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मंदिर का अनोखा झंडा: हवा के विपरीत दिशा में लहराने का रहस्य

जगन्नाथ मंदिर की महिमा कौन नहीं जानता. पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन इससे जुड़े कई रहस्य और परंपराएं भी हैं, जो आपको हैरान कर देंगी. इन्हीं में से एक है इस मंदिर का झंडा जो हवा की दिशा के विपरीत लहराता है. आम तौर पर झंडा हवा के साथ उड़ता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं होता. यही बात इस मंदिर को रहस्यमयी और अद्भुत बनाती है. आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है कि मंदिर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है. स्थानीय लोग इसे भगवान जगन्नाथ की दैवीय शक्ति का संकेत मानते हैं. कहा जाता है कि मंदिर के ऊपर लहराता झंडा नकारात्मक ऊर्जाओं को खत्म करता है और पूरे वातावरण में सकारात्मकता फैलाता है. इस झंडे को हर दिन बदला जाता है, लेकिन यह काम कोई साधारण नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति भक्ति और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. हर शाम लगभग सूर्यास्त के समय पुराना झंडा उतारकर नया त्रिकोणीय झंडा लगाया जाता है. सर्दियों में यह काम करीब 5 बजे और गर्मियों में 6 बजे के आसपास किया जाता है. ऐसा भी है कि अगर किसी दिन झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर 18 सालों तक बंद हो सकता है. इसलिए चाहे बारिश हो या तूफान, यह परंपरा एक दिन के लिए भी नहीं रुकती. झंडा बदलने का यह कार्य एक विशेष परिवार, जिसे चुनरा सेवक या चोला परिवार कहा जाता है, के हाथों से ही होता है. इस परिवार के लोग लगभग पिछले 800 सालों से यह पवित्र जिम्मेदारी निभा रहे हैं. सबसे हैरानी की बात यह है कि वे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 214 फुट ऊंचे मंदिर के शिखर पर चढ़ते हैं और वहां झंडा बदलते हैं. कहा जाता है कि आज तक इस परिवार के किसी भी सदस्य को इस काम के दौरान कोई चोट नहीं लगी. पुराने झंडे को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला माना जाता है, इसलिए हर दिन नया झंडा लगाकर भगवान जगन्नाथ के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है. यह झंडा केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है. जगन्नाथ मंदिर का यह रहस्य भले ही विज्ञान से परे हो, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह भगवान की शक्ति और कृपा का जीवंत प्रमाण है.

प्रॉपर्टी टायकून के ठिकानों पर CBI की Raid, करोड़ों की हेराफेरी का शक

पटियाला पंजाब में आज मशहूर प्रॉपर्टी कारोबारी के घर CBI ने रेड की है। जानकारी के मुताबिक, CBI ने आज शहर के प्रसिद्ध प्रॉपर्टी कारोबारी बी.एच. प्रॉपर्टी के घर पर छापा मारा। बताया जा रहा है कि, सीबीआई की टीम सुबह ही कारोबारी के घर पर पहुंच गई थी और स्थानीय पुलिस तैनात कर दी गई। जानकारी के मुताबिक, मौके पर पिछले कई घंटों से चैकिंग चल रही है। हालांकि, इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि यह रेड DIG भुल्लर के संबंध में की गई थी या किसी और वजह से। हालांकि, घर के बाहर कोतवाली थाने के एसएचओ जसप्रीत सिंह कहलों और मॉडल टाउन चौकी के प्रभारी एएसआई रंजीत सिंह सहित पुलिस बल तैनात किया गया है। 

संकल्प फाउंडेशन ट्रस्ट के दीपावली मिलन समारोह में झलकी एकता और संस्कृति की झांकी

संकल्प फाउंडेशन ट्रस्ट का दीपावली मिलन समारोह – 2025: एकता, संस्कृति और राष्ट्रभाव का अद्भुत संगम संकल्प फाउंडेशन ट्रस्ट के दीपावली मिलन समारोह में झलकी एकता और संस्कृति की झांकी दीपों के पर्व पर संकल्प फाउंडेशन का आयोजन, एकता और राष्ट्रभाव का सुंदर संदेश नई दिल्ली  संकल्प फाउंडेशन ट्रस्ट द्वारा आयोजित “दीपावली मिलन समारोह – 2025” एक भव्य और प्रेरणादायक आयोजन के रूप में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर समाजसेवा, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मंच पर आदरणीय श्री संतोष कुमार तनेजा जी (अध्यक्ष, संकल्प फाउंडेशन ट्रस्ट), डॉ. विजय चौथवाल जी (प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के सलाहकार एवं टेम्जेन इम्ना अलोंग, मंत्री नागालैंड , कालसी साहब (पूर्व मुख्य सचिव) तथा श्री अनिल अग्रवाल जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा को कई गुना बढ़ा दिया। समारोह के दौरान आदरणीय संतोष तनेजा जी का सभी गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में स्नेहपूर्वक स्वागत किया गया। यह क्षण आत्मीयता, आदर और संगठनात्मक एकता का प्रतीक रहा, जिसने पूरे वातावरण को प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया। मंच से स्वामी विवेकानंद जी के प्रेरक विचार “Strength is life, Weakness is death” के माध्यम से समर्पण, सेवा और राष्ट्रभाव का सशक्त संदेश दिया गया। संकल्प फाउंडेशन ट्रस्ट के इस दीपोत्सव ने न केवल संस्कृति और परंपरा की रोशनी फैलाई, बल्कि समाज में सहयोग, एकता और आत्मविश्वास की नई चेतना भी जागृत की।

सीएम भगवंत मान का बड़ा ऐलान! पंजाब की महिलाओं को हर महीने मिलेंगे 1000 रुपये

चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार अगले बजट में हर महिला को 1,000 रुपये प्रति माह देने के अपनी पार्टी के चुनावी वादे को पूरा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार जनता से किए गए हर वादे को पूरा कर रही है। सीएम भगवंत मान तरनतारन विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार करने आए थे। इस सीट आम आदमी पार्टी ने हरमीत सिंह संधू को उम्मीदवार बनाया है। भगवंत मान ने कहा, ‘‘हमारी माताओं और बहनों से किया गया 1,000 रुपये का वादा भी आगामी बजट में पारित होने के बाद पूरा किया जाएगा।’’ मान ने उपचुनाव में आम आदमी पार्टी की भारी जीत का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि यह तय है कि राज्य सरकार की ‘जनहितैषी’ नीतियों के कारण आम आदमी पार्टी तरनतारन उपचुनाव में भारी जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि विपक्षी तरनतारन के लोगों को बिकाऊ समझकर पैसे से खरीदने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन हलके के समझदार लोग आम आदमी पार्टी के ईमानदार उम्मीदवार को चुनकर विधानसभा भेजेंगे और विपक्षियों के भ्रम दूर कर देंगे। लूटने वाले दल सत्ता से बाहर हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने पंजाब का समग्र विकास और लोगों की समृद्धि सुनिश्चित की है। मान ने दावा किया कि किसी ठोस मुद्दे के अभाव में विपक्ष केवल नाम के लिए ही राज्य सरकार की आलोचना कर रहा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पारंपरिक दलों ने पंजाब और उसके लोगों को ‘बेरहमी से लूटा’, जिसके कारण उन्हें राज्य की सत्ता से बेदखल होना पड़ा। प्रचार के दौरान उन्होंने कहा, "हलका तरनतारन के गांवों का जोश और जुनून आम आदमी पार्टी की जीत की गवाही खुद ब खुद दे रहा है। हमारी यह जीत आपके बच्चों के बेहतर भविष्य के हक में काम आएगी।"   तरनतारन में 11 नवंबर को होगा मतदान तरनतारन उपचुनाव के लिए मतदान 11 नवंबर को होगा और नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। यह सीट जून में आप विधायक कश्मीर सिंह सोहल के निधन के बाद खाली हुई थी। भगवंत मान ने गांव भूसे, कलस, बुरज 169, नौशहरा, चीमा कलां, बीर राजा तेजा सिंह, छीना बिधीचंद, भुच्चर कलां और अड्डा गगोबुआ में पार्टी वॉलंटियरों के साथ रोड शो निकाला। उन्होंने उम्मीद जताई कि 11 नवंबर को तरनतारन के लोग आम आदमी पार्टी को रिकॉर्ड तोड़ वोट डालकर जिताएंगे और फिर से आप का विधायक बनाएंगे।

केंद्र क्यों बचना चाहती है इस पीठ से? रिटायरमेंट से 3 हफ्ते पहले CJI गवई ने जताई नाराज़गी

नई दिल्ली  उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार की उस अर्जी पर कड़ा रुख अपनाया, जिसमें अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 2021 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेजने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि अंतिम सुनवाई के आखिरी चरण में सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी। साथ ही अदालत ने कहा है कि ऐसा लगता है कि सरकार मौजूदा बेंच से बचने की कोशिश कर रही है। यह अधिनियम फिल्म प्रमाणन अपीलीय अधिकरण समेत कुछ अपीलीय अधिकरण को खत्म करता है और विभिन्न अधिकरणों के न्यायिक एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति एवं कार्यकाल से जुड़े कई नियमों में बदलाव करता है। हो चुकी थीं अंतिम दलीलें प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने इस बात को लेकर नाराजगी जताई कि केंद्र अब इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजना चाहता है। पीठ ने इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता मद्रास बार एसोसिएशन सहित विभिन्न याचिकाकर्ताओं की ओर से अंतिम दलीलें पहले ही सुन ली हैं। सुप्रीम कोर्ट बोला- हमें सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी पीठ ने कहा, 'पिछली तारीख (सुनवाई की) पर, आपने (अटॉर्नी जनरल) ये आपत्तियां नहीं उठाईं और आपने निजी कारणों से सुनवाई टालने का अनुरोध किया। आप पूरी सुनवाई के बाद ये आपत्तियां नहीं उठा सकते… हम केंद्र सरकार से ऐसी तरकीब अपनाने की उम्मीद नहीं करते हैं।' नाराज नजर आ रहे प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'यह ऐसे समय हुआ है जब हमने एक पक्ष की पूरी बात सुन ली है और अटॉर्नी जनरल को निजी कारणों से छूट दी है।' CJI ने कहा कि ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार मौजूदा पीठ से बचना चाहती है। सीजेआई गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ से अपील की कि वे बड़ी पीठ द्वारा सुनवाई किए जाने के अनुरोध संबंधी केंद्र की अर्जी को गलत न समझें। उन्होंने कहा कि इस पहलू पर शुरुआती आपत्तियां पहले ही केंद्र सरकार द्वारा दाखिल जवाब का हिस्सा हैं। सीजेआई ने कहा, 'अगर हम आपकी यह अर्जी खारिज कर देते हैं, तो हम यह मानेंगे कि केंद्र इस पीठ से बचने की कोशिश कर रहा है। एक पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अब हम यह सब नहीं सुनेंगे।' कोर्ट ने उठाए सरकार की टाइमिंग पर सवाल अटॉर्नी जनरल ने कहा, 'नहीं, कृपया ऐसा न समझें। यह अधिनियम काफी सोच-विचार के बाद लाया गया था… हम बस इतना कह रहे हैं कि क्या इन मुद्दों की वजह से इस अधिनियम को सीधे रद्द कर देना चाहिए। उसे लागू होने और प्रभाव दिखाने के लिए थोड़ा समय दिया जाए।' न्यायमूर्ति चंद्रन ने कहा कि इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने का मुद्दा पहले नहीं उठाया गया था और इतने देरी से ऐसा नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा, 'कम से कम किसी मंच पर तो आपको यह मुद्दा उठाना चाहिए था… और वह भी इसके लिए एक अर्जी? आपने सुनवाई टालने का अनुरोध इसलिए किया कि आप आकर बहस करना चाहते थे।' अटॉर्नी जनरल ने जब यह गलतफहमी दूर करने की पूरी कोशिश की कि केंद्र सुनवाई टालना चाहता है, तो सीजेआई ने कहा, 'हमारे मन में आपके लिए बहुत इज्जत और सम्मान है।' अटॉर्नी जनरल को लगाई फटकार सीजेआई ने कहा, 'आप (अटार्नी जनरल) कृपया (अरविंद) दातार (वरिष्ठ अधिवक्ता, जिन्होंने अधिनियम के खिलाफ दलील पेश की) द्वारा दी गई दलीलों का जवाब देने तक ही सीमित रहें।' पीठ ने कहा, 'जो भी दस्तावेज सामने आए हैं, उनके आधार पर बहस करें। अगर बहस के दौरान हमें लगता है कि बड़ी पीठ के पास मामला भेजने की जरूरत है, तो हम ऐसा करेंगे… लेकिन हम आपकी उस अर्जी के कहने पर ऐसा नहीं करेंगे जो आधी रात को आई है।' शुक्रवार को सुनवाई फिर से होगी। न्यायालय ने 16 अक्टूबर को इस अधिनियम के अलग-अलग प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू की थी।  

नई शुरुआत की ओर पंजाब! सरकार ने लिया ऐतिहासिक फैसला, बदल जाएगा राज्य का भविष्य

पटियाला पंजाब के चिकित्सा शिक्षा व अनुसंधान तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को डिजीटल और आधुनिक युग से जोड़ते हुए पटियाला के सरकारी राजिंदरा अस्पताल का पूर्ण ई-अस्पताल के रूप में उद्घाटन किया और यहां मुख्यमंत्री मरीज सहायता केंद्र को भी मरीजों के लिए समर्पित किया। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अब राजिंदरा अस्पताल में मरीजों को तेज, पारदर्शी और सहज स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान होंगी तथा राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के उद्देश्य से शीघ्र ही यह प्रणाली प्रदेश के सभी जिला और उपमंडल अस्पतालों में प्रारंभ की जाएगी। डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने “रंगला पंजाब” के सपने के तहत स्वास्थ्य, विकास, शिक्षा और रोजगार को प्राथमिकता देते हुए सरकारी राजिंदरा अस्पताल की पुरानी शान को बहाल किया है। उन्होंने बताया कि यहां क्रिटिकल मैडीसिन, फैमिली मैडीसिन, पेलिएटिव और जेरिएट्रिक केयर के चार नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। सुपर स्पैशलिटी अस्पताल को और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के साथ-साथ 300 बिस्तरों का ट्रॉमा केयर अस्पताल बनाया जा रहा है ताकि किसी भी मरीज को वैंटीलेटर की कमी के कारण चंडीगढ़ रेफर न करना पड़े। डॉ. बलबीर सिंह ने समाज सेवी संस्थाओं का धन्यवाद करते हुए बताया कि किंग्स इलैवन पंजाब के तत्वावधान में राऊंड टेबल इंडिया द्वारा 30 लाख रुपए की लागत से तैयार किया गया मुख्यमंत्री मरीज सहायता केंद्र मरीजों और उनके परिजनों को बैठने, प्रतीक्षा करने, जन औषधि सुविधा प्राप्त करने और वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगों को हर तरह की मदद देने के लिए एक हेल्प डेस्क से सुसज्जित किया गया है।   उन्होंने कहा कि इससे मरीजों और डॉक्टरों के बीच संबंध और भी मजबूत होंगे तथा जो मरीज अपनी परेशानी लेकर राजिंद्रा अस्पताल आता है, वह यहां से संतुष्ट होकर लौटेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस मरीज सहायता केंद्र में कोई भी समाजसेवी संस्था आकर सेवा कर सकती है। ई-अस्पताल “डिजीटल इंडिया” पहल के अंतर्गत एन.आई.सी. द्वारा विकसित एक ओपन-सोर्स अस्पताल प्रबंधन प्रणाली के तहत राजिंदरा अस्पताल का पूर्ण डिजीटलाइजेशन हो गया है। मरीजों को कंप्यूटराइज्ड ओ.पी.डी. पर्ची और लैब सूचना प्रणाली के माध्यम से कंप्यूटराइज्ड रिपोर्टें भी मिलेंगी। उन्होंने बताया कि बिलिंग मॉड्यूल के माध्यम से अस्पताल के सभी कार्य डिजीटल रूप से संचालित किए जा रहे हैं मरीज पंजीकरण, बिलिंग, लैब रिपोर्ट, प्रत्येक मरीज के लिए यूनिक हॉस्पिटल आईडी और कंप्यूटराइज्ड रसीदों के साथ बिलिंग और भुगतान भी डिजिटल हो गया है। डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि राज्य के मैडीकल और नर्सिंग विद्यार्थियों सहित अन्य विषयों के विद्यार्थियों को भी प्रारम्भिक स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान करने की शुरुआत की गई है, और राज्य में 3 सरकारी और 5 निजी मैडीकल कॉलेजों सहित कुल 8 नए मैडीकल कॉलेज शीघ्र ही प्रारंभ होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में इलाज की सुविधाएं बहुत महंगी होने के कारण पटियाला को मैडीकल हब बनाकर स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, हर पंजाबी को 10 लाख रुपये तक की इलाज सुविधा प्रदान कर पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य क्रांति को और आगे बढ़ाया है। इस अवसर पर डी.आर.एम.ई. डॉ. अवनीश कुमार, डायरैक्टर प्रिंसीपल डॉ. आर.पी.एस. सिबिया, मैडीकल सुपरिंटैंडैंट डॉ. विशाल चोपड़ा, डॉ. सुधीर वर्मा, एन.आई.सी. से राज्य सूचना अधिकारी विवेक वर्मा, वरिष्ठ निदेशक धर्मेश कुमार, आई.टी. निदेशक संजीव शर्मा, एल.सी. गुप्ता, आनंद सरकारिया, विवेक कुमार, डॉ. दीपाली, डॉ. सीमा सहित पटियाला हेल्थ फाऊंडेशन, पटियाला इंडस्ट्री एसोसिएशन, जनहित समिति, लायंस क्लब, ब्लड डोनेशन संस्थाओं तथा अन्य समाज सेवी संगठनों के प्रतिनिधि, फैकल्टी और चिकित्सा विद्यार्थी उपस्थित थे।

भोजन व्यवस्था में लापरवाही पर MDU सख्त, छह कुक तुरंत निलंबित

रोहतक  रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) के महिला छात्रावास में शराब पीने का वीडियो वायरल होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए 6 कुक को निलंबित कर दिया है। निलंबित कर्मचारियों में हेड कुक त्रिलोक सिंह, कुबेर सिंह, महेंद्र सिंह, सुंदर सिंह, नसीब सिंह और मुकेश शामिल हैं। 31 अक्तूबर को वायरल हुए इस वीडियो में 4 से 5 कर्मचारी छात्रावास परिसर में शराब पीते हुए नजर आ रहे थे। मामले के संज्ञान में आने के बाद MDU प्रशासन ने जांच समिति गठित की, जिसने दोषी पाए जाने पर यह कार्रवाई की। सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी कर्मचारियों की बैठक बुलाई और छात्रावास अनुशासन पर सख्त निर्देश जारी किए। प्रशासन की सख्त चेतावनी MDU प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी को ब्रेकफास्ट, लंच या डिनर के समय के अलावा छात्रावास परिसर में रुकने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही छात्रावास में बीड़ी, सिगरेट, गुटखा या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ के सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। यदि कोई कर्मचारी इस आदेश का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

भारतीयों के लिए मुश्किलें बढ़ीं: कनाडा रद्द कर सकता है हज़ारों अस्थायी वीजा

बेंगलुरु  कनाडा जाने की चाह रखने वाले भारतीयों को तगड़ा झटका लग सकता है। कनाडाई सरकार संसद में लंबित विधेयक के जरिए अस्थायी वीजा को बड़े पैमाने पर रद्द करने की शक्ति चाहती है, जिसका इस्तेमाल भारत से आने वाले फर्जी आवेदनों को रोकने के लिए किया जा सकता है।  रिपोर्ट में आईआरसीसी, सीबीएसए और अमेरिकी विभागों के हवाले यह बताया गया है। इस प्रावधान को भारत से अस्थायी वीजा आवेदकों की धोखाधड़ी को रोकने वाला कदम बताया गया है।   विधेयक में कहा गया कि महामारी या युद्ध के समय ढेर सारे वीजा एक साथ रद्द किए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडाई अधिकारी इनमें से कुछ खास देशों के वीजा धारकों को निशाना बनाना चाहते हैं। अस्थायी निवासियों में काम करने वाले, विदेशी छात्र और घूमने आने वाले लोग शामिल होते हैं। यह नियम कनाडा की सीमाओं को मजबूत करने वाले कानून का हिस्सा बताया जा रहा है। नए लोगों का आना कम करने का दबाव इमिग्रेशन वकील सुमित सेन ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया था कि अगर लिबरल सरकार का स्ट्रॉन्ग बॉर्डर्स बिल पास हो गया, तो हजारों आवेदन एक झटके में रद्द हो सकते हैं, क्योंकि इससे मंत्री को बहुत बड़ी ताकत मिल जाएगी। उन्होंने कहा कि 2007 में फाइलें इसलिए बंद की गईं ताकि पुरानी लंबित अर्जियों का बोझ हटाया जा सके। ये बात उन्होंने तब कही जब अर्जियों को मंजूरी देने में बहुत देरी हो रही है – जैसे स्टार्टअप वीजा के तहत उद्यमियों को 35 साल (420 महीने) तक इंतजार करना पड़ जाता है। अभी कनाडा सरकार नए लोगों का आना कम करना चाहती है, चाहे वो स्थायी रहने वाले हों या अस्थायी। इससे भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। 74% भारतीय छात्रों के स्टडी परमिट रिजेक्ट रविवार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 में 74% भारतीय छात्रों के स्टडी परमिट रिजेक्ट हो गए जबकि 2023 के अगस्त में सिर्फ 32% ही रिजेक्ट हुए थे। यानी अब भारत से पढ़ाई के लिए कनाडा जाना बहुत मुश्किल हो गया है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार इस महीने अपनी आप्रवासन स्तर योजना पेश करने वाली है। देश में बढ़ते आप्रवासन-विरोधी भावना के कारण सरकार पर नए लोगों की संख्या कम करने का दबाव है।  

राजस्व वादों के मामलों के तेजी से निस्तारण के सीएम योगी के निर्देशों का दिख रहा असर

सबसे अधिक राजस्व मामले निस्तारित कर लखनऊ अव्वल, जनपदीय न्यायालयों में जौनपुर ने फिर मारी बाजी      राजस्व वादों के मामलों के तेजी से निस्तारण के सीएम योगी के निर्देशों का दिख रहा असर      सीएम योगी की मॉनीटरिंग से प्रदेश में मामले के निस्तारण में आया खासा सुधार     – कुल राजस्व मामले के निस्तारण में प्रयागराज दूसरे, गोरखपुर तीसरे और कानपुर नगर चौथे स्थान पर     – जनपद स्तरीय न्यायालयाें में राजस्व मामलों के निस्तारण में जौनपुर पहले, लखीमपुर खीरी दूसरे और बस्ती तीसरे स्थान पर      – पिछले 13 माह से जनपद स्तरीय न्यायालयों में राजस्व वादों के निस्तारण में जौनपुर टॉप फाइव में     लखनऊ प्रदेश में राजस्व मामलों के त्वरित निस्तारण की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त मॉनीटरिंग का असर साफ नजर आ रहा है। सीएम योगी खुद हर माह जिलावार मामलों की समीक्षा भी करते रहते हैं। योगी सरकार की विशेष पहल के तहत तेजी से मामलों के निपटारे की रणनीति को अपनाया गया, जिससे राजस्व विवादों के मामलों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश भर में राजस्व वादों के निस्तारण में तेजी देखी गयी है। राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) द्वारा अक्टूबर माह की जारी रिपोर्ट में पूरे प्रदेश में सबसे अधिक राजधानी में मामलों को निस्तारित किया गया है जबकि जनपद स्तरीय न्यायालय में राजस्व के मामले निपटाने में एक बार फिर जौनपुर ने बाजी मारी है। बता दें कि जनपद स्तरीय न्यायालयों में राजस्व वादों के निस्तारण में पिछले 13 माह से जौनपुर टॉप फाइल जिलों में बना हुआ है।    राजधानी में सबसे अधिक कुल 15,260 मामले निस्तारित किये गये  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश हैं कि राजस्व विवादों के मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जाए। उनकी इस पहल का उद्देश्य न केवल जनता को त्वरित न्याय दिलाना है, बल्कि प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को भी बढ़ावा देना है। इसी के तहत प्रदेश के जिलाधिकारी और अन्य संबंधित अधिकारी पूरी तत्परता से मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। राजस्व परिषद की आरसीसीएमएस की अक्टूबर माह की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में पूरे प्रदेश में कुल 3,24,897 राजस्व मामलों का निस्तारण किया गया। लखनऊ जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर ने बताया कि सबसे अधिक राजधानी लखनऊ में 15,260 मामले निस्तारित किये गये, जो पूरे प्रदेश में सबसे अधिक हैं। इसके बाद प्रयागराज में कुल 10,501 मामलों को निस्तारित कर पूरे प्रदेश में दूसरा, गोरखपुर 8,165 मामलों को निस्तारित कर तीसरे स्थान पर है। इसी तरह कानपुर नगर ने 7,866 मामले निस्तारित कर चौथा और शाहजहांपुर ने 7,707 मामलों का निस्तारण कर पांचवां स्थान प्राप्त किया है।     जनपद स्तरीय न्यायालयाें में जौनपुर ने मारी बाजी, सबसे अधिक 480 मामले किये निस्तारित  जौनपुर डीएम डॉ. दिनेश चंद्र सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुसार राजस्व मामलों को निस्तारित किया जा रहा है। बोर्ड ऑफ रेवन्यू की अक्टूबर माह की राजस्व न्यायालय कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) की रिपोर्ट के अनुसार जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के निर्धारित मानक निस्तारण से अधिक मामलों का निस्तारण किया है। जौनपुर की पांच राजस्व न्यायालयों ने बोर्ड के प्रति माह निस्तारण के मानक 250 के सापेक्ष 480 मामलों का निस्तारण किया है। इसका रेश्यो 192 प्रतिशत है। इसी के साथ जनपदीय न्यायायल में राजस्व मामलों के निस्तारण में प्रदेश में जौनपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है जबकि मानक 300 के सापेक्ष 334 मामलों का निस्तारण कर दूसरे स्थान पर लखीमपुर खीरी और मानक 300 के सापेक्ष 310 मामले निस्तारित कर तीसरे स्थान पर बस्ती है। इसी तरह अक्टूबर में जौनपुर के जिलाधिकारी न्यायालय ने निर्धारित 30 मामलों के मानक के मुकाबले 71 मामलों का निस्तारण कर 236.67 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल की, जो की प्रदेश भर में सबसे अधिक है और जौनपुर प्रदेश भर में पहले स्थान पर है। वहीं भदोही के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 63 मामले निस्तारित किये गये। वहीं, मऊ के जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा 51 मामले निस्तारित किये गये। इसी तरह जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा निस्तारित किये गये मामलों में भदोही दूसरे और मऊ तीसरे स्थान पर है।     भू राजस्व संबंधित मामलों के निस्तारण में भी जौनपुर अव्वल  इसी प्रकार अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व जौनपुर निर्धारित मानक 50 के सापेक्ष कुल 184 वादों का निस्तारण कर प्रदेश में प्रथम स्थान पर हैं। वहीं, अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व गाजीपुर कुल 36 वादों का निस्तारण कर दूसरे स्थान पर हैं तथा अपर जिलाधिकारी भू-राजस्व मीरजापुर कुल 24 वादों का निस्तारण कर तीसरे स्थान पर हैं।     

आज से छत्तीसगढ़ में वोटर लिस्ट चेकिंग, BLOs घर-घर करेंगे सर्वे, 7 फरवरी को फाइनल लिस्ट

रायपुर  छत्तीसगढ़ के रायपुर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के तहत मंगलवार 4 नवंबर से घर-घर गणना चरण की शुरुआत होगी। इस प्रक्रिया में बीएलओ घर-घर जाकर मतदाता परिचय पत्र का सत्यापन करेंगे। प्रथम चरण के साथ आगे की प्रक्रियाओं को लेकर सोमवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि प्रथम चरण की प्रक्रिया जारी है। जिनका नाम साल 2003 के एसआईआर में है, उन्हें दस्तावेज देने की जरूरत नहीं है। केवल 5-6 प्रतिशत मतदाताओं को ही दस्तावेज देने की जरूरत होगी। उन्होंने बताया कि असुविधा होने पर बीएलओ मतदाता हेल्पलाइन नंबर 1950 पर कॉल रिक्वेस्ट के माध्यम से मदद ले सकते हैं। मतदाता सूची का मिलान 2003 के आधार पर उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में विगत एसआईआर की मतदाता सूची वर्ष 2003 को आधार मानकर मिलान किया गया है। बीएलओ ने वर्तमान में केवल अपने मतदान केंद्र के मतदाताओं का मिलान किया है, जो कि 71 प्रतिशत के करीब है। अधिकारियों ने बताया कि 2003 के बाद से आज पर्यंत कई मतदाता अन्यत्र शिट हुए हैं। मतदान केन्द्रों का परिसीमन भी हुआ है। एन्यूमरेशन फेज में बीएलओ द्वारा मतदाताओं के घर-घर सर्वे के दौरान यह मिलान प्रतिशत 10-15 प्रतिशत और बढ़ जाएगा। मतदाता सूची में लगभग 50 प्रतिशत महिलाएं हैं। वर्ष 2003 के एसआईआर के बाद विवाहित महिलाएं अपने तत्कालीन मतदान केंद्र से अन्यत्र स्थानांतरित हुई हैं। बीएलओ द्वारा घर-घर एन्यूमरेशन फेज में 15 से 20 प्रतिशत और महिला मतदाताओं का मिलान किया जा सकेगा। ऐसे में एसआईआर के दौरान आपको इन 11 दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी…     केंद्र या राज्य सरकार या पीएसयू के नियमित कर्मचारी या पेंशनभोगी को जारी किया गया कोई भी पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश     1 जुलाई, 1987 से पहले सरकार/स्थानीय प्राधिकरण/बैंक/डाकघर/एलआईसी/पीएसयू द्वारा जारी कोई भी पहचान पत्र, प्रमाण पत्र या दस्तावेज     जन्म प्रमाण पत्र     पासपोर्ट     मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिकुलेशन या शैक्षिक प्रमाण पत्र     स्थायी निवास प्रमाण पत्र     वन अधिकार प्रमाण पत्र     ओबीसी/एससी/एसटी या कोई भी जाति प्रमाण पत्र     राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर     राज्य या स्थानीय प्राधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर     सरकार द्वारा जारी कोई भी भूमि या मकान आवंटन प्रमाण पत्र कहां-कहां हो रहा एसआईआर?     अंडमान निकोबार द्वीपसमूह     छत्तीसगढ़     गोवा     गुजरात     केरल     लक्षद्वीप     मध्य प्रदेश     पुड्डचेरी     राजस्थान     तमिलनाडु     उत्तर प्रदेश     पश्चिम बंगाल एसआईआर का क्या है शेड्यूल?     गणना पत्रों की छपाई व बीएलओ को प्रशिक्षण- 28 अक्टूबर 2025 से तीन नवंबर 2025 तक।     घर-घर जाकर पुनरीक्षण का काम- चार नवंबर 2025 से चार दिसंबर 2025 तक।     मतदाता सूची के मसौदे का प्रकाशन- 09 दिसंबर 2025     दावे और आपत्तियों का समय-09 दिसंबर 2025 से 08 जनवरी 2026 तक।     दस्तावेजों की जांच के लिए नोटिस, सुनवाई, सत्यापन: 09 दिसंबर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक     अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन- 07 फरवरी 2026 एसआईआर क्यों जरूरी? आयोग ने इस दौरान बताया कि एसआइआर क्यों जरूरी है। आयोग के मुताबिक बदलते शहरीकरण में लोगों का तेजी से विस्थापन हो रहा है। यह इसकी एक बड़ी वजह है। दूसरा इसके चलते कई जगहों पर लोगों के मतदाता सूची में दो-दो जगह से नाम दर्ज है। तीसरा मतदाता सूची में मतदाताओं के मृत होने के बाद भी नामों का हटाया न जाना है। चौथी वजह देश के तमाम हिस्सों में गलत तरीके से घुसपैठ करके बड़ी संख्या में लोगों ने मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम जुड़वा लिया है। एसआइआर के दौरान इन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच हो सकेगी। राजनीति दलों से सहयोग की अपील सीईओ यशवंत कुमार ने राजनीतिक दलों से आग्रह किया है। उन्होंने पुनरीक्षण के दौरान अपने बूथ स्तरीय एजेंटों (बीएलओ) के माध्यम से निर्वाचन आयोग के कर्मचारियों को पूरा सहयोग देने की अपील की है, ताकि छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम सूची में जोड़े जा सकें और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें। क्या-क्या कार्य होंगे घर-घर गणना चरण अवधि- 4 नवंबर से 4 दिसंबर तक मसौदा सूची का प्रकाशन – 9 दिसंबर दावा-आपत्तियों की अवधि – 9 दिसंबर से 8 जनवरी 2026 तक नोटिस चरण (सुनवाई व सत्यापन)- 9 दिसंबर से 31 जनवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन – 7 फरवरी 2026