्रसारित इस विज्ञापन में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के शब्दों का इस्तेमाल कर अमेरिकी शुल्क नीति की आलोचना की गई थी।ट्रंप को यह कदम “अमेरिका-विरोधी और शत्रुतापूर्ण व्यवहार” लगा। उन्होंने कहा कि कनाडा के साथ व्यापार वार्ता अब समाप्त कर दी जाएगी। ओंटारियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने बयान जारी कर कहा कि यह विज्ञापन सप्ताहांत के बाद हटा दिया जाएगा, लेकिन वर्ल्ड सीरीज के पहले मैच के दौरान इसे दिखाए जाने से मामला बिगड़ गया।   कनाडा-अमेरिका व्यापार पर संभावित असर कनाडा के तीन-चौथाई से अधिक निर्यात अमेरिका को जाते हैं।हर दिन करीब 3.6 अरब कनाडाई डॉलर मूल्य के माल और सेवाएं सीमा पार करती हैं। ट्रंप के नए शुल्क से कनाडा की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका लग सकता है। व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क कब लागू होगा और किन वस्तुओं पर इसका असर पड़ेगा। रीगन को लेकर विवादित दावा ट्रंप ने यह भी कहा कि विज्ञापन में रीगन के रुख को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।उन्होंने कहा -“रीगन अमेरिका के हितों की रक्षा के पक्षधर थे, लेकिन इस विज्ञापन में उन्हें शुल्क विरोधी दिखाया गया है, जो पूरी तरह झूठ है।”  

ट्रम्प का बड़ा बयान और प्रतिबंध, राष्ट्रपति पेट्रो पर कार्रवाई से लैटिन अमेरिका में अमेरिकी नीति पर असर

वाशिंगटन अमेरिका ने कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो (Gustavo Petro) पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है. यह कदम ट्रंप प्रशासन और अमेरिका के पुराने सहयोगी इस लैटिन अमेरिकी देश के बीच बढ़ते तनाव को और गहरा कर सकता है. अमेरिका ने ये प्रतिबंध उस समय लगाए, जब ट्रंप ने पेट्रो पर आरोप लगाया कि उन्होंने कोलंबिया से अमेरिका में कोकीन की तस्करी रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. पिछले कुछ हफ्तों से वॉशिंगटन और लैटिन अमेरिकी देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. अमेरिकी सेना ने दक्षिण कैरेबियन क्षेत्र में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में संदिग्ध जहाजों पर हमले किए हैं, जिन पर अमेरिका का दावा है कि वे ड्रग्स लेकर जा रहे थे. हालांकि, उसकी ओर से अब तक इसका कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया है. डोनाल्ड ट्रंप ने पेट्रो को बताया 'ड्रग लीडर' गुस्तावो पेट्रो ने अमेरिका पर कै​रेबियन सागर में एयरस्ट्राइक करके निर्दोष लोगों की 'हत्या' करने का आरोप लगाया था. जवाब में डोनाल्ड ट्रंप ने कोलंबियाई राष्ट्रपति को 'अवैध ड्रग लीडर' और 'बुरा आदमी' कहकर संबोधित किया था. पेट्रो, जिनका अब सिर्फ 10 महीने का कार्यकाल बाकी है, लंबे समय से इन अमेरिकी सैन्य हमलों के विरोधी रहे हैं. वह कोलंबिया में छह दशकों से चल रहे संघर्ष को शांति वार्ताओं और आत्मसमर्पण समझौतों के जरिए खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है. अमेरिका ड्रग तस्करी बर्दाश्त नहीं करेगा अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बयान जारी करते हुए कहा, 'जब से राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो सत्ता में आए हैं, कोलंबिया में कोकीन का उत्पादन दशकों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. इससे अमेरिका में ड्रग्स की बाढ़ आ गई है और हमारे नागरिक इस जहर के शिकार हो रहे हैं.' उन्होंने आगे कहा, 'राष्ट्रपति पेट्रो ने कोलंबिया में ड्रग कार्टेल्स को फलने-फूलने का भरपूर मौका दिया है और इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है. राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका की सुरक्षा के लिए कड़ा कदम उठाया है और यह स्पष्ट कर दिया है कि हम ड्रग तस्करी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे.' कोलंबिया किसी के दबाव में नहीं झुकेगा ट्रंप ने 23 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में मीडिया से कहा था कि 'पेट्रो न सिर्फ असफल नेता हैं बल्कि एक अवैध ड्रग डीलर हैं, जिन्होंने अपने देश को अपराधियों के हवाले कर दिया है.' कोलंबिया सरकार ने एक बयान जारी करके अमेरिका के इस कदम को 'गंभीर कूटनीतिक आक्रमण' बताया है. राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने कहा,'अमेरिका की कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है. कोलंबिया कभी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा. हमने अपने देश में शांति और न्याय के लिए संघर्ष किया है.' कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने भी अमेरिकी राजदूत को तलब कर राष्ट्रपति ट्रंप के बयान पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है और कहा है इस तरह की बयानबाजी से दोनों देशों के बीच सहयोग पर गंभीर असर पड़ेगा. कैरेबियन सागर में अमेरिका की लगातार बढ़ती सैन्य तैनाती पर लैटिन अमेरिका के देशों ने चिंता जताई है. ब्राजील और चिली ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि 'कूटनीतिक समाधान' ही किसी भी समस्या को हल करने का सबसे उपयुक्त रास्ता है, जबकि मेक्सिको ने ट्रंप प्रशासन के क्षेत्र में एयरक्राफ्ट कैरियर 'यूएसएस जेराल्ड फोर्ड' तैनात करने के फैसले को 'एकतरफा और असंतुलित' कदम बताया. 

ट्रंप की बड़ी पेशकश: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच युद्ध सुलझाने को तैयार, बोले – तुरंत रोक सकता हूं नुकसान

वाशिंगटन  दुनिया में जब भी कहीं बम फटता है, बंदूक चलती है या सीमा पर तनाव बढ़ता है तो एक शख्स सामने आ ही जाता है और वो है डोनाल्ड ट्रंप. जिनका बयान दुनिया भर में चर्चा का विषय बन जाता है. इस बार उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहे संघर्ष पर अपनी राय रखी और कहा कि अगर वो चाहें तो इसे “आसानी से सुलझा सकते हैं.” अब भले ये बयान आत्मविश्वास से भरा हो या अति-आत्मविश्वास से, लेकिन ट्रंप का अंदाज हमेशा की तरह इस बार भी सुर्खियों में आ गया है.  ट्रंप का बयान जिसने हलचल मचा दी  पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि यह लगभग आखिरी मामला है, हालांकि मैं समझता हूं कि पाकिस्तान ने हमला किया है या अफगानिस्तान पर हमला हो रहा है. अगर मुझे इसे सुलझाना है तो यह मेरे लिए आसान है. इस बीच, मुझे अमेरिका चलाना है, लेकिन मुझे युद्ध सुलझाना पसंद है. यानि ट्रंप के अनुसार, अफगानिस्तान-पाकिस्तान जैसे दशकों पुराने विवाद को सुलझाना उनके लिए कोई मुश्किल काम नहीं. उन्होंने आगे कहा कि उन्हें जान-माल की हानि रोकने में गर्व महसूस होता है. उन्होंने कहा- जानते हो क्यों? मुझे लोगों को मारे जाने से रोकना पसंद है. मैंने लाखों लोगों की जान बचाई है, और मुझे लगता है कि हमें इस युद्ध में सफलता मिलेगी.” उनका यह बयान ऐसे समय आया जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 48 घंटे के युद्धविराम (Ceasefire) को बढ़ाने पर सहमति बनी है. यह निर्णय दोहा में हुई बातचीत के बाद लिया गया, जहां सऊदी अरब और कतर ने मध्यस्थता का समर्थन किया. पाकिस्तानी हमले में मारे गए तीन अफगान खिलाड़ी लेकिन इसी बीच मामला फिर से गर्मा गया. खबर आई कि पाकिस्तान के फिर से हवाई हमलों में तीन अफगान क्रिकेटर मारे गए हैं. जिससे कि सीमा पर गोलियों की गूंज के बीच खेल जगत को झकझोर दिया. अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (ACB) ने बताया कि तीन क्रिकेटर मारे गए हैं. यह हमला पूर्वी पक्तिका प्रांत में हुआ. बोर्ड ने कहा कि खिलाड़ी उरगुन से शाराना गए थे, जहां वे एक मित्रता-पूर्ण मैच में हिस्सा लेने वाले थे. उरगुन लौटते वक्त, एक सभा के दौरान उन्हें निशाना बनाया गया. जिसे बोर्ड ने “पाकिस्तानी शासन द्वारा किया गया कायराना हमला” बताया. मारे गए खिलाड़ियों की पहचान कबीर, सिबगतुल्लाह और हारून के रूप में हुई. इसी हमले में पांच अन्य लोग भी मारे गए. इसके बाद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने पीड़ितों के सम्मान में अगले महीने होने वाली त्रिकोणीय श्रृंखला (Tri-series) जिसमें पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल थे. इस हमला के बाद अफगानिस्तान ने नाम वापस ले लिया. रॉयटर्स का खुलासा- युद्धविराम के बावजूद हवाई हमले जारी दुनिया के कई हिस्सों में शांति सिर्फ कागज पर होती है जमीन पर नहीं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने युद्धविराम के बावजूद बरमल और उरगुन जिलों में हवाई हमले किए. इससे पहले अफ़ग़ान सीमा के पास एक आत्मघाती हमले में सात पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और 13 घायल हुए. पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि आतंकियों ने उत्तरी वजीरिस्तान जिले में एक सैन्य शिविर पर हमला किया. एक हमलावर ने विस्फोटकों से लदी गाड़ी को चारदीवारी से टकरा दिया और दो अन्य हमलावरों को गोली मार दी गई. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया कि हमले में छह आतंकवादी मारे गए. तालिबान ने दी चेतावनी  अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने पश्तो भाषा के चैनल एरियाना न्यूज से कहा कि काबुल ने अपने बलों को आदेश दिया है कि जब तक पाकिस्तान किसी भी हमले से बचता है, तब तक अफगान बल युद्धविराम बनाए रखें. यानी यह एक शर्तिया शांति है अगर एक गोली चली, तो सबकुछ फिर से भड़क सकता है. कभी सहयोगी रहे इस्लामाबाद और काबुल अब कट्टर प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं. 2021 में अमेरिकी सेनाओं के अफगानिस्तान से निकलने के बाद तालिबान सत्ता में लौटा था, लेकिन पाकिस्तान के लिए वही ‘मित्र’ अब बोझ बन गया है. वर्तमान संकट की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान ने काबुल से मांग की कि वो उन आतंकियों को रोके जो पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं और जिनके ठिकाने अफगीनिस्तान में हैं. लेकिन तालिबान सरकार ने इस आरोप को नकार दिया. नतीजा यह हुआ कि सीमा पर गोलीबारी, हवाई हमले, आत्मघाती धमाके और अब निर्दोष खिलाड़ियों की मौत.

ट्रंप ने किया ऐलान: दक्षिण कोरिया में होंगे जिनपिंग के साथ सीधे वार्ता

वाशिंगटन  दक्षिण कोरिया में एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस मौके पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात होने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वह अगले कुछ सप्ताह में दक्षिण कोरिया में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने व्हाइट हाउस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ एक बैठक के दौरान यह टिप्पणी की। चीन ने दुर्लभ मृदा धातुओं (जो विभिन्न सैन्य और वाणिज्यिक उत्पादों के उत्पादन के लिए आवश्यक घटक हैं) पर निर्यात नियंत्रण कड़ा करने का फैसला लिया। इसके बाद से दोनों महाशक्तियों के बीच व्यापार तनाव बढ़ गया है। उन्होंने कहा, "चीन बातचीत करना चाहता है और हमें चीन से बात करना पसंद है। इसलिए हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं और हम कुछ हफ्तों में दक्षिण कोरिया में मिलने वाले हैं।" अपनी टैरिफ नीति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि कोरिया में होने वाली संभावित बैठक से पहले अमेरिका "बहुत मजबूत" स्थिति में है। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति से पूछा गया कि क्या शी जिनपिंग के साथ उनकी बैठक से कोई व्यापार समझौता हो सकता है। इस पर ट्रंप ने कहा, "हो सकता है।" उन्होंने कहा, "वे बातचीत करना चाहते हैं और हम बातचीत कर रहे हैं और मुझे लगता है कि हम एक ऐसा समझौता करेंगे जो दोनों के लिए अच्छा होगा। मुझे लगता है कि हम कुछ करेंगे।" पिछले शुक्रवार को, ट्रंप ने चीन के निर्यात नियंत्रण कदम की निंदा की और शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक रद्द करने की धमकी दी। उन्होंने 1 नवंबर से चीनी वस्तुओं पर अतिरिक्त 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने और उसी दिन सभी महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर पर निर्यात नियंत्रण लागू करने की योजना की भी घोषणा की। टैरिफ योजना पर बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि अगर वे चाहें तो इसे "बढ़ा" सकते हैं, और चीन नहीं चाहता कि यह टैरिफ लागू हो। राष्ट्रपति ट्रंप ने दक्षिण कोरिया, जापान और यूरोपीय संघ का भी ज़िक्र किया और जोर देकर कहा, "हम बस यही चाहते हैं कि हमारे साथ निष्पक्ष व्यवहार हो। लेकिन निष्पक्षता यह है कि सैकड़ों अरबों और यहां तक कि खरबों डॉलर अमेरिका में आ रहे हैं और टैरिफ के कारण हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा सुरक्षित है। अगर टैरिफ नहीं होते, तो हमारी कोई राष्ट्रीय सुरक्षा नहीं होती। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है।" उसी दिन पहले प्रसारित फॉक्स बिजनेस के एक इंटरव्यू में, राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी और शी जिनपिंग की एक "अलग" बैठक "निर्धारित" है। उन्होंने कहा, "हम कुछ हफ्तों में मिलने वाले हैं। दरअसल, हम दक्षिण कोरिया में मिलने वाले हैं। राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य लोग भी। लेकिन हमारी एक अलग बैठक निर्धारित है।" चीन के खिलाफ टैरिफ योजना पर, राष्ट्रपति ट्रंप का रुख थोड़ा नरम दिखाई दिया। उन्होंने कहा, "यह टिकाऊ नहीं है, लेकिन संख्या यही है। शायद नहीं… यह टिक सकता है, लेकिन उन्होंने मुझे ऐसा करने के लिए मजबूर किया। मुझे लगता है कि चीन के साथ हमारा रिश्ता ठीक रहेगा।" ट्रंप ने शी की भी प्रशंसा की और कहा, "मैं उनके साथ बहुत अच्छा व्यवहार करता हूं; वह एक बहुत ही मजबूत नेता और अद्भुत इंसान हैं।" उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका को चीन के साथ "निष्पक्ष समझौता" करना होगा और अपने इस आरोप को दोहराया कि चीन ने अमेरिका को "धोखा" दिया है।

‘कोई विकल्प नहीं’ — ट्रंप के हमास पर तेज रुख के बाद क्या बढ़ेगी आर्मी एक्शन की संभावना?

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमास को चेतावनी दी है क‍ि अगर गाजा में लोगों की हत्या करना जारी रखा तो हमारे पास कोई चॉइस नहीं बचेगा. अमेरिका के पास विकल्प कम रह जाएंगे और हमें अंदर जाकर उन्हें मारना होगा. ट्रंप के इस मैसेज ने मिड‍िल ईस्‍ट में एक बार फ‍िर आग भड़का दी है. ऐसी संभावनाएं जताई जाने लगी हैं क‍ि अमेर‍िकी सेना कहीं हमास पर अटैक न कर दे. उधर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्‍याहू ने चेतावनी दी क‍ि मारे गए बंधकों के शव नहीं मिले तो हम तबाही मचा देंगे. इजरायल पूरी ताकत के साथ हमास से बात करेगा. पिछले कुछ दिनों में हमास ने कुछ बंधकों के शव वापस किए हैं, जिनमें से दो की पुष्टि इनबार हैइमैन और सार्जेंट मेजर मुहम्मद अल-अतारश के तौर पर हुई. इन हालिया सौंपियों के बाद सोमवार से अब तक मृत बंधकों की वापसी की संख्या नौ बताई गई है, जबकि अभी भी कई शव गाजा में बने हुए हैं. इस बीच वह 20 जीवित बंधक जिन्हें सोमवार को रिहा किया गया था, उनके बदले इजराइल ने 250 फिलिस्तीनी कैदियों और 1,718 गाजा कैदियों को रिहा कर दिया था. हमास ने क्‍या कहा हमास की सैन्य शाखा ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि शेष शवों की तलाश जारी है और इसके लिए बड़े प्रयास और विशेष तकनीकी उपकरणों की आवश्यकता होगी. वहीं इस देरी के चलते इजरायली जनता में हमास के प्रति गुस्सा तेज हुआ है और कुछ आवाजें यह कह रही हैं कि हमास ने पिछले सप्ताह के सीजफायर समझौते के तहत अपनी ज़िम्मेदारियों का पालन नहीं किया. हालांकि संयुक्त राज्य की प्रशासनिक वक़्तियों ने इस बात को बहुत अधिक तौर पर “समझौते का उल्लंघन” बताने से हतोत्साहित किया है. मिड‍िल ईस्‍ट में जंग को नया मोड़ ट्रंप के ट्वीट ने मिड‍िल ईस्‍ट में जंग को नया मोड़ दे द‍िया है. कूटनीत‍िक मामलों के जानकारों का मानना है क‍ि ट्रंप का यह मैसेज सिर्फ हमास के ल‍िए नहीं है बल्कि रूस, ईरान और अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ियों के ल‍िए भी है. दूसरी ओर, नेतन्याहू का पूरी ताकत वाला संदेश इजरायल की सैन्य नीति और आक्रामकता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दोहराता है. हालांकि, लोगों का अभी भी मानना है क‍ि अमेर‍िका आर्मी ऑपरेशन को आख‍िरी विकल्‍प मानेगा. उससे पहले मुद्दों को सुलझाने की कोश‍िश करेगा.