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राजभाषा दिवस पर भव्य समारोह: संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल बोले— जल्द ही आठवीं अनुसूची में शामिल होगी छत्तीसगढ़ी भाषा

रायपुर : छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस के अवसर पर संस्कृति विभाग के ऑडिटोरियम में भव्य समारोह आठवीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी भाषा जल्द ही शामिल होगी: संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल रायपुर छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस के अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में संस्कृति विभाग के अडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम में रायपुर उत्तर विधायक पुरन्दर मिश्रा, धरसींवा विधायक अनुज शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सु मोना सेन, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, संचालक संस्कृति एवं राजभाषा विवेक आचार्य, छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग की सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार उपस्थित रहीं। अतिथियों का स्वागत पारंपरिक छत्तीगढ़िया तरीके से खुमरी पहना कर किया गया। कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि सभी अतिथियों ने अपना उद्बोधन छत्तीसगढ़ी में दिया। छत्तीसगढ़ी में उद्बोधन देते हुए मंत्री अग्रवाल ने कहा कि आठवीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी को शामिल करने के लिए पूर्व में प्रयास हो चुके हैं तथा अब पूरी तैयारी के साथ केंद्र को प्रस्ताव भेजकर इसे जल्द पूरा किया जाएगा। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली छत्तीसगढ़ी की विविधता पर जोर देते हुए प्रसिद्ध कहावत ‘‘कोस-कोस पर पानी बदले, चार कोस पर बानी‘‘ का उल्लेख किया तथा सभी बोलियों को समाहित कर भाषा को समृद्ध बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने साहित्यकारों को उनके छत्तीसगढ़ी भाषा में योगदान के लिए बधाई दी तथा छत्तीसगढ़ी साहित्यकारों द्वारा लिखित पुस्तकों का विमोचन भी किया। मंत्री अग्रवाल ने संस्कृति विभाग परिसर में लगाई गई छत्तीसगढ़ी किताबों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा सेल्फी प्वाइंट पर अपनी सेल्फी भी ली। छह साहित्यकारों का सम्मान, 13 पुस्तकों का विमोचन कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रति योगदान हेतु पद्म धर्मपाल सैनी (जगदलपुर), सरला शर्मा (दुर्ग), एस.पी. जायसवाल (सरगुजा), हेमलाल साहू निर्माेही (दुर्ग), डॉ. प्रकाश पतंगीवार (रायपुर) तथा काशी साहू (बिलासपुर) को मुख्य अतिथियों ने छत्तीसगढ़ी भाषा एवं साहित्य में उनके योगदान हेतु सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखी पुस्तकों का विमोचन भी किया गया जिसमें ‘‘आठवीं अनुसूची में छत्तीसगढ़ी‘‘ प्रधान संपादक डॉ. अभिलाषा बेहार, संपादक डॉ. सुधीर शर्मा, ‘‘छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग प्रांतीय सम्मेलन 2024 की स्मारिका‘‘, सदाराम सिन्हा ‘स्नेही‘ कृत ‘‘सूरूज खड़े मुहाटी म‘‘, स्व. नोहरलाल साहू ‘अधमरहा‘ कृत ‘‘हाना के तराना‘‘, मकसूदन साहू कृत ‘‘बरीवाला‘‘, अरविंद मिश्र कृत ‘‘छत्तीसगढ़ी शब्द सामरथ‘‘, डॉ. राघवेन्द्र दुबे कृत ‘‘मोर छत्तीसगढ़ के माटी‘‘, डॉ. किशन टण्डन कृत ‘‘भुंइयां के भगवान‘‘, जमुना प्रसाद चौहान कृत ‘‘मया के खोंदरा‘‘, डॉ. नरेन्द्र वर्मा कृत ‘‘मैं बेटा किसान के‘‘, डॉ. विवेक तिवारी कृत ‘‘हमर परियावरन‘‘, स्व. भूषण लाल परगनिहा कृत ‘‘ गउ रामायन‘‘, विकास कश्यप कृत ‘‘एक दिया‘‘, बलराम मिर्झा कृत ‘‘मन चंगा तो कठौती में गंगा‘‘ और मती आशा झा कृत ‘‘मया भरे आंखी‘‘ प्रमुख हैं। कविता पाठ, गोष्ठी और प्रदर्शनी से सजा समारोह कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ी किताबों की प्रदर्शनी, साहित्यकारों द्वारा कविता पाठ, आठवीं अनुसूची हेतु चर्चा गोष्ठी आयोजित हुई। छत्तीसगढ़ी साहित्यकारों ने कविता पाठ से अतिथियों को मंत्र मुग्ध कर दिया। यह समारोह छत्तीसगढ़ी भाषा के संवर्धन में मील का पत्थर साबित हुआ।

मल्हारगढ़ थाने की राष्ट्रीय उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी बधाई

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ थाने को उच्च रैंकिंग के लिए दी बधाई गर्व की बात , मल्हारगढ़ देश के सर्वश्रेष्ठ थानों में हुआ शामिल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ थाने को उच्च रैंकिंग प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह द्वारा छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित पुलिस महानिदेशकों और पुलिस महानिरीक्षकों की कॉन्फ्रेंस में देश के श्रेष्ठ पुलिस थानों के रैंकिंग की घोषणा की गई। इस रैंकिंग में पुलिस थाना मल्हारगढ़, जिला मंदसौर को देश भर के पुलिस थानों में 9 वीं रैंक प्राप्त हुई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने थानों की रैंकिंग के लिये विभिन्न 70 पैमाने तय किए थे। इनमें अपराध का ग्राफ, आपराधिक प्रकरण को सुलझाने की अवधि, स्वच्छता और पुलिसकर्मियों का व्यवहार सहित अन्य पैमाने शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला पुलिस अधीक्षक मंदसौर सहित संबंधित थाना स्टॉफ और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों कर्मचारियों से इस उपलब्धि का स्तर बनाए रखने की अपेक्षा करते हुए अन्य थानों के स्टॉफ को भी मंदसौर से प्रेरणा लेकर श्रेष्ठ कार्य का आह्वान किया है। उन्होंने गर्व का अनुभव करवाने वाली इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए मध्यप्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी बधाई दी है।  

महाकाल का अनोखा अलंकरण: फूलों की 10–15 किलो वजनी ‘अजगर माला’ चढ़ाई

उज्जैन महाकाल मंदिर में इन दिनों भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला पहनाई जा रही है। प्रतिदिन होने वाली पांच आरती के अलावा दिनभर भक्तों की ओर से लाई जाने वाली मालाएं भगवान को अर्पित की जा रही है। हालांकि ज्योतिर्लिंग क्षरण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भगवान को भारी फूल माला तथा अधिक मात्रा में पुष्प अर्पित नहीं करने का सुझाव दिया है। समय-समय पर मंदिर समिति भी एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों पर अमल करने का दावा करती रही है, मगर हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए सारिका गुरु ने वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआइ) और जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की समिति गठित की थी। एक्सपर्ट कमेटी के सदस्य वर्ष 2019 से लगातार ज्योतिर्लिंग क्षरण की जांच कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने क्षरण रोकने के लिए अनेक सुझाव दिए हैं।   इनमें भगवान महाकाल के अभिषेक के लिए सादे पानी की जगह आरओ जल का उपयोग करना, भस्म आरती में ज्योतिर्लिंग पर कपड़ा ढंक कर भस्म अर्पित करना, पंचामृत की मात्रा केवल सवा लीटर करना, भगवान के शृंगार में उपयोग होने वाले आभूषणों का वजन कम करना, भगवान महाकाल को भारी फूल माला तथा अधिक मात्रा में पुष्प अर्पित नहीं करना जैसे सुझाव शामिल है। मंदिर समिति एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर अमल कर रही है। अभिषेक में आरओ जल का उपयोग हो रहा है, आभूषण का वजन कम कर दिया गया है, भस्म आरती में भस्म अर्पण से पहले ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंका जाता है। लेकिन मानीटरिंग के अभाव में भगवान को फूलों की भारी माला पहनाने का क्रम जरूर जारी नजर आ रहा है। 10 से 15 किलो वजनी है अजगर माला महाकाल मंदिर प्रशासनिक भवन के पास स्थित हार, फूल व प्रसाद की दुकानों पर फूलों की भारी माला का विक्रय किया जा रहा है, इसे अजगर माला कहा जाता है। इसमें एक हजार कमल के फूलों से बनी सहस्त्र कमल तथा विभिन्न किस्म के फूलों से तैयार की गई भारी माला शामिल है। बताया जाता है फूलों की भारी भरकम माला का वजन करीब 10 से 15 किलो रहता है। दिन भर में भगवान को इस प्रकार की 40 से 50 मालाएं पहनाई जा रही है। 500 से 2100 रुपये कीमत महाकाल मंदिर के आसपास दुकानों से विक्रय की जाने वाली अजगर माला 500 से 2100 रुपये में विक्रय की जा रही है। भक्तों द्वारा लाई जा रही भारी माला को दिनभर भगवान को अर्पित किया जाता है। पांच आरती में भी भगवान को भरी भरकम मालाएं ही अर्पित की जा रही हैं।

आत्मनिर्भरता की ओर कदम: कोयला खनन सूची में 18 नई कंपनियां शामिल

नई दिल्ली भारत में कोयला खनन को रफ्तार देने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश में मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसियों के दायरे को बढ़ाते हुए निजी संस्थाओं को भी अधिकृत एजेंसियों की सूची में शामिल कर लिया है। 26 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, खान व खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4(1) के दूसरे प्रावधान के तहत, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की नेबेट (QCI-NABET) द्वारा मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं को आधिकारिक रूप से खनिज खोज संबंधी कार्यों के लिए अधिकृत कर दिया गया है। इस कदम से कोयला सहित खनिज संसाधनों की खोज होगी तेज सरकार का कहना है कि इस कदम से कोयला सहित खनिज संसाधनों की खोज तेज होगी, तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और देश के खनन क्षेत्र में निजी भागीदारी को नई दिशा मिलेगी। यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 18 नई एजेंसियों को किया गया शामिल कोयला मंत्रालय ने कहा है कि इस फैसले से 18 नई एजेंसियों को कोयला और लिग्नाइट की खोज के लिए अधिकृत सूची में जोड़ा गया है। इससे कोयला ब्लॉक आवंटियों को प्रोस्पेक्टिंग कार्यों के लिए एजेंसी चुनने में ज्यादा लचीलापन और विकल्प मिलेंगे। नई मान्यता प्राप्त एजेंसियों में ये शामिल हैं     इंडियन माइन प्लानिंग एंड कंसल्टेंट्स, कोलकाता;     मेरॉक्स माइनिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम;     यूनाइटेड एक्सप्लोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता;     माहेश्वरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता;      नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन – टाटा स्टील लिमिटेड, पूर्वी सिंहभूम;     माइनिंग एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड, बिदवान;     रेम्को कोल एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, चंद्रपुर;     साउथ वेस्ट जियोलॉजिकल एक्सप्लोरेशन लिमिटेड, गुरुग्राम;     जियोटेक्निकल माइनिंग सॉल्यूशंस, धर्मपुरी;     नोवोमाइन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईस्ट खासी हिल्स;     सुरमाइन कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली;     कार्तिकेय एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर;     माइनिंग टेक कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद;     जेम्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, रांची;     रेवेल कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद;     सीएमएमसीओ टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड, हैदराबाद;     जसनी जियोटेक प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर;     एपीसी ड्रिलिंग एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, नामक्कल शामिल हैं। कोयला और लिग्नाइट की खोज को मिलेगी रफ्तार सरकार का मानना है कि अधिकृत प्रोस्पेक्टिंग एजेंसियों की संख्या बढ़ाने से निजी क्षेत्र के संसाधनों और विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे अन्वेषण प्रक्रिया में दक्षता, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम कोयला और लिग्नाइट की खोज की रफ्तार को उल्लेखनीय रूप से तेज करने की दिशा में देखा जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, विस्तारित एजेंसी सूची से शुरुआती चरण में ही खनन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे देश में संसाधन विकास की गति तेज होगी। इसके साथ ही कोयला और लिग्नाइट की उपलब्धता में सुधार होगा, जो देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राज्य में आधार कार्ड नियमों में बड़ा बदलाव, विभागों को जारी हुई कड़ी गाइडलाइन

लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार ने दस्तावेज़ों की प्रमाणिकता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी सरकारी कार्य में आधार कार्ड को जन्मतिथि के प्रमाण-पत्र के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह निर्णय दस्तावेज़ सत्यापन की प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। नियोजन विभाग ने सभी प्रमुख सचिवों और अपर मुख्य सचिवों को आदेश भेजते हुए बताया कि आगे से उम्र प्रमाणित करने के लिए केवल मान्य दस्तावेज़-जैसे जन्म प्रमाण पत्र, हाईस्कूल सर्टिफिकेट या अन्य अधिकृत प्रमाण-ही मान्य होंगे। इस फैसले की पृष्ठभूमि में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का 31 अक्टूबर को जारी किया गया पत्र है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि आधार कार्ड पहचान का दस्तावेज़ है, न कि जन्मतिथि का प्रमाणपत्र। UIDAI के इस निर्देश के बावजूद कई विभाग आधार को जन्म तारीख का प्रमाण मानकर चल रहे थे, जिसके बाद यूपी सरकार ने इसे रोकने के लिए औपचारिक आदेश जारी कर दिया। नियोजन विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह ने साफ कहा कि अब राज्य के किसी भी विभाग में आधार को उम्र प्रमाणित करने के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा और सभी कार्यालयों को इस नियम का पालन करना होगा।

रोज शाम को दीपक जलाने से बढ़ेगी धन और खुशहाली – जानिए सही जगहें

हिंदू धर्म में दीपक जलाना बहुत पवित्र और विशेष माना जाता है. वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में भी दीपक जलाने को बहुत शुभ माना गया है. देवी-देवाताओं की पूजा में दीपक हमेशा जलाया जाता है. मान्यता है कि बिना दीपक जलाए कोई भी पूजा पूरी नहीं होती है. देवी-देवताओं की आरती दीपक जलाकर ही की जाती है. हिंदू धर्म में गोधूलि बेला यानी शाम का समय बहुत पावन माना जाता है. वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में इस समय में घर के कुछ विशेष स्थानों पर दीपक जलाने के लिए कहा गया है. इन स्थानों पर रोज शाम के समय घी या तेल का दीपक जलाना चाहिए. मान्यता है कि शाम के समय घर के इन स्थानों पर दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है. ऐसै में आइए जान लेते हैं घर के ये कौन से स्थान हैं, जहां शाम के समय दीपक जलाना चाहिए. इन जगहों पर जलाएं दीपक प्रमुख द्वार पर घर के प्रमुख द्वार पर रोजाना शाम के समय तेल का दीपक जलाना चाहिए. इससे विशेष लाभ होता है. वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि रोजाना गोधूलि बेला में घर के प्रमुख द्वार पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती और नकारात्मक उर्जा दूर होती है. तुलसी के पास हिंदू धर्म में तुलसी का पौधा बहुत विशेष माना गया है. ऐसे में रोजाना शाम की पूजा में दीपक जलाने के साथ-साथ तुलसी के पास भी घी का दीपक जलाना चाहिए. ऐसा करने से माता लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं. उत्तर-पूर्व दिशा में ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में शाम के समय दीपक जलाना चाहिए. ये दिशा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार मानी जाती है. इस दिशा में भी दीपक जलाने से बहुत लाभ मिलते हैं. सीढ़ियों के नीचे रोजाना शाम के समय सीढ़ियों के नीचे भी तेल का दीपक जलाना चाहिए. इससे काफी अच्छे परिणाम मिलते हैं. साथ ही घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है.

धारा 163 पाँच दिनों तक प्रभावी: जानें बिहार जिले में आदेश क्यों हुए जारी

पटना बिहार में नयी सरकार के गठन के बाद आगामी एक दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर राजधानी पटना के जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। एक से पांच दिसंबर 2025 तक चलने वाले इस सत्र के दौरान पटना में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू रहेगी, जिसके तहत किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, जुलूस और सार्वजनिक विरोध कार्यक्रम पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध प्रभावी होगा। जुलूस, घेराव, धरना पर प्रतिबंध पटना सदर के अनुमंडल पदाधिकारी गौरव कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि सत्र के दौरान विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों द्वारा अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन की आशंका रहती है। इस संभावना को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के गैरकानूनी रूप से एकत्र होने, जुलूस, घेराव, धरना या किसी भी प्रकार की आक्रामक गतिविधि प्रतिबंधित रहेगी। बिना पूर्व अनुमति के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल पूर्णतः निषिद्ध आदेश में आग्नेयास्त्र, विस्फोटक सामग्री, फरसा, गड़ासा, भाला, छुरा जैसे हथियारों के साथ घूमने को भी दंडनीय अपराध करार दिया गया है। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना पूर्व अनुमति के लाउडस्पीकर का इस्तेमाल पूर्णतः निषिद्ध रहेगा। यह आदेश एक दिसंबर से लागू होगा और पांच दिसंबर तक प्रभावी रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की जाएगी तथा संबंधित मार्गों पर विशेष ट्रैफिक नियंत्रण व्यवस्था लागू की जाएगी। जिला प्रशासन का कहना है कि यह कदम विधानसभा की कार्यवाही को बिना किसी व्यवधान के संपन्न कराने और शहर में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

सर्दी में रेल यात्रियों के लिए अहम फैसला: पंजाब में 1 दिसंबर से बदले रहेंगे ये नियम

रूपनगर उत्तर रेलवे और अंबाला छावनी डिवीजन ने कोहरे के कारण नंगल डैम और अंबाला छावनी जंक्शन के बीच चलने वाली दो पैसेंजर ट्रेनों को कैंसिल करने के ऑर्डर जारी किए हैं। ऑर्डर के मुताबिक, ये ट्रेनें 1 दिसंबर से 28 फरवरी तक कैंसिल रहेंगी। विभाग ने बताया कि पहली ट्रेन नंबर 64516, नंगल डैम से सुबह 10:45 बजे अंबाला छावनी जंक्शन के लिए निकलती है और चंडीगढ़ जंक्शन होते हुए दोपहर 2:20 बजे अंबाला छावनी जंक्शन स्टेशन पहुंचती है। दूसरी पैसेंजर ट्रेन नंबर 64517 अंबाला छावनी-सरहिंद जंक्शन-नंगल डैम, अंबाला छावनी जंक्शन से सुबह 11:35 बजे अपनी मंजिल नंगल डैम के लिए निकलती है और दोपहर 3:20 बजे नंगल डैम पहुंचती है।  

CM पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार भिड़े, कांग्रेस में बढ़ी कलह—BJP देख रही मौक़ा

 नई दिल्ली    कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जिस तरह सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है, उसके चलते कांग्रेस का सबसे बड़ा किला कहीं ढह न जाए. कर्नाटक में कांग्रेस का संकट गहराता ही जा रहा है. शिवकुमार और सिद्धारमैया में कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है और अब फैसला बेंगलुरू से नहीं, बल्कि दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के दरबार से होगा. डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच कर्नाटक कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है. शिवकुमार के समर्थक विधायक और नेता खुलकर उतर गए हैं कि मुख्यमंत्री बदला जाए. वहीं, सीएम सिद्धारमैया भी अपनी सियासी लॉबिंग तेज कर दी है और अपनी कुर्सी को बचाए रखने के लिए दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से मिलेंगे. क्या कांग्रेस का कर्नाटक किला ढह जाएगा? देश के तीन राज्यों में कांग्रेस अपने दम पर सत्ता में है. कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना की कांग्रेस की सरकार है. सऐसे में उसका सबसे बड़ा किला कर्नाटक ही है, लेकिन कुछ समय से राज्य में सियासी टकराव चल रहा है. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद की कुर्सी को लेकर वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई है, जिससे पार्टी की छवि बुरी तरह प्रभावित हुई है. डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों ही नेता सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. इससे राज्य में शासन पर भी असर पड़ रहा है. सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है. कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई दिख रही है. एक खेमा शिवकुमार को सीएम बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है तो दूसरा धड़ा सिद्धारमैया के साथ है. कुर्सी की लड़ाई ऐसे ही अगर जारी रही तो कांग्रेस के लिए सियासी नुकसान साबित हो सकता है। इस तरह कांग्रेस के एकमात्र प्रभावी किले कर्नाटक के भी ढहने के लक्षण दिखने लगे हैं. ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले से छिड़ी जंग कर्नाटक में यह घमासान तब तेज हुआ है जब सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हुए हैं. कहा जा रहा है कि सरकार गठन के दौरान भी सीएम पद को लेकर जारी खींचतान के बाद ढाई साल का फॉर्मूला तय हुआ था. बताया जा रहा है कि 2023 में कांग्रेस की अप्रत्याशित जीत के बाद यह तय हुआ था कि मुख्यमंत्री पद को ढाई-ढाई साल के लिए बांटा जाएगा. इस फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया पहले ढाई साल सीएम रहेंगे और उसके बाद डीके शिवकुमार सत्ता संभालेंगे. दरअसल, सिद्धारमैया का ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और तभी से डीके शिवकुमार खेमे के विधायक अब उन्हें सीएम बनाने की बात कह रहे हैं. डीके शिवकुमार के भी दिल्ली आकर गांधी परिवार से मिलने की बात कही जा रही है. वहीं, सिद्धारमैया कह रहे हैं कि मेरी ताकत घटी नहीं, बढ़ी है. उन्होंने कहा कि 'विधायक दिल्ली जाएं, कोई समस्या नहीं। आखिरी फैसला हाईकमान का है।' साथ ही कहा कि 2023 में जो जनादेश मिला था, वह पाँच साल के लिए था. वेट एंड वॉच के मूड में खड़ी बीजेपी कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच छिड़ी लड़ाई में बीजेपी वेट एंड वॉच की रणनीति पर चल रही है. वह अपनी तरफ से कोई पहल करती नहीं दिख रही है. बीजेपी नेता इसे कांग्रेस के घर का झगड़ा बता रहे हैं। कर्नाटक से आने वाले एक केंद्रीय मंत्री वी सोमन्ना ने कहा है कि बीजेपी को डीके शिवकुमार की जरूरत नहीं है। बीजेपी ने कहा कि अगर कांग्रेस के पास हिम्मत है तो वह विधानसभा भंग करे और राज्य में चुनाव करवाए. उन्होंने आगे कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी बहुत मजबूत है. उसको डीके की जरूरत नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि कर्नाटक की हालत खराब है। सड़कों की हालत बहुत बुरी है, कांग्रेस पार्टी पावर शेयरिंग के ड्रामे में उलझी हुई है. कर्नाटक की जनता ने इससे भ्रष्ट सरकार नहीं देखी है. CM के लिए इस नेता का पलड़ा भारी; इतने MLA हैं साथ कर्नाटक सरकार में मचे घमासान को लेकर दिल्ली में जल्द बैठक हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। खबर है कि ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री की कथित सीक्रेट डील को लेकर सीएम सिद्धारमैया और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार के बीच तकरार जारी है। हालांकि, अटकलें हैं कि सिद्धारमैया का पलड़ा भारी हो सकता है।  सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि फिलहाल सिद्धारमैया के पद पर आंच नहीं आएगी। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी जानती है कि वह OBC यानी अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के बड़े नेता हैं। साथ ही उन्हें अहिंदा समुदाय के साथ पार्टी के 100 से ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल है। कांग्रेस के कुल 137 विधायक हैं। ऐसे में उनकी सहमति के बगैर नेतृत्व परिवर्तन आलाकमान के लिए भी आसान नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार और उनके समर्थकों की तरफ से डाला जा रहा दबाव कैबिनेट फेरबदल टाल सकता है। माना जा रहा था कि सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल करना चाह रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, शिवकुमार के प्रयासों को आंतरिक समर्थन में कमी के चलते कमजोर माना जा रहा है। हालांकि, वोक्कलिगा समुदाय उनका समर्थक माना जाता है। दोनों पक्षों के लिए अड़े समर्थक सिद्धारमैया और शिवकुमार का समर्थन करने वाले जाति समूह खुलकर उनके पक्ष में आ गए है। एक समूह ने कांग्रेस को मौजूदा मुख्यमंत्री को हटाने के खिलाफ चेतावनी दी, जबकि दूसरे समुदाय ने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने का पुरजोर समर्थन किया। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग समुदाय महासंघ (केएसएफबीसीसी) ने कांग्रेस को चेतावनी दी है कि राज्य इकाई में अंदरूनी कलह के मद्देनजर सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाने का कोई भी प्रयास पार्टी पर असर डालेगा, जबकि कर्नाटक राज्य वोक्कालिगारा संघ ने चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के साथ अगर अन्याय हुआ तो वह इसका कड़ा विरोध करेगा। अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित समुदायों के लिए संक्षिप्त कन्नड़ नाम) सिद्धरमैया का प्रमुख वोटबैंक माना जाता है, वहीं कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं जो एक प्रभावशाली कृषक समुदाय है जिसके कई नेता जैसे के. हनुमंतैया, के.सी. रेड्डी, एच.डी. देवगौड़ा, एस.एम. कृष्णा, सदानंद गौड़ा और एच.डी. कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री रह … Read more

आधार अपडेट: UIDAI ने पेश किए नए नियम, जानें क्या हुआ बदलाव

 नई दिल्‍ली आधार जारी करने वाली संस्‍था UIDAI ने आधार नामांकन और आधार में सुधार को लेकर कुछ नियमों में बदलाव कर दिया है. इस बदलाव से आधार कार्ड बनवाने वाले और अपडेट कराने वाले यूजर्स प्रभावित हो सकते हैं. इस नियम को  Third Amendment Regulations, 2025 के तहत नोटिफाई किया गया है.  नए नियमों के तहत डॉक्‍यूमेंट्स को अपडेट किया गया है, जिसका इस्‍तेमाल पहचान, एर्डेस, रिलेशन या डेट ऑफ बर्थ के प्रमाण के तौर पर किया जा सकता है. यूआईडीएआई ने यह बदलाव बच्‍चों, युवाओं और सीनियर सिटीजन के सभी आयु वर्गों के लिए किया है.  अगर आप भी अपने आधार कार्ड को अपडेट कराने या बनवाने जा रहे हैं तो इन डॉक्‍यूमेंट्स के बारे में जान लीजिए.  नाम बदलने के लिए डॉक्‍यूमेंट्स  UIDAI ने नाम सुधारन के लिए कई रह के पहचान को अप्रूव किया है. इसमें पासपोर्ट सबसे भरोसेमंद डॉक्‍यूमेंट के तौर पर होता है. इसमें आपकी फोटो, नाम, डेट ऑफ बर्थ और एड्रेस एक साथ दर्ज होते हैं. इसके अलावा PAN कार्ड, वोटर ID (EPIC), ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी पहचान पत्र और विवाह प्रमाण पत्र भी नाम में अपडेट कर सकते हैं. एड्रेस के लिए जरूरी डॉक्‍यूमेंट एड्रेस प्रूफ के लिए यूआईडीएआई ने बहुत से डॉक्‍यूमेंट्स को मान्‍य किया है . इसमें पासपोर्ट, बैंक पासबुक/बैंक स्टेटमेंट (अपडेटेड), बिजली-पानी-गैस के बिल (तीन महीने के भीतर जारी) शामिल हैं. किराए पर रहने वाले नागरिग, रेंट एग्रीमेंट दे सकते हैं. साथ ही हाउस या प्रॉपर्टी टैक्‍स की रसीद, आईडी कार्ड, राशन कार्ड भी दे सकते हैं.  डेट ऑफ बर्थ के लिए डॉक्‍यूमेंट जन्‍मतिथि अपडेट कराने के लिए नागरिकों के अभी बहुत से डॉक्‍यूमेंट देने होते हैं, जिसमें आप जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, या 10वीं-12वीं की मार्कशीट शामिल हैं. फिजिकल पैन कार्ड भी दिया जा सकता है. ई-पैन योग्‍य नहीं माना जाता है.  अब क्‍या हुआ बदलाव?  यूआईडीएआई ने नए नियम में जो बदलाव किया है, उसके मुताबिक अब  एक ही दस्तावेज जिसमें फोटो, नाम और पता तीनों हैं, आधार अपडेट के लिए पर्याप्‍त माना जाएगा. पहले अलग-अलग प्रमाण देना जरूरी होता था, लेकिन अब एक ही डॉक्‍यूमेंट से प्रॉसेस पूरा किया जा सकता है. नाम बदलना, एड्रेस चेंज, डेट ऑफ बर्थ अपडेट करना या रिलेशन जोड़ना, ये सभी काम अब एक ही डॉक्‍यूमेंट से बदले जा सकते हैं.  आधार कैसे अपडेट कर सकते हैं?      अगर आप आधार अपडेट करना चाहते हैं तो सबसे पहले सही डॉक्‍यूमेंट्स को तैयार रखना होगा.      अब नजदीकी आधार सेंटर्स या ऑनलाइन के लिए माई आधार ऐप पर जाना होगा.      यहां आप अपने डॉक्‍यूमेंट के साथ अपडेट करने वाला फार्मा भरकर जमा कर सकते हैं.      अगर डॉक्‍यूमेंट सही हुए तो आपका आधार कार्ड अपडेट हो जाएगा.