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हरजोत बैंस का बड़ा ऐलान, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए नई पहल शुरू

पंजाब  पंजाब के शिक्षा तथा सूचना व लोक सम्पर्क विभाग के कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश की सीमा से लगे पंजाब के इलाकों में बरसात के मौसम दौरान बाढ़ के कारण भारी नुकसान हो जाता है। इसका स्थायी हल नदियों को चैनलाइज करके ही हो सकता है, इसलिए केंद्र सरकार को चैनलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश से सटे पंजाब के नीम पहाड़ी इलाके में हुई भारी वर्षा के कारण सरसा नदी और खड्डों में अधिक मात्रा में पानी आने से गांव आसपुर, अवानकोट, रणजीतपुरा, आलोवाल और खरोटा के किसानों के खेतों में हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंचे हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि वे पिछले कई हफ्तों से नंगल/श्री आनंदपुर साहिब उपमंडल के दर्जनों गांवों का दौरा कर चुके हैं। 100 से अधिक गांवों का नुकसान हुआ है। इस भारी बरसात ने इन गांवों के किसानों की फसलें और जमीनें बहुत नुकसान पहुंचाया है। पंजाब सी.एम. भगवंत सिंह मान ने 20 हजार रुपए प्रति एकड़ मुआवजा देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इन गांवों की भी विशेष गिरदावरी के आदेश दे दिए गए हैं जो जल्द ही पूरी की जाएगी। बैंस ने मौके पर पहुंचकर गांव आसपुर के निवासियों से मुलाकात की और हालात का जायजा लिया। प्रशासन को तुरंत राहत कार्य शुरू करने के आदेश जारी किए। उन्होंने कहा कि उनकी टीमें, वालंटियर, पंच, सरपंच और नौजवान लगातार प्रभावित लोगों की सेवा में लगे हुए हैं। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है और जल्द ही राहत पहुंचाई जाएगी।    इस मौके पर जुझार सिंह मुल्तानी (मैंबर सैणी वैल्फेयर बोर्ड पंजाब), सतनाम सिंह आसपुर, निर्मल सिंह, गुरबख्श सिंह, दयाल सिंह, हरि सिंह, हरजिंदर सिंह नंबरदार, गुरमीत सिंह, पवन कुमार, हरविंदर सिंह आदि मौजूद थे।

अंतरराष्ट्रीय झटका: बलूच आर्मी पर प्रतिबंध लगाने की चीन-पाक योजना पर अमेरिका और यूरोप ने रोका

न्यूयॉर्क पाकिस्तान में सक्रिय विद्रोही संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी और उसकी मजीद ब्रिगेड को संयुक्त राष्ट्र की पाबंदी सूची 1267 में शामिल कराने के प्रस्ताव पर अमेरिका ने वीटो कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान और उसके सदाबहार दोस्त चीन की ओर से इस प्रस्ताव को रखा गया था। इस पर अमेरिका ने वीटो लगा दिया। इसके अलावा ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने भी विरोध किया। इस तरह यह प्रस्ताव गिर गया। दरअसल संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति 1267 के तहत यह प्रावधान है कि अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से किसी भी तरह का ताल्लुक रखने वाले आतंकी संगठन पर पाबंदी लगाई जाती है। ऐसे संगठनों की संपत्तियों को दुनिया भर में जब्त किया जा सकता है। इसी को लेकर अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने कहा कि जिस बलूच लिबरेशन आर्मी और उसके आत्मघाती दस्ते मजीद ब्रिगेड पर पाबंदी का प्रस्ताव है, उसका अलकायदा और इस्लामिक स्टेट से तो कोई संबंध ही नहीं है। ऐसे में इन दोनों को इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद ने बुधवार को कहा था कि अफगानिस्तान में अलकायदा, इस्लामिक स्टेट, तहरीक-ए-तालिबान, ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट, बलूच लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड के ठिकाने हैं। पाकिस्तानी राजनयिक का दावा था कि अफगानिस्तान में इन संगठनों के कम से कम 60 ठिकाने हैं। लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने इस दलील के आधार पर पाबंदी से इनकार किया। अमेरिका ने साफ कहा कि बलूच लिबरेशन आर्मी का अलकायदा या फिर इस्लामिक स्टेट से कोई संबंध नहीं पाया गया। इसलिए इस सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। हालांकि यह भी सही है कि अमेरिका ने बलूच लिबरेशन आर्मी और मजीद ब्रिगेड को आतंकी संगठन घोषित किया है। बलूचिस्तान में लंबे समय से स्वायत्तता की मांग उठती रही है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने इस मांग को लेकर विद्रोह ही छेड़ रखा है। बता दें कि भारत कई बार पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों पर पाबंदी की मांग कर चुका है, लेकिन चीन अकसर अड़ंगे लगाता रहा है। अब ऐसा पहली बार हुआ है, जब चीन और पाकिस्तान के साझा प्रयास को अमेरिका ने इस तरह झटका दिया है। उसके अलावा फ्रांस और ब्रिटेन ने भी विरोध किया है।  

भारतीय टीम के लिए चेतावनी: सैमी बोले, पेस बॉलिंग से 20 विकेट भारत में भी सम्भव

वेस्टइंडीज  वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी का मानना ​​है कि उनके तेज गेंदबाजी आक्रमण में इतनी विविधता है कि वह भारतीय हालात में 20 विकेट ले सकता है। उन्होंने अपनी टीम से आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले न्यूजीलैंड से प्रेरणा लेने को कहा, जिसने पिछले साल भारत को उसकी धरती पर हराकर इतिहास रचा था। भारत और वेस्टइंडीज के बीच पहला टेस्ट मैच दो अक्टूबर से अहमदाबाद में और दूसरा टेस्ट मैच 10 अक्टूबर से दिल्ली में खेला जाएगा। मुख्य कोच डैरेन सैमी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘अब हम ऐसी स्थिति में हैं जहां हमारा तेज गेंदबाजी आक्रमण किसी भी परिस्थिति में विकेट लेने में सक्षम हैं। हमारे पास चार अलग-अलग तरह के तेज गेंदबाज हैं जिनकी अपनी खास विशेषता है। हमारे तेज गेंदबाजी आक्रमण में विविधता है।’’ वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजी आक्रमण में अल्जारी जोसेफ, शमर जोसेफ, एंडरसन फिलिप और जेडन सील्स के अलावा ऑलराउंडर जस्टिन ग्रीव्स शामिल हैं। सैमी ने कहा, ‘‘हमारे पास शमर जोसेफ है, जो बेहद कुशल गेंदबाज है। हमारे पास जेडन है, जिसका अगला पैर मजबूत है और वह गेंद को दोनों तरफ स्विंग करा सकता है। हमारे पास अल्जारी जोसेफ है जो अपने कद के कारण उछाल हासिल कर सकता है। इस तरह से हमारे पास भारत में टेस्ट मैच में 20 विकेट लेने की क्षमता है।’’ सैमी ने कहा कि उनकी टीम न्यूजीलैंड का अनुसरण करना चाहती है, जिसने पिछले साल भारत को 3-0 से हराया था। उन्होंने कहा, ‘‘न्यूजीलैंड ने वहां जाकर अविश्वसनीय रूप से अच्छा प्रदर्शन किया और हमें उससे प्रेरणा लेनी चाहिए। लेकिन यह उन चीजों को समझने की बात है जो न्यूजीलैंड ने उन परिस्थितियों में कीं। उम्मीद है कि हमारे खिलाड़ी उनका अनुसरण करेंगे।’’  

अचानक हुई ट्रंप की हेलीकॉप्टर लैंडिंग, पत्नी मेलानिया मौजूद – क्या था कारण?

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हेलीकॉप्टर की ब्रिटेन में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है। ब्रिटेन दौरे के बाद अमेरिका वापस लौटते समय उनके हेलीकॉप्टर 'मरीन वन' में तकनीकी खराबी आ गई थी जिसके कारण उसे रास्ते में ही उतारना पड़ा। इस दौरान उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप भी उनके साथ थीं। क्या हुआ था? डोनाल्ड ट्रंप अपनी पत्नी मेलानिया के साथ ब्रिटेन से अमेरिका जाने वाली फ्लाइट पकड़ने के लिए चेकर्स से लंदन के स्टैनस्टेड एयरपोर्ट जा रहे थे। रास्ते में हेलीकॉप्टर में हाइड्रोलिक समस्या आने के कारण उसे ल्यूटन एयरपोर्ट पर आपात स्थिति में उतारना पड़ा। इस घटना के बाद उन्हें दूसरे हेलीकॉप्टर में सवार होकर स्टैनस्टेड एयरपोर्ट भेजा गया जहां से उन्होंने अमेरिका के लिए उड़ान भरी। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति और उनकी पत्नी पूरी तरह से सुरक्षित हैं। बाद में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने अपनी यात्रा को सुरक्षित बताया और कहा कि वह घर जाने को उत्सुक हैं। कैसा होता है 'मरीन वन' हेलीकॉप्टर? ट्रंप ने ब्रिटेन की यात्रा के लिए मरीन-वन और मरीन-टू हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया था जिन्हें 'व्हाइट टॉप' भी कहते हैं। ये हेलीकॉप्टर बेहद सुरक्षित होते हैं जिनमें मिसाइल डिफेंस सिस्टम, रडार और जैमिंग सिस्टम लगे होते हैं। इन्हें परमाणु बम विस्फोट के बाद भी चुंबकीय प्रभावों को झेलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 'मरीन वन' अक्सर अपने जैसे दिखने वाले 2-3 अन्य हेलीकॉप्टरों के समूह में उड़ता है जिन्हें टिल्ट-रोटर विमान 'ग्रीन टॉप्स' कहा जाता है ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो। ट्रंप का ब्रिटेन दौरा ट्रंप का ब्रिटेन दौरा दो दिन का था जहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण मुलाकातें कीं। उन्होंने विंडसर कैसल में राजा और रानी से मुलाकात की और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ कूटनीतिक वार्ता की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ब्रिटेन की यात्रा को बेहद सफल और शानदार बताया है।  

रूस ने दिखाई सख़्ती, बड़ी ताकतों पर हुक्म चलाने वालों को दी नसीहत

मॉस्को  रूस ने बेलारूस के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास 'जापद' में भारत की भागीदारी को लेकर यूरोप की चिंताओं को सिरे से खारिज कर दिया है। रूस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत एक शक्तिशाली देश है और पश्चिमी देशों को इस तरह की हास्यास्पद बातें नहीं करनी चाहिए। रूसी विदेश मंत्रालय की ये प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब यूरोपीय संघ ने भारत की संयुक्त सैन्य अभ्यास में भागीदारी पर चिंता जताई थी। यूरोपीय संघ ने कहा कि भारत की रूस से करीबी उसके साथ घनिष्ठ संबंधों को खतरे में डाल सकती है। इस पर रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने गुरुवार को कहा कि पश्चिमी देशों को कब यह समझ आएगा कि विशेषकर भारत जैसी शक्तियों पर हुक्म चलाने की कोशिश करना निरर्थकता और हास्यास्पद है। उन्होंने यूरोप की चिंताओं को "निराधार" और "बेहूदा दबाव" करार देते हुए कहा कि यह रूस और भारत के बीच मजबूत संबंधों को कमजोर नहीं करेगा। पांच दिनों तक चले इस सैन्य अभ्यास 'जापद 2025' का समापन मंगलवार को हुआ, जिसमें रूस ने अपनी सामरिक परमाणु हथियारों की लॉन्चिंग का अभ्यास किया। इस अभ्यास में रूस की 'ओरेश्निक' हाइपरसोनिक मिसाइल की भी झलक देखने को मिली, जिसका परीक्षण पिछले साल यूक्रेन युद्ध के दौरान किया गया था। रूसी विदेश मंत्रालय ने यह भी उम्मीद जताई कि अभ्यास में शामिल हुए अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने स्वयं देखा होगा कि रूस नाटो के लिए कोई खतरा नहीं है। ये रहा रूस का पूरा बयान रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, "जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि मैं किसी तीसरे देशों के आपसी संबंधों पर टिप्पणी करना पसंद नहीं करती। लेकिन रूस और भारत के संबंधों पर टिप्पणी करने के लिए मैं तैयार हूं। हम आपस में मजबूत और समय की कसौटी पर खरे उतरे दोस्ताना रिश्तों से बंधे हुए हैं। मैं जोर देकर कहती हूं कि हमारे संबंध पूरी तरह से आत्मनिर्भर हैं। असीम संभावनाओं से भरा हुआ स्वरूप दोनों देशों की जनता के हित में लगातार साकार हो रहा है- भले ही भू-राजनीतिक माहौल उतार-चढ़ाव का क्यों न हों।" उन्होंने आगे कहा, "रूस-भारत के बीच विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी की ठोस नींव है जो आपसी सम्मान, समानता, एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखना और सबसे महत्वपूर्ण, अंतरराष्ट्रीय मंच पर एकजुट करने वाले एजेंडे को आगे बढ़ाती है। खासकर सैन्य और सैन्य-तकनीकी सहयोग के संदर्भ में, जिसकी लम्बी परंपराएं रही हैं।" जखारोवा ने कहा, "हमारी साझेदारी कभी भी तीसरे देशों के खिलाफ नहीं रही है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य है- राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा करना, अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और शांति को सुदृढ़ करना। हम रूसी-बेलारूसी सैन्य अभ्यासों में नई दिल्ली की भागीदारी का स्वागत करते हैं। इस संदर्भ में किसी बाहरी की ओर से व्यक्त की गई कोई भी तथाकथित चिंता निराधार और जानबूझकर गढ़ी हुई है। असल में यह हमारे भारतीय मित्रों पर खुलेआम दबाव बनाने का एक और तरीका है। वे उन्हें रूस के साथ सहयोग करने, संवाद करने और साझेदारी करने से रोकने की कोशिश करते हैं। आखिर पश्चिम कब समझेगा कि संप्रभु विदेश नीति अपनाने वाले देशों पर हुक्म चलाने की ऐसी कोशिशें कितनी व्यर्थ और सच कहें तो हास्यास्पद हैं- खासकर जब बात भारत जैसी शक्ति की हो।" यह सैन्य अभ्यास रूस, बेलारूस और अन्य मित्र देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने का हिस्सा था। इसमें शामिल देशों ने न केवल तकनीकी और सामरिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। रूस और भारत के बीच रक्षा सहयोग हाल के वर्षों में और गहरा हुआ है, जिसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, हथियारों का विकास और रणनीतिक वार्ता शामिल हैं। जापद अभ्यास में भारत की भागीदारी को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। कुमाऊं रेजिमेंट की टुकड़ी ने लिया भाग बता दें कि नाटो देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच रूस और बेलारूस ने 'जापद-2025' नामक एक विशाल संयुक्त सैन्य अभ्यास का आयोजन किया, जिसमें कई देशों ने भाग लिया। लेकिन भारतीय सेना की भागीदारी ने अंतरराष्ट्रीय हलकों में खासा ध्यान खींचा। रूसी सरकारी एजेंसी TASS के अनुसार, भारत ने इस अभ्यास में अपनी 65 सदस्यीय सैन्य टुकड़ी भेजी। भारत के रक्षा मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि की है। भारत की ओर से बेहद सम्मानित कुमाऊं रेजिमेंट की टुकड़ी इस अभ्यास का नेतृत्व कर रही थी। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस भागीदारी का उद्देश्य रूस के साथ "सहयोग और आपसी विश्वास की भावना को मजबूत करना" है। भारत के अलावा ईरान, बांग्लादेश, बुर्किना फासो, कांगो (DRC) और माली की टुकड़ियों ने भी भाग लिया। यूरोप की चिंताओं के बावजूद, रूस ने स्पष्ट किया कि वह अपने मित्र देशों के साथ सैन्य और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगा। रूसी विदेश मंत्रालय ने पश्चिमी देशों से अपील की कि वे वैश्विक शक्ति संतुलन को समझें और अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करें।  

भगवंत मान ने जताई प्रतिक्रिया, UP और बिहार के लोगों के खिलाफ फैसलों पर बोले ये शब्द

चंडीगढ़ पंजाब के कई जिलों से ऐसी खबरें आई हैं कि गांवों के सरपंचों समेत कई लोगों की ओर से यूपी और बिहार के मजदूरों को बाहर निकालने के ऐलान किए गए हैं। होशियारपुर जिले के तो 20 सरपंचों का कहना है कि वे पंजाब से बाहर के लोगों को निवास प्रमाण पत्र जारी नहीं करेंगे। जिले में एक पांच साल के बच्चे के साथ कुकर्म और फिर उसकी दर्दनाक हत्या के बाद ऐसी स्थिति पैदा हुई है। वहीं इससे पहले भी गुरदासपुर समेत कई जिलों में इस तरह के मामले आए हैं। अब इस तरह के ऐलानों के बारे में भगवंत मान से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि किसी को भी देश के किसी भी हिस्से में जाकर काम करने और रहने का हक है। यूपी और बिहार के मजदूरों को पंजाब के गांवों से निकालने के ऐलान पर भगवंत मान ने कहा कि पंजाबी सबसे ज्यादा विदेशों में रहते हैं। मान ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि हमारे यहां के लोग कनाडा जैसे देशों में गए हैं और वहां मंत्री तक बने हैं। दुनिया भर में विरोध चल रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन तक में चल रहा है कि ये लोग क्यों आ गए हैं और उन्हें बाहर निकालो। यदि कोई कानून तोड़े तो उसे सख्त सजा मिले। कानून तोड़ने वाला किसी समुदाय का नहीं होता है, उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। फास्ट ट्रैक पर सुनवाई होनी चाहिए। मान ने कहा कि छत्तीसगढ़, कोलकाता में पंजाबियों का ही ट्रांसपोर्ट है। मुंबई तो पंजाबियों का बहुत कारोबार है। उन्होंने कहा कि लोगों के दिलों में गुस्सा है तो ऐसा हो सकता है। भगवंत मान ने कहा कि हम सुरक्षा देने को तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमला हुआ तो हमने कश्मीरियों को सुरक्षा दी। लेकिन यदि कोई प्रदेश का कानून तोड़ेगा तो सख्त सजा मिलेगी और हमारी उसमें कोई हमदर्दी नहीं है। अपने एक विधायक पर रेप का केस होने और फिर पुलिस के साथ एनकाउंटर होने के मामले में भगवंत मान ने कहा कि हमने तो सारे अच्छे लोग चुने थे, लेकिन कुछ खराब निकल आए तो क्या करें। भगवंत मान ने कहा कि भाजपा के लोगों से यह सवाल पूछिए। वहां तो जिन लोगों के खिलाफ केस होते हैं, यदि वही उनकी पार्टी में आ जाते हैं तो वह सही हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास तो पंजाब में नेता ही नहीं हैं। भाजपा का यहां पर कांग्रेस विंग है। रवनीत बिट्टू, अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ जैसे नेता मुख्य हैं, जो कभी कांग्रेस में हुआ करते थे। इसी तरह मनप्रीत बादल हैं, जो कई दलों से पाला बदलते हुए भाजपा में आ गए हैं।

कर्नाटक धर्मस्थल मामला: जांच में नया मोड़, सात खोपड़ियां बरामद

कर्नाटक कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बंगलगुद्दा क्षेत्र में धर्मस्थल सामूहिक दफन मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को गुरुवार को दो और खोपड़ियां मिली हैं। इसके साथ ही अब तक सात मानव खोपड़ियां बरामद हो चुकी हैं। ये खोपड़ियां मुख्य रूप से मध्यम आयु के पुरुषों की बताई जा रही हैं और ये अवशेष लगभग एक वर्ष पुराने हो सकते हैं। फोरेंसिक जांच से इसकी और पुष्टि होने की उम्मीद है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया है कि ये अवशेष संभवतः आत्महत्या के मामलों से जुड़े हो सकते हैं। विशेष जांच दल धर्मस्थल में कथित तौर पर सैकड़ों लोगों की हत्या और अवैध दफनाने के मामलों की जांच कर रहा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईटी ने बुधवार को पांच खोपड़ियां बरामद की थीं, जबकि गुरुवार को दो और मिलीं हैं। एंटी-नक्सल फोर्स के कर्मियों के साथ पुलिस और वन अधिकारियों की संयुक्त टीम ने लगभग 12 एकड़ में फैले जंगली क्षेत्र को खंगाला है। खोज अभियान के दौरान अन्य मानव अवशेषों के अलावा एक लाठी भी मिली। एसआईटी सूत्रों ने बताया कि ये खोजें बंगलगुद्दा रिजर्व फॉरेस्ट के घने इलाके में की गईं, जहां पहले भी संदिग्ध गतिविधियों की शिकायतें मिली थीं। सनसनीखेज आरोपों से शुरू हुई जांच धर्मस्थल सामूहिक दफन मामला जुलाई 2025 में तब सुर्खियों में आया जब एक पूर्व सफाई कर्मचारी ने दावा किया कि 1995 से 2014 के बीच उसे मंदिर शहर के आसपास 100 से अधिक शव दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। शिकायतकर्ता की पहचान सी.एन. चिन्नय्या के रूप में हुई। उसने आरोप लगाया कि ये शव मुख्य रूप से महिलाओं और नाबालिगों के थे, जिनमें यौन हिंसा के निशान थे। चिन्नय्या ने अदालत में कुछ कंकाल अवशेष भी पेश किए थे। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने 19 जुलाई को डीजीपी प्रणब मोहंती के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया। जांच के दौरान 17 स्थलों पर खुदाई हुई, लेकिन अधिकांश जगहों पर कोई प्रमुख अवशेष नहीं मिले। अगस्त में चिन्नय्या को झूठी गवाही के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। एक अन्य ट्विस्ट में, एक महिला ने अपनी बेटी के लापता होने का दावा वापस ले लिया, जो कथित तौर पर काल्पनिक था। चिन्नय्या की अदालती पेशी और हाईकोर्ट का निर्देश गुरुवार को चिन्नय्या को बेलथंगड़ी अदालत में पेश किया गया, जहां उसका बयान दर्ज किया गया। वह अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर को फिर अदालत में पेश होगा। इस बीच, कर्नाटक हाईकोर्ट ने गुरुवार को याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे धर्मस्थल में कथित शव दफन के बारे में कोई स्वतंत्र जानकारी रिकॉर्ड पर रखें। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सुनवाई को 26 सितंबर तक स्थगित कर दिया। एसआईटी के एक अधिकारी ने बताया, "ये खोपड़ियां हाल की लग रही हैं और पुरुषों की हैं। फोरेंसिक परीक्षण से मौत का कारण और समय स्पष्ट होगा। हम आत्महत्या या अन्य प्राकृतिक कारणों की संभावना तलाश रहे हैं।" राजनीतिक हलकों में भी यह मामला गरमाया हुआ है। भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर मंदिर शहर की छवि खराब करने का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस इसे साजिश बता रही है।  

सेवा सम्मान 2025: केसरी फाउंडेशन ने समाजसेवा की विभूतियों को किया सम्मानित

इंदौर इंदौर प्रेस क्लब परिसर में केसरी फाउंडेशन का पहला स्थापना दिवस और केसरी सेवा सम्मान 2025 का भव्य आयोजन सम्पन्न हुआ। यह आयोजन केवल सम्मान समारोह नहीं, बल्कि समाज सेवा, समर्पण और प्रेरणा का उत्सव बन गया। कार्यक्रम में शरीर से दिव्यांग किंतु हौसलों से बुलंद मोटिवेशनल स्पीकर पूनम श्रोती (भोपाल) ने अपने उद्बोधन से सबका दिल जीत लिया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर संध्या अग्रवाल एवं चित्रा वाजपेई को सम्मानित किया गया। वरिष्ठतम पत्रकार उमेश रेखे को पत्रकारिता में छह दशक से अधिक योगदान हेतु लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया गया। कुष्ठ रोगियों एवं बुजुर्गों की सेवा में समर्पित सुधीर भाई गोयल, नाममात्र शुल्क पर गंभीर बीमारियों का आयुर्वेद उपचार करने वाले डॉ. शिवदयाल वर्डे को सम्मानित किया गया। इंदौर की स्वच्छता अभियान की मिसाल बनीं सफाई कर्मी इंदिरा बाई श्यामलाल और महिला सुरक्षा में उल्लेखनीय कार्य करने वाली पुलिस अधिकारी गौरी तिवारी को भी सेवा सम्मान मिला। इसके अलावा समाजसेवा और जनहित कार्यों में योगदान हेतु जगप्रीत सिंह टुटेजा, बबीता हार्डिया, पायल गिदवानी, रेनू जय सिंघानी, विवेक गावडे, प्रीति बवेजा, हेमंत गट्टानी, हिना नीमा सहित अनेक विभूतियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम पूज्य श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर नितिन दास जी महाराज के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। विशेष अतिथि के रूप में विधायक गोलू शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार एवं मध्यप्रदेश प्रेस क्लब अध्यक्ष डॉ. नवीन आनंद जोशी तथा केंद्रीय गुरुसिंघ सभा मप्र-छत्तीसगढ़ अध्यक्ष हरपाल सिंह मोनू भाटिया उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता में केसरी फाउंडेशन की टीम – संजीव मल्होत्रा, लतिका नजान, संजय मिश्रा, मनजीत चावला, मनोज नजान, तेजपाल सिंह चावला, रोहन मल्होत्रा, शालिनी जोशी, मंजूषा नाचन, उपेंद्र जी, प्रीति अजमानी और हरलीन कौर चावला का महत्वपूर्ण योगदान रहा। फाउंडेशन ने संकल्प लिया है कि समाज सेवा और प्रतिभाओं को मंच देने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा।

नगर वनों का उचित विकास और रखरखाव हो: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

वनों में स्थित आस्था स्थलों को किया जाए विकसित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव नगर वनों का उचित विकास और रखरखाव हो: मुख्यमंत्री डॉ. यादव नदियों के किनारों पर पौधरोपण को करें प्रोत्साहित: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा की भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के वनांचल में ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जिन्हें स्थानीय समुदायों द्वारा सांस्कृतिक या धार्मिक मान्यताओं के आधार पर पारंपरिक रूप से संरक्षित किया जाता है। आस्था के ये क्षेत्र न केवल आध्यात्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि जैवविविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी संतुलन, सामुदायिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ऐसे स्थलों को देवलोक वनों के रूप में विकसित करने की जरूरत बताई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन क्षेत्र में प्रदेश की प्रमुख नदियों के दोनों ओर 5 किलोमीटर क्षेत्र में पौधारोपण गतिविधियों को बढ़ाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों के किनारों के अतिक्रमण हटाने में स्थानीय समुदाय का सहयोग लिया जाए। साथ ही स्थानीय समुदाय के आय संवर्धन के लिए पौधारोपण में औषधीय पौधों सहित उपयोगी पौधों के रोपण को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर उज्जैन देवास क्षेत्र को मेट्रोपोलिटन एरिया के रूप में विकसित किया जा रहा है, क्षिप्रा नदी के संरक्षण की योजना तदनुसार बनाई जाए। मुख्यमंत्री ने नगर वनों के उचित विकास और रखरखाव के संबंध में भी अधिकारियों को निर्देशित किया। मगरमच्छ व अन्य जलीय जीव, जल संरचनाओं के स्वस्थ इकोसिस्टम के लिए जरूरी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों और जल संरचनाओं के स्वस्थ ईकोसिस्टम को बनाए रखने में मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन नदियों और जल संरचना में यह जीव अधिक संख्या में हैं, वहां से उन्हें शिफ्ट कर अन्य नदियों और जल संरचना में छोड़ा जाए। इसकी शुरुआत नर्मदा और तवा नदी से की जाए। बैठक में वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने, लघु वन उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि, तेंदूपत्ता बोनस वितरण आदि विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में अपर मुख्य सचिव वन  अशोक वर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन बल प्रमुख  व्ही.एन. अम्बाडे सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

राहुल की यात्रा में दिखी एकता, पर तेजस्वी की चुप्पी के पीछे क्या है गठबंधन की गांठ?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा दोनों गठबंधनों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. एनडीए में चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अधिकाधिक सीटें हासिल करने के लिए लंबे समय से बवेला मचाए हुए हैं. मांझी अब 20 सीटों के लिए अड़े हुए हैं. चिराग पासवान की पार्टी लोजपा-आर (LJP-R) को न सिर्फ सीटें चाहिए, बल्कि अब सीएम पद की रेस में भी उन्हें शामिल कर दिया है. चिराग के बहनोई सांसद अरुण पासवान की नजर में चिराग सीएम पद के लिए फिट कैंडिडेट हैं. मांझी ने अधिक सीटें मांगने के पीछे के कारण भी उजागर कर दिए हैं. उनका कहना है कि पार्टी को सदन में मान्यता के लिए कम से कम 8सीटों पर जीतना जरूरी है. और, यह तभी संभव होगा, जब उनकी पार्टी को 20 या इससे अदिक सीटें मिलें. एनडीए का तो रिकार्ड ही रहा है कि टिकट बंटवारे से पहले खूब चिल्ल-पों मचती है, लेकिन जिसे जितनी सीटें मिलती हैं, वे उससे ही संतुष्ट हो जाते हैं. सबसे मुश्किल हालात 8 विपक्षी दलों के महागठबंधन में पैदा हो गए हैं. कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीट बंटवारे की शर्तों को लेकर घमासान मचा हुआ है. कांग्रेस ने कसी RJD की नकेल महागठबंधन के दो सबसे बड़े घटक दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर तलवारें तन गई हैं. अव्वल तो कांग्रेस तेजस्वी को चुनाव से पहले सीएम फेस घोषित करने को तैयार नहीं, जबकि तेजस्वी खुद को सीएम फेस बताते रहे हैं. बिहार अधिकार पर निकले तेजस्वी कांग्रेस की चुप्पी के बावजूद अपने को भावी सीएम के रूप में पेश कर रहे हैं. पहले भी वे कई बार यह बात कह चुके हैं. राहुल के साथ वोटर अधिकार यात्रा के दौरान उन्होंने यहां तक कह दिया कि राहुल को पीएम और उन्हें सीएम बनाने के लिए वोट कीजिए. जहां तक सीटों का सवाल है तो कांग्रेस 2020 की तरह मनपसंद 70 सीटें तो चाहती ही है, साथ ही अब उप मुख्यमंत्री का पद भी मांगने लगी है. दोनों दलों के बीच तनातनी का आलम यह है कि सीट बंटवारे के मुद्दे पर 15 सितंबर को होने वाली महागठबंधन की बैठक टालनी पड़ गई. अब तेजस्वी यादव ने भी सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. खींचतान से महागठबंधन में दिख रही दरार अगर टूट की बुनियाद बन जाए तो आश्चर्य नहीं. बिहार की वह सीट, जिसे लेकर RJD-कांग्रेस में खींच गई तलवार बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन के अंदर सीट शेयरिंग का मसला गरमा गया है. खासकर कुटुंबा (SC) विधानसभा सीट को लेकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच खींचतान तेज हो गई है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक आरजेडी ने इस सीट से पूर्व मंत्री सुरेश पासवान का नाम आगे कर दिया है. इससे कांग्रेस नेताओं में नाराजगी है. कांग्रेस का आरोप है कि आरजेडी जानबूझकर दबाव की राजनीति कर रही है और कुटुंबा में उनकी मजबूत स्थिति को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. दरअसल, कुटुंबा सीट पर कांग्रेस का लगातार दबदबा रहा है. मौजूदा विधायक राजेश कुमार और उनके पिता सात बार से इस सीट पर कब्जा बनाए हुए हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में भी राजेश कुमार ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी. उन्हें 50,822 वोट मिले थे, जबकि रनर-अप हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के उम्मीदवार शर्वन भुइंया को 34,169 वोट ही मिले. कांग्रेस ने तब 16,653 वोटों के अंतर से यह सीट अपने नाम की थी. साल 2020 के नतीजे कैंडिडेट    कुल वोट     वोट शेयर राजेश कुमार    50,822    36.61% शर्वन भुइंया    34,169    24.61% कहां फंसा है मामला? यही वजह है कि कांग्रेस मानती है कि इस सीट पर उनकी स्थिति बेहद मजबूत है और आरजेडी का नया चेहरा थोपना केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इस बार आरजेडी की मोहताज नहीं है और बदली हुई परिस्थितियों में बेहतर तरीके से चुनाव लड़ रही है. कांग्रेस नेताओं का यह भी आरोप है कि राजेश राम को डिप्टी सीएम का चेहरा सामने न लाने के लिए भी अंदरखाने राजनीति हो रही है. यानी, महागठबंधन के भीतर सत्ता संतुलन को लेकर खींचतान खुलकर सामने आने लगी है. 76 सीटों पर दावेदारी इसी बीच, खबर है कि कांग्रेस ने इस बार बिहार की 76 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है. इनमें से 38 सीटों पर जल्द ही उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस इन सीटों पर आरजेडी के ग्रीन सिग्नल का इंतजार नहीं करेगी. यानी, पार्टी अब अपनी रणनीति खुद बनाने के मूड में है. आज दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक भी होने वाली है, जिसमें बिहार कांग्रेस के कई नेता शामिल होंगे. माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद कांग्रेस अपने रुख को और स्पष्ट करेगी. अब देखना यह है कि यह खींचतान सीट शेयरिंग फॉर्मूले को कितना प्रभावित करती है और क्या महागठबंधन एकजुट रहकर मैदान में उतर पाता है. कांग्रेस की आक्रामक दावेदारी सीटों की संख्या के लिए आरजेडी के सामने कांग्रेस ने 2020 को आधार बनाने की शर्त रखी है. तब कांग्रेस को महागठबंधन में 70 सीटें मिली थीं. कांग्रेस का कहना है कि उसे जो सीटें दी गईं, उसमें आधी से अधिक कमजोर सीटें थीं. इसलिए उसने टिकट बंटवारे में अच्छी-बुरी सीटों में संतुलन बनाने की दूसरी शर्त रखी है. कांग्रेस केवल 19 सीटें जीत पाई थी. उसके खराब स्ट्राइक रेट को महागठबंधन की हार का एक मुख्य कारण माना गया था. कांग्रेस का कहना है कि उसे आधी से अधिक वैसी कमजोर सीटें मिली थीं, जिसकी वजह से उसका स्ट्राइक रेट खराब रहा. कांग्रेस ने अपने लिए उप मुख्यमंत्री पद की तीसरी शर्त रखी है. महागठबंधन में शामिल वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी भी डिप्टी सीएम पद के लिए पहले से ही हाय-तौबा मचाए हुए हैं. सहनी तो यहां तक कहते हैं कि अगर तेजस्वी सीएम बनेंगे तो उनका डिप्टी सीएम बनना पक्का है. कांग्रेस की शर्तों से यह साफ है कि काग्रेस अब बिहार में अपने को आरजेडी का पिछलग्गू बनाए रखने से बचना चाहती हैं. राहुल की वोटर अधिकार … Read more