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साल का सबसे बड़ा खगोलीय नज़ारा: 12 अगस्त को दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण

सूर्य ग्रहण एक अद्भुत खगोलीय घटना है, जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश कुछ समय के लिए रुक जाता है। यह घटना केवल अमावस्या के दिन संभव होती है, जब तीनों खगोलीय पिंड एक सीध में होते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार, सूर्य ग्रहण को सूर्यदेव और राहु-केतु के संबंध से जोड़ा गया है। स्कंद पुराण में इसका वर्णन मिलता है कि राहु और केतु, जिन्होंने अमृत पान का छल किया था, उन्हें भगवान विष्णु ने दंडस्वरूप ग्रह बना दिया। इसी कारण जब राहु सूर्य को निगलता है, तो सूर्य ग्रहण लगता है। 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण खगोलीय रूप से रोमांचक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र अवसर होगा। हालांकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा परंतु ग्रहण काल के नियमों का पालन और मंत्र जप इस दिन शुभ फल प्रदान कर सकता है। जो व्यक्ति इस समय आत्मचिंतन, ध्यान और प्रार्थना करता है। उसके जीवन में सूर्य की तरह नई रोशनी अवश्य आती है। सूर्य ग्रहण 2026 की तिथि और समय 12 अगस्त 2026, बुधवार को पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा। इस ग्रहण का दृश्य आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, पुर्तगाल और रूस के कुछ हिस्सों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। यहां के लोगों को कुछ क्षणों के लिए दिन में रात जैसा अंधकार दिखाई देगा। वहीं यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में देखा जाएगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। 2026 में एक और सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को भी लगेगा, जो आंशिक रहेगा। सूर्य ग्रहण का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व धार्मिक दृष्टि से सूर्य ग्रहण के समय सूर्यदेव की पूजा व मंत्र जप करना अत्यंत शुभ माना गया है। पद्म पुराण में कहा गया है कि ग्रहण काल में किया गया जप, ध्यान और दान सौ गुना अधिक फलदायी होता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक खगोलीय संयोग है। इस दौरान सूर्य की किरणों का कुछ भाग पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाता, जिससे कुछ स्थानों पर अस्थायी अंधकार फैल जाता है। हिंदू शास्त्रों और वैज्ञानिक सलाह के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल में विशेष सावधानी रखनी चाहिए- ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें। नुकीली वस्तुओं जैसे सुई, चाकू, कैंची का प्रयोग न करें। घर की खिड़कियां और दरवाज़े बंद रखें ताकि हानिकारक किरणें भीतर न आएं। भगवान विष्णु या सूर्यदेव के मंत्रों का जप करें, जैसे “ॐ नमो भगवते सूर्याय आदित्याय नमः।” यह मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा देता है।

दूसरे चरण में 12 मंत्रियों की परीक्षा, बिहार चुनाव में सत्ता की चुनौती

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान होना है और यह चरण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए असली अग्निपरीक्षा साबित होने जा रहा है. इस चरण में 12 मंत्रियों की साख दांव पर है. खास बात यह है कि इनमें कई दिग्गज लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं तो कुछ नए चेहरे हैं जिन्होंने कम समय में सत्ता तक सफर तय किया. जिन मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है इनमें ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव सुपौल से, उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा झंझारपुर से, परिवहन मंत्री शीला मंडल फुलपरास से, पीएचईडी मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू छातापुर से, गन्ना उद्योग मंत्री कृष्णानंदन पासवान हरसिद्धि से, आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मंडल सिकटी से, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह धमदाहा से, भवन निर्माण मंत्री जयंत राज अमरपुर से, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार गया टाउन से, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुमित कुमार सिंह चकाई से, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान चैनपुर से और पशुपालन मंत्री रेणु देवी बेतिया से शामिल हैं. विजेंद्र प्रसाद यादव: नीतीश सरकार के वरिष्ठतम मंत्री ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव इस बार लगातार नौवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं. वे नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ मंत्रियों में से एक हैं. उन्होंने कहा – 24 घंटे बिजली, हर घर नल-जल, सड़क और पुलिया का जाल हमने बिछाया है. जनता मालिक है और जनता विकास पर भरोसा करेगी. डॉ. प्रेम कुमार: 8 बार के MLA, एंटी-इंकम्बेंसी की चुनौती सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार गया टाउन से लगातार आठ बार जीत चुके हैं. पर्यटन, सड़क और शिक्षा पर उनके काम को सराहा गया, लेकिन इस बार एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर चुनौती बन सकता है. वे कहते हैं-जनता काम को पहचानती है, विकास की राजनीति पर ही भरोसा करेगी. रेणु देवी: पूर्व डिप्टी CM अब पशुपालन मंत्री, साख की लड़ाई पूर्व उपमुख्यमंत्री और मौजूदा पशुपालन मंत्री रेणु देवी बीजेपी की महिला शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं. दुर्गा वाहिनी से राजनीति की शुरुआत कर उपमुख्यमंत्री तक पहुंची रेणु देवी अब अपने गढ़ में साख की परीक्षा में हैं. वे कहती हैं- मैंने सेवा की राजनीति की है, पद की नहीं. जनता ने हमेशा स्नेह दिया है और इस बार भी वही आशीर्वाद मिलेगा. नीतीश मिश्रा: विरासत और विकास मॉडल की परीक्षा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र नीतीश मिश्रा, उद्योग मंत्री के रूप में सरकार के योजनागत विकास की तस्वीर पेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा-पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए हमने उद्यम और निवेश बढ़ाने पर ध्यान दिया है. जनता भरोसा रखेगी. शीला मंडल: स्त्री शक्ति का फेस, कर्पूरी ठाकुर की सीट परिवहन मंत्री शीला मंडल फुलपरास से दोबारा चुनाव लड़ रही हैं. 2020 में उन्होंने कांग्रेस के कृपानाथ पाठक को 10,966 वोटों से हराया था. दिलचस्प है कि 1977 में कर्पूरी ठाकुर इसी सीट से मुख्यमंत्री बने थे. शीला मंडल कहती हैं-फुलपरास का नाम अब महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ गया है. हमने जो काम किया है उस पर जनता भरोसा करेगी. नीरज सिंह बबलू: दबंग छवि और बाढ़ प्रबंधन पर परीक्षा पीएचईडी मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू लगातार जीतते रहे हैं. अपने क्षेत्र में वे विकास और सख्त प्रशासन के लिए जाने जाते हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद उन्होंने राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाई है. बबलू का कहना है-हमने नल-जल, सड़क और बिजली की दिशा में ठोस काम किया है. कृष्णानंदन पासवान: गन्ना किसानों की उम्मीदों की कसौटी गन्ना उद्योग मंत्री कृष्णानंदन पासवान हरसिद्धि (SC) सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. यह इलाका गन्ना किसानों का केंद्र माना जाता है. पासवान का कहना है- गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान और मिलों को पुनर्जीवित करने पर हमने काम किया है. जनता सब जानती है. विजय कुमार मंडल: आपदा प्रबंधन मंत्री की साख दांव पर भागलपुर जिले की सिटी सीट से आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मंडल मैदान में हैं. बाढ़ और राहत कार्यों में इनकी भूमिका अहम रही है. मंडल कहते हैं-आपदा के समय हमने राहत और पुनर्वास का मजबूत तंत्र बनाया. जनता हमारी प्रतिबद्धता देख रही है. लेसी सिंह: नीतीश की ‘शक्ति स्तंभ’, छठी जीत की कोशिश खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे भरोसेमंद महिला सहयोगियों में से हैं. धमदाहा से वे लगातार पांच बार जीत चुकी हैं और इस बार छठी बार मैदान में हैं. उनका कहना है-महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर हमने काम किया है, वही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है. जयंत राज: युवा कुशवाहा चेहरा और विकास की राजनीति भवन निर्माण मंत्री जयंत राज अमरपुर से चुनाव लड़ रहे हैं. वे कुशवाहा समाज में मजबूत पकड़ रखते हैं और खुद को “काम करने वाला नेता” बताते हैं. उनका कहना है-प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों के विकास कार्यों से जनता प्रभावित है. इस बार भी विश्वास मिलेगा. सुमित कुमार सिंह: निर्दलीय से बने मंत्री, अब JDU से टिकट विज्ञान, प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा मंत्री सुमित कुमार सिंह पिछली बार निर्दलीय जीते थे, लेकिन अब जदयू से चुनाव मैदान में हैं. दिग्गज समाजवादी नेता नरेंद्र सिंह के बेटे हैं. इस बार उनके खिलाफ जदयू के ही 2020 के प्रत्याशी संजय प्रसाद निर्दलीय मैदान में हैं. सुमित का कहना है-हमारे परिवार की राजनीति सेवा पर आधारित रही है, जनता उस पर भरोसा करेगी. जमा खान: एकमात्र मुस्लिम मंत्री, विकास के भरोसे मैदान में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान पिछली बार बसपा से जीते थे, अब जदयू से मैदान में हैं. उनका कहना है- हम भाईचारे और विकास की राजनीति करते हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काम पर वोट मांग रहे हैं. बिहार चुनाव में पूर्व मंत्रियों की फौज भी मैदान में इस चरण में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी (सिकंदरा), पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद (कटिहार) समेत एक दर्जन से अधिक पूर्व मंत्री मैदान में हैं. भाजपा से सुनील कुमार पिंटू, कृष्ण कुमार ऋषि, विनोद नारायण झा, राम नारायण मंडल, जदयू से दामोदर रावत, आरजेडी से जयप्रकाश नारायण यादव, बीमा भारती, समीर महासेठ, कुमार सर्वजीत, शाहनवाज आलम, बृज किशोर बिंद, हम से अनिल कुमार और लोजपा (रामविलास) से मुरारी प्रसाद गौतम की साख भी दांव पर है. 14 नवंबर को फैसले का दिन, तय होगी बिहार … Read more

New Aadhaar App: बेहतर सिक्योरिटी और आसान एक्सेस के साथ आपके फोन में

 नई दिल्ली  न्यू आधार ऐप लॉन्च हो गया है. इस ऐप की मदद से कई नए फीचर्स मिलेंगे और सिक्योरिटी भी बेहतर होगी. इसकी जानकारी खुद Aadhaar (@UIDAI) अकाउंट ने X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करके दी है. इस ऐप का लंबे समय से इंतजार हो रहा था. न्यू आधार ऐप आने के बाद हर जगह आधार कार्ड की फोटो कॉपी लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी.  पोस्ट के मुताबिक, New Aadhaar App में नए फीचर्स मिलेंगे. इसमें सिक्योरिटी इनहेंस्ड, ईजी एक्सेसस और पूरी तरह से पेपर लेस एक्सपीरियंस होगा. साथ ही पोस्ट में Android और iOS यूजर्स को न्यू आधार ऐप डाउनलोड करने का लिंक भी प्रोवाइड किया गया है.  प्ले स्टोर पर आया न्यू आधार ऐप   प्ले स्टोर पर न्यू आधार ऐप के फीचर्स की जानकारी दी है और फोटो को लिस्टेड किया है. फोटो में दिखाया गया है कि मोबाइल ऐप पर ही आधार कार्ड को दिखाया जा सकेगा. इसमें डेट ऑफ बर्थ और आधार नंबर की सिक्योरिटी को बेहतर किया है. डेट ऑफ बर्थ का सिर्फ ईयर और आधार नंबर के के लास्ट चार डिजिट नजर आएंगे. बायोमैट्रिक को लॉक कर सकेंगे न्यू आधार ऐप की मदद से मोबाइल से ही आधार नंबर होल्डर्स बायोमैट्रिक को लॉक कर सकेंगे. इसके लिए सिंपल का प्रोसेस फॉलो करना होगा. मोबाइल ऐप पर आधार कार्ड डाउनलोड करने के भी दो ऑप्शन मिलेंगे, जिसमें एक फुल आईडी डिटेल्स और दूसरा माक्स्ड आईडी डिटेल्स है.  आधार डिटेल्स शेयर करना हुआ आसान और सिक्योर न्यू आधार ऐप की मदद से आधार डिटेल्स शेयर करना आसान बना दिया. ऐप में शेयर का ऑप्शन है, जिसपर क्लिक करनेके बाद आपको कुछ ऑप्शन मिलेंगे. इसमें वह कंप्लीट शेयर, सिलेक्टिव शेयर और डाउनलोड आधार के ऑप्शन पूछता है. इसके बाद जब आप सिलेक्टिव शेयर के ऑप्शन पर क्लिक करते हैं तो कुछ नए ऑप्शन मोबाइल स्क्रीन पर सामने आ जाते हैं. बताना होगा कि आधार की कौन सी डिटेल्स को शेयर किया है, उसके सामने बने बॉक्स पर चेक करना होगा. इसके बाद कंटीन्यू करना होगा. फिर कंफर्मेशन करने के बाद उस फाइल को मैसेजिंग ऐप या ईमेल की मदद से शेयर किया जा सकता है.  फैमिली के लिए भी यूजफुल  न्यू आधार ऐप के अंदर फैमिली मेंबर्स के आधार कार्ड नंबर को भी एक ही डिवाइस में रखा जा सकता है, जिसकी जानकारी ऐप ऐप स्टोर पर दी है. इसके लिए आधार नंबर होल्डर्स को फिजिकल कॉपीज लेकर घूमने की जरूरत नहीं होगी. सेफ्टी के लिए फेस ऑथेंटिकेशन का यूज किया जाएगा.   आधार कार्ड क्या होता है?  आधार कार्ड भारत सरकार की तरफ से जारी किए जाने वाला यूनिक आईडी नंबर है.  इस नंबर को  भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) तैयार करता है. आधार कार्ड में 12 अंकों का एक यूनिक नंबर होता है और यही नंबर हर एक भारतीय की अलग-अलग पहचान की जानकारी देता है.   

ड्राइवर के बेटे की मेहनत रंग लाई, महिला IAS की मदद से बना डिप्टी कलेक्टर

खंडवा   यह कहानी है मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के रहने वाले ऋतिक सोलंकी (Hrithik Solanki) की. उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से मिसाल कायम की है. ऋतिक सोलंकी के पिता रूपसिंह सोलंकी आईएएस अफसर सृष्टि जयंत देशमुख के ड्राइवर हैं. आपने बड़े अधिकारियों के बच्चों को सफलता का शिखर छूते हुए तो अक्सर देखा होगा, लेकिन ऋतिक की सफलता ने साबित कर दिया कि लगन और दृढ़ संकल्प से गरीबी की रेखा को पार किया जा सकता है. ऋतिक सोलंकी की उपलब्धि सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए बड़ी प्रेरणा है, जिनके पास सीमित संसाधन हैं. ऋतिक सोलंकी ने हाल ही में घोषित मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) परीक्षा के नतीजों में सफलता हासिल की है. यह सफलता उन्हें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि उनके पिता की ईमानदार मेहनत और मां के सहयोग से मिली है. अपने पिता को आईएएस सृष्टि देशमुख के यहां काम करते देखकर ऋतिक ने भी सिविल सेवा में जाने का सपना देखा और उसे पूरा किया.  आईएएस सृष्टि देशमुख के ड्राइवर हैं ऋतिक के पिता ऋतिक सोलंकी के पिता रूपसिंह सोलंकी वर्तमान में आईएएस सृष्टि देशमुख के ड्राइवर के पद पर तैनात हैं. आईएएस सृष्टि देशमुख देश की सबसे चर्चित महिला अफसरों की लिस्ट में शामिल है. इंस्टाग्राम पर उनके लाखों फॉलोअर्स हैं. सृष्टि देशमुख ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2018 में ऑल इंडिया रैंक 5 हासिल की थी. उन्होंने महिला वर्ग में टॉप किया था. आईएएस सृष्टि देशमुख वर्तमान में नरसिंहपुर जिले (मध्य प्रदेश) में अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (ADM) के पद पर कार्यरत हैं. चर्चा में हैं मध्य प्रदेश के ऋतिक सोलंकी ऋतिक सोलंकी ने MPPSC 2023 की परीक्षा में सफलता हासिल की है. इस परीक्षा के माध्यम से उनका चयन सरकारी अधिकारी के पद पर हुआ है, जिससे उनका सिविल सेवा का सपना पूरा हो गया है. ऋतिक ने सिर्फ मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग 2023 की परीक्षा में ही सफलता हासिल नहीं की है. वह इससे पहले 2022 में हुई एमपीपीएससी परीक्षा में भी सफल हो चुके हैं. तब उन्हें एटीओ यानी ट्रेजरी ऑफिसर के पद पर नियुक्ति मिली थी. फिलहाल वे अलीराजपुर में पोस्टेड हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं ऋतिक सोलंकी ऋतिक सोलंकी के पिता रूपसिंह ने बताया कि उन्होंने बेटे को अफसर बनाने के लिए कई त्याग किए. उन्होंने अपनी और पत्नी की जरूरतों को पीछे रखकर घरखर्च में कटौती की. कई सुविधाओं से भी समझौता किया. बेटे को दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाने और यूपीएससी की कोचिंग जॉइन करवाने के लिए उन्होंने अपनी जीपीएस मशीन बेच दी थी. ऋतिक सोलंकी अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देते हैं. उनके बड़े भाई राहुल भी मप्र वन सेवा परीक्षा में पास होकर महाराष्ट्र की चंद्रपुर फॉरेस्ट अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं.  

LIC का 10,000 करोड़ मुनाफा, प्रीमियम की कमाई और निवेश का पूरा हाल

 नई दिल्ली देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC यानी भारतीय जीवन बीमा निगम (Life Insurance Corporation of India) ने दूसरी तिमाही के नतीजे पेश कर दिए हैं. सालाना आधार पर कंपनी के कंसॉलिडेटेड शुद्ध लाभ में करीब 30.7 फीसदी का उछाल देखने को मिला है. पिछले साल समान अवधि में कंपनी का प्रॉफिट करीब 7,728 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 10,098 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.  साथ ही, कंपनी की नेट प्रीमियम आय भी बढ़ी है, Q2 में यह 1,26,930 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 1,20,326 करोड़ रुपये थी, यानी आय में करीब 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. हालांकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में LIC का लाभ करीब 8 फीसदी कम रहा. अब आइए जानते हैं कि LIC का बिजनेस कैसे चलता है और उसे कमाई कैसे होती है.  LIC की स्थापना 1956 में हुई थी, जब सरकार ने 245 से ज्यादा प्राइवेट बीमा कंपनियों का विलय करके एक सरकारी बीमा संस्था बनाई. LIC का मुख्य काम लोगों से बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) लेकर बदले में इंश्योरेंस और निवेश पर रिटर्न देना है. LIC का बिजनेस तीन हिस्सों में बंटा है…  1. लाइफ इंश्योरेंस (Life Insurance): यह LIC का मुख्य बिजनेस है. लोग LIC से बीमा पॉलिसी खरीदते हैं. जैसे जीवन बीमा, एंडोमेंट प्लान, टर्म प्लान, पेंशन प्लान और चाइल्ड पॉलिसी. हर महीने या सालाना प्रीमियम देने पर LIC पॉलिसी मैच्योर होने पर या मृत्यु की स्थिति में बीमा राशि (Sum Assured) देती है. इसी प्रीमियम से LIC की सबसे बड़ी आय होती है.  2. निवेश (Investment Income): LIC अपने पास जमा करोड़ों ग्राहकों का पैसा सरकारी बॉन्ड, शेयर बाजार, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट और कंपनियों में निवेश करती है. इन निवेशों पर मिलने वाला ब्याज, डिविडेंड और पूंजीगत लाभ (Capital Gains) LIC की दूसरी बड़ी कमाई है.  LIC का निवेश पोर्टफोलियो 45 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है, ये रकम LIC ने देश की बड़ी कंपनियां जैसे Reliance, ITC, HDFC Bank, Infosys, TCS और SBI में निवेश किया है.  3. Loan और Service Income: LIC अपने पॉलिसीधारकों को पॉलिसी क अगेन्स लोन (Policy Loan) भी देती है. उस पर मिलने वाला ब्याज भी LIC की अतिरिक्त कमाई होती है. इसके अलावा LIC कुछ सेवाओं और फीस (जैसे एजेंट कमीशन या प्रोसेसिंग चार्ज) से भी आमदनी करती है.  LIC का प्रॉफिट कैसे बनता है? LIC हर साल अपनी आय में से खर्च (कर्मचारियों की सैलरी, क्लेम पेमेंट, एजेंट कमीशन) घटाकर जो बचता है, वही उसका मुनाफा (Profit) होता है. यह मुनाफा सरकार (जो LIC की सबसे बड़ी शेयरधारक है) और पॉलिसीधारकों में बांटा जाता है.  इस बीच अक्सर लोगों के मन में ये भ्रम होता है कि LIC शेयर बाजार में निवेश करता है, तो क्या वह हमारे बीमा के पैसे लगाता है या म्यूचुअल फंड के? आइए समझते हैं.  LIC के पास दो बड़े फंड्स होते हैं… पॉलिसीधारकों का फंड- यह वो पैसा होता है, जो ग्राहक अपनी बीमा पॉलिसी के प्रीमियम के रूप में जमा करते हैं. LIC इस पैसे को सरकार द्वारा तय नियमों के तहत निवेश करता है. भारतीय बीमा नियामक (IRDAI) के अनुसार LIC को अपने निवेश का एक तय हिस्सा अलग-अलग जगहों पर लगाना होता है. नियम के मुताबिक सरकारी बॉन्ड में 50 फीसदी से अधिक, कॉरपोरेट बॉन्ड में 15–20 फीसदी, शेयर बाजार में करीब 20–25 फीसदी, इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल प्रोजेक्ट पर 5–10% निवेश किया जाता है. यानी LIC अपने निवेश का 20-25% हिस्सा ही शेयर बाजार में लगाता है, बाकी पैसों को सुरक्षित जगहों पर लगाया जाता है. LIC की एक अलग सहायक कंपनी  LIC Mutual Fund है, यह कंपनी म्यूचुअल फंड स्कीम चलाती है. (जैसे LIC MF Large Cap Fund, LIC MF Flexi Cap Fund वगैरह). लेकिन इसका पैसा निवेशकों (Mutual Fund investors) से आता है, न कि बीमा पॉलिसीधारकों से.  सवाल- क्या LIC बीमा का पैसा शेयर बाजार में लगाता है?     जवाब- हां, लगभग 20–25% पैसा शेयरों में निवेश किया जाता है. सवाल- क्या म्यूचुअल फंड का पैसा LIC के पास जाता है? जवाब- नहीं, LIC Mutual Fund अलग संस्था है.    सवाल- क्या सरकार इस निवेश को रेगुलेट करती है?     जवाब- हां, IRDAI और वित्त मंत्रालय इसकी निगरानी करते हैं. 

यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी, इंदौर स्टेशन पर QR कोड से ऑटो ड्राइवर की जानकारी उपलब्ध

इंदौर  रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) नई पहल शुरू करने जा रही है, जिसका नाम है 'हमारी सवारी, भरोसे वाली'। पुलिस ने ऐसे ऑटो रिक्शा ड्राइवरों का डिजिटल डेटा बनाया है जो रेलवे स्टेशन से चलते हैं। ऑटो पर क्यूआर कोड भी लगाया जा रहा है, जिसे स्कैन करते ही उसकी संपूर्ण पहचान मोबाइल पर आ जाएगी। पुलिस अधीक्षक (रेल) पद्मविलोचन शुक्ल के अनुसार सवारियों की सुरक्षा और सुविधा में ऑटो ड्राइवरों का अहम रोल है। बाहर से आने वाले यात्री कई बार ड्राइवरों की शिकायत करते हैं पर उनके संबंध में जानकारी नहीं रहती। यह सब देखते हुए पुलिस ने रेलवे स्टेशन परिसर से संचालित होने वाले ऑटो ड्राइवरों का डिजिटल डेटा तैयार करवाया है। पुलिस ने ड्राइवरों का सत्यापन एवं पंजीकरण कर उनके नाम, मोबाइल नंबर, वाहन संख्या, फोटो और परिवार व रिश्तेदारों की जानकारी आदि का डेटाबेस तैयार कर लिया है। पुलिस रिकॉर्ड में पंजीकृत ऑटो रिक्शा पर क्यूआर कोड स्टीकर लगाया जाएगा, जिसे स्कैन करते ही ड्राइवर की पहचान मोबाइल पर मिल जाएगी। एसपी के अनुसार यात्री यह जान सकेगा कि उसका ड्राइवर कौन है और वह किस ऑटो रिक्शा में सफर कर रहा है। उसका सामान छूटने, विवाद होने, तय स्थान पर न छोड़ने पर पुलिस से मदद भी ले सकते हैं। एसपी ने बताया इस अभियान की शुरुआत 14 नवंबर से होगी। इससे चालकों को भी बेवजह के आरोपों से राहत मिलेगी। 'पटरी की पाठशाला' में पढ़ेंगे भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चे जीआरपी पुलिस ने 'पटरी की पाठशाला' की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य रेल सुरक्षा, महिला सुरक्षा, साइबर जागरूकता, नैतिक शिक्षा एवं नशामुक्त जीवन के संदेश को आमजन तक पहुंचाना है। इससे स्थानीय बच्चों में नैतिक शिक्षा, अनुशासन और जिम्मेदारी का भाव विकसित होगा। 'पटरी की पाठशाला' अभियान में बच्चों के लिए रेल सुरक्षा कक्षाएं, कहानी, पोस्टर व खेल के माध्यम से शिक्षा देना, गुड टच-बैड टच की जानकारी देना शामिल किया है। रेलवे स्टेशन और उसके आसपास भिक्षावृत्ति, व्यावसायिक गतिविधियों में लगे व लावारिस घूमने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि वे देश के भविष्य निर्माण में सहभागी बन सकें। महिला एवं साइबर सुरक्षा सत्र में हेल्पलाइन नंबरों (139, 112, 1930) की जानकारी के साथ आत्मरक्षा एवं आत्मविश्वास पर भी चर्चा होगी।

विश्व प्रसिद्ध सांची में जुटेंगे विदेशी बौद्ध अनुयायी, दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव आज से

रायसेन   अपने अनोखे बौद्ध स्तूपों के लिए विश्व प्रसिद्ध सांची में 29 और 30 नवंबर को दो दिवसीय महाबोधि महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है. इसकी तैयारियां जोरों पर हैं, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मेहमान और कलाकार शिरकत करेंगे. साल में एक बार होने वाले इस धार्मिक उत्सव में श्रीलंका, जापान, थाईलैंड और वियतनाम सहित कई देशों के बौद्ध अनुयायी शामिल होने के लिए आमंत्रित किए गए हैं. इस वर्ष, श्रीलंका के हाई कमिश्नर के साथ ही वहां की विशेष नृत्य मंडली भी सांची में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करेगी. विदेश भक्त अपने साथ पूजा के लिए विशेष सामग्रियां लेकर यहां पहुंचेंगे, जिससे महोत्सव की दिव्यता और बढ़ेगी. भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के अस्थि कलश के दर्शन इस महोत्सव की मुख्य वजह सांची स्तूप के पास स्थित चैत्यगिरि में सुरक्षित रखे भगवान बुद्ध के परम शिष्य सारिपुत्र और महामोदग्लायन के पवित्र अस्थि कलश हैं. बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है, क्योंकि वर्ष में एक बार, दो दिन के लिए, सूर्योदय से सूर्यास्त तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ इन कलशों को रखा जाता है. महोत्सव के आखिरी दिन (रविवार) को इन अस्थि कलशों को मुख्य स्तूप की परिक्रमा के लिए शोभा यात्रा के साथ निकाला जाता है. इन देशों के अनुयायियों को किया गया आमंत्रित महाबोधि सोसाइटी के स्वामी विमल तिस्से थेरो ने बताया, '' जापान, श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम सहित कई देशों के मेहमानों को आमंत्रित किया जा चुका है. इस तरह से जब विश्व के कोने-कोने से बौद्ध अनुयाई यहां पर उपस्थित होंगे तो इस कार्यक्रम की भव्यता और बढ़ेगी सब लोग मिलकर इस महोत्सव को मनाएंगे.'' सांची स्तूप का गौरवशाली इतिहास सांची की इस ऐतिहासिक धरोहर का निर्माण सम्राट अशोक महान ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में करवाया था. यह भारत के सबसे प्राचीन बौद्ध स्मारकों में से एक है. बाद में शुंग और सातवाहन शासकों ने इसका विस्तार किया और पहली शताब्दी ईसा पूर्व में यहां के चार भव्य तोरण द्वार (प्रवेश द्वार) बनाए गए, जिन पर बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं से जुड़ी विस्तृत नक्काशी है. सांची का यह महान स्तूप प्रेम, शांति, विश्वास और साहस का प्रतीक है और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल है. सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम बौद्ध धर्म के इस विशेष महत्व वाले आयोजन के लिए प्रशासन भी कमर कस रहा है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपुसे ने जानकारी देते हुए बताया की पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष पुलिस इंतजाम किए गए हैं, जिसमें महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी शामिल है और आसामाजिक तत्वों पर विशेष नजर रखना शामिल है।जिससे की पर्यटको को आसुविधा न हो

रायपुर में 3 दिन के लिए मिनी PMO तैयार, 500 अफसरों के साथ PM मोदी और गृहमंत्री करेंगे महत्वपूर्ण बैठक

रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 28 से 30 नवंबर तक डीजी कांफ्रेंस का आयोजन होगा, जिसमें  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, देशभर के डीजीपी और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल होंगे. कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद, नक्सल, साइबर क्राइम और पुलिस सुधार पर मंथन होगा, जिसकी तैयारियों के लिए प्रशासनिक अमला जुट गया है. बंगला M-01 तीन दिनों के लिए मिनी PMO रायपुर में डीजी कॉन्फ्रेंस के दौरान नवा रायपुर का बंगला M-01 तीन दिनों के लिए मिनी PMO में तब्दील होगा. यह बंगला विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का बंगला है. बैठक में पीएम मोदी, अमित शाह और अजित डोभाल के अलावा 70 डीजी, पैरामिलिट्री चीफ समेत 500 अफसर जुटेंगे. इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और NSG की तैनाती की जा रही है. इसके अलावा 400 गाड़ियां तैयार की गई है. बैठक में किस रणनीति पर होगी चर्चा? डीजी कॉन्फ्रेंस (DG Conference) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मुख्य रूप से नक्सलवाद, आतंकवाद, साइबर क्राइम और पुलिस सुधार पर चर्चा करेंगे. नक्सलियों के खात्मे के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय है, जिसमें अब सिर्फ पांच महीने का समय बचा है. ऐसे में यह बैठक नक्सलवाद के खात्मे को लेकर बेहद अहम मानी जा रही है. डीजी कॉन्फ्रेंस के दौरान देशभर के पुलिस महानिदेशकों और केंद्रीय बलों के प्रमुख अधिकारियों की मौजूदगी में नक्सलवाद खत्म करने पर चर्चा होगी और इसको लेकर रणनीति तय की जाएगी. इसके अलावा आधुनिक पुलिसिंग के तरीकों, तकनीक का उपयोग करके निगरानी (जैसे तकनीकी निगरानी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों और राज्यों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने (इंटेलिजेंस शेयरिंग) जैसे महत्वपूर्ण आंतरिक सुरक्षा के विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी और योजनाएं बनाई जाएंगी. आईआईएम भवन में होग कॉन्फ्रेस! डीजी कॉन्फ्रेंस सम्मेलन का आयोजन नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) भवन में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के रात्रि विश्राम के लिए बंगला M-01 के चुनाव के पीछे खास वजह हो सकती है. इस बंगले से आईआईएम और नया विधानसभा भवन बेहद नजदीक हैं, जिससे आवागमन में सहूलियत होगी. 

महाकाल लोक जाने का रास्ता होगा आसान, 710 मीटर नया कॉरिडोर तैयार, जून 2027 तक प्रोजेक्ट पूरा

उज्जैन   मध्यप्रदेश सरकार उज्जैन को नया रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब क्षिप्रा नदी के घाटों (Kshipra Ghat) पर होने वाली आरती को बनारस और हरिद्वार की गंगा आरती (Shipra is a tributary of Ganga) की तरह भव्य और आधुनिक रूप में आयोजित किया जाएगा। सरकार चाहती है कि आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ (2028) तक उज्जैन में ऐसी आरती शुरू हो जाए, जिसे देखने वाले श्रद्धालु भावविभोर हो उठें। इस दिशा में राज्य सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इसका उद्देश्य ऐसी पेशेवर एजेंसियों का चयन करना है, जो टेक्निक, म्यूजिक, लाइट और परम्परा को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट को अंजाम दे सकें। तकनीक से बनेगी आरती आकर्षक उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल का मकसद क्षिप्रा आरती (Kshipra River) को इतना भव्य और यादगार बनाना है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां का अनुभव जीवनभर याद रखें। महाकाल लोक जाने के लिए 710 मीटर लंबा और 22.18 मीटर चौड़ा नया रास्ता बन रहा है। 63 करोड़ की लागत से बनने वाला यह सुगम रास्ता जून 2027 तक तैयार हो जाएगा। रेलवे से भी सहमति मिल गई है। इससे अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को महाकाल लोक तक पहुंचना आसान होगा। अभी उन्हें पार्किंग से पुल पर चढ़ने के बाद 2100 मीटर लंबी दूरी तय कर महाकाल लोक पहुंचना पड़ रहा है। भीड़ नियंत्रण में रहेगी: इंदौर, देवास से आने वाले यात्री हरिफाटक के पास वाहन पार्क कर सीधे महाकाल लोक पहुंच सकेंगे। महाशिवरात्रि, नागपंचमी, नववर्ष पर भीड़ नियंत्रण में की जा सकेगी। 2. यातायात का दबाव कम होगा: पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग बनने से हरिफाटक ब्रिज, महाकाल घाटी, नीलगंगा, इंदौर रोड, जयसिंहपुरा में यातायात का दबाव कम होगा। उन्होंने कहा, हमने ऐसी एजेंसियों से प्रस्ताव मांगे हैं, जो तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आरती को और आकर्षक बना सकें। इसका मकसद यह है कि जब श्रद्धालु घाट पर आएं तो उन्हें सिर्फ आरती नहीं, बल्कि भावनात्मक अनुभव हो।  गंगा आरती क्यों है प्रेरणा का स्रोत हरिद्वार और बनारस की महागंगा आरती में हर शाम सैकड़ों पुजारी, घंटों और दीपों के साथ गंगा आरती करते हैं। वाराणसी की दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती अपने आप में खास होती है। यहां दर्जनों पुजारी एक साथ समान वेशभूषा में दीप थाल लेकर मंत्रोच्चार करते हैं। हर पुजारी एक लय में जब आरती करते हैं तो भव्य नजारा होता है। शंखनाद, घंटों की गूंज और वेद मंत्रों की ध्वनि श्रद्धालुओं के मन में गहराई तक उतर जाती है।अब मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव सरकार चाहती है कि उज्जैन की क्षिप्रा आरती (shipra river in ujjain) भी इसी तरह का भव्य अनुभव दे।  तकनीक से सजेगी क्षिप्रा आरती एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट में कहा गया है कि आरती में परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम होना चाहिए। सरकार ने एजेंसियों से ऐसे सुझाव मांगे हैं।जिनमें AI आधारित प्रोजेक्शन मैपिंग, सिंक्न्रोनाइज्ड लाइटिंग, साउंड और विजुअल स्टोरीटेलिंग, होलोग्राम और AR/VR अनुभव और आध्यात्मिक संगीत संयोजन जैसी तकनीकें शामिल होंगी। इन तकनीकों की मदद से घाटों पर आरती का अनुभव केवल धार्मिक न रहकर दिव्य दृश्यात्मक आयोजन बन जाएगा। श्रद्धालु दीपों की रोशनी के साथ मां क्षिप्रा की कथा, उज्जैन के इतिहास और महाकाल की महिमा को लाइट एण्ड साउंड श्खो की मदद से अनुभव कर सकेंगे।  कई घाटों पर एक साथ आरती की तैयारी फिलहाल क्षिप्रा नदी की आरती केवल रामघाट तक सीमित है और ज्यादातर निजी समूहों द्वारा कराई जाती है।अब सरकार की योजना है कि कई घाटों को जोड़ा जाए और एक साथ सामूहिक आरती का आयोजन हो। इसका प्रारूप बनारस के मल्टी-घाट मॉडल जैसा होगा। जहां एक ही समय पर अलग-अलग घाटों पर आरती होती है, लेकिन उनकी ध्वनि और लय एक होती है।

अमेरिका का नया हथियार: लॉन्च होते ही मिसाइल को कर देगा कबाड़, S-400 और आयरन डोम बेकार

नई दिल्ली  अमेरिकी रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) ने ऐलान किया है कि वह 2028 तक अंतरिक्ष में अपने ‘स्पेस-बेस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर’ का असली परीक्षण करेगा. यह वही हथियार है जो Golden Dome प्रोजेक्ट का सबसे खतरनाक और निर्णायक हिस्सा माना जा रहा है. एक ऐसा सिस्टम जो अंतरिक्ष से ही दुश्मन की मिसाइलों को लॉन्च के कुछ सेकंड में तबाह कर देगा. यह प्रोजेक्ट डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान शुरू हुआ था, जिसका लक्ष्य है अमेरिका को अभेद्य मिसाइल डिफेंस कवच देना – धरती से लेकर अंतरिक्ष तक. लॉकहीड मार्टिन के सीईओ जिम टैकलेट ने अपने एक बयान में कहा, “हम 2028 तक वास्तविक ऑन-ऑर्बिट इंटरसेप्टर टेस्ट करने जा रहे हैं – यह कोई लैब एक्सपेरिमेंट नहीं, बल्कि असली युद्ध-तैयार सिस्टम होगा.” उन्होंने बताया कि कंपनी अब पूरी तरह ऑपरेशनल प्रोटोटाइप्स बना रही है – ऐसी मशीनें जो “टेस्ट स्टैंड पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में उड़ेंगी, मिसाइल को हिट करेंगी और उत्पादन के लिए तैयार होंगी.” अगर लॉकहीड मार्टिन का यह प्रोजेक्टकामयाब हो गया, तो फिर एस-400 और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस की जरूरत ही नहीं रह जाएगी. ‘द वॉर ज़ोन’ में प्रकाशित खबर के मुताबिक, लॉकहीड मार्टिन ने अपने वर्जीनिया स्थित Center for Innovation में Golden Dome की कमांड एंड कंट्रोल (C2) प्रणाली का प्रोटोटाइप वातावरण तैयार किया है. यह ओपन आर्किटेक्चर सिस्टम समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक की रक्षा क्षमताओं को एकजुट कर रहा है. कंपनी ने बताया कि इस मिशन में कई इंडस्ट्री पार्टनर्स भी जुड़ चुके हैं ताकि अमेरिका को हर मोर्चे पर ‘सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी बढ़त’ मिले. हालांकि, पेंटागन पूरी परियोजना पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार Golden Dome ऐसा ऑल-डोमेन डिफेंस सिस्टम बनेगा जो आने वाले दशकों तक अमेरिका की अंतरिक्षीय सैन्य ताकत का केंद्र होगा. लॉकहीड मार्टिन का यह मिशन सिर्फ एक परीक्षण नहीं – बल्कि यह संकेत है कि स्पेस अब जंग का नया मैदान बन चुका है. 2028 में जब Golden Dome का इंटरसेप्टर अंतरिक्ष में सक्रिय होगा, तो पूरी दुनिया उसकी रेंज में होगी. अब तक जो जानकारी सार्वजनिक की गई है, उसके अनुसार पेंटागन और व्हाइट हाउस दोनों ने साफ़ कर दिया है कि Golden Dome प्रोजेक्ट का केंद्रबिंदु अंतरिक्ष में तैनात मिसाइल इंटरसेप्टर होंगे. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि दुश्मन की मिसाइल को अमेरिकी सीमाओं से बहुत दूर ही नष्ट किया जाए, ताकि किसी भी खतरे को देश के भूभाग के करीब आने से पहले ही खत्म किया जा सके. अमेरिकी रक्षा रणनीतिकारों के मुताबिक, बैलिस्टिक मिसाइलें और हाइपरसोनिक हथियार – जिनमें रॉकेट बूस्टर का इस्तेमाल होता है – सबसे ज्यादा कमजोर अपने शुरुआती ‘बूस्ट फेज़’ में होते हैं, यानी लॉन्च के ठीक बाद. अमेरिकी स्पेस फोर्स के प्रमुख जनरल चांस साल्ट्ज़मैन ने मार्च में Defense One को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, “हम सिर्फ स्पेस-बेस्ड इंटरसेप्टर नहीं चाहते – हम चाहते हैं कि वे मिसाइल को उसी ‘बूस्ट फेज़’ में मार गिराएं. हम चाहते हैं कि ये हमला हमारे देश से जितना दूर हो सके, वहीं असर दिखाए. इसलिए उन्हें बेहद तेज़ और सटीक होना होगा.” हालांकि, Golden Dome योजना केवल बूस्ट फेज़ में इंटरसेप्शन तक सीमित नहीं है. यह सिस्टम मिड-कोर्स फेज़ (जब मिसाइल पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर अंतरिक्ष में होती है) में भी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों को ट्रैक और ध्वस्त करने में सक्षम रहेगा. अमेरिका अब ऐसा स्पेस डिफेंस नेटवर्क बना रहा है जो दुश्मन की मिसाइल को उसके लॉन्च होते ही आसमान में खत्म कर दे – ताकि जंग की आग कभी अमेरिकी ज़मीन तक न पहुंच सके.