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नाटो प्रमुख का दावा: पीएम मोदी ने पुतिन से पूछा यूक्रेन युद्ध का अगला कदम

नई दिल्ली पश्चिमी सैन्य गठबंधन नाटो के महासचिव मार्क रुटे ने भारत पर अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के प्रभावों पर बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के टैरिफ की वजह से भारत ने  रूस से उसकी यूक्रेन स्ट्रैटेजी पर स्पष्टीकरण मांगा है. नाटो चीफ ने कहा कि ट्रंप की ओर से भारत पर लगा गए टैरिफ की वजह से रूस पर बड़ा असर पड़ रहा है. रूटे ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर  पुतिन से बात कर रहे हैं. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर सीएनएन से बात करते हुए रूटे ने कहा कि भारत पर ट्रंप के टैरिफ का रूस पर बड़ा असर हो रहा है. भारत की ओर से पुतिन से बात की जा रही है. पीएम मोदी रूस से यूक्रेन पर अपनी रणनीति स्पष्ट करने को कह रहे हैं क्योंकि भारत को टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. बता दें कि ट्रंप ने पिछले महीने भारत पर 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था. इसके साथ ही रूस से कच्चा तेल खरीदने की वजह से भारत पर अमेरिका ने 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी लगाया था. अमेरिकी सरकार का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से भारत पर टैरिफ लगाया गया है. अमेरिका का कहना है कि रूस से तेल खरीदने की वजह से यूक्रेन के खिलाफ रूस को मदद मिल रही है. ट्रंप ने इस दौरान नाटो देशों से भी चीन पर टैरिफ लगाने को कहा था कि ताकि रूस का तेल कम खरीदा जा सके.

संविधान के प्रहरी का संदेश: हिंदू समाज को कमतर आंकना स्वीकार नहीं – सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि वह हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 के प्रावधानों को दी गई चुनौतियों पर विचार करते समय सावधानी बरतेगा। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ 1956 अधिनियम के तहत उत्तराधिकार के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा, 'हिंदू समाज की जो संरचना पहले से मौजूद है, उसे कमतर मत कीजिए। एक अदालत के रूप में, हम आपको सावधान कर रहे हैं। एक हिंदू सामाजिक संरचना है और आप इसे गिरा नहीं सकते… हम नहीं चाहते कि हमारा फैसला किसी ऐसी चीज को नष्ट दे जो हजारों सालों से चली आ रही है।' शीर्ष अदालत ने कहा कि यद्यपि महिलाओं के अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन 'सामाजिक संरचना और महिलाओं को अधिकार देने के बीच संतुलन' होना चाहिए। पीठ ने व्यापक मुद्दों पर विचार किए जाने तक समाधान की संभावना तलाशने के लिए संबंधित पक्षों को उच्चतम न्यायालय के मध्यस्थता केंद्र में भेज दिया। याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनौती दिए गए प्रावधान महिलाओं के प्रति भेदभावपूर्ण हैं। सिब्बल ने कहा कि महिलाओं को केवल परंपराओं के कारण समान उत्तराधिकार के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने अधिनियम का बचाव करते हुए कहा कि यह 'समुचित ढंग से तैयार किया गया' अधिनियम है और आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता 'सामाजिक ढांचे को नष्ट' करना चाहते हैं। शीर्ष अदालत के समक्ष विचारणीय मुद्दा हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 और 16 है, जो बिना वसीयत के या बिना वसीयत के मरने वाली हिंदू महिलाओं की संपत्ति के हस्तांतरण को नियंत्रित करती है। अधिनियम की धारा 15 के अनुसार, जब किसी हिंदू महिला की बिना वसीयत के मृत्यु हो जाती है, तो उसकी संपत्ति उसके माता-पिता से पहले उसके पति के उत्तराधिकारियों को मिलती है।

रोहिणी आचार्य के आरोपों पर संजय यादव का बयान, जानें क्या कहा तेजस्वी के विश्वासपात्र ने

पटना पिछले कुछ दिनों से राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सियासी गलियारे में कई बातें चल रही है। अब तक केवल इस मामले में पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने प्रतिक्रिया दी थी। अब राजद के सांसद, तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव रोहिणी आचार्य के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि रोहिणी दीदी ने जो कहा, उसका संदर्भ हम सब भली-भांति समझते हैं। पार्टी पूरी तरह से एकजुट है, और किसी प्रकार का कोई भ्रम या मतभेद नहीं है। राजद में किसी तरह की गलतफहमी नहीं है। 'भाजपा को हराना और इस सरकार को उखाड़ फेंकना ही लक्ष्य' संजय यादव ने रोहिणी दीदी ने जो त्याग और बलिदान दिया है, उसे भाजपा और टोलर्स कभी नहीं समझ सकते हैं। उन्होंने जितना महान बलिदान दिया, उसे भी भाजपा के लोग नहीं समझ पाए हैं। जो लोग भ्रम फैलना चाहते हैं, उन्हें कोई फायदा नहीं होने वाला है। पार्टी और लालू परिवार पूरी तरह से एकजुट है। सबका एक ही लक्ष्य है कि भाजपा को हराना और इस सरकार को उखाड़ फेंकना। जल्दी ही जनता भाजपा और उनके सहयोगियों को जवाब दे दी। 'भ्रम फैला रही भाजपा, बिहार सब जानता है' संजय यादव ने कहा कि संजय यादव एक समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिन्हें पार्टी अध्यक्ष द्वारा एक जिम्मेदारी सौंपी गई है, जैसे कई और कार्यकर्ताओं को दी गई है। भाजपा चाहती है कि भ्रम फैले, लेकिन बिहार लोकतंत्र की जननी है। बिहार ने हमेशा लोकतंत्र को मजबूती दी है, और यह कभी नहीं सहेगा कि लोकतंत्र को चुनाव आयोग के जरिये कुचला जाए। संजय यादव ने भाजपा पर सीधा हमला करते हुए कहा कि भाजपा को सबसे ज्यादा डर बिहार से है, क्योंकि यह एकमात्र राज्य है जहां उन्हें आज तक मुख्यमंत्री नहीं मिला। इसीलिए वह तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। कभी दस-दस हजार रुपये बांट रहे हैं, कभी तीन-तीन बार प्रभारी बदल रहे हैं। इससे साफ है कि उन्हें बिहार को लेकर कितनी चिंता है। जानिए, रोहिणी ने क्या-क्या पोस्ट लिखा था 18 सितंबर को रोहिणी आचार्य ने कहा था कि वह लालू-तेजस्वी की जगह लेने की कोशिश करने वालों को देखना पसंद नहीं करती हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर आलोक कुमार के पोस्ट को शेयर किया था। इसके बाद संजय यादव के खिलाफ लोगों ने जमकर प्रतिक्रिया दी है। रोहिणी आचार्य ने जो शेयर किया है, उसमें लिखा है कि फ्रंट सीट सदैव शीर्ष के नेता-नेतृत्वकर्त्ता के लिए चिन्हित होती है और उनकी अनुपस्थिति में भी किसी को उस सीट पर नहीं बैठना चाहिए। वैसे अगर "कोई" अपने आप को शीर्ष नेतृत्व से भी ऊपर समझ रहा है, तो अलग बात है। 19 सितंबर को रोहिणी आचार्य ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को जीवनदान देने वाला फोटो-वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि जो जान हथेली पर रखते हुए बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने का जज्बा रखते हैं, बेखौफी-बेबाकी-खुद्दारी तो उनके लहू में बहती है.."। इधर, इस पोस्ट के कुछ ही घंटे बाद रोहिणी ने एक और पोस्ट किया। उसमें उन्होंने लिखा कि मैंने एक बेटी व बहन के तौर पर अपना कर्त्तव्य एवं धर्म निभाया है और आगे भी निभाती रहूंगी। मुझे किसी पद की लालसा नहीं है, न मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा है। मेरे लिए मेरा आत्म-सम्मान सर्वोपरि है। रोहिणी की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुए।

अमित शाह आज पटना में करेंगे रणनीतिक बैठक, धर्मेंद्र प्रधान सहित कई नेता शामिल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही भाजपा ने अपने चुनावी अभियान की रफ्तार तेज कर दी है. इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को पश्चिम चंपारण जिले के कुमारबाग पहुंच रहे हैं. यहां वे इंजीनियरिंग कॉलेज के ऑडिटोरियम में चंपारण और सारण संभाग के 10 संगठनात्मक जिलों के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे. उसके बाद पटना में 40 नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे. जिसमें बिहार भाजपा चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान भी शामिल होंगे. कार्यक्रम की रूपरेखा अमित शाह शुक्रवार दोपहर 2 बजे कुमारबाग पहुंचेंगे और शाम 4 बजे तक वहां रहेंगे. इस दौरान वे बेतिया-बगहा, रक्सौल, ढाका, मोतिहारी, गोपालगंज, सीवान उत्तर-दक्षिण और छपरा समेत 10 जिलों के 294 कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे. बैठक में सांसद, राज्यसभा सदस्य, विधायक, विधान परिषद सदस्य, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, जिलाध्यक्ष, प्रभारी और कोर कमेटी सदस्य सहित संगठन के अहम पदाधिकारी शामिल होंगे. सुरक्षा के कड़े इंतजाम गृह मंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. कुमारबाग इंजीनियरिंग कॉलेज के खेल मैदान में अस्थायी हेलीपैड बनाया गया है. स्थानीय पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती भी बढ़ा दी गई है, ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हो सके. शाम को पटना में अहम बैठक कार्यकर्ता संवाद के बाद अमित शाह बेतिया से पटना रवाना होंगे. यहां भाजपा प्रदेश कार्यालय में वे प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय स्तर के 40 वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनावी रणनीति पर मंथन करेंगे. इस बैठक में बिहार चुनाव के प्रभारी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहेंगे. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल के मुताबिक, इस बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव की दिशा और रणनीति पर गहन चर्चा होगी. 

बीजेपी को बड़ा झटका, मिर्धा परिवार के तेजपाल ने थामा कांग्रेस का हाथ

नागौर राजस्थान की राजनीति में मिर्धा परिवार का नाम हमेशा ही एक सियासी तूफान के पर्याय के रूप में लिया जाता रहा है। मारवाड़ के इस जाट बहुल इलाके में मिर्धा वंश की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कभी कांग्रेस को मजबूत करने वाले नाथूराम मिर्धा के वारिस आज भाजपा की ओर झुकते नजर आ रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में कुचेरा नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष तेजपाल मिर्धा ने अपने 500 से अधिक समर्थकों के साथ कांग्रेस को अलविदा कह दिया और भाजपा में शामिल हो गए। देर रात प्रगतिशील संगठन (कांग्रेस समर्थित) का दामन थाम लिया। यह कदम 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान हुए दृश्यों की याद दिला रहा है, जब तेजपाल ने गठबंधन प्रत्याशी हनुमान बेनीवाल के खिलाफ खुला विद्रोह किया था। लेकिन अब, ज्योति मिर्धा के खिलाफ पार्टी के संगठन की गुटबाजी के चलते उन्होंने फिर से कांग्रेस का दामन थाम लिया। यह घटना नागौर की सियासत को एक नया आयाम दे रही है। तेजपाल मिर्धा, जो खींवसर विधानसभा क्षेत्र से 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे, ने उस समय राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के हनुमान बेनीवाल के खिलाफ मैदान संभाला था। बेनीवाल, जो आरएलपी के संस्थापक हैं और 2019 के लोकसभा चुनाव में नागौर से जीते थे, ने ज्योति मिर्धा को हराया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-आरएलपी गठबंधन के तहत बेनीवाल को ही टिकट मिला, जिससे मिर्धा परिवार में खलबली मच गई। तेजपाल ने तब खुलेआम बेनीवाल के खिलाफ प्रचार किया और ज्योति मिर्धा का समर्थन किया। परिणामस्वरूप, अप्रैल 2024 में कांग्रेस ने तेजपाल सहित तीन नेताओं—सुखराम डोडवाडिया और भंवराराम सूबका—को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। निष्कासन के ठीक बाद, 12 अप्रैल 2024 को तेजपाल मिर्धा के आह्वान पर कुचेरा नगरपालिका के 21 पार्षदों, 8 पूर्व पार्षदों और 7 पंचायत समिति सदस्यों ने सामूहिक रूप से कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। लगभग 400 से अधिक कार्यकर्ताओं ने त्यागपत्र सौंपे, जिससे नागौर में कांग्रेस की नींव हिल गई। तेजपाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, "नागौर में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 8 में से 4 सीटें जीतीं। लोकसभा में भी हमारी स्थिति मजबूत थी, फिर आरएलपी से गठबंधन क्यों? हनुमान बेनीवाल कांग्रेस को तोड़ने का हथियार मात्र हैं।" एक साल बाद, तेजपाल ने फिर वही रास्ता चुना है। देर रात राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कांग्रेस पार्टी से निष्कासित तेजपाल को दुबारा पार्टी में शामिल कर लिया। डोटासरा ने उन्हें पार्टी में शामिल करते हुए धन्यवाद दिया। तेजपाल ने कहा कि दिन का भटका रात को घर वापिस आ जाना कोई बड़ी बात नहीं है। उनका मकसद परिवार की एकजुटता और ज्योति मिर्धा के प्रति वफादारी था। तेजपाल के साथ उनके 500 समर्थक भी भाजपा से वापिस कांग्रेस में शामिल हो गए, जो कुचेरा और आसपास के इलाकों में मिर्धा परिवार की मजबूत पकड़ को दर्शाता है। तेजपाल खुद कुचेरा नगरपालिका के दो बार निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं, और खींवसर में उनका प्रभाव निर्विवाद है। यह घटना मिर्धा परिवार की जटिल सियासी यात्रा का एक और अध्याय जोड़ती है। स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा, जिन्हें राजस्थान में 'बाबा' के नाम से जाना जाता है, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और किसान नेता थे। वे कांग्रेस के दिग्गज नेता थे, जिन्होंने 1977 के लोकसभा चुनाव में इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की एकमात्र सीट नागौर से जीती थी। नाथूराम की विरासत पर चलते हुए उनकी पोती डॉ. ज्योति मिर्धा 2009 में नागौर से कांग्रेस सांसद बनीं। लेकिन 2023 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा का दामन थाम लिया। दिल्ली में भाजपा मुख्यालय में शामिल होते हुए ज्योति ने कहा था कि "कांग्रेस गलत दिशा में जा रही है, राष्ट्र निर्माण में अवसर कम हैं।" भाजपा ने उन्हें तुरंत प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया और 2023 विधानसभा तथा 2024 लोकसभा में नागौर से टिकट दिया। ज्योति के इस कदम के बाद मिर्धा परिवार के अन्य सदस्यों ने भी भाजपा की ओर कदम बढ़ाए। मार्च 2024 में ज्योति के चाचा रिछपाल मिर्धा और उनके बेटे विजयपाल मिर्धा (डेगाना विधायक) ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा जॉइन कर ली। ज्योति ने इसे अपनी सफलता बताया, यह कदम भाजपा को और मजबूत करेगा। लेकिन परिवार में सब कुछ सुगम नहीं चला। अप्रैल 2024 में रिछपाल के भाजपा जॉइन करने के बावजूद तेजपाल ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देकर परिवार के साथ में डटे रहने का फैसला किया था। अब तेजपाल का वापिस कांग्रेस में आना परिवार की एकजुटता को मजबूत करने का संकेत नहीं दे रहा हैं। हालांकि, नागौर के भाजपा संगठन में मिर्धा परिवार और स्थानीय नेताओं के बीच गुटबाजी चरम पर है। ज्योति मिर्धा को टिकट मिलने के बाद से ही संगठन के पुराने नेताओं में असंतोष पनप रहा है। मिर्धा परिवार की प्रभुत्व की कोशिशों से स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता नाराज हैं। सूत्र बताते हैं कि ज्योति और संगठन के बीच खींचतान तेज हो गई है। हाल ही में नवंबर 2024 के विधानसभा उपचुनावों से पहले नागौर और सवाई माधोपुर से 14 कांग्रेस नेताओं के भाजपा में शामिल होने पर भी ज्योति की भूमिका प्रमुख रही, लेकिन संगठन ने इसे अपनी जीत बताया। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा, "भाजपा डर दिखाकर तोड़ रही है।" स्थानीय लोग कयास लगा रहे हैं कि यह अंत नहीं है। ज्योति मिर्धा और भाजपा संगठन के बीच जारी तनाव के चलते रिछपाल मिर्धा समेत अन्य परिवारजन फिर से कांग्रेस की ओर कभी लौट सकते हैं। एक स्थानीय किसान नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मिर्धा परिवार की राजनीति हमेशा उतार-चढ़ाव वाली रही है। नाथूराम बाबा की विरासत किसानों की आवाज है, लेकिन आज सत्ता की होड़ में बंट गई है। नागौर जिले के 9 विधानसभा क्षेत्रों में से 3 पर मिर्धा परिवार का कब्जा रहा है—खींवसर, डेगाना और नागौर। 2023 चुनावों में ही चार मिर्धाओं ने मैदान संभाला था: तेजपाल (कांग्रेस, खींवसर), विजयपाल (कांग्रेस, डेगाना), हरेंद्र (कांग्रेस, नागौर) और ज्योति (भाजपा, नागौर)। यह घटना न केवल कांग्रेस को मजबूत कर रही है, बल्कि आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में भी भाजपा पर असर डालेगी। कुचेरा जैसे छोटे शहरों में तेजपाल का प्रभाव विकास कार्यों से जुड़ा है—सड़कें, पानी की आपूर्ति और किसान योजनाओं … Read more

Gold-Silver Price: चांदी का बढ़ा भाव, सोना भी हुआ महंगा , जानें आज क्या है गोल्ड-सिल्वर का रेट

इंदौर  आज शुक्रवार 26 सितंबर को सोना-चांदी की कीमतें और बढ़ गईं। सोने की कीमतों में जहां 440 रुपए प्रति दस ग्राम और चांदी के भाव में 3000 रुपए प्रति किलो का उछाल आया है, वहीं 22 कैरेट सोने के दाम (Gold Rate Today) 1,05,450 रुपए, 24 कैरेट का भाव 1,15,030 रुपए और 18 ग्राम सोने का रेट 86,310 रुपए पर ट्रेंड कर रहा है। इसके अलावा 1 किलो चांदी का रेट (Silver Rate Today) 1, 43, 000 रुपए पर पहुंच गई है। patrika.com पर जानें आपके शहर में 18, 22 और 24 कैरेट सोने का भाव… क्या हैं ताजा रेट… आज शुक्रवार को सोने के ताजा भाव -18 कैरेट सोने का भाव: इंदौर और भोपाल में सोने का भाव 86,210 चल रहा है। -22 कैरेट सोने का ताजा भाव: भोपाल और इंदौर में आज 10 ग्राम सोने की कीमत (Gold Rate Today) 1,05 450/- रुपए पर ट्रेंड कर रही है। -24 कैरेट सोने का ताजा भाव: भोपाल और इंदौर में आज 10 ग्राम सोने की कीमत 1,14, 930 रुपए हो गई है। आज शुक्रवार को आपके शहर इंदौर और भोपाल में चांदी का लेटेस्ट रेट चांदी की बात करें तो आपके शहर भोपाल और इंदौर में 1 किलो चांदी की कीमत 1,43,000/ रुपए ट्रेंड कर रही है। यहां जानें कैसे चेक करें शुद्धता? सोना खरा है या नहीं? ISO (Indian Standard Organization) की ओर से सोने की शुद्धता पहचानने के लिए हॉल मार्क दिए जाते हैं। 24 कैरेट गोल्ड 99.9 प्रतिशत शुद्ध होता है और 22 कैरेट लगभग 91 प्रतिशत शुद्धता होती है। वहीं 24 कैरेट सोने में 1.0 शुद्धता (24/24=1.00) होनी चाहिए। वहीं 22 कैरेट गोल्ड में 9% अन्य धातु जैसे तांबा, चांदी, जिंक मिलाकर जेवर तैयार किए जाते हैं। 22 कैरेट सोने में 0.916 शुद्धता (22/24 = 0.916) होनी चाहिए। 24 कैरेट सोने के गहने? 24 कैरेट सोने के गहनों पर 999, 23 कैरेट पर 958, 22 कैरेट पर 916, 21 कैरेट पर 875 और 18 कैरेट पर 750 लिखा होता है। 24 कैरेट में कोई मिलावट नहीं होती, इसके सिक्के मिलते है, लेकिन 24 कैरेट सोने के आभूषण नहीं बनाए जा सकते, इसलिए ज्यादातर दुकानदार 18, 20 और 22 कैरेट सोना बेचते हैं। जानें क्या है चांदी पर हॉलमार्किंग का नियम सोने के बाद अब 1 सितंबर 2025 से चांदी की ज्वैलरी पर हॉलमार्किंग का नियम लागू कर दिया है। हालांकि चांदी के लिए हॉलमार्किंग अनिवार्य नहीं है। आप बिना हॉलमार्क वाली चांदी भी खरीद सकते हैं। 6 अंकों का यूनिक HUID कोड बता देगा चांदी कितनी शुद्ध हॉलमार्किंग के नियमों के तहत, चांदी पर 6 अंकों का यूनिक HUID कोड होगा। इससे तुरंत पता चल जाएगा कि आपका खरीदा हुआ गहना कितनी शुद्धता का है और वह असली है या नहीं। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने चांदी की शुद्धता के लिए 6 नए स्टैंडर्ड 800, 835, 900, 925, 970 और 990 तय किए हैं। जिल गहने पर 925 या 9250 अंकित है, तो इसका सीधा अर्थ है कि चांदी 92.5% शुद्ध है।

फूल रथ की परिक्रमा में छाया विवाद, बस्तर दशहरा की विजय रथ पर भी उठे सवाल

जगदलपुर विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में बुधवार को विवादों के बीच परंपरानुसार फूल रथ की परिक्रमा शुरू की गई. मां दंतेश्वरी का छत्र सजाए गए चार पहियों वाले फूल रथ पर रखा गया और प्रधान पुजारी रथ पर सवार होकर गोलबाजार के बीच मावली माता की परिक्रमा करते नजर आए. इस दौरान गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ मां के छत्र का स्वागत हुआ, वहीं पुलिस जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए सलामी भी दी. नवरात्रि के तीसरे दिन निभाई जाने वाली इस परिक्रमा से पहले बड़ा विवाद खड़ा हो गया. 60 साल बाद फिर से राजा-रानी को रथ पर बैठाने की मांग को लेकर बस्तर संभाग के विभिन्न गांवों से पहुंचे पटेल समुदाय अड़े रहे. उनका कहना था कि जब तक राजा-रानी रथ पर सवार नहीं होंगे, वे रथ नहीं खींचेंगे. देर रात तक यह विवाद चलता रहा. रथ घंटों तक खड़ा रहा. बस्तर कलेक्टर हरिस एस और बस्तर एसपी सलभ सिन्हा की समझाइश के बाद भी पटेल समुदाय अपने बात पर अड़ा रहा. तब बस्तर राज परिवार के सदस्य कमल चंद भंजदेव ने बारिश के बीच ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की. आखिरकार राजा के पुजारी के रथ पर मां दंतेश्वरी का छत्र रखने के बाद परिक्रमा पूरी हुई. छह दशकों से बंद है परंपरा गौरतलब है कि रियासत काल में यह परंपरा रही कि राजा-रानी मां दंतेश्वरी के छत्र के साथ रथ पर सवार होते थे. यह परंपरा 1965 के बाद से बंद हो गई. इस साल वर्तमान बस्तर रियासत प्रमुख कमलचंद भंजदेव की शादी के बाद मांग उठी कि उन्हें रथ पर बैठाया जाए, लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी. बुधवार की परिक्रमा में घंटों बाद देर रात रथ सिरहासार चौक से निकला और गोलबाजार, मिताली चौक होते हुए मां दंतेश्वरी मंदिर तक पहुंचा. यह रस्म आगामी 3 दिनों तक और इसी तरह निभाई जाएगी. सात सौ साल पुरानी है परंपरा माना जाता है कि बस्तर दशहरा की रथ परिक्रमा की शुरुआत 1410 ईसवी में महाराजा पुरुषोत्तम देव ने की थी. परंपरा और आस्था से जुड़ी यह रस्म हर साल दशहरे का मुख्य आकर्षण रहती है. हालांकि, विवाद अभी थमा नहीं है. पटेल समाज ने साफ संकेत दिए हैं कि 2 अक्टूबर को होने वाली विजय रथ परिक्रमा में वे राजा को रथपति की उपाधि दिलाने की मांग फिर से उठाएंगे. ऐसे में आशंका है कि दशहरे के इस बड़े आयोजन में विवाद एक बार फिर उठ सकता है.

एशिया कप का ऐतिहासिक फाइनल: IND vs PAK, बांग्लादेश का सपना टूटा

दुबई  साल 1984 में पहली बार एश‍िया कप खेला गया. उसके बाद एश‍िया कप के अब तक 17 सीजन हुए. 1984 से लेकर 2025 के बीच 41 सालों का फासला है. लेकिन ऐसा पहली बार होगा कि भारत-पाक‍िस्तान इस प्रत‍िष्ठ‍ित टूर्नामेंट के फाइनल में पहली बार एक-दूसरे के आमने-सामने होंगे. यानी कुल म‍िलाकर यह इस टूर्नामेंट के ल‍िहाज से ऐत‍िहास‍िक लम्हा है.   एशिया कप 2025 के मैच नंबर-17 में 25 सितंबर (गुरुवार) को बांग्लादेश और पाकिस्तान की टक्कर हुई. दुबई के दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में हुए सुपर-चार के इस मुकाबले में पाकिस्तानी टीम ने बांग्लादेश पर 11 रनों से जीत हासिल की. इस जीत के साथ ही पाकिस्तानी टीम ने फाइनल में प्रवेश कर लिया है. अब 28 सितंबर (रविवार) को होने वाले फाइनल में पाकिस्तान का सामना भारत से होगा. एशिया कप के 41 सालों के इतिहास में पहली बार भारत और पाकिस्तान के बीच फाइनल खेला जाएगा. मुकाबले में बांग्लादेश को जीत के लिए 136 रनों का टारगेट मिला था, लेकिन उसकी टीम 20 ओवर्स में 9 विकेट पर 124 रन ही बना सकी. वहीं यह यह इस टूर्नामेंट का सबसे बड़ा ट्व‍िस्ट (मोड़) माना जा रहा है. पाक‍िस्तान ने 25 स‍ितंबर को बांग्लादेश को सुपर-4 मुकाबले में हराकर भारत के ख‍िलाफ फाइनल खेलने के ल‍िए अपनी सीट बुक कर ली. वैसे टूर्नामेंट की शुरुआत से ही इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा था क‍ि दोनों देशों के बीच फाइनल होगा.  भारत और पाकिस्तान एश‍िया कप के 17वें संस्करण में पहली बार एशिया कप के फाइनल में भिड़ेंगे. भारत इस टूर्नामेंट का 8 बार फाइनल जीता है. इनमें साल 1984, 1988, 1990–91, 1995, 2010, 2016, 2018, 2023 शाम‍िल है. 2016 में एश‍िया कप टी20 फॉर्मेट था.  वहीं पाक‍िस्तान केवल दो बार साल 2000, 2012 और में यह कप जीता है. लेकिन यहां सबसे बड़ा ट्व‍िस्ट यही है कि दोनों ही देश कभी भी एक दूसरे के सामने फाइनल में नहीं आए हैं. श्रीलंका ने इस टूर्नामेंट को 6 बार 1986, 1997, 2004, 2008, 2014, 2022 में जीता है. 2022 का एश‍िया कप अभी की तरह टी20 फॉर्मेट रहा है.  पाकिस्तान और भारत कितनी बार एश‍िया कप के रनर-अप  भारतीय टीम एश‍िया कप जीतने के मामले में सबसे अग्रणी हैं. वहीं वो 3 बार रनर-अप भी रहा है. भारतीय टीम को 1997, 2004, 2008 फाइनल में हार भी मिली. तीनों ही बार उसे फाइनल में श्रीलंका ने च‍ित किया. अब पाकिस्तान के ख‍िलाफ भारत जब एश‍िया कप के फाइनल में खेलेगा, तो यह उसका 12वां एश‍िया कप फाइनल होगा. वहीं पाक‍िस्तान 1986, 2014, 2022 (टी20 फॉर्मेट) का रनर-अप रहा है.  1986 में एश‍िया कप भारत नहीं खेला था  टीम इंड‍िया ने 1986 का एशिया कप नहीं खेला था क्योंकि उस समय श्रीलंका के साथ क्रिकेट संबंध अच्छे नहीं थे. पाकिस्तान ने भी 1990–91 का टूर्नामेंट भारत के साथ राजनीतिक रिश्ते खराब होने की वजह से बॉयकॉट क‍िया था. इसी कारण 1993 का एशिया कप भी रद्द हो गया था. एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने बाद में तय किया कि 2009 से टूर्नामेंट हर दो साल में एक बार खेला जाएगा. ICC ने यह भी तय किया कि एशिया कप में खेले गए सभी मैचों को आधिकारिक वनडे मैच माना जाएगा. 2015 में ACC के आकार को छोटा करने के बाद ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल ) ने घोषणा की कि 2016 से एशिया कप बारी-बारी से वनडे और टी20 फॉर्मेट में खेला जाएगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अगला बड़ा टूर्नामेंट किस फॉर्मेट में है. इसी वजह से 2016 का एशिया कप पहली बार टी20 फॉर्मेट में खेला गया था. बाद में 2022 और अब‍ 2025 में यह टी20 फॉर्मेट में हुआ. 

पीएम मोदी का ऐलान: महिला रोजगार योजना के तहत 75 लाख महिलाओं को मिलेगा ₹10 हजार

पटना  बिहार में महिला सशक्तिकरण के लिए एनडीए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत आज से हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 सितंबर को सुबह 11 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस योजना का शुभारंभ किया.  इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा समेत कई मंत्री भी शामिल हुए.  योजना का मकसद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और स्वरोजगार के जरिए सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है. महिलाओं को मिलेगा 10 हजार रुपए इस योजना के तहत, बिहार के हर परिवार की एक महिला को अपनी पसंद के रोजगार के लिए ₹10,000 की पहली किस्त दी जाएगी. काम शुरू करने के 6 महीने बाद, मूल्यांकन के आधार पर, उन्हें अधिकतम ₹2 लाख तक की अतिरिक्त सहायता भी मिल सकती है. यह एक समुदाय-आधारित योजना है, जिसमें स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को वित्तीय मदद के साथ-साथ कार्य प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. ग्रामीण हाट-बाजारों का विकास इस योजना में उत्पादन के बाद उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए राज्य में ग्रामीण हाट-बाजारों को और विकसित करने की योजना भी शामिल है. यह कदम महिलाओं को उनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में मदद करेगा और उनकी आजीविका को बढ़ावा देगा. कौन उठा सकेगा योजना का लाभ? योजना का फायदा उठाने के लिए महिला को बिहार का स्थायी निवासी होना जरूरी है. आवेदक की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10+2, इंटरमीडिएट, आईटीआई, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या समकक्ष होनी चाहिए. आवेदक की उम्र 18 से 60 साल के बीच होनी चाहिए. यह योजना सभी धर्मों और जातियों के लिए है और इसमें ट्रांसजेंडर व्यक्ति भी शामिल हैं. आवेदक के परिवार में कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए और न ही आयकर दाता हो.  

समाज कल्याण मंत्री राजवाड़े का बयान: शराबबंदी पर कांग्रेस सरकार विफल

कोरबा प्रदेश की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े आज एक दिवसीय कोरबा प्रवास पर रहीं। इस दौरान उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित विशेषीकृत दत्तकग्रहण अभिकरण-सेवा भारती का अवलोकन किया और यहां निवासरत बच्चों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने यहां उपलब्ध सुविधाओं और बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई से चर्चा कर बच्चों को मिल रही सुविधाओं से अवगत हुईं। मंत्री राजवाड़े ने उनके प्रयासों की सराहना की। मंत्री राजवाड़े ने विभाग के गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि महतारी वंदन योजना से महिलाओं को लाभ मिला है। आर्थिक समृद्धि के साथ आत्मनिर्भर बनने की राह आसान हुई है और खुशहाली का वातावरण निर्मित हुआ है। इस दौरान विधायक कटघोरा प्रेमचंद पटेल, महापौर संजू देवी राजपूत, डीपीओ रेणु प्रकाश सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण तथा विभाग के अधिकारी, प्रतिनिधि उपस्थित थे। प्रदेश की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने कहा था कि शराब दुकान बंद करेंगे, लेकिन कांग्रेस के कार्यकाल में शराब की दुकानें बढ़ी हैं। हमने कोई वादा नहीं किया है लेकिन लोग शराब कम पिए इस दिशा में प्रशासन पूरा काम कर रहा है। कांग्रेस सरकार ने कोरोना काल जैसे समय में शराब बेची और दुकान बढ़ाईं। शराबबंदी को लेकर वादा करके जो कांग्रेस की सरकार बनी थी लेकिन वह कर नहीं पाए जिसके चलते फिर से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इसके लिए प्रशासन के द्वारा लगातार जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। ताकि लोग नशे से दूर रहें, नशे के चलते ही आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं जिस पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जा रहा है।