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राशन कार्ड रद्द होने का खतरा: सांरगढ़-बिलाईगढ़ में सिर्फ 4 दिन बचे, तुरंत करें आवश्यक कार्रवाई

सारंगढ़-बिलाईगढ़ छत्तीसगढ़ के सांरगढ़-बिलाईगढ़ जिला वासियों के लिए एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। 5 दिसंबर तक ई-केवायसी नहीं कराने वालों का राशन कार्ड रद्द होने की संभावना जताई जा रही है। जहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत जिले में प्रचलित कुल 222996 राशनकार्डों में कुल 674767 हितग्राही है। जिला खाद्य कार्यालय से प्राप्त जानकारी अनुसार इसमें से कुल 49 हजार हितग्राहियों का ई-केवायसी किया जाना शेष है। इस संबंध में समस्त शासकीय उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से ई-केवायसी किया जाना है। अतः जिले के समस्त राशन कार्ड हितग्राहियों से अनुरोध है कि अपने नजदीकी शासकीय उचित मूल्य दुकान से सम्पर्क कर अपना ई-केवायसी अनिवार्य रूप से करावें। 05 दिसम्बर 2025 तक जिन राशन कार्ड हितग्राहियों का ई-केवायसी नहीं होने से राशन कार्ड निरस्त होने की संभावना बनी हुई है।  

पलकें, आंखें और गर्दन हिलाने वाला रोबोट: IIT दिल्ली के स्टूडेंट्स की शानदार क्रिएशन

नई दिल्ली  आईआईटी दिल्ली के स्टूडेंट्स ने कमाल कर दिया है. स्टूडेंट ने एक इंसानों जैसा रोबोट बना दिया है, जो रोबोट बड़े-बड़े एक्सपर्ट बनाते हैं. वैसे ही रोबोट को सिर्फ तीन महीने की कड़ी मेहनत के बाद ही दिल्ली आईआईटी के मैथमेटिक्स के स्टूडेंट शिवांश गुप्ता और उनकी टीम द्वारा बनाया गया है. इस रोबोट का एक-एक अंग आपको इंसानों जैसा लगेगा और तो और आगे चलकर जिन लोगों के हाथ पैर कट जाते हैं. उनके लिए भी ये रोबोट के अंग वरदान बन सकते हैं. यह रोबोट देखने में बिल्कुल इंसानों जैसा लगता है. इसकी पलके भी छपकती है. आंखें भी घूमती है. हाथ भी खुलता और बंद होता है. गर्दन भी घूमती है. आईआईटी दिल्ली के स्टूडेंट्स द्वारा इसे सिर्फ तीन महीने में ही तैयार किया गया है. इस तरह काम करता है ये रोबोट स्टूडेंट शिवांश गुप्ता ने बताया कि मैथमेटिक्स प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने मिलकर से बनाया है. 3 महीने लगे इस रोबोट को बनाने में. इसका हाथ इंसानों जैसा ही काम करता है. आंखें भी इंसानों जैसी लगती हैं. गर्दन भी घूमती है. उसका सिर भी है. उन्होंने बताया कि इसे बनाने का उद्देश्य था एक इंसानों जैसा रोबोट बनाना, जो आगे चलकर इंसानों के काम को आसान करे. उसमें इंसानों जैसे फीचर्स हो और जब किसी का घटना दुर्घटना में हाथ कट फट जाता है तो इस इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट का इस्तेमाल कर हम उनके हाथों के अलग-अलग पार्ट्स भी बना सकते हैं, जिससे कोई भी दिव्यांग ना हो. उन्होंने बताया कि अभी यह सिर्फ एक पीस बनाया गया है. अभी इसमें बहुत सुधार की जरूरत है. अभी इसे पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी जोड़ा जाएगा. अभी अलग-अलग टीमों ने मिलकर अलग-अलग चीजों का इस्तेमाल करके इसे बनाया है. इतनी रखी गई है कीमत शिवांश गुप्ता ने बताया कि इसे बनाने में काफी खर्चा आया है. इसलिए इसकी कीमत 10 हजार रुपये रखी जाएगी. मार्केट में जब भी यह मार्केट में आएगा, तो इसको जो भी खरीदना चाहेगा. वो 10 हजार रुपए में खरीदेगा. उन्होंने बताया कि अभी शुरुआती दौर है, आगे चलकर हो सकता है कि कोई बड़ी कंपनी भी से ले ले या हमारे आइडिया को कोई बड़ी कंपनी लेना पसंद करेगी, तो उस हिसाब से इसे बेचा जाएगा.

दत्तात्रेय होसबाले का वक्तव्य: हिन्दुत्व को बताया भारत की आत्मा, धर्मांतरण पर कानून की मांग

इंदौर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 'हिन्दुत्व' को "भारत की आत्मा" बताया और कहा कि कहा कि हिंदुत्व के मुख्य विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है.इंदौर में आरएसएस के शताब्दी संपर्क कार्यक्रम 'प्रमुख जन गोष्ठी' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जागरूकता, सामाजिक समरसता और कानूनों के सख्त प्रवर्तन के माध्यम से धार्मिक धर्मांतरण की जांच की जा सकती है. होसबाले ने जोर देकर कहा, "हिन्दुत्व भारत की आत्मा है." उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदू विचार वह है जहां यह कहा जाता है कि ईश्वर को इस या उस मार्ग से प्राप्त किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इसी समाज के कारण यह भूमि एक हिंदू राष्ट्र है, जहां संस्कृति की अभिव्यक्ति विविध है लेकिन मूल एक है. धर्मांतरण के लिए सख्त कानून जरूरी धर्मांतरण पर एक सवाल का जवाब देते हुए होसबाले ने कहा, "धर्म जागरण, सेवा कार्य, सामाजिक समरसता, संतों के दौरे और कानूनों के सख्त प्रवर्तन से धार्मिक धर्मांतरण पर रोक लगाई जा सकती है." उन्होंने समझाया कि भारतीय संस्कृति में 'धर्म' की अवधारणा केवल अंग्रेजी शब्द 'Religion' तक सीमित नहीं है, इसे व्यापक अर्थों में समझा जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "ट्रैफिक नियम सबके लिए समान हैं. वाहन 'Religion' है और ट्रैफिक नियमों का पालन करना 'Dharma' है. रिलीजन बदला जा सकता है, लेकिन धर्म नहीं."  उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि धर्म बदलने के पीछे की मंशा गलत है, तो ऐसे कृत्यों को रोकने और सतर्क रहने की आवश्यकता है. वरिष्ठ RSS पदाधिकारी ने यह भी कहा कि सेक्युलरिज्म की अवधारणा पर अडिग रहने के कारण कुछ लोग खुद को हिंदू बताने से हिचकने लगे हैं. उन्होंने जोर दिया कि हिन्दुत्व के मूल विचारों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है.

एयरपोर्ट के लिए उज्जैन में शुरू होगा भूमि अधिग्रहण, AAI और सरकार के बीच MOU के बाद प्रोजेक्ट आगे बढ़ा

उज्जैन   उज्जैन एयरपोर्ट को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य शासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के बीच एमओयू के बाद जमीन अधिग्रहण की कवायद शुरु होगी। प्रयास है कि सिंहस्थ से पहले एयरपोर्ट का शुभारंभ हो जाए ताकि महापर्व के दौरान श्रद्धालु और पर्यटकों को हवाई मार्ग से भी सीधे उज्जैन पहुंचने की सुविधा मिल सके। दताना हवाई पट्टी के एयरपोर्ट में विकसित होने के बाद यहां से एटीआर-72 हवाई जहाज उड़ान भर सकेंगे। साथ ही नाइट लैडिंग की सुविधा भी उपलब्ध हो जाएगी। 241 एकड़ जमीन की जरूरत अभी देवास रोड ग्राम दताना में हवाई पट्टी है। जो चार्टड प्लेन की उड़ान के ही उपयोग में आती है। इसे विस्तारित करते हुए यहां एयरपोर्ट बनाया जाएगा। इसके लिए मौके पर करीब 241 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। भू-अर्जन को लेकर प्रशासन ने सर्वे पूरा कर शासन को रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है। सर्वे अनुसार भू-अजर्न में करीब 180 किसान व भवन स्वामी प्रभावित होंगे। मुआवजा सहित विकास पर करीब 475 करोड़ रुपए खर्च होने का आंकलन है। सर्वे और एमओयू होने के बाद अब एयरपोर्ट के लिए अगला कदम भू-अर्जन की कार्रवाई का रहेगा। सक्षम स्वीकृति मिलने के बाद संभावना है कि दिसंबर में भू-अर्जन की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। कलेक्टर रौशनकुमार सिंह ने बताया, एयरपोर्ट निर्माण को लेकर आवश्यक कार्रवाई प्रचलित है। 950 मीटर का रनवे होगा 1800 मीटर दताना-मताना हवाई पट्टी पर अभी करीब 950 मीटर का रन-वे है। एयरपोर्ट के लिए इसका विस्तार लगभग दोगुना करते हुए इसे 1800 मीटर का बनाया जाएगा। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंहस्थ-२८ को अब तक का सबसे भव्य व सुविधायुक्त आयोजित करने का लक्ष्य रखा है। सीएम की मौजूदगी में हुआ MOU उज्जैन में एयरपोर्ट को लेकर मप्र शासन और एयरपोट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) के मध्य कुछ सप्ताह पूर्व ही मप्र स्थापना दिवस के अवसर पर भोपाल में एमओयू साइन किया गया है। ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में एमओयू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू की उपस्थिति में हुआ। हवाई यात्रा के लिए अभी इंदौर एयरपोर्ट का सहारा लेना पड़ता है। सिंहस्थ से पूर्व उज्जैन में एयरपोर्ट बनने से यात्री इंदौर की जगह सीधे उज्जैन पहुंच सकेंगे। सिंहस्थ बाद भी यह उपयोगी साबित होगा। यहां छोटे विमान (एटीआर) उतर व उड़ान भर सकेंगे। अभी नाइट लैंडिंग सुविधा नहीं है। एयरपोर्ट बनने से रात में भी हवाई मार्ग से उज्जैन आना-जाना संभव होगा।

भोपाल वेस्टर्न बायपास के नए अलाइनमेंट को मिली मंजूरी, 36 किमी सड़क के लिए 6000 पेड़ होंगे कटेंगे

भोपाल  भोपाल और सागर में पेड़ों की कटाई को लेकर पिछले दिनों मप्र हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की थी। अधिकारियों ने जब कोर्ट को बताया कि भोपाल में 244 पेड़ों में से 112 को रिलोकेट किया गया है और इसकी तस्वीरें कोर्ट के सामने पेश की गईं तो कोर्ट इन्हें देखकर भड़क गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे ट्रांसप्लांटेशन से पेड़ नहीं बचते, मर जाते हैं। कोर्ट की यह टिप्पणी इस समय इसलिए मायने रखती है, क्योंकि भोपाल में वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को सरकार ने मंजूरी दे दी है। करीब 36 किमी लंबे इस बायपास के निर्माण के लिए 6 हजार से ज्यादा पेड़ों को काटा या शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि कम से कम पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए बायपास के नए अलाइनमेंट को मंजूरी दी गई है। वहीं भोपाल के अमझरा गांव में 90 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को दी गई है। पर्यावरण के जानकारों का कहना है कि 6 हजार पेड़ों को काटने के बाद जो नुकसान होगा, उसकी भरपाई इतनी जल्दी नहीं हो सकेगी। बहरहाल, वेस्टर्न बायपास के 4 हजार रुपए करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए राज्य सरकार ने 2981 करोड़ रुपए की प्रशासकीय मंजूरी भी जारी की है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर बनने वाली यह सड़क न केवल भोपाल को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाएगी, बल्कि इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम के बीच एक हाई-स्पीड कॉरिडोर भी बनेगा.। पहले जानिए क्यों बदला वेस्टर्न बायपास का अलाइनमेंट पहले यह बायपास मंडीदीप के पास इकायाकलां से शुरू होकर फंदा तक बनना था, लेकिन अब यह 11 मील स्थित प्रतापपुर से शुरू होकर फंदा कलां तक जाएगा। नए रूट में वन क्षेत्र 6.1 किमी से घटकर 5.45 किमी रह गया है। सड़क विकास निगम के अधिकारियों का तर्क है कि रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन और समसगढ़ स्थित पुराने शिव मंदिर को बचाने के लिए रूट में बदलाव किया गया है। हालांकि, इस बदलाव के पीछे की कहानी कुछ और ही बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पुराने रूट पर कई नेताओं, अधिकारियों और रसूखदारों की जमीनें आ रही थीं, जिन्हें बचाने के लिए अलाइनमेंट बदला गया। पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने इस मामले की शिकायत सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय से की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रोजेक्ट को जानबूझकर प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बदला गया है। सड़क के लिए कटेंगे 6463 पेड़ भोपाल वेस्टर्न बायपास का निर्माण पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 416.25 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, जिसमें लगभग 45 हेक्टेयर वन भूमि भी शामिल है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस भूमि पर मौजूद 6463 पेड़ों को या तो काटा जाएगा या फिर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। वन विभाग ने पेड़ों की कटाई की अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी है। इसके तहत क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए भोपाल के अमझरा गांव में 90 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को उपलब्ध कराई गई है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि हजारों पुराने और घने पेड़ों के कटने से होने वाले पारिस्थितिक नुकसान की भरपाई महज नए पौधे लगाकर नहीं की जा सकती। यह बायपास कोलार और हुजूर तहसील के उन इलाकों से गुजरेगा, जो अपनी हरियाली के लिए जाने जाते हैं। बाघों के मूवमेंट के लिए 1.5 किमी लंबे पुल बनेंगे चूंकि नया रूट भी रातापानी टाइगर रिजर्व के बफर जोन के करीब से गुजर रहा है, इसलिए वन्यजीवों, विशेषकर बाघों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।     वाय-डक्ट का निर्माण: बाघों और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित मूवमेंट के लिए 6 अलग-अलग स्थानों पर कुल 1480 मीटर लंबे वाय-डक्ट (ऊंचे पुल) बनाए जाएंगे। इससे जानवर नीचे से बिना किसी बाधा के आवाजाही कर सकेंगे और ट्रैफिक ऊपर से गुजरता रहेगा।     साउंड प्रूफ फेंसिंग: पूरे बायपास को साउंड प्रूफ बनाया जाएगा। सड़क के दोनों ओर 10 मीटर ऊंची फेंसिंग की जाएगी, ताकि वाहनों के शोर से वन्यजीव परेशान न हों और वे सड़क पर न आ सकें। अब जानिए बायपास के फायदे पर्यावरणीय चिंताओं के बावजूद इस बायपास के बनने से भोपाल और आसपास के क्षेत्र को 4 बड़े फायदे होंगे…     समय और ईंधन की बचत: इंदौर जाने वाले वाहनों को अब शहर के अंदर से नहीं गुजरना पड़ेगा, जिससे उनकी दूरी 21 किलोमीटर कम हो जाएगी। डेढ़ घंटे का सफर महज 30 मिनट में पूरा होगा।     हाई-स्पीड कनेक्टिविटी: यह बायपास निर्माणाधीन इंदौर-भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड 6-लेन हाईवे से जुड़ेगा, जिससे माल ढुलाई और आना-जाना आसान होगा।     शहर को जाम से मुक्ति: भारी वाहन शहर के बाहर से ही निकल जाएंगे, जिससे भोपाल वासियों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।     एयरपोर्ट तक सीधी पहुंच: जबलपुर, मंडीदीप और नर्मदापुरम से आने वाले वाहन बिना शहर में प्रवेश किए सीधे एयरपोर्ट पहुंच सकेंगे। जनवरी से शुरू होगी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद अब अगले महीने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक में प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद नए साल में जनवरी से ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस प्रोजेक्ट के लिए 23 गांवों की जमीनें अधिगृहीत की जाएंगी।

थार रेगिस्तान में खुला सोने का खजाना, बाड़मेर करेगा चीन का खेल खत्म; देश की टेक्नोलॉजी और डिफेंस को बड़ा बल

बाड़मेर  पश्चिम राजस्थान का बाड़मेर अब सिर्फ थार नहीं बल्कि दुनिया की नई ‘ऊर्जा राजधानी’ बनकर उभर रहा है. सिवाना की धरती में नियोबियम जैसे रेयर अर्थ खनिजों का ऐसा खजाना मिला है, जिसका घनत्व दुनिया के औसत से 100 गुना ज्यादा बताया जा रहा है. इलेक्ट्रिक कार, रॉकेट साइंस, हाई-टेक डिफेंस सिस्टम और परमाणु ऊर्जा में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ की खोज की जा रही है. चीन जिस रेयर अर्थ मेटल पर दुनिया को सालों से बांधे बैठा है, अब वही धागा बाड़मेर के हाथ में है. सिवाना की चट्टानों में नियोबियम का ऐसा विशाल भंडार मिला है, जिसे भू वैज्ञानिक ‘भविष्य की तकनीक की रीढ़’ मानते हैं. इलेक्ट्रिक कारों से लेकर मिसाइल, रॉकेट और परमाणु ऊर्जा तक हाई-टेक उद्योग में इस्तेमाल होने वाली यह धातु अब चीन के बजाय भारत की धरती से निकलेगी. 100 गुना अधिक घनत्व वाले रेयर अर्थ का खुलासा भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की शुरुआती रिपोर्टों ने सिवाना की चट्टानों में नियोबियम और अन्य रेयर अर्थ तत्वों के उच्च घनत्व का खुलासा हुआ है. सिवाना की पहाड़ियों में मिले रेयर अर्थ दुनिया के औसत घनत्व से 100 गुना तक अधिक पाया गया है. अब बाड़मेर न सिर्फ चीन की बढ़त तोड़ देगा बल्कि वैश्विक तकनीकी बाज़ार में भारत को नई ताकत भी देगा. इसके लिए सिवाना के भाटीखेड़ा में एक ब्लॉक का ऑक्शन भी किया जा रहा है. सिवाना में यहां है रेयर अर्थ का भंडार सिवाना के कमठाई, दांता, लंगेरा, राखी, थापन, भाटीखेड़ा, फूलन व डण्डाली में रेयर अर्थ के बड़े भण्डार मिले है. सिवाना के चारों तरफ एक गड्ढेनुमा रचना है, जिसमें ग्रेनाइट और रॉयलाइट व एल्केलाइन आग्नेय चट्टानें हैं. इसे सिवाना रिंग्स कॉम्पलेक्स और मालानी रॉक्स के नाम से भी जाना जाता है. रेगिस्तान में मिले हैं यह रेयर अर्थ बाड़मेर के सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में गैलेनियम, रूबीडियम, इप्रीयम, थोरियम, यूरेनियम, सीरियम, टिलूरियम, यूरेनियम सहित करीब 15 प्रकार के खनिज हैं जो भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक लेंथोनोइट ग्रुप के हैं. इसका उपयोग सुपर कंडक्टर, हाई प्लग्स, मैग्नेट, इलेक्ट्रॉनिक पॉलिसिंग, ऑयल रिफाइनरी में केटिलिस्ट, हाईब्रिड कार कंपोनेंट एवं बैटरी के लिए किया जाता है.  कैंसर दवा, बैटरी, लेजर, एरोस्पेस के लिए भी यह उपयोगी है. चीन को मात देंने के लिए मौजूद है रेयर अर्थ के भंडार सिवाना की पहाड़ियों में करीब 900 अरब से अधिक का खजाना छुपा हुआ है. इससे करीब 6 हजार मेट्रिक टन उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है. बाड़मेर के वरिष्ठ भू वैज्ञानिक सी.पी. दाधीच के मुताबिक सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में भाटीखेड़ा ब्लॉक को ऑक्शन किया जाएगा. यहां चीन को मात देने के लिए विशाल रेयर अर्थ के भंडार मौजूद है.

ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से इंदौर-उज्जैन की यात्रा होगी आसान और तेज, 48.10 किमी का ब्लू प्रिंट तैयार

इंदौर  सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए इंदौर और उज्जैन के बीच सफर को आसान बनाया जा रहा है। अब एमपीआरडीसी एक नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर तैयार करने जा रहा है। पितृ पर्वत से शुरू होकर चिंतामन गणेश मंदिर के पास सिंहस्थ बायपास तक जाने वाला यह नया हाईवे 48.10 किमी लंबा होगा। निर्माण को लेकर टेंडर खुल गया है। लुधियाना की कंपनी सीगल इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्रालि ने सबसे कम बोली लगाई। अधिकारियों के मुताबिक सालभर के भीतर सड़क का काम शुरू किया जाएगा। इन दिनों जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से इंदौर से उज्जैन की यह दूरी महज तीस मिनट में तय की जा सकेगी। हाईवे को एक्सेस कंट्रोल्ड फोरलेन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी चौड़ाई 60 मीटर होगी। प्रोजेक्ट पर करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। 1089 करोड़ रुपये निर्माण पर और बाकी राशि भूमि अधिग्रहण पर किसानों को दी जाएगी। इंदौर और उज्जैन जिलों में 175 हेक्टेयर से अधिक जमीन लेना है। अकेले इंदौर जिले में ही 650 किसानों की जमीन से सड़क निकाली जाएगी। हातोद और सांवेर तहसील के किसान प्रभावित होंगे। अधिकारियों के मुताबिक अगले कुछ दिनों में जमीन को लेकर सर्वे किया जाएगा। गाइडलाइन पर मुआवजा दिया जाएगा। प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युटी मोड पर विकसित होगा और कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले वर्ष से निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। एटीएमएस और सीसीटीवी भी पूरे मार्ग पर एटीएमएस सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे मार्ग की लगातार निगरानी रखी जा सकेगी। यह व्यवस्था विशेष रूप से सिंहस्थ मेले और वीआईपी मूवमेंट के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन को काफी सुगम बनाएगी। इसके साथ ही मौजूदा इंदौर-उज्जैन रोड पर वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे यात्रियों को बेहतर और तेज यात्रा अनुभव मिलेगा। चार स्थानों से होंगी एंट्री ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का ब्लू प्रिंट तैयार हो चुका है। हाईवे को जोड़ने के लिए चार स्थानों से वाहनों की एंट्री रखी जाएगी, जिसमें इंदौर और उज्जैन के अलावा वेस्टर्न बायपास क्रासिंग और उज्जैन-बदनावर रोड क्रासिंग भी शामिल है। सड़क जंबूड़ी हप्सी, हातोद, कांकरिया बोर्डिया, पोटलोद, मगरखेड़ी, लिंबा पीपल्या समेत कई गांवों से होकर निकलेगा, जबकि हाईवे पर टोल व्यवस्था मौजूदा स्टेट हाईवे की तरह होगी। इसमें इंदौर और उज्जैन दोनों ओर से अलग-अलग टोल प्वाइंट तय किए जाएंगे। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी     प्रोजेक्ट को लेकर टेंडर निकाले गए हैं। कागजी प्रक्रिया पूरी होने में थोड़ा समय लगेगा। अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। सालभर में निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। – गगन भाबर, डिविजनल मैनेजर, एमपीआरडीसी  

विशेष गहन पुनरीक्षण में मध्य प्रदेश ने रचा रिकॉर्ड, 93% काम पूरा—6 जिलों में शत-प्रतिशत डिजिटलाइजेशन

भोपाल देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. मध्य प्रदेश में भी SIR (Special Intensive Revision) का काम तेजी से जारी है. रविवार 30 नवंबर की शाम तक 5 करोड़ 33 लाख से ज्यादा लोगों के गणना पत्रकों को डिजिटल रूप में बदल दिया गया है. जो कुल प्रक्रिया का लगभग 93 प्रतिशत है. प्रदेश के 39 जिलों ने 95 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा कर शानदार प्रदर्शन किया है, जबकि 5 अन्य जिलों में भी 92 प्रतिशत से अधिक प्रगति दर्ज की गई है. मध्य प्रदेश में कुल 5.73 करोड़ मतदाताओं को 65,014 बीएलओ द्वारा नाम जोड़ने के लिए फॉर्म बांटे गए थे. 23 नवंबर तक इनमें से 3.27 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके थे. हालांकि इस बीच लगातार बीएलओ की हो रही मौतों ने प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं. प्रदेश में अब तक 7 बीएलओ की मौतें हो चुकी हैं. देवास में 26 BLO और दो पटवारियों को नोटिस मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा ने बताया कि, ''प्रदेश में गणना पत्रकों के डिजिटलाइजेशन का कार्य तेज गति से जारी है. अभी तक मध्य प्रदेश के 6 जिलों अशोकनगर, नीमच, बैतूल, गुना, मंडला और सीहोर जिले ने SIR का काम शत प्रतिशत पूरा कर लिया है.'' उन्होंने सभी शासकीय सेवकों और नागरिकों को धन्यवाद देते कहा कि यह उपलब्धि सभी के समन्वित प्रयास और अथक परिश्रम से ही संभव हुई है. रविवार 30 नवंबर शाम तक 5 करोड़ 33 लाख से अधिक गणना पत्रकों का डिजिटलाइजेशन पूरा हो चुका है, जो कुल कार्य का लगभग 93 प्रतिशत है. संजीव कुमार झा ने बताया कि प्रदेश के 39 अन्य जिलों ने 95 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. इसके अलावा प्रदेश के 5 जिलों में 92% से अधिक कार्य पूर्ण हो चुका है. निर्धारित समय से पहले ही कार्य पूर्णता की ओर है. इसी प्रेरणा और समन्वय से प्रदेश के सभी जिलों में शत-प्रतिशत कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा.'' जबलपुर की स्नेहलता ने सबसे पहले हासिल किया लक्ष्य स्नेहलता पटेल महिला बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर की पोस्ट पर हैं. उन्हें पनागर विधानसभा के 10 बूथों (52 से 61) की जिम्मेदारी मिली थी, जिनमें कुल 7706 मतदाताओं की जानकारी अपडेट करनी थी. स्नेहलता ने यह कार्य सबसे पहले पूरा कर जिले में मिसाल कायम की. जहां इनाम के तौर पर उन्हें शासन की ओर से एयर ट्रैवल का विशेष पुरस्कार मिला. उन्होंने पीएम श्री हेली पर्यटन सेवा के तहत कान्हा और बांधवगढ़ की जॉय राइड का आनंद लिया. वहीं मैहर के BLO विनोद सिंह ने समय से 14 दिन पहले SIR का काम पूरा किया था. जिस पर एसडीएम ने सम्मान कर इनाम में दिया सरसी आइलैंड ट्रिप का टिकट दिया था. जबलपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में काम की रफ्तार धीमी बात करें SIR के सबसे धीमे काम की तो जबलपुर की पूर्व विधानसभा सीट पर सबसे धीमी गति से काम पूरा हो रहा है. यहां अब तक सिर्फ 59% डिजिटाइजेशन हो पाया है. SIR का काम जारी है, लेकिन कुछ अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई है. यहां एक मामला ऐसा भी आया जहां एक भाजपा नेता ने कुछ नाम जोड़े जाने पर आपत्ति जताई है, लेकिन प्रशासन ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. स्थानीय नेताओं का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या 2003 की मतदाता सूची उपलब्ध न होना है, जिसे इलेक्शन कमीशन को सभी को उपलब्ध कराना चाहिए. आखिर क्या है SIR? SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची को घर-घर जाकर अपडेट करने, गलतियों को सुधारने और डेटा को डिजिटाइज करने का प्रोसेस है. जिन मतदाताओं को फॉर्म नहीं मिले हैं, वे ECI पोर्टल पर ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं. BLO का विवरण राज्य के CEO की वेबसाइट और राष्ट्रीय मतदाता खोज पोर्टल पर मिल जाता है. SIR की समय सीमा बढ़ाई गई चुनाव आयोग ने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही SIR प्रक्रिया की समय सीमा एक हफ्ते के लिए बढ़ा दी है. अब मतदाता सूची का संशोधन 11 दिसंबर तक किया जा सकेगा. ड्राफ्ट रोल अब 9 दिसंबर 2025 की जगह 16 दिसंबर 2025 को जारी होगा. दावे और आपत्ति की तारीखें भी बदलकर 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 कर दी गई हैं. मध्य प्रदेश के दमोह में एसआईआर का काम अंतिम चरण में है. यहां पर करीब 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है. देवास में 26 बीएलओ और दो पटवारियों को नोटिस देवास जिले का पूरा प्रशासनिक अमला छुट्टी, तीज, त्यौहार के बाद भी SIR के कार्य में डटा हुआ है. विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में लापरवाही पर कलेक्टर के आदेश पर रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एसडीएम देवास द्वारा 26 बीएलओ और दो पटवारियों को नोटिस जारी किए गए हैं. जिसमें पटवारी मनीष शर्मा, अरुण जाटव और बीएलओ प्रमिला भण्डारी, वंदना देवरे सहित अन्य शामिल हैं. जवाब सही नहीं होने पर कलेक्टर द्वारा सख्त कार्यवाही की जाएगी. 

India Plan-B on Tariff: ट्रंप की चाल हुई फेल, मोदी सरकार की रणनीति ने किया बड़ा असर

ट्रंप टैरिफ की हवा निकाल दी! मोदी सरकार के प्लान-B ने बचाई भारतीय अर्थव्यवस्था—जानें कैसे हुआ कमाल India Plan-B on Tariff: ट्रंप की चाल हुई फेल, मोदी सरकार की रणनीति ने किया बड़ा असर मोदी सरकार का प्लान-B आया काम, ट्रंप टैरिफ का असर किया बेअसर—भारत ने ऐसे पलट दिया खेल   नई दिल्ली यह कहना कि अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव पूरी तरह असफल हो गया, थोड़ी जल्दबाजी होगी. लेकिन ये तो अब कहा ही जा सकता है कि भारत ने अमेरिकी टैरिफ का तोड़ निकाल लिया है. दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े बता रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था पर ट्रंप की दबाव नीति काम नहीं आई.  दरअसल, चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ 8.2% रही, जो कि उम्मीद से बढ़कर है. क्योंकि RBI ने 6 फीसदी जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया था. तमाम रेटिंग एजेंसियों ने भी 7.0-7.6 फीसदी के बीच जीडीपी ग्रोथ रहने का भरोसा जताया था, यानी हर पैमाने पर भारतीय अर्थव्यवस्था में बेहतर करती दिख रही है. खासकर मैन्युफैक्चरिंग में 9.1% और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7.2% उछाल देखने को मिली है. सर्विस-सेक्टर का भी शानदार प्रदर्शन रहा है. अमेरिका ने थोपा एकतरफा टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की रणनीति अब फेल होती नजर आ रही है, ट्रंप ने भारत में एकतरफा 50 फीसदी टैरिफ थोप दिया, उन्हें लगा है कि टैरिफ के दबाव में भारत झुक जाएगा, और वो अपनी बातें मनवाने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और अब उसका परिणाम भी दिख रहा है कि ट्रंप की दबाव नीति की हवा निकल चुकी है. बड़ेबोले ट्रंप ने तो भारतीय अर्थव्यवस्था को 'डैड इकोनॉमी' तक करार दे दिया था.  लेकिन हकीकत में भारतीय अर्थव्यवस्था को रोकने के लिए ट्रंप ने चाल चली थी, उसे सरकार ने अपने प्लान-बी से फ्लॉप कर दिया, और भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से बढ़ती जा रही है. इसी कड़ी में दूसरी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े ट्रंप की दबाव नीति को करारा जवाब है. कहा तो ये भी जा रहा है कि तीसरी तिमाही में और बेहतर जीडीपी के आंकड़े आ सकते हैं.  क्या है भारत का प्लान-B अब आइए जानते हैं कि आखिर भारत ने ऐसा क्या किया, जिससे ट्रंप टैरिफ बेअसर हो गया. दुनिया जानती है कि खपत के लिहाज भारत आज के दौर में सबसे बड़ा बाजार है, हर कोई इस बाजार में प्रवेश करना चाहता है. क्योंकि भारत में डिमांड बनी हुई है. यही देश की सबसे बड़ी ताकत है.  दरअसल, बात बेनतीजा होने के बाद अमेरिका ने जिस तरह से भारत पर रूसी तेल खरीदने का बहाना बनाकर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया, उसी दिन से भारत ने अपना प्लान-B को जमीन पर उतारने के लिए काम करना शुरू कर दिया. टैरिफ के शुरुआत असर को कम करने के लिए भारत ने काफी हद तक घरेलू मांग, निवेश और नीतियों पर फोकस किया. इसी कड़ी में आयकर में छूट (12 लाख तक की आय पर कोई टैक्स नहीं) की व्यवस्था लागू की गई.  टैरिफ से विदेशी मांग थोड़ी मंद पड़ी, लेकिन इस बीच घरेलू खपत, निर्माण और सेवाएं तेज हो रही हों, जिससे GDP में कम असर दिखना स्वाभाविक है. टैरिफ को बेअसर करने के लिए सरकार ने खपत, कैपेक्स और रिफॉर्म पर जबरदस्त काम किया, जिसे आप Plan-B कह सकते हैं.  एकसाथ उठाए गए कई कदम सरकार की रणनीति दोतरफा रही, एक घरेलू मांग को बरकरार रखना और निवेश को प्रोत्साहित करना. अमेरिकी टैरिफ से निर्यात सेक्टर प्रभावित हुआ, जो अभी भी कुछ हद तक जूझ रहे हैं. लेकिन मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेस की ताकत से GDP मजबूत बनी हुई है. अमेरिकी टैरिफ का इकोनॉमी पर कम प्रभाव के लिए ब्याज दरों में कटौती, और जीडीपी दरों में बदलाव जैसे भी कदम उठाए गए, जिससे घरेलू डिमांड को ताकत मिली.  बता दें, सितंबर महीने में भारत का कुल निर्यात 6.75% बढ़ा, जबकि अमेरिका को भेजे गए सामान में 11.9% की गिरावट दर्ज की गई. यह दर्शाता है कि भारत ने अमेरिका-व्यापार निर्भरता को कम कर दूसरे बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा ली है. रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) की रिपोर्ट को मानें, तो अमेरिका द्वारा कुछ भारतीय प्रोडक्ट्स पर 50% तक के टैरिफ लगाने के बावजूद भारत अपना एक्सपोर्ट को बढ़ाने में सफल रहा है.  अमेरिकी विकल्प के तौर पर करीब 50 नए देशों से भारत की बातचीत चल रही है.