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बिहार पूजा स्पेशल बस: किराया हुआ 1/3 तक कम, जानें सब्सिडी और टाइमिंग

पटना  बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की त्योहारी सीजन सेवा के तहत पर्व स्पेशल बसों से दिल्ली, गुरुग्राम, अंबाला, कोलकाता, लखनऊ जैसे शहरों से बिहार आना-जाना काफी सस्ता हो गया है। राज्य सरकार पर्व स्पेशल बसों के किराया पर भारी सब्सिडी दे रही है, जिससे सफर का खर्च एक तिहाई तक कम हो गया है। दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ के दौरान हवाई किराया बढ़ने और ट्रेन में टिकट की सदाबहार किल्लत के कारण सरकार ने कई शहरों से एसी और नॉन एसी बसों को चलाने का फैसला किया है। बीएसआरटीसी ने बसों की समय सारिणी (टाइम टेबल) के साथ असली किराया, उसमें दी जा रही सब्सिडी और पैसेंजर द्वारा भुगतान की जाने वाली राशि की लिस्ट भी जारी कर दी है। बिहार में नवंबर में विधानसभा चुनाव है और वोटरों को लुभाने के लिए सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार कई वर्गों के लिए एक के बाद एक नकद सहायता राशि की स्कीम शुरू कर रही है। पहले से चल रही योजनाओं में मदद की राशि बढ़ाई जा रही है। बस किराया पर सब्सिडी को उसी से जोड़कर देखा जा रहा है। पर्व स्पेशल बसें 20 सितंबर से 30 नवंबर तक चलेंगी। छठ 28 अक्टूबर को ही है लेकिन चुनाव को ध्यान में रखते हुए योजना में वापसी के लिए 30 नवंबर तक का समय कवर कर लिया गया है ताकि वोटर चाहे तो मतदान के बाद लौटे। उदाहरण के लिए किशनगंज से दिल्ली का निर्धारित किराया एससी स्लीपर के लिए 3247 रुपये है लेकिन इसमें सरकार की तरफ से 992 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। एक पैसेंजर को इस बस से किशनगंज आने या किशनगंज से दिल्ली जाने के लिए मात्र 2255 रुपये ही देने होंगे। यह मूल किराया में 30 परसेंट से ऊपर की छूट है। बिहार के अलग-अलग जिलों से दिल्ली, गुरुग्राम, कोलकाता, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, अंबाला, सिलीगुड़ी, रांची समेत अन्य शहरों के लिए बस किराए में अलग-अलग सब्सिडी है और कुछ में यह मदद 37-38 फीसदी तक जा रही है।

रायपुर: महतारी सदन योजना से होगा महिला-प्रधान विकास, छत्तीसगढ़ बनेगा उदाहरण – मुख्यमंत्री साय

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज धमतरी जिले के मगरलोड विकासखंड के करेली बड़ी गांव से प्रदेश के 51 महतारी सदनों का लोकार्पण किया। नवरात्रि के पावन पर्व के दौरान शुरू की गई महतारी सदन योजना को  साय ने प्रदेश की माताओं और बहनों की तरक्की के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि माताओं-बहनों, के लिए गाँवों में ही केंद्र बनाने महतारी सदनों के निर्माण की घोषणा सरकार ने की थी ताकि आप वहां एकत्रित होकर एक बड़ी सुविधापूर्ण जगह में मिल-जुलकर अपना काम कर सकें। आज यह बड़ा काम पूरा हुआ है। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  विजय शर्मा, राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा, लोकसभा सांसद मती रूप कुमारी चौधरी, पूर्व मंत्री एवं कुरूद के विधायक  अजय चन्द्राकर सहित सचिव मती निहारिका बारिक और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण जन एवं गणमान्य नौगरिक मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने आस्था महिला संकुल संगठन करेली बड़ी की महिला समूह सदस्यों को महतारी सदन का हस्तांतरण प्रमाण पत्र भी सौंपा। मुख्यमंत्री ने परिसर मौल का पौधा भी रोपा।  51 महतारी सदनों का किया लोकार्पण  मुख्यमंत्री ने धमतरी के करेली बड़ी से 51 महतारी सदनों का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री ने धमतरी के करेली बड़ी से 51 महतारी सदनों का किया लोकार्पण मुख्यमंत्री ने कहा कि महतारी सदन योजना छत्तीसगढ़ को महिला-केंद्रित विकास का मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। महतारी सदन केवल महिलाओं की तरक्की का आधार ही नहीं बनेगा, बल्कि यह पूरे प्रदेश की तरक्की का आधार बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महतारी सदन माताओं-बहनों की शक्ति, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया केंद्र होगा। महतारी सदन शिक्षा, कौशल और उद्यमिता के द्वार खोलेंगे। उन्होंने कहा कि इन सदनों में महिला स्व-सहायता समूहों को जोड़कर आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। माताएँ-बहनों के लिए महतारी सदन में सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, हस्तशिल्प, कृषि-आधारित प्रशिक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसे अनेक कार्यक्रम चलाए जाएंगे।

भाजपा के नए अध्यक्ष पर सस्पेंस, विपक्ष ने साधा निशाना

नई दिल्ली  भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के चुनाव में देरी पर अब विपक्ष निशाना साध रहा है। विपक्षी गठबंधन INDIA के सदस्य दल शिवसेना (UBT) ने आरोप लगाए हैं कि देश को चलाने वाली पार्टी अपने खुद के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर पा रही है। उनका दावा है कि किसी एक नेता के नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। फिलहाल, इसे लेकर भाजपा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। शिवसेना (यूबीटी) से राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, 'एकमत नहीं हो रहा है नाम के ऊपर यह भी सच है। एक पार्टी देश चला रही है, लेकिन अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन नहीं कर पा रही है। यह क्या मामला है, क्या मसला है किसी को नहीं पता। आप चुनाव आयोग को बदल सकते हो, आप सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को बदल सकते हो, आप किसी को भी बदल सकते हो।' उन्होंने आगे कहा, 'आप देश के उपराष्ट्रपति को घर भेज सकते हो, लेकिन आपकी पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन नहीं कर सकती। यह क्या मामला है, देश को पता होना चाहिए। आप कल राष्ट्रपति को भी घर भेजेंगे, जैसे धनखड़ साहब को भेजा है, लेकिन आप अपनी पार्टी का अध्यक्ष नहीं चुन सकते।' पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया था। हाल ही में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में सीपी राधाकृष्ण ने जीत हासिल की है। भाजपा अध्यक्ष फिलहाल, केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा भाजपा की कमान संभाल रहे हैं और इससे पहले उन्हें कार्यकाल विस्तार दिया जा चुका है। यह साफ नहीं है कि भाजपा कब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करेगी, लेकिन अटकलें लगाई जा रही हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव के पहले पार्टी नया कप्तान चुन सकती है। हालांकि, इसे लेकर भी आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। रेस में कौन भाजपा ने अब तक संभावित उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन अटकलें हैं कि इस रेस में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान का नाम शामिल है। साथ ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नाम की भी अटकलें जारी हैं। फिलहाल, पार्टी ने या किसी भी नेता ने इस बात की पुष्टि नहीं की है।  

कार्डियोलॉजी विभाग ने हृदय के 100% ब्लॉकेज पर दर्ज की जीत, एसीआई में मरीज की सफल एंजियोप्लास्टी

  रायपुर पं. जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) अब न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीजों के लिए भी जीवनदाता बनता जा रहा है। हाल ही में एसीआई के कार्डियोलॉजी विभाग में मध्यप्रदेश निवासी 60 वर्षीय मरीज के हृदय की 100% ब्लॉक हो चुकी चार नसों की सफल एंजियोप्लास्टी की गई। मरीज के परिजनों के अनुसार, मरीज लंबे समय से दवाओं के सहारे जीवन जी रहे थे। मध्यप्रदेश के कई बड़े अस्पतालों ने एंजियोप्लास्टी करने से मना कर दिया था। इस बीच उनके एक करीबी रिश्तेदार से पता चला कि एसीआई में कुछ वर्ष पूर्व एक मरीज के जटिल हृदय रोग का सफल उपचार किया गया है। इसी भरोसे के साथ वे रायपुर पहुँचे। स्वयं मरीज अपना अनुभव बताते हुए कहते हैं कि जब कई बड़े अस्पतालों के डॉक्टरों ने कह दिया था कि उनके यहाँ इलाज संभव नहीं है तो एसीआई बड़ी उम्मीद लेकर आया था। डॉक्टर से हमने कह भी दिया था कि जितना भी रिस्क हो, आप इलाज़ की तैयारी कीजिये, मैं उसके लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार हूँ। अंततः यहाँ के डॉक्टरों ने मुझे नया जीवनदान दिया।  कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित वास्तव के नेतृत्व में हुई इस प्रक्रिया में राइट फीमोरल एंजियोप्लास्टी के जरिए मरीज की ब्लॉक नसों को खोला गया। फिलहाल मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और जल्द ही उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। डॉ. वास्तव ने बताया कि पाँच वर्ष पूर्व भी मध्यप्रदेश से आए एक मरीज की सफल लेजर एंजियोप्लास्टी की गई थी। इस बार भी कठोर ब्लॉकेज को देखते हुए लेजर की तैयारी की गई थी, किंतु सौभाग्य से सामान्य एंजियोप्लास्टी से ही सफल परिणाम मिल गये। डीन डॉ. विवेक चौधरी ने मरीज की स्थिति को देखते हुए विभाग को अतिशीघ्र एंजियोप्लास्टी करने के निर्देश दिये।

रायगढ़ में उपभोक्ता बन रहे ऊर्जा उत्पादक – बचत भी, कमाई भी

रायपुर : प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से बदल रही जिंदगी रायगढ़ में उपभोक्ता बन रहे ऊर्जा उत्पादक – बचत भी, कमाई भी बिजली का बिल हुआ अतीत, सूरज की रोशनी बनी आत्मनिर्भरता का जरिया रायपुर सूरज की किरणें अब केवल जीवनदायिनी शक्ति ही नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती का नया स्रोत भी बन चुकी हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा उपभोक्ता से ऊर्जा उत्पादक बना दिया है। रायगढ़ जिले में यह योजना सैकड़ों परिवारों के जीवन को नई रोशनी दे रही है। अब तक जिले में 300 से अधिक घरों की छत पर सौर पैनल लगाए जा चुके हैं। इस योजना का लाभ उठाने वाले परिवारों के अनुभव ही इसकी असली सफलता की कहानी बयां कर रही हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से बदल रही जिंदगी लोहरसिंह गांव के ईश्वर प्रसाद नायक ने बताया कि 3 किलोवॉट का सोलर प्लांट लगाने के बाद अप्रैल में 267 यूनिट बिजली उत्पन्न हुई। उन्हें 577 रुपए की छूट मिली। मई में उनका पूरा उपभोग सौर ऊर्जा से पूरा हुआ और बिल शून्य हो गया। रायगढ़ के प्रदीप मिश्रा और प्रदीप पटेल ने बताया गया कि इस योजना ने उन्हें आर्थिक राहत के साथ मानसिक शांति और आत्मनिर्भरता का अहसास भी कराया। हीरापुर कोतरा रोड के राजेंद्र चौरसिया ने बताया कि जुलाई में उनके 3 किलोवॉट प्लांट से 507 यूनिट बिजली उत्पन्न हुई। उन्हें 4,178 रुपए की छूट मिली। वे अब अतिरिक्त बिजली ग्रिड में देकर हर महीने हजारों रुपये की बचत कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त माध्यम है। उपभोक्ता न केवल घरेलू जरूरतें पूरी कर सकते हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर सकते हैं। विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर नागरिकों को योजना का लाभ समझा रही हैं। यह योजना केवल सस्ती बिजली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं को बचत और अतिरिक्त कमाई का अवसर देती है। परिवारों को आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करती है। पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देती है।   आकर्षक सब्सिडी और आसान प्रक्रिया विभागीय अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 1 किलोवाट प्लांट से प्रतिमाह लगभग 120 यूनिट बिजली उत्पादन होता है। इसमें केंद्र सरकार 30 हजार रुपए एवं राज्य सरकार 15 हजार रुपए सब्सिडी प्रदान करती है। 2 किलोवाट प्लांट से प्रतिमाह लगभग 240 यूनिट बिजली उत्पादन होता है। इसमें केंद्र सरकार 60 हजार रुपए एवं राज्य सरकार 30 हजार रुपए सब्सिडी देती है। 3 किलोवाट प्लांट से प्रतिमाह लगभग 360 यूनिट बिजली उत्पादन होता है। इसमें केंद्र सरकार 78 हजार रुपए एवं राज्य सरकार 30 हजार रुपए सब्सिडी देती है। शेष राशि उपभोक्ता स्वयं वहन करेंगे, जिसे बैंक ऋण सुविधा के माध्यम से भी प्राप्त किया जा सकता है। योजना का लाभ पूरी तरह ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से दिया जा रहा है। उपभोक्ता चउेनतलंहींत.हवअ.पद पोर्टल, पीएम सूर्यघर मोबाइल ऐप, सीएसपीडीसीएल वेबसाइट, मोर बिजली ऐप अथवा टोल-फ्री नंबर 1912 पर कॉल कर आवेदन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त नजदीकी सीएसपीडीसीएल कार्यालय से भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उपभोक्ता स्वयं ही ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से वेंडर का चयन कर सकते हैं।

कोण्डागांव में 25 सितंबर को आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल, तैयारियों का होगा परीक्षण

कोण्डागांव राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, गृह मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली तथा छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राजस्व, एवं आपदा प्रबंधन विभाग एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कोण्डागांव के संयुक्त तत्वाधान में दिनांक 25 सितंबर 2025 दिन गुरूवार, प्रातः 10 बजे स्थान कोण्डागांव में बाढ़ पर एवं केशकाल में बिल्डिंग गिर जाने पर मॉक ड्रिल का आयोजन किया जाएगा। यह मॉक ड्रिल आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने तथा जनता को जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। यह केवल एक प्रशिक्षण प्रक्रिया है और घबराने की आवश्यकता नहीं है। नागरिकों से अपील की गई है कि अभ्यास के दौरान शांति बनाये रखे, तथा किसी भी प्रकार की घबराहट से बचें। साथ ही अफवाहों से बचने तथा दूसरों को सही जानकारी प्रदान करने करें। सभी से अनुरोध किया गया है कि इस महत्वपूर्ण मॉक ड्रिल में प्रशासन का पूरा सहयोग करें।

दिवाली के बाद कोटा-दिल्ली एक्सप्रेस-वे: अब सफर होगा सुपरफास्ट, मुंबई के लिए अभी वेटिंग!

नई दिल्ली  दिल्ली से मुंबई तक के लिए बन रहे एक्सप्रेस वे का काम 2019 में शुरू हुआ था जो कि 2023 तक पूरा किया जाना था लेकिन इस प्रोजेक्ट में एक-दो नहीं बल्कि तीन साल की देरी हो गई है. हालांकि अच्छी बात ये है कि अगले साल यह प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा. इसी बीच दिल्ली से कोटा जाने वालों के लिए एक राहत की खबर सामने आई है. जी हां, भले ही मुंबई तक सीधी कनेक्टिविटी में एक साल लगना हो लेकिन कोटा तक की सीधी कनेक्टिविटी आपको दिवाली के बाद ही मिल जाएगी. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के प्रोजेक्ट डायरेक्टर कोटा संदीप अग्रवाल ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए बताया कि कोटा से दिल्ली तक का रूट इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगा. नवंबर या दिसंबर में लोग इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. हालांकि मुंबई से सीधा कनेक्ट होने में देरी के लिए उन्होंने कुछ मुख्य कारण बताए हैं. उन्होंने बताया कि मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में 4.9 किलोमीटर की सुरंग बनाई जानी है जिसका निर्माण 2026 फरवरी के बाद ही हो पाएगा. इसलिए फिलहाल मुंबई से सीधी कनेक्टिविटी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा. वहीं दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर 26.5 किलोमीटर लंबे पैकेज नंबर 10 पर काम चल रहा है, इसका काम लगभग पूरा हो गया है जिसमें फिनिशिंग के काम चल रहे हैं. यहां पर 765 केवी की हाईटेंशन लाइन दो बार एक्सप्रेसवे को काट रही है जिसकी वजह से इसे शिफ्ट किया जा रहा है. इसके लिए शटडाउन लिया गया है. एक क्रॉसिंग के लिए मिल गया है जबकि दूसरे के लिए लिया जाना है. पहली क्रॉसिंग के लिए एक महीने का शटडाउन लिया गया है. NHAI का पूरा टारगेट NHAI का फिलहाल पूरा फोकस पैकेज नंबर 10 को पूरा कराने पर है और इसे जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिशें की जा रही हैं. अधिकारियों ने इसी पैकेज के पास अपना कैंप लगा लिया है और काम की बारीकी से देखरेख की जा रही है. जुलाई और अगस्त में हुई भारी बारिश की वजह से साइट पर पूरी तरह से काम ठप रहा क्योंकि साइट पर मटेरियल ही नहीं पहुंच पा रहा था. अधिकारियों का कहना है कि यह 8 लेन का बन रहा है जिसमें 4 लेन शुरू करने की कोशिशें की जा रही हैं. दिल्ली से कोटा तक का रास्ता वर्तमान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से आप अगर कोटा जाते हैं तो आपको एक्सप्रेसवे से उतर कर दोबारा चढ़ना पड़ता है. जिसमें करीब 60 किलोमीटर तक आपको टू लेन के मेगा हाईवे पर चलना होता है. जो कि बूंदी के लबान से शुरू होता है और सवाई माधोपुर के कुश्तला तक जाता है. इस मार्ग पर काफी ट्रैफिक होता है और कई बार इस रास्ते को भी बंद कर दिया जाता है. लेकिन एक्सप्रेस वे कंपलीट होने के बाद आपको ये परेशानी नहीं झेलनी होगी.  

वैवाहिक झगड़ों में बच्चे को हथियार बनाने पर हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली  दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले की सुनवाई करते हुए अपने एक अहम फैसले में कहा है कि वैवाहिक विवाद में नाबालिग बच्चे को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना गलत है। हाईकोर्ट ने यह माना है कि पति या पत्नी द्वारा नाबालिग बच्चे को जानबूझकर दूसरे माता-पिता से अलग करने की कोशिश न सिर्फ मनोवैज्ञानिक क्रूरता है, बल्कि यह तलाक का वैध आधार हो सकता है। हाईकोर्ट ने यह फैसला एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया, जिसने सितंबर 2021 में एक फैमिली कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें क्रूरता के आधार पर विवाह को भंग कर दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने 19 सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि वैवाहिक विवादों में बच्चे को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से न केवल दूसरे माता-पिता को नुकसान पहुंचता है, बल्कि बच्चे के भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालता है और इससे पारिवारिक सद्भाव की नींव कमजोर होती है। इस जोड़े की शादी मार्च 1990 में हुई थी, जिससे उनका एक बेटा हुआ और पत्नी ने 2008 से साथ रहने से इनकार कर दिया। इसके चलते पति ने 2009 में तलाक के लिए अर्जी दी थी। सितंबर 2021 में निचली अदालत ने उस व्यक्ति को तलाक दे दिया, जिसके खिलाफ महिला ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। महिला का दाव- पति यौन संबंध बनाने को तैयार नहीं था महिला ने अपनी याचिका में कहा कि उसने अपने पति से नाता नहीं तोड़ा, बल्कि तलाक की अर्जी दायर करने के बाद भी अपने बेटे के साथ ससुराल में ही रहती रही। उसने आगे कहा कि उसका पति यौन संबंध बनाने को तैयार नहीं था और उसके ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट की थी। वहीं, इसके महिला के पति ने अपनी याचिका में मौजूदा मुलाकात आदेशों के बावजूद अपने बेटे से संपर्क बनाए रखने की अपनी नाकाम कोशिशों का जिक्र किया। उसने दावा किया कि उसने चार-पांच बार अपने बच्चे से मिलने की कोशिश की, लेकिन बच्चे ने उससे बात करने से इनकार कर दिया। आखिरकार उसने यह मुलाकातें बंद कर दीं। पति ने आगे दावा किया कि तलाक की अर्जी दायर करने के बाद महिला ने उसके और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ कई आपराधिक शिकायतें दर्ज कराईं। मनोवैज्ञानिक क्रूरता का एक गंभीर रूप जस्टिस शंकर द्वारा लिखित फैसले में हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा, ''नाबालिग बच्चे को प्रतिवादी से जानबूझकर अलग-थलग करना मनोवैज्ञानिक क्रूरता का एक गंभीर रूप है। वैवाहिक विवाद में बच्चे को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से न केवल प्रभावित माता-पिता को चोट पहुंचती है, बल्कि बच्चे की भावनात्मक स्वास्थ्य भी नष्ट हो जाता है और पारिवारिक सौहार्द की जड़ पर आघात पहुंचता है।'' हाईकोर्ट ने अपने 29 पन्नों के फैसले में यह भी माना कि वैवाहिक यौन संबंध से लगातार वंचित रखना क्रूरता की पराकाष्ठा है। कोर्ट ने कहा, "यह सर्वविदित है कि यौन संबंध और वैवाहिक कर्तव्यों का निर्वहन शादी का आधार है, उनके लिए लगातार इनकार करना न केवल वैवाहिक जीवन के बिखराव को दर्शाता है, बल्कि क्रूरता का भी प्रतीक है जिसके लिए न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है।"  

जनसेवा और श्रद्धा का संगम: कुमारी सैलजा के जन्मदिन पर होगा हवन व रक्तदान शिविर

सिरसा  अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी, सिरसा के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री व सिरसा लोकसभा सांसद कुमारी सैलजा का जन्म दिन 24 सितंबर को स्थानीय कांग्रेस भवन में धूमधाम से मनाया जाएगा।  पीसीसी डेलीगेट्स राजेश चाडीवाल ने बताया कि बुधवार को सुबह 9 बजे कांग्रेस भवन में हवन यज्ञ किया जाएगा, जिसमें पार्टी के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता, कानूनी प्रकोष्ठ, महिला कांग्रेस, जिला यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई मिलकर आहूति डालकर सांसद के लंबे व स्वस्थ जीवन की कामना करेंगे।  इसके बाद कांग्रेस भवन में ही रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। उन्होंने सभी पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे तय समय पर कार्यक्रम में पहुंचें।

राजस्थान में बिजली संकट को अलविदा! बांसवाड़ा में देश का 8वां न्यूक्लियर पावर प्लांट तैयार

बांसवाड़ा   देश में परमाणु ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है और इसी के तहत राजस्थान में रावतभाटा के बाद अब बांसवाड़ा में दूसरा परमाणु बिजलीघर का शिलान्यास होने जा रहा है, जिससे न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे देश को बड़ी सौगात मिलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस परियोजना की आधारशिला रखी जाएगी. भारत में वर्तमान में 7 परमाणु बिजलीघरों में 22 रिएक्टर काम कर रहे हैं. इनकी कुल क्षमता 6,780 मेगावाट है. राजस्थान का रावतभाटा परमाणु ऊर्जा स्टेशन पहले से ही देश के सबसे बड़े स्टेशनों में से एक है. अब बांसवाड़ा में 700-700 मेगावाट की चार इकाइयों वाला एक नया परमाणु बिजलीघर स्थापित होने जा रहा है, जिसकी कुल क्षमता 2800 मेगावाट होगी. यह परियोजना भारत के 2031 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 22,480 मेगावाट तक बढ़ाने के लक्ष्य में एक मील का पत्थर साबित होगी. बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे इस परियोजना से यह परमाणु बिजलीघर स्वच्छ ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत होगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में मदद मिलेगी. यह भारत की वैश्विक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भी सहायक होगा. साथ ही इस परियोजना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे. अनुमान है कि इसके निर्माण और संचालन के दौरान 5,000 लोगों को प्रत्यक्ष और 20,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा. यह आदिवासी बहुल बांसवाड़ा क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर होगा. वहीं इस परियोजना के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना, जैसे कि सड़कों और परिवहन नेटवर्क, का भी विकास होगा. इससे क्षेत्र में समग्र आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और जीवन स्तर में सुधार होगा. इस बिजलीघर से 2800 मेगावाट बिजली उत्पादन से राजस्थान की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. अमेरिका और फ्रांस परमाणु ऊर्जा में अग्रणी विश्व में, अमेरिका (93 रिएक्टर) और फ्रांस (56 रिएक्टर) जैसे देश परमाणु ऊर्जा में अग्रणी हैं. भारत भी अब इस दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बांसवाड़ा परियोजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. 2036 तक पूरी तरह से चालू होने की उम्मीद के साथ, यह परियोजना बांसवाड़ा को सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि देश के ऊर्जा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण केंद्र बना देगी.