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युवराज का जन्म! वैभव सूर्यवंशी ने 14 साल में तोड़ा बाबर आजम का रिकॉर्ड, सबकी नजरें अब उस पर

नई दिल्ली टीम इंडिया के 'नन्हे शहजादे' वैभव सूर्यवंशी मैदान पर उतरते नहीं कि कोई ना कोई रिकॉर्ड टूट जाता है। फिलहाल वैभव ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हैं भारतीय अंडर-19 टीम तीन मैच की वनडे और दो मैच की टेस्ट सीरीज खेलने गई है। वनडे सीरीज में इंडिया अंडर-19 टीम ने ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 टीम का 3-0 से सूपड़ा साफ किया। वैभव सूर्यवंशी ने इस दौरान 124 रन बनाए, हालांकि वह तीसरे मैच में ज्यादा कुछ कमाल नहीं कर पाए और 20 गेंदों पर 16 रन बनाकर आउट हो गए। हालांकि इसके बावजूद वह पाकिस्तान के पूर्व कप्तान बाबर आजम का रिकॉर्ड तोड़ने में कामयाब रहे। जी हां, यह रिकॉर्ड है यूथ वनडे में 16 या उससे कम की उम्र में सबसे ज्यादा रन बनाने का। वैभव सूर्यवंशी 556 रनों के साथ बाबज आजम का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं और फिलहाल वह लिस्ट में दूसरे पायदान पर हैं। अब उनकी नजरें पाकिस्तान के ही हसन रजा का रिकॉर्ड तोड़ इतिहास रचने पर होगी। यूथ वनडे में 16 या उससे कम उम्र में सर्वाधिक रन हसन रजा: 727 रन वैभव सूर्यवंशी: 556 रन बाबर आजा: 552 रन नजमुल हुसैन शान्तो: 546 रन अहमद शहजाद: 510 रन वैभव सूर्यवंशी ने हाल ही में यूथ वनडे में सबसे अधिक छक्के का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किया था। यह रिकॉर्ड इससे पहले भारत के ही उनमुक्त चंद के नाम था जिन्होंने 38 छक्के जड़े थे, वह अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत के कप्तान भी रह चुके हैं। मगर अब 43 छक्कों के साथ वैभव पहले पायदान पर पहुंच गए हैं। वैभव सूर्यवंशी के यूथ वनडे करियर की बात करें तो अभी तक खेली 11 पारियों में उन्होंने यह 556 रन 50.54 की औसत और 151.91 के शानदार स्ट्राइक रेट के साथ बनाए हैं। अभी तो उनके करियर का आगाज हुआ है, जिस तरह वह खेल रहे हैं उसे देखकर लगता है कि वह यूथ क्रिकेट में सभी रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं।  

पहली बार हीरा नगर स्टेशन तक पहुंची इंदौर मेट्रो, दशहरे तक रेडिसन चौराहे तक ट्रायल रन जारी

 इंदौर  इंदौर मेट्रो ने शुक्रवार को अपने ट्रायल रन के दौरान पहली बार हीरा नगर स्टेशन तक का सफर तय किया। गांधी नगर स्टेशन से रवाना हुई मेट्रो 11.65 किमी की दूरी तय कर दोपहर चार बजे हीरा नगर स्टेशन पहुंची। इस मौके पर मेट्रो के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य भी मौजूद रहे, जो रेडिसन चौराहे से ट्रॉली में बैठकर हीरा नगर पहुंचे और फिर मेट्रो से सुपर कॉरिडोर स्टेशन तक यात्रा की। गौरतलब है कि 19 सितंबर को मेट्रो पहली बार गांधी नगर से एमआर-10 स्टेशन तक पहुंची थी। वहीं शुक्रवार को यह हीरा नगर स्टेशन तक चली। योजना के अनुसार दशहरे तक मेट्रो बापट चौराहा, मेघदूत उद्यान और विजय नगर चौराहा होते हुए रेडिसन चौराहे तक पहुंचेगी। मेट्रो संचालन शुरू करने से पहले भारतीय रेल के रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) की टीम इंदौर आकर इस हिस्से का निरीक्षण करेगी। अप्रूवल मिलने के बाद कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम दिसंबर में सुपर कॉरिडोर 3 से रेडिसन तक ट्रैक का परीक्षण करेगी। सीएमआरएस की मंजूरी के बाद ही गांधी नगर से रेडिसन चौराहे तक नियमित यात्री संचालन शुरू होगा। शुक्रवार का ट्रायल रन शेड्यूल     2:15 बजे : सुपर कॉरिडोर 3 स्टेशन से रवाना हुई मेट्रो     2:45 बजे : हीरा नगर स्टेशन पहुंची     3:30 बजे : हीरा नगर से निकली     4:00 बजे : सुपर कॉरिडोर 3 स्टेशन पर वापस पहुंची अब तक का ट्रायल रन सफर     19 सितंबर : गांधी नगर से एमआर-10 तक (8.24 किमी)     26 नवंबर : गांधी नगर से हीरा नगर तक (11.65 किमी)     2 अक्टूबर तक : रेडिसन चौराहे तक (15.76 किमी) फिलहाल यात्रियों के लिए चल रही मेट्रो (4.28 किमी) गांधी नगर (देवी अहिल्या बाई होलकर स्टेशन) से सुपर कॉरिडोर 3 (झलकारी बाई स्टेशन) तक। निर्माण कार्य की स्थिति सुपर कॉरिडोर 2 से रेडिसन चौराहे तक 11 मेट्रो स्टेशन निर्माणाधीन हैं। अगले डेढ़ माह में इनके कांक्रीट ढांचे और प्लेटफार्म का काम पूरा होगा। लिफ्ट, एस्केलेटर और प्रवेश-निकास मार्ग का काम भी तेजी से चल रहा है। अनुमान है कि दिसंबर के पहले सप्ताह तक स्टेशन पूरी तरह तैयार हो जाएंगे।  

होमगार्ड की नौकरी पर मप्र हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कॉलऑफ खत्म कर दिया गया

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने मध्य प्रदेश के होमगार्ड का कॉलऑफ समाप्त कर दिया है। करीब 10 हजार होमगार्ड ने 490 याचिकाएं दायर की थीं। जिन पर लंबी सुनवाई के बाद सुरक्षित किया गया आदेश सुनाते हुए न्यायालय ने उक्त आदेश दिया, जिससे अब अब प्रदेश के होमगार्ड को पूरे 12 माह रोजगार मिलेगा, साथ ही अन्य लाभ भी दिए जाएंगे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विकास महावर ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि कॉलऑफ प्रक्रिया और उससे संबंधित प्रविधान असंवैधानिक घोषित किए जाने योग्य है। दरअसल, आपातकाल में पुलिस की सहायता हेतु एक स्वामसेवी संगठन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए होमगार्ड बनाया गया था। शुरुआत में होमगार्ड को केवल आपातकालीन में ड्यूटी पर आह्वान में लिया जाता था। परंतु वर्ष 1962 के पश्चात संगठन से आपातकालीन के अलावा नियमित सेवाएं ली जाने लगीं और संगठन पुनर्गठन कर सैद्धांतिक रूप से नियमित कर दिया गया। 1962 से होमगार्ड नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें हर वर्ष दो से तीन माह के लिए कॉलऑफ कर दिया जाता था, जबकि संगठन के अन्य अधिकारियों और सैनिकों को नियमित कर पूरे वर्ष कार्य दिया जाता था। उक्त भेदभाव पूर्ण रवैये व होमगार्ड की बदतर सेवा शर्त के विरुद्ध मानव अधिकार आयोग में कई शिकायतें वर्ष 2008 में की गई। मानव अधिकार आयोग ने विस्तृत जांच पश्चात राज्य शासन को होमगार्ड अधिनियम के स्थान पर नोट विधान लाने व कॉलऑफ प्रक्रिया जोकि पूर्ण रूप से अनुचित है उसको खत्म करने की अनुशंसा की। मानवाधिकार आयोग की अनुशंसा पर कोई कार्रवाई शासन द्वारा नहीं की गई, जिस वजह से वर्ष 2011 होमगार्ड संगठन द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की गई, जिसे वर्ष 2011 में स्वीकार कर शासन को नए विधान बनाने हेतु आदेशित कर स्पष्ट रूप से कॉलऑफ समाप्त करने हेतु आदेश दिए गए। जिसके विरुद्ध शासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई परंतु वह आदेश यथावत रहा। इसी दौरान न्यायालय के निर्देशानुसार कमेटी का गठन किया गया व आलोच्य नियम व आदेश पारित किए गए व वर्ष में दो माह का कॉलऑफ का प्रविधान रखा गया, जबकि कॉलऑफ प्रक्रिया उच्च न्यायालय ने समाप्त कर दी थी। जिसके खिलाफ यह याचिकाएं दायर की गई थीं। जिसमें अंतरिम आदेश पारित पूर्व में पारित किये गये थे। याचिका के लंबित रहते शासन ने नियम में बदलाव कर तीन वर्ष में दो माह का कॉलऑफ का प्रविधान किया जिसे भी न्यायालय में अमेंडमेंट कर चैलेंज किया गया। मामले में हुई विस्तृत सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से काल आफ प्रक्रिया को संविधान के अनुकछेद 14, 21,23 के विपरीत बताते हुए न्यायालय को बताया की होमगार्ड संगठन पूर्व में एक स्यामसेवी संगठन था। परंतु अब ये एक नियमित संगठन बन चुका है व होमगार्ड समस्त कार्य कर रहे हैं, जो संगठन के ही अन्य नियमित सैनिक व पुलिस कर्मी द्वारा किया जाता है, ऐसी दशा में उनसे भेदभाव नहीं किया जाना चाहिये एवं पूरे वर्ष कार्य पर रखा जाना चाहिए, जिससे वे अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें। राज्य शासन द्वारा याचिकाओं पर आपत्ति ली गई व कहा गया कि होमगार्ड संगठन एक स्वयंसेवी संगठन है एवं इन्हें पूरे वर्ष कार्य पर नहीं रखा जा सकता। विस्तृत सुनवाई पश्चात हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कॉलऑफ प्रक्रिया समाप्त करने के आदेश देते हुए सभी होमगार्ड जवानों को पूरे वर्ष कार्य पे रखे जाने और समस्त लाभ प्रदान करने के आदेश दिए।  

सरकार की बड़ी पहल: अब अप्रैल से चलेगा स्कूलों का नया सत्र

जयपुर राजस्थान में सरकारी स्कूलों का शैक्षणिक सत्र जुलाई के बजाय 1 अप्रैल से शुरू किया जा सकता है। शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र में बदलाव को लेकर कवायद शुरू कर दी है। इस मामले में शिक्षा विभाग के सचिव कृष्ण कुणाल ने हाल में एक बैठक भी बुलाई थी जिसमें शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत को अप्रैल  से करने के लिए शिविरा पंचांग में बदलाव और शिक्षा समय-सारणी में आवश्यक समायोजन पर चर्चा की गई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बदलाव इस मकसद से किया जा रहा है ताकि सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों की प्रतिस्पर्धा में टिक सकें। राजस्थान में निजी स्कूलों का शैक्षणिक सत्र अप्रैल से ही शुरू हो जाता है। जबकि सरकारी स्कूल में मार्च में परीक्षा खत्म होने के बाद स्कूल फिर से खुलने के बीच लंबा गैप आ जाता है। इस बीच निजी स्कूल वाले कई बच्चों को सरकारी स्कूल से तोड़कर अपने स्कूलों में दाखिला करवा लेते हैं। इसके साथ ही सत्र पहले शुरू होने से छात्रों का कोर्स भी समय पर पूरा हो सकेगा। बैठक में सुझाव दिया गया कि 15 अप्रैल से 1 मई के बीच कम‑से‑कम 20 % अध्याय पूरा किया जाए, यदि पुस्तकों की समय पर आपूर्ति हो सके। साथ ही राज्य में परीक्षा समय-सारणी को CBSE के साथ करने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। इसके लिए परीक्षा पेटर्न में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। जिसमें इंटरनल असेसमेंट्स को घटाने व विषय परीक्षाओं को मार्च 15 तक समाप्त करने जैसे उपाय शामिल हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में कई चुनौतियां भी हैं । राजस्थान के सरकारी स्कूलों में नई कॉपी और किताबों की प्रिंटिंग का काम जुलाई तक पूरा होता है। इतनी बड़ी संख्या में पुस्तकों और कॉपियों को पहले प्रिंट करवाने के लिए बजट भी पहले चाहिए होगा। यह केंद्र सरकार से समग्र शिक्षा अभियान के तहत मिलता है। तो इसके लिए केंद्र सरकार से मांग की जाएगी कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत राजस्थान को जो राशि नए वित्त वर्ष में जारी की जाए उसकी जानकारी पहले से दे दी जाए ताकि उसके अनुसार अपने खर्च पूर्व में ही निर्धारित कर सकें। पूर्व में भी हुए प्रयास लेकिन विफल रहे शिक्षक संगठनों ने इस प्रस्ताव पर संशय जताया है। आल राजस्थान स्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल ने कहा कि पूर्व में भी यह प्रयास हुए लेकिन सफल नहीं हुए। पूर्व शिक्षक प्रकाश मिश्रा ने कहा कि अधिकांश ग्रामीण छात्र जुलाई के पहले स्कूल नहीं आते, और सत्र की शुरुआत अप्रैल से करना व्यवहार में चुनौतीपूर्ण है। हालांकि विभाग का कहना है कि इस निर्णय को सभी पक्षों से सलाह करके लिया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण के साथ रोज़गार सृजन: पंजाब में ज़रूरतमंदों को बंटे ई-रिक्शा

पंजाब  पंजाब में भगवंत मान सरकार ने एक बार फिर जनता को भरोसा दिलाया है कि उसकी प्राथमिकता सबसे पहले आम इंसान की भलाई है. मलोट हल्के में कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने 15 जरूरतमंद परिवारों को ई-रिक्शा भेंट कर न सिर्फ रोजगार का साधन दिया, बल्कि आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ने का सुनहरा अवसर भी प्रदान किया. यह पहल उन गरीब और मजदूर वर्गों के लिए नई उम्मीद की किरण है जो लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे थे. पर्यावरण संरक्षण का रखा गया विशेष ध्यान डॉ. बलजीत कौर ने इस अवसर पर कहा कि मान सरकार का लक्ष्य राज्य से गरीबी और बेरोजगारी को समाप्त करना है. सरकार चाहती है कि कोई भी परिवार बेसहारा न रहे और हर मजदूर व गरीब परिवार को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिले. ई-रिक्शा योजना इस सोच की स्पष्ट मिसाल है, जो लोगों को रोज़गार के साथ-साथ इज्जत और आत्मसम्मान से जीने का अवसर देती है. इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पर्यावरण संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा गया है. ई-रिक्शा न केवल प्रदूषण-मुक्त साधन हैं बल्कि बढ़ते ईंधन खर्च से भी राहत दिलाते हैं. इस तरह मान सरकार ने रोजगार के साथ-साथ पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में भी सराहनीय कदम उठाया है. यह सोच दिखाती है कि सरकार दीर्घकालीन विकास की ओर अग्रसर है.   गरीब और मजदूर वर्ग को मजबूत करना ही असली विकास इस दौरान लाभार्थियों ने ई-रिक्शा मिलने पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और डॉ. बलजीत कौर का दिल से धन्यवाद किया. उनका कहना था कि पहले उनके पास रोजगार का कोई स्थायी साधन नहीं था, लेकिन अब वे अपने परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें आसानी से पूरी कर पाएंगे. इस पहल से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और समाज में जीने का एक नया हौसला मिला है. मान सरकार द्वारा चलाई जा रही इस योजना ने यह साबित कर दिया है कि गरीब और मजदूर वर्ग को मज़बूत करना ही असली विकास है. पंजाब सरकार का यह प्रयास दिखाता है कि सरकार केवल वायदे नहीं कर रही बल्कि धरातल पर काम कर रही है. यह कदम राज्य के हज़ारों परिवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा. ई-रिक्शा वितरण के इस अवसर पर डॉ. बलजीत कौर ने भरोसा दिलाया कि मान सरकार आगे भी गरीबों और मज़दूरों के लिए ऐसी योजनाएं लाती रहेगी. पंजाब के हर नागरिक को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना ही इस सरकार का मुख्य उद्देश्य है. यही वजह है कि आज मान सरकार को “जनता की सरकार” कहा जा रहा है, जो हर वर्ग के हित में दिन-रात कार्य कर रही है.

गांवों में नई तकनीक की बयार: पंजाब सरकार बनाएगी आधुनिक पंचायत घर और सेवा केंद्र

पंजाब  रंगला पंजाब के सपने को साकार करने की दिशा में पंजाब की भगवंत मान सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है. 125 करोड़ की लागत से 500 नए आधुनिक पंचायत घर और कॉमन सर्विस सेंटर (आम सेवा केंद्र) बनाने की घोषणा की गई है. यह सिर्फ ईंटों और सीमेंट की इमारतें नहीं हैं, बल्कि ये गांवों की तकदीर बदलने की नींव हैं. ग्रामीण विकास और पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने जानकारी देते हुए कहा कि 2,800 से अधिक आबादी वाले प्रत्येक गांव में एक पंचायत घर और एक सामान्य सेवा केंद्र होगा, जो बैठकों और डिजिटल सेवाओं की डिलीवरी के लिए बुनियादी ढांचे की कमी को दूर करेगा. सीएम भगवंत मान ने इससे पहले फतेहगढ़ साहिब से इस परियोजना का शुभारंभ किया था. उन्होंने आशा व्यक्त की कि पंचायत घर पंचायतों को एक साथ आने और अपने गांवों की बेहतरी के लिए सामूहिक निर्णय लेने के लिए एक उपयुक्त मंच प्रदान करेंगे.   रंगला पंजाब के वादे को पूरा करने की दिशा में मील पत्थर डिजिटल बुनियादी ढांचे के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंद ने कहा कि सामान्य सेवा केंद्र ग्रामीण नागरिकों के लिए सरकारी योजनाओं के लिए पंजीकरण, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट और कई अन्य सेवाओं को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. एक पंचायत घर के निर्माण की लागत 20 लाख रुपये होगी, जबकि एक सामान्य सेवा केंद्र 5 लाख रुपये की लागत से बनाया जाएगा. यह परियोजना सिर्फ सुविधाओं की बात नहीं करती, बल्कि यह गांवों के आत्म-सम्मान को भी बढ़ाती है. यह गांवों को ‘स्मार्ट’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. मान सरकार का यह फैसला ‘रंगला पंजाब’ के वादे को पूरा करने की दिशा में एक और मील पत्थर है. गांव में पंचायतों के पास एक सम्मानजनक और आधुनिक जगह हो, जहां वे बैठकर गांव के विकास के लिए योजनाएं बना सकें. यह गांवों में निर्णय लेने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा. यह पंजाब के गांवों के लिए एक नई उम्मीद और गौरव का प्रतीक है.   गांवों में आएगी डिजिटल क्रांति इन नए पंचायत घरों के साथ-साथ ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ (आम सेवा केंद्र) भी बनाए जा रहे हैं. ये केंद्र गांवों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी सेवाओं, डिजिटल साक्षरता और अन्य ऑनलाइन सुविधाओं को सुलभ बनाएंगे. ये केंद्र ग्रामीणों को शहरों के बराबर सुविधाएं देंगे. यह कदम ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच के डिजिटल अंतर को कम करेगा. ये केंद्र गांवों में ही सारी सुविधाएं उपलब्ध कराएंगे. इससे गाँव के लोग आसानी से सरकारी सेवाओं का लाभ उठा पाएंगे और उनका जीवन सरल हो जाएगा. यह परियोजना सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह पंजाब को फिर से उसका गौरव लौटाने का सपना है. यह सपना है कि पंजाब का हर गाँव आत्म-निर्भर बने, हर गांव में आधुनिक सुविधाएं हों, और हर गाँव का व्यक्ति खुद को सशक्त महसूस करे.

यूएई से भारत आया BKI का दुर्दांत आतंकी परमिंदर पिंडी, कई राज्यों की पुलिस को था तलाश

फिरोजपुर  पंजाब पुलिस के एक शीर्ष अधिकारी ने शनिवार को बताया कि कई जघन्य अपराधों में शामिल बब्बर खालसा इंटरनेशनल के एक आतंकवादी को संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पित किया गया है। पुलिस महानिदेशक गौरव यादव ने बताया कि विदेश में मौजूद आतंकवादी हरविंदर सिंह उर्फ ​​रिंदा और हैप्पी पासिया के करीबी सहयोगी परमिंदर सिंह उर्फ ​​पिंडी को केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी से लाया गया है।   यादव ने कहा कि पिंडी गुरदासपुर के बटाला में पेट्रोल बम हमलों, हिंसक हमलों और जबरन वसूली समेत कई जघन्य अपराधों में शामिल था। यादव ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि बटाला पुलिस के अनुरोध पर जारी रेड कॉर्नर नोटिस (आरसीएन) पर तेजी से कार्रवाई करते हुए, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम 24 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात गई और विदेश मंत्रालय तथा यूएई के अधिकारियों के साथ समन्वय किया। यादव ने कहा कि सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस टीम आरोपी को भारत लाने में सफल रही।

12 साल बाद इंदौर का BRTS अब इतिहास, एजेंसी को तोड़ने की मिली मंजूरी

इंदौर इंदौर के विवादित बीआरटीएस कॉरिडोर की आखिरकार उलटी गिनती शुरू हो गई है। मेयर इन काउंसिल ने इसे तोड़ने के लिए औपचारिक मंजूरी जारी कर दी है और संभवतः बुधवार से एजेंसी इसे तोड़ने का काम शुरू करेगी। इसके टूटने से निगम को ढाई करोड़ की राशि मिलेगी। डिवाइडर बनाने में 12 करोड़ करीब खर्च होंगे। बीआरटीएस 300 करोड़ में बना था     इंदौर बीआरटीएस साल 2013 में शुरू हुआ था। तब प्रारंभिक लागत 90 करोड़ मानी गई लेकिन बनते-बनते यह 300 करोड़ हो गई। इंदौर में यह 11.47 किमी लंबा है। इसमें हर दिन 60 हजार से अधिक यात्री सफर करते थे। इसमें हर 500 मीटर की दूरी पर एक बस स्टैंड बनाया गया। निरंजनपुर से राजीव गांधी प्रतिमा चौराहे तक यह कॉरिडोर अभी मौजूद है, जिसे अब तोड़ा जाएगा। इसमें दोनों ओर की रैलिंग के साथ ही बस स्टॉप को हटाया जाएगा और बीच में डिवाइडर बनाएंगे, जिससे रोड चौड़ा होगा। कई जंक्शन पर फ्लाईओवर बनाने की भी योजना है। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे तोड़ने की घोषणा की थी। बाद में हाईकोर्ट ने भी इस पर मुहर लगाई। महापौर की बैठक में लगी मुहर शुक्रवार को महापौर पुष्यमित्र भार्गव द्वारा महापौर सभाकक्ष में मेयर इन कौंसिल की बैठक में इसका फैसला लिया गया। बीआरटीएस कॉरिडोर इंदौर की आरसीसी बीम, एमएस रेलिंग एवं बस शेल्टर्स को तोड़ने के संबंध में प्राप्त ऑफर रेट की स्वीकृति प्रदान की गई, जिसके तहत उपरोक्त कार्य को हटाने के साथ ही निविदा शर्त अनुसार निर्माण कार्य भी प्रारंभ करने के संबंध में निर्देशित किया गया। बैठक में यह भी लिए गए फैसले महापौर भार्गव ने बताया कि इंदौर देश में स्वच्छता का पाठ सिखाता है, इंदौर स्वच्छता का मॉडल है, जिसके परिणामस्वरूप इंदौर शासन के निर्देशनुसार स्वच्छता गुरु बनकर इंदौर के समीप देपालपुर नगर परिषद को स्वच्छता का पाठ पढ़ाएगा और स्वच्छता अभियान में सहयोग करेगा। इसके लिए जल्द नगर निगम एवं देपालपुर परिषद के मध्य एमओयू भी साइन होगा, ताकि इंदौर देपालपुर को भी स्वच्छ व सुंदर बनाने में सहयोग कर सके। भविष्य में शहर की फायर सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए, 70 मीटर ऊंचाई के अग्निशमन कार्यार्थ हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म क्रय रखरखाव के साथ क्रय करने की भी स्वीकृति प्रदान की गई, यह विशेष फायर टेंडर फिनलैंड से असेंबल होकर पहुंचेगे। बैठक में अमृत 2.0 योजना के अंतर्गत राशि 10.78 करोड़ की लागत से बिलावली तालाब तथा राशि 3.24 करोड़ की लागत से छोटा सिरपुर तालाब के विकास एवं जीर्णोद्धार संबंधित कार्यों की निविदा दर एवं अनुबंध करने की स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में निगमायुक्त दिलीपकुमार यादव, महापौर परिषद सदस्य राजेन्द्र राठौर, अश्विनी शुक्ल, निरंजनसिंह चौहान, नंदकिशोर पहाडिया, अभिषेक शर्मा बबलु, राजेश उदावत, मनीष शर्मा मामा, अपर आयुक्त, विभाग प्रमुख व अन्य उपस्थित थे। कोर्ट के आदेश के सात माह बाद अब तोड़ा जाएगा     2.5 करोड़ रुपये से अधिक राशि मिलेगी निगम को     12 वर्ष का सफर अब थमेगा     3 एजेंसियां मिलकर बनाएंगी डिवाइडर     90 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान था बीआरटीएस निर्माण पर, जो बढ़कर 300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया     बीआरटीएस मार्ग में जहां फ्लाईओवर प्रस्तावित हैं, वहां फिलहाल डिवाइडर बनाने के बजाय रेलिंग लगाई जाएगी     12 करोड़ रुपये खर्च आएगा बीआरटीएस मार्ग पर डिवाइडर बनाने में निगम को एक और नवाचार की तैयारी बीआरटीएस तोड़ने के बाद मार्ग में बनाए जाने वाले डिवाइडर में पौधारोपण होगा। इन पौधों तक पानी पहुंचाने के लिए विशेष पाइप लाइन डिवाइडर में बिछाई जाएगी। एक बटन दबाते ही 11 किमी लंबे मार्ग में बनाए डिवाइडरों में रोपे गए पौधों तक पानी पहुंच जाएगा। निरंजनपुर से शुरू होकर राजीव गांधी प्रतिमा तक जाता है बीआरटीएस     11.47 किमी लंबा है बीआरटीएस     21 बस स्टैंड हैं बीआरटीएस पर     14 क्रास चौराहे आते हैं मार्ग पर     500 मीटर की दूरी पर एक बस स्टैंड बनाया है     40 नए बस स्टैंड बनाए जाएंगे इस मार्ग पर डिवाइडर बनाने का काम भी चलेगा     बीआरटीएस तोड़ने वाली एजेंसी बुधवार से काम शुरू कर देगी। शुक्रवार को हुई एमआइसी की बैठक में दो करोड़ 55 लाख 56 हजार 860 रुपये के प्रस्ताव पर मुहर लग गई है। बीआरटीएस तोड़ने के साथ ही मार्ग पर डिवाइडर बनाने का काम भी चलेगा ताकि यातायात बाधित न हो। -पुष्यमित्र भार्गव, महापौर, इंदौर

BSNL का बड़ा कदम: स्वदेशी 4G नेटवर्क लॉन्च, 97,000+ साइटों पर सेवा शुरू

नई दिल्ली  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज BSNL का 4G नेटवर्क (5G रेडी) लॉन्च कर दिया है। ये नेटवर्क देशभर में 97 हजार साइटों पर रोलआउट किया गया है। यह नेटवर्क पूरी तरह से स्‍वदेशी तकनीक पर तैयार हुआ है। इसके साथ ही अब भारत उन टॉप-5 देशों में शामिल हो जाएगा, जो अपनी टेलिकॉम टेक्नोलॉजी और इक्पिमेंट्स खुद बनाते हैं। डेनमार्क, स्वीडन, साउथ कोरिया और चीन के बाद भारत पांचवां देश है। इसके साथ ही अब भारत में मौजूद सभी टेलिकॉम ऑपरेटर 4G नेटवर्क से लैस हो गए हैं। बता दें कि Jio, Airtel और Vi (Vodafone Idea) पहले ही देश में अपने 4G और 5G नेटवर्क लॉन्च कर चुके हैं। बता दें कि भारत में बीएसएनएल के 9 करोड़ से ज्यादा एक्टिव वायरलेस (मोबाइल) सब्सक्राइबर्स हैं। टावर लगभग 37,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए बीएसएनएल की रजत जयंती के अवसर पर, प्रधानमंत्री ने 97,500 से ज्यादा मोबाइल 4G टावरों का भी उद्घाटन किया, जिनमें बीएसएनएल के 92,600 4G टेक्नोलॉजी साइट भी शामिल हैं। ये टावर लगभग 37,000 करोड़ रुपये की लागत से स्वदेशी तकनीक से बनाए गए हैं। ये टावर सौर ऊर्जा पर काम करते हैं। 5G पर आसानी से शिफ्ट हो जाएगा नेटवर्क बीएसएनएल का स्वदेशी 4G नेटवर्क क्लाउड-बेस्ड और फ्यूचर रेडी है और इसे आसानी से 5G में अपग्रेड किया जा सकता है। इसे 5G में अपग्रेड करने के लिए हार्डवेयर में बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, केवल सॉफ्टवेयर अपडेट से ही यह 5G पर आसानी से शिफ्ट हो जाएगा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने डिजिटल भारत निधि के माध्यम से भारत के 100% 4G सैचुरेशन नेटवर्क का भी अनावरण किया, जिसके तहत 29,000 से 30,000 गांवों को मिशन-मोड प्रोजेक्ट के तहत जोड़ा गया है।  

हिरासत मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने दी कड़ी चेतावनी, पुलिस की लापरवाही पर तुरंत कार्रवाई जरूरी

भोपाल  मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत में 26 साल के युवक की मौत के मामले में जिम्मेदार दो पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार इन अधिकारियों की गिरफ्तारी के आदेश की अनदेखी नहीं कर सकती.  पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि अगर अधिकारी उन्हें गिरफ्तार करने में विफल रहते हैं, तो कोर्ट उन दोनों के खिलाफ आरोप तय कर सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए, ताकि उनके सामने न्याय हो सके. कोर्ट को सूचित किया गया कि मई 2025 से दोनों अधिकारियों का वेतन रोक दिया गया है, और SP को आदेश मिल चुका है कि उन्हें निलंबित कर दिया गया है.  जस्टिस महादेवन की टिप्पणी जस्टिस महादेवन ने सवाल उठाया कि अधिकारी 15 अप्रैल से अपने पता नहीं लगाया जा सका, जबकि अगस्त में उन्होंने अग्रिम जमानत दाखिल की. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति बनी रही तो CBI निदेशक के खिलाफ भी अवमानना की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है. कोर्ट का अवमानना संबंधी नोट जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि गिरफ्तारी के निर्देश के बाद अग्रिम जमानत की गुहार करना अपने आप में अवमानना है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि 15 मई के निर्देश के बावजूद अब तक गिरफ्तारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. आगामी निर्देश और हलफनामा कोर्ट ने कहा कि सात अक्टूबर तक आदेश का अनुपालन करते हुए हलफनामा दाखिल किया जाए, और अगर अनुपालन नहीं होता है, तो 8 अक्टूबर को मध्य प्रदेश के DGP भी कोर्ट में उपस्थित होंगे.