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इस महीने HKRNL की नई भर्ती शुरू, अंतिम तारीख से पहले करें आवेदन और पाएं मासिक सैलरी!

चंडीगढ़  हरियाणा कौशल रोजगार निगम लिमिटेड (HKRNL) की ओर से जिला स्तर पर फर्स्ट एड इंस्ट्रक्टर पदों पर भर्ती की जाएगी। यह नियुक्तियां सेंट जॉन एंबुलेंस इंटरनेशनल एसोसिएशन के माध्यम से की जाएंगी। कुल 48 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया जारी है, जो 20 अक्टूबर तक चलेगी। प्रत्येक जिले में एक पुरुष और एक महिला उम्मीदवार की नियुक्ति की योजना है। आवेदन के लिए ANM, GNM या BSC नर्सिंग जैसी योग्यताएं अनिवार्य रखी गई हैं और अभ्यर्थी के पास कम से कम एक वर्ष का अनुभव होना चाहिए। हर महीने मिलेंगे इतने रूपये योग्य उम्मीदवारों को चयन के बाद मासिक 17,500 रुपये का वेतन दिया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया का उद्देश्य राज्यभर में प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण को सशक्त बनाना और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना है।

योगी आदित्यनाथ ने खोला राज का पर्दा: बिहार में बढ़ा भाई-भतीजावाद और अपराध, जिम्मेदार कौन?

पटना उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को आधिकारिक रूप से बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार में उतर गए। दानापुर में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कांग्रेस और राजद पर जुबानी हमला किया। विशाल रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का हवाला दिया। वहीं, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर राज्य में जंगल राज और भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार का न सिर्फ एक रिश्ता है, बल्कि एक साझा विरासत भी है। एक आत्मा, एक संस्कृति और एक संकल्प का बंधन। यह बंधन भगवान राम और माता जानकी के बंधन जितना ही अटूट है। योगी आदित्यनाथ ने लोगों को बिहार के राजनीतिक अतीत की याद दिलाते हुए कहा कि 1990 से 2005 तक राज्य जंगल राज से ग्रस्त था, जहां ज्ञान और अध्यात्म की जगह भाई-भतीजावाद और अपराध ने ले ली थी। उन लोगों (कांग्रेस और राजद) ने बिहार की ज्ञान की आध्यात्मिक भूमि को भाई-भतीजावाद और अपराध की भूमि में बदल दिया, जिससे हमारे युवाओं के लिए पहचान का संकट पैदा हो गया। सीएम योगी ने कहा कि बिहार को उस कलंक से मुक्त करने के लिए एनडीए सरकार ने 20 साल तक काम किया है। आज डबल इंजन वाली सरकार प्रभावी विकास के लिए काम कर रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक पर निशाना साधा। उन्होंने उन पर चुनावों में धांधली करने और बिहार के विकास को बाधित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार पारदर्शी मतदान का समर्थन करती है, लेकिन कांग्रेस, आरजेडी और उनके सहयोगी कहते हैं कि धांधली होनी चाहिए। क्या उन्हें चुनावों में धांधली करने का अधिकार दिया जाना चाहिए? क्या विदेशी घुसपैठियों को यहां आकर दलितों, गरीबों और बिहार के नागरिकों के अधिकारों पर डाका डालने की इजाजत दी जानी चाहिए? उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश ने माफिया राज का सफाया कर दिया है और बिहार में भी ऐसा ही शासन जारी रहना चाहिए। उन्होंने मतदाताओं से बिहार में एनडीए की सत्ता में वापसी सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में माफिया पहले ही नरक में जा चुके हैं। हमने उनकी संपत्ति भी जब्त कर ली है और गरीबों के लिए घर बनाना शुरू कर दिया है। दानापुर रैली के बाद, योगी आदित्यनाथ ने सहरसा में एक और सभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने विपक्ष पर हमला तेज किया। उन्होंने कहा कि गरीबों का कल्याण कांग्रेस या राजद के एजेंडे में कभी नहीं रहा। परिवार कल्याण ही उनका एकमात्र एजेंडा था। जब कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश की, तो बिहार ही उठ खड़ा हुआ। आज राजद ने खुद को उसी कांग्रेस के हाथों गिरवी रख दिया है। वे जयप्रकाश नारायण के सपनों को चकनाचूर कर रहे हैं।

आज बाढ़ में नामांकन, मोकामा में RJD ने वीणा को बनाया उम्मीदवार

 पटना  बिहार में मोकामा सीट पर अनंत सिंह और सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी के बीच मुकाबला 100 फीसदी कन्फर्म हो गया है। लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने मोकामा सीट से मुंगेर की पूर्व सांसद वीणा देवी को टिकट दे दिया है। सिंबल लेकर मोकामा के बाहुबली सूरजभान सिंह वीणा देवी का नामांकन कराने बाढ़ निकल गए हैं। मोकामा में पहले चरण में चुनाव है। नामांकन का आखिरी दिन कल है। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के उम्मीदवार और बाढ़ के बाहुबली अनंत सिंह 14 अक्टूबर को पर्चा भर चुके हैं। अनंत सिंह इस सीट से पहले पांच बार लगातार जीते हैं। 2022 में अनंत सिंह को एके 47 रखने के केस में जब सजा हुई तो विधायकी जाने के बाद उनकी पत्नी नीलम देवी उप-चुनाव जीती थीं। अनंत सिंह 2005 से 2010 तक तीन बार जेडीयू के टिकट पर जीते, 2015 में निर्दलीय जीत गए और 2020 में राजद के सिंबल पर जीते। 2022 में नीलम देवी राजद से ही जीती, लेकिन 2024 में नीतीश कुमार के बहुमत परीक्षण में सरकार के साथ चली गईं। विधानसभा के रिकॉर्ड में यह सीट राजद के ही खाते में दर्ज है।   दूसरी ओर, सूरजभान सिंह 2000 में मोकामा से पहली बार और आखिरी बार विधायक बने थे। तब उन्होंने अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को बड़े अंतर से हराया था। दिलीप सिंह राजद के दबंग नेता और राबड़ी देवी की सरकार में कद्दावर मंत्री थे। 2004 में सूरजभान सिंह लोजपा के टिकट पर बलिया से लोकसभा सांसद बन गए। बाद में सजा हुई और चुनाव नहीं लड़ पाए तो 2014 में पत्नी वीणा देवी को मुंगेर से लोजपा का सांसद बनाया।  

जब पूरा गांव पुलिस नियंत्रण में: माहौल हुआ तनावपूर्ण

जालंधर जालंधर सैंट्रल विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 5 के अंतर्गत आते चोहक कलां गांव में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब निहंग सिंह संगठनों ने गांव के एक सार्वजनिक स्थल, लंगर हॉल के अंदर एक निशान साहिब स्थापित कर दिया और हॉल के अंदर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज जी का प्रकाश करने के बाद, श्री अखंड पाठ साहिब जी का पाठ शुरू कर दिया। एस.सी. समुदाय द्वारा विरोध जताए जाने के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसकी सूचना मिलने पर जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को टालने के लिए तुरंत कार्रवाई की और डी.सी.पी. सुरक्षा नरेश डोगरा, ए.डी.सी.पी. सिटी-1 आकर्षि जैन, ए.डी.सी.पी. इन्वैस्टिगेशन जयंत पुरी, ए.डी.सी.पी. हैडक्वार्टर सुखविंदर सिंह, ए.सी.पी. सैंट्रल अमनदीप सिंह, ए.सी.पी. सुरक्षा गगनदीप सिंह घुमन, एस.एच.ओ. डिवीजन-5 साहिल चौधरी, एस.एच.ओ. रामा-मंडी मनजिंदर सिंह, एस.एच.ओ. थाना-2 जसविंदर सिंह और एस.एच.ओ. थाना नई बारांदरी रविंदर कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीमें मौके पर पहुंचीं और तुरंत चोहक कलां गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।   प्रमुख दलित नेता, इस गांव के पूर्व सरपंच, सामाजिक न्याय परिषद के संयोजक और पंजाब दलित महासभा के चेयरमैन रमेश कुमार चोहकां ने कहा कि उक्त स्थान गांव का एक साझा स्थान है और इसका इस्तेमाल जंज घर के रूप में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस स्थान पर धार्मिक, सामाजिक और शादी समारोह आयोजित किए जाते हैं, लेकिन आज कुछ निहंग सिंह संगठनों ने हॉल के अंदर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश करके श्री अखंड पाठ साहिब जी का जाप शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि चौहकां कलां वैल्फेयर सोसायटी द्वारा हाल को साफ कर जंज घर के रूप में प्रयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि कुछ गांवों के लोगों के अनुरोध पर कुछ निहंग संगठनों ने इस स्थान पर कब्जा कर लिया है और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश किया गया है। उन्होंने पुलिस प्रशासन का शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए धन्यवाद किया और कहा कि गांव का सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखा जाना चाहिए।   इस संबंध में नंबरदार जरनैल सिंह ने कहा कि यह स्थान गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा का लंगर हॉल है। गुरुद्वारा सिंह सभा हाल मात्र पांच मरले में बना हुआ है और गुरुद्वारा साहिब में न तो शौचालय है और न ही लंगर बनाने और परोसने की सुविधा के लिए जगह है, जिसके लिए यह लंगर हॉल स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह लंगर हॉल गुरुद्वारा साहिब जी के संकल्पों के अनुसार 2014 में बनाया था। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने एस.सी. समुदाय के लोगों को इस स्थान को समागमों के लिए प्रयोग करने की सहमति दी थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से गुरु घर के इस स्थान पर शादी समारोह आयोजित किए गए और गुरु घर के लंगर हॉल में डीजे बजाए गए तथा मांस-मदिरा का सेवन किया गया, जिसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।   उन्होंने कहा कि प्रबंधक कमेटी पिछले तीन महीनों से प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रही पर कोई सुनवाई नहीं की गई, जिसके बाद गुरु घर की प्रबंधक कमेटी ने शहीद तरना दल के जत्थेदार बाबा हरि सिंह जी ग्रंथियां बटाला वाले और जत्थेदार बाबा लखबीर सिंह जी चौलांग वाले से संपर्क किया और इस स्थान पर मर्यादा रखने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि निहंग सिंह संगठन गुरु घर की मर्यादा के लिए एकत्रित हुए थे। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने हमारी कोई भी बात नहीं सुनी, इसलिए हमें गुरु घर की मर्यादा बनाए रखने के लिए निहंग सिंह संगठनों के समक्ष यह मुद्दा रखना पड़ा, जिसके बाद निहंग संगठन ने मर्यादा अनुसार निशान साहिब स्थापित कर और धन धन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी महाराज जी का प्रकाश कर श्री अखंड पाठ साहिब जी की शृंखला शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को इस मामले पर ध्यान देकर दोनों पक्षों का पक्ष जानना चाहिए।

सेलिब्रेशन मोमेंट: आईसीसी ने सितंबर के लिए दिया अभिषेक शर्मा और स्मृति मंधाना को बेहतरीन खिलाड़ी का खिताब

नई दिल्ली आईसीसी ने भारतीय टी20 टीम के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा और भारतीय महिला टीम की सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना को सितंबर महीने के लिए सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के सम्मान से नवाजा है। बाएं हाथ के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने एशिया कप 2025 में शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। अभिषेक ने सात मैचों में 44.85 की औसत और 200 के स्ट्राइक रेट से 314 रन बनाए थे। वे टूर्नामेंट के श्रेष्ठ स्कोरर थे। इसी प्रदर्शन के आधार पर अभिषेक को सितंबर महीने का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर चुना गया। अभिषेक ने इस पुरस्कार के दौर में अपनी टीम के साथी खिलाड़ी कुलदीप यादव और जिम्बाब्वे के बल्लेबाज ब्रायन बेनेट को पछाड़ा। आईसीसी द्वारा जारी एक बयान में अभिषेक ने गुरुवार को कहा, "पुरस्कार जीतकर बहुत अच्छा लग रहा है और मुझे खुशी है कि यह पुरस्कार कुछ महत्वपूर्ण मैचों के लिए मिला है जिनमें मैं टीम को जीत दिलाने में मदद कर सका। मुझे उस टीम का हिस्सा होने पर गर्व है जो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी जीत दिला सकती है।" अभिषेक ने कहा, "टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में हमारा हालिया रिकॉर्ड हमारी उत्कृष्ट टीम संस्कृति और सकारात्मक सोच को दर्शाता है। मैं टीम प्रबंधन को उनके मार्गदर्शन के लिए और अपने सभी साथियों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूं। मैं उस पैनल का भी आभारी हूं जिसने मुझे इस पुरस्कार के लिए चुना।" महिला श्रेणी में सितंबर महीने के लिए सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर का पुरस्कार स्मृति मंधाना को दिया गया। स्मृति ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू एकदिवसीय सीरीज में 58, 117, और 125 रनों की पारी खेली थी। मंधाना ने सीरीज में 77 की औसत और 135.68 के स्ट्राइक रेट से 308 रन बनाए थे। मंधाना ने इस पुरस्कार की रेस में दक्षिण अफ्रीका की तजमीन ब्रिट्स और पाकिस्तान की सिदरा अमीन को पछाड़ा। मंधाना ने कहा, "सितंबर 2025 के लिए आईसीसी महिला प्लेयर ऑफ द मंथ का पुरस्कार पाकर मैं सचमुच सम्मानित महसूस कर रही हूं। इस तरह का सम्मान मुझे एक खिलाड़ी के रूप में आगे बढ़ने और विकसित होने के लिए प्रेरित करता है। यह सम्मान उस समर्थन, विश्वास और प्रयास को भी दर्शाता है जो हम एक टीम के रूप में सामूहिक रूप से एक साथ देते हैं। मेरा लक्ष्य हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और टीम के लिए मैच जीतना रहा है। मैं उन अवसरों का पूरा लाभ उठाने के लिए उत्सुक हूं जिनसे आगे आने वाले मैचों में भारत को यादगार जीत मिलेगी।" 

बलूच विद्रोहियों का हमला: अफगानिस्तान तनाव के बीच बलूचिस्तान में गैस पाइपलाइन बुरी तरह क्षतिग्रस्त

बलूचिस्तान  पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 48 घंटे का युद्धविराम लागू है। दूसरी तरफ बलूचिस्तान में अशांति थमने का नाम नहीं ले रही। बलूच लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) ने धादर इलाके में एक पुलिस गश्ती दल को बंधक बनाने की जिम्मेदारी स्वीकार की है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। बीएलएफ ने दावा किया कि उसके लड़ाकों ने धादर में पुलिस अधिकारियों को बंधक बना लिया, जबकि बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (बीआरजी) ने एक धमाके की जिम्मेदारी ली, जिसमें सुई और काशमोर के बीच स्थित महत्वपूर्ण गैस पाइपलाइन को भारी क्षति पहुंची। द बलूचिस्तान पोस्ट (टीबीपी) के मुताबिक, बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाराम बलूच के बयान से पता चलता है कि लड़ाकों ने शाम करीब 5 बजे धादर के अल्लाह यार शाह इलाके में पुलिस गश्ती दल का सामना किया। बयान में कहा गया कि गश्ती दल को घेर लिया गया, अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया, उनके हथियार छीन लिए गए और कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए वाहन को आग के हवाले कर दिया गया। बीएलएफ प्रवक्ता ने आगे बताया कि शुरुआती पूछताछ से यह सामने आया कि बंधक अधिकारी बलूच समुदाय या राष्ट्रीय आंदोलन के खिलाफ कोई कार्रवाई में शामिल नहीं थे, इसलिए उन्हें बिना किसी हानि के रिहा कर दिया गया। टीबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, बीएलएफ ने इस ऑपरेशन की पूरी जिम्मेदारी ली है। वहीं, बीआरजी के प्रवक्ता दोस्तैन बलूच ने बताया कि संगठन ने डेरा बुगती के सुई इलाके से कराची तक जाने वाली 36 इंच व्यास वाली गैस पाइपलाइन पर सुई और काशमोर के बीच रातभर विस्फोटक लगाए, जिससे भारी तबाही हुई। बीआरजी के बयान में स्पष्ट किया गया कि यह हमला उनके सतत अभियान का हिस्सा है, जो तब तक चलेगा जब तक राजनीतिक मांगें पूरी न हो जाएं।  

कल होंगे नए गुजरात मंत्रियों के शपथ ग्रहण: CM पटेल के नेतृत्व में होगी नई टीम का गठन

अहमदाबाद  गुजरात की सियासत से इस वक्त की बड़ी खबर आ रही है. मौजूदा सरकार के सभी मंत्रियों ने मुख्यमंत्री को अपना इस्तीफा सौप दिया है. इससे अब नए मंत्रिमंडल का मार्ग प्रशस्त होगा. कल गुजरात में नए मंत्रिमंडल का शपथग्रहण समारोह होगा. मुख्यमंत्री देर रात राज्यपाल को हटाए जाने वाले मंत्रियों के इस्तीफे सौंपेंगे. नए मंत्रियों के नामों की एक सूची भी सौंपी जाएगी. अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाले मंत्रिपरिषद का शुक्रवार को विस्तार होगा.भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने पहले ही बताया था कि आगामी कैबिनेट विस्तार में राज्य को करीब 10 नए मंत्री मिल सकते हैं. इतना ही नहीं करीब आधे मौजूदा मंत्रियों को बदला जा सकता है. गुजरात कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत 17 मंत्री इस बड़े सियासी फेरबदल को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि गुजरात के सीएम भूपेंद्र पटेल के मंत्रिपरिषद का विस्तार शुक्रवार सुबह साढ़े 11 बजे होगा. मौजूदा गुजरात कैबिनेट में मुख्यमंत्री समेत 17 मंत्री हैं. 8 कैबिनेट मंत्री हैं. इतने ही राज्य मंत्री हैं.कुल 182 सदस्यों वाली विधानसभा में सदन की कुल संख्या का 15 प्रतिशत या 27 मंत्री हो सकते हैं. अब आगे क्या-क्या होगा? मौजूदा मंत्रियों से इस्तीफा लेने के बाद अब मंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायकों को देर रात जानकारी दी जाएगी. कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए 3 से 4 विधायकों को जगह मिल सकती है. ज्यादातर नए मंत्री मूल रूप से बीजेपी से होंगे. समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए जातिगत समीकरण का पूरा ध्यान रखा जाएगा. कुल मिलाकर नए मंत्रिमंडल में युवा और अनुभवी चेहरों का सियासी संगम देखने को मिलेगा. नए मंत्रिमंडल में इन्हें मिल सकती है जगह जानकारी के मुताबिक, इस बार कैबिनेट में रिवाबा जडेजा, अर्जुन मोडवाडिया, जीतू वाघानी, हर्ष सांघवी को जगह मिल सकती है. 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार गुजरात के मंत्रिमंडल में फेरबदल किया जा रहा है. सीएम पटेल के नेतृत्व में ये फेरबदल आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति के मद्देनजर हो रहा है. अब सरकार फेरबदल करके 2027 के चुनाव में अपनी जीत को लेकर सभी समीकरणों को साधने का प्रयास कर रही है.  

लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा देने खाद्य मंत्री सपरिवार खरीदी करने पहुंचे बाजार

अपना त्योहार, अपनों के हाथों से बनी वस्तुएं खरीद कर मनाये : गोविंद सिंह राजपूत  भोपाल  स्थानीय दुकानदारों, हस्तशिलपियों एवं लोकल फाॅर, वोकल को बढ़ावा देने के लिए दीपावली के अवसर पर खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने परिवार सहित कटरा बाजार सागर पहुंचकर खरीदारी की । स्थानीय दुकानदारों से बातचीत करते हुए श्री राजपूत ने शहरवासियों से भी अपील करते हुए कहा कि अपना त्यौहार अपने के हांथों से बनी वस्तुओं को खरीदकर मनायें ताकि हर घर में दीवाली की खुशियां पहुंच सकें। यह सभी व्यापारी आपके द्वारा खरीदी गये साज-सामग्री से प्रोत्साहित होते हैं, उनके घर भी त्यौहार की खुशियां पहुंचती हैं। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत एवं उनकी पत्नी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सविता सिंह ने बाजार से मिट्टी के दीपक तथा अन्य पूजा सामग्री खरीदी। त्योहारी सीजन में लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लोकल फॉर वोकल’ और ‘स्वदेशी अपनाओ, देश बचाओ’ अभियान को गति देने के लिए मंत्री श्री राजपूत ने इस दिवाली पर स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने का आह्वान किया। त्योहारी सीजन में स्थानीय बाजारों में खरीदारी कर उन्होंने न केवल स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन दिया, बल्कि छोटे व्यापारियों और कारीगरों के लिए रोजगार के अवसरों को भी बल दिया। मंत्री श्री राजपूत ने कटरा बाजार का दौरा कर स्थानीय हस्तशिल्प, मिट्टी के दीये, हस्तनिर्मित वस्त्र और स्वदेशी खाद्य पदार्थों की खरीदारी की। उन्होंने कहा, स्वदेशी अपनाने से न केवल हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि लाखों कारीगरों, छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।यह कदम स्थानीय उत्पादकों और विक्रेताओं के लिए आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। ‘लोकल फॉर वोकल’ अभियान का लक्ष्य उपभोक्ताओं को स्वदेशी उत्पादों के प्रति जागरूक करना है, जिससे विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम हो। इससे न केवल देश का पैसा देश में रहेगा, बल्कि स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।  लोकल फाॅर वोकल के मंत्री श्री राजपूत ने बताये फायदे  मंत्री श्री राजपूत ने नागरिकों से अपील की कि वे इस दिवाली स्थानीय दुकानों से खरीदारी करें, ताकि त्योहारों की रौनक के साथ-साथ देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता भी बढ़े। इस पहल से न केवल व्यापारियों को लाभ होगा, बल्कि सांस्कृतिक विरासत भी संरक्षित होगी। स्वदेशी अपनाकर हम एक सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत का निर्माण कर सकते हैं। मंत्री राजपूत ने कहा कि लोकल फॉर वोकल से स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होती है। लोकल फॉर वोकल से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलते हैं, जिससे उनकी आय बढ़ती है और वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकते हैं। स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण होता है, जिससे हमारी सांस्कृतिक विरासत बनी रहती है। लोकल फॉर वोकल से परिवहन की आवश्यकता कम होती है, जिससे ईंधन की बचत होती है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ती है, क्योंकि उत्पादक अपने उत्पादों को अच्छी तरह से बनाने के लिए प्रेरित होते हैं। देश आत्मनिर्भर बनता है, क्योंकि हमें आयात पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है।

टिकट की राजनीति: क्या तेजस्वी का फैसला पारिवारिक विवाद थामने की चाल है या यादव वोट बैंक को साधने की रणनीति?

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए सियासी दलों ने हर दांव चल रहे हैं. आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के सियासी विरासत संभाल रहे तेजस्वी यादव ने अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव की चचेरी साली करिश्मा राय को परसा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है. हालांकि, तेज प्रताप का अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय के साथ विवाद चल रहा है और मामला अदालत में है. करिश्मा राय बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दरोगा प्रसाद राय की पोती हैं. दरोगा राय के छोटे बेटे पूर्व मंत्री चंद्रिका राय की बेटी ऐश्वर्या राय के साथ तेज प्रताप की शादी हुई थी, कुछ समय के बाद उनके रिश्ते खराब हो गए. इसे लेकर लालू परिवार बैकफुट पर आ गया है. तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप के ससुर चंद्रिका राय के बड़े भाई विधानचंद्र राय की बेटी करिश्मा राय को प्रत्याशी बनाया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तेजस्वी का यह सियासी डैमेज कंट्रोल करने का दांव है या फिर यादव वोटों को जोड़े रखने की स्ट्रैटेजी है? करिश्मा राय पिछले विधानसभा चुनाव में भी आरजेडी से टिकट मांग रही थीं, लेकिन तब उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था. तेज प्रताप और उनकी पत्नी ऐश्वर्या के बीच चल रहे केस की वजह से लालू परिवार ने करिश्मा को टिकट नहीं दिया था. लालू परिवार उस समय तेज प्रताप के साथ था, लेकिन पिछले दिनों लालू यादव ने तेज प्रताप को परिवार और पार्टी से बेदखल कर दिया. तेज प्रताप यादव इस बार के विधानसभा चुनाव में खुद अपनी पार्टी बनाकर लड़ रहे हैं. तेज प्रताप यादव महुआ सीट से ताल ठोक रहे हैं. लालू यादव द्वारा पारिवारिक संबंधों और राजनीतिक समीकरणों को साधते हुए करिश्मा राय को परसा सीट से मैदान में उतारना, क्षेत्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. परसा से टिकट देकर तेजस्वी एक तीर से कई दांव साधते नजर आ रहे हैं. परसा विधानसभा सीट जीतने का सियासी दांव   बिहार की सियासत में दरोगा प्रसाद का राजनीतिक रसूख किसी से छिपा नहीं है. वह बिहार के सीएम रहे और परसा सीट पर उनका सियासी दबदबा था. 1952 में पहली बार परसा सीट से जीतकर विधायक बने दरोगा राय ने 1970 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. इस सीट को दरोगा राय के बेटे चंद्रिका राय ने अपनी कर्मभूमि बनाते हुए अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया. 2015 में परसा सीट पर चंद्रिका राय आरजेडी से विधायक चुने गए, उससे पहले जेडीयू से जीतते रहे. तेज प्रताप और ऐश्वर्या के रिश्ते बिगड़े तो चंद्रिका राय ने आरजेडी का दामन छोड़कर जेडीयू में वापसी कर ली. 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू के टिकट पर चंद्रिका राय चुनाव लड़े और आरजेडी से छोटे राय मैदान में थे. छोटे लाल राय ने जीत दर्ज कर विधायक बने, लेकिन बाद में वे पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो गए. अब 2025 के चुनाव में परसा में मुकाबला दिलचस्प होगा. चंद्रिका राय के जेडीयू में अलग-थलग पड़ जाने के चलते तेजस्वी ने बड़ा दांव चला. आरजेडी ने करिश्मा राय को उतारा है तो जेडीयू से छोटे लाल राय मैदान में है. इस तरह मुकाबला काफी रोचक होगा. तेजस्वी यादव ने सियासी संदेश देने का चला दांव  तेजस्वी यादव ने तेज प्रताप यादव की साली को टिकट देकर सियासी संदेश दे दिया है. तेजस्वी ने तेज प्रताप को स्पष्ट संदेश दिया है कि आरजेडी अब उन लोगों से दूरी बनाकर नहीं रखेगा, जिनसे उनके निजी विवाद के चलते 2020 में दूरी बनाई गई थी. इसी के चलते तेजस्वी ने करिश्मा को पार्टी का टिकट दिया है. चंद्रिका राय अब जब खुद चुनावी मैदान में नहीं हैं तो अपनी भतीजी के लिए सियासी समर्थन कर सकते हैं. बिहार में यादव समुदाय के करीब 15 फीसदी वोटर हैं, जो ओबीसी में सबसे ज्यादा हैं. यादव आरजेडी का परंपरागत वोटर माना जाता है. तेज प्रताप यादव के हरकतों से यादव समाज नाराज भी माना जा रहा था, चाहे ऐश्वर्या राय के साथ विवाद का मामला हो या फिर अनुष्का यादव के साथ फोटो वायरल होने की बात हो. ऐसे में तेजस्वी ने करिश्मा राय को प्रत्याशी बनाकर यादव समुदाय की नाराजगी को दूर करने का दांव चला है.

राकेश किशोर की मुश्किलें बढ़ीं: CJI पर हमला मामले में कोर्ट ने दिया हरी झंडी

नई दिल्ली  भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई पर सुप्रीम कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश करने वाले राकेश किशोर की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने गुरुवार को जूताकांड में राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई चलाने की अपनी मंजूरी दे दी है। भगवान विष्णु पर सीजेआई गवई की टिप्पणी से नाराज राकेश किशोर ने छह अक्टूबर को उन पर भरी कोर्ट में जूता फेंकने की कोशिश की थी। हालांकि, बाद में सीजेआई ने उन्हें माफ करते हुए कोई भी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया था। अटॉर्नी जनरल द्वारा अवमानना की मंजूरी दिए जाने की बात की जानकारी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तब दी, जब सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने इस मामले को उठाया। कोर्ट की अवमानना क नियम सेक्शन 15 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ इसकी कार्रवाई शुरू किए जाने से पहले अटॉर्नी जनरल की मंजूरी की जरूरत होती है। सीजेआई गवई पर जूता फेंकने के मामले में अटॉर्नी जनरल की ओर से यह मंजूरी दी गई है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की थी और एजी वेकंटरमणी को पत्र लिखा था। विकास सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को कल लिस्ट करने की मांग की। उन्होंने लिखा, ''जूता फेंकने के मामले को ऐसे ही नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। राकेश किशोर को जूता फेंकने पर कोई पछतावा नहीं है। मैंने अटॉर्नी जनरल से मंजूरी मांगी थी और इसे कल लिस्ट किया जा सकता है। सोशल मीडिया इस मामले में पागल हो गया है।'' सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा, ''राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए एजी द्वारा मंजूरी दी जा चुकी है। संस्था की ईमानदारी दांव पर है। कुछ कार्रवाई की जरूरत है।'' हालांकि, इतना सब सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस घटना को जाने देना ही सबसे बेहतर होगा। मेहता और सिंह ने अदालत से सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री पोस्ट करने पर रोक से संबंधी आदेश पारित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि हर तरह की अपमानजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। पीठ ने कहा कि भाषण और अभिव्यक्ति का मौलिक अधिकार दूसरों की गरिमा की कीमत पर नहीं हो सकता है। इसने सोशल मीडिया की अनियमित प्रकृति के दुष्प्रभावों की ओर इशारा किया और कहा, ‘‘हम सामग्री के उत्पाद और उपभोक्ता दोनों हैं’’। हालांकि, कोर्ट ने मामले की कल मामले की सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं किया है। जस्टिस कांत ने कहा, ''देखते हैं एक हफ्ते में क्या होता है और भी बिकने वाली चीजें पढ़ेंगे।'' वहीं, जस्टिस बागची ने कहा कि शायद छुट्टियों के बाद कुछ और बिकने वाली चीजें सामने आएंगी। प्रधान न्यायाधीश पर जूता फेंकने के प्रयास की यह अभूतपूर्व घटना छह अक्टूबर को हुई। उस दिन सुबह करीब 11:35 बजे अदालत कक्ष संख्या-एक में 71-वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर ने अपने जूते उतारकर उन्हें प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ की ओर फेंकने का प्रयास किया। सुरक्षाकर्मियों ने आरोपी अधिवक्ता को तुरंत हिरासत में ले लिया। अदालती कार्यवाही के दौरान हुई इस घटना से अविचलित प्रधान न्यायाधीश ने अदालत के अधिकारियों और अदालत कक्ष में मौजूद सुरक्षाकर्मियों से इसे नजरअंदाज करने और राकेश किशोर नामक दोषी वकील को चेतावनी देकर छोड़ देने को कहा।