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यूपी के विभिन्न जिलों से आये 160 से अधिक उद्यमी स्वदेशी व ग्रामीण उत्पादों का कर रहे प्रदर्शन

खादी महोत्सव 2025 है स्वदेशी, नवाचार और सशक्तिकरण का उत्सव यूपी के विभिन्न जिलों से आये 160 से अधिक उद्यमी स्वदेशी व ग्रामीण उत्पादों का कर रहे प्रदर्शन खादी महोत्सव 2025 का विशेष आकर्षण हैं कौशल विकास कार्यशालाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम व आधुनिक उपकरणों का वितरण  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत दृष्टिकोण के तहत स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खादी महोत्सव 2025 का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश की राजधानी में आयोजित दस दिवसीय खादी उत्सव 2025 में आधुनिक संदर्भ में स्वदेशी आंदोलन को पुनर्जीवित करने, स्वदेशी शिल्पकला, स्थानीय उद्यमिता और पारंपरिक कलाओं को एक बड़े पैमाने पर सर्व समावेशी मंच के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विशिष्टता को प्रदर्शित कर रहे हैं खादी के उत्पाद   राज्य के विभिन्न जिलों से 160 से अधिक उद्यमी इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं, जो पारंपरिक उत्पादों की विविध श्रृंखला प्रस्तुत कर रहे हैं। हाथ से काती गई खादी के वस्त्रों से लेकर टेराकोटा कला, हर्बल उत्पादों, आभूषणों और पर्यावरण-अनुकूल वस्तुओं तक यह प्रदर्शनी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विशिष्टता और विविधता को प्रदर्शित करती है। खादी महोत्सव में जहां एक ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों के विशिष्ट शिल्प को जानने व खरीदने का अवसर मिल रहा है, तो वहीं दूसरी ओर ग्रामीण व कुटीर के उद्यमियों को अपने उत्पाद आमजन तक पहुंचाने का मंच भी मिल रहा है।   ग्रामीण उद्यमियों को किया जा रहा आधुनिक उपकरणों का वितरण इस वर्ष खादी महोत्सव 2025 का एक प्रमुख आकर्षण लाभार्थियों को आधुनिक उपकरणों का वितरण किया जाना है। जिसके तहत दोना बनाने वाली मशीनें, पॉपकॉर्न यूनिट और इलेक्ट्रिक कुम्हार चाक शामिल हैं। यह पहल ग्रामीण व कुटीर उत्पादों की उत्पादकता बढ़ाने, महिला-नेतृत्व वाले व्यवसायों का समर्थन करने और ग्रामीण युवाओं के लिए सार्थक आजीविका के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। ऐसे कदम प्रदेश के परंपरागत व ग्रामीण के उद्योगों में तकनीकी उन्ययन व नवाचार को को बढ़ावा दे रहे हैं। जिससे न केवल उत्पादों की लागत में कमी आएगी बल्कि उनकी गुणवत्ता में भी सुधार होगा।  कौशल विकास, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग और पैकेजिंग पर आधारित कार्यशालाओं का आयोजन बाजार स्थल और कौशल विकसित करने की जगह दोनों के रूप में डिजाइन किया गया यह खादी महोत्सव 2025 में कौशल विकास, ई-कॉमर्स, डिजिटल मार्केटिंग, पैकेजिंग और व्यवसाय प्रबंधन पर आधारित कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यशालाओं के माध्यम से खादी व ग्रामीण उत्पादों को स्थानीय बाजारों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक विस्तार करने एवं प्रदेश की अर्थव्यवस्था में स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। व्यवसाय और प्रशिक्षण गतिविधियों के साथ-साथ, सांस्कृतिक प्रदर्शन, लोक संगीत और पारंपरिक कला प्रदर्शनों ने आयोजन को जीवंतता प्रदान कर रहा है।  खादी महोत्सव 2025 स्वदेशी व ग्रामीण विकास के मंच के रूप में संचालित है, जहां परंपरा प्रौद्योगिकी से मिलती है, और ग्रामीण क्षमता आर्थिक शक्ति के रूप में परिवर्तित होने का अवसर मिलता है। खादी महोत्सव यह संदेश देता है कि स्वदेशी उद्योग न केवल भारत की परंपरागत व ऐतिहासिक पहचान हैं, बल्कि एक स्थायी, स्थानीय रूप से सशक्त और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले से जुड़ी तैयारियों को लेकर की समीक्षा बैठक, फिर पत्रकारों को दी जानकारी

दिव्यता व भव्यता के साथ संपन्न करेंगे माघ मेलाः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माघ मेले से जुड़ी तैयारियों को लेकर की समीक्षा बैठक, फिर पत्रकारों को दी जानकारी तीन जनवरी को पौष पूर्णिमा, 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंती पंचमी, पहली फरवरी को माघ पूर्णिमा व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि मेले को 800 हेक्टेयर में बसाने की हो रही कार्रवाईः मुख्यमंत्री माघ मेले के दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु करेंगे संगम पर स्नानः मुख्यमंत्री लगभग 20 से 25 लाख कल्पवासी एक माह तक मेले में प्रवास के साथ करते हैं मां गंगा की साधनाः मुख्यमंत्री बोले- गंगा-यमुना में सीवर के एक बूंद का भी नहीं होगा रिसाव   माघ मेले के दृष्टिगत सभी संबंधित विभागों को जोड़कर चल रही तैयारीः सीएम योगी 20-20 बेड के दो हॉस्पिटल बनाए जा रहे, 50 एंबुलेंस की भी रहेगी व्यवस्थाः मुख्यमंत्री 25 हजार शौचालय-3000 सफाईकर्मी रहेंगे तैनात, 17 थाने व 42 पुलिस चौकी होगी स्थापितः मुख्यमंत्री प्रयागराज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को माघ मेले की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक की, फिर पत्रकारों को इसकी जानकारी दी। सीएम ने कहा कि मेले की प्रगति युद्ध स्तर पर है। कल्पवासियों व श्रद्धालुओं के साथ पूरे आयोजन को भव्यता-दिव्यता के साथ संपन्न करेंगे। उन्होंने बताया कि माघ मेले की तिथि 15 दिन पहले आ रही है। तीन जनवरी को पौष पूर्णिमा, 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंत पंचमी, पहली फरवरी को माघ पूर्णिमा व 15 फरवरी को महाशिवरात्रि (छह प्रमुख स्नान) होंगे। तीन जनवरी से 1 फरवरी तक यहां कल्पवासियों की बड़ी संख्या रहेगी। लगभग 20 से 25 लाख कल्पवासी एक माह तक मेले में प्रवास कर मां गंगा की साधना व तपस्या करते हैं। इनके साथ ही मुख्य स्नान पर्वों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने आते हैं। अनुमान है कि लगभग डेढ़ महीने के दौरान प्रयागराज में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम पर स्नान करेंगे। हर दिन लगभग 20-25 लाख कल्पवासियों के साथ ही देश-प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र से भी लोग आएंगे। मेले को 800 हेक्टेयर में बसाने की कार्रवाई हो रही है। सात सेक्टर बनाए गए हैं। अलग-अलग रूट से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 42 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था रहेगी। 2024 की तुलना में बढ़ाया गया दायरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण का गठन किया था और मंडलायुक्त को इसका अध्यक्ष नामित किया था। मेला प्राधिकरण के नेतृत्व में महाकुम्भ के साथ-साथ अन्य आयोजन भी संपन्न होते हैं। माघ मेला 2026 की तैयारी प्रारंभ हो चुकी है। 2024 की तुलना में इसके दायरे को बढ़ाया गया है। यहां की टीम के सामने 2025 के महाकुम्भ का अनुभव है, जिसने देश-दुनिया में अमिट छाप छोड़ी थी और भारत की सनातन धर्म की परंपरा के प्रति लोगों के मन में नया उत्साह भरा था। माघ मेले के दृष्टिगत सभी संबंधित विभागों को जोड़कर चल रही तैयारी सीएम योगी ने बताया कि माघ मेले के दृष्टिगत यूपी सरकार के सभी संबंधित विभागों को जोड़ा गया है। सिंचाई विभाग बाढ़ निरोधक उपाय करने के साथ ही जल की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। यद्यपि आज संगम में 19-20 हजार क्यूसेक शुद्ध जल की उपलब्धता है, लेकिन उस समय भी 10 हजार क्यूसेक जल की उपलब्धता निरंतर बनी रहे, विभाग यह प्रयास कर रहा है। नमामि गंगे को जल की शुद्धता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पावर कॉरपोरेशन नियमित विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ इलेक्ट्रिक सेफ्टी की व्यवस्था करेगा। उप्र पावर कारपोरेशन द्वारा मेला क्षेत्र में 47 किमी. की एचटी व 360 किमी. की एलटी लाइन बिछाने और 25 अस्थायी सब स्टेशन बनाने का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। बोले-सीवर के एक बूंद का रिसाव भी गंगा-यमुना जी में नहीं होगा सीएम योगी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी कनेक्टिंग मार्ग के साथ ही अंदर के मार्गों की भी व्यवस्था देखेगा। आवागमन में दिक्कत न हो, इसके लिए विभाग सात पांटून ब्रिज, लगभग 160 किमी. के दायरे में चकर्ड प्लेट बिछाएगा। उप्र जल निगम द्वारा 242 किमी. की पेयजल पाइप लाइन बिछाने का कार्य प्रारंभ हो गया है। 85 किमी. की सीवर लाइन बिछाने की कार्रवाई होगी, जिससे सीवर के एक भी बूंद का रिसाव गंगा-यमुना जी में न होने पाए। 20-20 बेड के दो हॉस्पिटल बनाए जा रहे, 50 एंबुलेंस की भी रहेगी व्यवस्था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्रद्धालुओं के त्वरित उपचार के लिए 20-20 बेड के दो हॉस्पिटल बनाए जा रहे हैं। 12 पीएचसी प्राथमिक स्वास्थ्य हेल्प सेंटर के रूप में लोगों को सुविधा उपलब्ध कराएंगे। एक वेक्टर कंट्रोल यूनिट, पांच आयुर्वेदिक- पांच होमियोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना, 50 एंबुलेंस की भी व्यवस्था रहेगी। 25 हजार शौचालय, 3000 सफाईकर्मी रहेंगे तैनात सीएम योगी ने बताया कि नगर विकास द्वारा पर्याप्त शौचालय, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई है। मेले के दौरान 25 हजार शौचालय, 8 हजार डस्टबिन, 10 लाख से अधिक लाइनर बैग, 20 सक्शन गाड़ियां, 3000 सफाईकर्मी तैनात रहेंगे। 17 थाने व 42 पुलिस चौकी होगी स्थापित सीएम योगी ने कहा कि मेले को सकुशल संपन्न कराने के लिए यूपी पुलिस द्वारा पर्याप्त कार्मिक तैनात किए गए हैं। मेला पुलिस अधीक्षक के साथ ही पहले चरण में एडिशनल एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर समेत अन्य पुलिसकर्मियों की तैनाती हो चुकी है। शेष की तैनाती प्रक्रिया कार्रवाई चल रही है। पुलिस लाइन के निर्माण कार्य को बढ़ाया जा चुका है। मेला क्षेत्र में 17 थाने, 42 पुलिस चौकी, 20 फायर टेंडर, 7 अग्निशमन चौकी, अग्निशमन के 20 वाच टावर, एक जल पुलिस थाना, एक जल पुलिस कंट्रोल रूम और 4 जल पुलिस सब कंट्रोल रूम स्थापित किए जाने हैं। 8 किमी. का डीप वाटर बैरिकेडिंग भी यूपी पुलिस द्वारा लगाया जाएगा। मेले के दौरान 3800 बसें करेंगी काम सीएम योगी ने बताया कि नगर विकास द्वारा सीसीटीवी व एआई युक्त 400 कैमरों के माध्यम से क्राउड मॉनीटरिंग-क्राउड डेंसिटी एनालिसिस व इन्सिडेंट रिपोर्टिंग (स्वच्छता व सुरक्षा निगरानी) भी होगी। उन्होंने बताया कि यातायात व भीड़ नियंत्रण के लिए भी अंतरजनपदीय व अंतरराज्यीय कार्ययोजना विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। यहां करीब 3800 बसें काम करेंगी। इसमें परिवहन निगम की 3000 बसें भी रहेंगी। 75 शटल बस मेला … Read more

योगी सरकार की प्रभावी नीतियां खेती में डिजिटल तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने का बन रही हैं जरिया

एआई के माध्यम से कृषि क्षेत्र में बड़ी क्रांति की ओर उत्तर प्रदेश योगी सरकार की प्रभावी नीतियां खेती में डिजिटल तकनीकों को बढ़ावा देकर किसानों की आमदनी बढ़ाने का बन रही हैं जरिया एआई संचालित तकनीकों के अभिनव प्रयोगों से खेती में कुशलता, उत्पादन व लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि लखनऊ  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को तकनीकी दृष्टि से अत्याधुनिक बनाने की दिशा में लगातार सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश खेती के क्षेत्र में तकनीक आधारित अभिनव प्रयोगों के क्रियान्वयन एक अनुकरणीय मॉडल के तौर पर प्रस्तुत हो रहा है। राज्य में योगी सरकार ने पारंपरिक खेती को आधुनिक स्वरूप देने के उद्देश्य से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित समाधानों का विस्तार किया है, जिससे न केवल उत्पादन बढ़ा है, बल्कि किसानों की आय में भी बड़ा सुधार देखने को मिल रहा है। एआई के इस्तेमाल से मौसम, मिट्टी और फसल के अनुसार वैज्ञानिक परामर्श, कीट और रोग नियंत्रण, सिंचाई प्रबंधन तथा मार्केट एक्सेस के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई है। स्मार्ट खेती की दिशा में तेजी से बढ़ रहा यूपी प्रदेश में एआई-संचालित ड्रोन, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली तथा डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म्स के कुशल क्रियान्वयन से कृषि कार्यों की पूर्ति और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। डिजिटल कृषि मिशन के तहत लगभग 300 कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान खेती को स्मार्ट बनाने के अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। एआई आधारित कीट एवं रोग निगरानी व्यवस्था के जरिए फसलों को होने वाले नुकसान में भारी कमी आई है, जिससे किसानों को राहत मिली है। मक्का की उपज 29 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाने तथा धान की उपज 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक करने की दिशा में भी प्रगति हो रही है। इससे प्रदेश तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर उच्च उत्पादकता वाले राज्यों की श्रेणी में शामिल हो रहा है। किसानों के आर्थिक उत्थान में एआई की बड़ी भूमिका विश्व बैंक और गूगल साझेदारी के माध्यम से उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है जिसने एआई आधारित कृषि और शासन प्रणाली को बड़े पैमाने पर अपनाया है। यह प्रणाली किसानों को वास्तविक समय में मिट्टी, मौसम और फसल के अनुसार डिजिटल सलाह उपलब्ध करा रही है। ई-नाम जैसे प्लेटफॉर्मों ने किसानों को मार्केट एक्सेस आसान बनाया है, जबकि एआई ने ऋण, बीमा और सब्सिडी जैसी सेवाओं का लाभ भी तीव्र गति से उपलब्ध कराया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस कृषि से जुड़े हर किसान को तकनीक से जोड़ने और गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास अब बड़े पैमाने पर सफल होते दिखाई दे रहे हैं। इन प्रयासों के जरिए उत्तर प्रदेश की एआई आधारित कृषि क्रांति न केवल राज्य के भविष्य को बदल रही है, बल्कि देश के लिए भी एक नए आदर्श मॉडल के रूप में उभर रही है।

रिपोर्ट का बड़ा धमाका: चीन ने पाक को दिए हथियार, ऑपरेशन सिंदूर में राफेल को निशाना बनाने की कोशिश

नई दिल्ली  दो सदस्यों वाले अमेरिकी आयोग ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि चीन ने मई में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष का अवसरवादी तरीके से उपयोग किया। इस दौरान उसने अपनी रक्षा क्षमताओं का परीक्षण और प्रचार के मकसद से पाकिस्तान को हथियारों की मदद की। मंगलवार को प्रकाशित यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीजिंग ने चार दिवसीय संघर्ष का लाभ उठाया ताकि अपने हथियारों का परीक्षण और विज्ञापन कर सके।   रिपोर्ट में कहा गया है, "यह संघर्ष पहली बार था जब चीन की आधुनिक हथियार प्रणालियों का उपयोग किया था। उनमें HQ-9 वायु रक्षा प्रणाली, PL-15 हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और J-10 लड़ाकू विमान शामिल हैं। यह एक वास्तविक दुनिया के क्षेत्र प्रयोग के रूप में काम आया।" रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने कथित तौर पर संघर्ष के बाद जून में पाकिस्तान को 40 J-35 पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू जेट, KJ-500 विमान और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली बेचने की पेशकश की। संघर्ष के हफ्तों बाद, चीनी दूतावासों ने भी भारत-पाकिस्तान संघर्ष में अपने सिस्टम की सफलताओं की प्रशंसा की, जिसका उद्देश्य हथियार बिक्री को बढ़ावा देना था। राफेल को बदनाम करने का अभियान रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू जेट को बदनाम करने के लिए एक दुष्प्रचार अभियान भी चलाया। फ्रांसीसी खुफिया जानकारी के अनुसार, चीन ने अपने J-35 के पक्ष में फ्रांसीसी राफेल की बिक्री में बाधा डालने के लिए एक दुष्प्रचार अभियान शुरू किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल करके AI और वीडियो गेम की तस्वीरों को प्रचारित किया, जिसमें चीन के हथियारों द्वारा नष्ट किए गए विमानों के कथित मलबे को दिखाया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीनी दूतावास के अधिकारियों ने इंडोनेशिया को राफेल जेट की पहले से चल रही खरीद को रोकने के लिए मना लिया। चीन ने रिपोर्ट को बताया झूठा चीन ने इस रिपोर्ट को झूठा करार दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, "समिति द्वारा जारी की गई रिपोर्ट स्वयं झूठी है।" माओ ने आगे कहा, "आपने जिस समिति का उल्लेख किया है, उसका चीन के प्रति हमेशा एक वैचारिक पूर्वाग्रह रहा है और उसकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।" 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारत ने इस हमले में सीमा पार के लिंक पाए और 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कई आतंकी शिविरों पर हमला किया गया। इसके बाद पाकिस्तान ने एक बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया, लेकिन खतरों को विफल कर दिया गया। कार्रवाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के एयरफील्ड पर हमला किया। 10 मई को हुए संघर्ष विराम के साथ शत्रुता समाप्त हो गई थी।  

योगी सरकार की नीतियों से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग व डाटा सेंटर्स के हब के तौर पर हो रहा प्रदेश का विकास

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग व आईटी निवेश के ग्लोबल डेस्टिनेशन के तौर पर चमक रहा यूपी योगी सरकार की नीतियों से इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग व डाटा सेंटर्स के हब के तौर पर हो रहा प्रदेश का विकास तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था बन रही युवाओं के लिए रोजगार सृजन का माध्यम, नए अवसर हो रहे उत्पन्न इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि, 2017 की तुलना में लगभग 11 गुना उछाल लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा तकनीक आधारित समावेशी विकास की मजबूत सोच ने उत्तर प्रदेश को इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग और डाटा सेंटर हब के रूप में विश्व पटल पर स्थापित करना शुरू कर दिया है। वर्तमान में, राज्य की उन्नति औद्योगिक रूप से अग्रणी कई राज्यों से भी अधिक तेज है। इसका सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिल रहा है, जिन्हें आईटी और नई तकनीक आधारित क्षेत्रों में रोजगार एवं कौशल विकास के सुनहरे अवसर प्राप्त हो रहे हैं। योगी सरकार की कुशल नीतियों के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में निवेश निरंतर बढ़ रहा है और इससे 1.48 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने की प्रबल संभावनाएं हैं। रणनीतिक बदलाव से बदला परिदृश्य पिछले पौने नौ वर्षों में राज्य सरकार ने पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ भविष्य आधारित डिजिटल अर्थव्यवस्था पर अपना विशेष फोकस किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीतने में सफल हुआ है। बेहतर कारोबारी माहौल, सरल प्रक्रियाएं, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स नेटवर्क ने राज्य में सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स, हाई-वैल्यू इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी सेवाओं और डाटा आधारित उद्योगों की स्थापना को नए आयाम दिए हैं। इस क्रम में स्टार्टअप इकोसिस्टम भी मजबूती से विस्तृत हो रहा है और बड़े पैमाने पर युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। प्रमुख निर्यातक बनकर उभरा उत्तर प्रदेश राज्य से इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी उत्पादों के निर्यात में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। 2017 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात जहां 3,862 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में बढ़कर 44,744 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार आईटी निर्यात भी 55,711 करोड़ से 82,055 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। प्रदेश आज कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रमुख निर्यातक राज्य के रूप में उभर चुका है। सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2024 लागू होने के बाद इस क्षेत्र में बड़े निवेश की नई संभावनाएं खुल रही हैं। मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती उत्तर प्रदेश में वैश्विक कंपनियां एसेम्बली यूनिट, डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग, कंपोनेंट और प्रिसिजन इलेक्ट्रॉनिक्स प्लांट की स्थापना कर रही हैं, जिससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में देश में बनने वाले कुल मोबाइल फोनों का लगभग 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश में होता है। भूमि बैंक, प्रस्तावित सेमीकंडक्टर पार्क, बड़े पैमाने पर डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रिक व्हीकल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निवेश के साथ राज्य अब भविष्य की तकनीकी छलांग के लिए पूरी तरह तैयार है। निवेश का पसंदीदा गंतव्य बनकर उभर रहा यूपी कम लॉजिस्टिक्स लागत, बेहतर कानून-व्यवस्था, सिंगल विंडो सिस्टम और तकनीकी कौशल से लैस मजबूत युवा कार्यबल ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे विश्वसनीय गंतव्यों में शामिल कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा, निवेश संरक्षण और इंडस्ट्रियल टाउनशिप आधारित अप्रोच ने यूपी के औद्योगिक विकास को गति दी है। भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और ऐसे में उत्तर प्रदेश का उभरना यह दर्शाता है कि देश का टेक्नोलॉजी और विनिर्माण भविष्य केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य सरकार विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और योजनाओं के माध्यम से युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर अपनी जनसांख्यिकीय ताकत को एक वास्तविक आर्थिक संपदा में परिवर्तित कर रही है।

अयोध्या का वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में बड़ा योगदान, सालाना कारोबार 4 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान

अयोध्या का वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी में बड़ा योगदान, सालाना 4 लाख करोड़ का होगा कारोबार    जनवरी-जून, 2025 के बीच लगभग 23 करोड़ पर्यटक आए, वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने में मिलेगी मदद   लखनऊ अयोध्या में ध्वजारोहण कार्यक्रम से रामनगरी का गौरव विश्व में अपने व्यापक स्वरूप में आलोकित होने लगेगा। श्रीराम मंदिर की ध्वजा पर भगवान सूर्यदेव विराजमान हैं। सूर्यवंशी प्रभु श्रीराम की नगरी में ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद पर्यटन में तेजी के संकेत मिल रहे हैं। आध्यात्मिकता, प्राचीनता और दैवीय गुणों को समेटे हुए ध्वज की छटा देखने के लिए विश्व से बड़ी संख्या में पर्यटक अयोध्या पहुंचेंगे। इससे अयोध्या के पर्यटन में पहले से ज्यादा उछाल आने वाला है पर्यटन से राजस्व के 4 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान  अयोध्या में जनवरी-जून 2025 के बीच करीब 23 करोड़ पर्यटक आए थे। दिसंबर 2025 तक करीब 50 करोड़ पर्यटकों के शहर पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या में वृद्धि से आने वाले कुछ वर्षों में अयोध्या का पर्यटन 4 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2029 तक उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने को लेकर एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रहे हैं। अयोध्या का पर्यटन सीएम योगी के इस मिशन को पूरा करने में  महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। अयोध्या उत्तर प्रदेश के जीएसडीपी में अभी 1.5% योगदान कर रहा है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से अयोध्या की हिस्सेदारी और बढ़ जाएगी।     अयोध्या बन रहा है पर्यटन का सबसे बड़ा हब श्रीराम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में पर्यटकों का तांता लगा रहता है। राम मंदिर और उससे जुड़े निर्माण कार्य में अब तक लगभग 2150 करोड़ रूपये खर्च किया जा चुका है। यहां के होटल, रेस्टोरेंट, दुकानें, टूर एंड ट्रैवेल्स, पूजा सामग्री और प्रसाद के कारोबार रिकॉर्डतोड़ कमाई कर रहे हैं। अयोध्या में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 76 से ज्यादा होटल खुल चुके हैं। निजी क्षेत्र की होटल कंपनियां आईएचसीएल, मैरियट, रैडीशन, कामट, लेमन ट्री बड़ी मात्रा में निवेश कर रही हैं। देश और दुनिया से आने वाले पर्यटकों की सुख-सुविधा का पूरा ध्याम रखा जा रहा है।  उत्तर प्रदेश के पर्यटन में अयोध्या की हिस्सेदारी में वृद्धि 2028 तक उत्तर प्रदेश का पर्यटन सेक्टर 70,000 करोड़ का उद्योग बन जाएगा। इसमें अकेले अयोध्या का योगदान लगभग 25% होगा। अगर इसी तरह की ग्रोथ पर्यटन क्षेत्र में आगे देखने को मिलती है तो 4 लाख करोड़ राजस्व का टारगेट आसानी से प्राप्त कर लिया जाएगा। अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद तीर्थयात्रा से जुड़े उ‌द्योगों का वार्षिक कारोबार दिनों दिन बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में केवल आर्थिक विकास ही नहीं हुआ, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिल रही है। उत्तर प्रदेश में मंदिर और उससे जुड़ी गतिविधियों ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में करीब ₹1.25 लाख करोड़ का योगदान किया है। आध्यात्म से आर्थिक विकास की यात्रा  अयोध्या केवल धार्मिक केंद्र न रहकर आर्थिक क्रियाकलापों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। रामनगरी की पर्यटन वृद्धि केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के एक बहुआयामी आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की कहानी है। इससे अयोध्या विकास के नए मापदंड स्थापित कर रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के पहले से ही सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में हो रहे दीपोत्सव ने साल दर साल नया कीर्तिमान स्थापित किया और देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या की तरफ आकर्षित किया। अब अयोध्या में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल स्थानीय व्यापारियों के रोजगार में और वृद्धि होगी, बल्कि लघु उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के व्यापार को भी गति मिलेगी।

इंटरनेशनल टेरर लिंक! दिल्ली में बम के बाद सामने आई चीन-तुर्की-पाकिस्तान की नई साजिश

नई दिल्ली  पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के इशारे पर दिल्ली में अंजाम दिए गए बम धमाके के 10 दिन बाद ही अब 'बंदूक' वाली एक साजिश का खुलासा हुआ है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े हथियार तस्कर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसके तार पाकिस्तान, चीन और तुर्की से जुड़े हुए हैं। पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ बताया गया है, जो तरह-तरह से भारत में खून-खराबे और तबाही की साजिश रचने में व्यस्त रहता है। दिल्ली पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान मनदीप, दलविंदर, रोहन और अजय के रूप में हुई है। इनके कब्जे से चीन और तुर्की में बने 10 अत्याधुनिक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और 92 जिंदा कारतूस की बरामदगी हुई है। बरामद पिस्टल्स में तुर्की में निर्मित PX-5.7 और चीन में निर्मित PX-3 शामिल हैं। ये पिस्टल बेहद खतरनाक हैं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर स्पेशल फोर्स में होता है। खंगाला जा रहा पूरा नेटवर्क गिरोह का सीधा संबंध आईएसआई से मिला है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई है। पता लगाया जा रहा है कि इस तरह के कितने पिस्टल पहले आ चुके हैं और नई खेप किन लोगों तक पहुंचना था। ड्रोन से पंजाब भेजते थे हथियार एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि तुर्की और चीन में निर्मित इन बंदूकों को भारत भेजने का काम आईएसआई की ओर से किया जा रहा था। यह भी पता चला है कि हथियारों को पाकिस्तान से पंजाब के रास्ते दिल्ली तक पहुंचाया जा रहा था। तस्करी से जुड़े गुर्गे ड्रोन के जरिए पंजाब में सीमा पार गिराते थे। यहां से इन पिस्टल को दिल्ली लाया गया था। पिस्टल की सप्लाई दिल्ली और आसपास के इलाकों में अपराधियों को होनी थी।

पटना में शिक्षक को गोलियों से भुना, इलाज के दौरान PMCH में दम तोड़ा

वैशाली बिहार के सोनपुर में शुक्रवार की शाम एक शिक्षक की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना पहलेजा थाना क्षेत्र के खरिक बाजार के पास हुई, जहां प्राथमिक विद्यालय गंगाजल में पदस्थापित 45 वर्षीय शिक्षक सनोज कुमार को बाइक सवार दो अपराधियों ने सिर में गोली मारकर फरार हो गए। शिक्षक सनोज कुमार स्कूल से अपनी बाइक पर घर लौट रहे थे और घर से कुछ ही दूरी पर थे कि पीछे से आए दो अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ गोली चलाई। गोली सिर के पीछे लगी और वह सड़क पर गिर पड़े। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें गंभीर हालत में पटना PMCH ले जाया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। दिनदहाड़े बाजार के पास हुई इस वारदात से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही सारण एसपी डॉ. कुमार आशीष, ग्रामीण एसपी संजय कुमार और सोनपुर एसडीपीओ प्रीतीश कुमार मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसडीपीओ ने बताया कि मौके से एक खोखा बरामद किया गया है और प्रारंभिक जांच में हत्या की वजह पैसों के लेनदेन का विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार, गोली शिक्षक के सिर के पीछे से दागी गई थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। फिलहाल परिजनों द्वारा कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक मृतक के पिता ने बताया कि सनोज कुमार का लगभग तीन लाख रुपये के लेनदेन को लेकर एक ग्रामीण से विवाद चल रहा था और इसी विवाद को हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। परिवार में घटना के बाद कोहराम मचा हुआ है, वहीं पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई है।  

मां और दूसरे पति ने मिलकर की बेटे की हत्या, कोर्ट ने सुनाई आजीवन सजा

दुर्ग दुर्ग में अपने ही 4 साल के बच्चे की हत्या मामले में उसकी मां और सौतेले पिता को कठोर सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा दी है. साथ ही 1000 रुपए अर्थ दंड भी लगाया है. वहीं जुर्माना न भरने पर 8 महीने अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. दरअसल, पूरा मामला 2 साल पुराना है. आरोपी गायत्री को पहले पति से जगदीप सिंह (4 साल) का बेटा था. जगदीप का सौतेला पिता मनप्रीत उसके साथ आए दिन मारपीट करता था और गायत्री भी उसे मारती थी. इसी दौरान 31 जनवरी 2023 की रात दोनों ने जब जगदीप सिंह को खूब पीटा. अंदरूनी चोट आने से 4 साल का जगदीप बेहोश हो गया, जिसके बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई. दंपति ने चुपचाप उसका अंतिम संस्कार करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन पुलिस को इस बात की भनक लग गई. पुलिस ने मौके पर पहुंच गई और मासूम का पोस्टमार्टम कराया. पोस्टमार्टम में जानकारी सामने आई कि अत्यधिक मारपीट होने की वजह से मासूम की मौत हो गई. जिसके बाद पुलिस ने पति पत्नी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. अब आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.

ओडीओपी व डिजिटलीकरण के समन्वय से नए व्यापारिक मॉडल के प्रादुर्भाव का गढ़ बना उत्तर प्रदेश

यूपी की नई आर्थिक सोच को प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम बना 'भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2025' ओडीओपी व डिजिटलीकरण के समन्वय से नए व्यापारिक मॉडल के प्रादुर्भाव का गढ़ बना उत्तर प्रदेश युवा व महिला उद्यमिता तथा निवेशक साझेदारी से भविष्य की अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती लखनऊ  भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2025 के माध्यम से उत्तर प्रदेश अपनी आर्थिक क्षमता व अवसरों की नई उड़ान को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रहा है। ‘लोकल टू ग्लोबल’ की थीम पर केंद्रित इस मेले में उत्तर प्रदेश ने न केवल अपने पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक स्वरूप में पेश किया, बल्कि नए स्टार्टअप, नवाचार व डिजिटल इकोसिस्टम की ताकत को भी दुनिया के समक्ष सशक्त रूप से प्रदर्शित किया है। योगी सरकार की ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ओडीओपी) योजना को इस आयोजन में सबसे बड़े फोकस के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसके तहत 343 विशेष स्टॉल स्थापित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश से 2,750 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया है, जो मेले में राज्य की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी में से एक है। इस प्रकार, भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला-2025 में उत्तर प्रदेश ने यह साबित किया है कि वह न सिर्फ अपनी पारंपरिक विरासत को वैश्विक पहचान दिला रहा है, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और निवेशकों के साथ नए युग की आर्थिक क्रांति के नेतृत्व की दिशा में तेजी से अग्रसर है। राष्ट्रीय व वैश्विक पटल पर नए अवसर हो रहे सृजित मेले में युवा उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूपी सरकार के सहयोग से 150 से अधिक युवा स्टार्ट-अप्स और महिला उद्यमियों को अपनी नवोन्मेषी पहल, डिज़ाइन और तकनीकी उत्पादों के प्रदर्शन का अवसर मिल रहा है। उनके लिए विशेष बिजनेस वर्कशॉप, नेटवर्किंग सेशन और निवेशक मंच आयोजित किए गए हैं, जहां वे प्रत्यक्ष तौर पर विदेशी व देशी खरीदारों से संवाद स्थापित कर रहे हैं। महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, सामाजिक परिवर्तन और आत्मनिर्भर भारत के मजबूत स्वरूप के तौर पर रेखांकित किया गया है। आगरा का पेठा, भदोही की कार्पेट, बनारसी साड़ियाँ, मेरठ का खेल सामान, कानपुर का चमड़ा, फिरोजाबाद का ग्लासवेयर और सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी जैसे उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय खरीदारों के मुख्य आकर्षण के रूप में उभर रहे हैं। इन उत्पादों के निर्माण, विकास व वाणिज्यिक प्रबंधन में युवाओं तथा महिलाओं की अग्रिम भूमिका उन्हें इस वृहद आयोजन के माध्यम से सीधे तौर पर राष्ट्रीय व वैश्विक पटल से जोड़कर उनके उत्पादों के लिए नए अवसर सृजित कर रही है। मेले के दौरान पारंपरिक शिल्प को आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल मार्केटिंग और सस्टेनेबल प्रैक्टिसेज के साथ प्रस्तुत कर राज्य ने विश्व बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप खुद को और अधिक कुशल, सक्षम व प्रतिस्पर्धी राज्य के तौर पर स्थापित किया है। भविष्य की अर्थव्यवस्था के मजबूत रोडमैप की दिखी झलक सीएम योगी के कुशल मार्गदर्शन में विकसित हो रही राज्य की नई आर्थिक सोच इस मेले में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जहां पारंपरिक हस्तशिल्प को एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और डिजिटलीकरण से जोड़ने के प्रयासों को व्यापक सफलता मिली है। प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों की ग्राम से ग्लोबल बाजार तक पहुंच को सहज और सार्थक बनाया गया है, जिसका प्रमाण मेले में भी देखने को मिला है। मेले में कई विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के साथ बी2बी मीटिंग्स का आयोजन हो रहा है, जिनका उद्देश्य ओडीओपी सहित प्रदेश के उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना है। महाराष्ट्र और राजस्थान के साथ साझेदार राज्य की भूमिका में भाग लेकर उत्तर प्रदेश ने इस भव्य आयोजन में खुद को वैश्विक व्यापार केंद्र तथा एक विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है। साथ ही शिक्षा, कौशल विकास और रिसर्च एंड डेवलपमेंट को प्राथमिकता में रखते हुए नई परियोजनाओं, निवेश समझौतों तथा लॉजिस्टिक्स हब आधारित आर्थिक ढांचे को भविष्य की सतत विकास यात्रा के आधार के रूप में प्रस्तुत किया गया है।