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नवा रायपुर मेडिसिटी: मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई इबारत लिख रहा है छत्तीसगढ़

हेल्थकेयर हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है अटल नगर रायपुर, स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान किसी भी विकसित समाज की असली नींव होते हैं। भारत जब वर्ष 2047 के विकसित राष्ट्र के संकल्प की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ हमारी प्रमुख प्राथमिकता बन चुकी हैं। इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही ‘मेडिसिटी’ परियोजना न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवा के नए युग की शुरुआत कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  के नेतृत्व एवं वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में यह परियोजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी और भविष्यगामी स्वास्थ्य पहल के रूप में उभर रही है। नवा रायपुर अटल नगर पहले से ही शिक्षा, परिवहन, उद्योग और आधुनिक शहरी ढांचे का प्रमुख केंद्र रहा है। अब मेडिसिटी इसे राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थकेयर की राजधानी के रूप में स्थापित करने जा रहा है। अत्याधुनिक कनेक्टिविटी, व्यापक परिवहन नेटवर्क और भौगोलिक दृष्टि से रणनीतिक स्थिति नवा रायपुर को न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए भी उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख गंतव्य बना रही है। हर वर्ष 7 करोड़ से अधिक यात्री यहां के एयरपोर्ट और रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं, और जल्द ही शुरू होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बाद मेडिकल टूरिज्म के विस्तृत अवसर यहां खुलने वाले हैं। सेक्टर 36–37 में 200 एकड़ में विकसित की जा रही मेडिसिटी में 5,000 से अधिक बेड की क्षमता और देश के अग्रणी हेल्थकेयर समूहों की भागीदारी इस परियोजना को देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य शहर के रूप में स्थापित करेगी। मेडिसिटी में मेडिकल यूनिवर्सिटी, नर्सिंग कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित किए जा रहे हैं ताकि डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल पेशेवरों की नई और सक्षम पीढ़ी तैयार हो सके। कार्डियोलॉजी, कैंसर साइंस, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और मल्टी–स्पेशियलिटी अस्पतालों के साथ अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स लैब्स यहां स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। मरीजों और उनके परिजनों के लिए आवासीय परिसर, छात्रावास, होटल और धर्मशाला जैसी सुविधाएँ इस पूरे क्षेत्र को एक व्यवस्थित ह्यूमन–सेंट्रिक मेडिकल ज़ोन में बदल देंगी। ‘वॉक-टू-हॉस्पिटल’ मॉडल, पर्यावरण अनुकूल डिजाइन, सुगम सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी और पीएमजेएवाई व सीजीएचएस जैसी योजनाओं के तहत किफायती उपचार सेवाएँ इस परियोजना को पूरी तरह समावेशी बनाती हैं। उल्लेखनीय है कि नवा रायपुर में पहले से सक्रिय उत्कृष्ट स्वास्थ्य संस्थान इस संरचना को और भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं। श्री सत्य साई संजीवनी हॉस्पिटल 2012 से बाल हृदय रोग के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अग्रणी केंद्र है, जहाँ भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अफ्रीकी देशों से भी मरीज आते हैं। वहीं 2018 से संचालित 170 बिस्तरों वाला बालको कैंसर हॉस्पिटल सेंट्रल इंडिया के 500–600 किमी के दायरे में अत्याधुनिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराता है। रायपुर का स्वच्छ वातावरण और कम जीवन–यापन लागत मरीजों के लिए इसे और उपयुक्त बनाती है। मेडिसिटी केवल एक स्वास्थ्य परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों का भी विशाल केंद्र बनेगी। स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस और सपोर्ट सेवाओं में हजारों रोजगार सृजित होंगे। इसके आसपास किफायती आवास, व्यापारिक प्रतिष्ठान और नई सेवा गतिविधियों का विस्तार राज्य की जीडीपी में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ सरकार का वह संकल्प है जो कहता है—सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य, कम लागत में उच्च सुविधा और सुरक्षित जीवन की गारंटी। यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के स्वस्थ, सुरक्षित और विकसित भविष्य की नई परिभाषा है। आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर मेडिसिटी न सिर्फ मध्य भारत बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श हेल्थकेयर मॉडल के रूप में स्थापित होगी। नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का ऐसा इंजन बनेगी, जो आने वाले दशकों तक राज्य की विकास रफ्तार को नई दिशा देगा। 200 एकड़ में विकसित हो रही यह विश्वस्तरीय हेल्थकेयर सिटी न सिर्फ उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करेगी, बल्कि स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस, शिक्षा और सेवा क्षेत्रों में हजारों रोजगार सृजित कर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देगी। एम्स, बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट, मेडिकल यूनिवर्सिटी और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों की स्थापना से नवा रायपुर राष्ट्रीय हेल्थ हब के रूप में उभरेगा।  मेडिसिटी का मॉडल ‘सुलभता, किफायत और उच्च गुणवत्ता’ के सिद्धांतों पर आधारित है और यह आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को मेडिकल टूरिज्म, रिसर्च और हेल्थ इकोनॉमी का अग्रणी केंद्र बनाएगा।-वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही मेडिसिटी  मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई शुरुआत है। 200 एकड़ में विकसित हो रहा यह विशाल हेल्थकेयर सिटी आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ ही नहीं, ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र सहित पूरे क्षेत्र को अत्याधुनिक, सुलभ और किफायती चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करेगा। ‘नवा रायपुर मेडिसिटी’ उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ, मेडिकल शिक्षा, अनुसंधान और मेडिकल टूरिज्म सभी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराते हुए भारत के विकसित भविष्य की मजबूत आधारशिला बनेगी। – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

सैनी सरकार की बड़ी पहल: हरियाणा में जनगणना अब पूरी तरह डिजिटल तरीके से

चंडीगढ़ हरियाणा में 2027 में होने वाली जनगणना के लिए सैनी सरकार ने रोडमैप जारी किया है। हरियाणा की फाइनेंशियल कमिश्नर सुमिता मिश्रा ने शुक्रवार को कहा कि जनगणना पूरी तरह से डिजिटल मोड में की जाएगी। मिश्रा 2027 की जनगणना के लिए राज्य नोडल अधिकारी भी हैं। सुमिता ने कहा कि एन्यूमरेटर और सुपरवाइज़र डेटा इकट्ठा करेंगे और डिजिटल तरीके से एक सेंट्रल सर्वर पर अपलोड करेंगे। उन्होंने एक ऑफिशियल बयान में कहा कि मोबाइल ऐप, एक पोर्टल और दूसरे टूल एंड्रॉयड और iOS प्लेटफॉर्म पर हिंदी, इंग्लिश और 14 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होंगे। जनगणना अधिकारी नियुक्त  सभी लेवल पर जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति की तैयारी शुरू करने के लिए सुमिता मिश्रा ने सभी डिविजनल कमिश्नरों को डिविजनल जनगणना अधिकारी और डिप्टी कमिश्नरों/जिला मजिस्ट्रेटों को अपने अधिकार क्षेत्र में काम की निगरानी के लिए प्रिंसिपल जनगणना अधिकारी नियुक्त किया है। एडिशनल डिप्टी कमिश्नरों, एडिशनल जिला मजिस्ट्रेटों और सीनियर डिप्टी कलेक्टरों को जिला जनगणना अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह स्ट्रक्चर सब-डिवीजनल और ब्लॉक लेवल तक फैला हुआ है ताकि ग्रामीण क्लस्टर और तहसीलों में पूरी कवरेज पक्की हो सके। उन्होंने कहा कि फील्ड ऑपरेशन के दौरान टेक्निकल सपोर्ट, डेटा वैलिडेशन और लॉजिस्टिक कोऑर्डिनेशन देने के लिए प्लानिंग, स्टैटिस्टिक्स, इन्फॉर्मेटिक्स और एजुकेशन डिपार्टमेंट के ऑफिसर्स को एडिशनल या डिप्टी डिस्ट्रिक्ट सेंसस ऑफिसर अपॉइंट किया गया है। डिफेंस इलाकों के लिए अलग प्रोटोकॉल बनाया गया  शहरी इलाकों के लिए, म्युनिसिपल कमिश्नर और एडमिनिस्ट्रेटिव हेड प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर के तौर पर काम करेंगे, जबकि शहरी निकायों के CEO और सेक्रेटरी चार्ज सेंसस ऑफिसर के तौर पर काम करेंगे। सिर्फ मिलिट्री, पैरामिलिट्री और दूसरे डिफेंस संस्थानों के कब्ज़े वाले इलाकों के लिए एक अलग प्रोटोकॉल बनाया गया है। सेंसस ऑपरेशन के डायरेक्टर संबंधित अधिकारियों से सलाह करके इन इलाकों के लिए स्पेशल चार्ज ऑफिसर तय करेंगे। सरकार या पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) के कंट्रोल वाली कॉलोनियों के लिए भी खास नियम बनाए गए हैं, जिनमें रेलवे, सिंचाई, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट और थर्मल पावर स्टेशन शामिल हैं। प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर्स को अपने अधिकार क्षेत्र में ऐसे सभी इलाकों की पहचान करनी होगी। 700-800 लोगों की आबादी पर एक एन्यूमेरेटर एन्यूमरेटर और सुपरवाइजर फील्ड ऑपरेशन का मुख्य हिस्सा होंगे। सुमिता मिश्रा ने कहा कि एक एन्यूमेरेटर लगभग 700-800 लोगों की आबादी को संभालेगा और हर सुपरवाइज़र छह एन्यूमेरेटर की देखरेख करेगा, जिसमें 10 परसेंट रिज़र्व इमरजेंसी के लिए रखे जाएंगे। इस एक्सरसाइज को डिजिटल गवर्नेंस में एक बड़ा कदम बताते हुए, उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों को सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम पोर्टल पर मोबाइल नंबर, ईमेल ID, ऑफिस की जगह और पहचान के डॉक्यूमेंट जैसी डिटेल्स के साथ रजिस्टर होना चाहिए ताकि सुरक्षित, पेपरलेस ऑपरेशन पक्का हो सके। उन्होंने आगे बताया कि एन्यूमेरेटर और सुपरवाइज़र के लिए राज्य भर में ट्रेनिंग सेशन अगले साल की शुरुआत में शुरू होने वाले हैं। ज़िला और नगर निगम प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे सभी ग्रामीण, शहरी और स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव इलाकों में जनगणना को आसानी से पूरा करने के लिए लगातार और करीबी तालमेल बनाए रखें। बता दें कि भारत की 16वीं जनगणना जाति के आधार पर 2027 में की जाएगी, जिसकी रेफरेंस डेट 1 अक्टूबर, 2026 होगी। 

अगर माही भाई मैच देखने आते हैं तो वह पल हमारे लिए बहुत ख़ास होगा : राहुल

रांची 30 नवंबर, यानी रविवार को राजधानी रांची क्रिकेट के रोमांच से सराबोर होने वाली है। जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे सीरीज का पहला मुकाबला खेला जाएगा। मैच से पहले दोनों टीमें पूरी तरह मैदान पर उतरी दिखीं। भारतीय खिलाड़ियों ने नेट्स में जमकर पसीना बहाया तो दक्षिण अफ्रीका की टीम भी अपने प्लान को धार देने में जुटी रही। शनिवार को फुल टीम प्रैक्टिस के बाद भारतीय टीम के कप्तान केएल राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मैच से जुड़ी कई अहम बातों पर खुलकर चर्चा की। राहुल ने कहा कि रांची में खेलना हमेशा खास रहा है, क्योंकि यह शहर क्रिकेट की धड़कनों से भरा हुआ है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ”यह महेंद्र सिंह धोनी का शहर है… यहां क्रिकेट नस-नस में दौड़ता है। अगर माही भाई स्टेडियम में मैच देखने आते हैं, तो वह पल हमारे लिए बहुत खास होगा। यहां दर्शकों का समर्थन हमेशा जबरदस्त रहता है।” राहुल के इस बयान ने प्रेस रूम में मौजूद पत्रकारों के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी। पत्रकारों द्वारा किए गए सवालों का जवाब देते हुए राहुल ने टीम संयोजन, विकेटकीपिंग विकल्प और स्पिनर्स के खिलाफ टीम की चुनौतियों पर भी खुलकर बात की। ऋषभ पंत की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में राहुल ने कहा कि अंतिम निर्णय मैच के दिन ही होगा। राहुल ने कहा,”पंत भी टीम में हैं… वह शानदार फॉर्म में हैं। यह कल ही तय हो पाएगा कि वह विकेटकीपिंग करेंगे या सिर्फ बैटिंग पर ध्यान देंगे। टीम मैनेजमेंट इस पर विचार कर रहा है।” टीम इंडिया हाल के दिनों में स्पिनर्स के खिलाफ कमजोर नजर आई है। इस पर भी राहुल ने साफ कहा कि टीम इस चुनौती को अच्छी तरह समझती है और इसे सुधारने के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया,”पुराने और अनुभवी बैट्समैन से हम लगातार सीख रहे हैं कि स्पिन को बेहतर कैसे खेलें। आने वाले समय में हम इस विभाग में और मजबूत होंगे। हर सत्र में हम स्पिनरों पर खास फोकस करके प्रैक्टिस कर रहे हैं।” बॉलिंग और बैटिंग रणनीति को लेकर राहुल ने ज्यादा खुलासा तो नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा कि टीम हालात के अनुसार अपनी प्लानिंग कर चुकी है। उन्होंने बताया कि इस विकेट पर शुरुआत में बैटिंग थोड़ी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, लेकिन मिडल ओवर्स में रन बनाने के अवसर जरूर मिलेंगे। राहुल ने कहा कि डेथ ओवर्स में टीम की बॉलिंग यूनिट काफी मजबूत है, और सभी गेंदबाज अपनी-अपनी भूमिका को लेकर स्पष्ट हैं।उन्होंने कहा, ”हमारा ध्येय दक्षिण अफ्रीका के मजबूत बल्लेबाजी क्रम पर शुरू से दबाव बनाने का रहेगा। बॉलिंग यूनिट इस मैच के लिए तैयार है।” स्टेडियम में होने वाली भीड़ को लेकर राहुल ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए इस तरह का माहौल हमेशा उत्साहित करने वाला होता है।यहां के दर्शक ऊर्जा देते हैं, दबाव नहीं। हम उम्मीद करते हैं कि रविवार को भारत के समर्थन में पूरा स्टेडियम गूंजेगा। रांची के जेएससीए स्टेडियम में रविवार के मैच को लेकर सुरक्षा व्यवस्था भी चाक-चौबंद है और मैच के टिकट पहले ही बिक चुके हैं। अब क्रिकेट फैन्स को बस इंतजार है पहले वनडे के उस शानदार मुकाबले का, जहां हर चौका-छक्का रांची को क्रिकेटकार का त्यौहार बना देगा।  

अधिकारियों का बेऊर-बाढ़ जेल में सर्च ऑपरेशन, कई वार्डों की तलाशी

पटना अपराध एवं अपराधियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से पुलिस ने शनिवार को पटना के अति संवेदनशील बेऊर सेंट्रल जेल और बाढ़ जेल में सघन छापेमारी अभियान चलाया। छापेमारी के दौरान क्या-क्या बरामद हुआ है, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। शनिवार की सुबह लगभग पांच बजे, जब सभी बंदी अपने-अपने वार्डों में बंद थे, तभी भारी पुलिस बल के साथ बेऊर जेल में यह अभियान शुरू किया गया। छापेमारी का नेतृत्व पटना के सिटी एसपी (पूर्वी, मध्य) एवं एडीएम कर रहे थे। इस दौरान अधिकारियों ने बेउर जेल के सभी वार्डों की गहन तलाशी ली। सिटी एसपी (पूर्वी) ने बताया कि छापेमारी अभी चल रही है। इसके समाप्त होने के बाद बरामदगी से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। पटना और आसपास के क्षेत्रों में लगातार हो रही आपराधिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन जेल के अंदर छापेमारी अभियान चलाया। सूत्रों की मानें तो बिहार में कई बड़ी घटनाओं में अपराधियों का तार बेऊर जेल से जुड़ने की आशंका जताई जाती रही है। हाल के दिनों में भी कुछ बड़ी वारदातों को लेकर पुलिस प्रशासन ने अनुमान व्यक्त किया था कि इनका संबंध बेउर जेल से हो सकता है। इसी वजह से प्रशासन द्वारा लगातार जेल में छापेमारी और सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। इधर, बाढ़ अनुमंडल में मौजूद उपकारा में भी छापेमारी अभियान चलाया गया। बाढ़-1 और बाढ़-2 एसडीपीओ, एसडीएम और कई थानों की पुलिस के साथ सुबह 06.00 बजे बाढ़ उपकारा पहुंचे। पुलिस टीम को देख जेल में हड़कंप मच गया। अधिकारियों ने एक-एक वार्ड का बारिकी से निरीक्षण किया। करीब एक घंटे तक तलाशी अभियान चलाया गया। उपकारा बाढ़ के सभी आठ वार्डों (महिला वार्ड सहित) का सघन तलाशी लिया गया। हालांकि इस दौरान कोई आपत्तिजनक सामान नहीं मिला।

यूएस ने किया वीजा देने से इनकार, फीफा विश्व कप के फाइनल ड्रॉ का बॉयकॉट करेगा ईरान

तेहरान ईरान की फुटबॉल फेडरेशन 2026 फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल ड्रॉ का बहिष्कार करेगी। यह ड्रॉ 5 दिसंबर को वॉशिंगटन डीसी में निर्धारित है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान प्रतिनिधिमंडल के कई प्रमुख सदस्यों को वीजा देने से इनकार कर दिया है। शुक्रवार को घोषणा करते हुए फेडरेशन के प्रवक्ता आमिर मेहदी अलावी ने आईआरआईबी टीवी को बताया कि यह फैसला आवश्यक पूछताछ, आंतरिक चर्चाओं और खेल एवं युवा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से परामर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे खेल भावना के विपरीत बताया है। आमिर मेहदी अलावी ने स्पष्ट किया है उन्होंने फीफा के अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो समेत उनके अधिकारियों को वीजा के मुद्दे के बारे में बता दिया गया है। ‘सिन्हुआ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अलावी ने बताया है कि फीफा ने इस मामले को गंभीरता से लेने का वादा किया है। वीजा देने से इनकार करने के बाद फेडरेशन के अध्यक्ष समेत कई खास लोगों पर इसका असर पड़ा है। हालांकि, पुरुषों की नेशनल टीम के हेड कोच आमिर घालेनोई समेत चार सदस्यों को वीजा मिल गया है। फीफा विश्व कप 2026 की शुरुआत 11 जून से होगी। फुटबॉल का यह महाकुंभ 19 जुलाई तक खेला जाएगा, जिसमें 48 टीमें हिस्सा लेने जा रही हैं। इन टीमों को चार-चार के 12 ग्रुप में बांटा जाएगा। इसे यूनाइटेड स्टेट्स, कनाडा और मेक्सिको मिलकर होस्ट करेंगे। ऐसा पहली बार है जब यह टूर्नामेंट तीन देशों में खेला जाएगा। ग्रुप स्टेज के बाद हर ग्रुप से टॉप दो टीमें, साथ ही आठ सबसे ऊंची रैंक वाली तीसरे स्थान पर रहने वाली टीमें, एक बड़े नॉकआउट फेज में जाएंगी, जिससे पिछले एडिशन की तुलना में एक बड़ा और ज्यादा कॉम्पिटिटिव एलिमिनेशन ब्रैकेट बनेगा। फीफा विश्व कप 2026 के लिए कुल 16 स्टेडियम चुने गए हैं। इनमें तीन वेन्यू मेक्सिको में, जबकि दो वेन्यू कनाडा में हैं। शेष 11 वेन्यू यूनाइटेड स्टेट्स में हैं। ईरान की टीम ने 2026 वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह बना ली है। यह फीफा विश्व कप में ईरान की लगातार चौथी मौजूदगी होगी। इस टीम ने कुल 7 बार इस विश्व कप में हिस्सा लिया है।  

गर्ग इलेक्ट्रॉनिक शोरूम में हुई चोरी का खुलासा, थाना अयोध्यानगर पुलिस ने 02 शातिर नकबजन किए गिरफ्तार

शोरूम में चोरी किए इलेक्ट्रॉनिक सामान एवं नगदी सहित लगभग 12 लाख रुपए का मसरूका जब्त   भोपाल     नगरीय क्षेत्र भोपाल में चोरी, नकबजनी तथा संपत्ति संबंधी अपराधो की रोकथाम एवं अपराधियों को पकडकर शतप्रतिशत बरामदगी हेतु पुलिस आयुक्त भोपाल श्री हरिनारायणचारी मिश्र भापुसे और अति. पुलिस आयुक्त श्री अवधेश गोस्वामी भापुसे द्वारा निर्देशित किया गया है।         उक्त दिशा निर्देशो के तारतम्य मे पुलिस उपायुक्त जोन-02 श्री विवेक सिंह (भापुसे) के लगातार निर्देशन में अति.पुलिस उपायुक्त श्री गौतम सोलंकी  के पर्यवेक्षण तथा सहायक पुलिस आयुक्त एम.पी.नगर संभाग श्री मनीष भारद्वाज (भापुसे)  के मार्गदर्शन मे थाना प्रभारी निरीक्षक महेश लिल्हारे के नेतृत्व मे गठित टीम ने 02 शातिर नकबजन से कुल 12 लाख रुपये का मसरुका बरामद करने मे सफलता प्राप्त की है।  घटना का विवरण- दिनाँक 24-25.11.2025 को रात्री में अयोध्या बायपास स्थित गर्ग्स (फर्नीचर) एवं इलेक्ट्रोनिक्स शोरूम में अज्ञात चोर द्वारा शोरूम का ताला तोड़कर गल्ले में रखे नगद 60-70 हजार रूपये एवं ए.टी.एम कार्ड के साथ शोरूम मे रखे सैमसंग,  वेस्टल एवं अन्य ब्राण्ड की एल.ई.डी. टी.व्ही. एवं महंगे मोबाईल फोन व एय़र बर्ड तथा वाटर हीटर, गीज़र, मिक्सर ग्राइंडर, वाटर प्यूरीफायर, फ्रेस व महंगे इलेक्ट्रोनिक्स सामान चोरी कर शोरूम मे रखे सामान गिराकर क्षतिग्रस्त भी किए ।  जिस पर से थाना अयोध्या नगर में अपराध क्र. 507/25 धारा 331(4), 305(ए) बी.एन.एस. का पंजीबध्द कर अनुसंधान मे लिया गया जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्यवाही करने हेतु निर्देशित किया गया। जिसके पालन में टीम गठित कर घटनास्थल के आसपास के फूटेज व मुखबीर तंत्र विकसित कर लगातार आरोपियों की तलाश पतारसी की गई । लगातार प्रयास करने पर बैंक ए.टी.एम में लगे सी.सी.टी.व्ही फुटेज के माध्याम से जानकारी एकत्रित की जिसके आधार पर  संदेही दीपक यादव को अभिरक्षा मे लेकर पूछताछ करने पर दीपक यादव ने अपने साथी तरूण उर्फ महेन्द्र मीना  के साथ मिलकर दिनांक 24.11.2025 की रात्री में गर्ग (फर्नीचर) एवं इलेक्ट्रोनिक्स शोरूम मे चोरी एवं तोड़फोड़ करना स्वीकार किया किया। बाद दीपक यादव की निसादेही पर पर अन्य आरोपी तरूण उर्फ महेन्द्र मीना को पकडा, दोनो आरोपियो ने अपना जुर्म स्वीकार किया जिनके कब्जे से गर्ग (फर्नीचर) एवं इलेक्ट्रोनिक्स शोरूम से चोरी किया गया इलेक्ट्रोनिक्स सामान एवं नगद सहित लगभग कुल 12 लाख रुपये का मसरुका जब्त किया गया। आरोपी – 01. दीपक यादव पिता महेन्द्र यादव उम्र 19 वर्ष पता म.न. 127 बी सेक्टर अयोध्यान गर भोपाल। स्थाई पता-  ग्राम इमलिया थाना/तहसील खनीया धाना जिला शिवपुरी मध्य प्रदेश। शिक्षा- 10 वी व्यवसाय- सिक्युरीटी गार्ड। अपराधिक रिकार्ड 01. अप.क्र. 181/24 धारा 331(3),306 बी.एन.एस  थाना चूनाभट्टी भोपाल 02. अप.क्र. 507/25 धारा 331(4),305(ए) बी.एन.एस  थाना अयोध्या नगर भोपाल 02.तरूण उर्फ दीपक मीना पिता राजेश मीना उम्र 19 वर्ष पता ग्राम देहरी तहसील/थाना अहमदपुर जिला सीहोर। हाल पता तुलसी लोधी का किराये का मकान दामखेड़ा थाना छोला मंदिर भोपाल शिक्षा- 05 वी कक्षा व्यवसाय- ड्रायवरी का काम। आपराधिक रिकार्ड- 01.- अप.क्र. 507/25 धारा 331(4),305(ए) बी.एन.एस  थाना अयोध्या नगर भोपाल सराहनीय भूमिका –  थाना प्रभारी श्री महेश लिल्हारे, उनि. सुदील देशमुख,  प्रआऱ 1177 अमित व्यास, प्रआर.3178 बृजेश सिंह, प्र.आर.2233 रूपेश सिंह जादौन, प्र.आऱ.2638 सुदीप राजपूत, प्र.आर.316 भागवत, आर.3040 अजय,  आर.3514 राजेश अन्नोटिया, आर.1055 प्रदीप दामले, आर.3457 भूपेन्द्र उईके,म.आर.3837 पल्लवी शर्मा (सायवर सेल) की सराहनीय भूमिका रही ।

रोडवेज कर्मियों की हड़ताल से जनजीवन प्रभावित, महिला यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी

पटियाला/होशियारपुर/लुधियाना/संगरूर पंजाब रोडवेज, PUNBUS और PRTC के कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रही। बसें न चलने की वजह से आम यात्रियों को भारी परेशानी हुई। खासकर महिलाओं को मुफ्त यात्रा न होने की वजह से नुकसान उठाना पड़ा और उन्हें प्राइवेट बसों में टिकट खरीदकर सफर करना पड़ा। कर्मचारियों का गुस्सा इसलिए है क्योंकि सरकार किलोमीटर स्कीम के तहत टेंडर खोल रही है। उनका आरोप है कि यह सरकारी बसों को खत्म करने और प्राइवेट ऑपरेटरों को फायदा पहुंचाने की 'पीछे के दरवाजे' वाली चाल है। प्राइवेट बसें सरकारी रूटों पर चलेंगी और हजारों कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।   'हमारे 4 बड़े लीडर अभी भी पुलिस हिरासत में हैं' होशियारपुर में PUNBUS कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट संदीप सिंह ने बताया, 'हमारे 4 बड़े लीडर अभी भी पुलिस हिरासत में हैं, स्टेट कमेटी मेंबर कुलवंत सिंह, डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट रामिंदर सिंह, सेक्रेटरी नरिंदर सिंह और कैशियर धर्मिंदर सिंह। जब तक ये रिहा नहीं होंगे, किलोमीटर स्कीम के टेंडर रद्द नहीं होंगे और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का नहीं किया जाएगा, तब तक हमारा धरना और हड़ताल जारी रहेगी।' संदीप सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'पिछले 4 साल में पंजाब रोडवेज़ को एक भी नई बस नहीं दी गई। 500 से ज्यादा पुरानी बसें सड़क से बाहर हो चुकी हैं। जो बसें चल रही हैं, उनमें भी बड़े-बड़े रिपेयर की जरूरत है। टायर तक खरीदने के पैसे नहीं हैं। मेंटेनेंस के लिए फंड ही नहीं है।' धुरी थाने के SHO की यूनिफॉर्म में लगी आग, झुलसे शुक्रवार को हड़ताल शुरू होने से पहले ही पुलिस ने कई यूनियन लीडरों को हिरासत में ले लिया था। इसके बाद कई जगह कर्मचारियों और पुलिस में झड़प हुई। संगरूर में तो मामला बहुत गंभीर हो गया। वहां कुछ कर्मचारी बस के ऊपर चढ़ गए और पुलिस वालों पर पेट्रोल छिड़क दिया। धुरी थाने के SHO की यूनिफॉर्म में आग लग गई और वे झुलस गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लुधियाना में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा की। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'सरकार हमारी मांग मान ले और हिरासत में लिए गए साथियों को तुरंत रिहा करे।' मुफ्त यात्रा करने वाली महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के नेता सरवन सिंह पंधेर ने भी कर्मचारियों का खुलकर साथ दिया। उन्होंने राज्य सरकार पर इस स्कीम को प्राइवेट ठेकेदारों के हित में लाने का आरोप लगाया। दूसरी तरफ सड़कों पर सरकारी बसें गायब होने से यात्रियों का बुरा हाल है। प्राइवेट बस वाले मनमाना किराया वसूल रहे हैं। मुफ्त यात्रा करने वाली महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। कर्मचारी कह रहे हैं कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, हड़ताल खत्म नहीं होगी। सरकार और यूनियनों के बीच अभी तक कोई बातचीत शुरू नहीं हुई है। अब देखने वाली बात ये है कि यह आंदोलन कब तक चलता है और आम जनता को कब तक परेशानी झेलनी पड़ती है। 

सिलसिलेवार चोरी का खुलासा: फुटेज वायरल होते ही सक्रिय हुई पुलिस, ब्लैकमेलर गिरोह पकड़ा गया

जांजगीर-चांपा अकलतरा क्षेत्र में हुए सिलसिलेवार चोरी का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। अकलतरा थाना और सायबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में कस्तूरी ट्रेडर्स में हुई बड़ी चोरी के चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से लगभग 3 लाख रुपये नगद, सोने-चांदी के जेवरात, 28 चांदी के सिक्के, दो मोटरसाइकिल और एक ऑटो बरामद किया गया है। मामले के दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। जानकारी के अनुसार, 23 नवंबर को प्रार्थी अर्चित अग्रवाल ने अकलतरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह 21 नवंबर को परिवार सहित खरसिया एक पारिवारिक शादी में गए थे। वापसी पर घर का ताला टूटा हुआ मिला। घर के अंदर सीसीटीवी डीवीआर की हार्डडिस्क चोरी थी, सामान बिखरा पड़ा था, तथा घर से नकदी, जेवरात और चांदी के सिक्के चोरी हो चुके थे। रिपोर्ट पर धारा 331(4), 305(ए), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया गया। मामले में एसपी के निर्देश पर विशेष टीम बनाई गई। वहीं फॉरेंसिक, फिंगर प्रिंट और डॉग स्क्वॉड की मदद से जांच आगे बढ़ाई गई। इस दौरान शहर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए। सीसीटीवी फुटेज और लगातार निगरानी के बाद संजय नगर निवासी अफरोज खान और किशन कश्यप पर शक गहरा हुआ, तो दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें आरोपियों ने अपराध कबूल किया। ऐसे दिए चोरी की वारदात को अंजाम आरोपी अफरोज ने बताया कि 21-22 नवंबर की दरम्यानी रात वह अपने साथी अनिल साहू और किशन कश्यप के साथ मोटरसाइकिल से सीसीआई ग्राउंड पहुंचा। किशन, जो पहले कस्तूरी ट्रेडर्स में काम कर चुका था, दुकान और घर की पूरी जानकारी रखता था। उन्होंने योजना बनाकर दुकान के ग्रिल का ताला तोड़ा, सीसीटीवी हार्डडिस्क निकाल ली और ऊपर स्थित कमरे की अलमारी तोड़कर नकदी, सोना-चांदी, सिक्के बैग में भरकर ले गए। चोरी का सामान बाद में अफरोज के ऑटो में छिपाया गया। चोरी का फुटेज वायरल, शुरू हुआ ब्लैकमेल का खेल और बंटे हिस्से कुछ दिनों बाद जब चोरी का सीसीटीवी फुटेज वायरल होने लगा, तब संजय नगर निवासी राजेश रगड़े उर्फ दादा, राजेश सिदार और सुभाष रगड़े उर्फ बाबू ने फुटेज देखकर अफरोज खान को बुलाया और उसे ब्लैकमेल करने लगे। उन्होंने कहा कि चूंकि वही लोग अर्चित अग्रवाल के घर में चोरी करने गए थे, इसलिए चोरी की रकम और जेवरात में से उन्हें भी हिस्सा दिया जाए। इसके बाद अगले दिन अफरोज खान बिलासपुर में बंटवारा करने की बात कहकर किशन कश्यप के लिए ₹1,00,000, राजेश रगड़े उर्फ दादा के लिए 50,000, सुभाष रगड़े उर्फ बाबू के लिए 20,000 और राजेश सिदार के लिए 82,000 अलग कर दिया। अफरोज, सुभाष रगड़े को अपने ऑटो में बैठाकर बिलासपुर ले गया। वहीं राजेश रगड़े उर्फ दादा अपनी मोटरसाइकिल से और किशन कश्यप तथा राजेश सिदार भी बिलासपुर पहुंचे, जहां उनके हिस्से की रकम दे दी गई। अफरोज खान बाकी बचे सभी जेवर, चांदी के सिक्के, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, नकदी राशि और सिक्का पैसा एक नीले बैग में भरकर वापस ले आया। पुलिस ने उसके बताए अनुसार 2,11,000 नगद, 27 चांदी के सिक्के, सोने-चांदी की अंगूठियां, बिछिया, चांदी की राखी, बेलपत्र, मछली, त्रिशूल और अन्य ज्वेलरी जब्त कर ली है। घटना में प्रयुक्त ऑटो भी जब्त किया गया है। राजेश रगड़े उर्फ दादा से 50,000 और उसकी मोटरसाइकिल तथा सुभाष रगड़े उर्फ बाबू से 20,000 भी बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों के नाम     सुभाष रगड़े (21 वर्ष)     अफरोज खान (30 वर्ष)     राजेश सगड़े (40 वर्ष)     अनिल साहू (34 वर्ष)  

भागवत का संदेश: राष्ट्रवाद की अवधारणा भारत में पश्चिमी सोच से अलग, भाईचारा हमारी पहचान

नागपुर   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि विवादों में पड़ना भारत के स्वभाव में नहीं है और देश की परंपरा ने हमेशा भाईचारे और सामूहिक सद्भाव पर जोर दिया है. नागपुर में एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने कहा कि भारत की राष्ट्रवाद की अवधारणा पश्चिमी सोच से पूरी तरह अलग है. नागपुर में एक कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि भारत की राष्ट्रवाद की अवधारणा पश्चिमी सोच से पूरी तरह अलग है. उन्होंने कहा, 'हमारी किसी से कोई बहस नहीं होती. हम झगड़ों से दूर रहते हैं. झगड़ा करना हमारे देश के स्वभाव में नहीं है. साथ रहना और भाईचारा बढ़ाना हमारी परंपरा है.' उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के दूसरे हिस्से टकराव वाले हालात में ही बने हैं.' उन्होंने कहा, 'एक बार कोई राय बन जाने के बाद उस विचार के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं होता. वे दूसरे विचारों के लिए दरवाजे बंद कर देते हैं और उसे इज्म कहना शुरू कर देते हैं.' भागवत ने यह भी कहा कि भारत की राष्ट्र की अवधारणा पश्चिमी व्याख्याओं से मूल रूप से अलग है.' उन्होंने जोर देकर कहा, 'वे राष्ट्र के बारे में हमारे विचार नहीं समझते, इसलिए उन्होंने इसे 'राष्ट्रवाद' कहना शुरू कर दिया.' 'राष्ट्र' का हमारा कॉन्सेप्ट, राष्ट्र के पश्चिमी विचार से अलग है. हमारे बीच इस बारे में कोई मतभेद नहीं है कि यह राष्ट्र है या नहीं — यह एक 'राष्ट्र' है और यह पुराने समय से मौजूद है.' उन्होंने दावा किया, 'हम राष्ट्रीयता शब्द का इस्तेमाल करते हैं, राष्ट्रवाद का नहीं. देश पर बहुत ज्यादा गर्व की वजह से दो वर्ल्ड वॉर हुए. इसीलिए कुछ लोग राष्ट्रवाद शब्द से डरते हैं.' आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत का राष्ट्रवाद घमंड या गर्व से पैदा नहीं हुआ है, बल्कि लोगों के बीच गहरे जुड़ाव और प्रकृति के साथ उनके सह-अस्तित्व से पैदा हुआ है. उन्होंने ज्ञान के महत्व पर भी जोर दिया जिससे समझदारी आती है और इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ जानकारी से ज्यादा व्यावहारिक समझ और एक सार्थक जीवन जीना जरूरी है. उन्होंने कहा कि सच्ची संतुष्टि दूसरों की मदद करने से मिलती है. यह एक ऐसी भावना है जो अस्थायी सफलता के विपरीत, जीवन भर बनी रहती है.

मौलाना मदनी का बयान विवादित: जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी मीटिंग में सुप्रीम कोर्ट पर उठाए सवाल

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी काउंसिल की मीटिंग में मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मदनी ने कहा कि अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं। मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट उसी समय ‘सुप्रीम’ कहलाने का हकदार है जब वह संविधान की पाबंदी करे। मदनी ने कहा कि जब जब जुल्म होगा तब तब जिहाद होगा। जिहाद शब्द हिंसा का हमनाम बना दिया जिहाद पर मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा- इस्लाम के दुश्मनों में जिहाद शब्द हिंसा का हमनाम बना दिया है। लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्द इस्तेमाल करके मुसलमानों की तौहीन की जा रही है। ये साफ होना चाहिए इस्लाम में जिहाद एक पवित्र कर्तव्य है। कुरान में जिहाद के कई अर्थ है। समाज और इंसानियत के बुलंदी के लिए हुआ है, जहां जंग के मायने में इस्तेमाल हुआ है तो जुल्म के खात्मे के लिए हुआ है। जब जब जुल्म तब तब जिहाद होगा। जिहाद’ को लेकर मौलाना मदनी ने कहा, 'आज सरकार और मीडिया एक पवित्र शब्द को पूरी तरह गलत तरीके से दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि जिहाद को लव जिहाद, थूक जिहाद, जमीन जिहाद जैसे शब्दों के साथ जोड़कर बदनाम किया जा रहा है, जबकि जिहाद हमेशा पवित्र रहा है और दूसरों की भलाई और बेहतरी के लिए बताया गया है. उन्होंने कहा, 'जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा.' उन्होंने इस बात को दोहराया भी- 'जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा.' उन्होंने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष देश भारत में, जहां लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है, वहां जिहाद की कोई बहस नहीं है. यहां मुसलमान संविधान के प्रति वफादारी दिखाते हैं. नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है. अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो इसके लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी. ‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा’ वहीं जिहाद पर बोलते हुए मौलाना मदनी ने कहा कि इस्लाम के विरोधियों ने जिहाद को हिंसा का पर्याय बनाकर पेश किया है. उन्होंने कहा, ‘लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर मुसलमानों का अपमान किया जा रहा है. जबकि इस्लाम में जिहाद एक पवित्र कर्तव्य है. कुरान में इसके अलग-अलग अर्थ हैं… इंसानियत और समाज की बेहतरी के लिए.’ उन्होंने जोर देकर कहा, ‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा… मैं इसे दोहराता हूं, जुल्म के खिलाफ खड़े होना हर आसमानी मजहब की नैतिक जिम्मेदारी है.’ इस बयान के बाद सभा में ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाहु अकबर’ के नारे भी लगे. मदनी ने यह भी स्पष्ट किया कि जिहाद कोई व्यक्तिगत बदले की कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसका फैसला केवल शरीयत के तहत चलने वाली सरकार ही कर सकती है. उन्होंने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां इस्लामी शासन की अवधारणा नहीं है, इसलिए जिहाद बहस का विषय बनाना ही गैर-जरूरी है. वंदे मातरम विवाद पर क्या बोले मदनी? इसके अलावा वंदे मातरम को लेकर विवाद पर मदनी ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा, ‘मुर्दा कौमें सरेंडर करती हैं. अगर कहा जाएगा ‘वंदे मातरम’ बोलो, तो वे बोलना शुरू कर देंगी. जिंदा कौम हालात का मुकाबला करती है.’ हालांकि मौलाना मदनी के इस बयान पर अन्य मुस्लिम संगठनों ने दूरी बना ली है. जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष मौलाना सादातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि वंदे मातरम जैसे मुद्दे को लेकर विवाद पैदा करना तर्कहीन है. उन्होंने कहा, ‘हर व्यक्ति को अपने विश्वास के अनुसार जीने और अपने तरीके से देशप्रेम व्यक्त करने का अधिकार है. किसी एक नारे या गीत को पूरे देश पर थोपना तार्किक नहीं है. जो लोग वंदे मातरम के जरिए अपने प्रेम का इजहार करना चाहें, करें. बाकी लोग अपने तरीके से देश से मुहब्बत जताएं… यह उनका हक है.’ 'मुर्दा कौमें डरकर बोलने लगती हैं वंदे मातरम' वंदेमातरम के मुद्दे पर मौलाना मदनी ने कहा, 'मुर्दा कौमें सरेंडर कर दिया करती हैं. वो कहेंगे वंदे मातरम बोलो तो पढ़ना शुरू कर देंगे. ये पहचान है मुर्दा कौम होने की. अगर जिंदा कौम है तो हालात का मुकाबला करना पड़ेगा. सुप्रीम कहलाने का हक नहीं मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा- बाबरी मस्जिद और तलाक के जुड़े मामले में प्रभाव आम है अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही है। इबादतगाह कानून को नजरअंदाज करके ज्ञानवापी और मथुरा का मामला कोर्ट में सुना गया। सुप्रीम कोर्ट उस वक्त ही सुप्रीम कहलाने का हकदार है जब तक संविधान की पाबंदी करे और अगर ऐसा ना करे तो सुप्रीम कहलाने का हक नहीं है।