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बिना पूर्व सूचना के स्वास्थ्य मंत्री पहुंचे चाईबासा सदर अस्पताल, कर्मचारियों में हड़कंप!

रांची झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के अचानक चाईबासा सदर अस्पताल पहुंचते ही अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य मंत्री ने लगभग तीन घंटे तक गहन जांच की और अस्पताल के सभी वाडरं, प्रयोगशालाओं एवं मरीजों की देखभाल व्यवस्था का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान थैलेसीमिया मरीज की रिपोटर् में एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने की गंभीर लापरवाही सामने आई। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंत्री ने तत्काल कारर्वाई के निर्देश दिए और पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। इस दौरान चाईबासा के उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग के जांच विशेषज्ञ भी उपस्थित थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वर्ष 2023-24 में कुछ बच्चों को संक्रमित प्लाज्मा का ट्रांसफ्यूजन किया गया था। कुल 259 डोनर्स से रक्त लिया गया, जिनमें से 44 लोगों की जांच कराई गई। जांच में चार लोगों के एचआईवी पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। मंत्री ने बताया कि यह मामला गंभीर है और जांच जारी है। रिपोर्ट आने तक किसी को भी अफवाह या राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए। डॉ. अंसारी ने कहा की यदि जांच में किसी की लापरवाही साबित होती है, तो मैं स्वयं उस परिवार की पूरी जिम्मेदारी लूंगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। डॉ अंसारी ने आगे कहा कि कोल्हान क्षेत्र से चार-चार पूर्व मुख्यमंत्री रहे, लेकिन किसी ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया। आज जब खामियां सामने आ रही हैं, तो उन्हें बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। डॉ अंसारी ने यह भी कहा कि गलती हुई है, मैं स्वीकार करता हूं। मैंने तत्काल कार्रवाई की है और आगे जांच रिपोर्ट के आधार पर और भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। भाजपा पर निशाना साधते हुए डॉ अंसारी ने कहा कि 'भाजपा इस गंभीर मामले को राजनीतिक रंग देकर अपनी रोटियां सेंक रही है। 20 वर्षों तक उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था को मजाक बना दिया था। आज स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है और जनता यह महसूस कर रही है कि अब उनका इलाज बेहतर हो रहा है। डॉ अंसारी ने जनता से अपील करते हुए कहा कि मैं लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए दिन-रात काम कर रहा हूं। जनता से अनुरोध है कि मुझे सहयोग दें और बेवजह की बयानबाजी से बचें।  

एमएसएमई के लिये समूह बीमा उत्पाद पर हितधारकों की कार्यशाला संपन्न

भोपाल  रैम्प यानि राइजिंग एंड एक्सीलीरेटिंग एमएसएमई परफार्रेमेंस के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के सहयोग से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए समूह बीमा उत्पाद पर कार्यशाला पंचानन भवन भोपाल में हुई। इस कार्यशाला में शासकीय विभागों के प्रतिनिधियों, उद्योग संघों, व्यापारी संघों तथा प्रमुख बीमा कंपनियों की सहभागिता रही। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म खुदरा विक्रेताओं एवं एमएसएमई के लिए एक व्यापक समूह बीमा उत्पाद विकसित करना और बीमा जागरूकता को बढ़ावा देना रहा। चर्चा में बीमा कवरेज के महत्व, दावा निपटान की चुनौतियों, किफायती एवं अनुकूलित बीमा उत्पादों की आवश्यकता तथा शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया। प्रतिभागियों ने एमएसएमई के लिए विशेष रूप से तैयार नीतियाँ विकसित करने, बीमा साक्षरता को प्रोत्साहित करने (विशेषकर महिला उद्यमियों और जनजातीय क्षेत्रों में) तथा “इंश्योरेंस फॉर ऑल – विकसित भारत 2047” की दिशा में कार्य करने के सुझाव दिए। कार्यशाला का समापन सामूहिक सहयोग से मध्यप्रदेश में एमएसएमई के लिए सशक्त बीमा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के संकल्प के साथ हुआ।  

बिहार-बंगाल के वोटरों के लिए बड़ी खबर: अब इस एक दस्तावेज़ से बनेगा वोटर कार्ड

कोलकाता चुनाव आयोग ने बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया से तैयार होने वाली नई मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए एक और दस्तावेज को मान्यता प्रदान की है। आयोग की ओर से जारी की गई अधिसूचना में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम बंगाल में गत एसआइआर (2002) से तैयार मतदाता सूची में शामिल नहीं है, लेकिन उसके माता-पिता अथवा किसी निकट संबंधी का नाम बिहार में इसी साल हुए एसआइआर से तैयार मतदाता सूची में शामिल है तो उसे वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से कटने न पाए, इसलिए यह पहल की गई है। बिहार वोटर लिस्ट अब बंगाल में मान्य मालूम हो कि चुनाव आयोग ने SIR के तहत भारतीय नागरिकता के सत्यापन के लिए जो दस्तावेज निर्धारित किए हैं, उनमें केंद्र अथवा राज्य सरकार के कर्मचारी के तौर पर कार्यरत अथवा सेवानिवृत्ति के बाद पेंशनभोगी होने पर इससे संबंधित परिचय पत्र, एक जुलाई, 1987 से पहले बैंक, डाकघर, एलआइसी अथवा स्थानीय प्रशासन की ओर से दिया गया कोई दस्तावेज शामिल है।   इन दस्तावेजों को किया गया शामिल  इसके अलावा जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, बंगाल शिक्षा बोर्ड की दसवीं (माध्यमिक) अथवा उससे उच्च शिक्षा संबंधी प्रमाणपत्र, राज्य सरकार के उपयुक्त प्राधिकरण की ओर से दिया गया निवास स्थल का प्रमाणपत्र, फारेस्ट राइट सर्टिफिकेट, जाति प्रमाणपत्र, किसी भी नागरिक की राष्ट्रीय पंजी, स्थानीय प्रशासन की ओर से दी गई पारिवारिक पंजी व जमीन अथवा घर के कागजात को भी शामिल किया गया है। वहीं आधार को सिर्फ पहचान के प्रमाण के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। मतदाता सूची में आसानी अधिकारी ने बताया कि जिन लोगों के नाम 2002 की मतदाता सूची होंगे, उन्हें इनमें से कोई दस्तावेज जमा करना नहीं पड़ेगा। जिनके नाम नहीं होंगे, वे 2002 की बंगाल की मतदाता सूची के साथ अब 2025 की बिहार की मतदाता सूची में अपने माता-पिता अथवा निकट संबंधी का नाम शामिल होने को प्रमाणित करके अपना नाम नई मतदाता सूची में शामिल करवा पाएंगे।  

बांग्लादेश की बड़ी गलती? दुबई से भारत का चावल खरीदकर दे रहा दोगुना दाम, एक्सपर्ट्स ने जताई चिंता

ढाका  मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश सरकार का प्रमुख बनने के बाद से ही नई दिल्ली और ढाका के बीच संबंधों में खटास आ गई। इसके बाद भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ कई कड़े ऐक्शन लिए। अब बांग्लादेश को महंगे दाम में चावल खरीदना पड़ रहा है। वह अब दुबई के जरिए भारत का ही चावल महंगी कीमत पर लेना पड़ रहा है। बांग्लादेश के फूड डिपार्टमेंट ने भी कन्फर्म किया है कि वह जो चावल दुबई से खरीद रहा है, वह असल में भारतीय ही है। ऐसे में बांग्लादेश के हैरान एक्सपर्ट्स ने भी सवाल खड़े किए हैं कि आखिर में भारत का चावल, भारत के बजाए दुबई से क्यों खरीदा जा रहा। यह तो पैसों की बर्बादी है।   जब पूछा गया कि चावल सीधे भारत से इंपोर्ट क्यों नहीं किया जाता, तो एक अधिकारी ने भारत के साथ ट्रेड डेफिसिट का हवाला देते हुए कहा कि सीधे इंपोर्ट को बायपास करने से इम्बैलेंस को और बिगड़ने से रोकने में मदद मिलती है। बांग्लादेश की मिनिस्ट्री ऑफ फूड के एक प्रपोजल के मुताबिक, एडवाइजरी काउंसिल ऑन गवर्नमेंट प्रोक्योरमेंट ने म्यांमार और दुबई से कुल 100,000 टन चावल खरीदने को मंजूरी दी है। बांग्लादेश की फाइनेंस मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा कि 50,000 टन पारबॉयल्ड चावल म्यांमार से और 50,000 टन नॉन-बासमती पारबॉयल्ड चावल दुबई से आएगा, जिसकी कुल कीमत TK 4,462,380,570 (323 करोड़ रुपये) होगी। देशकाल न्यूज के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के तहत, बांग्लादेश सरकार ने पैकेज-2 के तहत एक इंटरनेशनल ओपन टेंडर के जरिए 50,000 टन नॉन-बासमती पारबॉयल्ड चावल के इम्पोर्ट को मंजूरी दी है। चावल दुबई में M/s Credent One FZE से USD 355.99 प्रति टन के हिसाब से खरीदा जाएगा, जिसकी कीमत TK 2,169,047,070 होगी। इस बीच, 50,000 टन पारबॉयल्ड चावल म्यांमार से गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट बेसिस पर USD 376.50 प्रति टन के हिसाब से इम्पोर्ट किया जाएगा, जिसकी कीमत TK 2,293,261,500 होगी। दुबई अपना लगभग सारा चावल इंपोर्ट करता है, जिसमें ज्यादातर भारत से आता है। दुबई का जेबेल अली पोर्ट एक बड़ा री-एक्सपोर्ट हब है, जो अफ्रीका और मिडिल ईस्ट के देशों में चावल भेजता है। Credent One FZE जैसी कंपनियां भारतीय बासमती और नॉन-बासमती चावल की बड़ी इंपोर्टर हैं। अतिरिक्त पैसा खर्च कर रही यूनुस सरकार वहीं, बांग्लादेश के जानकारों के अनुसार, दुबई के जरिए चावल इंपोर्ट करने पर एक्स्ट्रा खर्च आ रहा है, जो जनता के पैसे की बर्बादी है। दुबई चावल बनाने वाला देश नहीं है, बल्कि वह भारत से चावल इंपोर्ट करके उसे फिर से एक्सपोर्ट करता है। हालांकि भारत से सीधे चावल इंपोर्ट करने का मौका है, लेकिन किसी इंटरमीडियरी कंपनी के जरिए खरीदने के फैसले ने सवाल खड़े कर दिए हैं। खाद्य विभाग में प्रोक्योरमेंट डिवीजन के डायरेक्टर, मोहम्मद मोनिरुज्जमां ने बताया, ‘सप्लायर का ऑफिस दुबई में है। अगर मीडिया में यह रिपोर्ट आती है कि चावल दुबई से आता है, तो हम क्या कह सकते हैं? चावल का सोर्स भारत है।’

जातीय गणित में उलझे नेता, अलीनगर बना सियासी दंगल का मैदान

दरभंगा विधानसभा चुनाव में अपनी सफलता के लिए सभी राजनीतिक दल जातीय समीकरण दुरुस्त करने में जुट गए हैं। सभी दल विभिन्न जातियों पर पकड़ रखने वाले नेताओं को अपनी ओर खींचने में लगे हैं। पार्टियां चुनाव प्रचार के बहाने जाति बहुल विधानसभा में संबंधित जातियों के स्टार प्रचारकों को भेज रहे हैं, ताकि उनके प्रभाव वाली जाति को अपने पक्ष में लाकर अपने दल के प्रत्याशी को विजयी माला पहनाई जा सके। इसके लिए अलग-अलग जाति को साधने की भरपूर कोशिश की जा रही है। सभी तिकड़म लगाए जा रहे हैं। हालांकि, जातीय समीकरण के अनुसार ही क्षेत्र में प्रत्याशियों को भी उतारा गया है। इसके बावजूद संतोष नहीं है कि वह अपनी जाति के मतदाताओं को साध सकें। मिथिला में चुनाव पहले से ही जातीय आधार पर लड़े जाते रहे हैं। इसी कारण क्षेत्र विशेष में विभिन्न राजनीतिक दल प्रत्याशियों का चयन करते समय क्षेत्र विशेष में जाति विशेष की बहुलता पर विशेष ध्यान देते रहे हैं। दरभंगा के बेनीपुर विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मतदाताओं की आबादी बहुतायत में है, इसलिए 2015 में भाजपा से गोपालजी ठाकुर और जदयू से सुनील कुमार चौधरी को मैदान में उतारा गया था। वर्ष 2020 में जदयू के विनय कुमार चौधरी कांग्रेस के मिथिलेश कुमार चौधरी पर भारी पड़े थे। इस बार भी यही दोनों प्रतिद्वंद्वी मैदान में हैं। रोचक तथ्य तो यह है कि दोनों मजबूत ब्राह्मण उम्मीदवारों के बीच त्रिकोण बनाने वाले निर्दलीय प्रत्याशी अवधेश कुमार झा भी इसी समुदाय से आते हैं। महागठबंधन और राजग दोनों ने इस क्षेत्र में अपने-अपने प्रत्याशियों के प्रचार के लिए जिन स्टार प्रचारकों को भेजा है, उनमें भी अधिकांश उसी समुदाय के हैं। पड़ोसी विधानसभा क्षेत्र अलीनगर में ब्राह्मण समुदाय के मतदाताओं की प्रभावी संख्या है। इसको देखते हुए राजग ने मैथिली ठाकुर, महागठबंधन ने विनोद मिश्र और जन सुराज ने विप्लव झा को प्रत्याशी बनाया है। अब प्रत्याशी का समुदाय किसके साथ जाएगा। इस गुत्थी को सुलझाने के लिए क्षेत्र में उसी समुदाय के स्टार प्रचारक की फौज भी उतारी जा रही है। वह अपने प्रत्याशी के पक्ष में अपनी जाति के कितने मतदाताओं को गोलबंद करेंगे, या मतदाता उनकी बात का कितना असर लेते हैं। यह तो चुनाव के बाद पता चलेगा, लेकिन जातीय गणित सुलझाने की गुत्थी में कोई भी गठबंधन या दल किसी से पीछे नहीं है। ऐसा ही जातीय गणित का खेल जाले विधानसभा क्षेत्र में भी देखा जा रहा है कि जहां एनडीए ने अपने काबीना मंत्री जीवेश कुमार को तीसरी बार मैदान में उतारा है, जबकि महागठबंधन ने राजद से कांग्रेस में लाकर पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा को मैदान में उतार दिया है, जबकि वर्ष 2005 और 2010 के विधानसभा चुनाव में हालांकि जाति-कार्ड के बजाय विकास को मुख्य मुद्दा बनते देखा गया था। मिथिला के लोग जातीय भावना से अब ऊपर उठ गए हैं, लेकिन वर्ष 2025 आते-आते सभी दलों का जोर फिर जातीय समीकरण बिठाने पर हैं। जिले के 10 विधानसभा सीटों पर पिछले विधानसभा में नौ पर एनडीए ने कब्जा जमाया था। लेकिन इस बार जातीय समीकरण के चक्र के सामने बड़े-बड़े प्रत्याशी धूल फांकते नजर आ रहे हैं।  

राष्ट्रीय एकता दिवस पर राज्यपाल गंगवार ने किया सरदार पटेल को याद, एकता और समरसता का दिया संदेश

रांची झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल गंगवार ने आज राजभवन में महान स्वतंत्रता सेनानी व आधुनिक भारत के शिल्पकार तथा भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। राज्यपाल ने कहा कि सरदार पटेल ने राष्ट्रीय एकता, अखंडता और रियासतों के एकीकरण के माध्यम से आधुनिक भारत की सुदृढ़ नींव रखी। उनका जीवन, त्याग और नेतृत्व देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा। राज्यपाल ने इस अवसर पर समस्त राज्यवासियों को ‘राष्ट्रीय एकता दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, 'महान स्वतंत्रता सेनानी और देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल जी की 150वीं जयंती पर शत-शत नमन। देश की एकता और अखंडता को सशक्त आधार प्रदान करने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल जी का योगदान सदियों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा।'  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण

आदिवासी वीर नायकों को समर्पित देश का पहला डिजिटल संग्रहालय रायपुर छत्तीसगढ़ की धरती पर 1 नवम्बर को इतिहास रचा जाएगा, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर देश के पहले डिजिटल ट्राइबल म्यूज़ियम शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण करेंगे। यह भव्य संग्रहालय उन आदिवासी वीर नायकों को समर्पित है, जिन्होंने अंग्रेज़ी हुकूमत के विरुद्ध अपने प्राणों की आहुति दी और छत्तीसगढ़ की अस्मिता की रक्षा की। आदिवासी नायक भगवान बिरसा मुंडा जहां देशभर के आदिवासियों के प्रेरणापुंज हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में सोनाखान के ज़मींदार वीर नारायण सिंह ने फिरंगियों के विरुद्ध बिगुल फूंका था। उन्होंने अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम शहीद माना जाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शहीद वीर नारायण सिंह और अंग्रेज़ों के विरुद्ध संघर्ष करने वाले आदिवासी नायकों की स्मृतियों को सहेजने के उद्देश्य से नवा रायपुर में इस अद्वितीय संग्रहालय की स्थापना का निर्णय लिया। 50 करोड़ की लागत से बना अनूठा डिजिटल संग्रहालय नवा रायपुर के सेक्टर-24 में लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है। इसकी डिज़ाइन, अवधारणा और तकनीकी संरचना आधुनिकतम मानकों पर आधारित है। संग्रहालय में अत्याधुनिक वीएफएक्स टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्शन सिस्टम, डिजिटल स्क्रीन, और मोबाइल पर क्यूआर कोड स्कैन करने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे आगंतुक हर कथा को डिजिटल माध्यम से अनुभव कर सकेंगे। आदिवासी विद्रोहों की जीवंत कहानी – 14 सेक्टरों में सजा इतिहास संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के प्रमुख आदिवासी आंदोलनों—हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल, सोनाखान विद्रोह, झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह—की जीवंत झलक दिखाई जाएगी। इन ऐतिहासिक विद्रोहों को 14 सेक्टरों में विभाजित कर प्रस्तुत किया गया है, ताकि दर्शक हर संघर्ष और उसकी प्रेरक गाथा को समझ सकें। संग्रहालय परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह का भव्य स्मारक भी बनाया गया है। यह स्मारक न केवल श्रद्धांजलि का स्थल होगा, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। प्रवेश द्वार पर सरगुजा के कलाकारों द्वारा तैयार की गई सुंदर नक्काशीदार पैनलें लगाई गई हैं। वहीं परिसर में 1400 वर्ष पुराने साल, महुआ और साजा वृक्ष की प्रतिकृतियाँ स्थापित की गई हैं, जिनकी पत्तियों पर 14 विद्रोहों की डिजिटल कहानियाँ उकेरी गई हैं। सुविधाओं से सुसज्जित आधुनिक परिसर संग्रहालय में सेल्फी प्वाइंट, दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधाएँ, ट्राइबल आर्ट से सजा फर्श, और भगवान बिरसा मुंडा, शहीद गैंदसिंह की मूर्तियाँ स्थापित की गई हैं। ये सभी तत्व संग्रहालय को एक जीवंत सांस्कृतिक और भावनात्मक अनुभव का केंद्र बनाते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस मनाने की परंपरा की शुरुआत की थी। उन्होंने आदिवासी समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए देश का सबसे बड़ा अभियान पीएम जनमन और प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना प्रारंभ की। इन पहलों के अंतर्गत आदिवासी इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा  शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह‑जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का लोकार्पण छत्तीसगढ़ की रजत जयंती वर्ष के एक ऐसे क्षण के रूप में दर्ज होगा जो इतिहास, परंपरा और आधुनिकता को एक सूत्र में पिरो देगा।

डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में नई उड़ान भरेगा मध्यप्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

“अभ्युदय मध्यप्रदेश” – एक नवंबर को 70वां स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को मिलेंगी सौगातें रवीन्द्र भवन में होगा राज्य स्तरीय समारोह भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश के गौरवशाली 70वें स्थापना दिवस पर राज्य सरकार डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में भी नई उड़ान भरने जा रही है। नागरिकों और निवेशकों को सशक्त बनाने के लिए तीन नई डिजिटल पहल शुरू होंगी। इनमें “MP ई-सेवा पोर्टल” के माध्यम से नागरिकों को एक ही मंच पर सभी सरकारी सेवाएँ सरल और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होंगी। “Invest MP 3.0” पोर्टल निवेशकों के लिए एक उन्नत सिंगल विंडो सिस्टम के रूप में कार्य करेगा, जिससे निवेश की प्रक्रिया और अधिक सहज व समयबद्ध बनेगी। वहीं “Wash on Wheels” मोबाइल ऐप युवाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ते हुए शहरी स्वच्छता सेवाओं में नई तकनीकी ऊर्जा जोड़ेगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश निवेश उपलब्धियों, औद्योगिक प्रगति और रोजगार सृजन के विजन पर अपने विचार साझा करेंगे। इस अवसर पर “द टू-ईयर जर्नी” शीर्षक से एक विशेष ऑडियो-विजुअल का प्रदर्शन किया जायेगा जिसमें विगत दो वर्षों की राज्य की निवेश प्रोत्साहन यात्रा और उपलब्धियों का जीवंत चित्रण होगा। अभ्युदय मध्यप्रदेश का यह राज्य स्तरीय समारोह 1 नवम्बर 2025 को भोपाल के रवींद्र भवन में सुबह 11:30 बजे से होगा। यह केवल उत्सव नहीं बल्कि प्रदेश की सशक्त विकास यात्रा उपलब्धियों और आने वाले वर्षों के संकल्पों का प्रतीक बनेगा। कार्यक्रम में प्रदेश की हवाई कनेक्टिविटी को भी नई दिशा देने के लिए विमानन क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत की जाएगी। इनमें उज्जैन हवाई अड्डे के विकास अनुबंध पर हस्ताक्षर, रीवा–नई दिल्ली और रीवा–इंदौर फ्लाइट के लिए अनुबंध तथा प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर पर्यटन हेलीकॉप्टर सेवा के अनुबंध शामिल हैं। इन पहलों से राज्य के औद्योगिक, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को नई उड़ान मिलेगी। “अभ्युदय मध्यप्रदेश” राज्य सरकार की नीति, दृष्टि और प्रतिबद्धता का ऐसा संगम होगा, जिसमें प्रदेश के विकास के साथ भविष्य की दिशा का स्पष्ट खाका प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकसित भारत @2047” के विजन से प्रेरित होकर “समृद्ध मध्यप्रदेश 2047” के संकल्प को नई गति दे रही है। यह आयोजन उसी दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में देखा जा रहा है जो यह संदेश देगा कि मध्यप्रदेश दृढ़-संकल्प शक्ति के साथ लगातार बढ़ रहा है। समारोह में केंद्रीय मंत्रियों, नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के उच्च पदाधिकारियों की उपस्थिति भी रहेगी। कार्यक्रम में विधि एवं न्याय मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू, उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. सुमन के. बेरी, मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप तथा अदानी ग्रुप के प्रबंध निदेशक श्री प्रणव अदानी सहित आंध्रप्रदेश से आने वाले गणमान्य अतिथि और उद्योग प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन राज्य की विकास यात्रा एवं भविष्य की रूपरेखा पर अपने विचार साझा करेंगे। कार्यक्रम में “समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” दृष्टि-पत्र का विमोचन किया जाएगा जो प्रदेश के दीर्घकालिक विकास का रोडमैप प्रस्तुत करेगा। यह दस्तावेज़ एक ऐसे मध्यप्रदेश की परिकल्पना करता है जो नागरिकों के जीवन की सुगमता और गुणवत्ता पर केंद्रित, निवेश और रोजगार सृजन के अवसरों से सम्पन्न तथा परंपरा और आधुनिकता के संतुलन से सशक्त सांस्कृतिक राज्य के रूप में आगे बढ़े। “अभ्युदय मध्यप्रदेश” स्थापना दिवस आत्मविश्वास, नवाचार और प्रगति की नई उड़ान का प्रतीक बनेगा। यह आयोजन उस भावना का उत्सव है जो कहती है, मध्यप्रदेश न केवल अपनी विरासत पर गर्व करता है, बल्कि भविष्य को और उज्ज्वल बनाने के लिए पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।  

रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ को मिलेगा नया गौरव – प्रधानमंत्री मोदी करेंगे भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण

छत्तीसगढ़ विधानसभा का नया भवन : परंपरा और आधुनिकता का संगम रायपुर, छत्तीसगढ़ के इतिहास में 1 नवम्बर का दिन एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी राज्य की जनता को विधानसभा का नया भवन समर्पित करेंगे। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद रायपुर के राजकुमार कॉलेज से शुरू हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा को 25 वर्षों के बाद रजत जयंती वर्ष में अपना भव्य, आधुनिक और पूर्ण सुविधायुक्त स्थायी भवन मिलने जा रहा है। यह भवन केवल एक खूबसूरत इमारत ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक भी है। ‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान को इस भवन की वास्तुकला में बखूबी पिरोया गया है। विधानसभा के सदन की सीलिंग पर धान की बालियों और पत्तियों को उकेरा गया है, जो प्रदेश की कृषि-प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। भवन के ज्यादातर दरवाजे और फर्नीचर बस्तर के पारंपरिक काष्ठ शिल्पियों द्वारा बनाए गए हैं। इस तरह नया विधानसभा भवन आधुनिकता और परंपरा का एक जीवंत संगम बन गया है। भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अत्याधुनिक भवन नए विधानसभा भवन को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त और सुसज्जित भवन है, जिसके सदन को 200 सदस्यों तक के बैठने के लिए विस्तारित किया जा सकता है। पेपरलेस विधानसभा संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी सुविधाओं का समावेश भी किया गया है, जिससे यह भवन ‘स्मार्ट विधानसभा’ के रूप में विकसित होगा। 324 करोड़ की लागत से बना 51 एकड़ में फैला परिसर कुल 51 एकड़ में फैले इस परिसर का निर्माण 324 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है। भवन को तीन मुख्य हिस्सों—विंग-ए, विंग-बी और विंग-सी—में विभाजित किया गया है। विंग-ए में विधानसभा का सचिवालय, विंग-बी में सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय, तथा विंग-सी में मंत्रियों के कार्यालय स्थित हैं। हरित तकनीक से निर्मित पर्यावरण अनुकूल भवन यह भवन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और हरित निर्माण तकनीक से बनाया गया है। परिसर में सोलर प्लांट की स्थापना के साथ वर्षा जल संचयन हेतु दो सरोवर भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, भवन में पर्यावरण-संरक्षण के सभी मानकों का पालन किया गया है। 500 सीटर ऑडिटोरियम और 100 सीटर सेंट्रल हॉल विधानसभा भवन में 500 दर्शक क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और 100 सीटर सेंट्रल हॉल बनाया गया है। भवन की वास्तुकला आधुनिकता और पारंपरिक शैलियों का उत्कृष्ट मेल है। तीन करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक छत्तीसगढ़ की संस्कृति और शिल्प से सजे-संवरे इस नए विधानसभा भवन में राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की उम्मीदें, आकांक्षाएं और आत्मगौरव साकार होता दिखेगा। यह भवन न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था  का, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान, प्रगति और परंपरा का प्रतीक भी बनेगा।

विशेष शिक्षकों का फूटा गुस्सा, BRP संघ ने डिप्टी सीएम साव को सौंपी संविलियन की मांग

रायपुर उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन कराने छत्तीसगढ़ प्रदेश स्पेशल एजुकेटर संघ ने डिप्टी सीएम अरुण साव एवं शिक्षा सचिव से मुलाकात की। शासन के रवैये से नाराज होकर BRP विशेष शिक्षक संघ ने संविलियन करने की मांग की है। साथ ही तत्काल भर्ती प्रकिया पर रोक लगाते हुए 20 वर्षों से कार्यरत संविदा विशेष शिक्षकों के पक्ष में निर्णय लेने की बात कही। संघ के सदस्य सुदीप जांगड़े ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश का सही तरीके से पालन नहीं किया गया, जिससे छत्तीसगढ़ में BRP को संविलियन का लाभ नहीं मिला। ना ही इनके लिए कोई विचार किया गया है। इस सबंध में अपनी मांग रखा है। इस दौरान प्रमुख रुप से संदीप जांगडे (संरक्षक), श्याम नारायण पाण्डेय, पूर्णिमा खोब्रागडे, कमलेश खोब्रागडे, प्रवीण चौधरी, प्रिया यादव आदि सदस्य उपस्थित रहे। संघ ने कहा, दिव्यांग बच्चों की शिक्षा एक कानूनी अधिकार है। जो भारत सरकार के संविधान और विभिन्न कानूनों द्वारा संरक्षित है। शिक्षा को अनुच्छेद 21ए के तहत मौलिक अधिकार (शिक्षा का अधिकार (RTE) एवं अधिनियम 2009 के तहत भी सभी विकलांग बच्चे जो 6 से 18 वर्ष की आयु तक निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने प्रावधानित किया गया है। इसे पूरे देश में पालन कराने भारत सरकार ने समावेशी शिक्षा नीतियां तैयार कर सभी राज्यों में भारतीय पुनर्वास परिषद एक्ट 1992 द्वारा पंजीकृत विशेष शिक्षकों की भर्ती की गई है। संघ ने बताया, छत्तीसगढ़ राज्य में भी इसी नीति का पालन करते हुए शासकीय विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा पहली से 12वीं तक के लगभग 78410 दिव्यांग बच्चों के शिक्षण प्रशिक्षण एवं बाधारहित वातावरण प्रदान करने 162 विशेष शिक्षक पद नाम (BRP) की संविदा नियुक्ति कर विगत 20 वर्षों से छत्तीसगढ़ शसन सेवा ले रही है। संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों के विनियमितिकरण / समान्य शिक्षकों के सामान वेतनमान अनुमनय कराये जाने के संबंध में रजनीश कुमार पाण्डेय व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया व अन्य उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका को उच्चतम न्यायालय ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि प्रदेश में कार्यरत संविदा विशेष शिक्षकों की स्क्रीनिंग कमेटी बनाकर पद समायोजन करे एवं नए पदों की भर्ती समय सीमा में करते हुए उक्त कार्यवाही का हलफनामा प्रस्तुत करे। इसका पालन महाराष्ट्र, मणिपुर, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार आन्ध्र प्रदेश ने किया, परंतु छत्तीसगढ़ सरकार ने उक्त आदेश का पालन न करते हुए उच्च्तम न्यायालय को श्रृटिपूर्ण हलफनाम देकर प्रदेश में विशेष शिक्षकों का संविलियन नहीं किया एवं विशेष शिक्षकों की 848 पद सृजित कर 100 पदों की भर्ती विज्ञापन जारी किया है।