samacharsecretary.com

PM-CM अयोग्यता बिल: दो बाधाओं पर NDA की जीत, अब तीसरी चुनौती करेगी मुश्किल

नई दिल्ली लोकसभा ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री की गंभीर अपराध में गिरफ्तारी और 30 दिन तक न्यायिक हिरासत में रखे जाने पर उन्हें पद से हटाने के प्रावधान वाले 130वें संविधान संशोधन विधेयक तथा दो अन्य विधेयकों को विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच बुधवार को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया है। ऐसी चर्चा है कि संसद के शीतकालीन सत्र से पहले JPC इस बिल पर अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंप देगी। उसके बाद इस बिल को पारित कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। चूंकि यह संविधान संशोधन बिल है, इसलिए इसे पारित कराने की प्रक्रिया में तीन बड़ी अचड़नें हैं। नियमानुसार इसे संसद के दोनों सदनों से विशेष बहुमत के साथ पारित कराया जाना चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में दो स्तरों पर बहुमत चाहिए। पहला, कुल सदस्यों का बहुमत और दूसरा, उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। तीसरी अड़चन आधे से अधिक राज्यों की विधानसभाओं से भी इस बिल को पारित कराना होगा। संसद में दोनों सदनों में NDA की ताकत क्या? अब बात संसद में एनडीए के संख्या बल की और इस संशोधन विधेयक को पारित कराने में आने वाली अड़चन की। चूंकि, संसद में दो स्तर पर बहुमत चाहिए जिसमें पहला सदन की कुल सदस्य संख्या का 50% से अधिक मत जरूरी है, तो इस अड़चन को सरकार आसानी से पार कर लेगी क्योंकि लोकसभा में 542 सदस्य हैं। ऐसे में 50 फीसदी मत यानी बिल के पक्ष में 272 सांसदों का वोट चाहिए, जबकि मौजूदा समय में उसके पास लोकसभा में 293 सांसद हैं। इसी तरह राज्यसभा में अभी कुल सदस्यों की संख्या 239 है। साधारण बहुमत के लिए 120 सांसदों के मत की जरूरत होगी, जो आसानी से पूरी हो जाएगी क्योंकि राज्यसभा में NDA के अभी 132 सांसद हैं। दो तिहाई बहुमत में बड़ी अड़चन अब बात दो तिहाई बहुमत की, जो दूसरी और सबसे अहम अड़चन है। लोकसभा में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है, जबकि राज्यसभा में यह आंकड़ा 160 है। चूंकि लोकसभा में NDA के सांसदों की संख्या सिर्फ 293 है और राज्यसभा में सिर्फ 132 है तो इस मामले में दोनों ही सदनों में यह बिल अटक सकता है। यानी लोकसभा में कुल 69 सांसद और राज्यसभा में कुल 28 सांसदों के समर्थन की दरकार सरकार को होगी। बिना विपक्षी समर्थन के ⅔ बहुमत मिलना मुश्किल इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि सरकार के पास संसद के दोनों ही सदनों में दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं है। दूसरी तरफ विपक्षी इंडिया गठबंधन इस बिल का काला कानून बताकर इसका जबर्दस्त विरोध कर रहे हैं। अगर सरकार दोनों ही सदनों में नवीन पटनायक की बीजू जनता दल, जगनमोहन रेड्डी की YRCPC और निर्दलियों का भी समर्थन हासिल कर लेती है, तब भी दो तिहाई बहुमत का जुगाड़ नहीं कर पाएगी। ऐसे में इस बिल का संसद से पारित होना नामुमकिन लगता है। विधानसभाओं से भी पारित होना चाहिए बिल इस बिल को पारित कराने की तीसरी बड़ी जरूरत आधे से अधिक राज्य विधानसभाओं से पारित कराना है। चूंकि भारत राज्यों का संघ है, इसलिए ऐसे संविधान संशोधन बिल का 50 परसेंट राज्यों की असेंबली से पास होना जरूरी है। इस मामले में एनडीए को कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि आधे से ज्यादा राज्यों में एनडीए की सरकार है। ऐसे में और क्या संभावना? एक संभावना यह भी बन रही है कि अगर विपक्ष संयुक्त संसदीय समिति में शामिल होता है और उसके सुझावों को सरकार मान लेती है, जिसमें यह कहा जा सकता है कि न्यायिक हिरासत की बजाय सजा होने पर ही इस्तीफे को अनिवार्य बनाया जाए, तब संभावना बन सकती है कि विपक्षी दल उसका समर्थन करें। अन्यथा इस संशोधन बिल के पारित होने की संभावना कम ही है। बता दें कि अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दो साल या उससे अधिक की सजा होने पर किसी भी संसद या विधानसभा सदस्य की सदस्यता स्वत: ही समाप्त हो जाती है और उसे पद से इस्तीफा देना पड़ता है।  

हमर छत्तीसगढ़ की मिसाल: जहां गुरुजी पढ़ाते भी हैं और बच्चों के बाल भी संवारते हैं

कबीरधाम  छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की लापरवाही की खबरें तो आपने बहुत देखी और सुनी होगी, लेकिन आज हम आपको एक ऐसे सरकारी स्कूल के मास्टरजी यानी शिक्षक के बारे में बताने जा रहे हैं जो 'सैलून वाले गुरुजी' के नाम से मशहूर हैं। चौक गए न आप भी। दरअसल, कबीरधाम जिले के सरकारी मिडिल स्कूल में पदस्थ टीचर पूनाराम पनागर की पहल भी गजब है। यह शिक्षक स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के साथ विद्यार्थियों के बाल भी निःशुल्क कटिंग करते हैं। शिक्षक आखिर क्यों ऐसा करता है,नाई बनने के पीछे उनका क्या मकसद है? तो चलिए आपको इस मास्टरजी के बारे में बताते हैं। कौन हैं ये शिक्षक? कबीरधाम जिले में बोड़ला स्थित पूर्व माध्यमिक स्कूल में शिक्षक पूनाराम पनागर की पोस्टिंग हैं। वह बच्चों को पढ़ाने के उनके बाल भी मुफ्त में काटते हैं। बाल कटिंग में खर्च होने वाले पैसों को शिक्षक बच्चों से कॉपी, पेन या स्कूल से संबंधी जरूरी काम करने को कहते हैं। शिक्षक पूनाराम बताते हैं कि मैं पहले बोड़ला के महलीघाट गांव के प्राइमरी स्कूल में था। इस आदिवासी क्षेत्र में सेलून नहीं थे। ऐसे में स्कूल के बच्चों के बाल काफी बढ़ जाते थे। तब मैंने 2012 से खुद ही बच्चों के बाल काटना शुरू कर दिया। बाद में मेरा ट्रांसफर यहां बोड़ला के स्कूल में हो गया। यहां भी सरकारी हॉस्टल में रहने वाले बच्चे गरीब परिवारों से है। शिक्षक पूनाराम ने बताया कि सरकारी SC-ST हॉस्टल के बच्चों के बाल महीने में किसी एक रविवार को काटता हूं। इससे बच्चों के सेलून का खर्चा बच जाता है। इतना ही नहीं शिक्षक पूनाराम सरकारी स्कूल के पहली से दसवीं क्लास के बच्चों को 15 साल से स्कूल के अलावा फ्री कोचिंग भी दे रहे हैं। अपने पढ़ाए बच्चों के बीच यह स्पर्धा भी कराते हैं कि जो जिले में टॉप करेंगे या प्रदेश में टॉपर सूची में आएंगे तो उन्हें 10 से 15 हजार इनाम भी देंगे। वे हर साल पर्चा छपवाकर इलाके में बंटवाते हैं कि लोग अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूल में ही कराएं। शिक्षक के इस पहल की पूरे प्रदेश में जमकर चर्चा हो रही है।   घर पर बच्चों को निःशुल्क कोचिंग भी पढ़ाते हैं पूनाराम पनागर की इस पहल की सराहना न सिर्फ छात्र बल्कि अन्य शिक्षक और अभिभावक भी करते हैं। पूनाराम के काम को समाज सेवा की मिसाल मानते हैं। शिक्षक कृष्ण कुमार ध्रुवे बताते हैं कि पूनाराम सर… बच्चों के शैक्षणिक उत्थान को लेकर बहुत सजग हैं। उनकी सोच यह है कि बच्चे पैसों की बचत करके उसका उपयोग शैक्षणिक गतिविधियों में करें। वे गरीब और कमजोर बच्चों को निःशुल्क कोचिंग भी देते हैं, ताकि वे पीछे न रहे। अपने कोचिंग में पढ़ने वाले बच्चों के बीच प्रतिस्पर्धा भी करवाते हैं और यह भी कहते हैं कि 10वीं और 12वीं में टॉप करने वाले बच्चों को पुरस्कार भी अपनी जेब से देंगे। सरकारी स्कूलों में दाखिला कराने बांटते हैं पर्चा कबीरधाम जिले में एक सरकारी शिक्षक अपनी सेवा भावना से मिसाल बन गए हैं। सरकारी स्कूलों में हर साल बच्चों का दाखिला घट रहा है, लेकिन शिक्षक पूनाराम हर साल खुद पर्चा छपवाकर ग्रामीणों से अपील करते हैं कि वे अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में कराएं। महंगी फीस से बचें और उन पैसों को बच्चों के आगे की पढ़ाई के लिए बचाएं…। गरीब और कमजोर बच्चों को शिक्षक अपने पैसों से पुस्तक-कापी भी खरीदकर देते हैं, ताकि उन्हें पढ़ने में कोई दिक्कत न हो। ऐसे शिक्षक की प्रतिबद्धता ने यह साबित कर दिया है कि एक शिक्षक अगर चाहे तो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।  

पंजाब भर में हड़ताल, PSPCL के कर्मचारियों ने दे दी एक और चेतावनी

लुधियाना  प्राइवेट कंपनी से संबंधित बिजली कर्मचारी अमनप्रीत सिंह की मौत के बाद सी.एच.बी ठेका कर्मचारियों द्वारा पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन की विभिन्न डिविजनों के मुख्य गेट पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियो ने दावा किया है मृत्यु के पारिवारिक समस्या को इंसाफ दिलवाने के लिए कर्मचारियों द्वारा पूरे पंजाब में हड़ताल शुरू कर दी गई है और नए आंदोलन को लेकर अगली रणनीति अपनाई जा रही है। उन्होंने बताया कि  बिजली की हाई टेंशन तारों पर काम कर रहे अमनप्रीत सिंह की दर्दनाक मौत हो चुकी है और हादसे के बाद पावर कॉम विभाग के किसी भी अधिकारी द्वारा मृतक के पारिवारिक सदस्यों की बात तक नहीं पूछी गई। उन्होंने बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मृतक  परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने सहित बुजुर्ग मां-बाप की पेंशन लगाई जाए और अगर जल्द ही कर्मचारियों की मांगे पूरी नहीं हुई तो पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन के चीफ इंजीनियर के कार्यालय को घेरने सहित बिजली मंत्री संजीव अरोड़ा की कोठी का घेराव किया जाएगा।  

लापरवाही का शिकार ग्रामीण: लाखों खर्च के बाद भी सड़क बेहाल, ठेकेदार को नोटिस

बीजापुर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करोड़ों की योजनाएं गांवों तक बेहतर आवागमन की सुविधा देने के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन उसूर तहसील की बासागुड़ा-कुम्हारपारा सड़क इसका बिल्कुल उल्टा उदाहरण बन गई है। साल 2020 में ठेकेदार आकाश चांडक ने 60 लाख की लागत से 1.60 किमी लंबी मिट्टी-मुरुम सड़क बनाई थी। पांच साल बीतने को हैं लेकिन ठेकेदार ने इस सड़क की एक बार भी मरम्मत नहीं की। नतीजा यह हुआ कि आज यह सड़क पूरी तरह से उबड़-खाबड़ और गड्ढों से भरी खाई में तब्दील हो चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि सड़क पर चलना किसी नदी को पार करने से कम नहीं है। जगह-जगह गड्ढे, कटे किनारे और झाड़ियों ने इसे मौत का जाल बना दिया है। आलम यह है कि धरमापुर, मल्लेपल्ली और डल्ला गांव के करीब 1000 ग्रामीण रोजाना इसी सड़क से गुजरने को मजबूर हैं। पैदल यात्री, बाइक सवार और ट्रैक्टर चालकों के लिए यह सफर किसी चुनौती से कम नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने सड़क निर्माण में शुरुआत से ही लापरवाही बरती और काम अधूरा छोड़ दिया। अब मरम्मत न होने से हालात बदतर हो गए हैं। उनका कहना है कि सड़क पर चलने से ज़्यादा आसान तो खेतों में चलना है। इस मामले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता नवीन कुमार टोंडे और उप अभियंता परमानंद रामटेके ने बताया कि ठेकेदार को 5 अगस्त 2025 को मरम्मत करने के लिए नोटिस भेजा गया है। लेकिन ठेकेदार ने मरम्मत कार्य शुरू नहीं किया तो विभाग 18 लाख रुपये की वसूली ठेकेदार से करेगा। लेकिन सवाल यह है कि आखिर ग्रामीणों की पांच साल से चली आ रही परेशानी का जिम्मेदार कौन है? और कब तक ऐसी योजनाएं सिर्फ कागजों पर ही टिकाऊ साबित होंगी?

उज्जैन महाकाल मंदिर में शिव का मुखौटा गिरा, ज्योतिषाचार्य बोले- अप्राकृतिक घटना

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में दो दिन पहले 18 अगस्त सोमवार को एक अनोखी घटना घटित हुई । यहां रोजाना की तरह रात्रि 8:00 बजे शिवलिंग पर श्रृंगार किया जा रहा था। शिवलिंग पर भांग से भगवान शिव का मुखौटा बनाया गया । इस दौरान बड़ी मात्रा में भांग लगाई गई। इसके तत्काल बाद आरती शुरू ही होने ही वाली थी कि भांग का श्रृंगार टूटकर नीचे गिर गया। यहां शिव के मुखौटे से नाक, होंठ और एक आंख टूट कर नीचे गिर गई। कुछ ही क्षण में मंदिर के गर्भगृह में मौजूद पंडे पुजारी ने तत्काल फिर से मुखौटा बनाया और आरती की। यह पूरी घटना मंदिर में लगे सीसीटीवी में कैद हुई जो कि वायरल हो गई। खड़े हो रहे हैं सवाल इस घटना के बाद महाकाल मंदिर प्रबंध समिति और मंदिर के पंडे पुजारियों पर कई प्रकार के सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना को लेकर ज्योतिष आचार्य और धर्म के ज्ञाता भी अपना अलग-अलग मत दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कई निर्देश नियमों की बात करें तो वर्ष 2020 में महाकाल शिवलिंग क्षरण रोकने की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महाकाल मंदिर समिति को निर्देश दिए थे कि शिवलिंग पर तय मात्रा में पंचामृत चढ़ाया जाए। इसके अलावा भांग और अन्य सामग्रियों के लिए भी निर्देशित किया था । बावजूद इसके वर्तमान समय में निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा है। शिवलिंग पर तय मात्रा से अधिक भांग लगाई जा रही है। यही कारण है कि मुखौटा टूटकर गिर गया। अप्राकृतिक घटना के संकेत इस घटना को लेकर देश के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य अमर त्रिवेदी का कहना है कि यह एक अप्राकृतिक घटना का संकेत है। इस घटना के पीछे दो अलग-अलग मत है। देवता जिस भी सामग्री को पसंद करते हैं, उसे वह स्वीकार करते हैं और यदि किसी सामग्री में त्रुटि या श्रद्धा ना हो या अच्छी मानसिकता से ना बनाई गई हो या उसमें धर्म का प्रभाव ना हो तो वे सामग्री को त्याग देते हैं। ये हैं वैज्ञानिक कारण ज्योतिषाचार्य के अनुसार वैज्ञानिकता की बात करें तो पत्थरों की अपनी आद्रता होती है। पत्थरों में आंतरिक आद्रता और आंतरिक उष्णता रहती है। जब बाहरी आद्रता व उष्णता वाली भांग पत्थर पर लगाई जाती है तो कभी-कभी उसके गिरने की संभावना बनती है। यहां एक प्रकार से ऋतु परिवर्तन के संकेत भी हैं। भविष्य में बाढ़ और जल की स्थिति दिखेगी। आप्राकृतिक घटना के भी संकेत हैं। शिवलिंग के श्रृंगार का जिक्र नहीं धर्म के ज्ञाता, महर्षि पाणिनि वेद विद्या संस्थान के पूर्व कुलपति और पूर्व संभागायुक्त डॉ मोहन गुप्त ने इस घटना को लेकर कहा कि हिंदू धर्म में शिवलिंग पर भांग के श्रृंगार का किसी भी शास्त्र में कोई उल्लेख नहीं मिलता है। शुरू से इस बात का विरोध हुआ है। महाकाल के शिवलिंग पर भांग का श्रृंगार नहीं किया जाना चाहिए। शिव पुराण और लिंग पुराण में भी कहीं उल्लेख नहीं है। ऐसी कोई भी परंपरा नहीं रही है। भांग के श्रृंगार से शिवलिंग का क्षरण होता है । कई घंटे तक भांग का शिवलिंग पर लगे रहना क्षरण पैदा करता है। पंडित-पुजारी नहीं मान रहे बात शास्त्र का आधार पंडित पुजारी नहीं मान रहे हैं । अब श्रृंगार अपने आप गिर गया है। यह संकेत है कि खुद महाकाल इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। भांग का श्रंगार उचित नहीं है इसे बंद किया जाना चाहिए। अब प्रशासन और पंडित पुजारी को सोचना चाहिए। यह उचित नहीं है।  

राहुल मुखिया के ठिकाने पर ताबड़तोड़ कार्रवाई, इलाके में सुरक्षा कड़ी

मोतिहारी बिहार के मोतिहारी में गुरुवार सुबह सुबह एनआईए की रेड से पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। एनआईए के टीम ने कुख्यात अपराधी और चर्चित भूमाफिया राहुल मुखिया के घर पर छापेमारी की है। राहुल मुखिया के घर जिले के गोविंदगंज थाना क्षेत्र स्थित खजूरिया गांव में अहले सुबह से यह कार्रवाई शुरू हुई। वहीं, पकड़ी दयाल थाना क्षेत्र के थरबिटिया गांव में पूर्व मुखिया छेदी सिंह के घर पर भी रेड चल रही है। बताया जाता है कि इस छापेमारी में केंद्रीय जांच एजेंसी के साथ साथ मोतिहारी पुलिस के जवान भी शामिल है। राहुल मुखिया का इतिहास पूर्व से भी आपराधिक रही है। शागिर्द कुणाल सिंह को पुलिस ने पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया था वहीं, छेदी सिंह के बारे में भी यह बताया जाता है कि कहीं न कहीं उसकी संलिप्तता इनके साथ रही है, जिससे यह रेड पड़ी है। बताते चले कि 15 मार्च 2023 में राहुल मुखिया के शागिर्द कुणाल सिंह को पुलिस ने पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया था। कुणाल के घर से पुलिस ने एके 47 बरामद किया था। इस मामले मे पिपराकोठी थाना मे पुलिस ने एफआईआर दर्ज कराया था, जिसमे राहुल मुखिया सहित अन्य को आरोपित किया गया  था। आवास के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया गया इस मामले में अपराधी कुणाल को आजीवन कारावास की सजा मिली है। वहीं, छापेमारी के दौरान किसी को घर के आस-पास आने-जाने की रोक लगा दी गई है। एनआईए की टीम ने आवास के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना लिया है, ताकि कोई भी व्यक्ति अंदर या बाहर नहीं जा सके। राहुल मुखिया का नाम लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों और भूमाफियागिरी में सामने आता रहा है। बताया जाता है कि उसके खिलाफ कई संगीन मामले दर्ज हैं ।यही नहीं, वह बहादुरपुर पंचायत की मुखिया ज्योति कुमारी का पति भी है। ऐसे में इस छापेमारी ने स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक हलकों में भी खलबली मचा दी है।

हरियाणा पुलिस पर सवाल, मनीषा हत्याकांड में बिश्नोई गैंग ने दी सीधी चेतावनी

हरियाणा हरियाणा के भिवानी जिले में 19 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की हत्या के मामले ने प्रदेशभर में आक्रोश और विरोध प्रदर्शन देखा जा रहा है। मनीषा 11 अगस्त को स्कूल से लौटने के बाद नर्सिंग कॉलेज में एडमिशन संबंधी जानकारी लेने गई थी, जिसके बाद वह लापता हो गई। दो दिन बाद यानी कि 13 अगस्त को शव खेत में मिला। इस घटना ने लोगों को झकझोर दिया और तेज न्याय की मांग को और बुलंद कर दिया। लगातार विरोध प्रदर्शनों और परिवार की मांगों के बीच हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को घोषणा की कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस पूरी गंभीरता और पारदर्शिता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि वह खुद मामले की निगरानी कर रहे हैं और पीड़िता को हर हाल में न्याय दिलाया जाएगा। बिश्नोई गैंग की धमकी इस बीच, मामले ने नया मोड़ तब लिया जब लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर धमकी भरा पोस्ट जारी किया। इस पोस्ट में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी ढिल्लों के नाम से लिखा गया कि अगर हरियाणा पुलिस न्याय देने में नाकाम रही तो उनका गैंग हत्यारे को सजा देगा। गैंगवार के इस एंगल ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। माना जा रहा है कि लॉरेस बिश्नोई और रोहित गोडारा गैंग इस हाई-प्रोफाइल केस का इस्तेमाल हरियाणा में अपना वर्चस्व दिखाने के लिए कर रहे हैं। स्थिति तब और बिगड़ गई जब कनाडा में बैठे बिश्नोई गैंग के सहयोगी गोल्डी ढिल्लों ने उसी पोस्ट में कनाडा के ब्रैम्पटन में सोनू छठा की हत्या की जिम्मेदारी भी ली। ढिल्लों ने दावा किया कि सोनू छठा सांसद धानुआ की हत्या की साजिश में शामिल था और लॉरेंस के नाम पर रंगदारी वसूल रहा था। लॉरेंस बिश्नोई इस समय जेल में है और गोल्डी ढिल्लों विदेश से सक्रिय है। ऐसे में अधिकारियों को डर है कि यह मामला प्रदेश में गैंगवार को और भड़का सकता है और कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। मनीषा के परिवार और ग्रामीणों ने लगातार CBI जांच की मांग की थी। भिवानी में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद मुख्यमंत्री ने यह आश्वासन दिया कि इस मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।  

सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी पर पंजाब में सख्ती, डिप्टी कमिश्नर ने दिए आदेश

अमृतसर सड़क सुरक्षा कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने संबंधित अधिकारियों को सुरक्षित स्कूल वाहन पालिसी को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए। डिप्टी कमिश्नर ने जिला बाल सुरक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि स्कूल बसों में पालिसी के अनुसार सभी सुविधाएं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वे स्कूल प्राधिकारियों से संपर्क स्थापित कर इसे लागू करें और प्रत्येक स्कूल से वाहनों की जानकारी के संबंध में एक शपथ पत्र लिया जाए। उन्होंने कहा कि वे स्कूल बसों/ऑटो का निरीक्षण सुनिश्चित करें। स्कूल बसों का रंग पीला होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ओवरलोड स्कूल बसों/ ऑटो का चालान किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि चालक वर्दी में हो, उसके पास लाइसेंस हो और हर बस में एक कंडक्टर हो। उन्होंने जिलावासियों से अपील की कि अगर आपको कोई भी स्कूल ड्राइवर नियमों का उल्लंघन करता दिखे तो इसकी सूचना हैल्पलाइन नंबर 1098 पर दें ताकि उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके। बैठक में क्षेत्रीय परिवहन सचिव खुशदिल सिंह, ए.डी.टी.ओ. मैडम शालू अर्चन, इंजीनियर इंजीनियर नैशनल हाईवे योगेश यादव, जिला बाल सुरक्षा अधिकारी तरनजीत सिंह, अरविंदर भट्टी के अलावा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। नाबालिगों द्वारा वाहन चलाए जाने पर सख्त कार्रवाई हो डिप्टी कमिश्नर ने स्कूल पदाधिकारियों से कहा कि वे बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूलों में स्लोगन, पेंटिंग, प्रश्नोत्तरी आदि प्रतियोगिताएं आयोजित करें। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए तथा उनके अभिभावकों को जागरूक किया जाए कि यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते हुए पकड़ा गया तो उसके अभिभावकों को भी तीन साल तक की कैद हो सकती है। जुलाई माह में ट्रैफिक नियमों की उल्लंघना करने वालों से 23 लाख जुर्माना वसूला ए.सी.पी. ट्रैफिक पवन कुमार ने बताया कि जुलाई माह के दौरान पुलिस ने यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर 15,435 चालान जारी कर 23 लाख 23 हजार 500 रुपए का जुर्माना वसूला है। उन्होंने बताया कि काली फिल्म लगाने वालों के 450, बिना हेलमेट के 1584, बिना सेफ्टी बेल्ट के 368, बिना लाइसेंस के 52, मोबाइल फोन का उपयोग करने पर 167, मोटर वाहन एक्ट के उल्लंघन पर 3, नशे में वाहन चलाने पर 207, तेज गति से वाहन चलाने पर 1, प्रेशर हॉर्न पर 2, ट्रिपल राइडिंग पर 281, लाल बत्ती जंप करने पर 619, यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर 2273, गलत पार्किंग पर 6253, टो वाहनों पर 1090, बिना इंश्यारेंस पर 91, नो एंट्री पर 2 चालान किए गए तथा अन्य धाराओं के लिए 6 चालान जारी कर जुर्माना वसूला गया है।  

चिन्नास्वामी में क्रिकेट की वापसी जरूरी, वेंकटेश प्रसाद ने भगदड़ पर जताई चिंता

बेंगलुरु चिन्नास्वामी स्टेडियम में क्रिकेट की वापसी एक भव्य समारोह का मुख्य विषय रहा जहां पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने बुधवार को अपने पैनल का घोषणापत्र जारी करके आगामी कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) चुनावों में भाग लेने की दिशा में पहला ठोस कदम उठाया। चार जून को यहां हुई भगदड़ में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के 11 प्रशंसकों की जान चली गई थी जिसके बाद इस प्रतिष्ठित स्टेडियम में कोई मैच नहीं हुआ है। अब यहां अगले महीने होने वाले आईसीसी महिला विश्व कप के मुकाबलों पर भी खतरा मंडरा रहा है। घोषणापत्र जारी करने के बाद प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘‘सच कहूं तो यह (भगदड़) कुछ ऐसा है जो नहीं होना चाहिए था। हमें (राज्य) सरकार के साथ संपर्क में बहुत सक्रिय होना होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चिन्नास्वामी स्टेडियम में जल्द से जल्द मैच खेले जाएं।’’ प्रसाद ने संकेत दिया कि उनके उम्मीदवारों के पैनल में 16 सदस्य होंगे। हालांकि उन्होंने इस समय उनके नाम बताने से परहेज किया। केएससीए के चुनाव अक्टूबर या नवंबर में हो सकते हैं क्योंकि रघुराम भट के नेतृत्व वाले मौजूदा पदाधिकारी 30 सितंबर को अपना तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लेंगे। प्रसाद ने कहा, ‘‘जहां तक स्टेडियम की बात है तो हमें इसकी खोई हुई गरिमा वापस लाने की जरूरत है। हम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को वापस लाना चाहते हैं। हमने देखा है कि हर अंतरराष्ट्रीय मैच बेंगलुरु से बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह एक बहुत ही प्रतिष्ठित स्थल है – चिन्नास्वामी स्टेडियम जो पिछले 50 वर्षों से खड़ा है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है जहां अंतरराष्ट्रीय मैच बाहर स्थानांतरित किए गए हों। यह अच्छी बात नहीं है।’’  

BEST टेस्ट में फेल होकर फडणवीस से मिले राज, ठाकरे परिवार में फिर दरार के संकेत

मुंबई  महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने गुरुवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की, जिससे राज्य के राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गई हैं। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब बेस्ट कर्मचारी सहकारी ऋण समिति का चुनाव मिलकर लड़ने वाली उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) और मनसे को बुधवार को अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। दोनों पार्टियों ने पहली बार मिलकर कोई चुनाव लड़ा था, हालांकि उनका संयुक्त पैनल चुनाव में एक भी पद नहीं जीत पाया। राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनाव के लिए शिवसेना (UBT) और मनसे के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि, इसे लेकर किसी भी दल ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा था। हाल ही में मराठी भाषा को लेकर आयोजित एक कार्यक्रम में राज और उद्धव साथ नजर आए थे। हार पर फडणवीस ने कसा तंज फडणवीस ने बुधवार को कहा कि BEST चुनाव में शिवसेना (UBT) और मनसे की हार ‘ठाकरे ब्रांड’ की सार्वजनिक अस्वीकृति को दर्शाती है। उन्होंने ठाकरे भाइयों के नेतृत्व वाली दोनों पार्टियों पर इस चुनाव का राजनीतिकरण करने के लिए निशाना साधा। शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का संयुक्त पैनल सोमवार को चुनाव में सभी 21 सीट हार गया। फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा, 'मुझे लगता है कि इस तरह के चुनाव का राजनीतिकरण करने की कोई आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि यह केवल एक ऋण समिति का चुनाव था। लेकिन उन्होंने ठाकरे ब्रांड की जीत के बड़े-बड़े दावे करके इसका राजनीतिकरण कर दिया। लेकिन ऐसा लगता है कि लोगों को यह पसंद नहीं आया। चुनाव के नतीजे लोगों की अस्वीकृति को दर्शाते हैं।' महाराष्ट्र में भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा कि यह परिणाम ठाकरे भाइयों के घटते प्रभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा, 'उद्धव और राज ठाकरे ने बेस्ट चुनाव को लेकर एक साथ आकर खूब शोर मचाया। ऐसा दिखाया गया मानो उनकी जीत आसान हो, लेकिन मनसे के हाथ मिलाने के बावजूद यह सहकारी संस्था में एक भी सीट नहीं जीत पाए, जिस पर वर्षों से शिवसेना (UBT) का दबदबा रहा है।' BEST चुनाव बेस्ट क्रेडिट सोसाइटी का चुनाव लड़ने के लिए शिवसेना (UBT) और मनसे ने ‘उत्कर्ष’ नाम का एक पैनल गठित किया था। इस पैनल में 21 सदस्य थे, जिनमें से शिवसेना (UBT) से 18, मनसे से दो और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संघ से एक सदस्य थे। शिवसेना (UBT) और मनसे के नेताओं ने कहा था कि बेस्ट में मनसे के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है, लेकिन यह चुनाव दोनों पार्टियों को राज्य में आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले एक साथ आने का मौका देगा।