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आज का राशिफल 4 दिसंबर: सभी 12 राशियों के लिए दिन के खास संकेत

मेष 4 दिसंबर के दिन आपकी फाइनेंशियल स्थिति अच्छी रहेगी लेकिन बचत जरूर करें। आपका साथी यह ध्यान रखेगा कि आप जीवन में खुश और संतुष्ट रहें। तरक्की करने के लिए आसान रूटीन बनाए रखें। शांत मूड आपको प्रायोरिटी तय करने और सावधानी से काम करने में मदद करेगा। वृषभ 4 दिसंबर का दिन आपको जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कराने वाला है। आपको अपने परिवार और दोस्तों से भी सपोर्ट मिलेगा, जो आपको अच्छे भविष्य के बारे में सकारात्मक सोचने में मदद करेगा। जल्द ही आप आगे की यात्रा के लिए अपने जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव करने में सक्षम होंगे। मिथुन 4 दिसंबर के दिन आप महत्वपूर्ण अवसर से न चूकें। अपने परिवार या रिश्तेदारों से सलाह लें, जो खराब वक्त में आपका साथ दें। आपके प्रेम संबंध मधुर बने रहेंगे और सकारात्मक बदलाव भी देखने को मिलेंगे। आप दोनों के बीच विश्वास और अंडर्स्टैंडिंग होनी चाहिए। कर्क 4 दिसंबर के दिन नियमित रूप से हल्की-फुल्की बातचीत करना जरूरी है। आपको अपने करियर और नौकरी के अवसरों पर ध्यान देने की जरूरत है। इससे आपको मानसिक शांति पाने और एक-दूसरे पर और भी अधिक भरोसा करने में मदद मिलेगी। सिंह 4 दिसंबर के दिन आपके लिए अपने रिश्ते को अगले लेवल पर ले जाने का अच्छा समय है। अपने साथी के साथ क्वालिटी टाइम स्पेन्ड करें ताकि आप एक साथ गहरा कनेक्शन स्थापित कर सकें। आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा लेकिन आप बहुत ज्यादा पैसे नहीं बचा पाएंगे। कन्या 4 दिसंबर के दिन आपको अपने रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए किसी बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। ढेर सारे अवसर पाने के लिए आपको विनम्र और ईमानदार रहना चाहिए। अंत में आप देखेंगे कि आपकी प्रतिभा आपके काम आएगी। तुला 4 दिसंबर के दिन तनाव कम लें। उन लोगों के प्रति आभारी रहें, जो बदले में कुछ भी उम्मीद किए बिना आपके मानसिक स्वास्थ्य की परवाह करते हैं। स्थिति में सुधार के लिए आपको कुछ वित्तीय विचारों के साथ एक्सपेरिमेंट करने की आवश्यकता है। वृश्चिक 4 दिसंबर का दिन आपके जीवन में खुशियां और संतुष्टि लेकर आने वाला है। आप आध्यात्मिक विकास हासिल करने में भी सफल रहेंगे, जो महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आप उस संबंध को महसूस करेंगे, जो एक साथ एक विशेष बंधन बनाने के लिए आवश्यक है। धनु 4 दिसंबर के दिन परिणाम देखने के लिए अच्छा काम जारी रखें। दोनों के बीच रिश्ते को बेहतर बनाने के लिए किसी एक्टिविटी में भाग लें। छोटी बचत से शुरुआत करें और देखें कि आपका प्रदर्शन कैसा रहता है। मकर 4 दिसंबर के दिन आपके पास अपना समय नहीं होगा। आपका परिवार यह सुनिश्चित करेगा कि आप नियमित रूप से अपनी चिंताओं को साझा करके शक्ति और संतुष्टि प्राप्त करें। काम का बोझ ज्यादा न लें। कुंभ 4 दिसंबर के दिन में आप आसानी से सफल हो जाएंगे। कुछ बड़ा हासिल करने के लिए आपको अपने निजी समय का त्याग करना होगा। आपके परिवार को इस संबंध में सहयोगी होना चाहिए ताकि यह एक टीम वर्क बन जाए। मीन 4 दिसंबर के दिन आपका प्रेम जीवन समृद्ध रहेगा, जिससे आपको अपने साथी के साथ संवाद करने में आसानी होगी। सब कुछ भगवान की इच्छा के अनुसार होगा. बेहतर भविष्य के लिए रचनात्मक योजनाएं बनाएं ताकि आप अपना ख्याल रख सकें।

डिजिटल रिकॉर्ड की रफ्तार तेज: एसआईआर के दूसरे चरण में 47.5 करोड़ फॉर्म अपलोड, 11 दिसंबर तक कर सकेंगे ई-एफ सबमिट

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दूसरे चरण ने एक और महत्वपूर्ण मुकाम हासिल कर लिया है। आयोग द्वारा दी गई ताजा जानकारी के अनुसार, देशभर में 47.5 करोड़ से अधिक यानी 93 प्रतिशत से ज्यादा एन्यूमरेशन फॉर्म (ईएफ) का डिजिटलाइजेशन पूरा हो चुका है। इस अभियान के तहत 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहे व्यापक मतदाता सत्यापन कार्य में 99.83 प्रतिशत यानी 50.88 करोड़ से भी अधिक मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं। आयोग ने बताया कि एन्यूमरेशन फॉर्म भरने और जमा करने की अंतिम तारीख 11 दिसंबर है। यानी मतदाताओं के पास अब भी कुछ दिन बचे हैं, जिसमें वे अपने विवरण की पुष्टि, सुधार या बदलाव करा सकते हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी दैनिक बुलेटिन के अनुसार, लक्षद्वीप, गोवा, अंडमान-निकोबार जैसे छोटे राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में भी 99 प्रतिशत से अधिक फॉर्म वितरित हो चुके हैं। डिजिटलाइजेशन में सर्वाधिक प्रगति लक्षद्वीप, गोवा और अंडमान-निकोबार में दिखी है, जहां 97 से 100 प्रतिशत तक फॉर्म डिजिटाइज हो चुके हैं। सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश में 13.27 करोड़ फॉर्म (85 प्रतिशत) डिजिटलाइज्ड हो चुके हैं, जबकि फॉर्म वितरण 99.87 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। देशभर में 5,32,828 बीएलओ और 12 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट्स इस अभियान में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। ईसीआई का स्पष्ट उद्देश्य है कि हर योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो, अनुचित/दोहराई गई प्रविष्टियां हटें और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और मजबूत बने। आयोग ने राजनीतिक दलों से भी आग्रह किया है कि वे अधिक बीएलओ नियुक्त करें ताकि फॉर्म की समीक्षा और सत्यापन में सहयोग किया जा सके। मतदाता अपने बीएलओ या ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं। आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार न करें और समय रहते अपने विवरण सत्यापित कर दें ताकि आने वाले चुनावों के लिए सूची पूरी तरह तैयार हो सके।

दुनिया की सबसे बड़ी एयर मिस्ट्री: MH370 की खोज 11 साल बाद फिर सुर्खियों में!

कुआलालंपुर विमान हादसों की रहस्यमयी कड़ी में मलेशिया का MH370 आज भी सबसे अनसुलझा रहस्या बना हुआ है, जिसमें एक पूरा विमान आसमान से अचानक गायब हो गया था। हादसे को 11 साल से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद आज तक इसका कोई पुख्ता जवाब नहीं मिला है। अब मलेशिया सरकार ने इसकी तलाश फिर से शुरू करने का फैसला किया है। मलेशियाई अधिकारियों ने घोषणा की है कि मलेशिया एयरलाइंस की उड़ान MH370 के मलबे की खोज 30 दिसंबर 2025 से एक बार फिर शुरू हो रही है। उस विमान में 227 यात्री और 12 क्रू मेंबर सहित कुल 239 लोग सवार थे। कुआलालंपुर से बीजिंग जा रही मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 8 मार्च 2014 की सुबह टेकऑफ के कुछ ही देर बाद बिना किसी डिस्ट्रेस कॉल या संकेत के रडार से गायब हो गई। इसके बाद विमानन इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और लंबा सर्च ऑपरेशन चला, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। कई तरह के सिद्धांत और षड्यंत्रकारी थ्योरी भी सामने आईं। अब मलेशिया के परिवहन मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिकी कंपनी ओशन इन्फिनिटी दक्षिणी हिंद महासागर के तल पर फिर से व्यापक खोज शुरू करेगी। यह नया सर्च अभियान 30 दिसंबर 2025 से शुरू होकर रुक-रुक कर लगभग 55 दिन तक चलेगा। इस साल मार्च में ही मलेशिया सरकार ने ओशन इन्फिनिटी के साथ नया करार किया था। पीड़ित परिवारों को मिलेगी मानसिक सुकून विमान में सवार 239 लोगों में सबसे ज्यादा 153 यात्री चीन के थे। इन परिवारों ने पिछले कई सालों से मलेशिया सरकार पर खोज फिर शुरू करने का दबाव बनाए रखा है। कई रिश्तेदार आज भी इंतजार में हैं कि कम से कम उनके प्रियजनों के अवशेष या मलबा मिल जाए, ताकि उन्हें यह समझ आए कि आखिर उनके अपनों के साथ क्या हुआ। सरकार इस खोज को परिवारों को अंतिम जवाब देने की कोशिश मान रही है। मलेशिया को कोई वित्तीय बोझ नहीं यह सर्च ऑपरेशन 'No Find, No Fee' आधार पर होगा, यानी अगर विमान या उसका विश्वसनीय मलबा नहीं मिला तो मलेशिया सरकार को एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ेगा। कंपनी को 70 मिलियन अमेरिकी डॉलर तभी मिलेंगे जब MH370 का मुख्य मलबा या ठोस सबूत मिलेगा। यह वही शर्त 2018 के असफल अभियान में भी थी। इस बार ज्यादा सटीक जगह पर तलाश ओशन इन्फिनिटी ने 2018 के बाद लगातार नए सैटेलाइट डेटा, समुद्री धाराओं के मॉडल और ड्रिफ्ट एनालिसिस का अध्ययन किया है। इसके आधार पर अब खोज क्षेत्र को और छोटा व सटीक कर दिया गया है, जहां विशेषज्ञों के अनुसार विमान के मिलने की सबसे ज्यादा संभावना है। अब तक क्या-क्या हो चुका है? 2014-2017: मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और चीन ने मिलकर 1,20,000 वर्ग किमी क्षेत्र खंगाला था, लेकिन कुछ मिला नहीं। 2018: ओशन इन्फिनिटी ने 25000 वर्ग किमी क्षेत्र खोजा। एक बार फिर असफलता हाथ लगी

देशविरोधी नारे और फर्जीवाड़ा! अल-फलाह यूनिवर्सिटी व अस्पताल में हुआ बड़ा खुलासा

फरीदबाद दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल का सेंटर पॉइंट बनी फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर यहां के एक पूर्व नर्सिंग स्टाफ ने बड़ा खुलासा किया है। कर्मचारी ने दावा किया है कि यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में रोजाना 100 से लेकर 150 तक नकली मरीजों की फाइलें तैयार की जाती थी। आतंकी डॉ. मुजम्मिल शकील और सुसाइड बॉम्बर बने डॉ. उमर नबी के कहने पर ऐसा किया जाता था। जो कर्मचारी ऐसा नहीं करता था उसकी एबसेंट मार्क कर सैलरी काट दी जाती थी। उसने बताया कि रात के समय काम करने वाला कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी पर अक्सर पाकिस्तान की तारीफ करते थे। इतना ही नहीं, कई बार हंसी-मजाक में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे तक लगा दिए जाते थे। सूत्रों की मानें तो डॉ. शाहीन सईद अपने दोस्त और दिल्ली ब्लास्ट के आतंकी मॉड्यूल से डॉ. मुजम्मिल के साथ एनआईटी मार्केट में विस्फोटक या अन्य सामान खरीदने जाती थी। सुरक्षा जांच एजेंसी अब दोनों के आने-जाने, कौन-कौन सा सामान खरीदा, मिलने-जुलने जैसी सारी जानकारी को जुटा रही है। बता दें कि राजस्थान के रहने वाले लक्ष्मण ने साल 2025 में 14 जुलाई को अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में जॉइन किया था। लेकिन 25 अक्तूबर को उसने नौकरी छोड़ दी। वह यहां पर नर्सिंग स्टाफ में काम करता था। मेडिकल कॉलेज में उसकी ड्यूटी अस्पताल के आईसीयू में होती थी। लक्ष्मण ने बताया कि रात के समय काम करने वाले स्टाफ से नकली फाइलें तैयार कराई जाती थी। हर कर्मचारी को 5 फाइल तैयार करने का टारगेट दिया जाता था। इन नकली फाइलों पर डॉक्टर के साइन पहले से ही होते थे। फाइल में केवल उनको मेडिकल चार्ट नोट्स बनाने होते थे। इन फाइलों में उन दवाइयों का रिकॉर्ड बनाया जाता, जो यूज ही नहीं होती थी। इन फाइलों को सुबह होते ही डॉक्टर अपने साथ ले जाते थे। फाइलों का क्या यूज होता था किसी भी स्टाफ के कर्मचारी को इसके बारे में नहीं बताया जाता था। लक्ष्मण ने बताया कि उनको लगता है कि इन फाइलों का उपयोग बाहर से गरीबों के इलाज के नाम पर फंड एकत्रित करने के लिए किया जाता था। रोजाना 100 से लेकर 150 तक फाइलों को तैयार किया जाता था। इतना ही नहीं, अगर कोई कर्मचारी फाइलें बनाने से मना करता था तो किसी की सैलरी होल्ड कर दी जाती है या फिर कटौती की जाती है। लेकिन कश्मीरियों के साथ ऐसा नहीं किया जाता है। लक्ष्मण के अनुसार अस्पताल एवं मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग स्टाफ से जुड़े करीब 200 लोग काम करते हैं। यहां करीब 80 फीसदी मुस्लिम और 20 फीसदी हिंदू कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें भी करीब 30 से 35 फीसदी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर कश्मीर से आते हैं। पाकिस्तान के समर्थन में नारेबाजी लक्ष्मण ने दावा किया है कि रात के समय जो कश्मीरी मेडिकल स्टाफ और डॉक्टर ड्यूटी करते हैं। वे अक्सर अपनी बातों में पाकिस्तान की तारीफ करते हुए नजर आते थे। कई बार एक दूसरे के साथ वह हंसी-मजाक करते हुए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते थे। हर रोज कश्मीर को लेकर कुछ न कुछ चर्चा होती रहती थी। कश्मीरी स्टाफ आरोप लगाते हैं कि जम्मू-कश्मीर में सेना उनके भाइयों पर जुल्म करती है। सेना कश्मीरियों को स्पेशल टारगेट बनाती है। केंद्र और हरियाणा सीएम, मंत्री को भेजा मांग पत्र अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट के पेरेंट्स ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मानव संसाधन मंत्री , हरियाणा सीएम, स्वास्थ्य मंत्री, डीएमईआर, NMC को ईमेल के जरिए अपना मांग पत्र भेजा है। मांग पत्र में सभी को इस मामले में जल्दी से जल्दी शामिल होने की बात कही है। एक अभिभावक ने बताया कि उनके साथ 360 से अधिक अभिभावक आपस में जुड़ चुके हैं। इनमें अधिकांश, यूपी, बिहार, पंजाब, दिल्ली और एनसीआर के हैं। सभी अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता में हैं। सरकार हाई लेवल कमेटी गठित करे पेरेंट्स की मांग है कि सरकार एक हाई लेवल कमेटी का गठन करे। कमेटी के अंदर स्वास्थ्य विभाग, NMC सहित दूसरे विशेषज्ञ और अभिभावकों को शामिल किया जाए। कमेटी यह सुनिश्चित करे कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई, प्रैक्टिस, इंटर्नशिप, रजिस्ट्रेशन पर किसी प्रकार का कोई खतरा न आए। क्योंकि अभी तक उन्हें केवल मौखिक रूप से आश्वासन दिया जा रहा है। परिजनों का कहना है कि यूनिवर्सिटी का आतंकवाद में नाम आने के बाद हर कोई उनके बच्चों को शक की नजर देख रहा है। ऐसे में उनके बच्चों को आगे परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उनके बच्चे डर के साये में न तो पढ़ाई कर पा रहे हैं, न ही रातों को सो पा रहे हैं।

प्रदूषण का नया गणित: पराली घटने पर भी क्यों नहीं सुधर रही हवा?

गुरदासपुर  इस साल गुरदासपुर जिले में खेतों में आग लगाने (स्टबल बर्निंग) के मामलों में करीब 57 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता अभी भी खराब बताई जा रही है। इस समय हवा का गुणवत्ता सूचकांक 134 के करीब है, जो सेहत के लिए ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता। बेशक खेतों में आग कम लगी है, जिस कारण प्रदूषण के लिए खेतों में लगाई जाने वाली आग को कसूरवार नहीं ठहराया जा सकता। दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश न होने के कारण हवा का गुणवत्ता सूचकांक डगमगा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस साल जिले के अंदर खेतों में आग लगाने के सिर्फ 86 मामले सैटेलाइट के माध्यम से रिपोर्ट हुए हैं। यह आंकड़ा पिछले साल 2024 के 199 मामलों से काफी कम है, जबकि 2023 में 359 केस सामने आए थे। इस प्रकार, इस बार खेतों में आग के मामलों में तकरीबन 57 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जोकि पराली प्रबंधन अभियान की कामयाबी की ओर इशारा करती है। अधिकारियों के मुताबिक, इस साल किसानों में जागरूकता अभियान, मशीनरी की उपलब्धता और प्रशासन की तरफ से निगरानी व सख्त कार्रवाई के कारण पराली जलाने के इन मामलों में बड़ी कमी आई है। हवा की गुणवत्ता में सुधार की बजाय गिरावट क्यों? हालांकि खेतों में आग कम लगी, पर दूसरी ओर गुरदासपुर में हवा का गुणवत्ता सूचकांक बेहतर होने की बजाय कई जगहों पर बढ़ता नजर आ रहा है। प्रदूषण विभाग के मुताबिक, हवा में प्रदूषण बढ़ा हुआ है, और इसका मुख्य कारण लंबे समय से बारिश न होना माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले कई हफ्तों से जिले में बारिश न होने के कारण हवा में मिट्टी और धूल के कण बड़ी मात्रा में मौजूद हैं। वाहनों की रोजाना आवाजाही और निर्माण कार्यों की धूल भी हवा में मिलकर प्रदूषण को बढ़ा रही है। आम तौर पर पराली जलाने का रुझान कम होने के कारण हवा की गुणवत्ता में सुधार आना चाहिए, लेकिन इस बार स्थिति विपरीत नजर आ रही है। कुछ दिनों से जिले का हवा सूचकांक 130 से 140 के आस-पास रिकॉर्ड हो रहा है, जो ‘पुअर ज़ोन' में आता है। डॉक्टरों के मुताबिक, प्रदूषित हवा के कारण बुजुर्गों, छोटे बच्चों और दमा के मरीजों के लिए स्थिति चिंताजनक है। खांसी, गले में जलन, आंखों में जलन और सांस संबंधी समस्याओं के मामले बढ़ने लगे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक

बॉन्ड वाले डॉक्टर्स की भर्ती नियम बदलेगी सरकार, जल्द ही कैबिनेट में लाया जाएगा प्रस्ताव अब प्रदेश में है शासकीय और निजी कुल मिलाकर 52 मेडिकल कॉलेज प्रदेश के एक जिले को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की तैयारी पन्ना, बैतूल, कटनी और धार में बनेंगे नए मेडिकल कालेज, भूमिपूजन जल्द ही भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में आमूलचूल परिवर्तन लाना ही सरकार की मंशा है। स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और चिकित्सा शिक्षा के व्यापक विस्तार के लिए सरकार बहुस्तरीय सुधार लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अधिकाधिक नागरिकों को आयुष्मान योजना का लाभ दिलाया जाए। ऐसे अस्पताल या डॉक्टर आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं करते हैं या इस योजना में इम्पैनल्ड नहीं है, उन्हें भी इस योजना से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉक्टर्स की आपूर्ति के लिए विभाग भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाए। यह प्रयास किया जाए कि फील्ड में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के संचालन के लिए निजी चिकित्सकों की भी सेवाएं ली जाए। इसके लिए उन्हें कॉल पर बुलाने के अलावा अच्छा मानदेय (इन्सेंटिव) भी दिया जाए। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा ग्रहण कर रहे ऐसे विद्यार्थी, जिनकी फीस सरकार द्वारा अदा की जा रही है, ऐसे बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को मध्यप्रदेश में ही सेवाएं देने के लिए रोका जाए। ऐसे डॉक्टर्स को प्रदेश के जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए इन्हें भी आकर्षक मानदेय राशि दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तेजी से नए मेडिकल कॉलेजेस स्थापित हो रहे हैं, ऐसे में अधिक संख्या में डॉक्टर्स की आवश्यकता होगी। बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को प्रमोट कर, इनके मानदेय को रिवाईज़ कर सभी नए मेडिकल कॉलेजेस एवं फील्ड के अस्पतालों में इनकी सेवाएं ली जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सहित खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों और संचालित गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उप मुख्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री राजेन्द्र शुक्ल, राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री) श्री नीरज मंडलोई भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत पात्र हितग्राहियों तक इनका लाभ समय पर और प्रभावी रूप से पहुंचे, इसके लिए डिलेवरी सिस्टम को और मजबूती और पारदर्शिता के साथ लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने फील्ड अमले की भूमिका पर विशेष जोर देते हुए कहा कि फील्ड स्तर पर संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही से ही स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि विभागीय सेवाओं का समन्वय और योजनाबद्ध क्रियान्वयन ही सरकार की लक्ष्य पूर्ति का वास्तविक माध्यम है। बैठक में बताया गया कि बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को शासकीय डॉक्टर्स के रूप में भर्ती करने के लिए, इनके भर्ती नियम संशोधित किए जा रहे हैं। इसके लिए जल्द ही मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में तेजी से नए मेडिकल कॉलेजेस की स्थापना के लिए विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्राइवेट अस्पतालों में गर्भवती माताओं का बेवजह सीजेरियन आपरेशन करने की शिकायत आती रहती हैं, इस पर सख्ती से नियंत्रण किया जाए। उन्होंने कहा कि 108 एम्बुलेंस के चालकों द्वारा ज़बरदस्ती मरीजों को प्राइवेट हॉस्पिटल में ले जाने की शिकायत भी आती हैं, इसकी सख्ती से निगरानी करें और ऐसी प्रवृत्ति को रोकें। बताया गया कि बीते दो साल मे 84000 से अधिक कार्डियक सर्जरी शासकीय अस्पतालों में हुई है। प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में शासकीय अस्पतालों में कार्डियक सर्जरी बहुत कम खर्चे में होती है। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय व्यवस्थाओं की सराहना की। बताया गया कि प्रदेश में देहदान करने वाले 38 मृतकों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया है। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक बेहद अच्छी योजना है और पूरे समाज के बीच इसे बेहद प्रमुखता से प्रचारित किया जाना चाहिए। बैठक में उप मुख्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बताया कि अगले तीन सालों में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा सीएम-केयर योजना के सफल क्रियान्वयन को कार्य योजना में ले लिया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2028 की समाप्ति तक राजगढ़, मंडला, छतरपुर, उज्जैन, दमोह एवं बुधनी में निर्माणाधीन गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज प्रारंभ कर देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा पीपीपी मोड पर तैयार किए जाने वाले सभी मेडिकल कॉलेजेस का निर्माण कार्य भी इसी अवधि के दौरान पूरा कर लेने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा प्रदेश के एक जिले को मेडिकल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने का लक्ष्य लिया गया है। प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालय में कैथलैब की स्थापना भी वर्ष 2028 तक कर दी जाएगी। वर्ष 2028 तक मातृ मृत्यु दर 100 प्रति लाख जीवित जन्म करने का लक्ष्य लिया गया है। उन्होंने बताया कि खाद्य प्रशासन के सुदृढ़ीकरण के लिए FSSAI द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए 41.07 करोड़ रुपए की कार्य योजना मंजूर कर दी गई है। इसी प्रकार औषधि प्रशासन के सुदृढ़ीकरण के लिए 211 करोड़ रुपए की लागत से 5 साल की कार्य योजना बनाकर CDSCO को भेज दी गई है। इसमें उल्लेखित सभी पूंजीगत कार्य 3 साल की समय-सीमा में पूरे कर लिए जाएंगे।   प्रमुख बिन्दु     प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में आमूलचूल परिवर्तन लाना सरकार की मंशा।     स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण और चिकित्सा शिक्षा के व्यापक विस्तार के लिए सरकार बहुस्तरीय सुधार लागू कर रही।     प्रदेश में अधिकाधिक नागरिकों को आयुष्मान योजना का लाभ दिलाया जाए।     अस्पताल या डॉक्टर आयुष्मान योजना के तहत इलाज नहीं करते हैं या इस योजना में इम्पैनल्ड नहीं है, उन्हें भी इस योजना से जोड़ा जाए।     डॉक्टर्स की आपूर्ति के लिए विभाग भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाए।     चिकित्सा शिक्षा ग्रहण कर रहे ऐसे विद्यार्थी, जिनकी फीस सरकार द्वारा अदा की जा रही है, ऐसे बॉन्ड वाले डॉक्टर्स को मध्यप्रदेश में ही सेवाएं देने के लिए रोका।     डॉक्टर्स को प्रदेश के जनजातीय एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए इन्हें भी आकर्षक मानदेय राशि दी जाए।     बॉन्ड वाले डॉक्टर्स … Read more

यूपी पुलिस एसआई एग्जाम डेट जारी: उम्मीदवार मार्च 2026 में दें तैयारी का बड़ा मुकाबला

लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने सब-इंस्पेक्टर (SI) पद भर्ती परीक्षा की तिथि जारी कर दी है। आयोग की ओर से जारी नोटिस के अनुसार यूपी पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा का आयोजन 14 मार्च और 15 मार्च 2026 को किया जाएगा। जिन उम्मीदवारों ने भर्ती के लिए आवेदन किया है वे आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाकर परीक्षा तिथि नोटिस चेक कर सकते हैं। इस भर्ती प्रकिया के जरिए कुल 4543 पदों पर उम्मीदवारों की नियुक्ति होगी। जिसमें उप निरीक्षक नागरिक पुलिस पद, प्लाटून कमांडर पीएसी/उप निरीक्षक सशस्त्र पुलिस पद, प्लाटून कमाण्डर/उप निरीक्षक, विशेष सुरक्षा बल पद और महिला उप निरीक्षक ना.पु. (पीसी) पद शामिल हैं। वैकेंसी डिटेल्स- उप निरीक्षक नागरिक पुलिस- 4242 पद प्लाटून कमांडर पीएसी/उप निरीक्षक सशस्त्र पुलिस- 135 पद प्लाटून कमाण्डर/उप निरीक्षक, विशेष सुरक्षा बल- 60 पद महिला उप निरीक्षक ना.पु. (पीसी)- 106 पद लिखित परीक्षा लिखित परीक्षा ओएमआर शीट पर होगी। यह 400 अंकों की होगी। 2 घंटे का समय होगा। कुल प्रश्न 160 होंगे। सामान्य हिंदी, मूलविधि/संविधान/सामान्य ज्ञान, संख्यात्मक व मानसिक योग्यता परीक्षा, मानसिक अभिरुचि परीक्षा/ बुद्धिलब्धि परीक्षा/ तार्किक परीक्षा से 40-40 प्रश्न आएंगे। चारों सेक्शन 100-100 नंबर के होंगे।प्रत्येक विषय में 35 फी प्रदी अंक और कुल 50 प्रतिशत अंक प्राप्त न करने वाले अभ्यर्थी भर्ती के पात्र नहीं होंगे। फिजिकल टेस्ट शारीरिक दक्षता परीक्षा के संभावित नियम इस प्रकार है- पुरुषों के लिए – 4.8 किमी की दौड़ 28 मिनट में पूरी करनी होगी। महिलाओं को 16 मिनट में 2.4 किमी दौड़ना होगा। सफल तैयारी के लिए जरूरी टिप्स परीक्षा की तारीख अब तय हो गई है, इसलिए उम्मीदवारों को एक स्मार्ट स्ट्रैटिजी के साथ अपनी तैयारी करनी चाहिए। नियमित अभ्यास और टाईम मैनेजमेंट: सबसे पहले सभी विषयों को उनकी ताकत और कमजोरी के आधार पर विभाजित करते हुए एक स्टडी प्लान बनाएं। परीक्षा हॉल में टाईम मैनेजमेंट में महारत हासिल करने के लिए नियमित रूप से मॉक टेस्ट दें। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों पर ध्यान: परीक्षा के पैटर्न और कठिनाई स्तर को समझने के लिए कम से कम 5 से 10 पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करें।  

वोटों की हार और पार्टी की तकरार! AAP विधायक खुलकर बागी, केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ीं

नई दिल्ली दिल्ली की सत्ता जाने के बाद अपने सबसे बड़े गढ़ में आम आदमी पार्टी (आप) की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। पूर्व विधायक राजेश गुप्ता ने पार्टी छोड़ी, पटपड़गंज से चुनाव हारे अवध ओझा साथ छोड़ गए और अब एक मुस्लिम विधायक ने बागी तेवर अपना लिए हैं। मटियामहल से 'आप' विधायक आले मोहम्मद इकबाल ने पार्टी को एमसीडी चुनाव में मिले जख्म पर नमक रगड़ दिया है। ये वही आले मोहम्मद हैं जिन्हें अरविंद केजरीवाल ने डिप्टी मेयर का पद दिया था और फिर विधानसभा का टिकट दिया।   आले के पिता और दिग्गज नेता शोएब इकबाल ने पिछले महीने ही 'आप' छोड़ने का ऐलान कर दिया था और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के उम्मीदवार मोहम्मद इमरान के समर्थन में खुलकर काम करते हुए उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई। अब आले ने इस पर खुशी जाहिर करके बड़ा संकेत दे दिया है। आले इकबाल के एक्स प्रोफाइल पर उनकी तस्वीर अब पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के संग नहीं बल्कि पिता शोएब इकबाल के साथ दिखती है। जिस पर लिखा है, 'हमारा काम ही हमारी पहचान।' पहले की तरह अब वह ना तो वह तस्वीरों में पार्टी सिंबल का इस्तेमाल कर रहे हैं और ना ही 'आप' की नीतियों, कामकाज और नेताओं के भाषणों को शेयर करते हैं। चादंनी महल में आप की हार और मोहम्मद इमरान की जीत के बाद आले मोहम्मद इकबाल ने जो प्रतिक्रिया दी उससे उनके बागी तेवर साफ हो गए हैं। उन्होंने लिखा, ‘यह जीत मेरे इलाके के शेरों की है। साजिश करने वाले हार गए। हक की जीत हुई, बातिल की हार हुई। जो काम करने वाले थे, वही जीतकर आए। शोएब इकबाल की मोहब्बत को सलाम- अहंकारी, पैसे वाले, शोहरत वाले, ताकतवर- सबके मुंह काले हो गए। शेर आ गया- अल्हमदुल्लिलाह!’ एक तरफ आले ने पिता शोएब इकबाल की मोहब्बत को सलाम लिखा तो दूसरी तरफ पूर्व विधायक शोएब इकबाल विजेता उम्मीदवार मोहम्मद इमरान के साथ जश्न मनाते, उन्हें गले लगाते दिखे। आम आदमी पार्टी की ओर से अभी इस प्रतिक्रिया नहीं आई है। माना जा रहा है कि पार्टी आले पर ऐक्शन ले सकती है। आले मोहम्मद इकबाल ने कहा- साजिश करने वाले हार गए। पूर्व विधायक शोएब इकबाल ने 9 नवंबर को 'आप' छोड़ने की घोषणा की थी। चांदनी महल वार्ड में पसंद के उम्मीदवार को टिकट नहीं दिए जाने से वह नाराज थे। शोएब इकबाल ने तब कहा था, ‘मैं आम आदमी पार्टी की नीतियों से नाखुश हूं। पार्टी एक आंदोलन से उपजी थी, लेकिन अब यह अपनी राह से भटक गई है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है और अब कभी वापस नहीं लौटूंगा।’ उन्होंने चांदनी महल वार्ड के लिए पार्टी द्वारा चुने गए उम्मीदवार पर भी नाखुशी जताई। पार्टी ने इस क्षेत्र से मुद्दसिर उस्मान कुरैशी को मैदान में उतारा था। शोएब ने कहा, ‘मैं इस इलाके से छह बार विधायक रहा हूं। मेरा बेटा पार्षद था और सबसे ज्यादा मतों के अंतर से जीता था। जब उसने विधानसभा चुनाव लड़ा, तो सबसे ज्यादा अंतर से जीता। पार्टी ने (एमसीडी उपचुनाव के लिए) जिस उम्मीदवार को टिकट दिया है, उसे कोई नहीं जानता।’ शोएब इकबाल ने तब संकेत दिया था कि और लोग पार्टी छोड़ सकते हैं।

भारत को रोकने की भूल भारी पड़ेगी: जयशंकर का तीखा बयान—‘दीवार खड़ी की तो सबसे बड़ा नुकसान US-Europe का’

नई दिल्ली  विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को दो टूक कहा कि वैसे देश सबसे बड़े लूज़र होंगे, जो सीमा पार प्रोफेशनल्स के फ्लो में बहुत ज़्यादा रुकावटें डाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में दूसरे देशों को यह समझाने की ज़रूरत है कि टैलेंट (प्रतिभाओं) का इस्तेमाल आपसी फायदे के लिए ही है। मोबिलिटी पर एक कॉन्क्लेव के इंटरैक्टिव सेशन में उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार की इमिग्रेशन पॉलिसी पर सख्ती के बीच आई है। ट्रंप प्रशासन ने नई नीति के तहत H-1B वीज़ा पर भारी भरकम फीस लगा दी है और इमिग्रेशन नियमों को कड़ा कर दिया है ताकि विदेशी प्रोफेशनल्स अमेरिका न पहुंच सकें।   जयशंकर ने कहा कि सीमाओं के पार पेशेवरों के प्रवाह में बहुत अधिक बाधाएं पैदा करने वाले देशों को “कुल मिलाकर नुकसान” ही होगा। गतिशीलता पर एक सम्‍मेलन में आयोजित संवादात्मक सत्र के दौरान दिए गए उनके बयान ट्रंप प्रशासन की आव्रजन पर सख्ती के अनुरूप अमेरिका द्वारा एच-1बी वीजा पर नया शुल्क लगाने के फैसले की पृष्ठभूमि में आए हैं। जयशंकर ने कहा, “अगर वे प्रतिभा के प्रवाह में बहुत ज्यादा रुकावटें खड़ी करते हैं, तो उन्हें कुल मिलाकर नुकसान होगा। खासकर अगर आप उन्नत विनिर्माण के युग में प्रवेश कर रहे हैं, तो आपको और ज्यादा प्रतिभा की जरूरत होगी।” वह एच-1बी वीजा कार्यक्रम पर चिंताओं सहित आव्रजन से जुड़े व्यापक मुद्दों पर पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। किसी देश का नाम लिए बगैर जयशंकर ने कहा कि भारत को अन्य देशों को यह समझाने की जरूरत है कि “सीमा पार प्रतिभा का इस्तेमाल हमारे पारस्परिक लाभ के लिए है”। उन्होंने कहा, “अक्सर उद्यमिता और प्रौद्योगिकी के अग्रणी लोग ही गतिशीलता के पक्ष में दलील देते हैं। इसके विपरीत, वे लोग जिनके पास कोई राजनीतिक आधार या संबोधित करने के लिए एक निश्चित मतदाता वर्ग होता है, वे इसका विरोध कर सकते हैं। हालांकि, अंततः वे किसी न किसी प्रकार के समझौते पर पहुंच ही जाएंगे।” जयशंकर ने कुछ देशों में प्रतिभाओं की गतिशीलता के लिये प्रतिरोध को कुछ कंपनियों द्वारा चीन से अपने विनिर्माण केंद्र स्थानांतरित करने के प्रयासों से भी जोड़ा। एच-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत, कंपनियां अमेरिका में काम करने के लिए विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों की भर्ती करती हैं, शुरुआत में यह अवधि तीन साल के लिए होती है, जिसे तीन और वर्षों के लिए बढ़ाया जा सकता है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के अनुसार, हाल के वर्षों में स्वीकृत सभी एच-1बी आवेदनों में से लगभग 71 प्रतिशत आवेदन भारतीयों के थे। जयशंकर ने कहा, “यदि कई विकसित देशों में नौकरियों पर दबाव है, तो उसका कारण यह नहीं है कि उन क्षेत्रों में लोग बाहर से आए। असल वजह यह है कि उन्होंने अपनी विनिर्माण गतिविधियां बाहर जाने दीं – और आप जानते हैं, कहां।” उन्होंने कहा, “यदि लोगों के लिए यात्रा करना कठिन हो जाता है, तो भी काम रुकने वाला नहीं है। यदि लोग यात्रा नहीं करेंगे, तो काम बाहर जाएगा।” जयशंकर ने कानूनी गतिशीलता के महत्व पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, “एक वैश्वीकृत दुनिया में, मुझे लगता है कि जब हम अपने बाहरी संबंधों, खासकर आर्थिक संबंधों की बात करते हैं, तो हम अक्सर व्यापार पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।” उन्होंने कहा, “लेकिन हम अक्सर काम और उससे जुड़ी गतिशीलता की उपेक्षा करते हैं। आपको यह समझाने के लिए कि हम किस चीज पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। पिछले साल, भारत में 135 अरब अमेरिकी डॉलर का धन प्रेषण हुआ। यह अमेरिका को हमारे निर्यात का लगभग दोगुना है।” इसके साथ ही जयशंकर ने अवैध आवाजाही के प्रति भी आगाह किया और इसके संभावित परिणामों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “यदि आप मानव तस्करी और इससे जुड़े सभी अपराधों को देखें, तो अक्सर इसमें विभिन्न प्रकार के एजेंडे वाले लोग शामिल होते हैं, जैसे राजनीतिक एजेंडा, अलगाववादी एजेंडा, वे सभी इसके अवैध कारोबार में शामिल हो जाते हैं।”  

मध्यप्रदेश में 97% से अधिक गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन पूरा

15 और जिलों में 100%, 33 ने पार किया 90% से अधिक का लक्ष्य भोपाल मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी मध्यप्रदेश श्री संजीव कुमार झा ने बताया कि प्रदेश में गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन का कार्य तेज गति से जारी है।अभी तक मध्यप्रदेश में लगभग 5करोड़ 57लाख गणना पत्रकों का डिजीटाइजेशन पूरा हो चुका है। जो कुल कार्य का 97% से अधिक है।15 जिलों अशोक नगर,नीमच, बैतूल, गुना,मंडला, डिंडोरी, शाजापुर, सीहोर, सीधी, उमरिया, बुरहानपुर, मंदसौर,सतना, टीकमगढ़ और अलिराजपुर में शत्-प्रतिशत डिजीटाइजेशन का काम हो चुका है। श्री झा ने सभी शासकीय सेवकों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित समयावधि से पूर्व यह उपलब्धि सभी के प्रयास और कर्तव्य निष्ठा से ही संभव हुई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने बताया कि प्रदेश के 19अन्य जिलों ने 99प्रतिशत से अधिक,12जिलों में 98%और 6जिलों मे90%से अधिक कार्य पूरा कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री झा ने डिजिटाइजेशन में लगे सभी शासकीय सेवकों, बीएलओ तथा सहयोगी नागरिकों के समन्वित प्रयास की सराहना की जिसके चलते निर्धारित समय से पहले ही कार्य पूर्णता की ओर है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में शत-प्रतिशत कार्य शीघ्र पूरा कर लिया जाएगा।