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भारी सुरक्षा घेरा: भगवंत मान के दौरे से पहले प्रशासन सतर्क, बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्थाएं

लुधियाना पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के दौरे से पहले मिला हैंड ग्रेनेड पुलिस और सुरक्षा एजैंसियों के लिए बड़ा अलर्ट बन गया है। घटना के बाद अब प्रशासन ने सुरक्षा को 3 गुना बढ़ा दिया है। आर.टी.ओ. दफ्तर में होने वाले सी.एम. के समारोह की कमान खुद कमिश्नर स्वप्न शर्मा ने अपने हाथों में ले ली है। उनके निर्देशन में डी.सी.पी. हैड क्वार्टर स्नेहदीप शर्मा और डी.सी.पी. सिटी रूपिंदर सिंह को सुरक्षा की फ्रंटलाइन पर तैनात किया गया है। सोमवार देर शाम ही सी.एम. सिक्योरिटी टीम लुधियाना पहुंच गई थी। टीम ने आर.टी.ओ. दफ्तर का पूरा दौरा कर हर प्वाइंट का बारीकी से निरीक्षण किया। सुरक्षा अधिकारियों ने प्रशासन से सभी आर.टी.ओ. कर्मचारियों की पूरी सूची ली है, कौन-कौन समारोह में ड्यूटी पर रहेगा और किससे सी.एम. मुलाकात करेंगे, इसकी पूरी डिटेल ली गई है। प्रैस कान्फ्रैंस का स्थान बदला, सुरक्षा बनी प्राथमिकता पहले सी.एम. की प्रैस कान्फ्रैंस आर.टी.ओ. दफ्तर के पार्किंग एरिया में रखी जानी थी लेकिन सिक्योरिटी टीम के सुझाव के बाद अब स्थान बदलकर मुख्य भवन के सामने कर दिया गया है। इसके लिए नई व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। मंगलवार को बम निरोधक दस्ते ने समारोह स्थल के हर कमरे, दराज और बंद गेट तक की तलाशी ली। आर.टी.ओ. दफ्तर के जिन हिस्सों पर ताले लगे थे, उन्हें खुलवाकर सुरक्षा कर्मियों ने चैकिंग की। सिक्योरिटी टीम ने निर्देश दिए हैं कि समारोह के दिन केवल वही कर्मचारी अंदर रहेंगे जिनकी पहले से वैरीफिकेशन हो चुकी है। समारोह के कुछ ही दूरी पर रखे गए तीनों आतंकी और गैंगस्टर गौर करने वाली बात यह है कि जिन 3 आतंकियों को हैंड ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किया गया था, उन्हें और गैंगस्टर कौशल चौधरी को फिलहाल सी.आई.ए.-1 थाने में रखा गया है, जो आर.टी.ओ. दफ्तर से महज 50 मीटर की दूरी पर है। वहां पुलिस के जवान 24 घंटे निगरानी में तैनात हैं। डी.सी.पी. स्नेहदीप शर्मा ने बताया कि सुरक्षा के इंतजाम पूरी तरह से पुख्ता हैं। हर दिशा में पुलिस की तैनाती की गई है। प्रैस कान्फ्रैंस कहां होगी, यह प्रशासन तय करेगा, पर वहां की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी होगी। सी.एम. सिक्योरिटी टीम के साथ मिलकर सभी प्वाइंट चैक किए जा रहे हैं। किसी तरह की लापरवाही नहीं होगी।

बाबा कार्तिक उरांव ने जनजातीय समाज के उत्थान हेतु अपना जीवन किया समर्पित: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर  जनजातीय समाज के महान शिक्षाविद्, समाजसेवी एवं राष्ट्रनायक बाबा कार्तिक उरांव की जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर आज अंबिकापुर में भूमि पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्यमंत्री श्री साय ने बाबा कार्तिक उरांव जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि बाबा कार्तिक उरांव समाज के गौरव हैं। उन्होंने विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद अपनी धर्म, संस्कृति और सभ्यता को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने पुरखों के बताए हुए मार्ग पर चलते हुए उच्चतम शिक्षा अर्जित की और समाज को दिशा दी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव का यह कथन-“जितना ज्यादा पढ़ेंगे, उतना ही समाज को गढ़ेंगे”- आज भी हमें प्रेरित करता है। उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान, शिक्षा के प्रसार और सामाजिक एकता के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित किया। हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज के सर्वांगीण विकास का संकल्प लेना चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नगर निगम कार्यालय के समीप बनने वाले बाबा कार्तिक उरांव चौक का भूमि पूजन किया तथा मूर्ति एवं चौक निर्माण के लिए ₹40.79 लाख की राशि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह चौक बाबा कार्तिक उरांव के आदर्शों, विचारों और योगदान की स्मृति को सहेजने का प्रतीक बनेगा। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने समाज के उत्थान और विकास के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। हमें उनके बताए हुए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने समाज की संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और रीति-रिवाजों को सम्मान देते हुए समाज को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने सदैव समाज में एकता, शिक्षा और जागरूकता का संदेश दिया। आज यह आवश्यक है कि हम उनके आदर्शों और बताए मार्ग पर चलकर समाज को संगठित करें और एकता के सूत्र में बांधें, जिससे जनजातीय समाज सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनकर देश के विकास में अपनी भागीदारी निभा सके। इस अवसर पर सामरी विधायक श्रीमती उद्धेश्‍वरी पैकरा, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत, सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व और संकल्प शक्ति से प्रदेश लिख रहा है निवेश की नई इबारत

भोपाल मध्यप्रदेश में अब विकास कोई वादा नहीं, बल्कि अनुभव है। ऐसा अनुभव, जो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदृष्टि और निर्णायक नेतृत्व से संभव हुआ है। राज्य सरकार ने उद्योगों के लिए भरोसा, पारदर्शिता और नीति-सुधार का ऐसा वातावरण बनाया है, जहाँ हर निवेश अवसर में बदल रहा है और हर विचार उद्योग में। यही परिवर्तन आज ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ के रूप में पूरे देश का ध्यान आकर्षित कर रहा है। वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय केवल औपचारिक घोषणा नहीं रहा, बल्कि राज्य की औद्योगिक नीति का सक्रिय अध्याय बना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस, इन्फ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन एवं सस्टेनेबिलिटी को औद्योगिक विकास के मुख्य आधार बने हैं। राज्य सरकार द्वारा 18 नई औद्योगिक नीतियाँ तैयार की गईं, जो निवेश, नवाचार, रोजगार और सतत विकास को नई ऊर्जा देती हैं। राज्य ने इज़ ऑफ डूइंग बिजनेस से आगे बढ़ते हुए कॉन्फिडेंस ऑफ डूइंग बिजनेस का नया दौर शुरू किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से निवेश प्रक्रिया को न केवल सरल और तेज़ बनाया गया, बल्कि उसे भरोसेमंद और पारदर्शी भी किया गया है। अब हर निवेशक यह अनुभव कर रहा है कि मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करना सुविधा से आगे बढ़कर एक सुरक्षित निर्णय है। इंडस्ट्री प्रमोशन पॉलिसी 2025 इसी दृष्टि का प्रतिबिंब है — पूंजीगत निवेश पर 40 प्रतिशत तक सहायता, रोजगार और निर्यात-आधारित प्रोत्साहन, और एफडीआई को बढ़ावा देने वाले प्रावधान इस नीति को निवेशकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक बनाते हैं। गार्मेंट्स, फुटवियर और टॉय उद्योगों में प्रशिक्षण और रोजगार के नए अवसर खुले हैं। वहीं फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और मेडिकल डिवाइस सेक्टर में अनुसंधान और गुणवत्ता-विकास के लिए विशेष व्यवस्थाएँ की गई हैं। राज्य सरकार ने औद्योगिक बुनियादी ढाँचे को भी नई दिशा दी है। स्मार्ट औद्योगिक पार्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और क्लस्टर-आधारित औद्योगिक क्षेत्रों के विकास ने निवेशकों को सुविधा और गति प्रदान की है। नई औद्योगिक टाउनशिप्स, इंटरकनेक्टेड ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और बिजली की निर्बाध आपूर्ति जैसी पहलों से उद्योगों के लिए समग्र पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में औद्योगिक निवेश अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह छोटे और मध्यम नगरों तक पहुँचकर क्षेत्रीय संतुलन स्थापित कर रहा है। जनविश्वास अधिनियम, स्टार्ट योर बिजनेस इन 30 डेज योजना, GIS आधारित भूमि आवंटन प्रणाली और एमपी इन्वेस्ट पोर्टल ने औद्योगिक प्रक्रियाओं को गति दी है। अब अनुमतियाँ और सेवाएँ एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, जिससे निवेश प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सोच उद्योग को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे रोजगार, नवाचार और सामाजिक उत्थान का माध्यम बनाती है। भूमि, ऊर्जा, जल और कच्चे माल की सुलभता के साथ अनुसंधान एवं तकनीकी प्रोत्साहन ने राज्य की औद्योगिक पहचान को नई ऊँचाइयाँ दी हैं। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में स्किल डेवलपमेंट और इंडस्ट्री कनेक्ट को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे स्थानीय युवाओं को उद्योगों से सीधे जोड़ने की प्रक्रिया और सशक्त बनी है। उज्जैन, इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे शहर आज इस औद्योगिक परिवर्तन के जीवंत उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश उद्योग और निवेश का वह केंद्र बन रहा है, जहाँ विकास स्थायी है और अवसर अनंत। ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ अब केवल नारा नहीं, बल्कि उस आत्मविश्वास का नाम जिसने राज्य को उद्योग है। रोजगार और निवेश की नई परिभाषा दी है। यह वही यात्रा है जहाँ नीति संकल्प में बदलती है और संकल्प परिणामों में। 

तीन दिवसीय कार्यशाला में शिक्षण ,संवाद और नेतृत्व कौशल को मिला नया आयाम

भोपाल  संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में क्वेस्ट अलायंस के तकनीकी सहयोग से इंदौर, बालाघाट, उज्जैन एवं सागर संभागों के मास्टर ट्रेनर्स के लिए तीन दिवसीय आवासीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य आईटीआई प्रशिक्षणार्थियों के बीच रोजगार कौशल (Employability Skills) पाठ्यक्रम को समेकित और प्रभावी रूप से लागू करना था। कार्यशाला में चार संभागों के 17 जिलों से आए मास्टर ट्रेनर्स ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कक्षा शिक्षण की आधुनिक पद्धतियों, विद्यार्थियों की लर्निंग जर्नी, डिजिटल एवं तकनीकी टूल्स के प्रयोग, टीम नेतृत्व, संचार कौशल, समस्या समाधान और सकारात्मक कार्यस्थल संस्कृति के निर्माण जैसे विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला मास्टर ट्रेनर्स के लिए शिक्षण के नवीन तरीकों से अवगत होने और आईटीआई विद्यार्थियों की करियर तैयारी एवं जीवन कौशल विकास के लिए प्रेरक भूमिका निभाने का अवसर बनी। अनुभव-साझा सत्रों, समूह गतिविधियों और व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों ने सीखने की प्रक्रिया के विविध पहलुओं को गहराई से समझा। कौशल विकास संचालनालय, अतिरिक्त संचालक श्री डी.एस. ठाकुर ने सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। कौशल विकास संचालनालय द्वारा संचालित यह पहल राज्य के युवाओं में रोजगार योग्यता, संवाद कौशल और आत्म-प्रेरणा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।  

मध्यप्रदेश ने किया बंद पड़ी खदानों को प्रारंभ करने में सराहनीय कार्य : सचिव खनन मंत्रालय गोयल

प्रदेश में नीलाम किये गये खनिज ब्लॉक में हुआ उत्कृष्ट कार्य प्रदेश में 118 विभिन्न मुख्य खनिज ब्लॉकों की हुई सफल नीलामी : प्रमुख सचिव उमराव भोपाल सचिव खान मंत्रालय भारत सरकार श्री पीयूष गोयल ने कहा कि मध्यप्रदेश में बंद पड़ी खदानों को प्रारंभ करने में सराहनीय कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नीलाम किये गये खनिज ब्लॉकों में भी मध्यप्रदेश राज्य ने उत्कृष्ट कार्य किया है। सचिव श्री गोयल ने होटल ताज लेंक फ्रंट भोपाल में मुख्य खनिज ब्लॉक के संचालन की समीक्षा बैठक में यह बात कही। उन्होंने खदान संचालन के लिये वैधानिक कठिनाई दूर करने के लिये नीलाम किये जाने के पहले जिला स्तर पर नीलाम ब्लॉक में शामिल भूमि के परीक्षण के लिये कलेक्टर की अध्यक्षता में वन, राजस्व एवं खनिज साधन विभाग की कमेटी गठित किये जाने के निर्देश दिये। सचिव श्री गोयल ने ब्लॉक के सफल बोलीदारों के साथ खनन संचालन प्रारंभ करने के लिये चर्चा की। चर्चा में बोलीदारों को वैधानिक अनुमति प्राप्त करने में आ रही कठिनाइयों के निराकरण के लिये सुझाव दिये। श्री गोयल ने भारत सरकार द्वारा किये जा रहे नीतिगत प्रयासों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि खनन संचालन के लिये वैधानिक अनुमति प्राप्त करने में लगने वाले समय को न्यूनतम किये जाने के लिये सरकार निरंतर प्रयासरत है, लेकिन इसमें सफल बोलीदार को भी अपने स्तर पर प्रयास करना होंगे। श्री गोयल ने कहा कि वन मंत्रालय से भी वन अनुमति प्राप्त करने के लिये शीघ्र बैठक आयोजित की जायेगी। बैठक में वन अनुमति प्राप्त करने में वैधानिक कठिनाइयों को दूर करने के लिये चर्चा होगी। इसका लाभ सभी सफल बोलीदारों को प्राप्त होगा। प्रमुख सचिव खनिज श्री उमाकांत उमराव ने बैठक में बताया कि प्रदेश में 118 विभिन्न मुख्य खनिज ब्लॉकों का खान एवं खनिज अधिनियम एवं प्रावधान के अंतर्गत सफल नीलामी की गयी है। खनि पट्टा के 6 ब्लॉक तथा समेकित अनुज्ञप्ति के 12 ब्लॉक में कार्य प्रारंभ हो गया है। शेष ब्लॉकों में खनन संक्रियाएं प्रारंभ करने के लिये राज्य शासन द्वारा सतत रूप से समीक्षा की जा रही है। प्रमुख सचिव श्री उमराव ने बताया कि खनिज साधन विभाग द्वारा खनन संचालन में वैधानिक अनुमति प्राप्त करने के लिये नियमानुसार आवेदन करने तथा आवेदन की पूर्ति करने में नियमों की स्पष्ट जानकारी दिये जाने के लिये कार्यशाला भी आयोजित की गयी। कार्यशाला में सफल बोलीदार, आरक्यूपी, पर्यावरण सलाहकार, वन विभाग के प्रतिनिधि, भारतीय खान ब्यूरो और एसबीआई केप के प्रतिनिधियों द्वारा भाग लिया गया। खनिज साधन द्वारा किये जा रहे प्रयासों से खनन संचालन के लिये आवश्यक वैधानिक अनुमति प्राप्त करने में लगने वाले समय में निरंतर कमी परिलक्षित हुई है। इनमें आशय पत्र जारी करना, खनन योजना प्रस्तुत करना, पर्यावरण अनुमति के लिये आवेदन प्रस्तुत करना और पर्यावरण अनुमति के लिये टीओआर जारी करने में लगने वाले दिवसों में कमी आयी है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत रूप से सफल बोलीदारों से चर्चा की जा रही है तथा उन्हें समक्ष में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिये प्रशासकीय स्तर पर चर्चा भी की जा रही है। समीक्षा बैठक में संचालक प्रशासन एवं खनिकर्म श्री फ्रेंक नोबल, पीसीसीएफ श्री मनोज अग्रवाल, सचिव पर्यावरण श्री अतुल मिश्रा, मेंबर सेक्रेटरी सिया श्री दीपक आर्य तथा भारत सरकार खान मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय, सफल बोलीदारों, उनके प्रतिनिधि और खनिज साधन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।  

‘100 दिन की चुप्पी’ पर बवाल: कांग्रेस ने जगदीप धनखड़ को लेकर की बड़ी मांग

नई दिल्ली  कांग्रेस ने एक बार फिर से पूर्व उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे का मुद्दा उठाया और मांग की कि वे एक कम से कम फेयरवेल के हकदार हैं। कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि धनखड़ अपने इस्तीफे के 100 दिनों से पूरी तरह से चुप हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक ऐसी घटना को ठीक 100 दिन हो गए हैं, जो पहले कभी नहीं हुई। रमेश ने एक्स पर कहा, "अचानक और चौंकाने वाली बात यह है कि 21 जुलाई की देर रात, भारत के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस्तीफा दे दिया। यह साफ था कि उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया था – भले ही वह दिन-रात पीएम की तारीफ करते थे।" कांग्रेस नेता ने कहा कि 100 दिनों से, पूर्व वाइस प्रेसिडेंट जो रोजाना सुर्खियों में रहते थे, पूरी तरह चुप – अनदेखे और अनसुने हैं। रमेश ने आगे कहा कि पूर्व वाइस प्रेसिडेंट, राज्यसभा के चेयरमैन के तौर पर, विपक्ष के अच्छे दोस्त नहीं थे। कांग्रेस महासचिव ने आगे कहा, "वह लगातार और गलत तरीके से विपक्ष की खिंचाई करते थे। फिर भी, डेमोक्रेटिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए, विपक्ष कह रहा है कि वह कम से कम एक फेयरवेल फंक्शन के हकदार हैं, जैसा कि उनके पहले के सभी नेताओं के साथ हुआ था। ऐसा नहीं हुआ है।" धनखड़ के इस्तीफे के बाद, कांग्रेस ने दावा किया था कि उपराष्ट्रपति पद से उनके इस्तीफे के पीछे के कारण उनके द्वारा बताई गई हेल्थ प्रॉब्लम से कहीं ज्यादा गहरे है। विपक्षी पार्टी ने सरकार से धनखड़ के इस्तीफे पर सफाई देने के लिए भी कहा था। बता दें कि अचानक से बड़ा कदम उठाते हुए धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा और कहा कि वह तुरंत पद छोड़ रहे हैं। 74 साल के धनखड़ ने अगस्त 2022 में पद संभाला था और उनका कार्यकाल 2027 तक था। वे राज्यसभा के चेयरमैन भी थे और उन्होंने संसद के मॉनसून सेशन के पहले दिन इस्तीफा दे दिया था। राज्यसभा चेयरमैन के तौर पर अपने अहम कार्यकाल में, धनखड़ का विपक्ष के साथ कई बार टकराव हुआ, जिसने उन पर महाभियोग चलाने का प्रस्ताव भी पेश किया था। यह प्रस्ताव, जो आजाद भारत में किसी वाइस प्रेसिडेंट को हटाने का पहला प्रस्ताव था, बाद में राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने खारिज कर दिया था।  

मंदिर में घुसकर ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगाए, मूर्तियों पर जूते से वार करने पहुंचा युवक, श्रद्धालुओं ने किया काबू

बेंगलुरु  कर्नाटक के बेंगलुरु से बुधवार को हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक शख्स ने स्थानीय मंदिर में घुसकर जमकर उत्पात मचाया है, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस के मुताबिक शख्स को मंदिर के गर्भगृह के बाहर रखी हुई मूर्ति को खंडित करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। शख्स की पहचान 45 वर्षीय कबीर मंडल के रूप में हुई है जो कथित तौर पर बांग्लादेश का नागरिक है। पूरा मामला तब सामने आया जब मंदिर के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर उसकी पिटाई कर दी और मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस ने बताया कि यह घटना मंगलवार सुबह मराठाहल्ली के पास देवरबिसनहल्ली स्थित वेणुगोपाल मंदिर में हुई। मंदिर नष्ट करने की दी धमकी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी शराब के नशे में धुत होकर मंदिर में 'अल्लाह हू अकबर’ चिल्लाते हुए घुस गया। जानकारी के मुताबिक उसने कथित तौर पर मंदिर के प्रवेश द्वार पर स्थित मूर्तियों पर अपने जूतों से हमला करने की भी कोशिश की। एक स्थानीय निवासी ने एनडीटीवी को बताया, “वह 'अल्लाह हू अकबर' चिल्लाते हुए मंदिर में घुस गया और मूर्तियों पर अपने जूतों से हमला करने की कोशिश की। उसने मंदिर को नष्ट करने की भी धमकी दी।” मोची का काम करता है आरोपी अधिकारी ने बताया कि इसके बाद मंदिर के कर्मचारियों और श्रद्धालुओं ने उसे पकड़ लिया, मंदिर परिसर के बाहर एक खंभे से बांध दिया और पुलिस के हवाले करने से पहले उसकी जमकर पिटाई की। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी पिछले चार-पांच सालों से इलाके में मोची का काम कर रहा है। पुलिस ने बताया कि उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और तफ्तीश की जा रही है।  

कृति खरबंदा के करियर का ‘जादुई अनुभव’, ‘शादी में जरूर आना’ ने बदल दी जिंदगी

मुंबई,  कृति खरबंदा, नाम सुनते ही आंखों के सामने आती है वो मुस्कान, जो कभी शरारती है, कभी गंभीर। दिल्ली में 29 अक्टूबर 1990 को जन्मीं कृति ने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन वो बॉलीवुड की चमकती दुनिया में अपना नाम बनाएंगी। मॉडलिंग और ऐड फिल्मों से शुरुआत की। फिर 2009 में तेलुगु फिल्म ‘बोनी’ में पहला ब्रेक मिला। साउथ की फिल्मों में काम करते-करते बॉलीवुड का दरवाजा खटखटाया। 2016 में ‘राज रिबूट’ से हिंदी सिनेमा में एंट्री ली, लेकिन असली जादू 2017 में हुआ। फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ में मशहूर अभिनेता राजकुमार राव के साथ उनकी जोड़ी बनी, और उनकी सादगी भरी एक्टिंग ने सबका दिल जीत लिया। फिर आई ‘हाउसफुल 4’, ‘पागलपंती’, और ‘14 फेरे’। हर बार एक नया रंग, एक नया किरदार। कॉमेडी हो या इमोशन, कृति खरबंदा ने खुद को साबित किया। बॉलीवुड की फिल्में अक्सर हमारे जीवन के बड़े पलों, खासकर शादी जैसे पवित्र बंधन को पर्दे पर भव्यता से दिखाती हैं। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जिनकी सादगी और प्रामाणिकता दर्शकों के दिल को छू जाती है। साल 2017 में आई फिल्म ‘शादी में जरूर आना’ एक ऐसी ही फिल्म थी, जिसने साधारण प्रेम कहानी को एक अविस्मरणीय मोड़ दिया। इस फिल्म की लीड एक्ट्रेस कृति खरबंदा के लिए यह सिर्फ एक एक्टिंग असाइनमेंट नहीं था। उन्होंने कई इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया है कि फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें इतना गहरा और भावनात्मक अनुभव हुआ, मानो वह सचमुच अपनी आरती शुक्ला नामक किरदार की शादी निभा रही हों। सेट पर बने उस माहौल ने एक फिल्मी सीन को वास्तविक विदाई का रंग दे दिया। कृति खरबंदा के लिए उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर की पीसीएस अधिकारी ‘आरती शुक्ला’ का किरदार सिर्फ स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह एक ऐसी लड़की की यात्रा थी जिसके सपने और स्वाभिमान शादी की वेदी पर दांव पर लग जाते हैं। कृति खरबंदा ने बताया कि जब वह पहली बार पारंपरिक दुल्हन के जोड़े में तैयार हुईं, तो सेट पर चारों ओर का माहौल इतना प्रामाणिक था कि उनके लिए काल्पनिक और वास्तविक दुनिया के बीच की रेखा धुंधली हो गई। शादी की रस्में, सजावट और परिवार के सदस्यों का भावुक होना, ये सब देखकर कृति बार-बार भावुक हो जाती थीं। उनके अनुसार, यह महज शूटिंग नहीं थी, बल्कि वह उस भावनात्मक उथल-पुथल को जी रही थीं जिससे आरती गुजरी थी, खासतौर पर उस रात जब वह शादी छोड़कर चली जाती है। यह गहरा भावनात्मक जुड़ाव ही था जिसने उनके अभिनय को इतनी विश्वसनीयता दी। ‘शादी में जरूर आना’ ने कृति खरबंदा के करियर को एक नई पहचान दी और यह साबित किया कि वह महज एक ग्लैमर डॉल नहीं, बल्कि एक सक्षम अभिनेत्री हैं। कृति खरबंदा ने इस फिल्म को अपने जीवन का ‘जादुई अनुभव’ बताया। उनके अनुसार, उन्हें इस फिल्म से जो प्यार और पहचान मिली, वह किसी भी आर्थिक सफलता से कहीं ज्यादा थी। इससे पहले कृति ने अपनी कन्नड़ फिल्म ‘प्रेम अड्डा’ में भी एक अनोखी चुनौती का सामना किया था, जिसने साबित किया कि वह किरदार के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। उस फिल्म में उन्हें बिना मेकअप वाली, 80 के दशक की ग्रामीण लड़की का किरदार निभाना था। कृति की गोरी रंगत इस रोल के लिए फिट नहीं बैठ रही थी, इसलिए उन्होंने किरदार की मांग के अनुसार लुक पाने के लिए काफी मेहनत की। सबसे खास बात यह थी कि कृति ने उस फिल्म के लिए अपने कपड़े अपनी मां के साथ मिलकर खुद डिजाइन किए थे, ताकि किरदार का लुक बिल्कुल प्रामाणिक और जमीन से जुड़ा हुआ लगे।  

सेवानिवृत्ति के बाद भी सरकारी मकान में रहना पड़ा भारी, 6 महीने बाद देना होगा जुर्माना और तगड़ा किराया

भोपाल मध्‍य प्रदेश कैबिनेट ने सरकारी आवास को लेकर नया नियम लागू किया है। अब रिटायरमेंट के 6 महीने बाद तक यदि अधिकारी ने आवास रिक्‍त नहीं किया तो उससे तगड़ा किराया वसूला जाएगा। कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि भोपाल स्थित शासकीय आवास आवंटन नियम 2000 में संशोधन की स्वीकृति के साथ ही तय किया गया है। भोपाल से बाहर स्थानांतरण होने या सेवानिवृत्त होने की स्थिति में अधिकतम छह माह तक की अवधि के लिए शासकीय सेवक सामान्य दर पर आवास में रहता है तो प्रथम तीन माह की अवधि के लिए आवंटित आवास का किराया भुगतान सामान्य दर पर लगेगा। इस अवधि के बाद पुनः आगामी तीन माह के लिए किराया सामान्य दर से 10 गुना दर पर लगेगा। इसके बाद 30 प्रतिशत पेनाल्टी लगाकर किराया वसूला जाएगा एवं बेदखली की कार्रवाई होगी। पहले केवल तीन माह तक ही शासकीय आवास धारण करने की अनुमति थी।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के सख्त निर्देश, दोनों आरोपी हुए गिरफ्तार

 टीआई और आरक्षक को किया लाइन अटैच डीआईजी, कलेक्टर एवं एसपी हैं मौके पर मौजूद विजयराघवगढ़ एवं कैमोर में स्थिति शांतिपूर्ण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कटनी जिले के कैमोर में हुई घटना पर पुलिस प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घटना को दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कटनी जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को तत्परता से कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने बुधवार की सुबह दोनों आरोपियों को कजरवारा गांव से गिरफ्तार कर लिया है। डीआईजी श्री अतुल सिंह, कलेक्टर कटनी श्री आशीष तिवारी और पुलिस अधीक्षक कटनी श्री अभिनय विश्वकर्मा पूरे समय विजयराघवगढ़ में मौजूद रहकर कानून व्यवस्था का जायजा लिया और शांति व्यवस्था कायम की। मंगलवार को दो पक्षों के विवाद में कैमोर निवासी श्री नीलेश रजक की दो आरोपियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। टीआई एवं आरक्षक लाइन अटैच पूरे मामले के बाद टीआई कैमोर अरविंद चौबे और पुलिस आरक्षक प्रेमशंकर पटेल को निलंबित कर पुलिस लाइन अटैच कर दिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश के बाद पुलिस ने टीम गठित कर आरोपियों की खोजबीन शुरू की। दोनों आरोपियों अकरम और प्रिंस जोसेफ को पुलिस ने कजरवारा से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों ने पुलिस पर फायर किया, आत्मरक्षा में पुलिस की जवाबी फायरिंग में दोनों आरोपी घायल हो गए हैं। उन्हें तत्काल इलाज के लिए जबलपुर रवाना किया गया है। प्रभारी मंत्री श्री सिंह पहुँचे कैमोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देश पर कटनी जिले के प्रभारी मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने बुधवार को कैमोर पहुँच कर मृतक स्व. श्री नीलेश रजक के परिवार से मुलाकात की और शोक संवेदना प्रकट कर ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सख्त निर्देश है कि मध्यप्रदेश में किसी भी आपराधिक गतिविधि को सरकार बर्दाश्त नहीं करेंगी। अनैतिक गतिविधियों में शामिल लोगों को दण्डित किया जायेगा। पुलिस अपना कार्य कर रही है, गुनहगारों का जीवन सलाखों के पीछे बीतेगा। कैमोर में हुई हत्या की वजह से जनहानि और लोकपरिशांति भंग होने की संभावना के मद्देनजर थाना विजयराघवगढ़ एवं थाना कैमोर के संपूर्ण क्षेत्र में शांति व्यवस्था की दृष्टि से निषेधात्मक आदेश लागू किया गया है। जिला प्रशासन ने विजयराघवगढ़ व कैमोर दोनों स्थानों में कार्यपालिक मजिस्ट्रेटों की तैनाती भी की।