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Defender का नया अवतार बाजार में आया, पावरफुल परफॉर्मेंस और लग्ज़री लुक का परफेक्ट कॉम्बो

नई दिल्ली ब्रिटिश ऑटोमेकर लैंड रोवर ने भारत में अपनी आइकॉनिक एसयूवी का स्पेशल वर्ज़न Defender 110 Trophy Edition लॉन्च कर दिया है. आकर्षक लुक और पावरफुल इंजन से लैस इस स्पेशल एडिशन एसयूवी की कीमत 1.3 करोड़ रुपये (एक्स-शोरूम) तय की गई है. यह लिमिटेड-एडिशन मॉडल खास तौर पर उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जिन्हें एडवेंचर और ऑफ-रोडिंग का शौक है. खास लुक और एक्सक्लूसिव एडिशन डिफेंडर ट्रॉफी एडिशन दो नए कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगी. जिसमें डीप सनग्लो येलो और केस्विक ग्रीन कलर शामिल है. लुक और डिज़ाइन की बात करें तो इसमें ब्लैक-आउट रूफ, बोनट, स्कफ प्लेट्स, व्हील आर्चेज और साइड क्लैडिंग दी गई है जो इसे और भी मस्क्युलर लुक देती है. बोनट और C-पिलर पर खास Trophy Edition डेकल्स भी नज़र आते हैं जो इसे और भी यूनिक स्टाइल देते हैं. इस लिमिटेड एडिशन वर्ज़न में 20-इंच ग्लॉस ब्लैक अलॉय व्हील्स दिए गए हैं, जिन पर ग्राहक ऑल-सीज़न या ऑल-टेरेन टायर्स का विकल्प चुन सकते हैं. साथ ही, ऑफ-रोडिंग के लिए ऑप्शनल ऐक्सेसरीज़ भी दी जा रही हैं जैसे कि हेवी-ड्यूटी रूफ रैक, ब्लैक डिप्लॉयबल साइड लैडर, साइड पैनियर्स और ब्लैक स्नॉर्कल. इसके अलावा खरीदार अपनी गाड़ी को स्क्रैच से बचाने के लिए दोनों रंगों में मैट प्रोटेक्टिव फिल्म का विकल्प भी चुन सकते हैं. कैसा है एसयूवी का इंटीरियर  कैबिन के अंदर इबोनी विंडसर लेदर सीट्स, डोर सिल्स पर Trophy ब्रांडिंग वाले LED प्लेट्स, और डैशबोर्ड के क्रॉसबीम पर एक्सटीरियर कलर की फिनिश दी गई है. वहीं, इसके लेज़र-एच्च्ड एंडकैप्स पर भी ट्रॉफी के बैजिंग को बारीकी से उकेरा गया है. कंपनी ने इसके केबिन को प्रीमियम बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.  इंजन और परफॉर्मेंस Defender 110 Trophy Edition में 3.0-लीटर इनलाइन-6 ट्विन-टर्बोचार्ज्ड डीज़ल इंजन दिया गया है, जो 350hp की पावर और 700Nm का टॉर्क जनरेट करता है. इसके साथ 8-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन और स्टैंडर्ड फोर-व्हील-ड्राइव सिस्टम मिलता है. कंपनी के मुताबिक यह एसयूवी महज 6.4 सेकंड में 0 से 100 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है और इसकी टॉप स्पीड 191 किमी/घंटा तक जाती है. क्या है 'Trophy Edition' की कहानी? असल में, ट्रॉफी एडिशन की जड़ें 1980 में शुरू हुए कैमल ट्रॉफी (Camel Trophy) इवेंट से जुड़ी हैं, जिसे ‘The Olympics of 4×4’ भी कहा जाता था. इस इंटरनेशनल ऑफ-रोडिंग कंपटीशन में शुरुआती वर्षों में जीप का इस्तेमाल हुआ, लेकिन बाद में लैंड रोवर इसका ऑफिशिलयल व्हीकल पार्टनर बन गया. लैंडरोवर के लगभग सभी मॉडल, जैसे रेंज रोवर, सीरीज थ्री, लैंड रोवर 90, डिफेंडर, डिस्कवरी और फ्रीलैंडर इस ट्रॉफी में इस्तेमाल किए गए थे. इन्हीं वाहनों का क्लासिक 'Sandglow' कलर स्कीम आज की नई डिफेंडर 110 ट्रॉफी एडिशन में दोबारा देखने को मिलता है. कुल मिलाकर, यह SUV सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि Land Rover की उस ग्लोरी का जश्न है जिसने दशकों तक ऑफ-रोडिंग को एक कला में तब्दील किया है.

बारात लेकर जा रही बस खाई में गिरी, शादी का जश्न बदल गया हादसे में

हिमाचल  हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के लुहारघाट क्षेत्र में एक निजी बस के खाई में गिरने से बड़ा हादसा हो गया। यह बस रामशहर थाना क्षेत्र के तहत वैवाहिक समारोह में शामिल होने जा रहे 42 रिश्तेदारों को लेकर जा रही थी, तभी अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे गिर गई। विवाह की खुशियां मातम में बदलीं इस दुर्घटना में लगभग 10 यात्रियों को गंभीर चोटें आई हैं। घायलों की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए बिलासपुर एम्स रेफर कर दिया गया है। इसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। चीख-पुकार के बीच ग्रामीणों ने शुरू किया बचाव कार्य जानकारी के अनुसार, बस रामशहर के जोबी गांव में एक विवाह कार्यक्रम के लिए जा रही थी। रास्ते में एक तीव्र ढलान और मोड़ पर चालक ने नियंत्रण खो दिया, जिसके कारण बस फिसलकर गहरी खाई में जा गिरी और पलट गई। दुर्घटना इतनी भीषण थी कि घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीणों ने तुरंत मोर्चा संभाला और पुलिस के पहुंचने से पहले ही राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। पुलिस टीम को सूचना मिलते ही वे भी मौके पर पहुंच गई। ग्रीन कॉरिडोर बनाकर बिलासपुर एम्स भेजे गए घायल रामशहर पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को एंबुलेंस के जरिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद, गंभीर रूप से घायल यात्रियों को विशेषज्ञ चिकित्सा के लिए एम्स बिलासपुर भेजा गया। इस हादसे में बस को भी काफी नुकसान हुआ है। डीएसपी नालागढ़ भीष्म ठाकुर ने बताया कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और घायलों की हालत फिलहाल स्थिर है। उन्होंने पुष्टि की कि गंभीर रूप से घायल यात्रियों का इलाज एम्स बिलासपुर में चल रहा है। हादसे के बाद अस्पताल की ओर दौड़े परिजन दुर्घटना की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने भी मौके पर पहुंचकर राहत कार्यों का जायजा लिया। अपने प्रियजनों का हाल जानने के लिए बड़ी संख्या में लोग अस्पताल की ओर दौड़ पड़े। पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के सही कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। यह हादसा बिलासपुर जिले की सीमा से लगे क्षेत्र में हुआ है। गौरतलब है कि पिछले दिनों बिलासपुर में ही पहाड़ दरकने से एक चलती बस दुर्घटनाग्रस्त हुई थी, जिसमें 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस नए हादसे ने क्षेत्र में एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।  

बाढ़ की जिम्मेदारी भूटान पर, ममता बनर्जी ने मुआवजे की मांग की

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दावा किया कि पड़ोसी देश भूटान से बहकर आने वाले पानी के कारण उत्तर बंगाल में बाढ़ आयी और उन्होंने भूटान से मुआवजे की मांग की। राहत एवं पुनर्वास कार्यों का निरीक्षण करने के लिए प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर रही मुख्यमंत्री बनर्जी ने जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में कहा कि भूटान से विभिन्न नदियों के माध्यम से बहकर आने वाले वर्षा जल के कारण यह क्षति हुई है। बनर्जी ने एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा, ‘‘भूटान से आने वाले पानी के कारण हमें नुकसान हुआ है हम चाहते हैं कि वे हमें मुआवजा दें।" उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले कुछ समय से भारत-भूटान संयुक्त नदी आयोग के गठन पर जोर दे रही हूं और मेरी मांग है कि पश्चिम बंगाल को भी इसका हिस्सा बनाया जाए। हमारे दबाव में इस महीने की 16 तारीख को एक बैठक होनी है और हमारे अधिकारी उसमें शामिल होंगे।'' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने राज्य को आपदाओं से निपटने के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता से वंचित रखा है। बनर्जी ने जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा के बामनडांगा क्षेत्र में कई राहत शिविरों का दौरा किया, जो चार अक्टूबर को हुई भारी बारिश के कारण सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। इससे इस क्षेत्र में बाढ़ आ गई थी और दार्जिलिंग तथा उसके निचले इलाकों के ऊपरी इलाकों में जान-माल की व्यापक क्षति हुई थी। पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों में भूस्खलन और बाढ़ में कम से कम 32 लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। प्राकृतिक आपदा के बाद बनर्जी उत्तर बंगाल के अपने दूसरे दौरे पर हैं। वह शुक्रवार तक वहां रहेंगी। राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री बनर्जी पांच अक्टूबर से चार दिनों के लिए उत्तर बंगाल में थीं।    

कांग्रेस नेता भूपेश बघेल बोले, 1-2 दिन में तय होगा बिहार महागठबंधन का सीट बंटवारा

रायपुर एनडीए में सीट बंटवारे के बाद अब सब की नजर महागठबंधन पर है। राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो लालू प्रसाद और नेता प्रतिपक्ष दिल्ली में हैं। वहीं कांग्रेस के भी कई प्रमुख नेता दिल्ली में कैंप कर रहे हैं। आज कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है। वहीं बैठक से पहले कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने बिहार में महागठबंधन के सीट बंटवारे पर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि यह 1-2 दिन में हो जाएगा। सारी तैयारी हो चुकी है, ये जल्दी हो जाएगा। बिहार एनडीए में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बिहार के विधानसभा चुनावों के लिए सीट बंटवारे की घोषणा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और जनता दल (यूनाइटेड) यानी जदयू दोनों 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें मिली हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह सीटें दी गई हैं। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को भी छह सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिला है। भाजपा महासचिव विनोद तावड़े ने एक्स पर लिखा, संगठित व समर्पित एनडीए…आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एनडीए परिवार के सभी सदस्यों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में आपसी सहमति से सीटों का वितरण पूर्ण किया, जो कि इस प्रकार है– भाजपा – 101 सीट जदयू – 101 सीट लोजपा (रामविलास) – 29 सीट रालोमो – 06 सीट हम – 06 सीट आज दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक आज कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक है। इसके बाद संभावना है कि शाम तक सीट बंटवारे की घोषणा हो जाएगी। हालांकि कई सीटों पर कांग्रेस और राजद के बीच पेज फंसा हुआ ही है। इसलिए कांग्रेस ने इस बार अलग-अलग नीति बनाने शुरू कर दी है। 2020 के विधानसभा के तरह ही इस बार भी कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रही है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की सूची भी पूरी तरह से तैयार कर ली है। दिल्ली में केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में इस पर मोहर भी लग जाएगी। सूत्र बता रहे हैं कि राजद और वामदल अब भी कांग्रेस को 70 सीट देने के लिए तैयार नहीं हैं।  

इलाज में देरी पर हंगामा, डॉक्टर बोले- हमें नहीं पता था कि मरीज सिंगर राजवीर जवंदा हैं

पिंजौर  मशहूर पंजाबी गायक और अभिनेता राजवीर जवंदा की सड़क हादसे में हुई मौत को लेकर नया खुलासा सामने आया है। अब यह साफ हो गया है कि हादसा हिमाचल प्रदेश के बद्दी में नहीं, बल्कि पिंजौर-बद्दी हाईवे पर सेक्टर-30 टी प्वाइंट के पास हुआ था। जवंदा की बाइक के आगे अचानक आवारा पशु (गौवंश) आ गया, जिससे बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इलाज में देरी बनी जानलेवा हादसा 27 सितंबर की सुबह हुआ था। गंभीर रूप से घायल जवंदा को उनके साथियों ने तुरंत जे.एन. शौरी मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल, पिंजौर में भर्ती कराया।लेकिन आरोप है कि निजी अस्पताल ने इलाज करने से मना कर दिया और सिर्फ प्राथमिक उपचार देकर उन्हें पंचकूला सेक्टर-6 सिविल अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहीं से उन्हें आगे मोहाली के फोर्टिस अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद 8 अक्तूबर को उनकी मौत हो गई।स्थानीय लोगों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि अगर जवंदा को समय पर उचित इलाज मिल जाता, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। डॉक्टरों ने दी सफाई—“मरीज बेहोश था, बाहरी चोट नहीं दिखी” जे.एन. शौरी अस्पताल के डॉक्टर विमल शौरी और मोहित शौरी ने बताया कि राजबीर नामक एक बेहोश मरीज को दो साथी सुबह लगभग 9 बजे अस्पताल लेकर आए थे। डॉ. मोहित ने बताया,  “मरीज के शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं थी। हमने तुरंत इंजेक्शन और दवाइयां देकर करीब 15–20 मिनट तक होश में लाने की कोशिश की, लेकिन वे रिवाइव नहीं हुए। हमें लगा कि मरीज को बड़े अस्पताल में आगे का इलाज मिलना चाहिए, इसलिए हमने रेफर कर दिया।”

मोहन सरकार का दिवाली गिफ्ट संभव! मप्र में बढ़ सकता है डीए-डीआर, केंद्र से 3% पीछे

भोपाल  केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों को 3% महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) बढ़ाने के फैसले के बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारी भी सक्रिय हो गए हैं। प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से दीपावली से पहले समान लाभ देने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि त्योहार के पहले बोनस और फेस्टिवल एडवांस में बढ़ोतरी की घोषणा की जाए, ताकि वे अपने परिवार के साथ खुशियां मना सकें। 3% डीए-डीआर और बोनस की मांग मध्यप्रदेश के कर्मचारियों ने दीपावली से पहले 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत (डीए-डीआर) देने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बोनस और फेस्टिवल एडवांस की राशि बढ़ाने की भी मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि त्योहारी सीजन में खर्च बढ़ जाता है, इसलिए सरकार को समय रहते राहत प्रदान करनी चाहिए।तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा- दीपावली पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को बोनस के साथ 3% डीए और डीआर देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारी और पेंशनर्स लाभान्वित होंगे। प्रदेश में मिल रहा 55% डीए, केंद्र में बढ़कर हुआ 58% वर्तमान में मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता दिया जा रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारियों का डीए अब 3% बढ़कर 58% हो गया है। राज्य के कर्मचारियों का डीए जुलाई 2025 से ड्यू है, जिसे अभी तक नहीं बढ़ाया गया है। इससे प्रदेश के कर्मचारियों में नाराजगी है, क्योंकि उन्हें हमेशा केंद्र के बाद देरी से डीए वृद्धि मिलती है। 29 साल से बंद है बोनस कर्मचारी संगठनों ने याद दिलाया कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है। उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में दिया जाता था। केंद्र सरकार और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस देती हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में यह सुविधा वर्षों से बंद है।कर्मचारी संगठनों ने कहा- सरकार कहती है कि राज्य कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना उनकी ‘कथनी और करनी’ में फर्क दिखाता है। 10 लाख कर्मचारी-पेंशनर्स होंगे प्रभावित तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्च बढ़ जाता है। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों को आर्थिक राहत देने के लिए बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए। इससे प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को लाभ मिलेगा। राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दीपावली से पहले महंगाई भत्ते की किस्त जारी करने की मांग की है। प्रदेश के कर्मचारियों को मिल रहा 55% डीए वर्तमान में मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं, केंद्र सरकार के कर्मचारी अब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बाद 58% डीए प्राप्त कर रहे हैं। प्रदेश के कर्मचारियों का जुलाई 2025 से डीए ड्यू है। 29 साल से बंद बोनस देने की मांग कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्ष 1996 से प्रदेश में बोनस बंद है, जबकि उस समय कर्मचारियों को 1079 रुपए तक बोनस के रूप में मिलता था। केंद्र और रेलवे आज भी अपने कर्मचारियों को दीपावली बोनस दे रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। यह फिर से शुरू किया जाना चाहिए। संगठनों ने कहा कि सरकार एक ओर दावा करती है कि कर्मचारियों को केंद्र के समान सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन बोनस न देना “कथनी और करनी में अंतर” दर्शाता है। कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव दीपावली से पहले कर्मचारियों को राहत देने का फैसला लेकर त्योहार की खुशियां दो गुनी करेंगे। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा कर्मचारियों को दीपावली के पहले 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने के बाद अब राज्य के कर्मचारी भी मोहन सरकार से महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहा है कि एमपी में काम कर रहे कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देकर बोनस दिया जाए ताकि कर्मचारी त्यौहार खुशियों के साथ मना सकें। इसके साथ ही फेस्टिवल एडवांस भी बढ़ी हुई राशि के साथ देने की मांग की जा रही है। उधर माना जा रहा है कि जल्दी ही राज्य सरकार भी कर्मचारियों के लिए डीए देने का ऐलान कर सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जिस प्रकार से केंद्र एवं रेलवे द्वारा दीपावली के अवसर पर बोनस एवं 3% महंगाई भत्ता, महंगाई राहत एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों को प्रदान कर दी गई है उसी प्रकार मध्य प्रदेश सरकार भी दीपावली के त्योहार पर कर्मचारियों को आर्थिक रूप से खुशियां दे। प्रदेश में वर्ष 1996 से बोनस बंद है। वर्ष 1996 तक 1079 रुपए बोनस के रूप में कर्मचारियों को प्राप्त होते थे। वर्तमान में प्रदेश के कर्मचारियों को 55% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा आज भी अपने कर्मचारियों को बोनस दिया जा रहा है वहीं मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को बोनस से वंचित कर दिया गया है। संगठनों के अनुसार एक तरफ प्रदेश सरकार द्वारा कहा जाता है कि केंद्र के समान कर्मचारियों को सभी सुविधाएं दी जाएंगी वहीं बोनस न देना कथनी और करनी में अंतर बताता है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि दीपावली के अवसर पर हर घर में खर्चा बढ़ जाता है। इसकी भरपाई के लिए सरकार को बोनस के साथ 3% महंगाई भत्ता और महंगाई राहत देना चाहिए जिसका फायदा प्रदेश के 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलेगा। इसी तरह कर्मचारी नेता जितेंद्र सिंह ने भी सरकार से दिवाली के पहले महंगाई भत्ते की किस्त देने की मांग की है। जुलाई 2025 से 3% महंगाई भत्ता बढ़ाने पर इतना मिलेगा लाभ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी -1395 से 1620 तृतीय श्रेणी कर्मचारी -1755 से 4419 द्वितीय श्रेणी अधिकारी – 5049 से 6048 प्रथम श्रेणी अधिकारी -7191 से 12690 तीन प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ने पर महीने का इतना हो जाएगा वेतन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वेतन मान – 55 %भत्ता – 58% भत्ता 15500-– 24025 24490 16100— 16985—25438 … Read more

महिला वकीलों की आवाज़ बुलंद: कोर्ट में चेंबर और बैठने की जगह की मांग पर दिया ज्ञापन

नई दिल्ली 15 से 25 साल हो गए और देख‍ि‍ए, इसके बाद भी देश भर के न्यायालयों-बार काउंस‍िल्स में मह‍िला वकीलों के लिए आज बैठने तक के लिए जगह नहीं है. बरसों से हम हर तरह से सह रहे हैं. 90 के दशक तक तो कभी ये हालात थे कि ज्यूड‍िशरी में मह‍िलाओं का आना ही बहुत अच्छा नहीं माना जाता था. आज जब मह‍िलाओं की संख्या यहां बढ़ी है तो उन्हें सुव‍िधाएं नहीं मिल रहीं. कई पीपल के पेड़ के नीचे बैठ रही हैं तो कई बस एक सही जगह के इंतजार में रहती हैं…सुप्रीम कोर्ट महिला अधिवक्ता एसोसिएशन की जनरल सेक्रेटरी एडवोकेट प्रेरणा सिंह कहती हैं कि अब हम सुप्रीम कोर्ट से अपने लिए बराबरी से ज्यादा व्यवहार‍िक जरूरत पूरी करने की मांग कर रहे हैं.  मह‍िला अध‍िवक्ताओं की याच‍िका में क्या है?  गौरतलब है कि देश की वरिष्ठ महिला अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. याच‍िकाकर्ताओं में 15 से 25 साल अनुभव वाली इन वकीलों ने अदालत से देश भर की अदालतों और बार एसोसिएशनों में महिला वकीलों को प्रोफेशनल चैंबर या केबिन देने के लिए एक समान और लैंगिक रूप से संवेदनशील नीति बनाने की मांग की है. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर प्रतिवादियों से जवाब मांगा है.  याचिका में महिला अधिवक्ताओं ने कहा है कि बरसों से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की चैम्बर वेटिंग लिस्ट में होने के बावजूद उन्हें प्रोफेशनल कामों के लिए उचित जगह नहीं मिली. याचिका में ये भी कहा गया है कि भविष्य में होने वाले चैंबर या केबिन आवंटन में महिला वकीलों को प्राथमिकता दी जाए या उनके लिए सीटें आरक्षित हों.  इसके अलावा याचिका में उन महिला वकीलों के लिए भी चैंबर बनाने और प्राथमिकता देने की बात की गई है जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 25 साल से ज्यादा प्रैक्टिस की है और जो अभी सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की प्रतीक्षा सूची में हैं पेड़ के नीचे बैठकर प्रैक्ट‍िस… एडवोकेट प्रेरणा महिला वकीलों की प्रैक्ट‍िकल समस्या का जिक्र करती हैं. वो कहती हैं कि इतने सालों की प्रैक्टिस होने के बाद भी हमें बैठने के लिए कोई जगह नहीं मिलती. कंसल्टेशन रूम हमेशा बुक रहता है. लोग दिन भर वहीं बैठे रहते हैं. तमाम अदालतों में महिला वकीलों को अक्सर पेड़ के नीचे बैठकर क्लाइंट से मिलने या काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. कल्पना कीजिए आप पेड़ के नीचे बैठकर काम कर रही हैं, चाय वाला आता है और कहता है ‘चाय ले लो मैडम’. आप जवाब देती हैं, ‘नहीं, आगे जाएं’. चायवाला आगे कहेगा कि कोई नहीं क्लाइंट को पिला दो. बताओ आपकी उस समय क्या इज्जत रह जाती है.  कहने का अर्थ ये है कि ऐसी बहुत सारे हालात हम लोगों ने देखा और महसूस किया है. तभी हमें लगा कि ये जरूरी है कि हमें एक सम्मानजनक स्थान दिया जाए. हमारी मांग रिजर्वेशन के लिए नहीं बल्कि हमें बेसिक सुविधाएं चाहिए. हमारा मकसद केवल ये है कि महिलाओं को काम करने के लिए सुविधाजनक चेम्बर मिले. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आज नोटिस जारी किया और उन्होंने सकारात्मक संकेत दिया कि महिलाओं, दिव्यांगों और अन्य जरूरतमंदों को कार्य और सुविधा के लिए जगह दी जानी चाहिए. हमें उम्मीद है कि जल्द ही कुछ सकारात्मक आदेश और निर्देश मिलेंगे. कार्यक्षमता पर पड़ रहा असर  याच‍िकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट महिला वकील संघ की उपाध्यक्ष एडवोकेट भक्ति पासरिजा का कहना है कि महिला वकीलों को चेंबर की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है. महिला वकील लंबे समय से चेंबर के लिए आवेदन कर रही हैं, लेकिन उन्हें कोई पॉजिट‍ि रेस्पांस नहीं मिल रहा है. वो कहती हैं कि हम कभी भी रिजर्वेशन की बात नहीं करते. यहां मुद्दा समान अवसर और कार्यक्षमता का है. हमें उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर सकारात्मक कदम उठाएगा. मेरा मानना है कि महिला वकीलों के लिए कार्यस्थल होंगे तो पेशेवर संरचना में सुधार होगा.  मांगें पूरी हुई तो क्या बदलेगा  सुप्रीम कोर्ट की सीन‍ियर एडवोकेट सोन‍िया माथुर कहती हैं कि आज लड़क‍ियां ज्यूड‍िशरी में करियर बनाने का सपना देखने लगी हैं. कोर्ट पर‍िसरों में मह‍िला अध‍िवक्ताओं की संख्या बढ़ी है. ऐसे में न्यायालय पर‍िसर भी जेंडर सेंसेट‍िव होने चाहिए. मह‍िलाएं न्याय के क्षेत्र में आती हैं तो उन्हें यहां का माहौल भी उनके अनुरूप मिलना चाहिए. ठीक यही बात दिव्यांगों के लिए भी लागू होती है. उन्हें भी अदालतों में चेंबर के अलावा हर सहूल‍ियत मिलनी चाहिए. न्यायालय में समय समय पर महिलाओं के लिए आवाज उठाई जाती है. देश भर के न्यायालयों में न स‍िर्फ चेंबर बल्क‍ि महिलाओं के ल‍िए क्रेच की सुव‍िधा, साफ टॉयलेट और भेदभाव रहित माहौल मिलना चाहिए. इससे उनकी प्रोफेशनल कार्यक्षमता बढ़ेगी. साथ ही ज्यूड‍िशरी में मह‍िलाओं की संख्या और ज्यादा बढ़ेगी. 

महंगाई में बड़ी गिरावट, GST और बाजार ने मिलकर दी राहत — जानें किन चीज़ों के दाम घटे

नई दिल्ली आम आदमी को महंगाई (Inflation) के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है, सितंबर महीने में खुदरा महंगाई दर गिरकर 1.54 फीसदी पर पहुंच गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जून-2017 के बाद खुदरा महंगाई दर सितंबर में सबसे कम रही. यानी करीब 99 महीने में सबसे कम महंगाई दर सितंबर महीने में दर्ज की गई है.  दरअसल, सितंबर 2025 में खाने-पीने की चीजें सस्ती होने से खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) लुढ़क कर 1.54 फीसदी पर पहुंच गई. इससे पहले अगस्त महीने में मामूली बढ़ोतरी के साथ खुदरा महंगाई दर 2.07% पर पहुंच गई थी, जबकि जुलाई- 2025 में खुदरा महंगाई दर 1.55 फीसदी दर्ज की गई थी. आंकड़ों को देखें तो खाद्य मुद्रास्फीति लगातार चौथे महीने निगेटिव रही है. खुदरा महंगाई के बास्केट में करीब 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का होता है, जो कि महीने-दर-महीने के आधार पर सितंबर में माइनस 0.64% से घटकर माइनस 2.28% रह गई. वहीं सितंबर महीने में ग्रामीण महंगाई दर 1.69% से घटकर 1.07% हो गई है. जबकि शहरी महंगाई 2.47% से घटकर 2.04% पर आ गई.  महंगाई में गिरावट के पीछे GST का भी योगदान खुदरा महंगाई दर में गिरावट के पीछे GST रिफॉर्म का भी बड़ा योगदान रहा है, जीएसटी रेट में बदलाव और खाने-पीने की चीजों पर जीएसटी रेट में कटौती से भी सामान सस्ते हुए हैं. बता दें, 22 सितंबर से देश में जीएसटी रिफॉर्म को लागू हो गया है. इन सबके बीच खुदरा महंगाई अब भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 2-6% की आरामदायक सीमा के भीतर बनी हुई है. खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी या गिरावट तब आती है, जब‍ फूड प्रोडक्‍ट्स खासकर आलू, प्‍याज, हरी सब्जियां, चावल, आटा और दाल वगैरह की कीमतें बढ़ती या घटती हैं. गौरतलब है कि RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने बीते महीने कहा था कि वित्त वर्ष-26 की अंतिम तिमाही में मुद्रास्फीति में तेजी आने की संभावना है, खासकर सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण. वित्त वर्ष 26 के लिए RBI अब मुद्रास्फीति 3.1% रहने का अनुमान लगा रहा है, जो कि पहले 3.7% रहने का अनुमान लगाया गया था.  कैसे मापते हैं खुदरा महंगाई दर खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation Rate) एक आर्थिक संकेतक है, जो उपभोक्ता स्तर पर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में औसत बढ़ोतरी को मापता है. भारत में यह आमतौर पर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index – CPI) के आधार पर गणना की जाती है. CPI मुख्य तौर पर वस्तुओं और सेवाओं, जैसे खाद्य पदार्थ, ईंधन, कपड़े, आवास, स्वास्थ्य और परिवहन की कीमतों में बदलाव को ट्रैक करता है, जो सामान्य उपभोक्ता के दैनिक जीवन के लिए आवश्यक हैं. भारत में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) CPI डेटा जारी करता है. खुदरा महंगाई का आम आदमी पर असर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) महंगाई को काबू में करने के लिए रेपो रेट जैसे उपायों का उपयोग करता है. RBI का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4% (+/- 2%) के दायरे में रखना है. महंगाई बढ़ने से आम लोगों की क्रय शक्ति प्रभावित होती है. महंगाई दर निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह रिटर्न की वास्तविक वैल्यू को प्रभावित करती है.

सवार कुत्ते की टिकट नहीं कटने पर बस में तीखी बहस, अब जांच में सामने आएंगे सच

हरियाणा  हरियाणा रोडवेज की भट्टू से फतेहाबाद आ रही बस में रविवार को उस समय हंगामा हो गया, जब एक यात्री अपने पालतू कुत्ते को साथ लेकर बस में सवार हुआ और उसका टिकट नहीं काटा गया। घटना को लेकर बस परिचालक और टिकट जांच उड़नदस्ता टीम के बीच तीखी बहस हुई। मामला बढ़ने पर रोडवेज मुख्यालय ने परिचालक पर जांच बैठा दी है। कुत्ते की सीट के नीचे बैठने पर यात्रियों ने की आपत्ति जानकारी के अनुसार, भट्टू निवासी एक परिवार अपने डेढ़ साल के पालतू कुत्ते के साथ बस में सवार हुआ और कुत्ते को सीट के नीचे बैठा दिया। कुछ यात्रियों ने कुत्ते की उपस्थिति पर असहजता जाहिर की और इसकी शिकायत बस परिचालक कमलदीप से की। आरोप है कि परिचालक ने शिकायत को नजरअंदाज कर दिया और नियमानुसार कुत्ते का टिकट भी नहीं काटा। फ्लाइंग टीम ने मांगा टिकट, परिचालक से हुई बहस जब बस मिनी बाईपास पहुंची, तो वहां मौजूद टिकट जांच (फ्लाइंग) टीम ने कुत्ते को देखकर उसका टिकट मांगा। टिकट न मिलने पर टीम और परिचालक के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि परिचालक ने टीम का वीडियो बनाकर दबाव बनाने की कोशिश की, जबकि जांच टीम ने परिचालक पर राजस्व गबन का आरोप लगाते हुए मौके पर ही रिपोर्ट तैयार कर दी। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार, कमलदीप पहले भी एक सवारी को टिकट न देने के मामले में निलंबित किया जा चुका है। जांच में दोष सिद्ध न होने पर हाल ही में उसे बहाल किया गया और दोबारा उसी रूट पर ड्यूटी दी गई थी। फतेहाबाद डिपो के ट्रैफिक मैनेजर सुरेंद्र ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों पक्षों को सोमवार को कार्यालय में तलब किया गया है। रोडवेज नियमों के अनुसार, जानवरों के लिए दो टिकट का किराया अनिवार्य हरियाणा रोडवेज नियमों के अनुसार, किसी भी पालतू जानवर को बस में ले जाने के लिए उसका किराया दो टिकटों के बराबर देना होता है। इसके अतिरिक्त, किसी जानवर को यात्रियों के बीच खुले में ले जाना भी नियमों के विरुद्ध है। ऐसा न करने पर परिचालक के खिलाफ गबन का मामला बन सकता है, क्योंकि इससे सरकार को राजस्व का नुकसान होता है।  

PF में अच्छा न्यूज़! वित्त मंत्रालय ने तय की नई ब्याज दर, आपका रिटर्न अब 7.1%

नई दिल्ली  सरकारी कर्मचारियों के लिए वित्तीय सुरक्षा का एक मजबूत स्तंभ मानी जाने वाली सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) योजना के ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर 2025) के लिए जीपीएफ पर ब्याज दर को 7.1 प्रतिशत पर यथावत रखने का औपचारिक निर्णय लिया है। यह घोषणा कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आई है, क्योंकि ब्याज दर स्थिर रहने से उनकी बचत पर मिलने वाला रिटर्न सुरक्षित रहेगा। GPF Scheme  क्या है और क्यों है महत्वपूर्ण? जीपीएफ भारत में केंद्र और राज्य सरकार के स्थायी कर्मचारियों के लिए एक अनिवार्य बचत योजना है, जो रिटायरमेंट के बाद वित्तीय सुरक्षा मुहैया कराती है। इस योजना में कर्मचारी अपनी मासिक तनख्वाह का एक हिस्सा, सामान्यतः कम से कम 6 प्रतिशत, अपने खाते में जमा करते हैं। इसके ऊपर सरकार द्वारा निश्चित ब्याज दर पर अतिरिक्त लाभ दिया जाता है, जो तिमाही आधार पर तय होता है। यह योजना सुरक्षित होने के साथ-साथ टैक्स फ्री ब्याज प्रदान करती है, जिससे कर्मचारियों को एक भरोसेमंद और गारंटीड रिटर्न मिलता है। रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को इस खाते में जमा पूंजी समेत ब्याज की पूरी राशि मिलती है, जो आर्थिक तौर पर उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है। कौन-कौन से फंड्स पर लागू होती है यह ब्याज दर? 7.1% ब्याज दर सिर्फ सामान्य भविष्य निधि तक सीमित नहीं है। यह कई अन्य सरकारी फंड्स जैसे: -अंशदायी भविष्य निधि (भारत) -अखिल भारतीय सेवा भविष्य निधि -राज्य रेलवे भविष्य निधि -रक्षा सेवा अधिकारी भविष्य निधि -सामान्य भविष्य निधि (डिफेंस सर्विस) पर भी लागू होती है। साथ ही, सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर भी इस दर से ब्याज मिलता है, जो आम नागरिकों के लिए खुली दीर्घकालिक बचत योजना है।   अन्य बचत योजनाओं की वर्तमान ब्याज दरें वहीं, प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए डिज़ाइन की गई कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की ब्याज दर वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 8.25 प्रतिशत है, जो जीपीएफ की तुलना में थोड़ी अधिक है। नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस), जो बाजार आधारित निवेश योजना है, में रिटर्न निश्चित नहीं होते लेकिन लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना होती है। सरकार ने हाल ही में अन्य छोटी बचत योजनाओं की भी ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिनमें सुकन्या समृद्धि योजना, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, और राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र शामिल हैं।