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उच्च शिक्षा विभाग ने वीआईटी विश्वविद्यालय प्रकरण में दिखाई कड़ाई

उच्च शिक्षा विभाग का वीआईटी विश्वविद्यालय मामले में कड़ा रुख वीआईटी सीहोर की अव्यवस्थाओं पर जांच समिति की रिपोर्ट, विश्वविद्यालय से 7 दिन में जवाब तलब भोपाल राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने, सीहोर जिले में स्थित निजी वीआईटी विश्वविद्यालय में मेस व्यवस्था, छात्रावास प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अनुशासन तंत्र से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाया है। जांच समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद विभाग ने विश्वविद्यालय प्रशासन से 7 दिनों में बिंदुवार जवाब मांगा है। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि छात्रों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मेस भोजन से 35 छात्र-छात्राएँ बीमार, पेयजल की भी समस्या विश्वविद्यालय प्रबंधन ने समिति के समक्ष यह स्वीकार किया है कि 14 से 24 नवंबर के बीच 23 छात्र और 12 छात्राएँ यानी कुल 35 विद्यार्थी पीलिया से पीड़ित हुए। जांच समिति ने पुष्टि की है कि भोजन और पेयजल की गुणवत्ता पर नियंत्रण कमजोर था तथा कई दिनों तक शिकायतें आने के बावजूद उचित सुधार नहीं किया गया। समिति ने यह भी उल्लेख किया कि छात्र-छात्राओं ने प्रबंधन से पेयजल में दुर्गंध आने की शिकायत की थी, परंतु प्रबंधन द्वारा इस पर समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई। विश्वविद्यालय परिसर में तानाशाही जैसी व्यवस्था जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि परिसर में प्रबंधन एकतरफा और तानाशाही रवैया अपनाता है। रिपोर्ट में उल्लेख है कि कर्मचारियों से प्रतिरोध या शिकायतें सुनने की अनुमति नहीं होती और छात्रों पर अनुशासन के नाम पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। समिति ने उल्लेख किया है कि सीहोर जिले के मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO )और स्वास्थ्य अधिकारियों को विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर दो घंटे तक रोककर रखा गया, जबकि वे स्थितियों का निरीक्षण करने आए थे। छात्रों में असुरक्षा और अविश्वास का भाव व्याप्त समिति के अनुसार विश्वविद्यालय परिसर का वातावरण ऐसा है जहाँ छात्र स्वयं को सुरक्षित और स्वतंत्र महसूस नहीं करते हैं। अनुशासन तंत्र भय आधारित है, जिसके कारण छात्र अपनी समस्याएँ खुलकर नहीं बता पाते हैं। रिपोर्ट बताती है कि शिकायतें बढ़ती रहीं, परंतु प्रशासन ने छात्रों को शांत करवाने या माहौल सुधारने की दिशा में कोई रचनात्मक कदम नहीं उठाया। जब स्थिति बिगड़ गई और छात्र आंदोलन की ओर बढ़े, तब भी प्रबंधन द्वारा प्रभावी नियंत्रण या संवाद स्थापित नहीं किया गया।  अव्यवस्थित स्वास्थ्य केंद्र और बीमारी नियंत्रण में लापरवाही समिति ने पाया कि विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्वास्थ्य केंद्र में बीमारी फैलने की जानकारी होने के बावजूद समय पर उपचार, परीक्षण और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया सक्रिय नहीं की गई। स्वास्थ्य केंद्र स्टाफ केवल औपचारिक स्तर पर दवाएँ दे रहा था। बीमारी नियंत्रण के लिए न तो प्रबंधन ने कोई विशेष अभियान चलाया गया और न ही प्रभावित छात्रों की नियमित मॉनिटरिंग की गई।रिपोर्ट में कहा गया है कि बीमारी फैलने की वास्तविक स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन की जानकारी में थी, फिर भी आवश्यक कदम समय पर नहीं उठाए गए। विभाग ने मांगा बिंदुवार जवाब उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय से मेस के भोजन की गुणवत्ता, पेयजल की शुद्धता और 35 छात्रों के बीमार होने संबंधी पूरी रिपोर्ट, परीक्षण और उपचार विवरण, हॉस्टल प्रबंधन, जलापूर्ति, स्वच्छता और रखरखाव में कमी के कारण तथा अब तक उठाए गए सुधारात्मक कदम, छात्रों की बार-बार की शिकायतों पर समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, अनुशासन के नाम पर छात्रों व कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डालने और शिकायतों को दबाने के आरोपों पर स्पष्टीकरण, CMHO और स्वास्थ्य अधिकारियों को गेट पर रोके जाने की पूरी जानकारी और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान, बीमारी फैलने के बाद स्वास्थ्य केंद्र और प्रबंधन द्वारा अपनाए गए नियंत्रण उपायों का विवरण आदि समस्त विद्यार्थी हितों से जुड़े विषयों पर 7 दिनों के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। उच्च शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि उत्तर संतोषजनक नहीं रहा तो निजी विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।  

पुल स्पान दुर्घटना के बाद कार्रवाई तेज, प्रबंधक को किया गया निलंबित

बरेली–पिपरिया मार्ग पर पुल का स्पान गिरने की घटना में प्रबंधक निलंबित वर्तमान एवं तत्कालीन संभागीय प्रबंधक एवं सहायक महाप्रबंधकों को नोटिस मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित भोपाल बरेली–पिपरिया मार्ग (किमी 4/10) पर स्थित उच्च स्तरीय पुल का एक स्पान सोमवार को मरम्मत कार्य के दौरान अचानक ढह गया, जिससे मोटरसाइकिल से गुजर रहे चार युवक नीचे गिरकर घायल हो गए। सभी घायलों का उपचार बरेली सिविल अस्पताल में जारी है। यह पुल वर्ष 1980 में लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित किया गया था और वर्ष 2010 से म.प्र. सड़क विकास निगम के संधारण में है। रैम्स सॉफ्टवेयर से किए गए सर्वे में पुल के विभिन्न अवयवों जैसे स्लैब रीइन्फोर्समेंट में जंग, एक्सपेंशन जॉइंट में खराबी तथा प्रोटेक्शन वर्क की कमजोर स्थिति को देखते हुए इसके मरम्मत एवं पुनर्निर्माण के लिए ₹98 लाख की स्वीकृति 29 मई 2025 को प्रदान की गई थी। घटना के तुरंत बाद विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित फील्ड स्टाफ की जिम्मेदारी तय कर प्रबंधक  ए.ए. खान को निलंबित कर दिया तथा वर्तमान एवं तत्कालीन संभागीय प्रबंधक एवं सहायक महाप्रबंधकों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया। साथ ही मुख्य अभियंता  गोपाल सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है, जो सात दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। रिपोर्ट के आधार पर विभाग द्वारा आगे की कठोर कार्रवाई की जाएगी। पुल का स्पान गिर जाने के कारण मार्ग पर यातायात प्रभावित हो गया है, जिसे अब वैकल्पिक डायवर्जन मार्ग से संचालित किया जा रहा है। फिलहाल यातायात को ग्राम नागपुरिया में स्थित पुरानी पुलिया के माध्यम से मोड़ा गया है। इसके साथ ही क्षतिग्रस्त पुल के समीप ह्यूम पाइप डालकर अस्थायी डायवर्जन भी बनाया जा रहा है, ताकि वाहनों की आवाजाही सुचारू रखी जा सके। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गए हैं और मरम्मत कार्य की निगरानी तीव्र की गई है।  

स्मार्ट तकनीक आधारित त्वरित निराकरण प्रणाली और संवेदनशील पुलिसिंग से बढ़ी सड़क सुरक्षा और नागरिकों का विश्वास

बेहतर यातायात प्रबंधन और महिला सुरक्षा के लिए भोपाल,इंदौर ,अशोकनगर और डिंडोरीपुलिस का सार्थक प्रयास स्मार्ट तकनीक आधारित त्वरित निराकरण प्रणाली और संवेदनशील पुलिसिंग से बढ़ी सड़क सुरक्षा और नागरिकों का विश्वास यातायात प्रबंधन और महिला सुरक्षा में भोपाल, इंदौर, अशोकनगर व डिंडोरी पुलिस के सफल प्रयास भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा भोपाल, इंदौर, अशोकनगर तथा डिंडोरी में कानून‑व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और महिला सुरक्षा को नई दिशा देने के लिए तकनीक-संचालित एवं नागरिक–केंद्रित सार्थक प्रयास प्रारंभ किए गए हैं। इन पहलों का उद्देश्य ट्रैफिक दबाव, भौगोलिक व संरचनात्मक चुनौतियों तथा महिला सुरक्षा की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए अधिक सुरक्षित, सुगम और नागरिक‑अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है। भोपाल – क्यूआर कोड आधारित शिकायत/सुझाव प्रणाली भोपाल में नगरीय यातायात पुलिस द्वारा आम नागरिकों की आसान और सीधे सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष QR कोड प्रणाली शुरू की गई है। नागरिक इस क्यूआर कोड को स्कैन कर किसी भी चौराहे, तिराहे, सड़क या क्षेत्र से संबंधित समस्या, सुझाव या अव्यवस्था की सूचना सीधे भेज सकते हैं। प्राप्त जानकारियों का संकलन कर परीक्षण उपरांत पुलिस उपायुक्त, यातायात द्वारा आवश्यकतानुसार स्थल निरीक्षण, त्वरित सुधारात्मक कदम तथा संबंधित विभागों से समन्वय कर निराकरण किया जा रहा है। इस पहल से यातायात प्रबंधन अधिक नागरिक‑केंद्रित, सहभागितापूर्ण और पारदर्शी बन रहा है तथा सुरक्षित आवागमन के लिए नियम पालन की जन‑जागरूकता भी बढ़ रही है। इंदौर – व्हाट्सएप हेल्पलाइन से त्वरित ट्रैफिक समाधान इंदौर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 7049107620 जारी किया गया है। इस हेल्पलाइन पर प्राप्त 1119 शिकायतों में से 1077 का त्वरित निराकरण कर पुलिस ने नागरिकों में भरोसा और शीघ्र सेवा की अपेक्षा को और मजबूत किया है। शेष 44 शिकायतों पर भी सतत कार्यवाही जारी है। हेल्पलाइन पर मुख्य रूप से ऑटो/ई–रिक्शा द्वारा अव्यवस्थित रूप से सवारी बैठाने, शाम के समय मुख्य मार्गों पर बढ़ते यातायात दबाव तथा शादी/बारात/मैरिज गार्डन आदि के कारण होने वाले ट्रैफिक अवरोध से संबंधित समस्याएँ प्राप्त हुईं, जिनका समाधान ट्रैफिक वायरलेस कंट्रोल, फील्ड टीमों, क्रेन/सपोर्ट तथा तत्काल पेट्रोलिंग कार्रवाई के माध्यम से किया गया। अशोकनगर – ‘निर्भया पुलिस मोबाइल’ से महिला सुरक्षा को नया आयाम महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अशोकनगर में पुलिस अधीक्षक  राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में ‘निर्भया पुलिस मोबाइल’ सेवा का शुभारंभ किया गया है। इस सेवा का उद्देश्य महिला संबंधी अपराधों की रोकथाम, सुरक्षा की सतत उपस्थिति तथा त्वरित पुलिस सहायता सुनिश्चित करना है। निर्भया पुलिस मोबाइल स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग सेंटरों एवं अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार पेट्रोलिंग कर महिलाओं और छात्राओं में सुरक्षा का भाव मजबूत करेगी। रात्रि 10:00 बजे से प्रातः 05:00 बजे तक शहर में किसी भी अकेली महिला या बालिका की जानकारी मिलने पर उसे सुरक्षित उसके घर तक पहुँचाने की सुविधा प्रदान की गई है, जिसके लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 7587619200 जारी किया गया है। इस यूनिट में एक उप निरीक्षक, दो महिला आरक्षक तथा दो पुरुष आरक्षकों का विशेष बल तैनात है, जिसका संचालन एवं समन्वय महिला सुरक्षा शाखा अशोकनगर द्वारा किया जा रहा है। डिंडोरी पुलिस -क्यूआर कोड आधारित ऑनलाइन शिकायत प्रणाली जनहित में पारदर्शिता और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने हेतु जिले में ऑनलाइन शिकायत प्रणाली शुरू की गई है, जिसके माध्यम से नागरिक बिना किसी भय या औपचारिकता के अपनी समस्या सीधे पुलिस अधीक्षक तक पहुँचा सकते हैं। क्यूआर कोड आधारित इस सुविधा से नागरिक मोबाइल से कोड स्कैन कर आसानी से ऑनलाइन फॉर्म भरकर शिकायत, सुझाव या दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। थानों, चौकियों, पुलिस लाइन व विभिन्न शासकीय कार्यालयों में लगाए गए क्यूआर कोड लोगों को घर बैठे या सार्वजनिक स्थान से ही शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान करते हैं।  ये सभी पहलें प्रदेश में स्मार्ट, संवेदनशील और नागरिक‑अनुकूल पुलिसिंग का सशक्त उदाहरण बन रही हैं। इन पहलों ने न केवल यातायात अवरोधों में कमी और सड़क सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि महिला सुरक्षा के लिए भरोसेमंद तंत्र विकसित कर पुलिस–नागरिक संवाद एवं विश्वास को भी नई ऊँचाई दी है।  

डीजी/आईजी कॉन्फ्रेंस–2025 में मध्यप्रदेश पुलिस के ‘नशे से दूरी है जरूरी’ नवाचार को मिली राष्ट्रीय सराहना

डीजी/आईजी कॉन्‍फ्रेंस–2025 में DGP मकवाणाके द्वारा प्रस्‍तुत मध्यप्रदेश पुलिस के नवाचारों में नशे से दूरी है जरूरी को मिली राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सराहना भोपाल रायपुर में आयोजित डीजी/आईजी कॉन्‍फ्रेंस–2025में माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित उच्चस्तरीय सत्रों में सामुदायिक पुलिसिंग, उभरते साइबर अपराध, भीड़ प्रबंधन, वैज्ञानिक अन्वेषण,टेक्नोलॉजी-इंटीग्रेशन, साइबर सुरक्षा, नशे से दूरी तथा नागरिक-सहभागिता आधारित सुरक्षा ढाँचे पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इस राष्ट्रीय मंच पर मध्यप्रदेश पुलिस की कई नवाचार पहलें विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रहीं। सम्मेलन के दौरानमध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा द्वारा “Future-Ready Policing: Vision 2047” का व्यापक विज़न प्रस्तुत किया गया। उनकी प्रस्तुति में AI आधारित प्रिडिक्टिवपुलिसिंग, डेटा-संचालित निर्णय प्रक्रिया, साइबर सुरक्षा ढाँचा, कम्युनिटी आउटरीच, आपदा प्रबंधन प्रणालियाँ तथा युवाओं की सकारात्मक भागीदारी जैसे बिंदुओं को भविष्य की पुलिसिंग के प्रमुख स्तंभ के रूप में रेखांकित किया गया। उन्होंने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग तभी प्रभावी हो सकती है जब उसमें तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता – दोनों का संतुलित समावेश हो। सम्मेलन में मध्यप्रदेश पुलिस के राज्यव्यापीनशामुक्तिजनअभियान “नशे से दूरी है ज़रूरी” की भी प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। उन्होंने बताया कि स्कूलों, कॉलेजों, कलाकारों, खिलाड़ियों, स्वयंसेवी संगठनोंकी व्यापक भागीदारी के कारणतथा युवाओं को जोड़ने में यह अभियान एक सशक्त जनआंदोलन के रूप में उभरा है। प्रत्यक्ष कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 23 लाख तथा सोशल मीडिया माध्‍यमोंसे 6करोड़ 35 लाख लोगों तक पहुँच बनाने के परिणामस्वरूप इस अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। “नशे से दूरी है ज़रूरी’’ राज्यव्यापीजनजागरूकता अभियान ने अपनी व्यापकता, प्रभावशीलता तथा वृहद स्तर पर जनसहभागिता के चलते वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया। इस उपलब्धि के लिए WBR (वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स) के CEO  संतोष शुक्ला ने पुलिस मुख्यालय, भोपाल मध्यप्रदेश में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया था। साथ ही उन्हें ब्रिटिश पार्लियामेंट में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सम्मान समारोह हेतु आधिकारिक आमंत्रण भी प्रदान किया गया था, जिससे मध्यप्रदेश पुलिस को वैश्विक स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। मध्यप्रदेश पुलिस की इन पहलों – Vision 2047, “नशे से दूरी है ज़रूरी” अभियान तथा सिंहस्थ–2028 की तकनीकी तैयारियों – ने राष्ट्रीय मंच पर राज्य की पुलिसिंग नवाचार, प्रशासनिक नेतृत्व और अग्रदर्शी सोच को सशक्त रूप से स्थापित किया है।  

कौशल प्रशिक्षण में ग्लोबल स्किल पार्क बना युवाओं की नई दिशा—मंत्री टेटवाल

ग्लोबल स्किल पार्क युवाओं के कौशल प्रशिक्षण को दे रहा है नई दिशा: मंत्री टेटवाल वर्ष 2026 बैच के स्वागत समारोह में 750 बच्चे एवं पेरेन्ट्स हुए शामिल भोपाल कौशल विकास एवं रोजगार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कहा कि ग्लोबल स्किल्स पार्क की निरंतर बढ़ती प्रतिष्ठा के पीछे उसके तीन मूल स्तंभ गुणवत्ता, अनुशासन और उत्कृष्टता हैं, जिनके मार्गदर्शन में संस्थान का प्रवेश और प्लेसमेंट रिकॉर्ड प्रतिवर्ष नई उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और राज्य शासन के निरंतर सहयोग से प्रदेश के युवाओं को केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि रोजगार-योग्यता प्रदान की जा रही है, जिससे कौशल भारत मिशन को नई दिशा और गति मिल रही है। मंत्री टेटवाल ने यह बात संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल्स पार्क में 2025–26 बैच के नए प्रशिक्षु छात्रों के लिए आयोजित स्वागत समारोह के अवसर पर कही। मंत्री टेटवाल ने कहा कि ग्लोबल स्किल पार्क युवाओं के कौशल प्रशिक्षण को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि संस्था का दृढ़ संकल्प है कि हर विद्यार्थी को वैश्विक मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए। ज्ञान और कौशल का यह संगम हमारे युवाओं को न केवल नए अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उन्हें कुशल भारत के अग्रदूत के रूप में स्थापित करते हुए एक उज्ज्वल, समर्थ और सशक्त भविष्य के निर्माण में सक्षम बनाएगा। उन्होंने छात्रों से परिवार के सपनों का सम्मान करने, गुरुजनों के प्रति आदर बनाए रखने तथा संस्थान की विश्व-स्तरीय सुविधाओं का पूर्ण उपयोग कर स्वयं को प्रतिदिन अपग्रेड करने का आग्रह किया। यह कार्यक्रम नए सत्र की शुरुआत के साथ छात्रों में कौशल विकास, अनुशासन और भविष्य की संभावनाओं के प्रति नई ऊर्जा उत्पन्न करेगा। सीईओ डॉ. गिरीश शर्मा ने बताया कि ग्लोबल स्किल पार्क में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या ने नए कीर्तिमान स्थापित किए है। पहली बार संस्थान में पूर्व वर्षों की तुलना में कहीं अधिक छात्रों ने नामांकन किया, जो ग्लोबल स्किल पार्क की बढ़ती प्रतिष्ठा और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के प्रति बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। इस बार असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखंड सहित अनेक राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र पहुँचे। परिसर में लगभग 750 से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति ने एक उत्सवमय वातावरण उत्पन्न कर दिया। कई विद्यार्थी अपने माता-पिता के साथ पहुँचे, जिससे यह और स्पष्ट हुआ कि ग्लोबल स्किल पार्क राष्ट्रीय स्तर पर उन युवाओं की पहली पसंद बन रहा है, जो कौशल, अनुशासन और व्यापक करियर अवसरों के आधार पर अपना उज्ज्वल भविष्य गढ़ना चाहते हैं। डॉ. शर्मा ने बताया कि संस्था के क्लब्स, समिति और मजबूत एलुमनी नेटवर्क विद्यार्थियों को उद्योगों से जुड़ने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि संस्था की प्राथमिक नीति "स्टूडेंट फर्स्ट" है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक निर्णय, प्रत्येक सुविधा और प्रत्येक प्रक्रिया का केंद्र बिंदु विद्यार्थी ही है। संस्थान का लक्ष्य हर विद्यार्थी को सुरक्षित, सहयोगी और विकास-उन्मुख वातावरण प्रदान करना है, जहाँ उनकी ज़रूरतें, सीखने की गति और करियर उन्नति सर्वोच्च प्राथमिकता पर रहती है। स्वागत समारोह नए बैच के लिए संस्था की शैक्षणिक उत्कृष्टता, उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण और सफल भविष्य निर्माण की दिशा में एक सशक्त एवं प्रेरक शुरुआत साबित हुआ।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता जयंती के पावन अवसर पर इंदौर को दी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नये गीता भवन की सौगात

गीता का प्रत्येक अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य की भावना से परिपूर्ण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता जयंती के पावन अवसर पर इंदौर को दी अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नये गीता भवन की सौगात प्रदेश के हर नगर में बनेंगे नये गीता भवन – मुख्यमंत्री डॉ. यादव की घोषणा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव और गीता जयंती के पावन अवसर पर एक बड़ी सौगात देते हुए मध्यप्रदेश में शासकीय क्षेत्र के पहले अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त नये गीता भवन का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस तरह के गीता भवन प्रदेश के सभी नगर निगम, नगर पालिकाओं और नगर पंचायत स्तर पर भी बनाये जाएंगे। इंदौर का लोकार्पित यह नया गीता भवन परंपरा एवं आधुनिकता का अनूठा संगम है। राज्य शासन द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक अध्ययन एवं इससे जुड़े विभिन्न आयामों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गीता भवन परियोजना के अंतर्गत ऐतिहासिक गोपाल मंदिर परिसर को आधुनिक गीता भवन के रूप में विकसित कर प्रदेश को समर्पित किया गया है। इस योजना के तहत स्मार्ट सिटी द्वारा इस नये गीता भवन में विकसित विविध आधुनिक सुविधाएँ नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, विधायक गोलु शुक्ला, सुमित मिश्रा, श्रवण सिंह चावड़ा, अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर, गौरव रणदिवे, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव, भारत न्यास के सचिव राम तिवारी, स्मार्ट सिटी के सीईओ अर्थ जैन विशेष रूप से मौजूद थे। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मालवा की गौरवशाली विरासत, कृष्ण भक्ति और गीता का संदेश मध्यप्रदेश की दिशा तय करते हैं। उन्होंने कहा कि मालवा क्षेत्र कृष्ण लीलाओं से अछूता नहीं है। कृष्ण भगवान ने मालवा के उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की। उन्होंने कहा कि मालवा की अहिल्या बाई होलकर ने देश में अनेक धर्म स्थलों का जीर्णोद्धार कराया और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गीता संघर्ष में आत्मबल और जीवन में मार्गदर्शन देती है। गीता का प्रत्येक अध्याय ज्ञान, विज्ञान, दर्शन, योग और कर्तव्य की भावना से परिपूर्ण है। भगवान कृष्ण ने अपने विराट स्वरूप के माध्यम से मानव को भय से मुक्त कर कर्तव्य के प्रति जागरूक किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गीता जयंती के अवसर पर अनेक रिकार्ड कायम किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गीता जयंती के अवसर पर आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि विजेताओं का नगद के साथ ही ई-रिक्शा, ई-बाईक, लैपटॉप आदि प्रदान किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण के जीवन से संघठन, साहस, धर्म की रक्षा और अन्याय के प्रतिकार का संदेश मिलता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गीता जीवन के हर चरण में मार्गदर्शक है। गीता से भक्ति मार्ग, ज्ञान मार्ग और कर्म मार्ग से मोक्ष प्राप्ति का रास्ता भी दिखायी देता है। गीता संकट में बल देती है, संघर्ष में , उलझन में सारथी और अंधकार में अटल साथी बनती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है ‍कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्मार्ट सिटी परियोजना प्रारंभ की है। इस परियोजना से विरासत का संरक्षण करते हुए हम विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्य शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा प्रकाशित तथा रामेश्‍वर लखनलाल पाटीदार द्वारा ‍लिखित कृष्ण चरित मानस और राघवदास पंडितदास द्वारा लिखित अमृतस्य अवंतिका का विमोचन भी किया। उन्होंने कृष्ण चरित मानस के लेखक रामेश्वर लखनलाल पाटीदार को पाँच लाख रूपये ‍दिये जाने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के बाद संजीव मालवीय द्वारा निर्देशित कृष्ण लीलाओं पर आधारित नृत्य नाटिका को भी देखा। इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर के लिये आज गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि गीता ने ‍सिखाया है कि अगर हम सभी अपने-अपने धर्म एवं कर्तव्यों का पालन करेंगे तो अधिकारों का संरक्षण स्वत: होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में नया सांस्कृतिक प्रवाह देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में विरासत से ‍विकास की ओर तेजी से बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गोपाल मंदिर में किया पूजन-अर्चन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के पूर्व ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में पूजन-अर्चन किया। उन्होंने प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि के लिए कामना की। उन्होंने गोपाल मंदिर में हुए विकास कार्यों विशेषकर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त लाइब्रेरी और प्रदर्शनी विथिका का अवलोकन भी किया। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त गीता भवन इंदौर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अंतर्गत राजवाड़ा स्थित गोपाल मंदिर में नया गीता भवन बनाया गया है। इस गीता भवन की विशेषता यह है कि यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रवचनों और शैक्षणिक आयोजनों हेतु अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 550 सीट का एक खूबसूरत सभागृह भी बनाया गया है। सकारात्मक एवं आध्यात्मिक वातावरण से युक्त 50-सीटर रीडिंग हॉल तथा आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की गई है। लाइब्रेरी में अध्यात्म, दर्शन, योग, ध्यान, भारतीय संस्कृति, माइंडफुलनेस तथा जीवन-प्रबंधन से संबंधित लगभग 1200 पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, डिजिटल आर्काइव के माध्यम से अनेक ई-बुक्स, ऑडियो-वीडियो व्याख्यान, ऑनलाइन कोर्स तथा अन्य डिजिटल संसाधनों तक सरलतापूर्वक पहुँच सुनिश्चित की गई है। लाइब्रेरी की आंतरिक सज्जा को प्राकृतिक रंगों, आध्यात्मिक कलाकृतियों, इनडोर पौधों तथा सौम्य प्रकाश व्यवस्था के माध्यम से इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि उपयोगकर्ताओं को शांत, प्रेरणादायी तथा एकाग्रता-उन्मुख वातावरण प्राप्त हो सके। मंदिर परिसर के पुनर्विकसित भागों में प्रदर्शनी कक्ष विकसित किए गए हैं, जिससे यह स्थल धार्मिक विरासत के संरक्षण के साथ-साथ कला एवं संस्कृति को एक साथ बढ़ावा देते हुए जनता के लिए एक समावेशी सांस्कृतिक अवसंरचना भी प्रदान करेगा। मुख्य बिंदु इंदौर का ऐतिहासिक गोपाल मंदिर परिसर आधुनिक सुविधाओं से युक्त गीता भवन के रूप में विकसित। स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत भवन में सभागार, रीडिंग हॉल, डिजिटल लाइब्रेरी एवं प्रदर्शनी कक्ष जैसी उन्नत सुविधाएँ स्थापित। मालवा की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत, कृष्ण भक्ति और गीता का संदेश प्रदेश की दिशा निर्धारित करते हैं। गीता संघर्ष में आत्मबल, जीवन में मार्गदर्शन और … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस नवीन घाट निर्माण कार्य का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए

श्रद्धालुओं का सिंहस्थ 2028 का अनुभव होगा भव्य, दिव्य और अलौकिक : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस नवीन घाट निर्माण कार्य का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किए जा रहे नवीन घाट निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि घाटों पर हरियाली होनी चाहिए, सभी घाटों के निर्माण में एकरूपता होनी चाहिए, घाट निर्माण के बाद घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं और संसाधन भी सुनिश्चित किए जाएं। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिहंस्थ-2028 के सभी कार्य गुणवत्ता पूर्ण और समय अवधि में पूर्ण हो जिससे श्रद्धालुओं का सिंहस्थ-2028 का अनुभव भव्य, दिव्य और अलौकिक बने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भविष्य में घाट आधारित विकास कार्य योजना पर भी कार्य किया जाएगा। प्रमुख बिन्दु मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन सिंहस्थ-2028 के लिए किए जा रहे नवीन घाट निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। घाटों पर हरियाली होनी चाहिए। सभी घाटों के निर्माण में एकरूपता होनी चाहिए। घाट निर्माण के बाद घाटों पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं और संसाधन भी सुनिश्चित किए जाएं। सभी कार्य गुणवत्ता पूर्ण और समय अवधि में पूर्ण हो। सिंहस्थ-2028 का अनुभव भव्य, दिव्य और अलौकिक बने।    

स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए हर संभव सहयोग करेगी प्रदेश सरकार- उपमुख्यमंत्री

विकसित यूपी- 2047 लक्ष्य की प्राप्ति के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च होंगे 1 लाख करोड़ रुपये' :ब्रजेश पाठक  स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए हर संभव सहयोग करेगी प्रदेश सरकार- उपमुख्यमंत्री  विकसित यूपी- 2047 का महत्वपूर्ण लक्ष्य, हर घर तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाना   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप विकसित यूपी 2047 के तहत प्रदेश में स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य शिक्षा के विकास के लिये स्टेकहोल्डर्स की कॉनफ्रेंस का आयोजन राजधानी में किया गया। उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में उत्तर प्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण है। विकसित यूपी- 2047 बनाने में हेल्थ सेक्टर को मजबूत करने के लिए आने वाले दस वर्षों में 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में हमारी सरकार बनने के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में तेज विकास हुआ है, लेकिन इसे विकसित देशों के समकक्ष बनाने के लिये हमें अभी और भी प्रयास करना है। कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन अवसर पर राज्य मंत्री मयंकेश्वर सिंह, मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश अवस्थी ने भी अपने विचार रखे।  इसके बाद स्वास्थ्य सेवा, स्वास्थ्य शिक्षा, नर्सिंग, पैरामेडिकल व फार्मा से जुड़े हुए स्टेकहोल्डर्स व विभाग के अधिकारियों के विचार मंथन के कई सत्रों का आयोजन किया गया।  विकसित यूपी- 2047 मिशन के तहत आयोजित स्वास्थ्य व स्वास्थ्य शिक्षा के लिए आयोजित स्टेकहोल्डर्स कॉन्फ्रेंस में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने संबोधित करते हुए कहा कि विकसित यूपी- 2047 का लक्ष्य प्राप्त करने में स्वास्थ्य सेवाओं का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है। हमारा लक्ष्य प्रदेश के 25 करोंड़ लोगों तक उनके घर के पास स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के पहले उत्तर प्रदेश जो एक बीमारू राज्य था आज प्रदेश में सर्वाधिक एक्सप्रेस वे, निर्बाध बिजली आपूर्ति और इंफ्रास्ट्रकचर के निर्माण से यूपी में निवेश को बढ़ावा दिया है। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी जहां प्रदेश में पहले केवल 40 मेडिकल कॉलेज ही थे, उनकी संख्या बढ़कर 81 हो चुकी है। साथ ही प्रत्येक पांच हजार की आबादी पर आरोग्य मंदिरों का संचालन हो रहा है, जहां पैथोलॉजी जॉच से लेकर, प्राथमिक स्वास्थ्य की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में भी पहले की 5000 एमबीबीएस सीटों की तुलना में वर्तमान में 12,000 से अधिक सीटें हो चुकी हैं, वहीं एमएस और एमडी की सीटें भी लगभग दोगुनी बढ़ी हैं। इसके अलावा मिशन निरामया का सफल संचालन किया जा रहा है एवं संजीवनी एप के माध्यम से प्रदेश की चिकित्सकीय सुविधा की उपलब्धता पर लाइव नज़र रखी जाती है। लेकिन अभी हमें स्वास्थ्य सेवाओं को विकसित देशों के समकक्ष बनाने के लिए कई और प्रयास करने हैं। जिसके लिए प्रदेश सरकार हर संभव सहयोग करेगी, साथ ही आने वाले दिनों में विकसित यूपी- 2047 को सफल बनाने के लिए 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।  कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए मुख्यमंत्री सलाहकार अवनीश अवस्थी ने कहा कि आजादी के सौवें वर्ष में विकसित भारत का जो लक्ष्य प्रधानमंत्री ने रखा है उसे प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 ट्रिलियन डालर का योगदान देने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने में शिक्षा और स्वास्थ्य आधारभूत स्तंभ हैं। डब्लूएचओ के मानकों के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ इसमें गुणात्मक सुधार की ओर भी ध्यान देना होगा। हमें प्राइमरी, सेंकेडरी, टर्शियरी के साथ पैरामेडिकल और नर्सिंग सुविधाओं का भी विस्तार करना होगा। इस अवसर पर बोलते हुए अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य व स्वास्थ्य शिक्षा, अमित कुमार घोष ने विकसित भारत, विकसित यूपी- 2047 का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए इकोनामी के साथ सभी क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया, साथ ही एडीजी 30 के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में स्वास्थ्य सेवाओं को मानक अनुरूप विकासित करने की प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की साथ ही इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए सभी के सहयोग की अपेक्षा की। इस अवसर पर राज्य मंत्री मंयकेश्वर सरन सिंह ने भी सत्र को संबोधित किया और स्वास्थ्य सुविधाओं को छोटे शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित यूपी- 2047 के मिशन को प्राप्त करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य शिक्षा की आयोजित कॉफ्रेंस में प्रदेश में स्वास्थ्य, स्वास्थ्य शिक्षा, नर्सिंग, पैरामेडिकल, फार्मा संबंधित विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया। जिसमें विषय से संबंधित राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों ने विचार मंथन के प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के समक्ष आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान का रोडमैप प्रस्तुत किया। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण व एआई के प्रयोग पर भी जोर दिया। विशेषज्ञों ने प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं को डब्लूएचओ के मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से न केवल इंफ्रास्टक्रचर विकास बल्कि चिकित्सकों के साथ अन्य मेडिकल स्टाफ को भी अधिक विषय विशेषज्ञ बनने पर जोर दिया। कोविड जैसे महामारियों का समाना करने के लिए मेडिकल रिसर्च को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

11 दिसंबर तक चार जनपदों (बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर) में लगेगी ‘कृषि चौपाल’

किसानों की समृद्धि के लिए पश्चिम यूपी के गांवों में पहुंच रही योगी सरकार 11 दिसंबर तक चार जनपदों (बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर) में लगेगी ‘कृषि चौपाल’ किसान ही संभालेंगे चौपाल का जिम्मा, आयोजन में सिर्फ किसानों की ही रहेगी भागीदारी   किसानों की खुशहाली पर योगी सरकार का जोर, योगी सरकार तक पहुंचेंगे गन्ना किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार की संवेदनशीलता से किसानों को मिल रहा फसल का उचित दाम और जल्द भुगतान  बागपत योगी सरकार के नेतृत्व में किसानों को गन्ना का उचित दाम मिल रहा है। गन्ना मूल्य का जल्द भुगतान होने से किसान खुशहाल भी हो रहे हैं। योगी सरकार द्वारा गन्ना किसानों के हित में किए जा रहे कार्यों की बदौलत किसान अब स्वयं ‘कृषि चौपाल’ लगा रहे हैं। पहली से 11 दिसंबर तक यह चौपाल पश्चिमी यूपी के चार जनपदों में लगेगी। किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार तक पहुंचेंगे, जिसके जरिए सरकार गन्ना किसानों के संरक्षण व संवर्धन के लिए और बड़े कदम उठाएगी।  11 दिसंबर तक चार जनपदों में होगी दो-दो चौपाल  किसानों द्वारा 11 दिसंबर तक पश्चिमी यूपी के चार जनपदों में ‘कृषि चौपाल’ लगेगी। यह चौपाल बागपत, हापुड़, शामली व मुजफ्फरनगर में होगी। चारों जनपदों में दो-दो कृषि चौपाल लगेगी। तीन दिसंबर को बागपत के हिसावदा गांव में चौपाल लगेगी। पांच व छह दिसंबर को हापुड़, 7 व 8 को शामली में कृषि चौपाल लगेगी। 10-11 दिसंबर को मुजफ्फरनगर के यहियापुर व दाहोद गांव में कृषि चौपाल लगाई जाएगी। कृषि चौपाल की कमान भी किसान ही संभालेंगे। किसानों से मिले फीडबैक योगी सरकार तक पहुंचाए जाएंगे। इसके आधार पर योगी सरकार किसानों की बेहतरी के लिए और भी नए कार्य व प्रयास करेगी।  बागपत के मीतली गांव में लगी पहली चौपाल, सिर्फ किसानों की ही रही भागीदारी  पहली कृषि चौपाल सोमवार को लगी। इसका आयोजन बागपत के मीतली गांव में किया गया। किसानों द्वारा लगाए गए चौपाल में सिर्फ किसानों ने ही हिस्सा लिया। किसानों ने बढ़ाए गए गन्ना मूल्य के लिए योगी सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में मूल्य वृद्धि की। पिछली सरकारें गन्ना किसानों का सुध नहीं लेती थी, लेकिन अब इसमें निरंतर वृद्धि हो रही है। किसानों के नाम पर राजनीति करने वाले भी योगी सरकार के किसान हित में किए गए फैसले से मौन हो गए हैं।  देश की उन्नति के पांच आधार पर किया गया कार्य  किसानों ने कहा कि एक तरफ योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में जहां किसान, युवा, महिला, नौजवान का ध्यान रखा, वहीं उन्नति के मुख्य पांच आधार पर भी कार्य किया। किसानों ने कहा कि 2014 में जब हाईवे पर चलते थे तो क्या हालात थे, यह किसी से छिपा नहीं है। किसी भी देश की उन्नति के पांच आधार होते हैं स्वास्थ्, शिक्षा, सड़क, बिजली-पानी। 2014 के बाद मोदी और 2017 से योगी सरकार की बदौलत क्षेत्र का कायाकल्प हुआ। अब हर वर्ग का समुचित विकास भी हो रहा है।  योगी सरकार ने गन्ना मूल्य में की 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि  योगी सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ा तोहफा देते हुए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की। योगी सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ने की अगेती प्रजाति का मूल्य 370 से बढ़ाकर 400 रुपये और सामान्य प्रजाति का 360 रुपये से 390 रुपये प्रति क्विंटल किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान हो रहा है। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने चिकित्सा सेवा में प्रवेश करने वाले नवीन MBBS बैच के विद्यार्थियों को दीं शुभकामनाएं

उप मुख्यमंत्री  शुक्ल मानसरोवर मेडिकल कॉलेज और एमजीयू हॉस्पिटल में आयोजित व्हाइट कोट सेरेमनी कार्यक्रम में हुए शामिल उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने चिकित्सा सेवा में प्रवेश करने वाले नवीन MBBS बैच के विद्यार्थियों को दीं शुभकामनाएं चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोच्च मार्ग है – उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेंद्र शुक्ल मानसरोवर मेडिकल कॉलेज और एमजीयू हॉस्पिटल में आयोजित व्हाइट कोट सेरेमनी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा में प्रवेश करने वाले नवीन MBBS बैच के सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस साथ ही उन्हें उत्कृष्ट चिकित्सकीय सेवा भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानवता की सेवा का सर्वोच्च मार्ग है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि आने वाला समय आप सभी की निष्ठा, संवेदनशीलता और सेवा-भावना पर निर्भर करेगा। आप अपने ज्ञान, कौशल और मानवीय मूल्यों के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखते हैं। इसलिए चिकित्सकीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए हमेशा मरीजों के प्रति करुणा, समर्पण और ईमानदारी बनाए रखें। इस अवसर पर कार्यक्रम में आरोग्य भारती के संगठन सचिव डॉ. अशोक वार्ष्णेय, DME डॉ. अरुणा कुमार और मानसरोवर मेडिकल कॉलेज के संचालक  गौरव तिवारी उपस्थित थे।