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क्वेटा में बड़ा आतंकी हमला: सैन्य ठिकाने पर फिदायीन हमला और गोलीबारी, 10 जवान शहीद

 क्वेटा पाकिस्तान के क्वेटा शहर में स्थित सेना के मुख्यालय आज भयंकर धमाका हुआ है. पूर्वी क्वेटा में फ्रंटियर कॉर्प्स मुख्यालय के पास मंगलवार को एक ज़ोरदार विस्फोट के बाद अचानक गोलीबारी हुई. विस्फोट की आवाज मॉडल टाउन और आसपास के इलाकों में सुनी गई, जिसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है. विस्फोट से आस-पास के घरों और इमारतों की खिड़कियां टूट गईं. पाकिस्तान की न्यूज वेबसाइट डॉन के अनुसार इस धमाके में अबतक 10 लोगों की मौत की खबर है, जबकि 32 लोग घायल हो गए हैं. मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है. बलूचिस्तान के स्वास्थ्य मंत्री बख्त मुहम्मद काकर और स्वास्थ्य सचिव मुजीब-उर-रहमान ने सिविल अस्पताल क्वेटा, बीएमसी अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में आपातकाल की घोषणा कर दी है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सभी सलाहकार, डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ ड्यूटी पर हैं. बचाव सूत्रों ने पुष्टि की है कि घायलों और मृतकों के शवों को सिविल अस्पताल क्वेटा भेज दिया गया है. सूत्रों के अनुसार धमाके के बाद शहर में अफरा-तफरी का माहौल हो गया है. धमाके के बाद मौके पर फायरिंग की भी आवाज सुनी गई है. इसके बाद लोग सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं. धमाके के बाद घटनास्थल से धुएं का गुबार निकलते हुए देखा गया.  शुरुआती रिपोर्ट में पता चला है कि धमाका बेहद तेज था, लेकिन धमाके की स्पष्ट वजह सामने नहीं आ पाई है.  इलाके में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है. सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया है और कॉम्बिंग ऑपरेशन चला रही है.  धमाके की तस्वीरें वहां लगी एक सीसीवीटी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है. इसमें धमाके की आवाज और आग की लपटें देखी जा सकती हैं.  पुलिस अधिकारियों ने बताया कि विस्फोट का पता लगाने के लिए जांच जारी है. बचाव दल और पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं, जबकि तलाशी अभियान के लिए इलाके को सील कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सभी डॉक्टर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल कर्मचारी ड्यूटी पर हैं.  क्वेटा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी है. ये स्थान चरमपंथी हिंसा का प्रमुख केंद्र रहा है. यहां पर अलगाववादी और चरमपंथी हिंसा की घटनाएं आम है. इसमें लश्कर-ए-झंगवी (LeJ) और इस्लामिक स्टेट खोरासान प्रोविंस (ISKP) के नाम आते हैं.  इसके अलावा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) भी इस इलाके में सक्रिय है. हाल-फिलहाल में बलूच अलगाववादी हमले भी यहां बढ़े हैं.

स्वामिनारायण मंदिर जोधपुर: जानें इस भव्य मंदिर की खास बातें और इतिहास

जोधपुर  जोधपुर के कालीबेरी में स्थित बीएपीएस स्वामिनारायण मंदिर का मूर्ति प्रतिष्ठा महोत्सव 25 सितंबर को संपन्न हुआ. मंदिर का लोकार्पण बीएपीएस के वर्तमान अध्यक्ष, परम पूज्य महंतस्वामी महाराज के कर-कमलों द्वारा बड़ी धूमधाम और वैदिक परंपरा के अनुसार किया गया. इस ऐतिहासिक अवसर पर देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु, संत, स्वयंसेवक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे. यह मंदिर राजस्थान की पुण्यभूमि पर परम पूज्य प्रमुखस्वामी महाराज के एक शुभ संकल्प का मूर्त स्वररूप है, जिसे परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने पूर्ण किया. यह सिर्फ एक आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि भारतीय स्थापत्य कला, अध्यात्म और मानव सेवा का अद्भुत मिश्रण है और साथ ही हजारों स्वयंसेवकों के नि:स्वार्थ सेवा भाव और समर्पण का भी प्रतीक है. BAPS: एक वैश्विक सामाजिक और आध्यात्मिक आंदोलन इस मंदिर का निर्माण बीएपीएस (बोचासणवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामिनारायण) संस्था द्वारा किया गया है. बीएपीएस, जिसकी स्थापना 1907 में ब्रह्मस्वरूप शास्त्रीजी महाराज ने भगवान श्री स्वामिनारायण द्वारा प्रबोधित वैदिक अक्षरपुरुषोत्तम सिद्धांत के आधार पर की थी, आज वैश्विक स्तर पर समाज सेवा, मानव उत्कर्ष और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के कार्यों के लिए प्रसिद्ध है.   बीएपीएस की वैश्विक उपलब्धियां:     1700 से अधिक मंदिर और 5025 केंद्र.     55,000 समर्पित स्वयंसेवकों का विशाल समुदाय.     भव्य अक्षरधाम मंदिर.     1200 से अधिक सुशिक्षित संत.     180 से अधिक मानव सेवा की विभिन्न प्रवृत्तियों का सफल संचालन. दिल्ली अक्षरधाम मंदिर, अमेरिका का रॉबिंसविले अक्षरधाम मंदिर, आबू धाबी का बीएपीएस हिन्दू मंदिर और जोधपुर का स्वामिनारायण मंदिर – यह मंदिर केवल आध्यात्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि समाज सेवा और मानव उत्कर्ष के जीवंत केंद्र भी हैं. संकल्प से सिद्धि: मंदिर निर्माण की यात्रा जोधपुर मंदिर की आधारशिला करीब एक दशक से भी पहले रखी गई थी. वर्ष 2014 में जब परम पूज्य महंतस्वामी महाराज ने इस स्थान पर विचरण किया, उस समय यहाँ केवल रेतीली भूमि और जोधपुरी छित्तर पत्थरों की खानें थीं. दशकों से इस क्षेत्र में संतों के सतत विचरण ने हजारों लोगों के जीवन को सकारात्मक दिशा दी और जोधपुर में सत्संग का विस्तार किया. शिलान्यास और आधार शिलान्यास विधि: 2019 में सद्गुरु वरिष्ठ संत पूज्य ईश्वरचरनदास स्वामीजी के सान्निध्य में संपन्न हुई थी. इस अवसर पर राजस्थान के पूर्व मेयर रामेश्वर दाधीच, हाई कोर्ट जस्टिस विनीत माथुर, श्री बड़ा रामद्वारा सूरसागर के महंत रामप्रसादजी महाराज, और मेयर घनश्याम जी ओझा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. ‘सेवा ही हमारा जीवन’: स्वयंसेवकों का निस्वार्थ समर्पण इस भव्य मंदिर के निर्माण में सात वर्षों का समय लगा, जो हजारों स्वयंसेवकों, संतों और स्थानीय समुदाय के लोगों के अतुलनीय योगदान का परिणाम है. सेवा और निष्ठा के मुख्य बिंदु: कारीगरों का योगदान: पिंडवाड़ा, सागवाड़ा, भरतपुर, जोधपुर, जयपुर और आस-पास के क्षेत्रों से 500 से अधिक कारीगरों ने इस दिव्य धाम को साकार करने में सहयोग दिया. संस्था ने उनके आवास, भोजन, स्वास्थ्य सेवा और सांस्कृतिक संवर्धन के लिए उचित सुविधाएँ प्रदान कीं, साथ ही उन्हें व्यसन-मुक्त जीवन जीने के लिए प्रेरित किया. उच्च शिक्षित स्वयंसेवक: निर्माण से लेकर लोकार्पण तक इस सेवाकार्य में जुड़ने वाले कई दीक्षित संत आईआईटी, आईआईएम, स्नातक और पीएचडी हैं, जिन्होंने अपनी उच्च शिक्षा, सुनहरे भविष्य को समाज और राष्ट्र निर्माण की सेवा में समर्पित कर दिया. मंदिर महोत्सव सेवा: मूर्ति प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान, 35 जितने विभिन्न सेवा विभाग संचालित किए गए, जिनमें हजारों स्वयंसेवकों ने भाग लिया. ये स्वयंसेवक न केवल जोधपुर और राजस्थान से, बल्कि जयपुर, दिल्ली, राजकोट, पोरबंदर आदि शहरों से अपनी नौकरी व व्यवसाय से अवकाश लेकर सेवा के लिए पहुंचे.   महिला भक्तों की पहल: महोत्सव से पूर्व जोधपुर सत्संग मंडल की महिला भक्तों ने घर-घर जाकर भगवान नीलकंठवर्णी की मूर्ति की पधरवानी करने का संकल्प लिया. करीब 2100 घरों में जाकर उन्होंने लोगों को मंदिर की महिमा बताई और उनके परिवार की मंगल कामना के लिए प्रार्थना की. इसके साथ साथ मंदिर की सफाई, मंदिर की सजावट, पत्थरों की घिसाई के काम में भी महिला स्वयं सेवकों का अमूल्य योगदान रहा.   युवा एवं युवती तालीम केंद्र के युवाओं का योगदान: मंदिर महोत्सव की सेवा के दौरान गुजरात से युवा तालीम केंद्र, युवती तालीम केंद्र, जयपुर युवक मंडल और भी अन्य केंद्रों में से सौ से भी अधिक युवक युवती इस अद्भुत कार्य में अपनी सेवा देने के लिए जोधपुर पहुंचे.  

जगदलपुर : केंद्रीय जेल के बंदियों को दी गई स्वरोजगार संबंधी जानकारी

जगदलपुर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर रजत महोत्सव के तहत विशेष कार्यक्रम के तौर पर जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र जगदलपुर द्वारा केन्द्रीय जेल जगदलपुर में सोमवार को बढ़ई, दर्जी, लोहारी, जूट बैग, मूर्तिकार, प्रिटिंग प्रेस का कार्य सीख रहे बंदियों को भविष्य में स्वरोजगार के क्षेत्र में स्वयं का कुछ व्यवसाय प्रारंभ करने हेतु विभाग द्वारा जमीनी स्तर पर प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम एवं प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। क्षेत्रीय व्यापार एवं उद्योग केन्द्र के मुख्य महाप्रबंधक श्री अजीत सुंदर बिलुंग के द्वारा योजनाओं की जानकारी देने सहित भविष्य में आयमूलक गतिविधियों से जुड़कर समाज के विकास में चलने बंदियों को प्रेरित किया गया। इस दौरान केन्द्रीय जेल के अधिकारी-कर्मचारियों सहित उद्योग विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

नई सड़क से कम होगी दिल्ली से गुरुग्राम की दूरी, क्या होगा रूट?

नई दिल्ली  दिल्ली में आम जनता के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है ट्रैफिक जाम की. पीक टाइम यानि ऑफिस और स्कूल टाइमिंग में तो सड़कों पर हद से ज्यादा ट्रैफिक मिलता है. मगर जाम की इस समस्या से निपटने के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब AIIMS से महिपालपुर बाइपास और गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड को जोड़ने वाला 20 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा. इस मेगा प्रोजेक्ट से दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे (NH-48), महरौली-गुरुग्राम रोड और दोनों रिंग रोड्स पर ट्रैफिक का बोझ कम होने की उम्मीद है. NHAI ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसके डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के लिए बोली आमंत्रित की गई, जो 15 अक्टूबर तक तैयार हो सकती है. इस कॉरिडोर की अनुमानित लागत करीब 5 हजार करोड़ रुपये है. हालांकि अंतिम लागत DPR के बाद ही तय होगी. यह कॉरिडोर एम्स/आईएनए से शुरू होकर नदिरा मार्ग, महरौली-गुरुग्राम रोड और गुरुग्राम-फरीदाबाद रोड को जोड़ेगा, जो दिल्ली-गुरुग्राम हाईवे के समानांतर चलेगा. इस प्रोजेक्ट का मकसद है गुरुग्राम से गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा जाने वाले ट्रैफिक को डायवर्ट करना. यह सिग्नल-फ्री कॉरिडोर साउथ दिल्ली की मुख्य सड़कों पर दबाव कम करेगा, जिससे NH-48, MG रोड और इनर-आउटर रिंग रोड्स पर राहत मिलेगी. कहां से होकर गुजरेगा यह कॉरिडोर? यह 20 किमी लंबा कॉरिडोर एम्स/आईएनए से शुरू होगा और ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू और नेल्सन मंडेला मार्ग को पार करते हुए वसंत विहार, वसंत कुंज और अर्जनगढ़ होते हुए फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड पर खत्म होगा. ‘ट्रैफिक मैनेजमेंट सबसे ज्यादा जरूरी’ सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) के चीफ साइंटिस्ट और ट्रैफिक इंजीनियरिंग डिवीजन के हेड, एस. वेलमुरुगन ने बताया- दिल्ली-गुरुग्राम रूट की क्षमता पहले ही चरम पर है. यह कॉरिडोर ट्रैफिक लोड को कम करने में मददगार होगा. उन्होंने सुझाव दिया कि DPR बनाते समय निर्माण के दौरान वैकल्पिक रास्तों पर ट्रैफिक लोड और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था पर ध्यान देना होगा. खासकर दिल्ली सेक्शन और RTR इलाके के आसपास के ऑफ-रैंप्स को सावधानी से प्लान करना जरूरी हैय वेलमुरुगन ने यह भी कहा कि अगले पांच सालों में नोएडा/जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली एयरपोर्ट पर कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन गुरुग्राम की कनेक्टिविटी को बेहतर करना जरूरी है. साउथ दिल्ली से गुरुग्राम यह एलिवेटेड कॉरिडोर न सिर्फ दिल्ली की सड़कों को जाम से राहत देगा, बल्कि साउथ दिल्ली और गुरुग्राम के बीच यात्रा को और आसान बनाएगा. सिग्नल-फ्री रास्ते और रणनीतिक रूप से बनाए गए ऑफ-रैंप्स के साथ यह प्रोजेक्ट दिल्ली की ट्रैफिक व्यवस्था में नया आयाम जोड़ेगा. लेकिन निर्माण के दौरान ट्रैफिक मैनेजमेंट और वैकल्पिक रास्तों की प्लानिंग पर खास ध्यान देना होगा, ताकि दिल्लीवासियों को और परेशानी न हो.  

मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से जुड़ी 1,500 से अधिक बालिकाएं

मिशन शक्ति 5.0 कन्या पूजन समारोहों में शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर जोर, मिशन शक्ति की प्रतिबद्धता को मिली मजबूती लखनऊ नवरात्रि के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रहे मिशन शक्ति 5.0 अभियान ने नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को एक नई ऊंचाई प्रदान की है। महिला एवं बाल विकास विभाग के आह्वान पर पूरे उत्तर प्रदेश में 30 सितंबर एवं 1 अक्टूबर को अष्टमी-नवमी तिथियों पर आयोजित कन्या पूजन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। अष्टमी के दिन पूरे प्रदेश में 5 लाख से अधिक कन्याओं का सम्मानजनक पूजन किया गया। साथ ही इन आयोजनों में 1,500 से अधिक बालिकाओं को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से जोड़ा भी गया है। मिशन शक्ति 5.0 के तहत बालिकाओं का कन्या पूजन धार्मिक परंपरा का निर्वहन भर ही नहीं रह गया है, बल्कि समाज में कन्या जन्म को उत्सव के रूप में स्थापित करने वाली सामाजिक क्रांति का प्रतीक भी बना है। बीते 20 सितंबर को शुरु हुए मिशन शक्ति 5.0, महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं आत्मनिर्भरता को मजबूत करने का व्यापक अभियान बन गया है। कन्या पूजन के माध्यम से योगी सरकार ने समाज को गहरा संदेश भी दिया, जिसके तहत बेटियों को परिवार और समाज की आधारशिला के रूप में बताया गया है। विभिन्न जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में महिला कल्याण बेबी रानी मोर्या, राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला, प्रभारी मंत्री, जिलाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में ये कार्यक्रम आयोजित हुए।  बालिकाओं को दी गई महिला केंद्रित योजनाओं की जानकारी, कन्या सुमंगला योजना के फॉर्म भरवाए गए अष्टमी के दिन विभिन्न विभागों और संस्थाओं के माध्यम से पूरे प्रदेश में 5 लाख से अधिक कन्याओं का सम्मानजनक पूजन किया गया। इन आयोजनों का मूल उद्देश्य कन्या जन्म को बोझ न मानकर आशीर्वाद के रूप में देखने को प्रेरित किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, लोकगीतों और संवाद सत्रों के जरिए बालिकाओं को शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य एवं आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित किया गया।  कार्यक्रम स्थल पर विशेष काउंटरों पर कन्या सुमंगला योजना के फॉर्म भरवाए गए, जो मुख्यमंत्री योगी के मार्गदर्शन में बालिकाओं को जन्म से उच्च शिक्षा तक 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। परिवारों को योजनाओं की विस्तृत जानकारी देकर अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया गया। मिशन शक्ति के तहत बाल विवाह, शिक्षा वंचना और स्वास्थ्य उपेक्षा जैसी कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाया गया, जो नारी सुरक्षा के मूल सिद्धांत को मजबूत करता है। महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव लीना जौहरी ने कहा कि कन्या पूजन केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज को संदेश है कि बेटियां हमारी शक्ति और भविष्य की धरोहर हैं। मिशन शक्ति हर कन्या को सुरक्षित-सशक्त बनाने का संकल्प है। वहीं महिला कल्याण निदेशक संदीप कौर ने कहा कि यह समारोह कन्याओं के प्रति सकारात्मक सोच का विस्तार करेगा। आज हमें यह समझने की आवश्यकता है कि हर बेटी अपने साथ परिवार और समाज के लिए उज्ज्वल भविष्य की संभावना लेकर आती है। मिशन शक्ति बेटियों के सशक्तिकरण की यह लौ पूरे प्रदेश में प्रज्वलित कर रहा है।

गर्मियों से मिली राहत, नोएडा में बारिश ने बदल दिया मिजाज

नई दिल्ली  नोएडा में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है. मंगलवार सुबह से ही आसमान पर घने काले बादलों का डेरा रहा और दिन चढ़ते ही नोएडा के क्षेत्रों में झमाझम बारिश ने दस्तक दे दी. यह बारिश जहां गर्मी और उमस से जूझ रहे लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आई, वहीं सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम से जनजीवन कुछ घंटों के लिए अस्त-व्यस्त हो गया. तापमान में गिरावट, लोगों ने ली राहत की सांस बीते कई दिनों से बढ़ती गर्मी और चिपचिपी उमस से लोग परेशान थे. मंगलवार की बारिश ने तापमान में अचानक गिरावट दर्ज कराई और मौसम को सुहाना बना दिया. अधिकतम तापमान जहां 34-35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा, वहीं न्यूनतम तापमान 26-29 डिग्री तक पहुंच गया. हल्की बारिश का सिलसिला रहेगा जारी मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक 2 अक्टूबर से बारिश में कमी आएगी, हालांकि आसमान में बादल बने रहेंगे. 3 और 4 अक्टूबर को मौसम आंशिक रूप से बादलभरा रहेगा, जबकि 5 अक्टूबर तक साफ आसमान देखने को मिलेगा. ह्यूमिडिटी 55 से 85 प्रतिशत तक बनी रहने की संभावना है, जिससे हल्की ठंडक के साथ वातावरण में नमी और ताजगी बनी रहेगी.   किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है बारिश विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की विदाई से पहले आई यह बारिश किसानों के लिए भी लाभकारी साबित हो सकती है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां देर से बोई गई फसलें अभी पानी की मांग कर रही थी.

राष्ट्रीय खिलाड़ी से प्रशिक्षक तक का सफर, मिशन शक्ति अभियान से मिली नई उड़ान

मिशन शक्ति- 5.0 – सम्मान, उपलब्धियों और समर्पण से नारी सशक्तीकरण की नई इबारत लिख रही ज्योति सिंह लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को मजबूत करने वाला मिशन शक्ति 5.0 अभियान नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है। महिला सुरक्षा की दिशा में इस अभियान की भावना को साकार कर रही हैं वाराणसी की रहने वाली ज्योति सिंह। मार्शल आर्ट्स के माध्यम से लाखों बालिकाओं और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाली ज्योति सिंह महिला सुरक्षा के क्षेत्र में प्रेरणास्त्रोत बनी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महिलाओं की गरिमा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए 20 सितंबर को मिशन शक्ति 5.0 की शुरुआत की। सीएम की मंशानुरूप ज्योति जैसी महिलाएं इस दिशा में जमीनी स्तर पर क्रांति ला रही हैं। महिला सुरक्षा की दिशा में ज्योति सिंह के कार्य और उपलब्धियां नारी शक्ति की उस ताकत की गवाही है, जो सुरक्षा से लेकर स्वावलंबन तक का सफर तय करती है। महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग ने दिया अवसर मिशन शक्ति अभियान के तहत महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग से जुड़कर ज्योति सिंह आज एक समर्पित मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक और समाजसेवी के रूप में जानी जाती हैं। वर्ष 2012 में झांसी में ब्लैक बेल्ट प्राप्त करने के बाद उन्होंने लड़कियों को सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण देना शुरू किया, लेकिन उन्हें 2020 में शुरु हुए मिशन शक्ति के पहले फेस में ब्रेक मिला। आज वे थर्ड डिग्री ब्लैक बेल्ट धारक हैं और अपनी संस्था ‘मानव एकडमी ऑफ मार्शल आर्ट’ के जरिए लाखों बच्चों व महिलाओं को आत्मविश्वासी बनाने का कार्य कर रही हैं। मिशन शक्ति 5.0 के उद्देश्यों यानि नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को ज्योति ने अपनी जिंदगी का मूलमंत्र बना लिया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मिशन शक्ति अभियान ने यूपी की महिलाओं और बालिकाओं में नया आत्मविश्वास जगाया है। आज वे अपने अधिकारों को समझ रही हैं और खुद की सुरक्षा के लिए सक्रिय हो रही हैं। सेल्फ डिफेंस अब उनके लिए सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि जीवन की कुंजी बन गई है। खेल जगत में ज्योति की उपलब्धियां असाधारण हैं खेल जगत में ज्योति की उपलब्धियां असाधारण हैं, जो मिशन शक्ति के स्वावलंबन को और मजबूती प्रदान कर रही है। वे नेशनल लेवल पर लगातार चार वर्षों 24वीं, 25वीं, 26वीं और 27वीं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में विजेता रहीं। 2018 और 2019 में ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में दो स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर अपनी धाक जमाई। 2020 से 2024 तक मानव वंदनसेवी ऑफ मार्शल आर्ट्स द्वारा उन्हें बेस्ट कोच चुना गया, जबकि 2023 में भारतीय कराटे संघ ने उन्हें मान्यता प्राप्त कोच के रूप में सम्मानित किया। वर्ष 2025 में भारतीय कराटे संघ से थर्ड डैन ब्लैक बेल्ट की उपाधि प्राप्त कर ज्योति ने एक नया मुकाम हासिल किया। ये उपलब्धियां न केवल व्यक्तिगत सफलता हैं, बल्कि मिशन शक्ति 5.0 के तहत बालिकाओं को खेलों में बढ़ावा देने वाले प्रयासों का हिस्सा हैं, जहां 1.5 लाख से अधिक लड़कियां विधानसभा स्तर पर स्पोर्ट्स कॉम्पिटिशन में भाग ले रही हैं। विभिन्न स्तरों पर योगी सरकार द्वारा किया गया सम्मानित महिलाओं की सुरक्षा में योगदान देने के लिए समय-समय पर ज्योति को विभिन्न स्तरों पर योगी सरकार द्वारा सम्मानित भी किया गया है। 2019 में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें सम्मानित किया, जबकि उसी वर्ष मानव वंदनसेवी ऑफ मार्शल आर्ट्स ने बेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर का खिताब दिया। 2024 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने प्रशस्ति पत्र देकर उनका सम्मान किया। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने उन्हें सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया। 2025 में जिला प्रशासन झांसी ने खेल और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें एक दिन के लिए अधिकारी नियुक्त कर विशेष सम्मान दिया। ये सम्मान मिशन शक्ति के सम्मान के पहलू को दर्शाते हैं, जहां महिलाओं की गरिमा को बढ़ावा दिया जा रहा है। फीमेल सेफ्टी के क्षेत्र में ज्योति का योगदान 2021 से अब तक अत्यंत सराहनीय रहा है। उन्होंने झांसी और आसपास के जिलों में बालिकाओं को व्यावहारिक सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण दिया। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी या फिर बाल सुधार गृह ज्योति योगी सरकार की मदद से हर जगह जाकर बालिकाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाती हैं। 'बेटी है तो बचेगी' और 'पावर एंजल्स' जैसे अभियानों से जुड़कर वे महिलाओं को सशक्त बना रही हैं। ज्योति का दृष्टिकोण स्पष्ट है। ज्योति कहती हैं कि हर लड़की और महिला केवल शिक्षा में ही आगे न बढ़े, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी मजबूत बने। आत्मरक्षा आत्मविश्वास और स्वतंत्रता की कुंजी है। ज्योति कहती हैं कि बालिकाएं सेल्फ डिफेंस को लेकर सकारात्मक हैं और बड़े जुनून के साथ अपनी रक्षा के गुर सीख रही हैं।  मिशन शक्ति 5.0 ने उत्तर प्रदेश को महिलाओं के सशक्तिकरण में अग्रणी राज्य बना दिया है। ज्योति सिंह जैसी महिलाएं इस अभियान की रीढ़ हैं, जो नारी सुरक्षा से लेकर स्वावलंबन तक की राह पर चलकर लाखों जीवन बदल रही हैं। उनकी सफलता की कहानी न केवल प्रेरणा देती है, बल्कि साबित करती है कि योगी सरकार का विजन जमीनी हकीकत में बदल रहा है।

कोई किसी से प्यार करे लेकिन… अनिल विज का ‘आई लव मोहम्मद’ पर विवादित बयान

चंडीगढ़  देश के कई राज्यों में 'आई लव मोहम्मद' ट्रेंड को लेकर हो रही हिंसा पर हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे देश की शांति भंग करने की सुनियोजित साजिश करार दिया। विज ने कहा कि किसी का किसी से प्यार होना बिल्कुल स्वाभाविक है, इसमें कोई समस्या नहीं, लेकिन यदि इस बहाने से कानून-व्यवस्था को धक्का पहुंचाने की कोशिश हो, तो यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। उन्होंने आगे कहा कि किसी का किसी से इश्क हो, इसमें किसी को कोई एतराज नहीं, लेकिन लगता है कि टूलकिट के जरिए देश में अस्थिरता फैलाने के नए-नए हथकंडे आजमाए जा रहे हैं। लखनऊ में 'आई लव मोहम्मद' के होर्डिंग लगवाना और कांग्रेस की इसमें कथित संलिप्तता, ये सब एक बड़ी षड्यंत्र की कड़ियां नजर आ रही हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस ट्रेंड का फायदा उठाकर पथराव, गोलीबारी या दंगे भड़काए जाते हैं, तो यह राष्ट्र की शांति और कानूनी ढांचे के साथ खिलवाड़ होगा, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राहुल गांधी गाली-गलौज करने वाला 'बच्चा' कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा भाजपा को 'वोट चोर' और अब 'पेपर चोर' ठहराने पर अनिल विज ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कुछ बच्चे बचपन से ही फूहड़ भाषा बोलने के आदी हो जाते हैं और वे कभी शालीन शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर पाते। राहुल गांधी जो चाहें बोलें, यह उनकी अपनी समझ है, लेकिन ऐसी भाषा देश की राजनीति के स्तर को नीचा दिखाती है। विज ने तंज भरे लहजे में कहा कि राहुल बार-बार वोट चोरी का हल्ला मचाते हैं, लेकिन आज तक उन्होंने एक भी ऐसा ठोस उदाहरण पेश नहीं किया जहां वास्तव में वोट चोरी हुई हो। कांग्रेस को लेकर तो ढेर सारी बातें कही जा सकती हैं। इंदिरा गांधी का चुनाव ही फर्जी मतदान के आरोप में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था, और उसी के बाद उन्होंने आपातकाल थोप दिया। कांग्रेस का पूरा इतिहास ही लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया से छेड़छाड़ का रहा है। ट्रेंड पर कई राज्यों में मचा बवाल कानपुर में 'आई लव मोहम्मद' बैनर को लेकर भड़का विवाद उत्तर प्रदेश के कई शहरों तक फैल चुका है। उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को उपद्रवियों पर कठोर कार्रवाई करनी पड़ी और बुलडोजर तक चलाना पड़ा। सोमवार को महाराष्ट्र में भी इसी मुद्दे पर हंगामा हुआ। इस विवाद के जवाब में काशी के संतों ने 'आई लव महादेव' के पोस्टर जारी कर दिए हैं। इस पूरे प्रकरण पर उलेमा और विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी भिन्न-भिन्न हैं।      

किसानों को राहत: खेत से रेत हटाने के लिए सरकार देगी ₹7200 प्रति एकड़ सहायता

चंडीगढ़ पंजाब के बाढ़ प्रभावित लोगों को बड़ी राहत देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जिलों में ‘जिसदा खेत, उसदी रेत’ योजना के तहत किसानों को अपने खेतों से रेत निकालने के लिए 7200 रुपए प्रति एकड़ देने की घोषणा की। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान चर्चा को समेटते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत किसानों को अपने खेतों से बाढ़ के कारण जमा हुई रेत, मिट्टी निकालने और यदि वे चाहें तो उसे बेचने की अनुमति दी गई है। बाढ़ के कारण डूबे गांवों के कई खेतों में रेत और मिट्टी जमा हो गई है, इसलिए यह निर्णय लिया गया है। बाढ़ पीड़ितों को बड़ी राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने एसडीआरएफ नियमों के तहत फसल नुकसान के मुआवजे में बढ़ोतरी की है। 26 से 33 प्रतिशत फसल नुकसान के लिए मुआवजा 2000 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति एकड़, 33 से 75 प्रतिशत फसल नुकसान के लिए 6800 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 10,000 रुपए प्रति एकड़, और 75 से 100 प्रतिशत फसल नुकसान के लिए 6800 रुपए से बढ़ाकर 20,000 रुपए प्रति एकड़ किया गया है। 20,000 रुपये प्रति एकड़ के मुआवजे में राज्य सरकार 14,900 रुपए का योगदान देगी, जो देश में सबसे अधिक है। वह कल (मंगलवार) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर राज्य के विभिन्न मुद्दों को उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी तरह से क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत के लिए 1.20 लाख रुपए और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए मुआवजा 6500 रुपए से बढ़ाकर 35,100 रुपए कर दिया गया है। बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए विशेष गिरदावरी पहले से ही तय समय के भीतर चल रही है। राज्य सरकार उन किसानों को प्रति हेक्टेयर 47,500 रुपए (18,800 रुपए प्रति एकड़) देगी, जिनकी जमीन नदियों में बह गई है। पंजाब एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि रचनात्मक आलोचना का हमेशा स्वागत है क्योंकि आलोचक ही सच्चे दोस्त होते हैं जो सरकार के कामकाज में कमियों को उजागर करते हैं। उन्होंने बाढ़ के दौरान निस्वार्थ सामाजिक सेवा करने वालों का विशेष रूप से धन्यवाद करते हुए कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने पुनर्वास के लिए शानदार काम किया है। राशन और अन्य बाढ़ राहत सामग्री अन्य राज्यों के वालंटियर्स द्वारा भी प्रदान की गई, जो वास्तव में प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुनर्वास के लिए गांवों को गोद लिया है। सेना और एनडीआरएफ ने राहत कार्यों के लिए अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं।  अब पुनर्वास का समय है और राज्य सरकार इस संबंध में एक विधेयक पेश कर रही है। राज्य सरकार दीवाली के त्योहार से पहले 15 अक्टूबर से बाढ़ प्रभावित लोगों को मुआवजा वितरित करना शुरू कर देगी। पंजाब सरकार ने राज्य के सेम प्रभावित क्षेत्रों के लिए पहले ही 4.50 करोड़ रुपए जारी कर दिए हैं। मौसम की भविष्यवाणी के लिए उन्नत तकनीक विकसित करने के लिए आईआईटी खड़गपुर और बेंगलुरु के साथ-साथ थापर यूनिवर्सिटी, पटियाला को भी शामिल किया गया है। थापर यूनिवर्सिटी ऐसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को रोकने और कम करने के लिए मौसम संबंधी भविष्यवाणियों के लिए अपना सैटेलाइट लॉन्च करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भारत सरकार से बाढ़ के मुआवजे को बढ़ाकर 50,000 रुपए प्रति एकड़ करने की मांग की है। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि प्रधानमंत्री के पास महत्वपूर्ण मुद्दों पर राज्यपाल से मिलने का समय है, जबकि लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने राहत कार्यों के लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात की मांग की, लेकिन प्रधानमंत्री के पास चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए समय नहीं है। इस गंभीर संकट की घड़ी में भी केंद्रीय मंत्री राज्य सरकार और लोगों की मदद करने के बजाय केवल बाढ़ पर्यटन के लिए तस्वीरें खिंचवाने के लिए राज्य में आए। प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1600 करोड़ रुपए भी राज्य के साथ एक क्रूर मजाक है। उन्होंने कहा कि यह भी सुनने में आ रहा है कि राज्य को एसडीआरएफ से मिलने वाले 240 करोड़ रुपए भी इसमें शामिल कर दिए गए हैं। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री चुनावी राज्यों जैसे बिहार में बड़े राहत पैकेज की घोषणा कर रहे हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सौतेली मां जैसा व्यवहार का कड़ा विरोध करता है और वह मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री के सामने ये मुद्दे उठाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ऐसी नीच चालों से लोगों के जनादेश को दरकिनार कर रही है, जो पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने ‘अघोषित राष्ट्रपति शासन’ लागू किया हुआ है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि केंद्र सरकार संविधान के मूल संघीय ढांचे को नष्ट कर रही है, जो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। विपक्षी नेता के विरोध पर कड़ा प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने पूछा कि राज्य सरकार द्वारा स्थापित रंगला पंजाब फंड का विरोध करने के पीछे उनका क्या तर्क है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने यह फंड सी.एस.आर. और अन्य सामाजिक संस्थाओं, जो बाढ़ पीड़ितों की मदद करना चाहती हैं, से योगदान प्राप्त करने के लिए स्थापित किया है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि विपक्षी नेता उन कारणों से, जिनसे वे अच्छी तरह वाकिफ हैं, इस संबंध में आधारहीन बयान जारी कर रहे हैं।  

नई शुरुआत: भारत-ईएफटीए समझौते से मिलेगा वैश्विक बाजार का फायदा

नई दिल्ली  भारत और चार देशों के यूरोपीय समूह ईएफटीए के बीच मुक्त व्यापार समझौता बुधवार से लागू होगा। इसके तहत भारत को इस समूह से 15 साल में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता मिली है। इसके अलावा स्विजरलैंड की घड़ियों, चॉकलेट और कटे एवं पॉलिश किए गए हीरों जैसे कई उत्पादों पर कम या शून्य शुल्क की अनुमति दी गई है। यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के सदस्य आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विजरलैंड हैं। इस समझौते पर 10 मार्च 2024 को हस्ताक्षर किए गए थे। घरेलू ग्राहकों को घड़ियां, चॉकलेट, बिस्कुट और घड़ियां जैसे उच्च-गुणवत्ता वाले स्विजरलैंड के उत्पाद कम कीमतों पर उपलब्ध होंगे क्योंकि भारत इस व्यापार समझौते के तहत इन वस्तुओं पर सीमा शुल्क को 10 वर्ष में चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर देगा। संघ ने 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। समझौते के कार्यान्वयन के बाद 10 वर्ष के भीतर 50 अरब अमेरिकी डॉलर तथा अगले पांच वर्ष में 50 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता है जिससे भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। यह भारत द्वारा अब तक हस्ताक्षरित किसी भी व्यापार समझौते में सहमत अपनी तरह की पहली प्रतिबद्धता है। इस समझौते को आधिकारिक तौर पर व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौता (टीईपीए) कहा जाता है। इसमें यह प्रावधान है कि यदि प्रस्तावित निवेश किसी कारणों से नहीं आता है तो भारत चारों देशों को दी जाने वाली शुल्क रियायतों को पुनः संतुलित या निलंबित कर सकता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को दोहराया था कि टीईपीए एक अक्टूबर से लागू होगा। ईएफटीए देश यूरोपीय संघ (ईयू) का हिस्सा नहीं हैं। यह मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने और उसे तेज करने के लिए एक अंतर-सरकारी संगठन है। इसकी स्थापना उन देशों के लिए एक विकल्प के रूप में की गई थी जो यूरोपीय समुदाय में शामिल नहीं होना चाहते थे। भारत 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ के साथ एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर अलग से बातचीत कर रहा है।