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दिवाली बनी ग्लोबल हेरिटेज: यूनेस्को की मान्यता पर PM का बयान—‘लोकप्रियता नई ऊंचाई छुएगी’

नई दिल्ली  भारत के प्रमुख पर्व दीपावली को यूनेस्को की ‘अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची’ में आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया गया है। खुद यूनेस्को ने बुधवार को इसकी घोषणा की। यूनेस्को की यह बैठक नई दिल्ली में आयोजित की जा रही है, जिसमें 78 देशों से आए दर्जनों नामांकनों पर विचार किया जा रहा है। दिवाली का चयन इस बात को दर्शाता है कि यह त्योहार विश्व स्तर पर अपनी सांस्कृतिक महत्ता और लोकाचार के कारण विशेष पहचान रखता है।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इस घोषणा से सभी भारतीय खुश हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'भारत और दुनिया भर के लोग बहुत खुश हैं। हमारे लिए, दीपावली हमारी संस्कृति और मूल्यों से बहुत करीब से जुड़ी हुई है। यह हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह रोशनी और सच्चाई का प्रतीक है। यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में दीपावली के शामिल होने से इस त्योहार की ग्लोबल लोकप्रियता और भी बढ़ेगी। प्रभु श्री राम के आदर्श हमें हमेशा रास्ता दिखाते रहें।' यह पहली बार है कि भारत अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) के संरक्षण के लिए अंतरसरकारी समिति के सत्र की मेजबानी कर रहा है। इस समिति का 20वां सत्र लाल किले में आठ से 13 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है। यूनेस्को द्वारा दीपावली उत्सव को प्रतिष्ठित सूची में शामिल किए जाने की घोषणा के बाद ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे हवा में गूंज उठे। यूनेस्को का उद्देश्य इस सूची के माध्यम से दुनिया भर में विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं की विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आने वाली पीढ़ियों के लिए उनका संरक्षण सुनिश्चित करना है। भारत ने दीपावली उत्सव को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किए जाने पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यूनेस्को ने शांति और अच्छाई की जीत की शाश्वत मानवीय अभिलाषा का सम्मान किया। दीपावली भारतीयों के लिए बेहद भावनात्मक त्योहार है, जिसे पीढ़ियों से मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'कुम्हारों से लेकर कारीगरों तक लाखों हाथ इस विरासत को जीवित रखते हैं। यूनेस्को का यह ‘टैग’ भी एक जिम्मेदारी है; हमें सुनिश्चित करना होगा कि दीपावली हमेशा एक विरासत बनी रहे। हमारे बच्चों को राम राज्य और सुशासन के त्योहार दीपावली के बारे में जानना चाहिए। आगामी दीपावली में सभी को शांति, कृतज्ञता और साझा मानवता का एक अतिरिक्त दीप जलाने के लिए आमंत्रित करें।' दिल्ली में विशेष आयोजन, शहर जगमगाया दिवाली को वैश्विक विरासत सूची में शामिल किए जाने के मौके पर दिल्ली सरकार ने पूरे शहर में विशेष कार्यक्रमों की घोषणा की है। प्रमुख इमारतों को भव्य रोशनी से सजाया जा रहा है, मुख्य सड़कों पर आकर्षक सजावट की गई है और एक विशाल दीप प्रज्वलन समारोह भी आयोजित किया जा रहा है। दुनियाभर में मनाया जाने वाला त्योहार दिवाली केवल हिंदू समुदाय ही नहीं, बल्कि सिख, जैन और भारत के बाहर बसे लाखों प्रवासी भारतीय भी इसे बड़े धूमधाम से मनाते हैं। कई समुदायों में यह पांच दिनों तक चलने वाला त्योहार है, जो अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई, और अज्ञान पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। दिवाली आमतौर पर अमावस्या की रात को मनाई जाती है, जो हर साल अक्टूबर के अंत या नवंबर में पड़ती है। इस दौरान घरों में दीये जलाना, रंगोली सजाना, पटाखे फोड़ना, और लक्ष्मी पूजा की परंपरा विशेष रूप से निभाई जाती है। रामायण से जुड़ी आस्था उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में दिवाली को भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने के रूप में मनाया जाता है, जब उन्होंने रावण का वध कर धर्म और न्याय की पुनर्स्थापना की थी। इस कारण यह त्योहार उत्सव, प्रकाश और नई शुरुआत का प्रतीक बन गया। दिवाली का गहरा संबंध लक्ष्मी, धन और समृद्धि की देवी की आराधना से भी है। लोग इस दिन नई वस्तुएं खरीदते हैं और व्यापार भी शुभ माना जाता है। विदेश मंत्रालय ने जताई खुशी भारत के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा- एक आनंददायक क्षण, जब दीपावली- अच्छाई पर बुराई की जीत और भगवान राम के अयोध्या लौटने के वैश्विक पर्व को यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया। इस घोषणा के बाद भारत के सांस्कृतिक इतिहास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और नई पहचान मिली है और दिवाली का वैश्विक महत्व और भी प्रखर होकर सामने आया है। भारत की 15 चीजें वर्तमान में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल हैं, जिनमें कुंभ मेला, कोलकाता की दुर्गा पूजा, गुजरात का गरबा नृत्य, योग, वैदिक मंत्रोच्चार की परंपरा और रामलीला – महाकाव्य ‘रामायण’ का पारंपरिक प्रदर्शन शामिल हैं।

वीर सावरकर अवॉर्ड पर शशि थरूर का खुलासा—क्या कांग्रेस सांसद होंगे सम्मानित?

नई दिल्ली  कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मंगलवार को एक ट्वीट के जरिए यह खुलासा किया है कि उन्हें दिल्ली में आज दिए जाने वाले “वीर सावरकर अवॉर्ड” के बारे में न तो कोई आधिकारिक सूचना मिली है और न ही उन्होंने इसे स्वीकार किया है। थरूर ने लिखा कि उन्हें केवल मीडिया रिपोर्टों से पता चला कि उनका नाम पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं में शामिल किया गया है। थरूर ने बताया कि वे स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान के लिए केरल गए थे, जहां उन्हें पहली बार इस अवॉर्ड के बारे में मीडिया से पता चला। उन्होंने कहा, “मैं न इस अवॉर्ड से अवगत था, न ही इसे स्वीकार किया है। आयोजकों द्वारा मेरी सहमति के बिना मेरा नाम घोषित करना पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है।” उन्होंने कहा, “अवॉर्ड की प्रकृति, आयोजकों या किसी भी संदर्भ के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में कार्यक्रम में भाग लेने या अवॉर्ड स्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं उठता।” आपको बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। हाल ही में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए आयोजित राजकीय भोज में “गर्मजोशी भरा और आत्मीय” माहौल था तथा कई लोगों से बातचीत करना आनंददायक था। थरूर की यह टिप्पणी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पुतिन के सम्मान में दिए गए भोज के एक दिन बाद आई थी। थरूर ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, "शुक्रवार रात राष्ट्रपति पुतिन के लिए राष्ट्रपति भवन में आयोजित भोज में शामिल हुआ। माहौल बेहद गर्मजोशी भरा और आत्मीय था। वहां उपस्थित कई लोगों से बातचीत करने का आनंद लिया, खासतौर पर रूसी प्रतिनिधिमंडल से आए साथी बेहद अच्छे थे।’’  

हड़ताल नहीं चलेगी! हरियाणा सरकार ने डॉक्टरों पर लगाया 6 महीने का एस्मा

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने डॉक्टरों की हड़ताल पर सख्त कार्रवाई करते हुए प्रदेश में अगले 6 महीने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (ESMA) लगा दिया है. सरकार ने हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, 1974 (1974 का 40) की धारा 4 (क) की उप-धारा (1) के तहत डॉक्टरों की हड़ताल पर रोक लगा दी है. सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि एस्मा 8 दिसंबर से लागू होगा और अगले छह महीने की अवधि के लिए स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक और कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे. आदेश में कहा गया है कि हरियाणा के राज्यपाल ने भी इस बात को माना है कि गंभीर रूप से बीमार और अन्य मरीजों की देखभाल सुनिश्चित करने और जन साधारण के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का निर्वाध परिदान बनाए रखने के लिए कोई भी हड़ताल सार्वजनिक स्वास्थ्य और समुदाय के जीवन के लिए आवश्यक सेवाओं पर गंभीर रूप से असर डालेगी. 6 महीने तक डॉक्टरों की हड़ताल पर रोक आदेश में आगे कहा गया है कि अब हरियाणा आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1974 (1974 का 40) की धारा 4 (क) की उप धारा (1) के अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते राज्य में एस्मा लगाया जा रहा है जो कि अगले छह महीने तक डॉक्टरों के किसी भी प्रकार के हड़ताल पर रोक लगाता है.   दरअसल, हरियाणा में सभी सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों के डॉक्टरों ने मंगलवार को प्रमोशन से जुड़े मुद्दे को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया. डॉक्टरों के इस ऐलान से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के बेपटरी हो जाने का अंदेशा था. हरियाणा के चिकित्सा अधिकारी राज्य स्वास्थ्य विभाग में शामिल होने के बाद प्रमोशन के सीमित अवसरों से निराश हैं. हड़ताल को लेकर डॉक्टरों का क्या कहना था? हड़ताल पर जाने वाले डॉक्टरों का कहना था कि उनके अधिकतर सहयोगियों को अपने पूरे करियर में केवल एक ही बार प्रमोशन मिलती है. कुछ डॉक्टरों की यह भी शिकायत थी कि वर्तमान नीति के तहत 75 फीसदी एसएमओ पद पदोन्नति के जरिए भरे जाते हैं जबकि 25 फीसदी सीटें सीधी भर्ती के लिए आरक्षित हैं. डॉक्टरों का तर्क है कि सीधी भर्ती वाले एसएमओ अपने करियर में बहुत आगे बढ़ जाते हैं, कुछ तो महानिदेशक के पद तक पहुंच जाते हैं, जबकि सेवारत डॉक्टर स्थिर रहते हैं.  

गुजरात के राजकोट में एक बेहद खौफनाक और हैरान करने वाला मामला आया सामने, 6 साल की बच्ची से हुई दरिंदगी

राजकोट  गुजरात के राजकोट में एक बेहद खौफनाक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक 6 साल की बच्ची का अपहरण करके 30 साल के एक शख्स ने उसके साथ दरिंदगी की। खुद 3 बच्चों के इस बाप ने ना सिर्फ मासूम बच्ची के साथ रेप किया बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड भी डाल दी। पुलिस ने हैवानियत करने वाले आरोपी राम सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। जख्मी बच्ची का अस्पताल में इलाज चल रहा है।   मामला राजकोट के जिले के अटकोट पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक घटना को 4 दिसंबर को उस वक्त अंजाम दिया गया जब बच्ची के माता-पिता खेत में काम करने के लिए बाहर गए थे। इस दौरान राम सिंह बच्ची को उठाकर एक सुनसान जगह पर ले गया और वहां उसका मुंह दबाकर हैवानियत करने लगा। मासूम बच्ची के जिस्मों पर अपने हवस का जुल्म ढहाने से जब उसका मन नहीं भरा तो उसने एक फीट का लोहे का रॉड लड़की के प्राइवेट पार्ट में डाल दिया। इधर, काम से लौटने के बाद जब बच्ची नहीं मिली तो माता-पिता तलाश में जुटे। उन्हें वह घटनास्थल पर लहूलुहान मिली। तुरंत उसे लेकर पास के अस्पताल में गए जहां से बच्ची को राजकोट रेफर कर दिया गया। अस्पताल से मिली सूचना के बाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत पुलिस हरकत में आई। 10 टीमों का गठन करके आरोपी की तलाश शुरू की गई। गांव में लगे सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच करके इसका विश्लेषण किया गया। पुलिस ने टेलिकॉम कंपनियों से भी डेटा लेकर यह पता लगाया कि कितने मोबाइल फोन उस दौरान घटनास्थल के आसपास ऐक्टिव थे। इस तरह बच्ची ने हैवान को पहचाना पुलिस ने 140 संदिग्धों की सूची बनाकर उनसे पूछताछ की। एसपी राजकोट रुरल विजय सिंह गुर्जर के मुताबिक, पूछताछ के बाद 10 लोगों की तस्वीरें बच्ची को दिखाई गईं। काउंसलर, महिला पुलिस अधिकारी और डॉक्टर्स की मौजूदगी में बच्ची ने एक शख्स की तस्वीर में आरोपी को पहचान लिया। एसपी ने कहा, '30 साल के आरोपी राम सिंह को गिरफ्तार किया गया है। उसने ना सिर्फ रेप किया बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट में रॉड भी डाला। अभी जांच जारी है।' घटना को अंजाम दे फरार हो गया था राम सिंह पुलिस के मुताबिक पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल किया। उसने बताया कि उसने एक खेत में पानी की टंकी के पास उस दिन सुबह 11 बजे घटना को अंजाम दिया। लड़की के जख्मी होने और खून निकलने के बाद वह मौके से फरार हो गया। राम सिंह ने बताया कि वह मध्य प्रदेश के अलीराजपुर का रहने वाला है और दो साल से राजकोट में काम करता था। आरोपी राम सिंह और पीड़ित परिवार MP का रहने वाला राम सिंह 12 साल की एक बेटी और दो बेटों का बाप है। पीड़ित बच्ची का परिवार भी मूल रूप से मध्य प्रदेश का रहने वाला है और खेतों में मजदूरी करने के लिए राजकोट में रह रहा है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 65 (2) और पॉक्सो ऐक्ट की धारा 5 (I), 5 (M), और 6 (1) के तहत केस दर्ज किया है।

चुनाव से ठीक पहले SSP वरुण शर्मा ने ली छुट्टी, पटियाला में वायरल ऑडियो क्लिप पर आज अदालत का फैसला

पटियाला जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव से ठीक पहले पटियाला में बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। मतदान 14 दिसंबर को होना है और इसी बीच पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) वरुण शर्मा अचानक एक सप्ताह की छुट्टी पर चले गए हैं। यह कदम उस समय उठाया गया है जब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में आज वायरल ऑडियो-क्लिप विवाद पर अहम सुनवाई होनी है। पुलिस विभाग के सूत्रों ने पुष्टि की है कि SSP शर्मा मंगलवार शाम को अवकाश पर चले गए। फिलहाल संगरूर SSP सरताज चाहल को पटियाला की पुलिस व्यवस्था का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। हालांकि, यह राज्य चुनाव आयोग पर निर्भर करेगा कि वह पटियाला जिले के चुनाव-सम्बंधित कार्यों की निगरानी के लिए किसी अन्य अधिकारी की आधिकारिक तौर पर नियुक्ति करता है या नहीं। एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ने कहा, “SSP वरुण शर्मा छुट्टी पर हैं। इसकी जानकारी चंडीगढ़ मुख्यालय को भी दे दी गई है।” हाईकोर्ट ने दिया था जांच तेज करने का निर्देश छुट्टी का यह निर्णय उस समय आया है जब हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य चुनाव आयोग को वायरल ऑडियो क्लिप की जांच तेज करने का आदेश दिया था। शिरोमणि अकाली दल (SAD) अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने पिछले सप्ताह एक ऑडियो क्लिप जारी की थी, जिसमें कथित रूप से SSP शर्मा अपने अधीनस्थ अधिकारियों को विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन भरने से रोकने के निर्देश देते सुनाई दे रहे हैं। निष्पक्ष चुनाव की मांग, CBI जांच की अपील पूर्व विधायक डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान विपक्षी दलों को व्यवस्थित रूप से रोका गया। याचिका में SSP शर्मा के निलंबन, और सात दिनों के भीतर CBI-निगरानी में FIR दर्ज करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब आरोप पुलिस व्यवस्था के कामकाज से जुड़े हों तो राज्य पुलिस द्वारा ‘आंतरिक जांच’ का कोई अर्थ नहीं है। याचिका में उस कथित वायरल कॉन्फ्रेंस कॉल का भी जिक्र है, जिसे कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। इसमें कथित रूप से कहा गया है कि विपक्षी उम्मीदवारों को घरों और रास्तों में रोका जाए, स्थानीय विधायकों के निर्देश माने जाएं, सत्ताधारी दल AAP से जुड़े लोगों को “सकारात्मक रिपोर्ट” मिले और रिटर्निंग अधिकारी विपक्षी नामांकन रद्द कर दें ताकि कई सीटें बिना मुकाबले जीत ली जा सकें—जो आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन है।   राजनीतिक तापमान बढ़ा पटियाला SSP के छुट्टी पर जाने से राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। अब नजरें आज होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

नासिक जिला महिला विकास सहकारी बैंक पर RBI का बैन, खाताधारकों के लिए मुश्किलें बढ़ी

नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने महाराष्ट्र के एक सहकारी बैंक के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। नासिक जिला महिला विकास सहकारी बैंक लिमिटेड को 9 दिसंबर से कारोबार बंद करने का आदेश जारी किया गया है। यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के अलग-अलग प्रावधानों के तहत 19 की गई शक्तियों के तहत केंद्रीय बैंक ने उठाया।अब बैंक को आरबीआई के अप्रूवल के बिना लोन या एडवांस ग्रांट या रिन्यू करने से रोकने गया है। आदेश के तहत बैंक कोई इन्वेस्टमेंट भी नहीं कर सकता। न ही नई जमा राशियों को स्वीकार कर सकता है। इसके अलावा किसी भी प्रॉपर्टी या एसेट बचने, ट्रांसफर और डिस्पोज करने से भी रोका गया है। रिजर्व बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि इस बैंक का लाइसेंस  कैंसिल नहीं किया गया है।  बैंक अपनी फाइनेंशियल स्थिति में सुधार होने तक निर्देशों का पालन करेगा। तब तक बैंक पर पाबंदियां लागू रहेंगी। क्या है वजह? (RBI Action) आरबीआई ने यह कदम लिक्विडिटी की स्थिति को देखते हुए उठाया है। सुपरवाइजर चिताओं और बैंक के डिपॉजिटरों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी यह फैसला जरूरी था। केंद्रीय बैंक ने बैंक को 8 दिसंबर को जारी आदेश की एक कॉपी अपने वेबसाइट पर दिखाने का निर्देश भी दिया। ताकि कस्टमर और हितधारकों को इस बात की जानकारी मिल सके। बैंक के स्टेटस की समीक्षा नियमित तौर पर आरबीआई करता रहेगा। जरूरत पड़ने पर निर्देशों में बदलाव भी हो सकते हैं। यह आदेश 6 महीने तक लागू रहने वाला है। अगला फैसला रिव्यू के आधार पर लिया जाएगा। ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा? बैंक पर प्रतिबंध लगने के कारण कई ग्राहकों को भी परेशानी हो सकती है। आरबीआई द्वारा जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस बैंक के ग्राहकों को सेविंग अकाउंट या करंट अकाउंट या किसी भी खाते में जमा राशि में से केवल 35,000 रुपये निकालने की अनुमति होगी। हालांकि बैंक कुछ जरूरी चीजों  जैसे कि कर्मचारियों की सैलरी, किराया और बिजली के बिल इत्यादि पर खर्च कर सकता है। डीआईसीजीसी के के नियमों के तहत प्रत्येक कस्टमर को 5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर जमा बीमा क्लेम करने की सुविधा मिलती है। कोई भी खाताधारक अपनी मर्जी और सही वेरिफिकेशन के बाद इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।  

संजय पाठक पर राष्ट्रीय जनजाति आयोग करेगा जांच, कलेक्टर से आदिवासी जमीन खरीदी की रिपोर्ट की मांग

भोपाल  विधायक संजय पाठक से जुड़ा आदिवासी भूमि खरीद का विवाद गहराता जा रहा है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने उनके विरुद्ध दर्ज शिकायत को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश के पांच जिलों कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को जांच के आदेश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी कलेक्टर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करें, अन्यथा समन जारी कर व्यक्तिगत रूप से तलब किया जाएगा। आयोग ने यह भी चेताया है कि समय सीमा के भीतर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में वह संविधान के अनुच्छेद 338(क) के तहत सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों का उपयोग करेगा।  कर्मचारियों के नाम पर खरीदी गई जमीन होने का आरोप आयोग को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संजय पाठक ने अपने कुछ अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के नाम पर आदिवासी क्षेत्रों में जमीन खरीदी है। आयोग ने 5 दिसंबर को सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को पत्र भेजते हुए इस पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए थे। शिकायतकर्ता दिव्यांशु मिश्रा का आरोप है कि डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी जिलों में बैगा जनजाति के लोगों के नाम पर बड़े पैमाने पर बेनामी भूमि खरीदी गई है, जिसकी अनुमानित कीमत अरबों रुपये बताई जा रही है। NCST ने लिया संज्ञान इस पर संज्ञान में लेते हुए आयोग ने इन जिलों के कलेक्टरों से कहा है कि सभी कलेक्टर पत्र मिलने के बाद एक माह के अंदर प्रकरण में तथ्य और टिप्पणियां राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को व्यक्तिगत रूप से या अन्य संचार माध्यमों से उपलब्ध कराएंगे। आयोग के निर्देश पर डिंडोरी कलेक्टर ने जांच कर जानकारी भेज दी है, लेकिन चार कलेक्टरों जबलपुर, सिवनी, कटनी और उमरिया के कलेक्टर ने जानकारी नहीं दी है। इस पर आयोग ने उन्हें अंतिम चेतावनी दी है। शिकायत के बाद आयोग की सख्ती कटनी निवासी दिव्यांशु मिश्रा अंशु द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में दावा किया गया कि विजय राघवगढ़ से विधायक संजय पाठक ने अनुसूचित जनजाति के अपने कर्मचारियों के नाम पर जमीन खरीदी। आयोग ने 5 दिसंबर को कटनी, जबलपुर, उमरिया, डिंडौरी और सिवनी के कलेक्टरों को पत्र भेजकर कहा कि वे बैगा जनजाति के साथ धोखाधड़ी कर की गई भूमि खरीद के पूरे मामले की जांच कर तथ्य आयोग को उपलब्ध कराएं। आयोग ने पत्र में उल्लेख किया कि अरबों रुपए की बेनामी खरीद इन जिलों में बताई जा रही है, इसलिए प्रत्येक कलेक्टर एक माह के भीतर पूरे प्रकरण पर अपनी टिप्पणियां और दस्तावेज व्यक्तिगत रूप से या आवश्यक संचार माध्यमों से आयोग को भेजें। कलेक्टरों को आयोग की चेतावनी आयोग के अनुसार पांच में से सिर्फ डिंडौरी कलेक्टर ने अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया कलेक्टरों ने अब तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। इस पर आयोग ने चारों को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय पर रिपोर्ट नहीं आई तो संविधान के अनुच्छेद 338 क के तहत उपलब्ध सिविल कोर्ट की शक्तियों का उपयोग कर उन्हें या उनके प्रतिनिधियों को आयोग के समक्ष बुलाया जाएगा। आयोग ने माना कि यह मामला जनजातीय अधिकारों और भूमि सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे टालना स्वीकार्य नहीं होगा। 795 एकड़ जमीन पर खनन की तैयारी का दावा शिकायत में यह भी कहा गया है कि कटनी जिले के चार आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर डिंडौरी जिले में करीब 795 एकड़ जमीन खरीदी गई है। यह जमीन बजाग तहसील के पिपरिया माल, बघरेली सानी, सरई टोला और हर्रा टोला क्षेत्रों में स्थित है। जमीन खरीद वर्ष 2025 के बाद से होना बताया गया है। शिकायत के अनुसार यह भूमि रघुराज सिंह गौड़, नत्थू कोल, राकेश सिंह गौड़ और प्रहलाद कोल के नाम दर्ज है तथा यहां बाक्साइट खनन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सभी संबंधित खातों की वित्तीय जांच की भी मांग की है। कलेक्टरों को आयोग ने अंतिम चेतावनी जारी की  शिकायतकर्ता ने बताया कि 15 सितंबर को आयोग को शिकायत सौंपी गई थी। इसके बाद आयोग के निर्देश पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने जांच कर रिपोर्ट भेजी है। जबकि कटनी, जबलपुर, उमरिया और सिवनी के कलेक्टरों से अब तक जानकारी नहीं मिली है। इस पर आयोग ने चारों जिलों को अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। विधायक अलावा ने सीएम सचिवालय को दी शिकायत  इस प्रकरण में कांग्रेस विधायक हीरालाल अलावा ने भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखित शिकायत दी है। उनके पत्र के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके क्रम में जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त ने डिंडौरी कलेक्टर को पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा है। अपर आयुक्त द्वारा जारी पत्र में उल्लेख है कि बजाग तहसील के संरक्षित बैगा बहुल क्षेत्र में करीब 1200 एकड़ आदिवासी भूमि के कथित बेनामी सौदों की विस्तृत जांच आवश्यक है।  बैगा आदिवासियों की 795 एकड़ जमीन खरीदी गई शिकायतकर्ता के अनुसार बैगा आदिवासियों को धोखे में रखकर लगभग 795 एकड़ जमीन खरीदी गई और इस भूमि का उपयोग आगे चलकर बॉक्साइट खदानों के लिए किया जाना प्रस्तावित है। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन कर्मचारियों के खातों में हुए लेन-देन और वित्तीय गतिविधियों की भी जांच होनी चाहिए, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में भूमि खरीद उनकी वास्तविक आर्थिक क्षमता से मेल नहीं खाती। यह संदेह पैदा करता है कि जमीन वास्तव में बेनामी तरीके से खरीदी गई हो सकती है। आयोग को सितंबर में की गई इस शिकायत पर केवल डिंडौरी कलेक्टर ने ही अपनी रिपोर्ट भेजी है, जबकि सिवनी, जबलपुर, कटनी और उमरिया के कलेक्टरों ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। आयोग ने इसे अत्यंत गंभीर माना है और चारों जिलों के कलेक्टरों को अंतिम चेतावनी जारी की है। आयोग की इस कड़ी प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि आदिवासी जमीन से संबंधित मामलों में लापरवाही को वह किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं करेगा, खासकर तब जब मामला बैगा जैसे विशेष पिछड़ी जनजाति की जमीन से जुड़ा हो, जिनकी सुरक्षा के लिए कानून में विशेष प्रावधान मौजूद हैं। इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज है। कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस … Read more

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित माघ मेला संपन्न कराने की तैयारी

महाकुंभ के भव्य आयोजन के बाद माघ मेला-2026 की तैयारियां अंतिम चरण में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में एक बार फिर भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित माघ मेला संपन्न कराने की तैयारी मुख्य सचिव ने प्रतीक चिन्ह के अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर बैठक में की चर्चा 7 सेक्टर्स और 7 पॉन्टून पुलों को 7 ऊर्जा चक्रों के रंगों से सजाया जाएगा हर क्षेत्र में माघ मेला का प्रतीक चिन्ह किया जाएगा अंकित लखनऊ  महाकुंभ-2025 के सफल आयोजन के बाद अब राज्य सरकार माघ मेला-2026 को भी अभूतपूर्व, व्यवस्थित और सौंदर्यपूर्ण स्वरूप देने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में माघ मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। अभी हाल ही में मुख्य सचिव के समक्ष प्रतीक चिन्ह का अनावरण, सेक्टरवार रंग योजना और अवसंरचनात्मक सुधारों पर विशेष चर्चा हुई थी। इस बार अनुमानित है कि प्रयागराज में 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम पर पवित्र स्नान करेंगे, जिनमें प्रतिदिन आने वाले लाखों कल्पवासी भी शामिल होंगे। 7 सेक्टर्स – 7 ऊर्जा चक्रों के रंग पूरा मेला क्षेत्र रंग-समन्वित थीम पर आधारित होगा। हर सेक्टर एकरूपता का अनुभव कराएगा। मेले को सुसंगत और आकर्षक रूप देने के लिए सातों सेक्टर्स और सात पॉन्टून पुलों को "सात ऊर्जा चक्रों" के अनुरूप रंगों से सजाया जाएगा। हर सेक्टर की चहारदीवारी पर 3 फुट चौड़ी सीमांकन पट्टी बनाई जाएगी, जिससे मेले का आकार दृष्टिगत रूप से स्पष्ट, व्यवस्थित और सुंदर दिखाई देगा। सभी सेक्टर्स में उत्तर प्रदेश सरकार और माघ मेला-2026 का प्रतीक चिन्ह अंकित होगा। चेंजिंग रूम होंगे अधिक सुविधाजनक विभिन्न घाटों पर उपलब्ध चेंजिंग रूम भी सेक्टरवार रंग योजना के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। पहले की तुलना में दोगुनी क्षमता, रंग योजनाओं से मेल खाते हुए होंगे। अब 2 यूनिट में 2 के स्थान पर 4 लोग एक साथ सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। इससे भीड़ प्रबंधन अधिक सुचारू और सुविधाजनक होगा तथा मेले की एकरूपता कायम रहेगी। पॉन्टून पुलों पर बढ़ेगी सौंदर्य और सुरक्षा दोनों सातों पॉन्टून पुलों को इंद्रधनुषी सात रंगों से सजाया जाएगा। पुलों पर लगे लाइट, पोलों पर एलईडी लाइटें धार्मिक चिन्हों के साथ प्रदर्शित होंगी, जो दिन और रात दोनों समय आकर्षण का केंद्र रहेंगी। हर पुल पर रंग अनुरूप झंडे लगाए जाएंगे।यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलों पर कैनोपी का निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विश्वस्तरीय अनुभव देने पर फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि माघ मेला-2026 न केवल धार्मिक भावना का प्रतीक हो, बल्कि साफ-सफाई, सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा सुविधाओं और आधुनिक अवसंरचना के मामले में भी देशभर के मेले आयोजनों के लिए एक आदर्श बने। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मेला प्रशासन श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, व्यवस्थित, आध्यात्मिक और विश्वस्तरीय अनुभव प्रदान करने में जुट गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा- ‘रक्षक पाठ्यक्रम’ से छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और जिम्मेदारी में होगा सुधार

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के मध्य “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है। किसानों के बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ सुशासन के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना भी की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान—ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि “यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।” उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का नवाचार बताते हुए कहा कि भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी। यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में प्रारम्भ होगा। क्या है रक्षक पाठ्यक्रम प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग द्वारा “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी।संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, ,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कुलसचिव प्रो शैलेंद्र पटेल,प्रो ए के श्रीवास्तव,संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय सरगुजा कुलपति  प्रो राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त श्री महादेव कावरे, कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा,आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. टी.रामाराव कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई दुर्ग चांसलर डॉ.आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ ए. के झा एवं डॉ जया मिश्रा, आयोग के सचिव प्रतीक खरे सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

इंडस्ट्री बूस्ट: कोरियन कंपनियों ने पंजाब में निवेश के लिए दिखाई गहरी रुचि

मोहाली दक्षिण कोरिया दौरे के अंतिम दिन व्यापारिक नेताओं के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि पंजाब स्थिर एवं पारदर्शी शासन वाला राज्य है. तथा भविष्य के निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि पंजाब का मजबूत औद्योगिक इको-सिस्टम, विश्वसनीय और सस्ती बिजली, कुशल एवं मेहनती श्रमिक बल तथा बड़े बाजारों से सुगम संपर्क सुविधाएं इसे निवेश के लिए सबसे पसंदीदा गंतव्य बनाती हैं.भगवंत मान ने दोहराया कि पंजाब का शासन मॉडल निवेशक-अनुकूल है, जो कार्य-कुशलता और कारोबारी चक्र के दौरान पूर्ण सहयोग पर आधारित है. उन्होंने कहा कि पंजाब का विज़न प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दक्षिण कोरिया के साथ प्रौद्योगिकी, नवाचार और परस्पर लाभकारी संबंधों से प्रेरित है. सीएम भगवंत सिंह मान ने दक्षिण कोरियाई कंपनियों का स्वागत किया और कहा कि नवाचार-आधारित औद्योगिक विकास, दीर्घकालिक संबंध और परस्पर लाभकारी साझेदारी को बढ़ावा मिलेगा. भगवंत सिंह मान ने कहा कि इससे विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण और अनुसंधान क्षेत्रों में बड़ी संभावनाएं हैं.   मुख्यमंत्री ने अपना विज़न किया साझा अपना विज़न साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की मजबूत आर्थिक एवं सांस्कृतिक संबंधों के माध्यम से समृद्ध भविष्य सृजन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि पंजाब को साहस, मेहनत, उद्यमिता, रचनात्मकता और मजबूत सामुदायिक समझ वाली धरती के रूप में जाना जाता है. उन्होंने कहा कि पंजाब ने हमेशा भारत के विकास, विशेष रूप से खाद्य उत्पादन में देश को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज पंजाब आधुनिक औद्योगिक, प्रौद्योगिकी और वैश्विक सहयोग का केंद्र बनने की ओर अग्रसर है. मुख्यमंत्री ने राज्य के शासन एवं नियामक सुधारों को भी रेखांकित किया, जिनमें फास्टट्रैक पंजाब सिंगल-विंडो सिस्टम शामिल है, जिसमें 173 सेवाएं, ऑटो-डीम्ड मंजूरियां, पैन-आधारित व्यवसाय पहचानकर्ता और पंजाब बिजनेस राइट्स एक्ट में संशोधन शामिल हैं, जो समयबद्ध सैद्धांतिक मंजूरियों को सक्षम बनाते हैं. उन्होंने पंजाब के औद्योगिक बुनियादी ढांचे पर भी प्रकाश डाला और बताया कि 1.4 लाख करोड़ रुपए से अधिक का ग्राउंड इन्वेस्टमेंट पहले ही इन्वेस्ट पंजाब के माध्यम से सुनिश्चित किया जा चुका है. इस दौरान भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनका दृष्टिकोण सरल और स्पष्ट हैनीतिगत स्थिरता, निर्णय लेने में गति और निवेशकों के समय एवं विश्वास का सम्मान करने वाली शासन प्रणाली पेश करके पंजाब को विश्व उद्योग के लिए पसंदीदा गंतव्य बनाना. मोहाली में छठा प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर समिट मुख्यमंत्री ने निवेशकों को 13 से 15 मार्च 2026 तक आई.एस.बी. मोहाली कैंपस में होने वाले छठे प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर समिट में शामिल होने का निमंत्रण दिया. भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह सम्मेलन पंजाब की प्रगति को प्रदर्शित करेगा, अग्रणी उद्योगपतियों को एकत्र करेगा और साझेदारी एवं सहयोग के नए अवसर प्रस्तुत करेगा. उन्होंने दोहराया कि पंजाब सरकार राज्य में औद्योगिक विकास को और बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह समर्पित है और इसके लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी. इस दौरान मुख्यमंत्री द्वारा बिछाए गए रेड कारपेट से उत्साहित दक्षिण कोरियाई कंपनियों ने पंजाब में निवेश करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई. भगवंत सिंह मान ने उम्मीद जताई कि ऐसे निवेश न केवल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करेंगे, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास को और तेज करेंगे. उन्होंने दक्षिण कोरियाई निवेशकों को राज्य सरकार की ओर से हर मोर्चे पर पूर्ण समर्थन एवं सहयोग का भरोसा भी दिया और कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास को और बढ़ावा देना समय की जरूरत है. प्रभावशाली रहा निवेश रोड शो मुख्यमंत्री ने कहा कि सियोल में यह प्रभावशाली निवेश रोड शो दक्षिण कोरिया के साथ गहरी आर्थिक साझेदारी बनाने और राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए उनकी अंतरराष्ट्रीय पहुंच का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि इस आयोजन में कॉर्पोरेट नेता, वित्तीय सलाहकार, अनुसंधान एवं विकास संगठन, व्यापारिक संगठन और कोरिया में भारतीय एवं पंजाबी समुदाय के सदस्यों की जोरदार भागीदारी देखने को मिली. भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस रोड शो ने दक्षिण कोरिया एवं अंतरराष्ट्रीय संगठनों की एक विस्तृत श्रृंखला के वरिष्ठ प्रतिनिधियों को आकर्षित किया, जिनमें ਮਾਂ ब्लूमबर्ग, ब्रिक्स इंडिया ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, प्रमुख कानूनी फर्म किम एंड चांग एवं शिन एंड किम एल.एल.सी., कोरियन एसोसिएशन ऑफ सीनियर साइंटिस्ट्स एंड इंजीनियर्स, कोट्रा, डायंग कॉर्पोरेशन, गावोन इंटरनेशनल कंपनी लिमिटेड, टैगहाइव, पंजाबी एसोसिएशन ऑफ कोरिया, इनमैक ग्लोबल आदि शामिल हैं.