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पाकिस्तानी जासूस पंजाब की फौजी छावनी में कर रहा था जासूसी, फोन से खुला बड़ा राज़

फगवाड़ा पंजाब पुलिस ने कपूरथला मिलिट्री कैंट में सफाई कर्मचारी के रूप में काम करने वाले एक सिविलियन कर्मचारी को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है। कपूरथला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गौरव तूरा ने बुधवार को बताया कि आरोपी की पहचान राजा के रूप में हुई है, जो कपूरथला जिले के मुश्केवद गांव का रहने वाला है। उसे पुलिस ने एक नियमित गश्त और चेकिंग अभियान के दौरान कांजली के वाई-प्वाइंट के पास हिरासत में लिया। उन्होंने बताया कि राजा आर्मी कैंट में ठेके पर एक निजी स्वच्छता कर्मी (सैनिटेशन वर्कर) के रूप में कार्यरत था। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त किया और उसमें से पाकिस्तान में संपर्कों के साथ बातचीत के सबूत बरामद किए। जांच अधिकारियों का दावा है कि आरोपी प्रतिबंधित सैन्य क्षेत्रों की तस्वीरें और रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान भेज रहा था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि उसे यह जानकारी साझा करने के बदले पाकिस्तानी हैंडलरों से पैसे मिल रहे थे। अधिकारियों ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन बताया है और कहा है कि आरोपी द्वारा साझा की गई जानकारी में रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा, संरचना और गोपनीय परिचालन गतिविधियां शामिल थीं। इस संबंध में कपूरथला के कोतवाली थाना में ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट 1923 की धारा 3, 4 और 5 के तहत, साथ ही भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 152 के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने जानकारी कहां से हासिल की और उसके संभावित सहयोगी कौन हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी जांच में शामिल हो रही हैं।

इन 4 आदतों से दूर रहें, वरना समझदार होकर भी असफल रह जाएंगे!

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो खुद को अपने जीवन में सफल देखने की ख्वाहिश ना रखता हो। हर व्यक्ति अपने जीवन में सफलता का स्वाद चखना चाहता है। जिसके लिए वो समय-समय पर कड़ी मेहनत भी करता है। लेकिन कई बार मेहनती होने के बावजूद कुछ लोगों से सफलता कोसों दूर बनी रहती है। जिसके पीछे उनकी 4 बुरी आदतें जिम्मेदार हो सकती हैं। आइए जानते हैं व्यक्ति की उन 4 बुरी आदतों के बारे में, जो उसे जीवन में कमजोर बनाकर सफल होने से रोकती हैं। ऐसे में अगर आप अपने जीवन में सफलता का स्वाद लेते हुए आगे बढ़ते रहना चाहते हैं तो इन आदतों से समय रहते छुटकारा पा लेना चाहिए। ऐसा व्यक्ति जो हमेशा अपने अतीत में फंसा रहता है, कभी भी अपने जीवन से जुड़े बड़े फैसले आसानी से नहीं ले पाता है। ऐसा करते समय वो हमेशा खुद को कमजोर महसूस करता है, जिसकी वजह से सफलता उनसे हमेशा दूर बनी रहती है। अगर आप जीवन में सफलता पाना चाहते हैं तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल डालें। जितना जल्दी हो सके अपने अतीत से बाहर निकलने की कोशिश करें। अविश्वासी होना जो व्यक्ति दूसरों पर कभी विश्वास नहीं करते हैं, वो हमेशा अपने जीवन में अकेले रह जाते हैं। किसी पर भी भरोसा न कर पाने की आदत उन्हें जीवन में आगे नहीं बढ़ने देती है। जिसकी वजह से उन्हें बाकी लोगों की तुलना में सफल होने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। अकेलेपन की वजह से व्यक्ति मानसिक रोग का शिकार भी हो सकता है। जबकि टीम के साथ मिलकर काम करने से आपको प्रोत्साहन और समर्थन मिलता है, जिससे आपकी उपलब्धियां और ज्यादा बढ़ती हैं। चुनौतियों का सामना करने से पीछे हटना जो व्यक्ति जीवन में चुनौतियां लेने से घबराता है, वह अंदर ही अंदर खोखला और कमजोर होता चला जाता है। अगर आप जीवन में सफलता पाना चाहते हैं तो आपको हर चुनौती का डटकर सामना करना चाहिए। गलतियों को अनदेखा करना जो व्यक्ति अपनी गलतियों को हमेशा अनदेखा करता रहता है, उनसे कोई सीख नहीं लेता है, उसे जीवन में असफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। हर सफल व्यक्ति में अपनी गलतियों से सीखने का गुण होता है।

‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य की दिशा में बढ़ रहे कौशल मिशन के कदम

‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में चल रहे कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रगति पर हुई चर्चा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठा रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर युवा अपने कौशल के बल पर रोजगार या स्वरोजगार से जुड़कर विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत के संकल्प को साकार करे। सरकार के प्रयासों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और स्किल इंडिया मिशन को राज्य स्तर पर नई गति मिल रही है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मुख्यालय, अलीगंज, लखनऊ में समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में चल रहे कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा हुई। अधिक से अधिक युवा आईटीआई से जोड़े जाएं मंत्री अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार के प्रयासों से आईटीआई से पासआउट छात्रों को देश की अग्रणी कंपनियों में बेहतर प्लेसमेंट मिल रहा है, जिससे प्रदेश के युवाओं में कौशल शिक्षा को लेकर उत्साह बढ़ा है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन सफलताओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक युवा आईटीआई संस्थानों में प्रवेश लेकर अपनी रुचि के अनुसार कोर्स पूरा करें और रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ सकें। छात्रों को औद्योगिक भ्रमण कराया जाए उन्होंने कहा कि हर जिले में विभिन्न उद्योगों से समन्वय स्थापित कर छात्रों का औद्योगिक भ्रमण (इंडस्ट्री विजिट) कराया जाए और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए मिशन द्वारा एक इंडस्ट्री विजिट कैलेंडर और टाइम-टेबल तैयार किया जाएगा। मंत्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार उद्योगों को कौशल विकास मिशन और आईटीआई संस्थानों से जोड़ने के लिए ठोस पहल कर रही है, ताकि छात्रों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके और रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न हों। उन्होंने स्किल मित्र पोर्टल पर छात्रों की प्लेसमेंट स्थिति अद्यतन रखने और कोर्स को इंडस्ट्री डिमांड बेस्ड बनाने के निर्देश दिए। प्रत्येक माह की 21 तारीख को प्लेसमेंट ड्राइव सरकार के निर्देशानुसार सभी नोडल आईटीआई संस्थान प्रत्येक माह की 21 तारीख को प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करेंगे। इन ड्राइव्स में डेलॉइट इंडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। अब तक Subros Ltd., Creature Industries, Dixon Technologies, Havells, Pepsico और Sona BLW जैसी प्रमुख कंपनियों में आईटीआई छात्रों का चयन और प्लेसमेंट हुआ है। इसके अलावा Gyan Dairy, Alpha Engineers (TATA Motors Ancillary), Mohannah Enterprises, Kashi Industries और Avionics Sparrow जैसी इकाइयों में औद्योगिक भ्रमण कराए गए, जिससे छात्रों को प्रत्यक्ष औद्योगिक अनुभव प्राप्त हुआ। विभिन्न संस्थाओं के साथ योगी सरकार लगातार कर रही साझेदारी  बैठक में यह भी बताया गया कि ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलेपमेंट काउंसिल (ASDC), फर्नीचर एंड फिटिंग सेक्टर स्किल काउंसिल (FFSC) तथा ज्ञान डेयरी जैसी संस्थाओं के साथ योगी सरकार लगातार साझेदारी कर रही है। नोएडा, गोरखपुर और सहारनपुर में फर्नीचर सेक्टर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित करने की दिशा में कार्य तेजी से प्रगति पर है। बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. हरि ओम, मिशन निदेशक पुलकित खरे, अपर निदेशक प्रिया सिंह, विभागीय अधिकारीगण तथा डेलॉइट इंडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

साइबर अपराध से बचाव के लिए सबसे बड़ा हथियार जागरूकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

साइबर अपराध से लड़ाई पुलिस के साथ पूरे समाज की है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव साइबर अपराध से बचाव के लिए सबसे बड़ा हथियार जागरूकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव रन फॉर साइबर अवेयरनेस ने डिजिटल युग की सबसे जरूरी पहल को दिया जनआंदोलन का रूप : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रन फॉर साइबर अवेयरनेस को झंडी दिखाकर किया रवाना अटल पथ स्थित प्लेटिनम प्लाजा पर हुआ कार्यक्रम भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 'रन फॉर साइबर अवेयरनेस' जागरूकता अभियान के आयोजन के लिए मध्यप्रदेश पुलिस सहित सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों को बधाई देते हुए कहा कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, पूरे समाज की है। तकनीक और कानून अपने स्थान पर हैं, पर सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है। जब नागरिक जागरूक होगा, तभी राष्ट्र सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने डिजिटल युग की सबसे जरूरी पहल को जन-आंदोलन का रूप दिया है। हम जिस रफ्तार से डिजिटल रूप से मजबूत हुए हैं उसी रफ्तार से नई परेशानियां और खतरे सिर उठाने लगे हैं। जिस तकनीक ने हमें जोड़ा है उसी तकनीक ने अपराधियों को नए हथियार भी दिए हैं और आज ठगी के नए-नए तरीके आ गए हैं। डिजिटल अरेस्ट, फेक प्रोफाइल, हैकिंग, डेटा ब्रीचिंग, ऑनलाइन फ्रॉड, ओटीपी फॉड, ऑनलाइन शॉपिंग धोखाधड़ी और फेक इन्वेस्टमेंट लिंक जैसे अपराध बढ़ते जा रहे हैं। ये हमारे समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रहे हैं। 'रन फॉर साइबर अवेयरनेस' डिजिटल युग में नागरिक सुरक्षा का कर्तव्य निभा रही है। साइबर सिपाही, जिम्मेदारी, सुरक्षा और जागरूकता की दौड़ के लिए एकजुट हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर सुरक्षा और जागरूकता के लिए आयोजित रन फॉर साइबर अवेयरनेस के प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रन के लिए एकत्र प्रतिभागियों को अटल पथ स्थित प्लेटिनम प्लाजा से झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रन अटल पथ से एपेक्स बैंक तिराहा होते हुए टी.टी. नगर स्टेडियम पर पूर्ण हुई। इस अवसर पर विधायक भगवानदास सबनानी, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को कार्यक्रम स्थल पहुंचने पर पुलिस बैंड की धुन के साथ सलामी दी गई। पुलिस महानिदेशक तथा अन्य पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को पुष्प गुच्छ भेंटकर स्वागत किया और स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें कॉल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब डिजिटल इंडिया का सपना देखा था तब उन्होंने भारत को तकनीकी रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की परिकल्पना की थी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत डिजिटल क्रांति का अग्रदूत बना है। डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सेवाएं, ई-गवर्नेंस ये सब आज सबके जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। मध्यप्रदेश ने भी पंचायत से लेकर सचिवालय तक हर स्तर पर डिजिटल सेवाएं पहुंचाने का काम किया है। बैंकिंग से लेकर शिक्षा तक और रोजगार से लेकर शासन तक हर प्रक्रिया अब ऑनलाइन है। आज के समय में साइबर अपराधी कभी स्वयं को पुलिस अधिकारी बताकर, कभी बैंक मैनेजर बनकर, तो कभी किसी सरकारी एजेंसी का नाम लेकर लोगों को ठग रहे हैं। जब किसी परिवार की मेहनत की कमाई पलभर में लुट जाती है, जब किसी विद्यार्थी का भविष्य ठगी में फंस जाता है, तो यह पूरे समाज के लिए पीड़ा का विषय बन जाता है। यदि किसी के साथ साइबर ठगी हो जाए तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें। देरी करने से पीड़ित के पैसे वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है इसलिए त्वरित कार्रवाई ही बचाव है। जैसे हमने स्वच्छता को अपनी संस्कृति बनाया है, वैसे ही हमें साइबर स्वच्छता को भी अपनी संस्कृति बनाना होगा। डिजिटल युग का संविधान और सुरक्षित नागरिक का संस्कार है, स्टॉप थिंक एंड देन टेक एक्शन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि साइबर अपराध की सुरक्षा के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने हमें एक बहुत सार्थक मंत्र दिया है, स्टॉप थिंक, एंड देन टेक एक्शन। यानी रूको, सोचो और फिर कोई कदम उठाओ। जब कोई अनजान कॉल आए तो रूकिए। कोई आकर्षक लिंक दिखे तो सोचिए और जब निश्चित हो जाए कि यह सही है तभी क्लिक कीजिए। यही डिजिटल युग का संविधान है, यही सुरक्षित नागरिक का संस्कार है। साइबर अपराध पैसों के साथ विश्वास, चरित्र और पहचान की भी क्षति पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि आज साइबर अपराध हमारे देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ता अपराध बन चुका है। आने वाले वर्षों में साइबर क्राइम अन्य सभी अपराधों को पीछे छोड़कर सबसे अधिक संख्या में उभर कर आने वाला अपराध है। यह केवल पैसों की हानि नहीं, बल्कि विश्वास, चरित्र और पहचान की भी क्षति है। कई बार मेहनत और ज्ञान की चोरी भी डिजिटल माध्यमों से हो रही है। किसी की रिसर्च, डिजाइन, विचार या फोटो को बिना अनुमति के इस्तेमाल किया जाना भी साइबर अपराध है। सुरक्षित रहना अब दरवाजा बंद करने के साथ स्क्रीन लॉक करना भी पुलिस महानिदेशक मकवाना ने कहा कि आज की इस दौड़ का उद्देश्य केवल दौड़ना नहीं बल्कि सोचना और जागरूक होना भी है कि कैसे हम अपनी डिजिटल पहचान सुरक्षित रखें, कैसे हम अपने पासवर्ड-ओटीपी और निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें और कैसे हम डिजिटल सुरक्षा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। मध्यप्रदेश पुलिस लगातार साइबर जागरूकता के लिए अभियान चला रही है। विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं पंचायत व शहरों तक हर नागरिक यह समझ सके कि हमें यह याद रखना होगा कि एक जागरूक नागरिक ही सबसे बड़ी सुरक्षा दीवार है। पुलिस महानिदेशक मकवाना ने उपस्थित प्रतिभागियों से साइबर अपराध के प्रति जागरूक रहने, लोगों को जागरूक करने और समाज को साइबर अपराध से बचाने में योगदान देने का संकल्प लेने का आहवान किया। उल्लेखनीय है कि अक्टूबर माह को साइबर जागरूकता माह के रूप में मनाया जा रहा है। संपूर्ण प्रदेश में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशालाएं, व्याख्यान, स्कूल-कॉलेजों में सत्र और सोशल मीडिया अभियान कैंपेन चलाए गए। अभियान के अंतर्गत ही साइबर जागरूकता रन 2025 का आयोजन किया गया। रन में पुलिस अधिकारी- कर्मचारी, विद्यार्थी, स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य शामिल हुए। … Read more

वुमन जिहादी ब्रिगेड पर मसूद अजहर का भड़काऊ बयान, हिंदू महिलाओं को सेना में डालना बताया योजना

बहावलपुर  पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) ने अपनी जंग में नया मोड़ ला दिया है. अब महिलाओं को भी जिहाद के लिए तैयार किया जा रहा है. संगठन के सरगना मौलाना मसूद अजहर का 21 मिनट का एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आया है. यह बहावलपुर के मर्कज उस्मान ओ अली में हाल ही में दिया गया भाषण है. इसमें अजहर ने महिलाओं के नए विंग 'जमात-उल-मोमिनात' की पूरी योजना बताई है. यह महिलाओं को ट्रेनिंग, ब्रेनवॉश और जंग में इस्तेमाल करने का ब्लूप्रिंट है. महिलाओं की ट्रेनिंग: पुरुषों जैसी ही अजहर ने कहा कि पुरुष भर्तियों को 15 दिनों का 'दौरा-ए-तरबियत' कोर्स मिलता है. इसमें उन्हें भारत के खिलाफ जिहाद का ब्रेनवॉश किया जाता है. अब महिलाओं के लिए 'दौरा-ए-तस्किया' कोर्स शुरू होगा. यह भी बहावलपुर के मर्कज में चलेगा. अजहर ने वादा किया कि जो महिला इस जमात में शामिल होगी, वह मौत के बाद सीधे जन्नत पहुंचेगी. पहला कोर्स पूरा करने के बाद दूसरा स्टेज 'दौरा-आयत-उल-निसाह' होगा. इसमें महिलाओं को इस्लामी किताबों से सिखाया जाएगा कि महिलाएं जिहाद कैसे करें. अजहर ने कहा, पिछले 20 सालों से पुरुषों को जन्नत का लालच दिया जाता रहा. अब महिलाओं को भी वही सिखाया जाएगा. क्यों बनाई महिलाओं की ब्रिगेड? अजहर ने तर्क दिया कि जैश के दुश्मनों ने हिंदू महिलाओं को सेना में डाला है. महिला पत्रकारों को हमारे खिलाफ खड़ा किया है. इसलिए मैं भी अपनी महिलाओं को तैयार कर रहा हूं. वे इनके खिलाफ लड़ेंगी. उन्होंने कहा, जेईएम के पुरुष मुजाहिदीन इन महिलाओं के साथ खड़े होंगे. यह ब्रिगेड दुनिया भर में इस्लाम फैलाएगी. भर्ती और नियम: हर जिले में ब्रांच अजहर ने ऐलान किया कि पाकिस्तान के हर जिले में जमात-उल-मोमिनात की ब्रांच बनेगी. हर ब्रांच का 'डिस्ट्रिक्ट मुंतेज़िमा' होगी. वह महिलाओं को भर्ती करेगी. सख्त नियम: ब्रिगेड में शामिल महिलाएं किसी भी अनजान मर्द से फोन या मैसेंजर पर बात नहीं करेंगी. सिर्फ पति या करीबी परिवार से ही. लीडरशिप: अजहर के परिवार की महिलाएं पहले की जांचों से पता चला कि अजहर ने अपनी बहन सादिया अजहर को ब्रिगेड का सरदार बनाया है. दूसरी बहन समैरा अजहर और पुलवामा हमलावर उमर फारूक की विधवा आफेरा फारूक भी लीडर हैं. ये रोज ऑनलाइन सेशन चलाकर महिलाओं को जोड़ेंगी और भर्ती करेंगी. जेईएम ने एक नया पोस्टर जारी किया. इसमें 'उम्मे मसूद' (असली नाम समैरा अजहर) को ऑनलाइन क्लास का टीचर बताया. ये क्लासें हफ्ते में 5 दिन, 25 अक्टूबर से शुरू हुईं. अजहर ने कहा, जमात में 4-5 ऐसी महिलाएं हैं जिनके पुरुष रिश्तेदार भारतीय सेना से मुठभेड़ में मारे गए.  इन्हें 'शोबा-ए-दावत' कैंपेन के तहत नई भर्तियों को प्रेरित करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. अजहर ने महिलाओं से अपनी किताब "ऐ मुसलमान बहना" पढ़ने को कहा. यह ब्रेनवॉश का हिस्सा है. ऑपरेशन सिंदूर का बदला? अजहर के 14 परिवार के सदस्य भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' में मारे गए. इनमें यूसुफ अजहर, जमीला अहमद, हंबजा जमीला और हूज़ैफा अजहर शामिल थे. अब अजहर का दावा है कि उनकी बड़ी बहन हवा बीबी भी उसी हमले में मरी. ऑडियो में भावुक अजहर ने कहा कि मैंने अपनी बहन के साथ महिलाओं की ब्रिगेड का प्लान बनाया था. उसकी मौत के बाद इसे अमल में ला रहा हूं. पाकिस्तान की भूमिका पाकिस्तान इन आतंकी संगठनों को बढ़ावा देता है. आधिकारिक तौर पर ये बैन हैं, लेकिन हाल के भू-राजनीतिक बदलावों से पाकिस्तान को हौसला मिला है. इन संगठनों को ज्यादा आजादी मिल रही है. भारत के खिलाफ ये नई साजिशें चिंता की बात हैं. 

‘ब्लाउज डिलीवरी लेट’ का महंगा पड़ा अंजाम — महिला ने दर्जी को ठोका ₹7 हजार का फाइन

नई दिल्ली  आमतौर पर कपड़े सिलने में दर्जी की देरी से हर कोई परेशान रहता है लेकिन अहमदाबाद में एक महिला ने इस आम समस्या के खिलाफ आवाज़ उठाई और एक डिजाइनर शॉप को सबक सिखाया। यह मामला उन लाखों उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल बन गया है जो समय पर सेवा न मिलने पर चुप रह जाते हैं। जानिए क्या था पूरा मामला नवंबर 2024 में अहमदाबाद की एक महिला ने परिवार में होने वाली शादी के लिए एक पारंपरिक साड़ी का ब्लाउज सिलवाने के लिए सीजी रोड पर स्थित एक डिजाइनर शॉप को ऑर्डर दिया था। महिला ने ब्लाउज के कपड़े और डिज़ाइन का चुनाव करते हुए ₹4,395 का एडवांस भुगतान भी कर दिया था। दर्जी ने ब्लाउज तैयार करने की अंतिम तिथि 24 दिसंबर तय की थी। तय तारीख आने पर दर्जी ने ब्लाउज तैयार नहीं किया। महिला ने बार-बार अनुरोध किया और शादी से पहले ब्लाउज देने की गुहार लगाई लेकिन दर्जी ने लापरवाही दिखाई और समय पर काम पूरा नहीं किया। महिला ने उठाया कानूनी कदम समय पर ब्लाउज न मिलने और दर्जी के लापरवाह रवैये से परेशान होकर महिला ने सबसे पहले दर्जी को एक कानूनी नोटिस भेजा जिसका कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद महिला ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अहमदाबाद उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज करा दी। कोर्ट का सख्त आदेश उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि दर्जी द्वारा तय समय सीमा में काम पूरा न करना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी को दर्शाता है। कोर्ट ने यह भी माना कि इस लापरवाही के कारण महिला को अनावश्यक रूप से मानसिक तनाव सहना पड़ा। आयोग ने दर्जी को 45 दिनों के भीतर निम्न भुगतान करने का आदेश दिया: पूरी रकम वापसी: ग्राहक से ली गई पूरी एडवांस राशि ₹4,395 को 7% वार्षिक ब्याज के साथ वापस करना होगा। मानसिक पीड़ा का मुआवजा: ग्राहक को हुई मानसिक प्रताड़ना और कानूनी कार्यवाही के खर्च के लिए ₹7,000 का अतिरिक्त मुआवजा देना होगा।  

वोटर सुविधा में बड़ा कदम: अब कॉल पर मिलेगा बीएलओ से तुरंत समाधान

नई दिल्ली  भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतदाताओं की चुनाव संबंधी हर छोटी-बड़ी शिकायत और सवालों के त्वरित निपटारे के लिए दो प्रमुख सुविधाओं को और मजबूत किया है। राष्ट्रीय मतदाता हेल्पलाइन 1950 और नई 'बीएलओ के साथ बुक-अ-कॉल' सुविधा अब पूरे देश में सक्रिय हैं, जिसका उद्देश्य यह है कि कोई भी मतदाता चुनाव प्रक्रिया में असमंजस या परेशानी का शिकार न हो। आयोग के अनुसार टोल-फ्री नंबर 1800-11-1950 पर सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक प्रशिक्षित अधिकारी मतदाताओं के फोन का जवाब देते हैं। चाहे नाम जोड़ना हो, वोटर आईडी में सुधार, मतदान केंद्र की जानकारी या कोई शिकायत, सब कुछ यहीं सुलझाया जाता है। यह केंद्र सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्रीय हेल्पलाइन का काम करता है। समय पर और स्थानीय स्तर की प्रतिक्रिया के लिए हर राज्य में राज्य संपर्क केंद्र (एससीसी) और हर जिले में जिला संपर्क केंद्र (डीसीसी) स्थापित किए गए हैं। ये केंद्र कार्य दिवसों में कार्यालय समय के दौरान खुले रहते हैं और क्षेत्रीय भाषाओं में सहायता देते हैं ताकि कोई मतदाता भाषा की बाधा से वंचित न रहे। हर शिकायत और सवाल को राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (एनजीएसपी 2.0) पर दर्ज किया जाता है। मतदाता ऑनलाइन स्टेटस चेक कर सकते हैं। आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ), जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) और निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिए हैं कि 48 घंटे के अंदर हर अनुरोध का निपटारा हो। अब मतदाता ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म या ईसीआईनेट ऐप के जरिए अपने बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) से अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं। 'बुक-अ-कॉल विद बीएलओ' सुविधा से घर बैठे बीएलओ से फोन पर बात हो जाएगी। यह खास तौर पर ग्रामीण और दूरदराज के मतदाताओं के लिए उपयोगी है। यदि फोन नहीं करना चाहते, तो आयोग के आधिकारिक कंप्लेंट ईमेल पर शिकायत भेजें। हर मैसेज का जवाब दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि चुनाव से जुड़ी कोई भी जानकारी, सुझाव, फीडबैक या शिकायत के लिए 1950 हेल्पलाइन या बीएलओ अपॉइंटमेंट का इस्तेमाल करें। आयोग का दावा है कि यह पहल लोकतंत्र को और मजबूत बनाती है, जहां हर मतदाता की आवाज सुनी जाए।

8th Pay Commission लाएगा रिकॉर्ड बढ़ोतरी — जानें कितना बढ़ेगा आपका बेसिक पे

नई दिल्ली  केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे इंतज़ार के बाद अब आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिया गया है। मंगलवार को केंद्र ने आयोग की नियम और शर्तों (Terms of Reference) को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब आयोग अगले डेढ़ साल यानी 18 महीनों के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा। करीब 1 करोड़ से अधिक लोगों को होगा फायदा इस फैसले से लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारी और करीब 69 लाख पेंशनर्स प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे। यह आयोग कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर, भत्ते, पेंशन और अन्य वित्तीय लाभों की समीक्षा करेगा और ज़रूरी सुधारों का सुझाव देगा। जनवरी 2025 में हुई थी मंजूरी  आठवें वेतन आयोग के गठन को इस साल जनवरी में कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी थी। इसके बाद से मंत्रालयों, राज्य सरकारों और कर्मचारी संगठनों से लगातार सुझाव लिए जा रहे थे। अब जब आयोग की ToR तय हो गई है, तो इसके कामकाज की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। ऐसे तय होगी नई बेसिक सैलरी कर्मचारियों की नई बेसिक पे तय करने में फिटमेंट फैक्टर अहम भूमिका निभाएगा। फॉर्मूला होगा — नई बेसिक सैलरी = मौजूदा बेसिक पे × फिटमेंट फैक्टर उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक पे ₹25,500 है और फिटमेंट फैक्टर 2.86 तय होता है, तो उसकी नई बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग ₹72,930 तक पहुंच सकती है। मंत्रालयों से मिले इनपुट वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के अनुसार, सरकार ने रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) और राज्य सरकारों से इस संबंध में इनपुट मांगे थे। सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए आयोग का दायरा और जिम्मेदारियां तय की गई हैं। हर दशक में आता है बड़ा बदलाव पारंपरिक रूप से हर 10 साल में एक नया वेतन आयोग गठित किया जाता है। पिछली बार यानी सातवां वेतन आयोग फरवरी 2014 में बना था और इसकी सिफारिशें 1 जनवरी 2016 से लागू की गई थीं। अब आठवां आयोग उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कर्मचारियों के लिए नए वित्तीय ढांचे की रूपरेखा तैयार करेगा।

केवाईवी प्रक्रिया से बढ़ी वाहन मालिकों की मुश्किलें, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

नई दिल्ली बार-बार KYC (नो यॉर कस्टमर) (केवाईसी) (अपने ग्राहक को जानें) की प्रक्रिया से गुजरना ही शायद काफी नहीं था, तो अब सरकार ने एक नया नियम लागू किया है- KYV (Know Your Vehicle) (केवाईवी) यानी अपने वाहन को जानें। यह नई प्रक्रिया उन सभी लोगों के लिए जरूरी है जिनके पास गाड़ी और FASTag (फास्टैग) है। इसका मकसद है फास्टैग सिस्टम को साफ और सुरक्षित बनाना। लेकिन लोगों के लिए यह एक और झंझट बन गया है। क्या है KYV और क्यों लागू हुआ? 1 नवंबर 2024 से KYV को सभी फास्टैग यूजर्स के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब आपको अपनी गाड़ी की फोटो और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) अपलोड करने होंगे। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि फास्टैग सही गाड़ी से जुड़ा हुआ है। यह पहल NHAI (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की है, जिसे NPCI ने लागू किया है। इस नियम के पीछे वजह यह है कि कई मामलों में फास्टैग का गलत इस्तेमाल हो रहा था। जैसे ट्रक ड्राइवर कारों के फास्टैग का इस्तेमाल करके कम टोल टैक्स दे रहे थे। सरकार का कहना है कि KYV के जरिए ऐसे दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। कैसे करना होगा KYV KYV प्रोसेस में हर फास्टैग को उसके व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर (VRN) और चेसिस नंबर से लिंक करना जरूरी है। इसके अलावा,     आपको अपनी गाड़ी का सामने से एक फोटो लेना है, जिसमें फास्टैग और नंबर प्लेट साफ दिखे।     एक साइड फोटो भी लेनी है, जिसमें गाड़ी के एक्सल (पहिए) नजर आएं।     इन फोटो के साथ वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) अपलोड करनी होगी। इसके बाद बैंक या फास्टैग जारी करने वाली कंपनी इन डिटेल्स को VAHAN (वाहन) डेटाबेस से वेरिफाई करेगी। अगर KYV नहीं किया गया तो फास्टैग अपने-आप डिएक्टिवेट हो जाएगा। हर तीन साल में दोबारा करनी होगी प्रक्रिया यह प्रक्रिया सिर्फ एक बार की नहीं है। हर तीन साल में दोबारा KYV वेरिफिकेशन कराना होगा, ताकि सिस्टम अपडेट रहे और गलत इस्तेमाल को रोक जा सके। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कई लोग फास्टैग को गाड़ी पर लगाने की बजाय पर्स या जेब में रखते हैं। जिससे उसका गलत इस्तेमाल संभव हो जाता है। अब "वन व्हीकल, वन टैग" का नियम लागू किया जाएगा। सरकार को भी समझ आया झंझट लोगों की परेशानियों को देखकर अब सरकारी अधिकारी बैंकों से कह रहे हैं कि बिना ग्राहक को फोन किए उनका फास्टैग डिएक्टिवेट न करें। रिपोर्ट के मुताबिक, सड़क परिवहन मंत्रालय के एक अधिकारी ने माना कि प्रक्रिया "बहुत जटिल" है और इसे आसान बनाना जरूरी है। सरकार अब यह विचार कर रही है कि सभी बैंकों के पोर्टल पर KYV प्रक्रिया एक जैसी हो। और इसके लिए एक समान हेल्पलाइन नंबर भी दी जाए, ताकि लोग आसानी से मदद पा सकें।

न्यूजीलैंड का पलड़ा भारी, इंग्लैंड के टॉप ऑर्डर की नाकामी से दूसरा वनडे गया हाथ से

हैमिल्टन (न्यूजीलैंड) शीर्ष क्रम की एक और नाकामी के कारण इंग्लैंड की टीम 175 रन पर आउट हो गई और न्यूजीलैंड ने बुधवार को दूसरा एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच पांच विकेट से जीतकर श्रृंखला में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। इंग्लैंड की पारी केवल 36 ओवर तक चली और न्यूजीलैंड ने 33.1 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। उसकी तरफ से डेरिल मिशेल ने नाबाद 56, रचिन रविंद्र ने 54 और मिच सैंटनर ने नाबाद 34 रन बनाए। मिशेल ने शनिवार को श्रृंखला के पहले मैच में नाबाद 78 रन बनाकर न्यूजीलैंड को चार विकेट से जीत दिलाई थी। उस मैच में भी इंग्लैंड के प्रमुख बल्लेबाज नहीं चल पाए थे तथा कप्तान हैरी ब्रूक के शतक के बावजूद उसकी टीम 223 रन पर आउट हो गई थी। इंग्लैंड के लिए एक सकारात्मक बात तेज़ गेंदबाज़ जोफ़्रा आर्चर की वापसी रही, जिन्होंने 10 ओवरों में 23 रन देकर तीन विकेट लिए। ब्रूक ने दूसरे मैच में भी अच्छी शुरुआत की लेकिन वह 34 रन ही बना पाए जिससे इंग्लैंड का स्कोर छह विकेट पर 105 रन हो गया था। इंग्लैंड के शीर्ष क्रम के बाकी बल्लेबाजों में जेमी स्मिथ ने 13, बेन डकेट ने एक, जो रूट ने 25, जैकब बेथेल ने 18 और जोस बटलर ने नौ रन बनाए। आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करने वाले जेमी ओवरटन ने 28 गेंदों में 42 रन बनाकर शीर्ष स्कोरर रहे। ओवरटन ने पहले मैच में ब्रूक के साथ 87 रन की साझेदारी में 46 रन बनाए थे। ब्लेयर टिकनर न्यूजीलैंड के सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने 34 रन देकर चार विकेट लिए जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।