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राहुल गांधी के Gen-Z बयान पर विश्वास सारंग ने कसा तगड़ा जवाब

भोपाल   मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि जेन ज़ी (युवा पीढ़ी) ने देश को बचाने का काम किया है और यही कारण है कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को बार-बार देश का प्रधानमंत्री चुना. सारंग ने राहुल गांधी पर नकारात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी झूठ और भ्रामक बातों के सहारे लोगों को भड़काने की कोशिश करते हैं. उनकी राजनीति देश और उनके लिए हितकारी नहीं है. सारंग ने राहुल के रवैये को बचकाना बताया और कहा कि वह गंभीर मुद्दों को समझने में असमर्थ हैं. सारंग ने राहुल गांधी के उस बयान पर भी निशाना साधा जिसमें उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र बचाने की जिम्मेदारी उनकी नहीं है, वह सिर्फ दबाव बनाएंगे. सारंग ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया और कहा कि राहुल गांधी की नकारात्मक सोच के कारण ही जनता ने उन्हें बार-बार नकारा है. उन्होंने वोट चोरी के मुद्दे पर भी राहुल को आड़े हाथों लिया. सारंग ने कहा कि चुनाव आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अगर कोई शिकायत है, तो उसे लिखित शपथपत्र के साथ दर्ज करना होगा. लेकिन राहुल गांधी बिना सबूत के बयानबाजी करते हैं. सारंग ने जोर देकर कहा कि देश का हर वर्ग, खासकर जेन ज़ी, नरेंद्र मोदी के साथ है. युवाओं में मोदी के प्रति विशेष आकर्षण है और वह उनके लिए हीरो हैं. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार युवाओं के लिए कई कदम उठा रही है, जिससे देश 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में बढ़ रहा है. यह सपना जेन ज़ी ही साकार करेगी. सारंग ने कहा कि नकारात्मक राजनीति का कोई भविष्य नहीं है. देश का लोकतंत्र मजबूत है और जनता ने बार-बार मोदी को चुनकर यह साबित किया है. राहुल गांधी की गैर-जिम्मेदाराना बातें और भ्रामक बयानबाजी उनकी हार का कारण बनी हैं. जनता ने उनकी नकारात्मक राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दिया है.

खाड़ी देश का साफ संदेश: इज़रायल से संबंध नहीं तोड़ेंगे, मुस्लिम जगत में बढ़ी खींचतान

अबू धाबी  कतर पर इजरायली हमले और फिलिस्तीन के मुद्दे पर एकजुट हुए अरब जगत में अब विरोध के सुर उठने लगे हैं। खाड़ी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अन्य मुस्लिम देशों के अलग स्टैंड लेते हुए कहा है कि अगर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार वेस्ट बैंक के कुछ हिस्से या पूरे हिस्से को अपने देश मिला लेती है, तब भी संयुक्त अरब अमीरात इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंधों को नहीं तोड़ेगा। हालांकि, UAE ने कहा कि वह राजनयिक संबंधों को कम करने पर विचार कर सकता है लेकिन दोनों देशों के बीच संबंध पूरी तरह से नहीं तोड़ सकता। बड़ी बात यह है कि रॉयटर्स के सूत्रों ने यह खबर ऐसे समय में दी है, जब UAE विदेश मंत्रालय की अधिकारी लाना नुसेबेह ने 3 सितंबर को द टाइम्स ऑफ इजरायल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वेस्ट बैंक का किसी भी तरह का विलय एक "रेड लाइन" होगा और वह अब्राहम समझौते को खतरे में डालेगा। साथ ही साथ क्षेत्रीय एकीकरण की कोशिशों को खत्म कर देगा लेकिन गुरुवार की शाम अनाम खाड़ी अधिकारियों के हवाले से इस रिपोर्ट का खंडन कर दिया गया और यह बात सामने आई के UAE इजरायल से नाता नहीं तोड़ेगा। वेस्ट बैंक इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। फिलिस्तीनी इसे गाजा पट्टी के साथ अपने परिकल्पित राष्ट्र का अहम हिस्सा मानते हैं। दोहा में जुटे थे UAE समेत 50 मुस्लिम मुल्क यह डेवलपमेंट ऐसे वक्त में हुआ है, जब कुछ दिनों पहले ही कतर की राजधानी दोहा में करीब 50 मुस्लिम देशों ने बैठक की और इजरायल के खिलाफ एकजुटता दिखाई है। इस बैठक में UAE के पड़ोसी देशों सऊदी, ईरान, इराक, समेत जॉर्डन, तुर्की, पाकिस्तान, मलेशिया, सीरिया भी शामिल हुआ था। UAE भी उस बैठक का हिस्सा था। इसमें सभी अरब देशों ने इजरायल को गाजा में नरसंहार के लिए जिम्मेदार ठहराया और दोहा में उजरायली हमले की निंदा की। 2020 से UAE और इजरायल में संबंध बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात उन कुछ अरब देशों में से एक है जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध हैं और इन संबंधों को कमतर करना अब्राहम समझौते के लिए एक बड़ा झटका होगा। UAE ने 2020 में इजरायल के साथ संबंध स्थापित किए थे। अगर संबंधों में कटौती होती है तो यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू की विदेश नीति के लिए भी एक उपलब्धि हो सकती है। इजरायल सरकार ने हाल ही में ऐसे कदम उठाए हैं जो वेस्ट बैंक के विलय का पूर्वाभास दे सकते हैं, जिसे 1967 में छह दिवसीय युद्ध में जॉर्डन से पूर्वी यरुशलम के साथ छीन लिया गया था। संयुक्त राष्ट्र और अधिकांश देश इस तरह के कदम का विरोध करते रहे हैं। दूसरी तरफ, नेतन्याहू अगले साल होने वाले चुनाव से पहले इस विलय को एक चुनाव जिताऊ मुद्दे के रूप में देख रहे हैं।  

स्ट्राइक रेट के नाम पर सीटों की डिमांड, लोजपा ने चिराग को 2:17 वाला उदाहरण दिखाया

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए में सीट शेयरिंग पर अभी सहमति नहीं बनी है।इस बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने लोकसभा के स्ट्राइक रेट के आधार पर विधानसभा चुनाव में सीटों की मांग कर दी है। एलजेपी-आर ने अपनी सहयोगी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) को 2019 में 2 सांसदों के बावजूद एनडीए में 17 सीटों की याद दिलाकर सियासी पारे को गर्मा दिया है। एलजेपी-आर के बिहार प्रभारी अरुण भारती ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज बिहार विधानसभा में उनकी पार्टी का एक भी विधायक नहीं है। चर्चा हो रही है कि आने वाले चुनाव में लोजपा को सम्मानजनक सीटें नहीं मिलेंगी। उन्होंने दावा किया कि यह धारणा अधूरी है। असलियत यह है कि कुछ लोग LJP-R को केवल सीमित सीटों तक बांधकर देखना चाहते हैं। मानो उसकी असली ताकत और जनता में पकड़ को नजर अंदाज किया जा सकता हो। चिराग पासवान के जीजा एवं जमुई से लोजपा (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने आगे कहा,"बिहार की राजनीति और NDA का इतिहास बार-बार इसके बिल्कुल उलट गवाही देता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब सिर्फ 2 सांसद की पार्टी (जेडीयू) को लोकसभा चुनाव में 17 सीटें मिल सकती हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जब केवल 1 सांसद वाली पार्टी को 5 सीटें दी जा सकती हैं और वह पांचों सीटों पर जीत दर्ज करके गठबंधन के भरोसे को और मजबूत कर सकती है, तब यह तर्क ही बेमानी हो जाता है कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को विधानसभा चुनाव में सीमित हिस्सेदारी दी जानी चाहिए।" अरुण भारती ने साफ कहा कि लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की जमीनी पकड़, संगठन की मजबूती इस बात को साबित करती है कि पार्टी को सीमित सीटों तक बांधकर देखना गलत है। उन्होंने दावा किया किआने वाले विधानसभा चुनाव में LJP-R निर्णायक भूमिका निभाएगी और गठबंधन के भीतर उसे उसका योग्य और सम्मानजनक स्थान अवश्य मिलेगा। दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने एनडीए से अलग रहकर 38 सीटों पर चुनाव लड़ा था और दो पर ही जीत मिल पाई थी। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश एनडीए में वापस आ गए थे। उस चुनाव में दो सांसदों वाली जेडीयू को एनडीए में 17 सीटें लड़ने के लिए मिली थीं। उस समय लोजपा भी गठबंधन में थी और 7 में से 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद लोजपा में टूट हो गई और चिराग पासवान एवं चाचा पशुपति पारस के दो अलग-अलग गुट बन गए। पारस गुट एनडीए में बना रहा और चिराग 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले अलग होकर अकेले बिहार के चुनावी मैदान में उतरे थे। हालांकि, वे कुछ खास कमाल नहीं कर पाए थे। 2024 लोकसभा चुनाव में चिराग का 100 फीसदी स्ट्राइक रेट 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले चिराग की एनडीए में वापसी हो गई और चाचा पशुपति पारस आउट हो गए। चिराग की पार्टी को एनडीए में रहकर 5 सीटें लड़ने कों मिली थीं, जिसमें सभी पर एलजेपी-आर की जीत हुई थी। अब पार्टी उसी 100 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के हिसाब से बिहार विधानसभा चुनाव में जिताऊ सीटें मांग रही है।  

MBBS डॉक्टर को नहीं आता इंजेक्शन लगाना, गोरखपुर में 15 वर्षीय बच्ची बनी शिकार

गोरखपुर जिले के गगहा थाना क्षेत्र के महुराई सिंघला गांव में एक 15 वर्षीय बच्ची रंजना यादव को अस्पताल में लापरवाही का ऐसा खामियाजा भुगतना पड़ा, जो उसकी जान पर बन आई। परिजनों के अनुसार, निजी अस्पताल के एक कर्मचारी ने गलत तरीके से इंजेक्शन लगाया, जिससे इंजेक्शन की सुई (निडिल) टूटकर बच्ची की नस में फंस गई। घटना के बाद न केवल अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे, बल्कि पुलिस पर भी आरोप लगे कि उन्होंने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। फिलहाल बच्ची का ऑपरेशन कर निडिल निकाल दी गई है और अब वह खतरे से बाहर है। सीएमओ गोरखपुर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। क्या हुआ था? रंजना की तबीयत खराब होने पर परिवार वाले उसे लेकर हाटा स्थित एक अस्पताल में गए। वहां एक कर्मचारी ने बाएं हाथ में इंजेक्शन लगाया, लेकिन तुरंत ही रंजना को असहनीय दर्द शुरू हो गया। थोड़ी देर बाद दूसरे हाथ में भी इंजेक्शन लगाया गया, मगर आराम नहीं मिला। रातभर दर्द से कराहती बच्ची को परिजन दोबारा अस्पताल ले गए, लेकिन वहां से सिर्फ दवा देकर वापस भेज दिया गया। दर्द बढ़ने पर एक्स-रे करवाया गया, जिसमें खुलासा हुआ कि निडिल टूटकर नस में फंसी हुई है। अस्पताल ने किया इंतजार, फिर भगाया एक्स-रे रिपोर्ट लेकर जब परिजन दोबारा उसी अस्पताल पहुंचे, तो वहां उन्हें पूरे दिन अस्पताल में बैठाए रखा गया और आखिर में बदसलूकी कर भगा दिया गया। इससे आहत परिवार ने गगहा थाने में शिकायत की, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई। डीएम से की शिकायत, सीएमओ ने दिए जांच के आदेश न्याय न मिलने पर पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी कार्यालय में गुहार लगाई, जिसके बाद DM गोरखपुर ने सीएमओ को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। बच्ची को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने 2 दिन इलाज के बाद सफल ऑपरेशन कर नस में फंसी निडिल निकाल दी। परिजनों की मांग: हो सख्त कार्रवाई रंजना की मां सीमा यादव का कहना है कि अगर समय पर सही इलाज मिलता, तो बच्ची को इतनी पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती। उन्होंने मांग की कि ग़ैरजिम्मेदार अस्पताल कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी और मरीज के साथ ऐसी लापरवाही न हो।  

मंदोदरी के किरदार में दिखेंगी पूनम पांडेय, लव-कुश रामलीला में रावण की भूमिका पर चर्चा

नई दिल्ली एक्ट्रेस पूनम पांडेय शोबिज में काफी वक्त से नहीं दिखी हैं. वो पैप्स के कैमरों में जरूर स्पॉट होती हैं. मगर किसी शो या मूवी में नजर नहीं आई हैं. पूनम को स्क्रीन पर देखने का इंतजार कर रहे फैंस के लिए गुडन्यूज है. एक्ट्रेस को वो पर्दे पर तो नहीं लेकिन रामलीला में एक्टिंग करते हुए देख पाएंगे. पूनम को रामलीला में मिला अहम रोल पुरानी दिल्ली में होनी वाली लव कुश रामलीला में पूनम पांडे रावण की पत्नी मंदोदरी का रोल प्ले करेंगी. रामलीला में एक्टर आर्य बब्बर रावण का रोल निभाएंगे. रामलीला में मंदोदरी का अहम रोल प्ले करने का मौका मिलने पर पूनम ने खुशी जताई है. उनका एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने रामलीला समिति का आभार जताया है. पूनम ने जताया आभार पोस्ट में लिखा है- लव कुश रामलीला समिति की ओर से मुझे इस पावन अवसर पर आमंत्रित करने के लिए मैं दिल से धन्यवाद करती हूं. ये मेरे लिए खुशी और गर्व की बात है. मुझे इस ऐतिहासिक और भव्य आयोजन का हिस्सा बनने का जो मौका मिला है. रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और पंरपरा का उत्सव है. इसमें सम्मिलित होकर मैं खुद को सौभाग्यशाली मानती हूं. मैं पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस इवेंट का हिस्सा बनने का इंतजार कर रही हूं. आर्य बब्बर बने रावण  दिल्ली में होने वाली लव कुश रामलीला सबसे फेमस रामलीला में गिनी जाती हैं. इसका मंच लाल किले के मैदान में तैयार किया जाता है. आर्य बब्बर ने 2015 में आए टीवी शो 'संकट मोचन महाबली हनुमान' में रावण का रोल प्ले किया था. इस किरदार को रामलीला के मंच पर फिर से निभाने के लिए वो सुपर एक्साइटेड हैं. फैंस पूनम पांडेय और आर्य बब्बर की जोड़ी को लेकर उत्साहित हैं.  वर्कफ्रंट पर पूनम को आखिरी बार स्क्रीन पर वेब सीरीज 'हनीमून सुइट रूम नंबर 911' में देखा गया था. इससे पहले वो रियलिटी शो 'लॉकअप' में दिखी थीं. पूनम में 2013 में मूवी 'नशा' से बॉलीवुड में कदम रखा था. उनका एक्टिंग करियर काफी कोशशों के बावजूद नहीं चल सका. पूनम का अपना यूट्यूब चैनल और ऐप है, जहां वो अपनी बोल्डनेस का तड़का लगाती हैं. एक्ट्रेस अपनी लव लाइफ और तलाक के कारण लाइमलाइट में रहीं. 

नारी सशक्तिकरण गोरक्षपीठ की परंपरा, बतौर सीएम, योगी ने मिशन शक्ति के जरिए इसे दिया विस्तार

शारदीय नवरात्र के पहले दिन शुरू होगा मिशन शक्ति का पांचवा चरण लखनऊ नारी सशक्तिकरण गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ की परंपरा रही है। पीठ के शैक्षिक प्रकल्प, "महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद" से जुड़े महिलाओं के स्कूल, कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और हॉस्टल इसके प्रमाण हैं। इन संस्थाओं में शिक्षा के साथ इनमें पढ़ने वाली लड़कियों को उनके हुनर निखारने की भी ट्रेनिंग दी जाती है। उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद पीठ की परंपरा को अपने पद एवं जवाबदेही के अनुसार योगी ने नियोजित तरीके से मिशनरी भाव से नारी सशक्तिकरण, स्वावलंबन और सुरक्षा पर फोकस किया। मिशन शक्ति शुरू करने का मकसद भी यही था।  पांच साल पूर्व शक्तिपीठ देवीपाटन से शारदीय नवरात्र में शुरुआत कर योगी ने दिया था बड़ा संदेश पांच साल पहले शारदीय नवरात्र में ही बलराम जिले में स्थित शक्तिपीठ देवीपाटन से इसकी (मिशन शक्ति) शुरुआत कर योगी ने अपनी प्रतिबद्धता के बारे में बड़ा संदेश दिया था। तबसे नारी सशक्तिकरण, स्वावलंबन एवं सुरक्षा का ये संकल्प लगातार जारी है। इसी क्रम में नवरात्र के पहले दिन 22 सितंबर 2025 को इसके पांचवे चरण की शुरुआत होने जा रही है। पीठ की प्रतिबद्धता के मुताबिक योगी-1.0 के शुरुआत में ही महिलाओं में सुरक्षा का भाव जगाने के लिए मुख्यमंत्री की पहल पर एंटी रोमियो स्क्वाड का गठन हुआ था। बाद में क्रमशः कई योजनाओं में इसे शामिल किया गया। और, अंततः सबका समन्वय कर मिशन शक्ति के जरिए इसे नियोजित एवं विस्तृत रूप दिया गया। नतीजतन शुरुआत में पिछली सरकारों की अराजकता के कारण सर्वाधिक फोकस महिलाओं की सुरक्षा पर था। पर बाद में इसमें सुरक्षा के साथ, सशक्तिकरण एवं स्वावलंबन भी शामिल हो गया। इन सारी योजनाओं के नतीजे भी जमीन पर दिख रहे हैं। दरअसल मुख्यमंत्री का यह काम अपनी परंपरा, संस्कृति, संस्कार एवं इतिहास का सम्मान है। महिलाओं का सम्मान भारत की परंपरा उल्लेखनीय है कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति जितनी ही प्राचीन है अपने देश में नारियों को सम्मान देने की परंपरा। डबल इंजन (मोदी और योगी) की सरकार इसी परंपरा को लगातार आगे बढ़ा रही है। मिशन शक्ति के अलावा महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों का सशक्तिकरण, निराश्रित महिला पेंशन की पात्रता के लिए उम्र की सीमा खत्म करने के साथ धनराशि में वृद्धि, कन्या सुमंगला योजना, किसान सखी, बैंक सखी जैसी योजनाएं इसका प्रमाण हैं।  गोरक्षपीठ और नारी सशक्तिकरण  मालूम हो कि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के साथ गोरखपुर स्थित गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। उस पीठ के लिए नारी सदैव से शक्ति स्वरूपा और पूजनीय रही है। साल के दोनों नवरात्र के दौरान पीठ में इसका जीवंत स्वरूप भी दिखता है। रोज की खास पूजा के बाद नवरात्र के अंतिम दिन कन्या पूजन से इसका समापन होता है। खुद पीठाधीश्वर के रूप में मुख्यमंत्री कन्यायों का पांव पखारते हैं। उनको भोजन कराते हैं और दक्षिणा देकर विदा करते हैं। यह खुद में नारियों के प्रति सम्मान का एक बहुत बड़ा संदेश है। शिक्षा और स्वावलंबन पर जोर इसके अलावा महिलाओं की शिक्षा और स्वालंबन पर भी पीठ का खासा फोकस रहा है। पीठ  की ओर से संचालित शैक्षिक प्रकल्प महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद कई दशकों से आधी आबादी के शैक्षिक पुनर्जागरण और आर्थिक स्वावलंबन का अलग-अलग तरीकों से पूरे पूर्वांचल में अलख जगा रहा है। शिक्षा परिषद के शिक्षण संस्थाओं में से कई में बालिकाओं के लिए सह शिक्षा (को-एजुकेशन) की व्यवस्था है। आठ ऐसे शिक्षण संस्थान हैं जो विशेष तौर पर बालिकाओं की शिक्षा और उनके स्वावलंबन के लिए ही समर्पित हैं।  महाराणा प्रताप बालिका इंटर कॉलेज, महाराणा प्रताप महिला पीजी कॉलेज, महाराणा प्रताप टेलरिंग कॉलेज, दिग्विजयनाथ बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय, महाराणा प्रताप मीराबाई महिला छात्रावास, दिग्विजयनाथ महिला छात्रावास, गुरु श्रीगोरक्षनाथ स्कूल ऑफ नर्सिंग, योगिराज बाबा गम्भीरनाथ निशुल्क सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र जैसे संस्थानों से प्रतिवर्ष हजारों बालिकाएं अपने जीवन पथ पर ससम्मान आगे बढ़ रही हैं।

मोहन सरकार ने श्रमिक सुरक्षा को बनाया प्राथमिकता, विशेष ध्यान दिया गया

भोपाल  श्रमिकों की सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। श्रमिकों की सुरक्षा कर्तव्य के साथ-साथ सामाजिक सरोकार भी है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिये कारखाना अधिनियम,1948 तथा भवन एवं अन्य संनिर्माण अधिनियम,1996 और इनके अंतर्गत बनाए गए नियमों का पालन करना प्रत्येक नियोजक, कारखाना अधिभोगी और प्रबंधक का कानूनी दायित्व है। सभी कारखानों के प्रबंधन व निर्माण कार्य नियोजकों से अपेक्षा की जाती है कि वे स्वेच्छा से पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करें तथा श्रमिकों के लिए सुरक्षित, स्वस्थ एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण प्रदान करें। संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मती नमिता तिवारी ने बताया है कि श्रमिकों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। कारखानों या निर्माण स्थलों के निरीक्षणों में पाए गए गंभीर उल्लंघनों पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। ज्ञात्व्य है कि सुरक्षा प्रावधानों का उल्लंघन करने पर नियमों में जुर्माना या कारावास या दोनों तरह की कार्रवाई का प्रावधान है। औधोगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के सभी अधिकारियों को समस्त लम्बित वैधानिक प्रकरणों में विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए है। इनके त्वरित निराकरण से उत्पन्न निरोधक प्रभाव निर्माण स्थल और कारखानों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा। श्रम विभाग ने उद्योग जगत व नियोजकों से सहयोग की अपेक्षा की है ताकि उत्पादन और प्रगति के साथ-साथ श्रमिकों की सुरक्षा एवं कल्याण भी सुनिश्चित हो सके।  

ढाई लाख से ज्यादा फीडबैक के साथ आगे बढ़ा ‘समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ अभियान

आमजन के लिए शिक्षा सबसे बड़ा मुद्दा, आमजन ने दिया विकसित यूपी का विजन गांव से लेकर शहर तक जनता ने बढ़-चढ़कर दिए अपने सुझाव  एटा, मेरठ, मुजफ्फनगर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, मैनपुरी, कानपुर देहात, हरदोई जनपदों से आया सर्वाधिक फीडबैक लखनऊ योगी सरकार द्वारा संचालित 'समर्थ उत्तर प्रदेश–विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान निरंतर जनभागीदारी और सुझावों के साथ आगे बढ़ रहा है। शुक्रवार को प्रदेश के सभी 75 जनपदों में नोडल अधिकारियों एवं प्रबुद्धजनों ने भ्रमण कर छात्रों, शिक्षकों, व्यावसायियों, उद्यमियों, कृषकों, स्वयंसेवी संगठनों, श्रमिक संगठनों, मीडिया और आम जनमानस से संवाद किया। इस संवाद में न केवल विगत आठ-साढ़े 8 वर्षों की विकास यात्रा साझा की गई, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने के लिए रोडमैप पर चर्चा और फीडबैक भी प्राप्त किया गया। ढाई लाख से अधिक फीडबैक दर्ज सरकार द्वारा विकसित पोर्टल samarthuttarpradesh.up.gov.in पर अब तक ढाई लाख से ज्यादा फीडबैक दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 1.85 लाख से ज्यादा और नगरीय क्षेत्रों में करीब 70 हजार फीडबैक प्राप्त हुए।  आयु वर्ग के अनुसार 90 हजार से अधिक सुझाव 31 वर्ष से कम आयु वर्ग से, 1.36 लाख से अधिक सुझाव 31-60 वर्ग और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग से करीब 30 हजार से अधिक सुझाव आए हैं। शिक्षा क्षेत्र पर सबसे अधिक फीडबैक जनता के बीच शिक्षा अब भी सबसे बड़ा मुद्दा है। शिक्षा से जुड़े 90 हजार से अधिक सुझाव मिले। इसके अलावा नगरीय एवं ग्रामीण विकास से जुड़े 50 हजार, स्वास्थ्य और समाज कल्याण पर 20-20 हजार तथा कृषि क्षेत्र से संबंधित 45 हजार से अधिक सुझाव दर्ज किए गए। टूरिज्म में 5 हजार से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं।  इन जिलों से मिल रही भागीदारी एटा, मेरठ, मुजफ्फनगर, सहारनपुर, शाहजहांपुर, मैनपुरी, कानपुर देहात, हरदोई आदि जनपदों से सबसे अधिक भागीदारी रही। इन जिलों से 90 हजार से अधिक फीडबैक प्राप्त हुए। यह दर्शाता है कि जनता इस अभियान को गंभीरता से ले रही है। लड़कियों की शिक्षा से लेकर युवाओं के प्रशिक्षण तक मिल रहे सुझाव लखनऊ से पुष्पा शुक्ला ने सुझाव दिया है कि लड़कियों की शिक्षा से लेकर रोजगार तक एक सतत कार्यक्रम बनाया जाए, जिसमें स्कूल स्तर पर साप्ताहिक एसटीईएम एवं वित्तीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, मुफ्त सैनिटरी किट, आईटीआई/पॉलीटेक्निक आधारित लघु कौशल-पाठ्यक्रम (ईवी, उद्यमिता, प्रशिक्षण आदि) और बिज़नेस पास के जरिए उपस्थिति सुनिश्चित कर 2-3 वर्षों में ड्रॉप-आउट दर को 5% से कम करने जैसे कदम शामिल हों। बांदा के योगेश मिश्रा का कहना है कि सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और उभरती तकनीकों के रोजगार अवसरों को नोएडा की तरह लखनऊ, आगरा, मेरठ, कानपुर और वाराणसी जैसे टियर-2 शहरों में भी विस्तार दिया जाए, क्योंकि ये शहर हाई स्पीड ट्रेन नेटवर्क से जुड़े होने के कारण प्रतिभा और संसाधनों को आकर्षित कर सकते हैं। वहीं, जालौन के यश तिवारी ने मांग की है कि जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या एवं गुणवत्ता दोनों बढ़ाई जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र बाहर गए बिना अपने गृह जिले में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें और क्षेत्र का समग्र विकास संभव हो सके। विकसित उत्तर प्रदेश@2047 विजन के लिए नागरिकों से सुझाव आमंत्रित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प विकसित उत्तर प्रदेश@2047 को साकार करने के लिए प्रदेशभर में 5 सितम्बर से 5 अक्टूबर 2025 तक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार ने बताया कि नागरिक अपने सुझाव https://samarthuttarpradesh.up.gov.in पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं। 19 सितम्बर को अर्थ एवं संख्या प्रभाग के 300 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को इस अभियान में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया गया। सचिव नियोजन/महानिदेशक अर्थ एवं संख्या सेल्वा कुमारी जे. ने सभी को स्वयं, परिवार व मित्रजनों से सुझाव दर्ज कराने का आह्वान किया। निदेशक अलका बहुगुणा ढौंडियाल ने अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया। प्राप्त सुझावों में से उत्कृष्ट व सार्थक विचारों का चयन कर प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा। नियोजन विभाग इस विजन डॉक्युमेंट का नोडल विभाग है।

सऊदी अरब का बयान: परमाणु हथियारों के लिए पाकिस्तान से सौदा कर सकते हैं

रियाद सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। खासतौर पर भारत के लिहाज से यह महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान उसका चिरप्रतिद्वंद्वी है, लेकिन सऊदी अरब से भी अच्छे रिश्ते रहे हैं। ऐसे में दोनों के बीच हुए करार का भारत पर क्या असर होगा, यह अहम है। भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से यह बात कही भी गई है कि हम इस पर नजर रख रहे हैं। वहीं इजरायल का भी रिएक्शन आया है कि यह समझौता हमारे और भारत के चलते हुआ है। इजरायल की ओर से कहा गया है कि हम मिडल ईस्ट में एकमात्र परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और शायद इसीलिए सऊदी अरब ने पाकिस्तान से समझौता किया है। पाकिस्तान दुनिया का इकलौता परमाणु शक्ति से संपन्न मुस्लिम देश है। दरअसल सऊदी अरब की लंबे समय से यह इच्छा और मजबूरी रही है कि वह परमाणु हथियारों की सुरक्षा तलाशता रहा है। यही नहीं कुछ साल पहले ऐसी चर्चाएं थीं कि सऊदी अरब यूरेनियम का भंडार बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य परमाणु बम तैयार करना हो सकता है। लेकिन सऊदी अरब ने ऐसी चर्चाओं को खारिज कर दिया था। अमेरिकी पत्रकार बॉब वुडवार्ड ने अपनी पुस्तक 'War' में अमेरिकी सांसद लिंडसे ग्राहम और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच एक बातचीत का जिक्र किया है। इस मजेदार बातचीत में अमेरिकी सांसद पूछते हैं कि क्या सऊदी अरब की ओर से यूरेनियम का भंडार जुटाना क्या परमाणु हथियारों की ओर कदम बढ़ाना है। इस पर मोहम्मद बिन सलमान ने मजेदार जवाब देते हुए कहा था, 'हमें बम बनाने के लिए यूरेनियम की जरूरत नहीं है। हमें जरूरत होगी तो एक बम पाकिस्तान से खरीद लेंगे।' वहीं सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुल्ला अजीज बिन सलमान ने कहा था कि हम यूरेनियम का भंडार इसलिए बढ़ा रहे हैं ताकि उसका असैन्य इस्तेमाल हो सके। हमारा परमाणु हथियार जुटाने का कोई इरादा नहीं है। माना जा रहा है कि मोहम्मद बिन सलमान के उसी इरादे के तहत पाकिस्तान के साथ करार किया गया है कि परमाणु हथियारों से संपन्नता का नैरेटिव मिल सके। इजरायल के मुकाबले कतर, सऊदी अरब, मिस्र, यमन और ईरान समेत तमाम मुस्लिम देशों की यह कमजोरी रही है कि उनके पास परमाणु हथियार नहीं है। बता दें कि ईरान और इजरायल के बीच पिछले दिनों छिड़ी कुछ दिनों की जंग के दौरान भी पाकिस्तान ने कहा था कि हम जंग में उतरने को तैयार हैं। पाकिस्तान के एक नेता ने यहां तक कहा था कि हम ईरान के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।  

महिला क्रिकेट: भारत के खिलाफ धीमी ओवरों पर ऑस्ट्रेलिया टीम पर लगा दंड

नई दिल्ली ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम पर मुल्लांपुर (चंडीगढ़) में भारत के खिलाफ दूसरे एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में धीमी ओवर गति के लिए शुक्रवार को मैच फीस का 10 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया। ऑस्ट्रेलिया को बुधवार को दूसरे एकदिवसीय मैच में 102 रन से हार का सामना करना पड़ा, जो रनों के लिहाज से उनकी सबसे बड़ी हार थी। ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित समय में दो ओवर कम किए थे जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) की मैच रेफरी जीएस लक्ष्मी ने उस पर यह जुर्माना लगाया। आईसीसी ने एक बयान में कहा, ‘‘खिलाड़ियों और खिलाड़ी सहयोगी स्टाफ के लिए आईसीसी आचार संहिता के धीमी ओवर गति से संबंधित अनुच्छेद 2.22 के अनुसार खिलाड़ियों पर प्रत्येक ओवर कम करने के लिए मैच फीस का पांच प्रतिशत जुर्माना लगाया जाता है। ऑस्ट्रेलिया ने जुर्माना स्वीकार कर लिया है और इसलिए औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी।’’ यह आरोप मैदानी अंपायर वृंदा राठी और जननी नारायणन, तीसरे अंपायर लॉरेन एजेनबैग और चौथे अंपायर गायत्री वेणुगोपालन ने लगाया था। भारत और ऑस्ट्रेलिया की महिला टीमों के बीच 3 एकदिवसीय मैचों की सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला शनिवार को खेला जाएगा। बुधवार को हुए सीरीज के दूसरे मैच की बात करें तो उपकप्तान स्मृति मंधाना ने किसी भारतीय महिला बल्लेबाज का दूसरा सबसे तेज वनडे शतक जड़ा। भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 102 रन से करारी शिकस्त देकर तीन मैचों की श्रृंखला 1-1 से बराबर कर दी। पहले बल्लेबाजी के लिये भेजे जाने पर भारत के लिये बायें हाथ की बल्लेबाज मंधाना ने 91 गेंद में 117 रन बनाये जिसमे 14 चौके और चार छक्के शामिल थे । उन्होंने अपना शतक सिर्फ 77 गेंद में पूरा किया। जिससे मेजबान टीम ने 292 रन से अपना सर्वोच्च स्कोर बनाया। इसके बाद कई कैच छूटने के बावजूद मेजबान टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 40.5 ओवर में 190 रन पर आउट करके बड़ी जीत दर्ज की। इतिहास में यह पहली बार हुआ कि विश्व में दबदबा रखने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम कोई वनडे मैच 100 या उससे अधिक रनों से हारी। इससे पहले मंधाना ने 77 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। भारत की किसी महिला बल्लेबाज के सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है। उन्होंने राजकोट में इस साल जनवरी में आयरलैंड के खिलाफ 70 गेंद में शतक पूरा किया था।