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कोरोना काल के कर्ज़ पर रोक! कोयला पर कंपनसेशन सेस खत्म होने पर वित्त मंत्री ने किया ऐलान

रायपुर GST 2.O में कोयले पर कंपनसेशन सेस खत्म हो गया है. इस पर वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि कोयला खनन रॉयल्टी से अब छत्तीसगढ़ को सीधा फायदा होगा. कोरोना काल में लिया कर्ज सेस से चुकाया जा रहा था, अब जीएसटी में सेस के मर्ज होने से राहत मिलेगी. कोयला खपत पर 50% हिस्सा छत्तीसगढ़ को और 50% केंद्र को मिलेगा. वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जीएसटी चोरी पर गुटखा कारोबारी पर कार्रवाई को लेकर कहा कि ऑर्गनाइज टैक्स चोरी के मामले में हमारी सरकार सख्त है. छोटे-मोटे मामले में हमारा रवैया सहयोगात्मक है. अगर कोई अधिकारी-कर्मचारी भी गड़बड़ी करता है, तो उस पर भी कार्रवाई होगी. वहीं विपक्ष के जीएसटी रिफॉर्म के बावजूद कई सामानों के दाम पहले की तरह ही होने के आरोपों पर वित्त मंत्री ने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म से बहुत फायदा है. लगातार बड़े कदम उठाये जा रहे हैं. विपक्ष जीएसटी काउंसिल के भीतर दर कम करने का विरोध करती थी, राज्यों के रेवेन्यू पर हाय तौबा मचाते हैं, और बाहर में दाम कम नहीं हुआ, ऐसा कहकर कांग्रेस लोगों को बरगलाती है.

गरबा के रंग में डूबी दीपिका सिंह, ‘शुभारंभ’ गाने के साथ खास अंदाज में किया डांडिया सेलिब्रेशन

मुंबई,  टीवी की जानी-मानी एक्ट्रेस दीपिका सिंह अपने खूबसूरत डांस और ट्रेडिशनल लुक्स के लिए हमेशा चर्चा में रहती हैं। उनका हर अंदाज फैंस का दिल जीत लेता है। गुरुवार को उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर एक खास वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह गरबा करती नजर आ रही हैं। वीडियो की शुरुआत एक बेहद सिंपल लुक से होती है, जिसमें दीपिका ग्रीन टी-शर्ट और ब्लैक जैगिंग पहने अपने मेकअप रूम में तैयार होती नजर आती हैं। उनके हाथ में वही खूबसूरत लहंगा है, जो थोड़ी ही देर बाद उन्हें एक गरबा क्वीन में बदलने वाला है। कुछ ही सेकंड में ट्रांजिशन आता है, और दीपिका का पूरा लुक बदल जाता है। वह एक शानदार येलो कलर के घेरदार लहंगे और पर्पल कलर के ब्लाउज में तैयार दिखती हैं। उनका ब्लाउज बेहद यूनिक है, क्योंकि इससे चुन्नी भी अटैच है, यानी एक्ट्रेस ने अलग से चुन्नी को कैरी नहीं किया। लहंगा जहां बिल्कुल सिंपल है, वहीं ब्लाउज से लटकी चुन्नी ने लोगों का ध्यान खींचा। ब्लाउज से लेकर चुन्नी तक में बारीक कढ़ाई और मिरर वर्क किया गया है। उन्होंने इस लुक के साथ ऑक्सिडाइज्ड चोकर नेकलेस, झुमके और चूड़ियां पहनी। इसके बाद वीडियो में वह किसी कार्यक्रम में शामिल होती नजर आती हैं, जहां वह लोगों के साथ गरबा करती दिखती हैं। वहीं, कुछ लोग उनके साथ सेल्फी लेते नजर आते हैं। इस वीडियो की खूबसूरती को और भी खास इसका बैकग्राउंड म्यूजिक बना रहा है। दीपिका ने फिल्म ‘काई पो चे’ के मशहूर गाने ‘शुभारंभ’ को अपने इस वीडियो में जोड़ा है। इस गाने में गुजराती लोक धुनों की मिठास साफ महसूस होती है। श्रुति पाठक और दिव्या कुमार की आवाज में गाए गए गाने ‘शुभारंभ’ में म्यूजिक अमित त्रिवेदी ने दिया है। गाने के बोल ‘रंगी पर ओढ़ आई, खुशियों संग लाई’ हर किसी को थिरकने पर मजबूर कर रहे हैं।  

राहुल गांधी के हाइड्रोजन बम बयान पर चिराग ने साधा निशाना, कहा- ‘आरोप लगाना गलत’

 पटना लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बुधवार को पलटवार किया है। चिराग ने कहा, 'जब वे धमाका करेंगे, तभी हमें पता चलेगा कि यह 'हाइड्रोजन बम' क्या है। लेकिन फिलहाल, जब भी वे आते हैं और बोलते हैं, तो सिर्फ उसी चीज़ पर जोर देते हैं जिससे SIR प्रक्रिया की शुरुआत हुई।' उन्होंने आगे कहा, 'वे बार-बार आकर मतदाता सूची में गड़बड़ियों की बात करते हैं। यही वजह है कि SIR लाया गया है। एक तरफ आप शिकायत करते हैं और दूसरी तरफ उस शिकायत के समाधान से समस्या जताते हैं। यह ठीक नहीं है। अगर इस सिस्टम से आपको दिक्कत है तो उसके लिए कानून मौजूद हैं। लेकिन सिर्फ आरोप लगाना गलत है।' गौरतलब है कि इससे पहले मंगलवार को लोकसभा में राहुल गांधी ने बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने जिस हाइड्रोजन बम की बात कही थी, वह अभी आया नहीं है, बल्कि आने वाला है। जिस दिन आएगा, उस दिन सभी को सच्चाई का पता चल जाएगा। राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा संविधान को खत्म करना चाहती है। उन्होंने दावा किया, 'मैं भागीदारी के हिसाब से हिस्सेदारी के लिए गारंटी देता हूं। यह मेरी गारंटी है। क्योंकि, हम संविधान मानते हैं।'

तुलसी-शमी का पौधा लगाने के वास्तु नियम: दूर होंगी जीवन की हर बाधा

भारत की प्राचीन संस्कृति और परंपरा में पेड़-पौधों को एक विशेष स्थान दिया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ पौधों को घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-समृद्धि आती है। इन्हीं में से दो प्रमुख पौधे हैं तुलसी और शमी। दोनों का ही धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व बहुत गहरा है। माना जाता है कि इन्हें सही दिशा में और सही तरीके से लगाने से जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। आइए जानते हैं तुलसी और शमी के पौधे से जुड़े वास्तु टिप्स और उनके फायदों के बारे में। तुलसी का पौधा तुलसी को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना जाता है। इसे मां लक्ष्मी का रूप माना गया है और लगभग हर भारतीय घर में इसे देखा जा सकता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, तुलसी का पौधा घर के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है। तुलसी लगाने की सही दिशा वास्तु के अनुसार, तुलसी का पौधा हमेशा घर के ईशान कोण या उत्तर दिशा में लगाना चाहिए। यह दिशा देवताओं की मानी जाती है, जिससे शुभ फल मिलते हैं। यदि संभव न हो तो इसे पूर्व दिशा में भी लगाया जा सकता है। शमी का पौधा शमी का पौधा भी भारतीय संस्कृति में बहुत महत्वपूर्ण है। इसे शनि देव से जोड़ा जाता है और माना जाता है कि इसे घर में लगाने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। शमी को विजयदशमी के दिन पूजने की भी परंपरा है क्योंकि इसे शुभता और विजय का प्रतीक माना गया है। शमी लगाने की सही दिशा वास्तु शास्त्र के अनुसार, शमी का पौधा घर के बाहर मुख्य द्वार के पास लगाना चाहिए। इसे लगाते समय इस बात का ध्यान रखें कि जब आप घर से बाहर निकलें तो यह पौधा आपके बाईं ओर पड़े। अगर घर के बाहर जगह नहीं है, तो इसे छत पर दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) या पश्चिम दिशा में भी लगा सकते हैं। इसे घर के अंदर लगाने से बचें। तुलसी और शमी को एक साथ लगाने के नियम तुलसी और शमी के पौधों को कभी भी एक ही गमले में नहीं लगाना चाहिए। दोनों को अलग-अलग गमलों में रखें। दोनों पौधों को पास-पास लगाया जा सकता है, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि ये एक-दूसरे से सटे हुए न हों।  तुलसी को प्रतिदिन जल अर्पित करें और संध्या काल में उसके पास दीपक जलाएं। शमी के पौधे के नीचे शनिवार के दिन सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

ट्रेडिशनल लुक में दिखीं ईशा कोप्पिकर, बोलीं- ‘देवी की कृपा से हर दिन सुनहरा है’

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर अपनी खूबसूरती और स्टाइलिश अंदाज के लिए जानी जाती हैं। वह अक्सर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर अपनी मौजूदगी दर्ज करवाती रहती हैं। गुरुवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए मां की कृपा का बखान किया। ईशा ने पीले रंग की खूबसूरत ड्रेस पहनी है, जो उनकी शानदार शख्सियत को निखार रही है। उन्होंने कान में बड़े-बड़े झुमके, एक हाथ में ब्रेसलेट, दूसरे में स्टाइलिश घड़ी, उंगलियों में रिंग और पैरों में पारंपरिक मोजड़ी से लुक पूरा किया। वहीं, मिनिमल मेकअप के साथ उन्होंने अपने बालों को आगे से स्टाइल किया और पीछे खजूर चोटी बनाई, जो उन्हें और आकर्षक बना रहा है। पहली तस्वीर में ईशा एक हैंडबैग लिए बैठकर शानदार पोज दे रही हैं। दूसरी तस्वीर में वह दीवार के सहारे अपनी दिलकश अदाओं से सबका दिल जीत रही हैं। तीसरी तस्वीर में वह कैमरे की ओर हल्की मुस्कान के साथ देख रही हैं, जो उनकी सादगी और आत्मविश्वास को दर्शाता है। बाकी तस्वीरों में भी उन्होंने अलग-अलग अंदाज में पोज दिए हैं। ईशा ने तस्वीरों के साथ कैप्शन में लिखा, “आज का पीला रंग सूरज की तरह चमक रहा है। यह खुशी, समर्पण और देवी की कृपा को फैलाता है।” ईशा का यह स्टाइलिश अंदाज और भक्ति भाव उनके प्रशंसक खूब पसंद कर रहे हैं। उन्होंने उनकी तस्वीरों की जमकर तारीफ की। ईशा का फिल्मी सफर इतना आसान नहीं था, उन्होंने करियर की शुरुआत साउथ सिनेमा से की थी। इसके बाद वह बॉलीवुड में आ गईं। अभिनेत्री ने 2003 में रिलीज हुई 6 फिल्मों में नजर आईं। इन फिल्मों में ‘तुझे मेरी कसम’, ‘दिल का रिश्ता’, ‘डरना मना है’, ‘पिंजर’, ‘एलओसी’ और ‘कयामत’ शामिल हैं। फिल्म ‘पिंजर’ को नेशनल अवॉर्ड दिया गया था। इसी तरह से 2004 में उनकी 6 फिल्में रिलीज हुईं। इन फिल्मों में ‘रुद्राक्ष’, ‘कृष्णा कॉटेज’ और ‘इंतेकाम’ शामिल हैं। साल 2005 में ईशा कोप्पिकर फिल्म ‘क्या कूल हैं हम’, ‘मैंने प्यार क्यूं किया’ और ’36 चाइना टाउन’ का हिस्सा रहीं। 2006 में वह ‘डॉन’ में नजर आईं। साल 2007 में उन्होंने ‘इक विवाह ऐसा भी’ में अहम किरदार निभाया।  

PESA नियमावली पर अवमानना याचिका की सुनवाई: झारखंड सरकार ने बालू-खनन प्रतिबंध हटाने का किया आग्रह

रांची झारखंड हाईकोर्ट में आदिवासी बुद्धिजीवी मंच द्वारा दायर पेसा नियमावली लागू न होने पर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पेसा नियमावली का ड्राफ्ट तैयार कर कैबिनेट में भेजा जा चुका है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कोर्ट ने बालू घाट की नीलामी के बाद अलॉटमेंट पर लगी रोक हटाने के लिए दायर हस्तक्षेप याचिका (आईए) को स्वीकार कर प्रार्थी को नोटिस जारी किया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा कि यदि पेसा नियमावली लागू हो जाती है तो कोर्ट उचित आदेश पारित करेगा। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एक अहम आग्रह किया गया। सरकार ने अदालत से निवेदन किया कि बालू और लघु खनिजों के खनन पर जो अंतरिम रोक लगी है, उसे हटाया जाए। अवमानना याचिका पर अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार, महाधिवक्ता राजीव रंजन और अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश कोर्ट में मौजूद थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार ने बहस की।  

बस्तर में नक्सलियों की धरती पर बदलाव की बयार, CM साय बोले – 2026 तक खत्म करेंगे नक्सलवाद

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार की नवीन आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति 2025 और नियद नेल्ला नार योजना ने दंतेवाड़ा सहित पूरे बस्तर अंचल में नया विश्वास जगाया है। माओवादी हिंसा के झूठे नारों से भटके लोग अब विकास और शांति की राह चुन रहे हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर संभाग में चलाए जा रहे पूना मारगेम अभियान तथा दंतेवाड़ा जिले में चलाए जा रहे लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर हाल ही में 71 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 30 नक्सलियों पर 50 हजार से 8 लाख रुपये तक का कुल 64 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण हमारी नीतियों की प्रभावशीलता और जन-विश्वास का प्रत्यक्ष प्रमाण है। Cm  साय ने कहा कि आत्मसमर्पित नक्सलियों को बेहतर जीवन की शुरुआत के लिए 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए गए हैं। साथ ही उन्हें नक्सल उन्मूलन नीति के तहत सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और भरोसेमंद वातावरण के कारण अब तक 1770 से अधिक माओवादी मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। डबल इंजन की सरकार का संकल्प है कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा और आत्मसमर्पित साथियों को सम्मानजनक पुनर्वास एवं बेहतर जीवन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही  मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर बदल रहा है और नक्सलवाद का अंधियारा छंट रहा है। यह परिवर्तन बस्तर के उज्ज्वल भविष्य और शांति की ओर बढ़ते कदमों का सशक्त संकेत है।

धर्मेंद्र प्रधान को सौंपी गई बिहार की जिम्मेदारी, BJP ने बनाया चुनाव प्रभारी

नई दिल्ली बिहार चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने अपनी तैयारी तेज कर दी है. भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए अपनी चाल चल दी है. भारतीय जनता पार्टी ने बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे अहम सियासी राज्यों के लिए चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति की घोषणा की है. भाजपा ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बिहार का चुनाव प्रभारी बनाया है. यह नियुक्ति बिहार में एनडीए की मजबूती को बढ़ावा देने के लिए अहम मानी जा रही है. बिहार में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव है. धर्मेंद्र प्रधान के साथ सह-प्रभारी के रूप में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और गुजरात BJP के पूर्व अध्यक्ष सीआर पाटिल को नियुक्त किया गया है. भाजपा के लिए धर्मेंद्र प्रधान का चयन इसलिए खास है क्योंकि वे ओडिशा से आते हैं और पहले भी उत्तर प्रदेश, कर्नाटक जैसे राज्यों में चुनावी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं. भाजपा सूत्रों के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान की रणनीतिक क्षमता और संगठनात्मक कौशल बिहार में तेजस्वी यादव की अगुवाई वाले महागठबंधन को चुनौती देने में कारगर साबित होगा. हालांकि, बिहार में NDA पहले से सत्ता में है, मगर तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की यात्राओं से माहौल थोड़ा बदला है. ऐसे में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है. यही वजह है कि अच्छा-खासा सियासी अनुभव रखने वाले धर्मेंद्र प्रधान को बिहार फतह करने की जिम्मेदारी दी गई है. बंगाल में किसे कमान? पश्चिम बंगाल के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को चुनाव प्रभारी बनाया गया है, जबकि त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब सह-प्रभारी होंगे. पश्चिम बंगाल में टीएमसी की मजबूत पकड़ को तोड़ने के लिए BJP की यह रणनीति अगम है. वैसे भी अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हैं. 2026 में होने वाले चुनावों में भूपेंद्र यादव की भूमिका अहम होगी. भूपेंद्र यादव के पास भी अच्छा खासा संगठनात्मक अनुभव है. वहीं, बिप्लब देब का अनुभव पूर्वोत्तर राज्यों से बंगाल की राजनीति को मजबूत करेगा. तमिलनाडु का प्रभारी कौन? तमिलनाडु के लिए BJP ने ओडिशा से सांसद बैजयंत पांडा को चुनाव प्रभारी नियुक्त किया है, जबकि महाराष्ट्र से सांसद मुरलीधर मोहोल सह-प्रभारी होंगे. पश्चिम बंगाल की तरह तमिलनाडु में भी साल 2026 में विाधानसभा चुनाव हैं. अगले साल होने वाले चुनाव के लिए भाजपा DMK-AIADMK के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर काम कर रही है. पांडा की नियुक्ति दक्षिण भारत में भाजपा की विस्तार योजना का हिस्सा है. हाल ही में BJP की कोर कमिटी मीटिंग में 2026 चुनाव रणनीति पर चर्चा हुई, जिसमें जिला स्तर के प्रभारियों की नियुक्ति और गठबंधन वार्ता शामिल थी.

रात में अकेले बुलाता, कमरे में कैमरा छिपाया – स्वामी चैतन्यानंद के खिलाफ महिलाओं का खुलासा

नई दिल्ली खुद को आध्यात्मिक गुरु और शिक्षा के क्षेत्र का मार्गदर्शक बताने वाला स्वामी चैतन्यानंद सरस्वती अब फरार है. यह वही चेहरा है, जो किताबों के सहारे खुद को 'महान लेखक और दार्शनिक' की पहचान बनाता रहा, मगर असलियत में वह उन मासूम छात्राओं का शिकारी निकला जिन्हें उसने ज्ञान और सुरक्षा का भरोसा देकर अपने जाल में फंसाया. चौंकाने वाली ये कहानी किसी उपन्यास की तरह लग सकती है, लेकिन एफआईआर की कॉपी और दर्ज बयानों ने साफ कर दिया है कि यह कोई गढ़ी हुई कथा नहीं, बल्कि काली हकीकत है. FIR में दर्ज काली करतूत एफआईआर की पन्नों में दर्ज आरोप पढ़कर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की छात्राओं को देर रात स्वामी अपने क्वार्टर में बुलाता था. छात्राओं के हॉस्टल में “सुरक्षा” के नाम पर गुप्त कैमरे लगाए गए. एक छात्रा को उसकी मर्जी के खिलाफ नया नाम अपनाने पर मजबूर किया गया. छात्राओं को विदेश यात्राओं और देर रात प्राइवेट रूम में बुलाने के लिए दबाव बनाया जाता था. डीन सहित कुछ स्टाफ छात्राओं को स्वामी की मांगें मानने पर मजबूर करते और शिकायतों को दबा देते. विरोध करने वाली छात्राओं को निलंबन और निष्कासन की धमकी मिलती. व्हाट्सऐप और एसएमएस के जरिए अश्लील संदेश भेजे जाते थे. एफआईआर में साफ लिखा है कि छात्राओं को मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का शिकार बनाया गया. विरोध करने पर न सिर्फ पढ़ाई बल्कि करियर दांव पर लगाने की धमकी दी जाती. छात्राओं के बयान ने खोल दी पोल जांच एजेंसियों ने अब तक 32 छात्राओं के बयान दर्ज किए हैं. इनमें से 17 ने मजिस्ट्रेट के सामने साफ कहा कि बाबा गालियां देता, अश्लील मैसेज भेजता और अनुचित हरकतें करने की कोशिश करता था. कई छात्राओं ने बताया कि तीन महिला वार्डन उन्हें जबरन बाबा के कमरे तक ले जातीं. यानि पूरा सिस्टम एक साजिश की तरह रचा गया था, ताकि कोई बाहर आवाज न उठा सके. पहले भी रहा विवादों में ये पहली बार नहीं है जब चैतन्यानंद विवादों में आया हो. 2009 में डिफेंस कॉलोनी थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और छेड़छाड़ का केस दर्ज हुआ. जबकि 2016 में वसंत कुंज थाने में भी छेड़छाड़ की शिकायत हुई. हर बार उसने रसूख, पैसे और नेटवर्क का इस्तेमाल करके खुद को बचा लिया. लेकिन इस बार छात्राओं की गवाही और डिजिटल सबूतों ने उसके लिए बच निकलने के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं. फरारी पर पुलिस की नजर एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही चैतन्यानंद फरार है. दिल्ली पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की हैं. सभी एयरपोर्ट्स और बॉर्डर इलाकों पर निगरानी बढ़ा दी गई है. सूत्रों के मुताबिक, उसकी अंतिम लोकेशन आगरा में मिली थी. पुलिस को शक है कि वह लगातार ठिकाने बदल रहा है और मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से बच रहा है, ताकि ट्रैक न हो सके. संस्थान से मिले सीसीटीवी फुटेज के डीवीआर और हार्ड डिस्क को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है. जांचकर्ताओं को आशंका है कि कई रिकॉर्ड्स से छेड़छाड़ की गई है. किताबों के सहारे बनाई थी पहचान शायद सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि यही स्वामी चैतन्यानंद शिक्षा और अध्यात्म की दुनिया में बड़ा नाम बनाने की कोशिश कर रहा था. उसने 28 किताबें लिखी थीं. इन किताबों पर नामी-गिरामी हस्तियों के नाम से प्रस्तावना और समीक्षाएं दर्ज थीं. ‘फॉरगेट क्लासरूम लर्निंग’ नाम की किताब की प्रस्तावना तो एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स के नाम से बताई जाती थी. ई-कॉमर्स साइट्स पर उसे “प्रोफेसर, स्पीकर, लेखक और आध्यात्मिक दार्शनिक” कहा गया. अब पुलिस का कहना है कि यह सब उसकी सोची-समझी रणनीति थी. किताबों और चमकदार छवि के पीछे उसका असली चेहरा छिपा था – एक शातिर शिकारी, जो मासूम छात्राओं को अपना शिकार बना रहा था. समाज में डर और गुस्सा यह खुलासा होते ही संस्थान के भीतर दहशत फैल गई है. कई छात्राएं डर के कारण सामने आने से कतरा रही हैं. वे साफ कह रही हैं कि उन्हें अपनी जान का खतरा महसूस होता है. अभिभावकों में गुस्सा है. उनका कहना है कि अगर संस्थान के भीतर ही बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो वे किस पर भरोसा करें? पुलिस का दावा और अगला कदम दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ व्यक्तिगत अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित षड्यंत्र है. चैतन्यानंद और उसके सहयोगियों ने संस्थान के सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए छात्राओं को शिकार बनाया. एफआईआर में दर्ज धाराओं के तहत यह मामला गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. जांच एजेंसियां जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने का दावा कर रही हैं.

लता मंगेशकर की जयंती पर ‘120 बहादुर’ का खास टीजर होगा रिलीज

मुंबई, एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज की आने वाली फिल्म 120 बहादुर का खास टीजर लता मंगेशकर की जयंती 28 सितंबर के अवसर पर रिलीज होगा। फिल्म 120 बहादुर का पहला टीज़र सोशल मीडिया और ट्रेड सर्किल में आते ही दिलों को जीत रहा है। इसका ग्रैंड स्केल, इंटेंसिटी और इमोशनल गहराई सभी को पसंद आ रही है। ऐसे में इतना जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद अब मेकर्स दूसरा टीज़र लाने के लिए तैयार हैं, जो कि लता मंगेशकर की जयंती 28 सितंबर पर रिलीज किया जायेगा।इस दिन का खास महत्व है, क्योंकि इसे लता मंगेशकर की याद में चुना गया है। वह अपनी देशभक्ति के गानों के लिए जानी जाती हैं, खासकर "ऐ मेरे वतन के लोगों" के लिए। यह गीत कवि प्रदीप ने लिखा, सी. रामचंद्र ने संगीत दिया और लता मंगेश्कर ने गाया। यह गीत 1962 के भारत–चीन युद्ध में सैनिकों की बलिदानी को याद करता है और आज भी इसे त्याग और वीरता का प्रतीक माना जाता है। इस गाने पर पहली बार लता मंगेशकर ने 26 जनवरी 1963 को गणतंत्र दिवस के मौके पर परफॉर्म किया था, जिसने पूरे देश को भावनाओं की गहराई में डूबो दिया। टीज़र 2 ऑफ़ 120 बहादुर भाईचारे, देशभक्ति और चार्ली कंपनी के 120 जवानों की बहादुरी को सच्ची श्रद्धांजलि है। इसमें उनकी निडरता और जज़्बे की एक झलक देखने को मिलेगी। फरहान अख्तर ने कहा, “लता मंगेश्कर की जयंती के दिन ‘120 बहादुर’ का टीज़र 2 पेश करना बेहद खास है। यह गीत 1962 के भारत-चीन युद्ध के बहादुर सैनिकों और शहीदों के लिए लिखा गया था और लता जी ने इसे लाइव गाया था। जिसकी रिकॉर्डिंग आज भी पूरे देश की आत्मा को छू लेती है। ऐसे में हमारी फिल्म का संदेश कवि प्रदीप जी के दिल छू लेने वाले शब्दों से पूरी तरह मेल खाता है।” रज़नीश ‘रेज़ी’ घई द्वारा निर्देशित और रितेश सिधवानी, फरहान अख्तर (एक्सेल एंटरटेनमेंट) और अमित चंद्रा (ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़) द्वारा निर्मित, फिल्म 120 बहादुर 21 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।