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नेहा कक्कड़ और डिनो मोरिया का धमाकेदार डांस वीडियो, ‘तू प्यासा है, मैं पानी सनम’ हुआ वायरल

मुंबई, मशहूर सिंगर नेहा का हाल ही में डिनो मोरिया के साथ गाना ‘तू प्यासा है, मैं पानी सनम’ रिलीज हुआ था। अब गायिका ने गाने पर वीडियो बनाई है, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। वीडियो में नेहा और डिनो की जोड़ी गाने के बोल पर धमाकेदार डांस मूव्स करती नजर आ रही है। वीडियो की शुरुआत में नेहा डिनो को डांस के लिए उकसाती हैं और खुद शानदार डांस मूव्स करने लगती हैं। उनके एनर्जेटिक मूव्स देखकर डिनो भी खुद को रोक नहीं पाते और नेहा के साथ कदम मिलाते हुए डांस करने लगते हैं। दोनों की केमिस्ट्री और डांस मूव्स ने फैंस का दिल जीत लिया है। इस वीडियो में भी नेहा का बोल्ड और ग्लैमरस अंदाज छाया हुआ है, जबकि डिनो का स्टाइलिश लुक गाने की रौनक को बढ़ा रहा है। लुक की बात करें तो नेहा ने व्हाइट क्रॉप टॉप के साथ ब्लैक पैंट पहना है, जो उनके स्टाइलिश और ट्रेंडी अवतार को बखूबी दर्शाता है। वहीं, डिनो ने ब्लैक शर्ट और पैंट में अपना क्लासिक चार्म बिखेरा है। नेहा ने वीडियो के कैप्शन में कुछ नहीं लिखा, बस दो ब्लैक एंड व्हाइट इमोजी डाले, जो उनके और डिनो के लुक के साथ परफेक्टली मेल खाते हैं। ‘तू प्यासा है, मैं पानी सनम’ एक रोमांटिक और एनर्जेटिक गाना है, जिसमें नेहा का सिजलिंग अवतार देखने लायक है। गाने का म्यूजिक और बीट्स युवाओं को खूब पसंद आ रहा है। डिनो मोरिया की मौजूदगी ने गाने को और भी आकर्षक बना दिया है। इस गाने को यूट्यूब और अन्य म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज किया गया है और इसे अब तक 5.5 मिलियन व्यूज मिल चुके हैं। टोनी कक्कड़ ने गाने को लिखने के साथ-साथ संगीतबद्ध भी किया है। इस गाने को आदिल शेख ने डायरेक्ट किया है। इसकी कोरियोग्राफी मोहित और सेरेन ने की है।  

11 सितंबर को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बस्तर में करेंगे छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का शुभारंभ

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 11 सितंबर को बस्तर में आयोजित होने वाले छत्तीसगढ़ इन्वेस्टर कनेक्ट का शुभारंभ करेंगे। यह आयोजन क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति देने के साथ-साथ अवसरों के नए द्वार खोलने वाला साबित होगा। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं में बस्तर का विकास सदैव अग्रणी रहा है। इन्वेस्टर कनेक्ट इसी संकल्प को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। समावेशी विकास की इस सोच के अंतर्गत उद्योग और निवेश को केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित न रखकर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे मूलभूत क्षेत्रों से जोड़ा गया है, ताकि बस्तर का विकास केवल औद्योगिक प्रगति तक सीमित न रहकर सामाजिक उन्नति का आधार भी बन सके। इन्वेस्टर कनेक्ट न केवल बस्तर में नए उद्योगों और व्यापक रोजगार के अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि विकास की प्रत्येक उपलब्धि का लाभ सीधे स्थानीय समुदायों तक पहुँचे और वे इस प्रगति यात्रा के सक्रिय भागीदार बनें।

इस बार नवरात्रि की 9 नहीं, 10 दिन होंगी उत्सव की धूम

साल 2025 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर, सोमवार के दिन से हो रही है. शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है. इन दिनों मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. हर दिन किसी न किसी देवी को समर्पित होता है. इस दौरान आराधना से इंसान के जीवन के सारे दुख-दर्द और कष्ट मिट जाते हैं. साल 2025 में नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होकर 1 अक्टूबर तक चलेंगे. 1 अक्टूबर को महानवमी है और 2 अक्टूबर को दशहरा या विजयदशमी के साथ इस पर्व का समापन होगा. इसी दिन मां दुर्गा का विसर्जन भी किया जाएगा. साल 2025 में बनेगा दुर्लभ संयोग साल 2025 में नवरात्रि पर एक दुर्लभ संयोग बन रहा है. इस बार नवरात्रि 9 नहीं, बल्कि 10 दिनों की होगी. ऐसे में एक अतिरिक्त दिन किस बात का संकेत दे रहा है, यह जानना रोचक है. 9 नहीं, 10 दिन के होंगे नवरात्र साल 2025 में शारदीय नवरात्र 9 नहीं, बल्कि 10 दिनों के होंगे. नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से होगी. 24 और 25 सितंबर को तृतीया तिथि का व्रत रखा जाएगा. इस बार तृतीया तिथि दो दिनों तक रहेगी, जिसके कारण शारदीय नवरात्रि में एक दिन की वृद्धि होगी. नवरात्रि में बढ़ती हुई तिथि का महत्व     नवरात्रि में बढ़ती हुई तिथि को शुभ माना जाता है, जबकि घटती हुई तिथि को अशुभ माना जाता है. नवरात्रि में बढ़ती हुई तिथि शक्ति, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक होती है.     शारदीय नवरात्रि का पर्व हर साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है, जो चंद्रमा के बढ़ने का प्रतीक माना गया है. इस समय को अत्यंत सकारात्मक और शक्ति-विकास का कारण माना जाता है.     बढ़ती हुई तिथि नई शुरुआत, सृजन और प्रगति का प्रतीक है। इस दौरान की गई साधना फलदायी मानी जाती है. शारदीय नवरात्रि का महत्व शारदीय नवरात्रि में उपवास, ध्यान और मां दुर्गा की आराधना करने से भक्त अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत कर सकते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं.

मध्य प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, IAS और कलेक्टरों की लिस्ट तैयार

भोपाल पांच कलेक्टर और दो संभाग कमिश्नर बदलने के बाद सरकार कुछ प्रमुख सचिवों और कलेक्टरों को भी जल्द बदलेगी। इसकी तैयारी हो चुकी है। मुख्यमंत्री मोहन यादव इसे अंतिम रूप देंगे। संभावना जताई जा रही है कि दशहरा के बाद होने वाली कलेक्टर-कमिश्नर कांफ्रेंस से पहले तबादले किए जाएंगे, क्योंकि अक्टूबर से मतदाता सूची का संक्षिप्त पुनरीक्षण का काम प्रारंभ हो जाएगा और फिर जनवरी तक तबादले नहीं किए जा सकेंगे। सरकार ने सोमवार को 14 आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इसमें इंदौर और उज्जैन में कमिश्नर पदस्थ करने के साथ इंदौर, जबलपुर, कटनी, बड़वानी और आगर मालवा के कलेक्टर बदले गए। इसके बाद भी कुछ और जिलों के कलेक्टर बदले जाने हैं। सामान्य प्रशासन विभाग (कार्मिक) प्रस्ताव तैयार कर चुका है लेकिन मुख्यमंत्री के स्तर पर अंतिम निर्णय होना बाकी है। इसी तरह अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव स्तर के कुछ अधिकारियों के दायित्व में भी परिवर्तन संभावित है। इसमें जिन अधिकारियों के पास कार्य की अधिकता है, उनसे प्रभार लेकर दूसरे अधिकारियों को दिया जा सकता है। जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी देने पर विचार चल रहा है।

इंदिरा एकादशी 2025: महत्व, पूजा नियम और सही समय जानें, 16 या 17 सितंबर का फिक्स टाइम

हिंदू धर्म में एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है. सालभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं और हर एकादशी की अपनी धार्मिक मान्यता होती है. पितृपक्ष में आने वाली एकादशी को बेहद पवित्र माना गया है. इस एकादशी को इंदिरा एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजा पितरों को समर्पित होती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. कब है इंदिरा एकादशी 2025 द्रिक पंचांग के अनुसार इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत 17 सितंबर, बुधवार को रखा जाएगा. एकादशी तिथि की शुरूआत सुबह 12 बजकर 21 मिनट से होगी और इसका समापन रात 11 बजकर 39 मिनट पर होगा. इस दिन व्रत रखा जाएगा और पारण अगले दिन यानी 18 सितंबर को किया जाएगा. पंचांग के अनुसार, 18 सितंबर को सुबह 06:07 से 08:34 बजे के बीच स्नान-ध्यान कर पूजा-पाठ के बाद व्रत खोल सकते हैं. इंदिरा एकादशी का महत्व इंदिरा एकादशी को श्राद्ध एकादशी भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और तर्पण करने से जातक के पापों का नाश होता है और उनके पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. ऐसा करने से साधक को सुख-समृद्धि और शांति मिलती है. माना जाता है कि इस व्रत को करने वाला जातक सांसारिक सुखों का आनंद लेने के बाद अंत में बैकुंठ धाम को प्राप्त करता है. पूजन विधि इस व्रत की पूजा विधि भी विशेष मानी गई है. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें. पितरों को याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करें. इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित कर दीपक जलाएं. उन्हें पीले फूल और मिठाई अर्पित करें क्योंकि पीला रंग श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है. इसके बाद पूजा सामग्री चढ़ाकर व्रत कथा सुनें और अंत में विष्णुजी की आरती कर प्रसाद बांटें. पितरों की शांति के लिए करें इन चीजों का दान पितरों की शांति और संतुष्टि के लिए इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना गया है. इस दिन घी, दूध, दही और अन्न का दान करने से घर में सुख-समृद्धि और धन की वृद्धि होती है. साथ ही जरूरतमंदों को भोजन कराने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.

वजन कम करने की नई उम्मीद! ओजेम्पिक से दोगुनी ताकतवर दवा विकसित

 आज की दुनिया में मोटापा सिर्फ एक हेल्थ इश्यू नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल और मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है। अब तक ओजेम्पिक और वेगोवी जैसी दवाओं ने वजन कम करने के क्षेत्र में क्रांति तो लाई है, लेकिन इनके साथ उल्टी, जी मिचलाना, मांसपेशियों की कमजोरी और कभी-कभी दुबारा वजन बढ़ने जैसे साइड इफेक्ट भी देखने को मिले हैं। ऐसे में अब वैज्ञानिकों ने एक नई उम्मीद जगाई है एक ऐसी दवा जो सर्जरी जितना असरदार, लेकिन अधिक सुरक्षित और आसान हो सकती है। कैसी है नई दवा?- स्टडी अमेरिका की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक एक्सपेरिमेंटल दवा तैयार की है, जो एक साथ चार हार्मोन पर काम करती है GLP-1, GIP, ग्लूकागन और PYY।     GLP-1 भूख को कम करता है और पाचन को धीमा करता है।     GIP मतली को कंट्रोल करता है और फुलनेस की फीलिंग बढ़ाता है।     ग्लूकागन शरीर की एनर्जी खपत को बढ़ाता है और फैट बर्न करने में मदद करता है।     PYY पाचन की रफ्तार को और धीमा कर अतिरिक्त चर्बी को घटाने में मदद करता है।     वैज्ञानिकों का दावा है कि यह दवा 30% तक वजन घटा सकती है, जो कि आम तौर पर बैरियाट्रिक सर्जरी में देखने को मिलता है। जानिए नई दवा ओजेम्पिक से कैसे अलग है? ओजेम्पिक जैसी मौजूदा दवाएं सिर्फ GLP-1 पर काम करती हैं। नई दवा चार हार्मोन का संतुलन बनाकर असर दिखाने की कोशिश करती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे मतली और उल्टी जैसी शिकायतें कम होंगी, साथ ही मांसपेशियों और हड्डियों की ताकत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा और मोटापा घटने के बाद दुबारा बढ़ने का रिस्क भी कम हो सकता है। कोशिकाओं पर टेस्ट किया गया? अभी यह दवा प्रारंभिक प्रयोगशाला चरण (preclinical stage) में है। ये न तो जानवरों पर और न ही इंसानों पर इसका ट्रायल हुआ है। फिलहाल इसे कोशिकाओं पर टेस्ट किया गया है, जहां इसके अच्छे नतीजे मिले हैं। अगला कदम होगा पहले जानवरों पर, फिर इंसानों पर ट्रायल। उसके बाद ही इसे दवा के रूप में लॉन्च करने की प्रक्रिया शुरू होगी। क्यों है यह खोज अहम? भारत से लेकर अमेरिका तक लाखों लोग मोटापे से जूझ रहे हैं। वहीं मोटापा कम करने के लिए कई दवाएं बनाई गई हैं, जो काफ़ी असरदार हैं, लेकिन दवाओं के साइड इफेक्ट्स, इंजेक्शन की झंझट और महंगे दाम लोगों को परेशानी में डालते हैं।वहीं अगर नई दवा पर रिसर्च सफल रही, तो यह वजन घटाने में न सिर्फ मदद करेगी बल्कि इसके कम साइड इफेक्ट्स देखने को मिल सकते हैं और इस दवा को लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकेगा।

अब दिवालिया प्रोजेक्ट में फंसे होमबायर्स को राहत, सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए घर खरीदारों की बड़ी राहत दी है. कोर्ट के फैसले से उन होमबायर्स को बड़ी राहत मिली है जो दिवालिया हो चुकी हाउसिंग प्रोजेक्ट में फंसे हुए हैं. कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे खरीदारों को उनकी संपत्ति का कब्ज़ा पाने का अधिकार है, बशर्ते उनके दावे को रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने वित्तीय लेनदारों की सूची में स्वीकार कर लिया हो. यह फैसला होमबायर्स के अधिकारों को सुरक्षित करता है और दिवालियापन की कार्यवाही के दौरान उनके हितों को प्राथमिकता देता है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने यह आदेश चंडीगढ़ के एक मामले में सुनवाई करते हुए पारित किया. इस केस में, दो लोगों ने मोहाली के Ireo Rise (Gardenia) प्रोजेक्ट में 2010 में एक फ्लैट बुक किया था, उन्होंने 60 लाख की पूरी राशि का भुगतान भी कर दिया था, लेकिन 2018 में दिवालियापन की कार्यवाही शुरू होने के कारण उन्हें फ्लैट का कब्ज़ा नहीं मिल पाया.  सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? कोर्ट ने इस मामले को बड़े परिप्रेक्ष्य में देखा, क्योंकि इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की ऐसी व्याख्या उन होमबायर्स के साथ अन्याय होगी, जो समझौते के अपने हिस्से का सम्मान करने के बावजूद फ्लैट पर कब्जे का इंतजार कर रहे हैं. न्यायमूर्ति संजय कुमार और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा, "इस मामले के तथ्य उन आम होमबायर्स की दुर्दशा को उजागर करते हैं, जो अपने सिर पर छत पाने की उम्मीद में अपनी जीवन भर की बचत का निवेश करते हैं.' अपीलकर्ताओं ने 2011 में ही लगभग पूरी राशि का भुगतान कर दिया था, उनके दावे को सही तरह से सत्यापित और स्वीकार किए जाने के बावजूद, आज उन्हें कब्जा देने से इनकार करना, उनके साथ अनुचित और अनावश्यक अन्याय होगा. कोर्ट ने पाया कि NCLT and NCLAT  ने याचिकाकर्ताओं को गलत तरीके से क्लॉज 18.4(xi) के तहत वर्गीकृत किया. यह क्लॉज उन होमबायर्स पर लागू होता है, जिन्होंने दावा नहीं किया, देर से दावा किया या जिनका दावा बिल्डर द्वारा सत्यापित नहीं किया गया. कोर्ट ने ने माना कि इस वर्गीकरण में गलतियां थीं. कोर्ट ने बताया कि इस क्लॉज में सत्यापित दावों और देरी से या असत्यापित दावों के बीच एक स्पष्ट अंतर है, क्योंकि क्लॉज 18.4(vi)(a) उन आवंटियों के मामलों को नियंत्रित करता है जिनके दावे सत्यापित और स्वीकार कर लिए गए हैं. ये आवंटी अपने अपार्टमेंट या उसके बराबर किसी वैकल्पिक यूनिट पर कब्जा पाने के हकदार हो जाते हैं.  अपीलकर्ताओं ने 27 मई 2011 को बिल्डर के साथ समझौता किया था और लगभग 60 लाख रुपये की पूरी कीमत में से 57,56,684 रुपये का भुगतान कर दिया था. NCLAT ने अपने फैसले में कहा था कि अपीलकर्ताओं का दावा देर से आया था, क्योंकि यह उस तारीख के बाद मिला था जब 23 अगस्त 2019 को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (लेनदारों की समिति) द्वारा समाधान योजना (Resolution Plan) को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी थी. याचिकाकर्ताओं ने इसी फैसले को चुनौती देते हुए कोर्ट का रुख किया था.

पुराने पेट्रोल वाहन अब ई-वाहन में बदलेंगे, MAIT के वैज्ञानिकों ने किया क्रांतिकारी प्रयोग

भोपाल  मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक अनोखा प्रयोग किया है, जिससे पुराने पेट्रोल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहन में बदला जा सकेगा। यदि आप अपनी पुरानी गाड़ी को बदलना नहीं चाहते, तो अब सिर्फ इंजन बदलकर उसे ईवी में परिवर्तित किया जा सकेगा। मैनिट ने ईवी-डे के अवसर पर ईवी एक्सपो में लोगों को साफ और सस्ते भविष्य की झलक दिखाई। यह एक्सपो सिर्फ गाड़ियों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच बना जहां तकनीक, पर्यावरण और आम लोगों की जरूरतें एक साथ आईं। देश-विदेश की बड़ी कंपनियों ने की शिरकत इस मेगा इवेंट में देश-विदेश की बड़ी कंपनियों ने अपने लेटेस्ट इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) पेश किए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के एसीएस मनु श्रीवास्तव तथा प्रशासन विभाग के एसीएस संजय कुमार दुबे सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण टेक ट्रैक केस बैटल रहा जिसमें छात्र और युवा इनोवेटर्स ईवी डिजाइन और स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर अपने विजन साझा किया। कंपनियों ने अपने मॉडल्स ने दिखाया कि अब ईवी सिर्फ बड़े शहरों या अमीरों की चीज नहीं रही। दोपहिया वाहनों में किफायती और स्टाइलिश ऑप्शन पेश किए। नवाचार और टेक्नोलॉजी का संगम इस एक्सपो की खास बात रही नई बैटरी टेक्नोलॉजी, जिससे गाड़ियां अब ज्यादा दूरी तय कर रही हैं और कम समय में चार्ज हो जाती हैं। साथ ही, स्मार्ट फीचर्स जैसे मोबाइल ऐप से कंट्रोल, रियल टाइम नेविगेशन और सेटी अलर्ट्स भी लोगों को खूब पसंद आए। छात्रों ने दिखाया कमाल एक्सपो में टेक ट्रैक केस बैटल नाम की प्रतियोगिता भी हुई, जिसमें छात्रों ने स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और ईवी डिजाइन पर अपने इनोवेटिव आइडिया पेश किए।

यूपी में बढ़ेगा कनेक्टिविटी नेटवर्क, 22 जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू होंगी 1,540 बस रूट्स

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में परिवहन की समस्या से गुजर रहे ग्रामीण क्षेत्रों के लिए अच्छी खबर हैं. जल्द ही ग्रामीण इलाकों को जिले के डिपो मुख्यालय से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री जनता बस सेवा का संचालन शुरू किया जाएगा. शुरुआती दौर में पहले चरण में 22 जिलों में इस परिवहन सेवा का संचालन शुरू होगा. जिससे गांवों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी और लोगों का आना-जाना आसान होगा.  पहले चरण में ये कोशिश की जाएगी कि एक जिले के सबसे बड़े ब्लॉक तहसील को दूसरे जिले के साथ कनेक्ट किया जाए. यहां एक महीने तक बस सेवा का संचालन किया जाएगा. इस बीच अगर किसी तरह की परेशानी या कमियां दिखाई देती हैं तो उन्हें दूर किया जाएगा और फिर इसके दायरे को बढ़ाया जाएगा.  गांवों को मुख्य शहरों से जोड़ने की तैयारी तमाम कमियों को दूर करने के बाद पूरे प्रदेश में 1540 मार्गों पर मुख्यमंत्री जनता बस सेवा का संचालन शुरू कर दिया जाएगा. सीएम योगी आदित्यनाथ ने 6 सितंबर को ही कई बसों को संचालन भी शुरू किया था और अब परिवहन विभाग में ग्रामीणों के लिए जनता बस सेवा के संचालन पर भी मंथन किया जा रहा है.  इस प्रस्ताव के तहत परिवहन विभाग द्वारा गांवों को मुख्य शहरों से जोड़ने के लिए प्रथम जिला व डिपो मुख्यालय तक बसें चलाईं जाएंगी. जो कम किराये में ग्रामीणों के लिए उपलब्ध होंगी. इन बसों में दूसरी बसों के मुकाबले किराया भी कम होगा.  पहले चरण में 22 जिलों में जनता बस सेवा का संचालन होगा. इनमें लखनऊ, कानपुर, आगरा, शाहजहांपुर, सीतापुर, हरदोई, बरेली, मथुरा, नोएडा, ग़ाज़ियाबाद, एटा, फिरोजाबाद, वाराणसी, जौनपुर और बलिया जैसे जिलों को शामिल किया गया है.  परिवहन विभाग के मुताबिक इन बसों के संचालन के लिए सिंगर क्रू संचालन व्यवस्था लागू होगी. ये बसें चार चक्कर लगाएंगी. इनकी दूरी 60-80 किमी तक रहेगी. इसके साथ भी ये भी प्लान है कि बस का ठहराव गाँव में होना जरूरी होगा. किसी भी मार्ग पर तीन या तीन से ज्यादा बसों को संचालन जरूरत के हिसाब से किया जा सकेगा.    

हिंदी में मेडिकल पढ़ाई की शुरुआत, जबलपुर में खुल रहा पहला हिंदी माध्यम कॉलेज

 जबलपुर  मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जल्द ही जबलपुर में देश का पहला हिंदी चिकित्सा कॉलेज आरंभ करने जा रहा है। एमबीबीएस की 50 सीटों के साथ यह कालेज शैक्षिक सत्र 2027-28 से आरंभ होगा। इसमें पढ़ाई हिंदी माध्यम से कराई जाएगी। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय ने प्रस्ताव मध्य प्रदेश सरकार को भेजा विश्वविद्यालय कार्य परिषद की हरी झंडी मिलने के बाद प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है। इसके लिए एक करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट भी प्रस्तावित किया गया है। विश्वविद्यालय ने मातृभाषा हिंदी में इसे कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। अभी तक विश्वविद्यालय स्वयं कोई कॉलेज संचालित नहीं करता है। सिर्फ संबद्धता और परीक्षा संबंधी कार्य ही विश्वविद्यालय के जिम्मे होते हैं। अब विश्वविद्यालय का अपना कालेज होने से अकादमिक गुणवत्ता भी निखरेगी। हिंदी में चिकित्सा की पढ़ाई से ग्रामीण व आदिवासी अंचल से आने वाले छात्रों को सुविधा हो जाएगी। यह प्रस्ताव विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में पारित हुआ है। जबलपुर के सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से रहेगा संबद्ध यह कॉलेज, जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध रहेगा और एनएमसी के सभी मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। कॉलेज को पूरी तरह आवासीय बनाया जाएगा। राज्य शासन से मंजूरी और एनएमसी से मान्यता के बाद निर्माण व फैकल्टी चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। विश्वविद्यालय अपना जनरल हिंदी में प्रकाशित करेगामध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (एमयू) अपना जनरल भी हिंदी में प्रकाशित करेगा। कॉलेज के शुरू होने के साथ भाषाई दिक्कत शिक्षकों व छात्रों को न आए, इस दिशा में एमयू लगातार कार्य में जुटा हुआ है। हिंदी पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए एमयू ऐसी लाइब्रेरी पर काम कर रहा है जिसमें कोर्स से संबंधित पाठ्य पुस्तकें हिंदी में अनुवादित होंगी। नए कॉलेज का मसौदा राज्य सरकार को भेज दिया     कार्य परिषद की स्वीकृति के बाद नए कॉलेज का मसौदा राज्य सरकार को भेज दिया गया है। वहां से अनुमति के बाद इस दिशा में कार्य और तेज हो सकेगा। उम्मीद है जल्द ही सरकार इस पर फैसला लेगी। यह अपनी तरह का देश में पहला कालेज होगा, जहां चिकित्सा की पढ़ाई हिंदी में होगी। -डॉ पुष्पराज सिंह बघेल, कुलसचिव, मप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर