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INS माहे भारतीय नौसेना में शामिल, जनरल उपेंद्र द्विवेदी बने ऐतिहासिक समारोह के साक्षी

मुंबई मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में माहे-श्रेणी का पहला स्वदेशी पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत आज नौसेना में शामिल हो गया। कोचीन शिपयार्ड में निर्मित इस श्रेणी के आठ पनडुब्बी रोधी पोत नौसेना के बेड़े में शामिल होने हैं, जिनमें से यह पहला पोत है। यह माहे-क्लास का पहला पनडुब्बी रोधी (एंटी सबमरीन) और उथले पानी (जहां पानी की गहराई कम हो) में चलने वाला युद्धपोत है, जो तटीय इलाकों के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। मुंबई में हुए समारोह में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी मुख्य अतिथि रहे। द्विवेदी ने तीनों सेनाओं की संयुक्त ताकत पर जोर दिया। उन्होंने कहा- सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी शक्ति सिनर्जी है। ऑपरेशन सिंदूर इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह जहाज उथले पानी में ऑपरेशन, तटीय इलाकों में गश्त, समुद्री रास्तों की सुरक्षा और दुश्मन पनडुब्बियों की तलाश जैसे कामों में बड़ी भूमिका निभाएगा। ये काम बिना शोर के करने की काबिलियत के चलते इसे ‘साइलेंट हंटर’ नाम दिया गया है। INS माहे को कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने तैयार किया है, जो नौसेना की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल का एक मजबूत कदम माना जा रहा है। नौसेना ने इसे “नए दौर का तेज, फुर्तीला और आधुनिक भारतीय युद्धपोत” कहा है। INS माहे भारतीय नौसेना की नई पीढ़ी का युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है। यह शैलो वॉटर यानी कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रों में भी उच्च सटीकता (हाई-प्रिसिजन) के साथ ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसका 80 प्रतिशत हिस्सा भारत में ही बना है। यह एक मल्टी-रोल वॉरशिप है, जो कोस्टल डिफेंस, अंडरवॉटर सर्विलांस और सर्च-एंड-रेस्क्यू जैसे कई महत्वपूर्ण मिशन में तैनात किया जा सकता है। इसमें माइन ले-ड्रॉपिंग की क्षमता भी है, जिससे यह समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने और दुश्मन की गतिविधियों को रोकने में सक्षम है। युद्धपोत निर्माण में भारती की बढ़ती महारत माहे का जलावतरण स्वदेशी उथले पानी के लड़ाकू विमानों की एक नई पीढ़ी के आगमन का प्रतीक है- आकर्षक, तेज और पूरी तरह से भारतीय। 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, माहे-श्रेणी युद्धपोत डिजाइन, निर्माण और एकीकरण में भारत की बढ़ती महारत को दर्शाता है। क्या है एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट? एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) ऐसे युद्धपोत हैं जिन्हें तटीय क्षेत्रों के उथले पानी में पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये जहाज नौसेना की तटीय सुरक्षा क्षमता को बढ़ाते हैं और उन्नत सोनार, टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर जैसी प्रणालियों से लैस होते हैं। ये जहाज दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, खोज और बचाव कार्यों को करने और माइन बिछाने जैसे काम भी कर सकते हैं। देश चैन से सोएगा क्योंकि आप जागते रहेंगे- थलसेनाध्यक्ष मुंबई में भारतीय नौसेना के नए युद्धपोत INS माहे के भव्य कमीशनिंग समारोह में थलसेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि यह अवसर न सिर्फ गर्व का है, बल्कि देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता और समुद्री शक्ति का सशक्त प्रतीक भी है। उन्होंने सबसे पहले जहाज के कमांडिंग ऑफिसर और पूरी टीम को ‘ब्रावो जूलू’ कहते हुए शानदार आयोजन के लिए बधाई दी।

भारतीय महिला कबड्डी टीम की विश्व कप जीत पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताई खुशी

महिला कबड्डी विश्व कप विजय पर CM डॉ. यादव ने भारतीय टीम को दी बधाई भारतीय महिला कबड्डी टीम की विश्व कप जीत पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जताई खुशी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला कबड्डी विश्व कप जीतने पर भारतीय टीम को दी बधाई भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भारतीय महिला कबड्डी टीम को कबड्डी विश्व कप : 2025 जीतने पर बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह ऐतिहासिक विजय अनगिनत युवा बेटियों की शक्ति, साहस और संभावनाओं को नई उड़ान देगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कबड्डी विश्व कप जीतकर देश को विश्व पटल पर गौरवान्वित करने वाली भारतीय महिला टीम की सभी खिलाड़ियों का हार्दिक अभिनंदन है। उल्लेखनीय है कि बंगला देश की राजधानी ढाका में हुई स्पर्धा के अंतिम मुकाबले में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने चीनी ताइपे को 35-28 से शिकस्त दी। पूरे टूर्नामेंट में भारतीय टीम का प्रदर्शन शानदार रहा। भारत ने सेमीफाइनल में भी ईरान पर 33-21 से जीत दर्ज की। टूर्नामेंट में 11 देशों ने हिस्सा लिया था। यह निरंतर दूसरा अवसर है जब भारतीय टीम ने यह स्पर्धा जीत कर श्रेष्ठता सिद्ध की है। 

NCW का बड़ा फैसला: अब शॉर्ट-कोड 14490 पर मिलेगी तुरंत मदद

नई दिल्ली राष्ट्रीय महिला आयोग ने महिलाओं के हक में एक बड़ा कदम उठाया है। कमीश्न ने महिलाओं के लिए 24×7 शॉर्ट-कोड हेल्पलाइन 14490 जारी किया है। यह हेल्पलाइन चौबीसों घंटे काम करेगी। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि यह हेल्पलाइन कॉल करने वालों को प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में मार्गदर्शन प्रदान करेगी, प्राधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करेगी तथा आपात स्थितियों में समय पर हस्तक्षेप की सुविधा प्रदान करेगी। बयान में बताया गया है कि यह टोल-फ्री नंबर याद रखने में आसान है और आयोग की मौजूदा हेल्पलाइन ‘7827170170' से जुड़ा हुआ है, ताकि किसी भी प्रकार की देरी या शुल्क के बिना मदद सुनिश्चित की जा सके। एनसीडब्ल्यू ने कहा कि नया ‘शॉर्ट-कोड' आयोग की पहुंच को सुदृढ़ करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि जरूरतमंद महिलाओं को तत्काल सहायता प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने जनपद भदोही में हुए फैक्ट्री हादसे का संज्ञान लिया  मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को पहुंचकर राहत कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद भदोही में फैक्ट्री में हुए हादसे का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री जी ने जिला प्रशासन के आलाधिकारियों को तत्काल घटनास्थल पर पहुंचने का निर्देश दिए है। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।      दरअसल, औराई क्षेत्र के सूर्या कालीन फैक्ट्री में जहरीली गैस लीक होने से 3 लोगों की मौत हो गई है, जबकि एक मैकेनिक गंभीर रूप से घायल है।       मुख्यमंत्री जी ने घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जिला प्रशासन के अधिकारियों को उनके समुचित उपचार के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही घायल के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है।

देश ने कहा NO टू इच्छामृत्यु: जनमत संग्रह में 53% मतदाताओं ने किया विरोध

स्लोवेनिया स्लोवेनिया के नागरिकों ने रविवार को एक जनमत संग्रह में उस कानून को खारिज कर दिया, जो लाइलाज बीमारी से पीड़ित लोगों को अपना जीवन समाप्त करने की अनुमति देता था। चुनाव प्राधिकारियों द्वारा जारी प्रारंभिक परिणामों में यह जानकारी सामने आई। लगभग पूरी हो चुकी मतगणना के अनुसार, करीब 53 प्रतिशत मतदाताओं ने इस कानून के खिलाफ मतदान किया जबकि लगभग 46 प्रतिशत ने इसके पक्ष में वोट दिया। चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान लगभग 50 प्रतिशत रहा। इच्छामृत्यु के खिलाफ अभियान का नेतृत्व करने वाले रूढ़िवादी कार्यकर्ता एलेस प्रिम्क ने कहा, ‘‘करुणा की जीत हुई है। स्लोवेनिया ने जहर देकर मौत की नीति पर आधारित सरकार के स्वास्थ्य, पेंशन और सामाजिक सुधारों को अस्वीकार कर दिया है।'' यूरोपीय संघ के इस छोटे से देश की संसद ने यह कानून जुलाई में पारित किया था। पिछले वर्ष हुए एक गैर-बाध्यकारी जनमत संग्रह में लोगों ने इसका समर्थन किया था। हालांकि, प्रिम्क और अन्य विरोधियों ने 40,000 से अधिक हस्ताक्षर जमा कर फिर से मतदान कराने के लिए दबाव डाला। कानून के अनुसार, मानसिक रूप से सक्षम ऐसे लोग जिनके ठीक होने की कोई संभावना नहीं है या असहनीय दर्द झेल रहे हैं, उन्हें इच्छामृत्यु का अधिकार दिया जाना था। इसका मतलब था कि मरीज दो चिकित्सकों की मंजूरी के बाद स्वयं घातक दवा लेते। यह कानून मानसिक बीमारियों से पीड़ित लोगों पर लागू नहीं होता। इस कानून का समर्थन प्रधानमंत्री रॉबर्ट गोलोब की उदारवादी सरकार समेत कई पक्षों ने किया। समर्थकों ने तर्क दिया कि यह कानून लोगों को सम्मानपूर्वक जीवन और अपनी पीड़ा समाप्त करने का समय और तरीका स्वयं तय करने का अधिकार देता है। विरोध करने वालों में रूढ़िवादी समूह, कुछ चिकित्सक संघ और कैथोलिक चर्च शामिल थे। उनका कहना था कि यह कानून स्लोवेनिया के संविधान के खिलाफ है और सरकार को इसके बजाय बेहतर दर्दनाशक चिकित्सा सुविधाओं पर काम करना चाहिए। यूरोपीय संघ के कई अन्य देशों में ऐसे कानून पहले से लागू हैं, जिनमें स्लोवेनिया का पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया भी शामिल है।  

सीएम योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी व राम मंदिर में किया दर्शन पूजन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंच परखीं तैयारियां सीएम योगी आदित्यनाथ ने हनुमानगढ़ी व राम मंदिर में किया दर्शन पूजन मुख्यमंत्री ने ध्वजारोहण कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियों के बारे में भी जाना अयोध्या  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम के एक दिन पहले सोमवार को ही अयोध्या पहुंच गए। यहां उन्होंने ध्वजारोहण कार्यक्रम के आयोजन की तैयारियों के बारे में भी जाना। मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी व श्रीराम मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अयोध्या पहुंचने के बाद सबसे पहले वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचे। वहां का निरीक्षण किया और अधिकारियों को यहां से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं के बारे में जाना। मुख्यमंत्री वहां से सीधे साकेत डिग्री कॉलेज स्थित हेलीपैड पहुंचे। यहां उन्होंने हेलीपैड से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद मुख्यमंत्री हनुमानगढ़ी पहुंचे। यहां उन्होंने संकटमोचन हनुमान के चरणों में शीश झुकाया।  मुख्यमंत्री यहां से श्रीराम जन्म भूमि मंदिर पहुंचे। यहां पर उन्होंने कार्यक्रम की तैयारियों व सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। सीएम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों से भी तैयारियों के संदर्भ में जानकारी ली। फिर सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अधिकारियों को ध्वजारोहण कार्यक्रम से संबंधित दिशा-निर्देश दिया। उन्होंने सुरक्षा, सफाई, अतिथि स्वागत आदि को लेकर भी प्रशासन की तैयारियों को जाना, फिर दिशा-निर्देश भी दिया।

भारतीयों को राहत: कनाडा की नागरिकता नीति में ऐतिहासिक सुधार, C-3 बिल को हरी झंडी

कनाडा कनाडा ने वंश-आधारित नागरिकता कानून को आधुनिक बनाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया है। इस अधिनियम में संशोधन करने वाले विधेयक को शाही मंजूरी मिल गई है। इस कदम से का असर भारतीय मूल के हजारों परिवारों पर पड़ने की संभावना है। कनाडा सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नागरिकता अधिनियम (2025) में संशोधन करने वाले विधेयक सी-3 को शाही स्वीकृति मिल गई है। इसमें कहा गया कि यह नागरिकता अधिनियम को और अधिक समावेशी बनाने और कनाडाई नागरिकता के मूल्य को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।  समाचार विज्ञप्ति में कहा गया है, "नए कानून के लागू होते ही, उन सभी लोगों को कनाडाई नागरिकता प्रदान की जाएगी, जो विधेयक के प्रभाव में आने से पहले पैदा हुए हैं और जो प्रथम-पीढ़ी की सीमा या पिछले कानूनों के पुराने प्रावधानों के कारण नागरिक नहीं बन पाए थे।" कनाडाई वंशानुक्रम से नागरिकता पर पहली-पीढ़ी की सीमा वर्ष 2009 में लागू की गई थी। इसका अर्थ है कि यदि कोई बच्चा कनाडा के बाहर पैदा हुआ या गोद लिया गया है, तो वह वंशानुक्रम से कनाडाई नागरिक नहीं माना जाएगा, यदि उसके कनाडाई माता-पिता भी कनाडा के बाहर ही पैदा हुए हों या गोद लिए गए हों। मामले से परिचित लोगों का कहना है कि इस सीमा के कारण अनेक भारतीय मूल के कनाडाई लोगों के लिए समस्या उत्पन्न हो गई, जिनके बच्चे देश से बाहर पैदा हुए थे। विज्ञप्ति में कहा गया है कि नया कानून विदेश में जन्मे या गोद लिए गए कनाडाई माता-पिता को इस विधेयक के लागू होने की तिथि या उसके बाद कनाडा के बाहर जन्मे या गोद लिए गए अपने बच्चे को नागरिकता देने की अनुमति देगा, बशर्ते कि उनका कनाडा से पर्याप्त संबंध हो।    

बच्चों के लिए खुशखबरी! इस राज्य में एक हफ्ते की स्कूल की छुट्टी, जानें वजह

पटना अक्टूबर के त्योहारों की छुट्टियों के बाद अब फिर से बच्चों की मौज लगने वाली है। दरअसल, नवंबर का महीना खत्म होने वाला है और ठंड भी तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही स्कूलों में सर्दियों की छुट्टियों को लेकर चर्चा तेज हो गई। अब अभिभावकों और बच्चों को यह इंतजार है कि इस सर्दी में स्कूल कब बंद होंगे और कितने दिन तक छुट्टियां रहेंगी। बिहार में कब से शुरू होंगी सर्दी की छुट्टियां ? अगर बिहार की बात करें तो पिछले साल के अनुभव के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि सर्दी की छुट्टियां लगभग 7 दिन की होगी, जिसमें क्रिसमस और गुरु गोबिंद सिंह जयंती शामिल हो सकती है। पिछले वर्षों के अनुसार, छुट्टियों की संभावित तिथि 26 दिसंबर 2025 से 1 या 6 जनवरी 2026 तक हो सकती है। पूरे राज्य में तापमान में गिरावट के कारण छात्रों के लिए स्कूल जाना कठिन हो सकता है। ऐसे में सर्दियों की छुट्टियों का समय बच्चों और अभिभावकों के लिए राहत भरा रहेगा। 1 से 8वीं तक के स्कूल 7 दिनों के लिए बंद हालांकि, बिहार सरकार ने अभी तक अधिकृत शेड्यूल जारी नहीं किया है, लेकिन पिछले सालों के आधार पर अनुमान है कि क्लास 1 से 8वीं तक के स्कूल 7 दिनों के लिए बंद रहेंगे। बिहार सरकार कुछ दिनों तक विंटर वेकेशन 2025 की आधिकारिक घोषणा कर सकती है। 

राजस्थान में मौसम बदला: कम हुई सर्दी, कई जिलों में घनी धुंध के बीच हल्की धूप

जयपुर राजस्थान में उत्तरी तथा पश्चिमी हवाओं के मिश्रित प्रभाव से रात के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। रविवार को 6 शहरों को छोड़कर लगभग सभी जगह न्यूनतम तापमान 10°C या उससे ऊपर रहा। कई जिलों में धुंध के कारण दिनभर धूप कमजोर रही। मौसम केंद्र जयपुर ने अगले 4–5 दिन मौसम स्थिर रहने और तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना न होने का अनुमान जताया है। पिछले 24 घंटों में मैदानी इलाकों में सबसे कम तापमान फतेहपुर में 7.1°C रिकॉर्ड हुआ। उत्तरी हवाएं कमजोर पड़ने से यहां पिछले सप्ताह की तुलना में तापमान करीब 2 डिग्री बढ़ा है। अन्य शहरों में तापमान इस प्रकार दर्ज हुआ-सीकर 8.5°C, दौसा 9.3°C, चूरू 9.1°C, नागौर 8.9°C, जालौर 8.6°C, लूनकरणसर 7.8°C। माउंट आबू में लगातार दूसरे दिन 2°C दर्ज हुआ। धुंध का असर, धूप कमजोर अलवर, जयपुर, दौसा, बीकानेर, हनुमानगढ़, जैसलमेर और गंगानगर सहित कई शहरों में धुंध छाई रही, जिससे दिन में धूप कमजोर रही और अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहा। रविवार को अधिकतम तापमान बीकानेर 28.8°C, जोधपुर 30°C, कोटा 27.5°C, चूरू 28.6°C, गंगानगर 27.5°C, नागौर 28.1°C, जयपुर 27.2°C, अजमेर 27.1°C, अलवर 28.2°C, चित्तौड़गढ़ 29.3°C, बाड़मेर 30.4°C। दिन का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 31.5°C दर्ज हुआ। शहर — अधिकतम — न्यूनतम अजमेर — 27.1 — 13.2 भीलवाड़ा — 27.2 — 11.4 वनस्थली (टोंक) — 26.8 — 10 अलवर — 28.2 — 10 जयपुर — 27.2 — 13.3 सीकर — 26.5 — 8.5 कोटा — 27.5 — 12.4 चित्तौड़गढ़ — 29.3 — 11.6 उदयपुर — 27.3 — 11.1 बाड़मेर — 30.4 — 15.6 जैसलमेर — 28.7 — 11.9 जोधपुर — 30 — 10.6 बीकानेर — 28.8 — 12 चूरू — 28.6 — 9.1 गंगानगर — 27.5 — 10.5 नागौर — 28.1 — 8.9 बारां — 28.1 — 10.6 जालौर — 31.5 — 8.6 फतेहपुर — 28.4 — 7.1 करौली — 27.2 — 10.8 दौसा — 28.2 — 9.3 प्रतापगढ़ — 28.3 — 14.1 झुंझुनूं — 27.7 — 10.1

खैर नहीं अब अवैध कॉलोनियों का, 15 दिन में नोटिस जारी, कब्जा हटाने का आदेश CM मोहन यादव ने अफसरों को दिया

भोपाल   मध्यप्रदेश में सरकार अब नगरों के साथ ग्रामीण क्षेत्र में बन रही अवैध कॉलोनियों पर भी शिकंजा कसने जा रही है। नगरीय विकास विभाग अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने के लिए संशोधित नियमों के ड्राफ्ट में इसका दायरा गांवों में भी बढ़ा रहा है। सरकार की मंशा के अनुरूप इसमें संशोधन कर रहा है। अब नया संशोधित कानून शहरों के साथ गांवों पर भी लागू होगा। इसके लिए राजस्व विभाग ने भी सहमति दे दी है। जल्द नियमों में संशोधन कर शासन को भेजा जाएगा। इस ड्राफ्ट में अवैध कॉलोनियों के विकास पर रोक लगाने के लिए सख्त प्रावधान किए जा रहे हैं। इसमें पार्षद से लेकर, बिल्डर, डेवलपर, भू-स्वामी, पुलिस और प्रशासन सभी की जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। अवैध कॉलोनियां बनाने वालों पर जुर्माना भी 10 से बढ़ाकर 50 लाख किया जा रहा है। रोक लगाने के निर्देश दिए दरअसल, नगरीय विकास विभाग करीब डेढ़ साल से अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने के लिए कानून में संशोधन का ड्राफ्ट बना रहा है। इस बीच कई बार अफसरों के बदलने से यह काम पूरा नहीं हो सका। इसी बीच कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अफसरों को अवैध कॉलोनियों पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने के निर्देश दिए। इसके बाद नगरीय विकास विभाग के एसीएस संजय दुबे ने संशोधित नियमों का विस्तार ग्रामीण क्षेत्र में भी करने के निर्देश दिए। बताते हैं, शहर से लगे ग्रामीण क्षेत्र के अव्यवस्थित होने से शहरों पर प्रभाव पड़ रहा है। नए नियमों में यह सख्त प्रावधान -संशोधित बिल में पार्षद, सरपंच आदि की जिम्मेदारी तय की जा रही है। प्रावधान हैं, अवैध कॉलोनी की जानकारी मिलने पर तुरंत संबंधित निकाय अधिकारी को सूचना देनी होगी। अफसर को सूचना मिलने के 15 दिन में एफआइआर दर्ज करानी होगी। -अवैध कॉलोनी को नगरीय निकाय 15 दिन में जमीन को मूल स्वरूप में लाने के लिए नोटिस देगा। कॉलोनाइजर के ऐसा न करने पर निकाय अवैध कॉलोनी को ढहा कर जमीन कब्जे में लेगा। इसके बाद निकाय वहां विकास कार्य कराएगा। -अवैध कॉलोनियों का विकास रोकने कलेक्टर टास्क फोर्स बनाएंगे। यह हर सप्ताह क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट देगा। -अभी अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को न्यूनतम 3 साल और अधिकतम 10 साल कैद की सजा का प्रावधान है। नए नियमों में इसे बढ़ाकर न्यूनतम 7 साल और अधिकतम 10 साल की सजा किया जा रहा है। -अवैध कॉलोनियों के खिलाफ हर कार्रवाई के लिए समय सीमा तय की जा रही है। अफसरों के कार्रवाई न करने पर शासन उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा। पटवारी से लेकर एसडीएम तक की जिम्मेदारी तय की जा रही गांवों में विस्तार के लिए राजस्व विभाग के साथ बैठक कर सहमति ले ली गई है। अब राजस्व विभाग के पटवारी, आरआइ, तहसीलदार, एसडीएम आदि की जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं। गांवों में अवैध कॉलोनियों का पता लगाने के लिए सर्वे किया जाएगा। यह संशोधित नियम वरिष्ठ सचिव समिति के पास भेजे जाएंगे। समिति की अनुमति मिलने के बाद यह कैबिनेट में पेश किए जाएंगे। ऐसे में यह संशोधन प्रस्ताव विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आने की संभावना नहीं है। नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे का कहना है, नियमों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अगले साल नए नियम लागू हो सकते हैं। इसलिए पड़ी जरूरत अभी कई बड़े शहरों में मास्टर प्लान बरसों से अटके हैं। ऐसे में यहां प्लानिंग एरिया में ज्यादा वृद्धि नहीं हो सकी। नतीजा, शहरों से लगे गांवों में अवैध कॉलोनियां बनाने का सिलसिला चल रहा है। यहां निगरानी तंत्र भी विफल है। पंचायत की अनुमति लेकर कई स्थानों पर कॉलोनियां बन चुकी हैं। इस अनियोजित विकास का खामियाजा भविष्य में शहरों को भुगतना पड़ेगा।