samacharsecretary.com

ट्रंप के फैसलों के बीच पीएम मोदी की दूरी — जानिए असली कारण

नई दिल्ली कभी मंच साझा करते हुए ‘दो मजबूत नेताओं’ की दोस्ती का प्रतीक माने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अब रिश्तों की गर्माहट noticeably कम हो गई है। न अमेरिका में आमने-सामने मुलाकात, न किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में साझा उपस्थिति बस औपचारिक बधाइयों और प्रशंसाओं का सिलसिला जारी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों के बीच यह दूरी क्यों बढ़ रही है?   निमंत्रण पर ‘ना’ और बढ़ती खामोशी इस साल जून में ट्रंप ने पीएम मोदी को कनाडा से लौटते वक्त अमेरिका रुकने का निमंत्रण दिया, मगर मोदी ने वह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया। इसके बाद शर्म अल-शेख सम्मेलन के लिए भी आमंत्रण आया — जो ट्रंप की मध्यपूर्व शांति पहल का जश्न था पर प्रधानमंत्री ने इसमें भी शिरकत नहीं की और भारत की ओर से एक जूनियर मंत्री को भेजा गया। अब जब ट्रंप मलेशिया में हो रहे आसियान शिखर सम्मेलन में पहुंचे, मोदी ने वहां भी वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। यह पिछले एक दशक में दूसरा मौका है जब प्रधानमंत्री ने आसियान मंच पर भौतिक उपस्थिति दर्ज नहीं की। आगामी नवंबर में जब दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन होगा, ट्रंप ने पहले ही साफ कर दिया है कि वे उसमें शामिल नहीं होंगे। यानि, दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात अब लगभग एक साल बाद ही संभव दिख रही है।  अब ट्रंप मलेशिया में आयोजित आसियान शिखर सम्मेलन में हैं, जिसमें पीएम मोदी ने भाग नहीं लिया, बल्कि वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए. यह पिछले दस वर्षों में सिर्फ दूसरी बार है, जब उन्होंने आसियान सम्मेलन में उपस्थिति नहीं दर्ज की. और अब नवंबर में प्रधानमंत्री दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग जाने वाले हैं, जहां G20 शिखर सम्मेलन आयोजित होगा. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति पहले ही कह चुके हैं कि वे उस सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे. इसका मतलब है कि दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात अब लगभग एक साल तक नहीं होगी. पिछली बार उनकी मुलाकात फरवरी में वॉशिंगटन डीसी में हुई थी. कई लोगों को यह दूरी कुछ अजीब लग रही है. क्वाड शिखर सम्मेलन की तारीख को लेकर भी अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. कभी दो ‘मजबूत नेताओं’ के बीच हाई-प्रोफाइल ‘ब्रोमांस’ कहा जाने वाला रिश्ता अब एक अजीब कूटनीतिक दूरी में बदल गया है. अब मुलाकातें कम हो गई हैं. हाल ही में दोनों नेताओं के बीच तीन बार फोन पर बातचीत हुई है, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया. इस बीच सार्वजनिक बयानों में गर्मजोशी बनी हुई है. पीएम मोदी ट्रंप की ‘शांति प्रयासों’ की प्रशंसा करते हैं और ट्रंप उन्हें ‘अच्छा दोस्त’ कहते हैं, लेकिन सतह के नीचे यह रिश्ता कुछ तनावपूर्ण दिखाई देता है. तो सवाल है कि आखिर दोनों एक-दूसरे से बच क्यों रहे हैं? पुरानी नज़दीकी कैसे बन गई दूरी 2019-2020 के दौरान मोदी-ट्रंप के रिश्ते बहुत सार्वजनिक रूप से मजबूत दिखाई देते थे. ‘हाउडी मोदी!’ और ‘नमस्ते ट्रंप!’ जैसे विशाल आयोजनों ने इस दोस्ती की झलक पूरी दुनिया को दिखाई. दोनों नेता बड़े वादे करते थे… भारत-अमेरिका व्यापार बढ़ाना, रक्षा सहयोग गहरा करना, ऊर्जा समझौते करना. भारत के लिए ट्रंप एक ऐसे सहयोगी थे, जिनके साथ नई दिल्ली अपनी वैश्विक भूमिका मजबूत करना चाहती थी, जबकि अमेरिका के लिए भारत हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार था. जब ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति पद संभाला, तो पीएम मोदी ने फरवरी में उनसे मुलाकात की. दोनों ने अगली मुलाकात भारत में क्वाड शिखर सम्मेलन के दौरान करने का वादा किया, लेकिन मई आते-आते रिश्तों में दरारें दिखने लगीं. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध रुकवाया था. हालांकि पीएम मोदी ने सार्वजनिक रूप से इस दावे को खारिज कर दिया. जून तक आते-आते दोनों के रिश्ते में तनाव और बढ़ गया. रिश्ते में खटास के प्रमुख कारण 1. ट्रेड और टैरिफ: अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार असंतुलन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. भारत पर 50% तक टैरिफ लगाया गया है और अमेरिका भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्र में प्रवेश की मांग कर रहा है. मोदी ने साफ कहा है कि भारत समझौता नहीं करेगा. 2. रूसी तेल का खेल: भारत अभी भी रूस से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहा है. अमेरिका चाहता है कि भारत इसे कम करे. यह विवाद का बड़ा मुद्दा बन गया है. हाल ही में भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के उस दावे को खारिज किया कि भारत ‘लगभग शून्य’ स्तर तक रूसी तेल खरीद घटा देगा. 3. कूटनीतिक छवि: दोनों नेताओं के अपने घरेलू राजनीतिक आधार हैं जो उन्हें ताकतवर छवि बनाए रखने के लिए प्रेरित करते हैं, न कि समझौता करने के लिए. 4. रणनीतिक स्वायत्तता बनाम गठजोड़: भारत हमेशा यह रेखांकित करता है कि वह अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलेगा, किसी एक देश के साथ पूरी तरह नहीं जुड़ेगा. इन सभी तत्वों ने एक गर्मजोशी भरे रिश्ते को कठिन बना दिया है. क्या मोदी ट्रंप से मुलाकात टाल रहे हैं? ऐसा प्रतीत होता है कि प्रधानमंत्री मोदी किसी असहज या अनुचित माहौल में बैठक से बचना चाहते हैं. जैसे 47वें आसियान शिखर सम्मेलन (कुआलालंपुर) में उन्होंने वर्चुअल रूप से शामिल होना चुना, जिसे व्यापक रूप से ट्रंप से आमने-सामने मुलाकात से बचने के रूप में देखा गया. ट्रंप ने अपनी यात्रा के दौरान फिर से यह दावा दोहराया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म कराया और भारत रूस से तेल खरीदना बंद करने वाला है, जबकि भारतीय अधिकारियों ने ऐसे किसी भी फोन कॉल या बातचीत से इनकार किया. ऐसी स्थितियों में सार्वजनिक विरोधाभास से दोस्ती की छवि कमजोर पड़ती है. पीएम मोदी यह दिखाना चाहते हैं कि भारत किसी बाहरी दबाव में नहीं झुकेगा. ट्रंप से मिलना और वहां किसी ‘समझौते’ का संकेत देना, घरेलू राजनीति के लिहाज से मोदी के लिए असुविधाजनक हो सकता है. उसी तरह, ट्रंप भी ऐसी बैठक में दिलचस्पी नहीं रखते जहां उन्हें कोई ‘स्पष्ट जीत’ दिखाई न दे. इसलिए भारत का यह रवैया (बहुत जल्दी मुलाकात न करना) एक रणनीतिक लचीलापन बनाए रखने की कोशिश है. शर्म अल-शेख समिट में क्यों नहीं गए मोदी पीएम मोदी ने शर्म अल-शेख समिट में शामिल होने के लिए अमेरिकी न्योते … Read more

धुला भारत-ऑस्ट्रेलिया सेमीफाइनल, फाइनल में कौन होगी टीम? आंकड़ों में देखें

नवी मुंबई आईसीसी महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 के सेमीफाइनल में भारतीय टीम का सामना ऑस्ट्रेलिया से होना है. 30 अक्टूबर (गुरुवार) को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में होने वाले इस मुकाबले पर बारिश का खतरा मंडरा रहा है. इसी मैदान पर 26 अक्टूबर को भारत-बांग्लादेश का मैच बारिश के चलते रद्द करना पड़ा था. वहीं भारत- न्यूजीलैंड के मुकाबले में भी बारिश का खलल पड़ा था. अब गुरुवार को भी नवी मुंबई में बारिश होने की पूरी संभावना है. accuweather.com के अनुसार इस दिन नवी मुंबई में बारिश का पूर्वानुमान 65 प्रतिशत है, सेमीफाइनल भारतीय समयानुसार दोपहर 3 बजे शुरू होना है. लेकिन दोपहर के ही समय बारिश के पूरे आसार हैं. वैसे बारिश से गुरुवार को खेल धुलता भी है तो भी घबराने की जरूर नहीं है. आईसीसी ने इस मैच के लिए रिजर्व-डे भी रखा है. बारिश या किसी अन्य कारणों के चलते 30 अक्टूबर को मिनिमम 20-20 ओवरों का खेल संभव नहीं हो पाता है तो मैच रिजर्व डे (31 अक्टूबर) में जाएगा. मैच रिजर्व डे में वहीं से शुरू होगा, जहां रुका था. अगर एक बार टॉस हो गया तो मुकाबला 'लाइव माना जाएगा. हालांकि समस्या ये है कि शुक्रवार (31 अक्टूबर) को भी नवी मुंबई में बारिश की संभावना जताई गई है. 31 अक्टूबर को बारिश का पूर्वानुमान 90 प्रतिशत बताया गया है. यानी जमकर बारिश होने के आसार हैं. अब सवाल यह है कि अगर रिजर्व डे में भी मैच का नतीजा नहीं निकला, तो कौन सी टीम फाइनल में जाएगी? इस स्थिति में ऑस्ट्रेलियाई टीम फाइनल के लिए क्वालिफाई करेगी. क्योंकि ऑस्ट्रेलिया अंकतालिका में भारत से ऊपर रहा था. ऑस्ट्रेलियाई टीम ने लीग स्टेज में 7 में से 6 मैच जीते थे, जबकि एक मैच (श्रीलंका के खिलाफ) उसका बारिश के कारण रद्द हुआ था. भारतीय टीम चौथे नंबर पर रही थी दूसरी ओर भारतीय टीम ने लीग स्टेज में 3 मैच जीते, 3 हारे और एक में नतीजा नहीं निकल पाया. हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली भारतीय टीम अंकतालिका में चौथे स्थान पर रही थी. यानी अगर सेमीफाइनल मैच बारिश से रद्द होता है, तो बेहतर लीग रैंकिंग के आधार पर ऑस्ट्रेलियाई टीम फाइनल में जगह बनाएगी. इसी तरह से 29 अक्टूबर (बुधवार) को गुवाहाटी में साउथ अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच होने वाले पहले सेमीफाइनल के लिए भी रिजर्व डे का प्रावधान किया गया है. यदि वो मैच भी धुल जाता है तो इंग्लैंड की टीम फाइनल खेलेगी, क्योंकि वो अंकतालिका में साउथ अफ्रीका से ऊपर दूसरे स्थान पर रही थी.

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस: पूरे राज्य में उत्सव और कार्यक्रमों की भरमार

प्रदेश में हर्षोल्लास से मनाया जायेगा मध्यप्रदेश स्थापना दिवस मुख्य कार्यक्रम लाल परेड ग्राउंड भोपाल में होगा जिला-स्तर पर भी आयोजित होंगे कार्यक्रम भोपाल मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल सहित जिला मुख्यालयों पर एक से तीन नवम्बर तक 3 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। एक नवम्बर को शासकीय भवनों पर रात्रि में प्रकाश व्यवस्था की जायेगी। अनेक नवाचारों का होगा शुभारंभ स्थापना दिवस समारोह का मुख्य कार्यक्रम एक नवम्बर को प्रात: 11 बजे से लाल परेड मैदान पर आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम में "विकसित मध्यप्रदेश @2047" दृष्टि पत्र का विमोचन, एमपीई-सेवा एवं 'इन्वेस्ट एमपी' पोर्टल का शुभारम्भ होगा। साथ ही प्रतिष्ठित कलाकारों द्वारा सुगम संगीत की प्रस्तुति तथा आतिशबाजी की जायेगी। सायंकाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी होगा। विभिन्न विभागों की लगेगी विकास प्रदर्शनी स्थापना दिवस पर 2 एवं 3 नवम्बर को स्व-सहायता समूह एवं प्रदेश के प्रतिष्ठित शिल्पियों की 'आर्ट एण्ड क्राफ्ट' प्रदर्शनी सह विक्रय स्टॉल के माध्यम से प्रदेश की बहुआयामी कला-संस्कृति का लोकव्यापीकरण और मंचीय कार्यक्रम में महाराजा विक्रमादित्य महानाट्य का मंचन एवं सुगम संगीत का कार्यक्रम होगा। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं की सतत प्रगति, विरासत से विकास, उद्योग/विज्ञान क्षेत्र की विशिष्ट उपलब्धियों पर केन्द्रित आकर्षक प्रदर्शनी एवं मध्यप्रदेश के विकास पर केन्द्रित फिल्म का प्रदर्शन प्रदेश, जिला एवं ब्लॉक स्तर पर होगा। स्कूल-कॉलेजों में होंगी विभिन्न प्रतियोगिताएँ युवाओं को जोड़ने के लिए मध्यप्रदेश की गौरवशाली विरासत, बहुआयामी संस्कृति, पर्यटन, उद्योग, विज्ञान के क्षेत्र से संबंधित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता, वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिता, मध्यप्रदेश के विकास, पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों पर आधारित चित्र/फोटो प्रदर्शनी/पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन विभिन्न स्कूलों एवं कॉलेजों में किया जायेगा। सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाएँ, विज्ञान और उद्योग व्यवसाय के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित करने वाली संस्थाओं सहित संवाद, गोष्ठी, युवा वैज्ञानिक सम्मेलन भी आयोजित किये जायेंगे। जिला-स्तरीय समारोह जिला मुख्यालयों पर स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियाँ, जिलावार उत्कृष्ट कार्यों तथा जिला उत्पादों पर केन्द्रित प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। प्रभारी मंत्रियों के समन्वय से जिला स्तर पर कलेक्टर कार्यक्रम को अंतिम रूप देंगे। जिला मुख्यालय पर प्रमुख शासकीय भवनों पर एक नवम्बर की रात्रि को प्रकाश की व्यवस्था की जायेगी। स्थापना दिवस के कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, उद्योगपतियों, व्यावसासियों, समाजसेवियों, धर्मगुरुओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्ड्री विद्यालयों एवं महाविद्यालयीन छात्र/छात्राओं, शासकीय अधिकारी/कर्मचारियों, जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, लोकतंत्र सेनानियों एवं शहीद सैनिकों के परिवारों तथा महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित करने वाले स्व-सहायता समूह/स्टार्टअप के पदाधिकारियों को भी विशेष तौर पर आमंत्रित किया जायेगा। जिससे कार्यक्रम में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।  

डॉ. यादव करेंगे ‘अनुगूँज’ कार्यक्रम की शुरुआत, सांस्कृतिक रंगों से रोशन होगा आयोजन

डॉ. यादव करेंगे 'अनुगूँज' कार्यक्रम की शुरुआत, सांस्कृतिक रंगों से रोशन होगा आयोजन सांस्कृतिक महोत्सव अनुगूँज का शुभारंभ, कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे शासकीय विद्यालयों के 500 विद्यार्थी करेंगे अपनी सांस्‍कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों की सहभागिता से आयोजित किये जाने वाले सांस्‍कृतिक कार्यक्रम "अनुगूंज" का आयोजन मंगलवार 28 अक्‍टूबर को भोपाल स्थित शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय, शिवाजी नगर में शाम 5:30 बजे से होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम के मुख्‍य अतिथि होंगे। जनजातीय कल्‍याण मंत्री कुँवर विजय शाह एवं स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री  उदय प्रताप सिंह कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। अनुगूँज के प्रथम भाग 'धनक' के अंतर्गत वाद्य संगीत के साथ ही भारत के विविध शास्‍त्रीय नृत्‍य ओडिसी, भरतनाट्यम, कथक और मणिपुरी नृत्‍य आदि की मनमोहक प्रस्‍तुतियाँ होंगी। कार्यक्रम के द्वितीय भाग 'रंगकार' के अंतर्गत 'नाटक ताना बाना टूट न जाए' का मंचन विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम के सहभागी विद्यार्थियों ने एक माह की अल्पावधि में इन प्रस्तुतियों के लिए खुद को तैयार किया है। आत्‍मानुशासन, लगन, उत्साह और जोश के साथ भोपाल सहित प्रदेश के विभिन्‍न अंचलों से शासकीय विद्यालयों के लगभग 500 विद्यार्थियों ने अपनी अभिव्यक्ति को नए सोपान देने का प्रयास अनुगूँज में किया है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अनुगूँज के आकल्पन को आकार देने के लिए प्रदेश के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ख्‍यातिप्राप्‍त रंगकर्मी और कलाकारों को मेंटर्स के रूप में संयोजित किया गया है। इन मेंटर्स ने एक कुशल मार्गदर्शक के रूप में इस विशेष कार्यक्रम और भविष्य के लिए भी विद्यार्थियों को विभिन्न कलाओं में पारंगत कराया है। उल्‍लेखनीय है कि अनुगूँज समारोह स्कूल शिक्षा विभाग का एक रचनात्मक प्रयास है जो विद्यार्थियों की शिक्षा के साथ-साथ उनके रचनात्मक और सर्वांगीण विकास पर केंद्रित है। विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के लिए प्रदेश के राष्‍ट्रीय और अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त कलाकार विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे है। इनमें सुप्रसिद्ध संगीतकार मॉरिस लाजरस, ओडसी नृत्‍य की अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त नृत्‍य गुरू सु बिंदु जुनेजा, भरतनाट्यम शैली की शीर्षस्‍थ नृत्‍य गुरू सु भारती होम्‍बल, ख्‍याति प्राप्‍त कथक नृत्‍य गुरू मती पद्मजा रघुवंशी और मणिपुरी नृत्‍य शैली के प्रसिध्‍द आचार्य और राष्‍ट्रीय अंतर्राष्‍ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त नृत्‍य गुरू  एम.के. होजाइनगम्‍बा सिेंह, ख्‍यात रंग निदेशक  सादात भारती के साथ ही प्रसिद्ध मंच संचालक  विनय उपाध्‍याय जैसे शीर्षस्‍थ कला मनीषी शामिल हैं। एक भारत-श्रेष्‍ठ भारत की अवधारणा पर सजी अनुगूँज की इन प्रस्‍तुतियों को साकार करने के लिए देश की विभिन्‍न प्रदर्शनकारी सांस्‍कृतिक प्रस्‍तुतियों के प्रदर्शन के लिये विशाल मंच का निर्माण महाकाल की नगरी उज्‍जैन के महाकाल लोक के मॉडल पर तैयार किया गया है।  

नरसिंहपुर से 10 हजार का इनामी राजा हाशमी पकड़ा गया, इंदौर किन्नर विवाद में फिनाइल पिलाने का मामला

इंदौर    इंदौर पुलिस को किन्नर समाज से जुड़े एक विवादित में बड़ी सफलता हाथ लगी है. झगड़े के दौरान एक को फिनाइल पिलाने और मारपीट करने की घटना में फरार चल रहे 10 हजार रुपए के इनामी मुख्य आरोपी राजा हाशमी को गिरफ्तार कर लिया गया है.   किन्नर समाज से जुड़े विवाद में एक व्यक्ति को फिनाइल पिलाने और मारपीट करने का गंभीर आरोप. आरोपी राजा हाशमी घटना के बाद से पिछले एक हफ्ते से फरार चल रहा था, जिस पर डीसीपी जोन ने 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था. पुलिस टीम को तकनीकी जानकारी और मुखबिर की मदद से राजा हाशमी की लोकेशन गोटेगांव, जिला नरसिंहपुर (जबलपुर के पास) में मिली. पुलिस ने उसके बहनोई के घर पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया. आरोपी को हिरासत में लेकर इंदौर लाया गया है और पुलिस पूछताछ के लिए उसे अदालत में पेश कर रिमांड की मांग करेगी. इस मामले में पुलिस ने कुल चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था. एक आरोपी सपना हाजी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था. आरोपी अक्षय कुमायूं और पंकज जैन अब भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस के प्रयास लगातार जारी हैं. 

सड़क सुरक्षा के लिए कार्रवाई, उज्जैन में बुलेट साइलेंसर पर पुलिस ने चलाया रोडरोलर

उज्जैन  अपने वाहनों से कर्कश ध्वनि फैलाकर ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक शांति भंग करने वालों पर उज्जैन पुलिस ने फिर सख्ती दिखाई. टॉवर इलाके में पुलिस ने 5 लाख रुपए से अधिक कीमत के 30 से ज्यादा मोडिफाइड साइलेंसरों पर रोडरोलर चलवाकर उन्हें नष्ट किया. इस कार्रवाई के जरिए पुलिस ने संदेश दिया कि नियमों के खिलाफ कार्य बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और ऐसे कृत्यों पर सख्त कार्रवाई होगी.  दरअसल, शहर में तेज आवाज वाले साइलेंसरों से लोगों को परेशान करने, तेज रफ्तार से वाहन चलाकर पटाखे जैसी आवाज निकालने और राहगीरों को परेशानी में डालने वालों पर पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. लंबे समय से चल रही इस कार्रवाई में पुलिस ने ऐसी बाइकों, खासकर बुलेट में लगे मोडिफाइड साइलेंसर निकलवाए और वाहन चालकों पर जुर्माना भी लगाया. जब्त किए गए साइलेंसरों को टॉवर चौक पर जनता के सामने नष्ट कर पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी. एएसपी नितेश भार्गव ने बताया कि उज्जैन ट्रैफिक पुलिस शहर में यातायात नियम तोड़ने वालों, तेज रफ्तार से वाहन चलाने वालों और गैर-मानक साइलेंसरों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है.  करीब 5 लाख रुपए कीमत के 30 साइलेंसरों को सार्वजनिक स्थान पर नष्ट किया गया, ताकि समाज को यह संदेश जाए कि ऐसी चीजें वैध नहीं हैं और इन पर पुलिस कानूनी रूप से सख्त कार्रवाई करती है. पिछले कुछ समय से लगातार कार्रवाई चल रही है और भविष्य में भी अलग-अलग तरह की कार्रवाइयां नियोजित हैं.

संतोष चौबे’ के कहानी संग्रह ‘ग़रीबनवाज़’ का हुआ लोकार्पण

भोपाल. वरिष्ठ कवि–कथाकार, निदेशक विश्व रंग एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे के नए कहानी संग्रह 'ग़रीबनवाज़' का लोकार्पण एवं पुस्तक चर्चा का आयोजन रवीन्द्र भवन के गौरांजनी सभागार में समारोह पूर्वक किया गया। यह महत्वपूर्ण आयोजन रबीन्द्रनाथ टैगोर विशवविद्यालय, वनमाली सृजन पीठ एवं स्कोप ग्लोबल स्किल्स विश्वविद्यालय, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर श्री संतोष चौबे ने अपने कहानी संग्रह से "मगर शेक्सपियर को याद रखना" कहानी का बेहतरीन पाठ किया। उन्होंने इस अवसर पर अपनी रचना प्रक्रिया पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पठनीयता को लेकर मैं हमेशा सजगता बरतता हूँ। कहानी पढ़ते समय पाठक पहले ही वाक्य से कहानी के भीतर प्रवेश करें और फिर उसे पूरा पढ़कर ही रहें। मेरा मानना है कि लेखक की पवित्रता और उसका भोलापन हमेशा बना रहना चाहिए। मेरी कहानियों का मुख्य आधार उनमें दृश्यात्मकता और इंटेनसिटी का होना हैं।   समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार एवं वनमाली सृजन पीठ, भोपाल के अध्यक्ष श्री मुकेश वर्मा ने कहा ‘गरीबनवाज़’ कहानियाँ हमें जीवन के भीतर छिपे उस करुण पक्ष से जोड़ती हैं जो अक्सर हमारी दृष्टि से ओझल रह जाता है। संतोष चौबे की कहानियाँ सिर्फ घटनाएँ नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर चल रहे संवाद का दस्तावेज़ हैं। उनका कथा संसार हमारे समय का गहन आत्मपरिचय कराता है।   समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कथाकार श्री शशांक ने कहा कि संतोष चौबे की कहानियों में जीवन की संवेदना, मानवीय द्वंद्व और सामाजिक सरोकार गहराई से जुड़े हुए हैं। उनके पात्र आम जन की जद्दोजहद और आशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस संग्रह की कहानियाँ अपने शिल्प और कथ्य दोनों में उल्लेखनीय हैं।”   विशिष्ट अतिथि प्रतिष्ठित कथाकार डॉ. उर्मिला शिरीष ने अपने वक्तव्य में कहा कि कहानी संग्रह में स्त्री–पुरुष संबंधों, सामाजिक असमानताओं और नैतिक प्रश्नों की प्रस्तुति बेहद संवेदनशीलता के साथ की गई है। चौबे जी की कहानियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि आधुनिक हिंदी कथा साहित्य अब भी मनुष्य की जड़ों और उसकी करुणा से जुड़ा हुआ है।   कार्यक्रम में साहित्यकार रेखा कस्तवार, भालचंद्र जोशी, पंकज सुबीर ने भी अपनी टिप्पणियाँ दीं। वक्ताओं ने कहा कि चौबे जी की कहानियाँ गहरी मानवीय दृष्टि से ओतप्रोत हैं और वे पाठक को भीतर तक झकझोर देती हैं। युवा कथाकार सुश्री प्रज्ञा रोहिणी (दिल्ली) ने कहा कि संतोष चौबे जी की कहानियां उत्तर आधुनिकता के शिफ्ट की कहानियां है। हमारे समय की नजर नहीं आने वाली बड़ी-बड़ी खाईयों को पाटने का महत्वपूर्ण कार्य संतोष चौबे तमाम द्वदों के बावजूद अपनी रचनाओं के माध्यम से करते हैं।   युवा आलोचक श्री अच्युतानंद मिश्र (केरल) ने कहा कि संतोष जी रचनाओं में विधाओं में आवाजाही सबसे महत्वपूर्ण पक्ष है। सामाजिक स्वरूप और सामाजिक आलोचना को लेकर चिंता और गहरी वैचारिकी दृष्टि उनकी कहानियों में विन्यस्त है।   अतिथियों का स्वागत वनमाली सृजन पीठ की राष्ट्रीय संयोजक एवं आईसेक्ट पब्लिकेशन की प्रबंधक सुश्री ज्योति रघुवंशी द्वारा किया गया। स्वागत उद्बोधन भी सुश्री ज्योति रघुवंशी द्वारा दिया गया। लोकार्पण समारोह का संचालन युवा कथाकार एवं वनमाली कथा के संपादक श्री कुणाल सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में वरिष्ठ रचनाकारों डॉ. विजय बहादुर सिंह, डॉ. विनीता चौबे, डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय (मुंबई), आनंद प्रकाश त्रिपाठी, डॉ. नितिन वत्स, बलराम गुमास्ता, डॉ. जवाहर कर्नावट, मेजर जनरल श्री श्याम श्रीवास्तव, श्री हरि भटनागर, प्रज्ञा रावत, नीलेश रघुवंशी, देवीलाल पाटीदार, डॉ. रामवल्लभ आचार्य, डॉ. गिरजेश सक्सेना, करुणा राजुरकर राज, मोहन सगोरिया सहित युवा रचनाकारों, साहित्यप्रेमियों ने अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज की।

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के पोषण पर जारी की गाइडलाइन, छह महीने के बाद मांसाहारी परिवारों के लिए खास सलाह

भोपाल  मध्य प्रदेश में महिला और बाल विकास विभाग ने दो साल तक के बच्चों के आहार को लेकर नई सलाह जारी की है। विभाग का कहना है कि छह माह की उम्र पूरी होने के बाद यदि परिवार मांसाहारी है, तो बच्चों को अंडा, मांस और मछली खिलाना चाहिए।विभाग ने बच्चों के पोषण के पांच सूत्र जारी किए हैं और इनका प्रचार-प्रसार आंगनवाड़ी केंद्रों और जनजागरूकता अभियानों के जरिए करने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि बाजार की चीजें जैसे बिस्किट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस बच्चों के लिए नुकसानदायक हैं, क्योंकि इनमें आवश्यक पोषक तत्व नहीं होते। पोषण अभियान के तहत दिए निर्देश केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण अभियान के तहत यह दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मंत्रालय ने सभी राज्यों को इन सूत्रों को अपनाने को कहा है। मध्य प्रदेश में इन्हें राज्य की महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। पोषण के पांच सूत्र इस प्रकार हैं:     पहले 1000 सुनहरे दिन: बच्चे के जन्म से दो वर्ष तक का समय सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, जिसमें पोषण और स्वास्थ्य पर खास ध्यान देने की जरूरत है।     पौष्टिक आहार: परिवार मांसाहारी हो तो बच्चे को अंडा, मांस और मछली देने की सलाह।     अनीमिया से बचाव: आयरन और प्रोटीन से भरपूर भोजन का सेवन बढ़ाने की सलाह।     डायरिया से बचाव: साफ पानी और स्वच्छ भोजन पर ध्यान।     स्वच्छता और साफ-सफाई: संक्रमण और बीमारियों से बचाव के लिए व्यक्तिगत व घरेलू स्वच्छता पर फोकस। बच्चों के लिए 1000 दिन बताए सुनहरे पोषण के पांच सूत्र बताते हुए कहा गया है कि पहले सौ दिनों में बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। इसमें गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म के दो साल तक की उम्र की अवधि शामिल है। इस दौरान उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल और सही देखभाल होना चाहिए, ताकि बच्चे का पूरा विकास हो। इस दौरान मां और बच्चे को सही पोषण की सर्वाधिक जरूरत होती है। इन 1000 सुनहरे दिनों में 270 दिन गर्भावस्था, 365 दिन बच्चे के जन्म के पहले साल के और 365 दिन बच्चे के जन्म के दूसरे साल के शामिल होते हैं। पौष्टिक आहार में कहा- मांस, मछली, अंडा खाना चाहिए सभी उम्र के लोगों के साथ बच्चे को छह माह का होने पर पर्याप्त मात्रा में अलग-अलग आहार खिलाने की बात कही गई है। साथ ही कहा गया है कि विभिन्न खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, चावल और पीले व काले रंग की दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां मसलन पालक, मैथी, चौलाई, सरसों, पीले फल आम, पका पपीता आदि खाना चाहिए। विभाग ने इसमें यह भी कहा है कि यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली खाना चाहिए। विभाग के अनुसार खाने में दूध, मिल्क प्रोडक्ट, अखरोट आदि शामिल करने के साथ आंगनवाड़ी में मिलने वाले पोषाहार अवश्य खाना चाहिए। जब बच्चा छह माह का हो जाए तो मां के दूध के साथ घर का बना मसला और गाढ़ा ऊपरी आहार भी दिया जाना चाहिए। इसमें कद्दू, लौकी, गाजर, पालक, दाल शामिल हैं। अगर मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली भी देना चाहिए। बच्चे के खाने में नमक, चीना और मसाला कम डालें और बच्चे को बाजार का बिस्कुट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस जैसी चीजें न पिलाएं। इससे बच्चे को सही पोषक तत्व नहीं मिलते। अनीमिया रोकने के लिए भी अंडा, मांस, मछली खाने को कहा पोषण का तीसरा सूत्र अनीमिया रोकने को लेकर किए जाने वाले प्रयास बताए गए हैं जिसमें कहा गया है कि अनीमिया रोकथाम के लिए आयरन युक्त भोजन जैसे दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, मैथी, सरसों, फल, दूध, दही, पनीर आदि बच्चे को खिलाएं। एमपी में हो चुका है अंडा खिलाने का विरोध प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों में जाने वाले बच्चों को अंडा खिलाने का प्रस्ताव पूर्व में भी महिला और बाल विकास विभाग में आ चुका है जिसका जमकर विरोध हुआ और इसके बाद सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया है। अब केंद्रीय महिला और बाल विकास विभाग के पोषण के पांच सूत्र बताए जाने के बाद इसे जिला अधिकारियों को लागू करने के लिए कहा गया है। हालांकि आंगनवाड़ी केंद्रों से इसकी सप्लाई को लेकर कोई बात नहीं कही गई है। बच्चे के माता पिता के लिए यह सलाह दी गई है।

मुख्यमंत्री साय ने जशपुर में दुलदुला छठ घाट में सूर्य को दिया अर्घ्य: प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय ने आज छठ महापर्व के अवसर पर दुलदुला छठ घाट में पहुँचकर सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को छठ पूजा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य का अवसर है कि मुझे छठ पर्व में सम्मिलित होने का अवसर मिला।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनता के विश्वास और स्नेह से ही उन्हें जनसेवा का अवसर मिला है, और वे क्षेत्र के विकास एवं जनता की अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। मुख्यमंत्री साय ने दुलदुला क्षेत्रवासियों की माँग पर छठ घाट के सौन्दर्यीकरण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आगामी छठ पर्व तक दुलदुला छठ घाट का सौन्दर्यीकरण कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुनकुरी छठ घाट का सौन्दर्यीकरण लगभग ₹5 करोड़ 17 लाख की लागत से किया गया है, जहाँ इस वर्ष व्रती महिलाएँ पूर्ण श्रद्धा-भाव से पूजा-अर्चना कर रही हैं। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत दुलदुला अध्यक्ष रामकुमार सिंह, आईजी दीपक कुमार झा, कलेक्टर रोहित व्यास, पुलिस अधीक्षक शशिमोहन सिंह सहित छठ व्रत करने वाली महिलाएँ, जनप्रतिनिधिगण एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

महासमुंद जिले के 323 तीर्थयात्री मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत निकल पड़े प्रयागराज-काशी यात्रा पर

विधायक श्री सिन्हा ने फूल माला पहनाकर तीर्थयात्रियों को दी शुभकामना महासमुंद मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत महासमुंद जिले के पांचों विकासखंडों से आज कुल 323 श्रद्धालु 18 बसों के माध्यम से पवित्र तीर्थस्थलों — प्रयागराज, हनुमानगढ़ एवं काशी विश्वनाथ — के दर्शन हेतु रवाना हुए। यह पांच दिवसीय यात्रा 27 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित की गई है। रवाना होने के पूर्व सभी श्रद्धालुओं का मेडिकल चेक अप कराया गया। इस अवसर पर महासमुंद विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने ध्वज दिखाकर श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए रवाना किया। कार्यक्रम में नगर पालिका उपाध्यक्ष श्री देवी चंद राठी, श्री येतराम साहू, श्री पवन पटेल, श्री महेंद्र सिक्का, श्री राजू चंद्राकर, श्री माखन पटेल, श्री मीना वर्मा, श्री रिंकू चंद्राकर, श्री शरद मराठा, श्री राकेश चंद्राकर सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाज कल्याण विभाग, जनपद पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। विधायक श्री सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा आरंभ की गई थी, किंतु पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्ष के कार्यकाल में यह योजना बंद रही। वर्तमान में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में इस जनकल्याणकारी योजना को पुनः प्रारंभ किया गया है। उन्होंने श्रद्धालुओं को फूल माला पहनाकर और तिलक लगाकर शुभकामनाएं दी।  ज्ञातव्य है कि योजना अंतर्गत 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के श्रद्धालु तीर्थ यात्रा के पात्र हैं। यदि पति-पत्नी साथ यात्रा करना चाहें तो उनमें से एक को आयु सीमा में छूट दी जाती है। योजना के तहत प्रत्येक माह पात्र श्रद्धालुओं को शासन द्वारा निर्धारित तीर्थस्थलों का निःशुल्क दर्शन कराया जाएगा। यह योजना पूर्णतः निःशुल्क है । यात्रा के दौरान आवागमन, ठहरने एवं भोजन की सभी व्यवस्थाओं का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाता है। इससे वरिष्ठ नागरिकों को न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त होगा, बल्कि समाज और संस्कृति से उनका आत्मिक जुड़ाव भी सुदृढ़ होगा। महासमुंद जनपद से 52, बागबाहरा से 47, पिथौरा से 50, बसना से 40, सरायपाली से 43, नगरपालिका महासमुंद से 50, बागबाहरा से 6, सरायपाली से 15, तुमगांव से 6, पिथौरा से 6 तथा नगर पंचायत बसना से 5 श्रद्धालु शामिल हैं। इनके साथ कुल 9 अनुरक्षक भी यात्रा पर गए हैं। इस तीर्थ यात्रा से श्रद्धालुओं में उत्साह एवं श्रद्धा का भाव देखा गया। श्रद्धालु सुखिया ध्रुव,मचेवा, दुलारी साहू, बागबाहरा से फौज सिंह और ठाकुर दीवान,पिथोरा की रेखा प्रधान सहित सभी श्रद्धालुओं ने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए इस जनकल्याणकारी योजना को जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।