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IndiGo में बढ़ी सख्ती, पायलट से लेकर विमान तक, अब रोज़ जांचेंगी 8 सदस्यीय टीम

 नई दिल्ली इंडिगो संकट अभी भी जस का तस बना हुआ है. इस संकट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाई है. ऐसे में अब इंडिगो पर सख्ती बढ़ती जा रही है. डीजीसीए ने इंडिगो के कॉर्पोरेट दफ्तर में अपने अधिकारियों को तैनात कर दिया है.  ऐसे में खबर है कि डीजीसीए की ओर से बनी आठ सदस्यों की ओवरसाइट टीम इंडिगो के कामकाज पर नजर रखेगी. इस ओवरसाइट टीम में से दो सदस्य इंडिगो के कॉर्पोरेट दफ्तर में रोजाना तैनात होंगे. डीजीसीए के अधिकारी अब निजी तौर पर इंडिगो के कामकाज को मॉनिटर करेंगे. डीजीसीए के अधिकारी इंडिगो के कॉर्पोरेट ऑफिस में मौजूद रहकर हर चीज की सीधी निगरानी करेंगे, जिसमें विमानों की संख्या और स्थिति से लेकर पायलटों की संख्या और उनकी उपलब्धता, क्रू के कामकाजी घंटे और स्टैंडबाय क्रू की पूरी डिटेल शामिल है. इसके अलावा, इंडिगो के गुरुग्राम स्थित कॉर्पोरेट ऑफिस में पहले से बनी डीजीसीए की निगरानी टीम के साथ-साथ दो और डीजीसीए अधिकारियों को भी तैनात कर दिया गया है. इन तैनात किए गए डीजीसीए अधिकारियो के नाम ऐश्वीर सिंह- डिप्टी डायरेक्टर और मणि भूषण- सीनियर स्टैटिस्टिकल ऑफिसर है. ये अधिकारी कई चीजों की रोजाना निगरानी करेंगे.  – उड़ानों का कैंसिलेशन स्टेटस (घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय)   – रिफंड की स्थिति: एयरलाइन, ओटीए प्लेटफॉर्म और ट्रैवल एजेंट्स के जरिए   – ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (समय पर उड़ान भरने का रिकॉर्ड)   – यात्रियों को मुआवजा (CAR नियमों के अनुसार)   – सामान लौटाने की स्थिति बता दें कि दोनों टीमें रोजाना शाम छह बजे तक अपनी रिपोर्ट अनिवार्य रूप से डीजीसीए के समक्ष पेश करेंगी.  वहीं, आठ सदस्यीय ओवरसाइट टीम में कौन-कौन हैं?     कैप्टन कपिल मंगलिक – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन वी.पी. सिंह – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन अपूर्वा अग्रवाल – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन स्वाति लूम्बा – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन अमन सुहाग – सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन नित्या जैन – फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए)     कैप्टन एन.जे. सिंह – फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर (ए) इनमें से दो सदस्यों को गुड़गांव स्थित इंडिगो के कॉरपोरेट ऑफिस में रोजाना तैनात किया जाएगा. ये अधिकारी निम्न क्षेत्रों की गहन जांच और निगरानी करेंगे. – कुल फ्लीट (कंपनी के पास कुल कितने विमान हैं)   – औसत स्टेज लेंथ (प्रति उड़ान औसत दूरी)   – कुल पायलटों की संख्या   – नेटवर्क डिटेल्स (किन-किन रूट्स पर उड़ानें हैं)   – क्रू के कामकाजी घंटे    – मासिक/दैनिक डेड हेडिंग (बिना यात्रियों के क्रू को दूसरे शहर भेजना)   – ट्रेनिंग में लगे क्रू की संख्या   – स्प्लिट ड्यूटी (एक दिन में दो हिस्सों में ड्यूटी)   – प्रतिदिन सभी अनप्लांड लीव्स (बीमारी, आकस्मिक अवकाश, इमरजेंसी लीव आदि)   – प्रतिदिन कुल उड़ानें और उपलब्ध क्रू की संख्या – क्रू की कमी के कारण प्रभावित हुए सेक्टर्स की कुल संख्या   – प्रतिदिन और प्रति बेस (कॉकपिट एवं केबिन) स्टैंडबाय क्रू की संख्या ये सभी डेटा रोजाना चेक किया जाएगा और रिपोर्ट शाम 6 बजे तक जमा की जाएगी. बता दें कि इससे पहले इंडिगो संकट पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी. अदालत ने केंद्र से पूछा कि जब एयरलाइन फेल हो गई थी, तब सरकार ने क्या किया.

VHP की बड़ी मांग: जनगणना में सभी लोग खुद को हिंदू के रूप में रजिस्टर कराएं

बेंगलुरु  VHP यानी विश्व हिंदू परिषद ने आगामी जनगणना में सभी से खुद को हिंदू के तौर पर दर्ज कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए हिंदू समाज में बंटवारे की कोशिश को रोकना है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को बांटने की प्रयासों को रोकना है और एकजुट रहना है। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए मापदंड होना चाहिए।  अध्यक्ष अरुण कुमार ने जनगणना में सभी को हिंदू के तौर पर दर्ज कराने की यह वजह बताई है। उन्होंने कहा, 'कर्नाटक में लिंगायतों के कुछ वर्ग, आदिवासी इलाकों में सारणा और जाटवों के कुछ वर्ग और सामान्य में कुछ एससी एसटी में खुद को हिंदू पक्ष बताने के लिए अभियान चला रहे हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हिंदू समाज को बांटने वाले ऐसे प्रयास असफल हों और हम एकजुट रहें।' दिल्ली में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि धार्मिक अल्पसंख्यकों को तय करने के लिए जो नियम हैं, उनपर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अल्पसंख्यकों को सिर्फ आबादी के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। इसमें यह भी देखा जाना चाहिए कि किसी विशेष धर्म का पालन करने वालों ने पिछड़ेपन या दबाव का सामना किया है, जिसके चलते उन्हें विशेष अधिकार दिए जाएं।' कुमार ने फ्रीडम ऑफ रिलीजन एक्ट लागू किए जाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि हिंदू मंदिरों को सरकार के नियंत्रण से आजाद किया जाए और हिंदू समुदाय को तत्काल सौंप दिया जाए। उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ भी अभियान तेज करने की अपील की है। जनगणना की क्या तैयारी भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आगामी जनगणना के लिए जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति 15 जनवरी 2026 तक पूरी करने का निर्देश दिया है। परिपत्र के अनुसार, इस डेटा संग्रह कवायद के लिए प्रगणक और पर्यवेक्षक मुख्य जनगणना अधिकारी होंगे। इसमें कहा गया है कि लगभग 700-800 की आबादी के लिए एक प्रगणक को नियुक्त किया जाएगा और प्रत्येक छह प्रगणकों पर एक पर्यवेक्षक होगा। आपात स्थितियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षित प्रगणक और पर्यवेक्षक भी रखे जाएंगे। आगामी जनगणना 2027 में देश भर में जनगणना के कार्य को समय पर पूरा करने के लिए लगभग 30 लाख फील्ड अधिकारी तैनात किए जाएंगे। आरजीआई ने इन सभी गतिविधियों की निगरानी और प्रबंधन के लिए 'जनगणना प्रबंधन और निगरानी प्रणाली (CMS) नामक एक वेब पोर्टल भी विकसित किया है। दो चरणों में होगी जनगणना जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। इसमें पहला चरण, मकान सूचीकरण और आवास गणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा और दूसरा चरण जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगा। यह कवायद डिजिटल होगी और इसमें 30 अप्रैल को राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के निर्णय के अनुसार, जाति गणना को भी शामिल किया जाएगा।

थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर भारी लड़ाई, 6 लाख शरणार्थी, ड्रोन, रॉकेट और टैंक से हमला

ओड्डार मान्छे  थाईलैंड और कंबोडिया की ताजा लड़ाई तीसरे दिन में पहुंच चुकी है. दो ताकतवर एशियाई देशों की ये लड़ाई नाजुक मोड़ में पहुंच गई है. यहां रॉकेट, ड्रोन, F-16 जेट्स, आर्टिलरी, एंटी एयर मिसाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है. जंग की वजह से मात्र तीन दिन में ही दोनों देशों में 6 लाख से ज्यादा लोगो को अपना घर छोड़ना पड़ा है. जंग में अबतक 13 सैनिकों की मौत हो चुकी है.  दक्षिण-पूर्व एशिया के दोनों पड़ोसी देशों के अधिकारियों ने बुधवार को एक-दूसरे पर उकसावे की कार्रवाई का आरोप लगाया है. थाईलैंड के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सुरसंत कोंगसिरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को बताया कि सात प्रांतों में 400,000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है. उन्होंने कहा, "हमने सुरक्षा के लिए एक बड़े खतरे का अंदाजा लगाया था, जिसकी वजह से आम लोगों को बड़ी संख्या में सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा." थाई सेना ने यह भी बताया कि बुधवार सुबह कंबोडिया से दागे गए रॉकेट सुरिन में फानोम डोंग राक अस्पताल के पास गिरे, जिसके बाद मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों को बंकर में छिपना पड़ा.  थाईलैंड के अखबार द नेशन की रिपोर्ट के मुताबिक कंबोडिया ने चोंग बोक-चोंग आन मा पर 80 से ज़्यादा ड्रोन हमले किए. BM-21 रॉकेट और टैंक से फायरिंग की. यहां 171,000 लोगों ने चार सीमावर्ती प्रांतों में शरण ली है.  थाई सेना ने थाई-कंबोडियाई सीमा पर भारी लड़ाई वाली रात का ब्यौरा दिया है, जिसमें बताया गया है कि कंबोडियाई सेना ने चोंग बोक और चोंग आन मा में थाई ठिकानों पर 80 से ज़्यादा ड्रोन हमले, BM-21 रॉकेट और टैंक से फायरिंग की.  10 दिसंबर, 2025 को सुबह 9 बजे के अपडेट में थाईलैंड की सेना ने कहा है कि कंबोडिया ने  हिल 677 की ओर 80 से ज़्यादा ड्रोन भेजे. फू मकुआ इलाके पर कब्ज़ा करने की कोशिश में BM-21 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर से फायरिंग की. इसके अलावा थाई सेना का दावा है कि कंबोडिया ने  प्रीह विहार पर अपनी पोजीशन से टैंक और सीधे फायरिंग वाले हथियारों का इस्तेमाल करके कंथारालक जिले पर भी हमला किया.  थाई सेना ने चोंग चोम के दक्षिण में एक एंटी-ड्रोन साइट को नष्ट कर दिया.  वहीं पड़ोसी देश कंबोडिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता मैली सोचियाटा ने कहा, "पांच प्रांतों में 101,229 लोगों को सुरक्षित ठिकानों और रिश्तेदारों के घरों में पहुंचाया गया है." कंबोडियन मीडिया ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन द्वारा चलाई जाने वाली वेबसाइट कंबोडियननेस ने बताया कि थाई F-16 जेट्स ने देश के दो इलाकों पर हमला किया, जबकि तीन अन्य इलाकों में थाई गोलाबारी जारी रही.  दक्षिण-पूर्वी एशिया के ये पड़ोसी देश अपनी 800 किलोमीटर लंबी सीमा पर कई जगहों पर भिड़ते रहते हैं. इसमें कई एतिहासिक मंदिर शामिल हैं.  इससे पहले जुलाई में दोनों देशों के बीच पांच दिनों तक चली लड़ाई चली थी. जिसमें दर्जनों लोग मारे गए थे और सीमा के दोनों ओर लगभग 300,000 लोग विस्थापित हो गए थे. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और मलेशिया के सहयोग से दोनों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी थी. अब ट्रंप ने एक बार फिर से दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की बात कही है. 

राज्य में सख्ती चरम पर! पंजाब के सभी मुख्य बॉर्डर बंद, भारी पुलिस फोर्स तैनात

जालंधर/चंडीगढ़   पंजाब को सुरक्षित और शांतिपूर्ण राज्य बनाने के मकसद से मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देशों पर पंजाब पुलिस ने मंगलवार को विशेष अभियान ‘ऑपरेशन सील-23’ चलाया। इस अभियान का उद्देश्य पंजाब में प्रवेश या बाहर जाने वाले सभी वाहनों की गहन जांच कर असामाजिक तत्वों, नशा तस्करों और अवैध शराब से जुड़े लोगों पर कड़ी निगरानी रखना है।   पंजाब के डी.जी.पी. पंजाब गौरव यादव के आदेशों पर सभी जिलों में यह एकसमान ऑपरेशन चलाया गया। सभी बॉर्डर जिलों के एस.एस.पी. को रणनीतिक स्थानों पर संयुक्त नाकाबंदी लगाने और अधिकतम पुलिस बल तैनात करने के निर्देश दिए गए, ताकि गजेटेड अधिकारियों और एस.एच.ओ. की देखरेख में मजबूत नाके स्थापित किए जा सकें।   जानकारी सांझा करते हुए विशेष डी.जी.पी. (कानून-व्यवस्था) अर्पित शुक्ला ने बताया कि 10 अंतरराज्यीय सीमा जिलों— पठानकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, रूपनगर, एस.ए.एस. नगर, पटियाला, संगरूर, मानसा, होशियारपुर और बठिंडा में 65 एंट्री/एग्जिट प्वाइंट्स पर 600 से अधिक पुलिस कर्मियों की तैनाती के साथ समन्वित और मजबूत नाकाबंदी लगाई गई। उन्होंने कहा कि इस दौरान राज्य में प्रवेश/निर्गमन कर रहे 1182 वाहनों की जांच की गई, जिनमें से 234 का चालान किया गया और 2 वाहनों को जब्त किया गया। इसके अलावा पुलिस ने पांच एफआईआर दर्ज कर तीन व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया।    इसके साथ ही, पंजाब पुलिस ने अपने नशा विरोधी अभियान (कासो) को 283वें दिन भी जारी रखते हुए राज्यभर में 346 स्थानों पर छापेमारी की। इन कार्रवाइयों में 95 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 68 एफ.आई.आर. दर्ज की गईं। इस प्रकार पिछले 283 दिनों में गिरफ्तार कुल नशा तस्करों की संख्या 39,864 हो गई है। विशेष डी.जी.पी. ने बताया कि छापेमारी के दौरान 1.5 किलो हैरोइन, 429 ग्राम अफीम, 6 किलो गांजा, 21 किलो पोपी हस्क और 2.95 लाख रुपए ड्रग मनी बरामद की गई। 70 गजेटेड अधिकारियों की देखरेख में 1000 से अधिक पुलिस कर्मियों वाली 120 से अधिक टीमों ने पूरे राज्य में कार्रवाई करते हुए 340 संदिग्ध व्यक्तियों की जांच की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लागू की गई तीन-स्तरीय रणनीति एन्फोर्समैंट, डी-एडिक्शन और प्रिवैंशन (ई.डी.पी.) के तहत पंजाब पुलिस ‘डि-एडिक्शन’ अभियान को भी मजबूत कर रही है और आज 40 लोगों को नशामुक्ति एवं पुनर्वास उपचार के लिए प्रेरित किया गया।

अमेरिका से अरब तक महक रही बासमती: कैसे भारत ने जीता ग्लोबल राइस मार्केट

वाशिंगटन  सुबह का सूरज जब पंजाब के हरे-भरे खेतों पर चमकता है, तो हवा में एक अनोखी खुशबू फैल जाती है। ये खुशबू है बासमती चावल की- लंबे दाने, बारीक सुगंध और स्वाद का वो राज जो सदियों से भारत की मिट्टी से निकलकर दुनिया के हर कोने तक पहुंच रहा है। आज, जब आप अमेरिका के किसी रेस्तरां में बिरयानी का मजा लेते हैं या सऊदी अरब के किसी घर में चावल की थाली सजती है, तो उसके पीछे भारत का स्वाद जुड़ा होता है। ‘इंडियन राइस एक्सपोर्ट्स फेडरेशन’ के आंकड़ों के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और वैश्विक बाजार में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है। वह शीर्ष निर्यातक भी है, जिसकी 2024-25 में वैश्विक निर्यात में 30.3 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारत चावल की जो किस्में वैश्विक स्तर पर निर्यात करता है, उनमें ‘सोना मसूरी’ अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बाजारों में पसंद की जाती है। लेकिन भारत का ये दबदबा रातोंरात नहीं बना। ये एक लंबी ऐतिहासिक यात्रा की कहानी है जो सिंधु घाटी से शुरू होकर आज के जीन-एडिटेड बीजों तक का सफर तय कर चुकी है। आइए, इस खुशबू की कहानी को विस्तार से समझते हैं। भारतीय चावल की चर्चा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावे से शुरू हुई है। ट्रंप ने कहा है कि भारत को अमेरिकी बाजार में चावल डंप करना (सस्ते दामों पर बेचना) नहीं चाहिए और वह इस मामले से निपट लेंगे। ट्रंप ने चेतावनी दी कि टैरिफ लगाकर इस समस्या का आसानी से हल निकल जाएगा। ट्रंप ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘वाइट हाउस’ में खेती और कृषि क्षेत्र के प्रतिनिधियों तथा अपने कैबिनेट के प्रमुख सदस्यों खासकर वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट और कृषि मंत्री ब्रूक रोलिन्स के साथ एक गोलमेज बैठक की। लुइसियाना में अपने परिवार के कृषि कारोबार ‘केनेडी राइस मिल’ का संचालन करने वाली मेरिल केनेडी ने ट्रंप से कहा कि देश के दक्षिणी हिस्से में चावल उत्पादक वास्तव में संघर्ष कर रहे हैं और अन्य देश अमेरिकी बाजार में चावल डंप कर रहे हैं यानी कि बेहद सस्ते दामों पर चावल बेच रहे हैं। जब ट्रंप ने पूछा कि कौन से देश अमेरिका में चावल सस्ते दामों पर बेच रहे हैं तो राष्ट्रपति के बगल में बैठीं केनेडी ने जवाब दिया- भारत और थाइलैंड; यहां तक कि चीन भी प्यूर्टो रिको में चावल सस्ते दामों पर बेच रहा है। प्यूर्टो रिको कभी अमेरिकी चावल का सबसे बड़ा बाजार हुआ करता था। हमने कई वर्षों से प्यूर्टो रिको में चावल नहीं भेजे हैं। ट्रंप ने फिर बेसेंट की ओर देखते हुए कहा- भारत, मुझे भारत के बारे में बताइए। भारत को ऐसा करने की अनुमति क्यों है? उन्हें टैरिफ देना होगा। क्या उन्हें चावल पर छूट मिली हुई है? इस पर बेसेंट ने कहा- नहीं सर, हम अभी उनके साथ व्यापार सौदे पर बातचीत कर रहे हैं। केनेडी ने ट्रंप को यह भी बताया कि भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में एक मामला चल रहा है। ट्रंप ने कहा कि इसे बहुत आसानी से निपटाया जा सकता है। उन्होंने कहा- यह उन देशों पर टैरिफ लगाकर बहुत जल्दी हल हो जाएगा, जो अवैध रूप से सामान भेज रहे हैं। प्राचीन जड़ें: चावल का भारत से वैश्विक सफर अब आते हैं असली कहानी पर- भारत और चावल का इतिहास। चावल की कहानी भारत की सभ्यता से जुड़ी है। पुरातत्वविदों के अनुसार, 5000 साल से ज्यादा पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता (लगभग 2500 ईसा पूर्व) में चावल की खेती के प्रमाण मिलते हैं। लोथल और राखीगढ़ी जैसे स्थलों पर मिले अवशेष बताते हैं कि हमारे पूर्वज नदियों के किनारे इस अनाज को उगा रहे थे। वेदों में भी 'अन्न' के रूप में चावल का जिक्र है, जो न सिर्फ भोजन था बल्कि पूजा-अर्चना का हिस्सा भी। संस्कृत में इसे 'अक्षत' कहा जाता है, जो अमरता का प्रतीक है। प्राचीन काल में चावल व्यापार का माध्यम बना। रोमन साम्राज्य से लेकर अरब व्यापारियों तक, भारतीय चावल मसालों के साथ जहाजों पर लादा जाता। लेकिन असली मोड़ आया मुगल काल में। कहा जाता है कि जहांगीर के समय (17वीं शताब्दी) बासमती चावल को 'बासमती' नाम मिला, जिसका मतलब है 'महकदार' या 'सुगंधित'। हालांकि इतिहास में इसको लेकर अलग-अलग दावे हैं। खैर, ये चावल हिमालय की तलहटी में उगता था- पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के मैदानों में। मुगलों ने इसे राजसी भोजनों का हिस्सा बनाया और जल्द ही ये यूरोप पहुंच गया। ब्रिटिश राज में चावल निर्यात औपचारिक रूप ले चुका था। 19वीं शताब्दी के अंत तक, भारत ब्रिटेन को चावल सप्लाई कर रहा था, जो औद्योगिक क्रांति के दौरान मजदूरों का मुख्य भोजन था। स्वतंत्रता के बाद, 1950-60 के दशक में हरित क्रांति ने चावल उत्पादन को आसमान पर पहुंचा दिया। भारत रत्न एम.एस. स्वामीनाथन जैसे वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड बीज, उर्वरकों और सिंचाई (जैसे पंजाब में नहरें) से उत्पादन को दोगुना कर दिया। 1960 में जहां भारत 50 मिलियन टन चावल पैदा करता था, वहीं आज ये 150 मिलियन टन को पार कर चुका है। इस क्रांति ने न केवल भुखमरी को रोका, बल्कि यह निर्यात का आधार बनी। 1970-80 के दशक में भारत ने अफ्रीका और मध्य पूर्व को सस्ता चावल भेजना शुरू किया, जो आज भी उसके प्रमुख बाजार हैं। वैश्विक बाजार में उभार: चुनौतियां और जीत 1990 के दशक में भारत ने चावल निर्यात में थाइलैंड और वियतनाम को पछाड़ना शुरू किया। वजह? विविधता- बासमती की प्रीमियम खुशबू और नॉन-बासमती का सस्तापन। 2000 तक भारत वैश्विक निर्यात का 20% हिस्सा ले चुका था। लेकिन चुनौतियां भी आईं। 2007-11 और 2023 में एल नीनो जैसी सूखे की वजह से भारत ने निर्यात प्रतिबंध लगाए, जिससे वैश्विक कीमतें 15 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। ये कदम घरेलू खाद्य सुरक्षा के लिए थे, लेकिन दुनिया को याद दिला दिया कि भारत के बिना चावल बाजार अधूरा है। फिर भी, भारत ने दबदबा बनाए रखा। 2011 से भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। 2023 में OEC के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने 11 बिलियन डॉलर का चावल निर्यात किया, जिसमें सऊदी अरब, ईरान और इराक प्रमुख खरीदार थे। बेनिन जैसे अफ्रीकी देशों ने नॉन-बासमती चावल … Read more

HSSC बायोमेट्रिक विवाद पर नया खुलासा, हिम्मत सिंह ने अभ्यर्थियों को दी अहम जानकारी

हरियाणा  हरियाणा CET 2025 ग्रुप C परीक्षा के दौरान जिन अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक किसी कारण नहीं नहीं हो पाई थी। हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन ने उन अभ्यर्थियों को राहत दी है। इसको लेकर चेयरमैन हिम्मत सिंह ने अपने सोशल मीडिया X पर पोस्ट शेयर की है।  उन्होंने पोस्ट में लिखा कि जिसमें उन्होंने लिखा कि जिन अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं हो पाया है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। आयोग इस विषय पर काम कर रहा है। बहुत जल्द सभी को बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूर्ण कराने के लिए निर्धारित समय के बारे में सूचना दी जाएगी। उन्होंने पोस्ट में यह भी लिखा है कि 26 एवं 27 जुलाई को संपन्न हुए CET 2025 ग्रुप C परीक्षा के दौरान जिन अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं हो पाए थे, उन्होंने फोन कॉल, मैसेज और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी क्वायरीज आयोग को भेजी हैं। उन्होंने अभ्यर्थियों को कहा कि अफवाहों पर ध्यान न देने और आयोग की आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।  

पंजाब में बूथ लेवल अफसर की बल्ले-बल्ले! चुनावों के दौरान ड्यूटी को लेकर आया ये बड़ा फैसला

पंजाब  पंजाब में बूथ लेवल अफसर (BLO) के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंजाब के दफ़्तर की ओर से एक अहम कदम उठाया गया है। आदेश जारी करते हुए बताया गया है कि BLO को जिला परिषद और ब्लॉक समिती की चुनावों में बतौर पोलिंग स्टाफ की ड्यूटी से छूट दे दी गई है। सूत्रों के अनुसार, कई क्षेत्रों में महिला और पुरुष BLO को इस समय वोटर सूची अपडेट, वोटर शिनाख्त कार्य, और अपने क्षेत्र से जुड़े SIR के प्री-रिवीजन व voter mapping जैसे महत्वपूर्ण काम करने पड़ रहे हैं। कई BLO के लगातार आग्रह के बाद यह फैसला लिया गया है। चुनाव दफ़्तर का कहना है कि इससे BLO को अपने नियमित चुनाव कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी। इसी के साथ ही सभी डिप्टी कमिश्नरों-कम- जिला चुनाव अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि आने वाले समय में किसी भी BLO की ड्यूटी किसी अतिरिक्त काम के लिए न लगाई जाए। 

राहुल गांधी के विदेश दौरे पर सियासत गर्म: भाजपा का व्यंग्य, कंगना ने कहा— ‘दम नहीं उस इंसान में’

नई दिल्ली  लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की संसद सत्र के बीच संभावित जर्मनी यात्रा ने राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें 'विदेश नायक' और 'पर्यटन नेता' करार दिया है। वहीं अभिनेत्री व भाजपा सांसद कंगना रनौत ने राहुल पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 'उस इंसान में कोई दम नहीं है'। यह विवाद तब भड़का जब इंडियन ओवरसीज कांग्रेस (आईओसी) ने घोषणा की है कि राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी जाएंगे। बता दें कि संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू हुआ था और 19 दिसंबर को समाप्त होगा। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर राहुल गांधी के बर्लिन दौरे की जानकारी दी। आईओसी जर्मनी के अध्यक्ष बलविंदर सिंह ने बताया कि राहुल गांधी 17 दिसंबर को बर्लिन में यूरोपीय देशों के आईओसी नेताओं से मुलाकात करेंगे। इस कार्यक्रम में एनआरआई मुद्दों, कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने और पार्टी की वैचारिक पहुंच बढ़ाने पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में सैम पित्रोड़ा और डॉ. अरती कृष्णा जैसे वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। राहुल गांधी की विदेश यात्राओं का इतिहास रहा है, जहां वे अक्सर भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं के कमजोर होने और भाजपा-आरएसएस द्वारा संस्थाओं पर कब्जा जैसे मुद्दों को उठाते रहे हैं। कंगना बोलीं- उस इंसान में कोई दम नहीं राहुल गांधी के जर्मनी दौरे पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने कहा- मैं उनके दौरों पर नजर नहीं रखती, न ही उनके बारे में कोई खबर पढ़ती हूं। तो मैं उनके दौरों के बारे में क्या कह सकती हूं? लेकिन यह सबके लिए साफ है कि उनकी पार्टी सिंगल डिजिट में क्यों आ गई है। मैं इस तरह के इंसान पर कोई कमेंट नहीं करना चाहती क्योंकि आप जानते हैं कि उस इंसान में कोई दम नहीं है, कोई कैरेक्टर की ताकत नहीं है… भाजपा का तंज- विदेश नायक और भारत बदनामी टूर भाजपा ने राहुल गांधी की यात्रा को संसदीय जिम्मेदारियों से बचने का बहाना बताते हुए जोरदार हमला बोला। पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने एक्स पर पोस्ट कर कहा- एक बार फिर विदेश नायक वही कर रहे हैं जो वह सबसे अच्छा करते हैं! विदेश दौरे पर जा रहे हैं! संसद 19 दिसंबर तक चल रही है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गांधी 15 से 20 दिसंबर तक जर्मनी जाएंगे! राहुल LoP हैं – लीडर ऑफ पर्यटन। बिहार चुनावों के दौरान भी वह विदेश में थे और फिर जंगल सफारी में। पूनावाला ने एएनआई से बात करते हुए कहा, 'राहुल गांधी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि LOP का मतलब 'पर्यटन' (टूरिज्म) का लीडर है। राहुल गांधी एक गैर-गंभीर नेता हैं। लोग काम कर रहे हैं, और वह छुट्टियों के मूड में हैं…जब संसद 19 तारीख तक सेशन में है, तब भी वह विदेश जा रहे हैं। तो उनकी प्राथमिकताएं साफ हैं। अब मुझे नहीं पता कि वह किस वजह से जर्मनी जा रहे हैं, लेकिन हो सकता है कि वह सिर्फ भारत के खिलाफ जहर उगलने जा रहे हों। तो एक बार फिर, वह अपनी छुट्टियों के लिए और भारत को बदनाम करने के लिए विदेश जा रहे हैं।' भाजपा का यह हमला उस समय आया जब संसद में चुनाव सुधारों पर बहस चल रही है। मंगलवार को राहुल गांधी ने लोकसभा में वोट चोरी का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर भाजपा से सांठगांठ का इल्जाम लगाया था। भाजपा ने पलटवार में कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में संवैधानिक संशोधनों से संस्थाओं को कमजोर किया था।

अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है दीपावली का त्योहार : मुख्यमंत्री

दीपावली का यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल होना गर्व की बात : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है दीपावली का त्योहार : मुख्यमंत्री दीपावली की वैश्विक मान्यता अयोध्या की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाणः सीएम योगी यूनेस्को सूची में शामिल होने से उत्तर प्रदेश की परंपरा को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचानः सीएम लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में सम्मिलित किए जाने को गर्व का पल बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय उस उत्सव की वैश्विक पहचान है, जो अंधकार पर प्रकाश की विजय और नए आरंभ के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह उपलब्धि भारत की सांस्कृतिक शक्ति व परंपरा की महत्ता को विश्वपटल पर और अधिक मजबूती प्रदान करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' के माध्यम से विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के दृष्टिकोण से इस उपलब्धि के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उत्तर प्रदेश के लिए इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अयोध्या प्रभु श्रीराम की पावन भूमि है। यहीं पर दीपावली की पहली ऐतिहासिक उत्सव परंपरा की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहाकि अयोध्या केवल सांस्कृतिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं की आत्मा है। ऐसे में इस पर्व की वैश्विक मान्यता अयोध्या के आध्यात्मिक महत्व को और भी प्रखर बनाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान भारत की बढ़ती सांस्कृतिक प्रतिष्ठा का प्रतिबिंब है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विश्व स्तर पर अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति को व्यापक रूप से स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराओं और उत्सवों को विश्व समुदाय द्वारा अपनाया जाना सकारात्मक संकेत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आशा व्यक्त की कि अयोध्या का शाश्वत प्रकाश मानवता को सत्य और सद्भाव के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा। उनके अनुसार यह पर्व केवल उत्सव नहीं बल्कि जीवन दर्शन है, जो समाज को एकता और संस्कारों की दिशा में अग्रसर करता है।

अनंत अंबानी को अंतरराष्ट्रीय सम्मान: वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला ग्लोबल अवॉर्ड

नई दिल्ली  वन्यजीव संरक्षण और पशु कल्याण के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के लिए अनंत अंबानी को अमेरिका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में ‘ग्लोबल ह्यूमैनिटेरियन अवॉर्ड फॉर एनिमल वेलफेयर’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें वनतारा के जरिए जानवरों के बचाव, इलाज, पुनर्वास और संरक्षण में उनके नेतृत्व के लिए दिया गया।   अनंत अंबानी इस सम्मान को पाने वाले सबसे युवा और पहले एशियाई व्यक्ति बन गए हैं। इससे पहले यह अवॉर्ड अमेरिकी राष्ट्रपतियों जॉन एफ. कैनेडी और बिल क्लिंटन सहित हॉलीवुड हस्तियों और कई वैश्विक नेताओं को दिया जा चुका है। इस अवॉर्ड समारोह में दुनियाभर के वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञ और पशु कल्याण से जुड़े नेता शामिल हुए। इस सम्मान से विज्ञान-आधारित संरक्षण पहलों और विश्वभर में संवेदनशील प्रजातियों की रक्षा के लिए किए जा रहे अनंत के सतत प्रयासों को मान्यता मिली है। ग्लोबल ह्यूमन सोसाइटी ने बताया कि यह अवॉर्ड उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिनकी आजीवन प्रतिबद्धता पशुओं और प्रकृति पर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। वनतारा को मिली वैश्विक मान्यता: अनंत अंबानी को यह सम्मान जामनगर (गुजरात) में स्थापित उनके महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘वनतारा’ के लिए दिया गया। वनतारा दुनिया के सबसे बड़े और व्यापक वन्यजीव बचाव, उपचार, पुनर्वास तथा संरक्षण केंद्रों में से एक है। दुनिया के लिए एक मिसाल है यह मॉडल : डॉ. रॉबिन ग्लोबल ह्यूमन सोसाइटी की अध्यक्ष और सीईओ डॉ. रॉबिन गैंजर्ट ने अनंत अंबानी और वनतारा की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वनतारा सिर्फ एक रेस्क्यू सेंटर नहीं, बल्कि जानवरों के इलाज, देखभाल और संरक्षण- तीनों को एक साथ जोड़ने वाला एक अनूठा मॉडल है। वनतारा ने यह दिखाया है कि बड़े पैमाने पर जानवरों की मदद कैसे की जा सकती है और यही मॉडल अब दुनिया के लिए एक मिसाल बन चुका है। पशु हमें संतुलन और संवेदनशीलता सिखाते हैं : अनंत अवॉर्ड लेने के बाद अनंत अंबानी ने कहा कि यह सम्मान मुझे ‘सर्वभूत हित’ यानी सभी जीवों की भलाई के रास्ते पर और मजबूती से आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जानवर हमें जीवन में संतुलन और संवेदनशीलता सिखाते हैं। उन्होंने कहा कि वनतारा के जरिए हमारा मकसद हर जीव को सम्मान, देखभाल और एक बेहतर जिंदगी देना है। हमारे लिए संरक्षण भविष्य की बात नहीं, बल्कि आज की जिम्मेदारी है।