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विजिलेंस ने DSP शुक्ला को घेरा, सस्पेंड नहीं, बर्खास्त करने की उठी मांग

कानपुर  यूपी के कानपुर में खाकी के दामन पर एक बार फिर दाग लगा है, जिसने पूरे पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है. दरअसल, शहर में लंबे समय तक तैनात रहे पुलिस उपाधीक्षक (DSP) ऋषिकांत शुक्ला पर 100 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जमा करने का संगीन आरोप लगा है. यह मामला सामने आते ही शासन ने हड़कंप मच गया. आनन-फानन में DSP को निलंबित कर विजिलेंस (सतर्कता) जांच के आदेश दिए गए हैं.  दरोगा से DSP तक का 'अवैध' सफर बता दें कि कानपुर पुलिस कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद शुरू हुई एसआईटी जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. बताया जाता है कि ऋषिकांत शुक्ला ने दरोगा (उपनिरीक्षक) पद पर रहते हुए 1998 से 2009 के बीच, खासकर कानपुर में तैनाती के दौरान, अकूत दौलत बटोरी. एसआईटी ने पाया कि शुक्ला ने अपनी घोषित आय के स्रोतों से कहीं अधिक करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति अपने परिवार, साझेदारों और करीबियों के नाम पर खड़ी कर ली.  बेनामी संपत्तियों का जाल जांच में सामने आया कि डीएसपी ने अवैध कमाई को छिपाने के लिए बेनामी संपत्तियों का एक बड़ा जाल बुना. इनमें सबसे खास है आर्यनगर स्थित 11 दुकानें, जो कथित तौर पर उनके सहयोगी देवेंद्र दुबे के नाम पर दर्ज हैं. इसके अलावा, उनकी नजदीकी अखिलेश दुबे नामक एक शातिर अपराधी से भी सामने आई, जो फर्जी मुकदमे, जबरन वसूली और जमीन कब्जाने का गिरोह चलाता था. एसआईटी ने इस गठजोड़ को भी उजागर किया है, जिसमें पुलिस अधिकारियों के अलावा केडीए और अन्य विभागों के कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका है. 200 से 300 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का अनुमान  कानपुर के पूर्व डीएसपी ऋषिकांत शुक्ला पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित करने के मामले में शिकायतकर्ता सौरभ भदौरिया ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. भदौरिया ने बताया कि शुक्ला ने एसओजी में तैनाती के दौरान ठेकेदारी, जमीन कब्जाने और बिल्डिंग निर्माण के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया. जांच में भले ही अभी तक 100 करोड़ की संपत्ति सामने आई हो, लेकिन कुल संपत्ति 200 से 300 करोड़ रुपये होने का अनुमान है.  सूत्रों के अनुसार, शुक्ला की नोएडा, पंजाब, चंडीगढ़ समेत कई शहरों में बेनामी संपत्तियां हैं. कानपुर के आर्यनगर में 11 दुकानें और कई प्लॉट मिले हैं. इसके अलावा, उन्नाव और फतेहपुर में बिल्डरों के साथ मिलकर जमीनों पर कब्जे और निवेश के साक्ष्य भी मिले हैं.  शिकायत में आरोप है कि डीएसपी के बेटे विशाल शुक्ला ने अपराधी अखिलेश दुबे के साथ मिलकर 33 कंपनियां बनाईं, जिनका इस्तेमाल काले धन को सफेद करने में किया गया. शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इतनी बड़ी संपत्ति अर्जित करने वाले अधिकारी को केवल निलंबित नहीं, बल्कि नौकरी से बर्खास्त किया जाए. शासन अब इन कंपनियों और अन्य संपत्तियों की भी जांच कराने की तैयारी में है.   92 करोड़ की संपत्तियों का खुला राज, जांच अभी बाकी एसआईटी जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 12 संपत्तियों की बाजार कीमत करीब 92 करोड़ रुपये आंकी गई है. हालांकि, तीन अन्य संपत्तियों के दस्तावेज अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाए हैं. मामले की नजाकत को देखते हुए, अपर पुलिस महानिदेशक (प्रशासन) की संस्तुति पर अब विजिलेंस जांच शुरू की जा रही है.  फिलहाल, ऋषिकांत शुक्ला मैनपुरी जिले में डीएसपी के पद पर तैनात थे, जिन्हें अब निलंबित कर दिया गया है. विजिलेंस जांच पूरी होने के बाद ही 100 करोड़ के इस 'कुबेर' पर आगे की कानूनी और सख्त कार्रवाई तय की जाएगी. 

DIG भुल्लर मामले में CBI की नई कार्रवाई, खुल सकते हैं कई राज!

लुधियाना पंजाब पुलिस के निलंबित डी.आई.जी. हरचरण सिंह भुल्लर मामले में सी.बी.आई. ने लुधियाना में छापेमारी की है। इस मामले में सी.बी.आई. की टीम आज सुबह से ही पक्खोवाल रोड स्थित सरगोधा कॉलोनी पहुंची हुई है। जानकारी के अनुसार, सी.बी.आई. ने एक प्रॉपर्टी डीलर के घर पर छापेमारी की है। आज सुबह से ही घर के अंदर तलाशी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, इस कार्रवाई के तार निलंबित डी.आई.जी. हरचरण सिंह भुल्लर मामले से जुड़े हैं। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कोई भी अधिकारी इस बारे में जानकारी साझा नहीं कर रहा है। 

Vivo Y19s 5G अब भारत में, दमदार बैटरी और फीचर्स, इतनी है कीमत

मुंबई  Vivo ने भारत में नया अफोर्डेबल स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है. इसका नाम Vivo Y19s 5G है. इसमें 6000mAh की बैटरी, डुअल रियर कैमरा और साइड माउटेड फिंगरप्रिंट स्कैनर मिलता है. इसके अंदर मीडियाटेक डाइमेंसिटी का चिपसेट दिया है.  Vivo Y19s 5G को तीन वेरिएंट में लॉन्च किया है. वीवो के इस हैंडसेट की शुरुआती कीमत 10,999 रुपये है, इसमें 4GB Ram + 64GB स्टोरेज वेरिएंट मिलता है. वहीं अन्य दो वेरिएंट  11,999 और 13,499 रुपये में आते हैं. इनमें  4GB + 128GB स्टोरेज और 6GB + 128GB स्टोरेज वेरिएंट मिलता है. यह स्मार्टफोन मजेस्टिक ग्रीन और टाइटेनियम सिल्वर कलर में आता है.  Vivo Y19s 5G के स्पेसिफिकेशन्स  Vivo Y19s 5G में 6.74-inch का HD+ LCD स्क्रीन दिया है. इसमें 90Hz का रिफ्रेश रेट्स और 1600 × 720 पिक्सल रेजुल्यूशन मिलता है. यह हैंडसेट ऑक्टाकोर म MediaTek Dimensity 6300 6nm के साथ आता है. इसके साथ ARM Mali-G57 MC2 GPU का यूज किया है.  Vivo Y19s 5G की रैम और स्टोरेज  Vivo Y19s 5G में यूजर्स को 4GB और 6GB LPDDR4X RAM के ऑप्शन मिलते हैं. इसके अलावा स्टोरेज के भी दो ऑप्शन मिलते हैं, जो 64GB और 128GB हैं. इसमें 2TB तक का माइक्रोएसडी कार्ड यूज कर सकते हैं. यह स्मार्टफोन Android 15 बेस्ड Funtouch OS 15 पर काम करता है.   Vivo Y19s 5G का डुअल रियर कैमरा सेटअप  Vivo Y19s 5G में डुअल रियर कैमरा सेटअप दिया है. इसमें प्राइमरी कैमरा 13MP का है, जो  f/2.2 aperture के साथ आता है. इसमें 0.08MP का सेकेंडरी कैमरा भी दिया है. 5MP का फ्रंट कैमरा भी दिया है.  Vivo Y19s 5G की बैटरी  Vivo Y19s 5G में 6000mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 15W का फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है. इस हैंडसेट में साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है. कंपनी ने बताया है कि इसमें बेहतर ड्युरेबिलिटी देने के लिए Military-grade durability का यूज किया है. डस्ट और वॉटर रेसिस्टेंस के लिए IP64 रेटिंग दी है. 

रिंग रोड-एबी रोड के बीच 100 फीट चौड़ी सड़क, एमआर-9 लिंक रोड के लिए तोड़े गए 140 बाधक निर्माण

इंदौर  इंदौर में पहले मास्टर प्लान में शामिल एमआर-9 लिंक रोड को बनाने का काम नगर निगम ने शुरू किया है। इसके लिए मालवीय नगर से रिंंग रोड तक 100 फीट चौड़ी सड़क की जद में आ रहे 140 मकानों को तोड़ा गया। रहवासियों ने इसका विरोध भी किया, लेकिन अफसरों ने कहा कि तय मोहलत के बाद अब बाधक हिस्से तोड़ना होंगे। पिछले दिनों रहवासियों ने विधायक रमेश मेंदोला के घर के सामने धरना भी दिया था। इंदौर विकास प्राधिकरण पंद्रह साल पहले चंद्रगुप्त मोर्य प्रतिमा चौराहा से अनोप टाॅकिज चौराहा तक सड़क बना चुका है, लेकिन उसके आगे सड़क नहीं बन पाई है। अब एबी रोड से रिंग रोड के बीच सड़क बनाई जा रही है। भविष्य में यह सड़क खजराना से होते हुए बायपास तक बनेगी। चौड़ाई की जद में आ रहे 140 मकानों को पिछले माह नोटिस दिए गए थे और स्वेच्छा से मकान हटाने को कहा गया था। कुछ रहवासियों ने मकान हटा लिए थे। जिन लोगों ने निर्माण नहीं तोड़े, उन्हें नगर निगम के अमले ने जमींदोज कर दिया। पाचं जेसीबी व पोकलेन की मदद से चौड़ाई की जद में आ रहे सभी निर्माण को तोड़ दिया गया। अब नगर निगम अगले माह सड़क बनाने का काम शुरू करेगा। बीच का हिस्सा भी अधूरा एबी रोड से संजय गांधी नगर तक सड़क चौड़ी हो चुकी है, लेकिन 300 मीटर में घनी बस्ती है। जो हट नहीं पाई। इस कारण सड़क पूरी तरह नहीं जुड़ पाई। 300 मीटर में दो सौ से ज्यादा बाधक निर्माण है। रहवासी जमीन के बदले प्लाॅट देने की मांग कर रहे थे। इस कारण अभी तक सड़क अधूरी है।  

ड्रग्स माफिया पर हरियाणा सरकार की जंग: सिरसा बना ऑपरेशन का ग्राउंड ज़ीरो

चंडीगढ़  हरियाणा में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने अब जंग छेड़ दी है। सिरसा जिले में को खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीमों ने बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चलाते हुए 67 मेडिकल स्टोरों की जांच की। इनमें से 16 दुकानों को रिकॉर्ड न दिखाने और नियमों के उल्लंघन पर सील कर दिया गया। अभियान की निगरानी खुद राज्य ड्रग्स कंट्रोलर लालित कुमार गोयल ने की, जबकि हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव पूरे ऑपरेशन पर नज़र बनाए रहीं। अधिकारियों के मुताबिक, सिरसा को सबसे पहले चुना गया क्योंकि यहां नशे का सबसे अधिक प्रचलन है और यह इलाका लंबे समय से ड्रग्स के वितरण का हॉटस्पॉट माना जाता है। इसी वजह से सरकार ने अभियान की शुरुआत सिरसा से की, ताकि नशे के नेटवर्क की रीढ़ तोड़ी जा सके। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर विभाग के आयुक्त मनोज कुमार के नेतृत्व में 35 सीनियर ड्रग्स कंट्रोल ऑफिसर और कई जिलों से आए ड्रग्स कंट्रोल ऑफिसर को मिलाकर आठ विशेष टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने एक साथ ज़िले के कालांवाली, बडागुढ़ा, डबवाली, रानिया, ऐलनाबाद और सिरसा शहर में छापेमारी की। हर टीम के पास थी हिट-लिस्ट ‘ऑपरेशन क्लीन फार्मेसी’ नाम के इस अभियान में प्रत्येक टीम को उन दुकानों की सूची दी गई थी, जहां प्रतिबंधित या साइकोट्रोपिक दवाओं की बिक्री की आशंका थी। छापेमारी सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और करीब साढ़े छह घंटे तक लगातार जारी रही। अभियान में 67 दुकानों की जांच की गई, 16 दुकानों को सील किया गया, जबकि 15 दवाओं के सैंपल जांच के लिए लिए गए। एफडीए ने सभी गड़बड़ी वाले प्रतिष्ठानों को शो कॉज नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यालय से सीधी मॉनिटरिंग, मौके पर अधिकारी तैनात अभियान की सीधी निगरानी राज्य ड्रग्स कंट्रोलर लालित कुमार गोयल कर रहे थे। मुख्यालय से असिस्टेंट स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर्स परविंदर सिंह, करण सिंह गोदारा और राकेश दहिया भी मौके पर मौजूद रहे ताकि कार्रवाई में कोई ढिलाई न रहे। टीमों को साफ आदेश थे कि बिना किसी दबाव के, हर संदिग्ध मेडिकल स्टोर की जांच करो। रिकॉर्ड मांगो, जवाब न मिले तो दुकान सील करो। हिसार, फतेहाबाद और अंबाला अगले निशाने पर स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि सिरसा में हुई यह कार्रवाई शुरुआत मात्र है। यह एक तरह की सर्जिकल स्ट्राइक है जो बाकी जिलों में भी जारी रहेगी। हिसार, फतेहाबाद, अंबाला और पानीपत जैसे जिलों में भी अभियान तैयार है। उन्होंने कहा कि हरियाणा को नशे की गिरफ्त से आज़ाद कराना हमारा संकल्प है। मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि नशीली दवाओं की बिक्री में कोई भी व्यक्ति या संस्था संलिप्त मिली तो उसके खिलाफ कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।   हरियाणा बनेगा नशामुक्त प्रदेश अधिकारियों ने बताया कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ दुकानों की जांच नहीं बल्कि पूरे सप्लाई चेन को खत्म करना है। यानी निर्माता, सप्लायर और खुदरा विक्रेता – तीनों स्तरों पर कार्रवाई होगी। राज्य सरकार ने संबंधित विभागों से संयुक्त टास्क फोर्स बनाने की योजना पर भी काम शुरू कर दिया है ताकि सूचना का आदान-प्रदान और तेज़ी से हो सके। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह वक्त चेतावनी का नहीं, कार्रवाई का है। उन्होंने कहा कि नशे के इस जाल को तोड़ने के लिए हरियाणा सरकार आखिरी हद तक जाएगी।

हिंदू संगठन भड़के, तब्लीगी इज्तिमा कमेटी ने बताया दुकान इंकार की खबर गलत

भोपाल  राजधानी भोपाल में होने वाले विश्व स्तरीय मुस्लिमों के आलमी तब्लीगी इज्तिमा से पहले एक नया विवाद खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि आयोजन स्थल पर हिंदू व्यापारियों को दुकानें नहीं देने की बात सामने आई है। इस पर हिंदू संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे धार्मिक भेदभाव करार दिया है। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि हर बार शुरुआत इनकी ओर से होती है, और जब हम प्रतिक्रिया देते हैं तो उसे साम्प्रदायिक करार दे दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया  “अब कहां गया सद्भाव और भाईचारा? अगर इज्तिमा में हिंदू दुकानदारों को जगह नहीं दी जा रही है तो यह भेदभाव नहीं तो क्या है?” तिवारी ने कहा कि पिछली बार भी इसी तरह की शिकायतें आई थीं और इस बार फिर से वही स्थिति दोहराई जा रही है। उन्होंने कहा, “हम जब कहते हैं अपनों से व्यवहार, अपनों से त्योहार, अपनों से व्यापार, तो कुछ लोगों को बुरा लगता है। लेकिन अब हालात उनके अपने बनाए हैं। जैसा करोगे, वैसा पाओगे।” उन्होंने आगे कहा कि अगर मुस्लिम संगठन सच में सांप्रदायिक सौहार्द की बात करते हैं, तो उन्हें सबसे पहले हिंदू व्यापारियों को दुकानें देकर उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने कहा, “सकल संपदा रघुनाथ की है। सब कुछ भगवान का बनाया हुआ है। धर्म सिर्फ सनातन है, बाकी सब पंथ हैं।” चंद्रशेखर तिवारी ने हिंदू समाज से अपील करते हुए कहा कि “जहां अपमान मिले, वहां जाना ही नहीं चाहिए। प्रभु ने जीव दिया है तो रोटी भी देगा। देश में इतने धार्मिक आयोजन हैं- मठ, मंदिर, कुंभ, नर्मदा तट और कल्पवास जैसे मेलों में भी व्यापार के अनेकों अवसर हैं।”  वहीं इस मामले में तबलीगी इज्तिमा के मीडिया प्रभारी डॉक्टर उमर हफ़ीज़ का कहना है कि ये सरासर ग़लत है ।इज्तिमा में किसी धर्म जाति के साथ भेदभाव नहीं किया जाता है। हमने पिछले सालों में भी हिंदू भाइयों को दुकानें दी है और इस साल भी हिंदू भाइयों को दुकानें देंगे।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए खुशखबरी! 8वें वेतन आयोग पर सरकार का बड़ा ऐलान, जानें क्या बदलेगा

नई दिल्ली  8th Pay Commission: केंद्र सरकार ने आखिरकार लंबे इंतजार के बाद 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की आधिकारिक घोषणा कर दी है। वित्त मंत्रालय के एक्सपेंडिचर डिपार्टमेंट की ओर से 3 नवंबर को जारी गजट अधिसूचना में आयोग की संरचना, सदस्यों, कार्यक्षेत्र (Terms of Reference – TOR) और मुख्यालय का डिटेल साझा किया गया है। आयोग को केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के वेतन, भत्तों और अन्य लाभों की समीक्षा कर सिफारिशें देने का कार्य सौंपा गया है।   सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है — -अध्यक्ष (Chairperson): जस्टिस रंजन प्रकाश देसाई -पार्ट-टाइम सदस्य (Part-Time Member): प्रो. पुलक घोष -सदस्य-सचिव (Member-Secretary): पंकज जैन आयोग का कार्य यह सुनिश्चित करना होगा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों का वेतन ढांचा तार्किक, कुशल और परफॉर्मेंस बेस्ड हो, जो वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय अनुशासन के अनुरूप हो। 8वें वेतन आयोग के कार्यक्षेत्र सरकार ने आयोग के लिए विस्तृत TOR जारी किए हैं। इसके तहत आयोग को निम्नलिखित कार्य करने होंगे — (a) आयोग यह जांच करेगा और सिफारिश करेगा कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों, अखिल भारतीय सेवाओं, रक्षा बलों और अन्य विभागों के लिए वेतन, भत्तों और सुविधाओं में क्या-क्या परिवर्तन आवश्यक और व्यावहारिक हैं। इनमें शामिल हैं: 1. केंद्र सरकार के औद्योगिक और गैर-औद्योगिक कर्मचारी 2. अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी 3. रक्षा बलों के कार्मिक 4. केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारी 5. भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग (IA&AD) के अधिकारी 6. संसद द्वारा गठित नियामक संस्थाओं (RBI को छोड़कर) के सदस्य 7. सर्वोच्च न्यायालय के अधिकारी और कर्मचारी 8. उन उच्च न्यायालयों के कर्मचारी जिनका खर्च केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा वहन किया जाता है 9. केंद्र शासित प्रदेशों की अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारी (b) आयोग ऐसा वेतन ढांचा सुझाएगा जिससे योग्य प्रतिभा सरकारी सेवा की ओर आकर्षित हो और कर्मचारियों में जवाबदेही, दक्षता और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिले। (c) आयोग मौजूदा बोनस और प्रोत्साहन योजनाओं की समीक्षा करेगा और प्रदर्शन-आधारित नई योजना बनाने की सिफारिश करेगा ताकि उत्पादकता और उत्कृष्टता को पुरस्कृत किया जा सके। (d) मौजूदा भत्तों और उनकी पात्रता की शर्तों की समीक्षा कर उनका युक्तिकरण किया जाएगा। (e) (i) राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और एकीकृत पेंशन योजना (UPS) से जुड़े कर्मचारियों के लिए डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी (DCRG) की समीक्षा कर सिफारिशें देना। (ii) उन कर्मचारियों के लिए भी ग्रेच्युटी और पेंशन की समीक्षा करना जो NPS/UPS में शामिल नहीं हैं। आर्थिक संतुलन पर ध्यान 8वें वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें बनाते समय देश की आर्थिक स्थिति, राजकोषीय अनुशासन, राज्यों की वित्तीय स्थिति, और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) व निजी क्षेत्र में प्रचलित वेतन ढांचे को भी ध्यान में रखना होगा। आयोग की कार्यप्रणाली आयोग अपने कार्य के लिए स्वतंत्र प्रक्रिया अपनाएगा। इसे सलाहकारों, विशेषज्ञों और संस्थागत परामर्शदाताओं की नियुक्ति का अधिकार होगा। आयोग आवश्यक सूचनाएं और साक्ष्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से मांग सकता है। सरकार ने राज्यों, सेवाकर्मी संघों और अन्य संबंधित पक्षों से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा जताई है। रिपोर्ट तैयार करने की समयसीमा 8वें वेतन आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें गठन की तिथि से 18 महीनों के भीतर प्रस्तुत करनी होंगी। यदि आवश्यक हो, तो आयोग मध्यवर्ती रिपोर्टें भी भेज सकता है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में होगा। कुल मिलाकल 8वें वेतन आयोग के गठन से केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनरों की उम्मीदें एक बार फिर बढ़ गई हैं। आयोग की सिफारिशों के बाद अगले कुछ वर्षों में सरकारी कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।  

डॉक्टर की पत्नी गिरफ्तार, बच्चों की मौत मामले में स्टॉक हेराफेरी का खुलासा

भोपाल  22 मासूमों की जान लेने वाले जहरीले कफ सिरप कांड में लंबे समय से फरार चल रही सहआरोपी ज्योति सोनी आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ गई। आरोपी डॉ. प्रवीण सोनी की पत्नी ज्योति पर साक्ष्य छिपाने और अपराध में सहयोग करने का आरोप है। वह परासिया में अपना मेडिकल स्टोर संचालित करती थी। सोमवार को एसआईटी टीम ने परासिया से उसे गिरफ्तार किया। बैंगलौर और बनारस में काटी फरारी डीएसपी जितेंद्र जाट ने बताया कि फरारी के दौरान ज्योति सोनी बैंगलौर और बनारस में छिपी रही। इसी दौरान उसने जबलपुर हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत के प्रयास भी किए थे। सूचना मिलने पर एसआईटी ने परासिया में दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा। डॉ. प्रवीण सोनी को बचाने की कोशिश ड्रग विभाग की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि ज्योति सोनी ने फॉर्मासिस्ट सौरभ जैन और न्यू अपना फार्मा संचालक राजेश सोनी के साथ मिलकर जहरीले कफ सिरप कोल्ड्रिफ के स्टॉक में हेराफेरी की और जानकारी छिपाई। तीनों ने डॉ. प्रवीण सोनी को बचाने की नीयत से साक्ष्य मिटाने की कोशिश की थी। इसी आधार पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। सौरभ और राजेश पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि ज्योति अब पकड़ी गई है। गिरफ्तारी या सरेंडर? शहर में चर्चा ज्योति की गिरफ्तारी को लेकर परासिया में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उसने स्वेच्छा से सरेंडर किया, जबकि पुलिस का दावा है कि यह गिरफ्तारी है, समर्पण नहीं। एसआईटी अब उससे यह जानने की कोशिश करेगी कि फरारी के दौरान उसने किनसे संपर्क किया और मामले से जुड़े साक्ष्यों को कैसे नष्ट किया गया। 

समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर विधानसभा से एनडीए प्रत्याशी राजेश कुमार सिंह के समर्थन में सीएम योगी ने की जनसभा

RJD-कांग्रेस ने गरीबों के हक पर डकैती डाली, पशुओं का चारा डकारा- सीएम योगी – समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर विधानसभा से एनडीए प्रत्याशी राजेश कुमार सिंह के समर्थन में सीएम योगी ने की जनसभा – सीएम योगी बोले- रामद्रोही विपक्ष ने नरसंहार करवाए, अब माफिया गले लगाते हैं – विपक्ष पर सीएम योगी ने किया तंज, कहा- भगवान का श्राप है कि तुम लोग माफिया की कब्र पर फातिहा पढ़ते रहोगे, जनता तुम्हें ठुकराती रहेगी – 2005 से पहले RJD-कांग्रेस ने नौजवानों के रोजगार पर डकैती डाली, गरीबों के हक छीने- सीएम योगी – भागवान राम के अस्तित्व पर सवाल खड़ा करने वाले कांग्रेस के युवराज अब छठ मैया के बारे में भी प्रश्न खड़ा कर रहे हैं- सीएम योगी – सीएम योगी ने कहा- उत्तर प्रदेश का बुलडोजर थमने वाला नहीं है, अब बिहार भी माफिया के खिलाफ यही कार्रवाई करेगा – सीएम योगी ने जनता से की अपील, मोहिउद्दीननगर का नाम अब मोहन नगर करने की दिशा में आगे बढ़ें समस्तीपुर बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के प्रचार के अंतिम दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोहिउद्दीननगर में विपक्ष पर ऐसा तीखा प्रहार किया कि सभा में 'जय श्री राम' के नारे गूंज उठे। बीजेपी प्रत्याशी राजेश कुमार सिंह के समर्थन में आयोजित जनसभा में योगी ने RJD-कांग्रेस गठबंधन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि गरीबों के हक पर डकैती डालने वाला, पशुओं का चारा डकारने वाले ये लोग कभी बिहार का हित नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि ये लोग बिहार को जंगलराज में बदलकर पहचान के संकट में धकेल दिए। अपहरण उद्योग चलाया, दंगे भड़काए, नरसंहार करवाए। अब माफिया को गले लगाते हैं। सीएम योगी ने विपक्ष को रामद्रोही बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट देकर कहा कि राम हुए ही नहीं, RJD ने राम रथ रोका, समाजवादी ने राम भक्तों पर गोली चलाई। ये लोग परमपिता परमेश्वर की साक्षात प्रतिमूर्ति राम-जानकी के अस्तित्व पर प्रश्न खड़े करते हैं। ऐसे ही छठ मैया के बारे में भी कांग्रेस के युवराज आज प्रश्न खड़ा कर रहे हैं। RJD-कांग्रेस ने बिहार के पहचान को किया कलंकित- सीएम योगी RJD-कांग्रेस पर बिहार को कलंकित करने का आरोप लगाते हुए योगी ने कहा कि 2005 से पहले RJD-कांग्रेस ने नौजवानों के रोजगार पर डकैती डाली, गरीबों के हक छीने। गरीब बीमार होता तो तड़पकर मरता, क्योंकि स्वास्थ्य सुविधा नहीं थी। उन्होंने कहा कि जो लोग पशुओं का चारा खा गए, गरीबों का क्या भला करते? सीएम योगी ने कहा कि इंडी गठबंधन के लोग बिहार में जातीय सेनाएं खड़ी कर नरसंहार करवाए, अपहरण उद्योग चलाया, बेटी-व्यापारी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया। पर्व-त्योहार दंगों में झोंक दिए। समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर सीएम योगी ने कसा तंज समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने जिन लोगों को बार-बार खारिज किया है, वे लोग आज बिहार में आकर कहते हैं कि नाम बदला जा रहा है। सीएम योगी ने जवाब देते हुए कहा कि हम नाम ही नहीं बदल रहे हैं, हमने तो उत्तर प्रदेश के कार्य के माध्यम से उत्तर प्रदेश का नाम दुनिया के अंदर फिर से स्थापित कर दिया है। आज अयोध्या में राम मंदिर बन रहा है, काशी में काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण हो गया है, प्रयागराज में भव्य और दिव्य महाकुंभ का आयोजन भी होता है। अब तो उत्तर प्रदेश में माफिया को रौंदकर बुलडोजर जब चलता है और माफिया के द्वारा आर्जित आर्थिक संपत्ति को हम लोग गरीबों में बांटने का काम करते हैं। इंडी गठबंधन के पार्टनर समाजवादी पार्टी के लोग बिहार के अंदर भाषण के माध्यम से, बयानों के माध्यम से अपनी चिड़ निकालने का काम कर रहे हैं। सीएम योगी ने कहा कि सपा के बड़े नेता यहां पर खानदानी माफिया को गले लगा कर कहते हैं कि यह तो मजबूत आदमी है। हमने कहा कि भगवान ने तुम्हें यही श्राप दिया है कि जिंदगी भर इन माफियाओं की कब्र पर फातिहा पढ़ते रहोगे, जनता ऐसे ही ठुकराती रहेगी। उत्तर प्रदेश का बुलडोजर थमने वाला नहीं है- सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्नयाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश का बुलडोजर थमने वाला नहीं है। वह डरने वाला भी नहीं है। अब तो बिहार भी माफिया के खिलाफ यही कार्रवाई करेगा। हमें बिहार की धरती को ज्ञान की धरती के रूप में पुनर्स्थापित करने की दिशा में किए जाने वाले कार्यों को आगे बढ़ाना है। बिहार के विकास को भारत के विकास के साथ जोड़कर के आगे बढ़ाना है। बिहार के नौजवानों के लिए बिहार के अंदर ही नौकरी और रोजगार की सुविधा उपलब्ध करवानी है। बिहार की माताओं और बहनों की सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए उनके स्वावलंबन के कार्यक्रम को आगे बढ़ाना है। सीएम योगी ने बिहार में एनडीए सरकार के कार्यों की सरहाना की उन्होंने कहा कि एनडीए की सरकार थी, पैसा था तो एक करोड़ 41 लाख माताओं और बहनों के खातों में 10-10 हजार रुपए के अनुसार धनराशि भी चली गई है। यह तो शुरुआत है, शुरुआत। अभी तो इससे भी बड़ा कार्य होना है। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आज बिहार में मेडिकल कॉलेज बन रहे हैं, आईआईएम, आईआईटी, एम्स बन रहे हैं। मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल की संख्या 20 वर्ष पहले केवल दो हॉस्पिटल बिहार में थे, आज 41 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल बिहार के अंदर कार्य कर रहे हैं। यही नहीं, 12 करोड़ गरीबों को स्वच्छ ईंधन के रूप में रसोई गैस के कनेक्शन फ्री में। बहनों और भाइयों, यही नहीं, 12 करोड़ गरीबों के घर में शौचालय भी बना दिया। 4 करोड़ गरीबों के सर को ढकने के लिए एक-एक छत प्रधानमंत्री आवास के रूप में दे दिया गया। तीन करोड़ गरीबों को बिजली के फ्री में कनेक्शन भी दिए गए। मोहिउद्दीननगर का नाम अब मोहन नगर करने की दिशा में आगे बढ़ें- सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता से अपील करते हुए कहा कि अब मोहिउद्दीननगर का नाम अब मोहन नगर करने की दिशा में आगे बढ़ जाइए। ऐसा कार्य कर दीजिए कि गुलामी के अंश समाप्त हो जाएं। गुलामी के लिए कोई स्थान ही न रहे। हमने इसीलिए फैजाबाद को … Read more

प्रत्येक श्रद्धालु की सुविधा और सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री योगी

स्नान पर्वों और मेलों के सकुशल आयोजन के लिए 'स्वच्छता, सुरक्षा और सतर्कता' हो तैयारियों का आधार: मुख्यमंत्री प्रत्येक श्रद्धालु की सुविधा और सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री योगी संवेदनशील स्थलों पर ‘रील’ बनाने वाले पुलिसकर्मियों की तैनाती पर रोक: मुख्यमंत्री योगी मुख्यमंत्री का पुलिस को निर्देश, सार्वजनिक स्थलों पर अराजक-अवांछनीय तत्वों की उपस्थिति न हो, बढ़ायें चौकसी, कड़ी कार्रवाई हो कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली और विभिन्न मेलों की तैयारियों की मुख्यमंत्री ने की गहन समीक्षा स्नान घाटों पर प्रकाश, सीसीटीवी, फ्लोटिंग बैरियर और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश धान खरीद में बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए, किसानों को समय पर भुगतान हो: मुख्यमंत्री गो-आश्रय स्थलों में सुधार और मानदेय कर्मियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश ‘विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ अभियान में अब तक मिले 72 लाख से अधिक सुझाव, जनभागीदारी से बनेगा विकास का रोडमैप लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि आगामी पर्व-त्योहारों और मेलों के अवसर पर प्रदेश में 'स्वच्छता सुरक्षा और सतर्कता' सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सेवा और संवेदना का कार्य है। प्रत्येक श्रद्धालु की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना हर अधिकारी का दायित्व है। भीड़ प्रबंधन और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि स्नान घाटों, मेलों और भीड़भाड़ वाले स्थलों पर अराजक या अवांछनीय तत्वों की उपस्थिति किसी भी दशा में न होने पाए। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि माहौल पूर्णतः शांतिपूर्ण, सुरक्षित और श्रद्धाभाव से भरा रहे। मुख्यमंत्री सोमवार देर रात प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन, आगामी त्यौहारों की तैयारियों, धान खरीद और स्वास्थ्य सेवाओं सहित विभिन्न विषयों पर समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और शासन स्तर के अधिकारियों की उपस्थिति रही। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर में कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, ददरी मेला (बलिया) और गढ़मुक्तेश्वर मेला (हापुड़) जैसे आयोजनों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पर्व-त्योहारों पर लाखों श्रद्धालु घाटों और मेलों में पहुंचते हैं, ऐसे में भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। घाटों पर पर्याप्त प्रकाश, फ्लोटिंग बैरियर, सीसीटीवी कैमरे, स्वास्थ्य उपकेंद्र, मोबाइल टॉयलेट, खोया-पाया केंद्र और चेंजिंग रूम जैसी सुविधाएं पहले से सुनिश्चित की जाएं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों का जलस्तर अभी ऊँचा है और प्रवाह तेज है, इसलिए स्नान घाटों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। उन्होंने एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की सक्रिय तैनाती के निर्देश देते हुए कहा कि बिना लाइफ जैकेट के कोई भी नाविक या पर्यटक बोटिंग न करे। काशी में देव दीपावली, अयोध्या, प्रयागराज, हापुड़, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, बदायूं और बलिया जैसे जिलों में सर्वाधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी व्यवस्थाएं चाक-चौबंद कर ली जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि संवेदनशील स्थलों पर ड्यूटी के दौरान ‘रील’ बनाने वाले पुलिसकर्मियों की तैनाती कतई न की जाए, ताकि जनसेवा के कार्य में अनुशासन और मर्यादा बनी रहे। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि धान खरीद की प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रहे और किसानों को असुविधा न हो। किसी भी स्तर पर बिचौलियों की भूमिका स्वीकार्य नहीं होगी। जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए कि खाद एवं उन्नत बीजों की पर्याप्त उपलब्धता हर जनपद में सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने हाल की वर्षा से प्रभावित फसलों का तत्काल सर्वेक्षण कर बिना विलम्ब क्षतिपूर्ति का भुगतान नियमानुसार कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को मुआवजे के लिए किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। अवैध खनन को लेकर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि विशेष टीम गठित कर औचक निरीक्षण कराए जाएं। यदि किसी भी क्षेत्र में अनियमितता पाई गई तो संबंधित अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई होगी। मुख्यमंत्री ने निराश्रित गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि जिलाधिकारी स्वयं इन स्थलों का निरीक्षण करें और सुनिश्चित करें कि प्रत्येक गोवंश को चारा-पानी और चिकित्सा की समुचित सुविधा मिले। उन्होंने आशा, आंगनबाड़ी, रसोइया तथा मानदेय पर कार्यरत कर्मियों को हर माह समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने 'विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि अब तक प्रदेश के विभिन्न जनपदों से 72 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं। जौनपुर, गाजीपुर, हरदोई, प्रतापगढ़, बिजनौर, गोरखपुर, बरेली, सोनभद्र और गोंडा सहित कई जिलों से लोगों ने विकास के उपयोगी विचार साझा किए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप दिया जाए ताकि उत्तर प्रदेश के विकास का रोडमैप जनता के सुझावों से और सशक्त बने।